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गैस की किल्लत जारी: महीने भर बाद मिलेगा दूसरा सिलेंडर, 25 दिन का नियम फेल

भोपाल  पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध और ऊर्जा आपूर्ति पर मंडराते संकट के बीच राजधानी भोपाल सहित प्रदेश के लाखों रसोई गैस उपभोक्ता एक नई डिजिटल समस्या से जूझ रहे हैं। तेल कंपनियों द्वारा लागू किए गए 25 दिन के अंतराल के नियम ने व्यवहार में लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। कागजों में यह नियम पारदर्शिता और जमाखोरी रोकने के लिए बनाया गया है, लेकिन हकीकत में उपभोक्ताओं को दूसरा सिलेंडर पाने के लिए लगभग एक महीने तक इंतजार करना पड़ रहा है। बुकिंग और डिलीवरी की तारीख के बीच बढ़ते अंतर ने डिजिटल सिस्टम को ऐसा जाल बना दिया है, जिसमें आम आदमी की रसोई फंसती नजर आ रही है। डिजिटल नियम बना परेशानी का कारण     राजधानी की विभिन्न गैस एजेंसियों से मिल रही शिकायतों के अनुसार उपभोक्ताओं को दूसरे सिलेंडर के लिए तय समय से अधिक इंतजार करना पड़ रहा है। नियम के अनुसार एक सिलेंडर की बुकिंग के बाद 25 दिन का अंतराल आवश्यक है, लेकिन सिस्टम की गणना का तरीका उपभोक्ताओं के लिए मुश्किलें खड़ी कर रहा है।     तेल कंपनियां इस अंतराल की गणना बुकिंग की तारीख से नहीं बल्कि सिलेंडर की डिलीवरी की तारीख से कर रही हैं। यही कारण है कि उपभोक्ता समय पर बुकिंग करने के बावजूद अगला सिलेंडर समय पर नहीं ले पा रहे हैं। डिलीवरी में देरी बढ़ा रही इंतजार     गैस एजेंसियों द्वारा सिलेंडर पहुंचाने में होने वाली देरी भी इस समस्या को और गंभीर बना रही है। उदाहरण के तौर पर यदि किसी उपभोक्ता ने 20 फरवरी को गैस बुक की और एजेंसी ने सिलेंडर 26 फरवरी को पहुंचाया, तो सिस्टम के अनुसार अगली बुकिंग 24 मार्च से पहले संभव नहीं होगी।     इस स्थिति में उपभोक्ता को लगभग एक महीने तक इंतजार करना पड़ रहा है। एजेंसियों की देरी का सीधा असर उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है, जबकि डिजिटल सिस्टम उन्हें निर्धारित समय से पहले बुकिंग करने से रोक देता है। जरूरत के समय काम नहीं आ रहा सिस्टम     मध्यमवर्गीय परिवारों में अक्सर गैस की खपत स्थिति के अनुसार बदलती रहती है। घर में मेहमान आने, किसी आयोजन या अन्य कारणों से कई बार सिलेंडर 22–23 दिनों में ही खत्म हो जाता है। ऐसे समय में उपभोक्ता नया सिलेंडर बुक नहीं कर पाते।     मोबाइल एप और ऑनलाइन पोर्टल पर उपभोक्ताओं को ‘अभी बुकिंग संभव नहीं’ जैसा संदेश मिलता है। इससे लोगों में नाराजगी भी बढ़ रही है। उपभोक्ताओं का कहना है कि संकट के समय तकनीक सुविधा देने के बजाय बाधा बन रही है। पारदर्शिता के नाम पर बढ़ी दिक्कत     शहर के नागरिकों का कहना है कि पारदर्शिता और जमाखोरी रोकने के उद्देश्य से बनाया गया यह डिजिटल सिस्टम अब आम उपभोक्ता के लिए परेशानी का कारण बन गया है। पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के कारण पहले ही गैस और ऊर्जा की वैश्विक कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। ऐसे में उपभोक्ता संगठनों का कहना है कि इस नियम को व्यावहारिक बनाया जाना चाहिए। यदि डिलीवरी में देरी हो रही है तो उसकी गणना उपभोक्ता के खिलाफ नहीं होनी चाहिए। नियम में लचीलापन जरूरी     उपभोक्ता संगठनों का मानना है कि सरकार और तेल कंपनियों को इस डिजिटल व्यवस्था की समीक्षा करनी चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार बुकिंग की गणना डिलीवरी की तारीख के बजाय बुकिंग की तारीख से होनी चाहिए या फिर विशेष परिस्थितियों में उपभोक्ताओं को अतिरिक्त छूट दी जानी चाहिए।     यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में यह डिजिटल नियम लाखों परिवारों की रसोई पर और भारी पड़ सकता है।  

ईरान की धमकी के बीच अमेरिका ने लिया फैसला बदलने का कदम, होर्मुज स्ट्रेट पर तेल टैंकरों की आवाजाही पर असर

वाशिंगटन मध्य पूर्व में बढ़ते युद्ध के बीच एक सोशल मीडिया पोस्ट ने वैश्विक तेल बाजार में अचानक हलचल मचा दी. अमेरिका के ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने दावा किया कि अमेरिकी नौसेना ने होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे एक तेल टैंकर को सुरक्षा देते हुए एस्कॉर्ट किया है, ताकि दुनिया तक तेल की आपूर्ति जारी रह सके. लेकिन यह दावा ज्यादा देर तक नहीं टिक पाया. कुछ ही मिनटों बाद यह पोस्ट हटा दी गई और व्हाइट हाउस को आगे आकर सफाई देनी पड़ी। क्रिस राइट ने अपने पोस्ट में लिखा था कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान के दौरान भी वैश्विक ऊर्जा बाजार को स्थिर बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी नौसेना ने सफलतापूर्वक एक तेल टैंकर को होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित बाहर निकलने में मदद की, ताकि वैश्विक बाजारों तक तेल की आपूर्ति बनी रहे। हालांकि, यह जानकारी सामने आते ही तेल बाजार में तेज प्रतिक्रिया देखने को मिली. कुछ ही देर में कीमतों में उतार-चढ़ाव शुरू हो गया. इसके बाद व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलीन लेविट ने प्रेस ब्रीफिंग में साफ किया कि अमेरिकी नौसेना ने फिलहाल किसी भी तेल टैंकर को एस्कॉर्ट नहीं किया है. उन्होंने कहा कि ऐसा करना एक विकल्प जरूर हो सकता है, लेकिन अभी ऐसा कोई मिशन नहीं चल रहा है। अमेरिकी मंत्री के दावे को IRGC ने नकारा इस मामले पर ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC ने भी प्रतिक्रिया दी थी. ईरान के अधिकारियों ने अमेरिकी ऊर्जा मंत्री के दावे को पूरी तरह गलत बताया. उनका कहना था कि कोई भी अमेरिकी नौसैनिक जहाज होर्मुज स्ट्रेट के आसपास आने की हिम्मत तक नहीं कर पाया. बाद में अमेरिकी ऊर्जा विभाग के एक प्रवक्ता ने भी कहा कि ऊर्जा मंत्री के एक्स अकाउंट से जो वीडियो पोस्ट किया गया था, उसे विभाग के कर्मचारियों ने गलत कैप्शन के साथ साझा कर दिया था, इसलिए उसे हटा दिया गया। यह पूरा मामला ऐसे समय सामने आया है जब होर्मुज स्ट्रेट को लेकर वैश्विक बाजार पहले से ही बेहद संवेदनशील स्थिति में हैं. होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम समुद्री ऊर्जा मार्गों में से एक है. यहां से दुनिया के करीब 20 फीसदी कच्चे तेल और बड़ी मात्रा में एलएनजी की सप्लाई गुजरती है। ऑयल टैंकर पर हमले, शिपिंग कंपनियों ने बंद की सर्विस हाल ही में यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑर्गनाइजेशन और अन्य एजेंसियों के आंकड़ों में भी चिंता जताई गई है. 1 से 10 मार्च के बीच कम से कम 10 तेल टैंकरों पर हमले या हमले की कोशिशें दर्ज की गई हैं. इन घटनाओं के बाद कई शिपिंग कंपनियों ने सुरक्षा कारणों से इस रास्ते से गुजरना बंद कर दिया है। ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध शुरू होने के बाद से फारस की खाड़ी में व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही लगभग रुक गई है. इसके कारण खाड़ी क्षेत्र में तेल का भंडार बढ़ने लगा है. कई तेल उत्पादक देशों को मजबूर होकर उत्पादन कम करना पड़ा है. सऊदी अरब, कुवैत, इराक और संयुक्त अरब अमीरात जैसे बड़े तेल उत्पादक देश रोजाना लाखों बैरल कम तेल निकाल रहे हैं। अगर बंद रहा होर्मुज स्ट्रेट तो वैश्विक बाजार पर पड़ेगा असर विशेषज्ञों का मानना है कि अगर होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही जल्दी बहाल नहीं हुई, तो इसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर और ज्यादा पड़ सकता है. हालांकि, ईरान ने साफ संकेत दिया है कि जब तक युद्ध जारी रहेगा, तब तक फारस की खाड़ी से तेल निर्यात सामान्य नहीं होने दिया जाएगा। युद्ध से पहले हर दिन औसतन करीब 138 जहाज होर्मुज स्ट्रेट से गुजरते थे, लेकिन अब यह संख्या लगभग शून्य के करीब पहुंच गई है. इसी बीच ट्रंप प्रशासन वैश्विक बाजार को भरोसा दिलाने की कोशिश कर रहा है. अमेरिका ने शिपिंग कंपनियों को बीमा सुरक्षा देने और जरूरत पड़ने पर नौसेना से टैंकरों को एस्कॉर्ट करने का प्रस्ताव दिया है. इसके बावजूद तेल बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। JPMorgan Chase के कमोडिटी विश्लेषकों ने मंगलवार को कहा, जब तक Strait of Hormuz से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित नहीं हो जाती, तब तक ऐसे नीतिगत फैसलों का तेल की कीमतों पर ज्यादा असर नहीं होगा। युद्ध के कारण सप्लाई प्रभावित होने से कच्चे तेल की कीमतों में भी तेज उछाल आया. सोमवार को कीमतें करीब 30 फीसदी बढ़कर 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं. हालांकि बाद में थोड़ी गिरावट आई, जब राष्ट्रपति ट्रंप ने संकेत दिया कि युद्ध जल्द खत्म हो सकता है. लेकिन इसके अगले ही दिन अमेरिकी रक्षा मंत्री ने कहा कि ईरान के अंदर अब तक के सबसे आक्रामक हमले किए जाएंगे, जिससे बाजार में फिर अनिश्चितता बढ़ गई।

