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पाकिस्तान से आए हिंदुओं के अधिकारों पर सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी

नई दिल्ली  सुप्रीम कोर्ट ने पाकिस्तान से भारत आए अनुसूचित जाति के हिंदुओं की दुर्दशा पर गंभीर टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि जब सरकार ने इन लोगों को नागरिकता दी तो उन्हें गरिमापूर्ण तरीके से रहने की जगह भी उपलब्ध करानी चाहिए। यह टिप्पणी दिल्ली के मजनू का टीला इलाके में रहने वाले इन शरणार्थियों के विस्थापन के खतरे के बीच आई है, जहां सिग्नेचर ब्रिज के पास उनका कैंप है। दरअसल, ये लोग पाकिस्तान से धार्मिक उत्पीड़न से बचकर भारत आए थे। ज्यादातर अनुसूचित जाति के हिंदू हैं और यहां झुग्गी-झोपड़ी में रहते हैं। कइयों को नागरिकता मिल चुकी है, जबकि कुछ के आवेदन प्रक्रिया में हैं। दिल्ली डेवलपमेंट अथॉरिटी (डीडीए) और अन्य एजेंसियां यमुना फ्लडप्लेन पर अवैध कब्जे के नाम पर उन्हें हटाने की तैयारी कर रही थीं। दिल्ली हाईकोर्ट ने मई 2025 में एक फैसले में हटाने का रास्ता साफ किया था, जिसके खिलाफ ये लोग सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस एन. कोटेश्वर सिंह की पीठ ने मामले की सुनवाई की। कोर्ट ने केंद्र सरकार और डीडीए को नोटिस जारी किया और चार हफ्तों के अंदर जवाब मांग लिया। साथ ही, कोर्ट ने फिलहाल इन लोगों को विस्थापित करने की किसी भी योजना पर रोक लगा दी है। पीठ ने स्पष्ट कहा कि अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और गरिमा के अधिकार में सिर्फ नागरिकता काफी नहीं है, बल्कि आश्रय और सम्मानजनक जीवन भी शामिल है। कोर्ट ने सरकार से पूछा कि नागरिकता देने के बाद इन्हें वैकल्पिक आवास या पुनर्वास क्यों नहीं दिया जा रहा। यहां करीब 250-260 परिवार (लगभग 800-1200 लोग) रहते हैं। ज्यादातर मजदूरी, घरेलू काम या छोटे-मोटे काम करके गुजारा करते हैं। उनका कहना है कि पाकिस्तान में उन्हें ‘काफिर’ कहा जाता था। भारत आने पर शुरुआत में संदेह झेलना पड़ा। लेकिन, अब नागरिकता मिलने के बाद भी बेघर होने का डर सता रहा है।

कृषि में बड़ा बदलाव! CM योगी का आय बढ़ाने वाला इंटरक्रॉपिंग फॉर्मूला सभी किसानों के लिए

लखनऊ यूपी में किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र को नई दिशा देने के लिए सीएम योगी आदित्यनाथ ने गन्ना आधारित तिलहनी और दलहनी अंतःफसली यानी इंटरक्रॉपिंग खेती को लागू करने के निर्देश दिए हैं। उन्होने कहा है कि उत्तर प्रदेश को कृषि क्षेत्र में नई छलांग दिलाने का सबसे प्रभावी तरीका गन्ना के साथ तिलहनी एवं दलहनी अंतःफसली खेती को बड़े पैमाने पर लागू करना है। यह मॉडल गन्ना किसानों की आय को केवल दोगुना नहीं, बल्कि बहु-गुणित करने की क्षमता रखता है।   मुख्यमंत्री सोमवार को इस विषय पर आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। सीएम ने बताया कि गन्ने के साथ सरसों, मसूर, उर्द और मूंग जैसी उच्च मूल्य वाली फसलों की अंतःफसल (इंटरक्रॉपिंग) से किसानों को अतिरिक्त उत्पादन मिलेगा। इससे खेती की लागत कम होगी और पूरे वर्ष स्थिर आय सुनिश्चित हो सकेगी।उन्होंने कहा कि इस मॉडल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि गन्ने की पैदावार प्रभावित किए बिना किसानों को अतिरिक्त फसल, अतिरिक्त लाभ और जोखिम से सुरक्षा मिलती है। प्रदेश में कृषि योग्य भूमि का क्षैतिज विस्तार अब संभव नहीं है। ऐसे में ट्रिलियन डॉलर इकॉनमी के लक्ष्य को हासिल करने के लिए इकाई क्षेत्रफल से अधिक उत्पादन ही एकमात्र रास्ता है। उन्होंने गन्ना आधारित अंतःफसली खेती को यूपी के कृषि भविष्य का नया मॉडल बताते हुए कहा कि यह किसानों को अधिक उत्पादन, अधिक कमाई और जोखिम से सुरक्षा प्रदान करेगा। मुख्यमंत्री ने इस योजना को वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक मिशन मोड में लागू करने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि वर्तमान में प्रदेश में 29.50 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गन्ने की खेती होती है, जिसमें 14.64 लाख हेक्टेयर नया बोया गया क्षेत्र और 14.86 लाख हेक्टेयर पेड़ी शामिल है। इतने बड़े क्षेत्र में तिलहन और दलहन की अंतःफसल जोड़ने से उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और प्रदेश तथा देश को तिलहन-दलहन के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता मिलेगी। सीएम योगी ने निर्देश दिया कि कृषि विज्ञान केंद्र और कृषि विश्वविद्यालयों के माध्यम से वैज्ञानिक आधार पर अंतःफसल का चयन किया जाए। उन्होंने आईआईएसआर की सिफारिशों के अनुसार रबी में सरसों-मसूर और जायद में उर्द-मूंग को प्राथमिकता देने की बात कही। साथ ही वर्षवार रोडमैप और सहायता-अनुदान की स्पष्ट व्यवस्था करने के निर्देश दिए।  

