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न्यूजीलैंड की केंद्रीय अनुबंध सूची में शामिल हुए रचिन रविन्द्र, बेन सियर्स

वेलिंगटन रचिन रविन्द्र, बेन सियर्स, विल ओ’रूर्के और जैकब डफी को न्यूजीलैंड के पहले केंद्रीय अनुबंध की पेशकश की गई है, जबकि बाएं हाथ के स्पिनर एजाज पटेल की सूची में वापसी हुई है। तेज गेंदबाज एडम मिल्ने ने केन विलियमसन और लॉकी फर्ग्यूसन के साथ अनुबंध अस्वीकार कर दिया है तथा ब्लेयर टिकनर को 20 खिलाड़ियों की सूची से बाहर कर दिया गया है। रविंद्र 2023 वनडे विश्व कप के ब्रेकआउट स्टार थे, जहां उन्होंने 578 रन बनाए और फिर माउंट माउंगानुई में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ अपना पहला टेस्ट शतक बनाया, जिसे उन्होंने 240 में बदल दिया। वह मार्च में न्यूजीलैंड के पुरुष खिलाड़ी के रूप में सर रिचर्ड हैडली पदक के सबसे कम उम्र के विजेता बने। केंद्रीय अनुबंध मेों शामिल होने पर रचिन ने न्यूजीलैंड क्रिकेट (एनजेडसी) के हवाले से कहा, बड़े होने पर आप हर साल उन अनुबंध सूचियों को देखते थे और सोचते थे कि एक दिन उस सूची में होना अच्छा होगा – और अब ऐसा होना मेरे लिए खुशी की बात है, पिछले 12 महीने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलते हुए वाकई शानदार रहे हैं। मैंने बहुत कुछ सीखा है और निश्चित रूप से सुधार करने और ब्लैककैप्स को देने की भूख है। पिछले सीजन में तेज गेंदबाज सियर्स और ओ’रूर्के ने अपने टेस्ट डेब्यू पर प्रभावित किया था। ओ’रूर्के ने हैमिल्टन में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ नौ विकेट लिए और सियर्स ने क्राइस्टचर्च में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 90 रन देकर 4 विकेट लिए। सियर्स टी20 टीम के नियमित सदस्य भी थे, जबकि ओ’रूर्के ने दोनों व्हाइट-बॉल प्रारूपों में डेब्यू किया। 29 वर्षीय डफी न्यूजीलैंड की टीमों में नियमित नहीं हैं और उन्होंने अभी तक टेस्ट डेब्यू नहीं किया है। उन्होंने 2020 में अपने डेब्यू के बाद से छह वनडे और 14 टी20 में हिस्सा लिया है। पिछले सीजन में उन्होंने प्लंकेट शील्ड में 24.41 की औसत से 31 विकेट लिए थे। न्यूजीलैंड के चयनकर्ता सैम वेल्स ने कहा, बेन, जैकब, रचिन और विल के लिए अपना पहला अनुबंध प्रस्ताव प्राप्त करना विशेष रूप से रोमांचक है, और उनकी कड़ी मेहनत और प्रदर्शन के बाद यह उनके लिए योग्य है। ये युवा खिलाड़ी टीम का भविष्य हैं और अंतरराष्ट्रीय मंच पर उनकी प्रगति देखना उत्साहजनक है। पटेल की अनुबंध सूची में वापसी न्यूजीलैंड के आगामी टेस्ट-भारी कार्यक्रम का प्रतिबिंब है, जिसमें अफगानिस्तान (एक टेस्ट), श्रीलंका (दो टेस्ट) और भारत (तीन टेस्ट) के खिलाफ विदेशी दौरे शामिल हैं। इसके बाद वे दिसंबर में इंग्लैंड के खिलाफ तीन मैचों की घरेलू श्रृंखला खेलेंगे। विलियमसन के अनुबंध को अस्वीकार करने के फैसले के बाद न्यूजीलैंड को एक नए व्हाइट-बॉल कप्तान की आवश्यकता होगी। पिछले सत्र में टेस्ट टीम से बाहर होने के बावजूद शीर्ष क्रम के बल्लेबाज हेनरी निकोल्स ने अपना अनुबंध बरकरार रखा है। काइल जैमीसन वर्तमान में एक और पीठ की चोट से उबर रहे हैं, जिसका फरवरी में निदान किया गया था और वह एक साल तक बाहर रह सकते हैं। न्यूजीलैंड की केंद्रीय अनुबंध 2024-25 सूची में शामिल खिलाड़ी:- फिन एलन, टॉम ब्लंडेल, माइकल ब्रेसवेल, मार्क चैपमैन, डेवोन कॉनवे, जैकब डफी, मैट हेनरी, काइल जैमीसन, टॉम लैथम, डेरिल मिशेल, हेनरी निकोल्स, विल ओ’रूर्के, एजाज पटेल, ग्लेन फिलिप्स, रचिन रवींद्र, मिशेल सेंटनर, बेन सियर्स, ईश सोढ़ी, टिम साउथी, विल यंग।  

चोरों को संरक्षण देने वाली गठबंधन सरकार की विदाई अब की बार तय, बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सरकार पर निशाना साधा

रांची बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सरकार पर निशाना साधा है। मरांडी ने कहा कि जो सरकार आदिवासी हितैषी होने का दावा करती है, उसी सरकार में आदिवासियों का जाति प्रमाण पत्र नहीं बन रहा है। मरांडी ने कहा कि छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं में आवेदन तक नहीं कर पा रहे हैं। लगातार शिकायत करने और ज्ञापन देने के बावजूद भी उनकी समस्याओं का कोई भी समाधान नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि चोरों को संरक्षण देने वाली गठबंधन सरकार की विदाई अब की बार तय है। पूरे प्रदेश में चोरों का आतंक फैला हुआ है, प्रदेश का ऐसा एक भी कोना नहीं बचा है जहां राज्य सरकार के संरक्षण में झपट्टा मार गैंग काम न कर रही हो। मरांडी ने कहा कि प्रदेश के किसी भी जिले का आंकड़ा निकाल कर देखा जा सकता है कि कैसे ऐसी गैंग को संरक्षण देकर झामुमो और कांग्रेस की सरकार जनता में भय को बढ़ावा दे रही है। मरांडी ने आगे कहा, साढ़े चार साल की नाकामी को छुपाने की कोशिश में लगे मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जी, अब आपके बदले लिबास और ओढ़े हुए किरदार को जनता समझ चुकी है। इंतजार कीजिए, जनता अपने ऊपर हुए हर एक जुर्म का हिसाब आपसे लेगी।