अमरीन-आफरीन का ईरानी डेरा कनेक्शन सामने, बनीं सेक्स रैकेट की हेड

भोपाल भोपाल के बागसेवनिया थाना क्षेत्र में सामने आए हाई प्रोफाइल धर्मांतरण और रेप केस में गिरफ्तार दो सगी बहनें अमरीन और आफरीन फिलहाल जेल में बंद हैं. इस मामले में हर दिन नए और चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं. पुलिस अब इस पूरे मामले की कई एंगल से जांच कर रही है ताकि सच्चाई तक पहुंचा जा सके. पुलिस जांच में यह बात सामने आई है कि दोनों बहनों के परिवार का संबंध भोपाल के ईरानी डेरे से जुड़ा बताया जा रहा है. इस जानकारी के सामने आने के बाद पुलिस ने इस एंगल से भी जांच तेज कर दी है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, जब दोनों बहनें अपने परिवार के साथ अब्बास नगर की झुग्गियों में रहती थीं, उसी समय उनके परिवार की नजदीकियां ईरानी डेरे से बढ़ने लगी थीं. पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि ईरानी डेरे के आपराधिक छवि वाले लोगों से इन दोनों बहनों का कोई संपर्क था या नहीं. फिलहाल जांच एजेंसियां इस मामले से जुड़े सभी संभावित सबूतों को जोड़ने में जुटी हुई हैं ताकि पूरे नेटवर्क की सच्चाई सामने आ सके। ब्यूटी पार्लर की आड़ में चल रहा था रैकेट पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि दोनों बहनों ने ब्यूटी पार्लर की आड़ में अपना रैकेट फैलाया था. पुलिस का कहना है कि इस मामले में यह भी जांच की जा रही है कि अब तक कितनी युवतियां इस जाल का शिकार बनी हैं. जांच एजेंसियां पीड़िताओं तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं ताकि पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके। पुलिस मामले की कई एंगल से जांच में जुटी  इस मामले में एडिशनल डीसीपी गौतम सोलंकी ने बताया कि पुलिस पूरे मामले की सभी पहलुओं से जांच कर रही है. उन्होंने कहा कि ईरानी डेरे को लेकर अभी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है, लेकिन उससे जुड़ी कड़ियों की तलाश की जा रही है. पुलिस का कहना है कि तथ्यों और सबूतों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी और मामले की गहराई से विवेचना जारी है।

सावधान! 21 मार्च से बुध की नई चाल बढ़ा सकती है परेशानी, इन राशियों पर खास असर

ज्योतिष शास्त के अनुसार, जब कोई ग्रह अपनी गति बदलता है तो उसका प्रभाव सभी राशियों के जीवन पर पड़ता है. इसी कड़ी में बुध ग्रह की चाल में बदलाव फिर से कुछ राशि वालों पर अलग- अलग प्रकार से प्रभाव डाल सकता है. आपको बता दें 26 फरवरी 2026 से बुध की उल्टी चाल यानी वक्री अवस्था शुरू हुई थी, जो 21 मार्च 2026 को समाप्त होने जा रही है. इस दिन से ही बुध फिर से सीधी चाल चलेंगे यानी मार्गी होने वाले हैं. मान्यता के अनुसार, बुध का मार्गी होना सामान्य रूप से शुभ माना जाता है, लेकिन कुछ स्थितियों में यह कुछ राशियों के लिए चुनौतियां भी लेकर आ सकता है. आइए सबसे पहले समझते हैं बुध के व्रकी और मार्गी होने क्या राशियों पर क्या प्रभाव पड़ता है. बुध के मार्गी होने का ज्योतिषीय महत्व ज्योतिष शास्त्र में बुध को बुद्धि, वाणी, तर्क, व्यापार, संचार, तकनीक और गणना का कारक ग्रह माना जाता है. जब बुध की चाल बदलती है तो इसका सीधा असर व्यक्ति की सोच, निर्णय क्षमता, बातचीत और कामकाज पर पड़ सकता है. वक्री अवस्था में जहां कई काम अटक सकते हैं, वहीं मार्गी होने पर अक्सर चीजें धीरे-धीरे सामान्य होने लगती हैं. हालांकि यदि ग्रह की स्थिति कमजोर हो या वह अशुभ प्रभाव में हो तो मार्गी अवस्था में भी कुछ राशियों के लिए तनाव और रुकावटें बनी रह सकती हैं. इन राशियों के लिए बढ़ सकती हैं परेशानियां! तुला राशि     तुला राशि के जातकों के लिए बुध की सीधी चाल कुछ मामलों में चुनौतीपूर्ण हो सकती है.     कार्यक्षेत्र में गलतफहमियां बढ़ सकती हैं.     सहकर्मियों के साथ संवाद में सावधानी रखें.     व्यापार से जुड़े लोगों को कागजी कार्यों में विशेष ध्यान देने की जरूरत होगी.     आर्थिक फैसले सोच-समझकर लें. कुंभ राशि     कुंभ राशि वालों के लिए यह समय थोड़ा उतार-चढ़ाव भरा रह सकता है.     कामकाज में अचानक बाधाएं आ सकती हैं.     योजनाएं पूरी होने में देरी हो सकती है.     तकनीकी या ऑनलाइन कार्यों में परेशानी आ सकती है.     यात्रा से जुड़े मामलों में भी विलंब संभव है. मीन राशि     मीन राशि के जातकों को इस दौरान मानसिक दबाव महसूस हो सकता है.     निर्णय लेने में असमंजस की स्थिति बन सकती है.     धन से जुड़े मामलों में सावधानी जरूरी है.     किसी बात को लेकर गलतफहमी या विवाद की स्थिति बन सकती है.     कामकाज में ज्यादा मेहनत करनी पड़ सकती है.  

