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ग्रामीण रंग, पर्यटन संग उत्सव आज , ग्रामीण पर्यटन के उत्कृष्ट योगदानकर्ताओं को किया जायेगा पुरस्कृत

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मुख्य आतिथ्य में ग्रामीण पर्यटन से स्वरोजगार व आर्थिक उन्नति को प्रोत्साहित करने के लिये आज सुबह 11 बजे से कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कंवेंशन सेंटर में “ग्रामीण रंग, पर्यटन संग” राज्य स्तरीय उत्सव का आयोजन किया जाएगा। उत्सव में संस्कृति, पर्यटन, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम में ग्रामीण पर्यटन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हितधारकों और सहयोगियों को प्रोत्साहित किया जाएगा। प्रमुख सचिव पर्यटन एवं संस्कृति तथा प्रबंध संचालक, मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड, श्री शिव शेखर शुक्ला ने “ग्रामीण पर्यटन” के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश की समृद्ध संस्कृति, विरासत, तीज-त्योहार, पर्व और स्वादिष्ट खान-पान का अनुभव ग्रामीण क्षेत्रों में सबसे करीब से देखने को मिलता है। आज के समय में पर्यटक शांति की तलाश में मध्यप्रदेश के प्राकृतिक सौंदर्य और ग्रामीण परिवेश की ओर आकर्षित हो रहे हैं। प्रमुख सचिव श्री शुक्ला ने बताया कि पर्यटकों की सुविधा के लिए प्रदेश की रिस्पॉन्सिबल टूरिज्म मिशन वेबसाइट की ई-लॉन्चिंग भी मुख्यमंत्री डॉ. यादव करेंगे। सर्वश्रेष्ठ 6 होमस्टे (3 ग्रामीण, 3 नगरीय), विकास में ग्रामीण पर्यटन के उत्कृष्ट योगदान देने वाले 16 पर्यटन ग्रामों के सरपंचों, 8 परियोजना सहयोगी संस्थाओं और 10 जिला कलेक्टर्स को भी पुरस्कृत किया जाएगा। इस अवसर पर 14 नवीन होमस्टे का उद्घाटन और 60 पर्यटन गांवों के होमस्टे मालिकों को किट वितरित की जाएगी। ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने, आजीविका के अवसर सृजित करने, महिलाओं और वंचित वर्गों को सशक्त बनाने तथा होमस्टे क्लस्टर और पर्यटक ग्रामों में पर्यटन अधोसंरचना में सुधार के उद्देश्य से मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड (एमपीटीबी) और दिव्य योग मंदिर ट्रस्ट (पतंजलि) के बीच एमओयू किया जाएगा। ऊर्जा दक्ष एलईडी या सौर चलित स्ट्रीट लाइट्स की 61 पर्यटक गांवों में स्थापना के लिए एमपीटीबी और सिग्निफाई इनोवेशंस इंडिया लिमिटेड के बीच एमओयू होगा। प्रदेश में पर्यटन, फिल्म निर्माण और कौशल विकास को बढ़ावा देने के लिये मध्य प्रदेश टूरिज्म बोर्ड और स्कोप ग्लोबल स्किल्स यूनिवर्सिटी के बीच ग्रामीण होमस्टे को डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर सशक्त बनाने और उन्हें ओटीए प्लेटफॉर्म्स ऑनलाइन ट्रेवल एजेंसी पर जोड़ने के लिए मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड और मध्यप्रदेश स्टेट टूरिज्म डेवेलपमेंट कॉर्पोरेशन के बीच एमओयू होगा। प्रमुख सचिव श्री शुक्ला ने बताया कि उत्सव में प्रदेश के विभिन्न जिलों के प्रतिभागी और संस्थाएं आर्ट एंड क्राफ्ट के उत्कृष्ट उत्पादों जैसे क्लेआर्ट, माड़ना, चितेरा, बैम्बू शिल्प, हैण्डब्लॉक, गोंड पेंटिंग, हैंडलूम एवं हैंडीक्राफ्ट टैक्सटाइल्स आदि का प्रदर्शन करेंगे। यह एक दिवसीय प्रदर्शनी आमजन के लिए सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक खुली रहेगी। “ग्रामीण रंग, पर्यटन संग” उत्सव का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण पर्यटन केंद्रित गतिविधियों को प्रोत्साहित करना है। ग्रामीण पर्यटन परियोजना मध्यप्रदेश के 37 जिलों के कुल 100 ग्रामों में संचालित की जा रही है। इनमें से 63 ग्रामों में कार्य प्रारंभ किया जा चुका है और अब तक 294 होमस्टे निर्माण पूर्ण हो चुके हैं, जिनमें से 241 होमस्टे सफलतापूर्वक संचालित हो रहे हैं। कार्यक्रम में पर्यटन क्षेत्र के हितधारक, परियोजना सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधि, ग्राम पंचायतों के सरपंच, होम स्टे संचालक एवं महिलाएं उपस्थित रहेंगे।  

गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे के लोकार्पण के दिन 20 जून को मुख्यमंत्री सुरक्षा फ्लीट को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे

गोरखपुर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 20 जून को गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे का उद्घाटन करेंगे। मंगलवार को यहां जारी एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गयी। बयान में कहा गया कि गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे केवल रफ्तार के साथ आवागमन सुगमता का ही माध्यम नहीं बनेगा, बल्कि इस एक्सप्रेसवे पर सड़क व यात्री सुरक्षा के भी बेहतर इंतजाम रहेंगे। लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे की तर्ज पर एटीएमएस होगा लागू यात्री सुरक्षा के लिहाज से गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे के लोकार्पण के दिन 20 जून को मुख्यमंत्री सुरक्षा फ्लीट को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। जबकि आने वाले दिनों में सड़क सुरक्षा के लिए यहां लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे की तर्ज पर एटीएमएस (एडवांस ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम) भी लागू किया जाएगा। उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) द्वारा बनवाए गए गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे पर यात्री सुरक्षा के लिए मुख्यमंत्री जिस सुरक्षा फ्लीट की शुरुआत करेंगे, उसमें पांच इनोवा, पांच कैम्पर, चार एम्बुलेंस, दो क्रेन और एक हाइड्रा वाहन शामिल हैं। एक्सप्रेसवे पर हाइड्रा वाहन किया जाएगा तैनात यूपीडा के नोडल सुरक्षा अधिकारी राजेश पांडेय ने बताया कि यूपीडा के इनोवा वाहन की पैट्रोलिंग आठ-आठ घंटे की पाली में लगातार होती रहेगी। हर वाहन में चार सेवानिवृत्त सैनिकों की ड्यूटी रहेगी। कैम्पर वाहन पीछे से खुले रहते हैं और इसमें ट्रैफिक कोन, रस्सी, रेडियम स्ट्रिप आदि की उपलब्धता रहती है। किसी स्थान पर किसी वाहन के खराब होने पर या दुर्घटना होने पर ये वाहन तुरंत जाकर ट्रैफिक कोन, रस्सी और रेडियम स्ट्रिप से कवर कर देंगे ताकि अन्य वाहनों को कोई दिक्कत न हो। इसके अलावा 91 किलोमीटर लंबे इस एक्सप्रेसवे पर हर 45 किलोमीटर (किमी) पर मार्ग के दोनों तरफ एक-एक एम्बुलेंस की तैनाती रहेगी ताकि आकस्मिक चिकित्सकीय जरुरत यात्रियों को तत्परता से अस्पताल भेजा जा सके। किसी वाहन में अचानक खराबी आने पर उसे सड़क से हटाने के लिए हर 45 किमी पर क्रेन और पूरे एक्सप्रेसवे के लिए एक हाइड्रा वाहन को तैनात किया जाएगा। निगरानी के लिए एक्सप्रेसवे पर हर पांच किमी पर लगाए जाएंगे सीसीटीवी कैमरे यात्री और मध्यम मालवाहक वाहनों को क्रेन से और बड़े मालवाहक वाहनों को सड़क से नजदीक के चैनेज से उतार दिया जाएगा क्योंकि नेशनल हाईवे ऑथोरिटी ऑफ इंडिया के दिशानिर्देश के मुताबिक एक्सप्रेसवे पर खराब वाहनों को खड़ा नहीं किया जा सकता। गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे पर आने वाले समय में एटीएमएस भी लागू करने की तैयारी है। इस प्रणाली के तहत एक्सप्रेसवे पर हर पांच किमी पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाते हैं। इसकी मॉनिटरिंग कंट्रोल रूम से की जाती है। इसके अलावा एटीएमएस में रफ्तार सीमा का उल्लंघन करने वाले वाहनों पर नजर रखने के स्पीड कैमरे और एनपीआर (नम्बर प्लेट रीडर) की व्यवस्था भी होती है। एक्सप्रेसवे पर रफ्तार सीमा का उल्लंघन करने वाले वाहनों की तत्काल जानकारी संबंधित जिले के एआरटीओ के पास चली जाती है।

जय शाह ने कहा- डब्ल्यूटीसी का नया चक्र टेस्ट क्रिकेट को और भी ज्यादा रोमांचक बनाएगा

