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गेस्ट फैकल्टी नियमितीकरण पर हाईकोर्ट का फैसला, लंबी सेवा से नहीं मिलता नियुक्ति का अधिकार

जबलपुर  मध्यप्रदेश के कॉलेजों में अध्यापन का भार सम्भाल रहे 5000 से ज्यादा गेस्ट फैकल्टी को हाईकोर्ट के फैसले से तगड़ा झटका लगा है। उच्च शिक्षा विभाग द्वारा नियमित नियुक्ति करने की स्थिति में सालों यही अतिथि विद्वान अध्यापन की व्यवस्था संभाल रहे हैं।कॉलेजों में नियमित नियुक्ति की प्रक्रिया के दौरान गेस्ट फैकल्टी ने हाईकोर्ट में याचिका पेश कर नियमितीकरण की मांग की थी। सेवा के बदले मांगा नियमितीकरण याचिकाकर्ता अतिथि विद्वानों की याचिका के अनुसार वे एक से दो दशक से स्वीकृत और खाली पदों पर काम कर रहे हैं। नई भर्ती की जगह उन्हें सहायक प्राध्यापक, खेल अधिकारी और ग्रंथपाल के पदों पर नियमित किया जाए।   गेस्ट फैकल्टी द्वारा याचिका के माध्यम से उच्च शिक्षा विभाग के निर्देश पर फॉलेन आउट किए अतिथि विद्वानों की वापसी की मांग भी कर रहे थे। वहीं सरकार द्वारा नए सिरे से नियमित भर्ती के लिए जारी विज्ञापनों को रद्द करने की भी मांग की गई थी। गेस्ट फैकल्टी को सामाजिक सुरक्षा देने बनी समिति तीन दिन में ही बदली, उठे सवाल 20 साल से कार्यरत होने का दिया था हवाला याचिका में पन्ना निवासी डॉ. कमल प्रताप सिंह सहित 290 अन्य ने बताया था कि वे पिछले 20 सालों से शासकीय कॉलेजों में कार्यरत हैं। वे यूजीसी के मानकों के अनुसार पढ़ाई और अन्य कार्य कर रहे हैं, लेकिन उन्हें सिर्फ 50 हजार रुपए मानदेय मिलता है। हर साल 89 दिन का अनुबंध याचिकाकर्ताओं ने बताया कि उन्हें हर साल 89 दिन के अनुबंध पर रखा जाता है। इसके बाद सेवा समाप्त कर फिर नई प्रक्रिया से नियुक्ति दी जाती है। राज्य सरकार की ओर से उप महाधिवक्ता स्वप्निल गांगुली ने कोर्ट को बताया कि गेस्ट फैकल्टी को आयु सीमा में छूट, अनुभव के आधार पर वेटेज और 25 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण दिया गया है, ताकि वे नियमित भर्ती में शामिल हो सकें। नियमित भर्ती प्रक्रिया को बताया वैध सरकार ने कहा कि सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति एक वैधानिक आयोग के माध्यम से होती है। नियमों के विपरीत कोई भी नियुक्ति असंवैधानिक होगी। कोर्ट ने भी इस तर्क को सही माना। “फॉलन आउट” नियम को भी सही ठहराया हाईकोर्ट ने अपने फैसले में “फॉलन आउट” नियम को वैध बताया। कोर्ट ने कहा कि नियमित भर्ती होने पर गेस्ट फैकल्टी को हटाना कानूनन सही है, क्योंकि यह पद को स्थायी रूप से भरने की प्रक्रिया का हिस्सा है। कोर्ट के फैसले के मुख्य बिंदु 1. भर्ती प्रक्रिया में अंतर नियमित भर्ती (1990 के नियमों के तहत) एमपीपीएससी (MPPSC) के माध्यम से होती है। इसका आधार खुली प्रतियोगिता परीक्षा और अखिल भारतीय स्तर है। जबकि अतिथि विद्वानों का चयन केवल पोस्ट ग्रेजुएशन के अंकों के आधार पर मध्य प्रदेश के मूल निवासियों के लिए ही सीमित है। 2. आरक्षण नियमों का पालन नहीं: नियमित भर्ती में SC, ST, OBC और दिव्यांगों के लिए संवैधानिक आरक्षण लागू होता है। अतिथि विद्वानों की नियुक्ति में ऐसा कोई प्रावधान प्रभावी नहीं।है। अभ्यर्थी को इसमें केवल अतिरिक्त अंक दिए जाते हैं।   नियमित भर्ती के लिए हटाना गलत नहीं फैसले के अनुसार यदि किसी पद पर नियमित नियुक्ति या तबादले के कारण अतिथि विद्वान को हटाया जाता है, तो यह गलत नहीं है। नियम स्पष्ट है कि एक अस्थायी कर्मचारी की जगह दूसरा अस्थायी कर्मचारी नहीं रखा जा सकता। जबकि अस्थायी कर्मचारी की जगह स्थायी  कर्मचारी की नियुक्ति सही है।   जानकारी का अभाव नहीं सुनवाई पूरी करते हुए हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि अतिथि विद्वानों को नियुक्ति के पहले दिन से इस नियुक्ति की प्रकृति की सारी जानकारी थी।  उनकी नियुक्ति केवल एक शैक्षणिक सत्र के लिए थी इसलिए वे नियमित लाभ के हकदार नहीं होंगे। उमादेवी केस का हवाला हाईकोर्ट ने कहा कि ‘उमादेवी’ केस के लाभ यहां सीधे लागू नहीं होते। प्रोफेसर और लाइब्रेरियन जैसे उच्च शैक्षणिक पदों की योग्यता और कार्य की प्रकृति एक दिहाड़ी मजदूर से पूरी तरह अलग होती है।   भर्ती विज्ञापन को चुनौती नहीं अदालत ने कहा कि सरकार को नियमित भर्ती करने का पूरा अधिकार है। अतिथि विद्वान केवल इस आधार पर भर्ती विज्ञापन को चुनौती नहीं दे सकते कि वे लंबे समय से काम कर रहे हैं। यह कहते हुए हाईकोर्ट ने सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया है।

