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विधानसभा में मंत्री बघेल ने दी जानकारी, 16 लाख किसानों ने किया रकबा समर्पण

रायपुर. विधानसभा के बजट सत्र में आज खाद्य नागरिक आपूर्ति मंत्री दयाल दास बघेल ने सवालों का जवाब दिया. धान खरीदी के बारे में पूछे गए एक सवाल के जवाब में मंत्री ने बताया है कि 16 लाख 55 हजार से अधिक किसानों ने दो लाख 16 हजार हेक्टेयर रकबा समर्पण किया है. इस संबंध में कांग्रेस विधायक दिलीप लहरिया ने सवाल पूछा था. दिलीप लहरिया ने सवाल पूछा था कि खरीफ विपणन वर्ष2025–26 में प्रदेश में तकनीकी कारणों, एग्रीस्टेक पोर्टल और खरीदी की समय सीमा समाप्त होने के कारण अनेक किसान पंजीयन एवं टोकन होने के बावजूद धान नहीं बेच पाए हैं? यदि हां तो ऐसे किसानों की संख्या कितनी है. एग्रीस्टेक पोर्टल में रकबा/ शून्य कम अथवा त्रुटिपूर्ण दर्शाए जाने के कारण धान विक्रय से वंचित किसानों की आर्थिक क्षति का आकलन किया गया है या नहीं? यदि हां तो क्षतिपूर्ति के लिए शासन ने क्या किया है. इसके अलावा यह भी पूछा गया था कि किसानों से रकबा समर्पण किन परिस्थितियों में तथा शासन की किस नीति या आदेश के तहत कराया गया है ? अब तक कितने किसानों ने रकबा खसरा समर्पित किया है. ऋण वसूली के संबंध में भी सवाल पूछते हुए कांग्रेस विधायक दिलीप लहरिया ने पूछा कि जिन ऋणी किसानों का धान नहीं खरीदा जा सकता है. उनके अल्पकालीन कृषि ऋण के संबंध में शासन की क्या नीति है? खाद्य मंत्री दयालदास बघेल ने अपने जवाब में बताया है कि धान खरीदी अवधि के दौरान किसानों द्वारा लाये गये मानक धान का पूर्ण खरीदी किया गया है. जिन किसानों के द्वारा धान विक्रय का कार्य पूर्ण किया जा चुका है, उनसे रकबा समर्पण कराया जा सकता है. संबंधी निर्देश थे. खरीफ वर्ष 2025-26 में 1655149 किसानों ने 2.16 लाख हेक्टेयर रकबा का समर्पण किया. मंत्री ने बताया है कि जिन ऋणी कृषकों के द्वारा धान उपार्जन अवधि के दौरान अपना धान उपार्जन केन्द्रों विक्रय के लिए नहीं लाया गया है. उनके शेष ऋणों की वसूली देय तिथि के पूर्व कृषकों से व्यक्तिगत संपर्क कर नगद राशि वसूली की कार्यवाही की जाती है.

हाईवे पर बिना टोल सफर महंगा! NHAI के एनुअल पास की कीमत बढ़ने की तैयारी

नई दिल्ली आप अक्सर सड़कों पर मोटर गाड़ी (Car/Jeep/Van) लेकर निकल पड़ते हैं। राजमार्गों या एक्सप्रेसवे पर हर कुछ किलोमीटर पर बने टोल प्लाजा पर फीस भरते-भरते आप परेशान हैं। तो आपके लिए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने एनुअल पास जारी कर दिया है। अब यही पास महंगा होने वाला है। जी हां, एनएचएआई का एनुअल पास अगले एक अप्रैल से महंगा होने वाला है। कितना महंगा होगा एनएचएआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि एनएचएआई का एनुअल पास आगामी वित्त वर्ष 2026-27 के पहले दिन मतलब कि एक अप्रैल से महंगा होने वाला है। जब पूछा गया कि कितना महंगा होगा तो उन्होंने बताया कि इसमें 75 रुपये से 100 रुपये के बीच बढ़ोतरी हो सकती है। यह पास अभी 3,000 रुपये में मिलता है। क्यों महंगा होगा एनएचएआई का टोल जिस तरह से हर साल एक अप्रैल से बढ़ता है, उसी तरह से एनुअल पास में भी यही व्यवस्था है। टोल के दर में या एनुअल पास के रेट में बढ़ोतरी मुद्रास्फीति के थोक मूल्य सूचकांक (WPI) पर आधारित है। साल भर में डब्ल्यूपीआई इंडेक्स में जितनी बढ़ोतरी होती है, उसी हिसाब से एनएच के टोल भी बढ़ जाते हैं। उसी तरह से इस साल एनुअल पास का रेट करीब 100 रुपये बढ़ जाएगा। क्या है एनुअल पास जो व्यक्ति एनएच पर बराबर यात्रा करते हैं, उनकी सहूलियत के लिए पिछले साल 15 अगस्त से एनुअल पास की स्कीम लाई गई है। इसके तहत अभी 3,000 रुपये में एक पास जारी किया जाता है जो कि देश के राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) या राष्ट्रीय एक्सप्रेसवे (NE) के टोल प्लाजा पर वैलिड है। इस पास को खरीद लेने के बाद मोटर वाहन के मालिक एक साल या 200 टोल प्लाजा बिना शुल्क दिए पास कर सकते हैं। यदि आपने एक साल पूरा होने से पहले ही 200 टोल प्लाजा पार कर लिए तो उससे पहले ही पास खत्म हो जाएगा। कौन खरीद सकते हैं एनुअल पास एनएचएआई के एनुअल पास को कोई भी प्राइवेट या निजी कार, जीप या वैन के मालिक खरीद सकते हैं। कोई भी कॉमर्शियल व्हीकल या भाड़ा कमाने वाली गाड़ी के मालिक इसे नहीं खरीद सकते हैं। इस पास को राजमार्ग यात्रा ऐप और एनएचएआई पोर्टल से खरीदा जा सकता है।