दुबई बीते हफ्ते दक्षिण अफ्रीका ने लॉर्ड्स के मैदान पर विश्व टेस्ट चैंपियनशिप (डब्ल्यूटीसी) 2023-25 चक्र का फाइनल जीता। अब डब्ल्यूटीसी के नए चरण की शुरुआत पर आईसीसी अध्यक्ष जय शाह ने खिलाड़ियों को शुभकामनाएं दी हैं। नए चक्र की शुरुआत से ठीक पहले आईसीसी ने शाह के हवाले से एक प्रेस रिलीज जारी की, जिसमें उन्होंने कहा, “विश्व टेस्ट चैंपियनशिप का तीसरा संस्करण लॉर्ड्स में शानदार तरीके से संपन्न हुआ। ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका ने एक बेहतरीन मुकाबला खेला। अब हम अगले चरण का इंतजार कर रहे हैं। यह चैंपियनशिप टेस्ट फॉर्मेट को और भी अधिक जीवंत बनाएगी। नौ प्रतिस्पर्धी देशों में से चार डब्ल्यूटीसी के शुरुआती तीन चक्रों में फाइनल तक पहुंच चुके हैं।” उन्होंने आगे कहा, “खिलाड़ियों और फैंस के लिए कॉन्टेक्स्ट लाना, साथ ही उच्च स्तर की प्रतिस्पर्धा, लॉर्ड्स में बड़ी संख्या में लोगों का आना टेस्ट क्रिकेट की निरंतर लोकप्रियता का सबूत है। मैं इसके लिए सदस्य बोर्डों को धन्यवाद देना चाहता हूं। इसके साथ ही खिलाड़ियों को 2027 में अगले फाइनल के लिए अपनी यात्रा शुरू करने के लिए शुभकामनाएं देता हूं।” डब्ल्यूटीसी चक्र 2025-27 की शुरुआत 17 जून से हो चुकी है। गाले में बांग्लादेश और श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज का पहला मैच खेला जा रहा है। इसके बाद 20 जून से भारत-इंग्लैंड की टीमें भी अपने अभियान की शुरुआत करने जा रही हैं। भारत और इंग्लैंड आने वाले हफ्तों में हेडिंग्ले, एजबेस्टन, लॉर्ड्स, ओल्ड ट्रैफर्ड और द ओवल में आमने-सामने होंगे। ऑस्ट्रेलियाई टीम 25 जून से अपने नए चक्र की शुरुआत करने जा रही है। कंगारू टीम को वेस्टइंडीज के खिलाफ तीन टेस्ट खेलने हैं। इस टीम ने हाल ही में दक्षिण अफ्रीका के हाथों खिताब जीतने का मौका गंवाया है। पिछले चक्रों की तरह इस बार भी नौ टीमें डब्ल्यूटीसी में हिस्सा लेंगी। प्रत्येक देश दो साल की अवधि के दौरान छह अन्य टीमों के साथ खेलेगा। ऑस्ट्रेलिया घरेलू मैदान पर 11 मैच खेलेगा। इसमें इस साल के अंत में इंग्लैंड के खिलाफ एशेज सीरीज और न्यूजीलैंड के खिलाफ चार टेस्ट शामिल हैं। इतने ही मैच उसे बाहरी मैदान पर खेलने हैं। इंग्लैंड अपने मैदान पर 11 टेस्ट और बाहरी मैदान पर 10 टेस्ट खेलेगा। ये टीम दिसंबर 2026 में तीन टेस्ट के दौरे के लिए दक्षिण अफ्रीका का दौरा करेगी। वहीं, भारत इस चक्र में 18 मैच खेलेगा, जो घरेलू और बाहरी मैदान पर बराबर-बराबर होंगे।पिछले दो संस्करणों में इस्तेमाल की गई अंक प्रतिशत प्रणाली लीडरबोर्ड निर्धारित करेगी। इसमें टीमों को जीत के लिए 12 अंक, टाई के लिए छह अंक और ड्रॉ के लिए चार अंक मिलेंगे।  

सिंधु जल संधि ​रद्द होने से PAK में गंभीर जल संकट, पाकिस्तान में आएगी आपदा

नई दिल्ली  पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान की ओर जाने वाले सिंधु नदी के पानी के बहाव में कटौती कर दी है। इससे पाकिस्तान के सिंध प्रांत में फसलों की बुआई पर असर पड़ रहा है। पानी की कमी से वहां के किसान परेशान हैं। भारत ने सिंधु जल संधि को निलंबित किया हुआ है। पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में भी इस वक्त किसानों को मिलने वाले सिंधु के जल में पिछले साल के मुकाबले कमी देखी जा रही है। इस समय खरीफ की बुआई का समय है और अगर समय पर यह काम नहीं हो पाया तो फिर खेती पूरी तरह से चौपट होने की आशंका है। पिछले साल के मुकाबले दोनों प्रांतों को मिला कम पानी पाकिस्तान सरकार के इंडस रिवर सिस्टम अथॉरिटी (IRSA) की रिपोर्ट के अनुसार इस साल 16 जून को सिंधु नदी से सिंध प्रांत को 1.33 लाख क्यूसेक पानी मिला। पिछले साल इसी दिन 1.6 लाख क्यूसेक पानी मिला था। यानी यह लगभग 17% की कमी है। पाकिस्तान के पंजाब प्रांत को भी इस साल पिछली बार से थोड़ा कम पानी मिला है। इस साल उसे 1.26 लाख क्यूसेक पानी मिला है, जबकि पिछले साल 1.29 लाख क्यूसेक पानी मिला था। यह 2.25% की कमी है।    खरीफ फसलों की बुवाई पर पड़ा असर इंडस वॉटर ट्रीटी के पूर्व आयुक्त और केंद्रीय जल आयोग के पूर्व प्रमुख एके बजाज ने पाकिस्तान में आए इस जल संकट को लेकर बात की.उनका कहना था कि पाकिस्तान में सिंधु नदी से जुड़ी नदियों और जलाशयों में पानी कम बचा है. इससे वहां के किसानों के सामने संकट पैदा हो गया है.पाकिस्तान में इन दिनों खरीफ फसलों की बुवाई चल रही है.ऐसे में पानी के संकट का असर खरीफ फसलों की बुवाई पर भी पड़ रहा है. मुश्किल यह है कि पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में मॉनसून जून के आखिरी में या जुलाई के पहले हफ्ते तक पहुंचता है. इसका मतलब यह हुआ कि अगले तीन हफ्ते में पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में पानी का संकट और बड़ा हो सकता है. भारत ने सिंधु जल समझौते को स्थगित करने के बाद पाकिस्तान से इंडस रिवर सिस्टम से जुड़ी नदियों के जलस्तर के बारे में जानकारी शेयर करना बंद कर दिया है. ऐसे में जब मॉनसून सीजन के दौरान  इंडस रिवर सिस्टम से जुड़ी नदियों का जलस्तर बढ़ेगा तो इससे पाकिस्तान में बाढ़ का खतरा और बड़ा हो सकता है. ऐसे में पाकिस्तान को आपदा झेलनी पड़ सकती है. भारत ने स्थगित किया सिंधु जल समझौता भारत ने 22 अप्रैल को जम्मू कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल समझौते को स्थगित कर दिया था. भारत-पाकिस्तान ने यह संधि 1960 में की थी.इसके तहत सिंधु वाटर सिस्टम की तीन पूर्वी नदियों का पानी भारत इस्तेमाल कर सकता है. वहीं तीन पश्चिमी नदियों के पानी पर पाकिस्तान को अधिकार दिया गया था. पाकिस्तानी नदियों-जलाशयों में खत्म होने लगा पानी रिपोर्ट में बताया गया है कि पाकिस्तान में सिंधु नदी से जुड़ी नदियों और जलाशयों में कम पानी बचा है। खरीफ की फसलों की बुआई का समय है और ऐसे में पानी की कमी किसानों के लिए मुसीबत बन गई है। मानसून आने में अभी कम से कम दो हफ्ते बाकी हैं, इसलिए स्थिति और खराब हो सकती है। सिंधु जल संधि को निलंबित करने के बाद भारत ने पाकिस्तान को नदियों के जल स्तर की जानकारी देना भी बंद कर दिया है। इससे पाकिस्तान को बाढ़ की तैयारी करने में मुश्किल हो सकती है। अगर भारत में नदियों का जल स्तर बढ़ता है तो पाकिस्तान को बाढ़ से निपटने में परेशानी हो सकती है। 1960 में हुई भारत-पाकिस्तान सिंधु जल संधि क्या है सिंधु जल संधि 1960 में हुई थी। यह संधि भारत और पाकिस्तान के बीच कई तनावों के बावजूद बनी रही। लेकिन, 22 अप्रैल को जम्मू और कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने इसे निलंबित कर दिया। इस हमले में 26 लोग मारे गए थे। विश्व बैंक ने इस संधि को कराने में मदद की थी। संधि के अनुसार, भारत को सिंधु नदी की तीन पूर्वी सहायक नदियों – रावी, ब्यास और सतलुज के जल पर पूरा अधिकार है। वहीं, पाकिस्तान को तीन पश्चिमी नदियों,सिंधु, झेलम और चिनाब से लगभग 135 मिलियन एकड़ फीट (MAF) पानी मिलता रहा है। ये सभी नदियां भारत से पाकिस्तान की ओर बहती हैं। पाकिस्तान ने संधि के निलंबन पर आपत्ति जताई है। लेकिन, भारत का कहना है कि ‘खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते।’ मतलब, जब तक पाकिस्तान आतंकवाद को समर्थन देना बंद नहीं करता, तब तक पानी साझा नहीं किया जा सकता।

छत्तीसगढ़ शासन के निर्देशानुसार कांकेर जिले में ’मोर गांव, मोर पानी’ महाअभियान जोर-शोर से चलाया जा रहा

