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पशु चिकित्सा अधिकारी भर्ती-2025 की परीक्षा 19 अप्रैल को, अंक तय करने का प्रावधान नहीं

अजमेर  राजस्थान लोक सेवा आयोग ने पशुपालन विभाग में पशु चिकित्सा अधिकारी के 1100 पदों पर होने वाली भर्ती परीक्षा में न्यूनतम प्राप्तांक के संबंध में उपजे भ्रम को लेकर स्थिति स्पष्ट कर दी है। उक्त परीक्षा का आयोजन 19 अप्रैल 2026 को किया जाना प्रस्तावित है। आयोग सचिव ने बताया कि राजस्थान पशुपालन सेवा नियम, 1963 के दिनांक 23 मई 2022 को संशोधित नियम ’19’, के क्रम में साक्षात्कार द्वारा सीधी भर्ती के स्थान पर भर्ती को प्रतियोगी परीक्षा से किया गया है। इस संशोधित सेवा नियम में न्यूनतम प्राप्तांक के संबंध में कोई प्रावधान नहीं है। परीक्षा स्कीमः कुल प्रश्न: 150 (बहुविकल्पीय) कुल अंक: 150 समय: 2 घंटे 30 मिनट नेगेटिव मार्किंग: प्रत्येक गलत उत्तर पर 1/3 अंक काटा जाएगा। परीक्षा दो भागों में होगी: भाग-ए: राजस्थान का सामान्य ज्ञान (40 प्रश्न, 40 अंक) भाग-बी: संबंधित विषय (110 प्रश्न, 110 अंक) फर्जी सूचनाओं से रहें सावधानः इस संबंध में सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रही एक कथित अपील निर्णय क्रमांक एफ.23(163) दिनांक 15 नवंबर 2025 पूरी तरह फर्जी है। इस भ्रामक सूचना को फैलाने वालों के खिलाफ अलग से कानूनी कार्यवाही की जा रही है। अभ्यर्थी केवल आयोग द्वारा आधिकारिक वेबसाइट पर जारी सूचनाओं पर ही विश्वास करें।

शबाना महमूद की ब्रिटेन पीएम बनने की संभावना, कश्मीर पर पड़ सकता है प्रभाव?

लंदन   शबाना महमूद यह नाम विश्व की राजनीति पर हाल ही में चर्चा का केंद्र बन गया है, क्योंकि ऐसी संभावना जताई जा रही है कि शबाना महमूद ब्रिटेन की पहली मुस्लिम प्रधानमंत्री बन सकती हैं. शबाना महमूद पाकिस्तानी मूल की ब्रिटिश नागरिक हैं और उन्होंने आर्टिकल 370 को हटाने जाने का विरोध किया था. उन्होंने कश्मीर को लेकर कई बार भारत विरोधी तेवर दिखाया है, ऐसे में उनके प्रधानमंत्री बनने से क्या भारत और यूके के संबंधों पर असर पड़ सकता है? कौन है शबाना महमूद? शबाना महमूद लेबर पार्टी की तेज तर्रार नेता हैं. वह महज 45 साल की हैं. उनका जन्म इंग्लैंड के बर्मिंघम में हुआ है और वे एक पाकिस्तानी मूल के माता–पिता की संतान हैं. शबाना ने ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से कानून की पढ़ाई की है और शुरुआत में पेशे से वकील रही हैं और बाद में उन्होंने राजनेता बनने की ओर कदम बढ़ा दिया. शबाना का परिवार पीओके के मीरपुर से वास्ता रखता है. उनके पिता सिविल इंजीनियर हैं. शबाना ने शादी नहीं की है और अपने 4 भाई-बहनों में वो सबसे बड़ी हैं. 2010 में वे पहली बार संसद सदस्य (MP) के रूप में चुनी गईं. शबाना महमूद लेबर पार्टी की सदस्य हैं और कई महत्वपूर्ण पदों पर भी रह चुकी है. वर्तमान में वो होम सेक्रेटरी के तौर पर कार्यरत हैं. ब्रिटेन में होम सेक्रेटरी को भारत के गृहमंत्री के समकक्ष माना जा सकता है, लेकिन उसकी भूमिका विदेश नीतियों में भी अहम होती है. 2024 में शबाना ने न्याय मंत्री (Justice Secretary) और लॉर्ड चांसलर (Lord Chancellor) के रूप में भी सेवा दी. ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर की कुर्सी पर खतरा क्यों मंडराया? ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर सुपरमेरी जीत(बड़ी जीत) के साथ 5 जुलाई 2024 को ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बने थे, लेकिन एपस्टीन फाइल्स ने उनके लिए परेशानी खड़ी कर दी है. दरअसल कीर स्टारमर की परेशानी की वजह हैं पीटर मैंडेलसन. पीटर मैंडेलसन को कुछ समय पहले अमेरिका में ब्रिटिश राजदूत नियुक्त किया गया था और मैंडेलसन के संबंध जेफ्री एपस्टीन से थे. एपस्टीन फाइल्स में यह बताया गया है कि कि मैंडेलसन ने कई संवेदनशील जानकारी एपस्टीन को मेल की थी. इस मुद्दे को लेकर ब्रिटेन में बड़ा बवाल मचा हुआ है और प्रधानमंत्री की इस बात को लेकर आलोचना हो रही है कि आखिर उन्होंने ऐसे व्यक्ति की नियुक्ति क्यों की. पीटर मैंडेलसन को पद से हटा दिया गया है, लेकिन ब्रिटेन में प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग हो रही है. हालांकि कीर स्टारमर ने इस्तीफा देने से मना किया है, लेकिन उनपर इस्तीफे का दबाव बहुत बढ़ गया है. शबाना महमूद अगर ब्रिटेन की पीएम बनी, तो भारत के साथ बिगड़ेंगे संबंध? शबाना महमूद पाकिस्तानी मूल की राजनेता हैं. इसी वजह से एक आम भारतीय के मन में यह सवाल है कि क्या शबाना महमूद के प्रधानमंत्री बनने से भारत के साथ ब्रिटेन के संबंध बिगड़ सकते हैं? इस शंका के बीच हमें कुछ बातों को समझना होगा. सबसे बड़ी बात यह है कि किसी भी देश की राजनीति और वहां की नीतियां राष्ट्रीय हित के अनुसार तय होती हैं ना कि किसी व्यक्ति के धर्म और उसके सोच के आधार पर. इस स्थिति में अगर शबाना महमूद ब्रिटेन की प्रधानमंत्री बन भी जाती हैं, तो उनकी व्यक्तिगत राय का असर भारत और ब्रिटेन के संबंधों पर पर पड़ेगा इसकी संभावना शून्य है.