कब शुरू होगी चैत्र नवरात्रि 2026? 19 या 20 मार्च को लेकर कन्फ्यूजन खत्म, जानें कलश स्थापना मुहूर्त

चैत्र नवरात्रि शुरू होने वाली है. चैत्र मास की प्रतिपदा तिथि से ये नवरात्रि शुरू होती है. चैत्र नवरात्रि में सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है कलश स्थापना करना, जोकि पहले ही दिन की जाती है. इसके बाद नौ दिनों तक माता दुर्गा के 09 अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है. इस दौरान भक्त उपवास करते हैं. माता को अलग-अलग तरह के पकवानों का भोग लगाते हैं. नवरात्रि के दिनों में माता अपने भक्तों के दुख हरने के लिए आती हैं. नवरात्रि में अष्टमी और नवमी का दिन बहुत विशेष माना जाता है. इस दौरान भक्त कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर उन्हें घर आने के लिए आमंत्रित करते हैं और फिर उन्हें भोग-प्रसाद खिलाते हैं. हालांकि, इस बार लोगों के मन में चैत्र नवरात्रि की तारीख को लेकर संशय है कि ये 19 से शुरू हो रही है या 20 मार्च से. ऐसे में आइए जानते हैं चैत्र नवरात्रि की सही तारीख और कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त. चैत्र नवरात्रि कब से है? पंचांग के अनुसार, इस साल चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि की शुरुआत 19 मार्च को सुबह 06 बजकर 52 मिनट पर हो रही है. वहीं इस तिथि का समापन 20 मार्च को सुबह 04 बजकर 52 मिनट पर होगा. ऐसे में चैत्र नवरात्रि का शुभारंभ 19 मार्च से होगा. 27 मार्च को रामनवमी के साथ चैत्र नवरात्रि का समापन हो जाएगा. चैत्र नवरात्रि 2026 कलश स्थापना शुभ मुहूर्त इस साल चैत्र नवरात्र पर कलश स्थापना के लिए दो शुभ मुहूर्त रहने वाले हैं. 19 मार्च के दिन पहला शुभ मुहूर्त सुबह 06 बजकर 52 मिनट पर शुरू होगा. ये मुहूर्त सुबह 07 बजकर 43 मिनट पर खत्म होगा. इस दिन दोपहर को अभिजीत मुहूर्त में भी कलश स्थापना संभव होगी. कलश स्थापना अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 05 मिनट पर शुरू होगा. ये मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 53 मिनट तक रहेगा.

विवाद, बहिष्कार और अंत—SDM सर्वेश यादव की विदाई, नए अध्याय की शुरुआत!

Controversy, boycott and end – SDM Sarvesh Yadav’s farewell, beginning of a new chapter! संवाददाता चंदा कुशवाह नलखेड़ा। प्रशासनिक गलियारों में लंबे समय से चर्चा का विषय बने सुसनेर के SDM सर्वेश यादव को आखिरकार उनके पद से हटा दिया गया है। शासन ने उनकी जगह किरण बरबड़े को सुसनेर का नया SDM नियुक्त किया है। क्षेत्र में पिछले कुछ महीनों से लगातार विवाद और विरोध की स्थिति बनी हुई थी, जिसके बाद यह प्रशासनिक बदलाव हुआ है।दरअसल, SDM सर्वेश यादव का कार्यकाल शुरू से ही विवादों से घिरा रहा। सबसे पहले मामला विश्व प्रसिद्ध मां बगलामुखी मंदिर, नलखेड़ा से जुड़ा सामने आया, जहां मंदिर के पुजारियों ने उनके व्यवहार और कार्यप्रणाली को लेकर नाराजगी जताते हुए उनका बहिष्कार कर दिया था। मामला बढ़ने के बाद तत्कालीन कलेक्टर आगर ने हस्तक्षेप करते हुए सर्वेश यादव को मंदिर से जुड़े सभी दायित्वों से अलग कर दिया और यह जिम्मेदारी डिप्टी कलेक्टर कमल मंडलोई को सौंप दी गई।इसके बाद एक और विवाद उस समय सामने आया जब सुसनेर के अधिवक्ताओं ने SDM कोर्ट का बहिष्कार कर दिया। अधिवक्ताओं का आरोप था कि SDM सर्वेश यादव द्वारा उनसे बातचीत के दौरान असभ्य व्यवहार और कठोर भाषा का इस्तेमाल किया गया। इस मुद्दे को लेकर वकीलों ने हड़ताल शुरू कर दी। धीरे-धीरे यह विरोध केवल सुसनेर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि नलखेड़ा और सोयत तहसील के अधिवक्ताओं ने भी समर्थन देते हुए उनकी कोर्ट में पेशी देने से इनकार कर दिया। प्रशासनिक हलकों में यह मामला लगातार चर्चा में बना रहा।स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा होती रही कि SDM सर्वेश यादव अक्सर खुद को उच्च राजनीतिक संपर्कों वाला अधिकारी बताते थे। हालांकि इन चर्चाओं की आधिकारिक पुष्टि कभी नहीं हुई, लेकिन प्रशासनिक दफ्तरों और स्थानीय हलकों में यह बातें लंबे समय तक चर्चा का विषय बनी रहीं।लगातार बढ़ते विवाद, मंदिर प्रकरण और अधिवक्ताओं के विरोध के बाद आखिरकार शासन ने प्रशासनिक स्तर पर बदलाव करते हुए सर्वेश यादव को सुसनेर से हटा दिया और उनकी जगह किरण बरबड़े को नई SDM के रूप में पदस्थ किया है।नई SDM की नियुक्ति के बाद क्षेत्र में यह उम्मीद जताई जा रही है कि अब प्रशासन और आमजन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा और लंबे समय से चल रहे विवादों पर विराम लगेगा।

महाराष्ट्र में नए ऑटो रिक्शा परमिट फिलहाल बंद, परिवहन मंत्री ने बताई तीन बड़ी वजहें