इंदौर अग्निकांड पर पीएम मोदी का शोक, गर्भवती बहू सिमरन सहित पीड़ित परिवारों को आर्थिक सहायता

इंदौर  इंदौर अग्निकांड की खबर ने देशभर को झकझोरकर रख दिया है। सुनते ही लोगों की रूह कांप रही है। पीएम नरेंद्र मोदी  इंदौर में आग लगने के कारण आठ लोगों की मौत पर शोक व्यक्त किया है। उन्होंने पीड़ित परिवारों के लिए आर्थिक मदद की भी घोषणा की है। मध्य प्रदेश के सीएम डॉ. मोहन यादव, राज्य सरकार के मंत्री कैलाश विजय वर्गीय, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, पीसीसी चीफ जीतू पटवारी समेत कई वरिष्ठ नेताओं ने इस हादसे में गहरा दुख जताया है।   प्रत्येक मृतक के परिजनों को 2 लाख रुपये दिए जाएंगे  इंदौर की घटना पर प्रधानमंत्री कार्यालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट में लिखा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि मध्य प्रदेश के इंदौर में आग लगने की घटना में हुई जान-माल की हानि से गहरा दुख हुआ है। जिन लोगों ने अपने प्रियजनों को खोया है, उनके प्रति मेरी संवेदनाएं हैं। मैं घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की प्रार्थना करता हूं।” उन्होंने घोषणा करते हुए कहा कि पीएमएनआरएफ (प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष) की ओर से प्रत्येक मृतक के परिजनों को 2 लाख रुपये की अनुग्रह राशि दी जाएगी। घायलों को 50,000 रुपए दिए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने इंदौर में अग्नि दुर्घटना में दिवंगत नागरिकों को दी श्रद्धांजलि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर में हुई अग्नि दुर्घटना में दिवंगत नागरिकों को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गहन शोक व्यक्त करते हुए कहा कि यह दुर्घटना अत्यंत पीड़ादायक है, हमारी संवेदनाएं सभी शोकाकुल परिजन के साथ हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बाबा महाकाल से दिवंगतों की आत्मा की शांति और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने के लिए प्रार्थना की है। गर्भवती थी पुगलिया परिवार की बहू सिमरन ब्रजेश्वरी कॉलोनी में पुगलिया परिवार के मकान में लगी आग ने दो परिवारों को तबाह कर दिया। पुगलिया परिवार के मुखिया मनोज पुगलिया और उनकी बहू सिमरन की इस हादसे में मौत हो गई। सिमरन, मनोज के बेटे सौरभ की पत्नी थी। वह तीन साल पहले ही इस घर की बहू बनकर आई थी और गर्भवती थी। उसने इस परिवार के साथ एक नई जिंदगी के सपने भी संजोए थे।   चार माह का गर्भ था चार महीने से अधिक की गर्भवती सिमरन अब इस दुनिया में नहीं रहीं और उनके साथ ही उस नन्ही जान ने भी दम तोड़ दिया, जो अभी इस दुनिया में आने वाली थी। गर्भवती होने के कारण डाॅक्टरों ने आराम की सलाह दी थी। इस कारण सिमरन नीचे की मंजिल पर थी।  