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राजपाल यादव के बयान से उठे सवालों पर सोनू सूद बोले—मदद का मतलब क्या होता है

मुंबई राजपाल यादव धोखा-धड़ी केस में जेल में थे तो उन्हें बचाने के लिए इंडस्ट्री से कई हाथ आगे बढ़े। मुहिम की शुरुआत सोनू सूद ने की थी। उन्होंने एक पोस्ट में लिखा था कि राजपाल यादव को सम्मान के साथ मदद दें, उन्हें काम दें। जेल से अंतरिम जमानत पर बाहर आए राजपाल यादव को जब पता चला तो उन्होंने तल्ख लहजे में जवाब दिया कि लोगों को इस गलतफहमी में नहीं रहना चाहिए कि उन्हें काम की जरूरत है। अब राजपाल के जवाब पर सोनू सूद का रिएक्शन सामने आया है। राजपाल के जवाब पर क्या बोले सोनू सोनू सूद ने राजपाल यादव के कमेंट के बारे में कहा, ‘उनके लिए खुश हूं। मैंने यह नहीं कहा था कि उन्हें काम की जरूरत है। मैंने कहा था कि उन्हें साइन कीजिए और एडवांस पैसे दीजिए क्योंकि वह इस योग्य हैं।’ सोनू सूद ने किया था ट्वीट बता दें कि जब राजपाल यादव ने जब तिहाड़ जेल में सरंडर किया तो उनका इमोशनल बयान चर्चा में था। उन्होंने कहा था कि उनके पास पैसे नहीं हैं। यहां कोई किसी का नहीं। इसके बाद सोनू सूद ने एक ट्वीट किया। इसमें लिखा था कि राजपाल यादव के लिए वह जो बन पड़ेगा करेंगे। सोनू ने यह भी लिखा था कि उन्हें फिल्म के लिए साइन करें और एडवांस पैसे दें। सोनू के ट्वीट से इंस्पायर होकर कई लोग राजपाल की मदद करने आगे आए थे। टीवी एक्टर गुरमीत चौधरी ने भी राजपाल की मदद की थी और उन्हें भी सोनू सूद से प्रेरणा मिली थी। राजपाल ने दिया था ये जवाब राजपाल यादव जब जेल से बाहर आए और सोनू के कमेंट के बारे में पता चला तो बोले, ‘प्लीज गलतफहमी से बाहर आ जाइए कि मुझे काम मांगने की जरूरत है। हां काम मांगने में कोई शर्म की बात नहीं। मैं अपने काम की वजह से ही जिंदा हूं, सिनेमा मेरा पैशन है और मैं ऐसे काम करता हूं कि चार गुना ज्यादा काम मिलता है। मैं छुट्टियों में भी काम करता हूं। मुझे काम नहीं मिलता बल्कि यह 11 साल से मेरे साथ रहा है।’

भारत-ऑस्ट्रेलिया-कनाडा के नए ट्रायंगल का असर, जानें क्यों इसे गेमचेंजर माना जा रहा है

नई दिल्ली एक तरफ अमेरिका ट्रेड वॉर और भारी टैरिफ लगाकर अपनी अर्थव्यवस्था को समेट रहा है, तो दूसरी तरफ चीन ग्रीन टेक्नोलॉजी और क्रिटिकल मिनरल्स के बाजार पर एकाधिकार जमाकर बैठा है. इस खींचतान के बीच, दुनिया को एक नए और सुरक्षित रास्ते की तलाश थी. इसी तलाश को पूरा करने और चीन-अमेरिका पर निर्भरता को जड़ से खत्म करने के लिए तीन बड़े देशों ने हाथ मिलाया है. भारत, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा ने मिलकर एक नया और बेहद शक्तिशाली अलायंस बनाया गया है, जिसे ACITI यानी ऑस्‍ट्रेल‍िया, कनाडा, इंडिया टेक्‍नोलॉजी एंड इनोवेशन ट्रायंगल नाम द‍िया गया है. यह नया ट्रायंगल सिर्फ एक डील नहीं है, बल्कि इससे दुनिया की ग्रीन सप्लाई चेन का पूरा गेम बदलने वाला है |  आज की दुनिया में तरक्की का मतलब क्लीन एनर्जी, इलेक्ट्रिक गाड़ियां, सोलर पैनल और विंड टर्बाइन है. इन सभी को बनाने के लिए लिथियम, कोबाल्ट, ग्रेफाइट और रेयर अर्थ एलिमेंट्स जैसे खनिजों की जरूरत होती है.दिक्कत यह है कि इन खनिजों को निकालने और रिफाइन करने के बाजार पर चीन का लगभग पूरा कब्‍जा है. ग्रीन हाइड्रोजन बनाने वाले इलेक्ट्रोलाइजर की सप्लाई भी चीन ही कंट्रोल करता है. दूसरी ओर, अमेरिका ने अपनी नई नीतियों और टैरिफ से दुनिया भर के व्यापार को डरा दिया है. एक देश (चीन) पर पूरी तरह निर्भर रहना अब दुनिया के लिए एक बड़ा खतरा बन चुका था. ACITI गठबंधन इसी सिंगल-कंट्री डिपेंडेंस को तोड़ने का अचूक हथियार है | कैसे काम करेगा यह नया ट्रायंगल?     यह गठबंधन तीन देशों की अलग-अलग ताकतों को मिलाकर एक सुपर-पावरफुल सप्लाई चेन बनाएगा. इस साझेदारी का फोकस मुख्य रूप से क्लीन एनर्जी, क्रिटिकल मिनरल्स और लॉन्ग-टर्म आर्थिक सुरक्षा पर होगा |      ऑस्ट्रेलिया की ताकत: ऑस्ट्रेलिया दुनिया में लिथियम का सबसे बड़ा उत्पादक है. यानी एक तरह से लीडर है. लिथियम वह मुख्य धातु है जिससे हर तरह की बैटरी बनती है |      कनाडा की ताकत: कनाडा के पास क्रिटिकल मिनरल्स का भारी भंडार है और वह ग्रीन टेक्नोलॉजी को विकसित करने के लिए भारी फंड्स और नीतियां बना रहा है |      भारत की ताकत: भारत दुनिया का सबसे बड़ा और तेजी से बढ़ता बाजार है. भारत ने 2030 तक 500 गीगावॉट र‍िन्‍यूएबल एनर्जी पैदा करने का विशाल लक्ष्य रखा है. यानी भारत के पास इस नई तकनीक की सबसे ज्यादा डिमांड है |      जब ऑस्ट्रेलिया का कच्चा माल, कनाडा की तकनीक-पैसा और भारत का विशाल बाजार और मैन्युफैक्चरिंग स्केल एक साथ मिलेंगे, तो यह तिकड़ी चीन के एकाधिकार को सीधी और कड़ी टक्कर देगी |  सिर्फ मुनाफा नहीं, धरती को बचाना है लक्ष्‍य अक्सर ऐसे बड़े गठबंधन सिर्फ पैसा कमाने के लिए बनते हैं, लेकिन ACITI का नजरिया अलग है. इस गठबंधन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह होगी कि वे अपना ध्यान सिर्फ स्मार्टफोन बनाने या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बुलबुले में पैसा फूंकने पर न लगाएं. इस ट्रायंगल का असली लक्ष्य टेक-फॉर-गुड यानी भलाई के लिए तकनीक बनाना है. इसके तहत तीनों देश मिलकर काम करेंगे कि खनिजों का खनन पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना कैसे हो. पुरानी बैटरियों और इलेक्ट्रॉनिक कचरे से लिथियम, कोबाल्ट और तांबे को दोबारा कैसे निकाला जाए. यह गठबंधन सर्कुलर इकॉनमी यानी जहां चीजें बर्बाद न हों, बल्कि बार-बार इस्तेमाल हों, उस पॉल‍िसी को बढ़ावा देगा |   

सऊदी में हमले के बाद ट्रंप का ऐलान, कुवैत में US एंबेसी बंद, पाकिस्तान और इजरायल में नागरिक सेवाएं रद्द

