LATEST NEWS

WPL: RCB ने दिल्ली को हराया, इतिहास रचते हुए दूसरी बार बनी चैंपियन

 वडोदरा  महिला प्रीमियर लीग (WPL) 2026 के फाइनल में गुरुवार (5 फरवरी) को रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) का सामना दिल्ली कैपिटल्स (DC) से हुआ. वडोदरा के कोटाम्बी स्टेडियम में खेले गए इस मुकाबले में आरसीबी ने छह विकेट से जीत हासिल की. दिल्ली ने आरसीबी को जीत के लिए 204 रनों का टारगेट दिया था, जिसे उसने आखिरी ओवर की चौथी गेंद पर हासिल कर लिया. डब्यूपीएल में ये अब तक का सबसे बड़ा सफल रन चेज रहा. आरसीबी ने दूसरी बार डब्ल्यूपीएल खिताब जीता है. इससे पहले 2024 में भी ये खिताब जीतने में सफल रही है. उधर दिल्ली कैपिटल्स एक बार फिर खिताब नहीं जीत सकी. दिल्ली कैपिटल्स चारों सीजन फाइनल में पहुंची, लेकिन निराश हाथ लगी. बता दें कि 2023 और 2025 का डब्ल्यूपीएल सीजन मुंबई इंडियंस (MI) ने अपने नाम किया था. स्मृति ने खेली कप्तानी पारी, वॉल भी चमकीं चेज में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु की शुरुआत अच्छी नहीं रही और उसने ग्रेस हैरिस (9 रन) का विकेट सस्ते में गंवा दिया. हैरिस को चिनेले हेनरी ने बोल्ड किया. यहां से स्मृति मंधाना और जॉर्जिया वॉल ने जबरदस्त बैटिंग की. वॉल और स्मृति के बीच दूसरे विकेट के लिए 92 गेंदों पर 165 रनों की साझेदारी हुई. यह महिला प्रीमियर लीग में किसी विकेट के लिए सबसे बड़ी साझेदारी रही. वॉल ने 54 गेंदों पर 79 रन बनाए, जिसमें 14 चौके शामिल रहे. वॉल के आउट होने के बाद ऋचा घोष क्रीज पर उतरीं, लेकिन वो सिर्फ 6 रन बनाकर चलती बनीं. अब स्मृति मंधाना पर जिम्मेदारी थी कि वो टीम को जीत की मंजिल तक ले जाएं, लेकिन उनकी शानदार इनिंग्स का अंत चिनेले हेनरी ने किया. स्मृति ने 41 गेंदों का सामना करते हुए 87 रन बनाए, जिसमें 12 चौके और तीन छक्के शामिल रहे. आखिरी ओवर में दिल्ली को जीत के लिए 10 रन चाहिए थेे. उस ओवर में राधा यादव ने पहली गेंद पर एक रन लिया. फिर नादिन डिक्लर्क ने भी एक रन पूरा किया. इसके बाद राधा यादव ने दो चौके लगाकर मैच आरसीबी की झोली में ला दिया. WPL फाइनल में सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर 87 (41)- स्मृति मंधाना बनाम दिल्ली कैपिटल्स, वडोदरा, 2026 79 (54)- जॉर्जिया वॉल बनाम दिल्ली कैपिटल्स, वडोदरा, 2026 66 (44)- हरमनप्रीत कौर बनाम दिल्ली कैपिटल्स, ब्रेबोर्न, 2025 60* (55)- नेट साइवर-ब्रंट बनाम दिल्ली कैपिटल्स, ब्रेबोर्न, 2023 57 (37)- जेमिमा रोड्रिग्स बनाम आरसीबी, वडोदरा, 2026 WPL में सबसे बड़ी साझेदारियां (किसी भी विकेट के लिए) 165- स्मृति मंधाना & जॉर्जा वॉल (आरसीबी) vs दिल्ली कैपटिल्स, वडोदरा, 2026 162- मेग लैनिंग & शेफाली वर्मा (दिल्ली कैपटिल्स) vs आरसीबी, ब्रेबोर्न, 2023 146- जेस जोनासेन & शेफाली वर्मा (दिल्ली कैपटिल्स) vs आरसीबी, बेंगलुरु, 2025 142- स्मृति मंधाना & जॉर्जिया वॉल (आरसीबी) vs दिल्ली कैपटिल्स, नवी मुंबई, 2026 140- बेथ मूनी & लॉरा वोल्वार्ट (गुजरात जायंट्स) vs आरसीबी, दिल्ली, 2024 दिल्ली की कप्तान जेमिमा ने जड़ी फिफ्टी दिल्ली कैपिटल्स ने टॉस हारकर पहले बैटिंग करते हुए चार विकेट पर 203 रन बनाए. दिल्ली कैपिटल्स के लिए कप्तान जेमिमा रोड्रिग्स ने सबसे ज्यादा 37 बॉल पर 57 रन बनाए, जिसमें 8 चौके शामिल रहे. वहीं लॉरा वोल्वार्ट ने 3 चौके और दो छक्के की मदद से 25 गेंदों पर 44 रनों का योगदान दिया. विकेटकीपर बल्लेबाज लिजेल ली ने भी आतिशी बल्लेबाजी की. ली ने 3 चौके और तीन छक्के की मदद से 30 गेंदों पर 37 रनों की इनिंग्स खेली. चिनेले हेनरी ने तो 4 चौके और दो छक्के की मदद से सिर्फ 15 गेंदों पर नाबाद 35 रन कूटे. रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु की ओर से नादिन डिक्लर्क, सयाली सतघरे और अरुंधति रेड्डी ने एक-एक सफलता हासिल की. फाइनल में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु की प्लेइंग इलेवन: ग्रेस हैरिस, स्मृति मंधाना (कप्तान), जॉर्जिया वॉल, ऋचा घोष (विकेटकीपर), राधा यादव, नादिन डिक्लर्क, पूजा वस्त्राकर, अरुंधति रेड्डी, सयाली सतघरे, श्रेयांका पाटिल, लॉरेन बेल. फाइनल में दिल्ली कैपिटल्स की प्लेइंग इलेवन: लिजेल ली (विकेटकीपर), शेफाली वर्मा, लॉरा वोल्वार्ट, जेमिमा रोड्रिग्स (कप्तान), मारिजाने कैप, चिनेले हेनरी, निकी प्रसाद, स्नेह राणा, मिन्नू मणि, श्री चरणी और नंदनी शर्मा.

प्राइवेट पार्ट की सफाई से जुड़ी जानकारी से 85% पुरुष अनजान, डॉक्टर से जानें हाइजीन के जरूरी टिप्स

महिलाओं की हाइजीन, वजाइना क्लीनिंग टिप्स पर अक्सर हम बात करते रहते हैं लेकिन पुरुषों के हाइजीन की बात काफी कम होती है। शरीर की सफाई हर किसी को करनी चाहिए फिर चाहे वो पुरुष हो या महिला। अगर प्राइवेट पार्ट की सही से सफाई न की जाए, तो इंफेक्शन फैल जाता है और फिर ये गंभीर समस्या बन जाती है। ज्यादातर पुरुष जल्दबाजी में प्राइवेट पार्ट की सफाई सही से नहीं करते हैं। अगर आप भी ऐसा करते हैं, तो संभल जाइये। स्किन स्पेशलिस्ट डॉक्टर विहान सिंह का कहना है कि महिलाओं की तरह ही पुरुषों को भी प्राइवेट पार्ट की सफाई सही से करना काफी जरूरी है। चलिए कुछ हाइजीन टिप्स बताते हैं। प्राइवेट पार्ट साफ करने का सही तरीका डॉक्टर के मुताबिक, यूरिन पास करने के बाद ज्यादातर पुरुष ऐसे ही अंडरवियर पहन लेते हैं लेकिन ज्यादातर केसेस में इंफेक्शन इसी वजह से होता है। यूरिन स्टेन रहने और नमी बनी रहने के कारण फंगल इंफेक्शन फैलता है। कुछ और भी बातें हैं, जो पुरुषों को मालूम होनी चाहिए, चलिए जानते हैं- 1- प्राइवेट पार्ट की सफाई कभी भी साबुन से न करें। हमेशा किसी क्लीनिंग जेल या प्राइवेट पार्ट फ्रेंडली सोप से करें। केमिकल वाले साबुन के पार्टिकल्स स्किन पर जम जाते हैं। 2– सेक्स के बाद पेनिस को पानी से धोते हुए अच्छे से साफ करें। कई पुरुष ऐसा नहीं करते और इंफेक्शन फैलता है। 3– प्राइवेट पार्ट में अगर गीलापन है, तो अंडरवियर न पहनें। गीलेपन से खुजली, रैशेस की समस्या हो सकती है। 4- प्राइवेट पार्ट के प्यूबिक को भी समय-समय पर ट्रिम करें। प्यूबिक बाल बैक्टीरिया और पसीने को फंसा सकते हैं। 5– कभी भी गीले अंडरवियर न पहनें। टाइट और गीले अंडरवियर पहनने से भी प्राइवेट पार्ट में इंफेक्शन फैल सकता है। कैसे करें साफ प्राइवेट पार्ट को साफ करने के लिए गुनगुना पानी इस्तेमाल करें और केमिकल फ्री साबुन का इस्तेमाल करें। नहाते समय पेनिस एरिया के आस-पास की स्किन को अच्छे से क्लीन करें।

