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04 मार्च 2026 का राशिफल: मेष से मीन तक 12 राशियों का भविष्य, जानें किसके लिए है लाभकारी दिन

मेष राशि आज आप पार्टनर का खास ध्यान रखें क्योंकि वे किसी बात पर आपसे नाराज़ हो सकते हैं। पुरानी बातों को दोबारा न छेड़ें। रिश्ते को संभालने और बचाने की कोशिश करें, तभी स्थिति सुधरेगी। वृषभ राशि वृषभ राशि के लव लाइफ में आज कोई नया व्यक्ति आ सकता है। कमिटेड लोगों के पार्टनर किसी बात से नाराज़ हो सकते हैं। आपको सलाह है कि बेवजह की बहस से बचें, शांति और समझदारी से काम लें। मिथुन राशि मिथुन राशि के प्रेम जीवन में आज प्यार भरी बातें होंगी। साथ में कोई खास प्लान बन सकता है। पार्टनर के साथ घूमने जाने का मौका मिलेगा, जिससे रिश्ता और मजबूत होगा। कर्क राशि कर्क राशि के लव लाइफ में बिना कुछ कहे भी गलतफहमी बढ़ सकती है। पार्टनर से विवाद संभव है और शक की स्थिति बन सकती है। हालांकि शाम तक माहौल फिर से सामान्य हो जाएगा। सिंह राशि आपके रिलेशनशिप में कुछ मुद्दे बढ़ सकते हैं। कोई पुरानी बात आपको परेशान करेगी जिसके कारण मूड ऑफ रह सकता है, इसलिए धैर्य से काम लें। कन्या राशि कन्या राशि के लव लाइफ की स्थिति आज अच्छी रहने वाली है। डेट पर जाने का प्लान बन सकता है। कोई ऑनलाइन मैसेज आपके चेहरे पर मुस्कान ला सकता है। प्यार में नया ट्विस्ट आएगा। तुला राशि तुला राशि के रिश्ते में आज प्यार जताना जरूरी है, वरना दूरी बढ़ सकती है। पुराना विवाद खत्म करना ही बेहतर रहेगा। आपको सलाह है कि दूसरों की बात पर यकीन ना करें।  वृश्चिक राशि वृश्चिक राशि को कोई नया पसंद आ सकता है। कुछ लोगों का मूड आज थोड़ा ऑफ रह सकता है, खासकर शाम के समय। फिर भी प्यार को मौका देने की कोशिश करें। धनु राशि धनु राशि के लोगों को आज ज्यादा ओवरथिंकिंग करने से बचाव करना होगा। पुराने दिन फिर से खास बन सकते हैं। रात में प्यार भरी बातचीत होगी, लेकिन नींद कम आ सकती है। मकर राशि आज मकर राशि को पुराना प्यार याद आ सकता है और उसकी कमी महसूस होगी। शाम तक मूड हल्का करने के लिए कहीं घूमने जा सकते हैं। पार्टनर को बहुत मिस करेंगे। कुंभ राशि कुंभ राशि को लोगों के मन में आज पार्टनर की जिंदगी को लेकर सवाल आएंगे। आप उन्हें बहुत प्यार करते हैं, इसलिए छोड़ना मुश्किल लगेगा। आज अपने मन को मजबूत रखना होगा। मीन राशि मीन राशि के प्रेम जीवन में आज कोई नया व्यक्ति बीच में आ सकता है। पार्टनर से दिल की बातें करें। साथ में घूमने या डिनर डेट का प्लान बन सकता है।

ईरान संघर्ष से बाजार में हलचल, सप्लाई डर के बावजूद तेल कीमतों में आई नरमी

नई दिल्ली पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) के जरिए आपूर्ति को लेकर चिंताओं के बीच पिछले सत्र में 10 प्रतिशत से अधिक की तेज उछाल के बाद मंगलवार को कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में लगभग 1 प्रतिशत की बढ़त के साथ कुछ स्थिरता देखी गई। अमेरिकी कच्चे तेल के वायदा भाव में 1.4 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई और यह 72.23 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। वहीं ब्रेंट क्रूड 1.87 प्रतिशत बढ़कर शुरुआती कारोबार में 79.2 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड करता दिखा। ईरान के जवाबी हमलों से तेल और गैस आपूर्ति बाधित होने की आशंका बढ़ गई है, जिससे तेल की कीमतों में तेजी आई और महंगाई को लेकर चिंता गहरा गई। रिपोर्ट के मुताबिक, तेहरान ने सऊदी अरब के तेल और गैस ढांचे को निशाना बनाया और रणनीतिक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों को लेकर चेतावनी दी। विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिकी प्रशासन द्वारा घरेलू ऊर्जा कीमतों को नियंत्रित करने के लिए उठाए जाने वाले कदमों की घोषणा से सोमवार को आई घबराहट कुछ कम हुई। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने बताया कि ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट और ऊर्जा सचिव क्रिस राइट मंगलवार को बढ़ती ऊर्जा कीमतों से निपटने की योजना की घोषणा करेंगे। हालांकि, वैश्विक तेल आपूर्ति के प्रमुख मार्ग माने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों को खतरा बना हुआ है, जिससे कीमतों को समर्थन मिल रहा है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह मार्ग अस्थायी रूप से बंद भी होता है तो भारत कुछ समय तक स्थिति संभाल सकता है। लेकिन अगर जलडमरूमध्य लंबे समय तक बंद रहता है, तो भारत को आपूर्ति के स्रोतों में और विविधता लानी होगी। बताया जा रहा है कि भारत पहले से ही रूस, अफ्रीका और दक्षिण अमेरिका जैसे वैकल्पिक आपूर्तिकर्ताओं की तलाश कर रहा है। निवेश बैंक मॉर्गन स्टेनली ने कहा है कि यदि पश्चिम एशिया में पूर्ण स्तर का संघर्ष होता है और होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति लंबे समय तक बाधित होती है, तो ब्रेंट क्रूड की कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है। एक अन्य हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि जलडमरूमध्य में व्यवधान की स्थिति में ब्रेंट क्रूड 90 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जा सकता है और व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष की स्थिति में यह 100 डॉलर प्रति बैरल के पार भी जा सकता है। अनुमान के मुताबिक, सीमित संघर्ष की स्थिति में तेल की कीमत में 5 से 10 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी हो सकती है, जबकि ईरान के तेल ढांचे को सीधा नुकसान होने पर 10 से 12 डॉलर प्रति बैरल तक का इजाफा संभव है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कच्चे तेल की कीमत में हर 1 डॉलर की बढ़ोतरी से भारत का वार्षिक आयात बिल करीब 2 अरब डॉलर बढ़ जाता है, जिससे व्यापार संतुलन पर दबाव पड़ता है। दुनिया के कुल तेल परिवहन का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है, जबकि भारत के 40 प्रतिशत से अधिक कच्चे तेल आयात इसी मार्ग से आते हैं।

