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23,882 करोड़ का ऐलान: MP Budget 2026 में लाड़ली बहना योजना को मिली नई राहत

भोपाल   मध्य प्रदेश सरकार द्वारा विधानसभा में फाइनेंशियल ईयर 2026-27 का बजट (Madhya Pradesh Budget 2026) पेश किया जा रहा है। डॉ. मोहन यादव सरकार का ये तीसरा और बतौर वित्त मंत्री देवड़ा का सातवां बजट है। देवड़ा ने कहा कि हमारी सरकार का उद्देश्य हर हाथ को काम देना है। युवाओं को रोजगार देना है। पीएम के सपने को साकार करने वाला बजट है। बजट में लाड़ली बहना योजना और लाड़ली लक्ष्मी योजना का भी जिक्र किया गया है। लाड़ली बहनों के लिए क्या कहा… 2026-27 के बजट में मंत्री देवड़ा ने कहा कि लाड़ली बहना योजना में एक करोड़ 25 लाख महिलाएं रजिस्टर्ड है। इसमें 23 हजार 882 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। साथ ही बजट में लाड़ली लक्ष्मी योजना के लिए भी बड़ा ऐलान किया गया है। वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा कि लाड़ली लक्ष्मी योजना 2.0 में 52 लाख 29 हजार बालिकाओं को लाभ दिया जा रहा है, जबकि 14 लाख 12 हजार को छात्रवृत्ति मिल चुकी है। सरकार की तरफ से लाड़ली लक्ष्मी योजना के लिए 1800 करोड़ रुपए का प्रावधान किया जा रहा है। MP Budget में लाड़ली बहना और लक्ष्मी योजना की बड़ी बातें     नारी को केंद्र में रखकर बजट बनाया     हर हाथ को काम और हर उपज को दाम देने वाला बजट     हर नारी को काम देने पर सरकार का फोकस     औद्योगिकीकरण और अधोसंरचना पर ध्यान दिया गया     सभी वर्गों के लिए विकास के लिए सरकार संकल्पित

पांडुलिपियों, दुर्लभ ग्रंथों को सहेजकर डिजिटल रूप देगी योगी सरकार

गोरखपुर वर्तमान और भावी पीढ़यां विरासत पर गर्व की अनुभूति कर सकें, इसके लिए केंद्र और प्रदेश सरकार ने हमेशा प्रतिबद्धता जताई है। इसी क्रम में भारत की समृद्ध ज्ञान परंपरा और बौद्धिक विरासत को पुनर्जीवित करने के महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय अभियान ‘ज्ञान भारतम मिशन’ में प्रदेश की योगी सरकार ने बड़ी पहल की है। पांडुलिपियों और दुर्लभ ग्रंथों को सहेजकर विश्व पटल पर डिजिटल रूप देने के लिए प्रदेश सरकार ने सभी जिलों में जिला स्तर पर पांडुलिपियों को चिन्हित व संग्रहीत करने के आदेश जारी किए हैं। इसके पर्यवेक्षण के लिए हर जिले में वहां के मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) को नोडल अधिकारी नामित किया गया है।  विरासत के संरक्षण के लिए चलाए जा रहे ‘ज्ञान भारतम मिशन’ के अंतर्गत हर जिले में उपलब्ध भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़ी पांडुलिपियों एवं दुर्लभ ग्रंथों का वैज्ञानिक संरक्षण, डिजिटलीकरण और अभिलेखीकरण किया जा रहा है ताकि यह धरोहर शोधार्थियों, विद्यार्थियों और आम नागरिकों के लिए सुलभ हो सके। उत्तर प्रदेश के लिए यह अभियान और भी विशेष है क्योंकि उत्तर प्रदेश को प्राचीन ज्ञान दर्शन, साहित्य और संस्कृति की भूमि माना जाता है।  गोरखपुर के उप निदेशक संस्कृति यशवंत सिंह राठौर ने बताया कि ‘ज्ञान भारतम मिशन’ के अंतर्गत सरकारी एवं गैर सरकारी संस्थानों, मठों, मंदिरों, शैक्षणिक संस्थानों, निजी एवं सार्वजनिक पुस्तकालयों, व्यक्तियों के पास उपलब्ध पांडुलिपियों, हस्तलिखित ग्रंथों, ताड़पत्रों, भोजपत्रों और अन्य दस्तावेजों की पहचान, सर्वेक्षण, कैटलॉगिंग, संरक्षण तथा डिजिटलीकरण का कार्य किया जाना है। पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण होने से यह ज्ञान भारतम पोर्टल के माध्यम से आमजन को आसानी से उपलब्ध हो जाएंगी। रखरखाव के अभाव में व्यक्तियों या संस्थाओं के पास उपलब्ध कई ग्रंथ नष्ट होने की कगार पर हैं। अब जिला स्तर पर इन ग्रंथों को चिन्हित करने और उनके संरक्षण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जिला स्तर पर अभियान चलाकर पांडुलिपियों का संग्रह करने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं से संपर्क कर उन्हें सूचीबद्ध किया जाएगा। इसमें हाथ से लिखे उन ग्रंथों को शामिल किया जाएगा जो 75 वर्ष से अधिक प्राचीन हों। जिला स्तर पर तैयार सूची संस्कृति विभाग के जरिये प्रदेश के राजकीय अभिलेखागार को प्रेषित की जाएगी। जहां उच्च गुणवत्ता की स्कैनिंग के बाद इसका डिजिटल रूप तैयार हो जाएगा। इस मिशन की विशेषता यह है कि इसमें पांडुलिपियां संबंधित संग्रहकर्ता संस्था या व्यक्ति के ही अधिकार में रहेंगी।

बागपत के गांव तक मुख्यमंत्री योगी ने पहुंचाई हाईटेक एस्ट्रोनॉमी लैब, 45 प्रकार के प्रयोग कर अंतरिक्ष के बारे में समझ रहे बच्चे