उत्तर बस्तर कांकेर  छत्तीसगढ़ शासन के निर्देशानुसार कांकेर जिले  में ’मोर गांव, मोर पानी’ महाअभियान जोर-शोर से चलाया जा रहा है। उक्त संबंध में कलेक्टर श्री निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर द्वारा बताया गया कि जिले में औसतन 1200-1300 मिमी वार्षिक वर्षा होती है, फिर भी जिले में जल संकट की स्थिति बनी रहती हे। इसके पीछे अनियमित मानसून, पहाड़ी क्षेत्रों में तीव्र सतही जल बहाव और घटती भूजल पुनर्भरण जैसे कारण है। यह संकट अति गंभीर है, जहां अत्यधिक जल बहाव, मिट्टी में नमी बनाए रखने की क्षमता का कम होना और क्षतिग्रस्त जलग्रहण क्षेत्र, अनियमित मानसून कृषि को अलाभकारी बना देती है। उन्होंने बताया कि इस वर्षा ऋतु जल संरक्षण का अभियान को जन आंदोलन का रूप देने का लक्ष्य है, इसके लिए जिले की सभी 454 ग्राम पंचायतों में 02 से 05 जून तक चार दिवसीय उन्मुखीकरण और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोज़ित किया गया। कार्यक्रम में जिले के सभी 454 ग्राम पंचायतों के सरपंचों, सचिवों, रोजगार सहायकों, बिहान समूह के सदस्यों और जल संरक्षण से संबंधित विभिन्न विभागों द्वारा जल संरक्षण और जल संचयन की उन्नत तकनीकों का प्रशिक्षण दिया गया। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री हरेश मंडावी द्वारा बताया गया कि मोर गांव, मोर पानी की मुख्य विशेषता यह है कि यह सामुदायिक नेतृत्व वाली योजना है। इस अभियान में योजनाओं का निर्माण और कार्यान्वयन स्थानीय समुदाय के नेतृत्व में होता है। इसी प्रकार वैज्ञानिक एवं तकनीकी दृष्टिकोण के तहत जल प्रबंधन के लिए वैज्ञानिक और तकनीकी तरीकां का उपयोग किया जाता है। युक्तधारा पोर्टल का उपयोग करके डेटा इकट्ठा किया जाता है, जो बेहतर योजना और निगरानी में मदद करता है। वाटरवेल पोर्टल का उपयोग जल स्रोतों की निगरानी या प्रबंधन के लिए किया जाता है। उन्होंने आगे यह भी बताया कि भौगोलिक सूचना प्रणाली के ओपन सोर्स टूल्स का उपयोग मानचित्रण और स्थानिक विश्लेषण में सहायक होता है। साथ ही योजनाओं का अभिसरण विभिन्न सरकारी योजनाओं को एक साथ लाकर एकीकृत परिणाम प्राप्त करने पर जोर दिया जाता है। क्षमता निर्माण और संस्थागत सशक्तीकरण व्यक्तियों की क्षमताओं को बढ़ाने और स्थानीय संस्थाओं को मजबूत करने का लक्ष्य है। जल संरक्षण के प्रयासों को सीधे लोगों की आजीविका सुधारने से जोड़ा गया है। इसके लिए निरंतर निगरानी लागू की गई पहल की लगातार निगरानी और मूल्यांकन किया जाता है। मोर गांव मोर पानी अभियान एक समग्र, समुदाय केंद्रित और तकनीकी रूप से उन्नत दृष्टिकोण अपनाकर जल संरक्षण और प्रबंधन को सुनिश्चित कर रहा है। इस अभियान के माध्यम से जल संरक्षण और आजीविका जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में जिले में लगातार विकास हो रहा है, जिला प्रशासन के प्रयास से जिले को जल संकट से जल्द ही निदान मिल जाएगा। अपेक्षित परिणाम – बेहतर जल सुरक्षा और मृदा प्रबंधन के तहत जल संचयन और भूमि उपचार के माध्यम से कृषि उत्पादकता और जल उपलब्धता बढ़ेगी। इसी प्रकार स्थायी परिसंपत्ति निर्माण से टिकाउ जल संरचनाओं और प्राकृतिक संसाधन प्रणालियों का निर्माण होगा। आजीविका संवर्धन से बेहतर जल उपलब्धता और आजीविका परिसंपत्तियों से ग्रामीण रोजगार और आय में वृद्धि होगी। साथ ही स्थानीय और स्वामित्व का सुदृढ़ीकरण से पंचायती राज संस्थाओं और महिला स्वयं सहायता समूहों की क्षमता में वृद्धि होगी, इससे स्थानीय विकास कार्यों में उनकी भागीदारी और नेतृत्व मजबूत होगा और वे अपने गांव के लिए बेहतर निर्णय ले सकेंगे।

आरोपी पर पत्नी की अदला-बदली, रेप और गैंगरेप के आरोप, हाईकोर्ट ने कहा- जमानत देना सही नहीं

नई दिल्ली दिल्ली हाई कोर्ट ने एक ऐसे शख्स को जमानत देने से इनकार किया है जिस पर पत्नी को ‘पार्टनर स्वैप’ के लिए मजबूर करने का आरोप है। इसके अलावा सोशल मीडिया पर अपनी पत्नी की तस्वीर लगा उसके साथ सेक्स का ऑफर दिए जाने का भी आरोप है। कोर्ट ने यह कहते हुए आरोपी को जमानत नहीं दी कि यह ‘सामान्य वैवाहिक विवाद के आरोपों’ का केस नहीं है।  रिपोर्ट के मुताबिक, जस्टिस गिरीश कथपालिया जिस शख्स की जमानत याचिका पर सुनवाई कर रहे थे उस पर बलात्कार, सामूहिक बलात्कार, शारीरिक शोषण, क्रूरता और आपराधिक धोखाधड़ी जैसे आरोप हैं। 9 जून को दिए आदेश में कोर्ट ने कहा, ‘FIR में लगाए गए आरोप रूढ़िवादी वैवाहिक विवाद के नहीं हैं। कोर्ट ने महिला के इस आरोप पर विचार किया कि उसका देवर उसे गलत तरीके से छूकर उसका यौन उत्पीड़न करता था। महिला ने जब इसकी शिकायत अपने पति से की तो उसने उसे इस अपमान को अनदेखा करने के लिए कहा। अदालत ने एफआईआर का हवाला दिया, ‘जिसमें दर्ज किया गया था कि पति “ब्लेड से उसके हाथों को चोट पहुंचाता था और घायल हाथों से उसे रसोई का काम करवाता था” और साथ ही “उस पर पत्नी की अदला-बदली के लिए सहमत होने का दबाव बनाने लगा था और इस उद्देश्य के लिए, वह उसे एक होटल में ले गया जहां उसके दोस्तों ने उसके साथ छेड़छाड़ की, इसलिए वह भाग गई”। उस व्यक्ति पर महिला की फर्जी इंस्टाग्राम आईडी बनाने और “उसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा करने” के अलावा “लोगों को पैसे के लिए उसके साथ यौन संबंध बनाने के लिए उकसाने” का भी आरोप लगाया गया था। कोर्ट ने कहा कि “गंभीर आरोपों” के अलावा, महिला ने बलात्कार और सामूहिक बलात्कार के अपराधों का आरोप लगाते हुए मजिस्ट्रेट कोर्ट के समक्ष अपना बयान भी दर्ज कराया। अदालत ने कहा कि इसके अलावा, ऐसा प्रतीत होता है कि इससे पहले, जब अग्रिम जमानत दी गई थी, तो आरोपी ने अभियोक्ता से संपर्क किया था और टेक्स्ट चैट का आदान-प्रदान किया था, जिसकी प्रतियां रिकॉर्ड में हैं। यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण होगा कि उन टेक्स्ट चैट को आरोपी ने एक नए सिम कार्ड के माध्यम से एक काल्पनिक नाम के तहत बनाया था, लेकिन जांच में, उक्त सिम उसके नाम पर पंजीकृत पाया गया।”

’डीएमएफ से शिक्षा व्यवस्था को मिलेगा नया आयाम’