दुबई में बढ़ी सतर्कता: भारतीय दूतावास ने जारी की चेतावनी, जरूरी काम हो तभी करें यात्रा

नई दिल्ली  दुबई में भारतीय दूतावास ने अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की है। भारतीय दूतावास ने वहां रहने वाले भारतीय लोगों को गैर जरूरी यात्रा करने से बचने की सलाह दी है। दुबई में भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “अभी के इलाके के हालात को देखते हुए संयुक्त अरब अमीरात में सभी भारतीय नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे गैर-जरूरी यात्रा से बचें। पूरा ध्यान रखें, सतर्क रहें और यूएई अधिकारियों और एम्बेसी द्वारा जारी किए जाने वाले सुरक्षा गाइडलाइंस और एडवाइजरी का पालन करें।” “अबू धाबी में भारतीय एम्बेसी और दुबई में कॉन्सुलेट जनरल नॉर्मल तरीके से काम कर रहे हैं और जरूरत पड़ने पर अपडेट जारी करेंगे। किसी भी इमरजेंसी सवाल के लिए, यूएई में भारतीय नागरिक टोल फ्री नंबर: 800-46342 और व्हाट्सएप +971543090571 पर संपर्क कर सकते हैं।” रियाद में अमेरिकी दूतावास पर दो ईरानी ड्रोन हमलों के बाद आग लग गई और सामान का नुकसान हुआ। अमेरिकी दूतावास ने इसके बाद एडवाइजरी जारी की। हमले के बाद अमेरिकी दूतावास ने एक्स के जरिए रियाद, जेद्दा और धाहरान के लिए शेल्टर-इन-प्लेस एडवाइजरी जारी की। इसने इस क्षेत्र में सैन्य ठिकानों की गैर-जरूरी यात्रा पर रोक लगाने की भी घोषणा की और सऊदी अरब में रहने वाले अमेरिकी नागरिकों से तुरंत पनाह लेने की अपील की। बयान में कहा गया, “सऊदी अरब में अमेरिकी मिशन इलाके के हालात पर नजर रख रहा है। हम सभी यात्रियों से कहना चाहते हैं कि वे हमारे सबसे नए सुरक्षा अलर्ट देखें। किसी भी रुकावट के मामले में अपनी यात्रा की योजना को देखें और खुद को और अपने परिवार को सुरक्षित रखने के लिए सही फैसले लें।” इसमें आगे कहा गया, “हम सभी अमेरिकी नागरिकों को एक पर्सनल सेफ्टी प्लान बनाए रखने की सलाह देते हैं। विदेश में ट्रैवल करते या रहते समय अचानक कोई मुश्किल आ सकती है, और एक अच्छा प्लान आपको संभावित हालात के बारे में सोचने और पहले से सबसे अच्छा तरीका तय करने में मदद करता है।”

ईरान पर हमले से बढ़ा तनाव, पाकिस्तान ने किया विरोध; रक्षा मंत्री बोले- हालात बिगड़े तो मुश्किलें बढ़ेंगी

इस्लामाबाद ईरान पर हमलों का विरोध पाकिस्तान में हिंसक भी हुआ। अमेरिकी दूतावास को निशाने पर भी लिया गया, तो सांसदों ने भी विरोध के सुर बुलंद किए। संसद में राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के संबोधन के दौरान भी ‘जाली बोर्ड ऑफ पीस से बाहर निकलो’ के नारे लगे। वहीं, अब तो रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने भी कहना शुरू कर दिया है कि जंग पाकिस्तान के लिए खतरनाक है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने सोशल मीडिया पोस्ट में जायनिज्म (यहूदियों का आंदोलन) को मुस्लिम दुनिया में अस्थिरता की मुख्य वजह बताया है और इसे मानवता के लिए खतरा बताया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि ईरान पर चल रहा युद्ध पाकिस्तान की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर रहा है। उन्होंने कहा कि फिलिस्तीन की जमीन पर इजरायल के कायम होने से लेकर आज तक इस्लामी दुनिया पर जो भी बड़ी-बड़ी मुसीबतें आई हैं, जो भी युद्ध थोपे गए हैं, उनमें जायनिस्ट विचारधारा और इजरायल का सीधा हाथ दिखता है। ख्वाजा आसिफ ने ईरान के बारे में कहा कि ईरान समझौते के लिए तैयार था, इसके बावजूद उन पर युद्ध थोपा गया है। यह सब जायनिस्ट एजेंडा का हिस्सा है, जिसमें इजराइल का प्रभाव पाकिस्तान की सरहद तक लाने की कोशिश शामिल है। अफगानिस्तान, ईरान और भारत को मिलाकर पाकिस्तान विरोधी एजेंडा बनाया जा रहा है, ताकि पाकिस्तान की सरहदें असुरक्षित हो जाएं, हर तरफ से दुश्मन घेर लें और पाकिस्तान कमजोर हो जाए। वहीं, पाकिस्तान की पूर्व राजदूत ने पीस बोर्ड से हटने की सलाह दी है। उन्होंने कहा है कि शरीफ सरकार को ट्रंप का गाजा बोर्ड छोड़ देना चाहिए। पूर्व राजदूत मलीहा लोधी ने कहा कि नवाज शरीफ की सरकार को ट्रंप के बनाए “बोर्ड ऑफ पीस” से बाहर निकल जाना चाहिए। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि पाकिस्तान को शुरुआत में ही इस बोर्ड में शामिल नहीं होना चाहिए था। लोधी ने आरोप लगाया कि “ट्रंप सरकार कई देशों पर हमले कर चुकी है और गाजा में इजरायली कार्रवाई में उसकी भूमिका रही है।”

सुरक्षा अलर्ट जारी: United States Embassy ने जॉर्डन और यरुशलम की यात्रा पर लगाई रोक

