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रणनीति और समीकरण साधने की कवायद: यूपी में भाजपा की चुनावी तैयारी, योगी सरकार में बदलाव के संकेत

लखनऊ प्रदेश में राजनीतिक पदचापों की ध्वनि दूर तक पहुंचने लगी है। पिछले दिनों राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कई अहम विषयों को छेड़ते हुए प्रदेश को मथा, वहीं अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भाजपा के सभी छह क्षेत्रों में समन्वय बैठकों में पहुंच रहे हैं। राजनीतिक पंडितों का कहना है कि अब ‘ट्रिपल एस’ यानी सरकार, संगठन और संघ के मॉडल पर चुनावी तार को कसा जा रहा है। पार्टी अंदरूनी घमासान, यूजीसी एवं जातीय उबाल से होने वाले नुकसान से निपटने की रणनीति बना रही, वहीं नाराज कार्यकर्ताओं को साधने की कसरत भी तेज की गई है। सरकार, संघ और भाजपा की प्रदेश स्तर पर समन्वय बैठक नियमित अंतराल पर होती रहती है, जिसमें सरकार के कार्यों के साथ ही अनुषांगिक संगठनों के अभियानों एवं आगामी कार्यक्रमों की चर्चा होती है, साथ ही जनप्रतिनिधियों एवं कार्यकर्ताओं के बीच सामंजस्य बढ़ाने पर जोर दिया जाता ह, लेकिन अब पार्टी के सभी छह क्षेत्रों में बैठकें हो रही हैं। बैठक में प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी के साथ ही योगी भी पहुंच रहे हैं। राजनीतिक, सामाजिक एवं स्थानीय विषयों पर विमर्श 28 फरवरी को लखनऊ में आयोजित बैठक में योगी, पंकज, प्रदेश महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह के साथ ही संघ के सभी बड़े पदाधिकारी शामिल हुए। एक मार्च को वाराणसी और दो मार्च को गोरखपुर क्षेत्र में बैठक आयोजित की गई। बैठक में राजनीतिक, सामाजिक एवं स्थानीय विषयों पर विमर्श हुआ। होली के बाद पांच मार्च को पश्चिम क्षेत्र की समन्वय बैठक गाजियाबाद, छह मार्च को कानपुर और सात को ब्रज क्षेत्र की बैठक आगरा में होगी। समन्वय बैठकों की टाइमिंग विशेष रूप से बड़े राजनीतिक संकेत दे रही है। खासकर, ऐसे समय में जब प्रदेश संगठन में बड़े पैमाने पर बदलाव करने के साथ ही योगी मंत्रिमंडल में फेरबदल की भी चर्चा तेज है। प्रदेश अध्यक्ष चौधरी का कहना है कि सप्ताहभर में गाजियाबाद, कानपुर एवं आगरा में समन्वय बैठक होगी। इन बैठकों में प्रमुख मुद्दों के साथ ही क्षेत्रीय स्तर के विषयों पर भी स्वाभाविक तौर पर चर्चा होगी।  

सोशल मीडिया पर दी हाइड्रोजन बम की धमकी, पुलिस ने आरोपी को दबोचा

टीकमगढ़ पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती की बहू और जिला पंचायत अध्यक्ष उमिता राहुल सिंह लोधी को इंटरनेट मीडिया पर हाइड्रोजन बम से उड़ाने की धमकी देने वाले आरोपित को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। पकड़े गए आरोपित की पहचान अर्जुन चढ़ार निवासी खरगापुर के रूप में हुई है। एसडीओपी राहुल कटरे ने बताया कि 22 फरवरी को जीडब्ल्यू बृजेंद्र कुशवाहा नामक एक फेसबुक प्रोफाइल से जिपं अध्यक्ष उमिता सिंह की पोस्ट पर लिखा था हमारे पास हाइड्रोजन बम है, हम बनाना जानते हैं। नेताओं को हम खुद ही मारेंगे। इस कमेंट में जिला पंचायत अध्यक्ष और उनके पति, पूर्व मंत्री राहुल सिंह लोधी को जान से मारने की सीधी धमकी दी गई थी। साक्ष्य मिटाने के लिए तोड़ा मोबाइल पुलिस पूछताछ में आरोपित अर्जुन चढ़ार ने बताया कि घटना वाले दिन उसने अत्यधिक शराब का सेवन कर रखा था। नशे की हालत में वीडियो देखते समय अचानक जिपं अध्यक्ष की आइडी सामने आने पर उसने बोलकर यह कमेंट कर दिया था। मामला तूल पकड़ते ही घबरा गया और उसने साक्ष्य मिटाने के लिए अपना आठ साल पुराना मोबाइल तोड़कर फेंक दिया। सिम निकालकर दूसरे मोबाइल में भी डाली, लेकिन साइबर सेल ने आइएमइआइ नंबर और तकनीकी विश्लेषण के जरिए उसे खरगापुर से दबोच लिया।  

कांग्रेस के दावों पर साव ने साधा निशाना, धान की अंतर राशि से लेकर असम चुनाव तक उठाए सवाल

रायपुर छत्तीसगढ़ में धान की अंतर राशि को लेकर सियासत गरमा गई है। कांग्रेस ने जहां इसे को किसानों के साथ ‘प्रति एकड़ 3000 रुपए का चूना’ करार दिया, वहीं प्रदेश के उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने पलटवार करते हुए कांग्रेस पर किसानों को ठगने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जिस पार्टी ने अपने कार्यकाल में किसानों से किए वादे पूरे नहीं किए, उसे इस मुद्दे पर बोलने का नैतिक अधिकार नहीं है। डिप्टी सीएम साव ने कहा कि कांग्रेस ने अपने शासनकाल में किसानों को दो साल का बोनस देने का वादा किया था, लेकिन वह पूरा नहीं किया। इसके विपरीत राज्य सरकार ने कृषक उन्नति योजना के तहत धान खरीदी के बाद अंतर की पूरी राशि एकमुश्त किसानों के खातों में जारी की है। उन्होंने दावा किया कि सरकार ने जो कहा, वह करके दिखाया है। राज्यसभा प्रत्याशी चयन को लेकर भी उन्होंने प्रतिक्रिया दी। छत्तीसगढ़ से भाजपा प्रत्याशी के नाम पर चल रही अटकलों के बीच अरुण साव ने कहा कि पार्टी में चयन की प्रक्रिया जारी है और तय समय पर नाम की घोषणा तथा नामांकन किया जाएगा। स्थानीय प्रत्याशी की मांग के सवाल पर उन्होंने कांग्रेस पर अन्याय करने का आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा योग्य और सक्रिय कार्यकर्ता को अवसर देती है तथा अंतिम निर्णय पार्टी का पार्लियामेंट्री बोर्ड करता है। असम में चुनावी जिम्मेदारी मिलने पर भी उन्होंने अपनी भूमिका स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि पार्टी के निर्देशानुसार वे असम में संगठनात्मक कार्य कर रहे हैं और उन्हें लखीमपुर क्षेत्र की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहां स्थानीय कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर चुनावी रणनीति पर काम किया जा रहा है। उन्होंने विश्वास जताया कि असम में भाजपा ऐतिहासिक प्रदर्शन करेगी।

