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समीक्षा में 20 अन्य कार्यों में सुधार के दिए निर्देश

भोपाल  प्रदेश में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए लोक निर्माण विभाग द्वारा विशेष कार्ययोजना बनाकर औचक निरीक्षण की व्यवस्था की गई है। इसी क्रम में विभाग द्वारा बनाई गई कार्ययोजना के तहत 6 मार्च को मुख्य अभियंताओं के सात दलों ने सीहोर, पांढुर्णा, भिण्ड, बड़वानी, मऊगंज, उज्जैन और पन्ना जिलों में विभिन्न निर्माण कार्यों का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान कुल 35 कार्यों को रेंडम आधार पर चयनित कर उनकी गुणवत्ता और प्रगति का परीक्षण किया गया। निरीक्षण किए गए कार्यों में 21 कार्य लोक निर्माण विभाग (सड़क/पुल) के, 5 कार्य परियोजना क्रियान्वयन इकाई (भवन) के, 6 कार्य मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम, 2 कार्य मध्यप्रदेश भवन विकास निगम तथा 1 कार्य राष्ट्रीय राजमार्ग से संबंधित रहे। निरीक्षणों से प्राप्त प्रतिवेदनों की समीक्षा बैठक मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम के प्रबंध संचालक  भरत यादव, की अध्यक्षता में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई। बैठक में प्रमुख अभियंता (सड़क/पुल)  के.पी.एस. राणा, प्रमुख अभियंता (भवन)  एस.आर. बघेल, प्रमुख अभियंता (बी.डी.सी.)  अजय वास्तव, तकनीकी सलाहकार एमपीआरडीसी  आर.के. मेहरा सहित विभाग के सभी मुख्य अभियंता, अधीक्षण यंत्री, कार्यपालन यंत्री और निरीक्षण दल के अधिकारी ऑनलाइन शामिल हुए। समीक्षा में भिण्ड जिले के उदोतगढ़ में निर्माणाधीन प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र भवन तथा जी-टाइप और एचआई-टाइप आवासीय भवनों का कार्य संतोषजनक नहीं पाए जाने पर संबंधित ठेकेदार मेसर्स जय कैला देवी कंस्ट्रक्शन कंपनी, मुरैना को ब्लैकलिस्ट करने तथा कंसल्टेंट मेसर्स एनोवियस कंसल्टेंट इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, भोपाल के विरुद्ध कार्रवाई और वसूली के निर्देश दिए गए। साथ ही संबंधित विभागीय अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश भी दिए गए। इसके अलावा निरीक्षण के दौरान पाए गए 20 निर्माण कार्यों में आवश्यक सुधार करने के भी निर्देश दिए गए। बैठक में अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि पूर्व में किए गए निरीक्षणों के प्रतिवेदनों का पालन सुनिश्चित किया जाए तथा सीएम हेल्पलाइन में प्राप्त शिकायतों का समयबद्ध और संतोषजनक निराकरण किया जाए। साथ ही मुख्य अभियंता और अधीक्षण यंत्री स्वयं इसकी नियमित समीक्षा करें, जिससे आगामी माह की ग्रेडिंग में सुधार हो सके। इसके अतिरिक्त पुल-पुलियों के मरम्मत कार्यों को प्राथमिकता से पूर्ण करने तथा जहां पुल-पुलियों की स्थिति खतरनाक हो, वहां नए प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए गए, जिससे मानसून से पूर्व आवश्यक कार्य पूरे किए जा सकें। साथ ही सड़क सुरक्षा और ब्रिज सेफ्टी ऑडिट के कार्यों को प्राथमिकता से पूरा करने, लोक कल्याण सरोवरों के निर्माण कार्य शीघ्र पूर्ण कराने तथा लोक निर्माण सर्वेक्षण ऐप के माध्यम से सभी सड़कों की मैपिंग पूर्ण करने के निर्देश दिए गए। बैठक में यह भी तय किया गया कि नई सड़कों के निर्माण कार्यों के लिए कार्यादेश जारी करने से पहले संबंधित सड़क का सर्वेक्षण लोक निर्माण सर्वेक्षण ऐप के माध्यम से अनिवार्य रूप से किया जाएगा। विभाग के अंतर्गत नए कार्यों के वर्क ऑर्डर भी इसी ऐप के माध्यम से कोड जारी कर आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।  

