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भोपाल में वैलेंटाइन डे को लेकर पार्क के बाहर पुलिस बल तैनात, कार्यकर्ताओं ने की नारेबाजी

भोपाल मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में वैलेंटाइन-डे के मौके पर शुक्रवार को हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला. अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद और राष्ट्रीय बजरंग दल के कार्यकर्ता हाथों में लट्ठ (डंडे) लेकर सड़कों पर उतर आए. चिनार पार्क के बाहर जमा हुए इन कार्यकर्ताओं ने न केवल नारेबाजी की, बल्कि सार्वजनिक स्थलों पर ‘मर्यादा’ का उल्लंघन करने वाले जोड़ों का ‘मुंडन’ करने की सीधी चेतावनी भी दे डाली. प्रशासन की सतर्कता स्थिति को देखते हुए शहर के प्रमुख पार्कों, मॉल और सार्वजनिक स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई। पुलिस ने कहा कि शांति व्यवस्था भंग करने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी। अधिकारियों ने नागरिकों से भी अपील की कि वे किसी भी तरह के विवाद से बचें और कानून का पालन करें। पार्क के बाहर पुलिस तैनात स्थिति को देखते हुए पार्क के बाहर पुलिस बल तैनात किया गया है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए एहतियातन सुरक्षा व्यवस्था की गई है और किसी भी तरह की अवैध या हिंसक कार्रवाई की अनुमति नहीं दी जाएगी। गौरतलब है कि वैलेंटाइन डे को लेकर शहर में विभिन्न संगठनों की ओर से विरोध दर्ज कराया जा रहा है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक स्थलों पर शांति भंग करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। बजरंग दल की चेतावनी: मुंह काला करेंगे राष्ट्रीय बजरंग दल ने सार्वजनिक रूप से सख्त चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि वैलेंटाइन डे के नाम पर किसी भी तरह की अश्लीलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रांत मंत्री राकेश प्रजापति ने तीखे शब्दों में कहा कि यदि कोई युवक-युवती सार्वजनिक स्थानों पर आपत्तिजनक स्थिति में मिले, “बाबू-सोना” करते दिखाई दें, तो उनका सिर मुंडवाकर मुंह काला किया जाएगा और सड़कों पर जुलूस निकाला जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि जहां कहीं भी अश्लीलता करते पाए गए, वहां “शरीर का कोना-कोना तोड़ देंगे।” संगठन का आरोप है कि वैलेंटाइन डे के बहाने शहर में योजनाबद्ध तरीके से अशोभनीय गतिविधियां बढ़ाई जाती हैं, जिसका राष्ट्रीय बजरंग दल विरोध करेगा। प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। 15 निगरानी दस्ते गठित वैलेंटाइन डे पर अंतरराष्ट्रीय हिंदू परिषद और राष्ट्रीय बजरंग दल ने पाश्चात्य संस्कृति के प्रभाव का विरोध करते हुए सख्त रुख अपनाया है। वहीं संस्कृति बचाओ मंच ने शहरभर में 15 निगरानी दस्ते गठित कर होटल, मॉल और पार्कों पर नजर रखने की घोषणा की है। इससे एक दिन पहले शुक्रवार को हिंदू परिषद और बजरंग दल ने ‘दंड पूजन’ कर विरोध दर्ज कराया। संगठन के प्रांत मंत्री राकेश प्रजापति ने कहा कि भारतीय संस्कृति में प्रेम मर्यादा और सम्मान से जुड़ा है, लेकिन पश्चिमी प्रभाव में सार्वजनिक अश्लीलता को बढ़ावा दिया जा रहा है। जिसे भोपाल में किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि संगठन सच्चे प्रेम या पारिवारिक मूल्यों के खिलाफ नहीं, बल्कि सार्वजनिक मर्यादा भंग करने वालों के विरोध में हैं। बजरंग दल की एक दर्जन टीमें रहेंगी तैनात संगठनों ने ऐलान किया है कि 14 फरवरी को राष्ट्रीय बजरंग दल की करीब एक दर्जन टीमें शहर के प्रमुख पार्कों, सार्वजनिक स्थलों और भीड़-भाड़ वाले इलाकों में तैनात रहेंगी। किसी भी आपत्तिजनक गतिविधि पर सार्वजनिक विरोध दर्ज कराया जाएगा। विशेष आयोजन न करें होटल संचालक उधर, संस्कृति बचाओ मंच ने होटल संचालकों को चेतावनी दी है कि वैलेंटाइन डे पर विशेष आयोजन न करें। मंच पदाधिकारियों ने कहा कि भारतीय संस्कृति और संस्कार देश की पहचान हैं। युवाओं से अपील की गई है कि वे वैलेंटाइन डे के बजाय अगले दिन पड़ने वाली महाशिवरात्रि पर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना करें। संगठनों की घोषणाएं कुछ संगठनों ने दावा किया कि उन्होंने शहरभर में निगरानी टीमें गठित की हैं, जो सार्वजनिक स्थानों पर नजर रखेंगी। वहीं होटल संचालकों से अपील की गई कि वे 14 फरवरी को विशेष आयोजन न करें। सांस्कृतिक बहस तेज वैलेंटाइन डे को लेकर हर साल की तरह इस बार भी शहर में सांस्कृतिक बहस देखने को मिली। एक पक्ष इसे निजी अभिव्यक्ति और उत्सव का दिन मानता है, जबकि विरोध करने वाले इसे भारतीय परंपराओं के विपरीत बताते हैं। प्रशासन ने दोहराया है कि सभी नागरिकों को कानून के दायरे में रहते हुए अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन किसी भी तरह की हिंसक या जबरन कार्रवाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। शक्ति प्रदर्शन: ‘दंड पूजन’ के बाद मैदान में उतरे दस्ते राजधानी में विरोध की लहर एक दिन पहले ही शुरू हो गई थी, जब संगठनों ने ‘दंड पूजन’ कर अपनी रणनीति साफ कर दी थी. निगरानी दस्ते: संस्कृति बचाओ मंच ने शहर के होटलों, मॉल्स और पार्कों पर नजर रखने के लिए 15 विशेष निगरानी दस्ते गठित किए हैं. संस्कृति का तर्क: संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि वे प्रेम के खिलाफ नहीं, बल्कि पाश्चात्य संस्कृति के नाम पर परोसी जा रही ‘अश्लीलता’ के विरुद्ध हैं. महाशिवरात्रि की अपील: युवाओं से अपील की गई है कि वे विदेशी त्योहार के बजाय अगले दिन आने वाली महाशिवरात्रि पर शिव-पार्वती की पूजा करें. प्रशासन अलर्ट: पुलिस का सख्त घेरा हंगामे की आशंका को देखते हुए भोपाल पुलिस ने चिनार पार्क और अन्य प्रमुख पर्यटन स्थलों पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया है. सुरक्षा चक्र: पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि किसी भी संगठन को कानून हाथ में लेने या हिंसक कार्रवाई करने की अनुमति नहीं दी जाएगी. होटलों को हिदायत: दक्षिणपंथी संगठनों ने होटल संचालकों को भी चेतावनी दी है कि वे वैलेंटाइन-डे पर किसी भी तरह का विशेष आयोजन न करें.

छात्रा के साथ दरिंदगी और ब्लैकमेल का मामला, मुंबई से आरोपी गिरफ्तार, इंदौर में सनसनी

इंदौर  मध्य प्रदेश के इंदौर के द्वारकापुरी थाना क्षेत्र में चार दिन से लापता एमबीए छात्रा की निर्मम हत्या के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। दुष्कर्म के बाद रस्सी से गला घोंटकर हत्या करने वाला फरार सहपाठी छात्र पीयूष धामनोदिया मुंबई से गिरफ्तार कर लिया गया है। आरोपी की लोकेशन ट्रेस होने के बाद मुंबई पुलिस की मदद से उसे पकड़ा गया। वहीं आरोपी के परिजन मंदसौर से इंदौर पहुंच चुके हैं, जिनके बयान आज पुलिस दर्ज करेगी। द्वारकापुरी थाना पुलिस की टीम आरोपी को ट्रांजिट रिमांड पर लेने मुंबई पहुंच गई है और देर शाम तक उसे इंदौर लाया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि आरोपी से पूछताछ के बाद हत्या की असली वजह और पूरी साजिश का खुलासा होगा। वहीं आज छात्रा का पोस्टमार्टम भी कराया जाएगा। पुलिस के अनुसार सांवेर रोड स्थित एक कॉलेज में एमबीए सेकेंड ईयर की पढ़ाई कर रही 24 साल की छात्रा 10 फरवरी की दोपहर घर से दस्तावेज अपडेट कराने का कहकर निकली थी। पिता उसे मोती तबेला फायर स्टेशन के पास छोड़कर लौट गए थे। शाम को छात्रा ने छोटी बहन को फोन कर बताया था कि वह द्वारकापुरी की अंकली गली में किराए से रहने वाले अपने सहपाठी पीयूष धामनोदिया के साथ एक दोस्त के जन्मदिन में जा रही है। रात में उसके मोबाइल से बहन को मैसेज आया कि वह घर नहीं आएगी। अगले दिन संपर्क नहीं होने पर 11 फरवरी को परिजनों ने पंढरीनाथ थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई थी। जांच के दौरान पुलिस को छात्रा का नग्न शव उसके घर से करीब आधा किलोमीटर दूर अंकली गली स्थित आरोपी के किराए के कमरे से मिला। शव को कंबल से ढंका गया था और कमरे पर बाहर से ताला लगा हुआ था। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि छात्रा की हत्या रस्सी से गला घोंटकर की गई। शव पर धारदार हथियार से हमले के निशान भी मिले हैं, जो दरिंदगी की कहानी बयान कर रहे हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत की सटीक परिस्थितियां स्पष्ट होंगी। लोकेशन मुंबई की मिलते ही भेजी फोटो, ऐसे पकड़ा गया आरोपी डीसीपी जोन-1 कृष्ण लालचंदानी ने बताया कि आरोपी की तलाश में पुलिस टीमें लगातार सक्रिय थीं। जांच में पता चला कि आरोपी मूल रूप से मंदसौर के कालाखेत रोड का निवासी है और उसके पिता की धानमंडी में किराना दुकान है। पूछताछ में छात्रा के परिजनों ने खुलासा किया कि कॉलेज के वाट्सएप ग्रुप पर छात्रा के मोबाइल से आपत्तिजनक वीडियो वायरल किए गए थे, जिनमें छात्रा का चेहरा स्पष्ट दिख रहा था जबकि युवक ने अपना चेहरा इमोजी से छिपा रखा था। परिजनों ने आरोप लगाया कि पीयूष वीडियो बनाकर छात्रा को ब्लैकमेल कर रहा था और उसके परिचितों को भी वीडियो भेज रहा था। मोबाइल टॉवर लोकेशन मुंबई मिलने पर तत्काल अंधेरी पुलिस स्टेशन को सूचना देकर आरोपी की फोटो भेजी गई, जिसके आधार पर मुंबई पुलिस ने उसे दबोच लिया। अब इंदौर पुलिस आरोपी को शहर लाकर गहन पूछताछ करेगी, जिससे पूरे घटनाक्रम की परतें खुलने की उम्मीद है।