मनोज पिंगुआ का औचक दौरा: पुनर्वास केंद्र में व्यवस्थाओं की पड़ताल, दिए आवश्यक निर्देश

रायपुर अपर मुख्य सचिव मनोज पिंगुआ ने पुनर्वास केंद्र का किया निरीक्षण अपर मुख्य सचिव मनोज पिंगुआ ने आज मंगलवार को कोंडागांव जिले के प्रवास के दौरान देव खरगांव स्थित पुनर्वास केंद्र का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने पुनर्वासित व्यक्तियों से संवाद कर उनकी दैनिक गतिविधियों एवं व्यवस्थाओं की जानकारी ली। साथ ही केंद्र में संचालित विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों का अवलोकन किया। उन्होंने पुनर्वास केंद्र के व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए प्रशिक्षण के साथ-साथ उनकी शिक्षा पर भी विशेष ध्यान देने को कहा ताकि पुनर्वासित व्यक्तियों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित हो सके। साथ ही उन्होंने कृषि संबंधी स्वरोजगार पर विशेष ध्यान देने को कहा और सुबह शाम नियमित प्रार्थना कराने के भी निर्देश दिए। इस अवसर पर कलेक्टरमती नूपुर राशि पन्ना एवं पुलिस अधीक्षक पंकज चंद्रा ने पुनर्वासित व्यक्तियों को शासन की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से प्रदान की जा रही सुविधाओं की जानकारी दी। इस मौके पर 01 पुनर्वासित व्यक्ति को नियुक्ति पत्र प्रदान किया और 01 व्यक्ति को स्मार्टफोन भी प्रदाय किया। साथ ही सभी को प्रेरणा लेने हेतु प्रेरित किया।  गारमेंट फैक्ट्री का भी किया अवलोकन अपर मुख्य सचिव पिंगुआ ने जिला मुख्यालय स्थित कोंडानार गारमेंट फैक्ट्री का निरीक्षण कर वहां संचालित आजीविका गतिविधियों का अवलोकन किया तथा प्रबंधन से विस्तृत जानकारी प्राप्त की।  इस अवसर पर एसडीएम अजय उरांव, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रूपेश दांडे, डीएसपी सतीश भार्गव तथा केंद्र प्रभारी पुनेश्वर वर्मा सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।

जंग की आंच बाजार तक: तेल संकट गहराया, शिपमेंट रुकी तो चावल सप्लाई पर भी खतरा

ईरान   ईरान-इजरायल युद्ध के बाद पश्चिम एशिया में हालात तेजी से बिगड़ गए हैं। Strait of Hormuz में बढ़ते खतरे और जहाजों की आवाजाही पर असर ने वैश्विक सप्लाई चेन को झटका दिया है। कच्चे तेल और नेचुरल गैस की आपूर्ति पर दबाव के साथ-साथ भारत का बासमती चावल निर्यात भी गंभीर रूप से प्रभावित हुआ है। समंदर और बंदरगाहों पर अटका लाखों टन चावल ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के मुताबिक, भारत से खाड़ी देशों को भेजा गया करीब 4 से 6 लाख टन बासमती चावल ट्रांजिट में, भारतीय बंदरगाहों पर या गंतव्य देशों के पोर्ट पर फंसा हुआ है। आम तौर पर खाड़ी देशों तक चावल पहुंचने में करीब 40 दिन लगते हैं लेकिन मौजूदा संकट ने इस पूरी प्रक्रिया को बाधित कर दिया है। 5-6 हजार करोड़ रुपए दांव पर फंसे हुए कंसाइनमेंट की अनुमानित वैल्यू 5,000 से 6,000 करोड़ रुपए बताई जा रही है। शिपिंग कंपनियों के बीमा कवर रद्द होने और जोखिम बढ़ने से कंटेनर फ्रेट दरें दोगुनी से ज्यादा हो गई हैं। ऐसे में निर्यातकों ने नई बुकिंग और पैकिंग का काम रोक दिया है और पहले से किए गए अनुबंधों को प्राथमिकता दी जा रही है। 70% निर्यात खाड़ी पर निर्भर भारत हर साल करीब 60 लाख टन से अधिक बासमती चावल निर्यात करता है, जिसमें से लगभग 70% हिस्सा खाड़ी देशों जैसे सऊदी अरब, ईरान और यूएई को जाता है। वित्त वर्ष 2024-25 में कुल 60.65 लाख टन बासमती का निर्यात हुआ, जिसकी कीमत 50,312 करोड़ रुपए (5.94 अरब डॉलर) रही।   फोर्स मेज्योर क्लॉज का सहारा? ट्रेड सूत्रों के अनुसार, यदि हालात लंबे समय तक बने रहते हैं तो कुछ निर्यातक ‘फोर्स मेज्योर’ क्लॉज का सहारा ले सकते हैं। यह प्रावधान युद्ध या प्राकृतिक आपदा जैसी अप्रत्याशित परिस्थितियों में अनुबंध की शर्तों से अस्थायी राहत देता है। क्या भारत में सस्ता होगा बासमती? रिकॉर्ड पैदावार के बीच मांग घटने से बासमती की कीमतों में पहले ही करीब 6% की गिरावट आ चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि निर्यात बाधित रहा तो घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ने से दाम और नीचे आ सकते हैं। हालांकि ट्रेडर्स का कहना है कि मिडिल ईस्ट में बासमती एक जरूरी खाद्य वस्तु है और भारतीय चावल का वास्तविक विकल्प नहीं है। जैसे ही हालात सामान्य होंगे, खाड़ी देशों से मांग दोबारा तेजी पकड़ सकती है। फिलहाल निर्यातक ‘वेट एंड वॉच’ की रणनीति अपना रहे हैं।