भोपाल में आयोजित हुआ डॉ. अजय खरे का 12वां स्मृति व्याख्यान

जन स्वास्थ्य को केवल इलाज नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय और समानता से जोड़कर देखने की जरूरत: सुनील कौल भोपाल 7 मार्च 2026 को भोपाल में 12वां डॉ. अजय खरे स्मृति व्याख्यान आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम दुष्यंत कुमार स्मारक पांडुलिपि संग्रहालय, टी.टी. नगर, भोपाल में जन स्वास्थ्य अभियान, मध्य प्रदेश और मध्यप्रदेश मेडिकल ऑफिसर्स एसोसिएशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित हुआ। इस वर्ष के स्मृति व्याख्यान के मुख्य वक्ता डॉ. सुनील कौल थे, जिन्होंने “स्वास्थ्य के सामाजिक निर्धारक: स्वास्थ्य और चिकित्सा पर पुनर्विचार” विषय पर व्याख्यान दिया। यह व्याख्यान जन स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ. अजय खरे की स्मृति में आयोजित किया जाता है, जो जन-स्वास्थ्य और विज्ञान आंदोलन से गहराई से जुड़े रहे थे। इस अवसर पर जन स्वास्थ्य सम्मान 2025 भी प्रदान किए गए जिसकी घोषणा डॉक्टर अनंत भान द्वारा की गई। जन स्वास्थ्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए दिवंगत डॉ. सी. एम. गुलाठी को मरणोपरांत विशेष जन स्वास्थ्य सम्मान से सम्मानित किया गया। उन्होंने दवाओं और दवा नीतियों के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य किया था। इसके साथ ही डॉ. सी. सत्यामाला, वरिष्ठ जन स्वास्थ्य विशेषज्ञ, तथा विवेक पवार, जन स्वास्थ्य और सामाजिक कार्यकर्ता, को स्वास्थ्य और उससे जुड़े सामाजिक कारकों पर उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए सम्मानित किया गया। अपने व्याख्यान में डॉ. सुनील कौल ने कहा कि जन स्वास्थ्य को केवल इलाज के दायरे में नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, समानता और व्यापक सामाजिक संदर्भों के साथ जोड़कर देखने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि यदि पानी पर टैक्स लगाने की सोच विकसित होती है तो वह दिन दूर नहीं जब हवा पर भी टैक्स लगाया जाने लगे। उन्होंने कहा कि जब राजनीति खराब होती है तो उसका सीधा असर जन स्वास्थ्य पर भी पड़ता है। उन्होंने डॉ. अनुराग भार्गव द्वारा टीबी (तपेदिक) पर किए गए महत्वपूर्ण शोध का उल्लेख करते हुए बताया कि उन्होंने टीबी और भूख के बीच के संबंध को वैज्ञानिक रूप से स्थापित किया। आज पूरी दुनिया यह मानती है कि दवा के साथ-साथ पर्याप्त और पोषक भोजन भी टीबी के इलाज में अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके बावजूद आज भी देश में लगभग 4 लाख लोग हर साल टीबी से मर रहे हैं। पहले जहां टीबी से मौतों में 50 प्रतिशत तक कमी का लक्ष्य था, आज हम केवल लगभग 25 प्रतिशत कमी ही हासिल कर पा रहे हैं, जबकि टीबी की दवाएं मुफ्त उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि जन स्वास्थ्य में लोगों को बचाने के लिए केवल स्वास्थ्य बजट ही नहीं, बल्कि पोषण, सामाजिक सुरक्षा, शिक्षा और समानता जैसे अन्य कारक भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि आज शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं में भी पैसों का खेल बढ़ता जा रहा है, जिसका उदाहरण नीट (NEET) जैसी परीक्षाओं में दिखाई देता है। “हम जिस रास्ते पर जा रहे हैं, वह भटकाव का रास्ता है,” उन्होंने कहा। मध्यप्रदेश में कुपोषण की गंभीर स्थिति पर चिंता जताते हुए उन्होंने सवाल उठाया कि क्या आंगनवाड़ी मॉडल पर्याप्त है या उसमें बदलाव की जरूरत है। उन्होंने पहले 1000 दिनों (गर्भधारण से दो वर्ष तक) के पोषण और देखभाल के मॉडल पर व्यापक चर्चा की आवश्यकता बताई। उन्होंने यह भी कहा कि देश के बजट का बड़ा हिस्सा गृह मंत्रालय और सेना पर खर्च होता है, जबकि सामाजिक क्षेत्र और जन स्वास्थ्य पर पर्याप्त निवेश नहीं किया जाता। महिलाओं के खिलाफ हिंसा को उन्होंने एक गंभीर जन स्वास्थ्य संकट बताया। उनके अनुसार सरकारी आंकड़ों के हिसाब से देश में हर साल लगभग 35 हजार महिलाएं दहेज या घरेलू हिंसा के कारण जलकर मर जाती हैं, जबकि गैर सरकारी संस्थाओ के अनुसार करीब 75 हजार महिलाएं दहेज या घरलू हिंसा के कारण जलने से अपनी जान गंवाती हैं। उन्होंने कहा कि मातृ मृत्यु को रोकने के प्रयासों के साथ-साथ महिलाओं के खिलाफ हिंसा को भी जन स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से गंभीरता से लेना होगा। उन्होंने असम में किए गए एक सर्वे का हवाला देते हुए कहा कि 58 प्रतिशत पुरुषों ने स्वीकार किया कि उन्होंने अपनी पत्नी के साथ किसी न किसी प्रकार की हिंसा की है। इसलिए हिंसा को केवल महिला का मुद्दा नहीं, बल्कि समाज और जन स्वास्थ्य का मुद्दा मानना होगा। उन्होंने कहा कि घृणा, जातिवाद और सांप्रदायिक हिंसा भी जन स्वास्थ्य पर गहरा असर डालते हैं। 2020 में अमेरिका की एक प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्था ने भी घृणा को जन स्वास्थ्य का मुद्दा माना है। सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स (SDGs) के संदर्भ में उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य व्यवस्था का मूल विचार सभी के लिए समान उपचार का था, लेकिन आज स्थिति यह हो गई है कि “अगर आपके पास पैसा नहीं है तो इलाज भी नहीं मिलेगा।” इससे अमीर और गरीब दोनों ही असुरक्षित महसूस करते हैं। उन्होंने कहा कि समाज में जाति और वर्ग आधारित भेदभाव से ऊपर उठना होगा और लोगों की स्वायत्तता और सम्मान को मजबूत करना होगा। जलवायु परिवर्तन को भी उन्होंने एक बड़ा जन स्वास्थ्य संकट बताते हुए कहा कि हिमालय के ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं और कई अध्ययन बताते हैं कि आने वाले वर्षों में इनमें भारी कमी आ सकती है। उन्होंने कहा, “हम बेहतर की उम्मीद कर सकते हैं, लेकिन हमें सबसे खराब स्थिति के लिए भी तैयारी करनी चाहिए।” उन्होंने विकेंद्रीकृत स्वास्थ्य मॉडल की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि समुदाय आधारित स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करना होगा। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या आशा कार्यकर्ताओं को दवाएं देने और प्राथमिक उपचार की अधिक ट्रेनिंग दी जा सकती है, ताकि संकट की स्थिति में समुदाय स्तर पर स्वास्थ्य सेवाएं टिकाऊ बन सकें। उन्होंने कहा कि सामाजिक निर्धारक (Social Determinants) स्वास्थ्य के सबसे महत्वपूर्ण कारक हैं और जन स्वास्थ्य की दिशा में आगे बढ़ने के लिए इन्हें केंद्र में रखना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि मानव शरीर स्वयं में पूर्ण नहीं होता, इसलिए समाज, पर्यावरण और जीवन परिस्थितियां मिलकर स्वास्थ्य की स्थिति को तय करती हैं। मध्यप्रदेश मेडिकल ऑफिसर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधि और सीएमएचओ, इंदौर डॉ. माधव हसानी ने अपने संबोधन में कहा कि डॉ. अजय खरे द्वारा जन स्वास्थ्य के क्षेत्र में जो दीप जलाया गया था, उसे आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी हम सभी की है। उन्होंने डॉ. खरे के साथ अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि किस तरह उन्होंने संगठन … Read more

‘राहु केतु’ की OTT एंट्री: वरुण शर्मा-पुलकित सम्राट की कॉमेडी फिल्म अब इस प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध

मुंबई ‘फुकरे’ फेम जोड़ी पुलकित सम्राट और वरुण शर्मा की कॉमेडी फिल्‍म ‘राहु केतु’ OTT पर रिलीज हो गई है। हालांकि, इसमें एक पेंच है। अभी इसे रेंट यानी किराए पर देखने का विकल्‍प दिया गया है। इसी साल 16 जनवरी 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज इस फिल्‍म की तारीफ तो बहुत हुई, लेकिन बॉक्‍स ऑफिस पर मामला सुस्‍त रहा था। राइटर-डायरेक्‍टर विपुल विग की यह फिल्‍म पौराण‍िक कथाओं को कॉमेडी से जोड़कर एक मजेदार कहानी के साथ परोसती है। फिल्‍म में शालिनी पांडे और चंकी पांडे भी हैं। ‘राहु केतु’ एक कॉमेडी-एडवेंचर फिल्‍म है। इसे शनिवार, 7 मार्च को Amazon Prime Video पर रेंट के साथ रिलीज किया गया है। ओटीटी प्‍लेटफॉर्म के सब्‍सक्राइबर्स इससे 119 रुपये के किराए पर देख सकते हैं। इसके लिए एक बार पेमेंट करने के बाद इसे 30 दिनों के भीतर आप कभी भी देख सकते हैं। हालांकि, एक बार फिल्‍म शुरू करने के बाद इसे 48 घंटों के अंदर खत्‍म करना होगा। ‘राहु केतु’ की कहानी यह फिल्‍म दो अनाड़ी और हमेशा बदकिस्मत रहे दोस्‍तों, राहु (वरुण शर्मा) और केतु (पुलकित सम्राट) की है। ये दोनों बेतुकी कॉमेडी करते हैं, जिन्हें लोग हमेशा मनहूस होने की वजह से नापसंद करते हैं। इस बीच राहु को एक स्ट्रीट-स्मार्ट और चालाक लड़की, मीनू टैक्सी (शालिनी पांडे) से प्यार हो जाता है। मीनू के पास जल्दी पैसे कमाने की एक योजना है। इसमें कई लोगों को फंसाने का काम शामिल है। इस प्‍लान में शहर के SHO दीपक शर्मा (अमित सियाल) और उनका असिस्टेंट बंसी (सुमित गुलाटी) भी फंसता है। पागलपन भरी कहानी में प्‍लानिंग को अंजाम तक पहुंचाने के लिए एक जादुई किताब भी है, जिसका नाम ‘अतरंगी कहानियां’ है। इस किताब को चूरू लाल शर्मा (मनु ऋषि चड्ढा) ने लिखा है। इस अफरा-तफरी में राहु और केतु की जोड़ी को एक खतरनाक ड्रग माफिया का सामना करना पड़ता है। फिल्म में पीयूष मिश्रा भी फूफाजी के रोल में हैं, जो चूरू लाल शर्मा की मदद करते हैं। फिल्‍म की कहानी वैदिक ज्योतिष से आकाशीय छाया ग्रहों ‘राहु’ और ‘केतु’ को केंद्र में रखकर लिखी गई है। विपुल विंग ने उन्हें मॉडर्न, काम के कॉमेडी किरदारों में बदला है। यह फिल्‍म किस्मत की खोज की उथल-पुथल है, जहां किरदार लेखक की कलम (या मीन राशि के कंट्रोल) के मोहरे हैं।