मुंबई महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में नए ऑटो रिक्शा परमिट जारी करने की प्रक्रिया को फिलहाल रोक दिया है. परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक ने इस फैसले की जानकारी देते हुए कहा कि राज्य में पहले से ही बहुत बड़ी संख्या में ऑटो परमिट जारी हो चुके हैं, जिससे शहरों में ट्रैफिक जाम और प्रदूषण की समस्या गंभीर रूप से बढ़ गई है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, महाराष्ट्र में अब तक करीब 14 लाख ऑटो रिक्शा परमिट जारी किए जा चुके हैं. इनकी अधिकता के कारण मुंबई, पुणे, नागपुर जैसे बड़े शहरों में यातायात का बोझ बढ़ गया है. सड़कों पर भीड़-भाड़ से वाहनों की गति कम हो रही है, ईंधन की खपत बढ़ रही है और  प्रदूषण की समस्या भी गंभीर होती जा रही है. मौजूदा ऑटो परमिट धारकों ने भी सरकार से शिकायत की थी कि नए परमिट जारी होने से रिक्शा चालकों में प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है और उन्हें पर्याप्त सवारी नहीं मिल पा रही हैं. जिससे आय पर भी बुरा असर पड़ रहा है. सरकार ने इन्हीं शिकायतों को ध्यान में रखते हुए ये महत्वपूर्ण कदम उठाया है. महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में नए ऑटो रिक्शा परमिट जारी करने पर फिलहाल पूरी तरह रोक लगा दी है. परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक ने विधानसभा के बाहर ये घोषणा करते हुए बताया कि ट्रैफिक जाम, बढ़ता प्रदूषण और अवैध परमिट धारकों की शिकायतों के बाद ये कड़ा कदम उठाया गया है. इसके अलावा जांच में ये भी सामने आया है कि कुछ मामलों में अवैध बांग्लादेशी नागरिकों को भी ऑटो परमिट मिल गए थे. इस मामले की भी जांच की जा रही है और नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी. ऑटो रिक्शा की अधिकता के कारण मुंबई, पुणे, नागपुर जैसे बड़े शहरों में यातायात का बोझ बढ़ गया है. सड़कों पर भीड़-भाड़ से वाहनों की गति कम हो रही है, ईंधन की खपत बढ़ रही है और  प्रदूषण की समस्या भी गंभीर होती जा रही है. सरकार ने बताया कि केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद राज्य में नए ऑटो परमिट जारी करने की प्रक्रिया को फिलहाल रोक दिया गया है.

असम में सपा की एंट्री? विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी में अखिलेश यादव

लखनऊ लोकसभा चुनाव 2024 में जबरदस्‍त सफलता हासिल करने के बाद समाजवादी पार्टी ने राष्‍ट्रीय पार्टी का दर्जा पाने के लक्ष्‍य पर नजर गड़ा दी है। इस रणनीति के तहत पार्टी पहली बार असम विधानसभा चुनाव में हिस्‍सा लेने की योजना बना रही है। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है सपा पांच से 10 सीटों पर अपने उम्‍मीदवार उतार सकती है। जल्‍द ही इसका आधिकारिक ऐलान किया जाएगा। असम में 2026 में विधानसभा चुनाव होने हैं। बताया जा रहा है कि सपा असम के मुस्लिम बहुल इलाकों में अपने प्रत्‍याशी उतारेगी। सपा अध्‍यक्ष अखिलेश यादव भी वहां चुनाव प्रचार करने जा सकते हैं। महाराष्‍ट्र में दो और गुजरात में 1 सपा विधायक यूपी के बाहर की बात करें तो सपा के महाराष्‍ट्र में दो विधायक और गुजरात में एक विधायक हैं। यह राष्‍टीय पार्टी के मानक से काफी कम है। दरअसल, राष्‍ट्रीय पार्टी का दर्जा पाने के लिए लोकसभा या विधानसभा चुनावों में न्‍यूनतम चार राज्‍यों में कुल वैध वोटों का कम से कम 6 प्रतिशत होना जरूरी है। साथ ही लोकसभा में कम से कम चार सीटें होना चाहिए या लोकसभा चुनावों में कम से कम तीन अलग राज्‍यों से कुल सीटों का 2 प्रतिशत यानी 11 सीटें जीती हों। देखा जाए तो सपा के पास लोकसभा में इससे कहीं ज्‍यादा सीटें हैं पर वह एक ही राज्‍य उत्‍तर प्रदेश में है। इसलिए वह राष्‍ट्रीय पार्टी के मानकों को पूरा नहीं करती। यूपी में सपा के 37 सांसद गौरतलब है कि 2024 में सपा ने लोकसभा चुनावों में ऐतिहासिक प्रदर्शन किया था। सीटों के लिहाज से सपा बीजेपी और कांग्रेस के बाद देश की तीसरी सबसे बड़ी पार्टी है। उसके पास 37 सांसद हैं। सपा ने बीजेपी के गढ़ माने जाने वाली कई सीटों पर अपना परचम लहराया था। इसमें अयोध्‍या उल्‍लेखनीय है। असम में इसी साल होने हैं विधानसभा चुनाव राष्‍ट्रीय पार्टी का दर्जा प्राप्‍त करने के लिए समाजवादी पार्टी की नजर असम विधानसभा चुनावों पर है। असम में इसी साल तक चुनाव होने हैं। सपा अपने परंपरागत मुस्लिम वोटों पर नजर गड़ाए हुए हैं। इसी रणनीति के तहत सपा असम के मुस्लिम बहुल इलाकों में ही प्रत्‍याशी खड़ा करने की योजना बनाई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सपा 5 से 10 सीटों पर अपने उम्‍मीदवार खड़े कर सकती है।