प्रधानमंत्री द्वारा भारत के एमएसएमई और असंगठित व्यवसायों पर सुनियोजित ढंग से किया गया हमला एक आर्थिक तबाही: कांग्रेस

नई दिल्ली कांग्रेस ने बुधवार को आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने अपने ‘‘विनाशकारी नीति निर्धारण” से देश के विनिर्माण क्षेत्र को तहस नहस कर दिया। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह भी कहा कि कांग्रेस ने सरकार के आर्थिक कदमों को लेकर लगातार आगाह किया, लेकिन सरकार ने इसे अनसुना कर दिया और सूक्ष्म, लघु, मध्यम (एमएसएमई) और असंगठित व्यवसायों पर हमला किया। सुनियोजित ढंग से किया गया हमला एक आर्थिक तबाही रमेश ने एक बयान में कहा, ‘‘क्रेडिट रेटिंग कंपनी ‘इंडिया रेटिंग्स’ की एक नई रिपोर्ट ने उस बात की पुष्टि की है जिसे लेकर कांग्रेस लगातार आगाह करती आ रही है कि नॉन-बायोलॉजिकल प्रधानमंत्री द्वारा भारत के एमएसएमई और असंगठित व्यवसायों पर सुनियोजित ढंग से किया गया हमला एक आर्थिक तबाही है।” उन्होंने कहा, ‘‘मोदी सरकार का नीति निर्माण आम तौर पर असंगठित क्षेत्र को नज़रअंदाज़ करने वाला रहा है।” नौकरियां 2016 में 3.6 करोड़ से घटकर 23 में 3.06 करोड़ रमेश के मुताबिक, ‘‘नोटबंदी, जटिल कर संरचना और बिना तैयारी के लॉकडाउन लगाने” रूपी तीन झटके विशेष रूप से इसके विनाशकारी नीति निर्धारण की ओर ध्यान दिलाते हैं। उन्होंने दावा किया कि इन तीन झटकों के कारण असंगठित क्षेत्र के 63 लाख उद्यम बंद हुए, जिससे 1.6 करोड़ नौकरियां चली गईं। रमेश ने कहा कि यह ऐसे समय हुआ जब रिकॉर्ड संख्या में युवा श्रम बाजारों में प्रवेश कर रहे हैं जबकि मोदी सरकार नौकरियों के अवसरों को नष्ट कर रही है। उन्होंने कहा कि ‘मेक इन इंडिया’ के तमाम प्रचार, दिखावे और दावे के बावजूद विनिर्माण क्षेत्र की नौकरियां वित्त वर्ष 2016 में 3.6 करोड़ से घटकर वित्त वर्ष 23 में 3.06 करोड़ हो गईं। डॉक्टर मनमोहन सिंह ने नोटबंदी को वैधानिक लूट बताया कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि ‘‘नॉन-बायोलॉजिकल प्रधानमंत्री” ने भारत के विनिर्माण क्षेत्र को तहस नहस कर दिया है। रमेश ने कहा, ‘‘कांग्रेस प्रधानमंत्री को इन नतीजों को लेकर लगातार चेतावनी देती रही है। डॉक्टर मनमोहन सिंह ने ख़ुद संसद में नोटबंदी की निंदा करते हुए इसे ‘‘संगठित और वैधानिक लूट” बताया था। राहुल गांधी ने बार-बार एमएसएमई पर जीएसटी के ख़तरनाक दुष्परिणामों की ओर ध्यान आकर्षित करते हुए कहा है कि यह न तो अच्छा है और न सरल कर है।” उन्होंने आरोप लगाया कि 1.4 अरब भारतीय अब ‘‘नॉन-बायोलॉजिकल प्रधानमंत्री” के मित्रवादी पूंजीवाद, मनमाने नीति निर्धारण और मुद्दों को रचनात्मक रूप से हल न करने के आर्थिक दुष्परिणामों को भुगतने के लिए मजबूर हैं।

हाब रियाज, अब्दुल रज्जाक पीसीबी चयन समिति से बर्खास्त

लाहौर पाकिस्तान के टी20 विश्व कप अभियान में निराशाजनक प्रदर्शन के बाद पहली बार वहाब रियाज और अब्दुल रज्जाक को राष्ट्रीय टीम के चयनकर्ता पद से हटा दिया गया है। रज्जाक को कुछ सप्ताह पहले ही पुरुष और महिला दोनों टीमों के लिए चयन समिति में नियुक्त किया गया था, लेकिन अब वे महिला टीम के लिए भी चयनकर्ता के रूप में काम नहीं करेंगे। समझा जाता है कि इस सप्ताह के अंत में आधिकारिक तौर पर उनके हटाए जाने की घोषणा की जाएगी। ईएसपीएनक्रिकइन्फो के अनुसार, पाकिस्तान के टी20 विश्व कप से ग्रुप स्टेज से बाहर होने के बाद वहाब की नौकरी खतरे में थी। इस साल की शुरुआत में मुख्य चयनकर्ता के पद से हटाए जाने और आधिकारिक तौर पर एक ऐसी समिति के सात चयनकर्ताओं में से एक के रूप में नियुक्त किए जाने के बावजूद, जिसका कोई प्रमुख ही नहीं था, वहाब को व्यापक रूप से समिति का वास्तविक प्रमुख माना जाता था। आंतरिक रूप से, वहाब ने इस सार्वजनिक धारणा पर निराशा जताई थी, मुख्य रूप से इसलिए क्योंकि इसके परिणामस्वरूप उन्हें समिति द्वारा लिए गए निर्णयों के लिए किसी भी आलोचना का खामियाजा भुगतना पड़ा। जैसा कि पहले बताया गया है, चयन समिति का स्वरूप भी पुनर्गठित होने की संभावना है, जिसमें अंततः मुख्य चयनकर्ता की पुनः नियुक्ति की उम्मीद है। पैनल की संख्या कम होने की उम्मीद है, जिससे यह संभावना कम है कि वहाब और रज्जाक को संख्या पूरी करने के लिए प्रतिस्थापित किया जाएगा। वहाब का जाना पीसीबी अध्यक्ष मोहसिन नकवी के बेहद करीबी माने जाने वाले व्यक्ति के लिए सम्मान में एक तेज गिरावट है। वहाब ने नकवी को पंजाब का कार्यवाहक मुख्यमंत्री नियुक्त किए जाने के दौरान उनके मंत्रिमंडल में कार्यवाहक खेल मंत्री के रूप में काम किया था, और उनके बाद पीसीबी में शामिल हुए, जहां उन्हें शुरू में मुख्य चयनकर्ता नियुक्त किया गया था। वहाब ने टी20 विश्व कप में पाकिस्तान की टीम के साथ सीनियर टीम मैनेजर के रूप में भी यात्रा की थी, एक और जिम्मेदारी जिससे उन्हें हटाए जाने की संभावना है। माना जाता है कि नकवी सार्वजनिक रूप से यह प्रदर्शित करने के लिए उत्सुक थे कि कोई भी प्रतिकूल परिणामों से सुरक्षित नहीं है। इस निर्णय का प्रभावी रूप से मतलब है कि पीसीबी ने पाकिस्तान की राष्ट्रीय टीम के लिए खिलाड़ियों को चुनने की प्रक्रिया पर एक और यू-टर्न लिया है। सात सदस्यीय समिति की घोषणा चार महीने से भी कम समय पहले की गई थी, जिसमें वहाब को मुख्य चयनकर्ता से पदावनत किया गया था, जिसमें सात सदस्यों में से प्रत्येक के पास समान वोट थे, और उस समय नकवी ने कहा था कि समिति एक संतोषजनक निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए बहस और तर्क के आधार पर बहुमत से निर्णय लेगी। यह उस अस्थिरता के जारी रहने का भी संकेत देता है, जिसने हाल के वर्षों में चयन समिति को परेशान किया है। पिछले चार वर्षों में पीसीबी ने छह मुख्य चयनकर्ताओं को देखा है, जिसमें वहाब, हारून राशिद, शाहिद अफरीदी, इंजमाम-उल-हक, मोहम्मद वसीम और मिस्बाह-उल-हक सभी ने संक्षिप्त कार्यकाल दिया है। चयन समिति के शेष पांच सदस्य संबंधित प्रारूपों के मुख्य कोच और कप्तान, मोहम्मद यूसुफ, असद शफीक और डेटा विश्लेषक बिलाल अफजल हैं।  

