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वायुसेना का Su-30 MKI विमान क्रैश, दोनों पायलटों की जान गई

गुवाहाटी भारतीय वायुसेना का एक सुखोई-30 एमकेआई फाइटर जेट गुरुवार शाम को असम में लापता हो गया. देर रात इसके क्रैश होने की पुष्टि हुई. फाइटर जेट ने असम के जोरहाट से उड़ान भरी थी और शाम 7.42 बजे के बाद रडार से उसका संपर्क टूट गया. विमान का पता लगाने के लिए भारतीय वायुसेना (IAF) ने सर्च और रेस्क्यू मिशन शुरू किया है। वायुसेना ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा है कि IAF स्क्वाड्रन लीडर अनुज और फ्लाइट लेफ्टिनेंट पुरवेश दुरगकर के निधन पर दुख जताता है, जिन्हें Su-30 क्रैश में जानलेवा चोटें आईं। IAF के सभी कर्मचारी गहरी संवेदना जताते हैं, और इस दुख की घड़ी में दुखी परिवार के साथ मजबूती से खड़े हैं। भारतीय वायुसेना ने अपने X हैंडल पर खोए हुए फाइटर जेट का अपडेट शेयर करते हुए लिखा, ‘हमारे एक Su-30 MKI के लापता होने की खबर है. एयरक्राफ्ट ने असम के जोरहाट से उड़ान भरी थी और आखिरी बार शाम 7.42 बजे रडार के संपर्क में आया था. आगे की जानकारी का पता लगाया जा रहा है. एक सर्च और रेस्क्यू मिशन शुरू किया गया है।’  इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी सुपरमैन्यूवरबिलिटी, लंबी मारक क्षमता और दो इंजन वाला शक्तिशाली डिजाइन है. सुखोई-30 एमकेआई ब्रह्मोस जैसी सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ले जाने में भी सक्षम है, जिससे इसकी स्ट्राइक कैपेसिटी कई गुना बढ़ जाती है. इसमें आधुनिक एवियोनिक्स, मल्टी-फंक्शन रडार, थ्रस्ट वेक्टर कंट्रोल और लंबी दूरी तक उड़ान की क्षमता है. यह लड़ाकू विमान भारतीय वायुसेना की रीढ़ माना जाता है और देश की वायु सुरक्षा व सामरिक ताकत में इसकी भूमिका बेहद अहम है। सुखोई-30 एमकेआई भारतीय वायुसेना का सबसे ताकतवर और भरोसेमंद मल्टी रोल फाइटर जेट है. इसे 2000 के दशक की शुरुआत में भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया था. यह रूस के सुखोई डिजाइन ब्यूरो द्वारा विकसित किया गया है. भारतीय वायुसेना इस फाइटर जेट का विशेष रूप से कस्टमाइज संस्करण इस्तेमाल करती है, जिसमें MKI का अर्थ है मॉडर्नाइज्ड, कमर्शियल और इंडियन. यह विमान हवा से हवा, हवा से जमीन और समुद्री लक्ष्यों पर हमला करने में सक्षम है। रूस में इस एयरक्राफ्ट का प्रोडक्शन 2000 में शुरू हुआ था, जब नई दिल्ली ने मॉस्को से 140 Su-30 फाइटर एयरक्राफ्ट बनाने के लिए कहा था. पहला एयरक्राफ्ट 2002 में भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया था, और तब से, समय के साथ इसकी संख्या बढ़ती ही गई है।. आज, Su-30 भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमानों के बेड़े में सबसे बड़ा हिस्सा रखता है

योगी सरकार की योजनाओं का असर, एस्पिरेशनल ब्लॉक कार्यक्रम में यूपी का लहराया परचम

योगी सरकार ने राष्ट्रीय स्तर पर हासिल की एक और बड़ी उपलब्धि, नीति आयोग से लखीमपुर खीरी के दो ब्लॉकों को मिला सम्मान लखीमपुर खीरी के धौरहरा ब्लॉक को मिला गोल्ड और बांकेगंज को ब्रॉन्ज मेडल योगी सरकार की योजनाओं का असर, एस्पिरेशनल ब्लॉक कार्यक्रम में यूपी का लहराया परचम स्वास्थ्य, पोषण और कृषि योजनाओं में शत-प्रतिशत सैचुरेशन से मिली राष्ट्रीय पहचान धौरहरा ने छह और बांकेगंज ने तीन इंडिकेटर्स पर 100 प्रतिशत लक्ष्य हासिल कर जीता मेडल लखनऊ योगी सरकार ने राष्ट्रीय स्तर पर एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। नीति आयोग ने एस्पिरेशनल ब्लॉक के तहत उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी स्थित धौरहरा व बांकेगंज ब्लॉक को उत्कृष्ट कार्य के लिए गोल्ड और ब्रॉन्ज मेडल से नवाजा है। जुलाई से सितंबर 2024 के बीच चले संपूर्णता अभियान में जिले के बांकेगंज और धौरहरा ब्लॉक ने प्रदर्शन की नई इबारत लिखी। यह मेडल लखीमपुर खीरी की जिलाधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल ने प्राप्त किया। इसके साथ ही उन्हें सर्टिफिकेट ऑफ एप्रिसिएशन से सम्मानित किया गया।  बांकेगंज ब्लॉक ने तीन प्रमुख इंडिकेटर्स पर प्राप्त किया शत प्रतिशत सैचुरेशन जिलाधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में जिले के आकांक्षात्मक ब्लॉक में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं। इसी के तहत लखीमपुर खीरी के बांकेगंज ब्लॉक ने ‘हेल्थ एंड न्यूट्रिशन’, ‘एग्रीकल्चर एंड अलाइड सर्विसेज़’ और ‘एस्पिरेशनल ब्लॉक्स प्रोग्राम के तहत सोशल डेवलपमेंट’ थीम में तीन प्रमुख इंडिकेटर्स पर शत-प्रतिशत सैचुरेशन हासिल किया है। इसके लिए नीति आयोग की ओर से ब्लॉक को ब्रॉन्ज मेडल प्रदान किया गया है। यह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रेरणा से संभव हो पाया। सीएम योगी की मंशा के अनुरूप जमीनी निगरानी, विभागों के बीच बेहतर तालमेल और तय समय सीमा में लक्ष्य पूरा करने की रणनीति ने ब्लॉक को मॉडल बनाया। धौरहरा ब्लॉक ने प्राप्त किया छह इंडिकेटर्स पर शत प्रतिशत सैचुरेशन जिलाधिकारी ने बताया कि धौरहरा ब्लॉक ने छह इंडिकेटर्स पर शत-प्रतिशत सैचुरेशन के साथ गोल्ड मेडल हासिल किया। स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतर पहुंच, पोषण सुधार की ठोस पहल और कृषि योजनाओं के लाभार्थियों तक सीधी पहुंच ने नतीजे को असरदार बनाया। संपूर्णता अभियान के तहत किए गए प्रदर्शन ने यह साबित कर दिया कि जब प्रशासनिक इच्छाशक्ति और टीमवर्क साथ हो, तो लक्ष्य सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रहते, धरातल पर उतरते हैं। डीएम दुर्गा शक्ति नागपाल ने सीडीओ अभिषेक कुमार की मौजूदगी में बांकेगंज के बीडीओ ऋषिकांत अहिरवार और धौरहरा के तत्कालीन बीडीओ सुमित कुमार सिंह (वर्तमान में बीडीओ फूलबेहड़) को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित भी किया है।

वानखेड़े में ‘थाला कनेक्शन’: भारत ने 7 रन से जीता मुकाबला, संजू सैमसन के ऐतिहासिक कीर्तिमान