फरवरी से UPI ट्रांजेक्शन के नए नियम लागू, जानें क्या होगा असर

नई दिल्ली भारत में डिजिटल पेमेंट अब हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है. सब्जी खरीदने से लेकर ऑनलाइन शॉपिंग, बिजली का बिल भरने और दोस्तों को पैसे भेजने तक, हर जगह यूपीआई (UPI) का यूज हो रहा है. ऐसे में अगर यूपीआई के नियमों में कोई बदलाव होता है, तो उसका असर करोड़ों लोगों पर पड़ता है. इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और NPCI ने फरवरी 2026 से यूपीआई के नए नियम लागू करने का फैसला किया है. इन नए नियमों का मकसद लेनदेन को और तेज बनाना, धोखाधड़ी से सुरक्षा बढ़ाना, यूजर्स को अपने पैसों और भुगतान पर ज्यादा नियंत्रण देना है. अगर आप Google Pay, PhonePe, Paytm या किसी भी UPI ऐप का यूज करते हैं, तो आइए आज हम आपको UPI के कौन से नए नियम फरवरी से लागू हो रहे हैं.  अब UPI पेमेंट होगा और भी तेज नए नियमों के तहत UPI लेनदेन और API रिस्पॉन्स को 10 सेकंड के भीतर पूरा करना जरूर होगा. पहले यह समय सीमा 30 सेकंड थी, जिसकी वजह से कई बार पेमेंट अटक जाता था या देर से पूरा होता था. अब फायदा यह होगा कि पेमेंट जल्दी पूरा होगा, Pending या Processing में फंसे ट्रांजैक्शन कम होंगे, भीड़-भाड़ वाले समय (जैसे सेल या महीने के आखिर में) भी सिस्टम बेहतर काम करेगा. इससे ग्राहकों के साथ-साथ दुकानदारों को भी राहत मिलेगी.  API क्या होता है API यानी एप्लिकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस, इसे आप दो एप्स या सिस्टम के बीच बात करने का जरिया समझ सकते हैं. जब आप UPI से भुगतान करते हैं तो आपका UPI ऐप आपके बैंक से पूछता है क्या खाते में पैसे हैं फिर वह सामने वाले के बैंक से कहता है पैसे स्वीकार करो. यह पूरी बातचीत API के जरिए होती है. अब API तेज होगी, तो पूरा भुगतान भी जल्दी और स्मूथ होगा.  सुरक्षा पर खास जोर और यूजर्स को मिलेगा ज्यादा कंट्रोल 2026 के नए UPI नियमों में सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी, खासकर बड़े अमाउंट वाले लेनदेन के लिए. इसमें मुख्य बदलाव भुगतान से पहले स्पष्ट कन्फर्मेशन मैसेज, ऑटो पेमेंट और सब्सक्रिप्शन के लिए बेहतर सुरक्षा, यूजर्स आसानी से अपनी सब्सक्रिप्शन को देख, मैनेज और कैंसल कर पाएंगे. इससे गलत कटौती और धोखाधड़ी की संभावना कम होगी.  लंबे समय से यूज न हुई UPI ID पर रोक लग सकती है अगर आपकी कोई UPI ID लंबे समय से यूज नहीं हुई है, तो उसे अस्थायी रूप से बंद किया जा सकता है. इसे डॉरमेंट UPI ID कहा जाएगा. इसे दोबारा चालू करने के लिए यूजर को री-वेरिफिकेशन करना होगा. इस नियम का उद्देश्य है पुराने और भूले हुए अकाउंट्स का गलत यूज रोकना है. अब अगर कोई UPI पेमेंट फेल हो जाता है या अटक जाता है, तो बैंक और ऐप्स को कुछ घंटों के भीतर समस्या सुलझानी होगी, यूजर को साफ-साफ बताया जाएगा कि पैसा कटा या नहीं, कहां अटका, कब वापस मिलेगा, इससे यूजर्स की परेशानी और भ्रम दोनों कम होंगे.  UPI का रिकॉर्ड प्रदर्शन सरकार ने संसद में बताया कि चालू वित्त वर्ष में दिसंबर तक UPI के जरिए 230 लाख करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ. यह आंकड़ा 2022-23 के 139 लाख करोड़ रुपये से कहीं ज्यादा है. इससे साफ है कि UPI पर लोगों का भरोसा लगातार बढ़ रहा है. UPI अब सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है. वर्तमान में यह 8 देशों में यूज हो रहा है. जिसमें भूटान, फ्रांस, मॉरीशस, नेपाल, कतर, सिंगापुर, श्रीलंका, संयुक्त अरब अमीरात शामिल है. सरकार और NPCI मिलकर विदेशों में व्यक्ति से व्यक्ति (P2P) और व्यक्ति से व्यापारी (P2M) भुगतान को आसान बना रहे हैं. IMF की रिपोर्ट (जून 2025) के अनुसार, UPI दुनिया की सबसे बड़ी रियल-टाइम रिटेल पेमेंट सिस्टम है. ACI Worldwide रिपोर्ट 2024 के मुताबिक, दुनिया के कुल रियल-टाइम डिजिटल पेमेंट्स में करीब 49 प्रतिशत  हिस्सा UPI का है. 

मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी की सैलरी में होगी वृद्धि, शिक्षकों के पदों को भरने के लिए नया फॉर्मूला तैयार