वलयाकार सूर्य ग्रहण 17 फरवरी को, ग्रहों की चाल से इन राशियों पर पड़ेगा भारी असर

फरवरी में साल का पहला सूर्य ग्रहण 17 फरवरी को फाल्गुन अमावस्या के दिन पड़ रहा है. यह एक वलयाकार यानी रिंग ऑफ फायर सूर्य ग्रहण होगा. खगोलीय जानकारी के अनुसार यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां इसका सूतक काल मान्य नहीं माना जाएगा. ग्रहण दोपहर 3 बजकर 26 मिनट से शुरू होकर शाम 7 बजकर 57 मिनट तक रहेगा. यह मुख्य रूप से अंटार्कटिका, अफ्रीका के कुछ इलाकों और दक्षिण अटलांटिक महासागर के ऊपर दिखाई देगा. साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण किस राशि और नक्षत्र में लगेगा ज्योतिषीय दृष्टि से यह सूर्य ग्रहण कुंभ राशि और शतभिषा नक्षत्र में लग रहा है. ऐसे में इस राशि और नक्षत्र से जुड़े लोगों को विशेष सतर्क रहने की सलाह दी जाती है. सेहत और पैसों से जुड़े मामलों में लापरवाही नुकसान दे सकती है. इस दौरान लिए गए फैसले बाद में गलत साबित हो सकते हैं, इसलिए किसी भी बड़े निर्णय से पहले अच्छी तरह सोच-विचार करना जरूरी होगा. आंख मूंदकर किसी पर भरोसा करना ठीक नहीं रहेगा. सूर्य ग्रहण से इन राशियों को रहना होगा सावधान साल 2026 के पहले सूर्य ग्रहण का प्रभाव कुछ राशियों पर देखने को मिल सकता है. जिसमें सिंह राशि वालों को दांपत्य जीवन और साझेदारी के काम में सावधानी रखनी होगी. वृश्चिक राशि के लोगों को पारिवारिक मामलों और माता के स्वास्थ्य को लेकर सतर्क रहना होगा. कुंभ राशि के लिए मानसिक दबाव और उलझन की स्थिति बन सकती है, जिससे काम अटक सकते हैं. वहीं, मकर राशि वालों को धन संबंधी मामलों में संभलकर कदम उठाने की जरूरत है, खासकर निवेश करते समय विशेषज्ञ की राय लेना बेहतर रहेगा. सूर्य ग्रहण के दौरान जरूर करें ये काम 1. ग्रहण के समय धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सूर्य मंत्र या महामृत्युंजय मंत्र का जप करना शुभ माना जाता है.  2. ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान और दान करना भी लाभकारी बताया गया है.  3. इस दौरान भोजन बनाने या खाने से बचने की परंपरा है.  4. खासकर गर्भवती महिलाओं को सावधानी रखने और तेज या नुकीली वस्तुओं का उपयोग न करने की सलाह दी जाती है.

बाबरी मस्जिद विवाद से जुड़े हुमायूं कबीर के समधी की संपत्ति जब्त, ड्रग मामले में कार्रवाई

  कोलकाता पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में निलंबित तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेता और भरतपुर से विधायक हुमायूं कबीर के परिवार से जुड़ा मामला सियासी और कानूनी दोनों ही मोर्चों पर तूल पकड़ता जा रहा है. जिस समय हुमायूं कबीर द्वारा ‘बाबरी मस्जिद’ के नाम से एक नई मस्जिद के निर्माण की शुरुआत की तैयारी चल रही थी, उससे ठीक दो दिन पहले राज्य पुलिस ने उनकी बेटी के ससुर शरीफुल इस्लाम से जुड़ी करीब 10 करोड़ रुपये की संपत्तियों को जब्त कर लिया. यह कार्रवाई ड्रग तस्करी से जुड़े एक मामले में अदालत के आदेश के बाद की गई. पुलिस के अनुसार, शरीफुल इस्लाम के एक रिश्तेदार जियाउर रहमान को इस्लाम के घर के पास से करीब 500 ग्राम नशीले पदार्थों के साथ गिरफ्तार किया गया था. इसी मामले की जांच के तहत संपत्तियों को एनडीपीएस (नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस) एक्ट के तहत अटैच किया गया है. हुमायूं कबीर ने इस पूरी कार्रवाई को राजनीतिक साजिश करार देते हुए कहा कि उन्हें और उनके परिवार को राजनीतिक रूप से अपमानित करने के लिए झूठे मामले में फंसाया गया है. वहीं, उनकी बेटी नजमा सुल्ताना ने पुलिस पर परिवार को लगातार नोटिस भेजकर परेशान करने का आरोप लगाया. उन्होंने दावा किया कि यह कार्रवाई मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के इशारे पर की जा रही है और इसका मकसद उनके पिता को राजनीतिक रूप से दबाव में लाना है. भारी पुलिस बल ने  लालगोला बस स्टैंड से सटे इलाके में शरीफुल इस्लाम से जुड़ी कई संपत्तियों को जब्त करने की प्रक्रिया शुरू की, जिसमें एक होटल और एक आवासीय मकान शामिल है. यह कार्रवाई करीब दो घंटे तक चली. इसके बाद मंगलवार को भी सुबह से ही लालगोला थाने की पुलिस ने हुमायूं कबीर की बेटी के ससुराल पक्ष की संपत्तियों को सील करने की प्रक्रिया शुरू कर दी. पुलिस ने जिले के अलग-अलग इलाकों में स्थित कुल छह संपत्तियों को सील किया, जिनकी अनुमानित कीमत लगभग 8 करोड़ रुपये बताई जा रही है. दूसरे दिन सील की गई संपत्तियों में ईंट भट्टे और व्यावसायिक दुकानें शामिल हैं. इस तरह पुलिस ने दो दिनों में हुमायूं कबीर की बेटी के ससुराल पक्ष की कुल 18 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियों पर कार्रवाई की है. स्थानीय सूत्रों के अनुसार, शरीफुल इस्लाम लालगोला पंचायत क्षेत्र के नलदहारी इलाके के निवासी हैं. पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे इलाके में ड्रग्स की तस्करी और उससे अर्जित संपत्तियों की जांच की जा रही है तथा जब्त की गई संपत्तियों को आगे नीलाम किया जाएगा. सूत्रों का दावा है कि शरीफुल इस्लाम ने ड्रग तस्करी के जरिए 100 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति अर्जित की है और मुर्शिदाबाद के अलावा कोलकाता में भी उनके फ्लैट और मकान हैं. उन्हें पहले भी दो बार ड्रग तस्करी के मामलों में गिरफ्तार किया जा चुका है. बता दें कि हुमायूं कबीर ने 6 दिसंबर 2025 को अयोध्या में विवादित ढांचे के ध्वंस की बरसी के दिन बाबरी मस्जिद के मॉडल पर बनने वाली मस्जिद की आधारशिला रखी थी. मस्जिद निर्माण कार्य 11 फरवरी को कुरान तिलावत के बाद शुरू होने वाला है, जिसमें करीब 5,000 लोगों के शामिल होने की संभावना है. टीएमसी द्वारा मस्जिद निर्माण का विरोध किए जाने के बाद हुमायूं कबीर को पार्टी से निलंबित कर दिया गया था. इसके बाद उन्होंने अपनी नई पार्टी ‘जनता उन्नयन पार्टी’ (JUP) बनाई और आगामी विधानसभा चुनाव में करीब 135 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान किया है. वहीं, बीजेपी उन्हें अक्सर सत्तारूढ़ दल की ‘बी-टीम’ बताकर निशाना बनाती रही है.