धीमी शुरुआत के बाद पटरी पर लौटी ‘मर्दानी-3’, तीसरे दिन कमाई में उछाल

मुंबई, बॉलीवुड अभिनेत्री रानी मुखर्जी की फिल्म ‘मर्दानी 3’ ने भले ही बॉक्स ऑफिस पर धीमी शुरुआत की हो, लेकिन फिल्म ने धीरे-धीरे रफ्तार पकड़नी शुरू कर दी है। सिनेमाघरों में 30 जनवरी को रिलीज हुई इस फिल्म में रानी एक बार फिर दमदार पुलिस अधिकारी शिवानी शिवाजी रॉय के किरदार में में हैं। उनके साथ जानकी बोदीवाला और मल्लिका प्रसाद हैं। कहानी पुलिस ऑफिसर शिवानी शिवाजी रॉय की है जो सिर्फ़ तीन महीनों में रहस्यमयी हालात में गायब हुई 93 जवान लड़कियों के केस की जांच करती है। फिल्म का निर्देशन अभिराज मीनावाला ने किया है और इसे यशराज फिल्म्स ने प्रोड्यूस किया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, फिल्म ने रिलीज के तीसरे दिन (रविवार) 7.25 करोड़ रुपये की कमाई की, जो इसके पहले दो दिनों की तुलना में सबसे ज्यादा है। फिल्म ने पहले दिन 4 करोड़ से ओपनिंग की थी, जबकि दूसरे दिन इसका कलेक्शन 6.25 करोड़ रहा। इस तरह तीन दिनों में फिल्म की कुल कमाई 17.50 करोड़ हो गई है। फिल्म के ट्रेलर को दर्शकों ने काफी पसंद किया था, जिससे बॉक्स ऑफिस पर जोरदार शुरुआत की उम्मीद जताई जा रही थी। कई ट्रेड विश्लेषकों का मानना था कि फिल्म पहले दिन ही डबल डिजिट में कमाई कर सकती है, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। इसके बावजूद वर्ड ऑफ माउथ के सहारे फिल्म की कमाई में धीरे-धीरे बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। घरेलू बॉक्स ऑफिस के अलावा फिल्म को विदेशों में भी दर्शक मिल रहे हैं। तीन दिनों में वैश्विक स्तर पर फिल्म का कलेक्शन लगभग 25.1 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। गौरतलब है कि, ‘मर्दानी’ फ्रेंचाइजी की शुरुआत 2014 में हुई थी, जबकि ‘मर्दानी-2’ 2019 में रिलीज हुई थी। दोनों फिल्मों को दर्शकों और समीक्षकों से सराहना मिली थी। अब ‘मर्दानी-3’ भी उसी विरासत को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही है और आने वाले दिनों में इसके प्रदर्शन पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।  

किसान समृद्ध होंगे तो प्रदेश होगा मजबूत : सीएम डॉ. यादव का बड़ा बयान

कृषि वर्ष आयोजन के लिए सरकार ने तय की रूपरेखा भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि किसानों की आय में हर तरीके से वृद्धि करना ही हमारा मूल लक्ष्य है और यह उनकी फसल का उत्पादन एवं उत्पादकता बढ़ाने से ही संभव है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश के एक करोड़ से अधिक किसानों के हित में ‘समृद्ध किसान-समृद्ध प्रदेश’ के समावेशी मॉडल/थीम पर हम वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष (कृषि वर्ष) के रूप में मना रहे हैं। इस दौरान कृषि उत्पादों का मजबूत विपणन तंत्र स्थापित किया जाएगा, साथ ही खाद्य प्रसंस्करण को भी बढ़ावा दिया जाएगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों को उच्च उत्पादकता वाली फसल किस्मों/बीजों का वितरण, डिजिटलीकृत एवं नवीन कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा, प्राकृतिक एवं जैविक खेती को प्रोत्साहन, कृषि स्टार्टअप एवं एफपीओ जैसी कृषि आधारित रोजगार श्रृंखला को बढ़ावा, कृषि से संबद्ध सभी क्षेत्रों को एकीकृत करते हुए जिला-आधारित क्लस्टर्स का विकास तथा खेती-किसानी में फसल चक्र में बदलाव (विविधीकरण) को प्रोत्साहन देना कृषि वर्ष के प्रमुख लक्ष्य तय किए गए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गत दिवस किसान कल्याण वर्ष-2026 के आयोजन की रूपरेखा के संबंध में हुई बैठक में यह जानकारी दी। कृषि केबिनेट की जाएगी मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों का कल्याण हमारे लिए एक मिशन है। इनके समग्रहित में इसके लिए कृषि वर्ष के दौरान प्रदेश के अलग-अलग जिलों में कृषि केबिनेट भी की जाएगी। कृषि केबिनेट की शुरूआत निमाड़ अंचल से की जाएगी। किसान हित के सभी जरूरी निर्णय फील्ड में होने वाली कृषि केबिनेट में ही लिए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि खेती-किसानी से पर्यावरण में भी व्यापक सुधार आता है। उन्होंने कहा कि निमाड़ क्षेत्र में खेती-किसानी से बढ़ते लाभ और दिनों-दिन सिंचाई सुविधाओं के विस्तार से दूसरे किसान भी खेती की तरफ बढ़े हैं। इससे निमाड़ अंचल में चारों तरफ हरियाली ही हरियाली है और इस हरियाली का सबसे बड़ा लाभ यह हुआ है कि पूरे निमाड़ अंचल का तापमान पहले से चार डिग्री कम हो गया है। यह उपलब्धि हमें किसानों की बेहतरी के लिए और अधिक प्रयास करने के लिए प्रोत्साहित करती है। कृषि में तकनीक के उपयोग पर रहेगा जोर मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषि वर्ष के दौरान प्रदेश के किसानों के लिए कृषि तकनीक के उपयोग पर विशेष फोकस किया जाएगा। यह तय किया जाएगा कि किसानों को उनके सभी प्रकार के हितलाभ एग्री स्टैक के जरिए ही दिए जाएं। इसके लिए किसानों के बैंक खातों को समग्र आई.डी. के साथ जोड़ दिया जाएगा। साथ ही मोबाईल एवं क्यू.आर कोड आधारित तकनीक के उपयोग से कृषि आदानों की उपलब्धता (ट्रेसबिलिटी) भी सुनिश्चित की जाएगी। उन्नत पशुपालन तकनीक सीखने के लिए ब्राजील जाएंगे मप्र के पशुपालक कृषि वर्ष के दौरान सरकार का एक लक्ष्य दुग्ध उत्पादन में वृद्धि कर इसे वर्तमान से दुगना करना भी है। इसके लिए प्रदेश के पशुपालकों को उन्नत पशुपालन की नई-नई तकनीकें सीखने के लिए ब्राजील भेजा जाएगा। राज्य के पशुपालक उन्नत तकनीक से पशुपालन करेंगे तथा नई विधियों और पद्धतियों से उन्नत नस्लों के पशुओं से दुग्ध उत्पादन के लिए तैयार करेंगे। नई तकनीक से पशुपालकों के दुग्ध उत्पादन और आय दोनों में वृद्धि होगी। पैक्स समितियों के जरिए किसानों को दिलाएंगे अधिकतम सुविधाएं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कृषि वर्ष के दौरान किसानों को अधिकतम सेवाएं और सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। वर्ष के दौरान राजस्व विभाग द्वारा ऐसे किसान, जो किसी वजह से अबतक केसीसी धारक नहीं हैं, उनकी सूची निकटतम प्राथमिक सहकारी साख समितियों (पैक्स) को उपलब्ध कराई जाएगी। पैक्स समितियां किसानों से सम्पर्क कर पात्र किसानों से तय प्रारूप में आवेदन लेंगी और बैंक स्तर पर केसीसी मंजूर कराने की कार्यवाही भी करेंगी। मंजूरी वाले प्रकरणों को एकत्रित कर कैम्प लगाकर किसानों को केसीसी वितरित किए जाएंगे। उल्लेखनीय है कि वर्तमान में प्रदेश में 4500 से अधिक पैक्स समितियां कार्यरत हैं और करीब 23 लाख से अधिक किसान इन पैक्स समितियों से सीधे तौर पर जुड़े हुए हैं। भोपाल में होगा ‘आम महोत्सव’ किसान कल्याण वर्ष आयोजन की रूपरेखा को अंतिम रूप देने के संबंध में हुई इस बैठक में बताया गया कि आगामी मई माह में भोपाल में आम महोत्सव आयोजित किया जाएगा। महोत्सव में आम उत्पादकों, व्यापारियों, निर्यातकों और विशेषज्ञों की सहभागिता होगी। महोत्सव के दौरान आम की खेती से संबंधित नई तकनीक पर मार्गदर्शन और प्रेजेन्टेशन दिया जाएगा। साथ ही आम की सभी किस्मों का प्रदर्शन भी किया जाएगा। राज्यस्तरीय केन्द्रीय गुणवत्ता प्रयोगशाला का होगा लोकार्पण मध्यप्रदेश सहकारी दुग्ध महासंघ (एमपीसीडीएफ) द्वारा भोपाल में तैयार की जा रही राज्यस्तरीय केन्द्रीय गुणवत्ता प्रयोगशाला का लोकार्पण भी कृषि वर्ष के दौरान किया जाएगा। लगभग 12.65 करोड़ रूपए की लागत से निर्मित हो रही इस बड़ी प्रयोगशाला की सुविधा मिल जाने से पेस्टीसाइड, रसायन, भारी खनिज, वेजीटेबल आइल, शर्करा तथा दुग्ध उत्पादों और दूध में मिलावट की गहन जांच अब स्थानीय स्तर पर ही संभव होगी। इससे दीर्घ अवधि में मिलावटी दूध एवं दूध से बने उत्पादों पर अंकुश लगेगा। गुणवत्तापूर्ण उत्पादन मिलने से उपभोक्ताओं में सांची ब्रांड से बने उत्पादों की साख भी बढ़ेगी। सितम्बर में बालाघाट में होगा ‘सिंघाड़ा एवं मखाना महोत्सव’ किसान कल्याण वर्ष में सितम्बर के संभवत: पहले सप्ताह में बालाघाट जिले में ‘सिंघाड़ा एवं मखाना महोत्सव’ आयोजित किया जाएगा। महोत्सव में सिंघाड़ा उत्पादकों, व्यापारियों, निर्यातकों एवं फसल विशेषज्ञों द्वारा सहभागिता की जाएगी। सिंघाड़ा और मखाना कैश क्राप की तरह हैं। इनका सेवन स्वाथ्यवर्धक होता है। यह महिलाओं के लिए विशेष रूप से लाभकारी है।