रायपुर : ‘कोरबा जिले में शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा कदम’ ’108 स्कूलों को मिलेंगे , 17 करोड़ की स्वीकृति से सजेगा बच्चों का भविष्य’ ’डीएमएफ से शिक्षा व्यवस्था को मिलेगा नया आयाम’ रायपुर समावेशी बनाने की दिशा में लगातार प्रभावी कदम उठा रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की मंशा के अनुरूप कोरबा जिले में अब स्कूलों की तस्वीर बदलने जा रही है। जिला प्रशासन द्वारा जिले के 108 शैक्षणिक संस्थानों के लिए 17 करोड़ 08 लाख 94 हजार रुपए की लागत से नए भवनों के निर्माण को मंजूरी दी गई है। जिला कलेक्टर अजीत वसंत ने डीएमएफ (जिला खनिज न्यास निधि) से प्रथम चरण में सभी विकासखंडों के लिए भवन निर्माण स्वीकृत करते हुए विभिन्न विभागों को क्रियान्वयन एजेंसियां नियुक्त करने और कार्य शीघ्र प्रारंभ कराने के निर्देश दिए हैं। ’जर्जर भवनों की जगह बनेंगे आधुनिक स्कूल’ इस योजना के तहत पुराने और जीर्ण-शीर्ण भवनों को हटाकर नए और सुरक्षित भवनों का निर्माण किया जाएगा। इससे बच्चों को बेहतर एवं सुरक्षित शैक्षणिक माहौल मिल सकेगा। इस पहल के अंतर्गत पाली, पोड़ी उपरोड़ा, कटघोरा, करतला, कोरबा और नगरीय क्षेत्र बांकीमोंगरा के प्राथमिक व माध्यमिक शालाओं में भवन निर्माण कार्य शामिल है। प्रत्येक प्राथमिक विद्यालय के लिए औसतन 15 लाख से 15.65 लाख रुपए तथा माध्यमिक विद्यालयों के लिए 15.85 लाख से 16.60 लाख रुपए तक की राशि स्वीकृत की गई है। स्वीकृत कार्याे में पाली विकासखंड के ग्राम पंचायत चोढ़ा के अंतर्गत ग्राम भदरापारा छिंदपानी, भादाकछार छिंदपानी, तालाबपारा, छिंदपानी, ग्राम पंचायत पोटापानी अंतर्गत बरहामुड़ा, ग्राम पंचायत भण्डारखोल अंतर्गत जरमौहा, लाफा के गोंदिलहापारा, कोरबी के झालापारा, बड़ेबांका के कटेलपारा में नवीन प्राथमिकशाला भवन निर्माण हेतु 15-15 लाख रूपए की स्वीकृति प्रदान की है। इसी प्रकार ग्राम पंचायत कोरबी में नवीन माध्यमिक शाला भवन निर्माण हेतु 15 लाख 85 हजार, नोनबिर्रा में नवीन माध्यमिक शाला भवन निर्माण हेतु 15 लाख 85 हजार, ग्राम पंचायत पोड़ी में पुराना भवन विनिष्टीकरण सहित नए माध्यमिक शाला भवन निर्माण हेतु 16 लाख 60 हजार की राशि स्वीकृत किए गए है। पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड के खिरटी पंचायत के रनईपारा, ग्राम पंचायत परला के ललमटटापारा, ग्राम पंचायत सारिसमार के बंशीपेन्द्रो में एवं ग्राम पंचायत सरभोका के आश्रम में नवीन प्राथमिक शाला भवन निर्माण हेतु 15-15 लाख,  ग्राम पंचायत मेरई अंतर्गत मुडमिसिनी, पचरा के नदियापार, मानिकपुर के शाहीपुर, खिरटी के पण्ड्राआमा, कोडगार के महादेवपारा, ग्राम पंचायत पसान के गोलाबहरा, दर्रीपारा, बालमपुर, पोड़ीकला के पोड़ीपारा, बरदापखना,  सैला के पथराडांड, अडसरा के घाघरा, रानीअटारी, जटगा के बरेलियापारा, मेरई के ठाकुरदईयापारा, साखो के बरभांठा, मदनपुर के कोदवारीपारा, कटोरीनगोई के कुकरीकाडर, कोडगार के पहाड़पारा, घुंचापुर के लालपुर, मोरगा के जूनापारा, भुलसीभवना,  गुड़रूमुड़ा के कोड़ा, धजाक के जामबहार, मिसिया के करमीपारा, सिंधिया के कर्रा, ग्राम पंचायत केन्दई के केन्दई व आश्रित ग्राम रामभांठा, टिहलीसराई, पचरा के खुरूभांठा, लेपरा के नानलेपरा, सिर्री के बांधपारा, लैंगी के मोहनपुर में ग्राम पंचायत लाद, ग्राम पंचायत अटारी में पुराना भवन विनिष्टीकरण व नवीन प्राथमिक शाला भवन निर्माण के लिए प्रत्येक संस्थान हेतु 15 लाख 65 हजार, ग्राम पंचायत सुतर्रा व अमलडीहा में नवीन माध्यमिक शाला भवन निर्माण हेतु प्रत्येक संस्थान के लिए 15 लाख 85 हजार, ग्राम पंचायत मानिकपुर, सरभौंका, गिधमुड़ी, कुम्हारीसानी, लेपरा, सारिसमार, नगोईबछेरा, एवं ग्राम पंचायत केन्दई के टिहलीसराई, मोरगा के भुलसीभवना, ग्राम पंचायत कोनकोना के बरौदखार, खोडरी प के खम्हरिया, अमलीकुण्डा के अमलीकुण्डा बसाहट व झुनकीडीह, मातिन के मातीन बसाहट व लोड़ीबहरा में पुराने भवन विनिष्टीकरण व नवीन माध्यमिक शाला भवन निर्माण के लिए प्रत्येक संस्थान हेतु 16 लाख 60 हजार की राशि स्वीकृत की गई है। विकासखंड कटघोरा के ग्राम पंचायत बाता एवं ग्राम पंचायत खैरभौना के पड़निया में नवीन प्राथमिक शाला भवन निर्माण हेतु 15-15 लाख,  ग्राम पंचायत बिरदा एवं छुरीखुर्द में नवीन प्राथमिकशाला भवन निर्माण हेतु प्रत्येक संस्थान के लिए 15 लाख65 हजार, ग्राम पंचायत कनबेरी, अरदा एवं ग्राम पंचायत खैरभौना के पड़निया में नवीन माध्यमिकशाला निर्माण हेतु प्रत्येक संस्थान के लिए 15 लाख 85 हजार एवं ग्राम पंचायत कटसिरा एवं बाता में नवीन माध्यमिकशाला निर्माण हेतु 16 लाख 60 हजार की राशि स्वीकृत की गई है। विकासखंड करतला के ग्राम पंचायत तुमान के भांठापारा, बीरतराई के कचोरा, खरवानी के सरईपाली, सुपातरर्इ्र के तिल्हापतई, चिचोली के ठिठोली, नोनबिर्रा के बनियापारा, दमखांचा के दमखांचा बसाहट व खरहरकूड़ा, ग्राम पंचायत फुलझर, कनकी के बालक आश्रम कनकी, औराई के गनियारी, मुकुन्दपुर के कुरूडीह, रीवापार के दर्राभांठा ग्राम पंचायत रोगदा व पंचपेड़ी में पुराना भवन विनिष्टीकरण सहित नवीन प्राथमिकशाला भवन निर्माण हेतु प्रत्येक संस्थान के लिए 15 लाख 65 हजार की राशि, ग्राम पंचायत सुपातराई, तरदा, खरवानी, कोटमेर, घाठाद्वारी, दमखांचा एवं ग्राम पंचायत जामपानी के छातापाठ में पुराना भवन विनिष्टीकरण सहित नवीन माध्यमिकशाला भवन निर्माण हेतु प्रत्येक संस्थान के लिए 16 लाख 60 हजार राशि की स्वीकृति प्रदान की गई है। विकासखंड कोरबा के ग्राम पंचायत तौलीपाली, ग्राम पंचायत बासीन के रनगढ़हा, जामबहार के रोगबहरी, बेला के टापरा, ग्राम पंचायत चाकामार व आश्रित ग्राम हाथीमुड़ा में नवीन प्राथमिकशाला भवन निर्माण हेतु 15-15 लाख की स्वीकृति प्रदान की गई है। ग्राम पंचायत चाकामार व तिलईडाड़ में पुराना भवन विनिष्टीकरण सहित नवीन माध्यमिकशाला भवन निर्माण हेतु प्रत्येक संस्थान के लिए 16 लाख 60 हजार की राशि स्वीकृत की गई है। नगरीय क्षेत्र बांकीमोंगरा अंतर्गत शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बांकी साईड में 02 कक्ष का नया भवन सहशौचालय निर्माण हेतु 18 लाख 32 हजार एवं शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मांगरा में 02 कक्ष का नया भवन सह शौचालय निर्माण हेतु 18 लाख 32 हजार राशिकी स्वीकृति प्रदान की गई है। इन भवनों की स्वीकृति उन क्षेत्रों में दी गई है जहाँ लंबे समय से स्थानीय जनप्रतिनिधि, ग्रामीण व पालक पुराने व जर्जर विद्यालय भवनों को हटाकर नए भवनों की मांग कर रहे थे। जिला प्रशासन ने इस मांग को गंभीरता से लेते हुए शिक्षा की गुणवत्ता को ध्यान में रखकर यह ऐतिहासिक निर्णय लिया है।

Slot Server Thailand: Tips Jitu untuk Pemula Menang Besar dengan Cara Lebih Bijak