समुद्र में भारत की गुप्त ढाल: पनडुब्बियों का नेटवर्क, चीन-पाकिस्तान बेबस

नई दिल्ली भारत ने अपने दुश्मनों से निपटने के लिए समुद्र के भीतर पनुडुब्बियों का अभेद्य किला बना लिया है। यह किला इतना ताकतवर है यह अरब सागर से लेकर हिंद महासागर तक पाकिस्तान और चीन की चुनौतियों से पार पाने में बेहद कारगर और मारक साबित होगा। भारत के इस किले में न्यूक्लियर पॉवर्ड समेत हर तरह की पनडुब्बियां हैं, जो दुश्मन की नींद उड़ाने के लिए काफी हैं। भारत ने अपने दोनों तरफ के समुद्र में पनडुब्बियों का जाल बिछा रखा है। भारत ने परमाणु ऊर्जा से चलने वाली हमलावर स्वदेशी पनडुब्बियां बनाने के लिए भी तेजी से कदम बढ़ा दिए हैं, मगर उसके नौसेना के बेड़े में शामिल होने में अभी एक दशक लग सकता है। भारत ने अपने पश्चिमी और पूर्वी तट पर समंदर के पास पनडुब्बियों का जाल बिछा रखा है, जिससे भारत के चीन और पाकिस्तान जैसे दुश्मन अपनी हद पार करने से पहले सौ बार सोचेंगे। इसमें हर तरह की पनडुब्बियां शामिल हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, भारतीय नौसेना के बेड़े में करीब 20-21 मारक पनडुब्बियां हैं। इनमें से 17 तो डीजल पॉवर्ड अटैक पनडुब्बियां हैं। इसके अलावा, कम से कम 2 न्यूक्लियर पॉवर्ड बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी हैं। इसके अलावा, एक पनडुब्बी रूस से लीज पर ले रखी है। वहीं, एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत अपनी तीसरी स्वदेशी परमाणु-संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी (एसएसबीएन) आईएनएस अरिदमन (S-4) को अप्रैल या मई तक सेवा में शामिल किए जाने की उम्मीद है। पनडुब्बी वर्तमान में समुद्री परीक्षणों के अंतिम चरण में है और आने वाले महीनों में सेवा में शामिल होने की संभावना है। आईएनएस अरिदमन के शामिल होने के साथ ही भारत के पास सामरिक बल कमान (एसएफसी) के तहत पहली बार तीन परिचालन एसएसबीएन हो जाएंगे। NTI पर छपी एक रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय नौसेना की पनडुब्बियां पश्चिमी तट मुंबई और पूर्वी तट पर विशाखापत्तनम के पास समंदर में तैनात हैं। भारत ने हाल ही में दो पनडुब्बी अड्डे बनाए हैं। पहला मुंबई से 500 किलोमीटर दक्षिण में स्थित कारवार है। दूसरा, आईएनएस वर्षा नामक एक गुप्त नौसैनिक अड्डा है, जो चीन के हालिया उन्नयन के जवाब में भारत की नौसैनिक परमाणु क्षमताओं को बढ़ाने की एक बड़ी परियोजना का हिस्सा है। यह अड्डा पूर्वी तट पर काकीनाडा के पास स्थित है और इसमें पनडुब्बियों के लिए भूमिगत ठिकाने होंगे। फरवरी, 2015 में भारत सरकार ने स्वदेशी 6 न्यूक्लियर पॉवर्ड अटैक सबमरींस को अपने जंगी बेड़े में शामिल करने की परियोजना को मंजूरी दी थी। ये पनडुब्बियां विशाखापत्तनम के शिप बिल्डिंग सेंटर में बननी हैं। भारत के पश्चिमी तट पर अरब सागर है, जिसकी सीमा पाकिस्तान को छूती है। वहीं, पूर्वी तट के पास बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर है, जहां चीन के जासूसी जहाज अक्सर मंडराते रहते हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत के लिए न्यूक्लियर पॉवर्ड अटैक क्लास की पनडुब्बी की स्वदेशी क्षमता हासिल करना अभी भी एक दशक दूर का लक्ष्य है। माना जा रहा है कि इस तरह की पहली पनडुब्बी 2036 तक ही तैयार हो पाएगी। भारत के पास पहले से ही अरिहंत श्रेणी की परमाणु ऊर्जा से चलने वाली और परमाणु हथियारों से लैस पनडुब्बियां (एसएसबीएन) मौजूद हैं।

अग्निवीर योजना में बड़ा फैसला: भर्ती प्रक्रिया में बदलाव से नए युवाओं के लिए खुले दरवाजे

ग्वालियर भारतीय सेना में शामिल होकर देश की सेवा का सपना देखने वाले युवाओं के लिए बड़ी राहत की खबर है। रक्षा मंत्रालय और सेना भर्ती बोर्ड ने अग्निवीर भर्ती प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। फौजी बनने की हसरत रखने वाले युवाओं की आयु सीमा एक साल बढ़ा दी गई है। अभी तक अग्निवीर बनने की अधिकतम आयु सीमा 21 वर्ष थी। भर्ती में एक साल की बढ़ोतरी होने से हजारों युवाओं को फौजी की वर्दी पहनने का मौका मिलेगा। सेना भर्ती बोर्ड के अनुसार इस फैसले से युवाओं में अग्निवीर बनने का जुनून और बढ़ा है। पिछले 15 दिनों में 13,499 आवेदन प्राप्त हुए है, जिनमें मुरैना और भिंड के युवाओं की संख्या सबसे अधिक है। सेना भर्ती बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि फौजी बनने का जज्बा युवाओं में लगातार बढ़ रहा है। पिछली भर्ती में करीब 1700 युवाओं ने सेना जॉइन की थी। इस बार आवेदनों की संख्या देखकर लग रहा है कि पिछला आंकड़ा टूट सकता है। 13 फरवरी से अग्निवीर भर्ती के लिए आवेदन लिए जा रहे है। भिंड-मुरैना के युवा आगे… सबसे ज्यादा 7271 आवेदन भिंड और मुरैना के युवाओं के हैं। बोर्ड 1 अप्रैल तक आवेदन स्वीकार करेगा, इसलिए संख्या और बढ़ने की संभावना है। उम्र बनी थी रोड़ा, अब मौका अग्निवीर भर्ती प्रक्रिया में आवेदकों की अधिकतम आयु सीमा अब 22 वर्ष कर दी गई है। पिछली बार उम्र सीमा की वजह से जो अभ्यर्थी भर्ती से बाहर हो गए थे. उनके लिए यह बड़ा मौका है। उम्र में रियायत देकर सेना ने हजारों युवाओं के लिए रास्ता खोल दिया है। जिस तेजी से आवेदन आ रहे हैं. उससे उम्मीद है कि इस बार आवेदकों की संख्या पिछले आंकड़ों को पीछे छोड़ देगी। – पंकज कुमार, कर्नल, सेना भर्ती बोर्ड, ग्वालियर