लखनऊ उत्तर प्रदेश में बालिकाओं की शिक्षा और वैज्ञानिक सोच को नई उड़ान देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर अब सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाली बेटियां भी अंतरिक्ष विज्ञान की बारीकियां सीख रहीं हैं। बागपत जनपद के छपरौली ब्लॉक में स्थापित अत्याधुनिक एस्ट्रोनॉमी लैब से ग्रामीण छात्राओं के सपनों को उड़ान मिलेगी। ब्लॉक संसाधन केंद्र परिसर में बनाई गई इस हाईटेक खगोलशास्त्र प्रयोगशाला के माध्यम से छपरौली ब्लॉक की लगभग 100 बालिकाओं को आधुनिक विज्ञान को समझने का अवसर मिल रहा है। प्रयोगशाला में 45 प्रकार के प्रयोगों की सुविधा उपलब्ध कराई गई है, जिससे छात्राएं अंतरिक्ष से जुड़े जटिल सिद्धांतों को व्यावहारिक रूप से समझ रहीं हैं। योगी सरकार के इस प्रयास से अब ग्रामीण पृष्ठभूमि की छात्राएं भी टेलिस्कोप संचालित करने से लेकर नाइट-स्काई ऑब्जर्वेशन तक की गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी कर रही हैं। आकाशीय पिंडों की स्थिति, गति और संरचना को डिजिटल माध्यम से समझ रहीं हैं बेटियां सीएम योगी की इस दूरदर्शी पहल से विज्ञान शिक्षा को नई गति मिल रही है। ब्लॉक संसाधन केंद्र छपरौली में स्थापित एस्ट्रोनॉमी लैब को हाईटेक टेक्नोलॉजी से विकसित किया गया है। बागपत की जिलाधिकारी अस्मिता लाल ने बताया कि प्रयोगशाला में आधुनिक उपकरणों के साथ-साथ छात्राओं को एस्ट्रोनॉमी सॉफ्टवेयर के उपयोग का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। इससे वे आकाशीय पिंडों की स्थिति, गति और संरचना को डिजिटल माध्यम से समझ रहीं हैं। इस तरह का व्यावहारिक प्रशिक्षण छात्राओं में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने में बेहद सहायक होगा। टेलिस्कोप से चंद्रमा देख बढ़ रहा आत्मविश्वास इस पहल की सबसे खास बात यह है कि अब छात्राएं स्वयं टेलिस्कोप के माध्यम से चंद्रमा और अन्य आकाशीय पिंडों का प्रत्यक्ष अवलोकन कर रही हैं। जब एक बालिका अपने हाथों से टेलिस्कोप चलाकर चंद्रमा देखती है, तो उसके भीतर आत्मविश्वास और जिज्ञासा दोनों का विकास होता है। अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़े करियर के बारे में गंभीरता से समझ रहीं बालिकाएं कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय छपरौली की सभी छात्राएं इस लैब में नियमित रूप से प्रशिक्षण ले रही हैं। नाइट-स्काई प्रेक्षण जैसी गतिविधियां उनके लिए रोमांचक अनुभव साबित हो रही हैं। शिक्षकों का कहना है कि  इससे बालिकाओं की विज्ञान के प्रति रुचि तेजी से बढ़ी है और वे अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़े करियर के बारे में गंभीरता से सोचने लगी हैं। एआई-संचालित स्मार्ट क्लास से मिल रही आधुनिक शिक्षा जिलाधिकारी अस्मिता लाल ने बताया कि बागपत में शिक्षा के आधुनिकीकरण की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। जिले के 25 सरकारी विद्यालयों में एआई-संचालित स्मार्ट क्लास शुरू की गई हैं। इनके माध्यम से बच्चों को इंटरैक्टिव और तकनीक आधारित शिक्षा मिल रही है, जिससे सीखने की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार देखा जा रहा है।

जल संरक्षण से आत्मनिर्भर किसान, चिड़ौला में शक्तिगत कूप बना ग्रामीण समृद्धि की मिसाल

गांवों की तस्वीर और तकदीर बदलने की ग्रामीण ने पहल सफलता की कहानी रायपुर, ग्रामीण विकास और जल संरक्षण एक-दूसरे से गहरे जुड़े हुए हैं, जो सतत आजीविका, बेहतर स्वास्थ्य और कृषि उत्पादकता के लिए अनिवार्य हैं। वर्षा जल संचयन, तालाब गहरीकरण, और जल शक्ति अभियान जैसी पहल भू-जल स्तर में सुधार और महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए आवश्यक हैं।  शक्तिगत कूप के निर्माण ने ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी विकास को बढ़ावा दे रहे हैं। ग्रामीण विकास और जल संरक्षण की दिशा में मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के ग्राम पंचायत चिड़ौला से एक सशक्त और प्रेरणादायी सफलता की कहानी सामने आई है। यहां शक्तिगत कूप निर्माण कार्य जयबहादुर सिंह के लिए स्वीकृत किया गया, जिसके लिए शासन द्वारा 1.80 लाख रुपए की राशि प्रदान की गई। इस पहल का मुख्य उद्देश्य किसानों को स्थायी जल स्रोत उपलब्ध कराकर खेती-किसानी को सुदृढ़ बनाना तथा जल संरक्षण को बढ़ावा देना रहा। कूप निर्माण से पूर्व संबंधित हितग्राही सहित आसपास के किसान सिंचाई के लिए पूरी तरह वर्षा पर निर्भर थे, जिससे खेती करना अनिश्चित बना रहता था और उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता था। लेकिन शक्तिगत कूप के निर्माण के बाद खेतों तक नियमित रूप से पानी पहुंचने लगा है, जिससे फसलों की समय पर सिंचाई संभव हुई। इसका सीधा लाभ कृषि उत्पादन में वृद्धि के रूप में सामने आया है, वहीं किसानों की आय में भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। अब किसान समय पर बुवाई कर पा रहे हैं और खेती अधिक लाभकारी एवं सुरक्षित बन गई है। यह कूप केवल एक परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि आसपास के किसानों के लिए भी प्रेरणा का केंद्र बन गया है। जल उपलब्धता सुनिश्चित होने से क्षेत्र में दोहरी फसल लेने की संभावनाएं बढ़ी हैं, खेती की लागत में कमी आई है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिली है। साथ ही भूजल स्तर के संरक्षण और जल के समुचित उपयोग को भी बढ़ावा मिला है, जो दीर्घकालीन विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। ग्रामीणों ने शासन की इस जनहितकारी पहल के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार की योजनाएं गांवों की तस्वीर और तकदीर दोनों बदलने की क्षमता रखती हैं। 1.80 लाख रुपये की लागत से पूर्ण हुआ। यह शक्तिगत कूप निर्माण कार्य ग्राम पंचायत चिड़ौला में जल संरक्षण की दिशा में एक मजबूत कदम होने के साथ-साथ किसानों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक सफल, प्रेरक और अनुकरणीय उदाहरण बनकर उभरा है।