आजमगढ़ शिया-सुन्नी दंगा केस अपडेट: 12 आरोपियों पर गिरे दोषी ठप्पे

आजमगढ़  यूपी के आजमगढ़ के मुबारकपुर कस्बे में 27 साल पूर्व शिया-सुन्नी दंगे के दौरान हुई युवक की हत्या के मुकदमे में सुनवाई पूरी करने के बाद कोर्ट ने 12 लोगों को दोषी करार दिया है। उनकी सजा 17 फरवरी को सुनाई जाएगी। यह फैसला जिला एवं सत्र न्यायाधीश जयप्रकाश पांडेय ने शुक्रवार को सुनाया। मामले में कुल 16 आरोपी थी। सुनवाई की अवधि के बीच चार की मौत हो गई। अभियोजन पक्ष के अनुसार, वादी मुकदमा नासिर हुसैन ने मुबारकपुर थाने में 30 अप्रैल 1999 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। तहरीर में नासिर हुसैन ने बताया कि उसके चाचा अली अकबर निवासी पूराख्वाजा 27 अप्रैल 1999 से लापता थे। अली अकबर के लड़के जैगम ने 28 अप्रैल को गुमशुदगी की सूचना थाने में दी थी। 30 अप्रैल को अली की सिर कटी लाश राजा भाट के पोखरे से बरामद की गई। पुलिस की विवेचना के दौरान यह पता चला कि मोहर्रम के जुलूस से लौटते समय अली अकबर की सुन्नी समुदाय के लोगों ने मारपीट कर हत्या कर दी थी। अभियोजन पक्ष की तरफ से डीजीसी फौजदारी प्रियदर्शी पीयूष त्रिपाठी और एडीजीसी दीपक कुमार मिश्रा ने कुल नौ गवाहों को कोर्ट में परीक्षित कराया। चार लोगों की मुकदमे के दौरान हो गई थी मौत दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद अदालत ने 12 लोगों को हत्या का दोषी करार दिया। अदालत ने सजा पर सुनवाई के लिए 17 फरवरी की तिथि निर्धारित की है। बता दें कि पुलिस ने कुल 14 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। बाद में दो और लोगों को न्यायालय ने बतौर मुलजिम तलब किया। इस तरह कुल 16 आरोपी हो गए थे। 16 आरोपियों में से हाजी मोहम्मद सुलेमान निवासी दुल्हनपुरा, नजीबुल्लाह निवासी पूरासोफी, हमीदुल्लाह उर्फ झीनक निवासी हैदराबाद और हाजी अब्दुल खालिक निवासी हैदराबाद की मुकदमे के दौरान मौत हो गई। सिर कटी लाश मिलने से भड़की थी हिंसा मुबारकपुर कस्बे में 30 अप्रैल 1999 को पूराख्वाजा निवासी अली अकबर की पोखरे में सिरकटी लाश मिलने के बाद शिया और सुन्नी समुदाय के बीच हिंसा भड़क गई थी। रुक-रुककर करीब 19 महीने तक मुबारकपुर सुलगता रहा। दोनों समुदायों के बीच विवाद की शुरुआत मोहर्रम के दिन हुई थी। मुबारकपुर कस्बे में मोहर्रम की नौवीं की रात जुलूस निकाला जा रहा था। कस्बे के पुरासोफी टुन्न स्थित शिया समुदाय के इमामबाड़ा के बगल में महिलाओं के बैठने के लिए पर्दा लगाया गया था। दसवीं के दिन सुबह किसी ने पर्दे में आग लगा दी। सुबह 11 बजे शिया समुदाय की तरफ से जुलूस निकाला जाना था। पर्दा जलाने की बात थोड़ी देर में ही कस्बे में फैल गई। जिसके बाद शिया समुदाय के लोगों ने जुलूस निकालने से मना कर दिया। 19 महीने तक सुलगता रहा मुबारकपुर, 17 ने गंवाई जान मामले की जानकारी होने के बाद प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंचा। अफसरों ने शिया समुदाय के लोगों को समझाकर जुलूस निकलवाना शुरू किया। दोपहर में कस्बे के भुतही पक्कड़ के पास जुलूस पर कुछ लोगों ने पत्थर और गर्म पानी फेंक दिया। जिसके बाद विवाद बढ़ता चला गया। पुलिस के रिकार्ड के मुताबिक, पूराख्वाजा निवासी अली अकबर की कर्बला जाते समय सुन्नी समुदाय के लोगों ने पीटने के साथ ही चाकू मारकर हत्या कर दी। इस घटना के बाद दोनों तरफ से लोग बवाल पर आमादा थे। प्रशासन की सख्ती और पुलिस की सूझबूझ के बाद किसी तरह बवाल टला, लेकिन दोनों समुदायों में अंदर ही अंदर चिंगारी भड़कती रही। जनवरी 2000 में यह चिंगारी फिर शोला बन गई। सुन्नी समुदाय के तीन लोग साड़ी का कारोबार कर वाराणसी से मुबारकपुर लौट रहे थे, तभी कस्बे के शाह मोहम्मदपुर मोहल्ले में तीनों लोगों की हत्या कर दी गई। इस घटना के बाद बवाल बढ़ने लगा। दोनों पक्षों के लोग एक बार फिर आमने-सामने आ गए थे, लेकिन प्रशासन की सख्ती के कारण बड़ी घटना टल गई। पुलिस ने ताबड़तोड़ कार्रवाई शुरू कर दी। जिसके बाद करीब नौ महीने तक कोई अप्रिय घटना नहीं हुई। हालांकि दोनों पक्षों के लोग ताक में बैठे थे। नवंबर 2000 में आखिर उन्हें मौका मिल ही गया। कस्बे में करीब दर्जनभर जगहों पर एक साथ सुनियोजित तरीके से बम ब्लास्ट हुए। जिसमें दोनों पक्षों से तेरह लोगों की मौत हो गई। फास्ट ट्रैक कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में कई लोगों को कर दिया था बरी सुन्नी समुदाय के बीच हुए दंगे में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने अगस्त 2023 में पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में 22 आरोपियों को बरी कर दिया था। मुकदमे के अनुसार, पांच नवंबर 2000 को मुबारकपुर कस्बे में वादी मुकदमा अजादर हुसैन शाम सात बजे अपनी दुकान में बैठा था। इस दौरान सुन्नी समुदाय के कई लोग धारदार हथियार लेकर पहुंचे। शिया समुदाय के खिलाफ नारा लगाते हुए व जान से मारने की धमकी देते हुए अजादार हुसैन की दुकान पर लूटपाट की। इस घटना में मुख्तार व मोहम्मद हुसैन घायल हो गए। पुलिस ने इस मामले में कुल 26 आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया। आरोपी खलीलुर्रहमान, फुरतुल ऐम, एहकसामुर्रहमान, नौशाद की मौत हो गई। कुल सात गवाहों को अदालत ने पेश किया गया था। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद 22 आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया था। पुलिस जांच में थे 14 आरोपी, बाद में हो गए 16 शिया-सुन्नी बवाल के दौरान युवक की हत्या के मुकदमे में तेरह आरोपियों के विरुद्ध चार्जशीट 22 जुलाई 1999 को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की कोर्ट में भेजी गई। जबकि एक आरोपी हुसैन अहमद के विरुद्ध 21 नवंबर 1999 को चार्जशीट न्यायालय में प्रेषित की गई। मुकदमे की फाइल 5 फरवरी 2002 को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने सत्र न्यायालय में भेज दी। सत्र न्यायालय ने सुनवाई करते हुए 24 जुलाई 2002 को मुकदमे में 14 आरोपियों पर आरोप तय किया। प्रारंभिक गवाहों के बयान के आधार पर 18 जनवरी 2005 को मुकदमे में दिलशाद तथा वसीम अहमद को धारा 319 सीआरपीसी के तहत आरोपी के तौर पर कोर्ट ने तलब किया। इन दोनों आरोपियों के विरुद्ध 31 जनवरी 2005 को आरोप तय किया गया। अदालत ने इन 12 लोगों को माना हिंसा का दोषी 1. हुसैन अहमद, हैदराबाद 2. मोहम्मद अयूब … Read more

गुनाह स्वीकारने के बाद निखिल गुप्ता को कितने साल की सजा? जानें US की मांग

न्यूयॉर्क खालिस्तानी आतंकवादी और अमेरिकी नागरिक गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की साजिश वाले मामले में एक बड़ा नाटकीय मोड़ आया है। इस मामले के मुख्य आरोपी 54 साल के भारतीय नागरिक निखिल गुप्ता ने शुक्रवार को अमेरिकी अदालत के समक्ष अपना गुनाह कबूल कर लिया है। यह कदम उनके पिछले रुख से बिल्कुल उलट है। जून 2024 में चेक गणराज्य से प्रत्यर्पण के बाद से वे लगातार खुद को निर्दोष बता रहे थे। निखिल गुप्ता ने अमेरिकी मजिस्ट्रेट जज सारा नेटबर्न के समक्ष तीन गंभीर आरोपों में अपना दोष स्वीकार किया है। उनके खिलाफ सुपारी देकर हत्या कराने, हत्या की साजिश रचने और मनी लॉन्ड्रिंग की साजिश रचने का आरोप है। उन्होंने इन तीनों में दोष कबूल कर लिया है। कानूनी विश्लेषकों का मानना है कि अभियोजकों द्वारा जुटाए गए पुख्ता सबूतों के कारण निखिल गुप्ता के पास अपना गुनाह कबूल करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था। इस मामले की सुनवाई 30 मार्च से शुरू होने वाली थी, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक संचार और वायरटैप की गई बातचीत पेश की जानी थी। इन रिकॉर्डिंग्स में कथित तौर पर निखिल गुप्ता को एक हिटमैन के साथ 1,00,000 डॉलर की सुपारी पर बातचीत करते हुए सुना गया था। अपना गुनाह कबूल करने के बाद अब निखिल गुप्ता एक हाई-प्रोफाइल ट्रायल से बच जाएंगे, जिसमें उन्हें अधिकतम 40 साल की सजा हो सकती थी। हालांकि सजा का अंतिम निर्णय न्यायाधीश के विवेक पर निर्भर करेगा, लेकिन अमेरिकी सरकार ने गुप्ता के लिए 21 से 24 साल की कैद की सिफारिश की है। सीनियर जिला जज विक्टर मरेरो आने वाले महीनों में सजा सुनाने के लिए औपचारिक सुनवाई की तारीख तय करेंगे। इस पूरी साजिश के केंद्र में भारत की खुफिया एजेंसी रॉ (RAW) के पूर्व अधिकारी विकास यादव का नाम भी उछला है। अमेरिकी अधिकारियों का आरोप है कि यादव ने ही पन्नू की हत्या के समन्वय के लिए गुप्ता को भर्ती किया था। साल 2024 के अंत में यादव के खिलाफ संघीय गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया था, लेकिन वे फिलहाल भारत में हैं। भारत सरकार ने पुष्टि की है कि विकास यादव अब सरकारी सेवा में नहीं हैं, लेकिन उनके प्रत्यर्पण को लेकर फिलहाल कोई सहमति नहीं जताई गई है। भारत की आंतरिक जांच समिति ने स्वीकार किया है कि उक्त अधिकारी के आपराधिक लिंक थे, लेकिन साथ ही स्पष्ट किया कि इसमें सरकार की कोई भूमिका नहीं थी। कौन है गुरपतवंत सिंह पन्नू? गुरपतवंत सिंह पन्नू ‘सिख फॉर जस्टिस’ (SFJ) नामक संगठन का जनरल काउंसल है, जो अमेरिका में सक्रिय है। हाल के महीनों में पन्नू ने भारत विरोधी गतिविधियों को तेज किया है, जिसमें अमेरिकी शहरों में खालिस्तान जनमत संग्रह आयोजित करना, एयर इंडिया के बहिष्कार के वीडियो जारी करना और भारत विरोधी हरकतों के लिए इनामों की घोषणा करना शामिल है। इन गतिविधियों के कारण भारत की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने पन्नू के खिलाफ आतंकवाद से संबंधित नए मामले दर्ज किए हैं।

आज होगा फैसला: T20 वर्ल्ड कप 2026 में कौन करेगा क्वालीफाई, किसका होगा एलिमिनेशन?