नई दिल्ली मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच अमेरिका दूतावास ने जॉर्डन और यरुशलम के लिए एडवाइजरी जारी की है। अमेरिका ने स्थानीय खबरों पर नजर रखने और इन दोनों देशों की यात्रा करने से पहले विचार करने को कहा है। अमेरिका ने सुरक्षा कारणों से जॉर्डन में 2 मार्च को गैर-आपातकालीन अमेरिकी सरकारी कर्मचारियों और उनके परिवार के सदस्यों को देश छोड़ने का आदेश दिया है। अमेरिकी दूतावास के कामकाज में बदलावों को दिखाने के लिए एडवाइजरी समरी को अपडेट किया गया। अमेरिकी दूतावास ने कहा कि आतंकवाद और सशस्त्र संघर्ष के कारण जॉर्डन की यात्रा पर फिर से विचार करें। अमेरिका और ईरान के बीच 28 फरवरी को दुश्मनी शुरू होने के बाद ईरान से ड्रोन एवं मिसाइल हमलों और कमर्शियल उड़ानों में बड़ी रुकावटों का खतरा बना हुआ है। इसके अलावा अगर जाते हैं तो इमरजेंसी में निकलने का प्लान बनाएं जो अमेरिकी सरकार की मदद पर निर्भर न हो। क्राइसिस और इवैक्यूएशन पर हमारी जानकारी देखें। अपने आसपास का ध्यान रखें। वहीं, येरुशलम को लेकर अमेरिकी दूतावास ने कहा, “इजरायल से निकलने वाले अमेरिकियों को निकालने या सीधे मदद करने की स्थिति में नहीं है। जब आप अपनी सुरक्षा योजना बना रहे हों तो आपकी जानकारी के लिए नीचे दी गई जानकारी दी गई है। इजरायली टूरिज्म मंत्रालय ने 2 मार्च से ताबा बॉर्डर क्रॉसिंग के लिए शटल चलाना शुरू कर दिया है। शटल के लिए पैसेंजर लिस्ट में शामिल होने के लिए आपको मिनिस्ट्री के इवैक्युएशन फॉर्म के जरिए रजिस्टर करना होगा।” यूएस एंबेसी ने कहा कि अमेरिकी दूतावास पर्यटन मंत्रालय के शटल के लिए कोई सिफारिश (पक्ष या विपक्ष में) नहीं कर सकती है। अगर आप निकलने के लिए इस ऑप्शन का फायदा उठाते हैं तो अमेरिकी सरकार आपकी सुरक्षा की गारंटी नहीं दे सकती। यह जानकारी उन लोगों के लिए एक कर्टसी के तौर पर दी गई है जो इजरायल छोड़ना चाहते हैं। इसके अलावा, फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि राष्ट्रपति को लगता है कि तेहरान के साथ लंबे समय तक बातचीत के बावजूद समय खत्म हो रहा है। उन्होंने कहा, “हमने गर्मियों में ऑपरेशन मिडनाइट हैमर के दौरान यूरेनियम संवर्धन फैसिलिटी को नष्ट कर दिया था।” उपराष्ट्रपति ने कहा कि सरकार का मकसद इसे कुछ समय के लिए रोकने से कहीं ज्यादा था। वेंस ने कहा, “ट्रंप अपने दूसरे कार्यकाल के पहले तीन, चार साल तक देश को सिर्फ ईरानी न्यूक्लियर हथियार से सुरक्षित ही नहीं रखना चाहते थे, बल्कि वह यह सुनिश्चित करना चाहते थे कि ईरान के पास कभी न्यूक्लियर हथियार न बना सके।” वेंस ने कहा, ट्रंप ने अंदाजा लगाया कि ईरान अपने प्रोग्राम को आगे बढ़ाने पर तुला हुआ है और हर हाल में परमाणु हथियार बनाने के लिए प्रतिबद्ध है, तब अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान पर एक्शन लेने का फैसला किया।” विदेश मंत्री मार्को रुबियो की इस टिप्पणी पर कि अमेरिका आगे और कड़ा कदम उठा सकता है, इस बारे में सवाल पूछे जाने पर वेंस ने अमेरिकी सेना की क्षमता पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “ईरान के परमाणु कार्यक्रम को गंभीर नुकसान पहुंचाने की हमारी क्षमता कहीं अधिक है। साथ ही हम उन विभिन्न मिसाइलों को भी निशाना बना सकते हैं जो हमारे सैनिकों के लिए खतरा हैं। राष्ट्रपति के पास कई विकल्प उपलब्ध हैं।

घर लौटते परिवार पर काल बनकर टूटा ट्रक, दो मासूमों सहित 3 की मौत, 4 घायल

भिंड नोएडा से गोहद स्थित गृह गांव में होली मनाने आ रहे कार सवार परिवार से आगरा में ट्रक टकरा गया। हादसे में दो बच्चों सहित तीन लोगों की मौत हो गई। चार लोग घायल हो गए। जानकारी के अनुसार 32 वर्षीय रामकुमार पुत्र बांकेलाल जाटव निवासी कीरतपुरा थाना गोहद नोएडा के सेक्टर 93 में परिवार सहित रहते थे। होली मनाने के लिए रामकुमार सोमवार रात कार से गोहद आ रहे थे। ट्रक की टक्कर से कार के उड़े परखच्चे, तीन की मौत मंगलवार सुबह करीब 4:30 बजे आगरा-फतेहाबाद के बीच बाह की ओर से आ रहे तेज रफ्तार ट्रक ने सामने से आ रही स्विफ्ट कार को टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। कार में फंसे यात्रियों को बाहर निकालने के लिए रेस्क्यू टीम को वाहन काटना पड़ा। अस्पताल में डॉक्टरों ने जांच के बाद रामकुमार जाटव, चार वर्षीय बेटे मनदीप के अलावा छह वर्षीय तनु पुत्री भूरे जाटव निवासी कीरतपुरा को मृत घोषित कर दिया। कई लोग गंभीर घायल, ट्रक चालक फरार जबकि 40 वर्षीय भूरे जाटव, उनकी पत्नी 35 वर्षीय चंद्रिका, बेटी आठ वर्षीय अनन्या के अलावा रेखा पत्नी रामकुमार जाटव घायल हैं। भूरे जाटव की गंभीर हालत देखते हुए ग्वालियर में भर्ती कराया गया है। हादसे के बाद ट्रक चालक मौके से फरार हो गया। आर्थिक तंगी और अस्पताल के बिल ने बढ़ाई परेशानी हादसे के बाद मृतक रामकुमार जाटव के भाई राजकुमार जाटव ने आगरा में न्यू आगरा थाने में आवेदन देकर बताया कि हादसे में उनके भाई सहित भतीजों की मौत हो गई है। जबकि घायल श्री हरि अस्पताल में भर्ती हैं। अस्पताल प्रबंधन ने बताया कि घायलों का बिल 97 हजार रुपये हो गया है। जबकि घायलों के स्वजन मजदूरी करते थे, इसलिए परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है। अस्पताल प्रबंधन बिना बिल भरे हुए मरीजों को डिस्चार्ज नहीं कर रहा है।  

रणनीति और समीकरण साधने की कवायद: यूपी में भाजपा की चुनावी तैयारी, योगी सरकार में बदलाव के संकेत