जनवरी में हुई थी शादी, सामान लेने कमरे में गई थी हादसे में मृत कारोबारी मनोज पुगलिया के तीन बेटे हैं। दूसरे नंबर के बेटे की जनवरी माह में शादी हुई थी। उसकी पत्नी मायके में थी। तीसरे बेटे की शादी नहीं हुई है। बताया जाता है कि सौरभ ने अपनी पत्नी सिमरन को भी छत पर चलने के लिए कहा, लेकिन वह कुछ जरूरी सामान लेने कमरे के भीतर चली गई। इसके बाद पूरे घर में इतना धुआं भर गया कि नीचे के हिस्से में लोगों का दम घुटने लगा। मनोज के तीनों बेटे और पत्नी छत के रास्ते पड़ोसी की छत पर चले गए, जबकि मेहमानों को छत पर जाने का मौका भी नहीं मिल पाया।  साले विजय सेठिया का परिवार रात में ही आया था मनोज के साले विजय सेठिया और उनका परिवार रात को ही घर आया था। खाना खाने के बाद रात 12 बजे तक सभी नीचे बैठकर बातें करते रहे। इसके बाद सभी अलग-अलग कमरों में सोने चले गए थे। बेटा आया कीमती सामान लेने आग लगने पर तीनों बेटों को भागने के अलावा कुछ नहीं सूझा। सबसे पहले उन्होंने अपनी जान बचाई। घर में कीमती सामान और जेवर रखे थे। इन्हें निकालने के लिए बेटा सौरभ सुबह आठ बजे अपने जले हुए घर पर फिर पहुंचा। सौरभ ने बताया कि जब आग लगी, तब पूरे घर में काला धुआं भरा हुआ था और सांस लेने में काफी तकलीफ हो रही थी। 9 गैस सिलिंडर मिले, एक फूटा था फायर ब्रिगेड ने जले हुए घर से 9 गैस सिलिंडर भी निकाले, जिनमें कुछ खाली थे। आग उन सिलिंडर तक नहीं पहुंची, वरना हादसा और भी भयावह हो सकता था। हालांकि, रसोई  घर में रखे एक सिलिंडर में विस्फोट हुआ था।   गैस सिलिंडरों में धमाका हुआ  इंदौर में कार चार्जिंग के दौरान शॉर्ट सर्किट की वजह से आग लग गई, जिसने विकराल रूप ले लिया। इस हादसे में कम से कम 8 लोग आग के चलते जान खो दी। मिली जानकारी के अनुसार, बुधवार को बंगाली चौराहा क्षेत्र में स्थित बृजेश्वरी कॉलोनी में कार को चार्ज किया जा रहा था, तभी चार्जिंग के दौरान आग लग गई और देखते ही देखते इस आग ने विकराल रूप ले लिया। पूरी इमारत में आग की लपटें नजर आने लगीं। इस आग की चपेट में घर के अंदर रखे गैस सिलेंडर भी आ गए और एक-एक कर कई गैस सिलिंडर में धमाका हुआ। इसके चलते मकान का कुछ हिस्सा भी ढह गया। इस हादसे को लेकर जानें पुलिस कमिश्नर ने क्या बताया? इस हादसे में आठ लोगों की जलकर मौत हो गई, जबकि 3 लोग गंभीर रूप से घायल हैं। पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह के मुताबिक, तिलक नगर थाना क्षेत्र में सुबह 4 बजे आग लगने की सूचना मिली। सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड मौके पर पहुंची और आग बुझाने का प्रयास शुरू किया। तीन मंजिला मकान में पुगलिया परिवार रहता था।  इस परिवार के सदस्य ऊपरी मंजिल में सो रहे थे जबकि इनके यहां बिहार से मनोज सेठिया का परिवार आया हुआ था जो ग्राउंड फ्लोर में सो रहा था। इसी सेठिया परिवार के छह लोगों की मौत हादसे में हुई है जबकि दो लोग पुगलिया परिवार के हैं। वहीं घटना में तीन लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। 