‘हस्तक्षेप की गुंजाइश नहीं’—CJI ने जाति गणना पर रोक लगाने से किया इनकार

नई दिल्ली  देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने सोमवार को 2027 में होने वाली जनगणना से जुड़ी उस जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई से इनकार कर दिया, जिसमें नागरिकों की जाति संबंधी आंकड़ों को दर्ज करने, वर्गीकृत करने और सत्यापित करने के लिए अपनाई जाने वाली प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए थे। हालांकि, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची की बेंच ने यह माना कि याचिकाकर्ता ने एक जरूरी मुद्दा उठाया है, लेकिन मामले पर न्यायिक रूप से विचार करने से इनकार कर दिया और कहा कि इसे जनगणना अधिनियम 1958 के आलोक में अधिकारियों द्वारा ही देखा जाना चाहिए। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने केंद्र और भारत के महापंजीयक एवं जनगणना आयुक्त के कार्यालय को निर्देश दिया कि जनहित याचिका दायर करने वाले शिक्षाविद् आकाश गोयल द्वारा इस मुद्दे पर दिए गए सुझावों पर विचार करें। गोयल का प्रतिनिधित्व वरिष्ठ अधिवक्ता मुक्ता गुप्ता ने किया। गुप्ता ने कहा कि नागरिकों के जाति संबंधी विवरण को दर्ज करने, वर्गीकृत करने और सत्यापित करने के लिए उपयोग किए जाने वाले एक पारदर्शी प्रश्नपत्र को सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराया जाना चाहिए। याचिकाकर्ता ने कहा कि जाति संबंधी आंकड़ों की पहचान के लिए ‘पहले से तय कोई आंकड़ा’ नहीं है। इस पर पीठ ने कहा, ”जनगणना की प्रक्रिया जनगणना अधिनियम, 1958 और उसके तहत बनाए गए 1990 के नियमों के अनुसार संचालित होती है जो प्रतिवादी प्राधिकारियों को जनगणना करने के विवरण और तौर-तरीके तय करने का अधिकार देते हैं।” बार एंड बेंच के मुताबिक, CJI सूर्यकांत ने कहा, ”हमारे पास इस बात पर संदेह या शक करने का कोई वैध कारण नहीं है।” उन्होंने कहा, “याचिकाकर्ता और ऐसे ही विचार रखने वाले कई अन्य लोगों द्वारा जताई गई आशंका के मद्देनजर, प्रतिवादी प्राधिकारी किसी भी प्रकार की गलती से बचने के लिए क्षेत्र के विशेषज्ञों की सहायता एवं सहयोग से एक मजबूत व्यवस्था विकसित कर चुके होंगे। हमें लगता है कि याचिकाकर्ता ने महापंजीयक को दिए गए प्रतिवेदन के जरिए कुछ प्रासंगिक मुद्दे भी उठाए हैं…।” यह जनहित याचिका आकाश गोयल ने दायर की थी, जिसमें आगामी जनगणना 2027 में प्रस्तावित जाति गणना पर चिंता जताई गई थी। याचिकाकर्ता ने कहा था कि जाति गणना के दौरान स्व घोषणा के आधार पर जाति के आंकड़े दर्ज नहीं किए जाने चाहिए। याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि जाति डेटा प्रकृति में लंबे समय तक चलने वाला होगा और बिना सत्यापन के इसका संग्रह खतरनाक हो सकता है। इस पर पीठ ने कहा कि प्राधिकारी कानूनी नोटिस एवं याचिका में उठाए गए सुझावों पर विचार कर सकते हैं और इसी के साथ उसने जनहित याचिका का निपटारा कर दिया। वर्ष 2027 की जनगणना आधिकारिक तौर पर 16वीं राष्ट्रीय जनगणना है। यह 1931 के बाद पहली बार व्यापक जातिगत गणना को शामिल करने वाली और देश की पहली पूरी तरह डिजिटल जनगणना होगी।