एमपी के कई शहरों में गर्मी की लहर, ग्वालियर-चंबल सबसे ज्यादा प्रभावित, भोपाल और इंदौर में भी तापमान बढ़ा

भोपाल  मध्य प्रदेश में मार्च के दूसरे सप्ताह की शुरुआत के साथ ही गर्मी ने तेज तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। राज्य के कई हिस्सों में तापमान सामान्य से काफी ऊपर पहुंच गया है, जबकि ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में यह औसत से करीब 6 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया है। मौसम विभाग का अनुमान है कि 15 मार्च के बाद गर्मी का असर और तेज हो सकता है। यह आज की ताज़ा ख़बरों में मौसम से जुड़ा बड़ा अपडेट माना जा रहा है। धार में सबसे अधिक 39 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज मंगलवार को प्रदेश के कई जिलों में तापमान 38 डिग्री के पार पहुंच गया। धार में सबसे अधिक 39 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। इसके अलावा सागर में 38.9 डिग्री, रतलाम और नर्मदापुरम में 38.8 डिग्री, खजुराहो में 38.3 डिग्री, गुना में 38.1 डिग्री तथा दमोह और टीकमगढ़ में 38 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। पांच बड़े शहरों की बात करें तो ग्वालियर सबसे गर्म रहा, जहां पारा 37.2 डिग्री तक पहुंच गया। उज्जैन में 37 डिग्री, इंदौर में 36.8 डिग्री, जबलपुर में 36.6 डिग्री और भोपाल में 36.2 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। अधिकांश शहरों में अधिकतम तापमान 34 डिग्री से ऊपर बना हुआ है। हवा की दिशा बदलने से बढ़ी गर्मी मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार प्रदेश में हवा की दिशा में बदलाव आया है। पहले जहां हवाएं उत्तर-पूर्व से आ रही थीं, वहीं अब पश्चिम और उत्तर-पश्चिम की ओर से चल रही हैं। इन हवाओं में नमी कम है और ये राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों से होकर मध्यप्रदेश तक पहुंचती हैं, जिससे तापमान तेजी से बढ़ रहा है। 15 मार्च के बाद मौसम में बदलाव संभव मौसम विभाग के मुताबिक 15 मार्च के बाद एक पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो सकता है। इसके असर से प्रदेश के पूर्वी और दक्षिणी हिस्सों में बादल छाने और हल्की बूंदाबांदी की संभावना जताई जा रही है।मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि मार्च में लू चलने की संभावना नहीं है, लेकिन अप्रैल और मई में भीषण गर्मी पड़ सकती है। इस दौरान 15 से 20 दिनों तक हीट वेव का असर देखने को मिल सकता है। ग्वालियर-चंबल, जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर संभाग के कई जिलों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर जा सकता है। भोपाल, इंदौर, उज्जैन और नर्मदापुरम संभाग में भी तेज गर्मी पड़ने के संकेत हैं।  मंगलवार को प्रदेश के कई शहरों में तापमान 38 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच गया। धार में सबसे अधिक 39 डिग्री तापमान दर्ज किया गया, जबकि सागर में 38.9 डिग्री, रतलाम और नर्मदापुरम में 38.8 डिग्री, खजुराहो में 38.3 डिग्री और गुना में 38.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। दमोह और टीकमगढ़ में भी पारा 38 डिग्री तक पहुंच गया। प्रदेश के लगभग सभी प्रमुख शहरों में अधिकतम तापमान 34 डिग्री या उससे ऊपर रिकॉर्ड किया गया। बड़े शहरों की बात करें तो ग्वालियर में तापमान 37.2 डिग्री, उज्जैन में 37 डिग्री, इंदौर में 36.8 डिग्री, जबलपुर में 36.6 डिग्री और भोपाल में 36.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि मार्च की शुरुआत में इतनी तेजी से तापमान बढ़ना सामान्य ट्रेंड से अलग है। मौसम विभाग के अनुसार, तापमान बढ़ने की मुख्य वजह हवा की दिशा में बदलाव है। फिलहाल प्रदेश में हवाएं उत्तर-पूर्व की बजाय पश्चिम और उत्तर-पश्चिम दिशा से आ रही हैं। इन हवाओं में नमी कम है और ये रेगिस्तानी क्षेत्रों से होकर आती हैं, जिससे तापमान में तेजी से वृद्धि हो रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि मार्च का मौसम संक्रमण और एलर्जी के लिहाज से संवेदनशील होता है। दिन में तेज गर्मी और सुबह-रात हल्की ठंड रहने के कारण सर्दी-जुकाम, एलर्जी और अस्थमा के मरीज बढ़ सकते हैं। डॉक्टरों ने खासतौर पर बच्चों और बुजुर्गों को सुबह और देर रात ठंडी हवा से बचने की सलाह दी है। मौसम विभाग का अनुमान है कि 15 मार्च के बाद प्रदेश के कुछ हिस्सों में मौसम में हल्का बदलाव भी देखने को मिल सकता है। पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से पूर्वी और दक्षिणी क्षेत्रों में बादल छाने और हल्की बूंदाबांदी की संभावना जताई गई है। हालांकि इससे गर्मी में ज्यादा राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इस साल अप्रैल और मई के महीने सबसे अधिक गर्म रह सकते हैं। ग्वालियर, चंबल, सागर, रीवा, शहडोल और जबलपुर संभाग के कई जिलों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार जाने की संभावना जताई गई है। भोपाल, इंदौर और उज्जैन संभाग में भी गर्मी का असर तेज रहने का अनुमान है। पिछले वर्षों के आंकड़ों के अनुसार, मार्च में प्रदेश में दिन गर्म और रातें अपेक्षाकृत ठंडी रहती हैं, जबकि कभी-कभी बारिश भी होती है। इस बार भी ऐसा ही मौसम देखने को मिल सकता है, लेकिन शुरुआती दिनों में ही तापमान में तेजी से बढ़ोतरी ने लोगों को गर्मी का अहसास जल्दी करा दिया है।

भोपाल समेत कई राज्यों में IT की कार्रवाई, कारोबारी दिलीप गुप्ता के ठिकानों पर छापा