नई दिल्ली T20 World Cup 2026 super 8 scenario: भारत और श्रीलंका में खेले जा रहे आईसीसी मेंस टी20 वर्ल्ड कप 2026 को शुरू हुए 7 दिन बीत चुके हैं। 7 दिन में 21 मुकाबले खेले जा चुके हैं। हर दिन की तरह आज यानी शनिवार 14 फरवरी को भी 3 मैच होने हैं, लेकिन अभी तक एक भी टीम को सुपर 8 का टिकट नहीं मिला है और न ही कोई टीम टूर्नामेंट से आधिकारिक तौर पर एलिमिनेट हुई है। हालांकि, आज यानी 14 फरवरी को एक टीम एलिमिनेट हो जाएगी, जबकि एक टीम को सुपर 8 का टिकट मिल जाएगा। पूरा सिनेरियो क्या है? ये समझ लीजिए। दरअसल, आज यानी 14 फरवरी को 3 मुकाबले होने हैं, जिनमें एक मैच आयरलैंड वर्सेस ओमान, दूसरा मैच इंग्लैंड वर्सेस स्कॉटलैंड और तीसरा मैच न्यूजीलैंड वर्सेस साउथ अफ्रीका है। इनमें से एक मैच ऐसा है, जिसमें कोई भी टीम हारे वह टूर्नामेंट से एलिमिनेट हो जाएगी और उसके सुपर 8 में पहुंचने के सारे रास्ते बंद हो जाएंगे, जबकि एक मैच में जीतने वाली टीम सुपर 8 में अपनी जगह पक्की कर लेगी। पहले बात उस मैच की करते हैं, जो कि एलिमिनेटर की तरह है। ये मैच है आयरलैंड वर्सेस ओमान मैच, जो कोलंबो के एसएससी में खेला जाना है। इस मैच में जीतने वाली टीम सुपर 8 की रेस में बनी रहेगी, लेकिन सुपर 8 में पहुंचने के लिए उसे बहुत मेहनत करनी होगी और अन्य टीमों के नतीजों पर भी निर्भर रहना होगा, जबकि हारने वाली टीम का सफर समाप्त हो जाएगा। हालांकि, उसका एक मुकाबला बाकी रहेगा, जो वह अगले कुछ दिनों में खेलेगी। ये दोनों टीमें ग्रुप बी में हैं और पॉइंट्स टेबल में सबसे आखिरी पायदानों पर विराजमान हैं। इस मैच की विजेता टीम टूर्नामेंट में जीवित रहेगी, लेकिन हारने वाली टीम इस ग्रुप में किसी भी स्थिति में टॉप 2 में नहीं जा पाएगी और एलिमिनेट हो जाएगी, क्योंकि हारने वाली टीम ज्यादा से ज्यादा 2 अंकों तक पहुंच सकती है और इस ग्रुप में पहले से ही दो टीमों के 4-4 अंक हो गए हैं। ऐसे में यह मैच खास होगा। वहीं, अगर बात करें कि सुपर 8 में कौन सी टीम आज पहुंच सकती है तो इनमें साउथ अफ्रीका और न्यूजीलैंड का नाम शामिल है। ग्रुप डी में ये टीमें हैं। दोनों टीमें 2-2 मैच जीत चुकी हैं। एक और मैच जीतकर टीम के खाते में 6 पॉइंट हो जाएंगे और ग्रुप की हालत और टीमों को देखें तो साफ पता चलता है कि 6 अंकों से क्वालिफिकेशन पक्की है, लेकिन आधिकारिक पुष्टि शायद न हो, क्योंकि 6 या इससे ज्यादा अंक इस ग्रुप में इन दोनों टीमों के अलावा यूएई भी हासिल कर सकती है।

कलेक्टर की बैठक में हड़ताल समाप्त का किया ऐलान, पटवारी-आरआई 15 दिन बाद काम पर लौटे

मुंगेली. जिले के लोरमी तहसील में पिछले 15 दिनों से चल रहा पटवारी, राजस्व निरीक्षक (आरआई) और तहसीलदार के बीच का गतिरोध आखिरकार समाप्त हो गया है। कलेक्टर के मार्गदर्शन और हस्तक्षेप के बाद उनके निर्देशन में प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ के अधिकारियों तथा पटवारी-आरआई संगठनों के बीच बैठक आयोजित की, जिसमें आपसी सामंजस्य से समाधान निकाल लिया गया। इसके बाद हड़ताली पटवारी और राजस्व निरीक्षक अपने-अपने कार्य पर लौट आए। दरअसल, पटवारी और राजस्व निरीक्षक संघ ने लोरमी तहसील में पदस्थ तहसीलदार शेखर पटेल को हटाने की मांग को लेकर मोर्चा खोल दिया था। हड़ताली कर्मचारियों का आरोप था कि तहसीलदार द्वारा कार्य के दौरान अनावश्यक दबाव और प्रताड़ना दी जा रही है। इसी मुद्दे को लेकर 29 जनवरी से लोरमी तहसील के पटवारी और आरआई अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए थे। मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब तीन दिनों के लिए जिला पटवारी–आरआई संघ ने भी समर्थन दे दिया। वहीं कनिष्ठ प्रशासनिक सेवा संघ (नायब तहसीलदार एवं तहसीलदार) ने तहसीलदार शेखर पटेल को हटाने की स्थिति में जोरदार विरोध दर्ज कराने की बात कही थी। संघ पदाधिकारियों ने कलेक्टर से मुलाकात कर अपनी नाराजगी और मांगें रखी थीं। लगातार बढ़ते गतिरोध और प्रशासनिक कार्य प्रभावित होने की स्थिति को देखते हुए कलेक्टर को हस्तक्षेप करना पड़ा। वहीं कलेक्टर द्वारा बुलाई गई बैठक में सभी पक्षों को विस्तार से सुना गया। बैठक में आपसी संवाद, संयम और प्रशासनिक मर्यादा बनाए रखते हुए कार्य करने पर सहमति बनी। कलेक्टर ने आश्वासन दिया कि कर्मचारियों की जो भी जायज मांगें या शिकायतें हैं, उन पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। साथ ही सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को समन्वय बनाकर कार्य करने के निर्देश दिए गए। इससे पहले उन्होंने मीटिंग में राजस्व प्रकरणों के मामलों का तेजी से निपटारा करने के निर्देश दिए, साथ ही शासन एवं जिला प्रशासन के प्राथमिकता वाले कार्यों को शीघ्र पूर्ण करने के भी निर्देश दिए।

आज की आवश्यकता है कि अधिक से अधिक युवाओं को भविष्य उन्मुख तकनीकों में प्रशिक्षित किया जाएः मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

उत्तर प्रदेश इमर्जिंग टेक्नोलॉजी और नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था की ओर अग्रसरः मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सीएम योगी ने स्किल डेवलपमेंट, स्टार्टअप, डेटा सेंटर और रोजगार सृजन पर विस्तार से रखा पक्ष एआई, डिजिटल टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर, डेटा साइंस, रोबोटिक्स, ड्रोन टेक्नोलॉजी और स्पेस टेक्नोलॉजी जैसे उभरते क्षेत्रों में नए सेंटर स्थापित किएः मुख्यमंत्री  आज की आवश्यकता है कि अधिक से अधिक युवाओं को भविष्य उन्मुख तकनीकों में प्रशिक्षित किया जाएः मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ  लखनऊ उत्तर प्रदेश विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य सरकार की नीतियों, उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं पर विस्तृत वक्तव्य दिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार युवाओं को कौशल, तकनीक और उद्यमिता से जोड़कर उत्तर प्रदेश को इमर्जिंग टेक्नोलॉजी और नवाचार आधारित अर्थव्यवस्था की ओर अग्रसर कर रही है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि स्किल डेवलपमेंट और आईटीआई व्यावसायिक शिक्षा के अंतर्गत आते हैं। सरकार ने व्यावसायिक शिक्षा के ढांचे को आधुनिक तकनीकों से जोड़ते हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल टेक्नोलॉजी, सेमीकंडक्टर, डेटा साइंस, रोबोटिक्स, ड्रोन टेक्नोलॉजी और स्पेस टेक्नोलॉजी जैसे उभरते क्षेत्रों में नए सेंटर स्थापित किए हैं। उन्होंने बताया कि टाटा टेक्नोलॉजी के सहयोग से प्रत्येक जनपद के दो आईटीआई को इमर्जिंग टेक्नोलॉजी से जोड़ा जा रहा है। इन संस्थानों को ‘हब एंड स्पोक मॉडल’ पर विकसित किया जा रहा है, ताकि एक केंद्रीय संस्थान से जुड़े अन्य संस्थानों को तकनीकी संसाधन और प्रशिक्षण सहायता मिल सके। उन्होंने कहा कि आज की आवश्यकता है कि अधिक से अधिक युवाओं को भविष्य उन्मुख तकनीकों में प्रशिक्षित किया जाए। इमर्जिंग टेक्नोलॉजी आधारित कोर्स से युवाओं को जोड़ा गया मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के माध्यम से स्किल डेवलपमेंट और तकनीकी उन्नयन को नई दिशा मिली है। तकनीकी शिक्षा विभाग ने इस दिशा में कदम बढ़ाते हुए पाठ्यक्रमों को आधुनिक बनाया है। माध्यमिक शिक्षा के तहत प्रत्येक जनपद के राजकीय कॉलेजों को इमर्जिंग टेक्नोलॉजी आधारित कोर्स से जोड़ा जा रहा है। विद्यार्थियों को डेटा उपयोग, इंटरनेट सुविधा और डिजिटल संसाधनों से सशक्त करने की प्रक्रिया जारी है। मुख्यमंत्री ने सीएम युवा उद्यमी योजना का उल्लेख करते हुए बताया कि अब तक 1,10,000 युवाओं को 10 प्रतिशत मार्जिन मनी के साथ ब्याज-मुक्त और गारंटी-मुक्त ऋण उपलब्ध कराया जा चुका है। उन्होंने कहा कि योजना में चयन और प्रशिक्षण को अनिवार्य बनाया गया है, ताकि युवा सफल उद्यमी बन सकें। उन्होंने महिला उद्यमियों के लिए भी विशेष योजना लागू करने की बात कही गई। साथ ही स्वामी विवेकानंद युवा सशक्तिकरण योजना के माध्यम से युवाओं के डिजिटल सशक्तिकरण पर भी जोर दिया जा रहा है। स्टार्टअप और निवेश में वृद्धि मुख्यमंत्री ने कहा कि स्किल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया और स्टैंडअप इंडिया जैसी पहलों को प्रदेश में प्रभावी रूप से लागू किया गया है। वर्तमान में उत्तर प्रदेश में 20,000 से अधिक स्टार्टअप सक्रिय हैं। 76 इनक्यूबेटर, 7 सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और 8 यूनिकॉर्न राज्य में कार्यरत हैं। उन्होंने कहा कि पहले प्रदेश से पलायन रोजगार के अभाव और कानून-व्यवस्था की स्थिति के कारण होता था। अब कानून-व्यवस्था में सुधार और निवेश अनुकूल वातावरण के चलते रोजगार के अवसर बढ़े हैं और निवेश में वृद्धि हुई है। डेटा सेंटर और एआई पर फोकस मुख्यमंत्री ने बजट में घोषित यूपी डेटा अथॉरिटी और डेटा सेंटर क्लस्टर की स्थापना को भविष्य की जरूरत बताया। उनका कहना था कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए डेटा सेंटर बुनियादी ढांचा आवश्यक है और उत्तर प्रदेश इस दिशा में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल है। इमर्जिंग टेक्नोलॉजी की फैब यूनिट स्थापना का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह प्रदेश के औद्योगिक विकास की नई दिशा का संकेत है। बेरोजगारी दर 19 से 2.24 प्रतिशत पर आई मुख्यमंत्री ने दावा किया कि पिछली सरकार के समय लगभग 19 प्रतिशत रही बेरोजगारी दर अब घटकर 2.24 प्रतिशत रह गई है। उन्होंने इसे नीतिगत सुधार, निवेश वृद्धि और कानून-व्यवस्था में सुधार का परिणाम बताया। अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर भी निशाना साधते हुए कहा कि विकास कार्यों को लेकर अविश्वास की स्थिति उसी मानसिकता को दर्शाती है, जो सीमित दृष्टिकोण से बाहर नहीं निकल पाती। उन्होंने कहा कि प्रदेश ने पिछले वर्षों में व्यापक परिवर्तन देखा है और सरकार विकास, निवेश और रोजगार सृजन की दिशा में प्रतिबद्ध है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश को तकनीक, नवाचार और युवा शक्ति के माध्यम से देश की अग्रणी अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य लेकर सरकार आगे बढ़ रही है।