होली उत्सव के बाद यात्रा और भी मुश्किल, जबलपुर से दिल्ली, इंदौर, जयपुर और अहमदाबाद ट्रेनें भर गईं

जबलपुर होली पर घर पहुंचे लोगों की कार्यस्थल की ओर वापसी का दौर जारी है। त्योहार के बाद रविवार को सप्ताहांत पर जबलपुर से जाने वाली लगभग सभी प्रमुख ट्रेनें फुल रही। दिल्ली, इंदौर, जयपुर, अहमदाबाद जैसे शहरों के लिए जाने वाली ट्रेनों में अभी पांच दिनों तक कन्फर्म टिकिट उपलब्ध नहीं है। सबसे ज्यादा भार दिल्ली और इंदौर जाने वाली ट्रेन पर है। प्रमुख ट्रेनों की तत्काल टिकिट में भी लंबी प्रतीक्षा सूची बन रही है। यात्रियों की सुविधा के लिए पश्चिम मध्य रेल ने दिल्ली, दानापुर, कोटा, अयोध्या के लिए स्पेशल ट्रेन चलाई है। इन ट्रेनों में स्लीपर श्रेणी की टिकिट बुक हो चुकी है। वातानुकूलित श्रेणी की कुछ टिकिट ही खाली है। वहीं, उत्तर भारत से महाराष्ट्र और दक्षिण भारत के बीच चलने वाली ट्रेनें यात्रियों से खचाखच भरी हुई है।   मुंबई, पुणे, हैदराबाद, बेंगलुरू के लिए एक सप्ताह तक नियमित ट्रेनों में सीट उपलब्ध नहीं है। ट्रेन में कन्फर्म टिकिट नहीं मिलने पर पुणे, इंदौर, हैदराबाद, अहमदाबाद के लिए यात्री बसों का सहारा ले रहे है। यात्रियों को राहत देने रेलवे लंबी दूरी की स्पेशल ट्रेनों के फेरे बढ़ाने की भी तैयारी कर रहा है। सुरक्षा और सतर्कता बढ़ाई, लगातार निगरानी त्योहार के बाद घर से वापसी के बीच रविवार को आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में यात्रा जबलपुर स्टेशन पहुंचे। शहर से चलने वाली लंबी दूरी की ट्रेनों की सवारी के चलते मुख्य स्टेशन पर यात्रियों का दबाव रहा। भीड़ को देखते हुए रेल सुरक्षा बल और शासकीय रेल पुलिस ने सुरक्षा बढ़ाई। आरपीएफ के साथ ही होमगार्ड के जवान स्टेशन के प्रवेश द्वार पर तैनात रहे। यात्रियों के सामान की जांच और ट्रेन के प्रस्थान करने के एक घंटे पूर्व यात्रियों को प्रवेश दिया गया। रेल प्रशासन भी सतर्क रहा। ट्रेन के समय से कई घंटे पहले पहुंचने वाले यात्रियों को होल्डिंग एरिया में ठहराया गया। स्पेशल ट्रेनों की स्थिति     सोमवार को जाने वाली जबलपुर-निजामुद्दीन (01701) ट्रेन के स्लीपर में वेटिंग। सेकेंड एसी में आरएसी। थर्ड एसी में कुछ सीटें खाली।     सोमवार को चलने वाली दानापुर-सोगरिया (09822) ट्रेन के स्लीपर, थर्ड एसी इकोनोमी एवं सेकेंड एसी लगभग फुल।     मंगलवार को जाने वाली जबलपुर-अयोध्या (01705) ट्रेन के स्लीपर और सेकेंड एसी में वेटिंग। थर्ड एसी में कन्फर्म सीट उपलब्ध है। शहर से चलने वाली ट्रेनों     हजरत निजामुद्दीन सुपरफास्ट, श्रीधाम और महाकोशल एक्सप्रेस में दिल्ली के लिए एक सप्ताह तक वेटिंग।     जबलपुर-वेरावल सोमनाथ एक्सप्रेस में अहमदाबाद के लिए एक सप्ताह तक किसी श्रेणी में कन्फर्म टिकिट नहीं है।     ओवरनाइट और नर्मदा एक्सप्रेस में इंदौर के लिए एक सप्ताह तक प्रत्येक श्रेणी के टिकिट प्रतीक्षा सूची में है।     जबलपुर-अजमेर दयोदय एक्सप्रेस में जयपुर के लिए कन्फर्म टिकिट नहीं है।     जबलपुर-लखनऊ चित्रकूट एक्सप्रेस में लखनऊ के लिए अगले दिन तक टिकिट प्रतीक्षा सूची में है। साप्ताहिक ट्रेनों के हाल     जबलपुर-श्रीमाता वैष्णोदेवी एक्सप्रेस में स्लीपर में वेटिंग सौ और थर्ड एसी में 50 पार पहुंच गई है।     रविवार को जबलपुर-पुणे स्पेशल फुल थी। उसके अगले फेरे में भी समस्त श्रेणियों का टिकिट अभी से प्रतीक्षा सूची पर है।