प्रशांत किशोर ने बताया- महात्मा गांधी की जयंती यानी 2 अक्तूबर को वह अपनी राजनीतिक पार्टी लॉन्च करेंगे

नई दिल्ली चुनावी रणनीतिकार और जन सुराज के संयोजक प्रशांत किशोर ने अपनी राजनीतिक पार्टी की लॉन्चिंग की तारीख का ऐलान कर दिया है। महात्मा गांधी की जयंती यानी 2 अक्तूबर को वह अपनी राजनीतिक पार्टी लॉन्च करेंगे। इसके साथ ही उन्होंने कहा है कि वह अगले साल होने वाले बिहार विधानसभा चुनावों में सभी 243 सीटों पर उम्मीदवार खड़े करेंगे। किशोर ने यह भी कहा है कि उससे पहले वह 21 नेताओं की एक कमेटी गठित करेंगे जो पार्टी के इन मामलों को देखेगी। दो साल पहले प्रशांत किशोर ने 2 अक्तूबर, 2022 को गांधी जयंती के मौके पर ही पश्चिम चंपारण से जन सुराज यात्रा की शुरुआत की थी। पिछले दो साल में किशोर राज्यभर में 5000 किलोमीटर से ज्यादा की यात्रा कर चुके हैं। वह अपनी जनसभाओं में लोगों को जाति के कुचक्र से ऊपर उठकर विधायक-सांसद चुनने की अपील करते रहे हैं। ब्राह्मण समुदाय से ताल्लुक रखने वाले प्रशांत किशोर ने कहा है कि वह आगामी विधान सभा चुनावों में महागठबंधन और एनडीए के खिलाफ अपने बुते उतरेंगे। उन्होंने कहा कि वह 75 सीटों पर मुस्लिम उम्मीदवार खड़ा करेंगे। किशोर अपनी सभाओं में कहते रहे हैं कि बिहार के मुसलमान डर कर वोट करते रहे हैं। इसके अलावा उनका कोई नेता नहीं है। पीके दलितों पर भी बड़ा दांव खेलने जा रहे हैं। राज्य की आबादी में दलितों और मुसलमानों की कुल हिस्सेदारी 37 फीसदी है। इसलिए वह बड़ी संख्या में दलितों को भी चुनाव में उतारने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। प्रशांत किशोर की राजनीतिक शुरुआत नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू से हुई है। 2015 के विधान सभा चुनावों में जीत के बाद नीतीश ने उन्हें अपनी पार्टी में नंबर दो की हैसियत दी थी लेकिन जल्द ही दोनों के रास्ते अलग हो गए। अब प्रशांत किशोर नीतीश के दलित और मुस्लिम वोट बैंक में सेंधमारी का प्लान बना रहे हैं। उनकी इस रणनीति से लालू यादव की राजद के वोट बैंक में भी सेंधमारी का प्लान है। हालांकि, उन्हें भाजपा की बी टीम कहा जा रहा है लेकिन पीके ने साफ किया है कि वह सभी 243 सीटों पर उम्मीदवार उतार कर भाजपा को भी सबक सिखाएंगे।  

वेल्स राष्ट्रीय फुटबॉल टीम के कोच नियुक्त किये गए क्रेग बेलामी

लंदन  लिवरपूल, मैनचेस्टर सिटी और न्यूकैसल यूनाइटेड के पूर्व फारवर्ड क्रेग बेलामी को मंगलवार को वेल्स राष्ट्रीय टीम का नया कोच नियुक्त किया गया। 44 वर्षीय बेलामी ने 2028 तक चार साल के अनुबंध पर हस्ताक्षर किए हैं। वह रॉबर्ट पेज का स्थान लेंगे, जिन्हें जून में खराब परिणामों के कारण बर्खास्त कर दिया गया था। बेलामी, जिन्होंने वेल्स के लिए 78 मैचों में 19 गोल किए और 2007-2010 के बीच देश की कप्तानी की, ने कहा, मेरे लिए अपने देश का नेतृत्व करने का अवसर दिया जाना एक अविश्वसनीय सम्मान है और यह मेरे करियर का सबसे गौरवपूर्ण क्षण है। बर्नले में प्रथम टीम के कोच और विन्सेंट कोम्पनी के बायर्न म्यूनिख में शामिल होने के बाद कार्यवाहक मुख्य कोच को भूमिका निभाने वाले बेलामी ने कहा, मेरा हमेशा से सपना था कि मैं सिमरू (वेल्स) का मुख्य कोच बनूँ और मैं इस चुनौती के लिए तैयार हूँ, मैं इस टीम को विकसित करने के लिए अपनी पूरी प्रतिबद्धता देता हूँ और मैं वेल्स फुटबॉल में निरंतर सफलता लाने के लिए उत्सुक हूँ। मैं शुरुआत करने के लिए इंतजार नहीं कर सकता। बेलामी का पहला मैच 6 सितंबर को तुर्किये के खिलाफ यूईएफए नेशंस लीग टाई होगा।  