लखनऊ प्रदेश में राजनीतिक पदचापों की ध्वनि दूर तक पहुंचने लगी है। पिछले दिनों राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कई अहम विषयों को छेड़ते हुए प्रदेश को मथा, वहीं अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भाजपा के सभी छह क्षेत्रों में समन्वय बैठकों में पहुंच रहे हैं। राजनीतिक पंडितों का कहना है कि अब ‘ट्रिपल एस’ यानी सरकार, संगठन और संघ के मॉडल पर चुनावी तार को कसा जा रहा है। पार्टी अंदरूनी घमासान, यूजीसी एवं जातीय उबाल से होने वाले नुकसान से निपटने की रणनीति बना रही, वहीं नाराज कार्यकर्ताओं को साधने की कसरत भी तेज की गई है। सरकार, संघ और भाजपा की प्रदेश स्तर पर समन्वय बैठक नियमित अंतराल पर होती रहती है, जिसमें सरकार के कार्यों के साथ ही अनुषांगिक संगठनों के अभियानों एवं आगामी कार्यक्रमों की चर्चा होती है, साथ ही जनप्रतिनिधियों एवं कार्यकर्ताओं के बीच सामंजस्य बढ़ाने पर जोर दिया जाता ह, लेकिन अब पार्टी के सभी छह क्षेत्रों में बैठकें हो रही हैं। बैठक में प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के साथ ही योगी भी पहुंच रहे हैं। राजनीतिक, सामाजिक एवं स्थानीय विषयों पर विमर्श 28 फरवरी को लखनऊ में आयोजित बैठक में योगी, पंकज, प्रदेश महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह के साथ ही संघ के सभी बड़े पदाधिकारी शामिल हुए। एक मार्च को वाराणसी और दो मार्च को गोरखपुर क्षेत्र में बैठक आयोजित की गई। बैठक में राजनीतिक, सामाजिक एवं स्थानीय विषयों पर विमर्श हुआ। होली के बाद पांच मार्च को पश्चिम क्षेत्र की समन्वय बैठक गाजियाबाद, छह मार्च को कानपुर और सात को ब्रज क्षेत्र की बैठक आगरा में होगी। समन्वय बैठकों की टाइमिंग विशेष रूप से बड़े राजनीतिक संकेत दे रही है। खासकर, ऐसे समय में जब प्रदेश संगठन में बड़े पैमाने पर बदलाव करने के साथ ही योगी मंत्रिमंडल में फेरबदल की भी चर्चा तेज है। प्रदेश अध्यक्ष चौधरी का कहना है कि सप्ताहभर में गाजियाबाद, कानपुर एवं आगरा में समन्वय बैठक होगी। इन बैठकों में प्रमुख मुद्दों के साथ ही क्षेत्रीय स्तर के विषयों पर भी स्वाभाविक तौर पर चर्चा होगी।  

सोशल मीडिया पर दी हाइड्रोजन बम की धमकी, पुलिस ने आरोपी को दबोचा

टीकमगढ़ पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती की बहू और जिला पंचायत अध्यक्ष उमिता राहुल सिंह लोधी को इंटरनेट मीडिया पर हाइड्रोजन बम से उड़ाने की धमकी देने वाले आरोपित को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पकड़े गए आरोपित की पहचान अर्जुन चढ़ार निवासी खरगापुर के रूप में हुई है। एसडीओपी राहुल कटरे ने बताया कि 22 फरवरी को जीडब्ल्यू बृजेंद्र कुशवाहा नामक एक फेसबुक प्रोफाइल से जिपं अध्यक्ष उमिता सिंह की पोस्ट पर लिखा था हमारे पास हाइड्रोजन बम है, हम बनाना जानते हैं। नेताओं को हम खुद ही मारेंगे। इस कमेंट में जिला पंचायत अध्यक्ष और उनके पति, पूर्व मंत्री राहुल सिंह लोधी को जान से मारने की सीधी धमकी दी गई थी। साक्ष्य मिटाने के लिए तोड़ा मोबाइल पुलिस पूछताछ में आरोपित अर्जुन चढ़ार ने बताया कि घटना वाले दिन उसने अत्यधिक शराब का सेवन कर रखा था। नशे की हालत में वीडियो देखते समय अचानक जिपं अध्यक्ष की आइडी सामने आने पर उसने बोलकर यह कमेंट कर दिया था। मामला तूल पकड़ते ही घबरा गया और उसने साक्ष्य मिटाने के लिए अपना आठ साल पुराना मोबाइल तोड़कर फेंक दिया। सिम निकालकर दूसरे मोबाइल में भी डाली, लेकिन साइबर सेल ने आइएमइआइ नंबर और तकनीकी विश्लेषण के जरिए उसे खरगापुर से दबोच लिया।  

कांग्रेस के दावों पर साव ने साधा निशाना, धान की अंतर राशि से लेकर असम चुनाव तक उठाए सवाल

रायपुर छत्तीसगढ़ में धान की अंतर राशि को लेकर सियासत गरमा गई है। कांग्रेस ने जहां इसे को किसानों के साथ ‘प्रति एकड़ 3000 रुपए का चूना’ करार दिया, वहीं प्रदेश के उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने पलटवार करते हुए कांग्रेस पर किसानों को ठगने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जिस पार्टी ने अपने कार्यकाल में किसानों से किए वादे पूरे नहीं किए, उसे इस मुद्दे पर बोलने का नैतिक अधिकार नहीं है। डिप्टी सीएम साव ने कहा कि कांग्रेस ने अपने शासनकाल में किसानों को दो साल का बोनस देने का वादा किया था, लेकिन वह पूरा नहीं किया। इसके विपरीत राज्य सरकार ने कृषक उन्नति योजना के तहत धान खरीदी के बाद अंतर की पूरी राशि एकमुश्त किसानों के खातों में जारी की है। उन्होंने दावा किया कि सरकार ने जो कहा, वह करके दिखाया है। राज्यसभा प्रत्याशी चयन को लेकर भी उन्होंने प्रतिक्रिया दी। छत्तीसगढ़ से भाजपा प्रत्याशी के नाम पर चल रही अटकलों के बीच अरुण साव ने कहा कि पार्टी में चयन की प्रक्रिया जारी है और तय समय पर नाम की घोषणा तथा नामांकन किया जाएगा। स्थानीय प्रत्याशी की मांग के सवाल पर उन्होंने कांग्रेस पर अन्याय करने का आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा योग्य और सक्रिय कार्यकर्ता को अवसर देती है तथा अंतिम निर्णय पार्टी का पार्लियामेंट्री बोर्ड करता है। असम में चुनावी जिम्मेदारी मिलने पर भी उन्होंने अपनी भूमिका स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि पार्टी के निर्देशानुसार वे असम में संगठनात्मक कार्य कर रहे हैं और उन्हें लखीमपुर क्षेत्र की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहां स्थानीय कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर चुनावी रणनीति पर काम किया जा रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि असम में भाजपा ऐतिहासिक प्रदर्शन करेगी।