Mengenal Slot Server Thailand dan Daya Tariknya Perkembangan permainan slot online semakin menarik perhatian banyak orang karena menawarkan pengalaman bermain yang mudah dipahami dengan tampilan modern. Salah satu jenis yang cukup populer adalah slot server Thailand. Banyak pemain tertarik karena permainan ini dikenal memiliki pilihan tema yang beragam, fitur menarik, serta tampilan yang dirancang agar nyaman dimainkan oleh berbagai kalangan. Slot server Thailand https://siriusspamasaj.com/ sering dikaitkan dengan permainan yang memiliki sistem cepat, animasi menarik, dan pilihan bonus yang membuat pengalaman bermain terasa lebih seru. Namun, bagi pemula, memahami cara kerja permainan menjadi hal penting sebelum mulai bermain. Bukan hanya soal keberuntungan, tetapi juga bagaimana mengatur strategi dan mengambil keputusan dengan lebih baik. Memahami Cara Kerja Permainan Slot Sebelum Bermain Sebelum mencari peluang kemenangan besar, pemain pemula sebaiknya memahami konsep dasar slot terlebih dahulu. Pada dasarnya, permainan slot menggunakan sistem gulungan simbol yang akan menghasilkan kombinasi tertentu. Setiap permainan memiliki aturan, fitur bonus, serta tingkat volatilitas yang berbeda. Pemahaman terhadap fitur permainan dapat membantu pemain menentukan pilihan yang sesuai dengan gaya bermain. Ada permainan yang memberikan kemenangan kecil tetapi lebih sering, sementara ada juga yang menawarkan hadiah lebih besar dengan peluang yang lebih jarang. Banyak pemula melakukan kesalahan karena langsung bermain tanpa membaca informasi permainan. Padahal, mengetahui simbol khusus, fitur putaran gratis, hingga sistem pembayaran dapat menjadi langkah awal agar pengalaman bermain lebih terarah. Tips Memilih Slot Server Thailand yang Cocok untuk Pemula Memilih permainan yang tepat menjadi salah satu faktor penting bagi pemain baru. Tidak semua slot memiliki karakter permainan yang sama. Berikut beberapa hal yang bisa diperhatikan: 1. Pilih Permainan dengan Tampilan dan Fitur yang Mudah Dipahami Untuk pemula, sebaiknya memilih permainan dengan aturan sederhana. Tampilan yang jelas akan membuat pemain lebih mudah memahami fungsi setiap simbol dan fitur yang tersedia. Permainan yang terlalu kompleks terkadang membuat pemain bingung dan sulit menentukan strategi. Mulailah dari permainan yang memiliki informasi lengkap mengenai pembayaran dan fitur bonus. 2. Perhatikan Tingkat Volatilitas Permainan Volatilitas adalah salah satu istilah penting dalam dunia slot. Tingkat volatilitas menggambarkan pola pembayaran dalam sebuah permainan. Slot dengan volatilitas rendah biasanya memberikan kemenangan lebih sering dengan nilai yang lebih kecil. Sementara itu, slot dengan volatilitas tinggi memiliki peluang hadiah besar tetapi membutuhkan kesabaran lebih karena kemenangan bisa datang lebih jarang. Bagi pemula, memahami konsep ini dapat membantu mengatur ekspektasi dan memilih permainan yang sesuai dengan kemampuan bermain. 3. Manfaatkan Mode Latihan Jika Tersedia Salah satu cara terbaik untuk mengenal permainan adalah mencoba versi latihan. Dengan cara ini, pemain dapat memahami mekanisme permainan tanpa terburu-buru mengambil keputusan. Mode latihan juga membantu mengetahui apakah sebuah permainan cocok dengan gaya bermain sebelum menggunakan modal sebenarnya. Strategi Sederhana Agar Bermain Lebih Terarah Tidak ada strategi yang bisa menjamin kemenangan dalam permainan slot karena hasil tetap dipengaruhi oleh sistem permainan. Namun, beberapa kebiasaan positif dapat membantu pemain mengelola permainan dengan lebih baik. Mengatur Batas Bermain Sejak Awal Manajemen modal menjadi hal yang sangat penting. Tentukan batas yang nyaman sebelum mulai bermain dan hindari menggunakan dana yang dibutuhkan untuk kebutuhan lain. Dengan memiliki batas yang jelas, pemain dapat menikmati permainan dengan lebih santai tanpa merasa terbebani. Jangan Terburu-buru Mengejar Kekalahan Salah satu kesalahan umum pemain adalah mencoba mengembalikan kekalahan dengan terus bermain tanpa perhitungan. Cara ini justru dapat membuat keputusan menjadi kurang bijak. Lebih baik mengambil waktu untuk mengevaluasi permainan dan tetap mengikuti rencana awal yang sudah dibuat. Bermain dengan Fokus dan Santai Permainan slot membutuhkan kondisi pikiran yang tenang. Bermain saat sedang terburu-buru atau emosional dapat memengaruhi cara mengambil keputusan. Nikmati proses bermain sebagai hiburan dan tetap menjaga kontrol agar pengalaman tetap menyenangkan. Kesalahan Pemula yang Perlu Dihindari Selain mengetahui tips bermain, pemula juga perlu memahami beberapa kesalahan yang sering terjadi. Salah satunya adalah menganggap bahwa semua permainan memiliki pola kemenangan tertentu yang bisa ditebak secara pasti. Setiap putaran dalam permainan slot berjalan berdasarkan sistem yang sudah ditentukan. Karena itu, tidak ada metode yang mampu memastikan hasil setiap kali bermain. Kesalahan lainnya adalah terlalu fokus pada kemenangan besar hingga melupakan pentingnya pengelolaan permainan. Pemain yang bijak biasanya lebih memperhatikan durasi bermain, batas modal, dan kenyamanan saat menikmati permainan. Cara Menjadikan Pengalaman Bermain Lebih Positif Slot server Thailand dapat menjadi pilihan hiburan yang menarik ketika dimainkan dengan pendekatan yang tepat. Pemula sebaiknya fokus mempelajari permainan, mencoba berbagai fitur, dan membangun pengalaman secara bertahap. Kemenangan besar memang menjadi hal yang menarik, tetapi pemahaman terhadap permainan jauh lebih penting. 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थाने में आपके साथ कैसा बर्ताव हुआ, पुलिसकर्मी ने अच्छे से बात की या नहीं, समस्या को ठीक से सुना या नहीं, क्यूआर से फीडबैक देना होगा

भोपाल  अब हर एफआइआर के बाद शिकायतकर्ताओं को थाने में पुलिसकर्मियों के व्यवहार के संबंध में फीडबैक भी देना होगा। बताना होगा कि थाने में उनके साथ कैसा बर्ताव किया गया। पुलिसकर्मी ने अच्छे से बात की या नहीं। समस्या को ठीक से सुना या नहीं। इसके लिए थानों में क्यूआर कोड(QR Code) लगाए जा रहे हैं। इसको स्कैन करने के बाद शिकायतकर्ता ऑनलाइन फीडबैक भर सकेगा। पुलिस मुख्यालय ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिए हैं। भोपाल कमिश्नर को जारी पत्र के अनुसार थाने के किसी खुले स्थान पर क्यूआर कोड लगाया जाएगा। जिसे स्कैन कर लोग सेवाओं पर अपनी प्रतिक्रिया दे सकेंगे। फीड बैक के आधार पर कमियों को दूर करेंगे। क्यूआर कोड को गूगल या एनआइसी के माध्यम से फॉर्म को जनरेट किया जाएगा। इसकी लिंक कमिश्नर की ई-मेल आईडी से लिंक होगी। यह जानकारी देनी होगी ● नाम और मोबाइल नंबर ● अपराध नियंत्रण की स्थिति ● क्षेत्र में यातायात व्यवस्था ● सामाजिक गतिविधियों के दौरान पुलिस व्यवस्था ● आपदा के समय सहयोग ● पुलिसकर्मियों का व्यवहार ● पुलिसकर्मियों की कार्य दक्षता ● पुलिसकर्मियों की कार्यदक्षता ● थाना भवन की साफ सफाई ● थाना भवन में उपलब्ध संसाधन ● आगंतुकों की बैठने की व्यवस्था क्यों जरूरी है पुलिस कार्यशैली का फीडबैक?  पिछले समय में पुलिस के रवैये को लेकर कई शिकायतें सामने आई हैं, जैसे-     पुलिस कर्मचारियों का अमर्यादित व्यवहार।     पुराने मामलों की धीमी या लापरवाही भरी जांच।     झूठे मुकदमों में फंसाने की शिकायतें।     थानों में सुविधाओं की कमी। इन समस्याओं से निपटने और पुलिसिंग को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए फीडबैक सिस्टम की शुरुआत की गई है। इससे जनता की राय के आधार पर सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे। QR कोड स्कैन कर दें फीडबैक हर थाने के बाहर QR कोड लगाए जाएंगे जिन्हें आप अपने मोबाइल से स्कैन कर सकेंगे। स्कैन करते ही आपके सामने एक फॉर्म खुलेगा जिसमें आप निम्नलिखित जानकारियां भरेंगे-     आपका नाम और मोबाइल नंबर     थाने में आने का कारण     पुलिस का व्यवहार कैसा था     थाने की साफ-सफाई, पेयजल, शौचालय जैसी सुविधाएं कैसी थीं     आपके मामले की प्रगति या लंबित स्थिति     आपके मामले की प्रगति क्या है?     क्या आपको पुलिस से संतोषजनक सेवा मिली?     कोई सुझाव या शिकायत जो आप साझा करना चाहते हैं? यह फीडबैक जिला स्तर पर एसपी और प्रदेश स्तर पर पुलिस मुख्यालय द्वारा मॉनिटर किया जाएगा। फील्ड अफसरों की तबादला सूची में जनता की भूमिका  न सिर्फ फीडबैक, बल्कि जनता की राय को फील्ड अफसरों के तबादले के लिए भी इस्तेमाल किया जाएगा। पुलिस मुख्यालय अब तबादला सूची तैयार करते समय इस फीडबैक को गंभीरता से लेगा, जिससे बेहतर और जवाबदेह पुलिसिंग को बढ़ावा मिलेगा। यह व्यवस्था पुलिस कर्मियों की कार्यशैली को सुधारने में सहायक होगी और गलतफहमियों से बचाएगी। देवास में पायलट प्रोजेक्ट: ऐसे हुई शुरुआत मध्य प्रदेश पुलिस ने इस पहल का पायलट प्रोजेक्ट देवास जिले से शुरू किया है। यहां के सभी 21 थानों में QR कोड लगाए गए हैं। जनता इन कोड्स से फीडबैक देकर सीधे एसपी तक अपनी शिकायत और राय भेज रही है। इसके अलावा, वल्लभ भवन भोपाल से कॉलर फीडबैक सर्वे भी चलाया जा रहा है, जिसमें जनता आठ सवालों के माध्यम से पुलिस की कार्यशैली का आकलन करती है। हर थानों में लगवाएंगे क्यूआर कोड क्यूआर कोड हर थानों में लगवाएंगे। इसके आधार पर कमियों को भी दूर किया जाएगा। कोशिश होगी लोगों की हर संभव मदद हो। थानों में लोगों को अच्छा वातावरण मिले यह हमारी प्राथमिकता में है।- हरिनारायण चारी मिश्रा, पुलिस कमिश्नर, भोपाल पूरे प्रदेश में इसे लागू करने के निर्देश देवास में इस व्यवस्था को पहले लागू किया गया था। अब मुख्यालय से पूरे प्रदेश में इसे लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यालय ने क्यूआर स्कैन कोड बनाया है। इसका फॉर्मेट सभी को दिया गया है।– पवन श्रीवास्तव, एडीजी, पुलिस मुख्यालय

छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा दिव्यांगजनों के लिए आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और महत्वपूर्ण पहल की जा रही