रिकॉर्ड मशीन बने जोस बटलर, इंग्लैंड के लिए रच दिया नया क्रिकेट इतिहास

नई दिल्ली इंग्लैंड के धाकड़ बल्लेबाज जोस बटलर ने इतिहास रच दिया है। श्रीलंका के खिलाफ दूसरे टी20 मैच के दौरान उन्होंने ऐसी उपलब्धि हासिल की जो उनसे पहले किसी अंग्रेज क्रिकेटर ने नहीं हासिल की थी। ये उनका 402वां अंतरराष्ट्रीय मैच था और अब वह इंग्लैंड के लिए सबसे ज्यादा अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने वाले क्रिकेटर बन गए हैं। वह टी20 इंटरनेशनल में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले दुनिया के चौथे बल्लेबाज हैं। इंग्लैंड के लिए सबसे ज्यादा अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने वाले खिलाड़ी इससे पहले इंग्लैंड के लिए सबसे ज्यादा अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने का रिकॉर्ड महान तेज गेंदबाज जेम्स एंडरसन के नाम था। उन्होंने 401 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले थे और अब बटलर ने इस मामले में उन्हें पछाड़ दिया है। 35 साल के जोस बटलर के अब तक के करियर की बात करें तो उन्होंने 57 टेस्ट मैच खेले हैं। इसके अलावा उन्होंने इंग्लैंड के लिए 199 ओडीआई और 146 टी20 इंटरनेशनल मैच खेल चुके हैं। बटलर के नाम अब तक टेस्ट में 2907 रन, ओडीआई में 5515 रन और टी20 इंटरनेशनल में 3925 रन बनाए हैं। उन्होंने सितंबर 2022 के बाद से कोई टेस्ट नहीं खेला है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अब उनके नाम 402 मैचों में 12308 रन दर्ज हैं। टी20 इंटरनेशनल में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले चौथे बल्लेबाज जोस बटलर ने श्रीलंका के खिलाफ दूसरे टी20 मैच में 29 गेंदों में 39 रन ठोके और टीम की जीत में अहम भूमिका निभाई। अब इंग्लैंड ने 3 मैच की सीरीज में 2-0 की अजेय बढ़त बना ली है। इसके साथ ही जोस बटलर टी20 इंटरनेशनल में 4 हजार रन बनाने के नजदीक पहुंच गए हैं। वह T20I में इंग्लैंड के लिए सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज हैं और इस मामले में दुनिया में उनका चौथा स्थान है। बटलर से ज्यादा टी20 इंटरनेशनल रन सिर्फ बाबर आजम, रोहित शर्मा और विराट कोहली के नाम हैं। रोहित और कोहली टी20 इंटरनेशनल से संन्यास ले चुके हैं, इसलिए जल्द ही बटलर इस फॉर्मेट में रन बनाने के मामले में इन दोनों खिलाड़ियों को पीछे छोड़ सकते हैं। टी20 इंटरनेशनल में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले टॉप 5 बल्लेबाज 1- बाबर आजम- 4505 रन (139 मैच) 2- रोहित शर्मा- 4231 रन (159 मैच) 3- विराट कोहली- 4188 रन (125 मैच) 4- जोस बटलर- 3925 रन (146 मैच) 5- पॉल स्टर्लिंग (आयरलैंड)- 3888 रन, (161 मैच)

खूबसूरत त्वचा का दुश्मन! ये 3 फूड्स अंदर से कर रहे हैं स्किन डैमेज, तीसरा सबसे खतरनाक

अगर आप सोचते हैं कि सिर्फ महंगी क्रीम और सीरम आपकी स्किन को हेल्दी बनाए रखेंगे, तो आप सिर्फ एक पहलू पर ध्यान दे रहे हैं। दरअसल, हमारी स्किन की हेल्थ इस बात पर ज्यादा निर्भर करती है कि हमारा खान-पान सही है या नहीं। सही खान-पान आपकी त्वचा को चमकदार और स्वस्थ बना सकता है, लेकिन गलत डाइट इसे गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। इनसे परहेज करना आपकी स्किन को हेल्दी और जवां बनाए रखने के लिए जरूरी है। आइए जानें इनके बारे में। फ्रुक्टोज कॉर्न सिरप यह एक आर्टिफिशियल स्वीटनर है, जो अक्सर सोडा, पैकेट वाले जूस, बिस्कुट और प्रोसेस्ड जंक फूड में पाया जाता है। डॉक्टर के अनुसार, यह चीनी की तुलना में 10 गुना ज्यादा खतरनाक है और आपकी त्वचा के प्रोटीन को तेजी से नुकसान पहुंचाता है। यह शरीर में AGE (Advanced Glycation End products) बनाता है, जो सीधे आपकी त्वचा के कोलेजन को खत्म कर देते हैं। नतीजा यह होता है कि त्वचा सख्त हो जाती है, झुर्रियां तेजी से बनने लगती हैं और यह आपके लिवर को भी नुकसान पहुंचाता है। अगर आप पैकेट बंद प्रोसेस्ड फूड ज्यादा खाते हैं, तो आप प्रीमैच्योर एजिंग को बुलावा दे रहे हैं। बार-बार गर्म किया गया रिफाइंड तेल अक्सर हम बाहर के समोसे या डीप-फ्राइड स्नैक्स का आनंद लेते हैं, लेकिन समस्या यह है कि दुकानदार एक ही तेल को बार-बार गर्म करते हैं। बार-बार गर्म करने से तेल की संरचना बदल जाती है। डॉ. रेड्डी बताती हैं कि हर बार तेल गर्म होने पर उसमें मौजूद सुरक्षात्मक विटामिन-ई डैमेज हो जाता है। इस ऑक्सीडाइज्ड फैट से शरीर और त्वचा में अंदरूनी सूजन पैदा होती है। क्रिस्पी और ज्यादा तले हुए फूड्स फ्रेंच फ्राइज, पकौड़े और चिप्स का सुनहरा भूरा रंग और कुरकुरा टेक्सचर हमें बहुत लुभाता है। लेकिन यही कुरकुरापन सेहत के लिए खतरनाक है। डॉक्टर के अनुसार, जब खाने को बहुत अधिक तापमान पर कुरकुरा किया जाता है, तो उसमें एक्रिलामाइड बनता है। खाना जितना गहरा और क्रिस्पी होगा, उसमें AGEs की मात्रा उतनी ही ज्यादा होगी। ये तत्व सीधे आपकी त्वचा की संरचना को नुकसान पहुंचाते हैं और कोलेजन को तेजी से डैमेज करते हैं, जिससे त्वचा अपनी फ्लेक्सिबिलिटी खो देती है।  

यात्रियों के लिए बड़ा अपडेट: अब लिमिट पार करते ही भरना पड़ेगा कस्टम ड्यूटी

नई दिल्ली बीते एक फरवरी को आम बजट में कई ऐसे ऐलान हुए हैं। बजट-डे पर एक अहम ऐलान लगेज यानी सामान को लेकर हुआ है। केंद्र सरकार ने भारत में ‘ड्यूटी फ्री’ आयातित सामान लाने की लिमिट बदल दी है। ड्यूटी फ्री लगेज की लिमिट पहले के मुकाबले बढ़ाई गई है। पहले यह 50,000 रुपये था जिसे अब बढ़ाकर 75,000 रुपये कर दिया गया है। इसका मतलब है कि अब 75 हजार रुपये से ज्यादा के सामान पर ड्यूटी चार्ज लगेगा। बता दें कि सरकार ने सामान नियम, 2026 को नोटिफाई किया है। इसके तहत भारत में भूमि मार्ग के अलावा किसी भी अन्य मार्ग से आने वाले भारतीय नागरिकों या भारतीय मूल के पर्यटकों को 75,000 रुपये तक का ड्यूटी फ्री सामान लाने की अनुमति होगी। कितने आभूषण लाने की होगी छूट नये नियम दो फरवरी की मध्यरात्रि से प्रभावी हो जाएंगे और एक दशक पुराने सामान संबंधी नियम की जगह लेंगे। नये नियमों के तहत भारत आने वाले विदेशी पर्यटकों (शिशु को छोड़कर) को 25,000 रुपये तक के मूल्य का ‘ड्यूटी फ्री’ सामान लाने की इजाजत होगी। पहले यह सीमा नियम के तहत 15,000 रुपये थी। इसके अलावा, जो भारतीय नागरिक या भारतीय मूल के लोग एक साल से अधिक समय से विदेश में रह रहे हैं, उनके लिए गहनों (ज्वेलरी) को लेकर अलग नियम बनाए गए हैं। 40 ग्राम तक की ज्वैलरी बिना ड्यूटी लाने की इजाजत भारत लौटने पर महिला यात्री 40 ग्राम तक की ज्वैलरी बिना ड्यूटी ला सकती हैं। वहीं, पुरुष यात्री (या महिला के अलावा अन्य) 20 ग्राम तक की ज्वैलरी बिना ड्यूटी ला सकते हैं। यह ज्वैलरी यात्री के वैध सामान का हिस्सा होनी चाहिए। ज्वैलरी में सोना, चांदी, प्लेटिनम या अन्य कीमती धातुओं से बने आभूषण शामिल हैं, चाहे उनमें रत्न जड़े हों या नहीं। सरकार का कहना है कि बैगेज नियम, 2026 आज के समय में बढ़ती यात्रा और लोगों की बदलती जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाए गए हैं।  