मनोज पिंगुआ का औचक दौरा: पुनर्वास केंद्र में व्यवस्थाओं की पड़ताल, दिए आवश्यक निर्देश

रायपुर अपर मुख्य सचिव मनोज पिंगुआ ने पुनर्वास केंद्र का किया निरीक्षण अपर मुख्य सचिव मनोज पिंगुआ ने आज मंगलवार को कोंडागांव जिले के प्रवास के दौरान देव खरगांव स्थित पुनर्वास केंद्र का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने पुनर्वासित व्यक्तियों से संवाद कर उनकी दैनिक गतिविधियों एवं व्यवस्थाओं की जानकारी ली। साथ ही केंद्र में संचालित विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों का अवलोकन किया। उन्होंने पुनर्वास केंद्र के व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए प्रशिक्षण के साथ-साथ उनकी शिक्षा पर भी विशेष ध्यान देने को कहा ताकि पुनर्वासित व्यक्तियों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित हो सके। साथ ही उन्होंने कृषि संबंधी स्वरोजगार पर विशेष ध्यान देने को कहा और सुबह शाम नियमित प्रार्थना कराने के भी निर्देश दिए। इस अवसर पर कलेक्टरमती नूपुर राशि पन्ना एवं पुलिस अधीक्षक पंकज चंद्रा ने पुनर्वासित व्यक्तियों को शासन की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से प्रदान की जा रही सुविधाओं की जानकारी दी। इस मौके पर 01 पुनर्वासित व्यक्ति को नियुक्ति पत्र प्रदान किया और 01 व्यक्ति को स्मार्टफोन भी प्रदाय किया। साथ ही सभी को प्रेरणा लेने हेतु प्रेरित किया।  गारमेंट फैक्ट्री का भी किया अवलोकन अपर मुख्य सचिव पिंगुआ ने जिला मुख्यालय स्थित कोंडानार गारमेंट फैक्ट्री का निरीक्षण कर वहां संचालित आजीविका गतिविधियों का अवलोकन किया तथा प्रबंधन से विस्तृत जानकारी प्राप्त की।  इस अवसर पर एसडीएम अजय उरांव, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रूपेश दांडे, डीएसपी सतीश भार्गव तथा केंद्र प्रभारी पुनेश्वर वर्मा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

जंग की आंच बाजार तक: तेल संकट गहराया, शिपमेंट रुकी तो चावल सप्लाई पर भी खतरा

ईरान   ईरान-इजरायल युद्ध के बाद पश्चिम एशिया में हालात तेजी से बिगड़ गए हैं। Strait of Hormuz में बढ़ते खतरे और जहाजों की आवाजाही पर असर ने वैश्विक सप्लाई चेन को झटका दिया है। कच्चे तेल और नेचुरल गैस की आपूर्ति पर दबाव के साथ-साथ भारत का बासमती चावल निर्यात भी गंभीर रूप से प्रभावित हुआ है। समंदर और बंदरगाहों पर अटका लाखों टन चावल ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के मुताबिक, भारत से खाड़ी देशों को भेजा गया करीब 4 से 6 लाख टन बासमती चावल ट्रांजिट में, भारतीय बंदरगाहों पर या गंतव्य देशों के पोर्ट पर फंसा हुआ है। आम तौर पर खाड़ी देशों तक चावल पहुंचने में करीब 40 दिन लगते हैं लेकिन मौजूदा संकट ने इस पूरी प्रक्रिया को बाधित कर दिया है। 5-6 हजार करोड़ रुपए दांव पर फंसे हुए कंसाइनमेंट की अनुमानित वैल्यू 5,000 से 6,000 करोड़ रुपए बताई जा रही है। शिपिंग कंपनियों के बीमा कवर रद्द होने और जोखिम बढ़ने से कंटेनर फ्रेट दरें दोगुनी से ज्यादा हो गई हैं। ऐसे में निर्यातकों ने नई बुकिंग और पैकिंग का काम रोक दिया है और पहले से किए गए अनुबंधों को प्राथमिकता दी जा रही है। 70% निर्यात खाड़ी पर निर्भर भारत हर साल करीब 60 लाख टन से अधिक बासमती चावल निर्यात करता है, जिसमें से लगभग 70% हिस्सा खाड़ी देशों जैसे सऊदी अरब, ईरान और यूएई को जाता है। वित्त वर्ष 2024-25 में कुल 60.65 लाख टन बासमती का निर्यात हुआ, जिसकी कीमत 50,312 करोड़ रुपए (5.94 अरब डॉलर) रही।   फोर्स मेज्योर क्लॉज का सहारा? ट्रेड सूत्रों के अनुसार, यदि हालात लंबे समय तक बने रहते हैं तो कुछ निर्यातक ‘फोर्स मेज्योर’ क्लॉज का सहारा ले सकते हैं। यह प्रावधान युद्ध या प्राकृतिक आपदा जैसी अप्रत्याशित परिस्थितियों में अनुबंध की शर्तों से अस्थायी राहत देता है। क्या भारत में सस्ता होगा बासमती? रिकॉर्ड पैदावार के बीच मांग घटने से बासमती की कीमतों में पहले ही करीब 6% की गिरावट आ चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि निर्यात बाधित रहा तो घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ने से दाम और नीचे आ सकते हैं। हालांकि ट्रेडर्स का कहना है कि मिडिल ईस्ट में बासमती एक जरूरी खाद्य वस्तु है और भारतीय चावल का वास्तविक विकल्प नहीं है। जैसे ही हालात सामान्य होंगे, खाड़ी देशों से मांग दोबारा तेजी पकड़ सकती है। फिलहाल निर्यातक ‘वेट एंड वॉच’ की रणनीति अपना रहे हैं।