रायपुर छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा दिव्यांगजनों के लिए आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और महत्वपूर्ण पहल की जा रही है। विशेष रोजगार कार्यालय, रायपुर द्वारा 18 जून  को प्रातः 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक विशेष प्लेसमेंट कैम्प का आयोजन किया जा रहा है। यह कैम्प विशेष रोजगार कार्यालय, पुराना पुलिस मुख्यालय परिसर, सिविल लाइंस, रायपुर में आयोजित होगा।   विशेष रोजगार कार्यालय रायपुर की उपसंचालक डॉ. शशी अतुलकर ने बताया कि इस प्लेसमेंट कैम्प में अलर्ट एस.जी.एस प्राइवेट लिमिटेड रायपुर द्वारा दिव्यांगजनों को घर बैठे एजेंट के रूप में कार्य करने के लिए रोजगार के अवसर प्रदान किए जाएंगे। यह कार्य पूरी तरह से कमीशन आधारित होगा, जिसमें कार्य की मात्रा के अनुसार पारिश्रमिक दिया जाएगा। योग्यता और आवश्यक दस्तावेज इस कैम्प में छत्तीसगढ़ राज्य के सभी इच्छुक 12वीं उत्तीर्ण दिव्यांग अभ्यर्थी भाग ले सकते हैं। उन्हें अपने साथ 12वीं की अंकसूची, दिव्यांगता प्रमाण-पत्र, स्थानीय निवासी प्रमाण-पत्र, रोजगार कार्यालय पंजीयन प्रमाण-पत्र, आधार कार्ड दस्तावेजों की फोटोकॉपी एवं दो पासपोर्ट साइज फोटो लाना अनिवार्य होगा। कैम्प में आने-जाने, भोजन और ठहरने की व्यवस्था अभ्यर्थियों को स्वयं करनी होगी। किसी प्रकार का मार्ग व्यय देय नहीं होगा। अधिक जानकारी के लिए अभ्यर्थी कार्यालयीन समय में विशेष रोजगार कार्यालय रायपुर से दूरभाष क्रमांक +91-0771-4044081 पर संपर्क कर सकते हैं।

नर्मदा के भेड़ाघाट पर बन रहा ऑईकॉनिक ब्रिज, पुल पर ही बनेगा होटल और रोप-वे का भी होगा निर्माण

 जबलपुर  जबलपुर में नर्मदा पर भेड़ाघाट में निर्माणाधीन 1.3 किलोमीटर लंबा आईकॉनिक ब्रिज आधुनिक इंजीनियरिंग का नायाब नमूना होगा। इस ब्रिज एक हिस्सा 487 मीटर का एक्सट्रा डोज केबल ब्रिज भी होगा। एक्सट्रा डोज केबल वाला यह जबलपुर का चौथा ब्रिज होगा। जिस तरह से मदनमहल रेलवे स्टेशन पर बने केबल स्टे ब्रिज में उच्च तनाव वाली एक्सट्रा डोज केबल का उपयोग किया गया है, उसी तर्ज पर इसका भी निर्माण किया जाएगा। फेज-2 में बनेगा रोपवे 270 करोड़ की लागत से निर्माणाधीन इस ब्रिज का निर्माण कार्य पूरा होने पर उसमें रोपवे भी स्थापित किया जाएगा, जो ऊंचाई से पर्यटकों को पुण्य सलिला मैया नर्मदा के दर्शन कराएगा। हालांकि ये काम फेज 2 में होगा। इसके साथ ही ब्रिज के दोनों छोर पर होटल भी बनाए जाएंगे। इस ब्रिज की लाइटिंग भी खास होने वाली है, जो पर्यटकों को लुभाएगी। भेड़ाघाट में बन रहे इस ब्रिज से होकर एनएच 45 होते हुए रिंग रोड के माध्यम से सीधे एयरपोर्ट तक कनेक्टिविटी होगी। वहीं रोपवे से होकर पर्यटक नर्मदा के दोनों ओर पर्यटन स्थल सुगमता से पहुंच सकेंगे। 25 प्रतिशत काम पूरा प्रदेश की सबसे बड़ी रिंग रोड में नर्मदा पार उतारने बनाए जा रहे आईकॉनिक ब्रिज(Iconic Bridge) का अभी 25 प्रतिशत काम पूरा हुआ है। निर्माण एजेंसी एनएचएआई ने इसे वर्ष 2026 के अंत में पूरा करने का लक्ष्य रखा है। इस ब्रिज में एक्सट्रा डोज के 4 स्पॉन व नॉन एक्सट्रा डोज के 35 स्पॉन हैं। दूसरे आईकॉनिक ब्रिज का 65 प्रतिशत काम पूरा रिंग रोड में दूसरा आईकॉनिक ब्रिज नर्मदा पर भटौली क्षेत्र में 200 करोड़ की लागत से निर्माणाधीन है। 1.2 किलोमीटर लंबे इस ब्रिज का 65 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। बाकी काम इस वर्ष के अंत तक पूरा करने का लक्ष्य है। हालांकि इस ब्रिज में रोपवे नहीं होगा। इस ब्रिज में 5 स्पॉन एक्सट्रा डोज के व 12 स्पॉन नॉन एक्सट्रा डोज के होंगे।  पर्यटकों के लिए बनना है होटल भेड़ाघाट में बनने वाले ऑईकॉनिक ब्रिज में होटल का भी निर्माण किया जाएगा। पर्यटन महत्व को देखते हुए नदी पर हैवी स्टील व कंक्रीट स्ट्रक्चर से बनने वाले पुल के साथ ही आकर्षक होटल का निर्माण किया जाएगा, जहां पर्यटक कुछ पल सुकून के भी बिता सकेंगे। आकर्षक होगी लाइटिंग रिंग रोड के दूसरे फेस में मानेगांव से राष्ट्रीय राजमार्ग 45 तक के हिस्से में नर्मदा पर भेड़ाघाट में बनने वाला आईकॉनिक ब्रिज अब तक बने पुलों से बिलकुल हटकर होगा। प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों के अनुसार के अनुसार आईकॉनिक ब्रिज की लाइटिंग भी कुछ इस तरह होगी जो ब्रिज को आकर्षण का केन्द्र बनाएगी। वहीं रोपवे से होकर पर्यटक नर्मदा के दोनों ओर पर्यटन स्थल सुगमता से पहुंच सकेंगे। नए पुलों का तैयार हो रहा है नेटवर्क नर्मदा पार उतरने के लिए ढाई दशक पहले 1 ही पुल तिलवारा में हुआ करता था। दो दशक पहले नए ब्रिज का निर्माण हुआ तो अग्रेजों के जमाने का पुल बंद हो गया। एक दशक में नर्मदा पार उतरने तिलवारा में एक और पुल का निर्माण हुआ। इसके साथ ही भटौली में नए पुल का निर्माण हो गया। सडक़ मार्गों का विस्तार होने से नगर की परिधि पच्चीस किलोमीटर से बढकऱ पचपन किलोमीटर की हो गई है। लहेटा, सरस्वतीघाट, भेड़ाघाट और जमतरा में नए पुलों के निर्माण के साथ ही रिंग रोड भी आकार ले रही है इस प्रकार नए रोड नेटवर्क के तैयार होने से नर्मदा नदी के पार पहुंच आसान होगी। रिंग रोड के आसपास नगर के अन्य इलाकों में भी तेजी से विस्तार होने की संभावना बढ़ गई है।  रिंग रोड के फेज-1 में नर्मदा नदी पर एक किलोमीटर लंबे ऑईकॉनिक ब्रिज का निर्माण कार्य जारी है। ब्रिज के मुय स्पॉन के लिए फाउंडेशन तैयार किा जा रहा है। दोनों ओर एप्रोच रोड का निर्माण हो गया है।     अमृत लाल साहू, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, एनएचएआई नर्मदा नदी पर दो नए और बड़े ब्रिज के निर्माण व कनेक्टिंग सड़कों के बनने से नए तटों का विस्तार हो सकेगा। इससे नदी के वर्तमान तटों पर भीड़ का दबाव कम होगा, इसके साथ ही विकास की नई संभावनाएं भी खुलेंगी।     इंजी.संजय वर्मा, स्ट्रक्चर इंजीनियर व टाउन प्लानर ऊंचाई पर होगा व्यू प्वांइट, रोप-वे से पहुंचेंगे रिंग रोड में बन रहे इस ब्रिज में दूसर चरण में रोप-वे का निर्माण प्रस्तावित है। इस से ऊंचाई पर स्थित प्वांइट तक पर्यटक पहुंच सकेंगे। यहां से मां नर्मदा के विस्तार का खूबसूरत नजारा दिखेगा। पर्यटकों के साथ ही रील्स, यूट्यूबर्स के लिए यह पसंदीदा स्थाना बनेगा। ब्रिज के दोनों छोर पर होटल का निर्माण भी किया जाएगा। भेड़ाघाट में निर्माणाधीन ऑईकॉनिक ब्रिज का काम पूरा होने पर अगले चरण में उसमें रोपवे का निर्माण किया जाएगा। इसके साथ ही दोनों ओर होटल भी बनाए जाएंगे। इस ब्रिज का 25 प्रतिशत काम हो गया है, दूसरा ऑईकॉनिक ब्रिज भटौली में निर्माणाधीन है। दोनों ही ब्रिज में एक्सट्रा डोज केबल का भी उपयोग किया जाएगा।– अमृत लाल साहू, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, एनएचएआई

साइबर क्राइम से बचाव के लिए साइबर कमांडो तैयार किए, इंडियन साइबर क्राइम को-ऑर्डिनेशन सेंटर की स्थापना की