भोपाल  राजधानी भोपाल में बुधवार सुबह उस समय हलचल मच गई जब आयकर विभाग की विशेष टीम ने शहर के बड़े माइनिंग कारोबारी दिलीप गुप्ता से जुड़े ठिकानों पर एक साथ छापेमारी शुरू कर दी। दिल्ली से पहुंची आयकर विभाग की टीम ने तड़के चूना भट्टी क्षेत्र में स्थित उनके आवास और एमपी नगर इलाके में मौजूद व्यावसायिक कार्यालयों पर कार्रवाई की। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार यह अभियान केवल भोपाल तक सीमित नहीं है, बल्कि विभाग की अलग-अलग टीमें कानपुर, छतरपुर और दिल्ली समेत कई शहरों में गुप्ता से जुड़े प्रतिष्ठानों और कार्यालयों की जांच कर रही हैं, जिससे पूरे मामले को बड़े पैमाने की समन्वित कार्रवाई माना जा रहा है। आयकर विभाग की इस कार्रवाई के पीछे मुख्य रूप से टैक्स चोरी और वित्तीय लेन-देन में संभावित अनियमितताओं की जांच को प्रमुख कारण बताया जा रहा है। विभाग को लंबे समय से इनपुट मिल रहे थे कि माइनिंग कारोबार से होने वाली आय का पूरा विवरण आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज नहीं किया गया है। सूत्रों के अनुसार छापेमारी के दौरान अधिकारियों ने कई महत्वपूर्ण वित्तीय दस्तावेज, कंप्यूटर हार्ड डिस्क और अन्य डिजिटल उपकरण अपने कब्जे में लिए हैं। इन सभी रिकॉर्ड्स की जांच कर वास्तविक आय और घोषित आय के बीच अंतर का आकलन किया जा रहा है, ताकि किसी भी प्रकार की कर चोरी या वित्तीय हेरफेर का पता लगाया जा सके। जांच एजेंसियों के रडार पर पहले भी रह चुके है दिलीप गुप्ता गौरतलब है कि दिलीप गुप्ता पहले भी जांच एजेंसियों के रडार पर रह चुके हैं। पिछले वर्ष नवंबर में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ ने भी उनके ठिकानों पर कार्रवाई की थी, जिसमें करोड़ों रुपये की कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच की गई थी। उस समय तलाशी के दौरान बड़ी मात्रा में नकदी, जिंदा कारतूस और कई संपत्तियों से संबंधित दस्तावेज बरामद होने की जानकारी सामने आई थी। आरोप लगाए गए थे कि निवेश योजनाओं के नाम पर करोड़ों रुपये जुटाकर फर्जी दस्तावेजों के जरिए शेयर आवंटन किया गया। अब आयकर विभाग की नई कार्रवाई ने इस मामले को फिर से चर्चा में ला दिया है। अधिकारियों से सांठगांठ की जानकारी मौजूदा जांच में अधिकारियों द्वारा बेनामी संपत्तियों और हवाला से जुड़े लेन-देन के पहलुओं की भी जांच की जा रही है। आयकर विभाग की टीम दस्तावेजों का बारीकी से अध्ययन कर रही है और घर के सदस्यों तथा कार्यालय के कर्मचारियों से पूछताछ भी की जा रही है। छापेमारी के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और जांच पूरी होने तक बाहरी लोगों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई है। इस कार्रवाई के बाद भोपाल के व्यापारिक और माइनिंग क्षेत्र में भी हलचल देखी जा रही है, क्योंकि कारोबारियों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि आने वाले दिनों में और भी जांच या खुलासे सामने आ सकते हैं। माइनिंग सेक्टर में सक्रिय दिलीप गुप्ता के खिलाफ यह कार्रवाई प्रदेश में आर्थिक अनियमितताओं पर नियंत्रण के प्रयासों के रूप में देखी जा रही है। हालांकि आयकर विभाग ने अभी तक आधिकारिक रूप से जब्त की गई संपत्तियों या दस्तावेजों का विस्तृत विवरण जारी नहीं किया है, लेकिन जिस स्तर पर यह अभियान चलाया जा रहा है उससे यह अनुमान लगाया जा रहा है कि जांच में बड़े वित्तीय लेन-देन और संभावित अघोषित संपत्ति से जुड़े तथ्य सामने आ सकते हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि मामले में आगे किस प्रकार की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।  

बार-बार आखिरी समय में काम क्यों बिगड़ जाता है? प्रेमानंद महाराज ने खोल दिया राज

जीवन में कई बार आपको भी ऐसा लगा होगा कि आपके हर काम बनते हुए भी बिगड़ जाते हैं। अक्सर होता है कि कोई काम बिल्कुल अंत तक पहुंच जाता है और अचानक सब कुछ बिगड़ जाता है। कई बार तो चीजें शुरू होते ही खराब हो जाती हैं। ऐसी स्थिति में समझ नहीं आता कि भाग्य को दोष दें या कर्मों को। प्रेमानंद महाराज से पूछा गया सवाल प्रेमानंद जी महाराज के सत्संग में आए एक श्रद्धालु का भी ठीक यही प्रश्न था। उन्होंने कहा कि महाराज जी मेरे बनते हुए काम आखिर में क्यों बिगड़ जाते हैं। ऐसा बार-बार होने के पीछे आखिर क्या वजह है। इसपर प्रेमानंद जी महाराज का उत्तर हर किसी को जरूर जानना चाहिए। पूर्व कर्मों के फल हैं प्रेमानंद जी महाराज कहते हैं कि ऐसा होने के पीछे सबसे बड़ी वजह आप पूर्व जन्मों के पाप होते हैं। ये पूर्व के पाप ही हमें इस जीवन में भी दुख का अनुभव कराते हैं। वहीं हमारे अच्छे कर्म हमें सफलता प्रदान करते हैं। सफलता की ओर ले जाती हैं ये चीजें महाराज जी कहते हैं कि पूर्व जन्म के पाप ही असफलता का कारण होते हैं। इन्हें नष्ट करने का एक ही उपाय है कि आप सद्मार्ग की ओर बढ़ें। प्रभु का नाम जप करें, कीर्तन करें, अच्छे इंसान बनें, तीर्थयात्रा करें और लोगों की सेवा करें। ये सभी चीजें आपके पाप कर्म नष्ट कर के सफलता की ओर ले जाती हैं। आध्यात्म से जुड़ना है जरूरी प्रेमानंद जी महाराज कहते हैं कि इसी कारण आध्यात्म से जुड़ना बहुत जरूरी है। अन्यथा आपकी कामनाएं तो रहेंगी लेकिन वो कभी पूरी नहीं होंगी। जिस वजह से शोक, दुख, चिंता, भय आदि लगे ही रहेंगे। मन की शांति है जरूरी प्रेमानंद जी महाराज कहते हैं कि मन की शांति बहुत जरूरी है। अगर कोई इंसान गरीब भी है लेकिन धर्म के रास्ते पर चलता है, तो आप देखेंगे कि वो शांत है और जीवन में खुश है। वहीं अगर आप धनवान भी हैं लेकिन वासनाओं में लिप्त हैं, तो आपका जीवन हमेशा दुख, शोक, पीड़ा, चिंता आदि से भरा रहेगा। भजन से ही संभव है मन की शांति महाराज जी कहते हैं कि मन की शांति सिर्फ भजन से ही संभव है। आप धन, पद और प्रतिष्ठा से सब कुछ खरीद सकते हैं लेकिन मन की शांति नहीं। इसलिए अच्छे कर्म करें, भगवान का भजन करें; सफलता और सुख-शांति अपने आप ही आपके जीवन में प्रवेश करेंगे।

प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने ली विभागों की बैठक, कांकेर में नेशनल लोक अदालत की तैयारी जारी

कांकेर. आगामी शनिवार 14 मार्च को आयोजित होने वाली नेशनल लोक अदालत की तैयारियों एवं अधिक से अधिक प्रकरणों के निराकरण के लिए जिला न्यायालय कांकेर में बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री संजीव कुमार टामक द्वारा की गई। बैठक में बैंक, नगरपालिका, विद्युत एवं दूरसंचार विभाग के अधिकारियों से न्यायालयों में लंबित प्रकरणों को अधिकतम संख्या में राजीनामा, समझौते के माध्यम से नेशनल लोक अदालत में निराकृत कराने पर विशेष बल दिया गया। प्रधान जिला न्यायाधीश द्वारा संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि जिन प्रकरणों में समझौते की संभावना है, उनकी सूची शीघ्र तैयार कर संबंधित न्यायालयों में प्रस्तुत करें, ताकि पक्षकारों को समय पर नोटिस जारी किया जा सके। साथ ही प्री-लिटिगेशन प्रकरणों को भी समय पर प्रस्तुत करने हेतु विभागीय अधिकारियों को विशेष निर्देश दिए गए, जिससे अधिकतम मामलों का त्वरित एवं प्रभावी निराकरण संभव हो सके। बैठक में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कांकेर की सचिव श्रीमती शांति प्रभु जैन सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

