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पशुपालन एवं डेयरी विभाग राज्यमंत्री पटेल ने माँ नर्मदा का किया पूजन

अनूपपुर  मध्यप्रदेश शासन के पशुपालन एवं डेयरी विभाग राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार)  लखन पटेल ने पवित्र नगरी अमरकंटक स्थित माँ नर्मदा मंदिर में माँ नर्मदा का पूजन-अर्चन किया। उन्होंने माँ नर्मदा से प्रदेशवासियों की सुख, समृद्धि एवं कल्याण की कामना की। इस दौरान उप संचालक पशु पालन डॉ बी बी चौधरी, जनप्रतिनिधि, पत्रकार, मां नर्मदा मंदिर के पुजारी तथा श्रद्धालु उपस्थित रहे।

विकास की नई दिशा: गरीब, युवा, अन्नदाता, नारी और मध्यम वर्ग केंद्रित केंद्रीय बजट 2026 : डॉ. किरोड़ी लाल मीणा

जयपुर,  प्रदेश के कृषि एवं उद्यानिकी मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने सोमवार को सवाई माधोपुर जिला कलक्ट्रेट सभागार में केंद्रीय बजट 2026 के संबंध में प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि यह बजट प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में गरीब, युवा, अन्नदाता, नारी, मध्यम वर्ग और उद्यमी के लिए स्पष्ट दिशा एवं मजबूत आधार प्रस्तुत करता है। कृषि मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार का यह बजट रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म के सिद्धांत पर आधारित है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि यह बजट केवल सामाजिक न्याय तक सीमित नहीं है, बल्कि आर्थिक भागीदारी, तकनीकी नेतृत्व और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारत की भूमिका को मजबूत करने वाला बजट है। डॉ. मीणा ने विशेष रूप से महिला सशक्तिकरण पर प्रकाश डालते हुए कहा कि महिलाएं अब केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि भारत की ‘ग्रोथ इंजन’ हैं। महिला शिक्षा और सुरक्षा के लिए बड़ा कदम उठाते हुए राज्य के सभी 41 जिलों में महिला छात्रावास की स्थापना की जाएगी। बजट में महिलाओं की भूमिका को सामाजिक योजनाओं से आगे बढ़ाकर आर्थिक निर्णय, उद्यमिता, तकनीकी क्षेत्र और वैश्विक प्रतिस्पर्धा तक विस्तारित किया गया है। कृषि मंत्री ने कहा कि बजट में भारत स्किल इंडिया, डिजिटल स्किल्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स एवं ग्रीन टेक्नोलॉजी जैसे आधुनिक क्षेत्रों में युवाओं को प्रशिक्षित करने पर विशेष जोर दिया गया है। पर्यटन क्षेत्र में आई.आई.एम. के सहयोग से 10 हजार गाइडों के कौशल उन्नयन और खेलो इंडिया मिशन के माध्यम से अगले दशक में खेल क्षेत्र में बदलाव लाने की योजना से युवाओं को नई दिशा मिलेगी। इससे देश का युवा वर्ग भविष्य की नौकरियों के लिए तैयार होगा और भारत वैश्विक तकनीकी नेतृत्व की ओर अग्रसर होगा। स्वास्थ्य क्षेत्र पर चर्चा करते हुए डॉ. मीणा ने बताया कि आमजन पर चिकित्सा व्यय का बोझ कम करने के उद्देश्य से दवाओं पर लगने वाले शुल्क में कटौती की गई। वहीं कैंसर की 17 जीवन रक्षक दवाओं पर सीमा शुल्क शून्य किया गया है। मध्यम वर्ग के परिवारों को गुणवत्तापूर्ण इलाज उपलब्ध कराने के लिए जिला स्तर पर बायोफार्मा एवं आयुष केन्द्रों की स्थापना हेतु 10 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे सस्ती और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित होंगी। उन्होंने कहा कि बजट में मध्यम वर्ग के हितों का विशेष ध्यान रखा गया है। एलआरएस के अंतर्गत अब इस वर्ग के परिवारों के बच्चों की विदेश शिक्षा सुलभ बनाने हेतु विदेश यात्रा के टूर पैकेज पर टीसीएस की दर को 5 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत कर दिया गया है, जिससे अभिभावकों पर पड़ने वाला आर्थिक बोझ कम होगा। डॉ. मीणा ने कहा कि बजट में कृषि एवं उद्यानिकी क्षेत्र में प्राकृतिक खेती, फसल विविधीकरण, सूक्ष्म सिंचाई, भंडारण एवं मूल्य संवर्धन को बढ़ावा दिया गया है, जिससे किसानों की आय में वृद्धि होगी। किसानों की आय में वृद्धि हेतु भारत-विस्तार नाम बहुभाषीय ए.आई. टूल के माध्यम से कृषि प्रणालियों की तकनीकी जानकारी क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध करवाई जाएगी। उन्होंने कहा कि केंद्रीय बजट से राजस्थान के टेक्सटाइल तथा हथकरघा क्षेत्र को विशेष लाभ मिलेगा, जिसके तहत भीलवाड़ा के टेक्सटाइल हब, जयपुर हैंडलूम तथा बाड़मेर-जोधपुर में रोजगार और निर्यात बढ़ेगा। महात्मा गांधी स्वरोजगार योजना के तहत खादी-हथकरघा को प्रशिक्षण, मार्केट लिंकेज तथा ब्रांडिंग के माध्यम से सशक्त किया जाएगा, जिससे बुनकरों एवं कारीगरों को सीधा लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि केंद्रीय बजट में 10 हजार करोड़ रुपये के समर्पित एमएसएमई विकास कोष से जयपुर, अलवर, भीलवाड़ा, कोटा तथा उदयपुर जैसे शहरों के छोटे उद्योगों को बड़ा बूस्ट मिलेगा। वहीं इंफ्रास्ट्रक्चर तथा कनेक्टिविटी के तहत 5 लाख से अधिक आबादी वाले टियर-2 एवं टियर-3 शहरों और तीर्थ-पर्यटन स्थलों का विकास होगा। साथ ही 11 फरवरी को राज्य बजट में सवाई माधोपुर के पर्यटन को गति देने हेतु रणथम्भौर के विकास, 150 करोड़ से अधिक की अमरूद प्रसंस्करण इकाई, हवाई अड्डा विकास, लघु उद्योग, आपदा प्रबंधन परियोजनाएं, लटिया नाला सौंदर्यीकरण तथा धार्मिक-पर्यटन सर्किट की संभावनाएं शामिल होंगी। कृषि मंत्री ने कहा कि केंद्रीय बजट 2026 “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास” के संकल्प को साकार करने वाला बजट है और इसके सकारात्मक प्रभाव शीघ्र ही प्रदेश एवं जिले के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचेंगे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत विश्व की चौथी अर्थव्यवस्था बनकर वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में अग्रसर है।  