भोपाल मध्य प्रदेश में सरकारी मेडिकल कॉलेजों की संख्या तो बढ़ रही है, लेकिन इसमें डॉक्टर्स की नियुक्ति सरकार के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है. इसके लिए लगातार कोशिशें की जा रही हैं. राज्य सरकार अब दूर-दराज के मेडिकल कॉलेजों में डॉक्टर्स की कमी को पूरा करने के लिए उन्हें स्पेशल अलाउंस देने की भी तेयारी कर रही है. इन डॉक्टर्स को बड़े शहरों के आसपास स्थित सरकारी मेडिकल कॉलेजों की तुलना में 20 फीसदी अधिक प्रोत्साहन राशि दिए जाने की तैयारी चल रही है. इसके लिए स्वास्थ्य विभाग मापदंड तैयार कर रही है. मेडिकल कॉलेज खुले, पद खाली प्रदेश में सरकारी मेडिकल कॉलेजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन इनमें फैकल्टी की कमी पूरी करने में सरकारी को पसीना आ रहा है. सिंगरौली मेडिकल कॉलेज में तकरीबन 90 फीसदी फैकल्टी के पद खाली पड़े हैं. यहां स्वीकृत पदों की संख्या 116 है, लेकिन भर्ती मुश्किल से डेढ़ दर्जन पदों पर ही हो सकी है. कमोवेश यही स्थिति प्रदेश के श्योपुर जिले में बनाए गए सरकारी मेडिकल कॉलेज की है. इसमें फैकल्टी के 116 पद हैं, लेकिन यहां भी मुश्किल से 15 पदों को ही भरा जा सका है. इन कॉलेजों में पढ़ने के लिए स्टूडेंट्स तो पहुंच गए, लेकिन पढ़ाने वाले शिक्षक मौजूद नहीं हैं. इसकी वजह से ऑनलाइन क्लास के जरिए इन्हें पढ़ाया जा रहा है. फैकल्टी के मामले में सबसे ज्यादा समस्या नए मेडिकल कॉलेजों में हैं. श्योपुर, सिंगरौली, नीचम, मंदसौर और सिवनी में 50 से लेकर 90 फीसदी तक फैकल्टी के पद खाली हैं. कैबिनेट में लाया जाएगा प्रस्ताव इससे निपटने के लिए राज्य सरकार अब इन दूर-दराज के मेडिकल कॉलेजों में पदस्थ होने वाली फैकल्टी को स्पेशल अलाउंस देने की तैयारी कर रही है. उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ला ने हाल ही में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर इसका प्रस्ताव तैयार कर कैबिनेट के पास भेजने के लिए कहा है. इन डॉक्टर्स को अलाउंस देने के लिए मापदंड तैयार किए जा रहे हैं. उपमुख्यमंत्री के मुताबिक मेडिकल कॉलेजों में खाली पदों को भरने के लिए प्रक्रिया चल रही है. जल्द ही सभी पदों को भरने की कार्रवाई की जाएगी. तीन नए मेडिकल कॉलेज और होने जा रहे शुरू मध्य प्रदेश में इस सत्र से तीन और नए मेडिकल कॉलेज शुरू होने जा रहे हैं. ये मेडिकल कॉलेज सीहोर जिले के बुधनी, छतरपुर और दमोह में खोले जा रहे हैं. इन मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी के लिए व्यवस्थाएं शुरू कर दी गई हैं. तीन नए मेडिकल कॉलेज के बाद प्रदेश में सरकारी मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़कर 17 हो जाएगी. इसके अलावा मंडल और राजगढ़ में भी मेडिकल कॉलेज खोलने की तैयारियां चल रही हैं. प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या है 17 मध्य प्रदेश में अभी 17 मेडिकल कॉलेज हैं. इनमें गांधी मेडिकल कॉलेज भोपाल, गजराराजा मेडिकल कॉलेज ग्वालियर, महात्मा गांधी मेमोरियल मेडिकल कॉलेज इंदौर, नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज जबलपुर, श्याम शाह मेडिकल कॉलेज रीवा. बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज सागर, शासकीय मेडिकल कॉलेज दतिया, अटल बिहारी वाजपेयी शासकीय मेडिकल कॉलेज विदिशा, शासकीय मेडिकल कॉलेज रतलाम, नंद कुमार सिंह चौहान मेडिकल कॉलेज खंडवा शामिल हैं. इनके अलावा शासकीय मेडिकल कॉलेज शहडोल, छिंदवाड़ा मेडिकल कॉलेज, श्रीमंत रानी लक्ष्मीबाई सिंधिया मेडिकल कॉलेज शिवपुरी, शासकीय मेडिकल कॉलेज सतना, सुंदरलाल पटवा शासकीय मेडिकल कॉलेज मंदसौर, शासकीय मेडिकल कॉलेज सिवनी, वीरेंद्र कुमार सखलेचा शासकीय मेडिकल कॉलेज नीमच शामिल हैं. 

बंगाल SIR: 7 फरवरी तक 15 लाख वोटर्स की सुनवाई पूरी करने की डेडलाइन, क्या होगा अगला कदम?

कोलकाता  पश्चिम बंगाल में ड्राफ्ट वोटर लिस्ट पर दावों और आपत्तियों की सुनवाई पूरी करने की डेडलाइन खत्म होने में सिर्फ तीन दिन बाकी हैं। शेड्यूल के अनुसार इन तीन दिनों में लगभग 15 लाख वोटरों की सुनवाई पूरी करनी होगी। सुनवाई की डेडलाइन 7 फरवरी है और फाइनल वोटर लिस्ट 14 फरवरी को प्रकाशित होने वाली है। रोजाना की सुनवाई के ट्रेंड को देखते हुए भारतीय चुनाव आयोग को भरोसा है कि डेडलाइन पूरी की जा सकेगी। पश्चिम बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी के ऑफिस के एक सूत्र ने कहा, “अभी 6,500 सुनवाई केंद्र चल रहे हैं, जहां यह प्रक्रिया चल रही है। इसका मतलब है कि अगले तीन दिनों में हर केंद्र को रोजाना सुनवाई पूरी करनी होगी। यह बिल्कुल भी मुश्किल काम नहीं है।” इसका मतलब यह भी है कि 9 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच में एसआईआर पर अगली सुनवाई से पहले यह काम पूरा हो जाएगा। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से भी उम्मीद है कि वह तीन जजों की बेंच के सामने इस मामले पर अपना पक्ष रखेंगी, जैसा उन्होंने बुधवार को किया था। पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया की सुनवाई पिछले साल 27 दिसंबर को शुरू हुई थी। शुरुआती दौर में यह प्रक्रिया धीमी थी। लेकिन, बाद में हर सुनवाई केंद्र पर अधिकारियों की संख्या बढ़ने और नए सुनवाई केंद्रों की स्थापना के कारण यह तेज हो गई। 14 फरवरी को अंतिम वोटर लिस्ट जारी होने के बाद ईसीआई की पूरी बेंच स्थिति का जायजा लेने के लिए पश्चिम बंगाल आएगी। इसके तुरंत बाद आयोग महत्वपूर्ण विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा करेगा। मुख्य चुनाव अधिकारी के कार्यालय ने पहले ही ईसीआई को सुझाव दिया था कि राज्य में पिछले चुनावों की तरह सात-आठ चरणों की बजाय चुनाव प्रक्रिया दो चरणों में पूरी की जाए। उम्मीद है कि चुनाव अप्रैल के अंत तक संपन्न हो जाएंगे और मई के पहले सप्ताह तक नई राज्य कैबिनेट का गठन हो जाएगा।

विश्व बैंक रिपोर्ट: महायुद्ध के दौर में भारत की अर्थव्यवस्था बनी ‘ग्लोबल स्टार’, पाकिस्तान संकट में

नई दिल्ली एक नई रिपोर्ट में कहा गया है कि कोविड महामारी के बाद भारत और पाकिस्तान की अर्थव्यवस्थाओं ने बिल्कुल अलग दिशा पकड़ी है। जहां पाकिस्तान कई वर्षों से आर्थिक संकट में फंसा हुआ है, वहीं भारत तेजी से बढ़ते हुए विश्व की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। रिपोर्ट के अनुसार 2022 में पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था में 6% की बढ़ोतरी हुई थी, लेकिन यह वृद्धि लंबे समय तक टिक नहीं पाई। 2023 में पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति लगभग ठहर सी गई और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने केवल 0.5% विकास का अनुमान लगाया। इसके विपरीत भारत की अर्थव्यवस्था 2023 में 6% से अधिक बढ़ी और इसे वैश्विक अर्थव्यवस्था की “उजली किरण” माना गया। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पाकिस्तान की समस्याओं को उसके ही देश के अंदरूनी स्तर पर भी स्वीकार किया जा रहा है। इस्लामाबाद में हुए एक बिजनेस कार्यक्रम में विशेष निवेश सुविधा परिषद (SIFC) के राष्ट्रीय समन्वयक लेफ्टिनेंट-जनरल सरफराज अहमद ने कहा था कि पाकिस्तान के पास “कोई विकास योजना नहीं है” और देश की वित्तीय स्थिति बुरी तरह बिगड़ी हुई है। पाकिस्तान की सबसे बड़ी समस्या महंगाई रही है। 2022 से 2023 के बीच महंगाई दर 37.97% तक पहुंच गई, जो पिछले 30 वर्षों में सबसे ज्यादा मानी जा रही है। इससे आम लोगों की जिंदगी मुश्किल हो गई और रोजमर्रा की जरूरतों की कीमतें बढ़ गईं। विश्व बैंक के अनुसार महंगाई के कारण लगभग 13 मिलियन पाकिस्तानियों को गरीबी में गिरना पड़ा।  2023-24 तक गरीबी दर बढ़कर 25.3% हो गई, यानी लगभग हर चार में से एक व्यक्ति गरीबी रेखा के नीचे जीवनयापन कर रहा है। यदि अंतरराष्ट्रीय गरीबी मानक (दैनिक 4 डॉलर से कम) लागू किया जाए तो पाकिस्तान की लगभग 45% आबादी गरीब मानी जा सकती है।भारत में भी इस अवधि में महंगाई रही, लेकिन यह पाकिस्तान की तुलना में काफी कम थी। भारत में 2023 में मुद्रास्फीति 5-6% के आसपास थी और 2024 में यह और कम हुई। 2023 के अंत में भारत में खुदरा महंगाई 5% से नीचे आ गई, खासकर खाद्य कीमतों के नियंत्रण के कारण। रिपोर्ट में कहा गया है कि एक औसत पाकिस्तानी उपभोक्ता को भारत के मुकाबले लगभग पांच गुना अधिक महंगाई का सामना करना पड़ रहा है। गरीबी के मामले में भी भारत ने बड़ी प्रगति की है। विश्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार भारत में दैनिक 4 डॉलर से कम पर जीने वाले लोगों की संख्या 2023 तक 16% से घटकर 2.3% रह गई है।