सोमनाथ में 1000 साल बाद महाशिवरात्रि का भव्य आयोजन, 5 लाख श्रद्धालु होंगे शामिल

अहमदाबाद महाशिवरात्रि के अवसर पर इस वीकेंड पर गुजरात के विश्वप्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर में करीब 5 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है. अधिकारियों के मुताबिक, पिछले महीने आयोजित ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ के बाद से मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है. कैलाश खेर समेत कई कलाकार देंगे प्रस्तुति 15 फरवरी को महाशिवरात्रि के मद्देनजर सोमनाथ मंदिर में तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं. गिर सोमनाथ जिले के कलेक्टर एनवी उपाध्याय ने सोमवार को बताया कि भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा और सुविधाओं को लेकर बड़े पैमाने पर इंतजाम किए जा रहे हैं.गुजरात पर्यटन निगम की ओर से 14, 15 और 16 फरवरी को सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाएगा, जिसमें प्रसिद्ध गायक कैलाश खेर समेत देशभर के कलाकार प्रस्तुति देंगे. सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के बाद बढ़ी दर्शनार्थियों की संख्या उन्होंने बताया कि ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ 8 से 11 जनवरी के बीच आयोजित किया गया था, जो जनवरी 1026 में सोमनाथ मंदिर पर हुए पहले ऐतिहासिक हमले के 1000 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में एक राष्ट्रीय आयोजन था. इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शामिल हुए थे. उपाध्याय के अनुसार, पहले जहां रोजाना करीब 20 हजार श्रद्धालु मंदिर आते थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर लगभग 75 हजार प्रतिदिन हो गई है. महाशिवरात्रि के मुख्य दिन करीब 5 लाख श्रद्धालुओं के दर्शन के लिए आने की उम्मीद है. 10 गेटों पर सुरक्षा जांच के प्रबंध भीड़ प्रबंधन के लिए सुरक्षा जांच गेट की संख्या 6 से बढ़ाकर 10 कर दी गई है. दर्शन को सुचारु बनाने के लिए वन-वे एंट्री और एग्जिट सिस्टम लागू किया जाएगा. आपात स्थिति से निपटने के लिए 24 घंटे मेडिकल टीमें तैनात रहेंगी. इसके अलावा मंदिर परिसर के पार्किंग क्षेत्र में बड़े स्तर पर भंडारे और प्रसाद वितरण के लिए अतिरिक्त काउंटर लगाए जाएंगे. गुजरात पर्यटन निगम की ओर से 14, 15 और 16 फरवरी को सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाएगा, जिसमें प्रसिद्ध गायक कैलाश खेर समेत देशभर के कलाकार प्रस्तुति देंगे.

बिजली वितरण कंपनियों पर भारी बोझ: MP पर 71 हजार करोड़ का घाटा, देश में कहां है स्थान?

भोपाल  मध्य प्रदेश की बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) की आर्थिक स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। केंद्र सरकार की ताजा रिपोर्ट के अनुसार राज्य की तीनों बिजली वितरण कंपनियों पर मार्च 2025 तक 49 हजार करोड़ से अधिक का कर्ज हैं। वहीं, तीनों को कुल 71,395 करोड़ रुपये का घाटा हो चुका है। इस भारी नुकसान के साथ मध्य प्रदेश देश में बिजली वितरण के मामले में चौथे सबसे अधिक घाटे वाले राज्यों में शामिल हो गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि समय रहते सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो प्रदेश की बिजली वितरण व्यवस्था पर और अधिक वित्तीय दबाव बढ़ सकता है, जिसका असर आम उपभोक्ताओं पर भी पड़ सकता है। यह जानकारी बिजली राज्य मंत्री श्रीपाद नाइक ने राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में दी।   एक कंपनी पर सबसे ज्यादा बोझ राज्य की सबसे बड़ी बिजली वितरण कंपनी मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड (एमपीएमकेवीवीसीएल) पर अकेले 30,900 करोड़ रुपये का घाटा दर्ज है। यह नुकसान कई छोटे राज्यों के कुल घाटे से भी अधिक बताया जा रहा है। वहीं, पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी पर लगभग 27,992 करोड़ रुपये का घाटा है। पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी को करीब 12,503 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है। तीनों कंपनियों का संयुक्त घाटा प्रदेश की बिजली व्यवस्था की कमजोर आर्थिक स्थिति को दर्शाता है। देश में कहां है मध्य प्रदेश राष्ट्रीय स्तर पर डिस्कॉम ने वर्ष 2025 में 2,701 करोड़ रुपए का कर पश्चात मुनाफा दर्ज किया है, लेकिन एमपी समेत कई राज्यों के लिए पुराने कर्ज और घाटे की भरपाई करना चुनौती बना हुआ है। बिजली वितरण कंपनियों के कुल घाटे के मामले में पहले स्थान पर तमिलनाडु है। वहीं, दूसरे नंबर पर उत्तरप्रदेश, तीसरे नंबर पर राजस्थान और चौथे नंबर पर मध्य प्रदेश है।    घाटे के पीछे ये कारण विशेषज्ञों के अनुसार बिजली कंपनियों के घाटे के मुख्य कारणों में तकनीकी और वाणिज्यिक नुकसान, बिजली दरों में समय पर संशोधन न होना, सरकारी विभागों का बकाया भुगतान और सब्सिडी की देर से भरपाई शामिल हैं। 

देवी अहिल्याबाई होलकर विमानतल पर फास्टैग से शुल्क कटने की दिक्कत, सात मिनट की छूट नहीं बनी वास्तविक राहत

 इंदौर देवी अहिल्याबाई होलकर अंतरराष्ट्रीय विमानतल पर यात्रियों की सुविधा के लिए शुरू की गई फास्टैग पार्किंग व्यवस्था परेशानी का कारण बन गई है। एयरपोर्ट अथॉरिटी ने कहने को तो ‘पिक एंड ड्राप’ के लिए सात मिनट और 59 सेकंड की समय-सीमा तय कर रखी है, लेकिन हकीकत यह है कि निकास द्वार (एग्जिट गेट) पर लगने वाली वाहनों की लंबी कतार के कारण यह छूट बेमानी साबित हो रही है। यदि कोई वाहन चालक समय रहते अपने स्वजन को छोड़कर बाहर निकलने की कोशिश भी करे तो कतार में खड़े-खड़े ही समय की सीमा पार हो जाती है और गेट पर पहुंचते ही फास्टैग से शुल्क कट जाता है। दरअसल, इंदौर एयरपोर्ट पर प्रवेश करते ही ऑनलाइन फास्टैग से एंट्री हो जाती है। निकासी के दौरान फास्टैग के तय समय से अधिक होने पर पार्किंग शुल्क काट लिया जाता है। समय की गणना के लिए यात्री के पास किसी तरह की रसीद नहीं होती है। पार्किंग शुल्क 20 से 55 रुपये वसूल हो रहा निकास द्वार पर तैनात कर्मचारी केवल कंप्यूटर स्क्रीन का हवाला देकर पल्ला झाड़ लेते हैं। कई बार निकासी द्वार पर लंबी कतार के कारण वाहन चालकों को पांच से सात मिनट का समय लग जाता है। कई यात्रियों ने शिकायत की है कि प्रवेश और निकास के बीच महज कुछ सेकंड की देरी होने पर भी सिस्टम पार्किंग शुल्क 20 से 55 रुपये वसूल रहा है। फास्टैग और कैश की लाइन अलग-अलग करना चाहिए एयरपोर्ट एडवाइजरी कमेटी सदस्य सावन लड्ढा का कहना है कि पिक एंड ड्राप के दौरान हमेशा विवाद की स्थिति बनती है। एंट्री और एग्जिट की व्यवस्था अलग होने तक फास्टैग और कैश की लाइन अलग-अलग करना चाहिए। इससे फास्टैग वाले वाहनों को निकलने में देरी नहीं होगी। डबल डिडक्शन की गड़बड़ी भी सामने आ रही कैश के साथ फास्टैग भी पार्किंग में एक और बड़ी गड़बड़ी डबल डिडक्शन की सामने आ रही है। यदि कोई यात्री फास्टैग काम न करने की स्थिति में या जल्दबाजी में नकद भुगतान कर देता है तो भी सेंसर वाहन का नंबर स्कैन कर फास्टैग से पैसे काट लेता है। ऐसे मामलों में रिफंड की प्रक्रिया इतनी जटिल है कि अधिकांश यात्री चंद रुपयों के लिए शिकायत दर्ज कराने का झंझट ही नहीं पालते। मनीष कुमार ने बताया कि जनवरी में एयरपोर्ट पर उन्होंने नकद शुल्क दिया था, बाद में फास्टैग से भी शुल्क कट गया। जाम में फंसी सुविधा एयरपोर्ट पर पार्किंग और पिकअप पाइंट के बीच का ट्रैफिक मैनेजमेंट पूरी तरह फेल नजर आता है। क्या कह रहे हैं विशेषज्ञ पीक आवर्स के दौरान जब उड़ानों का दबाव ज्यादा होता है, तब सात मिनट के भीतर एयरपोर्ट परिसर से बाहर निकलना लगभग नामुमकिन है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक निकास द्वारों की संख्या नहीं बढ़ाई जाती और कतार में लगने वाले समय को शुल्क से मुक्त नहीं किया जाता, तब तक यात्रियों की जेब इसी तरह कटती रहेगी।     पिक एंड ड्रॉप में शुल्क लेने की शिकायतें आई थीं और एयरपोर्ट एडवाइजरी कमेटी की बैठक में इस समस्या को रखा था। यदि अभी भी शिकायत आ रही है, तो अधिकारियों से सुधार के लिए बात करेंगे। एंट्री और एग्जिट की व्यवस्था अलग की जा रही है। बिजासन माता मंदिर की तरफ से एग्जिट रहेगा। इसके बाद समस्या का समाधान हो जाएगा।     – शंकर लालवानी, सांसद  