नरेला में अवैध कब्जों पर चलेगा बुलडोजर, मंत्री सारंग ने अधिकारियों को दिए निर्देश

भोपाल  सहकारिता मंत्री  विश्वास कैलाश सारंग ने शनिवार को नरेला विधानसभा के वार्ड क्रमांक 69, 70 और 71 का दौरा कर शासकीय भूमि से अवैध कब्जे, मदरसे, फैक्ट्री और मांस की दुकानें हटाने के निर्देश दिए। क्षेत्रीय नागरिकों द्वारा अवैध अतिक्रमण को लेकर लगातार मिल रही शिकायतों के आधार पर मंत्री  सारंग स्वयं मौके पर पहुंचे और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ विस्तृत निरीक्षण कर स्थिति का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान मंत्री  सारंग ने शासकीय भूमि पर हुए अवैध अतिक्रमण को लेकर कड़ी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने नगर निगम, राजस्व, पुलिस सहित संबंधित विभागों के अधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि अवैध अतिक्रमण पर बने स्थानों को पेयजल, विद्युत सहित किसी भी प्रकार के शासकीय कनेक्शन नहीं दिए जाएं। उन्होंने निर्देश दिए कि यदि ऐसे स्थानों को पहले से कनेक्शन दिए गए हैं तो उन्हें तत्काल हटाया जाए तथा यह जांच की जाए कि किन अधिकारियों की अनुमति से यह कनेक्शन दिए गए। यदि किसी स्तर पर लापरवाही या मिलीभगत पाई जाती है तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। मंत्री  सारंग ने गुप्ता कॉलोनी, सुभाष कॉलोनी और शहंशाह गार्डन, अशोका गार्डन क्षेत्र में पहुंचकर शासकीय भूमि की स्थिति का निरीक्षण किया और स्थानीय रहवासियों से भी चर्चा कर उनकी समस्याओं को सुना। कई स्थानों पर शासकीय भूमि पर अवैध रूप से कब्जा कर निर्माण कार्य किए गए हैं और कुछ जगहों पर बिना अनुमति के गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। इस पर मंत्री  सारंग ने मौके पर मौजूद नगर निगम, राजस्व और पुलिस विभाग के अधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि ऐसे सभी अतिक्रमणों को चिन्हित कर तत्काल प्रभाव से कार्रवाई की जाए। मंत्री  सारंग ने कहा कि शासकीय भूमि जनता की संपत्ति है और उस पर किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि शासकीय भूमि पर अवैध रूप से संचालित हो रहे मदरसे, फैक्ट्री और मांस की दुकानों की विस्तृत जांच कर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि यदि किसी ने नियमों का उल्लंघन कर शासकीय भूमि पर कब्जा किया है तो उसे तत्काल हटाया जाए और भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया जाए। मंत्री  सारंग ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि क्षेत्र में शासकीय भूमि का सर्वे कर विस्तृत सूची तैयार की जाए और जहां-जहां अतिक्रमण पाया जाए वहां चरणबद्ध तरीके से अभियान चलाकर उसे हटाया जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि भविष्य में कोई भी व्यक्ति शासकीय भूमि पर अवैध कब्जा न कर सके। मंत्री  सारंग ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए कि नगर निगम, राजस्व और पुलिस विभाग संयुक्त रूप से अभियान चलाकर अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई करें। निरीक्षण के दौरान क्षेत्रीय नागरिकों ने मंत्री  सारंग को कई स्थानों पर हो रहे अवैध निर्माण और अतिक्रमण की जानकारी दी। मंत्री  सारंग ने नागरिकों को आश्वस्त करते हुए कहा कि क्षेत्र में अवैध गतिविधियों को किसी भी कीमत पर पनपने नहीं दिया जाएगा और शासकीय भूमि को पूरी तरह सुरक्षित रखने के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे। मंत्री  सारंग ने कहा कि नरेला विधानसभा क्षेत्र के विकास और नागरिकों की सुविधा के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। क्षेत्र में किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि, अतिक्रमण या शासकीय भूमि पर कब्जा करने वालों के खिलाफ कानूनी प्रावधानों के तहत कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि अतिक्रमण के विरुद्ध कार्रवाई में किसी प्रकार की लापरवाही न बरती जाए और निर्धारित समयसीमा में प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।  

रूस से तेल खरीद पर दबाव! 30 दिन की छूट देने वाले अमेरिका को भारत का कड़ा संदेश

नई दिल्ली भारत को रूस से तेल आयात करने की छूट देने वाले अमेरिकी दावे पर भारत ने कड़ा पलटवार किया है। शनिवार को भारत सरकार ने साफ कहा है कि रूसी तेल खरीदने के लिए किसी की इजाजत की जरूरत नहीं है। भारत ने कहा कि वह रूस से तेल का आयात जारी रखेगा। ईरान के खिलाफ अमेरिकी और इजरायली हमलों ने दुनिया के एनर्जी सेक्टर को उलट-पुलट कर रख दिया है। इससे दुनियाभर में तेल की कीमतों में तेजी आई है। ईरान के स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से जहाजों को न निकलने देने की धमकी के बाद कच्चे तेल पर असर पड़ा है। भारत सरकार के प्रेस इन्फॉर्मेशन ब्यूरो ने एक बयान में कहा कि नई दिल्ली ऐसी खरीद के लिए शॉर्ट-टर्म छूट पर निर्भर नहीं है। बयान में कहा गया, “भारत रूसी तेल खरीदने के लिए कभी भी किसी देश की इजाजत पर निर्भर नहीं रहा है।” बयान में आगे कहा गया, ”भारत फरवरी 2026 में भी रूसी तेल इंपोर्ट कर रहा है, और रूस अभी भी भारत का सबसे बड़ा क्रूड ऑयल सप्लायर है।” वॉशिंगटन ने फरवरी में एक अंतरिम ट्रेड डील के तहत भारतीय एक्सपोर्ट पर 25 फीसदी ड्यूटी वापस ले ली थी, जिसे उसने रूसी तेल खरीदना बंद करने के नई दिल्ली के ‘कमिटमेंट’ के तौर पर बताया था। बयान में कहा गया है कि भारत के पास शॉर्ट टर्म रुकावटों से निपटने के लिए 250 मिलियन बैरल से ज्यादा क्रूड और पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स का अच्छा स्टॉक है। हालांकि, भारत ने शनिवार को खाना पकाने के लिए इस्तेमाल होने वाले घरेलू लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (LPG) सिलेंडर की कीमत 60 रुपये बढ़ा दी। इसके साथ ही, कमर्शियल सिलेंडरों के दाम में भी इजाफा हुआ है। दुनिया भर में, शुक्रवार को क्रूड 8.5 फीसदी बढ़ गया और प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप के यह कहने के बाद कि सिर्फ ईरान का बिना शर्त सरेंडर ही मिडिल ईस्ट युद्ध को खत्म करेगा, इस हफ्ते यह लगभग 30 परसेंट बढ़ गया। वहीं, रूस ने शुक्रवार को कहा कि वह भारत को किए जाने वाले कच्चे तेल निर्यात के आंकड़े सार्वजनिक नहीं करेगा और इसे ‘बहुत से बुरा चाहने वालों’ से छिपाकर रखेगा। रूसी राष्ट्रपति कार्यालय ‘क्रेमलिन’ के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने यह टिप्पणी अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट के उस बयान के बाद की जिसमें पश्चिम एशिया संघर्ष के बीच भारतीय रिफाइनरियों को रूसी तेल खरीदने के लिए 30 दिनों की अस्थायी छूट देने की बात कही गई है। पेसकोव ने भारत को दिए गए तेल के बारे में पूछे जाने पर कहा, ”नहीं, हम साफ वजहों से मात्रा का कोई आंकड़ा नहीं देने जा रहे हैं। यह पहली बात है। बुरा चाहने वाले बहुत लोग हैं।”  