सीएम योगी ने कहा, उत्तर प्रदेश अब भय का नहीं, विश्वास और विकास का प्रदेश है

उत्तर प्रदेश ने तय की है अपराध व अव्यवस्था से अनुशासन और कर्फ्यू से कानून के राज की यात्राः मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश की उपलब्धियों, नीतिगत बदलावों और भविष्य की दिशा का व्यापक खाका प्रस्तुत किया सीएम योगी ने कहा, उत्तर प्रदेश अब भय का नहीं, विश्वास और विकास का प्रदेश है अपराध व अव्यवस्था से अनुशासन की यात्रा केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि मानसिकता और नीतिगत प्रतिबद्धता का परिणामः मुख्यमंत्री राजनीतिक मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा, लेकिन संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा बनाए रखना सभी की जिम्मेदारीः सीएम योगी लखनऊ  राज्यपाल के अभिभाषण पर शुक्रवार को विधानसभा में धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पिछले नौ वर्षों की यात्रा अपराध और अव्यवस्था से अनुशासन की यात्रा है। कर्फ्यू से कानून के राज की यात्रा है। उपद्रव से उत्सव की यात्रा है। समस्या से समाधान की यात्रा है और अविश्वास से आत्मविश्वास की यात्रा है। अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश की उपलब्धियों, नीतिगत बदलावों और भविष्य की दिशा का व्यापक खाका प्रस्तुत किया। मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि उत्तर प्रदेश अब भय का नहीं, विश्वास और विकास का प्रदेश है। अपराध और अव्यवस्था से अनुशासन की यात्रा केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि मानसिकता और नीतिगत प्रतिबद्धता का परिणाम है। राजनीतिक मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है।  विपक्ष का आचरण संवैधानिक प्रमुख और मातृशक्ति का अपमान मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष की शुरुआत में राज्यपाल का अभिभाषण सरकार की उपलब्धियों और भावी योजनाओं का आधिकारिक दस्तावेज होता है। इस दौरान विपक्षी दलों के सदस्यों का सदन में आचरण अनुचित था। नेता प्रतिपक्ष पर सवाल खड़े हुए करते हुए सीएम ने कहा कि संभवतः इसीलिए आप सदन में उपस्थित नहीं हुए, क्योंकि समाजवादी पार्टी के सदस्य आपके नियंत्रण से बाहर रहे होंगे। यही वह आचरण था, जिससे बिटिया घबराती थी और व्यापारी कारोबार समेटता था। मुख्यमंत्री ने विपक्ष को आड़े हाथ लेते हुए गालिब का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि गालिब ने कहा था ‘उम्र भर मैं ये भूल करता रहा, धूल चेहरे पर थी और आईना साफ करता रहा।’ समाजवादी पार्टी के और मुख्य विपक्षी दलों के इस आचरण के कारण पूरा सदन अपने आप को आहत महसूस कर रहा था।  ‘परसेप्शन’ और कानून-व्यवस्था पर जोर मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की छवि अचानक खराब नहीं हुई थी, बल्कि वर्षों तक चले अव्यवस्थित आचरण और अपराध के वातावरण ने उसे प्रभावित किया था। बेटियां भयभीत थीं, व्यापारी अपना कारोबार समेटने को मजबूर थे और दंगे-कर्फ्यू आम बात थे। 2017 के बाद से प्रदेश में “जीरो टॉलरेंस” नीति लागू की गई है। 2017 से पहले नीतिगत उदासीनता और प्रशासनिक शिथिलता का माहौल था, जबकि अब कानून का राज स्थापित हुआ है। 2017 के बाद से कोई सांप्रदायिक दंगा नहीं हुआ है और प्रदेश में भयमुक्त वातावरण बना है। समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंच रहा विकास का लाभ राज्यपाल के अभिभाषण का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि “डबल इंजन सरकार” के प्रयासों से 6 करोड़ से अधिक लोगों को बहुआयामी गरीबी से बाहर निकाला गया है। यह आंकड़ा नीति आयोग के अनुसार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि गरीबी से बाहर आने का अर्थ यह नहीं कि लाभार्थियों को अन्य योजनाओं से वंचित किया जाएगा। राशन, स्वास्थ्य, आवास, पेंशन और अन्य सुविधाएं जारी रहेंगी। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत हर गरीब को पक्का घर उपलब्ध कराया जा रहा है। आयुष्मान भारत योजना के अंतर्गत 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा दिया जा रहा है। निःशुल्क राशन की व्यवस्था जारी है। वृद्ध, निराश्रित और दिव्यांगजन को 12,000 रुपये वार्षिक पेंशन दी जा रही है। इन योजनाओं का उद्देश्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाना है। पुलिस सुधार और आधुनिक सुरक्षा तंत्र मुख्यमंत्री ने कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए किए गए सुधारों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि पुलिस बल में बड़े पैमाने पर भर्ती की गई है। पुलिस बल में महिलाओं की संख्या 10,000 से बढ़कर आज 44,000 हो गई है। 2017 से पहले हमारी प्रशिक्षण क्षमता 3,000 भी नहीं थी। आज यह स्थिति है कि हाल में 60,200 से अधिक पुलिस भर्ती की गईं, जिसके सभी चयनितों को प्रदेश में ही ट्रेनिंग दी जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि साइबर अपराध से निपटने के लिए सभी 75 जिलों में साइबर थाने की स्थापना के साथ-साथ प्रदेश के हर थाने में साइबर हेल्प डेस्क स्थापित की गई है। फॉरेंसिक साइंस इकोसिस्टम को मजबूत किया गया है, जिससे जांच प्रक्रिया अधिक वैज्ञानिक और प्रभावी हुई है। बीमारू से विकास की ओर बढ़ता उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश अब “बीमारू राज्य” की छवि से बाहर निकल चुका है। पहली बार आर्थिक सर्वेक्षण को सदन में व्यवस्थित रूप से प्रस्तुत किया गया, जो “विचार से व्यवस्था और व्यवस्था से विकास” की यात्रा का प्रतीक है। उन्होंने इसे अविश्वास से आत्मविश्वास की ओर बढ़ता प्रदेश बताया, जहां पहले उपद्रव की खबरें सुर्खियां बनती थीं, अब निवेश, इन्फ्रास्ट्रक्चर और सामाजिक कल्याण की खबरें प्रमुखता पा रही हैं।  उत्तर प्रदेश आज ट्रिपल-टी की त्रिवेणी बनकर उभरा मुख्यमंत्री ने कहा कि लगभग 9 वर्ष की जो यात्रा है, ये अपराध और अव्यवस्था से अनुशासन की यात्रा है, कर्फ्यू से कानून के राज की यात्रा है, उपद्रव से उत्सव की यात्रा है, समस्या से समाधान की यात्रा है और अविश्वास से आत्मविश्वास की यात्रा है। यानी ये यात्रा केवल एक सत्ता प्राप्त करने की होड़ नहीं है, इसको प्राप्त करने के लिए सरकार की स्पष्ट नीति थी, साफ नीयत थी, दृढ़ इच्छाशक्ति थी और सुशासन के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए हम लोगों ने जब सामूहिक रूप से प्रयास किया, हर व्यक्ति के मन में विश्वास भरा,  हां यूपी भी कर सकता है, यूपी से भी परिणाम दिए जा सकते हैं और वही आज उत्तर प्रदेश के अंदर देखने को मिल रहा है। आज उत्तर प्रदेश बीमारू राज्य नहीं है, आज यह ट्रिपल-टी का एक प्रतीक बना है। ट्रिपल टी मतलब टेक्नोलॉजी, ट्र्स्ट और ट्रांसफॉर्मेशन। यानी एक त्रिवेणी बनकर के उभरा है।  2017 के पहले केंद्र सरकार की योजनाओं का बॉटलनेक था उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री … Read more

