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सोशल मीडिया पर ‘नए रेंट नियम 2026’ का दावा: क्या सच में बदल गई बेदखली की प्रक्रिया?

नई दिल्ली ‘नए रेंट नियम 2026’ वाला एक पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। ‘भारत का नया किराया कानून 2026’ के दावे के साथ शेयर किए गए ऐसे पोस्ट में किराएदारों और मकान मालिकों से संबंधित नियमों को लेकर कई बड़े सनसनीखेज बदलाव के दावे किए गए हैं। वायरल पोस्ट के अनुसार किराया कानूनों में सरकार ने बहुत ज्यादा परिवर्तन कर दिया है। इसमें किराया, एडवांस और मकान खाली कराने के लिए नई वैद्यानिक प्रक्रिया में संशोधन की बात कही गई है। नए रेंट नियम 2026 के दावे से कंफ्यूजन ऑनलाइन तेजी से फैलने की वजह से ऐसे पोस्ट ने किराएदारों और मकान मालिकों में बहुत ही ज्यादा कंफ्यूजन पैदा कर दिया है। अलबत्ता,शेयर किए जा रहे तथ्यों में तकनीकी तौर पर कुछ सही हैं, लेकिन उनके पीछे की सच्चाई पूरी तरह से अलग है। ‘नए रेंट नियम 2026’ वाले पोस्ट में दावा     पहला तो वायरल पोस्ट के माध्यम से यह दावा किया जा रहा है कि नया किराया नियम इसी साल लागू हुआ है।     इसे इस तरह से बताने की कोशिश की गई है कि ये नियम एकसाथ पूरे देश में लागू हैं।     डिपॉजिट के तौर पर मकान मालिक दो महीने से ज्यादा का किराया नहीं ले सकता।     बिना कानूनी प्रक्रिया का पालन किए किराएदारों को नहीं निकाला जा सकता।     रेंट एग्रीमेंट डिजिटली स्टैंप्ड होना जरूरी है और 60 दिन के अंदर रजिस्ट्रेशन आवश्यक है।     12 महीने में सिर्फ एक बार किराया बढ़ सकता है, इसके लिए 90 दिनों की पूर्व सूचना जरूरी है।     मकान मालिक को प्रॉपर्टी में दाखिल होने से 24 घंटे पहले नोटिस देना होगा।     अगर 30 दिनों के भीतर जरूरी मरम्मत नहीं करवाए जाते हैं तो किराएदार उसे खुद ही करवा सकता है और किराए से उसमें लगा खर्च काट सकता है।     ताला बदलना, पानी/बिजली काटना या किराएदारों को धमकाना दंडनीय है।     कुछ रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि अगर किराया, संपत्ति को नुकसान या एग्रीमेंट को लेकर कोई विवाद होता है, तो इसका निपटारा किराया अदालत या ट्रिब्यूनल के द्वारा 60 दिन के अंदर किया जाएगा।   ‘रेंट नियम 2026’ जैसा कोई नियम नहीं बनाया गया है। अलबत्ता इनके कुछ प्रावधान मॉडल टेनेंसी एक्ट(MTA) 2021 में शामिल हैं।     केंद्रीय कैबिनेट से मंजूरी के बाद सरकार ने इसे एक गाइडलाइन नियमावली की तरह जारी किया था।     राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को इसके आधार पर अपने किराया नियम तैयार करने थे।     भारत में आवासीय और किराया संबंधी कानून राज्य सरकारों के अधीन आते हैं।     यानी किराया से संबंधित नियावली तैयार करने या उसमें संशोधन का अधिकार राज्य सरकारों के पास है। मॉडल टेनेंसी एक्ट पर केंद्र सरकार का स्टैंड     दिसंबर, 2021 में तत्कालीन आवास और शहरी मामलों के राज्यमंत्री कौशल किशोर ने एक सवाल के जवाब में लोकसभा में कहा था कि लैंड और कोलोनाइजेशन राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है।     उन्होंने केंद्र शासित प्रदेशों को लेकर भी ये बताया था कि उन्हें सलाह दी गई है कि वह या तो मॉडल टेनेंसी एक्ट के आधार पर नया कानून लागू करें या फिर अपने मौजूदा किराया नियावली में संशोधन करें। मॉडल टेनेंसी एक्ट को किन राज्यों ने अपनाया     राज्यसभा में पिछले साल अगस्त तक की दी गई जानकारी के अनुसार कुछ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने मॉडल टेनेंसी एक्ट के आधार पर नियम तैयार किए हैं।     असम, अरुणाचल प्रदेश जैसे राज्य और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, दादरा और नगर हवेली, दमन और दीव और लक्षद्वीप जैसे केंद्र शासित प्रदेश इनमें शामिल हैं।     केंद्र की ओर से यह भी कहा गया कि उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु जैसे राज्यों से कहा गया है कि वह मॉडल टेनेंसी एक्ट के ताजा स्वरूप के अनुरूप अपने किराया कानूनों में बदलाव करें। इन राज्यों ने इसके पुराने ड्राफ्ट के आधार पर इसे नोटिफाई कर लिया था। मॉडल टेनेंसी एक्ट को लेकर विवाद     रेंटल एग्रीमेंट के दौरान ‘आधार’ डिटेल उपलब्ध करवाने के प्रावधान पर सवाल उठाए गए हैं और इसे सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के विपरीत बताया जाता है।     इस कानून के तहत रेंट एग्रीमेंट के डिजिटल रजिस्ट्रेशन का यह कहकर विरोध होता है कि इससे किराएदार और मकान मालिक दोनों के निजी डेटा एक्सपोज होने का खतरा है।