ब्रिटनी स्पीयर्स की गिरफ्तारी से मचा हंगामा: जेल में बिताई रात, अब कोर्ट में होगा फैसला

कैलिफोर्निया मशहूर पॉप स्टार ब्रिटनी स्पीयर्स को कैलिफोर्निया में पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। ब्रिटनी स्पीयर्स पर शराब और ड्रग्स के नशे में गाड़ी चलाने का संदेह था। हालांकि, बाद में ब्रिटनी स्पीयर्स को छोड़ दिया गया, पर मामला अभी शांत नहीं हुआ है। ब्रिटनी स्पीयर्स को अब कोर्ट में पेश किया जाएगा। ब्रिटनी को 4 मार्च को कैलिफोर्निया हाईवे पेट्रोल ने स्थानीय समयानुसार लगभग रात साढ़े 9 बजे हिरासत में लिया। पूरा मामला क्या है, यहां जानिए: ब्रिटनी स्पीयर्स पर नशे में गाड़ी चलाने के आरोप, 4 मार्च की घटना यह घटना 4 मार्च की रात की है। तब ब्रिटनी स्पीयर्स कैलिफोर्निया के वेंचुरा काउंटी में कार चला रही थीं। कैलिफोर्निया हाइवे पेट्रोल (CHP) ने बताया कि स्पीयर्स के खिलाफ पुलिस को सूचना दी गई थी कि वह अपनी BMW कार को हाईवे पर तेज रफ्तार से लापरवाही से चला रही थीं। पुलिस ने रोका तो उन्हें ब्रिटनी पर नशे की हालत में गाड़ी चलाने का संदेह हुआ। इसके बाद ब्रिटनी स्पीयर्स के कई फील्ड सोब्रिटी टेस्ट लिए गए और गिरफ्तार कर लिया गया। 5 मार्च की सुबह जेल से रिहा, अब 4 मई को कोर्ट में पेशी ब्रिटनी स्पीयर्स को गुरुवार, 5 मार्च की तड़के सुबह जेल से रिहा कर दिया गया। अब उन्हें 4 मई को वेंचुरा काउंटी सुपीरियर कोर्ट में पेश होना है। पुलिस ने बताया कि घटना की जांच अभी जारी है और केमिकल टेस्ट के रिजल्ट आने बाकी हैं। मालूम हो कि जब ब्रिटनी स्पीयर्स को पुलिस ने रोका, तब वह अपनी काली बीएमडब्ल्यू 430i को अकेले ही चला रही थीं। कौन हैं ब्रिटनी स्पीयर्स? मालूम हो कि ब्रिटनी स्पीयर्स अमेरिका की पॉपुलर सिंगर और पॉप स्टार हैं। उन्होंने अपने करियर में कई हिट गाने दिए हैं, जिनमें Baby One More Time, Toxic, Everytime, Gimme More, Womanizer और Stronger जैसे नाम शामिल हैं। उन्हें ‘प्रिंसेस ऑफ पॉप’ भी कहा जाता है। ब्रिटनी स्पीयर्स ने साल 2024 में ऐलान किया था कि वह म्यूजिक इंडस्ट्री में कभी वापसी नहीं करेंगी। उनका आखिरी गाना साल 2022 में आया था, जो उन्होंने एल्टन जॉन के साथ गाया था। ब्रिटनी स्पीयर्स पिछले कई साल से काफी मुश्किलें झेल रही हैं और विवादों में भी रही हैं:     ब्रिटनी स्पीयर्स की मुश्किलें 2007 से शुरू हुईं, जब उन्होंने अपने बाल मुंडवा लिए और एक पपाराजी पर छाते से हमला कर दिया था।     साल 2008 में ब्रिटनी स्पीयर्स को लगातार दो बार मेंटल हेल्थ की जांच के लिए भर्ती कराया गया। इस कारण ब्रिटनी के पिता जेमी स्पीयर्स ने उनकी इमरजेंसी टेम्परेरी कंजरवेटरशिप के लिए याचिका दायर की। उसी साल अक्टूबर में इस कंजरवेटरशिप को परमानेंट कर दिया गया था।     ब्रिटनी स्पीयर्स करीब 13 साल तक पिता के संरक्षण (कंजरवेटरशिप) में रही थीं, जिस लेकर उन्होंने लॉस एंजेलिस की कोर्ट में केस दायर किया था और कहा कि उनका संरक्षण खत्म किया जाए। तब ब्रिटनी ने पिता पर कई गंभीर आरोप लगाए थे। ब्रिटनी ने कहा था कि संरक्षण में उन्हें 13 साल तक जबरदस्ती ड्रग्स दिए गए। ब्रिटनी ने बताया था कि उनकी बॉडी में एक IUD डिवाइस लगाई गई ताकि वह प्रेगनेंट न हो सकें और बच्चा न कर सकें।     ब्रिटनी ने यह भी आरोप लगाया था कि संरक्षण में पिता उनकी सारी संपत्ति और पैसे कंट्रोल कर रहे थे। यहां तक कि उनकी निजी जिंदगी से जुड़े तमाम फैसले भी पिता ही ले रहे थे। हालांकि, साल 2022 में ब्रिटनी स्पीयर्स को पिता के संरक्षण से मुक्ति मिल गई थी।

अग्नि सुरक्षा के लिए पुलिस मुख्यालय में मॉक ड्रिल, आपात स्थिति से निपटने का अभ्यास