MP के 27 उत्पादों को मिला प्रतिष्ठित GI टैग, देश-दुनिया में बढ़ी ब्रांड वैल्यू

भोपाल मध्यप्रदेश की अनेक शिल्प कलाओं और कृषि, उद्यानिकी उत्पादों को राष्ट्रीय स्तर पर “जीआई टैग” प्राप्त होना प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के वोकल फॉर लोकल के स्वप्न को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश के उन्नत किसानों, खाद्य प्रसंस्करण उद्यमियों, शिल्पकारों और उन्हें प्रोत्साहित करने वाले विभागों को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी है। इन्हें मिल चुका है जीआई टैग बैतूल जिले की पारंपरिक शिल्प कला भरेवा कला को यह राष्ट्रीय पहचान मिली है। क्राफ्ट विलेज टिगरिया की भरेवा व कला को जीआई टैग मिला है। राष्ट्रपतिमती द्रौपदी मुर्मु ने हाल ही में (दिसंबर 2025 में) भरेवा शिल्प के कलाकार बलदेव वाघमारे को राष्ट्रीय हस्तशिल्प पुरस्कार से भी सम्मानित किया। बैतूल के अलावा छतरपुर जिले के खजुराहो के स्टोन क्राफ्ट, छतरपुर जिले के ही पारंपरिक काष्ठ शिल्प, ग्वालियर के पत्थर शिल्प, ग्वालियर की पेपर मैश कला जीआई टैग प्राप्त करने में सफल रही है। प्रदेश के अन्य जीआई टैग उत्पाद इस प्रकार हैं: चंदेरी साड़ी, महेश्वरी साड़ी और फैब्रिक, धार का बाग प्रिंट, इंदौर के लेदर के खिलौने, दतिया और टीकमगढ़ के बेल मेटल वेयर, उज्जैन का बटीक प्रिंट, जबलपुर का संगमरमर शिल्प, डिंडोरी की गोंड पेंटिंग, वारासिवनी की हैंडलूम साड़ी, ग्वालियर की ज्यामितीय पैटर्न की कालीन, पन्ना का हीरा, डिंडोरी का लोहा शिल्प, बालाघाट का चिन्नौर चावल, रीवा का सुंदरजा आम, सीहोर और विदिशा का शरबती गेहूं, मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश का संयुक्त रूप से महोबा देशावरी पान, छिंदवाड़ा और पांढुर्णा क्षेत्र का नागपुरी संतरा, झाबुआ जिले का कड़कनाथ मुर्गा, रतलाम का सेव, मुरैना की गजक, बुंदेलखंड क्षेत्र का कठिया गेहूं और जावरा का लहसुन शामिल है। मध्यप्रदेश के अन्य अनेक उत्पाद भी जीआई टैग प्राप्त होने की श्रृंखला में शीघ्र शामिल होंगे। इसके लिए राज्य सरकार और केंद्र सरकार के स्तर पर विभिन्न संस्थाओं द्वारा आवश्यक प्रयास किये जा रहे हैं। वर्ष 2024 और 2025 में विशेष उपलब्धि मध्यप्रदेश में वर्ष 2024 में बुंदेलखंड के कठिया गेहूं और रतलाम जिले के जावरा के लहसुन को जीआई टैग प्राप्त हुआ। इसी तरह वर्ष 2025 में प्रदेश के पांच उत्पाद को जीआई टैग मिला। इनमें छतरपुर जिले के खजुराहो का स्टोन क्राफ्ट, छतरपुर का ही पारंपरिक फर्नीचर, बैतूल का भरेवा मेटल क्राफ्ट, ग्वालियर का पत्थर शिल्प और ग्वालियर का ही पेपर मैश क्राफ्ट शामिल है। जीआई टैग प्रदान करने का कार्य उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण में है। पंजीकरण की प्रक्रिया के बाद जीआई टैग की वैधता 10 वर्ष के लिए होती है, जिसे नवीनीकरण का लाभ भी मिलता है। जीआई टैग भौगोलिक संकेत रजिस्ट्री अर्थात (ज्योग्राफिकल इंडिकेशंस रजिस्ट्री) केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा प्रदान किया जाता है। किसी उत्पाद की प्रामाणिकता की दृष्टि से जीआई टैग मिलना बहुत महत्व रखता है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2004 में दार्जिलिंग की चाय को भारत के प्रथम जीआई टैग प्राप्त होने का गौरव मिला था।  