रेशम उत्पादन, शुद्धता की पहचान और विपणन को मिलेगा एकीकृत मंच

लखनऊ. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार प्रदेश के पारंपरिक और ग्रामीण उद्योगों को आधुनिक स्वरूप देने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। इसके तहत, रेशम उद्योग के सुदृढ़ीकरण, शुद्ध रेशमी वस्त्रों की पहचान तथा आमजन को रेशम उत्पादन की पूरी प्रक्रिया से अवगत कराने के उद्देश्य से प्रदेश में ‘सेन्टर ऑफ एक्सीलेन्स’ की स्थापना की गई है। स्थानीय कारीगरों को उपलब्ध होगा सीधा बाजार सेन्टर ऑफ एक्सीलेन्स में ‘सॉइल टू सिल्क’ की समस्त विधाओं, नर्सरी विकास, शहतूत वृक्षारोपण, रेशम कीट पालन, कोया उत्पादन, धागाकरण से लेकर साड़ी एवं परिधान निर्माण तक का चरणबद्ध और व्यावहारिक प्रदर्शन किया जाएगा। इसका उद्देश्य उपभोक्ताओं को यह समझाना है कि शुद्ध रेशम क्या होता है, उसकी गुणवत्ता कैसे पहचानी जाए और बाजार में उपलब्ध नकली या मिश्रित रेशम से कैसे भेद किया जा सकता है। यह केन्द्र न केवल प्रशिक्षण और जागरूकता का माध्यम होगा, बल्कि एक्जीबिशन, मार्केटिंग कम सेल सेंटर के रूप में भी कार्य करेगा, जहां शुद्ध रेशमी वस्त्रों और परिधानों का सीधा विक्रय किया जाएगा। इससे स्थानीय बुनकरों, कारीगरों, किसानों और स्वयं सहायता समूहों को सीधा बाजार उपलब्ध होगा। हजारों परिवारों की आजीविका होगी सुदृढ़ योगी सरकार की यह पहल आत्मनिर्भर उत्तर प्रदेश के संकल्प को साकार करने की दिशा में एक ठोस कदम है, जिससे रेशम उद्योग से जुड़े हजारों परिवारों की आजीविका सुदृढ़ होगी और प्रदेश की पारंपरिक कला एवं विरासत को राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलेगी। इस महत्वाकांक्षी केन्द्र का उद्घाटन सोमवार को सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम, खादी एवं ग्रामोद्योग, रेशम उद्योग, हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग मंत्री राकेश सचान द्वारा किया गया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि रेशम निदेशालय परिसर में स्थापित यह सेन्टर ऑफ एक्सीलेन्स प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जहां रेशम उत्पादन की पूरी श्रृंखला का प्रत्यक्ष एवं जीवंत प्रदर्शन किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि यहां रेशम कीट से धागा बनने की प्रक्रिया, धागाकरण एवं वस्त्र निर्माण की संपूर्ण विधि को एक ही स्थान पर देखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि पूर्व में यह स्थल अनुपयोगी अवस्था में था, जिसे विभागीय प्रयासों से आधुनिक, भव्य एवं उपयोगी स्वरूप प्रदान किया गया है। अब यह केन्द्र प्रदेश मुख्यालय पर देश-विदेश से आने वाले आगंतुकों के लिए रेशम उद्योग की पहचान का प्रमुख केन्द्र बनेगा। यहां एरी, शहतूती एवं टसर रेशम की उत्पादन प्रक्रिया को प्रत्यक्ष रूप से समझा जा सकेगा। प्रदेश में लगभग 300 से 350 मीट्रिक टन रेशम उत्पादन मंत्री सचान ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशानुसार वर्ष 2022 से प्रदेश में रेशम उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। वर्तमान में प्रदेश में लगभग 300 से 350 मीट्रिक टन रेशम उत्पादन हो रहा है, जिसे निरंतर बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। किसानों को प्रशिक्षण देकर रेशम उत्पादन से जोड़ा जा रहा है, जिससे उन्हें अतिरिक्त आय के अवसर प्राप्त हों। भारत सरकार एवं राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से रेशम उत्पादकों को अनुदान, प्रशिक्षण एवं तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। कार्यक्रम में अपर मुख्य सचिव, उद्यान एवं रेशम, उत्तर प्रदेश शासन, विशेष सचिव/निदेशक (रेशम), केन्द्रीय रेशम बोर्ड (भारत सरकार) के अधिकारी एवं वैज्ञानिकों सहित विभागीय एवं तकनीकी अधिकारी उपस्थित रहे।

इंतज़ार खत्म! CM योगी ने खोला राज – कब उड़ान भरेगा जेवर एयरपोर्ट, उद्घाटन पर PM मोदी की मुहर संभव

लखनऊ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जेवर में बने नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन इस महीने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किए जाने की संभावना है। इसके शुरू होने के बाद यह उत्तर प्रदेश का पांचवां अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट बन जाएगा। सीएम योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि एयरपोर्ट तैयार है और एयरोड्रम लाइसेंस प्राप्त करने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। उन्होंने कहा कि मुझे उम्मीद है कि प्रधानमंत्री द्वारा इस महीने एयरपोर्ट का उद्घाटन कर किया जाएगा। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट एक ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट है, जिसे गौतमबुद्ध नगर जिले के जेवर क्षेत्र में पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत विकसित किया जा रहा है। लगभग 1,300 हेक्टेयर में फैले इस प्रोजेक्ट के पहले चरण का संचालन शुरू में सितंबर 2024 में शुरू होने वाला था और यह कई डेडलाइन चूक चुका है। निवेश व रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे बता दें कि उत्तर प्रदेश में जल्द ही सबसे अधिक 21 हवाई अड्डों वाला प्रदेश बनने की राह पर है। लखनऊ, वाराणसी, अयोध्या जैसे अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों के बाद अब जेवर का नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट भी शीघ्र चालू होने वाला है। जेवर एयरपोर्ट के शुभारंभ से उत्तर प्रदेश एयर कार्गो हब के रूप में उभरेगा और निवेश व रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। जेवर एयरपोर्ट से पश्चिमी यूपी की अर्थव्यवस्था को मिलेगी रफ्तार जेवर एयरपोर्ट न सिर्फ दिल्ली-एनसीआर की वैश्विक कनेक्टिविटी को नई दिशा देगा, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को भी नई गति देने के लिए तैयार है। यह एयरपोर्ट नेट-जीरो उत्सर्जन के लक्ष्य पर काम करने वाला अत्याधुनिक एयरपोर्ट होगा, जिसमें स्विस दक्षता और भारतीय आतिथ्य का बेहतरीन मिश्रण देखने को मिलेगा। प्रारंभिक चरण में 1.2 करोड़ यात्रियों की वार्षिक क्षमता वाला यह एयरपोर्ट पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए एक आर्थिक हब का काम करेगा। यह एयरपोर्ट न केवल बुनियादी सुविधाओं को नई ऊंचाई देगा, बल्कि पश्चिमी यूपी के युवाओं के लिए रोजगार और संभावनाओं के अनगिनत द्वार खोलेगा।  