इमरान खान के लिए राहत: अस्पताल में इलाज, परिवार से मिलने की अनुमति भी मिलेगी

लाहौर  पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को जल्द अस्पताल शिफ्ट किए जाने की संभावना है. सूत्रों के मुताबिक उनकी आंख के इलाज के लिए 21 फरवरी से 26 फरवरी के बीच आइलिया इंजेक्शन की एक और डोज दी जानी है. उन्हें आंखों के इलाज के लिए रावलपिंडी के अस्पताल में भर्ती किया जा सकता है. जानकारी के मुताबिक इस बार उन्हें रावलपिंडी के अल शिफा आई ट्रस्ट हॉस्पिटल में इलाज के लिए ले जाया जा सकता है. अभी यह स्पष्ट नहीं है कि वह अस्पताल में कितने दिन रहेंगे. अंतिम फैसला डॉक्टरों से सलाह-मशविरा करने के बाद लिया जाएगा. सूत्रों का यह भी कहना है कि इलाज के दौरान या उसके बाद इमरान खान को अपने कुछ करीबी सहयोगियों और जेल में बंद उनकी पत्नी बुशरा बीबी से मुलाकात की अनुमति मिल सकती है. सरकार व्यापक मेडिकल जांच कराने की भी योजना बना रही है. इनमें एमआरआई, सीटी स्कैन, एक्स-रे, हृदय संबंधी जांच और पूरे शरीर के ब्लड टेस्ट जैसे प्रमुख परीक्षण शामिल हो सकते हैं. बताया जा रहा है कि इन सभी टेस्ट के जरिए उनकी सेहत की विस्तृत और आधिकारिक स्थिति स्पष्ट की जाएगी. दुनियाभर में हो रही है इमरान के इलाज की मांग इमरान खान को सरकार ने अकेले ही एक कोठरी में बंद कर रखा है, जहां न तो उनसे किसी को मिलने की इजाजत है और न ही वे वहां से निकल सकते हैं. उनसे मिलकर आए उनके वकील ने बताया था कि उनकी आंखों की रोशनी 85 फीसदी तक जा चुकी है और उन्हें दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं भी हो रही हैं. इसके अलावा उन्हें फ्रिज और टीवी जैसी बेसिक सुविधाएं भी नहीं दी गईं जबकि मच्छरों की वजह से वहां सोना तक मुश्किल हो रहा है. वकील ने मांग की थी कि उन्हें टीवी नहीं तो कम से कम किताबें ही दी जाएं, ताकि वे अपना समय बिता सकें. इमरान खान की ये हालत सामने आने के बाद पूरी दुनिया में उनके समर्थन में रैलियां हुईं और ये अपील की गई कि उनका इलाज हो. दुनिया में क्रिकेट जगत के 12 पूर्व कप्तानों ने मिलकर पाकिस्तान सरकार को चिट्ठी भी लिखी कि इमरान खान को उचित इलाज दिया जाए. खराब सेहत को बता रहे सियासी ड्रामा वहीं पाकिस्तान के पंजाब की सूचना मंत्री अज्मा बुखारी ने इमरान खान की हालिया मेडिकल रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा है कि उनकी सेहत और आंखों की रोशनी पूरी तरह ठीक है. उन्होंने बताया कि खान साहब को जेल में सभी जरूरी सुविधाएं दी जा रही हैं, जिनमें पौष्टिक भोजन और टहलने के लिए अलग स्थान भी शामिल है. अजमा बुखारी ने कहा कि मेडिकल जांच में किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या की पुष्टि नहीं हुई है. उनके मुताबिक इमरान खान एक आंख से घड़ी की सुइयां तक साफ देख सकते हैं. उन्होंने इमरान खान पर निशाना साधते हुए इसे उनका राजनीतिक ड्रामा करार दिया.

स्किल हब’ बनेगा उत्तर प्रदेश, ‘कौशल कनेक्ट सेल’ से युवाओं को सीधे मिलेगा रोजगार

लखनऊ. उत्तर प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संकल्प को साकार करने के लिए उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन (यूपीएसडीएम) द्वारा एक बड़ा कदम उठाया गया है। अब प्रदेश में निवेश करने वाले बड़े उद्योगों को उनकी जरूरत के अनुसार प्रशिक्षित कार्यबल उपलब्ध कराने के लिए ‘कौशल कनेक्ट सेल’ का गठन किया गया है। प्रदेश में आने वाले बड़े निवेश को सफल बनाने के लिए यह आवश्यक है कि उद्योगों को समय पर स्किल्ड मैनपावर मिल सके। इसी उद्देश्य से इन्वेस्ट यूपी और उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन के बीच प्रभावी समन्वय स्थापित करने के लिए ‘कौशल कनेक्ट सेल’ बनाई गई है। स्पीडअप-पीएमयू देगा प्रशिक्षण को रफ्तार प्रदेश के व्यावसायिक शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल ने बताया कि मिशन में प्रशिक्षण और सेवायोजन (रोजगार) की प्रक्रिया को गति देने के लिए स्पीडअप-पीएमयू को आबद्ध किया गया है। यह पीएमयू अब ‘कौशल कनेक्ट सेल’ के माध्यम से निवेशकों के साथ रियल-टाइम समन्वय स्थापित करेगा। डेटाबेस से लेकर सीधे प्लेसमेंट तक जिम्मेदारी ‘कौशल कनेक्ट सेल’ केवल एक प्रशासनिक इकाई नहीं होगी, बल्कि इसके कार्य जमीन पर बदलाव लाएंगे। रियल-टाइम ट्रैकिंग कर इन्वेस्ट यूपी के साथ दैनिक समन्वय कर निर्गत प्रोजेक्ट्स की स्थिति को अपडेट रखना यह सेल का मुख्य कार्य होगा। इसके साथ ही किस जिले में कितना निवेश आ रहा है और वहां किस सेक्टर (जैसे ऑटोमोबाइल, आईटी, टेक्सटाइल आदि) में कितने युवाओं की जरूरत है, इसका डेटाबेस तैयार करना भी उसकी जिम्मेदारी होगी। निवेशकों के एचआर विभाग से लगातार संपर्क में रहना और ट्रेनिंग पार्टनर्स के माध्यम से प्रशिक्षित बेरोजगार युवाओं को संबंधित उद्योगों की जरूरत के अनुसार रोजगार सुनिश्चित करना भी सेल का काम होगा। 35 सेक्टर्स और 1300 जॉब रोल्स में ट्रेनिंग उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन के मिशन निदेशक पुलकित खरे ने बताया कि वर्तमान में उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन द्वारा लगभग 35 सेक्टर्स और 1300 से अधिक जॉब रोल्स में युवाओं को प्रशिक्षित किया जा रहा है। ‘कौशल कनेक्ट सेल’ के सक्रिय होने से अब ट्रेनिंग और इंडस्ट्री की मांग के बीच का अंतर खत्म होगा और यूपी के युवाओं को उनके जिले में ही बड़े उद्योगों में नौकरी मिल सकेगी। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। ‘कौशल कनेक्ट सेल’ की स्थापना न केवल प्रदेश में ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बढ़ावा देगी, बल्कि उत्तर प्रदेश को ‘स्किल हब’ के बनाने में भी अहम भूमिका निभाएगी। इन अधिकारियों को सौंपी गई है जिम्मेदारी समन्वय को सुदृढ़ करने के लिए दोनों विभागों की ओर से एकल संपर्क सूत्र (एसपीओसी) नामित किए गए हैं। इन्वेस्ट यूपी की ओर से ओमैर शहिद, टीम लीडर एसपीओसी के रूप में कार्य करेंगे। कौशल विकास मिशन की ओर से इस सेल की अध्यक्षता डॉ. पवित्रा टंडन, सहायक निदेशक द्वारा की जाएगी। मिशन के एसपीओसी अतुल कुमार सिंह को नामित किया गया है। उनकी सहायता के लिए  धनंजय कुमार द्विवेदी और ज्योति वास्तव को भी टीम में शामिल किया गया है।