तेल टैंकर हादसा बना आग का तांडव, 200 मीटर तक फैल गई आग; एक शख्स जिंदा जला

जालौर जालौर जिले के सांचौर क्षेत्र में नेशनल हाईवे पर एक बड़ा हादसा सामने आया, जब तेल से भरा टैंकर पलटने के बाद उसमें भीषण आग लग गई। आग इतनी तेजी से फैली कि हाईवे पर करीब 200 मीटर तक लपटें फैल गईं। इस घटना में टैंकर में सवार एक व्यक्ति की जिंदा जलकर मौत हो गई, जबकि दूसरा व्यक्ति समय रहते बाहर निकलकर अपनी जान बचाने में सफल रहा। कैसे हुआ हादसा? जानकारी के अनुसार, टैंकर बाड़मेर से सांचौर की ओर जा रहा था। यह हादसा जैसलमेर-जामनगर मार्ग पर सिंवाड़ा ओवरब्रिज के पास हुआ, जहां टैंकर अनियंत्रित होकर पलट गया। टैंकर के पलटते ही उसमें भरा ज्वलनशील पदार्थ सड़क पर फैल गया और कुछ ही क्षणों में आग ने विकराल रूप धारण कर लिया।   प्रशासन और राहत कार्य हादसे के बाद हाईवे पर अफरातफरी मच गई और सुरक्षा के लिहाज से एक तरफ का यातायात तुरंत बंद कर दिया गया। सूचना मिलते ही सांचौर उपखंड अधिकारी प्रमोद कुमार और सिंवाड़ा चौकी पुलिस मौके पर पहुंची। सांचौर से दमकल की गाड़ी भी मौके पर पहुंची और आग बुझाने के प्रयास शुरू किए गए।   टैंकर और जांच की स्थिति बताया जा रहा है कि यह टैंकर भारत पेट्रोलियम का था और यह पूरी तरह आग की चपेट में आ गया। चितलवाना थानाधिकारी भंवरलाल गुड़ियासर के अनुसार फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि टैंकर में कौनसा ज्वलनशील पदार्थ भरा हुआ था। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और हादसे के कारणों का पता लगाया जा रहा है।

विधानसभा में टकराव: अतिथि शिक्षकों के भविष्य पर बहस के बीच विपक्षी विधायकों का वॉकआउट

रायपुर. विधानसभा बजट सत्र के दौरान बुधवार को स्कूलों के युक्तियुक्करण के साथ-साथ अतिथि शिक्षकों की भर्ती, वेतन और नियमितिकरण के मुद्दे पर शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव को न केवल विपक्ष बल्कि सत्ता पक्ष के विधायकों ने भी घेरा. मंत्री के जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने वॉकआउट किया. सत्ता के पक्ष के विधायकों सुनील सोनी, राजेश मूणत और रोहित साहू ने स्कूलों के युक्तिकरण पर शिक्षा मंत्री को घेरा. राजेश मूणत ने कहा कि युक्तियुक्करण के बाद स्कूलों की स्थिति ख़राब है. मैंने स्वयं दरी ख़रीद कर दी. शिकायत के बाद भी परीक्षण करने अधिकारी नहीं पहुंचे. मूणत के आरोप पर मंत्री ने परीक्षण कराने की बात कही. इस पर आसंदी ने मंत्री को 30 मार्च तक सभी स्कूलों की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए. विधायक सुनील कुमार सोनी ने शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव से सवाल किया कि स्कूल शिक्षा विभाग के द्वारा कितनी शालाओं का युक्तियुक्तकरण किया गया, एक वर्ष में जहां जहां स्कूल भवन खाली हुए है उसका उपयोग कहा हुआ है. शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने जवाब दिया कि स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा विगत वर्ष पूरे प्रदेश में 10538 शालाओं का युक्तियुक्तकरण किया गया हैं, जहां भी खाली भवन हैं वहां स्मार्ट स्कूल, लैब बनाया जाएगा. 10,372 शालाओं का उपयोग हुआ हैं, और 166 स्कूल का उपयोग नहीं हुआ है. इस पर सुनील सोनी ने सवाल किया कि बहुत से स्कूल जर्जर हैं, कब तक नवीनीकरण होगा. इस पर गजेंद्र यादव ने कहा कि जहां-जहां आवश्यकता है, वह हम जांच करवा कर नवीनीकरण करेंगे. इस पर विधायक अजय चंद्राकर ने सवाल किया कि कितने स्कूल के लिए आपने क्या नीति बनाई. इस पर गजेंद्र यादव ने कहा कि चीजों को आसान बनाने के लिए और स्कूल में प्रयाप्त शिक्षक हो इसके लिए हमने स्कूलों और शिक्षकों का युक्तियुक्तकरण किया है. विधायक राजेश मूणत ने सवाल किया कि रायपुर जिले में कितने स्कूलों का युक्तियुक्तकरण हुआ? इस पर गजेंद्र यादव ने बताया कि रायपुर में 389 स्कूल में 385 स्कूलों का युक्तियुक्तकरण हुआ है. 4 खाली हैं. नए सत्र से 150 स्कूल शुरू होंगे जो स्वामी आत्मानंद और विवेकानंद के तर्ज पर होगा. विपक्ष ने अतिथि शिक्षकों की भर्ती, वेतन और नियमितिकरण का मुद्दा उठाया. विपक्ष ने वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए कहा कि मोदी की गारंटी में नियमितीकरण का वादा था. ढाई साल बाद भी सरकार वादा नहीं पूरा कर पाई. इस पर मंत्री के जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने वॉकआउट किया.