नई दिल्ली मिडिल ईस्ट में जारी जंग और खतरनाक होती जा रही है. शनिवार को ईरान पर अमेरिका ने हमला किया था. अब खबर आ रही है कि हमले की आशंका के बावजूद ईरान के शीर्ष नेतृत्व को दिन में हमले की उम्मीद नहीं थी. शनिवार सुबह अयातुल्ला अली खामेनेई अपने सलाहकारों के साथ बैठक कर रहे थे. रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने सुरक्षित बंकर में जाने से इनकार किया और कहा कि छिपने से बेहतर है शहीद होना. बैठक शुरू होने के कुछ ही देर बाद मिसाइलें गिरीं. इसके अलावा सोमवार को ईरानी मीडिया ने यह भी कहा कि खामेनेई की पत्नी मंसूरे खोजस्ते का निधन हो गया. बताया गया कि हमलों के बाद वह कोमा में थीं. उनकी उम्र 78 वर्ष थी और उनकी शादी 1964 में हुई थी  |  सऊदी और खाड़ी में भी तनाव न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक सऊदी अरब में अमेरिकी दूतावास के पास धमाके की आवाज सुनी गई और धुआं उठता देखा गया. एक सऊदी अधिकारी ने आरोप लगाया कि अमेरिका ने अपनी एयर डिफेंस क्षमता इजरायल की सुरक्षा के लिए मोड़ दी और खाड़ी देशों को ईरानी हमलों के सामने खुला छोड़ दिया |  कुवैत में अमेरिकी सैनिकों पर सीधा हमला संघर्ष में पहली बार अमेरिकी सैनिकों की बड़ी मौत की पुष्टि हुई है. कुवैत के शुआइबा पोर्ट पर रविवार को एक अस्थायी ऑपरेशन सेंटर पर ईरानी हमले में छह अमेरिकी सैनिक मारे गए. रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा कि हमले के दौरान एक प्रोजेक्टाइल एयर डिफेंस को चकमा देकर अंदर पहुंच गया. इससे पहले इसे ड्रोन हमला बताया जा रहा था |  अमेरिकी F-15 भी क्रैश हुए तनाव के बीच कुवैत की एयर डिफेंस ने गलती से तीन अमेरिकी F-15 लड़ाकू विमानों को मार गिराया. अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इसे फ्रेंडली फायर की घटना बताया. छहों क्रू मेंबर सुरक्षित बाहर निकल गए और उनकी हालत स्थिर है. वीडियो में एक जलता हुआ विमान गिरता दिखा और एक पायलट पैराशूट से उतरता नजर आया |  अमेरिका में समर्थन घट रहा रॉयटर्स और इप्सोस के सर्वे के अनुसार, सिर्फ चार में से एक अमेरिकी ही ईरान पर हमले का समर्थन कर रहा है. लगातार बढ़ती अमेरिकी सैनिकों की मौत से घरेलू समर्थन और घट सकता है. खुद ट्रंप ने भी चेतावनी दी है कि आगे और नुकसान हो सकता है. मिडिल ईस्ट में हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं. मिसाइल, ड्रोन, एयर डिफेंस और अब दोस्ताना फायरिंग तक की घटनाएं दिखा रही हैं कि जंग का दायरा बढ़ चुका है |  कुवैत में अमेरिकी दूतावास बंद, कई देशों से स्टाफ हटाया गया अमेरिका ईरान का युद्ध: क्षेत्रीय तनाव के बीच अमेरिका ने कुवैत स्थित अपने दूतावास को अगली सूचना तक बंद करने का ऐलान किया है. इसके साथ ही अमेरिका ने बहरीन, जॉर्डन और इराक से गैर-जरूरी कर्मचारियों और उनके परिवारों को देश छोड़ने का आदेश दिया है. लगातार बढ़ते मिसाइल और ड्रोन हमलों के बीच यह कदम सुरक्षा के लिहाज से उठाया गया है |  पाकिस्तान में अपॉइंटमेंट्स रद्द… इजरायल में भी प्रभावित हुईं नागरिक सेवाएं ईरानी सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद पाकिस्तान में हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं. कराची में अमेरिकी दूतावास (कॉन्सुलेट) पर हुए हमले और उसके बाद हुई हिंसा और सुरक्षा को देखते हुए पाकिस्तान में मौजूद अमेरिकी कॉन्सुलेट ने अपने कामकाज रोक दिए हैं |  इस्लामाबाद स्थित अमेरिकी दूतावास के साथ-साथ लाहौर और कराची के कॉन्सुलेट ने शुक्रवार, 6 मार्च तक के लिए सभी वीजा अपॉइंटमेंट रद्द कर दिए हैं. खामेनेई की मौत के विरोध में कराची की सड़कों पर हजारों लोग उतर आए थे. प्रदर्शनकारियों का गुस्सा इतना ज्यादा था कि उन्होंने अमेरिकी कॉन्सुलेट पर हमला कर दिया और वहां जमकर तोड़फोड़ की. स्थिति को बिगड़ते देख सुरक्षा में तैनात अमेरिकी मरीन सैनिकों ने जवाबी गोलीबारी की. सूत्रों के मुताबिक, इस हिंसक झड़प में कई लोगों की मौत हो गई. वीजा सेवाएं और दूतावास पर सुरक्षा कड़ी सुरक्षा की नाजुक स्थिति को देखते हुए अमेरिकी दूतावास ने तत्काल प्रभाव से वीजा सेवाएं बंद करने का फैसला लिया है. जिन लोगों के अपॉइंटमेंट 6 मार्च तक तय थे, उन्हें अब नई तारीखों का इंतजार करना होगा. अमेरिकी दूतावास ने अपने नागरिकों को भी सतर्क रहने और भीड़भाड़ वाले इलाकों से दूर रहने की सलाह दी है |  कुवैत में भी दूतावास बंद पाकिस्तान के अलावा मिडिल-ईस्ट के अन्य देशों में भी अमेरिका के खिलाफ गुस्सा देखा जा रहा है. कुवैत स्थित अमेरिकी दूतावास ने घोषणा की है कि सुरक्षा कारणों से वो अगले आदेश तक पूरी तरह बंद रहेगा |  वहीं, इजरायल में अमेरिकी दूतावास ने X पर पोस्ट करते हुए लोगों को इजराइल छोड़कर जॉर्डन के रास्ते न जाने न करने की सलाह दी है. दूतावास ने कहा, ‘इस समय अमेरिकी दूतावास इजरायल से बाहर जा रहे अमेरिकियों को निकालने या मदद करने की स्थिति में नहीं है |  शनिवार को ईरान पर इजरायल और अमेरिका ने हमला कर दिया, जिसमें ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई थी. ईरान ने इसे “मुस्लिमों के खिलाफ युद्ध” करार दिया है, जिसके बाद से ही पाकिस्तान, कुवैत और इराक जैसे देशों में अमेरिका विरोधी प्रदर्शन तेज हो गए हैं. फिलहाल, पाकिस्तान और कुवैत में सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं |  ईरान के साथ खड़ा हुआ चीन अमेरिका ईरान का युद्ध: चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची से फोन पर बात की और चीन ने ईरान की संप्रभुता, सुरक्षा, क्षेत्रीय अखंडता और राष्ट्रीय गरिमा के समर्थन में खड़ा होने का बयान दिया. बीजिंग ने अमेरिका और इजरायल से तत्काल सैन्य कार्रवाइयों को रोकने, तनाव को और न बढ़ने देने और संघर्ष को पूरे मिडिल ईस्ट में फैलने से रोकने की अपील की है. चीन ने कहा कि वह ईरान के वैध अधिकारों और हितों की रक्षा का समर्थन करता है और उम्मीद जताई कि सभी पक्ष तनाव कम करने के लिए सकारात्मक भूमिका निभाएंगे.  ट्रंप की कड़ी चेतावनी, बोले- दूतावास पर हमले का जवाब मिलेगा सऊदी अरब में अमेरिकी दूतावास पर हमला लाइव: सऊदी अरब की राजधानी रियाद में अमेरिकी दूतावास पर ड्रोन हमले के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सख्त चेतावनी दी है. ट्रंप ने कहा कि वॉशिंगटन इस … Read more