मध्यप्रदेश के 63.54% घरों में पहुँचा नल से जल, बहनों का जीवन हुआ आसान

भोपाल मध्यप्रदेश 71 लाख पांच हजार घरों में नल से जल उपलब्ध कराकर देश के अव्वल राज्यों में शामिल हो गया है। यह लक्षित घरों का 63.54 प्रतिशत है। घरों में नल लगने से गाँवों की बहनों का जीवन आसान हो गया है। कई बहनें जल सखी बनकर ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों के सदस्य के रूप में काम कर रही है। छिंदवाड़ा के गढ़मऊ गांव की जल योद्धा श्रीमती अनीता चौधरी को नल-जल योजना के उत्कृष्ट क्रियान्वयन एवं संधारण के लिए विज्ञान भवन नई दिल्ली में राष्ट्रपति श्रीमती द्रोपदी मुर्मु ने स्वच्छ सुजल शक्ति सम्मान से पुरस्कृत किया। श्रीमती अनीता चौधरी ने सामुदायिक योगदान के लिए अपने गांव के लोगों को प्रेरित कर गाँव की जलापूर्ति योजना के लिये गांव के सभी परिवारों से सामुदायिक अंशदान की राशि रूपये 2,88,135 इकटठा किए। अब श्रीमती अनिता चौधरी को गांव में जल योद्धा के नाम से जानते हैं। निवाड़ी जिले के टीला ग्राम पंचायत के टीला गांव की छात्रा मोनिका गौतम कहती हैं कि नल-जल योजना से पहले पानी की ज्यादा समस्या होती थी। हमारे घर से एक किलोमीटर दूर लगे हैण्डपम्प से पानी भरने जाना पड़ता था। कई बार समय पर स्कूल नहीं पहुंच पाती थी। पढ़ाई का बहुत नुकसान होता था। जब से गांव में नल से जल मिलने लगा है, तब से घर पर ही पानी मिल रहा है। समय पर स्कूल भी जा पा रही हूँ। अब पढ़ाई के साथ-साथ घर के कामों में मम्मी की मदद भी करती हूँ। मुरैना जिले के गांव घडोर की रहने वाली श्रीमती त्रिवेणी जाटव कहती हैं कि पहले जब हमारे गांव में नल-जल योजना नहीं थी तब गाँव में पानी की व्यवस्था को लेकर बहुत समस्याएं थी। गांव के लोग दूर चलकर बड़ी मुश्किल से पानी लाते थे, जिससे काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। गर्मी के मौसम में पेयजल की स्थिति बहुत ही गंभीर हो जाती थी। गांव में जल स्रोत भी सीमित हैं। गर्मी के मौसम में जल स्तर नीचे चले जाने से जल संकट पैदा हो जाता था। नरेहला ग्रामीण समृद्ध जल प्रदाय योजना हमारे गाँव में आई तब से घर पर ही नल से शुद्ध पेयजल मिलने लगा है। शुद्ध पानी से परिवारजनों के स्वास्थ्य में भी सुधार हुआ है। नीमच जिले के गांव पड़दा की श्रीमती ललिता बैरागी ने अपने घर के दरवाजे पर नल से जल पाने की खुशी का इजहार करते हुए बताया कि घर-घर नल कनेक्शन होने से गांव वालों के चेहरे खिल उठे हैं। पहले हैण्डपम्प ही सहारा था। लम्बी लाईन लगानी पड़ती थी। कई बार पानी भरने के लिये एक दूसरे से कहा-सुनी भी हो जाती थी। पड़दा गांव कभी बूंद-बूंद पानी को तरसता था मगर जल जीवन मिशन में गंगा बावड़ी समूह जल प्रदाय योजना ने ग्रामीणों की प्यास बुझाई। अब पेयजल घर पर ही नियमित रूप से प्राप्त हो रहा है। फील्ड टेस्टिंग किट से लगातार पानी की गुणवत्ता की जांच भी की जाती है। दतिया जिले के गांव बसई की श्रीमती पुष्पा वंशकार का कहना है कि पहले काफी दूर से रात भर जाग कर हैण्डपम्प से साइकिल पर लादकर पानी लाना पड़ता था। बसई ग्रामीण समूह जल प्रदाय योजना से घर पर ही नल से शुद्ध जल मिलने लगा है। सीहोर जिले के ग्राम कोसमी की रहने वाली निशा सोलंकी बताती हैं कि गर्मी में कुंए का पानी सूख जाता था तो दूर पैदल चलकर नदी से पानी लाना पड़ता था। हमारा काफी समय बर्बाद होता था। अब पानी की समस्या दूर हो गई है। बच्चों को समय पर स्कूल भेज पा रही हूं। इसी जिले की गीता प्रजापति कहती हैं कि जल जीवन मिशन से खुशहाली आई है। समय पर खाना बना पा रहे हैं। घर के कामों को समय पर कर पाते हैं। पानी लाने की परेशानियां खत्म हो गई है।  

लड़की होने से था नाराज, तीन दिन की जुड़वां बेटियों की कथित तौर पर हत्या कर दी और उन्हें अपने घर के पास दफना दिया

नई दिल्ली बाहरी दिल्ली के सुल्तानपुरी इलाके में बेटे की चाह रखने वाले 32 वर्षीय एक व्यक्ति ने अपनी तीन दिन की जुड़वां बेटियों की कथित तौर पर हत्या कर दी और उन्हें अपने घर के पास दफना दिया। पुलिस ने इसकी जानकारी दी । पुलिस अधिकरी ने बताया कि आरोपी नीरज सोलंकी को हरियाणा के रोहतक से गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस उपायुक्त (अपराध) अमित गोयल ने बताया कि स्थानीय लोगों को पूठ कलां गांव के पास एक अस्थायी श्मशान घाट परिसर में शिशुओं के शव मिले। उन्होंने बताया कि दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक सोलंकी ने तीन जून को अपनी बेटियों की हत्या कर दी थी। गोयल ने कहा, ‘‘अदालत से अनुमति मिलने के बाद शवों को पांच जून को बाहर निकाला गया और मंगोलपुरी स्थित एसजीएम अस्पताल के मुर्दाघर में रखा गया।” डीसीपी ने बताया कि सोलंकी ने कथित तौर पर अपनी तीन दिन की बेटियों को इसलिए मार डाला क्योंकि वह बेटा चाहता था। बच्चियों का जन्म हरियाणा में एक निजी अस्पताल में हुआ था। गोयल ने बताया कि सोलंकी अपनी पत्नी से यह झूठ बोल कर बच्चियों को दिल्ली लाया था कि किसी बीमारी की वजह से उन्हें बचाया नहीं जा सका। दिल्ली लाने के बाद उसने बच्चियों को मार कर दफना दिया। डीसीपी ने बताया कि आरोपी फरार था और शुरू में सोलंकी के पिता को पकड़ा गया जिसने बताया कि बेटियों के जन्म से वह खुश नहीं था। उन्होंने बताया कि पोस्टमार्टम के बाद बच्चियों के शव उनकी मां को सौंप दिए गए। सोलंकी के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया गया है।  