भोपाल मध्यप्रदेश पुलिस द्वारा पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों को आपदा प्रबंधन एवं अग्नि सुरक्षा के प्रति प्रशिक्षित करने के उद्देश्य से नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में शनिवार सुबह पुलिस मुख्यालय के भूतल पर सुरक्षाकर्मियों एवं कर्मचारियों को स्वयं को सुरक्षित रखते हुए आग पर प्रभावी नियंत्रण करने का प्रशिक्षण दिया गया। इस दौरान अग्नि नियंत्रण से संबंधित मॉक ड्रिल भी आयोजित की गई, जिसमें आधुनिक उपकरणों के माध्यम से आग बुझाने की विधियों का प्रदर्शन किया गया। मॉक ड्रिल के दौरान तरल पदार्थों में लगी आग को अग्निशमन यंत्रों के प्रयोग से किस प्रकार सुरक्षित और प्रभावी तरीके से बुझाया जा सकता है, इसका व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। सुरक्षाकर्मियों ने धुएं और लपटों से सुरक्षित रहते हुए आग पर काबू पाने की तकनीकों का अभ्यास किया। इस अवसर पर मानसेवी डीएसपी  मोहनलाल मेहरा, पुलिस मुख्यालय के सुरक्षा इंचार्ज निरीक्षक  मुकेश सैनी, पुलिस फायर स्टेशन मंत्रालय, भोपाल के एसआई  बी.एस. हुड्डा एवं उनकी टीम उपस्थित रही। इन उपकरणों का दिया प्रशिक्षण मॉक ड्रिल के दौरान अधिकारियों और कर्मचारियों को आग बुझाने में प्रयुक्त होने वाले विभिन्न आधुनिक उपकरणों के बारे में जानकारी दी गई। प्रशिक्षण में कलेक्टिंग ब्रिज, डिवाइडिंग ब्रिज, फायरमैन हेलमेट, फोम नोजल, अग्निशमन सिलेंडर, कॉर्टेज, टॉर्च, रिवॉल्विंग नोजल, यूनिवर्सल ब्रांच, न्यू लाइट (ब्रांच), ऑर्डिनरी ब्रांच, एडॉप्टर, जाली, फायरमैन एक्स, लॉक कटर, प्रॉक्सीमेटी सूट, एल्यूमिनियम सूट, कैमिकल सूट, ब्रीदिंग ऑपरेटर सेट, लाइफ जैकेट, हौज पाइप, फायर ब्लैंकेट एवं अग्निशमन यंत्रों के उपयोग की जानकारी दी गई। 5 तरह की होती है आग – बुझाने में बरतें सावधानी प्रशिक्षण के दौरान एसआई  बी.एस. हुड्डा ने बताया कि आग मुख्यतः पांच प्रकार की होती है और प्रत्येक को बुझाने की प्रक्रिया अलग होती है। लकड़ी और कोयले में लगी आग को क्लास ‘ए’, तरल पदार्थों में लगी आग को क्लास ‘बी’, गैसों में लगी आग को क्लास ‘सी’, धातुओं में लगी आग को क्लास ‘डी’ तथा विद्युत से संबंधित आग को क्लास ‘ई’ श्रेणी में रखा जाता है। इन सभी प्रकार की आग को परिस्थितियों के अनुसार पानी या रासायनिक माध्यमों से बुझाया जाता है। अग्नि दुर्घटना होने पर यह करें      फायर ब्रिगेड, पुलिस कंट्रोल रूम, पुलिस थाना, विद्युत विभाग एवं चिकित्सालय को तत्काल सूचना दें।              फायर फाइटिंग दल फायर एक्सटिंग्यूशर, पानी या रेत की सहायता से प्रारंभिक अवस्था में आग बुझाने का प्रयास करें।              भवन के विद्युत प्रवाह को मेन स्विच से तुरंत बंद करें।                  फायर अलार्म दल अलार्म बजाकर सभी को अग्नि दुर्घटना की चेतावनी दें।                इवेक्युएशन टीम लोगों को निर्धारित सुरक्षित मार्गों से बाहर निकालकर सुरक्षित स्थान तक पहुंचाए।                     भगदड़ से बचें।                  लिफ्ट का प्रयोग न करें।                      संपत्ति बचाव दल महत्वपूर्ण एवं मूल्यवान सामग्री को सुरक्षित स्थान पर ले जाए।                  अत्यधिक ज्वलनशील पदार्थ जैसे पेट्रोल, केरोसिन और प्लास्टिक को आग के स्थान से दूर करें। इन नंबरों पर करें सूचित आग की सूचना देने के लिए भोपाल में एमपीईबी के हेल्पलाइन नंबर 0755-2678251, 0755-2678369 पुलिस का हेल्पलाइन नंबर 0755-2555922, पुलिस फायर स्टेशन का हेल्पलाइन नंबर 0755-2441008 और नगर निगम के हेल्पलाइन नंबर 0755-2542222 पर कॉल कर किया जा सकता है।  

ईरानी युद्धपोत की मदद पर विवाद: क्या अमेरिका ने बनाया दबाव? श्रीलंकाई मंत्री ने तोड़ी चुप्पी

कोलंबो श्रीलंका ईरान के नाविकों के साथ अंतराष्ट्रीय कानून के तहत व्यवहार करेगा। अमेरिकी हमले के शिकार हुए ईरानी जहाज पर सवार यह नाविक फिलहाल श्रीलंका में रुके हुए हैं। श्रीलंका के एक मंत्री शनिवार को यह जानकारी दी। ऐसी खबरें आ रही हैं कि अमेरिका, श्रीलंका पर दबाव डाल रहा है कि इन ईरानी नाविकों को उनके देश वापस न लौटने दे। हालांकि जब श्रीलंकाई मंत्री से अमेरिकी दबाव के बारे में पूछा गया तो उन्होंने इसका कोई सीधा जवाब नहीं दिया। बता दें कि ईरानी जहाज आइरिस डेना को अमेरिकी पनडुब्बी ने डुबो दिया था। इस हमले में कुछ नाविक मारे गए थे और कुछ घायल भी हुए थे। दूसरे युद्धपोत को भी सुरक्षा विदेश मंत्री विजिथा हिराथ ने नई दिल्ली में एक सम्मेलन को बताया कि श्रीलंका ईरानी फ्रिगेट आइरिस डेना के 32 नाविकों का कोलंबो की अंतरराष्ट्रीय संधि के तहत ख्याल रख रहा है। उन्होंने कहाकि हमने अंतर्राष्ट्रीय कानूनों के अनुसार सभी कदम उठाए हैं। श्रीलंका ने एक दूसरे ईरानी युद्धपोत, आइरिस बुशेहर, को भी सुरक्षित आश्रय प्रदान किया। डेना पर हमले के एक दिन बाद इसके 219 नाविकों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। इंजन समस्याओं से जुड़ी रिपोर्ट के बाद जहाज को श्रीलंका के उत्तर-पूर्वी तट पर स्थित त्रिनकोमाली ले जाया गया। इस बीच, भारत ने शनिवार को कहा कि उसने तीसरे ईरानी युद्धपोत, आइरिस लावान, को भी अपने किसी बंदरगाह पर मानवीय आधार पर ठहरने की अनुमति दी थी, क्योंकि उसने भी परिचालन समस्याओं की सूचना दी थी। तीन जहाज भारत द्वारा मध्य पूर्व में युद्ध शुरू होने से पहले आयोजित की गई एक बहु-राष्ट्रीय फ्लीट रिव्यू का हिस्सा थे। भारतीय प्रधानमंत्री एस जयशंकर ने कहाकि मुझे लगता है कि यह मानवीय काम था और हम इसके तहत ही काम कर रहे थे।  

अजिंक्य और विक्रम का कमाल: नागपुर के ‘गांधे ब्रदर्स’ बने मास्टरशेफ इंडिया सीजन 9 के चैंपियन

हैदराबाद, भारत के सबसे प्रतिष्ठित कुकिंग रियलिटी शो ‘मास्टरशेफ इंडिया’ सीजन 9 का समापन शुक्रवार, 6 मार्च को एक भव्य ग्रैंड फिनाले के साथ हुआ। महाराष्ट्र के नागपुर के रहने वाले दो भाइयों, अजिंक्य और विक्रम गांधे ने अपनी बेहतरीन पाक कला और रचनात्मकता से जजों का दिल जीतते हुए इस सीजन का खिताब अपने नाम किया। दिग्गज शेफ संजीव कपूर, विकास खन्ना, रणवीर बराड़ और कुणाल कपूर की मौजूदगी में गांधे ब्रदर्स को प्रतिष्ठित ‘गोल्डन एप्रन’ और मास्टरशेफ ट्रॉफी से नवाजा गया। इस जीत के साथ ही यह जोड़ी अब कुकिंग की दुनिया में नेशनल सेंसेशन बन गई है। गांधे ब्रदर्स की यह जीत उनके बरसों के कड़े संघर्ष और खाने के प्रति अटूट जुनून का परिणाम है। 31 वर्षीय विक्रम और 29 वर्षीय अजिंक्य ने बहुत कम उम्र में ही रसोई की बारीकियां सीख ली थीं। विक्रम ने जहाँ महज 19 साल की उम्र में अपनी कैंटीन शुरू की थी, वहीं अजिंक्य ने गोवा में अपना कैफे चलाकर अनुभव हासिल किया। कोविड महामारी के दौरान कई उतार-चढ़ाव देखने के बावजूद दोनों भाइयों ने हार नहीं मानी और अपनी पारंपरिक महाराष्ट्रियन कुकिंग शैली को आधुनिक ट्विस्ट देकर मास्टरशेफ के किचन में 50 अन्य जोड़ियों को पीछे छोड़ दिया। खिताब के साथ ही अजिंक्य और विक्रम गांधे को सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविजन की ओर से 25 लाख रुपये की पुरस्कार राशि और ‘गोल्डन शेफ कोट’ प्रदान किया गया। प्रतियोगिता के इस कड़े मुकाबले में ओडिशा की बहनें अंजू प्रधान और मंजू ओझा प्रथम रनर-अप रहीं, जबकि हैदराबाद की मां-बेटी की जोड़ी चंदना और साई श्री राचकोंडा ने तीसरा स्थान हासिल किया। पूरे सीजन में गांधे ब्रदर्स ने अपने घरेलू स्वादों और एयरोमॉडलिंग जैसे अनूठे शौक से मिलने वाले फोकस का बेहतरीन इस्तेमाल किया, जिसने उन्हें भारत का अगला मास्टरशेफ बनाने में मदद की।  