मुंबई मुंबई के वानखेड़े स्टेड‍ियम में गुरुवार (5 मार्च) को खेले गए टी20 वर्ल्ड कप 2026 के दूसरे सेमीफाइनल में भारत ने इंग्लैंड को 7 रन से हराकर फाइनल में जगह बना ली. मुकाबला जितना रोमांचक रहा, उतना ही दिलचस्प एक संयोग भी चर्चा में आ गया, और वह जुड़ा था भारतीय क्रिकेट के दिग्गज महेंद्र सिंह धोनी के स्पेशल 7 नंबर से।  यह खास मुकाबला देखने के लिए धोनी अपनी पत्नी साक्षी धोनी के साथ साथ पहुंचे थे, धोनी की इस दौरान रोहित शर्मा से भी मुलाकात हुई. रोहित ने इस दौरान धोनी और साक्षी को गले भी लगाया।    धोनी के लिए भी यह वानखेड़े स्टेड‍ियम बेहद खास है, क्योंकि यहीं उनकी कप्तानी में भारतीय टीम ने 2011 का वर्ल्ड कप जीता था. तब धोनी ने छक्का मारकर मैच फ‍िन‍िश किया था।  दरअसल, भारत ने इस मैच में पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 253/7 का बड़ा स्कोर खड़ा किया. जवाब में इंग्लैंड की टीम 20 ओवर में 246/7 रन ही बना सकी. यानी मैच का नतीजा 7 रन से तय हुआ और इंग्लैंड के 7 विकेट गिरे।  बस यहीं से सोशल मीडिया पर ‘थाला कनेक्शन’ की चर्चा शुरू हो गई, क्योंकि धोनी का जर्सी नंबर 7 रहा है. धोनी का बर्थडे भी 7 जुलाई को होता है. मैच खत्म होने के बाद राजस्थान रॉयल्स ने एक पोस्ट धोनी के फोटो के साथ शेयर किया और लिखा- फॉर ए रीजन… मैच खत्म होते ही सोशल मीडिया पर ‘Thala for a reason’ ट्रेंड करने लगा. फैन्स ने स्कोरकार्ड के आंकड़ों को धोनी के नंबर 7 से जोड़ते हुए कई पोस्ट किए. कुछ यूजर्स ने लिखा कि धोनी स्टेडियम में थे, भारत 7 रन से जीता और 7 विकेट गिरे… यह सिर्फ संयोग नहीं।  सेमीफाइनल देखने स्टेडियम पहुंचे थे धोनी इस मुकाबले को देखने भी वानखेड़े पहुंचे थे. मैच के दौरान कैमरा कई बार उनकी ओर गया और वह स्टैंड में बैठकर मुकाबले का आनंद लेते नजर आए.जैसे ही भारत ने 7 रन से जीत दर्ज की, सोशल मीडिया पर फैन्स ने इसे धोनी के लकी नंबर से जोड़ दिया. कई यूजर्स ने लिखा कि थाला का नंबर फिर काम कर गया।  रिकॉर्ड्स की बारिश, संजू सैमसन रच गए खास कीर्तिमान आईसीसी मेन्स टी20 वर्ल्ड कप 2026 में गुरुवार (5 मार्च) को भारत और इंग्लैंड के बीच दूसरा सेमीफाइनल खेला गया. मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में हुआ यह मुकाबला आखिरी ओवर तक गया, जहां भारतीय टीम ने सात रनों से रोमांचक जीत हासिल की. अब फाइनल में भारतीय टीम का सामना 8 मार्च को अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में न्यूजीलैंड से होगा. न्यूजीलैंड ने पहले सेमीफाइनल में साउथ अफ्रीका को 9 विकेट से हराया था। भारत-इंग्लैंड के बीच मुकाबले में कुल 499 रन बने. टी20 विश्व कप के इतिहास में किसी मैच में बनाए गए ये सर्वाधिक रन रहे. इससे पहले टी20 विश्व कप 2016 में इंग्लैंड और साउथ अफ्रीका के बीच हुए मुकाबले में कुल 459 रन बने थे. ओवरऑल टी20 इंटरनेशनल में ये दूसरा सबसे बड़ा हाईस्कोरिंग मुकाबला रहा. इस मामले में साउथ अफ्रीका vs वेस्टइंडीज मुकाबला टॉप पर है. साल 2023 में सेंचुरियन में खेले गए मैच में कुल 517 रन बने थे। क्या है थाला फॉर अ रीजन फ्रेज? ‘थाला फॉर अ रीज़न’ एक पॉपुलर मीम फ्रेज़ है जिसका इस्तेमाल अक्सर खासकर MS धोनी और चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) क्रिकेट फैन्स करते हैं. इसका इस्तेमाल धोनी, जिन्हें ‘थाला’ कहा जाता है, तमिल में ‘लीडर’ या ‘बॉस’ के लेजेंडरी स्टेटस को हाईलाइट करने के लिए किया जाता है. इसका मतलब है कि उनकी सक्सेस, लक और आइकॉनिक जर्सी नंबर 7 हमेशा किसी सिचुएशन को बचाने या डिफाइन करने के लिए मौजूद रहते हैं, अक्सर मजाकिया तौर पर किसी भी अच्छी घटना को नंबर सात से जोड़ दिया जाता है।   हाईस्कोरिंग मुकाबले में भारत की 7 रन से जीत सेमीफाइनल मुकाबला पूरी तरह बल्लेबाजों के नाम रहा. भारतीय बल्लेबाजों ने आक्रामक खेल दिखाते हुए 250 से ज्यादा रन बना दिए. जवाब में इंग्लैंड ने भी जोरदार पलटवार किया और आखिरी ओवर तक मैच रोमांचक बना रहा.हालांकि अंत में भारतीय गेंदबाजों ने दबाव में शानदार गेंदबाजी की और इंग्लैंड को लक्ष्य से 7 रन दूर रोक दिया।  इस जीत के साथ भारतीय टीम टी20 वर्ल्ड कप 2026 के फाइनल में पहुंच गई है. 8 मार्च का अब भारतीय टीम न्यूजीलैंड से अहमदाबाद में फाइनल खेलने उतरेगी. टीम का आत्मविश्वास काफी ऊंचा है और फैन्स को उम्मीद है कि भारत ट्रॉफी जीतकर इस शानदार अभियान को यादगार बना देगा।  मेन्स टी20 इंटरनेशनल मैच में सर्वाधिक रन 517- साउथ अफ्रीका बनाम वेस्टइंडीज, सेंचुरियन, 2023 499- भारत बनाम इंग्लैंड, वानखेड़े, 2026 496- भारत बनाम न्यूजीलैंड, तिरुवनंतपुरम, 2026 489- भारत बनाम वेस्टइंडीज, लॉडरहिल, 2016 488- न्यूजीलैंड बनाम ऑस्ट्रेलिया, ऑकलैंड, 2018 488- बुल्गारिया बनाम सर्बिया, सोफिया, 2022 इस मुकाबले में भारतीय बल्लेबाजों ने 19 और इंग्लिश बैटर्स ने 15 छक्के लगाए. पहली बार किसी टी20 विश्व कप मैच में इतने छक्के लगे. मुकाबले में कुल 73 बाउंड्रीज (39 चौके और 34 छक्के) लगे, जो किसी टी20 विश्व कप मैच में सबसे अधिक हैं. 2016 में इसी मैदान पर इंग्लैंड और साउथ अफ्रीका के बीच हुए मैच में 61 बाउंड्रीज लगे थे। टी20 विश्व कप मैच में सबसे अधिक छक्के 34- भारत बनाम इंग्लैंड, वानखेड़े, 2026 सेमीफाइनल 31- वेस्टइंडीज बनाम जिम्बाब्वे, वानखेड़े, 2026 30- नीदरलैंड्स बनाम आयरलैंड, सिलहट, 2014 28- भारत बनाम जिम्बाब्वे, चेन्नई, 2026 25- इंग्लैंड बनाम इटली, कोलकाता, 2026 एक पारी में सबसे अधिक छक्के (टी20 विश्व कप) 19- नीदरलैंड्स बनाम आयरलैंड, सिलहट, 2014 19- वेस्टइंडीज बनाम जिम्बाब्वे, वानखेड़े, 2026 19- भारत बनाम इंग्लैंड, वानखेड़े 2026 17- भारत बनाम जिम्बाब्वे, चेन्नई, 2026 16- ऑस्ट्रेलिया बनाम भारत, ब्रिजटाउन, 2010 इंग्लैंड के युवा बल्लेबाज जैकब बेथेल ने सेमीफाइनल में शानदार 105 रन बनाए. बेथेल टी20 विश्व कप के नॉकआउट मुकाबलों में सर्वोच्च पारी खेलने वाले बल्लेबाज बन गए हैं. बेथेल ने न्यूजीलैंड के फिन एलन का रिकॉर्ड तोड़ दिया, जिन्होंने पहले सेमीफाइनल में साउथ अफ्रीका के खिलाफ नाबाद 100 रन जड़े थे. बेथेल टी20 विश्व कप में शतक जड़ने वाले इंग्लैंड के चौथे बल्लेबाज हैं। टी20 विश्व कप के नॉकआउट मैचों में सर्वोच्च स्कोर 105 – जैकब बेथेल बनाम भारत, वानखेड़े, 2026 … Read more