गर्मी की जल्दी दस्तक: गाजियाबाद में प्रदूषण और बिजली कटौती से लोग बेहाल

गाजियाबाद मार्च का महीना अभी आधा भी नहीं बीता है, लेकिन शहर में मई जैसी गर्मी का एहसास होने लगा है। तेज धूप, बढ़ते प्रदूषण और लगातार हो रही बिजली कटौती ने लोगों की परेशानी और बढ़ा दी है। सोमवार को अधिकतम तापमान 34.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जबकि रात का तापमान भी करीब 19 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। गर्मी के बढ़ते असर के कारण अब तक बंद पड़े पंखे और एसी भी चलने लगे हैं। वहीं, प्रदूषण का स्तर भी चिंताजनक बना हुआ है। सोमवार को शहर का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 246 दर्ज किया गया जो खराब श्रेणी में आता है। मौसम विभाग के अनुसार फिलहाल तापमान में और बढ़ोतरी हो सकती है, हालांकि 15 मार्च के आसपास पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने की संभावना है, जिससे मौसम में कुछ राहत मिल सकती है। गर्मी और प्रदूषण से बढ़ीं स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ती गर्मी और खराब हवा की गुणवत्ता का असर लोगों के स्वास्थ्य पर भी पड़ने लगा है। दोपहर के समय बाजारों में भीड़ कम दिखाई दे रही है। धूल और धुएं के कारण लोगों को आंखों में जलन और गले में खराश की शिकायत हो रही है। फील्ड में काम करने वाले लोगों को डिहाइड्रेशन और थकान जल्दी महसूस हो रही है। वहीं, मॉर्निंग वॉक करने वालों को भी सांस लेने में भारीपन महसूस हो रहा है। मौसम में बदलाव की उम्मीद मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अगले दो-तीन दिनों तक गर्मी का असर बना रहेगा। हालांकि 15 मार्च के आसपास एक पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने की संभावना है, जिससे पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी और मैदानी क्षेत्रों में ठंडी हवाएं चल सकती हैं। इससे तापमान में कुछ गिरावट आ सकती है। खोड़ा में 17 घंटे बिजली गुल, लोग रहे परेशान गाजियाबाद के ट्रांस हिंडन क्षेत्र के खोड़ा इलाके में गंगाजल की समस्या के बाद अब बिजली संकट ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। रविवार को करीब 17 घंटे तक बिजली आपूर्ति बाधित रही, जिससे लाखों लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। स्थानीय लोगों ने सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट कर बिजली विभाग के प्रति नाराजगी जताई। रविवार सुबह करीब 11 बजे बिजली आपूर्ति अचानक बंद हो गई, जिसके बाद देर रात तक स्थिति सामान्य नहीं हो सकी। मामले में चीफ इंजीनियर पवन अग्रवाल ने कहा कि संबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट ली जाएगी और यह पता लगाया जाएगा कि इतनी देर तक बिजली आपूर्ति बाधित रहने की वजह क्या रही। कई इलाकों में बिजली ट्रिपिंग की समस्या गर्मी बढ़ने के साथ ही शहर के कई इलाकों में बिजली ट्रिपिंग और कटौती की समस्या भी बढ़ने लगी है। सोमवार को मानसरोवर पार्क, राज कंपाउंड, शंकर विहार, शनि विहार और हरपाल एन्क्लेव में एलटी लाइन में फॉल्ट के कारण करीब तीन घंटे तक बिजली आपूर्ति ठप रही। इसके अलावा सेन विहार, शांति नगर, बहरामपुर, अकबरपुर और बुद्ध विहार में करीब चार घंटे तक बिजली नहीं आने से लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। वहीं प्रताप विहार, राहुल विहार, चिपियाना बुजुर्ग, नंदग्राम, केला भट्टा, इस्लामनगर, दौलतपुर, भाटिया मोड़, पंचवटी कॉलोनी और पंचकूला कॉलोनी में भी दिनभर बिजली का आना-जाना लगा रहा। अधीक्षण अभियंता अनिल कुमार ने बताया कि जहां-जहां फॉल्ट की शिकायतें मिली हैं, वहां टीम भेजकर मरम्मत कराई जा रही है।

UPI में आया नया कमाल: फोन से दूर रहकर भी हो जाएगा पेमेंट

नई दिल्ली क्या आपके साथ भी ऐसा होता है कि कहीं पेमेंट करने के समय पर UPI ऐप में जाकर QR कोड स्कैन करने का ऑप्शन ढूंढना और फिर पेमेंट का पूरा प्रोसेस करना काफी लंबा काम हो जाता है? ऐसा उन लोगों के साथ खासतौर पर होता है, जो सुरक्षा के लिए UPI ऐप्स को फोन की होम स्क्रीन पर नहीं रखते। हालांकि अब आप चाहें, तो फोन को हिलाकर भी पेमेंट कर सकते हैं। इसके लिए आपको फोन को हाथ में पकड़कर उसी तरह हिलाना होगा, जिस तरह हम किसी को बाय करते हैं। इस फीचर का नाम Shake & Pay है और इसे PhonePe ऐप पर इस्तेमाल किया जा सकता है। क्या है Shake & Pay? जैसा कि नाम से पता चलता है इस फीचर की मदद से आप अपने फोन को शेक करके यानी कि हिला कर पेमेंट कर सकते हैं। यह फीचर उस झंझट को खत्म करता है, जिसमें आपको पहले पेमेंट ऐप को सर्च करना पड़ता है और फिर उसमें QR कोड स्कैन करने के ऑप्शन को तलाशना पड़ता है। कह सकते हैं कि यह UPI पेमेंट को और तेज बनाने का एक आसान सा तरीका है। कहां और कैसे काम करता है Shake & Pay फीचर अगर आप UPI पेमेंट्स के लिए Shake & Pay फीचर इस्तेमाल करना चाहते हैं, तो बता दें कि यह PhonePe ऐप पर उपलब्ध है। इसे ऑन करने के बाद जब आप PhonePe खोलकर फोन को शेक करेंगे, तो सीधा QR कोड स्कैनर खुल जाता है। इससे तुरंत कहीं भी पेमेंट करना आसान और तेज हो जाता है। गौर करने वाली बात है कि इस फीचर को इस्तेमाल करने के लिए आपको फोन को हाथ में पकड़कर तेजी से इस तरह हिलाना होगा जैसे कि आप किसी को बाय कर रहे हों। कैसे ऑन करें Shake & Pay फीचर PhonePe के Shake & Pay फीचर को इस्तेमाल करने के लिए जरूरी है कि आप Phonepe ऐप इस्तेमाल करते हों।     PhonePe ऐप की होम स्क्रीन पर ऊपर बाईं ओर मौजूद अपनी प्रोफाइल आइकन पर टैप करें।     इसके बाद नीचे की ओर स्क्रॉल करें और Shake & Scan को सर्च करें।     आपके QR कोड के ठीक नीचे मौजूद Shake & Scan के ऑप्शन को ऑन कर दें।     इसके बाद जब भी आप फोन को शेक करेंगे, तो आप सीधा QR कोड स्कैन के पेज पर पहुंच जाएंगे। ध्यान रखने वाली बात है कि सुरक्षा के लिहाज से Shake & Pay फीचर तभी काम करता है, जब आपके फोन में PhonePe ऐप खुला हो। बायोमेट्रिक फीचर के साथ करें इस्तेमाल अगर आप पेमेंट करने के तरीके को और तेज बनाना चाहते हैं, तो Shake & Pay फीचर के साथ बायोमेट्रिक फीचर का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। ऐसे में जब आप फोन को शेक करके QR कोड स्कैन कर लेंगे, तो आपको सिर्फ चेहरा दिखाकर या अंगूठा लगाकर पेमेंट को पूरा कर देना होगा। कहने का मतलब है कि न सिर्फ Phonepe पर QR कोड स्कैन करके के पेज पर तेजी से जाना संभव होगा बल्कि पेमेंट भी बायोमेट्रिक फीचर के चलते बिना पिन डाले ही पूरी की जा सकती है।

मैक्सिको के तट पर दिखीं ‘प्रलय की मछलियां’, कैमरे में कैद हुई हैरान कर देने वाली तस्वीरें