किसान कल्याण के संकल्प को मजबूत करता निर्णय या समृद्ध किसान, सशक्त मध्यप्रदेश

भोपाल  मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार ने एक बार फिर यह सिद्ध किया है कि किसान कल्याण उसकी नीतियों और निर्णयों का मूल आधार है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा गेहूं खरीदी पर प्रति क्विंटल 40 रुपये का अतिरिक्त बोनस देने का निर्णय किसानों के हित में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम है। इस निर्णय के बाद किसानों को गेहूं का मूल्य 2,625 रुपये प्रति क्विंटल मिलेगा, जो उनकी मेहनत के उचित सम्मान और कृषि को लाभकारी बनाने की दिशा में एक सकारात्मक पहल है। मध्यप्रदेश एक कृषि प्रधान राज्य है, जहां लाखों परिवार अपनी आजीविका के लिए खेती पर निर्भर हैं। ऐसे में सरकार की यह जिम्मेदारी होती है कि वह किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य दिलाने के साथ-साथ उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उपाय भी सुनिश्चित करे। गेहूं खरीदी पर बोनस की घोषणा इसी सोच का परिणाम है, जो यह दर्शाती है कि राज्य सरकार किसानों की आवश्यकताओं और चुनौतियों को गंभीरता से समझती है। प्रदेश सरकार ने गेहूं उपार्जन के लिए पंजीयन की अंतिम तिथि बढ़ाकर 10 मार्च करने का निर्णय भी लिया है, जिससे अधिक से अधिक किसान इस व्यवस्था का लाभ उठा सकें। यह निर्णय प्रशासनिक संवेदनशीलता और किसान-हितैषी दृष्टिकोण का परिचायक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार द्वारा किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए अनेक योजनाएं लागू की गई हैं। मध्यप्रदेश सरकार भी उसी दिशा में ठोस कदम बढ़ाते हुए किसानों को बेहतर मूल्य, सुविधाएं और अवसर प्रदान करने का प्रयास कर रही है। स्पष्ट है कि यदि किसान सशक्त होगा तो प्रदेश और देश दोनों समृद्ध होंगे। किसानों के परिश्रम को सम्मान और उनकी आय में वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए ऐसे निर्णय न केवल सराहनीय हैं, बल्कि कृषि क्षेत्र को स्थायी रूप से मजबूत बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण साबित होंगे। जयपाल सिंह चावड़ा लेखक (मध्यप्रदेश भाजपा किसान मोर्चे के अध्यक्ष है)

वर्किंग वुमेंन के लिए सुरक्षित आवासीय सुविधा विकसित कर रहा मध्यप्रदेश

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश में औद्योगिक विकास के साथ महिलाओं के सुरक्षित और सम्मानजनक कार्य परिवेश को सुनिश्चित करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। औद्योगिक क्षेत्रों में कार्यरत महिलाओं को सुरक्षित, सुविधाजनक और किफायती आवास उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में वर्किंग वुमेन हॉस्टल विकसित किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि राज्य औद्योगिक प्रोत्साहन नीति 2025 के अंतर्गत रोजगार सृजन को प्रोत्साहित करने के लिए प्रति कर्मचारी प्रति माह 5 हजार रुपए. की सहायता पांच वर्षों तक प्रदान की जा रही है, वहीं कौशल विकास को बढ़ावा देने के लिए पहले पांच वर्षों में नियुक्त प्रत्येक नए कर्मचारी के लिए 13 हजार रुपए की सहायता का प्रावधान किया गया है। इन पहलों का उद्देश्य महिलाओं के लिए अधिक रोजगार अवसर सृजित करना और उन्हें सुरक्षित आवासीय सुविधा उपलब्ध कराते हुए आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। औद्योगिक विकास के साथ महिला सुविधाओं पर विशेष ध्यान प्रदेश में औद्योगिक आधारभूत संरचना को सुदृढ़ करने के लिए 48 औद्योगिक पार्क विकसित किए जा रहे हैं, जिनमें आईटी पार्क, प्लग एण्ड प्ले पार्क, प्लेटेड इंडस्ट्रीज तथा कमर्शियल कॉम्प्लेक्स शामिल हैं। दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-नागपुर औद्योगिक कॉरिडोर के अंतर्गत औद्योगिक क्षेत्रों का विस्तार करते हुए प्रदेश में बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित किया जा रहा है। औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार के साथ महिला कर्मचारियों के लिए आवश्यक सुविधाओं के विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिससे औद्योगिक क्षेत्रों में कार्यरत महिलाओं को बेहतर और सुरक्षित कार्य वातावरण मिल सके। औद्योगिक क्षेत्रों में विकसित होंगे आधुनिक वर्किंग वुमेन हॉस्टल कार्यशील महिलाओं को सुरक्षित और व्यवस्थित आवास उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रदेश के चार प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में वर्किंग वुमेन हॉस्टल का निर्माण किया जा रहा है। भारत सरकार की स्कीम फॉर स्पेशल असिस्टेंस 2024-25 के अंतर्गत एमपीआईडीसी क्षेत्र में चार वर्किंग वुमेन हॉस्टल स्वीकृत किए गए हैं। इन परियोजनाओं के अंतर्गत कुल 26 आवासीय ब्लॉक्स का निर्माण किया जाएगा और प्रत्येक ब्लॉक में 222 बेड्स की व्यवस्था की जाएगी। हजारों महिलाओं को मिलेगा सुरक्षित आवास इन परियोजनाओं के पूर्ण होने पर लगभग 5700 से अधिक कार्यशील महिलाओं को सुरक्षित और सुव्यवस्थित आवास सुविधा उपलब्ध होगी। इससे औद्योगिक क्षेत्रों में कार्यरत महिलाओं को रहने और आवागमन से जुड़ी कठिनाइयों से राहत मिलेगी तथा वे अधिक आत्मविश्वास और सुविधा के साथ अपने कार्यक्षेत्र में योगदान दे सकेंगी। औद्योगिक क्षेत्रों में महिलाओं के लिए सर्वसुविधायुक्त हॉस्टल वर्किंग वुमेन हॉस्टल का विकास विक्रम उद्योगपुरी (उज्जैन), पीथमपुर सेक्टर-1 एवं 2 (धार), मालनपुर-घिरींगी (भिंड) और मंडीदीप (रायसेन) में किया जा रहा है। लगभग 6.66 हेक्टेयर भूमि पर इन परियोजनाओं का निर्माण करीब 250 करोड़ रुपये की लागत से किया जा रहा है। यह सुविधाएं औद्योगिक क्षेत्रों में कार्यरत महिलाओं को सुरक्षित और अनुकूल आवासीय वातावरण प्रदान करेंगी। महिला सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल औद्योगिक क्षेत्रों में विकसित हो रहे वर्किंग वुमेन हॉस्टल महिलाओं को सुरक्षित आवास, बेहतर जीवन सुविधा और कार्यस्थल के निकट रहने की सुविधा प्रदान करेंगे। इससे महिलाओं की कार्य भागीदारी बढ़ेगी, उनके आत्मनिर्भर बनने की प्रक्रिया को बल मिलेगा और औद्योगिक विकास में महिलाओं की भागीदारी और अधिक मजबूत होगी। मध्यप्रदेश में महिला सशक्तिकरण और औद्योगिक विकास को साथ लेकर आगे बढ़ाने की दिशा में यह पहल महत्वपूर्ण होगी।  