स्वास्थ्य अधोसंरचना एवं सेवाओं के सुदृढ़ीकरण का सुनियोजित प्रावधान

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि स्वस्थ प्रदेश ही समृद्ध प्रदेश की आधारशिला है। स्वास्थ्य अधोसंरचना के व्यापक विस्तार, गुणवत्तापूर्ण उपचार सुविधाओं की उपलब्धता और चिकित्सा शिक्षा के सुदृढ़ीकरण के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में सुनियोजित प्रावधान किए गए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश का प्रत्येक नागरिक, चाहे वह शहरी क्षेत्र में निवास करता हो या दूरस्थ ग्रामीण अंचल में, उसे समयबद्ध और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध हों। स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए कुल 23 हजार 747 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान है, जो राज्य सरकार की प्राथमिकताओं को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। राज्य सरकार का संकल्प है कि स्वास्थ्य सेवाओं को आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षित मानव संसाधन और सुदृढ़ अधोसंरचना के माध्यम से नए आयाम दिए जाएँ। प्रदेश को सशक्त, स्वस्थ और आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश की दिशा में तेजी से अग्रसर करने लिए सतत और सशक्त प्रयास किए जा रहे हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन एवं प्राथमिक स्वास्थ्य ढांचे को मजबूती राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत 4,600 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण, रोग नियंत्रण और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ किया जाएगा। प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों की स्थापना एवं संचालन के लिए 1,934 करोड़ रुपये तथा उप स्वास्थ्य केन्द्रों के लिए 782 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। सामुदायिक, उप एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों के भवन निर्माण के लिए 580 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और बेहतर होगी। आशा कार्यकर्ताओं को अतिरिक्त प्रोत्साहन के लिये 550 करोड़ रुपये तथा मुख्यमंत्री श्रमिक सेवा प्रसूति सहायता योजना के लिए 750 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं, जिससे जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार होगा। अस्पतालों एवं चिकित्सा महाविद्यालयों का विस्तार प्रदेश में विगत दो वर्षों में पाँच नए शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय प्रारंभ किए गए हैं। एमबीबीएस सीटों की संख्या 2,275 से बढ़कर 2,850 तथा स्नातकोत्तर सीटें 1,262 से बढ़कर 1,468 हो गई हैं। इंदौर, रीवा एवं सतना के चिकित्सा महाविद्यालयों के उन्नयन के साथ ही भोपाल, इंदौर, रीवा, जबलपुर, सागर एवं ग्वालियर में उन्नत चिकित्सा सुविधाएँ विकसित की गई हैं। पीपीपी मोड पर मेडिकल कॉलेज की स्थापना के लिए धार, बैतूल, पन्ना और कटनी में एलओए जारी किया जा चुका है। अन्य 9 जिलों में प्रक्रिया प्रगतिरत है। चिकित्सा महाविद्यालय एवं संबद्ध चिकित्सालयों के लिए 3,056 करोड़ रुपये और जिला एवं सिविल अस्पतालों के लिए 2,049 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। अस्पतालों एवं औषधालयों के भवन निर्माण के लिये 527 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। नवीन चिकित्सा महाविद्यालयों के निर्माण (राज्य सहायित) के लिए 580 करोड़ रुपये तथा चिकित्सा महाविद्यालयों में उन्नयन कार्यों के लिए 650 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। साथ ही नवीन नर्सिंग कॉलेजों के निर्माण के लिए 80 करोड़ रुपये एवं पी.जी. पाठ्यक्रमों के सुदृढ़ीकरण हेतु 79 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। आयुष्मान योजना क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश शीर्ष पर प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (आयुष्मान भारत) के तहत प्रदेश में 4 करोड़ 46 लाख से अधिक आयुष्मान कार्ड जारी किए जा चुके हैं। 70 वर्ष से अधिक आयु के नागरिकों के लिए आयुष्मान वय वंदना योजना के अंतर्गत 15 लाख 48 हजार कार्ड बनाकर मध्यप्रदेश शीर्ष पर है। इस योजना से 1,118 शासकीय एवं 720 निजी चिकित्सालय संबद्ध हैं। वित्तीय वर्ष 2026-27 में आयुष्मान भारत योजना के लिए 2,139 करोड़ रुपये का प्रावधान प्रस्तावित है। इसके अतिरिक्त नॉन-एसईसीसी हितग्राहियों के लिए 863 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। विशेष कार्यक्रम एवं अधोसंरचना मिशन बहुउद्देशीय रोग नियंत्रण कार्यक्रम के लिए 408 करोड़ रुपये तथा प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन के अंतर्गत 401 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना अंतर्गत सुपरस्पेशलिटी अस्पताल स्थापना के लिए 148 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। प्रदेश में डिजिटल स्वास्थ्य पहल को भी निरंतर आगे बढ़ाया जा रहा है। वर्तमान में 55 जिला चिकित्सालय, 158 सिविल चिकित्सालय, 348 सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, 1,442 प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र तथा 10,256 उप स्वास्थ्य केन्द्रों में कुल 48 हजार बिस्तर उपलब्ध हैं। मैहर, मऊगंज एवं पांढुर्णा में नए जिला चिकित्सालयों की स्थापना की कार्यवाही प्रचलन में है। उच्च जोखिम वाले दूरस्थ क्षेत्रों में निवासरत गर्भवती महिलाओं के लिए 228 बर्थ वेटिंग रूम स्थापित किए गए हैं, जो मातृ मृत्यु दर में कमी लाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। चिकित्सा शिक्षा एवं मानव संसाधन सुदृढ़ीकरण प्रदेश में 3,850 चिकित्सक पदों एवं 1,256 नर्सिंग अधिकारी पदों पर भर्ती की कार्यवाही प्रक्रियाधीन है। परिचारिकाओं के प्रशिक्षण के लिए 67 करोड़ रुपये तथा एएनएम एवं हेल्थ विजिटर्स को परिवार कल्याण प्रशिक्षण हेतु 60 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। सरकार भारतीय चिकित्सा पद्धति को भी बढ़ावा दे रही है। प्रदेश में 8 नवीन आयुर्वेद महाविद्यालय सह चिकित्सालय स्थापित किए जा रहे हैं। मध्यप्रदेश स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में नई ऊँचाइयों की ओर अग्रसर है। अधोसंरचना विस्तार, चिकित्सा शिक्षा सुदृढ़ीकरण, मानव संसाधन भर्ती और जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से प्रत्येक नागरिक तक गुणवत्तापूर्ण उपचार सुनिश्चित किया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य सुलभ, किफायती और सर्वसमावेशी स्वास्थ्य व्यवस्था स्थापित कर आत्मनिर्भर, सशक्त एवं स्वस्थ मध्यप्रदेश का निर्माण करना है।

वानखेड़े में मुकाबले से पहले Sam Curran का आत्मविश्वास चरम पर, बोले- इंग्लैंड करेगा खेल पलट

मुंबई टी20 वर्ल्ड कप 2026 में मेजबान भारत के खिलाफ सेमीफाइनल से पहले इंग्लैंड के सैम करन ने कहा कि दोनों टीमें एक-दूसरे के खिलाफ इतना खेल चुकी हैं कि कुछ छिपाने के लिए नहीं है लेकिन उन्हें अपनी टीम से बेहतरीन प्रदर्शन की उम्मीद है। इंग्लैंड ने 2022 में भारत को सेमीफाइनल में दस विकेट से हराने के बाद खिताब जीता था जबकि भारत ने 2024 में इंग्लैंड को 78 रन से हराने के बाद खिताब जीता था। ‘हम भारतीय खिलाड़ियों के साथ बहुत…’ ऑलराउंडर करन ने मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में इंग्लैंड के अभ्यास सत्र से पहले कहा, ”इस मैदान पर हम काफी खेल चुके हैं लिहाजा कुछ छिपा नहीं है।” उन्होंने कहा ,”हमारे पास अभ्यास के लिए दो दिन का समय है जिससे हालात के अनुकूल ढलने में मदद मिलेगी। इन स्टेडियमों में हम इतना खेल चुके हैं कि अलग-अलग हालात की आदत हो गई है। हम भारतीय खिलाड़ियों के साथ बहुत खेलते हैं तो कुछ भी छिपा नहीं है।” इंग्लैंड का इस टूर्नामेंट में प्रदर्शन उतार चढ़ाव भरा रहा है जिसने नेपाल को बमुश्किल चार रन से हराया। सुपर आठ में पाकिस्तान को दो विकेट से मात दी। ‘वानखेड़े स्टेडियम को खामोश करेगा इंग्लैंड’ करन ने कहा, ”पिछला प्रदर्शन अब मायने नहीं रखता। यह विश्व कप सेमीफाइनल है और हम इसमें अपना परफेक्ट खेल दिखाएंगे।” वानखेड़े स्टेडियम पर भारत के समर्थकों का शोर रहेगा लेकिन करन को पता है कि उन्हें खामोश कैसे करना है। उन्होंने कहा, ”यह शानदार स्टेडियम है। मुझे यकीन है कि गुरुवार की रात यह स्टेडियम खामोश रहेगा। भारतीय टीम शानदार है लेकिन हमारे अधिकांश खिलाड़ियों ने उसके खिलाफ और आईपीएल में खेला है। हम किसी चीज से भयभीत नहीं हैं और दोनों टीमें सेमीफाइनल की चुनौती को लेकर रोमांचित होंगी।” ‘वानखेड़े में खेलना आसान नहीं होता है’ भारत ने रविवार को वेस्टइंडीज को पांच विकेट से हराकर सेमीफाइनल में प्रवेश किया। संजू सैमसन ने कोलकाता में वेस्टइंडीज के खिलाफ ‘संकटमोचक’ की भूमिका निभाते हुए नाबाद 97 रन बनाए। वेस्टइंडीज ने 196 रन का लक्ष्य दिया था। खचाखच भरे ईडन गार्डंस पर भारत के फॉर्म में चल रहे सभी बल्लेबाज नाकाम रहे लेकिन संजू ने अपने करियर की सबसे यादगार पारी खेलकर वेस्टइंडीज के जीत के अश्वमेधी अभियान में नकेल कसी। मैच के बाद भारत के हेड कोच गौतम गंभीर ने इंग्लैंड के खिलाफ सेमीफाइनल को लेकर कहा, ”इंग्लैंड एक विश्वस्तरीय टीम हैं। उनके पास कई बेहतरीन खिलाड़ी भी हैं और हम सभी जानते हैं कि वानखेड़े में खेलना आसान नहीं होता है। उम्मीद है कि हम अच्छा प्रदर्शन करेंगे।”