चैत्र नवरात्रि 2026: घर में नहीं होनी चाहिए ये 5 चीजें, तभी बरसेगी मां दुर्गा की कृपा

चैत्र नवरात्रि केवल उपवास और पूजा-पाठ का पर्व नहीं है, बल्कि यह अपने अंतर्मन और परिवेश को शुद्ध करने का एक पावन अवसर भी है। हिंदू धर्म में मान्यता है कि नवरात्रि के नौ दिनों में आदिशक्ति मां दुर्गा स्वयं धरती पर पधारती हैं और अपने भक्तों के घर में वास करती हैं। माता रानी के स्वागत के लिए केवल मन की शुद्धि ही काफी नहीं है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, हमारे घर में रखी कुछ चीजें नकारात्मक ऊर्जा का संचय करती हैं, जो सुख-समृद्धि के मार्ग में अदृश्य बाधाएं उत्पन्न कर सकती हैं। यदि घर में वास्तु दोष हो या भारी मात्रा में नकारात्मक ऊर्जा जमा हो, तो कठिन पूजा-अर्चना के बाद भी वह शुभ फल प्राप्त नहीं हो पाता जिसकी हम कामना करते हैं। 19 मार्च 2026 से शुरू हो रहे नव-संवत्सर और चैत्र नवरात्रि से पहले यह अत्यंत आवश्यक है कि हम अपने आशियाने को उन वस्तुओं से मुक्त करें जो दरिद्रता और अशांति को निमंत्रण देती हैं। घर के कोनों में छिपा कबाड़ या टूटी-फूटी वस्तुएं न केवल धन के प्रवाह को रोकती हैं, बल्कि परिवार के सदस्यों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी बुरा असर डालती हैं। तो आइए जानते हैं, वास्तु के उन 5 खास नियमों के बारे में जिन्हें अपनाकर आप नवरात्रि से पहले अपने घर का कायाकल्प कर सकते हैं। खंडित मूर्तियां या फटे हुए धार्मिक चित्र अक्सर हम अनजाने में घर के मंदिर में ऐसी मूर्तियां रखे रहते हैं जो कहीं से खंडित होती हैं या देवी-देवताओं के चित्र फटे हुए होते हैं। वास्तु के अनुसार, ऐसी मूर्तियां घर में दुख और अशांति का कारण बनती हैं। नवरात्रि शुरू होने से पहले इन्हें पूरे सम्मान के साथ किसी पवित्र नदी में प्रवाहित कर दें या पीपल के पेड़ के नीचे रख आएं। खराब या बंद पड़ी घड़ियां वास्तु में रुकी हुई घड़ी को ‘ठहरे हुए भाग्य’ का प्रतीक माना जाता है। बंद पड़ी घड़ियां घर की प्रगति को रोकती हैं और नकारात्मक ऊर्जा पैदा करती हैं। यदि आपके घर में कोई ऐसी घड़ी है जो काफी समय से बंद है या टूटी हुई है, तो उसे तुरंत ठीक कराएं या घर से बाहर निकाल दें। टूटे हुए कांच और बर्तन टूटे हुए शीशे या चटके हुए बर्तन घर में दरिद्रता (गरीबी) को न्योता देते हैं। नवरात्रि के दौरान माता का भोग लगाने के लिए साफ और अखंडित बर्तनों का ही उपयोग होना चाहिए। इसलिए, रसोईघर या श्रृंगार दान में रखे टूटे हुए कांच के सामान को हटाना ही श्रेयस्कर है। फटे-पुराने जूते और चप्पल वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर के मुख्य द्वार या अलमारी के नीचे रखे फटे-पुराने जूते-चप्पल नकारात्मकता का सबसे बड़ा स्रोत होते हैं। यह शनि दोष का भी कारण बन सकते हैं। नवरात्रि से पहले घर के कोनों की सफाई करें और जो जूते उपयोग में नहीं हैं, उन्हें हटा दें ताकि सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहे। कबाड़ और बेकार का सामान घर की छत या स्टोर रूम में रखा पुराना कबाड़, जंग लगा लोहा या रद्दी कागज मानसिक तनाव का कारण बनते हैं। माता अंबे की कृपा पाने के लिए घर के वातावरण को हल्का और खुला रखना जरूरी है। कबाड़ हटाने से घर में ‘प्राण ऊर्जा’ का संचार बढ़ता है और आर्थिक तंगी दूर होती है।

सरपंच व सचिव चला रहे अपने राज सरकार के पैसों का उडा रहे धज्जियां

सरपंच व सचिव चला रहे अपने  राज सरकार के पैसों का उडा रहे धज्जियां। राजेंद्रग्राम/छबिलाल जनपद पंचायत पुष्पराजगढ़ अंतर्गत ग्राम पंचायत दुनिया के सरपंच श्रीमती जोगवती व सचिव पंचम सिमर को कर रहे अपने मन की राज और सरकार  के पैसों का धज्जियां उड़ाते नजर आ रहे हैं, अगर देखा जाए तो ग्राम पंचायत दुनिया के ग्राम मिर्च दादर में शासकीय प्राथमिक विद्यालय स्थित है जिसका बाउंड्री कारण किया जा रहा है जिसमें सुचारू रूप से गुणवत्ता विहीन है ऐसा लगता है की सीमेंट नहीं राख से चुने किया गया हो दीवाल को छूने से धूल जैसा उड़ रहा है उसे बाउंड्री वॉल में सरकार के द्वारा लाखों रुपए की लागत लगाकर बाउंड्री बनाने का निर्देश दिया गया है लेकिन एक पैसे का नहीं समझ में आ रहा है। उसे बाउंड्री वालों को बनते बनते लगभग एक से डेढ़ साल पूरा हो चुका है लेकिन अभी तक काम को पूरा कर सरपंच संचिव के द्वारा विद्यालय परिसर को नहीं सोपा गया है। और अगर देखा जाए तो कहीं पहले स्टार अधूरा तो कहीं चुनाई अधूरा तो कहीं दीवाल ही तैयार नहीं किया गया है और काम को पेंडिंग में छोड़ दिया गया है जहां कोई अधिकारियों  कर्मचारी के द्वारा जाकर वहां मौके पर संज्ञान में नहीं लिया जाता है। और यह भी कहा जाता है कि अगर सरिया को खुले में छोड़ दिया जाता है तो बहुत जल्दी जंग लग जाता है तो कई सालों से पड़ा हुआ जंग वाला सरिया टूटने के कगार में भी आ चुके हैं ऐसे में दीवार क्या सक्सेसफुल हो पाएगी। और जानकारी के अनुसार बताया गया की लगभग 1 साल काम को पेंडिंग में रखकर सरपंच सचिव चल फिर कर भी देखने नहीं पहुंच पा रहे हैं। की बाउंड्री बच्चा की गिर गया।

मंत्री सारंग ने रचना टॉवर का निरीक्षण किया, परिसर में आधुनिक सुविधाओं के लिए निर्देश जारी