प्रदेश के सभी जनपदों में चरणबद्ध रूप से विकसित होंगे एम्प्लॉयमेंट एंड इंडस्ट्रियल जोन

लखनऊ. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में औद्योगिक विकास को रोजगार से सीधे जोड़ने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश दिवस के अवसर पर घोषित ‘सरदार वल्लभभाई पटेल एम्प्लॉयमेंट एंड इंडस्ट्रियल जोन’ के लिए सभी जनपदों में उपयुक्त भूमि शीघ्र चिन्हित करने के निर्देश दिए हैं। सोमवार को इस संबंध में हुई महत्वपूर्ण बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश की औद्योगिक नीति का लक्ष्य ऐसा सक्षम वातावरण तैयार करना है, जहां युवाओं को कौशल विकास, रोजगार और उद्यमिता के अवसर एक ही परिसर में सुलभ हों। उन्होंने निर्देश दिए कि इस महत्वाकांक्षी योजना को स्थानीय आवश्यकताओं और क्षेत्रीय संभावनाओं के अनुरूप प्रभावी ढंग से लागू किया जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह जोन उद्योग, कौशल विकास, रोजगार, स्वरोजगार तथा उद्योग-सहायता से जुड़े विभागों और सुविधाओं को एकीकृत रूप से उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने एमएसएमई, सेवा आधारित उद्योगों और नवाचार से जुड़े क्षेत्रों को प्रोत्साहित करने के लिए प्लग-एंड-प्ले यूनिट और फ्लैटेड फैक्ट्री जैसी आधुनिक सुविधाओं के विकास पर विशेष जोर दिया, जिससे उद्यमियों को प्रारंभ से ही आवश्यक अवसंरचना उपलब्ध हो सके। बैठक में अवगत कराया गया कि इस योजना के अंतर्गत कॉमन फैसिलिटी सेंटर, टेस्टिंग फैसिलिटी, डिस्प्ले एवं डिजाइन सेंटर, टूल रूम, ईटीपी/सीईटीपी, प्लग-एंड-प्ले यूनिट तथा फ्लैटेड फैक्ट्री की सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इसके साथ ही युवाओं के कौशल उन्नयन हेतु उद्यमिता प्रशिक्षण, मेंटरिंग, विभिन्न ऋण योजनाओं की जानकारी तथा हैंडहोल्डिंग की व्यवस्था भी इसी परिसर से की जाएगी। बैठक में यह भी बताया गया कि योजना को चरणबद्ध रूप से प्रदेश के सभी जनपदों में लागू किए जाने का प्रस्ताव है। प्रत्येक जनपद में न्यूनतम 50 एकड़ क्षेत्रफल में एम्प्लॉयमेंट एंड इंडस्ट्रियल जोन विकसित किए जाएंगे। प्रस्तावित जोन के अंतर्गत औद्योगिक क्षेत्र, फ्लैटेड फैक्ट्री, वाणिज्यिक क्षेत्र, सड़क, कॉमन फैसिलिटी, सर्विस सेक्टर, ग्रीन एरिया और कार्यालय स्पेस का संतुलित लेआउट तैयार किया गया है। इसके साथ ही ‘सरदार वल्लभभाई पटेल एम्प्लॉयमेंट एंड स्किल डेवलपमेंट सेंटर’ की स्थापना भी प्रस्तावित है, जिसमें प्रशिक्षण हॉल, कॉन्फ्रेंस रूम, एक्सटेंशन काउंटर और उद्योग-सहायता से जुड़ी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि ऑपरेशनल मॉडल के अंतर्गत स्वरोजगार एवं उद्यमिता प्रशिक्षण, कौशल विकास, इंटर्नशिप, अप्रेंटिसशिप तथा संबंधित उद्योगों में वेतन आधारित रोजगार की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि ‘सरदार वल्लभभाई पटेल एम्प्लॉयमेंट एंड इंडस्ट्रियल जोन’ प्रदेश के युवाओं के लिए रोजगार, कौशल और उद्यमिता का एक सशक्त केंद्र बनेगा। उन्होंने निर्देश दिए कि संभावित स्थलों की शीघ्र पहचान कर परियोजना के क्रियान्वयन को गति दी जाए, ताकि यह पहल प्रदेश में औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन का एक प्रभावी मॉडल बन सके।