मैक्सिको बीच पर टहलना ही अपने आप में अनोखा अनुभव होता है। यहीं पर अगर कोइ दुर्लभ मछली दिख जाए तो दिन यादगार होना तय है। मैक्सिको के काबो सैन लुकास में बीच पर मोनिका पिटेंगर के साथ ऐसा ही हुआ है। उन्हें वो मछली दिखी है जो कई सालों में एक झलक दिखाती है। इस फिश को डूम्स डे फिश कहते हैं। डूम्स डे का मतलब ‘प्रलय का दिन’ होता है। मोनिका ने इसका वीडियो बनाकर अपना अनुभव साझा किया है। मोनिका वीडियो में बोलती दिख रही हैं कि मुझे अपनी आंखों पर विश्वास ही नहीं हुआ। मैंने ऐसा पहले कभी नहीं देखा था। फिक्शन मूवी वाला सीन था बिल्कुल। कुछ सेकंड बाद ही उन्हें दूसरी मछली भी दिखी तो वो नर्वस हो गईं। वो अजीब सी चमकती हुई आकृति थी इसलिए सभी परेशान हो रहे थे। पानी में वापस भेजा उनकी बहन को लगा कि ये मछली किसी दिक्कत में हैं। फिर उन्होंने मछली को धक्का देकर पानी में वापस भेजने की कोशिश शुरू की। तब कई और लोग भी आए और धक्का देने लगे। कितना अद्भुत मौका था जब मछलियां काफी देर बाद भी वापस नहीं आईं तो मोनिका और उनके परिवार ने इन फिश के बारे में पढ़ा और समझ आया ये तो अद्भुत मौका था। ये हर कोई नहीं अनुभव कर पाता है। 3000 फीट नीचे ये मछली 30 फीट तक लंबी होती है। ये पानी में 3000 फीट नीचे रहती हैं। इसलिए इन्हें अद्भुत माना जाता है। इनका असली नाम ओर फिश है। जापानी मान्यता इन्हें डूम्स डे फिश नाम जापान से मिला है। वहां माना जाता है कि ये समुद्र के देवता Ryūjin का संदेश देती हैं। ये बताती हैं कि सुनामी या भूकंप आने वाला है।

राज्यसभा की 26 सीटों पर नेताओं की एंट्री, शरद पवार-सिंघवी चुने गए; हरियाणा-बिहार में चुनाव से होगा फैसला

नई दिल्ली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) प्रमुख शरद पवार और केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले समेत 26 उम्मीदवार सोमवार (9 मार्च) को राज्यसभा के लिए निर्विरोध चुने गए। नाम वापसी की आखिरी तारीख बीत जाने के बाद, अब उच्च सदन की 11 सीटों के लिए 16 मार्च को मतदान होगा। बिहार में पांच, ओडिशा में चार और हरियाणा में दो सीटे हैं जहां चुनाव होगा। इन द्विवार्षिक चुनावों में बिहार के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे नीतीश कुमार और भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन के राज्यसभा के लिए चुने जाने की पूरी संभावना है। 10 राज्यों में खाली हुई 37 सीटों के लिए कुल 40 उम्मीदवारों ने अपना नामांकन दाखिल किया था। नाम वापसी के बाद, अब बिहार, ओडिशा और हरियाणा में एक-एक सीट के लिए कड़ा मुकाबला होने की उम्मीद है। 11 सीटों के लिए अब कुल 14 उम्मीदवार चुनावी मैदान में बचे हैं। भाजपा ने नियुक्त किए केंद्रीय पर्यवेक्षक भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने सोमवार (9 मार्च) को बिहार, हरियाणा और ओडिशा में राज्यसभा चुनाव के लिए केंद्रीय पर्यवेक्षकों की नियुक्ति की एक अधिसूचना जारी की। बिहार: केंद्रीय मंत्री हर्ष मल्होत्रा और छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा। हरियाणा: गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष सांघवी। ओडिशा: महाराष्ट्र के मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले। राज्यों में चुनावी समीकरण और कड़ा मुकाबला बिहार (5 सीटें) बिहार में एक सीट के लिए दिलचस्प मुकाबला देखने को मिलेगा क्योंकि राजद (RJD) ने व्यवसायी से राजनेता बने अपने मौजूदा सांसद अमरेंद्र धारी सिंह को फिर से उम्मीदवार बनाया है। एनडीए के उम्मीदवार: केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर (हैट्रिक की कोशिश में), रालोमो (RLM) अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा (लगातार दूसरे कार्यकाल की उम्मीद में) और भाजपा के प्रदेश महासचिव शिवेश कुमार अपना संसदीय पदार्पण कर रहे हैं। नीतीश कुमार का ऐतिहासिक कदम: नीतीश कुमार ने पिछले सप्ताह राज्यसभा जाने के अपने फैसले की घोषणा की थी, जिससे राज्य के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री (20 वर्ष) के रूप में उनका कार्यकाल समाप्त हो रहा है। राजद का समीकरण: राजद के पास 25 विधायक हैं और कांग्रेस-वाम दलों सहित महागठबंधन के 10 अन्य विधायकों का समर्थन है। पार्टी एआईएमआईएम (AIMIM) और बसपा (BSP) की मदद से छह वोटों की अपनी कमी को पूरा करने की उम्मीद कर रही है। बिहार विधानसभा सचिव ख्याति सिंह के अनुसार, छह उम्मीदवारों में से किसी ने भी अपना नामांकन वापस नहीं लिया, जिसके कारण राज्य में एक दशक से अधिक समय में पहली बार मतदान की आवश्यकता पड़ रही है। ओडिशा (4 सीटें) ओडिशा में भी एक सीट के लिए मुकाबला तय है। भाजपा उम्मीदवार: प्रदेश अध्यक्ष मनमोहन सामल और मौजूदा राज्यसभा सांसद सुजीत कुमार। बीजद उम्मीदवार: संतरूप मिश्रा और प्रख्यात यूरोलॉजिस्ट डॉ. दातेश्वर होता। भाजपा के समर्थन से दिलीप रे ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर पर्चा भरा है, जिससे यहां क्रॉस-वोटिंग की संभावना बढ़ गई है। हरियाणा (2 सीटें) हरियाणा में भी एक सीट के लिए कड़ा मुकाबला होना है, जहां पहले भी क्रॉस-वोटिंग का इतिहास रहा है। कांग्रेस के पास 37 विधायक हैं और एक सीट जीतने के लिए विपक्षी पार्टी को केवल 31 पहली पसंद वाले वोटों की आवश्यकता है। मैदान में उम्मीदवार: भाजपा से संजय भाटिया, कांग्रेस से करमवीर सिंह बौद्ध और निर्दलीय सतीश नांदल। नांदल ने 2019 में भाजपा के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ा था और अब वह मैदान में तीसरे उम्मीदवार के रूप में उतरे हैं। विभिन्न राज्यों से निर्विरोध चुने गए उम्मीदवार चुनावों के इस दौर के बाद राज्यसभा में भाजपा की सीटें बढ़ने की उम्मीद है और वह उच्च सदन में सबसे अधिक सीटों वाली पार्टी बनी रहेगी। लोकसभा के पूर्व उपाध्यक्ष एम. थंबीदुरई और कांग्रेस के जाने-माने वकील अभिषेक मनु सिंघवी भी उन नेताओं में शामिल हैं जो उच्च सदन के लिए निर्विरोध चुने गए हैं। महाराष्ट्र (7 सीटें): सभी सात उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए। इनमें सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन के छह और विपक्षी महाविकास अघाड़ी के उम्मीदवार शरद पवार शामिल हैं। केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले, भाजपा नेता विनोद तावड़े, रामराव वडकुटे (भाजपा), नागपुर की पूर्व मेयर माया इवनाते (भाजपा), एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना की ज्योति वाघमारे और पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार के बेटे पार्थ पवार निर्विरोध निर्वाचित हुए। पश्चिम बंगाल (5 सीटें): सत्तारूढ़ टीएमसी (TMC) के चार उम्मीदवार – बाबुल सुप्रियो, पश्चिम बंगाल के पूर्व डीजीपी राजीव कुमार, सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ वकील मेनका गुरुस्वामी और अभिनेत्री कोयल मल्लिक निर्विरोध चुने गए। भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष राहुल सिन्हा भी निर्विरोध जीते। असम (3 सीटें): सत्तारूढ़ एनडीए के तीन उम्मीदवार- जोगेन मोहन और तेरश गोवाला के साथ-साथ यूपीपीएल (UPPL) के प्रमोद बोरो- निर्विरोध निर्वाचित हुए। तेलंगाना (2 सीटें): कांग्रेस उम्मीदवार अभिषेक सिंघवी और वेम नरेन्दर रेड्डी निर्विरोध चुने गए। तमिलनाडु (6 सीटें): सभी छह उम्मीदवार निर्विरोध जीते। अन्नाद्रमुक (AIADMK) के मौजूदा सांसद एम. थंबीदुरई, पीएमके नेता अंबुमणि रामदास, सत्तारूढ़ द्रमुक (DMK) के तिरुची शिवा और जे कॉन्स्टेंटाइन रवींद्रन, कांग्रेस के एम क्रिस्टोफर तिलक और डीएमडीके के कोषाध्यक्ष एल.के. सुधीश निर्वाचित हुए। छत्तीसगढ़ (2 सीटें): भाजपा की लक्ष्मी वर्मा और कांग्रेस की फूलो देवी नेताम निर्विरोध जीतीं, क्योंकि दो सीटों के लिए केवल यही दो उम्मीदवार मैदान में थीं। हिमाचल प्रदेश (1 सीट): मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के करीबी विश्वासपात्र कांग्रेस उम्मीदवार अनुराग शर्मा निर्विरोध निर्वाचित हुए।  