मंत्री  विश्वास कैलाश सारंग ने किया रचना टॉवर का दौरा  रचना टॉवर परिसर में होगा सौंदर्यीकरण, पार्क, ओपन जिम और पोल लाइट लगाने के निर्देश भोपाल  सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री  विश्वास कैलाश सारंग ने बुधवार को नरेला विधानसभा अंतर्गत स्थित रचना टॉवर परिसर का दौरा कर क्षेत्र की व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने स्थानीय नागरिकों से चर्चा कर क्षेत्र की समस्याओं और आवश्यकताओं की जानकारी ली। नागरिकों द्वारा क्षेत्र में बेहतर सार्वजनिक सुविधाओं और सौंदर्यीकरण की मांग को ध्यान में रखते हुए मंत्री  सारंग ने अधिकारियों को रचना टॉवर के समक्ष स्थित पेविंग के समीप सौंदर्यीकरण कार्य कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस स्थान को व्यवस्थित और आकर्षक रूप देने के लिए यहां पार्क का विकास किया जाएगा, जिससे क्षेत्र के नागरिकों को स्वच्छ और हरित वातावरण मिल सके। मंत्री  सारंग ने निर्देश दिए कि पार्क के साथ ही यहां ओपन जिम की भी व्यवस्था की जाए, जिससे क्षेत्र के नागरिक नियमित रूप से व्यायाम कर सकें और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा मिल सके। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में बढ़ती आबादी को देखते हुए इस प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध कराना आवश्यक है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि पार्क और ओपन जिम क्षेत्र की फेंसिंग कर उसे सुरक्षित और व्यवस्थित बनाया जाए। मंत्री  सारंग ने क्षेत्र में बेहतर प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए रचना टॉवर के समक्ष पोल लाइट लगाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि रचना टॉवर परिसर के सौंदर्यीकरण से संबंधित सभी कार्यों की कार्ययोजना तैयार कर शीघ्रता से कार्य प्रारंभ किया जाए, जिससे क्षेत्र के नागरिकों को जल्द से जल्द इन सुविधाओं का लाभ मिल सके। इस अवसर पर संबंधित विभागों के अधिकारी और स्थानीय नागरिक भी उपस्थित रहे। नागरिकों ने क्षेत्र के विकास के लिए मंत्री  सारंग का आभार व्यक्त किया। 

आम जनता के लिए राहत: विवादित जमीन की रजिस्ट्री पर रोक, मुकदमेबाजी कम करने का योगी सरकार का फैसला

लखनऊ यूपी में जमीन की खरीद-फरोख्त से जुड़े विवाद लंबे समय से आम लोगों के लिए बड़ी परेशानी बने हुए हैं. कई मामलों में यह सामने आता रहा है कि किसी जमीन की रजिस्ट्री ऐसा व्यक्ति अपने नाम से कर देता है जो उसका वास्तविक मालिक ही नहीं होता. कभी प्रतिबंधित जमीन की बिक्री हो जाती है, तो कहीं सरकारी या कुर्क संपत्ति भी रजिस्ट्री के जरिए दूसरे के नाम दर्ज हो जाती है. ऐसे मामलों का नतीजा अक्सर वर्षों तक चलने वाले कोर्ट केस और आर्थिक-मानसिक परेशानियों के रूप में सामने आता है। इन्हीं समस्याओं को ध्यान में रखते हुए अब योगी सरकार ने बड़ा कदम उठाने का फैसला किया है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में संपत्ति की रजिस्ट्री प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने से जुड़ा अहम प्रस्ताव मंजूर किया गया है. सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद फर्जी और विवादित जमीन की रजिस्ट्री पर प्रभावी रोक लग सकेगी और आम लोगों को अनावश्यक मुकदमेबाजी से राहत मिलेगी। रजिस्ट्री से पहले होगी दस्तावेजों की सख्त जांच नई व्यवस्था के तहत अब जमीन की रजिस्ट्री कराने से पहले उससे जुड़े दस्तावेजों की विस्तृत जांच अनिवार्य होगी. विशेष रूप से खतौनी, स्वामित्व से जुड़े रिकॉर्ड और अन्य जरूरी दस्तावेजों का परीक्षण किया जाएगा. इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि जो व्यक्ति जमीन बेच रहा है, वही उसका वास्तविक मालिक हो और संपत्ति पर किसी तरह का कानूनी विवाद या प्रतिबंध न हो. राज्य सरकार का मानना है कि यदि रजिस्ट्री से पहले ही दस्तावेजों की सख्ती से जांच कर ली जाए तो बाद में पैदा होने वाले कई विवादों को रोका जा सकता है। क्यों जरूरी हुआ यह फैसला राज्य के स्टाम्प एवं पंजीयन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रविंद्र जयसवाल ने बताया कि हाल के वर्षों में कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें संपत्ति का वास्तविक मालिक कोई और होता है लेकिन रजिस्ट्री किसी दूसरे व्यक्ति के नाम हो जाती है. कई बार ऐसा भी होता है कि प्रतिबंधित या विवादित जमीन को भी बेच दिया जाता है. कुछ मामलों में तो कुर्क की गई संपत्ति या सरकारी जमीन का भी विक्रय विलेख तैयार कराकर उसका पंजीकरण करा लिया जाता है. ऐसे मामलों का पता तब चलता है जब बाद में कोई पक्ष अदालत का दरवाजा खटखटाता है. तब तक जमीन की खरीद-फरोख्त कई हाथों में जा चुकी होती है और विवाद और जटिल हो जाता है. सीमित अधिकार के कारण हो जाती थी रजिस्ट्री वर्तमान में जमीन की रजिस्ट्री की प्रक्रिया रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1908 के तहत संचालित होती है. इस कानून के अनुसार उप-निबंधक के पास किसी दस्तावेज के पंजीकरण से इनकार करने के अधिकार बहुत सीमित हैं. कानून की धारा 35 के तहत उप-निबंधक केवल कुछ परिस्थितियों में ही रजिस्ट्री रोक सकता है. यही वजह है कि कई बार संदिग्ध मामलों में भी रजिस्ट्री हो जाती है और बाद में विवाद खड़ा हो जाता है. सरकार का कहना है कि इसी खामी को दूर करने के लिए कानून में संशोधन की आवश्यकता महसूस की गई। कानून में जोड़ी जाएंगी नई धाराएं सरकार द्वारा प्रस्तावित संशोधन के तहत रजिस्ट्रेशन अधिनियम में नई धाराएं जोड़ी जाएंगी. इनमें प्रमुख रूप से धारा 22-A, 22-B और 35-A शामिल होंगी. धारा 22-A के तहत कुछ श्रेणियों की संपत्तियों के दस्तावेजों के पंजीकरण पर रोक लगाने का प्रावधान होगा. धारा 22-B के तहत पंजीकरण से पहले अचल संपत्ति की पहचान सुनिश्चित करने की व्यवस्था की जाएगी. धारा 35-A के अंतर्गत यदि रजिस्ट्री के लिए प्रस्तुत दस्तावेजों के साथ स्वामित्व, अधिकार, कब्जा या हस्तांतरण से जुड़े आवश्यक कागजात संलग्न नहीं होंगे, तो पंजीकरण अधिकारी को रजिस्ट्री से इनकार करने का अधिकार होगा. सरकार इन दस्तावेजों की सूची राजपत्र में अधिसूचना जारी कर तय करेगी। विवादित जमीन की बिक्री पर लगेगी रोक सरकार का मानना है कि इस नई व्यवस्था के लागू होने से कई तरह की समस्याओं पर रोक लग सकेगी. उदाहरण के तौर पर- प्रतिबंधित जमीन की बिक्री, सरकारी भूमि की रजिस्ट्री, कुर्क संपत्ति का विक्रय, वास्तविक स्वामी के अलावा किसी और द्वारा जमीन बेच देना जैसे मामलों को शुरुआत में ही रोका जा सकेगा. इससे जमीन से जुड़े विवादों में कमी आने की उम्मीद है। आम लोगों को मिलेगी बड़ी राहत राज्य सरकार का कहना है कि इस बदलाव का सबसे बड़ा फायदा आम लोगों को मिलेगा. अक्सर देखा जाता है कि लोग अपनी जीवन भर की जमा पूंजी लगाकर जमीन या मकान खरीदते हैं. बाद में यदि पता चलता है कि संपत्ति विवादित है या किसी और की है, तो उन्हें वर्षों तक अदालतों के चक्कर लगाने पड़ते हैं. नई व्यवस्था लागू होने से ऐसे मामलों की संभावना काफी कम हो सकती है। अन्य राज्यों में भी लागू हैं ऐसे प्रावधान सरकारी अधिकारियों के मुताबिक देश के कई राज्यों में इसी तरह के प्रावधान पहले से लागू हैं, जहां संदिग्ध या विवादित संपत्तियों की रजिस्ट्री पर रोक लगाने की व्यवस्था की गई है. उत्तर प्रदेश में भी अब इसी दिशा में कदम उठाया गया है, ताकि जमीन से जुड़े मामलों में पारदर्शिता बढ़ाई जा सके. यह प्रस्ताव भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची की समवर्ती सूची की प्रविष्टि-6 के अंतर्गत लाया गया है. इसका मतलब यह है कि जमीन और संपत्ति के पंजीकरण से जुड़े मामलों में राज्य सरकार को कानून बनाने का अधिकार है, बशर्ते वह संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप हो। आगे क्या होगा कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद अब इस प्रस्ताव से संबंधित विधेयक को राज्य विधानमंडल में पेश किया जाएगा. विधानमंडल से स्वीकृति मिलने के बाद इसे कानून का रूप दिया जाएगा और फिर पूरे प्रदेश में नई व्यवस्था लागू की जाएगी. सरकार का मानना है कि यह कदम जमीन से जुड़े विवादों को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि रजिस्ट्री से पहले स्वामित्व और दस्तावेजों की जांच अनिवार्य हो जाती है, तो इससे संपत्ति लेन-देन की प्रक्रिया अधिक सुरक्षित हो जाएगी. इससे न केवल धोखाधड़ी के मामलों में कमी आएगी बल्कि जमीन खरीदने वाले लोगों का भरोसा भी बढ़ेगा।