मायावती का बड़ा हमला: बोलीं- सपा-कांग्रेस दलित विरोधी, चुनाव नजदीक आते ही बदलता है रवैया

लखनऊ बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उन पर “दलित विरोधी” राजनीति में लिप्त होने और बसपा संस्थापक कांशीराम की विरासत का चुनावी लाभ के लिए लाभ उठाने का प्रयास करने का आरोप लगाया। मायावती ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ, सपा और कांग्रेस दलित वोट के स्वार्थ में एक “सोची-समझी रणनीति” के तहत कांशीराम की जयंती मना रही हैं। उन्होंने कांग्रेस पर यह कहते हुए निशाना साधा कि कांग्रेस पार्टी केन्द्र में अपनी सरकार रहने के दौरान कांशीराम को ‘भारतरत्न’ की उपाधि नहीं दी और अब दूसरी पार्टी की सरकार से देने की मांग कर रही है। उन्होंने कहा, ”यह हास्यास्पद नहीं है तो क्या है?” मायावती ने दावा किया कि सपा और कांग्रेस ने शुरू से ही, बसपा को ख़त्म करने में लगी रहीं, जिस पार्टी की स्थापना कांशीराम ने की थी। उन्होंने कहा कि उसे कांशीराम की ‘एकमात्र उत्तराधिकारी” व बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष के जीते-जी कोई हिला नहीं सकता है। उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने पार्टियों पर कांशीराम के जीते जी उनकी उपेक्षा करने और अब उनकी विरासत का फायदा उठाने की कोशिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांशीराम के सम्मान में तत्कालीन बसपा सरकार द्वारा किये गये कार्यों को भी तत्कालीन सपा सरकार द्वारा ”अधिकांशः बदल दिया गया। यह है इन पार्टियों का इनके प्रति दोग़ला चाल व चरित्र।” मायावती ने प्रतिद्वंद्वी दलों के समर्थकों को चुप रहने की सलाह देते हुए कांशीराम की पुस्तक उल्लेख किया और कहा कि ”ऐसे लोगों से दूरी बनाने के लिए ही कांशीराम जी ने ‘चमचा युग’ के नाम से अंग्रेज़ी में एक किताब भी लिखी है।” कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने हाल ही में कांशीराम के लिए भारत रत्न की मांग की थी और इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को एक पत्र लिखा था।  

उपमुख्यमंत्री शुक्ल ने कहा, रीवा-रायपुर हवाई सेवा से विकास में तेजी आएगी

रीवा-रायपुर हवाई सेवा से बढ़ेगी विकास की रफ्तार : उप मुख्यमंत्री  शुक्ल रीवा-रायपुर हवाई सेवा से बढ़ी नजदीकियां भोपाल /रायपुर उप मुख्यमंत्री  राजेन्द्र शुक्ल दो दिवसीय रायपुर प्रवास में विभिन्न धार्मिक, सामाजिक और शिष्टाचार भेंट कार्यक्रमों में शामिल हुए। मंगलवार को रायपुर आगमन पर उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने वीआईपी रोड स्थित राम मंदिर में दर्शन कर प्रदेशवासियों के सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। इसके बाद वे क्वींस क्लब में विंध्य समाज द्वारा आयोजित सम्मान समारोह में शामिल हुए, जहां उनका भव्य स्वागत किया गया। उप मुख्यमंत्री  शुक्ल ने कहा कि रीवा से रायपुर के लिए शुरू हुई हवाई सेवा से क्षेत्र के लोगों को बड़ी राहत मिली है। उन्होंने कहा कि किसी भी क्षेत्र के विकास के लिए सड़कों और रेल सेवाओं का बेहतर होना जरूरी है। इससे पहले रीवा से दिल्ली और इंदौर के लिए हवाई सेवाएं प्रारंभ हो चुकी हैं, जिससे व्यापार और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। उन्होंने रीवा से दुर्ग तक ट्रेन सेवा जल्द शुरू करने के लिए सकारात्मक प्रयास करने का आश्वासन दिया। कार्यक्रम में विंध्याचल कल्याण सर्व समाज द्वारा उप मुख्यमंत्री  शुक्ल का अभिनंदन किया गया। यह हवाई सेवा केवल दूरी ही नहीं, बल्कि दिलों को भी जोड़ने का करेगी कार्य :  जायसवाल इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री  श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश के बीच संबंध बहुत गहरे हैं। उन्होंने कहा कि यह हवाई सेवा केवल दूरी ही नहीं, बल्कि दिलों को भी जोड़ने का कार्य करेगी। विधायक  किरण सिंहदेव ने कहा कि रीवा से रायपुर के लिए हवाई सेवा शुरू होना एक महत्वपूर्ण पहल है, जिससे आवागमन आसान हो गया है। कार्यक्रम में विधायक  मोतीलाल साहू, रीवा के पूर्व विधायक  के.पी. त्रिपाठी, समाज के संरक्षक  शंकर सिंह गहरवार, अध्यक्ष  कल्याण प्रसाद पांडेय, डॉ. व्यास मुनि द्विवेदी,  मधुकर द्विवेदी सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।  