साध्वी प्रेम बाईसा केस में बड़ा कदम: SIT ने पिता से की गहन पूछताछ

जोधपुर जोधपुर में साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध मौत के मामले में जांच तेज कर दी गई है। सोमवार को डीसीपी वेस्ट विनीत बंसल सहित वरिष्ठ पुलिस अधिकारी एसीपी कार्यालय पहुंचे, जहां साध्वी के पिता को बुलाकर पूछताछ की गई। मीडिया से बातचीत करते हुए डीसीपी वेस्ट विनीत बंसल ने बताया कि घटना के बाद से पुलिस कमिश्नर के निर्देश पर पूरी टीम गंभीरता से जांच कर रही है। उन्होंने कहा कि मृतका के बैकग्राउंड, उनके पिता के बैकग्राउंड, किसी से रंजिश या दुश्मनी, मेडिकल लापरवाही सहित सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर जांच की जा रही है। डीसीपी ने बताया कि रविवार को एफएसएल टीम द्वारा दोबारा घटनास्थल का निरीक्षण कराया गया है और वहां से मिले अहम तथ्यों का विश्लेषण किया जा रहा है। इसके साथ ही साध्वी के पिता के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल्स और सोशल मीडिया अकाउंट्स की भी जांच की जा रही है, ताकि मामले से जुड़े हर संभावित सुराग की पड़ताल की जा सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच में फिलहाल कोई भी व्यक्ति शक के दायरे से बाहर नहीं है और किसी को भी क्लीन चिट नहीं दी गई है। पूछताछ के लिए किसी व्यक्ति को दोबारा बुलाया जाना जांच प्रक्रिया का हिस्सा है। डीसीपी विनीत बंसल ने भरोसा दिलाया कि गठित एसआईटी द्वारा किसी के साथ अनावश्यक दबाव या दुर्व्यवहार नहीं किया जाएगा। प्रारंभिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट में किसी प्रकार की बाहरी या आंतरिक चोट के स्पष्ट निशान सामने नहीं आए हैं, हालांकि अंतिम निष्कर्ष विस्तृत पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट होगा। वहीं पूछताछ के बाद साध्वी के पिता ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्हें केवल बातचीत के लिए बुलाया गया था और उन पर किसी तरह का पुलिस दबाव नहीं बनाया गया। मोबाइल फोन का पासवर्ड मांगे जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि उनसे अब तक कोई पासवर्ड नहीं मांगा गया है। उन्होंने बताया कि वे साध्वी के समाधि स्थल जा रहे थे, इसी दौरान पुलिस ने उनसे एक बार कार्यालय आने को कहा था। बातचीत के बाद वे समाधि स्थल के लिए रवाना हो गए।

जब से पीएम मोदी ने पद संभाला, खेलों में कभी भी बड़ी समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ा: बृज भूषण शरण

नोएडा बीजेपी नेता और भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) के पूर्व अध्यक्ष बृज भूषण शरण सिंह ने प्रो रेसलिंग लीग (पीडब्ल्यूएल) 2026 को सराहा है। उन्होंने इस लीग को एक बड़ी सफलता बताते हुए खेल के लगातार विकास का श्रेय पिछले एक दशक में विकसित बेहतर स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर को दिया। हरियाणा थंडर ने रविवार रात नोएडा इंडोर स्टेडियम में एक रोमांचक फाइनल में दिल्ली दंगल वॉरियर्स को 5-4 से हराकर प्रो रेसलिंग लीग (पीडब्ल्यूएल) 2026 का खिताब जीता। इस मुकाबले पर प्रतिक्रिया देते हुए बृज भूषण ने कहा कि फाइनल आखिरी तक प्रतिस्पर्धी बना रहा, जिससे यह हाल के कुश्ती इतिहास के सबसे रोमांचक मुकाबलों में से एक बन गया। उन्होंने कहा, “यह एक बहुत ही प्रभावशाली मैच था, जिसमें आखिरी पलों तक रोमांच बना रहा, क्योंकि स्कोर 4-4 से बराबरी पर था। दिल्ली के 4 प्वाइंट्स थे और हरियाणा के भी 4 ही प्वाइंट्स थे। नतीजतन, आखिरी पलों तक विजेता तय नहीं हो पाया। ज्यादातर मुकाबलों में, नतीजा जल्दी स्पष्ट हो जाता है, और कोई भी विजेता का अनुमान लगा सकता है, लेकिन इस फाइनल में, सस्पेंस आखिर तक बना रहा, जिससे यह एक बेहतरीन मुकाबला बन गया।” कुश्ती में भारत की बढ़ती ताकत पर प्रकाश डालते हुए, बृज भूषण शरण सिंह ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश के भविष्य की संभावनाओं पर विश्वास जताते हुए कहा, “भारत कुश्ती में बहुत अच्छा प्रदर्शन कर रहा है। भविष्य में और भी बेहतर प्रदर्शन करने की उम्मीद है। सभी खेलों में, कुश्ती में भारत के लिए सर्वाधिक मेडल लाने की सबसे ज्यादा क्षमता है।” डब्ल्यूएफआई के पूर्व अध्यक्ष ने सरकार के तहत खेल की लगातार प्रगति के लिए पिछले एक दशक में स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार का भी श्रेय दिया। उन्होंने कहा, “जब से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पद संभाला है, खेल सुविधाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर में लगातार सुधार हुआ है। इस दौरान कभी भी बड़ी समस्याओं का सामना नहीं करना पड़ा।” हरियाणा थंडरर्स ने चैंपियनशिप ट्रॉफी के साथ 1.5 करोड़ रुपये की प्राइज मनी जीती है, जबकि रनर-अप दिल्ली दंगल वॉरियर्स को 75 लाख रुपये मिले।  

हमला पुलवामा में, पर रिश्ता पूरी तरह नहीं टूटा — भारत ने पाकिस्तान पर ‘टोटल बैन’ से क्यों किया परहेज?