ग्वालियर  तेजी से बढ़ते साइबर अपराध से निपटने के लिए देशभर में साइबर कमांडो तैयार किए जा रहे हैं। अब ग्वालियर इस दिशा में एक अहम केंद्र बनने जा रहा है। मुरैना रोड स्थित प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग कॉलेज ट्रिपल आइटीएम (ITM University) में साइबर कमांडो को प्रशिक्षण देने की संभावनाएं तलाशी गई हैं। केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन कार्यरत इंडियन साइबर क्राइम को-ऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) के डायरेक्टर अरविंद कुमार अपनी टीम के साथ सोमवार को यहां पहुंचे और संस्थान का गहन निरीक्षण किया। इंडियन साइबर क्राइम को-ऑर्डिनेशन सेंटर देशभर में साइबर अपराधों की बढ़ती घटनाएं अब कानून व्यवस्था के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन चुकी हैं। डिजिटल दुनिया में बैठकर हजारों किलोमीटर दूर से किए जा रहे अपराधों को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने “आइ4सी” यानी इंडियन साइबर क्राइम को-ऑर्डिनेशन सेंटर की स्थापना की है। इसका मकसद है – राज्यों की पुलिस, जांच एजेंसियों और तकनीकी संस्थानों के सहयोग से साइबर स्पेशलिस्ट तैयार करना। इसी कड़ी में सोमवार को I4C के ट्रेनिंग डायरेक्टर अरविंद कुमार और उनकी टीम ग्वालियर स्थित ट्रिपल आइटीएम यूनिवर्सिटी पहुंचे। उन्होंने संस्थान के इंफ्रास्ट्रक्चर, टेक्नोलॉजी लैब, साइबर सिक्योरिटी कोर्सेस और फैकल्टी की उपलब्धता का गहन निरीक्षण किया। इसके साथ ही कोर्स डिजाइन, ट्रेनिंग मॉड्यूल और लॉजिस्टिक सुविधाओं पर कॉलेज प्रबंधन के साथ बैठक की गई। साइबर कमांडो की ट्रेनिंग होगी शुरू राज्य साइबर सेल की टीम भी निरीक्षण में शामिल रही। टीम ने विशेष रूप से देखा कि क्या संस्थान एक राष्ट्रीय स्तरीय साइबर ट्रेनिंग सेंटर के मानकों को पूरा करता है। प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, संस्थान में सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं, जो साइबर कमांडो की ट्रेनिंग के लिए उपयुक्त हैं। ट्रेनिंग सेंटर का डेवलपमेंट होगा अरविंद कुमार ने बताया कि पहले चरण में देशभर में सीमित स्थानों पर साइबर कमांडो की ट्रेनिंग दी गई है। अब दूसरे चरण में हर राज्य में एक-एक ट्रेनिंग सेंटर विकसित किया जा रहा है, ताकि पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के अधिक से अधिक कर्मचारी प्रशिक्षित हो सकें। इन कमांडो को ट्रेनिंग के बाद अपनी-अपनी यूनिट में जाकर अन्य पुलिसकर्मियों को भी प्रशिक्षित करने का दायित्व होगा। इस निरीक्षण के बाद पूरी रिपोर्ट तैयार कर केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजी जाएगी। मंत्रालय की अनुमति मिलने पर ट्रिपल आइटीएम में जल्द ही साइबर कमांडो की ट्रेनिंग औपचारिक रूप से शुरू हो जाएगी।

आंगनवाड़ियों के नाश्ते -भोजन में चीनी और नमक की मात्रा नियंत्रित करने के लिए आदेश जारी

भोपाल  बच्चों और महिलाओं में मोटापा और हाईपरटेशन की समस्या बढ़ने के बीच केन्द्र ने मध्यप्रदेश सरकार को भी बच्चों और गर्भवतियों के पौष्टिक आहार में चीनी और नमक को नियंत्रित करने का निर्देश दिया है। केन्द्रीय महिला और बाल विकास मंत्रालय ने इस संबंध में राज्यों के मुख्य सचिव और महिला व बाल विकास सचिव को पत्र लिखा है। मंत्रालय ने टेक होम राशन और आंगनबाड़ी से बच्चों और गर्भवतियों को दिए जा रहे आहार में अधिक नमक, चीनी और रंग पाए जाने के बारे में चेताया है। राज्यों के मुख्य सचिव और अन्य अधिकारियों को लिखे पत्र में केंद्रीय महिला बाल विकास मंत्रालय ने ये निर्देश दिए हैं । राशन पैकेट की जांच में चीनी, नमक और अन्य तत्व कहीं अधिक मात्रा में मिले हैं। पत्र के मुताबिक डब्ल्यूएचओ के नियमों के तहत बच्चों और वयस्कों के भोजन में कुल पोषक तत्वों में से शक्कर 10% से कम होनी चाहिए। कुल ऊर्जा का सिर्फ 5% चीनी से आना चाहिए। वहीं, नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ न्यूट्रिशन के मुताबिक 2 साल तक के बच्चों के भोजन में अतिरिक्त चीनी नहीं होना चाहिए।पत्र के मुताबिक शक्कर की जगह मिठास के लिए गुड़ का प्रयोग करें। गुड़ भी कुल पोषक तत्वों का 5% से अधिक नहीं होना चाहिए। केंद्रीय मंत्रालय के पत्र ने किया हैरान पत्र में मंत्रालय ने लिखा है कि कहीं-कहीं बच्चों, गर्भवती और बच्चे को दूध पिलाने वाली महिलाओं को दिए जा रहे नाश्ते और भोजन में निर्धारित मात्रा से अधिक नमक, चीनी और रंग पाए गए हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मानकों के अनुसार इनके आहार में नमक, चीनी और रंगों की मात्रा नियंत्रित की जाए। इससे पहले सरकार ने स्कूली बच्चों के भोजन में चीनी की मात्रा नियंत्रित करने का निर्देश जारी किया था। कितनी मात्रा हो चीनी-नमक की डब्ल्यूएचओ के नियमों का हवाला देते हुए केन्द्र ने राज्य से कहा है कि बच्चों और वयस्कों के भोजन में कुल पोषक तत्वों का 10 प्रतिशत शक्कर और कुल ऊर्जा का पांच प्रतिशत नमक होना चाहिए। दूसरी ओर नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूट्रिशन के अनुसार दो वर्ष के बच्चों के भोजन में अतिरिक्त चीनी नहीं होनी चाहिए। उनके भोजन में मिठास के लिए शक्कर की जगह गुड़ का उपयोग करना चाहिए और वह भी कुल पोशक तत्वों का सिर्फ पांच प्रतिशत। अधिक नमक-चीनी से हो रही है ये बीमारियां मध्य प्रदेश सरकार पोषण आहार योजना के तहत आंगनवाड़ी केन्द्रों से लगभग 80 लाख गर्भवती और बच्चों को दूध पिलाने वाली महिलाओं और छह माह से छह वर्ष के बच्चों को पौष्टिक आहार दिया जाता है। इनके भोजन में अधिक नमक और चीनी की मात्रा होने से इन्हें उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, मोटापा, मधुमेह और दांतों की समस्याएं हो सकती हैं।