एमपी में LPG संकट गहरा, 70% बढ़ी मांग; होटल-रेस्टोरेंट को 10% कमर्शियल सिलेंडर देने की गाइडलाइन, आदेश का इंतजार

भोपाल  मध्य प्रदेश में एलपीजी की किल्लत लगातार बनी हुई है और इसका असर खास तौर पर होटल व रेस्टोरेंट कारोबार पर साफ दिखाई दे रहा है. लगातार आठवें दिन भी कमर्शियल गैस सिलेंडर की सप्लाई नहीं हो पाई है. हालांकि ऑयल कंपनियों ने नई गाइडलाइन में कुछ राहत देने के संकेत दिए हैं, जिसमें 10 प्रतिशत तक कमर्शियल सिलेंडर उपलब्ध कराने की बात कही गई है, लेकिन अभी तक इस संबंध में कोई स्पष्ट आदेश जारी नहीं हुए हैं. उम्मीद जताई जा रही है कि यदि बुधवार को निर्देश मिलते हैं तो प्रदेश के करीब 50 हजार होटल और रेस्टोरेंट को राहत मिल सकती है. घरेलू सिलेंडर की मांग में तेज उछाल दूसरी ओर, इस संकट का असर घरेलू गैस उपभोक्ताओं पर भी पड़ रहा है. कमर्शियल सिलेंडर की कमी के चलते घरेलू सिलेंडर की मांग अचानक करीब 70 प्रतिशत तक बढ़ गई है. इसके कारण अब उपभोक्ताओं को सिलेंडर के लिए 3 से 4 दिन तक इंतजार करना पड़ रहा है. भोपाल के फूड कंट्रोलर चंद्रभान सिंह जादौन के अनुसार शहर में करीब साढ़े 5 लाख गैस कनेक्शन हैं, जिनमें 80 हजार कमर्शियल और 4.70 लाख घरेलू कनेक्शन शामिल हैं. पहले जहां रोजाना करीब 8500 सिलेंडर बुक होते थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 14 हजार तक पहुंच गई है, जिससे सप्लाई और मांग के बीच बड़ा अंतर पैदा हो गया है. इधर, एलपीजी संकट के बाद प्रदेश में घरेलू सिलेंडर की डिमांड 70 प्रतिशत तक बढ़ गई है। इस वजह से वेटिंग 3 से 4 दिन तक चल रही है। भोपाल के फूड कंट्रोलर चंद्रभान सिंह जादौन ने बताया कि भोपाल में साढ़े 5 लाख घरेलू-कमर्शियल सिलेंडर कनेक्शन हैं। इनमें 80 हजार कमर्शियल और 4.70 लाख घरेलू सिलेंडर कनेक्शन शामिल हैं। 7 दिन पहले तक भोपाल में हर रोज एवरेज 8500 सिलेंडर की बुकिंग होती थी, जो अब 14 हजार तक पहुंच गई है। डिमांड बढ़ने से 5 से 6 हजार सिलेंडर का अंतर आ गया। इस वजह से आंकड़ा 48 हजार तक पहुंच गया है। सिलेंडर सप्लाई बढ़ाई फूड कंट्रोलर जादौन ने बताया, पिछले 2-3 दिन में भेपाल में ही रोजाना 12 से 13 हजार सिलेंडर की सप्लाई कर रहे हैं। अगले 3 से 4 दिन में क्लियर कर देंगे। भरत और एचपी कंपनी की ऑनलाइन और इंडेन की ऑफलाइन बुकिंग की जा रही है। इंडेन के सबसे ज्यादा 65% तक कनेक्शन हैं। गाइडलाइन आई, आदेश का इंतजार कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई को लेकर मंगलवार को ऑयल कंपनियों की नई गाइडलाइन आई। जिसमें 12 कैटेगिरी को कमर्शियल सिलेंडर देने की बात कही गई है। इनमें रेस्टोरेंट, होटल और ढाबों को खपत की 10% आपूर्ति भी शामिल हैं। फूड कंट्रोलर जादौन ने बताया कि विस्तृत आदेश आएंगे, तब सप्लाई शुरू कर देंगे। महाराष्ट्र में 70% सप्लाई, एमपी में भी हो एमपी होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष सुमित सूरी ने बताया, एसोसिएशन को महाराष्ट्र के उपहार गृहों में 70 प्रतिशत रिलीफ यानी, सिलेंडर दिए जाने के आदेश मिले हैं। एमपी में भी ये आदेश आ सकते हैं। फिलहाल मंगलवार को भी कमर्शियल सिलेंडर नहीं दिया गया। इस कारण प्रदेश के 50 हजार से अधिक होटल और रेस्टोरेंट में समस्या बनी रही। यदि इन्हें भी सिलेंडर मिलेंगे तो यह होटल इंडस्ट्री के लिए ‘ऑक्सीजन’ मिलने जैसा रहेगा। पिछले 8 दिन से सप्लाई नहीं होने से भोपाल, इंदौर समेत कई जिलों में होटल-रेस्टोरेंट में गैस का स्टॉक खत्म हो रहा है। वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में इंडक्शन, डीजल भट्‌ठी के इंतजाम जरूर किए हैं, लेकिन यह बहुत ही खर्चिला है। इसलिए मेन्यू में बदलाव करने की गाइडलाइन जारी की। सिलेंडर की कमी और ग्राहकों की संख्या कम होने के बावजूद प्रदेश के किसी भी होटल या रेस्टोरेंट से कर्मचारियों को नहीं निकाला गया।

मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में अब तक कराई जा चुकी पांच लाख बेटियों की शादी

1.75 लाख से अधिक बेटियों को मिली सरकारी नौकरी  मुख्यमंत्री ने महिला कल्याण के कार्यों को भी गिनाया  मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना में अब तक कराई जा चुकी पांच लाख बेटियों की शादी  लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपनी सरकार के महिला कल्याण के कार्यों को भी गिनाया। बताया कि प्रदेश में 9 लाख से अधिक सरकारी भर्ती हुईं। इसमें 1.75 लाख से अधिक बेटियों की भर्ती की गई। स्वयंसेवी समूह की 1.10 करोड़ से अधिक महिलाएं प्रदेश में आजीविका दीदी के रूप में उद्यमी बनकर कार्य कर रहीं हैं। इस बार के बजट में महिला उद्मयी स्कीम के अंतर्गत अलग से पैसे की व्यवस्था की गई है। पीएम के बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान, मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना (जन्म से स्नातक तक) 25 हजार का पैकेज, बेटी की शादी के लिए एक लाख रुपये की सहायता सामूहिक विवाह योजना में दी जा रही है। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के अंतर्गत अब तक पांच लाख बेटियों की शादी संपन्न कराई जा चुकी है।  जल्द ही पेंशन में वृद्धि करेगी कैबिनेट सीएम ने निराश्रित महिला, वृद्ध व दिव्यांगजन पेंशन की भी चर्चा करते हुए बताया कि 1.06 करोड़ से अधिक परिवारों को प्रदेश सरकार 12 हजार रुपये वार्षिक पेंशन उपलब्ध करा रही है। इनके कल्याण के लिए कैबिनेट जल्द ही इसमें वृद्धि का भी निर्णय लेगा। सरकार स्नातक व परास्नातक की मेधावी बेटियों को स्कूटी भी उपलब्ध कराएगी। बेटी की सुरक्षा, सम्मान व स्वावलंबन के लिए मिशन शक्ति का कार्यक्रम भी चल रहा है। उप्र के प्रतिभावान युवाओं के लिए नौकरी, रोजगार व स्वरोजगार भी उपलब्ध कराया जा रहा है। एमएसएमई में तीन करोड़ से अधिक रोजगार, बड़े निवेश के माध्यम से 65 लाख से अधिक नौकरियां उपलब्ध कराईं। सीएम युवा उद्यमी विकास अभियान के अंतर्गत अब तक 1.30 लाख से अधिक नए उद्यमी उत्तर प्रदेश में बने हैं। सरकार दो करोड़ से अधिक नौजवानों को टैबलेट देगी, इसमें से 50 लाख युवाओं को टैबलेट दिया जा चुका है, शेष को भी जल्द ही उपलब्ध होगा।

विश्व बैंक की यह पहल उत्तर प्रदेश को पर्यावरण-अनुकूल सतत विकास प्राप्त करने में मजबूती प्रदान करेगी