वनडे क्रिकेट में भारत का दबदबा: स्मृति मंधाना टॉप पर, हरमनप्रीत कौर को रैंकिंग में बढ़त

नई दिल्ली भारत की सलामी बल्लेबाज स्मृति मंधाना ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ हाल में संपन्न तीन मैच की श्रृंखला में उम्दा प्रदर्शन की बदौलत मंगलवार को जारी आईसीसी महिला एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय बल्लेबाजी रैंकिंग में शीर्ष पर पहुंच गईं। भारत की सलामी बल्लेबाज स्मृति मंधाना ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ हाल में संपन्न तीन मैच की श्रृंखला में उम्दा प्रदर्शन की बदौलत मंगलवार को जारी आईसीसी महिला एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय बल्लेबाजी रैंकिंग में शीर्ष पर पहुंच गईं। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ श्रृंखला में 58 और 31 रन की पारियां खेलने वाली स्मृति के 790 अंक हैं और उन्होंने दक्षिण अफ्रीका की लॉरा वोलवार्ट को पछाड़ा जिनके 782 अंक हैं। वोलवार्ट के पास मार्च और अप्रैल में न्यूजीलैंड के खिलाफ श्रृंखला के दौरान फिर से शीर्ष स्थान हासिल करने का मौका होगा। स्मृति मंधाना की बात करें तो भारत की इस स्टार बैटर ने अब तक 120 महिला एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैच खेले हैं। इनमें उनके नाम 47.88 के शानदार औसत से 5411 रन दर्ज हैं। महिला ओडीआई में उनके नाम 14 शतक और 35 अर्धशतक हैं। एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैचों में उनकी सर्वोच्च पारी 136 रन की है। अपने अंतिम एकदिवसीय अंतरराष्ट्रीय मैच में शतक जड़ने वाली एलिसा हीली ने 744 अंक के साथ रैंकिंग में चौथे स्थान पर रहते हुए अलविदा कहा। बेथ मूनी तीसरे जबकि एशले गार्डनर (724) पांचवें स्थान पर रहीं। भारतीय कप्तान हरमनप्रीत कौर नौवें स्थान के साथ शीर्ष 10 में जगह बनाने में सफल रहीं जबकि जेमिमा रोड्रिग्स 12वें स्थान पर हैं। तीन मैच की श्रृंखला में भारत के क्लीनस्वीप के बावजूद हरमनप्रीत (652) को चार स्थान का फायदा हुआ है। उन्होंने 53, 54 और 25 रन की पारियां खेलीं। गेंदबाजी सूची में दीप्ति शर्मा 10वें स्थान के साथ शीर्ष 10 में एकमात्र भारतीय गेंदबाज हैं। एलेना किंग (775) गेंदबाजी सूची में शीर्ष पर पहुंच गई हैं। उन्होंने लगभग चार साल तक शीर्ष पर रहीं सोफी एकलेस्टोन को पछाड़ा। गार्डनर तीसरे स्थान पर हैं। ऑस्ट्रेलिया की एलेना एकदिवसीय श्रृंखला में 16.71 की औसत से सात विकेट चटकाकर शीर्ष गेंदबाज रहीं। उन्होंने तीसरे और अंतिम एकदिवसीय में 33 रन देकर चार विकेट चटकाए जिससे ऑस्ट्रेलिया ने 185 रन की शानदार जीत दर्ज की। एलेना ने साथ ही अपने करियर की सर्वश्रेष्ठ रैंकिंग अंक भी हासिल किए। एलेना के अलावा ऑस्ट्रेलिया की तीन अन्य गेंदबाज गार्डनर (तीसरे), एनाबेल सदरलैंड (पांचवें) और किम गार्थ (आठवें) भी शीर्ष आठ में शामिल हैं। एकदिवसीय ऑलराउंडर की सूची में गार्डनर (516) शीर्ष पर बरकरार हैं। उन्होंने दूसरे स्थान पर मौजूद वेस्टइंडीज की हेली मैथ्यूज (418) पर 98 अंक की बढ़त बना रखी है। सदरलैंड (534) 23 स्थान की छलांग से 34वें स्थान पर पहुंच गई है। दीप्ति भी पांचवें स्थान के साथ ऑलराउंडर की सूची में शीर्ष 10 में हैं।  

खामेनेई की मौत का जश्न मनाने के बाद एलनाज नौरोजी ने जताया डर, “वे मुझे मार डालेंगे”

नई दिल्ली एलनाज नौरोजी बीते कुछ वक्त से चर्चा में हैं। वह अपने देश ईरान के शासकों के खिलाफ खुलकर बोल रही हैं। एलनाज ने अली खामेनेई की मौत पर खुशी जाहिर की थी। इसके बाद एक वीडियो शेयर करके कहा था कि वहां जो भी हो रहा है, वहां के हुक्मरान इसके जिम्मेदार हैं। अब एक इंटरव्यू में एलनाज ने यह भी कहा है कि जब तक वो सरकार है, वह अपने देश वापस नहीं जा सकतीं। उन्हें जान से मार दिया जाएगा। इजराइल से अच्छे थे ईरान के रिश्ते एलनाज ने बॉम्बे टाइम्स से बातचीत में बताया कि वह यूएस और इजराइल का सपोर्ट क्यों कर रही हैं। वह बोलीं, ‘जब हम ईरान के बारे में बात करते हैं तो मैं इस्लामिक रिपब्लिक को अलग कर देना चाहती हूं जिन्होंने ईरान के लोगों पर कब्जा कर रखा है। ईरान के ज्यादातर लोग स्मार्ट और पढ़े-लिखे हैं और उनके विचार इस्लामिक रिपब्लिक से नहीं मिलते। एक वक्त था जब ईरान और इजराइल के रिश्ते अच्छे थे। अगर आप सायरस द ग्रेट को देखें, जिस इंसान ने दुनिया का पहला मानवाधिकार लिखा, वो पर्शियन (ईरान का) था। उसने उसने यहूदियों को बेबीलोन से मुक्त करवाया था। शाह (मोहम्मद रजा पहलवी) के वक्त में भी हमारे यूएस से अच्छे रिश्ते थे। सिर्फ इस्लामिक रिपब्लिक ही है जो लगातार कह रहा है कि नक्शे से इजराइल को मिटाना चाहता है।’ एलनाज ने बताया क्यों कर रहीं विरोध एलनाज आगे बोलीं, ‘एक महीने पहले जो ईरानी इन शासकों का विरोध कर रहे थे, उन्हें मार दिया गया। मैं ईरान में पैर भी नहीं रख सकती। अगर मैंने ऐसा किया तो वे लोग मुझे भी मार देंगे। 2022 मूवमेंट में जो हुआ उसकी वजह से मैं ईरान नहीं जा पाई हूं, जहां उन्होंने माहसा अमीनी (22 साल की लड़की) को मार दिया था। सितंबर 2022 में पुलिस कस्टडी में जिसकी मौत होने के बाद जबरदस्त विरोध हुआ था। उस लड़की को इसलिए गिरफ्तार किया गया था कि उसने हिजाब गलत तरीके से पहना था। मैंने खामेनेई के खिलाफ बोला तो मेरे परिवार को मेरी सुरक्षा की चिंता हो गई। अगर युद्ध में लोग मारे जाते हैं तो मैं अयातुल्ला को दोष दूंगी क्योंकि लोग कई बार आए और उन्होंने कहा कि वे उन्हें नहीं चाहते लेकिन वे लोग नहीं हटे। ये डिक्टेटरशिप है।’ बचपन में ही ईरान से चली गई थीं एलनाज एलनाज का जन्म ईरान में हुआ था लेकिन वह 8 साल की हुईं तो उनके परिवार ने ईरान छोड़ दिया और जर्मनी चली गईं। उनके कुछ रिश्तेदार अभी भी वहां रहते हैं। जर्मनी में एलनाज ने मॉडलिंग की फिर 20 साल की उम्र में भारत आईं। वह कई साल से ईरान नहीं गई हैं।

भारत और इंग्लैंड का तीसरी बार सेमीफाइनल मुकाबला, किसकी होगी जीत?