झारखंड में शिक्षकों के लिए सुनहरा अवसर, लेक्चरर पदों पर भर्ती और आकर्षक सैलरी

रांची  लेक्चरर की तैयारी कर रहे अभ्यर्थी के लिए झारखंड में भर्ती निकली है। जिसमें 50 हजार से अधिक वेतन मिलेगा। झारखंड लोक सेवा आयोग ने लेक्चरर के पदों पर भर्ती के लिए आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है। उम्मीदवार जेपीएससी की आफिशियल वेबसाइट पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। इन पदों पर भर्ती के लिए आनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू हो गई है। इच्छुक एवं योग्य उम्मीदवार झारखंड आयोग की आफिशियल वेबसाइट पर जाकर 12 मार्च, 2026 कर आवेदन कर सकते हैं।इतना मिलेगा वेतनपे लेवल-9 के अंतर्गत चयनित उम्मीदवारों को 56,100 रुपये और पे लेवल-10 के अंतगर्त 57,700 रुपये छात्रों को दिए जाएंगे। आवेदन करने के लिए उम्मीदवारों की अधिकतम आयु 65 वर्ष से ज्यादा निर्धारित की गई है।शैक्षणिक योग्यताआवेदन करने के लिए उम्मीदवारों ने भारत के किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से बीई या बीटेक या मास्टर की डिग्री पूरी की हो। इसके साथ ही उम्मीदवारों ने यूजीसी नेट की परीक्षा उत्तीर्ण की हो।ऐसे करें आवेदनजो उम्मीदवार झारखंड में लेक्चरर के पदों पर नौकरी करना चाहते हैं। वे यहां बताए गए निम्नलिखित स्टेप्स की मदद से अप्लाई कर सकते हैं। आवेदन करने के लिए सबसे पहले ऑफिशियल वेबसाइट www.jpsc.gov.in पर जाकर विजिट करें। अब वेबसाइट के होमपेज पर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन लिंक पर क्लिक करें। लिंक पर क्लिक करने के बाद मांगी गई सभी जानकारी को ध्यान से दर्ज करें। सभी जानकारी को दर्ज करने के बाद जरूरी दस्तावेजों की स्कैन कॉपी को अपलोड करें। अंत में इसका एक प्रिंट आउट भी अवश्य निकाल लें। आवेदन करने से संबंधित अधिक जानकारी के लिए उम्मीदवार जेपीएससी की ऑफिशियल वेबसाइट www.jpsc.gov.in विजिट कर सकते हैं।

किसानों को मिली बड़ी राहत: 25 हजार करोड़ ऋण, सोलर पंप और सालाना 12 हजार की सहायता तय

भोपाल  मध्यप्रदेश सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश करते हुए किसानों और ग्रामीण विकास को केंद्र में रखा है। वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने बजट भाषण की शुरुआत अर्थशास्त्र के श्लोक “प्रजा सुखम राजनाह…” से की और कहा कि सरकार का लक्ष्य किसानों और आमजन की समृद्धि है। बजट में कृषि क्षेत्र के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की गईं, जिनका सीधा लाभ किसानों को मिलेगा।  दुग्ध उत्पादन और ग्रामीण विकास पर जोर वित्त मंत्री ने बताया कि मध्यप्रदेश देश का तीसरा सबसे बड़ा दुग्ध उत्पादन वाला प्रदेश है और सरकार दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए लगातार काम कर रही है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए मुख्यमंत्री वृंदावन योजना लागू की गई है। वहीं, अहिल्या बाई कौशल विकास योजना के जरिए ग्रामीण युवाओं को कौशल प्रशिक्षण दिया जा रहा है। बजट पेश किए जाने के दौरान कांग्रेस विधायकों ने हंगामा भी किया, जिस पर वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार ने जो वादा किया था, उसे पूरा किया है और कथनी-करनी में अंतर नहीं है। दाल उत्पादन में नंबर वन, किसानों को हर स्तर पर सहयोग वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा कि दाल उत्पादन में मध्यप्रदेश देश में पहले स्थान पर है, जबकि गेहूं और तिलहन उत्पादन में दूसरा स्थान रखता है। संतरा, धनिया और लहसुन उत्पादन में भी प्रदेश अग्रणी है। सरकार किसानों को खेत में उत्पादन से लेकर उपज की बिक्री तक हर स्तर पर सहायता दे रही है। किसानों के लिए अल्पकालीन ऋण योजना भी उपलब्ध कराई जा रही है। 1 लाख सोलर पंप और 3 हजार करोड़ का प्रावधान सरकार ने किसानों को बड़ी राहत देते हुए 3000 करोड़ रुपये की लागत से 1 लाख सोलर पंप उपलब्ध कराने की घोषणा की है। इससे किसानों को सिंचाई में सुविधा मिलेगी और बिजली पर निर्भरता कम होगी। किसान सम्मान निधि और मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के तहत किसान परिवारों को प्रतिवर्ष कुल 12 हजार रुपये की नकद सहायता दी जा रही है। यह राशि छोटे और सीमांत किसानों को खाद और बीज खरीदने में सीधी मदद प्रदान कर रही है। भावांतर और कृषक उन्नति योजना भावांतर योजना की सफलता से प्रभावित होकर अन्य राज्यों ने भी इसमें रुचि दिखाई है। सरकार ने कृषक उन्नति योजना की घोषणा की है, जिसके तहत किसानों को विशेष प्रोत्साहन देने का प्रावधान किया गया है। जैविक और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए 21 लाख 42 हजार हेक्टेयर क्षेत्र पंजीकृत किया गया है। साथ ही 1 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने का लक्ष्य तय किया गया है। किसानों के लिए 25 हजार करोड़ का ऋण प्रावधान किसानों को ऋण उपलब्ध कराने के लिए 25 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के लिए 1,299 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं, जिससे प्राकृतिक आपदा की स्थिति में किसानों को सुरक्षा मिलेगी। सीएम कृषक उन्नति योजना के लिए 5,500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। किसानों को 337 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी और 6.69 लाख किसानों को यह राशि वितरित की जाएगी। वर्ष 2026 को किसान कल्याण वर्ष घोषित किया गया है। गरीब कल्याण और आय बढ़ाने पर फोकस गरीब कल्याण के लिए 793 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। वित्त मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा बस जल्द शुरू की जाएगी। किसानों की आय बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं और किसान योजनाओं को मूल्य संवर्धन योजनाओं से जोड़ा गया है। वित्त मंत्री ने खेती को लाभ का धंधा बनाने के संकल्प को दोहराते हुए कहा कि सरकार किसानों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त करने के लिए प्रतिबद्ध है। 