मुख्यमंत्री जल संचय-जन भागीदारी अभियान की समीक्षा में वर्चुअली हुए शामिल

केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री  पाटिल ने मध्यप्रदेश की जल संचय की पहल को सराहा सामुदायिक सहभागिता पर आधारित जल संरक्षण और प्रबंधन में मध्यप्रदेश कर रहा है श्रेष्ठ उदाहरण प्रस्तुत : मुख्यमंत्री डॉ. यादव मुख्यमंत्री जल संचय-जन भागीदारी अभियान की समीक्षा में वर्चुअली हुए शामिल केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री  सी.आर. पाटिल द्वारा की गई समीक्षा भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश नदियों का मायका है। देश की कई महत्वपूर्ण नदियों के उद्गम स्थल होने के साथ ही प्रदेश में 250 से अधिक नदियां हैं। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के आहवान पर जल संसाधनों के संरक्षण, संवर्धन के लिए देश में आरंभ हुआ जल संचय-जन भागीदारी अभियान सामुदायिक सहभागिता का उत्कृष्ट उदाहराण बन गया है। मध्यप्रदेश ने इस अभियान के प्रथम चरण में 2 लाख 79 हजार जल संग्रहण संरचनाओं का निर्माण कर महत्वपूर्ण योगदान दिया है। द्वितीय चरण में भी मध्यप्रदेश में 64 हजार 395 कार्य प्रगति पर हैं और 72 हजार 647 कार्य पूर्ण कर लिए गए हैं। इस प्रकार 1 लाख 37 हजार 42 संरचनाओं के साथ प्रदेश, देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव केन्द्रीय जल शक्ति मंत्रालय द्वारा गुरूवार को आयोजित संयुक्त वीडियो कॉन्फ्रेंस को मंत्रालय भोपाल से संबोधित कर रहे थे। जल संचय-जन भागीदारी की व्यापक समीक्षा के लिए आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेंस में केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री  सी.आर. पाटिल, प्रदेश के पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री  प्रहलाद सिंह पटेल, सभी संभागायुक्त और जिला कलेक्टर्स शामिल हुए। केन्द्रीय मंत्री  पाटिल ने अभियान के अंतर्गत मध्यप्रदेश की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश सामुदायिक सहभागिता पर आधारित जल संरक्षण और सतत् जल प्रबंधन में देश के सम्मुख श्रेष्ठ उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि भूजल स्त्रोतों के दोहन के कारण गिरते हुए भूजल स्तर, प्राचीन जल संग्रहण संरचनाओं के क्षरण और नदियों के कम होते प्रवाह के प्रति हम पूर्णत: सजग है। इसलिए मध्यप्रदेश ने जल संचय-जन भागीदारी की राष्ट्रीय पहल को सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ आत्मसात करते हुए राज्य स्तर पर इसे व्यापक जनभागीदारी से जोड़ा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश से जिन नदियों का उद्गम है, उनके जल का स्त्रोत प्रदेश के वन हैं। यह नदियां अन्य राज्यों की कृषि और अन्य आर्थिक गतिविधियों में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं। इस प्रकार प्रदेश की नदियों का राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में उल्लेखनीय योगदान है। इस दृष्टि से राज्य में विद्यमान वनों के रखरखाव के लिए राज्य सरकार को केन्द्र की ओर से अतिरिक्त आर्थिक सहयोग की अपेक्षा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में जल संरक्षण के लिए बुनियादी ढांचे के विकास के लिए खेत-तालाबों और नए सरोवरों का निर्माण किया गया है। भू-जल संवर्धन के लिए कुओं का पुनर्भरण किया गया है। शहरी क्षेत्रों और वन क्षेत्रों में भी वर्षा जल संचयन संरचनाओं का निर्माण किया गया है। औद्योगिक इकाइयों को रूफ वाटर हार्वेस्टिंग के लिए प्रेरित किया गया है। नदियां निर्मल और अविरल रहे, यह हमारी प्रतिबद्धता है और इसके लिए अभियान के अंतर्गत प्रमुख नदियों में गिरने वाले प्रदूषित नालों की पहचान कर उनके शोधन की याजना बनाई गई है। पाठशालाओं में जल के संबंध में विभिन्न गतिविधियों जैसे चित्रकला, निबंध प्रतियोगिता, जल शपथ तथा रैलियों का आयोजन किया गया है। पानी के दक्षतापूर्ण उपयोग को भी अभियान के अंतर्गत प्रोत्साहित किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि हमारा संकल्प है कि प्रत्येक जिला, प्रत्येक ग्राम और प्रत्येक शहर इस अभियान में सक्रिय भूमिका निभाए और जल संरक्षण को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाए। केंद्र, राज्य सरकार और जनसहयोग से हम जल सुरक्षा के लक्ष्य को अवश्य प्राप्त करेंगे। मध्यप्रदेश बांधों की संख्या के मामले में देश में दूसरे स्थान पर : केन्द्रीय मंत्री  पाटिल केंद्रीय जल शक्ति मंत्री  सी.आर. पाटिल ने कहा कि मध्यप्रदेश बांधों की संख्या के मामले में देश में दूसरे स्थान पर है। मध्यप्रदेश गुजरात को पानी दे रहा है। केन-बेतवा लिंक परियोजना के माध्यम से उत्तर प्रदेश को भी पानी मिलेगा। इस परियोजना से 10 लाख 62 हजार हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी और लाखों लोगों को पेयजल की सुविधा मिलेगी। राजस्थान के साथ भी पार्वती-कालीसिंध-चंबल परियोजना को लेकर मध्यप्रदेश सरकार ने सकारात्मक सोच दिखाई है। मध्यप्रदेश, देश के सर्वाधिक लोगों को पेयजल उपलब्ध कराने वाला राज्य है। केन्द्रीय मंत्री  पाटिल ने कहा कि मध्यप्रदेश ने जल संचय-जनभागीदारी अभियान में उत्कृष्ट कार्य किया है। हमारी कोशिश है कि गांव का पानी गांव और खेत का पानी खेत में सिंचाई के लिए उपयोग हो। प्रधानमंत्री  मोदी ने देशवासियों से पेयजल की बर्बादी रोकने का भी आह्वान किया है। केंद्रीय मंत्री  पाटिल ने कहा कि मध्यप्रदेश एक बड़े वन क्षेत्र वाला राज्य है। वर्षा जल को संचित करने के प्रयासों से राज्य में सिंचाई और पेयजल के लिए पानी की उपलब्धता में और वृद्धि की जा सकती है। बैठक के दौरान खंडवा (पूर्व निमाड़), राजगढ़ और इंदौर जिलों के जिला कलेक्टरों ने विस्तृत प्रस्तुतियाँ दीं, जिनमें जल संचय जनभागीदारी 2.0 के क्रियान्वयन की जिला स्तरीय प्रगति तथा आगामी कार्ययोजना प्रस्तुत की गई। प्रस्तुतियों में भूजल पुनर्भरण, नदी पुनर्जीवन तथा जल संरक्षण गतिविधियों में सामुदायिक सहभागिता को विशेष रूप से रेखांकित किया गया। उल्लेखनीय है कि अभियान के अंतर्गत मध्यप्रदेश ने राष्ट्रीय स्तर पर चौथा स्थान प्राप्त किया था। विशेष रूप से खंडवा (पूर्व निमाड़) जिला देशभर के जिलों में प्रथम स्थान पर रहा, जो जल संरक्षण के क्षेत्र में प्रभावी नेतृत्व और जनभागीदारी का उत्कृष्ट उदाहरण है। मंत्रालय भोपाल में बैठक में अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा, मती दीपाली रस्तोगी,  संजय दुबे, प्रमुख सचिव  पी. नरहरि सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।  

आयुष्मान भारत के अंतर्गत उत्तर प्रदेश ने अब तक सर्वाधिक 5 करोड़ 60 लाख से अधिक गोल्डन कार्ड बनाए: सीएम