आदिवासी क्षेत्रों में पकड़ बढ़ाने की रणनीति, भाजपा का फोकस मालवा-निमाड़ अंचल पर

भोपाल आदिवासी बहुल बड़वानी जिले के नागलवाड़ी में कैबिनेट की बैठक कर भाजपा ने यह संदेश दे दिया है कि वह आदिवासियों में पार्टी के आधार को और मजबूत करना चाहती है। मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने मालवा- निमाड़ से इसकी शुरुआत कर यह भी बता दिया है कि इसके केंद्र में मालवा- निमाड़ अंचल रहेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कैबिनेट को मंत्रालय के बंद कमरों से निकालकर सीधे आदिवासी अंचल और खेतों के बीच ले जाकर यह स्पष्ट कर दिया है कि उसकी प्राथमिकता ग्रामीण और किसान मतदाता हैं। बैठक के अलावा आदिवासियों की आस्था के केंद्र भीलट देव मंदिर में कैबिनेट के सदस्यों द्वारा माथा टेकना इस समुदाय को भावनात्मक रूप से पार्टी से जोड़ने का प्रयास भी रहा। बता दें, आदिवासी मतदाताओं के झुकाव से ही मध्य प्रदेश में सरकार बनती है। इन दिनों नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार भी आदिवासियों को साधने के लिए निरंतर प्रवास कर रहे हैं। मालवा-निमाड़ अंचल में कांग्रेस के 12, भाजपा के आठ और एक सीट पर भारतीय आदिवासी पार्टी (बीएपी) का विधायक है। इस संख्या को देखते हुए भी भाजपा को यहां विशेष प्रयास करने की आवश्यकता है। मिशन-2028 की तैयारी  भाजपा ने आगामी विधानसभा चुनाव यानी मिशन 2028 की तैयारी नागलवाड़ी में कैबिनेट कर आरंभ कर दी है। उसका पहला लक्ष्य आदिवासी वर्ग का भरोसा जीतना है। दरअसल, वर्ष 2013 तक भाजपा के पास प्रदेश की कुल 47 एसटी आरक्षित सीटों में से दो- तिहाई सीटें हुआ करती थी लेकिन वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में भाजपा का जनाधार खिसक गया था। खासतौर से आदिवासी वर्ग ने भाजपा का साथ छोड़कर कांग्रेस का दामन थाम लिया था। इस कारण प्रदेश में कमल नाथ सरकार बन गई थी। वर्ष 2018 में राज्य की 47 एसटी आरक्षित सीटों में से भाजपा केवल 16 सीटें जीत पाई थी, जबकि कांग्रेस ने 30 सीटों पर कब्जा किया था। वर्ष 2013 के विधानसभा चुनाव की तुलना में यह भाजपा के लिए 15 सीटों का बड़ा नुकसान था। हालांकि भाजपा को कुल वोट शेयर (41.6%) कांग्रेस (41.5%) से थोड़ा अधिक मिला था, लेकिन आदिवासी अंचल में सीटों के नुकसान ने उसे बहुमत से दूर कर दिया। वर्ष 2018 के झटके के बाद भाजपा ने अपनी रणनीति बदली, जिसके परिणाम 2023 के चुनावों में दिखे। पार्टी ने एसटी सीटों पर अपनी संख्या 16 से बढ़ाकर 24 कर ली। यही कारण है कि नागलवाड़ी जैसी बैठकें केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि गहरी सुधारात्मक रणनीति का हिस्सा हैं। ‘प्रयोगधर्मी’ नेता की पहचान बना रहे डॉ. मोहन यादव नागलवाड़ी में आयोजित बैठक को ‘कृषि कैबिनेट’ नाम भी दिया गया। इससे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की राजनीतिक छवि में सुधार और मजबूती आने की पूरी संभावना है। इसके पीछे कई रणनीतिक कारण हैं। कैबिनेट को सुदूर गांव तक ले जाना डॉ. मोहन यादव को एक इनोवेटिव और ‘आउट ऑफ द बॉक्स’ सोचने वाले मुख्यमंत्री के रूप में स्थापित करता है। यह छवि उन्हें पिछली सरकारों के पारंपरिक ढर्रे से अलग करती है। मुख्यमंत्री का आदिवासी अंचल में जाकर उन्हीं के बीच बैठना और भीलट देव जैसे स्थानीय लोक-देवताओं को सम्मान देना, उन्हें आदिवासियों के बीच ‘अपना व्यक्ति’ के रूप में प्रस्तुत करता है। यह छवि 2018 के ‘आदिवासी विरोधी यानी एंटी-ट्राइबल’ नैरेटिव को काटने में मददगार होगी। एक ही बैठक में 27,746 करोड़ रुपये के भारी-भरकम प्रस्तावों को मंजूरी देना उन्हें एक अच्छा प्रशासक के रूप में प्रस्तुत करता है। इससे यह संदेश जाता है कि वह केवल घोषणाएं नहीं करते, बल्कि बजट का प्रविधान भी साथ रखते हैं। भाजपा की मौजूदा सक्रियता बताती है कि वह 21 प्रतिशत आदिवासी आबादी के महत्व को समझ चुकी है और इसे लेकर वर्ष 2028 में किसी भी प्रकार की जोखिम नहीं लेना चाहती।  

आदिवासी वोटरों को लुभाने की तैयारी में मोहन सरकार, बड़वानी बैठक से निकाय चुनावों को लेकर मिले संकेत