नई दिल्ली आईसीसी मेन्स टी20 वर्ल्ड कप 2026 में रविवार को टीम इंडिया ने वेस्टइंडीज को हराकर सेमीफाइनल के लिए क्वालिफाई कर लिया है. अब 5 मार्च को सेमीफाइनल के नॉकआउट मैच में उसकी भिड़ंत इंग्लैंड के साथ होनी है. भारत और इंग्लैंड के बीच होने वाली इस टक्कर में जो भी टीम जीतेगी वो फाइनल में चली जाएगी और 8 मार्च को अहमदाबाद में नजर आएगी. तो आइए आपको इन दोनों टीमों के बीच की राइवलरी के बारे में बताते हैं… पहले एक नजर सभी 4 टीमों पर इस बार 20 टीमों ने इस वर्ल्ड कप के महासमर में हिस्सा लिया था. इनमें से केवल 4 टीमें अब सेमीफाइनल के लिए सेलेक्ट हुई हैं. इनमें ग्रुप 1 से साउथ अफ्रीका और टीम इंडिया हैं. तो ग्रुप 2 से इंग्लैंड और न्यूजीलैंड ने क्वालिफाई किया है |  पहला सेमीफाइल मैच 4 मार्च को कोलकाता में साउथ अफ्रीका और न्यूजीलैंड के बीच खेला जाएगा, जबकि दूसरा सेमीफाइनल 5 मार्च को मुंबई के वानखेड़े में इंग्लैंड और भारत के बीच होगा |  लगातार तीसरी बार सेमीफाइनल में भारत एक अजब संयोग भी है. टीम इंडिया लगातार तीसरी बार टी20 वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में पहुंचा है. और दिलचस्प ये है कि तीनों बार उसका सामना इंग्लैंड से ही तय हुआ है. इससे पहले साल 2022 और साल 2024 में जब टीम इंडिया ने सेमीफाइनल के लिए क्वालिफाई किया तो फिर उसकी भिड़ंत इंग्लैंड से ही हुई थी. अब ये तीसरी बार दोनों की टक्कर है |  कैसा रहा है रिकॉर्ड दोनों टीमों की 2022 में जब सेमीफाइनल की भिड़ंत हुई तो टीम इंडिया की कमान रोहित शर्मा के हाथों में थी और इंग्लैंड के कप्तान बटलर थे. इस मैच में पहले बल्लेबाजी करते हुए टीम इंडिया ने हार्दिक पंड्या और कोहली की फिफ्टी के दम पर 168 रन बनाए थे. लेकिन इसके जवाब में इंग्लैंड ने 16 ओवर में ही 10 विकेट से भारत को धूल चटा दी थी. और भारत की उम्मीदों को तोड़ डाला था. फिर इंग्लैंड इस बार चैम्पियन भी बनी थी |  अब कहानी 2024 की अगली बार जब टी20 वर्ल्ड कप हुआ तो फिर से भारत और इंग्लैंड के बीच सेमीफाइनल का मैच खेला गया. लेकिन इस बार टीम इंडिया तैयार थी. कप्तान दोनों टीमों के सेम थे. लेकिन इस बार नतीजा भारत के पक्ष में आया. पहले बल्लेबाजी करते हुए भारत ने रोहित शर्मा की फिफ्टी के दम पर 171 रन बनाए. इसके जवाब में इंग्लैंड 103 पर ही सिमट गया. अक्षर और कुलदीप ने इस मैच में 3-3 विकेट झटके थे. बुमराह को 2 सफलता मिली थी |  अब तीसरी भिड़ंत अब लगातार तीसरी बार दोनों टीमें सेमीफाइनल में हैं. इंग्लैंड की टीम सुपर-8 में एक भी मैच नहीं हारी है और अपने ग्रुप की टॉपर रही है. लेकिन भारत को सुपर-8 के पहले मैच में ही साउथ अफ्रीका के हाथों हार झेलनी पड़ी थी. लेकिन फिर भारत ने बाउंस बैक किया और लगातार दो मैच जीतकर सेमीफाइनल का टिकट हासिल किया |  कैसा है टी20 वर्ल्ड कप का रिकॉर्ड सेमीफाइनल का आंकड़ा तो आपने जान लिया. लेकिन अब ये भी जानना जरूरी है कि आखिर टी20 वर्ल्ड कप में दोनों टीमों के आंकड़े क्या कहते हैं. टी20 वर्ल्ड कप में दोनों के बीच पांच मैच हुए हैं, जिसमें भारत ने तीन और इंग्लैंड ने दो जीते हैं. हालांकि सेमीफाइनल में 1-1 की बराबरी रही है |  अब देखना होगा कि वानखेड़े में दोनों टीमें कैसा प्रदर्शन करती हैं. इस बार इंग्लैंड की कमान हैरी ब्रूक के हाथों में है, जबकि टीम इंडिया के कप्तान सूर्यकुमार यादव हैं | 

महिलाओं में हार्ट अटैक के छुपे लक्षण—आज जानें, कल पछताने से बचें

महिलाएं अक्सर थकान, कमजोरी और लगातार बने रहने वाले दर्द को अपनी दिनचर्या का दोष मानकर नजरअंदाज करती रहती हैं, ये कमजोर या बीमार होते हार्ट के लक्षण भी हो सकते हैं। ऐसे में, तुरंत सतर्क होने और डॉक्टर से मिलने की आवश्यकता होती है… पुरुषों और महिलाओं में हार्ट से जुड़ी बीमारियों के लक्षण अलग-अलग होते हैं। महिलाओं की बड़ी समस्या यही है कि लक्षणों को लंबे समय तक अनदेखा करने के कारण उन्हें सही समय पर उपचार नहीं मिल पाता। हालांकि, एस्ट्रोजन के चलते महिलाओं को एक प्राकृतिक सुरक्षा कवच मिला होता है, लेकिन 50 वर्ष की उम्र के बाद इस सुरक्षा का असर कम हो जाता है। एक हालिया डाटा की मानें तो बीते कुछ वर्षों में महिलाओं में कार्डियक मामलों में 20 प्रतिशत तक की वृद्धि हुई है। ऐसे में, हम समय रहते लक्षणों को लेकर गंभीरता बरतें तो ऐसी समस्याओं से काफी हद तक बचाव संभव है। महिलाओं में हार्ट से जुड़ी समस्याएं अधिक सामने आने लगी हैं। हालांकि, पुरुषों और महिलाओं में इस समस्या के पीछे कारण और लक्षण अलग-अलग होते हैं। महिलाओं में अक्सर मेनोपाज यानी 45 से 50 की उम्र के बाद यह समस्या देखने में आती है। मेनोपाज से पहले एस्ट्रोजन की मात्रा भरपूर होती है। इससे रक्त वाहिकाएं स्वस्थ रहती हैं और अच्छा कोलेस्ट्राल (एचडीएल) संतुलित रहता है। यह हार्ट को सुरक्षित रखने वाला कोलेस्ट्राल होता है। इससे बैड कोलेस्ट्राल एलडीएल से भी सुरक्षा मिलती है। मेनोपाज के बाद एस्ट्रोजन अचानक कम हो जाता है, जिससे कोलेस्ट्राल का संतुलन बिगड़ जाता है। कई सारे कारणों पर रखनी होगी नजर महिलाओं में हार्ट की समस्या के पीछे अन्य कारण भी जिम्मेदार होते हैं, जैसे पालिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम आदि से भी हार्ट की बीमारी का जोखिम बढ़ता है। जल्दी मेनोपाज या प्रेग्नेंसी भी इस परेशानी का कारण बन सकती है। हमें समझना होगा कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं में हृदय की धमनियों की बनावट थोड़ी छोटी और रक्तवाहिकाएं पतली होती हैं। अक्सर ब्लाकेज इन पतली और छोटी धमनियों में होता है। इन छोटी-छोटी धमनियों का ब्लाकेज अक्सर पता नहीं चलता। यही कारण है कि महिलाओं में पुरुषों की तुलना में लक्षण बहुत ही अलग तरह के होते हैं। ये बहुत स्पष्ट नहीं होते, पर खतरनाक जरूर होते हैं। रोजमर्रा की थकान, कमजोरी को टालें नहीं महिलाओं में रोजमर्रा की थकान होती है, उन्हें लगता है कि यह दिनचर्या की वजह से है, इसलिए ऐसे लक्षणों को लंबे समय तक नजरअंदाज करती रहती हैं। इसी तरह सीने में दर्द उठना और उसका गर्दन व कंधों तक फैलना भी एक बड़ा लक्षण होता है। हार्ट की समस्या होने पर चक्कर और बेहोशी जैसे लक्षण भी हो सकते हैं। अचानक कमजोरी महसूस करना, घबराहट या फिर लगना कि धड़कन बहुत अधिक तेज हो गई है तो इसे टालने के बजाय तुरंत डाक्टर से मिलना चाहिए। किन्हें है अधिक जोखिम? जिन महिलाओं का मेनोपाज हो चुका है या जिन लोगों के परिवार में हार्ट की बीमारी की हिस्ट्री है या फिर जिन्हें डायबिटीज, ब्लडप्रेशर जैसी समस्याएं हैं, उन्हें हार्ट की हेल्थ को लेकर अधिक सतर्क होने की जरूरत है। धूमपान या अल्कोहल का सेवन, मानसिक तनाव भी बड़े रिस्क फैक्टर हैं। गर्भकाल के दौरान सीने में होने वाले दर्द को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। चूंकि, महिलाओं में हार्ट की समस्या को चिह्नित करना थोड़ा मुश्किल होता है, इसलिए समय रहते इन लक्षणों को पहचानने और समस्या होने पर डॉक्टर से मिलने के लिए जरूर प्रयास करना चाहिए। रिस्क फैक्टर पर रहे नजर     अगर आपकी उम्र 45 वर्ष से अधिक है और बार-बार सीने में दबाव महसूस करती हैं।     अगर सांस फूल रही है, पसीना आ रहा है या कमजोरी महसूस होती है।     अगर उल्टी लगती है, दर्द गर्दन तक पहुंचता है, तो तुरंत डाक्टर से मिलना चाहिए। बचाव के लिए आदतों में करें सुधार     हार्ट की समस्या से बचने के लिए स्वस्थ और संतुलित भोजन की आदत बनाएं।     नियमित व्यायाम करें, वजन, ब्लड प्रेशर और शुगर को नियंत्रण में रखें।     धूमपान या अल्कोहल, अल्ट्रा प्रोसेस्ड आहार आदि से दूरी बनाएं।     नींद को अच्छी तरह से पूरा करें। मानसिक तनाव से दूर रहने का प्रयास करें।     अपना नियमित स्वास्थ्य जांच अवश्य कराते रहें।  