जैसे कपिल देव को देखकर ही पाकिस्तान आधा मैच हार जाता था, वैसे ही डॉक्टर के व्यवहार से आधी बीमारी हार जाती है: सीएम योगी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ग्रेटर नोएडा में किया केडीएसजी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल का शुभारंभ   आयुष्मान भारत के अंतर्गत उत्तर प्रदेश ने अब तक सर्वाधिक 5 करोड़ 60 लाख से अधिक गोल्डन कार्ड बनाए: सीएम वर्ष 2014 से पहले देश में सिर्फ 6 एम्स कार्यरत थे, प्रधानमंत्री मोदी जी की पहले से आज देश में 23 एम्स: मुख्यमंत्री सरकारी प्रयासों के साथ निजी अस्पतालों के सहयोग से बड़ी आबादी को बेहतर और आधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकती हैं: सीएम योगी 2017 से पहले प्रदेश में “वन डिस्ट्रिक्ट-वन माफिया” की स्थिति थी और सरकारें माफियाओं के सामने नतमस्तक रहती थीं: योगी आज यूपी “वन डिस्ट्रिक्ट-वन मेडिकल कॉलेज”, “वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट” और अब “वन डिस्ट्रिक्ट-वन कुज़ीन” की दिशा में आगे बढ़ रहा: सीएम ग्रेटर नोएडा, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गुरुवार को ग्रेटर नोएडा में केडीएसजी सुपर स्पेशलिटी अस्पताल का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवा केवल इलाज तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें डॉक्टर और मरीज के बीच विश्वास और मानवीय व्यवहार की भी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। एक मरीज डॉक्टर के पास बड़े विश्वास के साथ जाता है। उसके लिए पैसा सबसे बड़ा मुद्दा नहीं होता, बल्कि डॉक्टर के व्यवहार और उसकी सलाह पर भरोसा अधिक महत्वपूर्ण होता है। डॉक्टर का अच्छा व्यवहार मरीज की आधी से अधिक बीमारी को समाप्त कर देता है। इस बात को समझाने के लिए मुख्यमंत्री ने क्रिकेट का उदाहरण देते हुए कहा कि जब भारत की क्रिकेट टीम के कप्तान के रूप में कपिल देव गेंदबाजी करते थे या टीम का नेतृत्व करते थे, तो पाकिस्तान की टीम आधा मैच वहीं हार जाती थी। इसी तरह यदि बीमारी की तुलना पाकिस्तान से की जाए और डॉक्टर को कपिल देव के रूप में देखा जाए, तो मरीज डॉक्टर को देखकर ही आधी लड़ाई जीत लेता है।  डॉक्टर पर विश्वास हो तो दवा भी असर करती है और दुआ भी मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि जब मरीज को डॉक्टर पर विश्वास हो जाता है तो बीमारी के खिलाफ उसकी मानसिक शक्ति बढ़ जाती है। इसके बाद दवा भी असर करती है और दुआ भी काम करती है। डॉक्टर को दुआ मिलती है और मरीज को सही दवा मिलने पर वह जल्दी स्वस्थ हो जाता है। इससे अस्पताल की प्रतिष्ठा भी बढ़ती है और डॉक्टर का सम्मान भी। उन्होंने प्रदेश सरकार द्वारा स्वास्थ्य क्षेत्र में उठाए जा रहे कदमों के बारे में कहा कि प्रदेश सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। सरकार ने आयुष्मान भारत योजना के माध्यम से गरीब और जरूरतमंद लोगों को बिना भेदभाव पांच लाख रुपये तक की कैशलेस उपचार सुविधा उपलब्ध कराई है, जिससे लाखों लोगों को राहत मिल रही है।  सेवा सही, सस्ती और विश्वसनीय होनी चाहिए मुख्यमंत्री ने कहा कि 2014 तक भारत के अंदर केवल छह एम्स काम कर रहे थे और प्रधानमंत्री मोदी जी की पहल का परिणाम है कि आज देश में 23 एम्स कार्य कर रहे हैं। आयुष्मान भारत के अंतर्गत 60 करोड़ से अधिक लोगों को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। इसमें उत्तर प्रदेश देश का अग्रणी राज्य है, जहां सर्वाधिक गोल्डन कार्ड बनाए गए हैं। प्रदेश में अब तक 5 करोड़ 60 लाख से अधिक गोल्डन कार्ड बनाए जा चुके हैं। इससे स्वास्थ्य क्षेत्र में एक स्वस्थ प्रतिस्पर्धा भी पैदा हुई है। यह स्वस्थ प्रतिस्पर्धा ऐसी है, जिसमें आज सुपर स्पेशियलिटी सुविधाएं भी बढ़ रही हैं। साथ ही सरकार द्वारा तय उपचार दरों और निजी क्षेत्र की मनमानी दरों के बीच बड़े अंतर को संतुलित करने का भी प्रयास हुआ है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारा मानना है कि अस्पतालों के लिए स्वास्थ्य सेवा की परिभाषा स्पष्ट होनी चाहिए। सेवा सही होनी चाहिए, सस्ती होनी चाहिए और विश्वसनीय भी होनी चाहिए। किसी भी स्तर पर मरीज के साथ धोखा नहीं होना चाहिए। हर व्यक्ति उस सेवा को वहन कर सके और उस पर भरोसा कर सके। सरकार के साथ निजी क्षेत्र की सहभागिता भी अत्यंत आवश्यक मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार के प्रयासों के साथ-साथ निजी क्षेत्र की सहभागिता भी अत्यंत आवश्यक है। निजी अस्पतालों के सहयोग से बड़ी आबादी को बेहतर और आधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकती हैं। किसी भी संपन्न देश के लिए यह आवश्यक है कि वहां के प्रत्येक नागरिक को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिले। यह उसका अधिकार भी है और सरकार का दायित्व भी। उन्होंने केडीएसजी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के निर्माण को इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताते हुए इसके संस्थापकों को बधाई दी। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि यह अस्पताल केवल गौतम बुद्ध नगर ही नहीं, बल्कि पूरे एनसीआर क्षेत्र तथा अन्य जनपद के लोगों को उच्चस्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यूपी में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की अपार संभावनाएं मुख्यमंत्री ने प्रसन्नता जताई कि केडीएसजी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल की स्थापना कपिल देव और उद्योगपति सुनील गुप्ता द्वारा की गई है। उन्होंने महाराष्ट्र की प्रतिष्ठित संस्था डीवाई पाटिल ग्रुप के साथ मिलकर इस अस्पताल के संचालन की जिम्मेदारी ली है। डीवाई पाटिल समूह शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में लंबे समय से काम कर रहा है और उसने महाराष्ट्र में उत्कृष्ट कार्य किए हैं। अब उनके अनुभव का लाभ गौतम बुद्ध नगर जनपद और एनसीआर क्षेत्र के लोगों को भी मिलेगा। उत्तर प्रदेश देश की सबसे बड़ी आबादी वाला राज्य है और यहां स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की अपार संभावनाएं हैं। यदि केडीएसजी समूह मेडिकल कॉलेज के क्षेत्र में भी निवेश करेगा, तो इससे नए मेडिकल प्रोफेशनल तैयार होंगे और स्थानीय लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिलेंगी। 1000 लोगों को मिलेगा रोजगार मुख्यमंत्री ने कहा कि यह 300 बेड का सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल केवल स्वास्थ्य सेवा ही नहीं देगा, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगा। यहां प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से कम से कम 1000 लोगों को रोजगार मिलेगा। इसमें डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ, पैरामेडिक्स, टेक्नीशियन, वार्ड बॉय, सफाई कर्मचारी, सुरक्षा कर्मी और अन्य सहयोगी कर्मचारी शामिल होंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज उत्तर प्रदेश सकारात्मक सोच के साथ विकास के मार्ग … Read more

हनुमान तालाब अखड़ार में 19 वर्षीय युवक का शव मिला,2 मार्च से लापता था युवक

हनुमान तालाब अखड़ार में 19 वर्षीय युवक का शव मिला,2 मार्च से लापता था युवक उमरिया  उमरिया जिले के बिलासपुर तहसील अंतर्गत 2 मार्च की शाम को लापता ग्राम झांपी निवासी एक 19 वर्षीय युवक का शव गांव से 10 किलोमीटर दूर ग्राम अखड़ार के हनुमान तालाब में 5 मार्च की शाम 4 से 5 बजे के आसपास मिला है। दरअसल ग्राम झापी निवासी 19 वर्षीय युवक के परिजनों ने बताया कि 2 मार्च की शाम 7:00 के आसपास जमुना कोल पिता पंजू कोल को दो लड़के ग्राम बड़खेरा से लेने आए थे। बाद में पता चला की जमुना कॉल को लेकर वह ग्राम अखड़ार के तालाब के पास गए जहां जमुना के साथ मारपीट भी हुई है। उसके बाद जमुना का कोई पता नहीं चला। उक्त मामले में एसडीओपी उमरिया ने बताया कि परिजनों की सूचना पर पुलिस चौकी बिलासपुर में  2 मार्च को ही गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कर ली थी। पुलिस युवक की तलाश कर रही थी और आज युवक का 100 ग्राम अखड़ार के हनुमान तालाब में मिला है।परिस्थिति जन्म साक्ष्यों को देखते हुए प्रथम दृष्टया यह मामला हत्या का प्रतीत हो रहा है। पोस्टमार्टम के लिए शव को मेडिकल कॉलेज शहडोल भेजा गया है। मर्ग कायमी कर मामले की जांच की जा रही है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार मामला तीन लोगों के बीच रिश्तों के विवाद से जुड़ा बताया जा रहा है जानकारी यह भी मिल रही है। कि मामले से जुड़े एक आरोपी तक पुलिस पहुंच चुकी है। खबर में बड़ी अपडेट यह है कि उमरिया पुलिस के द्वारा जल्द ही इस मामले का खुलासा किया जाएगा।  

नीतीश कुमार के राज्यसभा नामांकन से यूपी को क्या फायदा, 2027 के चुनाव में क्या होगा असर?