पानी की उम्मीद अधूरी: नई लाइन के बावजूद भागीरथपुरा में जल संकट बरकरार

इंदौर देश के सबसे स्वच्छ और मध्य प्रदेश के आर्थिक नगर इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से अबतक 36 लोग जान गवा चुके हैं। इलाके के बड़े हिस्से में नगर निगम ने नर्मदा लाइन बिछा दी है, लेकिन फिर भी रहवासियों को जलसंकट से जूझना पड़ रहा है। नई लाइन से ज्यादातर रहवासी अपनी हौज में कनेक्शन नहीं ले पाए हैं। नीले पाइपों के जरिए वे हौज भर रहे हैं। इस कारण उन्हें जलसंकट झेलना पड़ रहा है। दरअसल नई लाइन से कनेक्शन लेने के लिए रहवासियों को हौज के आसपास खुदाई करना होगी। हौज तक पाइप लाने के लिए आंगन में भी खुदाई होगी। इसमें काफी पैसा खर्च होता है, इससे रहवासी बच रहे हैं। कई घरों में अस्थाई पाइपों से पानी पहुंचाया जा रहा है। टैंकरों से भी पहुंचाया जा रहा जल जिन इलाकों में नई लाइन नहीं बिछी, वहां टैंकरों से पानी पहुंचाया जा रहा है। सबसे ज्यादा परेशानी उन लोगों को है, जो संकरी गलियों में रहते हैं। वहां टैंकर भी नहीं पहुंच पा रहे हैं। रहवासी मदन यादव ने कहा कि बस्ती के लोगों को जलसंकट का सामना करना पड़ रहा है।   नए कनेक्शन नहीं ले पाए कई लोग कई लोग नई लाइनों से कनेक्शन नहीं ले पाए हैं। अस्थाई कनेक्शन लेने की वजह से फिर लाइन में गंदगी जाने का खतरा बना रहेगा। अभी भी कई गलियों में खुदाई चल रही है और सड़कें खराब पड़ी हैं। लोग सड़कों के पेंचवर्क की मांग भी कर रहे हैं।   बता दें कि, इंदौर के भागीरथपुरा में दो माह पहले डायरिया और हैजा फैलने से एक हजार से ज्यादा लोग बीमार हो गए थे। साढ़े चार सौ से ज्यादा लोगों को भर्ती किया गया था और 36 लोगों की मौत हो चुकी है। इसका मामला कोर्ट में भी है। कोर्ट ने जांच के लिए एक आयोग गठित किया है। आयोग ने लोगों से दूषित पेयजल कांड को लेकर साक्ष्य भी मंगाए हैं।

MP के 200 गांवों में हवाई सर्वे से तय होगा मालिकाना हक, ग्रामीणों को मिलेगी बड़ी राहत