बलिया बनेगा नई फिल्म का केंद्र, अभिषेक चौबे संग हाथ मिलाएंगे सिद्धांत चतुर्वेदी

मुंबई, बॉलीवुड अभिनेता सिद्धांत चतुर्वेदी अपने मित्र और निर्देशक अभिषेक चौबे के साथ मिलकर अपने होम टाऊन बलिया को केंद्र में रखकर एक फिल्म बनाने की तैयारी कर रहे हैं। छोटे शहर बलिया से निकलकर मेनस्ट्रीम हिंदी सिनेमा तक अपनी पहुंच बनानेवाले सिद्धांत चतुर्वेदी अब अपनी ज़िंदगी के अनुभवों को परदे पर लाने की तैयारी में जुटे हैं। हाल ही में सिद्धांत चतुर्वेदी ने खुद यह बात कही कि वह निर्देशक अभिषेक चौबे के साथ मिलकर अपने होम टाऊन बलिया को केंद्र में रखकर एक फिल्म बनाने की तैयारी कर रहे हैं। गौरतलब है कि ‘गली बॉय’ से अपने करियर की शुरुआत करने वाले सिद्धांत चतुर्वेदी ने ‘गहराइयाँ’, ‘खो गए हम कहाँ’ और ‘धड़क 2’ जैसी फ़िल्में की और हमेशा लेयर्ड और हटकर किरदार चुने। यही वजह है कि अपनी हर फिल्म में अपने हर परफॉर्मेंस के लिए सिद्धांत ने अपने दर्शकों की सराहना बटोरी। फिलहाल अब वह अपने करियर के एक ऐसे मोड़ पर हैं, जहां वे चाहते हैं कि कहानी सीधे उनके जीवन और यादों से निकलकर सामने आए। सिद्धांत ने कहा, “अभी तक ये ऑफिशियल नहीं है, लेकिन मुझे लगता है ये वही स्टेज है जहां मैं बोल देना चाहता हूं। मैं अपनी रूट्स (जड़ों) पर वापस जाना चाहता हूं। मुझे बलिया की कहानी कहनी है। वहां की ज़िंदगी मैंने देखी है, और मैं वही एक्सपीरियंस स्क्रीन पर लाना चाहता हूं।” उन्होंने इस फिल्म में निर्देशक अभिषेक चौबे के साथ अपने सहयोग को लेकर भी उत्साह ज़ाहिर करते हुए कहा, “अभिषेक चौबे के साथ हम एक बलिया-बेस्ड स्टोरी पर काम कर रहे हैं। यह वाकई बहुत ही कमाल की कहानी है। इस पर काफी चर्चा चल रही है और मुझे लगता है कि बहुत जल्द ये सबके सामने आएगी।” बलिया में पले-बढ़े एक आम लड़के से लेकर बॉलीवुड के जाने-माने अभिनेता बनने तक, सिद्धांत चतुर्वेदी की जर्नी मेहनत, आत्मविश्वास और उद्देश्य से भरी रही है। ऐसे में यह फिल्म सिर्फ एक नया प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि उनकी पहचान, यादों और जड़ों की ओर वापसी का संकेत है। यही वजह है कि सिद्धांत के मुंह से इस फिल्म की बात सुनते ही उनके दर्शकों के मन में उत्साह की लहर दौड़ गई है, क्योंकि वे जानते हैं की अपनी फिल्मों के ज़रिए सच्चाई, गहराई और भावनात्मक ईमानदारी का संदेश देनेवाले सिद्धांत चतुर्वेदी कुछ ख़ास ही करेंगे।  

तेज साउंड बजाने पर जमकर चले लात-घूंसे, केंद्रीय विश्वविद्यालय में होली मिलन में भिड़े छात्र

बिलासपुर. गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय (GGU) परिसर में ब्रदर हुड पैनल ने होली मिलन कार्यक्रम रंग बरसे 0.5 का आयोजन किया था। कार्यक्रम के दौरान कुछ छात्रों ने नशे में जमकर रंग-गुलाल उड़ाए और एक दूसरे के कपड़े फाड़े। इसके बाद अचानक एक दूसरे से मारपीट करने लगे। मारपीट का वीडियो भी वायरल हुआ है। यूनिवर्सिटी में एबीवीपी द्वारा होली पर आयोजित कार्यक्रम में हुई मारपीट की चर्चा खत्म नहीं हुई और दूसरी बार छात्र आपस में भिड़ गए। ब्रदरहुड पैनल ने छात्रों के लिए रंग बरसे 0.5 का आयोजन किया था। ऑडिटोरियम के सामने तेज आवाज में साउंड सिस्टम लगाकर छात्र जमकर रंग-गुलाल उड़ा रहे थे। छात्र-छात्राएं सभी आपस में डांस कर रहे थे। कुछ छात्र आपस में ही एक दूसरे के शर्ट तक फाड़ रहे थे। अबीर गुलाल के नशे के बीच अचानक कुछ छात्रों ने मारपीट शुरू कर दी। बाकी छात्र विवाद देख इधर-उधर भागने लगे। मारपीट का वीडियो भी शाम तक सोशल मीडिया में वायरल होने लगा। वीडियो में छात्र एक दूसरे से मारपीट करते नजर आ रहे हैं। इस विवाद के बाद न तो पुलिस यूनिवर्सिटी आई और ना ही कोई थाने गया। चार दिन पहले भी इसी तरह के आयोजन में लड़े थे छात्र चार दिन पहले एबीवीपी ने कैंपस में होली मिलन का आयोजन किया था। कार्यक्रम के दौरान यहां भी छात्र आपस में भिड़ गए थे। कुछ छात्र तो विवाद का पूरा कारण दबी जुबान में नशा और यूनिवर्सिटी प्रबंधन की उदासीनता को बता रहे हैं। उनका कहना है कि पहले कार्यक्रम में विवाद के बाद यूनिवर्सिटी को ब्रदरहुड पैनल को रंग बरसे की अनुमति नहीं देना चाहिए था।