मेडिकल पीजी की 780 सीटें खाली, डॉक्टरों का सवाल—1.3 करोड़ फीस कौन देगा?

कर्नाटक नीट पीजी की कटऑफ माइनस 40 तक गिरने के बावजूद कर्नाटक में मेडिकल पीजी की 780 से ज्यादा सीटें खाली रह गई हैं। कर्नाटक एग्जामिनेशन अथॉरिटी (KEA) ने 7 मार्च को नीट पीजी काउंसलिंग की प्रक्रिया पूरी कर ली थी जिसके बाद प्राप्त आंकड़ों से पता चलता है कि राज्य में 4,773 पोस्टग्रेजुएट मेडिकल सीटों में से 783 (16 फीसदी) सीटें खाली रह गईं। इस साल लगभग 14400 छात्रों ने काउंसलिंग के लिए रजिस्ट्रेशन कराया और लगभग 10000 छात्रों ने केईए (KEA) पोर्टल के जरिए मेडिकल पीजी सीटों के लिए वेब ऑप्शन चुने। विशेषज्ञों ने सीटों के खाली रहने के लिए एक ही साल में 967 सीटों का बढ़ना और काउंसलिंग के लंबे राउंड्स को मुख्य वजह बताया है। 1.3 करोड़ रुपये तक फीस ज्यादातर सीटें जो खाली रह गई हैं, वे मैनेजमेंट कोटे के तहत आती हैं; इन सीटों की फीस प्राइवेट कॉलेजों में एनाटॉमी की सीट के लिए 25,000 रुपये से लेकर डर्मेटोलॉजी की सीट के लिए 1.3 करोड़ रुपये तक है। हैरानी की बात यह है कि पॉपुलर स्ट्रीम की सीटें भी खाली पड़ी हैं। उदाहरण के लिए, जनरल मेडिसिन में कुल 500 सीटें उपलब्ध थीं, जिनमें से 37 अभी भी खाली हैं। एमडी रेडियोडायग्नोसिस में 287 सीटों में से 35 सीटें खाली हैं। जनरल सर्जरी में 425 सीटों में से 11 सीटें खाली रह गई हैं, जबकि डर्मेटोलॉजी में 196 सीटों में से 15 और पीडियाट्रिक्स में 362 सीटों में से 25 सीटें खाली हैं। इतनी अधिक सीटें खाली रहने के मामले पर सोशल मीडिया पर भी चर्चा छिड़ गई है। डॉक्टर और उम्मीदवार दोनों ही अपनी राय साझा कर रहे हैं। डर्मेटोलॉजी की बढ़ी हुई फीस को देखते हुए एक न्यूरोलॉजिस्ट ने लिखा, ‘एमडी डर्मेटोलॉजी की एक सीट के लिए 1.3 करोड़ रुपये? कोई हैरानी की बात नहीं कि इसे लेने वाला कोई नहीं मिला। मेडिकल शिक्षा की लागत कम होनी चाहिए। इसका असर मेडिकल इलाज की लागत कम होने पर भी पड़ सकता है।’ इसके अलावा प्री-क्लिनिकल और पैरा-क्लिनिकल सीटों पर बहुत कम छात्रों ने दाखिला लिया। डेटा से पता चलता है कि कुल 119 सीटों में से, केवल आठ छात्रों ने एनाटॉमी की सीटें लीं। कोर्स , कुल सीटें , खाली सीटें एनाटॉमी 119 111 फिजियोलॉजी 117 97 बायोकेमिस्ट्री 113 92 फार्माकोलॉजी 123 53 पैथोलॉजी 265 39 माइक्रोबायोलॉजी 130 99 कम्युनिटी मेडिसिन 143 63 फोरेंसिक मेडिसिन 77 47 डर्मेटोलॉजी 196 15 पीडियाट्रिक्स 362 25 जनरल मेडिसिन 500 37 रेडियो डायग्नोसिस 287 35 रेस्पिरेटरी मेडिसिन 87 4 इमरजेंसी मेडिसिन 74 1 ऑर्थोपेडिक्स 358 28 एनेस्थीसिया 443 3 जनरल सर्जरी 425 11 ऑब्सटेट्रिक्स और गायनेकोलॉजी 362 18 डिप्लोमा इन क्लिनिकल पैथोलॉजी 2 2 डिप्लोमा इन पब्लिक हेल्थ 3 3 कुल 4,186 783 इस साल क्यों हालात अलग रिपोर्ट के अनुसार पिछले साल की तुलना से पता चलता है कि 2024–25 में, केईए काउंसलिंग के जरिए कुल 3,806 मेडिकल PG सीटें उपलब्ध थीं। इनमें से 3,378 सीटें अलॉट कर दी गईं, जबकि 428 सीटें खाली रह गईं। ये सभी सीटें प्री- और पैरा-क्लिनिकल प्रोग्राम की थीं। इसी तरह साल 2023 में प्री- और पैरा-क्लिनिकल स्ट्रीम में 478 सीटें अलॉट नहीं हो पाई थीं। यह स्थिति इस साल से काफी अलग है क्योंकि इस साल तो सबसे ज्यादा मांग वाली स्ट्रीम की सीटें भी खाली पड़ी हैं। इस मुद्दे पर बात करते हुए द ऑक्सफोर्ड एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस के चेयरमैन SNVL नरसिम्हा राजू ने कहा, ‘MBBS और MD के लिए अप्लाई करने वाले छात्रों की सोच अलग होती है। MBBS में, किसी भी स्टेज पर सीटें जोड़ी जाएं, वे भर जाती हैं। लेकिन PG में ऐसा नहीं होता। हमने जो देखा है, उसके मुताबिक काउंसलिंग के बीच में जोड़ी गई सीटों के लिए ज्यादा दावेदार नहीं मिलते। PG छात्रों ने अपने करियर का रास्ता पहले से ही तय कर लिया होता है।’ सीटें खाली क्यों रही उन्होंने आगे कहा, ‘कोर्ट केस और दूसरी देरी की वजह से काउंसलिंग में बहुत ज्यादा समय लगता है। एक काउंसलिंग और अगले साल की परीक्षा के बीच बहुत कम समय बचता है। इसलिए छात्र इस साल ज्यादा फीस वाली कैटेगरी की सीट लेने के बजाय अगले साल की परीक्षा की बेहतर तैयारी करने का फैसला करते हैं। इस वजह से कई संस्थानों में NRI/मैनेजमेंट कोटे की सीटें खाली रह जाती हैं।’