भोपाल मध्यप्रदेश के भोपाल जिले के 200 गांव में प्रशासन हवाई सर्वे करेगा। घर और निर्माणों पर फोकस होगा। हर मकान-दुकान, निर्माण की चतुर्सीमा को नापकर उसे रिकॉर्ड में लिया जाएगा। इससे गांवों में विकास योजनाओं में मदद मिलने के साथ ही घरों का मालिकाना हक देने की दिशा में भी काम बढ़ेगा। महाराष्ट्र, यूपी समेत दक्षिण भारत के राज्यों में इसी तरह ड्रोन से हवाई सर्वे कर हर घर की मैपिंग की गई है। अब भोपाल में भी ऐसा होगा। गौरतलब है कि जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में अगले एक साल में 700 करोड़ रुपए की बड़ी राशि खर्च होना है। गांवों की मैपिंग के आधार पर इस राशि को खर्च करने की योजना में मदद मिलेगी। जनगणना में मददगार पहले चरण में मकान का सूचीकरण होना है। ग्रामीण क्षेत्र में हवाई सर्वे से मकानों के सीमांकन से सूचीकरण में मदद मिलेगी। उनके पास जियो टैगिंग मैपिंग का रिकॉर्ड होगा। उन्हें सिर्फ एक बार फिजिकल वेरिफिकेशन कर ओके करने से काम बन जाएगा।   मेट्रोपोलिटन रीजन के लिए निकलेगी जमीन प्रशासनिक अफसरों के अनुसार मेट्रोपोलिटन रीजन को लेकर अभी डीपीआर तय हो रही है। भोपाल समेत आसपास के पांच शहरों को इसमें शामिल किया है। ये सर्वे भोपाल के बाद संबंधित जिलों में भी होगा। इससे जमीन की वास्तविक उपलब्धता व मकान निर्माण की स्थिति सामने आएगी।   दो चरणों में होगी जनगणनाजनगणना 2027 का कार्य दो चरणों में किया जाएगा। प्रथम चरण के अंतर्गत मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना का कार्य अप्रैल से सितंबर 2026 के मध्य, राज्य शासन द्वारा निर्धारित 30 दिवस की अवधि में संपन्न किया जाएगा। द्वितीय चरण अंतर्गत जनसंख्या की गणना का कार्य नौ से 28 फरवरी 2027 की अवधि में किया जाएगा। जनगणना 2027 के लिए संदर्भ तिथि एक मार्च 2027 की रात्रि 12 बजे होगी।

ईरान-इजराइल युद्ध का बाजार पर असर, कपड़ों के दाम बढ़ने की चेतावनी

बुरहानपुर ईरान-इजराइल युद्ध(Iran-Israel War) का असर अब बुरहानपुर के प्रमुख कपड़ा उद्योग पर पड़ने लगा है। यहां सबसे अधिक 20-23 और 50-60 काउंट के यार्न से कपड़ा उत्पादन होता है और इन्हीं दोनों यार्न के भाव पर 10 रुपए तक तेजी आई है। इससे डिमांड में भी कमी आ गई है। ऐसे में युद्ध लंबा खिंचा तो इसका असर कपड़ों की कीमतों पर भी पड़ेगा। वहीं युद्ध के कारण पंजाब और कोयंबटूर से आने वाले यार्न के सप्लाई पर भी असर पड़ा है। बुरहानपुर देशभर में कपड़ा उत्पादन के लिए जाना जाता है। यहां हर दिन दस गाड़ी यानी 2.5 लाख किलो तक यार्न की आवक होती है। व्यापारियों ने कहा कि कोविड के बाद जो हालात बने थे, वैसे तो नहीं हैं, लेकिन यार्न के भाव में अचानक वृद्धि हो गई है। पहले 20-23 नंबर का यार्न 105-108 था, जो अब 112 रुपए किलो तक हो गया है। वहीं 50 से 60 नंबर का यार्न 180-200 से बढ़कर 190-210 रुपए किलो तक पहुंच गया है। इससे नए यार्न की डिमांड में कमी आई है। फिलहाल कपड़ा उत्पादन पर असर नहीं हुआ है, लेकिन हालत नहीं सुधरे तो कपड़ा भी महंगा होगा। यह है मुख्य कारण यार्न कारोबारी अशोक अग्रवाल बताते हैं कि यह युद्ध(Iran-Israel War) का साइड इफेक्ट है। कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी के कारण पॉलिएस्टर यार्न और सिंथेटिक फाइबर के दाम बढ़ गए हैं, जिसका सीधा असर टेक्सटाइल उद्योग पर पड़ा है। कच्चे माल की लागत में वृद्धि का कारण यह है कि पॉलिएस्टर धागा पेट्रोकेमिकल से बनता है, जो कच्चे तेल का एक उत्पाद है। तेल की कीमतें बढ़ने से इसके मुख्य कच्चे माल जैसे प्यूरीफाइड टेरेफ्थेलिक एसिड और मोनोएथिलीन ग्लाइकॉल महंगे हो गए हैं। शिपिंग और लॉजिस्टिक्स में भी रुकावट आई है। तनाव के कारण जहाजों को दूसरे लंबे रूट से जाना पड़ रहा है, जिससे माल ढुलाई का खर्च बढ़ गया है।   यहां से आता है यार्न यार्न के भाव बढ़ने का एक कारण देशभर में सरकारी यार्न की एनटीसी मिलें बंद होना भी है। बुरहानपुर में यार्न की आवक कोयंबटूर, महाराष्ट्र व पंजाब से हो रही है, जिससे बुरहानपुर में कैमरिक का कपड़ा बनता है। कच्चा माल तैयार होने के बाद इसे बाहर सप्लाई किया जाता है। अभी जो यार्न के दाम बढ़े हैं, उससे बुरहानपुर में 60 फीसदी लूमों पर यही कपड़ा तैयार होता है।   युद्ध लंबा चला तो आएगा संकट युद्ध शुरू होने के बाद से इसका असर दिखने लगा है। एलपीजी गैस महंगी हो गई है। घरेलू गैस पर 60 और व्यावसायिक गैस 115 रुपए तक महंगी हो गई है। अब युद्ध लंबा चलता है तो बुरहानपुर के कपड़ा उत्पादन पर भी असर आएगा। फिलहाल 50 फीसदी कपड़ा इसी यार्न से बनता है। इसमें मुख्य रूप से गमछा तैयार होता है। यार्न के भाव तो बढ़ गए हैं, लेकिन कपड़े के भाव में अभी कोई तेजी नहीं आई है।

भोपाल में जमीन-मकान की कीमतों पर असर, कलेक्टर गाइडलाइन में भारी बढ़ोतरी का प्रस्ताव