MP से अमृतसर और बैंकाक के लिए सीधी उड़ान, इस महीने से शुरू होगा संचालन

इंदौर   इंदौर के देवी अहिल्याबाई होलकर एयरपोर्ट (Devi Ahilyabai Holkar Airport) पर अप्रैल से लागू होने वाले समर शेड्यूल में कई नई उड़ानें मिलने की उम्मीद है। अमृतसर से लेकर बैंकाक तक की फ्लाइट मिल सकती है। 26 अक्टूबर से शुरू हुए विंटर शेड्यूल में 6 नई घरेलू फ्लाइट शुरू हुई, लेकिन एक भी नई इंटरनेशनल उड़ान नहीं मिली थी। मालूम हो दुबई, थाइलैंड और सिंगापुर की डिमांड बहुत है शहर से एक मात्र शारजाह इंटरनेशनल उड़ान का संचालन होता है। तीन साल से थाइलैंड और सिंगापुर के लिए डिमांड है तो दुबई उड़ान फिर से शुरू करने की मांग है। कई बार जनप्रतिनिधि और एयरपोर्ट प्रबंधन इनको लेकर पहल कर चुका है। अभी दिल्ली-मुंबई जाने की मजबूरी वर्तमान में मुंबई, दिल्ली जैसे शहरों से इन देशों के लिए जाना पड़ता है। यह महंगा होने के साथ समय भी ज्यादा लगता है। बीते साल एक एयरलाइंस ने बैंकाक की उड़ान की तैयारी कर सभी औपचारिकता पूरी कर ली थी, लेकिन जानकारों ऐनवक्त पर नहीं चली। एयरपोर्ट के सकती है। इधर, अमृतसर, कोच्ची और के अनुसार इस बार बैंकाक की उड़ान मिल बागडोगरा की भी उड़ानें शुरू हो सकती हैं। जोधपुर जहां बंद हो चुकी है तो उदयपुर, नासिक की उड़ानें भी बंद हो सकती हैं। सर्वे में पता चली डिमांड अक्टूबर में एयरपोर्ट की एडवाइजरी कमेटी की ने कई रूट को लेकर सर्वे बैठक में पता चला था कि एक एयरलाइंस किया था। इसमें बैंकॉक, दुबई और सिंगापुर उड़ान की मांग आई थी। सांसद शंकर लालवानी, अधिकारियों और समिति के सदस्यों ने आश्वासन दिया था कि उड़ान शुरू हो जाएगी। मार्च में बढ़ जाएगी एयरपोर्ट की क्षमता अप्रेल में समर शेड्यूल लागू होगा, इसके पहले मार्च में रनवे का काम पूरा हो जाएगा जिससे एयरपोर्ट 24 घंटे चालू रहेगा। इतना ही नहीं पुराने टर्मिनल भी नए रूप में शुरू हो जाएगा। इससे उड़ानें बढ़ने पर सुविधाएं भी मिल जाएंगी।  थाइलैंड, दुबई और सिंगापुर की डिमांड से एयरलाइंस और एयरपोर्ट प्रबंधन को हमने डिमांड भेजी बैंकाक, अमृतसर, कोच्ची, बागडोगरा उड़ान मिलने की उम्मीद है। – हेमेन्द्र जादौन, अध्यक्ष, ट्रेवल एसोसिएशन ऑफ इंडिया एमपी-सीजी

ISRO ने चंद्रयान-4 के लिए चांद के साउथ पोल में लैंडिंग साइट निर्धारित की, लैंड रोवर भेजेगा

बेंगलुरु  भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो (ISRO) अपने अगले बड़े चंद्र मिशन की तैयारी में तेजी से जुट गया है. चंद्रयान-4 मिशन के लॉन्च होने में भले ही अभी करीब दो साल बाकी हैं, लेकिन इसकी सबसे अहम तैयारियों को पूरा कर लिया गया है. इसरो ने चंद्रमा के साउथ पोल में लैंडिंग के लिए एक सुरक्षित जगह भी चुन ली है. केंद्र सरकार पहले ही चंद्रयान-4 मिशन को मंजूरी दे चुकी है. यह मिशन भारत का पहला लूनर सैंपल रिटर्न मिशन होगा. इसका मतलब है कि इस बार चंद्रमा की मिट्टी और चट्टानों के सैंपल को पृथ्वी पर लाया जाएगा. इस कारण से इस मिशन यानी चंद्रयान-4 को अभी तक का सबसे मुश्किल लूनर मिशन यानी चंद्र मिशन माना जा रहा है. इसरो प्रमुख वी नारायणन पहले ही साफ कर चुके हैं कि चंद्रयान-4 को साल 2028 में लॉन्च करने का लक्ष्य रखा गया है. इस मिशन के वैज्ञानिकों ने चंद्रमा के साउथ पोल वाले इलाके में स्थित मॉन्स मूटन क्षेत्र का गहराई से अध्ययन किया. इस क्षेत्र में चार संभावित लैंडिंग साइट्स की पहचान की गई है, जिनके नाम MM-1, MM-3, MM-4 और MM-5 रखे गए. MM-4 साइट सबसे सुरक्षित इन सभी जगहों का अध्ययन इसरो के हाई-रिजॉल्यूशन ऑर्बिटर हाई रेजॉल्यूशन कैमरा की मदद से किया गया है. अलग-अलग एंगल से ली गई तस्वीरों और डेटा के आधार पर वैज्ञानिकों ने जमीन की ढलान, ऊंचाई और खतरे की संभावना को परखा. इस जांच में MM-4 साइट सबसे सुरक्षित पाई गई. इसरो अधिकारियों के मुताबिक MM-4 के आसपास एक किलोमीटर के क्षेत्र में खतरे वाली जगहें सबसे कम हैं. यहां जमीन की औसत ढलान करीब 5 डिग्री है, जो लैंडिंग के लिए काफी सुरक्षित मानी जाती है. इस जगह की औसत ऊंचाई 5334 मीटर है और यहां 24 मीटर गुणा 24 मीटर के कई ऐसे ग्रिड मिले हैं, जहां बिना किसी रुकावट के लैंडर उतारा जा सकता है. चंद्रयान-4 मिशन में कुल पांच मॉड्यूल होंगे. इनमें प्रोपल्शन मॉड्यूल, डिसेंडर मॉड्यूल, असेंडर मॉड्यूल, ट्रांसफर मॉड्यूल और री-एंट्री मॉड्यूल शामिल हैं. डिसेंडर और असेंडर मॉड्यूल मिलकर चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग करेंगे. इसके बाद सैंपल इकट्ठा किए जाएंगे और उन्हें सुरक्षित तरीके से पृथ्वी तक वापस लाया जाएगा. इस मिशन की सफलता भारत को चंद्र अन्वेषण (Moon Exploration) के क्षेत्र में दुनिया के चुनिंदा देशों की कतार में खड़ा कर देगी.