मेसी ने दागा 109वां गोल, अर्जेंटीना कोपा अमेरिका के फाइनल में

ईस्ट रदरफोर्ड  लियोनेल मेसी के अपने करियर के 109वें अंतरराष्ट्रीय गोल और वर्तमान टूर्नामेंट के पहले गोल के दम पर गत चैंपियन अर्जेंटीना ने कनाडा को 2-0 से हराकर कोपा अमेरिका फुटबॉल टूर्नामेंटके फाइनल में प्रवेश किया। अर्जेंटीना की तरफ से जूलियन अल्वारेज़ ने 22वें मिनट में पहला गोल किया जबकि मेसी ने 51वें मिनट में एन्जो फर्नांडीज के शॉट को गोल में भेज कर उसकी बढ़त दोगुनी की। मेसी के सामने तब गोलकीपर मैक्सिम क्रेप्यू थे लेकिन इस स्टार फुटबॉलर के आगे उनकी एक नहीं चली। मेसी ने अर्जेंटीना के लिए अपने पिछले 25 मैचों में 28 गोल किए हैं। वह कोपा अमेरिका में अब तक 14 गोल कर चुके हैं जो रिकॉर्ड से तीन गोल कम हैं। अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल में मेसी से अधिक गोल पुर्तगाल के क्रिस्टियानो रोनाल्डो के नाम पर दर्ज हैं जिन्होंने अभी तक 130 गोल किए हैं। ईरान के अल देई के नाम 1993 से 2006 तक 108 या 109 गोल दर्ज हैं। इक्वाडोर के खिलाफ 2000 में किए गए उनके गोल को लेकर विवाद है क्योंकि इस मैच के अंतरराष्ट्रीय दर्जे को लेकर मतभेद हैं। अर्जेंटीना ने यह जीत अपने स्वतंत्रता दिवस पर हासिल की जिससे उसका अजेय अभियान 10 मैच तक पहुंच गया है। अर्जेंटीना रविवार को होने वाले फाइनल में उरुग्वे या कोलंबिया का सामना करके रिकॉर्ड 16वां कोपा खिताब जीतने की कोशिश करेगा।

मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक, नर्मदा घाटी की परियोजनाओं के लिए निविदा आमंत्रण की स्वीकृति

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंत्रालय में मंत्रि-परिषद की बैठक हुई। मंत्रि-परिषद द्वारा विमुक्त, घुमन्तु एवं अर्द्ध-घुमन्तु जनजाति कल्याण विभाग के अंतर्गत संचालित छात्रावास, आश्रम और सामुदायिक कल्याण केन्द्रों में निवासरत विद्यार्थियों को अनुसूचित जाति कल्याण/ जनजातीय कार्य विभाग द्वारा निर्धारित शिष्यवृत्ति दरों के अनुरूप युक्त-युक्तीकरण की स्वीकृति दी है। स्वीकृति अनुसार बालकों को वर्तमान में प्रतिमाह देय शिष्यवृत्ति 1230 रुपए में वृद्धि कर 1550 रूपये एवं बालिकाओं को 1270 रूपये में वृद्धि कर  1590 रूपये प्रतिमाह दी जाएगी। साथ ही अनुसूचित जाति कल्याण/ जनजातीय कार्य विभाग द्वारा मूल्य सूचकांक के आधार पर आगामी शिष्यवृत्ति की दर में वृद्धि, विमुक्त, घुमन्तु एवं अर्द्ध-घुमन्तु कल्याण विभाग के लिए भी मान्य किए जाने का निर्णय लिया गया है। “नेशनल ई-विधान एप्लीकेशन” (नेवा) के क्रियान्वयन का अनुमोदन मंत्रि-परिषद द्वारा भारत सरकार द्वारा केन्द्र प्रवर्तित योजना “नेशनल ई-विधान एप्लीकेशन” (नेवा) को मध्यप्रदेश विधान सभा में क्रियान्वित करने के लिए 23 करोड़ 87 लाख रूपये की परियोजना का अनुमोदन दिया हैं। उल्लेखनीय है कि भारत सरकार के डिजिटल इंडिया कार्यक्रम में देश की समस्त विधान सभाओं को पेपर लेस करने एवं उन्हें एक प्लेटफार्म पर लाने के उद्देश्य से भारत सरकार द्वारा केन्द्र प्रवर्तित योजना “नेशनल ई-विधान एप्लीकेशन” (नेवा) लांच की गई है।  लागत की 60 प्रतिशत राशि भारत सरकार तथा 40 प्रतिशत राज्य शासन द्वारा वहन की जाएगी। नर्मदा घाटी की परियोजनाओं के लिए निविदा आमंत्रण  की स्वीकृति मंत्रि-परिषद द्वारा नर्मदा घाटी विकास विभाग की 9,271 करोड़ 96 लाख रूपये की लागत की 7 परियोजनाओं के निविदा आमंत्रण की अनुमति प्रदान की है। सोण्डवा उद्वहन माईक्रो सिंचाई परियोजना, निवाली उद्वहन माईक्रो सिंचाई परियोजना, सेंधवा उद्वहन माईक्रो सिंचाई परियोजना, महेश्वर जानापाव उद्वहन माईक्रो सिंचाई परियोजना, धार माईक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना, बड़ादेव संयुक्त माईक्रो सिंचाई परियोजना एवं माँ रेवा उद्वहन सिंचाई परियोजना के लिए निविदा आमंत्रण की अनुमति प्रदान की गई है। बोकारो माइक्रो इरीगेशन की प्रशासकीय स्वीकृति मंत्रि-परिषद द्वारा बोकरो माइक्रो सिंचाई परियोजना लागत राशि 46 करोड़ रूपये, सैंच्य क्षेत्र 3310 हेक्टेयर की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की गई है। परियोजना से तहसील रामपुरा नैकिन के 11 ग्रामों के कृषकों को सिंचाई सुविधा का लाभ प्राप्त होगा। इंदौर में केन्द्रीय जेल के शेष रहे कार्यों की प्रशासकीय स्वीकृति मंत्रि-परिषद ने इंदौर में सांवेर रोड़ पर निर्माणाधीन केन्द्रीय जेल के शेष रहे निर्माण कार्यों के लिए 217 करोड़ 73 लाख रूपये की प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की है। राज्य शासन के लिए विमान खरीदने का अनुमोदन मंत्रि-परिषद द्वारा राज्य शासन के लिए विमान खरीदने का अनुमोदन दिया गया है। राज्य शासन के लिये अति विशिष्ट व्यक्तियों की उड़ान के लिए “मध्यप्रदेश शासन के लिये विमान/हेलीकाप्टर क्रय-विक्रय नियम, 2019” के अंतर्गत बुलाए गए टेण्डर में निम्नतम (L1) निविदाकार संस्था से विमान मॉडल Challenger 3500 जेट विमान क्रय किये जाने के निर्णय का अनुमोदन दिया गया।  