प्रदेश सरकार का नया लक्ष्य, शराब से 21 हजार करोड़ कमाई, आबकारी नीति और 111 साल पुराने अंग्रेजी कानून में बदलाव

भोपाल  मध्य प्रदेश सरकार ने अपना खजाना भरने के लिए आबकारी नीति 2026-27 में बड़े बदलाव की तैयारी कर ली है. इस नई नीति का ड्राफ्ट अंतिम चरण में है और जल्द ही इसे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा. विभाग के अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री की मंजूरी के बाद नीति को कैबिनेट में लाया जाएगा. जानकारी के अनुसार, 1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाली इस नीति के जरिए सरकार ने शराब बिक्री से करीब 21 हजार करोड़ रुपये के राजस्व का लक्ष्य रखा है. इसके साथ ही आबकारी व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए 111 साल पुराने आबकारी अधिनियम में संशोधन की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है. नई नीति में राजस्व बढ़ाने पर होगा फोकस नई आबकारी नीति में शराब दुकानों की बिक्री से पिछले वर्ष के मुकाबले लगभग 3 हजार करोड़ रुपये अधिक राजस्व जुटाने का लक्ष्य रखा गया है. पिछली नीति में 18 हजार करोड़ रुपये की प्राप्ति का अनुमान था. इस बार दुकानों के चालू वित्तीय वर्ष के मूल्य में 10 से 15 प्रतिशत तक की वृद्धि कर आवंटन किए जाने का प्रस्ताव है. सबसे पहले दुकानों का नवीनीकरण किया जाएगा. इसके बाद लाटरी प्रक्रिया अपनाई जाएगी और अंत में ई-टेंडर के माध्यम से ठेके दिए जाएंगे. शापिंग माल में महंगी शराब के काउंटर का प्रस्ताव नई नीति में शापिंग माल में प्रीमियम और महंगी शराब के काउंटर खोलने का प्रस्ताव भी शामिल है. इस पर भी अंतिम फैसला मुख्यमंत्री यादव लेंगे. सरकार का मानना है कि इससे उच्च वर्ग के उपभोक्ताओं को नियंत्रित और वैधानिक विकल्प मिलेगा, साथ ही राजस्व में भी इजाफा होगा. हालांकि नई आबकारी नीति में न तो कोई शराब दुकान बंद करने का प्रस्ताव है और न ही नई दुकान खोलने की योजना है. धार्मिक और शैक्षणिक संस्थानों से तय दूरी जरुरी पिछली आबकारी नीति 2025-26 में 17 धार्मिक नगरों में शराब दुकानों को बंद किया गया था, जिससे 47 दुकानें बंद हुई थीं. इस बार ऐसी कोई कार्रवाई प्रस्तावित नहीं है. यानि न तो नई शराब दुकानें खुलेंगी और प ही पुरानी दुकानों को बंद किया जाएगा. वर्तमान वित्तीय वर्ष में मध्य प्रदेश में कुल 3,558 शराब दुकानें हैं, जो सभी कंपोजिट दुकानें हैं. नर्मदा नदी के दोनों किनारों से 5 किलोमीटर के दायरे में शराब दुकानें नहीं खोलने और धार्मिक व शैक्षणिक संस्थानों से 100 मीटर की दूरी का नियम पहले की तरह लागू रहेगा.     राज्य की आय में आबकारी का बड़ा योगदान प्रदेश के बजट में केंद्रीय करों में हिस्सेदारी और राज्य के स्वयं के कर अहम भूमिका निभाते हैं. जीएसटी के जरिए पिछले वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में 26 हजार करोड़ रुपये मिले थे, जबकि इस वर्ष दिसंबर तक 25,250 करोड़ रुपये की प्राप्ति हुई है. वैट, आबकारी, पंजीयन और मुद्रांक शुल्क से राज्य को 32,660 करोड़ रुपये का राजस्व मिला है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि से अधिक है. 111 साल पुराने आबकारी अधिनियम में संशोधन की तैयारी वित्तमंत्री जगदीश देवड़ा ने बताया कि, ”मध्य प्रदेश सरकार 1915 में लागू हुए आबकारी अधिनियम में संशोधन करने जा रही है. इसके लिए आबकारी विभाग ने अधिकारियों की विशेष टीम गठित की है, जो अधिनियम की अव्यावहारिक और अप्रासंगिक धाराओं की समीक्षा कर रही है. ऐसी धाराएं, जिनसे अब सरकार को कोई राजस्व नहीं मिलता, उन्हें हटाने का प्रस्ताव है.” देवड़ा ने बताया कि, ”आबकारी अधिनियम से ऐसी कंडिकाएं हटाई जा रही हैं, जिनका अब औचित्य नहीं बचा है.

यूपी में गुमशुदगी का खतरनाक आंकड़ा, 2 साल में 1.08 लाख लापता, सिर्फ 9,700 मिले, हाई कोर्ट नाराज

इलाहाबाद इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने एक मामले की सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश में गुमशुदा लोगों की बढ़ती संख्या पर गंभीर चिंता जताई है। अदालत के समक्ष प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, पिछले करीब दो वर्षों में प्रदेश में 1 लाख 8 हजार 300 लोगों के लापता होने की गुमशुदगी रिपोर्ट दर्ज की गई है, लेकिन इनमें से केवल 9,700 लोगों का ही अब तक पता लगाया जा सका है। अदालत ने इस स्थिति को बेहद गंभीर और चिंताजनक बताया है। खंडपीठ ने इस पूरे मामले को ‘प्रदेश में गुमशुदा व्यक्तियों के संबंध में’ शीर्षक से जनहित याचिका के रूप में दर्ज करने का आदेश दिया है। मामले की अगली सुनवाई गुरुवार को निर्धारित की गई है। यह आदेश न्यायमूर्ति अब्दुल मोईन और न्यायमूर्ति बबीता रानी की पीठ ने विक्रमा प्रसाद द्वारा दायर याचिका पर पारित किया। क्या है मामला याची, जो लखनऊ के चिनहट क्षेत्र का निवासी है, ने अदालत को बताया कि उसका बेटा जुलाई 2024 में लापता हो गया था। इस संबंध में उसने चिनहट थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट भी दर्ज कराई, लेकिन पुलिस की ओर से कोई प्रभावी या संतोषजनक कार्रवाई नहीं की गई। इस पर न्यायालय ने न केवल याची की शिकायत पर उचित कार्रवाई के निर्देश दिए, बल्कि प्रदेश भर में लापता व्यक्तियों से जुड़ी विस्तृत जानकारी प्रस्तुत करने का आदेश अपर मुख्य सचिव (गृह) को भी दिया। अधिकारियों का रवैया लापरवाही भरा अदालत के आदेश के अनुपालन में दाखिल हलफनामे में अपर मुख्य सचिव की ओर से बताया गया कि 1 जनवरी 2024 से 18 जनवरी 2026 के बीच पुलिस के पास दर्ज मामलों के अनुसार कुल 1,08,300 लोग लापता हुए हैं, जिनमें से सिर्फ 9,700 लोगों का ही अब तक पता लगाया जा सका है। इन आंकड़ों पर टिप्पणी करते हुए न्यायालय ने कहा कि इससे साफ जाहिर होता है कि गुमशुदा व्यक्तियों के मामलों में संबंधित अधिकारियों का रवैया लापरवाही भरा रहा है।  