भोपाल भोपाल में आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए तैयार की गई कलेक्टर गाइडलाइन में कई क्षेत्रों में प्रॉपर्टी की कीमतों में भारी वृद्धि का प्रस्ताव रखा गया है। शहर की करीब 500 से अधिक लोकेशन पर जमीन और प्रॉपर्टी के दामों में 50 से 100 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की तैयारी की गई है। हालांकि नई गाइडलाइन में लोकेशन की संख्या घटाकर 2,175 कर दी गई है, जबकि वर्तमान गाइडलाइन में 2,881 लोकेशन शामिल थीं। कई क्षेत्रों में सरकारी परियोजनाओं के कारण कीमतों में वृद्धि प्रस्तावित नहीं की गई है। 706 लोकेशन कम की गईं नई कलेक्टर गाइडलाइन में कुल 706 लोकेशन कम कर दी गई हैं। पहले जहां 2,881 लोकेशन शामिल थीं, वहीं अब केवल 2,175 लोकेशन को ही गाइडलाइन में रखा गया है। अधिकारियों के अनुसार कई क्षेत्रों में सरकारी परियोजनाएं शुरू होने के कारण वहां किसी प्रकार की वृद्धि प्रस्तावित नहीं की गई है। कई इलाकों में 20 से 100 प्रतिशत तक बढ़ोतरी कलेक्टर गाइडलाइन के प्रस्ताव के अनुसार शहर के कई प्रमुख क्षेत्रों में प्रॉपर्टी के दामों में बड़ी वृद्धि की तैयारी है। करोंद, पलासी, गांधीनगर, बैरागढ़, परवलिया सड़क, अयोध्या बायपास, आनंद नगर, रातीबड़, नीलबड़ और कोलार सहित कई क्षेत्रों में जमीन की कीमतों में 20 से 100 प्रतिशत तक वृद्धि प्रस्तावित की गई है। इसके अलावा रायसेन रोड, विदिशा रोड, बैरसिया रोड, नर्मदापुरम रोड, भोपाल-इंदौर रोड, भोपाल बायपास, बंगरसिया, 11 मील और कटारा हिल्स जैसे क्षेत्रों में भी कीमतों में बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा गया है। 621 लोकेशन पर 11 प्रतिशत वृद्धि का दावा पंजीयन और राजस्व अधिकारियों ने प्रस्ताव में 621 लोकेशन पर औसतन 11 प्रतिशत वृद्धि का दावा किया है। हालांकि जब यह प्रस्ताव पोर्टल पर अपलोड हुआ तो कई क्षेत्रों में इससे कहीं अधिक वृद्धि का प्रस्ताव सामने आया। अभी तक नहीं आई आपत्ति कलेक्टर गाइडलाइन का प्रस्ताव दो दिन पहले ही आम लोगों के लिए पोर्टल पर अपलोड किया गया है। जानकारी के अभाव में अब तक इस पर एक भी ऑनलाइन आपत्ति दर्ज नहीं हुई है। अगर, इसी तरह कोई आपत्ति नहीं आती है, तो अधिकतम वृद्धि वाले प्रस्ताव को केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड के पास अंतिम मंजूरी के लिए भेज दिया जाएगा। सर्वर ठप होने से रजिस्ट्री में परेशानी प्रॉपर्टी की कीमतों में संभावित वृद्धि को देखते हुए लोग जल्दी रजिस्ट्री कराने के लिए पंजीयन कार्यालय पहुंच रहे हैं। हालांकि सोमवार को सर्वर ठप होने के कारण कई लोगों को रजिस्ट्री के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा।

आईपीएल शेड्यूल पर बड़ा अपडेट: बीसीसीआई 12 मार्च तक जारी करेगा शुरुआती मैचों की तारीखें

नई दिल्ली भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) 12 मार्च तक इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) 2026 के शुरुआती 20 दिनों का शेड्यूल जारी करेगा। यह जानकारी बीसीसीआई सचिव देवजीत सैकिया ने दी है। आईपीएल का 19वां सीजन 28 मार्च से 31 मई के बीच खेला जाना है। देवजीत सैकिया ने मंगलवार को आईएएनएस से कहा, “हम 12 मार्च तक आईपीएल 2026 का शेड्यूल जारी करने की योजना बना रहे हैं। फिलहाल, हम आईपीएल के पहले 20 दिनों का शेड्यूल जारी करने जा रहे हैं।” ऐसा समझा जा रहा है कि बीसीसीआई पश्चिम बंगाल, असम और तमिलनाडु में होने वाले विधानसभा चुनावों के साथ किसी भी तरह के टकराव की स्थिति से बचना चाहता है। ऐसे में टूर्नामेंट के शेष मुकाबलों का शेड्यूल बाद में जारी किया जाएगा। इसके बावजूद, टीमों ने अपने प्री-सीजन की तैयारियां शुरू कर दी हैं। पांच बार की चैंपियन चेन्नई सुपर किंग्स ने 1 मार्च को नवलूर स्थित अपने हाई-परफॉर्मेंस सेंटर में अभ्यास शुरू कर दिया है। वहीं, मौजूदा चैंपियन रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने 10 फरवरी को नवी मुंबई के डीवाई पाटिल स्टेडियम में एक छोटा-सा तैयारी शिविर आयोजित किया था, जबकि 2022 की चैंपियन गुजरात टाइटंस ने नाथद्वारा के मिराज इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में दो बार अभ्यास सत्र आयोजित किए थे। पंजाब किंग्स ने फरवरी की शुरुआत में अबू धाबी में अभ्यास किया था। फिलहाल टीम के खिलाड़ी धर्मशाला में अभ्यास शिविर में हिस्सा ले रहे हैं। सनराइजर्स हैदराबाद ने 1 मार्च को अपने घरेलू खिलाड़ियों के साथ अपना शिविर शुरू किया था। पांच बार की विजेता मुंबई इंडियंस भी आगामी सीजन के लिए अपना अभ्यास शुरू कर चुकी है। कोलकाता नाइट राइडर्स 18 मार्च को अपना प्री-सीजन शिविर शुरू करेगी, जबकि राजस्थान रॉयल्स के 15 मार्च से जयपुर में एक अभ्यास शिविर के लिए इकट्ठा होने की उम्मीद है। दिल्ली कैपिटल्स ने हाल ही में हैदराबाद में एक शिविर आयोजित किया था। अब इस टीम के दिल्ली में भी एक शिविर आयोजित करने की उम्मीद है। इस बीच लखनऊ सुपर जायंट्स ने लखनऊ में एक तैयारी सत्र आयोजित किया था।

इंफ्रास्ट्रक्चर पूरा, फिर भी नहीं मिल रहीं लेट नाइट फ्लाइट्स; भोपाल एयरपोर्ट पर एयरलाइंस उदासीन