स्पेन यूरो 2024 के फाइनल में, यामल ने बनाया रिकॉर्ड

म्यूनिख  लैमिन यामल यूरोपीय फुटबाल चैंपियनशिप में सबसे कम उम्र में गोल करने वाले खिलाड़ी बन गए जिसकी मदद से स्पेन ने फ्रांस को 2-1 से हराकर यूरो 2024 के फाइनल में प्रवेश किया। फ्रांस ने रैंडल कोलो मुआनी के आठवें मिनट में काइलियन एमबाप्पे के क्रॉस पर हेडर से किए गए गोल के दम पर शुरुआती बढ़त हासिल की लेकिन वह इसका फायदा नहीं उठा पाया। स्पेन की तरफ से 16 वर्ष के यामल ने 21वें मिनट में बराबरी का गोल दागा। इसके चार मिनट बाद डैनी ओल्मो ने निर्णायक गोल किया। यामल ने मैच के बाद कहा, ‘‘शुरू में गोल खाने के बाद हम मुश्किल स्थिति में थे। मैंने सिर्फ गेंद पर कब्जा किया और उसे सही तरह से गोल में डाला। मैं बहुत खुश हूं। मैं बहुत अधिक नहीं सोचता हूं। बस अपने खेल का आनंद लेता हूं और टीम की मदद करने की कोशिश करता हूं। मैं गोल करके और टीम की जीत से बहुत खुश हूं।’’ स्पेन की निगाह रिकॉर्ड चौथे खिताब पर टिकी हैं। वह यामल के 17वें जन्मदिन के एक दिन बाद रविवार को बर्लिन में होने वाले फाइनल में इंग्लैंड या नीदरलैंड का सामना करेगा। फ्रांस के कोच डिडिएर डेसचैम्प्स ने कहा,‘‘हम जानते थे कि उनकी टीम बेहतरीन है और उन्होंने इसे साबित भी कर दिया। हमने शुरू में गोल कर दिया था लेकिन इसके बाद स्पेन ने हमारे लिए चीजों को मुश्किल बना दिया था।’’ स्पेन यूरो 2024 में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाली टीम रही है। यह एकमात्र टीम है जिसने अपने सभी मैच जीते हैं और 13 गोल किए हैं, जो यूरोपीय चैम्पियनशिप में सबसे अधिक गोल करने के स्पेनिश रिकॉर्ड के बराबर और फ्रांस के 1984 में बनाए गए रिकॉर्ड से एक गोल कम है। स्पेन के कोच डे ला फुएंते ने इंग्लैंड और नीदरलैंड को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि उनकी टीम फाइनल में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करेगी। उन्होंने कहा,‘‘मुझे यकीन है कि फाइनल पूरी तरह से अलग होगा। यह ऐसे प्रतिद्वंदी के खिलाफ होगा जो हमें अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित करेगा। भले ही यह सुनने में अच्छा नहीं लगता हो लेकिन अभी सुधार की गुंजाइश है।’’  

‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान चलाया, छत्तीसगढ़ जनसंपर्क विभाग का नई दिल्ली में वृक्षारोपण

रायपुर। छत्तीसगढ़ के जनसंपर्क विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत आज नई दिल्ली में वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित किया। नई दिल्ली स्थित छत्तीसगढ़ सूचना केन्द्र के कर्मचारियों ने आज साउथ दिल्ली में वृक्षारोपण किया। वृक्षारोपण कार्यक्रम में विभाग के प्रमुख अधिकारी और कर्मचारियों ने हिस्सा लिया। उन्होंने विभिन्न प्रकार के पौधों का रोपण कर पर्यावरण की सुरक्षा और हरियाली बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई। विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘यह अभियान न केवल पर्यावरण की दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह मातृत्व के प्रति सम्मान और आभार प्रकट करने का एक सुंदर तरीका भी है।’ कार्यक्रम के दौरान, अधिकारियों ने स्थानीय समुदाय को भी वृक्षारोपण के महत्व के बारे में जागरूक किया और उन्हें भी इस अभियान में शामिल होने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि एक पेड़ लगाने से न केवल पर्यावरण में सुधार होता है, बल्कि यह अगली पीढ़ियों के लिए एक स्वस्थ और हरित भविष्य की नींव भी रखता है।     विभाग ने इस अभियान के अंतर्गत भविष्य में और भी वृक्षारोपण कार्यक्रम आयोजित करने की योजना बनाई है। इस पहल की सराहना करते हुए, कई नागरिकों ने भी इसमें भागीदारी की इच्छा व्यक्त की और इसे एक सकारात्मक दिशा में उठाया गया कदम माना।  ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान छत्तीसगढ़ सरकार की पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता और लोगों में जागरूकता को दर्शाता है। जिसका उद्देश्य जनसहभागिता के माध्यम से अधिक से अधिक हरियाली बढ़ाना है।

भारत ने उनके देश को एक संप्रभु राष्ट्र बनने में मदद की, भारत और ऑस्ट्रिया के बीच बहुत अच्छे संबंध हैं: चांसलर कार्ल नेहमर