कोलार में अड़ीबाजी का आरोपी आखिरकार हिरासत में, पांच हजार रुपए का इनाम था घोषित

कोलार में अड़ीबाजी के मामले में फरार आरोपी गिरफ्तार, घोषित किया गया था पांच हजार का इनाम भोपाल कोलार पुलिस ने मारपीट और अड़ीबाजी के मामले में तीन महीने से फरार चल रहे दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपियों की गिरफ्तारी पर पांच हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था।  जानकारी के अनुसार फरियादी दौलत सिंह धाकड़ (22) पिछले साल नवंबर महीने में सुबह करीब चार बजे अपने एक दोस्त को छोडऩे के लिए प्रियंका नगर कोलार रोड गया था। वापस लौटते समय वंश मेहरा और उसके दो साथियों ने रोक लिया और पूछने लगे कि यहां क्यों आए थे। दौलत ने बताया कि वह अपने दोस्त को छोडऩे आया था। इसके बाद उन्होंने शराब पीने के लिए पांच सौ रुपये की मांग की। दौलत ने जब उन्हें रुपये देने से मना किया तो उन्होंने गाली-गलौज करते हुए उसके साथ बेल्ट से मारपीट कर दी। पुलिस ने इस मामले में आरोपियों के खिलाफ मारपीट और अड़ीबाजी का मामला दर्ज किया था। पुलिस ने इस मामले में आरोपी वंश मेहरा को उसी समय गिरफ्तार कर लिया था, जबकि दो आरोपी भाग निकले थे। आरोपियों की गिरफ्तारी पर पांच हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था, जिसके बाद से एक विशेष टीम आरोपियों की तलाश में लगाई गई थी। शुक्रवार को पुलिस ने फरार आरोपी राज पथरोड़ निवासी प्रियंका नगर और शैलेंद्र सेन निवासी गरीब नगर कोलार रोड को गिरफ्तार कर लिया है।  पत्थर से हमला कर मोबाइल लूटने वाले शातिर बदमाश गिरफ्तार,आधी रात को गणेश मंदिर बस स्टाप पर हुई वारदात  पुलिस ने चंद घंटों के भीतर 2 आरोपियों को दबोचा  भोपाल। हबीबगंज इलाके में एक युवक पर पत्थर से हमला कर मोबाइल फोन लूटने वाले 2 शातिर बदमाशों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। यह घटना आधी रात को गणेश मंदिर बस स्टॉप पर उस वक्त हुई, जब फरियादी बाइक से उतरकर पैदल अपने घर लौट थे। सूचना मिलते ही पुलिस ने इलाके में लगे करीब 100 सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगालने के बाद आरोपियों को दबोच लिया। जानकारी के अनुसार अशोक कुमार तिवारी (41) ई-2 अरेरा कॉलोनी में रहते हैं। गुरुवार की रात वह अपने दोस्त और होटल मालिक अखंड मिश्रा के साथ उनकी बाइक पर बैठकर ग्यारह मील मिसरोद से अपने घर लौट रहे थे। रात करीब बारह बजे अंखड ने उन्हें गणेश मंदिर बस स्टॉप पर उतारा और अपने घर से लिए निकल गए।बाइक से उतरने के बाद अशोक कुमार पैदल-पैदल अपने घर के लिए जाने लगे। इसी दौरान दो लड़के उनके पास पहुंचे और बगैर किसी बात के गाली-गलौज करने लगे। अशोक उनकी बातों को अनसुना करते हुए आगे बढ़े, तभी एक युवक ने झपट्टा मारकर उनके हाथ से मोबाइल फोन छीनने लगा।अशोक ने जब इसका विरोद किया तो उसके साथी ने पत्थर उठाकर उनके सिर पर हमला कर दिया, जिससे उन्हें गंभीर चोट आई। उसके बाद दोनों बदमाश मोबाइल फोन छीनकर भाग निकले। पुलिस ने इस मामले में अज्ञात बदमाशों के खिलाफ मारपीट और लूटपाट का मामला दर्ज किया था।सीसीटीवी कैमरों से मिला सुराग मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपियों की तलाश में पुलिस की एक विशेष टीम बनाई गई थी। टीम ने इलाके में लगे करीब 100 सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले और बदमाशों की पहचान के प्रयास किए। इसी दौरान मुखबिर से सूचना मिली कि रात को समय मोबाइल लूटने वाले दो संदेही गणेश मंदिर के पास देखा गया है। सूचना के बाद पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर उन्हें दबोच लिया। पूछताछ करने पर दोनों ने अपने नाम गोलू सनी एंथोनी (33) निवासी मद्रासी कालोनी टीटी नगर और राज विशेष उर्फ बिट्टू (24) निवासी रोहित नगर बावडिय़ा कला शाहपुरा बताया। आरोपी गोलू के खिलाफ टीटी नगर में आठ और राज के खिलाफ मिसरोद थाने में तीन अपराध पहले से दर्ज हैं।  पैसों की चाहत के चलते दिया वारदात को अंजाम  पूछताछ के दौरान आरोपियों ने बताया कि दोनों रात के समय तफरी करने के लिए निकले थे। इसी दौरान उनके मन में पैसे कमाने की लालसा हुई तो उन्होंने पैदल जा रहे व्यक्ति के साथ मारपीट कर मोबाइल फोन लूट लिया। वारदात को बाद बदमाशों ने लूटा गया मोबाइल रेलवे पटरी के पास लोहे के पाइप के अंदर छिपा दिया और उसके बाद अपने घर चले गए। पुलिस ने मोबाइल फोन जब्त कर लिया है। इनकी रही सराहनीय भूमिका लूटपाट की घटना का खुलासा और आरोपियों को गिरफ्तार करने में थाना प्रभारी संजय चौकसे, एसआई अजय दुबे, अखिलेश त्रिपाठी, शिवभानु सिंह, हेड कांस्टेबल राघवेन्द्र भास्कर, राजकुमार साहू, आरक्षक रामनरेश किरार, कंचन यादव, राकेश भारद्वाज, अरविन्द यादव, नीमेश लोट, अभिषेक मालवीय, पुष्पेन्द्र भदौरिया और शिवशंकर की सराहनीय भूमिका रही है।

एराज मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में पेशेंट सेफ्टी को लेकर जागरूकता कार्यक्रम संपन्न

एराज मेडिकल कालेज एण्ड हॉस्पिटल में हुआ पेशेंट सेफ्टी  कॉन्क्लेव-2026 । विशेषज्ञों ने कहा कि “एआई हर मर्ज की दवा नहीं हो सकता”  लखनऊ   एराज मेडिकल कालेज एण्ड हॉस्पिटल में संपन्न हो रहे पेशेंट सेफ्टी कॉन्क्लेव-2026 में विशेषज्ञों ने एक मत से माना कि “एआई हर मर्ज की दवा नहीं हो सकता” दो दिनों तक चलने वाले पेशेंट सेफ्टी कॉन्क्लेव-2026 में उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय सैफई के कुलपति प्रो. अजय सिंह ने बताया कि मरीज की सुरक्षा (पेशेंट सेफ्टी) किसी एक चिकित्सक या स्टाफ की जिम्मेदारी नहीं यह एक टीम वर्क है। चिकित्सीय पेशे में त्रुटि (कॉम्लीकेशन) और गलती (एरर) में अंतर होता है। उन्होंने कहा कि मरीज की सुरक्षा में होने वाली 50 फीसद से ज्यादा गलतियों को रोका जा सकता है साथ ही एआई (आर्टिफिशियन इंटेलिजेंस) हर मर्ज की दवा नहीं हो सकती हालांकि पेशेंट सेफ्टी में एआई मददगार बन सकता है इलाज के दौरान होने वाली गलतियों को AI पूरी तरह से रोक नहीं सकता इसके लिए लगातार सीखने की जरूरत है। मुख्य अतिथि प्रो. अजय एराज लखनऊ मेडिकल कालेज एण्ड हॉस्पिटल में आयोजित पेशेंट सेफ्टी कॉन्क्लेव-2026 में  उन्होंने बताया कि जब भी बात होती है तो बड़े अस्पतालों या चिकित्सा संस्थानों को लेकर ही योजनाएं बनाई जाती हैं। पीएचसी और सीएचसी पर भी ध्यान देने की जरूरत है। वहां गलतियों की संभावना अधिक है जो मरीज के लिए साबित होती हैं। प्रो. अजय ने बताया कि अगर किसी प्रोसीजर में डाक्टर से गलती हो जाए तो उसे सुधारे न कि गलती करने वाले का नाम सार्वजनिक करें। ऐसा करना डाक्टर के प्रति मरीज के मन में विश्वास को कम करता है। उन्होंने सलाह दी कि मरीज की सुरक्षा के प्रति बने मानकों के बारे में युवा डाक्टरों को लगातार प्रशिक्षित करें। उन्हें उन बिन्दुओं पर सीखाएं जहां चूक की संभावना अधिक होती है। कार्यक्रम में आए इंडियन इंस्टीटयूट ऑफ क्वालिटी मैनेजमेंट के निदेशक डॉक्टर गिरधन ज्ञानी ने बताया कि आज कई चिकित्सा संस्थानों और अस्पतालों में पेशेंट सेफ्टी पर कोई बात ही नहीं करता। इसी का कारण है कि गड़बडिय़ों की संभावना लगातार बनी रहती है। करीब 60 प्रतिशत गलतियों मानवीय चूक के कारण होती हैं। इनको रोकने के लिए सबसे बेहतर तरीका मॉनीटरिंग बढ़ाना है। चाहे आईसीयू हो, ओटी हो, ओपीडी या वार्ड निगरनी तंत्र मजबूत होने से गलतियां कम होंगी। इस अवसर पर एराज मेडिकल कालेज के लिए तैयार पेशेंट सेफ्टी सिवोनियर और पेशेंट सेफ्टी फ्लायर का लोकार्पण भी किया गया।  काम में गलती हो तो सुधारें जरूर: वीसी एरा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अब्बास अली महदी ने बताया कि काम करने पर गलतियां होने की संभावना हमेशा बनी रहती है। अगर गलती हो तो उसे समझें। गलती से सीखें और उसे सुधारें जरूर तभी मरीज की जान बचाना आसान होगी। उन्होंने युवा चिकित्सकों और स्टाफ को सलाह दी कि गलती हो जाए तो उसे स्वीकार करें और सुधारने की कोशिश करें। गलती को अनदेखा न करें क्योंकि चिकित्सीय पेशे में एक ही गलती को बार बार दोहराना उचित नहीं है। कार्यक्रम में एरा यूनिवर्सिटी की प्रो-वीसी प्रोफेसर फरजाना महदी ने कहा कि गलतियों को कम करने के लिए तकनीक का इस्तेमाल करें। तकनीक का प्रयोग तेजी से बढ़ रहा है और इसका लाभ मरीजों को मिले इसके लिए जरूरी है कि डाक्टर नई तकनीक को हमेशा सीखते रहें।  पेशेंट सेफ्टी कॉन्क्लेव में विशेषज्ञों ने दी सलाह  – डॉ. नीलिमा क्षीरसागर ने कहा कि ‘उचित दवा लेखन कौशल ही रोगी सुरक्षा की नींव है।’ दवा देने के साथ ही मरीज की शंकाओं का समाधान जरूरी करें।  – डॉ. बिकाश मेधी ने कहा कि कम्युनिकेशन स्किल पर ध्यान दें। भाषा सबंधी गलतियों से भी मेडिकेशन एरर हो सकती है जिसका खामियाजा मरीज को भुगतना पड़ता है।  – डॉ. बनानी पोद्दार ने कहा कि मरीज के अनुसार मानक बदल जाते हैं। गर्भवती महिला और साठ साल के बुजुर्ग को एक ही बीमारी में समान दवा नहीं दी जा सकती। उनकी दवाएं अलग-अलग होंगी।