2026 के राज्यसभा चुनाव की पूरी रूपरेखा, वोटिंग और रिजल्ट की तारीखें घोषित

नई दिल्ली राज्यसभा चुनाव 2026 की तारीकों का ऐलान हो गया है. चुनाव आयोग ने आज यानी बुधवार को 10 राज्यों की राज्यसभा की 37 सीटों के लिए चुनाव कार्यक्रम की घोषणा कर दी. राज्यसभा की ये सीटें अप्रैल 2026 में खाली होने वाली हैं और 10 राज्यों से जुड़ी हैं. राज्यसभा की 37 सीटों के लिए 16 मार्च को वोटिंग है और नतीजे भी उसी दिन आएंगे. कुल 245 सदस्यों वाली राज्यसभा में 233 चुने जाते हैं, और ये चुनाव छह साल के चक्र का हिस्सा हैं. चुनाव आयोग ने पहले ही इन राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को रिटर्निंग ऑफिसर्स की नियुक्ति के लिए पत्र भेज दिए थे. चुनाव आयोग ने राज्यसभा चुनाव का पूरा शेड्यूल जारी किया है. राज्यसभा चुनाव का नोटिफिकेशन 26 फरवरी 2026 को जारी होगा. नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख 5 मार्च 2026 है. नामांकनों की जांच 6 मार्च को होगी, जबकि नाम वापस लेने की अंतिम तारीख 9 मार्च 2026 है. राज्यसभा चुनाव के लिए वोटिंग 16 मार्च 2026 को सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक होगी. इसके बाद रिजल्ट की बारी आएगी. मतगणना उसी दिन शाम 5 बजे शुरू होगी. चुनाव प्रक्रिया पूरी करने की अंतिम तारीख 20 मार्च 2026 है. ये चुनाव राज्य विधानसभाओं के सदस्यों द्वारा कराए जाते हैं. इसलिए विधायकों की संख्या और पार्टियों की ताकत पर निर्भर करेंगे. प्वाइंटर्स में समझें राज्यसभा चुनाव का पूरा शेड्यूल     राज्यसभा चुनाव RS चुनाव कार्यक्रम (Rajya Sabha Election 2026 Schedule)     नोटिफिकेशन जारी: 26 फरवरी 2026     नामांकन की आखिरी तारीख: 5 मार्च 2026     नामांकन की जांच (Scrutiny): 6 मार्च 2026     नाम वापसी की अंतिम तारीख: 9 मार्च 2026     मतदान (Polling): 16 मार्च 2026 (सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक)     मतगणना (Counting): 16 मार्च 2026, शाम 5 बजे     चुनाव पूरा करने की अंतिम तारीख: 20 मार्च 2026 किन राज्यों की हैं ये सीटें? राज्यसभा की कुल 37 सीटें 10 राज्यों से खाली हो रही हैं. महाराष्ट्र से सबसे ज्यादा 7 सीटें, तमिलनाडु और बिहार से 6-6, पश्चिम बंगाल से 5, ओडिशा से 4, असम से 3, तेलंगाना, छत्तीसगढ़ और हरियाणा से 2-2, जबकि हिमाचल प्रदेश से 1 सीट. ये सीटें अप्रैल में रिटायर हो रहे सदस्यों की वजह से खाली होंगी. महाराष्ट्र में शरद पवार जैसे दिग्गज नेताओं की सीटें भी शामिल हो सकती हैं, जहां उन्होंने दोबारा चुनाव लड़ने की इच्छा जताई है. महाराष्ट्र में 288 विधायकों वाली विधानसभा में एक राज्यसभा सीट के लिए 37 वोट चाहिए, जिससे यहां कड़ा मुकाबला होने की संभावना है. जिन राज्यों की सीटें खाली हो रही हैं, उनकी रिस्ट महाराष्ट्र: 7 सीटें ओडिशा: 4 सीटें तमिलनाडु: 6 सीटें पश्चिम बंगाल: 5 सीटें असम: 3 सीटें बिहार: 5 सीटें छत्तीसगढ़: 2 सीटें हिमाचल: 1 तेलंगाना: 2 हरियाणा: 2 महाराष्ट्र से कौन-कौन हो रहे रिटायर?     डॉ. भगवत किशनराव कराड (02.04.2026)     डॉ. (श्रीमती) फ़ौज़िया तहसीन अहमद खान     प्रियंका विक्रम चतुर्वेदी     शरदचंद्र गोविंदराव पवार     धैर्यशील मोहन पाटिल     रजनी अशोकराव पाटिल     रामदास बंदू अठावले ओडिशा:     ममता मोहंता     मुज़िबुल्ला खान     सुजीत कुमार     निरंजन बिशी तमिलनाडु     एन.आर. एलंगो     पी. सेल्वारासु     एम. थम्बिदुरई     तिरुची सिवा     डॉ. कनिमोझी एन.वी.एन. सोमू     जी.के. वासन पश्चिम बंगाल     साकेत गोखले     ऋतब्रत बनर्जी     बिकाश रंजन भट्टाचार्य     मौसम नूर (05.01.2026 से रिक्त)     सुब्रत बक्शी असम     रामेश्वर तेली (09.04.2026)     भुवनेश्वर कलिता     अजीत कुमार भुइयां बिहार     अमरेंद्र धारी सिंह     प्रेम चंद गुप्ता (09.04.2026)     रामनाथ ठाकुर     उपेन्द्र कुशवाहा     हरिवंश नारायण सिंह छत्तीसगढ़     कवि तेजपाल सिंह तुलसी (09.04.2026)     फूलो देवी नेताम हरियाणा     किरण चौधरी (09.04.2026)     राम चंदर जांगड़ा हिमाचल प्रदेश     इंदु बाला गोस्वामी (09.04.2026) तेलंगाना     डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी (09.04.2026     के.आर. सुरेश रेड्डी  

राहुल की कोशिशें नाकाम, भूपेन बोरा भाजपा में जाएंगे; घर आकर CM हिमंत से की मुलाकात