भारत के चार सेमीकंडक्टर प्लांट्स पायलट प्रोडक्शन स्टेज पर, आईएसएम 2.0 से इकोसिस्टम में आएगी मजबूती

नई दिल्ली   केंद्र सरकार की ओर से देश में अब तक 10 सेमीकंडक्टर प्लांट्स को मंजूरी दी गई है। इसमें से चार प्लांट्स में उत्पादन पायलट स्टेज में पहुंच गया है। यह जानकारी केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद की ओर से बुधवार को दी गई। लोकसभा में एक प्रश्न का लिखित में जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा, “देश में अब तक केंद्र द्वारा 10 सेमीकंडक्टर प्लांट्स को मंजूरी दी जा चुकी हैं, जिनमें अनुमानित निवेश 1.6 लाख करोड़ रुपए है और इसमें से चार में उत्पादन शुरू हो चुका है।” आधिकारिक बयान में आगे कहा गया कि मंजूर प्रोजेक्ट्स में दो फैब और आठ पैकेजिंग यूनिट्स जैसे सीएमओएस (सिलिकॉन) फैब, एक सिलिकॉन कार्बाइड फैब, उन्नत पैकेजिंग और मेमोरी पैकेजिंग यूनिट्स शामिल हैं। स्टार्टअप्स के माध्यम से 24 चिप-डिजाइन परियोजनाओं को समर्थन दिया गया है, जिनमें से 16 ने टेपआउट पूरा कर लिया है और 13 को वेंचर कैपिटल फंडिंग प्राप्त हुई है। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने बताया कि 350 विश्वविद्यालयों को इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन ऑटोमेशन (ईडीए) टूल्स तक पहुंच प्रदान की गई है, जिनका उपयोग 65,000 इंजीनियर कर रहे हैं। सरकार ने सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले मैन्युफैक्चरिंग के लिए एक संपूर्ण इकोसिस्टम विकसित करने के उद्देश्य से 76,000 करोड़ रुपए के कुल परिव्यय के साथ सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम शुरू किया है, जिसमें डिजाइन, निर्माण से लेकर असेंबली, परीक्षण, पैकेजिंग और मॉड्यूल निर्माण और फैब्रिकेशन तक सब कुछ शामिल है। सरकार ने नेशनल एसोसिएशन ऑफ सॉफ्टवेयर एंड सर्विसेज कंपनीज (नैसकॉम) के अनुमानों का हवाला देते हुए कहा कि आईटी क्षेत्र का प्रदर्शन पिछले पांच वर्षों में सुधरा है, और 2020-21 से 2024-25 के बीच निर्यात 152 अरब डॉलर से बढ़कर 224.4 अरब डॉलर हो गया है। मंत्रालय ने बताया कि इसी अवधि में कुल आय 196 अरब डॉलर से बढ़कर 283 अरब डॉलर हो गई। विश्लेषकों का अनुमान है कि इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 की शुरुआत से हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर क्षमताओं के एकीकरण को बढ़ावा मिलेगा और देश का टेक्नोलॉजी इकोसिस्टम काफी मजबूत होगा, जिससे भारत अगली पीढ़ी के डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर में अग्रणी देश के रूप में स्थापित होगा। सरकार की 7,280 करोड़ रुपए की सिंटर्ड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट (आरईपीएम) योजना से रणनीतिक सामग्रियों तक सुरक्षित पहुंच सुनिश्चित करके भारत की व्यापक सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग महत्वाकांक्षाओं को बल मिलने की उम्मीद है।  

एमपी में बिना पर्ची के एंटीबायोटिक्स बिक रही हैं, हर महीने करोड़ों का अवैध धंधा चल रहा है

रीवा   जिले में एंटीबायोटिक्स दवाओं का हर माह 7 से 8 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार होता है। इतना ही नहीं प्रतिबंध के बावजूद तमाम दवा विक्रेता एंटीबायोटिक दवाओं की ऑन द काउंटर (ओटीसी) बिक्री भी कर रहे हैं। एंटीबायोटिक्स का बेवजह इस्तेमाल से जहां लोगों का स्वास्थ बिगड़ रहा है वहीं उनकी जेब पर भी असर पहुंच रहा है। दवा कारोबारियों व डॉक्टरों के गठजोड़ के कारण एंटीबायोटिक्स की खपत पर रोक नहीं लग पा रही है। यह गठजोड़ अवैध कमाई का जरिया बन गया है। एंटीबायोटिक दवाओं का जिला भी एक बड़ा बाजार बन चुका है। रीवा एवं मऊगंज जिले को मिलाकर अरमान व रूरल एरिया में कल 1380 मेडिकल स्टोर रजिस्टर्ड है। इनमें ग्रामीण अंचलों में मकड़जाल की तरह पहले झोलाछाप डॉक्टर शामिल नहीं है, जिसमें अंधाधुंध एंटीबायोटिक्स दवाओं की खुलेआम बिक्री हो रही है। बड़े स्तर पर चिकित्सकों ने भी अपने मरीजों को दवा लिखकर मेडिकल स्टोर से खरीदने की बजाय खुद ही बेच रहे हैं। इसके अलावा सर्दी, जुकाम, खांसी, फोड़े-फुन्सी, चोट इत्यादि के उपचार के लिए मरीज सीधे मेडिकल स्टोर पर जाकर काउंटर से एंटीबायोटिक्स खरीदकर कार्य चला रहे हैं और दवा विक्रेता भी धड़ल्ले से वायरल इंफेक्शन, मौसमी विकार व चोट घाव की दवा बिना डाक्टरों की पर्ची मांगे बेच भी रहे हैं।  एंटीबायोटिक्स के इस भयावह स्थिति को लेकर पड़ताल करने का प्रयास किया है। एक हजार से अधिक काउंटर जिले में संचालित: जिले में एंटीबायोटिक्स दवाओं का कारोबार एक बहुत बड़ा और सक्रिय स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र का हिस्सा है। यहां थोक विक्रेताओं का एक बड़ा नेटवर्क है जो निमोनिया, संक्रमण और अन्य बीमारियों के लिए एमोक्सिसिलिन, सेफलेक्सिन और डॉक्सीसाइक्लिन जैसे प्रमुख एंटीबायोटिक्स को अस्पतालों, क्लीनिकों और फार्मेसियों में वितरित करते हैं। शहर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में दवाओं की भारी मांग के कारण थोक और खुदरा कारोबार काफी बड़ा है। यही कारण है कि जहां शहरी क्षेत्र में 681 से अधिक तो ग्रामीण में लगभग 699 दवा काउंटर हैं जो फुटकर में दवाओं की बिक्री कर रहे हैं। इन्हीं काउंटर से माह भर में 7 से 8 करोड़ रुपये से अधिक की सिर्फ एंटीबायोटिक्स दवाओं की बिक्री हो जाती है। मेडिकल स्टोरों पर बिना पर्चे के एंटीबायोटिक्स की बिक्री : ख़ुटेही निवासी अशोक पटेल तीन दिन से सर्दी-जुकाम से पीड़ित हैं। बुधवार को बुखार एवं जुकाम के बाद पास के अन्नपूर्णा मेडिकल स्टोर पहुंचे और अपनी समस्या बताकर दवा ले ली। न दुकान संचालक ने डाक्टर की पर्ची मांगी और न ही पीड़ित ने दी। चिकित्सक कमीशन के खेल में अपनी जेबें भर रहे हैं। एंटीबायोटिक्स के माध्यम से धन कमा बना रहे हैं। जिस दवा कंपनी से इनका कमीशन अधिक मिलता है वे मरीज को वही दवा लिखते हैं। दवा विक्रेता क्या करे, जो मांग आएगी वह उसे ही तो बेचेगा। अब तो डॉक्टर दवाई भी बेचने लगे हैं। निश्चित रूप से सरकार को नियम सख्त करने की जरूरत है। तरुणेद्र सिंह, अध्यक्ष, दवा विक्रेता संघ रीवा। हमने पहले ही सरकारी चिकित्सकों को गाइड लाइन के पालन की सख्त हिदायत देकर रखी हुई है। वायरल इंफेक्शन में तो मरीज को एंटीबायोटिक्स दवा बिल्कुल नहीं देनी चाहिए। इसी तरह सर्दी, जुकाम में भी विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है। एक दो दिन में यह अपने आप ठीक हो जाती है। ऐसे में एंटीबायोटिक्स नुकसानदेह है। खासकर हाईडोज से बचना चाहिए। शिशु रोग के मामले में खासकर ध्यान देने की आवश्यकता है। डॉ प्रतिभा पांडे, सिविल सर्जन, कुशाभाऊ ठाकरे जिला अस्पताल बिछिया रीवा।