नई दिल्ली पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ आगामी टी20 वर्ल्ड कप 2026 में खेलने से इनकार कर दिया है। भारत और पाकिस्तान के बीच 15 फरवरी को कोलंबो के आर प्रेमदासा स्टेडियम में यह मुकाबला खेला जाना था। पिछले साल दोनों टीमों के बीच यह तय हुआ था कि भारत और पाकिस्तान के सभी मुकाबले न्यूट्रल वेन्यू पर होंगे, इसके बाजवजूद अब बांग्लादेश को अपना सपोर्ट दिखाने के लिए पाकिस्तान ऐसी नौटंकी कर रहा है। बता दें, बांग्लादेश ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए भारत में टी20 वर्ल्ड कप के मैच खेलने से इनकार कर दिया था। आईसीसी के लाख समझाने के बाजवूद बांग्लादेश नहीं माना जिस वजह से आईसीसी ने उन्हें बाहर कर स्कॉटलैंड के टूर्नामेंट में शामिल किया। आईसीसी के इस फैसले के बाद अब पाकिस्तान यह बगावत कर रहा है।   भारत के पास भी पाकिस्तान के खिलाफ मैच को बॉयकॉट करने का मौका था। पिछले साल जब पुलवामा अटैक हुआ था तो पूरे देश में आक्रोश फैला हुआ था। भारत कई तरीको से पाकिस्तान के खिलाफ बड़े फैसले ले रहा था। ऐसे में इसकी आंच क्रिकेट पर भी गिरने वाली थी। पूरे देशभर में कहा जा रहा था कि पाकिस्तान के खिलाफ भारत को क्रिकेट मैच नहीं खेलना चाहिए। मगर सरकार ने समझदारी दिखाते हुए एशिया कप में पाकिस्तान के खिलाफ खेलने का फैसला किया। भारतीय सरकार ने बीसीसीआई को पाकिस्तान के खिलाफ खेलने की मंजूरी दी। इसके कई कारण थे।     अगर भारत पाकिस्तान के खिलाफ खेलने से इनकार कर देता तो आईसीसी कई तरह की पाबंदियां लगा सकता था।     भारत का पाकिस्तान के खिलाफ ना खेलने का असर आईपीएल पर भी पड़ सकता था।     भारत को वित्तीय नुकसान भी हो सकता था।     दूसरी टीमों को भी आईसीसी भारत में द्विपक्षीय सीरीज खेलने से रोक सकता था।     आगामी आईसीसी और मल्टीनेशन इवेंट में भी भारत को इस फैसले का खामियाजा उठाना पड़ सकता था। इन्हीं सभी नुकसानों को टालने के लिए भारतीय सरकार ने बीसीसीआई को पाकिस्तान के खिलाफ खेलने की मंजूरी दी। हालांकि भारतीय टीम ने पाकिस्तान का क्रिकेट फील्ड पर कई तरह से बॉयकॉट किया। कप्तान सूर्यकुमार यादव ने सबसे पहले पाकिस्तानी कप्तान से टॉस के दौरान हाथ नहीं मिलाए। वहीं मैच खत्म होने के बाद भारतीय खिलाड़ी सीधा अपने ड्रेसिंग रूम में चले गए। इस घटना के बाद ही हैंडशेक विवाद खड़ा हुआ था। एशिया कप में भारत की फाइनल समेत तीन बार पाकिस्तान से भिड़ंत हुई थी और हर बार भारत का रुख ऐसा ही था। टीम इंडिया के खिलाड़ी पाकिस्तानी खिलाड़ियों से बात तक नहीं कर रहे थे। मगर जब पाकिस्तानी खिलाड़ियों ने उन्हें उकसाया तो अभिषेक शर्मा और जसप्रीत बुमराह जैसे खिलाड़ियों ने मैदान पर ही उन्हें मुंहतोड़ जवाब दिया। पाकिस्तान का बॉयकॉट करने का सिलसिला यहीं नहीं थमा। भारत ने एशिया कप का खिताब जीतने के बाद पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के मुखिया मोहसिन नकवी, जो एसीसी के भी अध्यक्ष हैं, उनसे ट्रॉफी लेने से इनकार कर दिया था। मोहसिन नकवी ने काफी देर भारतीय खिलाड़ियों का इंतजार किया, मगर सूर्यकुमार यादव की टीम मैदान पर होते हुए स्टेज तक नहीं पहुंची। अंत में नकवी ट्रॉफी लेकर ही मैदान के बाहर चले गए और आज तक उन्होंने भारत को एशिया कप की ट्रॉफी नहीं सौंपी। भारत ने तो बड़ी ही समझदारी से काम लिया और पाकिस्तान का अलग तरीके से बॉयकॉट करते हुए उनके खिलाफ मैच खेला। मगर बांग्लादेश को अपना सपोर्ट दिखान के चक्कर में पाकिस्तान कुल्हाड़ी पर अपना पैर मार बैठा है। बताया जा रहा है कि अगले कुछ दिनों में आईसीसी इस मुद्दे पर मीटिंग कर सकता है। आईसीसी पाकिस्तान को समझाने की कोशिश कर सकता है और उनसे भारत के खिलाफ मैच खेलने के लिए कह सकता है, क्योंकि इसी मैच से आईसीसी की सबसे ज्यादा कमाई होती है। अगर पाकिस्तान फिर भी नहीं मानता तो पाकिस्तान उन पर कई तरह की पाबंदियां लगा सकता है, इसकी वजह से पाकिस्तान क्रिकेट पूरी तरह से बर्बाद भी हो सकता है।  

गांव से ग्लोबल मार्केट तक पहुंचाएगा ये बजट, आत्मनिर्भर भारत को नई दिशा: पुष्कर सिंह धामी

देहरादून केंद्रीय बजट के संबंध में उत्तराखंड प्रदेश भाजपा कार्यालय, देहरादून में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने संबोधित किया और इसे विकसित भारत का बजट बताया। सीएम ने कहा कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 9वीं बार बजट पेश किया है, उन्हें बधाई देता हूं। यह बजट पीएम मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व का परिणाम है और 2026-27 का यह बजट भारत की आत्मा, आत्मनिर्भरता, आत्मविश्वास और विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने वाला है। यह भारत के सभी नागरिकों की आकांक्षाओं वाला बजट है। सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यह बजट हर वर्ग के लोगों को किसी न किसी रूप में आगे लाने और विकसित भारत बनाने का बजट है। भारत आर्थिक रूप से मजबूत बने, आने वाले समय में भारत तीन प्रमुख आर्थिक महाशक्तियों के रूप में स्थापित हो, हर वर्ग का विकास हो और वैश्विक समस्याओं को ध्यान में रखकर इस बजट को तैयार किया गया है। प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए सीएम धामी ने कहा कि ग्लोबल वार्मिंग को लेकर भी इस बजट में प्रावधान किए गए हैं। यह विकसित भारत के विजन वाला बजट है। कृषि, ग्रामीण विकास और कौशल निर्माण का भी इसमें ध्यान रखा गया है। ग्रामीण और सीमांत क्षेत्रों के विकास पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। उन्होंने कहा कि यह लोकल से ग्लोबल बनाने वाला बजट है। सीएम ने कहा कि यह भारतवर्ष के सभी नागरिकों के उत्थान एवं उनकी आकांक्षाओं की पूर्ति का बजट है। साथ ही यह बजट विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने वाला बजट है। यह बजट भारत के भविष्य को तीन मजबूत स्तंभों पर स्थापित करता है, भारत आर्थिक रूप से मजबूत बने, सामाजिक रूप से संतुलन स्थापित हो और ग्लोबल वार्मिंग जैसी समस्याओं पर फोकस किया गया है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड को 24 हजार करोड़ रुपए मिलेंगे, जो पिछले वर्ष के मुकाबले 1,800 करोड़ रुपए अधिक धनराशि है। यह अतिरिक्त संसाधन आधारभूत संरचना एवं रोजगार सृजन को नई गति देंगे। इस बजट में युवाओं के लिए और महिलाओं के लिए वह सब कुछ है, जिससे वे जॉब सीकर से जॉब क्रिएटर बन सकें। यह जनकल्याण को लाभ देने वाला बजट है।