भोपाल  सोमवार को बड़वानी जिले के नागलवाड़ी में हुई प्रदेश की पहली किसान कैबिनेट बैठक को मोहन सरकार का आदिवासी वोटर पर सीधा फोकस माना जा रहा है। 2027 के निकाय चुनाव और 2028 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा सरकार ने अभी से तैयारी शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जनजातीय बहुल जिले बड़वानी के नागलवाड़ी में पहली किसान कैबिनेट आयोजित की। यह बैठक भीलट देव मंदिर परिसर में टेंट-तंबू में हुई और मंत्रिमंडल ने आदिवासी संस्कृति के प्रमुख पर्व भगोरिया में भी सहभागिता की। इसने बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह कदम किसानों के साथ-साथ आदिवासी वोट बैंक को साधने की रणनीति का हिस्सा है। आदिवासी वर्ग पर परंपरागत रूप से कांग्रेस की मजबूत पकड़ मानी जाती रही है, लेकिन पिछले एक दशक में भाजपा ने इस वर्ग में अपना आधार बढ़ाया है।  47 विस सीटें एसटी के लिए आरक्षित प्रदेश की कुल 230 विधानसभा सीटों में से 47 सीटें अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग के लिए आरक्षित हैं। 2023 के चुनाव में भाजपा ने 24 और कांग्रेस ने 22 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि रतलाम जिले की सैलाना सीट पर भारत आदिवासी पार्टी को सफलता मिली। मालवा–निमाड़ अंचल में आदिवासी वर्ग की 22 सीटें हैं, जहां कांग्रेस ने 11, भाजपा ने 10 और एक भारत आदिवासी पार्टी ने जीत दर्ज की। यह क्षेत्र आदिवासी राजनीति का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है।  22% आबादी, 84 सीटों पर असर प्रदेश की कुल आबादी में लगभग 22 प्रतिशत हिस्सा आदिवासी समुदाय का है। 47 सीटें आरक्षित होने के बावजूद यह वर्ग करीब 80 से अधिक सीटों पर जीत-हार तय करने की स्थिति में माना जाता है।  2023 में कांग्रेस ने दिखाई मजबूती  2018 के चुनाव में कांग्रेस ने 30 आदिवासी सीटें जीतकर भाजपा को बड़ा झटका दिया था, जबकि भाजपा 16 सीटों तक सीमित रह गई थी। मालवा–निमाड़ में भी भाजपा को 22 सीटों में से केवल 6 सीटें मिली थीं। वहीं, 2023 में भाजपा ने वापसी करते हुए 24 सीटें जीतींं। हालांकि, इस चुनाव में कांग्रेस 66 सीटों पर सिमट गई, इसके बावजूद  उसने आदिवासी वर्ग के लिए आरक्षित 22 सीटों पर जीत दर्ज की। वहीं, मालवा निमाड़ में दोनों ही पार्टियों ने आधी आधी सीटों पर जीत दर्ज की।  आदिवासी वर्ग के लिए आरक्षित प्रदेश की सीटों का गणित  – 2013 में आरक्षित 47 सीटों में से 31 सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज की। कांग्रेस को 15 सीटों पर ही संतोष करना पड़ा, वहीं एक सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी जीता। वहीं, मालवा निमाण की 22 सीटों में से 15 भाजपा, 6 कांग्रेस और 1 सीट निर्दलीय को मिली।  – 2018 में आरक्षित 47 सीटों में से 16 सीटों पर भाजपा सिमट गई। वहीं, कांग्रेस ने 30 सीटों पर जीत दर्ज की। एक सीट निर्दलीय के खाते में गई। वहीं, मालवा-निर्माण की 22 सीटों में से 6 भाजपा, 15 कांग्रेस और एक सीट निर्दलीय के खाते में गई।  – 2023 में आरक्षित 47 सीटों में से 24 सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज की। वहीं, कांग्रेस ने 22 सीटों पर जीत दर्ज की। एक सीट पर निर्दलीय के खाते में आई। वहीं, मालवा- निर्माण की 22 सीटों में से 11 पर कांग्रेस, 10 पर भाजपा और एक सीट पर भारत आदिवासी पार्टी ने जीत दर्ज की।  2027 में सेमीफाइनल और 2028 में फाइनल बता दें, अगले दो साल मोहन सरकार के लिए अग्नि परीक्षा के हैं, इसलिए अब उसे तमाम वो काम करके दिखाना होंगे, जिनका वादा भाजपा ने अपने संकल्प पत्र में किया है। इनमें सबसे बड़ा वादा लाडली बहना योजना में शामिल बहनों को हर माह 3000 रुपये देने का है। अभी इसकी आधी राशि दी जा रही है। अगले तीन साल में इसे दोगुना करना है। यदि भाजपा यह करने में सफल रही तो 2027 के निकाय चुनाव और इसके बाद 2028 में होने वाले विधानसभा चुनाव में उसकी सत्ता में वापसी की राह कोई नहीं रोक सकेगा।  आदिवासी किसानों को आखिर क्या मिला नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि दो दशक से सत्ता में काबिज भाजपा सरकार ने ‘कृषक कल्याण वर्ष 2026’ के अंतर्गत भोपाल से करीब 350 किलोमीटर दूर आदिवासी बहुल बड़वानी जिले के नागलवाड़ी में पहली “कृषि कैबिनेट” की बैठक आयोजित की। दावा किया गया था कि इससे किसानों को सीधा फायदा पहुंचेगा और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए नई योजनाए लाई जाएंगी, ताकि आय दोगुनी हो सके। लेकिन बड़वानी और निमाड़ क्षेत्र के किसानों को आखिर क्या मिला?   

वाणिज्य एवं उद्योग और श्रम मंत्री लखन लाल देवांगन ने प्रदेशवासियों को दी होली पर्व की बधाई

रायपुर वाणिज्य एवं उद्योग और श्रम मंत्री लखन लाल देवांगन ने रंगों के पर्व होली पर प्रदेश वासियों को हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी है। उन्होंने अपने शुभकामना संदेश में कहा कि आप सभी के जीवन में होली का यह पर्व सुख, समृद्धि और खुशहाली लेकर आए। केबिनेट मंत्री देवांगन ने कहा कि संवेदनशील मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल पर राज्य सरकार द्वारा अपने वायदे के अनुरूप होली त्योहार के पहले प्रदेश के 25.28 लाख किसानों को कृषक उन्नति योजना के अंतर्गत 10,324 करोड़ रूपए की आदान सहायता राशि उनके बैंक के खातों में अंतरित की है। होली त्योहार में किसानों का उत्साह दोगुना हो गया है।     केबिनेट मंत्री देवांगन ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा श्रमिकों एवं उनके परिजनों की बेहतरी के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रह हैं। इन योजनाओं के माध्यम से श्रमिक की सामाजिक एवं आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने के लिए डीबीटी के जरिए छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निमार्ण कर्मकार कल्याण मण्डल द्वारा हितग्राहियों को अब तक लगभग 800 करोड़ रूपए की आर्थिक मदद दी जा चुकी है।          केबिनेट मंत्री देवांगन ने आगे कहा कि रंगों का यह त्योहार हमारे जीवन में उमंग, उत्साह और सौहार्द्र का संचार करता है। उन्होंने कहा कि होली केवल रंगों का त्यौहार नही बल्कि सामाजिक समरसता भाईचारे और भारतीय परम्पराओं की जीवंत अभिव्यक्ति का पर्व है। आइए, हम सभी मिलकर प्रेम, भाईचारे और सद्भाव के रंगों से अपने समाज को और भी अधिक रंगीन बनाएं।