भारत को मिला ऑयल का विशाल भंडार ! अब बाहर से मंगाएगा नहीं दूसरे देशों का देगा

नई दिल्ली भारत, अंडमान सागर में एक बेहद बड़ी ऑफशोर तेल खोज कर सकता है। इस तेल भंडार में 184,440 करोड़ लीटर कच्चा तेल हो सकता है और यह गुयाना की परिवर्तनकारी खोज को टक्कर दे सकता है। यह बात केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने द न्यू इंडियन के साथ एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में कही। अगर यह तेल भंडार मिल जाता है तो यह भारत के लिए एक बड़ा गेमचेंजर साबित होगा। पुरी ने कहा कि सरकार के हालिया सुधार और आक्रामक खोज अभियान एक बड़ी खोज के लिए आधार तैयार कर रहे हैं। पुरी के मुताबिक, छोटी खोजों के अलावा, अंडमान क्षेत्र में गुयाना जैसी बड़े पैमाने पर तेल की खोज भारत की अर्थव्यवस्था को 3.7 लाख करोड़ डॉलर से 20 लाख करोड़ डॉलर तक बढ़ाने में मदद कर सकती है। अगर कनफर्म हो गया कि अंडमान सागर में इतना बड़ा तेल भंडार है तो यह खोज भारत के एनर्जी लैंडस्केप को नया आकार दे सकती है। पुरी ने कहा कि कुछ वक्त की बात है, उसके बाद हो सकता है कि हम अंडमान सागर में एक बड़ा गुयाना खोज लें। क्या है गुयाना मॉडल गुयाना के तट पर एक्सॉनमोबिल, हेस कॉरपोरेशन और सीएनओओसी ने 11.6 अरब बैरल से अधिक का विशाल भंडार खोजा था। उस खोज ने गुयाना को तेल भंडार वाले दुनिया के टॉप 20 देशों में शामिल कर दिया, जिससे उस देश की अर्थव्यवस्था में नया बदलाव आया। पुरी का मानना ​​है कि अगर मौजूदा ड्रिलिंग प्रयास सफल होते हैं तो भारत इसी तरह की सफलता की ओर बढ़ सकता है, विशेष रूप से अंडमान क्षेत्र में। हमारी एनर्जी की जरूरतें एक झटके में होंगी पूरी माना जा रहा है कि इसके मिलने के बाद हमारी एनर्जी की जरूरतें एक झटके में पूरी हो जाएंगी। अगर अंडमान में खोज सफल होती है, तो भारत ऑयल इंपोर्ट्स को काफी हद तक कम कर सकता है और अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत कर सकता है। होर्मुज का रास्ता बंद होने से महंगे पड़ेंगे तेल व गैस ईरान और इजरायल के बीच युद्ध भारत के लिए भी नुकसानदायक है। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि युद्ध के कारण, भारत पर आर्थिक संकट का खतरा बढ़ रहा है। खासकर होर्मुज जलडमरुमध्य को लेकर चिंताएं हैं। अगर यह बंद होता है तो भारत के लिए तेल और गैस का आयात महंगा पड़ेगा। दोनों देशों से व्यापारिक रिश्ते वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने ईरान को 1.24 अरब डॉलर का माल निर्यात किया और 44.19 करोड़ डॉलर का आयात किया। वहीं, इजरायल के साथ 2.15 अरब डॉलर का निर्यात और 1.61 अरब डॉलर का आयात किया है। होर्मुज जलडमरूमध्य होर्मुज जलडमरूमध्य ओमान और ईरान के बीच स्थित है, जो खाड़ी के देशों (इराक, कुवैत, सऊदी अरब, बहरीन, कतर और संयुक्त अरब अमीरात) से समुद्री मार्ग को अरब सागर और उससे आगे तक जोड़ता है। यह जलडमरूमध्य अपने सबसे संकरे बिंदु पर केवल 33 किमी चौड़ा है। यहां प्रतिदिन लगभग दो करोड़ बैरल तेल और तेल उत्पाद जहाजों पर लादे जाते हैं। सस्ता नहीं है तेल के कुएं खोदना भारत ने कई क्षेत्रों में एक्सप्लोरेशन के लिए ड्रिलिंग को बढ़ाया है, खासकर उन क्षेत्रों में जिन्हें पहले दुर्गम माना जाता था। पुरी ने तेल की खोज के लिए कुएं खोदने की हाई कॉस्ट पर भी बात की। उन्होंने कहा कि इसमें बहुत सारा पैसा लगता है। उन्होंने कहा कि गुयाना में उन्होंने 43 या 44 कुएं खोदे, जिनमें से प्रत्येक की लागत 10 करोड़ डॉलर थी। उन्हें 41वें कुएं में तेल मिला। आगे कहा कि सरकारी कंपनी ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन (ONGC) ने इस साल जितने कुएं खोदे हैं, वे 37 साल में सबसे ज्यादा हैं। वित्त वर्ष 2024 में कंपनी ने 541 कुओं की खुदाई की। इसमें 103 एक्सप्लोरेटरी और 438 डेवलपमेंटल कुएं शामिल हैं। इन सब में कंपनी ने ₹37,000 करोड़ का अपना रिकॉर्ड हाई पूंजीगत खर्च भी दर्ज किया। समुद्री इलाके में खुदाई शुरू सरकार ने पिछले कुछ सालों में अनछुए समुद्री बेसिनों में तेल और गैस की खोज के लिए नीतिगत सुधार किए हैं और निवेश बढ़ाया है. सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां जैसे ONGC और ऑयल इंडिया लिमिटेड ने अंडमान के गहरे समुद्री इलाके में खुदाई शुरू कर दी है. कारोबारी साल 2024 में ONGC ने 37 सालों में सबसे अधिक 541 कुएं खोदे, जिसमें 103 खोज कुएं और 438 विकास कुएं शामिल थे. कंपनी ने ₹37,000 करोड़ का अधिकतम कैपिटल एक्सपेंडिचर भी रिकॉर्ड किया. भारत की वर्तमान कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग 85% आयात पर निर्भर है, जिससे देश की ऊर्जा सुरक्षा कमजोर होती है. अंडमान सागर में सफल खोज से आयात पर निर्भरता कम होगी और देश की एनर्जी स्वतंत्रता मजबूत होगी. इसके साथ ही, तेल की घरेलू उपलब्धता बढ़ने से पेट्रोल-डीजल की कीमतों में स्थिरता आएगी और आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी. पुरी ने बताया कि गुयाना में तेल खोजने के लिए 43-44 कुएं खोदे गए थे, जिनमें से 41वें कुएं में तेल मिला था. भारत भी इसी तरह की चुनौतियों का सामना कर रहा है, लेकिन उम्मीद है कि जल्द ही सफलता मिलेगी. अंडमान सागर में तेल की खोज भारत के लिए न केवल एनर्जी सेक्टर में क्रांति लाएगी, बल्कि ग्लोबल तेल बाजार में भी देश की स्थिति मजबूत करेगी. यह खोज भारत को एक प्रमुख तेल उत्पादक देश के रूप में स्थापित कर सकती है और आर्थिक रूप से देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी. तीसरा सबसे बड़ा ऑयल इंपोर्टर है भारत भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत में से 85% को आयात के जरिए पूरा करता है। देश कच्चे तेल के मामले में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा इंपोर्टर है, इसके आगे केवल अमेरिका और चीन हैं। कच्चे तेल का घरेलू उत्पादन वर्तमान में असम, गुजरात, राजस्थान, मुंबई हाई और कृष्णा-गोदावरी बेसिन में केंद्रित है। विशाखापत्तनम, मैंगलोर और पादुर में रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार बनाकर रखे गए हैं, ओडिशा और राजस्थान में नई साइट्स की योजना बनाई गई है। भारत की तेल आवश्यकता और आयात भारत के लिए यह तेल कितना महत्वपूर्ण है, इसका अंदाजा इस तथ्य से लगाया जा सकता है कि भारत अपनी कच्चे तेल की … Read more

डोनाल्ड ट्रंप अब मोबाइल फोन भी बेचेंगे, स्मार्टफोन के कारोबार में उतरा अमेरिकी राष्ट्रपति का परिवार

 वाशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का परिवार अब मोबाइल फोन निर्माण के नए कारोबार में उतरेगा। इसका नाम ट्रंप मोबाइल होगा। यह कदम तब उठाया गया है जब डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका के राष्ट्रपति जैसे सर्वोच्च सांविधानिक पद पर हैं। उनकी इस बात को लेकर आलोचना हो रही है कि वे अपनी निजी व्यावसायिक हितों के लिए सार्वजनिक नीतियों को प्रभावित कर सकते हैं। इसे ट्रंप ब्रांड की लोकप्रियता को भुनाने की एक और कोशिश करार दिया जा रहा है। ट्रंप ऑर्गनाइजेशन के कार्यकारी उपाध्यक्ष और डोनाल्ड ट्रंप के बेटे एरिक ट्रंप ने कहा कि ट्रंप मोबाइल अमेरिका में निर्मित फोन बेचेगा और देश में ही एक कॉल सेंटर संचालित करेगा। कंपनी की वेबसाइट के अनुसार, ट्रंप ऑर्गनाइजेशन 47.45 डॉलर (लगभग ₹3,950) प्रति माह की स्कीम पेश करेगी। इसमें असीमित बातचीत, टेक्स्ट और डेटा के साथ-साथ टेलीहेल्थ और फार्मेसी लाभ भी शामिल हैं। ट्रंप के “मेक अमेरिका ग्रेट” नारे से सजे सुनहरे रंग के इस फोन की कीमत 499 डॉलर (लगभग ₹41,500) है। आधिकारिक बयान में कहा गया है कि यह फोन सितंबर में बाजार में आ जाएगा। ट्रंप ऑर्गनाइजेशन के कार्यकारी उपाध्यक्ष और डोनाल्ड ट्रंप के छोटे बेटे एरिक ट्रंप ने कहा कि ट्रंप मोबाइल अमेरिका में बना फोन बेचेगा। साथ ही अमेरिका में ही एक कॉल सेंटर संचालित करेगा। अमेरिकी राष्ट्रपति की कंपनी ट्रंप ऑर्गनाइजेशन रियल एस्टेट, होटल और गोल्फ रिसॉर्ट्स के लिए जानी जाती है। लेकिन अब ट्रंप ऑर्गनाइजेशन डिजिटल मीडिया, क्रिप्टोकरेंसी और टेलिकॉम सेक्टर में भी पैर पसार रही है। ट्रंप ऑर्गनाइजेशन ने दावा किया है कि इसका कस्टमर सपोर्ट और मैन्यूफैक्चरिंग दोनों अमेरिका में ही होंगे। माना जा रहा है कि इसके बाद डोनाल्ड ट्रंप और उनके परिवार के कारोबारी साम्राज्य का नया विस्तार होने वाला है। एक्सपर्ट की मानें तो ट्रंप अपनी राजनीतिक पहचान को व्यावसायिक लाभ में बदलने की कोशिश कर रहे हैं। अब देखना दिलचस्प होगा कि अमेरिकी मार्केट में यह नया मोबाइल नेटवर्क और फोन कितना असर डालता है। इस बात को लेकर ट्रंप की आलोचना हो रही है कि वे अपनी निजी व्यावसायिक हितों के लिए सार्वजनिक नीतियों को प्रभावित कर सकते हैं। इसी क्रम में इसे ट्रंप ब्रांड की लोकप्रियता को भुनाने की एक और कोशिश करार दिया जा रहा है। इस नई मोबाइल फोन और सेवा को टी1 मोबाइल नाम दिया गया है। इसकी घोषणा मध्य पूर्व में कई रियल एस्टेट सौदों के बाद हुई है, जिसमें कतर में एक गोल्फ परियोजना भी शामिल है। पिछले महीने उनके परिवार ने वियतनाम में गोल्फ कोर्स, होटल और रियल एस्टेट परियोजनाओं के लिए 1.5 बिलियन डॉलर का साझेदारी समझौते को मंजूरी दी थी। हालांकि, इन सौदाें की शुरुआत ट्रंप के निर्वाचन से पहले हो गई थी। व्यवसायों में ट्रंप के नाम से जुड़ाव पर अमेरिका के व्यापारिक और राजनीतिक हलकों में विवादों का नया दौर शुरू हो गया है। गौरतलब है कि मोबाइल फोन कंपनियों की नियामक संस्था फेडरल कम्युनिकेशंस कमीशन ने उन मीडिया संस्थानों की जांच शुरू की है, जिन्हें ट्रंप नापसंद करते हैं।   भारत में आईफोन निर्माण को लेकर टैरिफ की धमकी दे चुके हैं ट्रंप एरिक ट्रंप ने सोमवार को कहा कि उपभोक्ताओं को ऐसा फोन मिलना चाहिए जो किफायती हो, उनके मूल्यों के अनुरूप हो। यह कंपनी एक अत्यंत प्रतिस्पर्धी बाजार में प्रवेश कर रही है। इसके पहले भारत में आईफोन निर्माण को लेकर लेकर डोनाल्ड ट्रंप एपल की आलोचना कर चुके हैं। ट्रंप ने एपल पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने की धमकी दी थी।  

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