प्रदेश की जनजातीय संस्कृति से नई पीढ़ी को परिचित करा रहा है संस्थान

लखनऊ. उत्तर प्रदेश जनजाति एवं लोक कला संस्कृति संस्थान, प्रदेश की जनजातीय सांस्कृतिक विरासत को संजोने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इस दिशा में संस्थान जनजातियों के पारंपरिक आभूषणों व दुर्लभ बर्तनों के संरक्षण, संवर्धन और प्रचार-प्रसार का उल्लेखनीय प्रयास कर रहा है। संस्थान का यह प्रयास मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की समावेशी विकास की अवधारणा को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इस क्रम में प्रदेश की विभिन्न जनजातियों के पारंपरिक तरीके से बनाए गए 500 से अधिक आभूषणों व बर्तनों का न केवल संरक्षण किया जा रहा है, बल्कि इनकी प्रदर्शनी के माध्यम से नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक धरोहर को जानने का अवसर भी प्रदान कर रहा है। जनजातीय परंपराओं और उनके कला-कौशल की पहचान हैं ये आभूषण उत्तर प्रदेश की थारू, बुक्सा, गोंड और बैगा जनजातियों के आभूषण न केवल सौंदर्य के प्रतीक हैं, बल्कि जनजातीय समाज की गहरी सांस्कृतिक जड़ों और परंपराओं को भी जीवंत बनाते हैं। इस उद्देश्य से जनजाति एवं लोक कला संस्कृति संस्थान इन जनजातियों के पारंपरिक तरीके से बने आभूषणों का संरक्षण कर रहा है। संस्थान के निदेशक अतुल द्विवेदी ने बताया कि ये आभूषण पूरी तरह से हस्तनिर्मित होते हैं, जिन्हें जनजातियों के शिल्पकार अपने सदियों पुराने ज्ञान और हस्तकौशल से तैयार करते हैं। जो इन जनजातियों की सांस्कृतिक परंपराओं के साथ उनके कला कौशल की भी पहचान हैं। ये आभूषण गिलेट या गोटा चांदी, पुराने भारतीय सिक्कों, मनकों, तांबा, पीतल, लकड़ी, हड्डी व सीप जैसी सामग्रियों से बनाए जाते हैं। इनका निर्माण पारंपरिक तरीके से होता है, जिसमें धातु को भट्टी में गर्म कर तार और चादरों में बदला जाता है, फिर हाथों से अंतिम आकार दिया जाता है। इनमें हंसली, पायल, करधनी, कड़े, झुमकी, हार, अंगूठियां, बाजूबंद और मंगलसूत्र जैसे आभूषण जनजातीय जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं। उन्होंने बताया कि संस्थान के प्रयास से जहां एक ओर लुप्त होते इन आभूषणों और उनकी निर्माण कला का संरक्षण किया जा रहा है, साथ ही उन्हें आधुनिकता से भी जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। इन आभूषणों के आधुनिक रूप युवा पीढ़ी पारंपरिक परिधानों के साथ-साथ एथनिक व वेस्टर्न पहनावे में भी प्रयोग कर रही है।  यूपी की थारू,बुक्सा,अगरिया,खरवार जनजातियों के बर्तनों का हो रहा है संरक्षण संस्थान का प्रयास केवल आभूषणों के संरक्षण तक ही सीमित नहीं है। यह जनजातियों के विलुप्त होते पीतल, तांबे और मिट्टी के पारंपरिक बर्तनों के संरक्षण में भी सक्रिय है। संस्थान के निदेशक ने बताया कि थारू, बुक्सा, अगरिया, खरवार और सोनभद्र क्षेत्र की जनजातियों के धातु के बर्तन, मृदभांड, धातु पात्र और जंगली लौकी से बनी ‘तुंबी’ आज भी जनजातीय समाज की जीवनशैली का सजीव उदाहरण है। हमारा संस्थान इनका संरक्षण करने के साथ समय-समय पर इनकी प्रदर्शनी भी लगाता है। प्रदेश की अगरिया जनजाति धातु शिल्प के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है, जो कि प्राचीन काल से धातुकर्म की कला से परिचित है। जबकि थारू जनजाति चावल से पेय बनाने के लिए प्रयोग होने वाले ‘जाड़’ के लिए मिट्टी के बर्तनों का प्रयोग करती है। संस्थान समय-समय पर प्रदर्शनियों के माध्यम से प्रदेश की जनजातियों की कलाकृतियों, आभूषणों और बर्तनों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच प्रदान कर रहा है। इसी क्रम में संस्थान की ओर से उत्तर प्रदेश दिवस- 2026 और जनजातीय भागीदारी महोत्सव में जनजातीय शिल्पकारों को मंच और सम्मान देकर जनजातीय गौरव को नई ऊंचाई प्रदान की गई।