रतलाम जिले में बच्चों को खसरा, अलर्ट पर स्वास्थ्य विभाग की टीम

रतलाम रतलाम जिले के बाजना विकासखंड में मीजल्स (खसरा) के केस सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। शनिवार को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संध्या बेलसरे ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा रात करीब नौ बजे तक किया। इस दौरान बताया गया कि 10 बच्चों में मीजल्स के लक्षण मिले। इनकी हालत अब नियंत्रण में है। होली पर बाहर से आए कुछ बच्चे वापस पलायन भी कर गए। स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा क्षेत्र में भ्रमण कर उपचार एवं आवश्यक स्वास्थ्य सेवा दे रही है। मामले में संबंधित एएनएम पर कार्रवाई के लिए प्रस्ताव बनाया गया है। शुक्रवार को डब्ल्यूएचओ के सर्विलांस मेडिकल ऑफिसर डॉ. रितेश बजाज, जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. वर्षा कुरील, बीएमओ बाजना डॉ. जितेंद्र जायसवाल व स्वास्थ्य विभाग का अमला प्रभावितों के पास पहुंचा था।   बाजना ब्लाक के ग्राम बोरपाड़ा और ग्राम रूपाखेड़ा में 9 माह से 5 वर्ष तक के बच्चों को एमआर वैक्सीनेशन करने के साथ ही विटामिन-ए का घोल पिलाया जा रहा है। निर्धारित प्रोटोकाल के अनुसार नोटिफिकेशन जनरेट करने, घर-घर जाकर स्वास्थ्य शिक्षा देने तथा अतिरिक्त टीकाकरण सत्र आयोजित करने की कार्ययोजना तैयार कर ली गई है। 10 से 14 दिन तक दिखाई देते हैं लक्षण जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. वर्षा कुरील ने बताया कि खसरा (मीजल्स) एक संक्रामक वायरल बीमारी है, जिसके प्रमुख लक्षण तेज बुखार, खांसी, बहती नाक, लाल और पानी भरी आंखें तथा पूरे शरीर पर लाल-भूरे रंग के दाने हैं। वायरस के संपर्क में आने के 10 से 14 दिन बाद इसके लक्षण दिखाई देते हैं और दानों से पहले मुंह के अंदर छोटे सफेद धब्बे (कोप्लिक स्पाट्स) भी नजर आ सकते हैं।  

BSNL का नेटवर्क अब और तेज़: 2002 यूपी गांवों में बिछ रही ऑप्टिकल फाइबर केबल

गोंडा उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं देने के लिए गोंडा व बलरामपुर में बीएसएनएल दो अरब रुपये खर्च कर अपना नेटवर्क सुधार रहा है। दोनों जिलों के 2002 गांवों में बीएसएनएल गांव-गांव ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाई जा रही है। इसके बाद ब्लाक, स्कूल अस्पताल व थाने को फाइबर कनेक्शन देकर उन्हें तेज रफ्तार के इंटरनेट सेवाएं दी जाएगी। यही नहीं, करीब 300 रुपये प्रति माह में ग्रामीण उपभोक्ता भी कनेक्शन लेकर तीव्र गति वाले इंटरनेट का लाभ ले सकेंगे। सरकार भले ही डिजिटलाइज्ड व आनलाइन सेवाएं देने के लिए गंभीर है लेकिन ऑनलाइन आवेदन फॉर्म से लेकर बैकिंग,गेहूं बिक्री रजिस्ट्रेशन समेत अन्य सेवाएं डिजिटल होने के बाद उनका पूरा लाभ ग्रामीणों को नहीं मिल पा रहा है। कारण, गांवों में इंटरनेट की खराब हालत के चलते हमेशा सर्वर डाउन रहता है, जिससे लोगों को बार-बार मुख्यालय दौड़ना पड़ रहा है। यही नहीं आए दिन सर्वर डाउन रहने से बच्चे,महिलाएं व बुजुर्गों को भी परेशानी हो रही है। कोई परीक्षा फॉर्म नही भर पा रहा है तो कोई पेंशन के लिए मुख्यालय तक दौड़ रहा है। इन्हें स्कूल में नामांकन परीक्षा व फॉर्म भरने से लेकर अन्य जरूरी कार्य भी निजी साइबर कैफे से कराना पड़ रहा है। सरकारी कार्यालयों में आनलाइन कामकाज निपटाने के लिए कार्मिकों को एनआईसी या फिर साइबर कैफे का सहारा लेना पड़ता है, जिसमें अधिक धन व श्रम अधिक व्यय होता है। साथ ही गोपनीयता भंग होने का भी डर रहता है। इन समस्याओं को देखते हुए सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों की इंटरनेट सेवाएं दुरुस्त करने की तैयारी शुरू कर दी है। सरकारी दूर संचार कंपनी बीएसएनएल ने गोंडा-बलरामपुर के 2002 गांवों में बीएसएनएल गांव-गांव ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछा रहा है। दो अरब रुपये की इस महत्वाकांक्षी परियोजना को जिम्मा उसने रेलवे विकास निगम को दिया है, जो इस साल 31 मई तक पूरा कर लिया जाना है। ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछने के बाद ब्लाक, स्कूल अस्पताल व थाने को फाइबर कनेक्शन दिया जाएगा, जिससे उन्हें तेज इंटरनेट की सेवाएं मिलेंगी। यही नहीं करीब 300 रुपये प्रति माह में ग्रामीण उपभोक्ता भी कनेक्शन लेकर इसका लाभ सकेंगे। दीपेंद्र गुप्ता, जिला प्रबंधक भारत संचार निगम लिमिटेड- ओएफसी केबल मई तक पड़ जाएगी, जिसके बाद जून से दोनाें जिलाें के सभी गांवों में तीव्र गति वाला इंटरनेट चलने लगेगा।