Indore Metro: छोटा गणपति स्टेशन बनेगा अंडरग्राउंड मेट्रो स्टेशनों में सबसे छोटा

इंदौर  मेट्रो परियोजना के अंडर ग्राउंड प्रोजेक्ट में छोटा गणपति मेट्रो स्टेशन पर बनी उलझन अब खत्म होने को है। मेट्रो के अंडर ग्राउंड अन्य स्टेशन के मुकाबले छोटा गणपति का स्टेशन सबसे छोटा होगा। मेट्रो प्रबंधन द्वारा छोटा गणपति स्टेशन निर्माण के लिए जो मृदा परीक्षण रिपोर्ट तैयार की है। उसमें बताया है कि यहां पर न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मैथड (नेटम) के माध्यम से खोदाई की जाएगी। इस प्रक्रिया में जमीन की सतह से 37 से 38 मीटर नीचे मेट्रो स्टेशन का निर्माण होगा। जबकि शहर में मेट्रो के अंडर ग्राउंड स्टेशन जमीन से 18 से 22 मीटर गहराई में बनाए जा रहे है। ऐसे में यह मेट्रो स्टेशन सबसे छोटा और सबसे ज्यादा गहराई में होगा। गार्डन के हिस्से में होगी खोदाई तो नहीं टूटेंगे मकान पूर्व में कट एंड कवर तकनीक के माध्यम से छोटा गणपति मेट्रो स्टेशन का निर्माण किया जाना था। यह अंडर ग्राउंड स्टेशन एमजी रोड के समानांतर मल्हारगंज थाने के पास 190 मीटर की लंबाई में बनाना तय किया था। ऐसे में 142 मकान टूट रहे थे। सर्वे रिपोर्ट के बाद न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मैथड से इसका निर्माण किया जाना तय किया है। ऐसे में एमजी रोड के समानांतर 146 मीटर लंबाई में स्टेशन बनाया जा सकेगा। इससे मकानों को तोड़ने की जरूरत नही होगी। सिर्फ इस क्षेत्र में बने गार्डन वाले हिस्से पर ही खोदाई की जाएगी। जमीन के नीचे स्टेशन का विस्तार किया जाएगा। इस प्रक्रिया से निर्माण एजेंसी को 25 से 30 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च करना होंगे।  

ऊर्जा मंत्री तोमर बोले, प्रदेश विद्युत क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करना प्राथमिकता

प्रदेश विद्युत के क्षेत्र में पूर्णत: आत्म निर्भर : ऊर्जा मंत्री  तोमर भोपाल ऊर्जा मंत्री  प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में किये जा रहे कार्यों से प्रदेश विद्युत के क्षेत्र में पूर्णतः आत्म निर्भर हो गया है। प्रदेश भविष्य में भी विद्युत के क्षेत्र में आत्म निर्भर बना रहे इसके लिये विद्युत उपलब्ध क्षमता में 1806 मेगावाट की वृद्धि का कार्यक्रम है। इसमें से 851 मेगावाट क्षमता वृद्धि हासिल की जा चुकी है। प्रदेश में गैर कृषि उपभोक्ताओं को लगभग 24 घंटे एवं कृषि उपभोक्ताओं को लगभग 10 घंटे प्रतिदिन विद्युत प्रदाय की जा रही है। रबी मौसम में मकर संक्रांति पर्व पर 19895 मेगावाट की अधिकतम विद्युत मांग की सफलतापूर्वक पूर्ति की गई, जो प्रदेश के इतिहास में सर्वाधिक है। प्रदेश में पारेषण हानियां अब मात्र 2.60 प्रतिशत रह गई हैं, जो पूरे देश में न्यूनतम हानियों में से एक है। वित्तीय वर्ष 2025-26 से 2029-2030 तक की अवधि में प्रदेश की पारेषण प्रणाली के सुदृढीकरण के लिये म.प्र. पॉवर ट्राँसमिशन कंपनी लिमिटेड द्वारा प्रस्तावित 5163 करोड़ रुपये के पूंजीगत कार्यों का अनुमोदन प्रदान किया गया है। अटल गृह ज्योति योजना में जिनकी मासिक खपत 150 यूनिट तक है एवं पात्र उपभोक्ताओं को प्रथम 100 यूनिट की खपत के लिए अधिकतम 100 रुपये का बिल दिया जा रहा है एवं अंतर की राशि राज्य शासन द्वारा सब्सिडी के रूप में वितरण कंपनियों को दी जा रही है। इस योजना में घरेलू विद्युत उपभोक्ताओं के लिये वर्ष 2024-25 में सब्सिडी की मद में 6495.27 करोड़ रूपये जारी किए गए थे। अटल कृषि ज्योति योजना के अंतर्गत 10 हॉर्सपॉवर तक के अनमीटर्ड स्थाई कृषि पंप कनेक्शनों को 750 रुपये प्रति हॉर्सपॉवर प्रतिवर्ष एवं 10 हार्स पॉवर से अधिक के अनमीटर्ड स्थाई कृषि पंप कनेक्शनों को 1500 रूपये प्रति हॉर्स पॉवर प्रतिवर्ष की फ्लेट दर से विद्युत प्रदाय किया जा रहा है। शासन द्वारा 1 हैक्टेयर तक भूमि एवं 5 हार्स पॉवर तक के कृषि पंप वाले अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के कृषकों को निःशुल्क विद्युत प्रदाय किया जा रहा है। योजना लगभग 9.3 लाख कृषि उपभोक्ता लाभान्वित हो रहे हैं। समाधान योजना 2025-26″ में अद्यतन लगभग 17 लाख 15 हजार रूपये उपभोक्ताओं का 350 करोड़ 67 लाख रूपये सरचार्ज माफ हुआ हैं तथा 852 करोड़ 76 लाख रूपये के बिल जमा हुए हैं। प्रधानमंत्री जनजातीय आदिवासी न्याय महा-अभियान (पीएम-जनमन) में प्रदेश में लगभग 28 हजार घरों के विद्युतीकरण की कार्य योजना को स्वीकृति प्रदान की गई है। वितरण कंपनियों द्वारा नवम्बर 2025 तक लगभग 26,000 घरों को विद्युत कनेक्शन प्रदान किए जा चुके हैं। शासन द्वारा अति उच्चदाब ट्राँसमिशन लाईनों के निर्माण से टॉवर लगने वाले और ट्राँसमिशन लाईन के प्रभावित किसानों को पहले की कलेक्टर गाईडलाईन से दोगुना मुआवजा एकमुश्त एवं डिजिटल माध्यम से दिया जाएगा।  

किसानों की सशक्तिकरण के लिए तकनीक का प्रभावी उपयोग किया जा रहा है: मुख्यमंत्री डॉ. यादव