भोपाल वृत्‍त में 3 लाख उपभोक्ताओं को मिली 2 करोड़ रुपये से अधिक की राहत

भोपाल वृत्‍त के लगभग 3 लाख उपभोक्‍ताओं को जनवरी में 2 करोड़ से अधिक की छूट स्‍मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को मिला सोलर ऑवर में 20 प्रतिशत छूट का लाभ भोपाल  मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा कंपनी कार्य क्षेत्र में 5 लाख 20  हजार 457 स्‍मार्ट मीटर उपभोक्‍ताओं को उनके मासिक विद्युत बिल में टाइम ऑफ डे छूट का लाभ प्रदान करते हुए जनवरी 2026 में कुल 3 करोड़ 61 लाख 26 हजार की रियायत प्रदान की गई है। इसमें भोपाल शहरी एवं ग्रामीण वृत्‍त के 2 लाख 97 हजार 813 उपभोक्‍ताओं को 2 करोड़ 10 लाख 66 हजार रूपए की दिन के टैरिफ में छूट मिली है। कंपनी द्वारा स्‍मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को उनकी खपत के आधार पर टाइम ऑफ डे छूट के तहत यह रियायत प्रदान की गई है।   मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा स्मार्ट मीटरिंग पहल के अंतर्गत माह जनवरी 2026 के दौरान यह छूट प्रदान की गई है। दिन के टैरिफ में स्‍मार्ट मीटर उपभोक्‍ताओं के लिए यह सभी छूट अथवा प्रोत्साहन की गणना सरकारी सब्सिडी (यदि कोई हो) को छोड़कर की जा रही है। कंपनी ने उपभोक्‍ताओं से अपील की है कि वे अपने परिसर में स्‍मार्ट मीटर लगाने में सहयोग करें और स्‍मार्ट मीटर लगवाने से न घबराएं। स्‍मार्ट मीटर उनके लिए हर तरह से फायदेमंद है और स्‍मार्ट मीटर की सटीक रीडिंग और बिलिंग के साथ ही कार्यप्रणाली में भी किसी प्रकार की गड़बड़ी की कोई गुंजाइश नहीं है। स्मार्ट मीटर से बिजली उपभोक्‍ताओं को ऊर्जा की खपत को ट्रैक करने और ऊर्जा की बचत करने में मदद मिलती है। स्‍मार्ट मीटर बिजली की खपत को सटीक रूप से मापता है, जिससे बिल में कोई गलती नहीं होती। ऐप से मोबाइल पर रियल-टाइम डेटा देखकर ऊर्जा की खपत को नियंत्रित किया जा सकता है। उपभोक्‍ताओं को ऊर्जा की गुणवत्ता के बारे में जानकारी मिलती है, जिससे ऊर्जा की खपत को बेहतर बनाया जा सकता है। उपभोक्‍ता ऊर्जा की खपत को ऑनलाइन मोबाइल एप के द्वारा किसी भी समय कहीं से भी देख सकते हैं। स्‍मार्ट मीटर ऊर्जा की खपत को कम करने में सहायक होकर पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को भी कम करता है।  

भोपाल को मिलेगा नया पुलिस थाना, कजली खेड़ा से सुरक्षा व्यवस्था में सुधार

भोपाल  राजधानी भोपाल के नगरीय क्षेत्र में एक और थाना बहुत जल्दी बढ़ने वाला है। दरअसल राज्य सरकार ने पुलिस मुख्यालय के प्रस्ताव पर कोलार के ग्रामीण क्षेत्र कजलीखेड़ा पुलिस चौकी को उन्नयन कर थाना बनाने की मंजूरी प्रदान कर चुक है। लेकिन थाना अभी तक संचालित नहीं हो सका है। भोपाल पुलिस आयुक्त संजय कुमार ने अतिरिक्त पुलिस आयुक्त अवधेश गोस्वामी, डीसीपी जोन-4 मयूर खंडेलवाल, एडीसीपी जोन-4 मलकीत सिंह के साथ कोलार थाने का निरीक्षण किया और व्यवस्थाएं देखीं।  पुलिस आयुक्त संजय कुमार ने एक-दो दिन में कजलीखेड़ा थाने को व्यवस्थाएं कर शुरू करने के निर्देश दिए हैं। पुलिस आयुक्त संजय कुमार ने कहा कि कोलार थाना क्षेत्र क्षेत्रफल की दृष्टि से बड़ा है और ग्रामीण क्षेत्र भी शामिल होने के कारण काम का बोझ अधिक है। उन्होंने कहा कि गांवों में पुलिस की तुरंत उपस्थिति के लिए कजलीखेड़ा थाने का संचालन शुरू किया जाए।  उल्लेखनीय है कि कजलीखेड़ा पहले पुलिस सहायता केंद्र था। वर्तमान में वह चौकी है। और वहां उप निरीक्षक केशांत शार्मा पदस्थ हैं। पुलिस आयुक्त ने थाना प्रभारी सहित 13 पुलिसकर्मियों को फिलहाल कोलार थाने से ही कजलीखेड़ा में पदस्थ किया जा रहा है। संभावना है कि बाद में नया थाना प्रभारी भी लाइन से भेजा जाए। पुलिस सूत्रों की मानें तो औपचारिकताएं पूरी होने के बाद फरवरी माह के अंत तक कजलीखेड़ा थाने का संचालन शुरू होने की संभावना है।  यह पुलिसकर्मी नए थाने में होंगे पदस्थ कोलार थाने से अलग होकर कजलीखेड़ा थाने में उप निरीक्षक सहित 13 पुलिसकर्मी पदस्थ किए जा रहे हैं। वर्तमान कजलीखेड़ा चौकी प्रभारी केशांत शर्मा को ही फिलहाल थाने की कमान सौंपी जा रही है। केशांत शर्मा के साथ एएसआई ⁠एएसआई रूपेश नर्रे, संतोष कुमार, ⁠प्रधान आरक्षक देवकीनंदन, सन्तोष यादव, रंजीत, महेश परमार के साथ आरक्षक रविन्द्र तोमर, रविन्द्र मालवीय, राजेश जाटव, ⁠प्रदीप यदुवंशी, ⁠जितेंद्र गुर्जर और ⁠महिला आरक्षक राधिका को नए थाने में पदस्थ करने संबंधी आदेश जारी किए गए हैं।

आगे की उड़ान: 6th जनरेशन के फाइटर प्लेन कैसे होंगे 5वीं पीढ़ी से ज्यादा शक्तिशाली?