कोलेस्ट्रॉल कम करने का घरेलू नुस्खा या सिर्फ मिथक? सुबह लहसुन खाने की हकीकत

नसों में जमा हो रहा ‘बैड कोलेस्ट्रॉल’ आपके दिल के लिए एक खतरे की घंटी है। अगर बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल समय रहते काबू में न आए, तो यह हार्ट अटैक जैसी जानलेवा स्थिति भी पैदा कर सकता है। खासतौर से, जिन लोगों का कोलेस्ट्रॉल हाई है, उन्हें अपनी सेहत को लेकर बेहद सतर्क रहने की जरूरत होती है। हालांकि, अच्छी बात यह है कि केवल दवाइयां ही नहीं, बल्कि कुदरत के पास भी इसका इलाज मौजूद है। रिसर्च के मुताबिक, आपकी रसोई में मौजूद लहसुन इस खतरे को कम करने की ताकत रखता है। आइए जानते हैं कैसे। लहसुन में छिपा है सेहत का राज लहसुन में ‘एलिसिन’ नाम का एक बायोएक्टिव कंपाउंड पाया जाता है, जिसे कोलेस्ट्रॉल कम करने के लिए जिम्मेदार माना जाता है। केवल खराब कोलेस्ट्रॉल (Bad Cholesterol) को घटाने के अलावा, लहसुन के कई अन्य फायदे भी हैं, जैसे:     ब्लड प्रेशर को कम करना     रोग प्रतिरोधक क्षमता में सुधार     शरीर को भरपूर एंटीऑक्सीडेंट्स देना कैसे कोलेस्ट्रॉल को कम करता है लहसुन? ऐसा माना जाता है कि सुबह के समय लहसुन की एक कली छीलकर चबाने से 15 से 20 दिनों के भीतर हाई कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद मिल सकती है। इस बारे में इजराइल के ‘इंस्टिट्यूट ऑफ लिपिड एंड एथेरोस्क्लेरोसिस रिसर्च’ ने एक राय भी दी है। स्टडी में बताया गया है कि लहसुन में मौजूद ‘एलिसिन’ लिवर की कोशिकाओं पर मौजूद रिसेप्टर्स के साथ जुड़कर खराब कोलेस्ट्रॉल के उत्पादन को रोक देता है। यह प्रक्रिया सेलुलर स्तर पर होती है। हालांकि, अच्छी बात यह है कि इसका गुड कोलेस्ट्रॉल के स्तर पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। क्या है इसे खाने का सही तरीका? अध्ययन बताते हैं कि दिन में एक से दो कलियां कच्चा लहसुन खाना सुरक्षित होता है। आप इसे भोजन के साथ या उसके बिना भी खा सकते हैं। हालांकि, लहसुन के सेवन को लेकर कोई सख्त गाइडलाइंस नहीं हैं, लेकिन सप्लीमेंट्स लेने वालों को सावधान रहना चाहिए, क्योंकि ज्यादा मात्रा में सेवन करने से कुछ साइड इफेक्ट्स भी हो सकते हैं। जैसे- गैस और बदहजमी, सीने में जलन, डायरिया और मुंह से बदबू आना इत्यादि। सावधानी है जरूरी लहसुन में खून को पतला करने वाले गुण होते हैं। इसलिए, यह उन लोगों के लिए बिल्कुल भी सही नहीं है जो किसी प्रकार के ब्लीडिंग डिसऑर्डर से जूझ रहे हैं। इसके अलावा, लहसुन कुछ दवाओं के असर को भी कम कर सकता है। इसलिए, डाइट में कुछ भी बदलाव करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना बेहद जरूरी है।  

संसद में नया विवाद: नियम 349 क्या, और क्यों राहुल गांधी घिरे आरोपों में?

नई दिल्ली राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान सोमवार (2 फरवरी) को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोद मुकुंद नरवणे के एक संस्मरण के मसौदे के कुछ अंश का जिक्र किया तो सदन में हंगामा मच गया। सत्ता पक्ष ने इसका जमकर विरोध किया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह ने भी नरवणे के संस्मरण का उल्लेख करने का विरोध किया। इसके बाद सदन में सत्तापक्ष और कांग्रेस के सदस्यों के बीच तीखी नोकझोंक एवं हंगामा देखने को मिला। सदन में गतिरोध बने रहने पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने अपराह्न दो बजकर नौ मिनट पर सभा की बैठक अपराह्न तीन बजे तक के लिए स्थगित कर दी। दोबारा जब कार्यवाही शुरू हुई तो राहुल गांधी ने फिर से जनरल नरवणे की बात कहनी शुरू कर दी। इसके बाद फिर सदन में हंगामा हुआ। इसे देखते हुए स्पीकर बिरला ने सदन की कार्यवाही शाम 4 बजे तक स्थगित कर दी। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने लोकसभा के नियम संख्या 349 का हवाला देते हुए कांग्रेस नेता से कई बार यह अपील की कि वह पुस्तक या किसी पत्रिका को सदन में उद्धृत नहीं कर सकते, हालांकि राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख का हवाला देते हुए चीन के साथ भारत के सैन्य तनाव का विषय उठाने का प्रयास किया और दावा किया कि पूर्व सेना प्रमुख ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के चरित्र के बारे में भी बताया है। इस दौरान राजनाथ सिंह ने राहुल गांधी पर सदन को गुमराह करने का प्रयास करने का आरोप लगाया। लोकसभा में गतिरोध के समय प्रधानमंत्री मोदी भी मौजूद थे। अब सवाल उठता है कि नियम 349 क्या है, जो राहुल गांधी को जनरल नरवणे का संस्मरण पढ़ने से रोक रहा है। क्या है लोकसभा का नियम 349? लोकसभा की नियम पुस्तिका (Rulebook) का नियम 349 सदन के भीतर सदस्यों के आचरण और मर्यादा से संबंधित है। यह नियम उन शिष्टाचारों को निर्धारित करता है जिनका पालन प्रत्येक सांसद को सदन की कार्यवाही के दौरान करना अनिवार्य होता है। यह नियम कहता है कि सदस्य सदन में नारे नहीं लगा सकते और न ही किसी तरह का प्रदर्शन कर सकते हैं। इस नियम की उपधारा एक में कहा गया है कि कोई भी सदस्य किसी अखबार की क्लिपिंग या मैगजीन में प्रकाशित अंश, कोई पुस्तक के अंश सदन में नहीं पढ़ सकते। इसके अलावा सदन के भीतर झंडे, प्रतीक चिन्ह, पोस्टर, तख्तियां या धार्मिक चित्र दिखाना वर्जित है। स्पीकर का निर्देश मानना बाध्यकारी लोकसभा का नियम 349 यह भी कहता है कि सदस्य सदन में जोर-जोर से बात नहीं कर सकते, हंस नहीं सकते और न ही ऐसी कोई हरकत कर सकते हैं जिससे कार्यवाही में बाधा आए। इसके अलावा जब कोई अन्य सदस्य बोल रहा हो, तो उसे टोकना या उसके भाषण के बीच में बाधा डालना नियम का उल्लंघन माना जाता है। नियम कहता है कि सदस्यों को लोकसभा अध्यक्ष (स्पीकर) की बातों और निर्देशों का पालन करना होता है और उनकी अनुमति के बिना कोई भी मुद्दा नहीं उठा सकता। तेजस्वी सूर्या के बयान पर पलटवार बता दें कि राहुल गांधी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर लाए गए धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा में भाग लेते हुए अपने भाषण की शुरुआत में ही भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या के वक्तव्य का उल्लेख करते हुए पलटवार करने का प्रयास किया। उनका कहना था कि सूर्या ने कांग्रेस की देशभक्ति और चरित्र पर सवाल खड़े किए हैं, इसलिए वह एक पूर्व सेना प्रमुख के उस संस्मरण के अंश को पढ़ना चाहते हैं जो एक पत्रिका में प्रकाशित हुआ है। उन्होंने जैसे ही इसे पढ़ने का प्रयास किया तो राजनाथ सिंह ने सवाल उठाया कि नेता प्रतिपक्ष को बताना चाहिए कि वह जिस पुस्तक का उल्लेख कर रहे हैं, वो प्रकाशित हुई है या नहीं। पहले तीन, फिर 4 बजे तक सदन की कार्यवाही स्थगित गृह मंत्री अमित शाह ने भी कहा कि सदन में पुस्तक और पत्रिका में प्रकाशित बातों को नहीं रखा जा सकता और नेता प्रतिपक्ष को व्यवस्था का पालन करना चाहिए। बिरला ने राहुल गांधी से कई बार कहा कि वह राष्ट्रपति के अभिभाषण पर अपनी बात रखें। जब राहुल गांधी इस संस्मरण के कुछ अंश सदन के पटल पर रखने पर अड़े रहे तो बिरला ने कहा, ”आप लगातार आसन की वमानना कर रहे हैं…।” राहुल गांधी ने कहा कि वह आसन को चुनौती नहीं दे रहे हैं, बल्कि चीन के साथ भारत के रिश्ते के बारे में बात रखना चाहते हैं। सदन में लगातार गतिरोध बने रहने पर बिरला ने लोकसभा की बैठक पहले तीन बजे तक फिर 4 बजे तक स्थगित कर दी।  