“कृषक कल्याण वर्ष-2026” समाचार किसानों को सशक्त बनाने किया जा रहा है तकनीक का प्रभावी उपयोग : मुख्यमंत्री डॉ. यादव एआई आधारित डिजिटल क्रॉप सर्वे और फार्मर रजिस्ट्री से पारदर्शी व प्रमाणिक कृषि डेटा व्यवस्था हुई स्थापित म.प्र. बना फार्मर रजिस्ट्री के शत-प्रतिशत अनुपालन वाला पहला राज्य भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि किसानों को सशक्त बनाने और कृषि व्यवस्था को आधुनिक स्वरूप देने के लिए तकनीक का प्रभावी उपयोग किया जा रहा है। एआई आधारित डिजिटल क्रॉप सर्वे और फार्मर रजिस्ट्री के माध्यम से राज्य में ग्रामीण डेटा प्रणाली को एक नई दिशा प्रदान की गई है। उन्नत तकनीक, पारदर्शी डेटा प्रबंधन और केंद्र-राज्य समन्वय से यह पहल किसानों के हित में मजबूत डिजिटल आधार तैयार कर रही है। इससे किसानों को योजनाओं का वास्तविक लाभ सुनिश्चित होगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि डिजिटल क्रॉप सर्वे के माध्यम से खेत पर उपस्थित होकर फसल की फोटो लेकर जानकारी सुरक्षित की जा रही है, जिससे फसल संबंधी डेटा पूरी तरह प्रमाणिक हो रहा है। जियो-फेंसिंग तकनीक से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि सर्वे केवल वास्तविक खेत स्थल पर ही किया जाए। सर्वे डेटा का त्रिस्तरीय सत्यापन एआई/एमएल सिस्टम और पटवारी स्तर पर किया जा रहा है। अन्य विभागों द्वारा भी इस डेटा का प्रभावी उपयोग किया जा रहा है। डीसीएस डेटा के आधार पर उपार्जन पंजीयन की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि इंटरनेट उपलब्ध न होने की स्थिति में भी सर्वे की विश्वसनीयता बनी रहे। सर्वे के दौरान ली गई फोटो की प्रामाणिकता और सही लोकेशन की पुष्टि प्रणाली द्वारा की जाती है। सर्वे केवल निर्धारित समयावधि में ही संभव है और समय सीमा के बाहर या मोबाइल समय में किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ होने पर सर्वे स्वतः रुक जाता है। एआई या एमएल एल्गोरिदम के माध्यम से डेटा का क्रॉस-वेरिफिकेशन कर मानवीय त्रुटियों की संभावना को न्यूनतम किया गया है। फसल क्षेत्र, उत्पादन अनुमान और योजनाओं के क्रियान्वयन में डेटा-ड्रिवन निर्णय लिए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि फार्मर रजिस्ट्री को एकीकृत डिजिटल प्रणाली के रूप में विकसित किया गया है। इसमें किसानों की पहचान, भूमि विवरण और योजना संबंधी जानकारी का केंद्रीकृत पंजीकरण एवं सत्यापन किया जा रहा है। इस प्रक्रिया में भूमि अभिलेखों का पूर्ण डिजिटल एकीकरण, स्थान आधारित रिकॉर्ड और बहु-स्तरीय डेटा जांच शामिल हैं। प्रत्येक किसान को 11 अंकीय विशिष्ट डिजिटल पहचान संख्या प्रदान की जा रही है, जिससे एक प्रमाणिक और सटीक किसान डेटाबेस (यूनिफाइड डिजिटल प्रोफाइल) तैयार हो रही है। फार्मर रजिस्ट्री के निर्धारित मानकों का 100 प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित करने वाला मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है। एससीए योजना में भारत सरकार से वित्तीय वर्ष 2025–26 के लिए 713 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृति प्राप्त हुई है। यह डिजिटल व्यवस्था डुप्लीकेशन और फर्जी लाभार्थियों पर प्रभावी रोक लगाएगी और भविष्य की सभी डिजिटल कृषि योजनाओं की मजबूत नींव बनेगी। साथ ही, जन समर्थ पोर्टल के माध्यम से किसानों को आसान कृषि ऋण की सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है।  

रायपुर में 27-28 मार्च को होगा प्रवासी छत्तीसगढ़ कॉन्क्लेव, शामिल होंगे दुनियाभर से छत्तीसगढ़ी

रायपुर प्रदेश के विकास में प्रवासी छत्तीसगढ़ियों की सहभागिता को सशक्त बनाने के उद्देश्य से 27 एवं 28 मार्च को राजधानी रायपुर में “प्रवासी छत्तीसगढ़ कॉन्क्लेव” का आयोजन किया जाएगा। यह कॉन्क्लेव उत्तर अमेरिका छत्तीसगढ़ प्रवासी संघ (North America Chhattisgarh Association – NACHA) तथा छत्तीसगढ़ एनआरआई संघ (NRI Association of Chhattisgarh) के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है। इस दो दिवसीय आयोजन में  भारत से बाहर विभिन्न देशों में निवासरत छत्तीसगढ़ के रहवासी सहभागिता करेंगे। इस कॉनक्लेव के लिए पंजीयन जल्द शुरू होगा।  कॉन्क्लेव के माध्यम से प्रवासी छत्तीसगढ़ियों को प्रदेश के सामाजिक, सांस्कृतिक एवं आर्थिक विकास से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। कार्यक्रम के दौरान छत्तीसगढ़ में निवेश की संभावनाओं, रोजगार सृजन, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यटन एवं उद्योग विकास स्टार्टअप विकास जैसे विषयों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया जाएगा। साथ ही, प्रवासी छत्तीसगढ़ियों के अनुभव एवं संसाधनों के माध्यम से राज्य के विकास में उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने पर चर्चा होगी। छत्तीसगढ़ी एनआरआई बाटेंगे अनुभव आयोजन के दौरान प्रवासी छत्तीसगढ़ियों के अनुभव, विशेषज्ञता और संसाधनों का उपयोग राज्य के विकास में कैसे किया जाए, इस पर मंथन होगा। साथ ही प्रदेश और विदेश में बसे छत्तीसगढ़ी समाज के बीच संवाद को मजबूत करने और सहयोग की नई संभावनाएं तलाशने पर जोर दिया जाएगा। कॉन्क्लेव में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ, उद्यमी, सामाजिक कार्यकर्ता और विशिष्ट अतिथि शामिल होंगे। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि प्रवासी छत्तीसगढ़ी राज्य की अमूल्य पूंजी हैं। विदेशों में कार्यरत छत्तीसगढ़ी नागरिक अपने ज्ञान, अनुभव और निवेश से प्रदेश के विकास को नई दिशा दे सकते हैं। सरकार चाहती है कि प्रवासी छत्तीसगढ़ी औद्योगिक, शैक्षणिक और सामाजिक विकास में सक्रिय भूमिका निभाएं। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का संदेश मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि प्रवासी छत्तीसगढ़ी राज्य की सबसे बड़ी ताकत हैं. उन्होंने कहा, “विदेशों में कार्यरत छत्तीसगढ़ी नागरिक अपने ज्ञान, अनुभव और निवेश से प्रदेश को नई दिशा दे सकते हैं. सरकार चाहती है कि वे औद्योगिक, शैक्षणिक और सामाजिक विकास में सक्रिय भागीदार बनें.” कई देशों से पहुंचेगा छत्तीसगढ़ी समाज दो दिवसीय इस कॉन्क्लेव में भारत के बाहर विभिन्न देशों में निवासरत छत्तीसगढ़ मूल के लोग भाग लेंगे. आयोजन को लेकर उत्साह देखा जा रहा है और इसके लिए पंजीयन प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी. निवेश और रोजगार पर केंद्रित सत्र कॉन्क्लेव का मुख्य उद्देश्य प्रवासी छत्तीसगढ़ियों को राज्य के सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक विकास से जोड़ना है. कार्यक्रम के दौरान निवेश के अवसर, रोजगार सृजन, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं, पर्यटन, उद्योग और स्टार्टअप इकोसिस्टम जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी. अनुभव से मिलेगा विकास को नया आयाम विदेशों में रहकर कार्य कर रहे छत्तीसगढ़ियों के अनुभव, विशेषज्ञता और संसाधनों का उपयोग राज्य के विकास में कैसे किया जाए, इस पर विशेष मंथन होगा. इसके माध्यम से प्रदेश और प्रवासी समाज के बीच संवाद को मजबूत करने की दिशा में ठोस पहल की जाएगी.  विशेषज्ञों और उद्यमियों की रहेगी भागीदारी कॉन्क्लेव में देश-विदेश से जुड़े विशेषज्ञ, उद्योगपति, सामाजिक कार्यकर्ता और अन्य विशिष्ट अतिथि शामिल होंगे. यह आयोजन छत्तीसगढ़ की वैश्विक पहचान को नई मजबूती देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. इस कॉन्क्लेव का उद्देश्य प्रदेश और प्रवासी छत्तीसगढ़ी समाज के बीच संवाद को सुदृढ़ करना तथा सहयोग की नई संभावनाओं को तलाशना है। यह आयोजन छत्तीसगढ़ की पहचान को वैश्विक स्तर पर और अधिक मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध होगा। कॉन्क्लेव में विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े विशेषज्ञ, उद्यमी, सामाजिक कार्यकर्ता एवं विशिष्ट अतिथि शामिल होंगे। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि प्रवासी छत्तीसगढ़ी प्रदेश की अमूल्य पूंजी हैं। उन्होंने कहा कि “विदेश में रहकर काम कर रहे छत्तीसगढ़ी नागरिक अपने ज्ञान, अनुभव और निवेश के माध्यम से राज्य के विकास को नई गति दे सकते हैं। सरकार चाहती है कि प्रवासी छत्तीसगढ़ी प्रदेश के औद्योगिक, शैक्षणिक और सामाजिक विकास में सक्रिय भूमिका निभाएं।”