ग्राहकों के लिए राहत: RBI का बड़ा फैसला, साइबर फ्रॉड में सुरक्षा की गारंटी

मुंबई डिजिटल ट्रांजेक्शन के दौर में ऑनलाइन ठगी का शिकार होने वाले करोड़ों भारतीयों के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) राहत की एक बड़ी योजना लेकर आया है। आरबीआई ने डिजिटल लेनदेन में ग्राहकों की सुरक्षा और जवाबदेही से जुड़े नियमों में बड़े बदलाव का एक प्रारूप (Draft) पेश किया है। इस नई नीति का मुख्य उद्देश्य छोटे मूल्य की धोखाधड़ी (Small Value Frauds) के लिए ग्राहकों को सीधा मुआवजा दिलाना और बैंकों की जिम्मेदारी तय करना है। प्रस्तावित समय-सारणी के अनुसार, जनता 6 अप्रैल, 2026 तक इस ड्राफ्ट पर अपने सुझाव दे सकती है और ये नियम 1 जुलाई, 2026 से पूरे देश में प्रभावी हो सकते हैं। अब बैंकों को साबित करनी होगी ग्राहक की गलती नए नियमों के तहत, डिजिटल धोखाधड़ी के मामलों में ‘सबूत’ जुटाने का पूरा बोझ अब बैंकों के कंधों पर होगा।     बैंक की जिम्मेदारी: बैंक को यह सिद्ध करना होगा कि धोखाधड़ी ग्राहक की लापरवाही से हुई है, न कि बैंकिंग सिस्टम की किसी खामी से।     व्यापक परिभाषा: ‘अधिकृत इलेक्ट्रॉनिक लेनदेन’ के दायरे को बढ़ाकर अब इसमें जबरदस्ती (Coercion) या धोखे से कराए गए भुगतान को भी शामिल किया गया है। इन स्थितियों में ग्राहक की होगी ‘जीरो लायबिलिटी’ (Zero Liability):     बैंक की चूक: यदि फ्रॉड बैंक की किसी तकनीकी कमी या लापरवाही के कारण हुआ हो।     थर्ड-पार्टी ब्रीच: यदि किसी तीसरे पक्ष की गलती से नुकसान हुआ है और ग्राहक 5 दिनों के भीतर इसकी सूचना बैंक को दे देता है। छोटे फ्रॉड के लिए मुआवजे का नया मॉडल RBI ने पहली बार ₹50,000 तक के डिजिटल फ्रॉड के लिए एक विशेष मुआवजे के ढांचे का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत पीड़ित को उसके शुद्ध नुकसान का 85% या अधिकतम ₹25,000 (जो भी कम हो) वापस मिल सकेगा। मुआवजे की शर्तें:     यह लाभ एक व्यक्ति को जीवन में केवल एक बार ही मिल सकेगा।     धोखाधड़ी की रिपोर्ट 5 दिनों के भीतर बैंक और साइबर क्राइम पोर्टल दोनों पर दर्ज करना अनिवार्य होगा। अलर्ट और रिपोर्टिंग के लिए सख्त निर्देश सुरक्षा को और पुख्ता करने के लिए RBI ने बैंकों के लिए नए रिपोर्टिंग मानक तय किए हैं:     अनिवार्य SMS अलर्ट: ₹500 से अधिक के हर डिजिटल लेनदेन पर बैंक को तुरंत SMS अलर्ट भेजना होगा।     24×7 रिपोर्टिंग चैनल: बैंकों को डिजिटल फ्रॉड की शिकायत के लिए चौबीसों घंटे चालू रहने वाली हेल्पलाइन या पोर्टल की सुविधा देनी होगी। RBI का यह कदम न केवल ग्राहकों का डिजिटल बैंकिंग पर भरोसा बढ़ाएगा, बल्कि बैंकों को अपने सुरक्षा तंत्र को और अधिक मजबूत करने के लिए भी प्रेरित करेगा।

एमपी में आदिवासी महोत्सव का बड़ा मंच, Amit Shah करेंगे कई योजनाओं का ऐलान

भोपाल प्रदेश का पहला बैगा महोत्सव शहडोल में नहीं, बल्कि बालाघाट में होगा। जिले में स्थान के चयन की प्रक्रिया लगभग पूरी कर ली है। यह जिला मुख्यालय या आसपास के क्षेत्रों में मार्च के अंत या अप्रैल के पहले सप्ताह में होगा। इसमें केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह शामिल होंगे। आदिवासी समाज से आने वाले अन्य केंद्रीय व राज्य के मंत्री व प्रमुख जन भी हिस्सा लेंगे। प्रदेश में नक्सलियों के खात्मे के बाद सरकार पहला बड़ा आयोजन करने जा रही है, इसका मकसद आदिवासी समाज को विकास की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए अतिरिक्त प्रयास करना और नक्सली गतिविधियों के कारण विकास से पिछड़े बालाघाट, मंडला जैसे जिलों पर अतिरिक्त ध्यान देना है। गृह मंत्री ने कार्य योजना को सराहा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की पहल पर उक्त महोत्सव की कार्य योजना बनाई गई, इसे केंद्रीय गृहमंत्री के सामने रखा गया, उन्होंने भी इसे सराहा है साथ ही उक्त महोत्सव में सहभागी बनने की इच्छा भी जताई है। बता दें, केंद्र ने नक्सलियों के खात्मे के लिए राज्य को मार्च-अप्रैल तक की गाइडलाइन दी थी लेकिन उसके तीन महीने पहले ही मप्र पुलिस और एजेंसियों ने मिलकर चिह्नित नक्सलियों का खात्मा कर दिया। कई को मार गिराया तो कुछ ने सरकार के समक्ष समर्पण किए थे। नक्सल से प्रभावित क्षेत्र को मिलेंगी सौगातें बैगा महोत्सव में आदिवासी समाज के उन लोगों को बड़ी सौगात मिल सकती है जो लंबे समय तक नक्सलियों के चंगुल में रहे। सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री के निर्देश पर ऐसे क्षेत्रों की जरुरतों का अलग से रोडमैप तैयार कर लिया है। इसका मकसद आदिवासी समाज को विकास की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए अतिरिक्त प्रयास करना और नक्सली गतिविधियों के कारण विकास से पिछड़े बालाघाट, मंडला जैसे जिलों पर अतिरिक्त ध्यान देना है। हालांकि अभी भी सरकार ने नक्सलियों के विरुद्ध अभियान को बंद नहीं किया, बल्कि यह आगे भी जारी रहेगा। क्षेत्र में सख्ती के साथ सर्च अभियान जारी है।

MP की 1.28 करोड़ महिलाओं को खुशखबरी, जल्द जारी होगी लाडली बहना योजना की 34वीं किस्त