इंडस्ट्री फर्स्ट और इन्वेस्टर फर्स्ट दृष्टिकोण से यूपी आज वैश्विक निवेशकों का आकर्षक गंतव्य

प्रदेश अब ट्रस्ट, ट्रांसफॉर्मेशन और टाइमली डिलीवरी का मॉडल, यही नए यूपी की पहचानः योगी सरकार ने ट्रिपल एस, यानी सिक्योरिटी, स्टेबिलिटी और स्पीड की गारंटी दी हैः सीएम इंडस्ट्री फर्स्ट और इन्वेस्टर फर्स्ट दृष्टिकोण से यूपी आज वैश्विक निवेशकों का आकर्षक गंतव्य     लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में कहा कि उत्तर प्रदेश अब ट्रस्ट, ट्रांसफॉर्मेशन और टाइमली डिलीवरी का मॉडल है, यही नए यूपी की पहचान है। प्रदेश के एमएसएमई सेक्टर की प्रगति बताते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान में प्रदेश में 96 लाख एमएसएमई यूनिटें संचालित हो रही हैं। इन यूनिटों में 3 करोड़ 11 लाख से अधिक लोग रोजगार प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि कृषि के बाद एमएसएमई क्षेत्र ही प्रदेश में सबसे अधिक रोजगार प्रदान करने वाला सेक्टर है। हालांकि, समाजवादी पार्टी की पूर्व सरकार के दौरान यह क्षेत्र लगभग मृतप्राय हो चुका था। उस समय सरकार के पास न कोई स्पष्ट विजन था, न ही टेक्नोलॉजी की समझ और न ही मजबूत इच्छाशक्ति। उद्यमियों को सरकारी सहयोग के बजाय इंस्पेक्टर राज का सामना करना पड़ता था। पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड या अन्य विभागों के अधिकारी अक्सर उन्हें परेशान करते थे।  योगी ने कहा कि वर्तमान सरकार ने इन समस्याओं को जड़ से समाप्त कर दिया। उद्यमियों को 1000 दिनों तक किसी भी एमएसएमई यूनिट स्थापित करने के लिए कोई एनओसी की आवश्यकता नहीं है। इस छूट नीति के परिणामस्वरूप आज प्रदेश में 96 लाख यूनिटें सक्रिय हैं और करोड़ों लोग रोजगार पा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने इसे ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ का जीता-जागता उदाहरण बताया, जिसने उत्तर प्रदेश को देश की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में स्थापित कर दिया है। नागरिकों को सुरक्षा देना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी कानून-व्यवस्था पर उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में आज रूल ऑफ लॉ ही सुरक्षा और विकास की सबसे बड़ी गारंटी है। हर नागरिक को सुरक्षा प्रदान करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कड़े शब्दों में चेतावनी दी कि कानून-व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों को उसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। प्रदेश के 25 करोड़ लोगों के भविष्य के साथ किसी को भी छेड़छाड़ की इजाजत नहीं दी जाएगी। सीएम ने कहा कि मजबूत कानून-व्यवस्था के कारण ही आज प्रदेश में उत्कृष्ट इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित हो रहा है। एक्सप्रेसवे का जाल बिछ चुका है, एयर कनेक्टिविटी में तेजी आई है।  उन्होंने बताया कि 22 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मेरठ-दिल्ली रैपिड रेल का उद्घाटन करेंगे। पहले मेरठ से दिल्ली जाने में 3-4 घंटे लगते थे, लेकिन अब 12 लेन हाईवे और रैपिड रेल से यह दूरी मात्र 45 मिनट में तय हो सकेगी। मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि पूर्व सरकारें दूरी बढ़ाने में माहिर थीं, न केवल भौगोलिक दूरी, बल्कि जाति-जाति और भाई-भाई के बीच खाई को चौड़ा करने का काम भी किया गया। पॉलिसी पैरालिसिस से निकलकर पॉलिसी स्टेबिलिटी की राह पर उन्होंने कहा कि असीम संभावनाओं के बावजूद उत्तर प्रदेश पहले निवेश से वंचित रहता था। आज फियरलेस गवर्नेंस और ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस इसकी नई पहचान है। सरकार ने ट्रिपल एस, यानी सिक्योरिटी, स्टेबिलिटी और स्पीड की गारंटी दी है। सुरक्षा का माहौल, शासन में स्थिरता और विकास में गति, ये तीनों आज उत्तर प्रदेश की ताकत हैं। प्रदेश पॉलिसी पैरालिसिस से निकलकर पॉलिसी स्टेबिलिटी की राह पर है। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में 34 से अधिक सेक्टोरल पॉलिसी लागू हैं। निवेश मित्र, निवेश सारथी और उद्यमी मित्र जैसे प्लेटफॉर्म निवेशकों को सुगम, पारदर्शी और विश्वसनीय वातावरण प्रदान कर रहे हैं। पहले ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस रैंकिंग में यूपी 14वें स्थान पर था, लेकिन आज यह टॉप अचीवर राज्यों में शामिल है। उत्तर प्रदेश ने सभी व्यापार सुधार मानकों को 100% लागू कर देश का पहला राज्य बनने का गौरव प्राप्त किया। डीरिग्युलेशन में नंबर-वन और 23 प्रमुख सुधारों को पूर्ण रूप से लागू किया गया। डिक्रिमिनलाइजेशन के तहत 13 राज्य कानूनों और 99% आपराधिक प्रावधानों को हटाया गया। इंडस्ट्री फर्स्ट और इन्वेस्टर फर्स्ट मुख्यमंत्री ने बताया कि 1947 से 2017 तक प्रदेश में मात्र 14 हजार कारखाने थे, जबकि पिछले साढ़े आठ वर्षों में यह संख्या 31 हजार से अधिक हो गई है। इंडस्ट्री फर्स्ट और इन्वेस्टर फर्स्ट दृष्टिकोण के कारण यूपी आज वैश्विक निवेशकों के लिए सुरक्षित और आकर्षक गंतव्य है। एमओयू अब कागजी नहीं, बल्कि ग्राउंड ब्रेकिंग, उत्पादन और रोजगार सृजन तक ठोस परिणाम दे रहे हैं। पिछले साढ़े आठ वर्षों में 50 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव आए, जिससे 60 लाख से अधिक युवाओं को प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रोजगार मिला। पहले यूपी के युवा अन्य राज्यों में पलायन करते थे, लेकिन अब प्रदेश में ही अवसर उपलब्ध हैं। बजट में ‘लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल एम्प्लॉयमेंट जोन’ योजना प्रस्तावित है, जो हर जिले में स्किल डेवलपमेंट से रोजगार तक की गारंटी देगी।  उन्होंने कहा कि आउटसोर्सिंग में शोषण रोकने के लिए विशेष कॉर्पोरेशन गठित किया गया है। इससे युवाओं को 16-20 हजार रुपये का मानदेय मिलेगा। कंपनियों को केवल सेवा शुल्क दिया जाएगा। शोषण करने वाली कंपनियों को ब्लैकलिस्ट और कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। आज उत्तर प्रदेश एमएसएमई और स्टार्टअप का प्रमुख हब है। यह वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी केंद्र के रूप में उभर रहा है। देश के 65% मोबाइल और 55-60% इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट यहीं बन रहे हैं। उत्तर भारत की पहली सेमीकंडक्टर फैब यूनिट का शिलान्यास प्रधानमंत्री जल्द करेंगे। 1962 से देश इस दिशा में प्रयासरत था, अब यूपी इसका केंद्र बनेगा।

आज सुरक्षा से समृद्धि और एम्प्लॉयमेंट से एक्सीलेंस तक आत्मनिर्भर हुईं महिलाएं: मुख्यमंत्री

प्रदेश में तीन गुना बढ़ी महिला वर्कफोर्स, 44 हजार महिला पुलिसकर्मी: मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री ने किया एलान, बढ़ाई जाएगी निराश्रित महिला, वृद्धजन और दिव्यांगजन की पेंशन राशि आज सुरक्षा से समृद्धि और एम्प्लॉयमेंट से एक्सीलेंस तक आत्मनिर्भर हुईं महिलाएं: मुख्यमंत्री उद्यमी और नेतृत्वकारी नारीशक्ति प्रदेश के भीतर प्रदान कर रही है नेतृत्व नौ लाख सरकारी नौकरियों में से 1,75,000 नौकरियां केवल महिलाओं के लिए  लखनऊ महिला सशक्तीकरण को लेकर विधानसभा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश में पिछले नौ वर्षों के दौरान महिलाओं की भागीदारी, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में ऐतिहासिक परिवर्तन हुआ है। वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में महिला वर्कफोर्स की भागीदारी 12 से 13 प्रतिशत के बीच थी, जो अब बढ़कर 36 से 37 प्रतिशत तक पहुंच गई है। इसे तीन गुना से अधिक वृद्धि बताते हुए कहा कि यह बदलाव केवल आंकड़ों में नहीं बल्कि सामाजिक और आर्थिक जीवन में भी स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। एक करोड़ छह लाख निराश्रित महिलाएं, वृद्धजन और दिव्यांगजन इस समय 12,000 रुपये सालाना पेंशन प्राप्त कर रहे हैं। सरकार इस राशि को बहुत जल्द बढ़ाने जा रही है। हमने बजट दे दिया है।  सुरक्षा से समृद्धि और एंप्लायमेंट से एक्सीलेंस तक नेतृत्व कर रहीं प्रदेश की महिलाएं  मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि नौ वर्षों में महिला सशक्तीकरण का इससे बड़ा उदाहरण क्या हो सकता है कि  2017 के पहले प्रदेश में वूमेन वर्कफोर्स कुल 12 से 13 फीसदी थी। आज यह 36 से 37 फीसदी है। यानी कामकाजी महिलाओं की संख्या पहले की तुलना में तीन गुना से अधिक बढ़ी है। उत्तर प्रदेश पुलिस की ही बात करूं तो महिलाओं की संख्या मात्र 10,000 थी, आज यह संख्या 44,000 पहुंच चुकी है।  उन्होंने नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय से कहा कि आपके समय में तो एक कहावत प्रचलित थी, “देख सपाई, बिटिया घबराई।” अब ऐसे में महिला सशक्तीकरण पर आपसे क्या चर्चा की जाए? आज सुरक्षा से समृद्धि और एम्प्लॉयमेंट से एक्सीलेंस तक आत्मनिर्भर, उद्यमी और नेतृत्वकारी नारी शक्ति उत्तर प्रदेश के भीतर नेतृत्व प्रदान कर रही है। अब तक नौ लाख सरकारी नौकरियां उपलब्ध कराई जा चुकी हैं। इनमें से 1,75,000 नौकरियां केवल महिलाओं के लिए समर्पित हैं। अब नाइट शिफ्ट में भी काम कर रहीं महिलाएं  मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में ‘ड्रोन दीदी’, सेल्फ हेल्प ग्रुप और ‘लखपति दीदी’ को एक मजबूत इकोसिस्टम प्रदान किया गया है। बीसी सखी योजना के अंतर्गत प्रत्येक ग्राम पंचायत में एक बीसी सखी बैंकिंग कार्यों को आगे बढ़ा रही है। आप कह रहे थे कि क्या महिला गहने पहनकर बाहर निकल सकती है? आपके समय में तो महिलाएं दिन में भी नहीं निकल पाती थीं। अब तो महिलाएं नाइट शिफ्ट में भी उद्योगों और कार्यालयों में कार्य कर रही हैं। इससे बड़ा उदाहरण और क्या हो सकता है? विपक्ष के लोगों को भी कन्यादान में सहभागिता करनी चाहिए  मुख्यमंत्री ने कहा कि उज्ज्वला योजना, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना और मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना, इन सभी योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को सशक्त किया जा रहा है। सामूहिक विवाह योजना में बेटी की शादी के लिए सरकार एक लाख की सहायता दे रही है। आपको भी उन शादियों में जाना चाहिए, कन्यादान में सहभागिता करनी चाहिए, क्योंकि कन्यादान को बहुत बड़ा दान माना गया है। बुलाने की आवश्यकता क्या है? पात्रता के आधार पर नाम चयनित करिए और बताइए कि हम इनका विवाह कराना चाहते हैं। किसी के लिए भी मना नहीं है। कोई भी पात्र व्यक्ति आवेदन कर सकता है। आप 100 लोगों का चयन करिए, प्रशासन को बताइए, अधिकारी धनराशि उपलब्ध करवाएंगे। वे भी उसमें सहभागी बनेंगे। यह हर व्यक्ति का अधिकार है। हर व्यक्ति को उसमें जाने का अधिकार है। हर जनप्रतिनिधि को उसमें सहभागी बनने का अधिकार है। दिव्यांगजनों को डीबीटी से मिल रहा योजना का लाभ  दिव्यांगजनों का जिक्र करते हुए सीएम ने कहा कि आपके समय मात्र 300 रुपये पेंशन मिलती थी, आज हम 12,000 रुपये सालाना पेंशन दे रहे हैं। यही नहीं, मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल भी दे रहे हैं और इस बार तो हमने बेटियों के लिए ई-ट्राईसाइकिल की भी घोषणा कर दी है। इलेक्ट्रिक ट्राईसाइकिल की भी घोषणा की है। ये पैसा डीबीटी के माध्यम से हम उनके खातों में भेज रहे हैं। आपके समय में वह 300 रुपये जाता था, वह भी छह महीने में एक बार जाता था। उसमें भी आधा ही लाभार्थी को मिल पाता था। आज डीबीटी के माध्यम से पूरा पैसा लाभार्थी के खाते में जाता है। प्रत्येक जरूरतमंद को उसके हिसाब से सुविधा का लाभ दिया है।