अनुपम खेर मना रहे हैं 71वां जन्मदिन, जानिए उनके करियर की खास उपलब्धियाँ

मुंबई, बॉलीवुड के जाने-माने चरित्र अभिनेता और फिल्मकार अनुपम खेर आज 71 वर्ष के हो गए। अनुपम खेर का जन्म 07 मार्च 1955 को शिमला में हुआ था। उनके पिता पुष्कर नाथ एक कश्मीरी पंडित थे और हिमाचल प्रदेश के वन विभाग में क्लर्क थे। अनुपम ने अपनी स्कूली शिक्षा शिमला के डीएवी स्कूल से की।बाद में, उन्होंने शिमला के संजौली स्थित सरकारी कॉलेज में अर्थशास्त्र की पढ़ाई की। उन्होंने चंडीगढ़ के पंजाब विश्वविद्यालय में भारतीय रंगमंच का अध्ययन करने के लिए पढ़ाई छोड़ दी। अनुपम खेर ने 1978 में नई दिल्ली में राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय से स्नातक किया। इसके बाद वह रंगमंच से जुड़ गए। 80 के दशक में अभिनेता बनने का सपना लिए हुए उन्होंने मुंबई में कदम रखा।अनुपम खेर महज 37 रुपये लेकर घर से निकले थे और वो सपनों के शहर मुंबई आए थे। शुरुआती दिनों में उन्हें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा था। इतना ही नहीं उन्हे कई रातें प्लेटफार्म पर गुजारनी पड़ी थी। तीन साल तक उनके पास कोई काम नहीं था। बतौर अभिनेता उन्हें वर्ष 1982 में प्रदर्शित फिल्म ‘आगमन’ में काम करने का मौका मिला, लेकिन फिल्म के असफल हो जाने के बाद वह फिल्म इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाने में कामयाब नहीं हो सके। वर्ष 1984 में अनुपम खेर को महेश भट्ट की फिल्म ‘सारांश’ में काम करने का अवसर मिला। इस फिल्म में उन्होंने एक वृद्ध पिता की भूमिका निभाई जिसके पुत्र की असमय मृत्यु हो जाती है। अपने इस किरदार को अनुपम ने संजीदगी के साथ निभाकर दर्शकों का दिल जीत लिया। साथ ही सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के फिल्म फेयर पुरस्कार से भी सम्मानित किए गए। वर्ष 1986 में उन्हें सुभाष घई की फिल्म ‘कर्मा’ में बतौर खलनायक काम करने का अवसर मिला। इस फिल्म में उनके सामने अभिनय सम्राट दिलीप कुमार थे, लेकिन अनुपम खेर अपने दमदार अभिनय से दर्शकों का दिल जीतने में सफल रहे।  

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर रायपुर में ‘लखपति दीदी संवाद’ कार्यक्रम में लखपती दीदियों से किया आत्मीय संवाद

रायपुर लखपति दीदी अभियान से छत्तीसगढ़ की महिलाएं लिख रही समृद्धि की नई कहानी – मुख्यमंत्री  साय छत्तीसगढ़ की महिलाएं आज आत्मनिर्भरता, मेहनत और नवाचार के बल पर नई पहचान बना रही हैं और हमारी सरकार उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। मुख्यमंत्री  साय ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर रायपुर के इंडोर स्टेडियम में आयोजित ‘लखपति दीदी संवाद’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह बात कही। कार्यक्रम में प्रदेश भर से आई स्व-सहायता समूह की हजारों महिलाएं और लखपति दीदियां उत्साहपूर्वक शामिल हुईं। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि हमारी संस्कृति में नारी को शक्ति का स्वरूप माना गया है और जहां नारी का सम्मान होता है, वहीं देवताओं का निवास होता है। उन्होंने कहा कि पहले महिलाएं घरों तक सीमित रहती थीं, लेकिन आज प्रदेश की महिलाएं स्व सहायता समूहों के माध्यम से आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।  मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि शासन का लक्ष्य लखपति दीदियों को और अधिक सशक्त बनाकर गांव की प्रत्येक महिला को लखपति बनाना और भविष्य में लखपति ग्राम का निर्माण करना है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के आह्वान पर छत्तीसगढ़ में 10 लाख महिलाओं को लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसमें से वर्तमान में लगभग 8 लाख महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। उन्होंने कहा कि अब प्रदेश में 10 लाख से अधिक लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य रखा गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार गांवों के लोगों के लिए 18 लाख प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत कर चुकी है और इनके निर्माण में बिहान की दीदियां भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं के सम्मान और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए राज्य सरकार द्वारा महतारी वंदन योजना प्रारंभ की गई है, जिसके तहत  लगभग 70 लाख माताओं-बहनों को 24 किश्तों में 15 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि दी जा चुकी है तथा इस वर्ष के बजट में इसके लिए 8,200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि लखपति दीदी योजना से प्रदेश की 5 लाख से अधिक महिलाएं आत्मनिर्भर बन चुकी हैं और अब लखपति दीदी भ्रमण योजना शुरू कर उन्हें देश-प्रदेश के व्यावसायिक केंद्रों और शक्ति पीठों का भ्रमण कराया जाएगा। उन्होंने बताया कि पंचायत विभाग द्वारा 250 महतारी सदनों का निर्माण, आंगनबाड़ी संचालन और पोषण योजनाओं के लिए भी इस वर्ष के बजट में प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि बालिकाओं को आर्थिक सुरक्षा देने के लिए रानी दुर्गावती योजना शुरू की जाएगी, जिसके तहत 18 वर्ष की आयु पूरी होने पर 1.5 लाख रुपये दिए जाएंगे। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि हमारी लखपति दीदियों से पूरे प्रदेश की माताओं-बहनों को प्रेरणा मिल रही है और अब हमारा लक्ष्य लखपति दीदियों को करोड़पति दीदी बनाना है। उन्होंने कहा कि आज शुरू हुई बकरी पालन क्लस्टर परियोजना से प्रदेश में बकरी पालन को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही इन्क्यूबेशन सेंटर की स्थापना और आईआईएम रायपुर के साथ एमओयू से स्व-सहायता समूहों की आमदनी बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में माताओं-बहनों की बड़ी भूमिका होगी। आज महिलाएं गांवों में सेंट्रिंग प्लेट उपलब्ध कराने से लेकर ड्रोन उड़ाने तक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि जहां नारियों की पूजा होती है, वहां देवताओं का वास होता है। एक नारी शिक्षित होती है तो दो परिवार और पूरा समाज शिक्षित होता है। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री  साय ने लखपति दीदी आधारित कॉफी टेबल बुक तथा छत्तीसकला आधारित ब्रांड बुक का विमोचन किया और लखपति दीदी ग्राम पोर्टल का शुभारंभ किया। इस पोर्टल के माध्यम से ग्राम पंचायतों का मूल्यांकन कर उन्हें लखपति दीदी ग्राम घोषित किया जाएगा। कार्यक्रम में उत्कृष्ट कार्य करने वाली स्व-सहायता समूह की महिलाओं, कैडर्स और लखपति दीदियों को सम्मानित भी किया गया। कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने कहा कि छत्तीसगढ़ की महिलाएं आज आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि पहले लोग कहते थे कि महिलाओं को लखपति बनाना संभव नहीं है, लेकिन आज प्रदेश में 8 लाख महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आने वाले समय में ये महिलाएं लखपति से करोड़पति दीदी बनने की दिशा में आगे बढ़ेंगी।  कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आई महिलाओं ने अपनी प्रेरक कहानियां साझा कीं। बस्तर जिले के दरभा ब्लॉक की लखपति दीदी  राजकुमारी कश्यप ने बताया कि एक समय ऐसा था जब उनके क्षेत्र में बाइक से आना-जाना भी कठिन था, लेकिन आज वह लखपति दीदी बन चुकी हैं। उन्होंने बताया कि उनका परिवार खेती पर निर्भर है और मुर्गीपालन से उन्हें सालाना 6–7 लाख रुपये की आय हो रही है। बालोद जिले की भुनेश्वरी साहू ने बताया कि उन्होंने 20 हजार रुपये का ऋण लेकर सिलाई मशीन से काम शुरू किया और बाद में उन्हें सरकार की पहल से ड्रोन पायलट की ट्रेनिंग मिली। आज वह अपने क्षेत्र में ड्रोन दीदी के नाम से जानी जाती हैं। जशपुर जिले की लखपति दीदी  अनिता साहू ने बताया कि वह ईंट निर्माण का कार्य करती हैं। उन्होंने कहा कि एक समय था जब समूह की साप्ताहिक बैठक में 10 रुपये जमा करने के लिए भी दूसरों पर निर्भर होना पड़ता था, लेकिन आज वह लखपति बन चुकी हैं। कार्यक्रम में प्रमुख सचिव  निहारिका बारीक ने बताया कि छत्तीसगढ़ में 8 लाख महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं, जिनमें से लगभग एक लाख महिलाएं नक्सल प्रभावित क्षेत्रों से हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश में 10 लाख 26 हजार स्व-सहायता समूहों से जुड़कर 30 लाख 85 हजार महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनी हैं। इस अवसर पर राजस्व मंत्री एवं उच्च शिक्षा मंत्री  टंकराम वर्मा, महिला एवं बाल विकास मंत्री  लक्ष्मी राजवाड़े, कौशल विकास मंत्री  गुरु खुशवंत साहेब, विधायक  सुनील सोनी, सचिव  भीम सिंह, रायपुर संभाग के आयुक्त  महादेव कावड़े, कलेक्टर  गौरव सिंह, मिशन संचालक  अश्वनी देवांगन  सहित बड़ी संख्या में लखपति दीदियां और स्व-सहायता समूह की महिलाएं उपस्थित थी।