‘सक्षम’ महोत्सव का आगाज़, राज्य मंत्री गौर रहे उपस्थित

भोपाल.  पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार)कृष्णा गौर ने सोमवार को ऑयल इंडस्ट्रीज द्वारा आयोजित संरक्षण क्षमता महोत्सव (सक्षम 2026) का शुभारंभ किया। उन्होंने आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि ईंधन संरक्षण को लेकर जन-जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से तेल कंपनियों द्वारा संयुक्त रूप से चलाया जा रहा सक्षम पखवाड़ा एक सराहनीय पहल है। उन्होंने कहा कि ईंधन का संरक्षण आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित रखने के लिए बेहद जरूरी है। राज्यमंत्री  गौर ने बताया कि तेल कंपनियों का यह सामूहिक प्रयास न केवल अपने निर्धारित लक्ष्यों तक पहुंचेगा, बल्कि इसके सकारात्मक परिणाम भी समाज में स्पष्ट रूप से दिखाई देंगे। कार्यक्रम में बढ़-चढ़कर बच्चे भी सहभागिता कर रहे हैं, इसका उल्लेख करते हुए उन्होंने खुशी जताई और कहा कि नई पीढ़ी में जागरूकता ही वास्तविक बदलाव की नींव है। इस अवसर पर उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे ईंधन की बचत को अपनी दैनिक जीवनशैली का हिस्सा बनाएं, ताकि पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ संसाधनों का संतुलित उपयोग सुनिश्चित हो सके। कार्यक्रम में ऊर्जा संरक्षण से जुड़े विभिन्न उपायों और जागरूकता गतिविधियों पर भी प्रकाश डाला गया। अधिकारियों ने बताया कि इस तरह के अभियान लोगों को जिम्मेदार उपभोक्ता बनने के लिए प्रेरित करते हैं। कार्यक्रम में इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड मध्य प्रदेश के मुख्य महाप्रबंधक एवं राज्य प्रमुख श्री अजय कुमार श्रीवास्तव, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड सेंट्रल जोन के जोनल हेड श्री अश्विन योगेश सिन्हा, गेल इंडिया लिमिटेड से श्री रंजन कुमार, भारत पैट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड मध्य प्रदेश एवं छत्तीसगढ़ के राज्य प्रमुख श्री नीरज उपस्थित रहे।

अरिजीत सिंह के सुरों से सजा ‘इश्क का फीवर’, ‘ओ रोमियो’ का नया गाना रिलीज

मुंबई, बॉलीवुड अभिनेता शाहिद कपूर एक बार फिर बड़े पर्दे पर अपने तीखे और रोमांटिक अंदाज के साथ लौटने के लिए तैयार हैं। उनकी आगामी फिल्म ‘ओ रोमियो’ 13 फरवरी को वैलेंटाइन वीक के खास मौके पर सिनेमाघरों में रिलीज होने जा रही है। फिल्म का निर्देशन मशहूर फिल्ममेकर विशाल भारद्वाज ने किया है और इसे साजिद नाडियाडवाला प्रोड्यूस कर रहे हैं। इस फिल्म में पहली बार शाहिद कपूर की जोड़ी अभिनेत्री तृप्ति डिमरी के साथ बनी है। फिल्म का नया गाना ‘इश्क का फीवर’ अब रिलीज कर दिया गया है, जिसमें शाहिद का स्टाइलिश और दीवाना-ए-इश्क अंदाज़ देखने को मिल रहा है। यह गाना टी-सीरीज़ के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर जारी हुआ है और रिलीज होते ही फैंस के बीच चर्चा में आ गया है। गाने में शाहिद और तृप्ति की फ्रेश केमिस्ट्री स्क्रीन पर खूब जच रही है। रोमांस के साथ हल्की जलन और जुनून का मिश्रण इस गाने को और दिलचस्प बना देता है। मशहूर गायक अरिजीत सिंह ने ‘इश्क का फीवर’ को अपनी आवाज दी है। गाने के बोल दिग्गज गीतकार गुलज़ार ने लिखे हैं, जबकि इसका संगीत विशाल भारद्वाज ने तैयार किया है। मेलोडी और इमोशन का संतुलन इस ट्रैक को खास बनाता है। बताया जा रहा है कि ‘ओ रोमियो’ की कहानी चर्चित किताब ‘माफिया क्वींस ऑफ मुंबई’ से प्रेरित है। फिल्म में रोमांस, ड्रामा और अंडरवर्ल्ड की पृष्ठभूमि का अनोखा मिश्रण देखने को मिलेगा। शाहिद और तृप्ति के अलावा फिल्म में नाना पाटेकर, अविनाश तिवारी, तमन्ना भाटिया, दिशा पटानी, फरीदा जलाल जैसे दमदार कलाकार भी अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे। वहीं, विक्रांत मैसी भी विशेष उपस्थिति दिखेगी।  

विश्व मंच पर चमकेंगे भारत के सितारे: हरमनप्रीत-कौर और स्मृति मंधाना का बीबीसी अवॉर्ड नामांकन