धार्मिक स्थल सर्वसमाज की आत्मनिर्भरता का आधारः योगी

दुर्योधन की प्रतिमा लगाने की वकालत, बाबर की कब्र में सजदा का समर्थन, लेकिन वंदे मातरम का विरोध करते हैं सपा नेताः मुख्यमंत्री सदन में बोले योगी- सनातन आस्था को कोई कैद नहीं कर सकता  दुनिया में जब भी मर्यादा पर चर्चा होगी तो अयोध्या, शाश्वत चेतना पर चर्चा होगी तो काशी, भक्ति पर मथुरा और समरसता पर होगी प्रयागराज की चर्चाः मुख्यमंत्री   धार्मिक स्थल सर्वसमाज की आत्मनिर्भरता का आधारः योगी लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को विधानसभा में समाजवादी पार्टी के नेताओं को जमकर आड़े हाथ लिया। उन्होंने कहा कि सपा के नेता दुर्योधन की प्रतिमा लगाने की वकालत करते हैं। वे बाबर की कब्र में सजदा का समर्थन, लेकिन वंदे मातरम का विरोध करते हैं। सीएम ने संसद में कांग्रेस व सपा के सांसदों की बातों का जिक्र किया और कहा कि हिंदुस्तान का खाएंगे, लेकिन वंदे मातरम नहीं गाएंगे। उन्होंने कहा कि भाजपा में कोई वंदे मातरम का कोई अपमान नहीं कर सकता। कांग्रेस व सपा को वंदे मातरम का विरोध करने वालों को डंके की चोट पर कान पकड़ कर, धक्का देकर बाहर करना चाहिए। राष्ट्रगीत का विरोध करने वाले को हिंदुस्तान की धऱा पर रहने का अधिकार नहीं मिलना चाहिए।  लोकमाता की चर्चा करने का अधिकार समाजवादी पार्टी को नहीं  सीएम योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकमाता अहिल्या बाई होल्कर की 300वीं जयंती कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होंने काशी विश्वनाथ धाम में लोकमाता की भव्य प्रतिमा लगवाई। भाजपा की डबल इंजन सरकार ने लोकमाता की 300वीं जयंती पर औरैया गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज का नामकरण उनके नाम पर किया। लोकमाता अहिल्या बाई होल्कर के नाम पर बने मणिकर्णिका व श्मशान घाट के पुनरुद्धार कार्यक्रम को बढ़ाया जाता है तो सपा व कांग्रेस विरोध करती हैं। लोकमाता को अपमानित करती हैं। सपा को लोकमाता की चर्चा करने का अधिकार नहीं है। सपा लोकमाता के नाम पर गुमराह कर रही है। सपाइयों को डालनी चाहिए सच बोलने और स्वीकारने की आदत  सीएम योगी ने सदन में राजू पाल व उमेश पाल का नाम लेकर कहा कि उनकी हत्या हुई। सपा इनके हत्यारों और माफिया को गले का हार बनाकर चलती थी। आज अनावश्यक रूप से मुद्दा बनाकर सपा समाज में विद्वेष फैलाना चाहती है। सीएम ने सपाइयों से कहा कि सच बोलने-स्वीकारने की आदत डालनी चाहिए। सपा राष्ट्रद्रोहियों का महिमा मंडन, राष्ट्र नायकों का अपमान और गाजी मेले का समर्थन करती है। उन्होंने सपाइयों से कहा कि गाजी के पाप का बदला कैसे लिया जाना चाहिए, यह महाराज सुहेलदेव के शौर्य से सीखिए। हमारी सरकार ने बहराइच में महाराज सुहेलदेव का विराट स्मारक और आजमगढ़ में विश्वविद्यालय बनवाया।  तुष्टिकरण की पराकाष्ठा की गई  सीएम योगी ने सपा नेताओं पर कटाक्ष किया कि वे माफिया की कब्र पर फातिहा पढ़ने जाते हैं, लेकिन अयोध्या में राम मंदिर, काशी विश्वनाथ धाम, मथुरा-वृंदावन धाम के विकास का विरोध करते हैं। सपा शासन में तुष्टिकरण की पराकाष्ठा की गई। सपा ने कांवड़ यात्रा, जन्माष्टमी पर्व को थाने-जेल में मनाने और अयोध्या की 84 कोसी परिक्रमा को रोक दिया था। दीपोत्सव का विरोध किया। कांग्रेस ने उच्चतम न्यायालय में एफिडेविट दिया कि श्रीराम-श्रीकृष्ण मिथक थे। सपा रामभक्तों पर गोलियां चलवाती है। मंदिर निर्माण को रोकने के लिए कोर्ट में वकील खड़ा करती है। सीएम ने सपाइयों को चेताते हुए कहा कि सनातन आस्था को कोई कैद नहीं कर सकता है। आज अयोध्या में भगवान राम का मंदिर बन गया है। पुनर्जागरण के इस मॉडल में विरासत भी है और विकास भी।  भारत की आस्था की आत्मा है यूपी सीएम योगी ने कहा कि आस्था का पुनर्जागरण उत्तर प्रदेश से प्रारंभ हुआ है। यूपी भारत की आस्था की आत्मा है। अयोध्या, काशी, मथुरा-वृंदावन, प्रयागराज, चित्रकूट, नैमिषारण्य, शुकतीर्थ केवल आस्था के ही नहीं, बल्कि राष्ट्र चेतना के भी केंद्र हैं। जब भी दुनिया में मर्यादा की चर्चा होगी तो अयोध्या, शाश्वत चेतना की चर्चा होगी तो काशी, भक्ति में मथुरा और समरसता में प्रयागराज की चर्चा होगी। यह चारों उत्तर प्रदेश में हैं। यूपी फिर से पुनर्जागरण का केंद्र बिंदु बना है। सीएम ने कहा कि गुलामी की मानसिकता से मुक्त करने की दिशा में हम मजबूती से बढ़े हैं। प्रयाग, काशी, मथुरा-वृंदावन, विंध्याचल, चित्रकूट, शुकतीर्थ, संभल, बरेली, नैमिषारण्य समेत बौद्ध, जैन, सिख व पौराणिक-ऐतिहासिक महत्व से जुड़े तीर्थस्थलों को आस्था और राष्ट्रीय चेतना के साथ जोड़ने का कार्य किया गया है। जिसका परिणाम है कि वहां करोड़ों श्रद्धालु आते हैं और आस्था के साथ अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान कर के जाते हैं।  आत्मगौरव के महापर्व बन गए हैं दीपोत्सव, देव दीपावली व रंगोत्सव सीएम योगी ने प्रयागराज महाकुम्भ की चर्चा करते हुए काशी समेत अन्य स्थलों का जिक्र किया। बोले कि मंदिर का पुजारी ब्राह्मण होगा, लेकिन वहां फूल बेचने वाले, नाव या टैक्सी चलाने वाले व्यक्ति सर्वसमाज से होते हैं। धार्मिक स्थल इन सबकी आत्मनिर्भरता का आधार बना हुआ है। डबल इंजन सरकार उसे पुनर्जीवित कर रही है। दीपोत्सव, देव दीपावली और रंगोत्सव केवल आयोजन नहीं, बल्कि आत्मगौरव के महापर्व बन गए हैं। सीएम ने अपने मन की पीड़ा व्यक्त करते हुए सदन को बताया कि 2017 में जब हमारी सरकार ने पहले दीपोत्सव और देवदीपावली-रंगोत्सव के आयोजन के बारे में सोचा तो आशंका हुई कि क्या होगा और कैसे होगा, लेकिन हमें सफलता मिली। आज करोड़ों लोग उस आस्था से फिजिकली व वर्चुअली जुड़कर आस्था को सम्मान देते हैं, लेकिन इस ताकत को पहले कभी समझने का प्रयास नहीं किया गया। आस्था को सम्मान देने का परिणाम है कि यूपी की जीडीपी बढ़ी है। यूपी ने लंबी छलांग लगाई है। सुरक्षा के साथ ही यूपी के प्रति धारणा भी बदली है।  तमिलनाडु के श्रद्धालुओं ने सोशल मीडिया पर लिखकर की यूपी की प्रशंसा  सीएम योगी ने सदन में एक वाकया भी सुनाया। महाकुम्भ के दौरान तमिलनाडु से भी कुछ श्रद्धालु आए थे। चित्रकूट में एक गांव के पास उनकी बस खराब हो गई। वे हिंदी और स्थानीय लोग तमिल नहीं जानते थे। तमिलनाडु वाले भटक रहे थे, अंधेरा होने को था। गांव वालों को पता चला तो वे वहां पहुंचे। इशारों में उन्हें तमिलनाडु वालों की परेशानी पता चली। फिर गांव के लोग इन अतिथियों को साथ लेकर गांव आए। गांव के एक परिवार में शादी … Read more

