नलखेड़ा में उफनती पुलिया पर बही कार, 7 की मौत: पूर्व सूचना के बाद भी सुरक्षा उपाय शून्य, प्रशासनिक जवाबदेही तय करने की आवश्यकता
Car swept away at overflowing culvert in Nalkheda; 7 dead: Zero safety measures despite prior warning; need to fix administrative accountability. संवाददाता – चंदा कुशवाहानलखेड़ा। बीती रात मूसलाधार बारिश के चलते माँ बगलामुखी मंदिर क्षेत्र स्थित पुलिया पर तेज बहाव में एक कार बह गई। इस हादसे में मासूम बच्चों सहित सात लोगों की असामयिक मृत्यु हो गई। तहसील और पुलिस थाना मुख्यालय के अत्यंत समीप घटित यह घटना स्थानीय आपदा प्रबंधन तंत्र की कार्यप्रणाली और संबंधित अधिकारियों के दायित्वों पर केंद्रित है। संवेदनशील स्थल की जानकारी के बावजूद रोकथाम नहींउक्त पुलिया भारी बारिश के दौरान निरंतर जलमग्न होती रही है, जो कि स्थानीय प्रशासन के रिकॉर्ड और संज्ञान में पूर्व से दर्ज है। इसके उपरांत भी घटना के समय मौके पर कोई सुरक्षा प्रबंध नहीं थे:बैरिकेडिंग का अभाव : जलस्तर बढ़ने पर मार्ग को भौतिक रूप से बंद करने हेतु बैरिकेड्स नहीं लगाए गए।निगरानी दल की अनुपस्थिति: आपदा प्रबंधन नियमावली के विपरीत, रपटे पर आवागमन रोकने के लिए कोटवार, नगर पालिका दल या पुलिस बल की ड्यूटी सुनिश्चित नहीं की गई। संबंधित अधिकारियों के दायित्व और चूकआपदा प्रबंधन अधिनियम एवं सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत फील्ड स्तर पर सुरक्षा सुनिश्चित करने का प्राथमिक दायित्व स्थानीय अमले का होता है:कस्बा पटवारी: क्षेत्र में जलभराव की स्थिति, नदी-नालों के बढ़ते जलस्तर की वास्तविक समय पर मैपिंग तथा तत्काल वरिष्ठ अधिकारियों को रिपोर्ट प्रेषित करने का दायित्व निर्धारित है। नगर पालिका प्रशासन : नगरीय सीमा और प्रमुख धार्मिक मार्ग होने के कारण रपटे के दोनों ओर चेतावनी बोर्ड लगाने, आपातकालीन बैरिकेडिंग करने और प्रकाश व्यवस्था बनाए रखने की सीधी जिम्मेदारी नगर पालिका की थी।तहसीलदार / कार्यपालक दंडाधिकारी: अतिवृष्टि की चेतावनी के दौरान संवेदनशील मार्गों पर आवागमन निषेध के आदेश जारी कर राजस्व और कोटवार अमले की तैनाती का पर्यवेक्षण करना प्रशासनिक प्रमुख का कार्यक्षेत्र है।स्थानीय पुलिस प्रशासन (थाना स्तर): थाने के निकटवर्ती संवेदनशील रपटे पर गश्त, बैरिकेडिंग के माध्यम से मार्ग अवरुद्ध करने और यातायात को डायवर्ट करने की फील्ड जिम्मेदारी पुलिस तंत्र की बनती है।प्राथमिक सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन न होने के कारण यह मार्ग खुला रहा और वाहन जलमग्न रपटे में प्रवेश कर गया। इस स्तर की गंभीर चूक पर केवल जांच तक सीमित न रहकर फील्ड अमले से लेकर नोडल प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों तक की व्यक्तिगत और विभागीय जवाबदेही तय कर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है।