नई दिल्ली भारत की महिला विश्व कप 2025 की ऐतिहासिक जीत में अहम भूमिका निभाने वाली कप्तान हरमनप्रीत कौर और उप-कप्तान स्मृति मंधाना, शतरंज की प्रतिभाशाली खिलाड़ी दिव्या देशमुख ‘2025 बीबीसी इंडियन स्पोर्ट्सवुमन ऑफ द ईयर’ पुरस्कारों के लिए नामांकित हैं।   पिस्टल निशानेबाजी में सनसनी मचाने वाली सुरुचि सिंह और ट्रैक एवं फील्ड एथलीट ज्योति याराजी इस प्रतिष्ठित वार्षिक पुरस्कार के लिए नामांकित अन्य दो खिलाड़ी हैं। अंतरिम वैश्विक निदेशक फियोना क्रैक ने एक विज्ञप्ति में कहा, ”इंडियन स्पोर्ट्सवुमन ऑफ द ईयर’ पुरस्कार पूरे भारत में महिलाओं की खेल प्रतिभाओं के एक वर्ष का प्रतीक है और बीबीसी विश्व सेवा अन्य किसी भी मीडिया प्रदाता की तुलना में इन प्रयासों को प्रदर्शित करने और उनका जश्न मनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।’ उन्होंने कहा, ‘हम इन महिलाओं को भारत और दुनिया भर के दर्शकों के सामने अपनी मेहनत से हासिल की गई उपलब्धियों को प्रदर्शित करने के लिए एक मंच प्रदान करके रोमांचित हैं।’ भारतीय महिला क्रिकेट टीम की कप्तान हरमनप्रीत ने नवंबर 2025 में देश को आईसीसी महिला विश्व कप का पहला खिताब दिलाया था। उन्होंने घरेलू सरजमीं पर खेले गये विश्व कप में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सेमीफाइनल में 339 रनों के विशाल लक्ष्य का पीछा करते हुए 88 गेंदों में 89 रनों की शानदार पारी खेली। हरमनप्रीत की 2017 में इसी प्रतिद्वंदी के खिलाफ एक अन्य विश्व कप सेमीफाइनल में 171 रनों की नाबाद पारी को आज भी महिला क्रिकेट की महानतम पारियों में से एक माना जाता है। इसी टीम की उप कप्तान 29 साल की मंधाना पहले से ही क्रिकेट के सर्वकालिक महान खिलाड़ियों में अपना नाम दर्ज करा चुकी हैं। यह वामहस्त बल्लेबाज एकदिवसीय क्रिकेट में सबसे ज्यादा शतकों के मामले में दूसरे जबकि सबसे अधिक रन बनाने वालों की सूची में तीसरे पायदान पर है। महाराष्ट्र के सांगली शहर की रहने वाली मंधाना अपने पिता और भाई से प्रेरित हैं, दोनों ने ही जिला स्तर पर क्रिकेट खेला है। उन्होंने पिछले साल सितंबर में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 50 गेंदों में शतक बनाया था। यह इस प्रारूप में किसी भारतीय द्वारा बनाया गया सबसे तेज शतक है। उन्होंने इस पारी के दौरान विराट कोहली का रिकॉर्ड तोड़ा था। उन्हें 2018 और 2021 में दो बार आईसीसी की साल की सर्वश्रेष्ठ महिला क्रिकेटर चुना गया है। बीस वर्षीय शतरंज की प्रतिभाशाली खिलाड़ी दिव्या ने पिछले साल जुलाई में फिडे महिला विश्व कप की पहली भारतीय और सबसे कम उम्र की चैंपियन बनकर इतिहास रच दिया। इस उपलब्धि ने उन्हें ग्रैंडमास्टर का दर्जा भी दिलाया। दिव्या ने ऐतिहासिक फाइनल मुकाबले में ग्रैंडमास्टर बनने वाली पहली भारतीय महिला कोनेरू हम्पी को हराया था। नागपुर में जन्मी देशमुख ने पांच साल की उम्र में शतरंज खेलना शुरू किया। दो साल के भीतर ही वह अंडर-7 राष्ट्रीय चैंपियन बन गईं और 2017 में उन्होंने लड़कियों के अंडर-12 वर्ग में विश्व युवा शतरंज चैंपियनशिप का खिताब जीता। दिव्या ने 2022 में ओलंपियाड में भारत की कांस्य पदक विजेता टीम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने इसके दो साल बाद व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीतकर और शीर्ष स्थान हासिल करने वाली टीम का हिस्सा बनकर और भी बड़ी उपलब्धि हासिल की। सुरुचि ने निशानेबाजी में आईएसएसएफ विश्व कप और विश्व चैंपियनशिप सहित अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में लगातार पदक जीतकर शीर्ष खिलाड़ियों में से एक के रूप में अपनी पहचान बनाई। हरियाणा की सुरुचि ने 2024 में राष्ट्रीय निशानेबाजी चैंपियनशिप में सात स्वर्ण पदक जीतकर सुर्खियां बटोरीं। उन्होंने इसके एक साल से भी कम समय में सीनियर स्तर पर अंतरराष्ट्रीय पदार्पण किया और वैश्विक मंच पर अपनी पहचान तेजी से स्थापित की। इस 19 साल की खिलाड़ी ने 2025 में ब्यूनस आयर्स, लीमा और म्यूनिख में आयोजित आईएसएसएफ विश्व कप सीरीज में व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीतकर बड़ी उपलब्धि हासिल की। उन्होंने लीमा में मिश्रित टीम स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता।  

10वीं–12वीं के छात्रों के लिए बड़ी खबर: CBSE बोर्ड परीक्षा एडमिट कार्ड और एग्जाम डेट घोषित

नई दिल्ली केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (cbse) द्वारा कक्षा 10वीं और 12वीं की वार्षिक बोर्ड परीक्षाओं के लिए एडमिट कार्ड 2026 जल्द ही जारी किए जाने की उम्मीद है। सीबीएसई ने प्राइवेट उम्मीदवारों के लिए हॉल टिकट पहले ही अपनी आधिकारिक वेबसाइट cbse.gov.in पर अपलोड कर दिए हैं, जबकि रोगुलर छात्रों के लिए एडमिट कार्ड फरवरी के पहले सप्ताह में जारी किए जा सकते हैं। सीबीएसई बोर्ड की परीक्षाएं 17 फरवरी 2026 से शुरू होने वाली हैं। परीक्षा में बैठने वाले हर छात्र के लिए एडमिट कार्ड सबसे महत्वपूर्ण डॉक्यूमेंट है, क्योंकि इसके बिना परीक्षा केंद्र में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी। परीक्षा का पूरा शेड्यूल बोर्ड द्वारा जारी रिवाइज्ड शेड्यूल के अनुसार: कक्षा 10वीं की परीक्षा 17 फरवरी से शुरू होकर 11 मार्च 2026 तक चलेगी। इस साल से कक्षा 10 के लिए दो बोर्ड परीक्षाओं का विकल्प भी शुरू किया गया है, जिसका दूसरा चरण मई-जून में होगा। कक्षा 12वीं की परीक्षा 17 फरवरी से 10 अप्रैल 2026 तक आयोजित की जाएगी। प्रैक्टिकल परीक्षाएं स्कूलों में 1 जनवरी 2026 से ही शुरू हो चुकी हैं। एडमिट कार्ड कैसे प्राप्त करें? नियमित छात्रों के लिए: रेगुलर छात्रों को अपना एडमिट कार्ड डाउनलोड करने की आवश्यकता नहीं है। उनके संबंधित स्कूल बोर्ड के पोर्टल से एडमिट कार्ड डाउनलोड करेंगे और प्रधानाचार्य के सिग्नेचर व स्कूल की मुहर के बाद छात्रों को वितरित करेंगे। प्राइवेट छात्रों के लिए (डाउनलोड स्टेप्स):     आधिकारिक वेबसाइट cbse.gov.in पर जाएं। 2. होमपेज पर “Admit Card for Candidates 2026” लिंक पर क्लिक करें। 3. अपना एप्लीकेशन नंबर, पिछला रोल नंबर या नाम दर्ज करें। 4. विवरण सबमिट करें और अपना एडमिट कार्ड डाउनलोड करें। 5. इसका एक स्पष्ट रंगीन प्रिंटआउट लें। एडमिट कार्ड पर इन जानकारियों को जरूर जांचें छात्रों को सलाह दी जाती है कि वे एडमिट कार्ड मिलते ही इन विवरणों का मिलान कर लें: छात्र का नाम और रोल नंबर। परीक्षा केंद्र का नाम, पता और केंद्र कोड। विषयों के नाम और उनके सही विषय कोड। फोटो और सिग्नेचर स्पष्ट हैं या नहीं। परीक्षा के दिनों के लिए रिपोर्टिंग समय और गेट बंद होने का समय। यदि किसी भी जानकारी में कोई गलती पाई जाती है, तो छात्र तुरंत अपने स्कूल या क्षेत्रीय सीबीएसई कार्यालय से संपर्क करें।  

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