MP के 27 उत्पादों को मिला प्रतिष्ठित GI टैग, देश-दुनिया में बढ़ी ब्रांड वैल्यू

भोपाल मध्यप्रदेश की अनेक शिल्प कलाओं और कृषि, उद्यानिकी उत्पादों को राष्ट्रीय स्तर पर “जीआई टैग” प्राप्त होना प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के वोकल फॉर लोकल के स्वप्न को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश के उन्नत किसानों, खाद्य प्रसंस्करण उद्यमियों, शिल्पकारों और उन्हें प्रोत्साहित करने वाले विभागों को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी है। इन्हें मिल चुका है जीआई टैग बैतूल जिले की पारंपरिक शिल्प कला भरेवा कला को यह राष्ट्रीय पहचान मिली है। क्राफ्ट विलेज टिगरिया की भरेवा व कला को जीआई टैग मिला है। राष्ट्रपतिमती द्रौपदी मुर्मु ने हाल ही में (दिसंबर 2025 में) भरेवा शिल्प के कलाकार बलदेव वाघमारे को राष्ट्रीय हस्तशिल्प पुरस्कार से भी सम्मानित किया। बैतूल के अलावा छतरपुर जिले के खजुराहो के स्टोन क्राफ्ट, छतरपुर जिले के ही पारंपरिक काष्ठ शिल्प, ग्वालियर के पत्थर शिल्प, ग्वालियर की पेपर मैश कला जीआई टैग प्राप्त करने में सफल रही है। प्रदेश के अन्य जीआई टैग उत्पाद इस प्रकार हैं: चंदेरी साड़ी, महेश्वरी साड़ी और फैब्रिक, धार का बाग प्रिंट, इंदौर के लेदर के खिलौने, दतिया और टीकमगढ़ के बेल मेटल वेयर, उज्जैन का बटीक प्रिंट, जबलपुर का संगमरमर शिल्प, डिंडोरी की गोंड पेंटिंग, वारासिवनी की हैंडलूम साड़ी, ग्वालियर की ज्यामितीय पैटर्न की कालीन, पन्ना का हीरा, डिंडोरी का लोहा शिल्प, बालाघाट का चिन्नौर चावल, रीवा का सुंदरजा आम, सीहोर और विदिशा का शरबती गेहूं, मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश का संयुक्त रूप से महोबा देशावरी पान, छिंदवाड़ा और पांढुर्णा क्षेत्र का नागपुरी संतरा, झाबुआ जिले का कड़कनाथ मुर्गा, रतलाम का सेव, मुरैना की गजक, बुंदेलखंड क्षेत्र का कठिया गेहूं और जावरा का लहसुन शामिल है। मध्यप्रदेश के अन्य अनेक उत्पाद भी जीआई टैग प्राप्त होने की श्रृंखला में शीघ्र शामिल होंगे। इसके लिए राज्य सरकार और केंद्र सरकार के स्तर पर विभिन्न संस्थाओं द्वारा आवश्यक प्रयास किये जा रहे हैं। वर्ष 2024 और 2025 में विशेष उपलब्धि मध्यप्रदेश में वर्ष 2024 में बुंदेलखंड के कठिया गेहूं और रतलाम जिले के जावरा के लहसुन को जीआई टैग प्राप्त हुआ। इसी तरह वर्ष 2025 में प्रदेश के पांच उत्पाद को जीआई टैग मिला। इनमें छतरपुर जिले के खजुराहो का स्टोन क्राफ्ट, छतरपुर का ही पारंपरिक फर्नीचर, बैतूल का भरेवा मेटल क्राफ्ट, ग्वालियर का पत्थर शिल्प और ग्वालियर का ही पेपर मैश क्राफ्ट शामिल है। जीआई टैग प्रदान करने का कार्य उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण में है। पंजीकरण की प्रक्रिया के बाद जीआई टैग की वैधता 10 वर्ष के लिए होती है, जिसे नवीनीकरण का लाभ भी मिलता है। जीआई टैग भौगोलिक संकेत रजिस्ट्री अर्थात (ज्योग्राफिकल इंडिकेशंस रजिस्ट्री) केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा प्रदान किया जाता है। किसी उत्पाद की प्रामाणिकता की दृष्टि से जीआई टैग मिलना बहुत महत्व रखता है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2004 में दार्जिलिंग की चाय को भारत के प्रथम जीआई टैग प्राप्त होने का गौरव मिला था।  