आर्थिक विकास की नई संभावनाओं के द्वार खोलेगा केन्द्रीय बजट: डॉ. मोहन यादव

भोपाल भारत विश्व की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर तेजी से बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के सशक्त और दूरदर्शी नेतृत्व में हम विकसित भारत का मिशन लेकर आगे बढ़ रहे हैं। केन्द्रीय वित्त मंत्री मती निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत बजट 2026-27 मध्यप्रदेश के लिए आर्थिक विकास की नई संभावनाओं के द्वार खोलेगा, उद्योगों को सरल प्रक्रियाएँ, निवेशकों को भरोसेमंद वातावरण, युवाओं को रोजगार के अवसर, महिलाओं को आर्थिक सशक्तिकरण, एमएसएमई सेक्टर को संस्थागत समर्थन और नागरिकों को बेहतर सेवाएँ प्राप्त होंगी। आत्मनिर्भर भारत के निर्माण की जो नींव प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में रखी गई है उसे वर्ष 2026-27 के बजट ने और ज्यादा मजबूत किया है। भारत की अर्थव्यवस्था अब तेजी से नई ऊंचाइयों को छूने के लिए तत्पर है। युवा शक्ति, नारी शक्ति, किसान शक्ति और उदयमिता के सहयोग से भारत ने आगे बढ़ने जो संकल्प लिया है वह कई अर्थों में अदभुत है। आज जब भारत औदयोगिक निवेश और निर्माण क्षेत्र का हब बनने जा रहा है, उसमें मध्यप्रदेश भी अपनी पूरी शक्ति के साथ योगदान देने के लिए तैयार है। हमने औदयोगिक निवेश के लिये अनूकूल वातावरण तैयार किया, जिससे निरंतर निवेश आ रहा है। नये बजट से पूरे इको-सिस्टम को नई ऊर्जा मिली है। बजट में हरित अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने पर पूरा ध्यान केन्द्रित किया गया है। इससे मध्यप्रदेश को दीर्घकालिक लाभ होने वाला है। कृषक कल्याण और कृषि विकास को मिशन के रूप में आगे बढ़ाने का संकल्प भी लिया गया है। इसी प्रकार सेमीकंडक्टर मिशन 2.0, इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट, मैन्युफैक्चरिंग और एआई आधारित तकनीक के विकास पर बजट में ध्यान केन्द्रित किया गया है। इन तीनों क्षेत्रों में मध्यप्रदेश को हाई‑टेक उद्योग, डिजिटल निवेश और नवाचार आधारित उद्यमिता को प्रोत्साहन मिलेगा। इन क्षेत्रों के लिये नीतियां बनाने का काम पूरा कर लिया है। निवेश आकर्षित करने के प्रयास निरंतर जारी हैं। केन्द्रीय बजट गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी शक्ति को आत्मनिर्भर बनाने के लिए समर्पित है। यह सर्वव्यापी, सर्वस्पर्शी और सर्वसमावेशी बजट है। जिस प्रकार मध्यप्रदेश में तेजी से शिक्षा का आधुनिकीकरण हो रहा है, नया बजट युवाओं के कौशल विकास और रोज़गार के लिए व्यापक अवसर लेकर आया है। शिक्षा से रोजगार एवं उदयम स्थायी समिति का गठन और 15 हजार माध्यमिक विदयालयों एवं 500 महाविदयालयों में एपीजीसी कंटेंट क्रिएटर लैब की स्थापना रचनात्मकता को बढ़ावा देगी। पर्यटन क्षेत्र में आईआईएम के सहयोग से 10 हजार गाइड्स के कौशल उन्नयन और खेलो इंडिया मिशन के माध्यम से अगले दशक में खेलों के परिदृश्य में बदलाव लाने का लक्ष्य युवाओं को नई दिशा देगा। महिलाओं के लिये एमएसएमई ग्रोथ फंड के लिए 10 हजार करोड़ रूपये का आवंटन लाभदायी होगा। युवा भारत के लिये सेवा क्षेत्र का विस्तार संभावनाओं के नये द्वार खोलेगा और रोज़गार और उदयम के अवसर बढ़ेंगे। महिला उदयमिता को बढ़ावा देने के लिए लखपति दीदी योजना में महिला उदयमियों को क्रेडिट लिंक आजीविका से उद्म स्वामित्व से जोड़ने में मदद मिलेगी। मध्यप्रदेश ने पहले ही इस दिशा में ठोस प्रयास किये हैं। सिटी ईकॉनामिक रीजन बनाने की नीति मध्यप्रदेश के शहरी विकास के लिए विशेष रूप से लाभकारी होगी। शहरों को संगठित आर्थिक केंद्रों के रूप में विकसित करने में यह सहायक सिद्ध होगी। शहरी क्षेत्रों में नियोजित आर्थिक विकास, औद्योगिक‑व्यावसायिक क्लस्टरिंग और आधुनिक अधोसंरचना का निर्माण होगा। इससे मध्यप्रदेश के प्रमुख शहर संगठित आर्थिक केंद्रों के रूप में विकसित होंगे और निवेश‑अनुकूल शहरी अर्थव्यवस्था का निर्माण होगा। यह निवेश मॉडल मध्यप्रदेश के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध होगा और कनेक्टिविटी, लॉजिस्टिक्स तथा व्यापारिक सुगमता को व्यापक रूप से मजबूत बनायेगा। बजट में सामाजिक समावेश पर पूरा ध्यान दिया गया है। आर्थिक विकास की ये पहल मध्यप्रदेश के लिए अत्यंत लाभकारी होगी। समावेशी विकास के साथ मानव-पूंजी निर्माण को भी मजबूती मिलेगी। शी-मार्ट्स, दिव्यांगजन कौशल योजना, सभी जिलों में गर्ल्स हॉस्टल और शिक्षा‑कौशल आधारित पहल से सामाजिक सशक्तिकरण के साथ आर्थिक विकास को समावेशी स्वरूप मिलेगा। इससे मध्यप्रदेश में गुणवत्तापूर्ण मानव‑पूंजी का सृजन होगा। ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को विकास के केन्द्र में रखते हुए यह बजट प्रशासनिक सरलीकरण, निवेश-अनुकूल नीतियों, संरचनात्मक सुधारों और वित्तीय स्थिरता के माध्यम से मध्यप्रदेश को तेज़ी से उभरती अर्थव्यवस्था के रूप में विकसित करने की ठोस आधारशिला रखता है। मध्यप्रदेश के लिए केंद्रीय बजट 2026-27 केवल एक नीति-दस्तावेज नहीं, बल्कि राज्य के आर्थिक, औद्योगिक और सामाजिक विकास का एक ऐतिहासिक अवसर है, जो मध्यप्रदेश को नई ऊँचाइयों तक ले जाने में अत्यंत सहायक एवं परिवर्तनकारी भूमिका निभाएगी।  