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने ऐतिहासिक ऑस्ट्रिया दौरे पर हैं। उन्होंने बुधवार को ऑस्ट्रिया के चांसलर कार्ल नेहमर से मुलाकात की और द्विपक्षीय साझेदारी पर चर्चा की। बैठक से पहले मोदी ने कहा कि भारत-ऑस्ट्रिया दोस्ती मजबूत है और आने वाले समय में यह और मजबूत होगी। मोदी दो दिवसीय यात्रा पर मंगलवार शाम मास्को से यहां पहुंचे। यह 40 से अधिक वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की ऑस्ट्रिया की पहली यात्रा है। वर्ष 1983 में इंदिरा गांधी ने ऑस्ट्रिया की यात्रा की थी। पीएम मोदी के साथ चर्चा के दौरान ऑस्ट्रिया के चांसलर कार्ल नेहमर ने एक बेहद पुरानी बात को याद किया। उन्होंने बताया कि कैसे भारत ने उनके देश को एक संप्रभु राष्ट्र बनने में मदद की। उन्होंने कहा, “भारत और ऑस्ट्रिया के बीच बहुत अच्छे संबंध हैं। यह विश्वास का रिश्ता है जो 1950 के दशक में शुरू हुआ था। जब बात शांति समझौते की होती है, तो भारत और ऑस्ट्रिया बहुत महत्वपूर्ण और सपोर्टिव पार्टनर रहे हैं।” उन्होंने आगे कहा, “भारत ने ऑस्ट्रिया की मदद की और 1955 में ऑस्ट्रियाई राज्य संधि के साथ वार्ता सकारात्मक निष्कर्ष पर पहुंची। भारत और ऑस्ट्रिया के बीच जो बात खास है वह यह कि हम भू-राजनीतिक स्थिति के घटनाक्रम को लेकर चिंतित हैं।” ऑस्ट्रिया की ‘आजादी’ में भारत का बड़ा हाथ, नेहरू ने ऐसे की थी मदद 1955 में भारत ने ऑस्ट्रिया की मदद करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। यह वह समय था जब द्वितीय विश्व युद्ध के बाद ऑस्ट्रिया पर चार सहयोगी शक्तियों (अमेरिका, सोवियत संघ, यूनाइटेड किंगडम, और फ्रांस) का कब्जा था। भारत ने ऑस्ट्रिया की आजादी और तटस्थता की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने संयुक्त राष्ट्र (UN) और अन्य अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर ऑस्ट्रिया के समर्थन में जोर दिया। भारत ने यह प्रस्ताव रखा कि ऑस्ट्रिया को एक स्वतंत्र और तटस्थ देश के रूप में स्थापित किया जाए, ताकि वह दोनों विश्व युद्धों के दौरान हुए संघर्षों से बाहर रह सके। क्या निकला नतीजा? इसका नतीजा ये निकला कि 1955 में ऑस्ट्रियाई राज्य संधि पर हस्ताक्षर किए गए, जिसने ऑस्ट्रिया की स्वतंत्रता और तटस्थता की स्थापना की। इस संधि ने ऑस्ट्रिया को चारों शक्तियों के नियंत्रण से मुक्त कर दिया और उसे एक संप्रभु राज्य बना दिया। भारत की इस पहल और समर्थन के कारण ऑस्ट्रिया ने स्वतंत्रता प्राप्त की और भारत की तरह ही शांति और तटस्थता की नीति अपनाई। क्या है ऑस्ट्रियन राज्य संधि? ऑस्ट्रियन राज्य संधि (Austrian State Treaty) एक महत्वपूर्ण संधि थी जिस पर 15 मई 1955 को वियना में हस्ताक्षर हुए थे। इस संधि ने ऑस्ट्रिया को द्वितीय विश्व युद्ध के बाद चार सहयोगी शक्तियों (संयुक्त राज्य अमेरिका, सोवियत संघ, यूनाइटेड किंगडम, और फ्रांस) के नियंत्रण से मुक्त करा दिया और उसे एक स्वतंत्र, संप्रभु और तटस्थ राष्ट्र के रूप में स्थापित किया। इससे ऑस्ट्रिया को पूर्ण स्वतंत्रता और संप्रभुता प्राप्त हुई, और सभी विदेशी सेनाओं को ऑस्ट्रियाई क्षेत्र से हटने का आदेश दिया गया। ऑस्ट्रिया ने अपनी स्थायी तटस्थता की घोषणा की, जिसका अर्थ है कि वह किसी भी सैन्य गठबंधन का हिस्सा नहीं बनेगा और किसी भी सैन्य संघर्ष में भाग नहीं लेगा। ऑस्ट्रिया पर लगाए गए सभी प्रतिबंध और नियंत्रण हटा दिए गए, जिससे ऑस्ट्रियाई सरकार को अपने मामलों का स्वायत्त रूप से संचालन करने की अनुमति मिली। ऑस्ट्रिया ने युद्ध के दौरान हुए नुकसान की क्षतिपूर्ति के लिए कुछ आर्थिक जिम्मेदारियों को स्वीकार किया और पुनर्निर्माण की दिशा में कदम उठाए। यह संधि ऑस्ट्रिया की स्वतंत्रता और स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण थी और उसने देश को शांति और तटस्थता की नीति अपनाने में मदद की। ऑस्ट्रियन राज्य संधि के कारण, ऑस्ट्रिया एक तटस्थ राष्ट्र के रूप में विकसित हुआ और उसने अपने स्वतंत्रता और संप्रभुता को सुनिश्चित किया। अमेरिका, सोवियत संघ, यूनाइटेड किंगडम, और फ्रांस का ऑस्ट्रिया पर कब्जा क्यों था? संयुक्त राज्य अमेरिका, सोवियत संघ, यूनाइटेड किंगडम और फ्रांस ने द्वितीय विश्व युद्ध के बाद ऑस्ट्रिया पर कब्जा किया था। इसका मुख्य कारण था कि ऑस्ट्रिया, नाजी जर्मनी का हिस्सा बन चुका था जब 1938 में एडोल्फ हिटलर ने ऑस्ट्रिया का एन्स्क्लुस (Anschluss) किया था। यहां एन्स्क्लुस का मतलब 1938 में ऑस्ट्रिया के विलय से है। यानी हिटलर ने ऑस्ट्रिया पर खुद का शासन स्थापित कर दिया था। द्वितीय विश्व युद्ध के अंत में, मित्र राष्ट्रों (Allied Powers) ने नाजी जर्मनी यानी हिटलर को हराया और यूरोप के पुनर्निर्माण की योजना बनाई। इस प्रक्रिया में, उन्होंने जर्मनी और उसके अधीनस्थ क्षेत्रों को विभाजित किया ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की नाजी सत्ता का पुनरुत्थान न हो सके और स्थिरता बनी रहे। इस विभाजन के हिस्से के रूप में, ऑस्ट्रिया को चार क्षेत्रों में विभाजित किया गया और इन क्षेत्रों का नियंत्रण संयुक्त राज्य अमेरिका, सोवियत संघ, यूनाइटेड किंगडम और फ्रांस को सौंपा गया। यह कब्जा अस्थायी था और इसका उद्देश्य ऑस्ट्रिया को नाजी शासन से मुक्त करना और देश में स्थायी शांति और लोकतंत्र की स्थापना करना था। इस प्रकार, इन चार सहयोगी शक्तियों ने मिलकर ऑस्ट्रिया के प्रशासन और पुनर्निर्माण की जिम्मेदारी संभाली, ताकि देश को स्वतंत्र और तटस्थ राज्य के रूप में पुनः स्थापित किया जा सके।  