भोपाल इस माह के अंत से लागू हो रहे समर शेड्यूल में एक भी लेट नाइट उड़ान शामिल नहीं हो सकी है। एयरपोर्ट अथारिटी ने एयरलाइंस कंपनियों को टाइम लिमिट से हटकर 24 घंटे में किसी भी समय स्लाट देने की पेशकश की है। इसके बावजूद एयरलाइंस कंपनियां रुचि नहीं दिखा रही हैं। फिलहाल लेट नाइट उड़ान के रूप में केवल पुणे रूट पर एक उड़ान है। एयर कनेक्टिविटी बढ़ाने के उद्देश्य से लंबे समय से दिल्ली, मुंबई, कोलकात्ता एयरपोर्ट्स की तरह 24 घंटे उड़ान संचालन को बढ़ावा दे रही हैं, लेकिन एयरलाइंस कंपनियां इसमें रूचि नहीं ले रही हैं। राजा भोज एयरपोर्ट पिछले डेढ़ साल से 24 घंटे खुल रहा है। इस अवधि में इंडिगो ने ही एक स्थाई पुणे उड़ान प्रारंभ की। कुछ समय के लिए मुंबई उड़ान प्रारंभ हुई फिर बंद हो गई। भोपाल से बेंगलुरू के लिए लंबे अर्से से लेट नाइट उड़ान की जरूरत महसूस की जा रही है। इस रूट पर दो नियमित उड़ाने हैं इसके बावजूद सस्ते टिकट नहीं मिलते। लेट नाइट उड़ानों से यह लाभ लेट नाइट उड़ानों में आमतौर पर सस्ते किराये में सीटों की बुकिंग होती है। एयरलाइंस कंपनियां देर रात को विमान पार्किंग में खड़े करने के बजाय ऐसे रूट पर इनका संचालन करती हैं जहां से 70 प्रतिशत से अधिक पैंसेजर लोड मिल सके। भोपाल से पुणे के बीच 80 प्रतिशत बुकिंग हो रही है। यदि बेंगलुरु, मुंबई एवं दिल्ली तक देर रात की उड़ानें प्रारंभ हो जाएं तो यात्रियों को बड़ी राहत मिल सकती है। दिल्ली बंद, नवी मुंबई शुरू होगी 29 मार्च से लागू हो रहे समर शेड्यूल में भोपाल से केवल नवी मुंबई तक एक उड़ान प्रारंभ हो रही है। मुंबई की एक उड़ान बंद होने का प्रस्ताव है। एयर इंडिया की मार्निंग उड़ान भी एक माह के लिए बंद हो रही है। गोवा एवं अहमदाबाद उड़ान भी बंद करने का प्रस्ताव है। यानि पहली बार समर सीजन में भोपाल से एयर कनेक्टिविटी बढ़ने के बजाय कम होने जा रही है। मिड सीजन में बढ़ेंगी उड़ानें समर शेड्यूल करीब छह माह लागू रहता है। मिड सीजन में कुछ नए रूट भोपाल से जुड़ेंगे। एयर इंडिया ने तकनीकी कारण से दिल्ली उड़ान एक माह के लिए बंद करने का निर्णय लिया है। अगले दो-तीन माह में एयर कनेक्टिविटी बढ़ेगी। लेट नाइट उड़ानें शुरू कराने के प्रयास भी किए जा रहे हैं।

अक्टूबर-नवंबर से MP में लागू हो सकता है ‘VB G-RAMJI’, राज्य सरकार बनाएगी अलग नियम

भोपाल मनरेगा की जगह शुरू होने जा रही विकसित भारत-रोज़गार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) के लिए गारंटी वीबी जी रामजी योजना प्रदेश में इसी वर्ष अक्टूबर-नवंबर से प्रारंभ हो सकती है। इसके लिए पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग तैयारियों में जुटा है। तैयारियों के संबंध में मंगलवार-बुधवार को दिल्ली में बैठक होने जा रही है, जिसमें सभी राज्यों से तैयारियों के संबंध में पूछा जाएगा। पंचायतों के बारे में जानकारी भी साझा की जाएगी, जिससे केंद्र सरकार राज्य को अनुदान के संबंध में नीति बना सके। अधिसूचना के बाद राज्य सरकार बनाएगी अपने नियम बता दें कि वीबी जी रामजी विधेयक संसद से पारित हो गया है। इसकी अधिसूचना अप्रैल या मई में जारी हो सकती है। इसके बाद राज्य सरकार अपने नियम बनाएगी, जो विधानसभा से पारित होंगे। इसमें लगभग छह माह का समय लगेगा। यह भी बता दें कि योजना में राज्य सरकारों को विकल्प दिया गया है कि वह केंद्र के नियम उसी रूप में स्वीकार कर लें या अपने अनुसार बदलाव कर लें। हर राज्य की परिस्थितियां अलग-अलग हैं।   स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर होगा नियमों में बदलाव उदाहरण के तौर पर शहरी और ग्रामीण क्षेत्र, श्रमिकों की संख्या, मनरेगा के अंतर्गत हुए काम, विकास कार्यों को लेकर राज्य सरकार की प्राथमिकता आदि। इन आधारों पर राज्य सरकार नियमों में कुछ परिवर्तन कर सकती है। विधानसभा से पारित होने के बाद इसे अमल में लाया जाएगा। अधिसूचना जारी होने के बाद सबसे पहले संबंधित अधिकारियों को प्रशिक्षित किया जाएगा। उन्हें बताया जाएगा कि मनरेगा से नई योजना किस तरह अलग है, कौन से नए काम शामिल किए गए हैं और सामाजिक अंकेक्षण किस तरह से किया जाना है।   काम के आधार पर तीन श्रेणियों में बंटेंगी पंचायतें अगले चरण में पंचायतों को तीन श्रेणियों में बांटा जाएगा। पहली वह पंचायतें जिनमें मनरेगा में कम काम हुआ है, उन्हें प्राथमिकता में रखकर वहां अधिक काम कराया जाएगा। इसके बाद मध्यम स्तर की ग्राम पंचायतें और तीसरी ऐसी पंचायतें होंगी जिन पर बहुत अधिक काम हो चुका है, वहां अब ज्यादा काम की आवश्यकता नहीं है। इस तरह सभी जगह समान रूप से विकास होगा। मनरेगा में कुछ ग्राम पंचायतों में बहुत अधिक तो कुछ में बहुत कम काम हुआ है।

मार्च में ही झुलसाने वाली गर्मी: राजस्थान की लपट से MP, दिल्ली-UP में पारा 40 के पास