स्वास्थ्य अधोसंरचना एवं सेवाओं के सुदृढ़ीकरण का सुनियोजित प्रावधान

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि स्वस्थ प्रदेश ही समृद्ध प्रदेश की आधारशिला है। स्वास्थ्य अधोसंरचना के व्यापक विस्तार, गुणवत्तापूर्ण उपचार सुविधाओं की उपलब्धता और चिकित्सा शिक्षा के सुदृढ़ीकरण के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में सुनियोजित प्रावधान किए गए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश का प्रत्येक नागरिक, चाहे वह शहरी क्षेत्र में निवास करता हो या दूरस्थ ग्रामीण अंचल में, उसे समयबद्ध और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध हों। स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए कुल 23 हजार 747 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान है, जो राज्य सरकार की प्राथमिकताओं को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। राज्य सरकार का संकल्प है कि स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षित मानव संसाधन और सुदृढ़ अधोसंरचना के माध्यम से नए आयाम दिए जाएँ। प्रदेश को सशक्त, स्वस्थ और आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश की दिशा में तेजी से अग्रसर करने लिए सतत और सशक्त प्रयास किए जा रहे हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन एवं प्राथमिक स्वास्थ्य ढांचे को मजबूती राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत 4,600 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण, रोग नियंत्रण और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ किया जाएगा। प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों की स्थापना एवं संचालन के लिए 1,934 करोड़ रुपये तथा उप स्वास्थ्य केन्द्रों के लिए 782 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। सामुदायिक, उप एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों के भवन निर्माण के लिए 580 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और बेहतर होगी। आशा कार्यकर्ताओं को अतिरिक्त प्रोत्साहन के लिये 550 करोड़ रुपये तथा मुख्यमंत्री श्रमिक सेवा प्रसूति सहायता योजना के लिए 750 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं, जिससे जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा। अस्पतालों एवं चिकित्सा महाविद्यालयों का विस्तार प्रदेश में विगत दो वर्षों में पाँच नए शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय प्रारंभ किए गए हैं। एमबीबीएस सीटों की संख्या 2,275 से बढ़कर 2,850 तथा स्नातकोत्तर सीटें 1,262 से बढ़कर 1,468 हो गई हैं। इंदौर, रीवा एवं सतना के चिकित्सा महाविद्यालयों के उन्नयन के साथ ही भोपाल, इंदौर, रीवा, जबलपुर, सागर एवं ग्वालियर में उन्नत चिकित्सा सुविधाएँ विकसित की गई हैं। पीपीपी मोड पर मेडिकल कॉलेज की स्थापना के लिए धार, बैतूल, पन्ना और कटनी में एलओए जारी किया जा चुका है। अन्य 9 जिलों में प्रक्रिया प्रगतिरत है। चिकित्सा महाविद्यालय एवं संबद्ध चिकित्सालयों के लिए 3,056 करोड़ रुपये और जिला एवं सिविल अस्पतालों के लिए 2,049 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। अस्पतालों एवं औषधालयों के भवन निर्माण के लिये 527 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। नवीन चिकित्सा महाविद्यालयों के निर्माण (राज्य सहायित) के लिए 580 करोड़ रुपये तथा चिकित्सा महाविद्यालयों में उन्नयन कार्यों के लिए 650 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। साथ ही नवीन नर्सिंग कॉलेजों के निर्माण के लिए 80 करोड़ रुपये एवं पी.जी. पाठ्यक्रमों के सुदृढ़ीकरण हेतु 79 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। आयुष्मान योजना क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश शीर्ष पर प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (आयुष्मान भारत) के तहत प्रदेश में 4 करोड़ 46 लाख से अधिक आयुष्मान कार्ड जारी किए जा चुके हैं। 70 वर्ष से अधिक आयु के नागरिकों के लिए आयुष्मान वय वंदना योजना के अंतर्गत 15 लाख 48 हजार कार्ड बनाकर मध्यप्रदेश शीर्ष पर है। इस योजना से 1,118 शासकीय एवं 720 निजी चिकित्सालय संबद्ध हैं। वित्तीय वर्ष 2026-27 में आयुष्मान भारत योजना के लिए 2,139 करोड़ रुपये का प्रावधान प्रस्तावित है। इसके अतिरिक्त नॉन-एसईसीसी हितग्राहियों के लिए 863 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। विशेष कार्यक्रम एवं अधोसंरचना मिशन बहुउद्देशीय रोग नियंत्रण कार्यक्रम के लिए 408 करोड़ रुपये तथा प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन के अंतर्गत 401 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना अंतर्गत सुपरस्पेशलिटी अस्पताल स्थापना के लिए 148 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। प्रदेश में डिजिटल स्वास्थ्य पहल को भी निरंतर आगे बढ़ाया जा रहा है। वर्तमान में 55 जिला चिकित्सालय, 158 सिविल चिकित्सालय, 348 सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, 1,442 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र तथा 10,256 उप स्वास्थ्य केन्द्रों में कुल 48 हजार बिस्तर उपलब्ध हैं। मैहर, मऊगंज एवं पांढुर्णा में नए जिला चिकित्सालयों की स्थापना की कार्यवाही प्रचलन में है। उच्च जोखिम वाले दूरस्थ क्षेत्रों में निवासरत गर्भवती महिलाओं के लिए 228 बर्थ वेटिंग रूम स्थापित किए गए हैं, जो मातृ मृत्यु दर में कमी लाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। चिकित्सा शिक्षा एवं मानव संसाधन सुदृढ़ीकरण प्रदेश में 3,850 चिकित्सक पदों एवं 1,256 नर्सिंग अधिकारी पदों पर भर्ती की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। परिचारिकाओं के प्रशिक्षण के लिए 67 करोड़ रुपये तथा एएनएम एवं हेल्थ विजिटर्स को परिवार कल्याण प्रशिक्षण हेतु 60 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। सरकार भारतीय चिकित्सा पद्धति को भी बढ़ावा दे रही है। प्रदेश में 8 नवीन आयुर्वेद महाविद्यालय सह चिकित्सालय स्थापित किए जा रहे हैं। मध्यप्रदेश स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में नई ऊँचाइयों की ओर अग्रसर है। अधोसंरचना विस्तार, चिकित्सा शिक्षा सुदृढ़ीकरण, मानव संसाधन भर्ती और जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से प्रत्येक नागरिक तक गुणवत्तापूर्ण उपचार सुनिश्चित किया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य सुलभ, किफायती और सर्वसमावेशी स्वास्थ्य व्यवस्था स्थापित कर आत्मनिर्भर, सशक्त एवं स्वस्थ मध्यप्रदेश का निर्माण करना है।

वानखेड़े में मुकाबले से पहले Sam Curran का आत्मविश्वास चरम पर, बोले- इंग्लैंड करेगा खेल पलट

मुंबई टी20 वर्ल्ड कप 2026 में मेजबान भारत के खिलाफ सेमीफाइनल से पहले इंग्लैंड के सैम करन ने कहा कि दोनों टीमें एक-दूसरे के खिलाफ इतना खेल चुकी हैं कि कुछ छिपाने के लिए नहीं है लेकिन उन्हें अपनी टीम से बेहतरीन प्रदर्शन की उम्मीद है। इंग्लैंड ने 2022 में भारत को सेमीफाइनल में दस विकेट से हराने के बाद खिताब जीता था जबकि भारत ने 2024 में इंग्लैंड को 78 रन से हराने के बाद खिताब जीता था। ‘हम भारतीय खिलाड़ियों के साथ बहुत…’ ऑलराउंडर करन ने मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में इंग्लैंड के अभ्यास सत्र से पहले कहा, ”इस मैदान पर हम काफी खेल चुके हैं लिहाजा कुछ छिपा नहीं है।” उन्होंने कहा ,”हमारे पास अभ्यास के लिए दो दिन का समय है जिससे हालात के अनुकूल ढलने में मदद मिलेगी। इन स्टेडियमों में हम इतना खेल चुके हैं कि अलग-अलग हालात की आदत हो गई है। हम भारतीय खिलाड़ियों के साथ बहुत खेलते हैं तो कुछ भी छिपा नहीं है।” इंग्लैंड का इस टूर्नामेंट में प्रदर्शन उतार चढ़ाव भरा रहा है जिसने नेपाल को बमुश्किल चार रन से हराया। सुपर आठ में पाकिस्तान को दो विकेट से मात दी। ‘वानखेड़े स्टेडियम को खामोश करेगा इंग्लैंड’ करन ने कहा, ”पिछला प्रदर्शन अब मायने नहीं रखता। यह विश्व कप सेमीफाइनल है और हम इसमें अपना परफेक्ट खेल दिखाएंगे।” वानखेड़े स्टेडियम पर भारत के समर्थकों का शोर रहेगा लेकिन करन को पता है कि उन्हें खामोश कैसे करना है। उन्होंने कहा, ”यह शानदार स्टेडियम है। मुझे यकीन है कि गुरुवार की रात यह स्टेडियम खामोश रहेगा। भारतीय टीम शानदार है लेकिन हमारे अधिकांश खिलाड़ियों ने उसके खिलाफ और आईपीएल में खेला है। हम किसी चीज से भयभीत नहीं हैं और दोनों टीमें सेमीफाइनल की चुनौती को लेकर रोमांचित होंगी।” ‘वानखेड़े में खेलना आसान नहीं होता है’ भारत ने रविवार को वेस्टइंडीज को पांच विकेट से हराकर सेमीफाइनल में प्रवेश किया। संजू सैमसन ने कोलकाता में वेस्टइंडीज के खिलाफ ‘संकटमोचक’ की भूमिका निभाते हुए नाबाद 97 रन बनाए। वेस्टइंडीज ने 196 रन का लक्ष्य दिया था। खचाखच भरे ईडन गार्डंस पर भारत के फॉर्म में चल रहे सभी बल्लेबाज नाकाम रहे लेकिन संजू ने अपने करियर की सबसे यादगार पारी खेलकर वेस्टइंडीज के जीत के अश्वमेधी अभियान में नकेल कसी। मैच के बाद भारत के हेड कोच गौतम गंभीर ने इंग्लैंड के खिलाफ सेमीफाइनल को लेकर कहा, ”इंग्लैंड एक विश्वस्तरीय टीम हैं। उनके पास कई बेहतरीन खिलाड़ी भी हैं और हम सभी जानते हैं कि वानखेड़े में खेलना आसान नहीं होता है। उम्मीद है कि हम अच्छा प्रदर्शन करेंगे।”