लखनऊ/बदायूं  बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चा ना केवल प्रदेश, बल्कि पूरे देश में हो रही है. बिहार में तो जेडीयू कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए. पटना में जेडीयू दफ्तर के सामने भी इसको लेकर प्रदर्शन किया गया. नीतीश के इस रुख को लेकर उत्‍तर प्रदेश में पार्टी क्‍या सोच रही है. उसके प्रदेश नेतृत्‍व का इस बारे में क्‍या मानना है, ये भी जानना जरूरी है.  अनूप पटेल का इस बारे में कहना है कि नीतीश कुमार अगर केंद्र की राजनीति में आते हैं तो कहीं ना कहीं इसका फायदा उत्तर प्रदेश सहित कई अन्य राज्यों के कार्यकर्ताओं और पार्टी को मिलेगा. उत्तर प्रदेश में भी जेडीयू की स्थिति मजबूत होगी।  दरअसल, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने के कदम के बाद बिहार की राजनीति को लेकर तमाम सवाल उठने लगे, क्योंकि अभी कुछ समय पहले ही नीतीश कुमार एक बार फिर बिहार के मुख्यमंत्री बने हैं.. लेकिन अभी कुछ दिनों से उनके बेटे निशांत कुमार की भी सक्रिय राजनीति में भागीदारी देखी जा रही है. तमाम मंचों पर उनका चेहरा दिखाया जाता है. इसके बाद कहा जा रहा है कि बिहार में इस बार जदयू के दो उप मुख्यमंत्री होंगे, जिसमें से निशांत कुमार एक हो सकते हैं. वहीं अगर मुख्यमंत्री की बात की जाए तो वह बीजेपी का ही कोई चेहरा होगा।  पूरे मामले पर उत्तर प्रदेश जनता दल यूके प्रदेश अध्यक्ष अनूप पटेल ने बदायूं में कहा कि हम लोग के सीनियर नेता का निर्णय देशहित में और पार्टी हित में हमेशा सही होता है. जैसा उनका निर्णय होगा हम सभी लोग उस निर्णय में उनके साथ हैं. उन्होंने कभी भी कोई ऐसा निर्णय नहीं लिया, जो देश हित में ना हो या पार्टी हिट में ना हो. उन्होंने कहा कि जो फार्मूला पहले था, पार्टी उसी लाइन पर काम करेगी. इस बार दो डिप्टी सीएम जदयू के होंगे और मुख्यमंत्री का चेहरा बीजेपी का होगा। उन्होंने कहा कि हम लोगों की बहुत समय से मांग थी कि निशांत को सक्रिय राजनीति में लाया जाए. हमें उम्मीद है कि अब वह सक्रिय राजनीति में आएंगे. बिहार में समर्थकों के प्रदर्शन पर उन्होंने कहा कि 2025 के चुनाव में हम लोगों ने घर-घर जाकर वोट मांगे और प्रचंड बहुमत से हमारी सरकार बनी तो स्वाभाविक बात है कि पब्लिक को बुरा तो लगेगा ही. कार्यकर्ताओं में पीड़ा है और वह पीड़ा रहेगी. नीतीश कुमार के केंद्रीय राजनीति में आने से उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश तथा अन्य कई और प्रदेशों की राजनीति में हमारी पार्टी को फायदा मिलेगा।

महिलाओं के सहारे आतंक फैलाने की कोशिश, लश्कर-ए-तैयबा की रणनीति उजागर

नई दिल्ली पाकिस्तानी आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा महिलाओं के लिए दो नए ट्रेनिंग सेंटर बनाने की तैयारी कर रहा है. इन सेंटर को ‘मरकज’ के रूप में डेवलप किया जाएगा, जहां महिलाओं को संगठन से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों के लिए ट्रेनिंग दिया जाएगा. यह कदम इस संगठन की रणनीति में संभावित बदलाव को दर्शाता है, क्योंकि अब तक लश्कर-ए-तैयबा अपने महिला विंग का उपयोग मुख्य रूप से राजनीतिक लामबंदी और प्रचार से जुड़े कामों के लिए करता रहा है. महिला विंग की प्रमुख इफ्फत सईद की हालिया टिप्पणियां इस बदलाव की तरफ इशारा करती हैं. माना जा रहा है कि आने वाले समय में महिलाओं को ओवर ग्राउंड वर्कर (OGW) जैसी भूमिकाओं में शामिल किया जा सकता है.  OGW नेटवर्क वे लोग होते हैं जो सीधे हथियारबंद गतिविधियों में शामिल नहीं होते, लेकिन संगठन के लिए जमीन पर सहयोग, सूचना को इकट्ठा और अन्य सहायता प्रदान करते हैं. महिलाओं को इस नेटवर्क में शामिल करने की कोशिश लश्कर के रणनीतिक विस्तार के रूप में देखी जा रही है. इस क्रम में संगठन के वरिष्ठ आतंकी अब्दुर रऊफ ने इस्लामाबाद स्थित मरकज कुबा अल इस्लाम का दौरा किया है. जानकारी के अनुसार, इस केंद्र का विस्तार किया जा रहा है और इसमें महिलाओं के लिए ख़ास ट्रेनिंग सुविधाएं जोड़ी जा रही हैं. सुरक्षा एजेंसियां इस पर कड़ी नजर रखे हुए हैं और सतर्कता बरत रही हैं. महिलाओं के लिए इन नए कैम्पों के जरिए लश्कर-ए-तैयबा अपने नेटवर्क को नए और व्यापक तरीकों से मजबूत करने की कोशिश कर सकता है. यह विकसित होती स्थिति क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए चिंता का विषय बनी हुई है. भारत में सुरक्षाबल लश्कर-ए-तैयबा की हर नए कदम पर खास नजर बनाई हुई है.   

रंगपंचमी पर इंदौर गेर का इंतजार, छतों से मिलेगा रंगों का अद्भुत दृश्य, टिकट से होगी एंट्री

इंदौर इंदौर की रंगपंचमी पर निकलने वाली गेर शहर का एक अनोखा और खास त्योहार है। इस दिन पुराने शहर के इलाकों में रंगों के शौकीन बड़ी संख्या में गेर में शामिल होते हैं और रास्ते में खड़े लोगों पर रंग बरसाते हुए आगे बढ़ते हैं। गेर के दौरान आसमान में दूर-दूर तक रंगों के बादल छा जाते हैं। इन खूबसूरत नजारों का आनंद लेने के लिए इस बार भी शहर के लोग गेर वाले मार्गों पर स्थित मकानों की छतें बुक कर सकेंगे और अपने परिवार के साथ इस आयोजन का मजा ले पाएंगे। प्रशासन ने पिछले साल भी यह व्यवस्था की थी, जो काफी सफल रही थी। शीतला माता बाजार से लेकर गौराकुंड और खजूरी मार्केट तक की छतों से लोग गेर की रौनक देख सकेंगे। हर साल इस आयोजन को देखने के लिए दूसरे शहरों से भी बड़ी संख्या में लोग इंदौर पहुंचते हैं। जिनके घर गेर के मार्ग पर पड़ते हैं, वहां अब छोटी-छोटी पार्टियों का भी आयोजन होने लगा है, जहां लोग अपने दोस्तों और रिश्तेदारों को बुलाकर रंगपंचमी का उत्सव मनाते हैं। इस साल गेर के मार्ग पर स्थित आठ छतों पर 200 से अधिक लोगों के बैठने की व्यवस्था की जाएगी। इनकी बुकिंग बुक माय शो के माध्यम से की जाएगी, जिसके लिए लोगों को टिकट खरीदना होगा। इस बार 8 मार्च को रविवार होने के कारण प्रशासन ने अलग से छुट्टी घोषित नहीं की है। रविवार होने की वजह से इस बार गेर में और अधिक भीड़ जुटने की संभावना जताई जा रही है। करीब चार किलोमीटर लंबे गेर मार्ग पर प्रशासन ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। बिजली के तार और केबल हटाए जा रहे हैं, साथ ही सड़कों की मरम्मत का काम भी किया जा रहा है। परंपरा के अनुसार इस बार भी चार गेर इस जुलूस का हिस्सा होंगी। लगभग 100 फीट तक रंग फेंकने वाली विशेष रंग मिसाइलें भी तैयार की जा रही हैं। इसके अलावा डीजे और भजन मंडलियां भी गेर में शामिल होंगी। नगर निगम की गेर भी इस जुलूस का हिस्सा रहेगी, हालांकि शहर में हाल ही में हुई कुछ घटनाओं के कारण मेयर पुष्यमित्र भार्गव इस बार गेर में शामिल नहीं होंगे।