गुवाहाटी  असम के पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष भूपेन बोरा के इस्तीफे को लेकर नया ट्विस्ट नजर आ रहा है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने  दावा किया कि 22 फरवरी को भाजपा ज्वॉइन करेंगे। उन्होंने यह भी कहाकि उनके साथ बड़ी संख्या में कांग्रेसी नेता भी भाजपा में आएंगे। बता दें कि सोमवार को भूपेन बोरा ने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया था। हालांकि बाद में शीर्ष नेतृत्व के मनाने पर उन्होंने अपने फैसले पर फिर से विचार करने की बात कहते हुए इस्तीफा वापस ले लिया था। बताया जाता है कि राहुल गांधी ने भी उन्हें मनाया था। लेकिन मंगलवार को उनके भाजपा जॉइन करने की बातें होने लगीं। हिमंत बोले उनके लिए घरवापसी हिमंत ने अपने बयान में कहाकि हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने पहले ही उनकी जॉइनिंग अप्रूव कर दी है। भाजपा में उनका स्वागत है। उन्होंने कहाकि भूपेन बोरा को वह सभी सम्मान दिया जाएगा, जिसके वह हकदार हैं। भाजपा से जुड़ना उनके लिए घरवापसी जैसा होगा, क्योंकि यह उनके जैसे लोगों की ही पार्टी है, जो अपने पिता की विरासत वाली सियासत नहीं करते हैं। इससे पहले सरमा, गुवाहाटी के घोरमारा इलाके में बोरा के आवास पर गए, जहां उनकी पत्नी और बेटे ने मुख्यमंत्री की आरती की और स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने पूर्व में कहा था कि बोरा के लिए भाजपा के दरवाजे खुले हैं और वादा किया था कि वह उन्हें विधानसभा चुनाव में सुरक्षित सीट से जीतने में मदद करेंगे। दिन में क्या बोले थे भूपेन बोरा वहीं, आज दिन में कांग्रेस की असम इकाई के पूर्व अध्यक्ष भूपेन बोरा ने कहा कि वह केंद्रीय नेतृत्व द्वारा पूछे जाने पर मंगलवार रात तक इस बारे में अपना अंतिम निर्णय घोषित करेंगे कि वह इस्तीफा वापस लेंगे या नहीं। बोरा ने आज सुबह पत्रकारों के साथ बातचीत में कहा कि अंतिम निर्णय लेने से पहले वह अपने शुभचिंतकों, करीबी सहयोगियों और लखीमपुर जिले के लोगों के साथ कई मुद्दों पर चर्चा करना चाहेंगे, जहां से वह ताल्लुक रखते हैं। बोरा ने बिना नाम लिए कांग्रेस के कुछ नेताओं पर हमला करते हुए कहा कि वह असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी (एपीसीसी) में रहने को तैयार हैं, लेकिन एपीसीसी (आर) में नहीं, जो स्पष्ट रूप से पार्टी के धुबरी से सांसद रकीबुल हुसैन की ओर इशारा था। उन्होंने कहाकि मैंने अपने त्यागपत्र में भी इस बात को स्पष्ट कर दिया है। आरोप भी लगाया था बोरा ने आरोप लगाया कि समागुरी विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव के लिए पार्टी के उम्मीदवार के रूप में कई वरिष्ठ नेताओं द्वारा उनके नाम का सुझाव दिया गया था, लेकिन उन्हें टिकट देने से इनकार कर दिया गया। हुसैन के धुबरी लोकसभा सीट से चुने जाने के बाद समागुरी विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव कराना आवश्यक हो गया था। पार्टी का टिकट उनके बेटे तंजील हुसैन को दिया गया था, जो भाजपा के दीप्लू रंजन शर्मा से चुनाव हार गए थे। बोरा ने दावा किया कि 2021 के विधानसभा चुनाव में, कई प्रमुख कांग्रेस नेताओं ने एआईयूडीएफ के साथ गठबंधन का विरोध किया था और मैंने इस संबंध में पार्टी आलाकमान को कई बार पत्र लिखा था। चुनावों के बाद, गठबंधन खत्म हो गया और पिछले लोकसभा चुनाव में हुसैन को इसका सबसे बड़ा फायदा हुआ, उन्होंने एआईयूडीएफ नेता बदरुद्दीन अजमल को रिकॉर्ड अंतर से हराकर सीट जीती।

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक आदेश: आदिवासी मतांतरण पर रोक, ग्राम सभाओं को मिले संवैधानिक अधिकार

 रायपुर  छत्तीसगढ़ के आदिवासी क्षेत्रों में मतांतरण को लेकर चल रहे विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले ने ग्राम सभाओं के अधिकारों को मजबूती दी है। 16 फरवरी 2026 को दिए गए निर्णय में सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि ‘पेसा’ कानून के तहत ग्राम सभाओं को अपनी सामाजिक और सांस्कृतिक परंपराओं की रक्षा का पूर्ण अधिकार है। इस फैसले के बाद बस्तर से सरगुजा तक जनजातीय समाज को अपनी परंपराओं की सुरक्षा के लिए कानूनी आधार मिल गया है। मामला कांकेर जिले की उन ग्राम पंचायतों से जुड़ा था, जिन्होंने बाहरी धर्म प्रचारकों के प्रवेश पर रोक लगाने का प्रस्ताव पारित किया था। ग्रामीणों ने गांवों में सूचना पट्ट लगाकर इस संबंध में स्पष्ट संदेश भी दिया था। हाई कोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट की मुहर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने पहले ही ग्राम पंचायतों के इस निर्णय को वैध माना था। अब सुप्रीम कोर्ट ने भी इसे बरकरार रखते हुए कहा है कि अपनी सांस्कृतिक पहचान की रक्षा के लिए ग्राम सभाओं द्वारा उठाए गए एहतियाती कदम पूरी तरह वैधानिक हैं। अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि ग्राम सभाएं केवल औपचारिक संस्था नहीं, बल्कि वास्तविक स्वशासन की इकाई हैं। फैसले पर सियासी प्रतिक्रिया निर्णय के बाद प्रदेश की राजनीति में भी हलचल बढ़ गई है। भाजपा के वरिष्ठ विधायक अजय चंद्राकर ने धर्म प्रचारकों से सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखने की बात कही। वहीं आदिवासी स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधीय पादप बोर्ड के चेयरमैन विकास मरकाम ने इसे आदिवासी समाज की सांस्कृतिक पहचान की बड़ी जीत बताया। गांव-गांव जनजागरण अभियान सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा और अन्य संगठनों ने गांवों में जनजागरण अभियान चलाने की तैयारी शुरू कर दी है। पूर्व मंत्री और जनजाति सुरक्षा मंच के राष्ट्रीय संयोजक गणेश राम भगत ने कहा कि अब जब सर्वोच्च न्यायालय ने ग्राम सभाओं के अधिकारों को मान्यता दे दी है, तो समाज को जागरूक कर परंपराओं की रक्षा सुनिश्चित की जाएगी। इस निर्णय ने स्पष्ट कर दिया है कि अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभाओं को अपनी सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक संरचना की रक्षा के लिए व्यापक अधिकार प्राप्त हैं।

CBSE की चूक: गणित के पेपर कम होने के कारण छात्रों को तीन शिफ्ट में परीक्षा देनी पड़ी