गोरखपुर में गूंजेगा “भव्य शिव बारात” का जयघोष, चार दिवसीय धार्मिक आयोजन 13 से 16 फरवरी तक

The chants of “Grand Shiva Baraat” will resonate in Gorakhpur, a four-day religious event from February 13th to 16th. विशेष संवाददाता : जितेन्द्र श्रीवास्तव / कैमरामैन अर्पिता श्रीवास्तव जबलपुर। महाशिवरात्रि पर्व के पावन अवसर पर गोरखपुर क्षेत्र में स्थित श्री शिव शक्ति महाकाल खाटू श्याम मंदिर में 13 से 16 फरवरी 2026 तक भव्य “शिव बारात” का आयोजन किया जा रहा है। चार दिवसीय इस धार्मिक कार्यक्रम में श्रद्धालुओं के लिए संगीत, हल्दी, बारात प्रस्थान, चुनरी चढ़ाने की रस्म और विशाल भंडारे का आयोजन रखा गया है। आयोजकों के अनुसार कार्यक्रम की शुरुआत शुक्रवार, 13 फरवरी 2026 को संगीत एवं ढोल-डीजे के साथ होगी। इसके बाद शनिवार, 14 फरवरी को शाम 7 बजे से हल्दी समारोह आयोजित किया जाएगा।रविवार, 15 फरवरी 2026 को शाम 6 बजे भव्य शिव बारात प्रस्थान करेगी, जिसमें भगवान शिव और माता पार्वती की झांकी के साथ भक्तों की बड़ी संख्या शामिल होगी। यह बारात क्षेत्र में आकर्षण का केंद्र रहेगी।सोमवार, 16 फरवरी 2026 को दोपहर 12 बजे चुनरी चढ़ाने की रस्म अदा की जाएगी, वहीं दोपहर 3 बजे से विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा, जिसमें सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया जाएगा।आयोजन स्थल मंदिर परिसर, अहीर मोहल्ला, गुरुद्वारा के पास, गोरखपुर (जबलपुर) में रहेगा। आयोजक मंडल ने समस्त क्षेत्रवासियों और श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर धार्मिक उत्सव को सफल बनाने की अपील की है। भक्तों में इस भव्य शिव बारात को लेकर खासा उत्साह देखा जा रहा है और क्षेत्र में धार्मिक वातावरण पहले से ही भक्तिमय हो गया है।

सुदृढ़ कानून व्यवस्था ने उत्तर प्रदेश को फियर जोन से फेथ जोन में बदला: सीएम

अब उपद्रव नहीं उत्तर प्रदेश है उत्सव का प्रदेशः मुख्यमंत्री 2017 के पहले सत्ता के संरक्षण में पले गुंडे और माफिया समानांतर सरकार चला रहे थेः योगी आदित्यनाथ   सुदृढ़ कानून व्यवस्था ने उत्तर प्रदेश को फियर जोन से फेथ जोन में बदला: सीएम   अब उत्तर प्रदेश में भय का वातावरण नहीं, अब लोगों के मन में आस्था हैः मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ  लखनऊ,  राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव में चर्चा में भाग लेते हुए मुख्यमंत्री ने नेता प्रतिपक्ष पर कई गंभीर सवाल भी खड़े किए। उन्होंने कहा कि 2017 के पहले उत्तर प्रदेश में गुंडे व माफिया सत्ता के संरक्षण में पल रहे थे। नेता प्रतिपक्ष ने स्वयं ऐसे कुछ नाम लिए हैं, जबकि कई नाम लेने में वह संकोच कर गए। हमारी सरकार ने पहले दिन जीरो टॉलरेंस की नीति की बात कही थी और सरकार आज भी अपनी जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत ही चल रही है। अपराध कोई भी करेगा तो कानून उसको अपनी गिरफ्त में लेगा। 2017 के पहले सत्ता के संरक्षण में पले गुंडे और माफिया समानांतर सरकार चला रहे थे। गुंडा टैक्स, अवैध वसूली, वन डिस्ट्रिक्ट वन माफिया की प्रवृत्ति को आगे बढ़ा रहे थे। कानून चंद हाथों की जागीर बन चुका था। कर्फ्यू और दंगा आम बात थी। पर्व और त्योहार आस्था के नहीं, आशंका के पर्याय बन गए थे। पुलिस का मनोबल टूटा हुआ था। न बेटी सुरक्षित थी और न व्यापारी ही सुरक्षित था। प्रदेश की छवि अराजकता और अस्थिरता का पर्याय थी और आज उपद्रव नहीं, उत्सव प्रदेश है उत्तर प्रदेश।  यूपी अब फियर जोन से फेथ जोन बना  मुख्यमंत्री ने कहा कि रिकॉर्ड पुलिस भर्तियां, महिला सशक्तिकरण की एक नई पारी, मॉडर्न पुलिसिंग, सुदृढ़ साइबर एवं फॉरेंसिक इन्फ्रास्ट्रक्चर आज उत्तर प्रदेश की पहचान हैं। साइबर क्राइम हो, त्वरित और आपातकालीन सेवाएं हों, अपराध और अपराधियों के प्रति जीरो टॉलरेंस, आज रूल ऑफ लॉ यूपी के अंदर देखने को मिलता है। सुदृढ़ कानून व्यवस्था ने उत्तर प्रदेश को फियर जोन से फेथ जोन में बदला है। अब भय का वातावरण नहीं है, अब लोगों के मन में आस्था है। हर जनपद में उत्तर प्रदेश का वासी जाता है, बिना भय के जाता है। कर्फ्यू कल्चर की जगह जीरो टॉलरेंस कल्चर ने ली है। अब दंगों की जगह फेस्टिव और टेंपल इकोनॉमी ग्रो कर रही है। कोई सोचता था अयोध्या में करोड़ों लोग आएंगे? प्रयागराज में 2013 के कुंभ में कुल 12 करोड़ श्रद्धालु आए थे और इस बार माघ मेला में ही 21 करोड़ श्रद्धालु आए हैं। ये है परिवर्तन। ये माघ मेला कल्पवासियों का होता था, लेकिन इस माघ मेले में बना रिकॉर्ड लोगों के विश्वास का प्रतीक है। अब यहां न कर्फ्यू है न दंगा है, यूपी में सब चंगा है।  आज उत्तर प्रदेश में मॉडर्न पुलिसिंग पर जोर  मुख्यमंत्री ने कहा कि अब उत्तर प्रदेश में महिलाओं को सुरक्षा है, व्यापारियों को भयमुक्त वातावरण है। इन आठ वर्षों में 2,19,000 से अधिक पुलिस की भर्ती हुई हैं। इसमें 20 फीसदी महिलाओं को अनिवार्य रूप से सम्मिलित किया गया है। पुलिस की ट्रेनिंग क्षमता को कई गुना बढ़ाया गया है। पुलिस भर्ती में हर जनपद के नौजवानों को अवसर मिला है, बिना भेदभाव। पुलिस अवस्थापना सुविधाओं में अभूतपूर्व विकास किया गया। पहले पुलिस के नौजवान खपरैल के बैरक में रहते थे। आज जिलों में आप जाएंगे तो हाई राइज बिल्डिंग पुलिस की अवस्थापना सुविधा के लिए होगी। मॉडर्न पुलिसिंग की बात आती है तो सात पुलिस कमिश्नरेट स्थापित किए गए, जिनके लिए आपकी सरकार कभी निर्णय ही नहीं ले पाई। फॉरेंसिक साइंस इकोसिस्टम को हम लोगों ने प्रदेश के अंदर लागू किया। आज तीन नए कानून लागू हो चुके हैं और लखनऊ में स्टेट फॉरेंसिक इंस्टीट्यूट की स्थापना की गई। डिग्री, डिप्लोमा और सर्टिफिकेट कोर्सेज प्रारंभ हो चुके हैं।  हर जनपद में साइबर क्रॉइम थाना स्थापित  मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 के पहले साइबर क्राइम के केवल दो थाने थे, आज सभी 75 जनपदों में साइबर क्राइम थाने हैं। इसके अलावा राज्य के हर थाने में एक साइबर हेल्प डेस्क भी है। अब तक हजारों करोड़ रुपये, जो साइबर अपराधियों द्वारा ऐंठे जाते थे, उनको वापस कराने और बचाने में भी इस तंत्र ने योगदान दिया है। तीन नए कानून लागू होने के बाद हर उस अपराध में, जिसमें सात वर्ष से अधिक की सजा है,  उसमें फॉरेंसिक एविडेंस आवश्यक है। पहले यूपी के अंदर दो या तीन लैब्स काम करती थीं, आज हम लोगों ने 12 ए-ग्रेड की लैब बनाई हैं और छह निर्माणाधीन हैं। हर जनपद में दो-दो फॉरेंसिक वैन उपलब्ध करवाई गई हैं, ताकि एविडेंस प्राप्त हो, अपराधी को सजा दी जा सके। ये एक नई दिशा में किए गए प्रयास हैं। दंगाइयों का काल है पीएसी, हमारी सरकार ने किया पुनर्जीवित  मुख्यमंत्री ने सेफ सिटी का जिक्र करते हुए कहा कि मुंबई हो या गुजरात या फिर यूपी, सभी जगह भाजपा ही सुरक्षा दे सकती है। उत्तर प्रदेश में सेफ सिटी के लक्ष्य को 17 नगर निगम समेत गौतम बुद्ध नगर जनपद में हम लोगों ने लागू किया है। हर जिला मुख्यालय में सीसीटीवी कैमरे की कवरेज, इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर के माध्यम से उसकी मॉनिटरिंग की जा रही है। उत्तर प्रदेश स्पेशल सिक्योरिटी फोर्स का गठन भी उत्तर प्रदेश में हुआ है। इसके साथ ही पीएसी की 34 कंपनियों को पुनर्गठित करके उसको जीवित किया है, क्योंकि ये दंगाइयों की काल है। दंगा समर्थक कोई भी पार्टी पीएसी का समर्थन नहीं करती। समाजवादी पार्टी के कालखंड में इसे एक प्रकार से समाप्त करने की साजिश की गई थी। अब उसका पुनर्गठन करने के साथ ही तीन कंपनी महिला पीएसी का गठन किया जा चुका है और साथ ही तीन और कंपनियां हम बनाने जा रहे हैं। जिन तीन महिला पीएसी कंपनियों का गठन किया गया है, वो वीरांगना उदा देवी के नाम पर लखनऊ में,  वीरांगना झलकारी देवी के नाम पर गोरखपुर में और वीरांगना अवंती बाई लोधी के नाम पर बदायूं में गठित हो चुकी हैं। तीन नई वाहिनियों का गठन हम लोग करने जा रहे हैं।

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