रोड प्रोजेक्ट्स की मंजूरी में देरी, वन विभाग की फंसी हुई 48 सड़क परियोजनाएं 117 से 1838 दिन तक

भोपाल  सड़क निर्माण कार्यों में वन विभाग से आवश्यक स्वीकृति समय पर नहीं मिलने के कारण प्रदेश में 48 परियोजनाओं में बड़ी देरी हुई है। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट में इसे प्लानिंग समन्वय की कमी का परिणाम बताया गया है। कैग रिपोर्ट के मुताबिक, मई 2023 से जून 2024 के बीच 16 संभागों में समीक्षा के दौरान पाया गया कि वन विभाग से अनुमति, भूमि विवाद, अतिक्रमण और यूटिलिटी शिफ्टिंग में देरी के कारण 48 कार्यों को पूरा होने में 117 से लेकर 1,838 दिनों तक का अतिरिक्त समय लगा। यानी कई दिनों तक काम लटका रहा। इसमें अधिकारियों की लापरवाही सामने आई है, जिन्होंने बिना अनुमति के ही काम शुरू कर दिया। इससे समय ज्यादा लगने के साथ ही लागत भी बढ़ी।   वन विभाग की पूर्व मंजूरी जरूरी मध्यप्रदेश निर्माण विभाग नियमावली और वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 के तहत वन भूमि के डायवर्जन के लिए भारत सरकार से पूर्व स्वीकृति अनिवार्य है। इसके बावजूद कई कार्य आवश्यक मंजूरी सुनिश्चित किए बिना शुरू कर दिए गए। ऑडिट रिपोर्ट में साफ किया कि इस प्रकार की कार्यप्रणाली से न केवल समय और लागत में वृद्धि हुई, बल्कि परियोजनाओं की प्रभावशीलता भी प्रभावित हुई। रिपोर्ट के अनुसार भोपाल नगर निगम सम्मेलन (जून 2025) में शासन ने राजस्व और वन विभाग के बीच अधिकार क्षेत्र के स्पष्ट नहीं होने की बात स्वीकार की और जांच के बाद सुधारात्मक कदम उठाने का आश्वासन दिया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि बिना पूर्व स्वीकृति कार्य शुरू करना प्लानिंग की कमी को दर्शाता है। भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए सख्त अनुपालन जरूरी है। 

ग्वालियर का मेगा प्रोजेक्ट: स्वर्ण रेखा नदी पर 13.85 KM लंबी एलिवेटेड रोड, 293 पिलर और 14 लूप के साथ खास उपलब्धि

ग्वालियर  ग्वालियर में दिल्ली के रिंग रोड की तर्ज पर प्रदेश की पहली एलिवेटेड रोड बन रही है। यह 2027 तक बनकर तैयार हो जाएगी। साथ ही यह मध्यप्रदेश की पहली ऐसी एलिवेटेड रोड होगी, जो किसी नदी के ऊपर बनाई जा रही है। मुरैना रोड पर जलालपुर तिराहा के पास से यह एलिवेटेड रोड शुरू हुई है, जो गिरवाई में शिवपुरी लिंक रोड के पास तक जाएगी। 293 पिलर पर बनाई जा रही इस एलिवेटेड रोड की लंबाई स्वर्ण रेखा नदी के बराबर मतलब 13.85 किलोमीटर है। एलिवेटेड रोड पर 14 लूप बनाए जा रहे हैं। इससे शहर का ट्रैफिक एलिवेटेड रोड पर चढ़ और उतर सकेगा। यह केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का ड्रीम प्रोजेक्ट है। फिलहाल इसका 60 फीसदी काम हो चुका है। उम्मीद है कि अगले साल तक यह सौगात ग्वालियर के लोगों को मिल जाएगी। कम से कम एक घंटे का समय बचेगा ग्वालियर में इस एलिवेटेड रोड का काम पूरा होने के बाद जब यह रोड पर ट्रैफिक शुरू हो जाएगा तो ग्वालियर की रफ्तार को नई उड़ान मिलेगी। मुरैना से शिवपुरी जाने वाले जलालपुर तिराहा से इस एलिवेटेड रोड पर आएंगे और गिरवाई से निकलकर सीधे शिवपुरी या झांसी के लिए निकल जाएंगे। उन्हें शहर के बीच से नहीं निकलना पड़ेगा। इससे शहर में एंट्री कर जाम में फंसने और लगने वाले समय की बचत होगी। इससे कम से कम एक घंटे का समय बचेगा। यह रोड अपने आप में खास इसलिए भी है कि यह मध्यप्रदेश की एक मात्र एलिवेटेड रोड है जो नदी के ऊपर है। इस तरह की रोड उत्तराखंड, हिमाचल में देखने को मिलती हैं। यह शहर के बीच में स्वर्ण रेखा नदी (स्वर्ण रेखा नाला) के ठीक ऊपर बन रही है। यह रोड बनने के बाद इसकी सुंदरता भी देखते ही बनेगी। एलिवेटेड रोड मुख्य मार्ग से कनेक्ट रहेगी स्वर्ण रेखा नदी पर तैयार होने वाले एलिवेटेड रोड को शहर के प्रमुख मार्गों से जोड़ा जा रहा है, जिससे वहां से एलिवेटेड रोड पर जाने और शहर की मौजूदा सड़क पर उतरने का रास्ता मिल सके। ये कनेक्टिविटी जीवाजीगंज, छप्परवाला पुर, फूलबाग पर लक्ष्मीबाई समाधि और हजीरा क्षेत्र से दी जाएगी। इन स्थानों पर ट्रैफिक लोड काफी रहता है। यहां से लोग दूसरे रास्तों के लिए डायवर्ट भी होते हैं। एलिवेटेड रोड हनुमान बांध से शुरू होकर तारागंज, जनकगंज, गेंड़ेवाली सड़क, शिंदे की छावनी, फूलबाग, तानसेन नगर, रानीपुरा, हजीरा, मछली मंडी रोड से होते हुए जलालपुर तिराहा तक पहुंचाएगी। ग्वालियर, लश्कर और फूलबाग का घटेगा ट्रैफिक एलिवेटेड रोड से शहर के यातायात के हिसाब से एक बड़ी क्रांति होगी। पूरे शहर में सड़कों की स्थिति खराब है। जबकि पिछले 6 साल में सवा लाख चार पहिया वाहन सड़कों पर नए बढ़ गए हैं। जिस कारण जगह-जगह पर जाम के हालात लग रहे हैं। एलिवेटेड रोड बनने से लोगों को आए दिन लगने वाले ट्रैफिक जाम से राहत मिलेगी। शहर के ग्वालियर, लश्कर और फूलबाग पर 50 फीसदी ट्रैफिक लोड कम हो जाएगा। 293 पिलर, 108 गाटर, 14 लूप ग्वालियर में दिल्ली की रिंग रोड की तर्ज पर बनाई जा रही एलिवेटेड रोड प्रोजेक्ट में समय और चुनौती के आधार पर बदलाव होते जा रहे हैं। 293 पिलर, 14 लूप और 108 गाटर से बन रही 13.85 किलोमीटर लंबी एलिवेटेड रोड सिर्फ एक सड़क नहीं, बल्कि शहर के पांच अलग-अलग सर्कल को जोड़ने वाला नया हाईवे है। जब यह प्रोजेक्ट शुरू हुआ था तो इसमें लगभग 13.85 किलोमीटर के रास्ते पर 19 लूप बनाए जा रहे थे। जिससे शहर का ट्रैफिक इन लूप के जरिए एलिवेटेड रोड पर चढ़-उतर सकेगा। बाद में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इस पर आपत्ति ली थी। उनका कहना था कि जब इतने लूप बना दिए जाएंगे तो एलिवेटेड रोड का महत्व ही खत्म हो जाएगा। इसके बाद लूप घटाकर अब 14 कर किए हैं। इसी तरह से पिलर और लूप की संख्या बदलती रही है। 1 हजार करोड़ का प्रोजेक्ट, 9-9 मीटर चौड़ी 2 सड़क लगभग एक हजार करोड़ रुपए की लागत से बनाई जा रही एलिवेटेड रोड का काम दो फेस में किया जा रहा है। दूसरे फेस की सड़क- गिरवाई पुलिस चौकी के पास से तारागंज, जीवाजीगंज, नदीगेट होते हुए लक्ष्मीबाई समाधि स्थल तक दूसरे चरण में 7.420 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड रोड बनाया जा रहा है। रिवाइज प्लान में रोड की चौड़ाई 19.5 मीटर हो गई है। उसमें 9-9 मीटर की दो सड़कें (कैरिज-बे) होंगी। बाकी डेढ़ मीटर में डिवाइडर बनेंगे। इसमें 9 पॉइंट पर 13 लूप बनाए जाएंगे। जिसमें गिरवाई, फूलबाग, रामदास घाटी, शिंदे की छावनी पर 2-2 लूप और हनुमान बांध, तारागंज, जनकगंज, जीवाजीगंज व महलगेट पर एक-एक लूप तैयार हो रहे हैं। जबकि पहले चरण या फेस की एलिवेटेड रोड जलालपुर तिराहा से लक्ष्मीबाई समाधि स्थल तक 6.5 किलोमीटर की बनाई जा रही है। मंगलम बिल्डकॉन इंडिया कर रही है काम एलिवेटेड रोड का कार्य श्री मंगलम बिल्डकॉन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड गुजरात कर रही है। प्रोजेक्ट में 90 प्रतिशत पैसा केंद्र और 10 प्रतिशत पैसा राज्य सरकार दे रही है। कंपनी की ढिलाई के कारण यह प्रोजेक्ट लगातार लेट हो रहा है। निर्माण एजेंसी लोक निर्माण सेतु संभाग से हुए अनुबंध के अनुसार कंपनी को पहले चरण (6.5 किमी) जलालपुर चौराहे के पास से लक्ष्मीबाई समाधि स्थल के पास तक का काम फरवरी 2025 में पूरा करना था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। कंपनी ने शासन स्तर से दिसंबर तक का समय बढ़वा लिया। अभी तक कंपनी 60 प्रतिशत काम कर पाई है। अब कंपनी प्रबंधन ने एक बार फिर जून 2026 का समय मांगा है। जिसके पीछे मानसून को कारण बताया है। ऐसे बढ़ता जा रहा बार-बार समय 23 जून 2022 के अनुबंध अनुसार 30 माह यानी 17 फरवरी 2025 तक काम पूरा होना था। लेकिन, तब तक कंपनी 50 प्रतिशत भी काम नहीं कर सकी थी। इसके बाद दिसंबर 2025 तक का वक्त लिया। कंस्ट्रक्शन कंपनी ने 38 महीने से अधिक समय बीतने के बाद अब फिर आवेदन देकर निर्माण कार्य पूरा करने के लिए जून 2026 तक का समय लिया है। साल 2027 तक दोनों फेस का काम पूरा होने के बाद एक एलिवेटेड रोड ग्वालियर को मिलेगी।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग सख्त, एम्स में महिला डॉक्टर की मौत पर 15 दिन में कार्रवाई रिपोर्ट का आदेश