ग्वालियर  मध्य प्रदेश की महत्वाकांक्षी लाडली बहना योजना की पात्र महिलाओं के लिए बड़ी खबर है। लाडली बहना योजना की 34वीं किस्त जल्द ही जारी होने वाली है। इस बार प्रदेश की करीब 1.28 करोड़ महिलाओं के खातों में सीधे 1500-1500 रुपए की राशि भेजी जाएगी। मुख्यमंत्री Mohan Yadav सिंगल क्लिक के माध्यम से यह राशि पात्र महिलाओं के खातों में ट्रांसफर करेंगे। 1.28 करोड़ को मिलेगा योजना का लाभ वर्तमान में 1.28 करोड़़ लाडली बहनें इस योजना (Ladli Behna Yojana) का लाभ ले रही हैं। इन महिलाओं के खातों में प्रतिमाह 1500-1500 रुपए की राशि ट्रांसफर की जाती है। इस सरकारी आंकड़े के मुताबिक मार्च महीने में आने वाली लाडली बहना योजना की 34वीं किस्त के कुल 1920 रुपए मोहन सरकार पात्र महिलाओं के खातों में ट्रांसफर करेगी। यह पैसा सीधे DBT (Direct Benefit Transfer) के माध्यम से महिलाओं के बैंक में पहुंचाया जाएगा। प्रदेश की बीजेपी सरकार की महत्वाकांक्षी योजना बता दें कि लाडली बहना योजना (Ladli Behna Yojana) प्रदेश की बीजेपी सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक है। जो प्रदेश की राजनीति में एक बड़ी गेम चेंजर योजना साबित हुई है। इस योजना का उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना और परिवार की आर्थिक स्थिति को बेहतर करना है। शुरुआत में इस योजना की पात्र महिलाओं को 1000 रुपए की राशि दी जाती थी। जिसे बढ़ाकर पहले 1250 रुपए किया गया और अब यह राशि 1500 तक बढ़ाई जा चुकी है। सरकार का दावा, महिलाएं हुईं आत्मनिर्भर, मिला सम्मान मध्य प्रदेश की मोहन सरकार का दावा है कि इस योजना का शुरू होने से प्रदेश की करोड़ों महिलाओं को बड़ा सहारा मिला है। वे न केवल आर्थिक रूप से मजबूत हुई हैं, बल्कि आत्मनिर्भर बनी हैं, परिवार में उनके आर्थिक योगदान से उनका सम्मान बढ़ा है और वे अब निर्णायक भूमिका में आ गई हैं। घर खर्च के साथ ही वे बच्चों की पढ़ाई और अपनी छोटी-मोटी जरूरतें खुद पूरी कर रही हैं।

2041 तक नया नोएडा: अबू धाबी स्टाइल स्मार्ट सिटी में 3000 फैक्ट्रियां और 6 लाख लोग बसेंगे

नोएडा उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर और बुलंदशहर के बीच बसने वाला ‘नया नोएडा’ (Naya Noida Master Plan 2041) (दादरी-नोएडा-गाजियाबाद विशेष निवेश क्षेत्र – DNGIR) भविष्य का सबसे आधुनिक औद्योगिक शहर बनने जा रहा है। इसे संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के अबू धाबी मॉडल पर विकसित किया जा रहा है। औद्योगिक हब… 3 हजार फैक्ट्रियां और 21 हजार हेक्टेयर क्षेत्र नया नोएडा करीब 21,000 हेक्टेयर के विशाल क्षेत्र में फैला होगा। मास्टर प्लान 2041 के अनुसार, इसका सबसे बड़ा हिस्सा यानी 8,811 हेक्टेयर क्षेत्र केवल उद्योगों के लिए आरक्षित किया गया है। यहां लगभग 3,000 छोटी-बड़ी औद्योगिक इकाइयां लगाई जाएंगी, जिससे यह क्षेत्र निवेश का ग्लोबल हब बनेगा।  इस नए शहर की अनुमानित आबादी करीब 6 लाख होगी। खास बात यह है कि इसमें से 3.5 लाख लोग माइग्रेंट (प्रवासी) होंगे, जो यहाँ के उद्योगों में काम करने के लिए आएंगे। आवासीय जरूरतों को पूरा करने के लिए 2,000 हेक्टेयर से अधिक जमीन का उपयोग किया जाएगा। ईडब्ल्यूएस से लेकर एचआईजी फ्लैट्स तक यहां हर आय वर्ग के लिए घर उपलब्ध होंगे। मास्टर प्लान में चार कैटेगरी और तीन टाइप के मकानों का प्रस्ताव है…     EWS (आर्थिक रूप से कमजोर): 18.1 हेक्टेयर क्षेत्र।     LIG (निम्न आय वर्ग): 40.8 हेक्टेयर क्षेत्र।     MIG (मध्यम आय वर्ग): 29.9 हेक्टेयर क्षेत्र।     HIG (उच्च आय वर्ग): 1.8 हेक्टेयर क्षेत्र। पानी और पर्यावरण: गंगाजल और झीलों का संगम शहर की प्यास बुझाने के लिए 300 MLD पानी की व्यवस्था की जाएगी, जिसमें गंगाजल और भूजल का मिश्रण होगा। पर्यावरण संरक्षण के लिए मास्टर प्लान में खास प्रावधान हैं…     झीलों और नहरों का निर्माण: 58.96 हेक्टेयर में लेक और 91.75 हेक्टेयर में कैनाल बनाई जाएंगी।     जल संचयन: गिरते भूजल स्तर को सुधारने के लिए वेटलैंड विकसित किए जाएंगे।     वाटर सप्लाई: कुल पानी में से 212 MLD उद्योगों को और 85 MLD घरेलू उपयोग के लिए दिया जाएगा। 80 गांवों की जमीन पर ‘लैंड पूल’ मॉडल नया नोएडा को बुलंदशहर और दादरी के 80 गांवों की जमीन पर बसाया जा रहा है। यहां जमीन का अधिग्रहण ‘लैंड पूलिंग’ नीति के जरिए किया जाएगा, जिससे किसानों को भी शहर के विकास में भागीदार बनाया जा सके।

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