‘धुरंधर’ के बाद नई सोलो लीड फिल्म में नजर आएंगे अर्जुन रामपाल

मुंबई, ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘धुरंधर’ की ज़बरदस्त सफलता के बाद अर्जुन रामपाल एक दमदार सोलो लीड के साथ फिर से बड़े पर्दे पर वापसी कर रहे हैं। यह नई, अभी अनटाइटल्ड फैमिली ड्रामा फिल्म मनोरंजन के साथ एक मजबूत सामाजिक संदेश भी लेकर आती है। कहानी जीवन की सादगी, अपनी जड़ों से जुड़ाव और उन रिश्तों का जश्न मनाती है जो सच में मायने रखते हैं। यहाँ कोई घिसा-पिटा मसाला नहीं, बल्कि दिल को छू लेने वाली, अपनेपन से भरी और पूरे परिवार के साथ देखने लायक कहानी है, जो हमें अपनी विरासत और अपनों की कद्र करना याद दिलाती है। यह फिल्म अर्जुन रामपाल और लेखक-निर्देशक शैलेश वर्मा की पहली साथ काम करने वाली फिल्म है। इसे पारस सॉफ्टवेयर एंड एंटरटेनमेंट और वेमो मल्टीमीडिया प्राइवेट लिमिटेड ने प्रोड्यूस किया है। फिल्म अगस्त 2026 के मध्य में सिनेमाघरों में रिलीज़ होने की तैयारी में है। वेमो के एमडी डॉ. विकास कुमार मोदी और शैलेश वर्मा इस साल तीन ऐसी फिल्मों की लाइनअप लेकर आ रहे हैं जो सामाजिक रूप से प्रभावशाली और मजबूत मूल्यों पर आधारित होंगी।  

भोपाल पुलिस की पहल: गोविंदपुरा थाने में महिलाओं व किशोरियों के लिए एक्सपोज़र विजिट

भोपाल महिलाओं एवं किशोरी बालिकाओं को पुलिस व्यवस्था, कानूनी प्रक्रियाओं तथा बाल संरक्षण संबंधी विषयों की जानकारी प्रदान करने और उनके भीतर सुरक्षा एवं अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से थाना गोविंदपुरा में एक्सपोज़र विजिट का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम निवसीड–बचपन संस्था एवं महिला बाल विकास विभाग के सहयोग से आयोजित हुआ, जिसमें अन्ना नगर सेक्टर एवं बाणगंगा परियोजना क्षेत्र की लगभग 70 महिलाओं एवं किशोरी बालिकाओं ने सहभागिता की। कार्यक्रम के दौरान थाना प्रभारी  अवधेश सिंह तोमर ने सभी प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए पुलिस थाने की कार्यप्रणाली के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने महिलाओं एवं बच्चों से संबंधित अपराधों, बाल संरक्षण से जुड़े प्रावधानों, शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया तथा आपातकालीन परिस्थितियों में पुलिस से सहायता प्राप्त करने के तरीकों के बारे में समझाया। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि पुलिस थाने में आने वाली प्रत्येक शिकायत को गंभीरता से लिया जाता है और पीड़ितों को न्याय दिलाने के लिए आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाती है। इसके पश्चात हेड कॉन्स्टेबल  मुकेश यादव तथा ऊर्जा डेस्क की प्रभारी मती रश्मि पटेल द्वारा प्रतिभागियों को पुलिस थाने के विभिन्न कक्षों का भ्रमण कराया गया। इस दौरान शिकायत कक्ष, रिकॉर्ड रूम, पूछताछ कक्ष, ऊर्जा डेस्क सहित अन्य व्यवस्थाओं की जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि महिलाओं एवं बच्चों से जुड़े मामलों के लिए थाने में विशेष डेस्क और सुविधाएँ उपलब्ध हैं, जहाँ उनकी समस्याओं को संवेदनशीलता के साथ सुना और उनका समाधान किया जाता है। एक्सपोज़र विजिट के दौरान प्रतिभागियों ने पुलिस अधिकारियों से विभिन्न विषयों पर प्रश्न भी पूछे, जिनका अधिकारियों द्वारा सहज एवं स्पष्ट रूप से उत्तर दिया गया। इस संवाद से महिलाओं और किशोरी बालिकाओं को पुलिस व्यवस्था और कानूनी प्रक्रियाओं के बारे में व्यावहारिक जानकारी प्राप्त हुई। कार्यक्रम में निवसीड–बचपन संस्था से सु निहारिका पंसोरिया तथा महिला बाल विकास विभाग से सु चंद्रावती अमरुते भी उपस्थित रहीं। इस प्रकार के कार्यक्रमों का उद्देश्य महिलाओं एवं किशोरियों को कानून और सुरक्षा तंत्र के प्रति जागरूक करना है, ताकि वे किसी भी समस्या या आपात स्थिति में निडर होकर पुलिस से सहायता प्राप्त कर सकें। ऐसे प्रयासों से समाज और पुलिस के बीच विश्वास मजबूत होता है तथा महिलाओं और बालिकाओं में आत्मविश्वास बढ़ता है।  

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