भोपाल  राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने एम्स भोपाल में कार्यरत एक महिला सहायक प्राध्यापक की मौत के मामले में गंभीर संज्ञान लिया है। आयोग ने मामले की जांच के निर्देश देते हुए 15 दिन के भीतर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है।शिकायत में आरोप लगाया गया है कि 5 जनवरी 2026 को महिला डॉक्टर की मौत लंबे समय से हो रहे मानसिक उत्पीड़न और खराब कार्य वातावरण के कारण हुई। शिकायत के अनुसार ट्रॉमा एवं आपातकालीन चिकित्सा विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. मोहम्मद यूनुस पर मानसिक प्रताड़ना के आरोप लगाए गए हैं।  महिला डॉक्टरों की शिकायतों को दबाया शिकायत में बताया गया है कि पीड़ित डॉक्टर ने अपनी परेशानी को लेकर तीन बार ई-मेल के माध्यम से संस्थान के अधिकारियों को जानकारी दी थी, लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। शिकायत में यह भी कहा गया है कि संस्थान में पहले भी महिला डॉक्टरों की शिकायतों को दबाया गया और इस मामले में अभी तक प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई।  पुलिस आयुक्त और एम्स भोपाल के निदेशक को दिए निर्देश मामले को गंभीर मानते हुए आयोग के सदस्य प्रियांक कानूनगो की अध्यक्षता वाली पीठ ने नोटिस जारी किया है। आयोग ने भोपाल के पुलिस आयुक्त और एम्स भोपाल के निदेशक को निर्देश दिए हैं कि मामले की जांच कर प्राथमिकी, शव परीक्षण रिपोर्ट और अन्य संबंधित दस्तावेज आयोग को उपलब्ध कराएं। 3 वर्षों की शिकायतों और उन पर हुई कार्रवाई का विवरण मांगा इसके साथ ही एम्स प्रशासन से संस्थान की यौन उत्पीड़न निवारण समिति की जानकारी, पिछले तीन वर्षों में मिली शिकायतों और उन पर हुई कार्रवाई का पूरा विवरण भी मांगा गया है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने कहा है कि यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन माना जाएगा। आयोग ने सभी संबंधित अधिकारियों को 15 दिन के भीतर पूरी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। 