गुणवत्ता पूर्ण कार्य करने के दिए निर्देश, महासमुंद के कलेक्टर ने किया एनएच-06 का निरीक्षण

महासमुंद. कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने सोमवार को एनएच-06 से बेलटुकरी तक जाने वाले मार्ग एवं महासमुंद-तुमगांव रोड का निरीक्षण किया तथा संबंधित निर्माण एजेंसी को आवश्यक निर्देश दिए। कलेक्टर लंगेह ने एनएच-06 से बेलटुकरी मार्ग के निरीक्षण के दौरान सड़क की स्थिति, और भारी वाहनों के कारण हो रही क्षति का जायजा लिया। कलेक्टर लंगेह ने इस दौरान जिला खनिज अधिकारी फागुलाल नागेश एवं पीएमजेएसवाई के कार्यपालन अभियंता आशीष कुलदीप एवं संबंधित विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए कि क्षेत्र में संचालित फर्सी पत्थर एवं अन्य खनन उद्योगों की सहायता से सड़क मरम्मत का कार्य शीघ्र कराया जाए। उन्होंने कहा कि खनिज परिवहन में लगे भारी वाहनों के कारण सड़कें क्षतिग्रस्त हो रही हैं, जिससे आम नागरिकों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कलेक्टर ने निर्देशित किया कि खनन कंपनियां अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए सड़क की मरम्मत, गड्ढों की भराई तथा आवश्यक सुधार कार्य जल्द पूरा करें। साथ ही, निर्धारित मानकों के अनुसार सड़क को सुरक्षित और सुगम बनाया जाए, ताकि ग्रामीणों, स्कूली बच्चों एवं राहगीरों को सुविधा मिल सके। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को समय-सीमा तय कर कार्य पूर्ण कराने के निर्देश भी दिए गए। तत्पश्चात कलेक्टर लंगेह ने महासमुंद-तुमगांव निर्माणाधीन सड़क के डामरीकरण कार्य का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने 9.65 किलोमीटर लंबी सड़क निर्माण कार्य की प्रगति का जायजा लिया और इसे जून 2026 तक पूर्ण करने के निर्देश संबंधित विभाग एवं ठेकेदार एजेंसी को दिए। निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने सड़क की गुणवत्ता, बेस लेयर, डामरीकरण की मोटाई, जल निकासी व्यवस्था एवं सुरक्षा मानकों की बारीकी से जांच की। उन्होंने अधिकारियों से निर्माण में उपयोग हो रही सामग्री की गुणवत्ता सुनिश्चित करने और मानकों के अनुरूप कार्य करने पर जोर दिया। कलेक्टर ने कहा कि सड़क निर्माण में किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने निर्माण एजेंसी को समय-सीमा का सख्ती से पालन करने तथा कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को नियमित मॉनिटरिंग करने, प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने तथा जनता की शिकायतों का त्वरित निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इस अवसर पर लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन अभियंता सी.एस. चंद्राकर एवं अनुविभागीय अधिकारी मौजूद थे।

एप्लास्टिक एनीमिया: खून की कमी से आगे की बीमारी, लक्षण, खतरे और आम एनीमिया से फर्क

जब भी हम एनीमिया शब्द सुनते हैं, तो हमारे दिमाग में सबसे पहले शरीर में आयरन की कमी, थकान और चेहरे का पीलापन जैसे लक्षण आते हैं। पोषण संबंधी एनीमिया या आयरन की कमी एक आम समस्या है जिसे सही खान-पान से ठीक किया जा सकता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि एप्लास्टिक एनीमिया इससे पूरी तरह अलग और कहीं ज्यादा खतरनाक स्थिति है? इसे सामान्य एनीमिया समझकर केवल आयरन की गोलियों से इलाज करना एक बड़ी भूल साबित हो सकती है। आइए डॉ. नितिन अग्रवाल (एमडी, ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन, एचओडी – डोनर रिक्वेस्ट मैनेजमेंट, DKMS फाउंडेशन इंडिया) से जानते हैं एप्लास्टिक एनीमिया कैसे एनीमिया से अलग है। क्या है एप्लास्टिक एनीमिया? एप्लास्टिक एनीमिया बोन मैरो के फ्लोयोर से जुड़ी एक समस्या है। इस कंडीशन में बोन मैरो नए ब्लड सेल्स बनाना बंद कर देती है। यह स्थिति न केवल हीमोग्लोबिन को प्रभावित करती है, बल्कि पूरे शरीर पर असर डालती है। आम एनीमिया और एप्लास्टिक एनीमिया में अंतर क्या है? जहां सामान्य एनीमिया में अक्सर केवल रेड ब्लड सेल्स या हीमोग्लोबिन की कमी होती है, वहीं एप्लास्टिक एनीमिया में तीन मुख्य समस्याएं एक साथ पैदा होती हैं-     कम हीमोग्लोबिन- जिससे बहुत ज्यादा थकान और कमजोरी महसूस होती है।     व्हाइट ब्लड सेल्स की कमी- इनके घटने से शरीर की बीमारियों से लड़ने की क्षमता कम हो जाती है, जिससे इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता है।     प्लेटलेट्स की कमी- प्लेटलेट्स कम होने से शरीर में चोट लगने पर खून बहना रुकना मुश्किल हो जाता है और इंटरनल ब्लीडिंग का जोखिम रहता है। क्यों होती है यह बीमारी? एप्लास्टिक एनीमिया के पीछे कई कारण हो सकते हैं। मुख्य रूप से ऑटोइम्यून डिजीज, कुछ दवाएं, टॉक्सिक चीजों से कॉन्टेक्ट और वायरल इन्फेक्शन इसके जिम्मेदार हो सकते हैं। कुछ दुर्लभ मामलों में यह बीमारी जेनेटिक भी हो सकती है। इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज एप्लास्टिक एनीमिया के लक्षण शरीर के हर हिस्से को प्रभावित करते हैं। इसके मुख्य संकेतों में शामिल हैं-     सांस लेने में तकलीफ और थकान।     दिल की धड़कन का तेज या अनियमित होना।     बार-बार या लंबे समय तक चलने वाले इन्फेक्शन और बुखार।     बिना किसी कारण के शरीर पर नीले निशान पड़ना।     नाक और मसूड़ों से खून आना या चोट लगने पर खून का न रुकना।     त्वचा का पीला पड़ना और त्वचा पर रैश होना।  

होली पर हुड़दंग से निपटने के लिए पुलिस ने की तैयारी, ड्रोन निगरानी, जिग-जैग बैरियर और एलआईयू अलर्ट