हर मंगलवार जनसुनवाई, देश में मिसाल बने अकेले विधायक

सिवनी.  दिनेश राय मुनमुन मध्यप्रदेश के अकेले ऐसे विधायक हे जो हर मंगलवार जनता की समस्याओं को सुनकर तुरंत हल करते हे या हल कराने की कोशिश करते हैं। यदि किसी को छोटी मोटी बीमारी के लिए आर्थिक मदद की आवश्यकता होती हैं तो ये अपनी जेब से उसे तुरंत मदद करते है। इसी कारण इनकी लोकप्रियता जनता में अलग छाई हुई हैं। आज तक इनके ऊपर दलाली और कमीशन का दाग नहीं है।  बेबाक बिना भय के इनकी बोलने की शैली इनकी पहचान हे। कोई भी कार्यक्रम चाहे सामाजिक विकास की बात हो हो या राजनीतिक कार्यक्रम हो इसके लिए वे सबसे आगे होते हैं। इसी कड़ी में पिछले  मंगलवार को,सिवनी स्थित अपने बारापत्थर  कार्यालय में आयोजित जनसुनवाई मे अनेकों आवेदनों पर सुनवाई कर समस्याओं का निराकरण किये जाने निर्देश दिया। ​प्रातः 11:00 बजे विधायक * दिनेश राय मुनमुन जी द्वारा अपने कार्यालय मे आयोजित जनसुनवाई आरंभ की गयी। इस जनसुनवाई में विधानसभा क्षेत्र के दूर-दराज से आए नागरिकों द्वारा अपनी व्यक्तिगत और सार्वजनिक समस्याओं से संबंधित अनेकों आवेदन प्रस्तुत किये गये। जिसमें विधायक  दिनेश मुनमुन जी ने प्रत्येक आवेदकों की बात को गंभीरता से सुना और संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश देते हुए कहा कि जनता की सेवा ही हमारा मुख्य ध्येय है समस्याओं का शीघ्र और प्राथमिकता के आधार पर निराकरण सुनिश्चित किया जाए। इसके अलावा विधायक  दिनेश राय मुनमुन जी ने ग्राम पंचायत अलोनिया द्वारा गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम मे सहभागिता किया। जहां पर बालिकाओं द्वारा कलश लेकर आपकी आगवानी की गयी। इसके तदोपरांत सर्वप्रथम विधायक  दिनेश राय मुनमुन जी ने मां भारती का पूजन-अर्चन कर कार्यक्रम आरंभ कराया। तत्पश्चात पंचायत प्रतिनिधियों ने साफा पहनाकर फूलमालाओं आत्मीय स्वागत किया। इस दौरान विधायक  दिनेश राय मुनमुन जी ने छात्र-छात्राओं एवं उपस्थितों को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं देते कहा कि कला और संस्कृति हमारे समाज की आत्मा होती है। अभी मंच पर जो प्रस्तुतियां मैंने देखीं,वे यह दर्शाती हैं कि हमारे क्षेत्र की प्रतिभा किसी से कम नहीं है। ​ राय ने कहा कि अक्सर कहा जाता है कि शिक्षा का अर्थ केवल किताबों से नहीं, बल्कि व्यक्तित्व के सर्वांगीण विकास से है। ऐसे सांस्कृतिक आयोजन विद्यार्थियों के आत्मविश्वास को बढ़ाते हैं और उन्हें अपनी जड़ों से जोड़े रखते हैं।विधायक  दिनेश राय मुनमुन जी ने आगे कहा कि मैं आयोजकों को बधाई देता हूं कि उन्होंने छात्र- छात्राओं को मंच प्रदान किया। सभी विद्यार्थियों से यही कहूंगा कि आप अपनी कला को जीवित रखें, खूब मेहनत करें और अपने माता-पिता व क्षेत्र का नाम रोशन करें। आप सभी के उज्जवल भविष्य की कामना करता हूं। इस अवसर पर सर्व जयदीप ठाकुर जी अध्यक्ष भाजपा मंडल बंडोल, राकेश बैस (काकू), विशाल साहू जी सरपंच, नीरज यादव जी उपसरपंच, राकेश यादव जी, टेकराम बरकडे जी, रामनाथ यादव जी, जयवंती यादव जी, अमरीश डहेरिया जी, निखिल राय जी, संजू बंजारा जी, तीरन ठाकुर जी, पवन साहू जी, नीलू बघेल जी सहित अभिभावक, शिक्षक,  शिक्षिकाऐं एवं बड़ी संख्या मे छात्र-छात्राओं की गरिमामय उपस्थिति रही।  

बयान बना बवाल: ‘दौड़ते विधायक’ कहानी सुनाने वाले जतिन सांसद पर कानूनी शिकंजा

इंदौर दौड़ते हुए ‘विधायक जी संग युवा नेता के किस्से’ सुनाकर लाखों लोगों को अपना फैन बना चुके जतिन शुक्ला बुरी तरह घिर गए हैं। सोशल मीडिया इंफ्लुएंशर जतिन शुक्ला के खिलाफ मध्य प्रदेश के इंदौर में केस दर्ज किया गया है। सांसद शंकर लालवानी के खिलाफ आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए जतिन का एक वीडियो वायरल होने के बाद शिकायत दर्ज कराई गई है। क्राइम ब्रांच ने प्राथमिक जांच के बाद जतिन शुक्ला के खिलाफ आईटी ऐक्ट सहित संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है।   एडिशनल डीसीपी राजेश दंडोतिया ने कहा कि सांसद के प्रतिनिधि विशाल गदवानी ने क्राइम ब्रांच थाने में शिकायत देकर बताया था कि ‘जतिन ऑफिशियल’ नामक इंस्टाग्राम से एक वीडियो वायरल किया गया है जिसमें सांसद का नाम लेकर अशोभनीय, आपत्तिजनक, भ्रामक और झूठी बातें कहीं गईं हैं। जतिन शुक्ला के खिलाफ बीनएस की धारा 200, 223 और 352 के तहत केस दर्ज किया गया है। डीसीपी ने बताया कि एक पेन ड्राइव में वीडियो और लिंक शेयर किया गया है। किसी प्रकार की असत्य और अशोभनीय और भ्रामक जानकारी सोशल मीडिया पर प्रसारित करना एक अपराध है। वहीं, शिकायतकर्ता विशाल गिदवानी ने कहा कि कुछ दिनों पहले उन्हें जानकारी मिली कि इंदौर शहर और जनप्रतिनिधियों के लिए गलत शब्दों का इस्तेमाल करते हुए वीडियो बनाया गया। शिकायतकर्ता ने क्या कहा? गिदवानी ने कहा कि जतिन ने वीडियो में इंदौर के सांसद के साथ बातचीत का दावा करते हुए उनके हवाले से कई ऐसी बातें कहीं है जो पूरी तरह असत्य हैं। गिदवानी ने कहा कि सांसद कभी जतिन से मिले भी नहीं हैं। वीडियो में जतिन इंदौर में प्रदूषित पानी पीने से हुई लोगों की मौत को लेकर कटाक्ष करते हुए सांसद पर आपत्तिजनक टिप्पणी करते दिखाई दे रहे हैं। फिलहाल जतिन की ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

आईओसी अध्यक्ष ने कहा- आईसीई और एपस्टीन फाइलें शीतकालीन ओलंपिक से ध्यान भटकाने वाली

मिलान अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (आईओसी) की अध्यक्ष किर्स्टी कोवेंट्री ने कहा है कि अमेरिकी इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट (आईसीई) और जेफ्री एपस्टीन से जुड़ी फाइलों को लेकर उठे मुद्दे आगामी मिलानो–कोर्टिना शीतकालीन ओलंपिक से ध्यान भटका रहे हैं, जो ‘दुखद’ है। मिलान में रविवार को हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में आईओसी अधिकारियों से इन विषयों पर सवाल पूछे गए। कोवेंट्री ने शुरुआत में इन्हें आईओसी के दायरे से बाहर का विषय बताया, लेकिन जोर देने पर उन्होंने माना कि ऐसी खबरें खेलों से फोकस हटाती हैं। कोवेंट्री ने कहा, “इन खेलों से ध्यान भटकाने वाली कोई भी चीज दुखद है। लेकिन वर्षों के अनुभव से हमने सीखा है कि खेलों से पहले हमेशा कोई न कोई मुद्दा सुर्खियों में आ जाता है—चाहे वह जीका रहा हो या कोविड। मगर मुझे भरोसा इस बात से मिलता है कि जब उद्घाटन समारोह होगा और खिलाड़ी प्रतिस्पर्धा शुरू करेंगे, तब दुनिया फिर से खेलों के जादू और भावना को याद करेगी।” शनिवार को मिलान में सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने शीतकालीन ओलंपिक के दौरान आईसीई एजेंटों की तैनाती के विरोध में प्रदर्शन किया। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि एजेंट सड़कों पर नहीं, बल्कि एक नियंत्रण कक्ष में तैनात रहेंगे। इसी बीच, एपस्टीन से जुड़ी सरकारी फाइलों के हालिया खुलासे में वर्ष 2003 के कुछ ईमेल सामने आए हैं, जो लॉस एंजेलिस ओलंपिक आयोजन समिति के प्रमुख केसी वासरमैन और एपस्टीन की तत्कालीन साथी घिस्लेन मैक्सवेल के बीच बताए जा रहे हैं। आईसीई एजेंटों की मौजूदगी पर पूछे गए सवाल पर कोवेंट्री ने कहा, “हमारे पास उपलब्ध जानकारी के आधार पर मुझे लगता है कि अमेरिकी प्राधिकरणों ने आवश्यक स्पष्टीकरण दे दिए हैं। सुरक्षा से जुड़े इस पहलू पर हमें आगे टिप्पणी करने की जरूरत नहीं है। हम खेलों का इंतजार कर रहे हैं।” वासरमैन के संबंध में पूछे जाने पर उन्होंने संक्षिप्त जवाब देते हुए कहा, “इस पर कल चर्चा नहीं हुई थी। वासरमैन अपना बयान दे चुके हैं और हमारी ओर से इसमें कुछ जोड़ने को नहीं है।” फाइलों में आईओसी के दो सदस्यों के नाम भी आए हैं—रिचर्ड कैरियन और जोहान एलियाश—हालांकि किसी भी तरह की गलत भूमिका का कोई संकेत नहीं है। इस पर कोवेंट्री ने कहा, “हम मीडिया रिपोर्ट्स पर नजर रख रहे हैं और सामने आई जानकारी को समझने के लिए समय चाहिए।” उल्लेखनीय है कि मिलानो–कोर्टिना शीतकालीन ओलंपिक 6 से 22 फरवरी तक आयोजित होंगे। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे और उद्घाटन समारोह में शामिल होंगे। कोवेंट्री करीब 10 महीने पहले आईओसी अध्यक्ष चुनी गई थीं और इस पद पर पहुंचने वाली पहली महिला हैं।  