निगम कमिश्नर फंसीं 2 घंटे, पार्षद के बेटे की शादी का होर्डिंग हटाने पर स्थानीय नेताओं का हंगामा

झांसी यूपी के झांसी में पार्षद के बेटे की शादी की होर्डिंग हटाने का मामला देर शाम उस समय गरमा गया जब पार्षदों ने हंगामा करते हुए प्रदर्शन शुरू कर दिया. उन्होंने नगर निगम ऑफिस गेट पर कब्जा कर अधिकारियों व कर्मचारियों को अंदर जाने व बाहर आने से रोक दिया। इसके चलते नगर आयुक्त भी ऑफिस में लगभग दो घंटे तक फंसी रहीं, बाद में पुलिस की मदद से उन्हें सुरक्षा घेरे में निकाला गया. पार्षदों ने चेतावनी दी है कि अगर समस्याओं का समाधान न हुआ तो कल से अधिकारियों को फिर ऑफिस अरेस्ट किया जाएगा। झांसी के नवाबाद थाना क्षेत्र के बीकेडी चौराहे के पास एक पार्षद के बेटे की शादी की होडिंग अवैध रूप से लगी थी. जिसको नगर निगम ने 9 मार्च को हटवा दिया. जब इसकी जानकारी पार्षदों को हुई तो वह आक्रोशित हो गए। गेट पर कब्जा और नगर आयुक्त को घेरा भाजपा व अन्य दलों के दो दर्जन से ज्यादा पार्षद दोपहर 4 बजे नगर निगम गेट पर धरने पर बैठ गए और नारेबाजी शुरू कर दी. इस दौरान उन्होंने किसी को गेट के अंदर-बाहर नहीं जाने दिया। पार्षदों ने छीनी गाड़ी की चाबी ऑफिस पहुंचे सहायक नगर आयुक्त गौरव कुमार को पार्षदों ने वापस लौटा दिया और उनकी सरकारी गाड़ी की चाबी निकाल ली. अपने चेम्बर में मौजूद नगर आयुक्त आकांक्षा राणा भी वहीं फंस गईं। पुलिस ने सुरक्षा घेरे में बाहर निकाला शाम 6 बजे के बाद भी ब पार्षद हटने को तैयार नहीं हुए तो पुलिस बुलाई गयी और पुलिस की मदद से नगर आयुक्त को ऑफिस से कड़ी सुरक्षा के बीच बाहर निकाला गया। प्रस्तावों पर काम न होने से नाराज हैं पार्षद भाजपा पार्षद दिनेश प्रताप बुंदेला ने आरोप लगाया कि पार्षदों के प्रस्तावों पर काम न होने से जनता में उनकी छबि खराब हो रही है. नगर आयुक्त मनमानी कर रहीं हैं. वहीं जब नगर निगम आयुक्त आकांक्षा राणा से बात की तो उन्होंने कहा सभी काम कराये जा रहे हैं, अगर कोई समस्या है तो आएं और बात करें।

तारिक रहमान की पहल: भारत के साथ बेहतर रिश्तों के लिए बांग्लादेश के इंटेलिजेंस चीफ को दिल्ली भेजा

नई दिल्ली बांग्लादेश में बीएनपी (BNP) की जीत और तारिक रहमान के प्रधानमंत्री बनने के बाद भारत के साथ रिश्ते सुधारने की कोशिशें तेज हो गई हैं। देशों के बीच कूटनीतिक और सुरक्षा संबंधों को पटरी पर लाने की कोशिश की जा रही है। सूत्रों के अनुसार, मार्च की शुरुआत में बांग्लादेश की शीर्ष रक्षा खुफिया एजेंसी डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ फोर्सेज इंटेलिजेंस (DGFI) के प्रमुख ने भारत का एक उच्च-स्तरीय दौरा किया। तारिक रहमान सरकार के सत्ता संभालने के बाद से किसी शीर्ष अधिकारी की यह पहली भारत यात्रा है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, बांग्लादेश के नवनियुक्त DGFI महानिदेशक मेजर-जनरल कैसर राशिद चौधरी ने 1 से 3 मार्च के बीच दिल्ली का दौरा किया। अपनी इस यात्रा के दौरान उन्होंने भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ प्रमुख पराग जैन और सैन्य खुफिया महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल आर. एस. रमन के साथ महत्वपूर्ण बैठकें कीं। 2 मार्च को एक निजी रात्रिभोज के दौरान दोनों देशों के खुफिया प्रमुखों ने खुफिया जानकारी साझा करने और सुरक्षा साझेदारी को गहरा करने पर विस्तार से चर्चा की। आपको बता दें कि भारत लंबे समय से बांग्लादेश की धरती पर होने वाली भारत विरोधी गतिविधियों को लेकर चिंतित रहा है। भारत की प्राथमिकता नई सरकार के साथ मिलकर इन चुनौतियों का समाधान करना है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के दौरान बांग्लादेश की कानून-व्यवस्था में जो गिरावट आई थी, उसे सुधारने के लिए तारिक रहमान सरकार अब भारत के साथ मिलकर काम करना चाहती है। इस सुरक्षा सहयोग का पहला बड़ा परिणाम पश्चिम बंगाल में देखने को मिला। राज्य की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने रविवार को घोषणा की कि बांग्लादेश के प्रसिद्ध राजनीतिक कार्यकर्ता शरीफ उस्मान बिन हादी की हत्या के दो मुख्य आरोपियों को उत्तर 24 परगना के बनगांव इलाके से गिरफ्तार कर लिया गया है। आपको बता दें कि 2024 के छात्र आंदोलन के प्रमुख युवा नेता और ‘इंकलाब मंच’ के प्रवक्ता हादी को दिसंबर 2025 में ढाका में सिर में गोली मारी गई थी, जिसके बाद सिंगापुर में उनकी मौत हो गई थी। आरोपियों की पहचान फैसल करीम मसूद और आलमगीर हुसैन के रूप में हुई है। इन्हें शुक्रवार और शनिवार की दरम्यानी रात बनगांव से पकड़ा गया। बांग्लादेश सरकार ने गिरफ्तार व्यक्तियों तक ‘काउंसुलर एक्सेस’ मांगी है ताकि उनकी पहचान की पुष्टि की जा सके। बांग्लादेश की विदेश राज्य मंत्री शामा ओबैद इस्लाम ने सोमवार को ढाका में पत्रकारों से कहा कि सरकार हादी हत्याकांड में न्याय सुनिश्चित करने के लिए सभी स्थापित नियमों का पालन करेगी। उन्होंने कहा, “हमने कोलकाता स्थित अपने मिशन के माध्यम से आरोपियों तक पहुंच मांगी है। चूंकि भारत और बांग्लादेश के बीच बंदियों के हस्तांतरण की संधि मौजूद है, इसलिए हम आरोपियों को वापस लाने के लिए सभी कूटनीतिक प्रयास करेंगे। हमें इस मामले में भारत से पूर्ण सहयोग की अपेक्षा है।” सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि मेजर-जनरल कैसर राशिद का दिल्ली दौरा और उसके तुरंत बाद हादी के हत्यारों की भारत में गिरफ्तारी यह संकेत देती है कि तारिक रहमान सरकार भारत के साथ अपने सुरक्षा संबंधों को एक नई दिशा देने के लिए तैयार है। आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि सीमा सुरक्षा और आतंकवाद के मुद्दों पर यह सहयोग कितना प्रभावी साबित होता है।

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