  मेरठ   होली पर हुड़दंगियों से निपटने के लिए पुलिस ने विशेष इंतजाम किए हैं। ड्रोन कैमरों और जिग-जैग बैरियर लगाकर निगरानी की जाएगी। स्थानीय खुफिया इकाई एलआईयू को भी अलर्ट कर दिया गया है।   पुलिस आयुक्त दीपक कुमार ने सभी एसीपी और थाना प्रभारियों के साथ ब्रीफिंग की। उन्होंने बताया कि रंग लगाने के बहाने हुड़दंग पर पुलिस शांतिभंग में कार्रवाई करेगी। आरोपियों को एसीपी कोर्ट में पेश किया जाएगा। उन्हें पुलिस की रिपोर्ट पर जेल भी भेजा जाएगा। पुलिसकर्मियों को निर्देशित किया गया है कि चेकिंग के नाम पर किसी से अभद्रता नहीं होनी चाहिए। माहौल बिगाड़ने की कोशिश करने वालों पर सख्त कार्रवाई करें।   संवेदनशील स्थानों पर पैरामिलिट्री फोर्स डीसीपी सिटी सय्यद अली अब्बास ने बताया कि सीसीटीवी कैमरों का प्रयोग हर चाैराहे पर किया जा रहा है। होली के दो दिन पुलिस विशेष नजर रखेगी। तेज गति से वाहन चलाने पर चालान की कार्रवाई होगी। कंट्रोल रूम से चाैराहों पर तैनात पुलिसकर्मियों को निर्देशित किया जाएगा। कहीं भी अनावश्यक भीड़ लगने या माहौल गड़बड़ दिखने पर वायरलेस पर अलर्ट किया जाएगा। लोकेशन के आधार पर गश्त कर रही पुलिस टीम को मौके पर भेजा जाएगा। संवेदनशील स्थानों पर पैरामिलिट्री फोर्स, पीएसी के साथ अतिरिक्त पुलिस बल रहेगा। मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्रों और मिश्रित आबादी वाले क्षेत्रों में ड्रोन से नजर रखी जाएगी और एसीपी और थानों का फोर्स थोड़ी-थोड़ी देर में गश्त करेगा।   60 पॉइंट पर लगेंगे जिग-जैग बैरियर पुलिस आयुक्त ने बताया कि 112 नंबर पर आईं शिकायतों का डाटा देखकर रणनीति तैयार की गई है। विवादित जगहों पर पहले से लोगों को चेतावनी दी गई है। शहर में 60 स्थानों पर जिग-जैग बैरियर लगाकर चेकिंग की जाएगी। हर थाने में 12 स्थानों पर स्टेटिक टीम तैनात रहेंगी। लगातार भ्रमणशील रहेंगी। बाजारों और संवेदनशील स्थानों पर बॉडी वार्म कैमरों के साथ पुलिसकर्मी तैनात रहेंगे। एलआईयू संवेदनशील क्षेत्रों में घूमकर जानकारी जुटाएगी और थाना पुलिस को सूचना देगी। सोशल मीडिया सेल 24 घंटे भ्रामक पोस्ट और माहौल बिगाड़ने वालों पर नजर रखेगी।  

संगठनात्मक अनुभव और सामाजिक समीकरण का मिला लाभ, राज्यसभा चुनाव में लक्ष्मी वर्मा बनीं भाजपा उम्मीदवार

रायपुर. भारतीय जनता पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति ने राज्यसभा के चुनाव के लिए उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है. छत्तीसगढ़ से पार्टी ने लक्ष्मी वर्मा को अपना अधिकृत प्रत्याशी घोषित किया है. भाजपा ने कई राज्यों के उम्मीदवारों के नामों का ऐलान किया गया है, जिसमें छत्तीसगढ़ से लक्ष्मी वर्मा के नाम पर मुहर लगाई गई है. पार्टी नेतृत्व ने संगठनात्मक अनुभव, सामाजिक समीकरण और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया है. लक्ष्मी वर्मा लंबे समय से पार्टी की सक्रिय कार्यकर्ता रही हैं और विभिन्न दायित्वों का निर्वहन कर चुकी हैं. राज्यसभा की इस सीट के लिए नामांकन प्रक्रिया निर्धारित तिथि पर शुरू होगी. राजनीतिक सफर बलौदाबाजार जिले के सिमगा ब्लॉक के ग्राम मु़ड़पार की निवासी लक्ष्मी वर्मा का राजनीतिक सफर बहुत लंबा है. वर्ष 1990 से भारतीय जनता पार्टी की प्राथमिक सदस्य लक्ष्मी वर्मा ने 2000 में रायपुर सांसद रमेश बैस की सांसद प्रतिनिधि नियुक्त की गईं. अगले ही साल 2001 में उन्हें भारतीय जनता पार्टी महिला मोर्चा कार्य समिति की सदस्य चुना गया. इस दायित्व को उन्होंने चार साल तक संभाला. पार्टी के भीतर उनकी सक्रियता का फल भी मिला, 2010 में उन्हें भारतीय जनता पार्टी पंचायती राज प्रकोष्ठ की राष्ट्रीय कार्य समिति (2010 से 2014 तक) के साथ-साथ भारतीय जनता पार्टी महिला मोर्चा कार्य समिति का सदस्य (2010 से 2022 तक ) नियुक्ति किया गया. उनके कार्यों को ध्यान में रखते हुए उन्हें पार्टी ने भारतीय जनता पार्टी का प्रदेश उपाध्यक्ष (2021 से 2025 तक) नियुक्त किया. इसके साथ (2021 से 2024 तक ) उन्हें गरियाबंद संगठन प्रभारी के साथ-साथ भारतीय जनता पार्टी मीडिया प्रवक्ता का भी दायित्व संभाला. संवैधानिक सफर लक्ष्मी वर्मा 1994 में रायपुर नगर पालिका निगम में वार्ड नं. 07 से पार्षद निर्वाचित हुईं. 2010 में रायपुर जिला पंचायत की अध्यक्ष निर्वाचित हुईं. 2019 में एफएसएनएल स्टील मिनिस्ट्री गवर्नमेंट ऑफ इंडिया में स्वतंत्र निदेशक के तौर पर काम किया. वहीं 7 अक्टूबर 2024 से छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की सदस्य संवैधानिक पद संभाल रही हैं. सामाजिक पद लक्ष्मी वर्मा की केवल राजनीति में ही नहीं बल्कि सामाजिक स्तर पर अपनी पहचान है. 1998 में शक्ति महिला मंच रायपुर की अध्यक्ष बनीं. इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा. 1999 में नेहरू युवा केन्द्र रायपुर से जिला युवा पुरस्कार से सम्मानित किया गया. 2004 में श्रम पुनर्वास समिति जिला रायपुर के सदस्य मनोनीत की गईं. 2009 से मजदूर यूनियन छत्तीसगढ़ एकता मजदूर कल्याण संघ पंजीयन क्र. को 467 की प्रधान संरक्षक हैं. 2011 से कुटुम्ब न्यायालय रायपुर में परामर्शदाता सदस्य हैं. वहीं 2014 वर्तमान में किसान संघर्ष समिति रायपुर छत्तीसगढ़ के विशेष आमंत्रित सदस्य नियुक्त किया गया. 2023 से वर्तमान में अखिल भारतीय पंचायत परिषद राष्ट्रीय महासचिव हैं. इसके अलावा छत्तीसगढ़ स्काउट गाइड की उपाध्यक्ष भी हैं. लक्ष्मी वर्मा की मनवा कुर्मी समाज में अच्छी-खासी पैठ है. 2000 से 2006 तक मनवा कुर्मी क्षत्रिय समाज छत्तीसगढ़ प्रदेश महिला महामंत्री रहीं. 2006 से 2008 तक समाज की प्रदेश संगठन मंत्री , 2008 से 2010 तक छत्तीसगढ़ मनवा कुर्मी प्रदेश महिला अध्यक्ष रहीं. वर्तमान में अखिल भारतीय कुर्मी क्षत्रिय महासभा महिला राष्ट्रीय महासचिव हैं.