उप मुख्यमंत्री शुक्ल का आह्वान: स्वास्थ्य सेवाओं का सुधार और योजनाओं का प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित करें

स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण, योजनाओं का करें प्रभावी, पारदर्शी एवं समयबद्ध क्रियान्वयन: उप मुख्यमंत्री  शुक्ल भोपाल उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल ने मंत्रालय में लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के विभिन्न विषयों की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण, अधोसंरचना विकास, चिकित्सकीय मैनपावर की उपलब्धता एवं चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों की समीक्षा की। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में निरंतर सुधार लाने के लिए सभी योजनाओं का प्रभावी, पारदर्शी एवं समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने अधोसंरचना विकास, चिकित्सकीय सहायक एवं चिकित्सकीय मैनपावर की नियुक्ति तथा स्वास्थ्य संस्थानों के उन्नयन से संबंधित प्रस्तावों की गहन समीक्षा की। उन्होंने इन प्रस्तावों को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र आगे बढ़ाने के निर्देश दिए। रिमोट लोकेशन में स्थित मेडिकल कॉलेजों में शिक्षण स्टाफ की नियुक्ति को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से अतिरिक्त इंसेंटिव प्रदान करने के प्रस्ताव को कैबिनेट अनुमोदन हेतु शीघ्र भेजने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि दूरस्थ क्षेत्रों में योग्य शिक्षण स्टाफ की उपलब्धता सुनिश्चित करना गुणवत्तापूर्ण चिकित्सकीय शिक्षा के लिए अहम है। बैठक में अंतर्विभागीय विषयों पर चर्चा करते हुए उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर औपचारिकताओं की पूर्ति प्राथमिकता से करने के निर्देश दिए, ताकि योजनाओं के क्रियान्वयन में अनावश्यक विलंब न हो। सीएम केयर्स के अंतर्गत टर्शरी केयर स्वास्थ्य सुविधाओं में अत्याधुनिक उपकरणों की उपलब्धता के साथ-साथ आवश्यक मैनपावर की नियुक्ति के प्रस्तावों को प्राथमिकता से अग्रेषित करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि गंभीर रोगों के उपचार हेतु टर्शरी केयर सेवाओं को और अधिक मजबूत किया जाना आवश्यक है, ताकि नागरिकों को उच्च स्तरीय चिकित्सा सेवाएं प्रदेश के हर क्षेत्र में उपलब्ध हों। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने दमोह, छतरपुर एवं बुधनी मेडिकल कॉलेजों के संचालन के लिए आवश्यक शिक्षण स्टाफ की भर्ती प्रक्रिया को निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आगामी शैक्षणिक सत्र में संचालन शुरू करने के लिए प्राथमिकता से समस्त औपचारिकताओं की पूर्ति की जाये। बैठक में केंद्रीय बजट के प्रावधानों पर भी विस्तार से चर्चा की गई। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने उपलब्ध बजटीय संसाधनों के समयबद्ध एवं प्रभावी उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए विभाग को ठोस कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। प्रमुख सचिव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा  संदीप यादव, आयुक्त  धनराज एस, एमडी एमपीपीएचएससीएल  मयंक अग्रवाल, एमडी एनएचएम डॉ. सलोनी सिडाना, संचालक चिकित्सा शिक्षा डॉ. अरुणा कुमार सहित विभागीय वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।  

मंत्री पटेल का ऐलान, नर्मदा परिक्रमा पथ के आश्रय स्थलों में बड़े पैमाने पर होगा पेड़ लगाना

नर्मदा परिक्रमा पथ के आश्रय स्थलों पर होगा व्यापक वृक्षारोपण : मंत्री  पटेल  राज्य स्तरीय कार्यकारिणी समिति की बैठक सम्पन्न भोपाल  पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री  प्रहलाद पटेल ने नर्मदा परिक्रमा पथ पर श्रद्धालुओं की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए आश्रय स्थलों पर व्यापक वृक्षारोपण करने के निर्देश दिये है।  पटेल सोमवार को जीवनदायिनी माँ नर्मदा के जल को निर्मल बनाए रखने, उनके प्रवाह को अविरल सुनिश्चित करने तथा नर्मदा से जुड़े समग्र विकास कार्यों के संबंध में राज्य स्तरीय कार्यकारिणी समिति की बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। बैठक में सर्व छोटे सिेंह, दिनेश जैन, मती हर्षिका सिंह,  अविप्रसाद एवं  दीपक आर्य उपस्थित थे। मंत्री  पटेल ने अधिकारियों को परिक्रमा पथ पर प्रस्तावित पुल, पुलिया एवं ब्रिज के सर्वेक्षण कार्य शीघ्र पूर्ण कर सुनियोजित कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिये। बैठक में विधानसभा से संबंधित लंबित प्रकरणों की विभागीय अधिकारियों के साथ समीक्षा की गई। मंत्री  पटेल ने सभी लंबित प्रकरणों के त्वरित एवं प्राथमिकता के आधार पर निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि जनहित से जुड़े विषयों का शीघ्र समाधान हो सके। बैठक में माँ नर्मदा के संरक्षण एवं विकास को जनभागीदारी से जोड़ने तथा योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष बल दिया गया।  

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