इंदौर में 350 करोड़ में एलिवेटेड कॉरिडोर, इस माह से शुरू होगा काम, सॉयल टेस्टिंग के साथ 6 लेन का प्रस्ताव, मेट्रो भी जुड़ेगी

इंदौर आखिरकार फरवरी से इंदौर के एबी रोड पर नौलखा से एमआइजी चौराहे के बीच 350 करोड़ रुपए की लागत से एलिवेटेड कॉरिडोर का निर्माण शुरू करने की कवायद हो गई है। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद इसकी तैयारी की गई। तीन चौराहों पर भुजाएं प्रस्तावित की गई है ताकि वाहन चालकों को सुविधा हो। ब्रिज पर रोटरी भी प्रस्तावित की जा रही है। वैसे एलिवेटेड कॉरिडोर (Elevated Corridor) के लिए सालों पहले प्लानिंग हुई थी। दो साल पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के इंदौर आने पर निर्माण के लिए भूमिपूजन भी हो गया था। इसके बाद कॉरिडोर को लेकर सवाल उठे तो सर्वे कराया गया। नौलखा से एमआइजी चौराहा (प्रेस कॉम्प्लेक्स तक) एलिवेटेड कॉरिडोर का प्रस्ताव था। लोगों ने आपत्ति लेते हुए सवाल उठाए कि ऐसे वाहन चालक बहुत कम होते है जो एबी रोड पर सीधे नौलखा से एमआइजी तक जाए। अधिकांश लोगों को बीच के इलाके में जाना होता है। यह रहवासी के साथ ही व्यवसायिक इलाका है। दिसंबर में की गयी थी घोषणा दिसंबर में मुख्यमंत्री ने एलिवेटेड कॉरिडोर बनाने के लिए निर्देशित किया, जिसके बाद पीडब्ल्यूडी ने फिर प्लानिंग की। वैसे गुजरात की कंपनी को पहले यह ठेका मिल चुका था, निरस्त नहीं होने से कुछ भुगतान भी बिना काम करने की बात सामने आ रही है। अब बीआरटीएस कॉरिडोर भी खत्म किया जा रहा है, ऐसे में कॉरिडोर ब्रिज का महत्व बढ़ गया है। पीडब्ल्यूडी ने कॉरिडोर पर शिवाजी प्रतिमा चौराहा, गीता भवन चौराहा एवं पलासिया चौराहे पर भुजाएं प्रस्तावित की है। भुजाएं देने से बीच के इलाके में जाने वाले वाहन चालकों को फायदा होगा और ऐसे में कॉरिडोर का ज्यादा इस्तेमाल संभव हो पाएगा।   नौलखा से एलआईजी के बीच बनने वाले एलिवेटेड कॉरिडोर को लेकर फिर नया प्रस्ताव आया है, अब इसे चार लेन से बढ़ाकर 6 लेन करने की बात कही गई है.  6 लेन करने का प्रस्ताव  इंदौर में एलिवेटेड कॉरिडोर को 6 लेन करने का प्रस्ताव दिया गया है, जनप्रतिनिधियों का कहना है कि एलिवेटेड ब्रिज जरूरी है. क्योंकि इससे ही जाम कम होगा, लेकिन इसकी चौड़ाई 4 की जगह 6 लेन की होनी चाहिए, जबकि इसे नौलखा से आगे राजीव गांधी चौराहा और राऊ के साथ-साथ एलआईजी के आगे तक बनाया जाना चाहिए, क्योंकि इससे ट्रैफिक की समस्या और दूर होगी. वहीं इस ब्रिज को मेट्रो से जोड़ने का प्रावधान करने की बात भी कही है, जिसमें मुख्य चौराहों पर एलिवेटेड रोटरी जैसे प्रावधान करने का प्रस्ताव रखा गया है.  ट्रैफिक अलर्ट: आंशिक रुकावट, जल्द जारी होगा डायवर्जन प्लान वर्तमान में सॉयल टेस्टिंग के कारण सड़क पर अस्थायी टीन लगाए गए हैं। पीडब्ल्यूडी अधिकारियों के अनुसार, 15 फरवरी से जब भारी मशीनें मौके पर पहुंचेंगी और खुदाई शुरू होगी, तब ट्रैफिक पुलिस के साथ मिलकर एक विस्तृत ट्रैफिक डायवर्जन प्लान जारी किया जाएगा, ताकि वाहन चालकों को परेशानी न हो। 15 फरवरी से काम  बताया जा रहा है कि इंदौर में इस ब्रिज का काम 15 फरवरी से शुरू हो जाएगा, क्योंकि यह ब्रिज इंदौर में अगले 50 साल तक ट्रैफिक की समस्या को ध्यान में रखते हुए बनाया जा रहा है, इसलिए इस पर जल्दबाजी नहीं करने की बात कही गई है. इंदौर की ट्रैफिक समस्या को दूर करने के साथ-साथ ब्रिज के विस्तार पर भी काम करने की बात कही गई है. जिसमें इंदौर के सभी जनप्रतिनिधियों ने अपनी राय दी है. बताया जा रहा है कि फिलहाल ब्रिज को 4 लेन में बनाने का प्रस्ताव रखा गया है, लेकिन अब इसे 6 लेन का करने की बात कही है.  

slot server thailand super gacor

spaceman slot gacor

slot gacor 777

slot gacor

Nexus Slot Engine

bonus new member

olympus

situs slot bet 200

slot gacor

slot qris

link alternatif ceriabet

slot kamboja

slot 10 ribu

https://mediatamanews.com/

slot88 resmi

slot777

https://sandcastlefunco.com/

slot bet 100

situs judi bola

slot depo 10k

slot88

slot 777

spaceman slot pragmatic

slot bonus

slot gacor deposit pulsa

rtp slot pragmatic tertinggi hari ini

slot mahjong gacor

slot deposit 5000 tanpa potongan

mahjong

spaceman slot

https://www.deschutesjunctionpizzagrill.com/

spbo terlengkap

cmd368

368bet

roulette

ibcbet

clickbet88

clickbet88

clickbet88

bonus new member 100

slot777

https://bit.ly/m/clickbet88

https://vir.jp/clickbet88_login

https://heylink.me/daftar_clickbet88

https://lynk.id/clickbet88_slot

clickbet88

clickbet88

https://www.burgermoods.com/online-ordering/

https://www.wastenotrecycledart.com/cubes/

https://dryogipatelpi.com/contact-us/

spaceman slot gacor

ceriabet link alternatif

ceriabet rtp

ceriabet

ceriabet link alternatif

ceriabet link alternatif

ceriabet login

ceriabet login

cmd368

sicbo online live

Ceriabet Login

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

casino online

clickbet88

login kudahoki88

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

slot olympus

sbobet

slot thailand

sbobet