भोले नामक विशाल नंदी के शरीर की धूल-मिट्टी को अपने हाथों से साफ किया सीएम योगी ने

गोसेवा में रमे सीएम योगी, गोवंश को खिलाया गुड़-रोटी नामों से पुकार कर, स्नेहिल थपकी देकर गायों-गोवंश को खूब दुलारा मुख्यमंत्री ने भोले नामक विशाल नंदी के शरीर की धूल-मिट्टी को अपने हाथों से साफ किया सीएम योगी ने गोरखपुर  गोरखनाथ मंदिर प्रवास के दौरान मंगलवार सुबह जनता दर्शन लगाकर जनसेवा करने के साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मंदिर की गोशाला में जाकर गोसेवा में भी रमे रहे। उन्होंने नामों से पुकार कर, स्नेहिल थपकी देकर गायों-गोवंश को खूब दुलारा, उन्हें गुड़-रोटी खिलाया और गोशाला के कार्यकर्ताओं को गोवंश की समुचित देखभाल के निर्देश दिए। गोरखनाथ मंदिर प्रवास पर मंगलवार प्रातःकाल सीएम योगी की दिनचर्या परंपरागत रही। उन्होंने गोरखनाथ मंदिर में शिवावतार महायोगी गुरु गोरखनाथ का दर्शन-पूजन किया और अपने गुरु ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की समाधि स्थल पर जाकर शीश झुकाकर आशीर्वाद लिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, जब भी गोरखनाथ मंदिर में होते हैं तो गोसेवा उनकी दिनचर्या का अभिन्न हिस्सा रहती है। मंगलवार सुबह भी वह मंदिर परिसर का भ्रमण करते हुए गोशाला में पहुंचे और वहां कुछ समय व्यतीत किया।  गोशाला में सीएम योगी ने चारों तरफ भ्रमण करते हुए श्यामा, गौरी, गंगा, भोला आदि नामों से गोवंश को पुकारा। उनकी आवाज इन गोवंश के लिए जानी पहचानी है। प्यार भरी पुकार सुनते ही कई गोवंश दौड़ते-कूदते उनके पास आ गए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी के माथे पर हाथ फेरा, उन्हें खूब दुलारा और अपने हाथों से गुड़-रोटी खिलाया। इसी क्रम में उन्होंने भोले नामक एक विशाल नंदी को स्नेह की थपकी देते हुए गुड़-रोटी खिलाया। उसके शरीर पर लगी धूल-मिट्टी को पहले अपने हाथों से साफ किया और फिर गोशाला कार्यकर्ता को निर्देशित किया कि भोले के शरीर को सूखे कपड़े से साफ कर दिया जाए। मंदिर की गोशाला में सीएम योगी ने मोर पर भी स्नेह बरसाया और उसे अपने हाथों से रोटी खिलाई।

खामेनेई की मौत पर ईरान में खुशी, भारत में क्यों मना रहे हैं मातम?

नई दिल्ली ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मिसाइल हमले में हत्या की खबर सामने आने के बाद मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर पहुंच गया है और पूरे इलाके में हालात तेजी से बिगड़ते नजर आ रहे हैं. अमेरिका और इजरायल की तरफ से किए गए इस हमले के बाद जहां एक तरफ कई देशों में विरोध प्रदर्शन देखने को मिले हैं और शिया मुस्लिम समुदाय के बीच गहरा शोक छा गया है. वहीं दूसरी तरफ ईरान और दुनिया के कुछ हिस्सों में लोगों ने इसे ‘फ्री ईरान’ की दिशा में पहला कदम बताते हुए जश्न भी मनाया है. इसी बीच भारतीय सिनेमा में काम कर रहीं ईरानी एक्ट्रेस एलनाज नोरौजी का सोशल मीडिया रिएक्शन सबसे ज्यादा सुर्खियां बटोर रहा है. ईरान से आई दो तस्वीरों ने पहले विरोध की आग दिखाई थी, अब वही तस्वीरें जश्न की कहानी बन गई हैं. कुछ समय पहले सोशल मीडिया पर वायरल हुई एक तस्वीर में एक युवती देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की तस्वीर जलाकर उसी आग से सिगरेट सुलगाती नजर आई थी. यह दृश्य ईरान में महिलाओं के गुस्से और सत्ता के खिलाफ खुली चुनौती का प्रतीक बना. अब खामेनेई की मौत की खबर सामने आने के बाद उसी तरह की महिलाएं ‘चीयर्स’ करती और जश्न मनाती दिखाई दे रही हैं. इन तस्वीरों ने दुनिया भर में बहस छेड़ दी है कि क्या यह सिर्फ एक राजनीतिक प्रतिक्रिया है या फिर दशकों से सख्त सामाजिक और धार्मिक पाबंदियों में जी रही ईरानी महिलाओं की आजादी की शुरुआत? ईरान में महिलाओं का संघर्ष क्यों बना वैश्विक मुद्दा?     पिछले कुछ सालों में ईरान में महिलाओं के अधिकार सबसे बड़ा राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा बनकर उभरे हैं. ड्रेस कोड, सार्वजनिक जीवन में पाबंदियां और मोरल पुलिसिंग के खिलाफ लगातार आंदोलन होते रहे हैं. कई बार इन आंदोलनों को सख्ती से दबाया गया, लेकिन विरोध की आवाज पूरी तरह खत्म नहीं हुई. महसा अमिनी की मौत के बाद आंदोलन और तेज हो गया.     खामेनेई की मौत के बाद सत्ता संरचना में संभावित बदलाव महिलाओं के आंदोलन को नई दिशा दे सकता है. हालांकि यह भी सच है कि ईरान की राजनीतिक व्यवस्था सिर्फ एक व्यक्ति पर निर्भर नहीं है, इसलिए तुरंत बड़े बदलाव की उम्मीद करना जल्दबाजी होगी. खामेनेई की मौत पर भारत में मातम क्यों  तेहरान में अमेरिका और इजरायल ने जिस तरह से ताबड़तोड़ हमले किए और इसमें ईरान के सुप्रीम लीडर 86 वर्षीय अयातुल्ला अली खामेनेई ने जान गंवाई, उसे लेकर हंगामा मचा हुआ है। खामेनेई की मौत को लेकर भारत के मुस्लिम समुदाय में कुछ वर्गों के बीच खास प्रतिक्रिया नजर आई। लखनऊ, हैदराबाद, मुंबई और अलीगढ़ में शोक सभाओं, अंतिम संस्कार की प्रार्थना और ऑनलाइन संदेशों से संकेत मिलता है कि यह एक रेयर मूमेंट है। ऐसा पहली बार है जब शिया और सुन्नी, धार्मिक मतभेदों के लंबे इतिहास के बाद भी एक नेता के निधन पर साथ में शोक जताते नजर आए। खामेनेई 1989 से कर रहे थे ईरान का नेतृत्व     खामेनेई, जिन्होंने अयातुल्ला रुहोल्लाह खुमैनी की मृत्यु के बाद 1989 से ईरान का नेतृत्व किया।     वो एक शिया धर्मगुरु थे और सुन्नियों के लिए कोई धार्मिक प्राधिकारी नहीं थे।     उनकी मृत्यु पर प्रतिक्रियाएं सांप्रदायिक सीमाओं को पार कर गईं।     कई सुन्नियों के लिए, यह भावना ईरान से कम और फिलिस्तीन से अधिक जुड़ी है।     ये एक ऐसा मुद्दा है जो दक्षिण एशिया में सांप्रदायिक विभाजनों को भी पार कर जाता है। खामेनेई पर क्यों आए शिया सुन्नी साथ? जमात-ए-इस्लामी हिंद के प्रमुख सैयद सदातुल्लाह हुसैनी ने कहा कि खामेनेई का जीवन धार्मिक अधिकार के साथ-साथ राजनीतिक दृढ़ विश्वास को भी दर्शाता था। एक बयान में कहा गया कि रमजान के पवित्र महीने में खामेनेई की शहादत ने मुस्लिम जगत के लाखों लोगों को गहरा शोक पहुंचाया है। कुछ सुन्नी मौलवियों में शोक के साथ-साथ उन मुस्लिम सरकारों की आलोचना भी शामिल थी जिन्हें चुप्पी साधे हुए देखा गया।  सुन्नियों की इस प्रतिक्रिया पर क्या कह रहे जानकार विद्वान बशारत अली ने कहा कि शिया राजनीतिक कल्पना में, शहादत एकता और राजनीतिक शक्ति का स्रोत बन जाती है। भारत में कई शियाओं के लिए, ईरान का धार्मिक महत्व है क्योंकि यह दुनिया का सबसे बड़ा शिया-बहुसंख्यक देश है। ये कोम और मशहद जैसे धार्मिक केंद्रों का घर है। सुन्नियों के लिए प्रतिक्रिया काफी हद तक राजनीतिक रही है, जो फिलिस्तीन और इजरायल के विरोध के इर्द-गिर्द केंद्रित है।  

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