नई दिल्ली राजस्थान से आ रही गर्म हवाओं का असर अब पूरे मध्य भारत में दिखने लगा है। मध्य प्रदेश के अधिकांश जिलों में तापमान तेजी से बढ़ा है और कई जगहों पर यह सामान्य से 4 से 6 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया है। मौसम विभाग के अनुसार फिलहाल प्रदेश में मौसम शुष्क रहने के आसार हैं और अगले एक सप्ताह तक तेज धूप और गर्म हवाओं का असर बना रह सकता है। दिल्ली में भी तापमान बढ़ने लगा है। मंगलवार को राजधानी में अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है, जबकि न्यूनतम तापमान 24 डिग्री के करीब रहेगा। हालांकि शहर की हवा की गुणवत्ता खराब बनी हुई है। एयर क्वालिटी इंडेक्स 326 दर्ज किया गया, जो Severe श्रेणी में आता है।   UP में मौसम का बदला मिजाज उत्तर प्रदेश में भी मौसम तेजी से करवट ले रहा है। आगरा, झांसी और बांदा जैसे जिलों में तापमान 37 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है। वहीं मेरठ, हापुड़ और कासगंज में सुबह हल्की धुंध और कोहरा भी देखने को मिला। मध्यप्रदेश में बढ़ी गर्मी प्रदेश में सबसे अधिक तापमान रतलाम में दर्ज किया गया, जहां पारा 39.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो सामान्य से 6.4 डिग्री अधिक है। पचमढ़ी को छोड़कर प्रदेश के अधिकांश संभागों में अधिकतम तापमान 35 से 38 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया गया। दिन में तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण लोगों को गर्मी का तीखा असर महसूस होने लगा है। ट्रफ सिस्टम का असर, कहीं हल्की बारिश संभव मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार इस समय बिहार से मराठवाड़ा तक एक ट्रफ लाइन झारखंड, छत्तीसगढ़ और विदर्भ के ऊपर से गुजर रही है। इसके प्रभाव से मध्य प्रदेश के दक्षिण-पूर्वी हिस्सों में कहीं-कहीं हल्की बारिश या बादल छाने की संभावना जताई गई है। इसके अलावा मध्य क्षोभमंडल में पश्चिमी हवाओं के साथ एक पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय है और जम्मू-कश्मीर के ऊपर उपोष्ण पश्चिमी जेट स्ट्रीम भी बह रही है। प्रमुख शहरों का तापमान भोपाल – अधिकतम 36.8°C, न्यूनतम 15°C इंदौर – अधिकतम 36.4°C, न्यूनतम 15.5°C ग्वालियर – अधिकतम 37.2°C, न्यूनतम 18.2°C जबलपुर – अधिकतम 36°C, न्यूनतम 17°C राजस्थान में मार्च में ही हीटवेव राजस्थान में गर्मी ने मार्च की शुरुआत में ही अपने तेवर दिखा दिए हैं। बाड़मेर में तापमान 40.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो प्रदेश का सबसे अधिक रहा। वहीं जयपुर में पारा 37.8 डिग्री तक पहुंच गया है। मौसम विभाग ने जैसलमेर और बाड़मेर सहित चार जिलों में 10-11 मार्च के लिए हीटवेव का येलो अलर्ट जारी किया है। जल्दी क्यों बढ़ रही गर्मी मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि फरवरी में उत्तर और मध्य भारत में सामान्य से कम बारिश हुई। इसके कारण आसमान साफ रहा और सूर्य की किरणें सीधे जमीन तक पहुंचने लगीं, जिससे तापमान तेजी से बढ़ गया। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले तीन-चार दिनों में तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ोतरी हो सकती है। 15 मार्च के बाद पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने पर कुछ जगहों पर हल्की बारिश या बूंदाबांदी की संभावना भी है।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने खाड़ी देशों में उपजी परिस्थितियों के मद्देनजर की नागरिक आपूर्ति व्यवस्था की समीक्षा

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश में आपूर्ति व्यवस्था में कहीं किसी प्रकार की कोई कठिनाई नहीं है। सरकार के पास पर्याप्त मात्रा में आपूर्ति संसाधन उपलब्ध हैं। किसी को भी खाद्य पदार्थ, गैस या तेल आपूर्ति के लिए परेशान या पैनिक होने की आवश्यकता नहीं है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे प्रदेश में बेहतर से बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार परिस्थितियों पर गहनता से नजर बनाए हुए हैं। केंद्र सरकार के मार्गदर्शन में देश के साथ मध्यप्रदेश में भी कहीं कोई आपूर्ति संबंधित दिक्कत नहीं है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मंगलवार को मंत्रालय में खाड़ी देशों में उपजी विषम परिस्थितियों के मद्देनजर मध्यप्रदेश में खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति व्यवस्था की समीक्षा बैठक की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विश्व और देश के समक्ष उपजी परिस्थितियों और संभावित चुनौतियों से निपटने के लिए मध्यप्रदेश में बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि तीन सदस्यीय मंत्री और अधिकारियों की समिति प्रदेश की आपूर्ति व्यवस्था की निगरानी करेगी और आपूर्ति बहाल रखने के लिए सभी कदम उठाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि खाड़ी देशों में रह रहे या वर्क वीजा पर गए या पर्यटन के लिए गए भारतीय नागरिकों, विशेषकर मध्यप्रदेश के निवासियों की स्वदेश वापसी के लिए मध्यप्रदेश सरकार लगातार केंद्र सरकार के सम्पर्क में है। राज्य सरकार से हेल्पलाइन के जरिए अब तक 255 लोगों ने संपर्क किया है, जिनकी सकुशल स्वदेश वापसी के लिए प्रयास तेज किए जा रहे हैं। बैठक में उप मुख्यमंत्री श्री राजेंद्र शुक्ल, सभी मंत्रीगण सहित प्रभारी मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा, पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना, अपर मुख्य सचिव (मुख्यमंत्री कार्यालय) नीरज मंडलोई, अपर मुख्य सचिव खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति तथा उपभोक्ता संरक्षण रश्मि अरूण शमी, सचिव परिवहन एवं आयुक्त जनसम्पर्क मनीष सिंह एवं अन्य विभागीय अधिकारी भी उपस्थित थे।  

सरकार की राहत योजना का असर: फरवरी में लाखों उपभोक्ताओं को बिजली बिल में करोड़ों की छूट

भोपाल  मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा स्‍मार्ट मीटर उपभोक्‍ताओं को दिन के टैरिफ में 20 प्रतिशत की छूट प्रदान की जा रही है। स्‍मार्ट मीटर उपभोक्‍ताओं के लिए यह सभी छूट अथवा प्रोत्साहन की गणना सरकारी सब्सिडी (यदि कोई हो) को छोड़कर की जा रही है। मध्‍य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने स्मार्ट मीटरिंग पहल के अंतर्गत, माह फरवरी 2026 के दौरान कुल 6, 13, 877 उपभोक्ताओं को उनके मासिक विद्युत बिल में टाइम ऑफ डे (ToD) छूट का लाभ प्रदान किया है, इसकी कुल राशि 3 करोड़, 68 लाख 01 हजार रूपए है। स्‍मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को उनकी खपत के आधार पर ये छूट दी गई है। कंपनी ने बताया कि स्‍मार्ट मीटर उपभोक्‍ताओं के लिए जिसमें घरेलू, गैर घरेलू, सार्वजनिक जल कार्य और स्ट्रीट लाइट और निम्‍नदाब औद्योगिक उपभोक्‍ताओं के लिए सोलर ऑवर सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक की अवधि के दौरान उपभोग की गई ऊर्जा के लिए ऊर्जा प्रभार की सामान्य दर पर 20 प्रतिशत की छूट 10 किलोवाट तक स्वीकृत लोड / अनुबंध मांग वाले उपभोक्‍ताओं को ही दी जा रही है। स्मार्ट मीटर के फायदे स्मार्ट मीटर ऊर्जा की खपत को ट्रैक करने और ऊर्जा की बचत करने में मदद करता है। बिजली की खपत को सटीक रूप से मापता है, जिससे बिल में कोई गलती नहीं होती। ऐप के जरिए मोबाइल पर रियल-टाइम डेटा देखकर ऊर्जा की खपत को नियंत्रित कर सकते हैं। ऊर्जा की गुणवत्ता के बारे में जानकारी मिलती है, जिससे ऊर्जा की खपत को बेहतर बना सकते हैं। ऊर्जा की खपत को ऑनलाइन ट्रैक करने और नियंत्रित करने की सुविधा मिलती है। ऊर्जा की खपत को कम करने से पर्यावरण पर पड़ने वाला दुष्प्रभाव कम होता है। ऊर्जा की खपत को नियंत्रित करने और ऊर्जा की बचत करने में मदद कर सकता है।

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