नई दिल्ली दूसरे विश्व युद्ध के प्रोपेलर वाले एयरक्राफ्ट से लेकर आज के स्टील्थ फाइटर जेट तक पिछले 8 दशकों में हवाई युद्ध में जबरदस्त बदलाव देखने को मिला है. फाइटर जेट्स की पांचवीं पीढ़ी जो रडार से बचने वाले, सेंसर से लैस एयरक्राफ्ट हैं, पहले ही उन सीमाओं को पार कर चुके हैं जिन्हें कभी मुमकिन माना जाता था. लेकिन अब दुनिया की बड़ी ताकतें छठी पीढ़ी के फाइटर जेट पर तेजी से कम कर रही हैं. हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप ने भी अमेरिका के नए F-47 को दुनिया का सबसे विनाशकारी एयरक्राफ्ट बताया था. आपको बता दें कि यह एयरक्राफ्ट भी छठी पीढ़ी का ही है. इसी बीच आइए जानते हैं कि आखिर कैसे होंगे छठी जनरेशन के फाइटर प्लेन. पांचवीं पीढ़ी से छलांग F-35 और F-22 जैसी पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट्स ने स्टील्थ, सेंसर फ्यूजन और एडवांस्ड एविएशन को पेश किए हैं. अब नई पीढ़ी के एयरक्राफ्ट से इससे कहीं आगे जाने की उम्मीद की जा रही है. यह कोई सिंपल अपग्रेड नहीं होगा बल्कि एक क्वांटम छलांग होगी. बिना पायलट और ऑप्शनल पायलट वाला कॉम्बैट  छठी पीढ़ी के जेट्स की सबसे खास विशेषता यह है कि इसमें ऑप्शनल मैनिंग होगी. इन एयरक्राफ्ट को पायलट उड़ा सकता है, रिमोट से कंट्रोल किया जा सकता है, या पूरी तरह से बिना पायलट के ऑपरेट किया जा सकता है. वे ऑटोनॉमस सपोर्ट ड्रोन के झुंड को भी कमांड करेंगे. इन्हें अक्सर लॉयल विंगमैन सिस्टम कहा जाता है. यह मुख्य फाइटर के साथ टोही, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध या हमले के मिशन कर सकते हैं. कोर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस  छठी पीढ़ी के फाइटर जेट्स में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस होगा. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम पायलटों की मदद करेंगे, युद्ध के मैदान के भारी मात्रा में डाटा का रियल टाइम में एनालिसिस करेंगे, रडार जैमिंग को मैनेज करेंगे, खतरों को भी प्रायोरिटी पर रखेंगे और यहां तक की तेज गति वाली लड़ाई के दौरान  टैक्टिकल फैसलों की भी सलाह देंगे.  नेक्स्ट लेवल स्टील्थ और रेडिकल डिजाइन स्टील्थ टेक्नोलॉजी में काफी सुधार किया जाएगा. छठी पीढ़ी के एयरक्राफ्ट को रडार, इंफ्रारेड और इलेक्ट्रॉनिक स्पेक्ट्रम में पता लगाना और भी मुश्किल होने की उम्मीद है. कुछ डिजाइन पारंपरिक वर्टिकल स्टेबलाइजर को पूरी तरह से हटा सकते हैं. इससे ड्रैग और रडार रिफ्लेक्शन कम होगा और एफिशिएंसी और सर्वाइवल में काफी ज्यादा सुधार होगा.  लेजर और डायरेक्टेड एनर्जी हथियार  पांचवीं पीढ़ी के जेट्स मुख्य रूप से मिसाइल पर निर्भर करते हैं. लेकिन छठी पीढ़ी के फाइटर जेट्स डायरेक्टेड एनर्जी हथियार ले जाएंगे. इसमें हाई एनर्जी लेजर और माइक्रोवेव सिस्टम शामिल हैं. यह हथियार लाइट की स्पीड से टारगेट को निशाना बना सकते हैं.  