विश्रामपुर मंगलवार को 10वीं बोर्ड परीक्षा के पहले ही दिन केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े हो गए। डीएवी पब्लिक स्कूल तिलसिवां परीक्षा केंद्र में गणित (बेसिक) के प्रश्नपत्र कम पहुंचने के कारण अफरातफरी की स्थिति बन गई, जिससे परीक्षा तीन चरणों में करानी पड़ी। इस केंद्र पर डीएवी पब्लिक स्कूल विश्रामपुर के 132 और साधुराम विद्या मंदिर, सूरजपुर के 51 परीक्षार्थियों की परीक्षा निर्धारित थी। परीक्षा का समय सुबह 10:30 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक तय था। पैकेट खोलते ही सामने आई गड़बड़ी जानकारी के अनुसार, बैंक से प्राप्त सीलबंद बंडल खोलने पर पाया गया कि गणित (बेसिक) कोर्स के पैकेट में अधिकांश प्रश्नपत्र स्टैंडर्ड कोर्स के थे। स्थिति गंभीर होने पर केंद्र प्रभारी विधु शर्मा ने बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारियों और सिटी कोऑर्डिनेटर से संपर्क किया। निर्देश मिलने के बाद अन्य परीक्षा केंद्रों से प्रश्नपत्र मंगाने की व्यवस्था की गई। इस पूरी प्रक्रिया में देरी होने से परीक्षार्थियों को कक्ष में इंतजार करना पड़ा। तीन अलग-अलग चरणों में परीक्षा अंततः प्रश्नपत्र उपलब्ध होने के बाद परीक्षा तीन चरणों में आयोजित की गई। पहला चरण सुबह 10:30 बजे, दूसरा 11:15 बजे और तीसरा 12:35 बजे शुरू हुआ। प्रबंधन का कहना है कि परिस्थितियों के बावजूद परीक्षा को व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराया गया। हालांकि, परीक्षा के पहले दिन हुई इस चूक ने बोर्ड की तैयारी और समन्वय व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।

भिलाई में धोखाधड़ी का मामला: फर्जी मृत्यु के जरिए 1.19 करोड़ रुपये की बीमा राशि निकाली गई

भिलाई  दुर्ग पुलिस ने राष्ट्रीय पेंशन योजना (एनपीएस) से जुड़े एक करोड़, 19 लाख रुपये की बीमा राशि की धोखाधड़ी का राजफाश किया है। मामले में जीवित व्यक्तियों को मृत दर्शाकर फर्जी मृत्यु दावा प्रस्तुत कर राशि निकासी की गई थी। पुलिस ने मुख्य आरोपित राजेश कनोजिया (44) को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया। आरोपित बोरसी दुर्ग का रहने वाला है। वह क्षेत्र में ऑनलाइन सेवा केंद्र संचालित करता है और एनपीएस निकासी के नाम पर ग्राहकों से आधार, पैन और बैंक संबंधी जानकारी लेकर फर्जी दस्तावेज तैयार करता था। फर्जी दस्तावेजों से जुड़े डिजिटल साक्ष्य जब्त पुलिस ने आरोपित से 10 हजार रुपये नकद और फर्जी दस्तावेजों से जुड़े डिजिटल साक्ष्य जब्त किए हैं। वहीं अन्य आरोपितों की तलाश जारी है। पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार, 16 फरवरी 2026 को एचडीएफसी लाइफ कंपनी लिमिटेड, बोकारो (झारखंड) के प्रबंधक ने लिखित आवेदन देकर शिकायत दर्ज कराई कि एनपीएस खातों में फर्जी मृत्यु दावा प्रस्तुत कर करीब 1.19 करोड़ रुपये की अनुचित निकासी की गई है। फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र और आधार दावे प्रस्तुत किए जांच में सामने आया कि आरोपीतों ने आपराधिक साजिश के तहत फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र, फर्जी आधार और अन्य केवाईसी दस्तावेजों का उपयोग कर बीमा दावे प्रस्तुत किए। जांच के दौरान यह भी पता चला कि सेवानिवृत्त कर्मचारी के नाम से मृत्यु दावा दाखिल किया गया, जबकि संबंधित व्यक्ति जीवित पाए गए।  

वर्ल्ड कप और चैंपियंस ट्रॉफी भारत में? पाकिस्तान विवाद ने बढ़ाई अनिश्चितता

नई दिल्ली भारत और पाकिस्तान के बीच जारी तनाव का सबसे बड़ा नुकसान इंडियन क्रिकेट फैंस को होने वाला है. खबर है कि भविष्य में होने वाले आईसीसी टूर्नामेंट भारत से बाहर ट्रांसफर हो सकते हैं. ऑस्ट्रेलिया के अखबार ‘द एज’ में छपी रिपोर्ट की माने तो आईसीसी 2029 चैंपियंस ट्रॉफी और 2031 वनडे विश्व कप को भारत से बाहर स्थानांतरित करने पर विचार कर रही है ताकि भारत और पाकिस्तान के एक-दूसरे के देशों में खेलने से इनकार करने के कारण पैदा होने वाली लॉजिस्टिक परेशानियों से बचा जा सके. भारत के टूर्नामेंट ऑस्ट्रेलिया में होंगे! खबर के मुताबिक अगर भारत से 2029 की चैंपियंस ट्रॉफी और 2031 का वनडे वर्ल्ड कप शिफ्ट होता है तो इसकी मेजबानी के लिए ऑस्ट्रेलिया का नाम सबसे ऊपर होगा, जहां 2015 में वनडे विश्व कप और 2022 में टी-20 विश्व कप हो चुका है. भारत-पाकिस्तान के बीच समझौता भारत और पाकिस्तान ने पहले आईसीसी के साथ एक समझौता किया था, जिसमें वैश्विक टूर्नामेंटों के दौरान एक-दूसरे के देशों में न खेलने पर सहमति बनी थी. यह फैसला भारत द्वारा 2025 चैंपियंस ट्रॉफी के लिए पाकिस्तान जाने से इनकार करने के बाद लिया गया था. मौजूदा स्थिति को देखते हुए यह संभावना है कि 2027 तक किए गए इस समझौते को भविष्य के टूर्नामेंटों तक भी बढ़ाया जा सकता है. कोलंबो में हो रहे भारत-पाक मैच भारत-श्रीलंका की संयुक्त मेजबानी में जारी मौजूदा टी-20 विश्व कप 2026 में पाकिस्तान अपने सारे मैच कोलंबो में ही खेल रही है, पाकिस्तान से मैच खेलने के लिए भारतीय टीम ने श्रीलंका का दौरा किया था, इस मैच में पाकिस्तान की शर्मनाक हार हुई थी. अब अगर टूर्नामेंट में सेमीफाइनल या फाइनल में दोनों टीम टकराती है तब भी वो मुकाबले कोलंबो में ही खेले जाएंगे.