आदिवासी वोटरों को लुभाने की तैयारी में मोहन सरकार, बड़वानी बैठक से निकाय चुनावों को लेकर मिले संकेत

भोपाल  सोमवार को बड़वानी जिले के नागलवाड़ी में हुई प्रदेश की पहली किसान कैबिनेट बैठक को मोहन सरकार का आदिवासी वोटर पर सीधा फोकस माना जा रहा है। 2027 के निकाय चुनाव और 2028 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा सरकार ने अभी से तैयारी शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जनजातीय बहुल जिले बड़वानी के नागलवाड़ी में पहली किसान कैबिनेट आयोजित की। यह बैठक भीलट देव मंदिर परिसर में टेंट-तंबू में हुई और मंत्रिमंडल ने आदिवासी संस्कृति के प्रमुख पर्व भगोरिया में भी सहभागिता की। इसने बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह कदम किसानों के साथ-साथ आदिवासी वोट बैंक को साधने की रणनीति का हिस्सा है। आदिवासी वर्ग पर परंपरागत रूप से कांग्रेस की मजबूत पकड़ मानी जाती रही है, लेकिन पिछले एक दशक में भाजपा ने इस वर्ग में अपना आधार बढ़ाया है।  47 विस सीटें एसटी के लिए आरक्षित प्रदेश की कुल 230 विधानसभा सीटों में से 47 सीटें अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग के लिए आरक्षित हैं। 2023 के चुनाव में भाजपा ने 24 और कांग्रेस ने 22 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि रतलाम जिले की सैलाना सीट पर भारत आदिवासी पार्टी को सफलता मिली। मालवा–निमाड़ अंचल में आदिवासी वर्ग की 22 सीटें हैं, जहां कांग्रेस ने 11, भाजपा ने 10 और एक भारत आदिवासी पार्टी ने जीत दर्ज की। यह क्षेत्र आदिवासी राजनीति का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है।  22% आबादी, 84 सीटों पर असर प्रदेश की कुल आबादी में लगभग 22 प्रतिशत हिस्सा आदिवासी समुदाय का है। 47 सीटें आरक्षित होने के बावजूद यह वर्ग करीब 80 से अधिक सीटों पर जीत-हार तय करने की स्थिति में माना जाता है।  2023 में कांग्रेस ने दिखाई मजबूती  2018 के चुनाव में कांग्रेस ने 30 आदिवासी सीटें जीतकर भाजपा को बड़ा झटका दिया था, जबकि भाजपा 16 सीटों तक सीमित रह गई थी। मालवा–निमाड़ में भी भाजपा को 22 सीटों में से केवल 6 सीटें मिली थीं। वहीं, 2023 में भाजपा ने वापसी करते हुए 24 सीटें जीतींं। हालांकि, इस चुनाव में कांग्रेस 66 सीटों पर सिमट गई, इसके बावजूद  उसने आदिवासी वर्ग के लिए आरक्षित 22 सीटों पर जीत दर्ज की। वहीं, मालवा निमाड़ में दोनों ही पार्टियों ने आधी आधी सीटों पर जीत दर्ज की।  आदिवासी वर्ग के लिए आरक्षित प्रदेश की सीटों का गणित  – 2013 में आरक्षित 47 सीटों में से 31 सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज की। कांग्रेस को 15 सीटों पर ही संतोष करना पड़ा, वहीं एक सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी जीता। वहीं, मालवा निमाण की 22 सीटों में से 15 भाजपा, 6 कांग्रेस और 1 सीट निर्दलीय को मिली।  – 2018 में आरक्षित 47 सीटों में से 16 सीटों पर भाजपा सिमट गई। वहीं, कांग्रेस ने 30 सीटों पर जीत दर्ज की। एक सीट निर्दलीय के खाते में गई। वहीं, मालवा-निर्माण की 22 सीटों में से 6 भाजपा, 15 कांग्रेस और एक सीट निर्दलीय के खाते में गई।  – 2023 में आरक्षित 47 सीटों में से 24 सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज की। वहीं, कांग्रेस ने 22 सीटों पर जीत दर्ज की। एक सीट पर निर्दलीय के खाते में आई। वहीं, मालवा- निर्माण की 22 सीटों में से 11 पर कांग्रेस, 10 पर भाजपा और एक सीट पर भारत आदिवासी पार्टी ने जीत दर्ज की।  2027 में सेमीफाइनल और 2028 में फाइनल बता दें, अगले दो साल मोहन सरकार के लिए अग्नि परीक्षा के हैं, इसलिए अब उसे तमाम वो काम करके दिखाना होंगे, जिनका वादा भाजपा ने अपने संकल्प पत्र में किया है। इनमें सबसे बड़ा वादा लाडली बहना योजना में शामिल बहनों को हर माह 3000 रुपये देने का है। अभी इसकी आधी राशि दी जा रही है। अगले तीन साल में इसे दोगुना करना है। यदि भाजपा यह करने में सफल रही तो 2027 के निकाय चुनाव और इसके बाद 2028 में होने वाले विधानसभा चुनाव में उसकी सत्ता में वापसी की राह कोई नहीं रोक सकेगा।  आदिवासी किसानों को आखिर क्या मिला नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि दो दशक से सत्ता में काबिज भाजपा सरकार ने ‘कृषक कल्याण वर्ष 2026’ के अंतर्गत भोपाल से करीब 350 किलोमीटर दूर आदिवासी बहुल बड़वानी जिले के नागलवाड़ी में पहली “कृषि कैबिनेट” की बैठक आयोजित की। दावा किया गया था कि इससे किसानों को सीधा फायदा पहुंचेगा और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए नई योजनाए लाई जाएंगी, ताकि आय दोगुनी हो सके। लेकिन बड़वानी और निमाड़ क्षेत्र के किसानों को आखिर क्या मिला?   

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