भारत का सशक्त कदम: सिंधु नदी पर बांधों का जाल और पाकिस्तान की बढ़ती मुश्किलें

नई दिल्ली ऑपरेशन सिंदूर के बाद अगर आपने सोचा होगा क‍ि भारत ने पाक‍िस्‍तान की ओर ध्‍यान देना बंद कर द‍िया है तो रुक‍िये… भारत ने जम्मू-कश्मीर की बर्फीली वादियों से बहने वाली चिनाब, झेलम और सिंधु नदी पर कुछ ऐसा क‍िया है क‍ि अगले कुछ महीनों बाद पाक‍िस्‍तान की सांसें अटक जाएंगी. सिंधु जल संध‍ि पर कंप्‍लीट ब्रेक के बाद मोदी सरकार ने इन नद‍ियों पर बांधों का जाल बिछाना शुरू कर द‍िया है. एक दो नहीं, बल्‍क‍ि कई बड़े बांध बनाए जा रहे हैं. सबको इमरजेंसी मोड में पूरा करने को कहा गया है. बजट पहले से अलॉट कर द‍िया गया है. टाइम फ‍िक्‍स है. साफ है क‍ि भारत अब अपनी नदियों के पानी की एक-एक बूंद का हिसाब रखेगा. पाक‍िस्‍तान के ल‍िए यह क‍िसी सर्जिकल स्‍ट्राइक से कम नहीं. वो प्रोजेक्‍ट जो पाक‍िस्‍तान का हलक सुखा देंगे च‍िनाब नदी सवलकोट हाइड्रो पावर प्रोजेक्‍ट     सवलकोट प्रोजेक्‍ट को चिनाब नदी पर भारत का सबसे महत्वाकांक्षी कदम माना जा रहा है. यह प्रोजेक्ट ऊधमपुर और रामबन जिलों में फैला हुआ है. यह चिनाब नदी पर पहले से मौजूद बागलीहार प्रोजेक्ट (अपस्ट्रीम) और सलाल प्रोजेक्ट (डाउनस्ट्रीम) के बीच में स्थित है. इसकी लोकेशन ऐसी है कि यह चिनाब के पानी के बहाव को नियंत्रित करने में भारत को अभूतपूर्व बढ़त देती है. पहले चरण में 1,406 मेगावाट और दूसरे चरण में 450 मेगावाट बिजली का उत्पादन होगा.     इमरजेंसी मोड: NHPC ने फरवरी 2026 में इसके लिए टेंडर जारी किए हैं. दस्तावेजों से पता चलता है कि सरकार इसे जितनी जल्दी हो सके (As early as possible) कमीशन करना चाहती है. मानसून के दौरान भी इसका काम 50% गति से जारी रखने का निर्देश दिया गया है. पाकल दुल परियोजना     किश्तवाड़ जिले में बन रही यह परियोजना पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ा दुःस्वप्न है. सिंधु जल संधि के तहत पाकिस्तान की ओर बहने वाली पश्चिमी नदियों पर भारत को ‘रन-ऑफ-द-रिवर’ प्रोजेक्ट बनाने की अनुमति थी, लेकिन पाकल दुल भारत की पहली ऐसी परियोजना है जिसमें पानी को स्टोर करने की क्षमता है.167 मीटर की ऊंचाई के साथ यह भारत का सबसे ऊंचा बांध होगा. इसकी मदद से भारत सर्दियों में जब पाकिस्तान को पानी की सबसे ज्यादा जरूरत होती है, तब पानी के बहाव को रेगुलेट कर सकेगा. सरकार ने इसे दिसंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है. कीरू प्रोजेक्‍ट     चिनाब नदी पर किश्तवाड़ में ही एक और महत्वपूर्ण बांध ‘कीरू’ आकार ले रहा है. कीरू को पाकल दुल और अन्य परियोजनाओं के साथ एक ‘चेन’ के रूप में डिजाइन किया गया है. इसका मतलब है कि अगर भारत ऊपर के बांध से पानी रोकता है, तो नीचे के सभी बांधों का प्रबंधन एक साथ किया जा सकेगा. इसे भी दिसंबर 2026 तक पाकल दुल के साथ ही चालू करने का आदेश दिया गया है, ताकि चिनाब पर भारत की पकड़ एक साथ मजबूत हो. क्वार प्रोजेक्‍ट     क्वार परियोजना इंजीनियरिंग का एक नमूना है. जनवरी 2024 में चिनाब नदी का रुख मोड़कर इसके निर्माण के लिए रास्ता बनाया गया था, जिसे पाकिस्तान ने बहुत करीब से ट्रैक किया था. केंद्र ने इसके लिए मार्च 2028 की समयसीमा तय की है. नदी का मार्ग परिवर्तन इस बात का सबूत है कि भारत अब पाकिस्तान के कड़े विरोध की परवाह किए बिना निर्माण कार्य जारी रख रहा है. रतले प्रोजेक्‍ट     रतले प्रोजेक्ट पिछले एक दशक से भारत और पाकिस्तान के बीच सबसे विवादित मुद्दा रहा है. पाकिस्तान ने इसके डिजाइन, विशेष रूप से इसके स्पिलवे को लेकर अंतरराष्ट्रीय अदालतों तक का दरवाजा खटखटाया है. भारत ने इन विरोधों को खारिज करते हुए 2024 में नदी का रुख मोड़ा और बांध के कंक्रीट कार्य की आधारशिला रखी. यह प्रोजेक्ट भी 2028 तक चालू होने की उम्मीद है. दुलहस्ती स्टेज-2     मौजूदा दुलहस्ती-1 के ठीक नीचे स्टेज-2 को भी पर्यावरण मंत्रालय ने मंजूरी दे दी है. पाकिस्तान ने इस पर हाल ही में यह कहकर आपत्ति जताई कि उसे सूचित नहीं किया गया था, लेकिन भारत ने इसे संधि के दायरे में बताते हुए आपत्ति को दरकिनार कर दिया है. झेलम नदी     किशनगंगा जलविद्युत परियोजना (330 MW): यह झेलम की सहायक नदी किशनगंगा (पाकिस्तान में नीलम) पर है. भारत ने इसे 2018 में चालू किया था. यह पानी को मोड़कर वुलर झील में डालती है, जिससे पाकिस्तान के नीलम-झेलम प्रोजेक्ट की बिजली क्षमता कम हो जाती है.     उरी स्टेज-II (240 MW): बारामूला जिले में स्थित इस प्रोजेक्ट को सरकार ने अब प्राथमिकता पर रखा है. संधि के स्थगन के बाद इसकी फाइलें तेजी से आगे बढ़ी हैं ताकि झेलम के पानी का अधिकतम उपयोग भारत की सीमा के भीतर हो सके.     तुलबुल नेविगेशन प्रोजेक्ट: यह वुलर झील के मुहाने पर एक ‘बराज’ है. पाकिस्तान के विरोध के कारण यह सालों से लटका था, लेकिन अब भारत इसे नेविगेशन और पानी के स्‍टोरेज के लिए फिर से जीवित कर रहा है. सिंधु नदी     निमो-बाजगो (45 MW): लेह के पास अलची गांव में स्थित यह बांध सिंधु नदी पर बना है. यह लद्दाख की बिजली जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ सिंधु के मुख्य बहाव पर भारत की कूटनीतिक पकड़ मजबूत करता है.     चुटक प्रोजेक्ट (44 MW): यह सिंधु की सहायक नदी ‘सुरु’ पर कारगिल जिले में स्थित है.     दुर्बुक-शायोक और निमू-चिलिंग प्रोजेक्ट: लद्दाख की इन परियोजनाओं पर भी पाकिस्तान ने हाल ही में आपत्ति जताई थी, लेकिन भारत इन्हें अपनी रणनीतिक जरूरतों के लिए तेजी से आगे बढ़ा रहा है. रावी नदी     शाहपुर कंडी बांध: पंजाब के पठानकोट में रावी नदी पर स्थित इस बांध का मुख्य हिस्सा फरवरी 2024 में तैयार हो गया है. यह रणजीत सागर बांध से निकलने वाले पानी को रोकेगा, जिससे पाकिस्तान जाने वाला पानी पूरी तरह बंद हो जाएगा और जम्मू-कश्मीर व पंजाब के खेतों को सिंचाई मिलेगी.     उझ मल्‍टी परपज प्रोजेक्‍ट: रावी की सहायक नदी ‘उझ’ पर यह प्रोजेक्ट कठुआ में बन रहा है. केंद्र ने हाल ही में यहां नहर प्रणाली को मंजूरी दी है ताकि पाकिस्तान जाने वाले अनियंत्रित पानी को रोककर पंजाब और राजस्थान की … Read 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Air Taxi की तैयारी: दिल्ली-नोएडा-गुरुग्राम में अब मिनटों में पहुंचेगा ऑफिस और अस्पताल

 नई दिल्ली  दिल्ली-NCR में रहने वाले लोगों को अक्सर भारी ट्रैफिक जाम का सामना करना पड़ता है. इस प्रॉब्लम को सॉल्व करने के लिए Air Tax का प्रस्ताव सामने आया है. इसके बाद सेंट्रल दिल्ली से गुरुग्राम का सफर सिर्फ 12 मिनट में पूरा होगा.  एयर टैक्सी कॉरिडोर योजना की दिल्ली -NCR में लगने वाले समय को घटाकर मिनटों में कर सकती है. भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, एयर टैक्सी कॉरिडोर की यह पहल दिल्ली-NCR में ट्रैफिक जाम और बुनियादी ढांचे की पुरानी समस्या का सॉल्यूशन बन सकती है.  दिल्ली वालों को गुरुग्राम और नोएडा की कनेक्टिविटी  CII ने गुरुग्राम-कनॉट प्लेस-नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को जोड़ने वाले एक पायलट एडवांस्ड एयर मोबिलिटी कॉरिडोर प्रपोजल पेश किया है.  रिपोर्ट के मुताबिक, इलेक्ट्रिक वर्टिकल टेक-ऑफ एंड लैंडिंग (eVTOL) फ्लाइट और अन्य  टेक्नोलॉजी पर काम को शामिल करके दिल्ली-NCR में एविएशन इकोसिस्टम को सुरक्षित तरीके से शामिल किया जा सकता है. हालांकि अभी यह प्रपोजल है और इसको कोई आधिकारिक मंजूरी नहीं मिली है.  सफल होने के बाद और भी शहरों में हो सकेगा शुरू दिल्ली-NCR में यह मॉडल सफल होता है तो आगे चलकर इस मॉडल को देश के अन्य बड़े शहरों में शामिल किया जा सकेगा. इसमें मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई और हैदराबाद जैसे नाम शामिल होंगे.  एयर एम्बुलेंस और पब्लिक ट्रांसपोर्ट को फायदा  दिल्ली-NCR में एयर टैक्सी का एम्बुलेंस में भी किया जा सकता है. इसके लिए अस्पतालों पर वर्टीपोर्ट्स तैयार किए जाएंगे. इसकी मदद एम्स समेत दूसरे बड़े अस्पतालों के बीच मरीज को रेफर करना आसान हो जाएगा.  ट्रैवल टाइम में होगी बारी कटौती  एयर टैक्सी की मदद से ट्रैवल टाइम में भारी कटौती आएगी. रिपोर्ट के मुताबिक, सेंट्रल दिल्ली से गुरुग्राम तक का सफर 12 मिनट से कम समय में होगा. सड़क से सफर में 1  घंटे से करीब डेढ़ घंटा लगता है.  कनॉट प्लेस से नोएडा इंटरनेशनल नेशनल एयरपोर्ट का सफर 20 मिनट से कम समय में होगा. सड़क से इस सफर में करीब 2 से 3 घंटे का समय लगता है. आगे क्या होंगे चुनौतियां?  देश की राजधानी होने की वजह से दिल्ली में कुछ हिस्से हाई सेंसटिव जोन हैं. दिल्ली कैंट, लुटियंस दिल्ली और IGI एयरपोर्ट के ऊपर से एयर टैक्सी को उड़ने की परमिशन नहीं दी जा सकती है. इसके लिए DGCA को नए स्टैंडर्ड और रूट्स तैयार करने होंगे. फायर सेफ्टी, इमरजेंसी इवैक्यूएशन और स्टॉप फ्री क्लीयरेंस जरूरी होगी. 