Holi 2026 Special: रणबीर कपूर की फैमिली होली, बेटी राहा के साथ दिखे

मुंबई मुंबई में आज यानी 3 मार्च को मनाया जा रहा है। स्टार्स होली के रंग में पूरी तरह से रंगे नजर आ रहे हैं। रणबीर कपूर से लेकर सोहा अली खान, नेहा धूपिया ने अपने बच्चों संग होली मनाई। स्टार्स के होली सेलिब्रेशन के वीडियोज भी सामने आने शुरू हो गए हैं। इस वक्त पूरे देश में हर कोई होली के खुमार में है। ऐसे में भला बॉलीवुड स्टार्स कहां पीछे रहने वाले हैं। एक तरफ जहां कई शहरों में होली 4 मार्च को मनाई जाएगी। वहीं, मुंबई में आज यानी 3 मार्च को मनाया जा रहा है। स्टार्स होली के रंग में पूरी तरह से रंगे नजर आ रहे हैं। रणबीर कपूर से लेकर सोहा अली खान, नेहा धूपिया ने अपने बच्चों संग होली मनाई। स्टार्स के होली सेलिब्रेशन के वीडियोज भी सामने आने शुरू हो गए हैं, जिन्हें फैंस काफी पसंद कर रहे हैं। पापा संग राहा ने खेली होली रणबीर कपूर को अक्सर उनकी बेटी राहा संग क्वालिटी टाइम एंजॉय करते देखा जाता है। ऐसे में होली पर रणबीर राहा संग रंग कैसे न खेलते। रणबीर कपूर का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वह दोस्तों के साथ सड़क पर रंग खेलते दिखे। इसके बाद वीडियो में रणबीर अपने घर के अंदर जाते नजर आए। रणबीर ने बेटी राहा के साथ होली खेली। यही नहीं, पापाराजी को देख रणबीर ने उनकी ओर हाथ हिलाया और फिर उनसे हाथ मिलाने के लिए भी रुके। इस वीडियो में रणबीर की गोद में राहा भी नजर आ रही है। नेहा धूपिया ने सोहा संग मनाई होली होली सेलिब्रेशन का एक और वीडियो सामने आया है। सोहा अली खान और नेहा धूपिया ने एक साथ होली मनाई। इस दौरान वीडियो में आप देख सकते हैं कि सोहा अपनी बेटी इनाया को रंग लगाती हैं। इसके बाद नेहा भी बच्चों संग रंग देखती दिखाई देती हैं। साथ में अंगद बेदी और कुणाल खेमू भी थे। वहीं, कई टीवी स्टार्स भी होली के रंगें नजर आए। इनके कई वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहे हैं। राम बन पर्दे पर छाएंगे रणबीर कपूर रणबीर कपूर के वर्कफ्रंट की बात करें तो वह इन दिनों अपनी मोस्ट अवेटेड फिल्म ‘रामायण पार्ट 1’ में बिजी हैं। इस फिल्म का निर्देशन नितेश तिवारी ने किया है। इस पौराणिक महाकाव्य बेस्ड फिल्म में रणबीर कपूर भगवान राम का किरदार निभाएंगे। ये फिल्म दिवाली 2026 को रिलीज होने वाली है। मूवी में साई पल्लवी माता सीता के रूप में नजर आएंगी, वहीं यश रावण का किरदार निभाने जा रहे हैं। रामायण में सनी देओल भगवान हनुमान के रूप में नजर आएंगे और खबर है कि एआर रहमान ने इसमें संगीत दिया है। इन फिल्मों के साथ भी मचाएंगे धमाल रामायण के अलावा, रणबीर की संजय लीला भंसाली के डायरेक्शन में बन रही पीरियड रोमांटिक ड्रामा फिल्म ‘लव एंड वॉर’ में नजर आएंगे। इस मूवी में उनके साथ आलिया भट्ट और विक्की कौशल भी हैं। रणबीर कपूर की अपकमिंग फिल्मों में ‘एनिमल’ की सीक्वल ‘एनिमल पार्क’ और ‘ब्रह्मास्त्र 2’ जैसी फिल्में भी शामिल हैं।  

त्योहार पर सख्ती: भोपाल में होली के दौरान हर प्रमुख चौराहे पर 108 एंबुलेंस तैनात

भोपाल होली और रंगपंचमी के उल्लास के बीच किसी भी अप्रिय स्थिति या चिकित्सीय आपातकाल से निपटने के लिए राजधानी का स्वास्थ्य अमला पूरी तरह अलर्ट हो गया है। शहर के प्रमुख अस्पतालों के साथ-साथ हर थाना क्षेत्र और भीड़भाड़ वाले इलाकों में 108 एंबुलेंस की विशेष तैनाती की गई है। सीएमएचओ ने सभी अस्पतालों को आकस्मिक चिकित्सा व्यवस्थाएं चाक-चौबंद रखने के निर्देश जारी किए हैं। थाना क्षेत्रों और प्रमुख केंद्रों पर एंबुलेंस की तैनाती 108 एंबुलेंस सेवा के सीनियर मैनेजर तरुण सिंह परिहार ने बताया कि एम्स, हमीदिया, जेपी अस्पताल, काटजू अस्पताल और बैरागढ़ जैसे प्रमुख केंद्रों के साथ-साथ शहर के सभी 22 थाना क्षेत्रों में एंबुलेंस तैनात रहेगी। ये वाहन जीवन रक्षक उपकरणों और प्रशिक्षित स्टाफ (ईएमटी) से सुसज्जित होंगे, ताकि सड़क दुर्घटना, आगजनी या विवाद की स्थिति में तुरंत सहायता मिल सके। 104 हेल्पलाइन से घर बैठे लें डॉक्टरी सलाह त्योहार के दौरान यदि किसी को सामान्य स्वास्थ्य समस्या होती है, तो उसे अस्पताल जाने की जरूरत नहीं है। प्रदेश सरकार की 104 हेल्थ हेल्पलाइन सुबह आठ से रात आठ बजे तक सक्रिय रहेगी। इसके माध्यम से अनुभवी डॉक्टरों से मुफ्त परामर्श, मानसिक तनाव की स्थिति में काउंसलिंग और नजदीकी ब्लड बैंक या अस्पताल की जानकारी ली जा सकती है। सेहतमंद होली के लिए विशेषज्ञों की सलाह सीएमएचओ डॉ. मनीष शर्मा ने बताया कि शहरवासी केमिकल युक्त रंगों से बचें। रंगों में लेड ऑक्साइड और कॉपर सल्फेट जैसे तत्व होते हैं, जो आंखों और त्वचा को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं। रंग खेलने से पहले शरीर पर तेल या मॉइस्चराइजर लगाएं और पूरी बांह के कपड़े पहनें। शराब या अन्य नशीले पदार्थों के सेवन से दूर रहें। आंखों में धुंधलापन, खुजली या सांस लेने में दिक्कत होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। यहाँ उपलब्ध रहेगी तुरंत सहायता प्रमुख केंद्र – एम्स भोपाल, जेपी अस्पताल, हमीदिया, आनंद नगर, कोलार, बैरागढ़। थाना क्षेत्र – एमपी नगर, हबीबगंज, टीटी नगर, अशोका गार्डन, निशातपुरा सहित जिले के सभी ग्रामीण व शहरी थाना क्षेत्र। आपातकालीन नंबर – 108 (एंबुलेंस), 104 (स्वास्थ्य परामर्श)।