एयर फ्री टायर: न पंचर, न हवा, इस कंपनी ने बदल दी गाड़ियों की दुनिया

नई दिल्ली Bridgestone AirFree Tyres: सड़क पर गाड़ी चलाते वक्त टायर पंचर हो जाए, तो सबसे पहले मन में यही ख्याल आता है कि आज तो दिन खराब हो गया. हवा निकली, गाड़ी रुकी, और सफर अटक गया. लेकिन अब टायर की दुनिया में एक ऐसी तकनीक सामने आ रही है, जो इस झंझट को बीते वक्त की बात बना सकती है. जापान की मशहूर टायर कंपनी Bridgestone ने ऐसा टायर पेश किया है, जिसमें हवा की ही जरूरत नहीं है. यानी न हवा भरने की टेंशन, न पंचर का डर, और न ही बीच सड़क पर रुकने की मजबूरी.  Bridgestone ने अपने एयरलेस टायर की थर्ड जेनरेशन मॉडल से पर्दा उठा दिया है. इस नए Airfree Tyre में पहले के मुकाबले कई अहम सुधार किए गए हैं, जाकि इसे और बेहतर बनाया जा सके. कंपनी इसे कॉन्सेप्ट स्टेज से आगे ले जाकर अब रियल वर्ल्ड यानी प्रोडक्शन रेडी लेवल पर पहुंचा दिया है. कंपनी इस एयर फ्री टायर को लेकर धीमें-धीमें सोशल इम्प्लीमेंटेशन की दिशा में आगे बढ़ रही है. अब तक भविष्य का टायर कहे जाने वाला एयरलेस टायर जल्द ही सड़कों पर दौड़ने वाली गाड़ियों में नज़र आएंगे. AirFree Tyre की तकनीक ब्रिजस्टोन के इस थर्ड जेनरेशन एयरफ्री टायर में एडवांस सिमुलेशन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है. इसके साथ ही मजबूत और फ्लेक्सिबल मटेरियल से बना स्ट्रक्चर तैयार किया गया है. कंपनी का कहना है कि, ऐसा इसलिए किया गया है ताकि ये एयरफ्री टायर अलग अलग मौसम और सड़क की स्थितियों के अनुसार बेहतर प्रदर्शन कर सके. इसका मकसद टायर को ज्यादा भरोसेमंद और लंबे समय तक चलने वाला बनाना है. AI बेस्ड डायनामिक स्ट्रक्चर इस टायर की एक ख़ास बात ये भी है कि, इसमें डायनामिक स्ट्रक्चरल डिजाइन दिया गया है. यह सेकंड जेनरेशन के राइड कंफर्ट वाले फोकस से आगे बढ़कर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) बेस्ड ऑटोमेटेड लर्निंग सिस्टम का इस्तेमाल करता है. यह सिस्टम टायर के आकार और उस पर पड़ने वाले दबाव को अलग अलग परिस्थितियों के हिसाब से खुद एडजस्ट करता है. इससे टायर का इस्तेमाल कई तरह के वाहनों में आसानी से किया जा सकता है. ब्लू स्पोक्स से बढ़ी सेफ्टी कंपनी ने इन टायरों के निर्माण में ब्लू स्पोक्स (नीले रंग के स्पोक व्हील्स) जैसे स्ट्रक्चर का इस्तेमाल किया है. आम भाषा में समझें तो टायर के अंदर नीले रंग के स्पोक्स लगाए गए हैं, जो कम रोशनी और शाम के समय साफ नजर आते हैं. इसका मकसद लोकल कम्युनिटी मोबिलिटी में सेफ्टी को और बेहतर बनाना है. इनमें हवा की जगह रिसाइकल होने वाली थर्मोप्लास्टिक रेजिन से बने स्पोक्स लगाए गए हैं, जो गाड़ी का पूरा वजन आसानी से उठा सकते हैं. ब्रिजस्टोन का यह भी दावा है कि, ये स्पोक्स सड़क के झटकों को भी कम करते हैं. इन टायरों का डेमो टेस्ट मार्च 2024 में जापान के कोडाइरा सिटी, टोक्यो में शुरू किया गया था, जो लगातार जारी है. यह टेस्ट ग्रीन स्लो मोबिलिटी सॉल्यूशंस के लिए इन टायरों की उपयोगिता को परखने के लिए किया जा रहा था. हालांकि आम पैसेंजर कार इस्तेमाल करने वालों को इसके लिए थोड़ा इंतजार करना पड़ सकता है. इस समय ब्रिजस्टोन इन एयरफ्री टायरों को कमर्शियल ट्रकों और अल्ट्रा कॉम्पैक्ट इलेक्ट्रिक वाहनों पर टेस्ट कर रही है. कंपनी का मानना है कि प्रोफेशनल फ्लीट वाहनों में मेंटेनेंस की जरूरत ज्यादा होती है, इसलिए वहां यह तकनीक ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकती है.

Hindu Nav Varsh 2026: हिंदू नववर्ष के शुभारंभ की तारीख, राजा और मंत्री के बारे में जानें

इंदौर  Hindu Nav Varsh 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार, नए साल की शुरुआत चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होती है. धार्मिक मान्यता है कि इसी दिन ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना की थी, इसलिए इसे हिंदू नववर्ष का पहला दिन माना जाता है. इसी दिन से पूरे साल का फल और उसके प्रभाव का आकलन भी किया जाता है। कब से शुरू होगा हिंदू नववर्ष? साल 2026 में हिंदू नववर्ष यानी विक्रम संवत 2083 की शुरुआत 19 मार्च से होगी. इस दिन गुरुवार पड़ रहा है, इसलिए इस वर्ष के राजा देवगुरु बृहस्पति होंगे. ज्योतिष के नियम के अनुसार जिस वार से साल शुरू होता है, उसी वार का स्वामी ग्रह पूरे वर्ष का राजा माना जाता है. वहीं इस साल के मंत्री मंगल ग्रह होंगे. इसलिए इस संवत का नाम ‘रौद्र’ रखा गया है। कैसा रहेगा रौद्र संवत का असर? ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, रौद्र नाम का यह संवत थोड़ा चुनौतीपूर्ण रह सकता है. दुनिया भर में राजनीतिक तनाव बढ़ने के संकेत हैं और देशों के बीच मतभेद भी देखने को मिल सकते हैं. कुछ स्थानों पर युद्ध जैसी स्थिति बनने की आशंका भी जताई जा रही है. इसके अलावा इस साल आगजनी, दुर्घटनाओं और प्राकृतिक समस्याओं की घटनाएं बढ़ सकती हैं. बारिश कम होने की वजह से फसलों पर असर पड़ सकता है, जिससे महंगाई भी बढ़ने की संभावना है. कई देशों में जनता सरकार के खिलाफ आवाज उठा सकती है. कुल मिलाकर यह साल कुछ उतार-चढ़ाव और चुनौतियां लेकर आ सकता है। क्या होता है रौद्र संवत्सर? ज्योतिषियों ने विक्रम संवत 2083 को ‘रौद्र’ नाम दिया है. हर साल का एक अलग नाम होता है, जिससे उस वर्ष के स्वभाव और संभावित घटनाओं का अंदाजा लगाया जाता है. इस बार नए साल की शुरुआत उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में होगी और उस समय शुक्ल योग के साथ मीन लग्न रहेगा. इन ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति को ज्योतिष में काफी अहम माना जाता है, क्योंकि इन्हीं के आधार पर साल भर के प्रभाव का आकलन किया जाता है. रौद्र शब्द का मतलब उग्र या तेज स्वभाव से जुड़ा होता है. इसी कारण यह माना जा रहा है कि पूरे साल के दौरान प्रकृति, समाज और राजनीति से जुड़े मामलों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं।

अल्ट्रॉवायलेट बाइक की कीमत में 40% की कमी, अब ₹1.49 लाख में मिलेगी ₹2.50 लाख वाली बाइक, ₹2,499 में मिलेगा सब्सक्रिप्शन प्लान

मुंबई  भारत की इनोवेशन-ड्रिवन मोबिलिटी कंपनी अल्ट्रॉवायलेट ऑटोमोटिव (Ultraviolette Automotive) ने EV मार्केट में बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने बैटरी फ्लेक्स (Battery Flex) नाम से एक नई बैटरी ऐज-ए-सर्विस (Battery-as-a-Service- BaaS) स्कीम लॉन्च की है, जिसके तहत अब आप X-47 क्रॉसओवर को सिर्फ ₹1,49,000 में घर ला सकते हैं। यह कीमत पहले करीब ₹2.5 लाख थी, यानी इसकी कीमत में लगभग 40% की कटौती हुई है। आइए जरा विस्तार से इसकी डिटेल्स जानते हैं। बैटरी फ्लेक्स (Battery Flex) एक ऐसा मॉडल है, जिसमें आप कम कीमत पर बाइक खरीदते हैं और बैटरी को सब्सक्रिप्शन पर लेते हैं। इस पहल के लिए अल्ट्रॉवायलेट (Ultraviolette) ने भारत की ग्रीन-ओनली NBFC ईकोफी (Ecofy) के साथ पार्टनरशिप की है। बैटरी सब्सक्रिप्शन की बात करें तो ये ₹2,499 प्रति माह से शुरू होती है। यह खर्च औसतन एक महीने के पेट्रोल खर्च से भी कम बताया जा रहा है। इसकी बैटरी पर 5 साल की वारंटी मिलती है। सब्सक्रिप्शन पूरा होने के बाद बैटरी की ओनरशिप ग्राहक को बिना अतिरिक्त शुल्क के ट्रांसफर कर दी जाएगी। X-47 एक इलेक्ट्रिक क्रॉसओवर टू-व्हीलर है, जो स्टाइल, परफॉर्मेंस और टेक्नोलॉजी का कॉम्बिनेशन पेश करता है। इसमें बैटरी फ्लेक्स (Battery Flex) के साथ कम डाउनपेमेंट, आसान मासिक खर्च देखने को मिलता है, जिससे बैटरी की टेंशन खत्म रहेगी। बैटरी फ्लेक्स (Battery Flex) के लिए एनरोलमेंट 5 मार्च 2026 से शुरू हो चुके हैं। भारत में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर अपनाने की रफ्तार बढ़ रही है, लेकिन ज्यादा कीमत अभी भी बड़ी बाधा है। बैटरी ऐज-ए-सर्विस (Battery-as-a-Service) मॉडल खरीद को किफायती बनाता है। इसकी बैटरी रिस्क कम करता है और ग्राहक का भरोसा बढ़ाता है। इसकी कम शुरुआती कीमत, सस्ता मासिक सब्सक्रिप्शन और 5 साल की वारंटी मिलती है। यह पैकेज EV खरीदारों के लिए काफी आकर्षक लग रहा है। अब देखना दिलचस्प होगा कि बैटरी फ्लेक्स (Battery Flex) स्कीम बाजार में कितना बड़ा असर डालती है।

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