43,000 करोड़ रुपये केंद्रीय योजनाओं में बचे अनspent, राज्यों की लापरवाही उजागर

नई दिल्ली वित्त वर्ष 2025-26 के पहले नौ महीनों में सरकार की फ्लैगशिप योजनाओं पर खर्च की रफ्तार बेहद धीमी रही है। एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार ने अपनी 53 सबसे बड़ी योजनाओं के लिए आवंटित कुल बजट का मात्र 41.2 प्रतिशत हिस्सा ही अब तक जारी किया है। विश्लेषण से पता चलता है कि 500 करोड़ रुपये से अधिक के बजट वाली इन योजनाओं में से अधिकतर के आवंटन में भारी कटौती की गई है। आशंका जताई जा रही है कि मार्च में वित्त वर्ष खत्म होने तक इन योजनाओं का कुल खर्च शुरुआती बजट के 75 प्रतिशत के आंकड़े को भी पार नहीं कर पाएगा। प्रमुख योजनाओं के बजट में की जा रही भारी कटौती  रिपोर्ट के अनुसार, विश्लेषण की गई 53 योजनाओं में से 47 के बजट को संशोधित कर कम कर दिया गया है। मूल बजट अनुमान जो 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक था, उसे घटाकर अब 3.8 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है। सबसे चौंकाने वाली कटौती प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) में देखी गई, जहां बजट 850 करोड़ रुपये से घटाकर मात्र 150 करोड़ रुपये कर दिया गया है। केवल मनरेगा (MGNREGS) और अनुसूचित जनजातियों के लिए पोस्ट-मैट्रिक स्कॉलरशिप जैसी तीन योजनाओं में ही मूल बजट से अधिक खर्च दर्ज किया गया है। सबसे बड़ी गिरावट PM कृषि सिंचाई योजना में बाकी 47 योजनाओं के लिए, RE अलग-अलग मात्रा में BE से कम है। सबसे बड़ी गिरावट PM कृषि सिंचाई योजना में देखी गई, जहां 150 करोड़ रुपये की RE 850 करोड़ रुपये के BE का मुश्किल से छठा हिस्सा है। कुल मिलाकर, इन 53 योजनाओं के लिए BE 5 लाख करोड़ रुपये से थोड़ा ज़्यादा था, जिसे संशोधित करके 3.8 लाख करोड़ रुपये से कम, या बजटीय आवंटन का 74.4 प्रतिशत कर दिया गया। 31 दिसंबर को खत्म होने वाले नौ महीनों में जारी किया गया फंड कुल 2 लाख करोड़ रुपये से थोड़ा ज्यादा था, जो बजट आवंटन का 41.2% और RE का 55.4% था। RE, BE के 40% से कम  पीएमकेएसवाई कमांड एरिया डेवलपमेंट और जल संसाधन, पीएम ई-बस सेवा, धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान, जल जीवन मिशन/राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल मिशन, प्राथमिक कृषि ऋण समितियों का कंप्यूटरीकरण और राज्य/केंद्र शासित प्रदेश घटक-PMAY शहरी की अन्य मदों के लिए RE, BE के 40% से कम है। इनमें से छह योजनाओं में जारी की गई वास्तविक राशि BE के 10% से कम है। इन बड़ी योजनाओं (2,000 करोड़ रुपये या उससे ज्यादा BE) में जल जीवन मिशन/नेशनल रूरल ड्रिंकिंग वाटर मिशन (BE 67,000 करोड़ रुपये, नौ महीनों में असल खर्च RE 31 करोड़ रुपये), PM स्कूल्स फॉर राइजिंग इंडिया (BE 7,500 करोड़ रुपये, असल खर्च 473 करोड़ रुपये), और प्रधानमंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना (BE 2,140 करोड़ रुपये, असल खर्च 40 करोड़ रुपये) शामिल हैं। अगर कुल 53 योजनाओं पर कुल खर्च की बात करें तो यह 3.8 करोड़ रुपये है। इन योजनाओं पर 5 लाख करोड़ के बजट का ऐलान हुआ था। 31 दिसंबर तक दो लाख करोड़ का बजट रिलीज किया गया था। यह कुल बजट का 41.2 फीसदी था। प्रधानमंत्री किसान सम्मान योजना, वॉटर मैनेजमेंट, पीएम ईबस सेवा, धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान, जल जीवन मिशन, कंप्यूटराइजेशन ऑफ प्राइमरी ऐग्रीकस्च्र क्रेडिट सोसाइटी और अन्य कई योजाओं पर बजट का 40 फीसदी ही खर्च हुआ है। इनमें से 6 योजनाएं ऐसी भी हैं जिनके लिए केवल 10 फीसदी ही बजट रिलीज हुआ है। इस बजट सत्र के दौरान केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी आर पाटील ने शनिवार को यहां बताया कि देश में जल जीवन मिशन (जेजेएम) के तहत अब तक 16 करोड़ घरों में नल से जल पहुंचाया जा चुका है।पाटिल ने यहां केन्द्रीय बजट को लेकर प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अमृत सरोवर योजना और जेजेएम ऐतिहासिक साबित हो रहे हैं और अमृत सरोवर योजना के तहहत देशभर में 69 हजार से अधिक सरोवरों का निर्माण किया गया है, जिससे भूजल स्तर में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने बताया कि जेजेएम के लिए 67 हजार 300 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं और अब तक 16 करोड़ घरों में नल से जल पहुंचाया जा चुका है और चार-पांच करोड़ घरों को और पानी देना है तथा इस योजना को वर्ष 2028 तक विस्तारित किया गया है। इससे देश की लगभग नौ करोड़ माताओं-बहनों का करीब 4.5 करोड़ घंटे का समय बचा है। साथ ही जल गुणवत्ता जांच के लिए 24 लाख 80 हजार महिलाओं को प्रशिक्षित भी किया गया है और आठ लाख महिलाओं ने परीक्षण पोर्टल पर अपनी रिपोर्ट को रखा है। जल जीवन मिशन और पीएम आवास योजना जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स पर असर

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