होलिका दहन के बाद अंगारों की परीक्षा: अंबिकापुर की परंपरा ने सबको किया हैरान

अंबिकापुर होली पर्व पर जहां एक ओर रंगों की मस्ती छाई रहती है, वहीं सरगुजा अंचल के ग्रामीण इलाकों में सदियों पुरानी परंपराएं आज भी जीवंत हैं। अंबिकापुर से लगे दरिमा थाना क्षेत्र के ग्राम करजी में होली की रात एक ऐसी अनोखी परंपरा निभाई जाती है, जो लोगों को आश्चर्य में डाल देती है। यहां होलिका दहन के तुरंत बाद ग्रामीण दहकते अंगारों पर नंगे पांव चलते हैं और हैरानी की बात यह कि उनके पैरों में फफोले तक नहीं पड़ते। ग्रामीण इसे देवी की कृपा और अटूट आस्था का परिणाम मानते हैं। वर्षों पुरानी परंपरा का निर्वहन और अटूट विश्वास वर्षों से चली आ रही इस परंपरा को देखने के लिए आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में लोग करजी पहुंचते हैं। इस वर्ष भी सोमवार की रात यहां वर्षों से चली आ रही परंपरा का निर्वहन किया गया। विधिविधान से होलिका दहन किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति रही। होलिका दहन के बाद अंगारों पर लोग चले। हर वर्ष होलिका दहन के बाद जब लकड़ियां जलकर अंगारों में बदल जाती हैं, तब अंगारों की परत बिछाई जाती है। इसके बाद गांव के पुरुष श्रद्धापूर्वक नंगे पांव उन पर चलते हैं। जनजातीय संस्कृति में निशानेबाजी और लोकगीतों का उल्लास ग्रामीणों का विश्वास है कि सच्ची श्रद्धा रखने वालों को कोई हानि नहीं होती। अंगारों पर चलने के बाद भी किसी के पैरों में जलन या छाले नहीं पड़ते। यह दृश्य देर रात तक लोगों की आस्था का केंद्र बना रहता है। सरगुजा अंचल की जनजातीय होली केवल अंगारों पर चलने तक सीमित नहीं है। कोड़ाकू जनजाति में होली की जली सेमर की ठूंठ पर लगभग 50 मीटर दूरी से पत्थर और तीर-धनुष से निशाना लगाने की परंपरा भी है। सफल प्रतिभागी को पुरस्कार स्वरूप महुआ के दो पेड़ दिए जाते हैं। फागुन मास में एक माह तक ‘होरी’ गीत गूंजते रहते हैं। झांझ, मंजीरा और मांदर की थाप पर पूरा गांव रंग और रस में डूबा रहता है।  

त्वरित कार्रवाई से बचीं दो घायलों की ज़िंदगियाँ, सड़क दुर्घटना में गंभीर घायलों को समय पर पहुँचाया अस्पताल

भोपाल  मऊगंज जिले के थाना मऊगंज क्षेत्र में डायल-112 जवानों की त्वरित, सजग एवं संवेदनशील कार्यवाही से सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हुए एक पुरुष एवं एक महिला को समय पर उपचार उपलब्ध कराया गया। संकट की इस घड़ी में डायल-112 टीम ने जिस तत्परता और जिम्मेदारी का परिचय दिया, वह सेवा एवं कर्तव्यनिष्ठा की सराहनीय मिसाल है। 02 मार्च को राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम, डायल-112 भोपाल को सूचना प्राप्त हुई कि थाना मऊगंज क्षेत्र अंतर्गत मऊगंज बाईपास के पास एक मोटर साइकिल को अज्ञात वाहन ने टक्कर मार दी है, जिससे मोटर साइकिल सवार पुरुष एवं एक महिला गंभीर रूप से घायल हो गए हैं और तत्काल पुलिस सहायता की आवश्यकता है। सूचना की गंभीरता को देखते हुए थाना मऊगंज में तैनात डायल-112 एफआरव्ही वाहन को तुरंत मौके के लिए रवाना किया गया। डायल-112 स्टाफ आरक्षक श्री रजनीश यादव एवं पायलट श्री प्रवेश चतुर्वेदी शीघ्र घटनास्थल पर पहुँचे और स्थिति का त्वरित आकलन करते हुए राहत एवं बचाव कार्य प्रारंभ किया। दुर्घटना में मोटर साइकिल सवार पुरुष एवं साथ में बैठी महिला घायल अवस्था में पाए गए। डायल-112 जवानों ने बिना समय गंवाए दोनों घायलों को एफआरव्ही वाहन की सहायता से सुरक्षित रूप से सिविल चिकित्सालय मऊगंज पहुँचाया, जहाँ उनका तत्काल उपचार प्रारंभ कराया गया। डायल-112 की इस त्वरित, संवेदनशील एवं समर्पित कार्यवाही के कारण घायलों को समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध हो सकी, जिससे संभावित गंभीर परिणामों को टाला जा सका। डायल 112 हीरोज श्रृंखला के अंतर्गत यह घटना सिद्ध करती है कि मध्यप्रदेश पुलिस हर आपात स्थिति में आमजन की सुरक्षा और जीवन रक्षा के लिए सदैव तत्पर, सजग और समर्पित है।  

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