भूपेन बोरा के साथ हिमंत सरमा का कनेक्शन, कांग्रेस पर असर डालने वाली नई चुनौती

गुवाहाटी  असम विधानसभा चुनाव की सियासी सरगर्मी के बीच कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और कद्दावर नेता भूपेन बोरा ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया. यह खबर आते ही कांग्रेस में भूचाल मच गया. पार्टी आलाकमान के एक्टिव होने और मान-मनौव्वल के बाद भूपेन बोरा ने अपना इस्तीफा वापस नहीं लिया, लेकिन कांग्रेस प्रभारी जितेंद्र सिंह ने जरूर कहा कि उन्हें मना लिया गया है और मामले को सुलझा लेंगे, लेकिन लगता है कि बात नहीं बन सकी है. यही वजह है कि अब भूपेन बोरा के बीजेपी में शामिल होने जा रहे है. मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने मंगलवार को भपेन बोरा के घर जाकर मुलाकात किया. इसके बाद हिमंत ने मीडिया से कहा कि भूपेन बोरा 22 फरवरी को बीजेपी में शामिल होंगे.उन्होंने कहा कि बोरा को बीजेपी में लेने के लिए राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने हरी झंडी दे दी है. बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप सैकिया इस मामले में भूपेन बोरा से बात करेंगे. बीजेपी में शामिल होना उनके लिए घर वापसी जैसा होगा.  असम सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने भूपेन बोरा के बीजेपी में शामिल होने की बात मीडिया से कह रहे थे, तो उनके बगल में भूपेन बोरा बैठे हुए थे. कांग्रेस को झटका ऐसे समय लगा है, जब प्रियंका गांधी असम के दो दिवसीय दौरे पर पहुंच रही है. ऐसे में सवाल उठता है कि हेमंत सरमा और भूपेंद्र बोरा की यारी, असम में कितना पड़ेगी कांग्रेस पर भारी?  प्रियंका के दौरे से पहले कांग्रेस को लगा झटका कांग्रेस दस साल से असम की सत्ता से बाहर है और बीजेपी को जीत की हैट्रिक लगाने के रोकने के लिए हरसंभव कोशिश में कर ही थी. कांग्रेस अपनी वापसी के लिए असम चुनाव की कमान प्रियंका गांधी के हाथों में सौंप रही है. प्रियंका असम चुनाव के लिए कांग्रेस स्क्रीनिंग कमेटी की अध्यक्ष हैं. प्रियंका असम के दो दिवसीय दौरे पर गुवाहाटी पहुंचेंगी.  प्रियंका गांधी अपने दो दिवसीय दौरा पर संगठन को सियासी धार देने की है. दोनों दिन प्रदेश नेताओं, जिला अध्यक्षों और फ्रंटल संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ बंद कमरे में बैठकों करेंगी. मकसद साफ है, पार्टी के अंदर चल रहे मतभेद सुलझाना,आपसी तालमेल बेहतर करना और उम्मीदवारों के चयन से पहले एकजुट ढांचा तैयार करना. इन कवायद के बीच भूपेन बोरा का कांग्रेस से इस्तीफा और अब बीजेपी के दामन थामने से प्रियंका गांधी के जरिए माहौल बनाने की कोशिशों को तगड़ा झटका लगा है.  भूपेन बोरा और हिमंता सरमा से सियासी यारी भूपेन बोरा से कांग्रेस से इस्तीफा देने के बाद दूसरे दिन ही असम में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने मंगलवार को उनके घर जाकर मुलाकात की. इसके बाद बोरा के साथ मीडिया के सामने आए उन्होंने कहा कि भूपेन बोरा 22 फरवरी को बीजेपी में शामिल होंगे. हिमंत सरमा ने कहा कि दिलीप सैकिया भूपेन बोरा के बीजेपी में शामिल होने से जुड़ी सभी औपचारिकताएं पूरी करेंगे. उनके साथ गुवाहाटी और उत्तर लखीमपुर में कई कांग्रेस नेता भी बीजेपी में शामिल होंगे. वे कांग्रेस में आखिरी मान्यता प्राप्त हिंदू नेता हैं. मुख्यमंत्री हिमंत सरमा ने कहा कि भूपेन बोरा को पूरा सम्मान और गरिमा दी जाएगी. बीजेपी में शामिल होना उनके लिए घर वापसी जैसा होगा क्योंकि यह एक ऐसी पार्टी है जिसमें उनके जैसे कई लोग हैं, जिनके पिता किसी उच्च पद पर नहीं रहे. कांग्रेस अब मुख्यधारा के असमिया लोगों की पार्टी नहीं रह गई है. उन्होंने कहा कि एक सच्चा कांग्रेसी नेता इस बात से दुखी होगा कि उसकी पार्टी चुनाव जीतने के लिए संघर्ष नहीं कर रही है.  हिमंत सरमा ने कहा कि मैंने भी यही पीड़ा झेली थी.जब मैं बीजेपी में शामिल होने गया, तब मुझे भी ऐसे फोन आए थे.ये लोग सामंतों की तरह जीते हैं. उन्हें लगता है कि एक फोन करने से फैसला बदल जाएगा. भूपेन बोरा बीजेपी में शामिल होते हैं तो फिर उनकी और हिमंत की सियासी जोड़ी का मुकाबला कांग्रेस को असम में करना होगा?  भूपेन बोरा कौन है और क्या है सियासी आधार भूपेन बोरा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और असम की राजनीति में एक जाना-पहचाना नाम हैं. 2021 से 2025 तक असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रह चुके हैं और संगठनात्मक राजनीति में मजबूत पकड़ के लिए पहचाने जाते हैं. भूपेन बोरा ऐसे नेता हैं, जिन्होनें जमीनी कार्यकर्ता से लेकर प्रदेश अध्यक्ष तक का सफर तय करने वाला नेता माना जाता है. भूपेन बोरा का जन्म असम में हुआ और उन्होंने छात्र राजनीति से अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की और कांग्रेस विचारधारा से जुड़े और धीरे-धीरे पार्टी संगठन में अहम भूमिकाएं निभाते गए. वे चार बार विधायक रहे और आक्रामक राजनीति के लिए पहचाने जाते हैं. एक संगठनकर्ता के रूप में बोरा की पहचान अनुशासित कार्यशैली, कैडर-बेस्ड राजनीति और पार्टी को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की रणनीति के लिए होती है.  कांग्रेस को दोबारा से खड़े करने में रोल अदा किया 5 साल पहले 2021 में जब असम में लगातार दूसरी बार कांग्रेस को बीजेपी से करारी हार का सामना करना पड़ा था. विधानसभा चुनाव के फौरन बाद जुलाई में दो बार के विधायक रह चुके भूपेन बोरा को असम प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष नियुक्त किया गया. करीब चार साल साल तक बोरा ने पूरी मेहनत की. उन्होंने राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा की तर्ज पर पूरे असम में पदयात्रा भी की और हिमंत बिस्वा सरमा सरकार के ख़िलाफ़ सड़कों पर नज़र आए.प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद उन्होंने कांग्रेस को दोबारा खड़ा करने, बूथ-स्तर पर संगठन को सक्रिय करने और युवाओं व अल्पसंख्यकों को पार्टी से जोड़ने पर खास जोर दिया. 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले जनवरी में राहुल गांधी ने मणिपुर से मुंबई तक भारत जोड़ो न्याय यात्रा निकाली थी. यात्रा जब गुवाहाटी पहुंची तो प्रशासन ने राहुल गांधी को शहर के अंदर से गुजरने से रोक दिया और बाहर से निकालने को कहा.इससे नाराज कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने पुलिस बैरिकेड पर आक्रामक प्रदर्शन किया जिसकी अगुवाई प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भूपेन बोरा कर रहे थे. उस समय भूपेन बोरा महज प्रदर्शन की औपचारिकता नहीं कर रहे थे बल्कि वाक़ई में आरपार में मूड में थे.  भूपेन बोरा ks बीजेपी में जाने से क्या होगा नुकसान असम विधानसभा चुनाव … Read more

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