अकाल तख्त की ओर से अब इस पर रोक का आदेश आ सकता है कि अब फिल्मों में नहीं दिखेंगे सिख शादियों के सीन

नई दिल्ली अब फिल्मों और टीवी सीरियल में सिख शादियों के सीन नहीं दिखेंगे। एसजीपीसी ने मोहाली में सीरियल की शूटिंग के दौरान हुए विवाद को लेकर रिपोर्ट मांगी है। अकाल तख्त की ओर से अब इस पर रोक का आदेश आ सकता है। मोहाली में एक पंजाबी सीरियल की शूटिंग के दौरान गुरुद्वारे का सेट बनाया गया था और आनंदकारज यानी सिख विवाह दर्शाया गया था। इसे लेकर विवाद छिड़ गया था और मौके पर पहुंचे निहंगों ने शूटिंग रुकवा दी थी। इसके अलावा पुलिस से मांग की थी कि इस मामले में बेअदबी के आरोपों में केस दर्ज किया जाए और ऐक्शन लिया जाए। निहंगों का कहना था कि टीवी सीरियल मेकर्स को सब कुछ मालूम था, फिर भी ऐसा किया गया। निहंगों का कहना था कि शूटिंग के दौरान गुरुग्रंथ साहिब का स्वरूप भी दिखाया गया। ऐसा करना गलत है और बेअदबी है। इसकी इजाजत किसी को नहीं है और यूं हर जगह गुरु ग्रंथ साहिब का स्वरूप नहीं ले जाया जा सकता। बता दें कि अकाल तख्त ने पहले ही मैरिज होम्स में होने वाली शादियों में गुरु ग्रंथ साहिब के स्वरूपों को ले जाने पर पाबंदी लिखा रखी है। मोहाली की घटना को एसजीपीसी ने गलत करार दिया है। अकाल तख्त जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह ने इस मामले में एसजीपीसी से रिपोर्ट मांग ली है, जिसके बाद इसको लेकर अकाल तख्त से आदेश जारी हो सकते हैं। इससे पहले मैरिज पैलेसों में श्री गुरू ग्रंथ साहिब ले जाने पर रोक लगाई जा चुकी है। जल्द ही पंज सिंह साहिबों की मीटिंग कर लेंगे फैसला: ज्ञानी रघबीर सिंह श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी रघबीर सिंह ने मोहाली के घडूआं में सीरियल की शूटिंग के दौरान नकली गुरुद्वारा साहिब में नकली आनंद कारज करने की घटना की निंदा की। उन्होंने कहा कि फिल्मी क्षेत्र के लोग अपने व्यापार को मुख्य रखकर सिख परपंराओं से खिलवाड़ कर रहे हैं। अगर वह इन हरकतों से बाज नहीं आए तो श्री अकाल तख्त साहिब को उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी पडे़गी। सिख एक्टर या डायरेक्टर या सहायक कर्मी इस घटना में दोषी या सहायक पाए जाएंगे, उनके खिलाफ श्री अकाल तख्त से भी सिख परंपराओं के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। सीरियल निर्माताओं पर भी ऐक्शन की है तैयारी जल्द ही पंज सिंह साहिबों की मीटिंग कर भविष्य के लिए फिल्मों में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की हजूरी दिखाने पर रोक लगाने को लेकर भी सख्त फैसला लिया जाएगा। साथ ही उन्होंने कहा कि  जो सिख एक्टर या डायरेक्टर या सहायक कर्मी मोहाली की घटना में दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ श्री अकाल तख्त से भी सिख परंपराओं के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। शिरोमणि कमेटी के अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने फिल्मों और सीरियलों में सिख परंपराओं को ठेस पहुंचाने वाली हरकतों की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा कि सिख भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली ऐसी घटनाओं को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। 

नगर निगम पर मनमानी का लगाया आरोप, राजस्थान-अजमेर में चूड़ी बाजार के स्ट्रीट वेंडर्स परिवार धरने पर बैठे

अजमेर. अजमेर नगर निगम द्वारा शहर के चूड़ी बाजार से हटाए गए ठेले को लेकर आज स्ट्रीट वेंडर्स का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने नगर निगम पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन किया । उन्होंने आरोप लगाया कि नगर निगम की इस कार्रवाई से वे लोग बेरोजगार हो गए हैं, इसे लेकर उन्होंने अजमेर नगर निगम के बाहर अपने परिवार के साथ धरना भी दिया। नगर निगम के पास चूड़ी बाजार क्षेत्र में 10 साल पूर्व बनाए गए वेंडिंग जोन में अस्थाई ठेला लगाकर व्यापार करने वाले व्यापारियों ने नगर निगम के अधिकारियों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कहा कि नगर निगम के अधिकारियों द्वारा बड़े व्यवसाइयों से पैसे लेकर हमारे ठेलों को हटाया जा रहा है। व्यापारियों का कहना है कि हमारे पास संपूर्ण दस्तावेज उपलब्ध हैं, उसके बावजूद निगम अधिकारियों द्वारा हजारों रुपये के चालान काटे जाते है और ठेलों को जब्त कर लिया जाता है। निगम कर्मचारियों पर अभद्र व्यवहार का आरोप लगाते हुए व्यापारियों ने कहा कि हमें दुकान खोलने के लिए नगर निगम से समय दिया जाता है, उस समय पर ही हम दुकान खोल सकते हैं। हम चाहते हैं कि हमारे ठेले सुबह से ही लगें, जैसे पहले लगते थे और नगर निगम द्वारा हमें नाजायज परेशान नही किया जाए।

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