वायु गुणवत्ता में सुधार लाने के उद्देश्य से विश्व बैंक और यूपी सरकार के बीच समझौते पर हस्ताक्षर यूपी क्लीन एयर मैनेजमेंट प्रोग्राम को लगभग 300 मिलियन डॉलर की मदद प्रदान करेगा विश्व बैंक विश्व बैंक की यह पहल उत्तर प्रदेश को पर्यावरण-अनुकूल सतत विकास प्राप्त करने में मजबूती प्रदान करेगी लखनऊ उत्तर प्रदेश में वायु गुणवत्ता में सुधार लाने के उद्देश्य से विश्व बैंक, भारत सरकार और प्रदेश सरकार ने एक महत्वपूर्ण समझौते पर नई दिल्ली में हस्ताक्षर किए हैं। यह समझौता उत्तर प्रदेश स्वच्छ वायु प्रबंधन कार्यक्रम (यूपी क्लीन एयर मैनेजमेंट प्रोग्राम) को 299.66  मिलियन अमेरिकी डॉलर की सहायता प्रदान करेगा। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य परिवहन, कृषि और उद्योग जैसे प्रमुख क्षेत्रों में वायु की गुणवत्ता और स्वच्छता के लिए एकीकृत समाधानों को बढ़ावा देना है, जिसका लाभ यूपी के साथ-साथ पड़ोसी राज्यों को भी मिलेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन को ध्यान में रखते हुए विश्व बैंक के साथ इस एमओयू को साइन किया गया। एमओयू पर उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से स्वच्छ वायु प्रबंधन प्राधिकरण की सीईओ एवं वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की सचिव बी. चंद्रकला,  भारत सरकार की ओर से आर्थिक मामलों के विभाग की संयुक्त सचिव जूही मुखर्जी और विश्व बैंक की ओर से भारत के कार्यवाहक कंट्री डायरेक्टर पॉल प्रोसी ने हस्ताक्षर किए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कहना है कि उत्तर प्रदेश 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में अग्रसर है। आर्थिक विकास, उत्पादकता और पर्यावरणीय संतुलन एक-दूसरे के पूरक हैं। इस कार्यक्रम से समृद्धि केवल जीडीपी से नहीं, बल्कि स्वच्छ आकाश, स्वस्थ नागरिकों और सतत एवं स्थायी पर्यावरण से मापी जाएगी। विश्व बैंक के भारत के कार्यवाहक कंट्री डायरेक्टर पॉल प्रोसी का कहना है कि यह कार्यक्रम प्रदेश में परिवहन और एमएसएमई क्षेत्रों में लगभग 150 मिलियन डॉलर की निजी पूंजी का लाभ प्रदान करेगा। साथ ही इलेक्ट्रिक बसों और तीन-पहिया वाहनों में निवेश, उद्योगों में उत्सर्जन निगरानी प्रणालियों और स्वच्छ प्रौद्योगिकियों के प्रयोग से फर्मों की उत्पादकता में सुधार करने में मदद करेगा।  यह कार्यक्रम प्रदेश के 3.9 मिलियन घरों को स्वच्छ खाना पकाने की सुविधा, 700 से अधिक ईंट भट्ठों को संसाधन-कुशल प्रौद्योगिकी को अपनाने में सहायता प्रदान करेगा। साथ ही किसानों की उत्पादकता बढ़ाने के लिए कुशल उर्वरक के प्रयोग को प्रेरित करेगा। यह कार्यक्रम विश्व बैंक के इंडो-गंगा मैदान और हिमालयी तलहटी क्षेत्रीय वायु गुणवत्ता प्रबंधन कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसकी परिपक्वता अवधि 10 वर्ष है। विश्व बैंक और उत्तर प्रदेश सरकार की यह पहल न केवल प्रदेश को वायु प्रदूषण से निपटने में मदद करेगी, बल्कि पर्यावरण-अनुकूल सतत विकास की दिशा में भी मजबूती प्रदान करेगी।

श्रद्धा कपूर की शादी की योजना, 39 की उम्र में राहुल मोदी के साथ बांधेंगी शादी का बंधन

मुंबई बॉलीवुड की ब्यूटी क्वीन श्रद्धा कपूर अपनी शादी को लेकर चर्चा में बनी हुई हैं. लंबे समय से श्रद्धा का नाम राइटर राहुल मोदी संग जुड़ रहा है. दोनों अपनी शादी को लेकर भी अक्सर सुर्खियों में बने रहते हैं. फैंस को भी श्रद्धा को दुल्हन के जोड़े में देखने का इंतजार है. अब श्रद्धा की शादी पर उनकी मौसी तेजस्विनी कोल्हापुरे ने चुप्पी तोड़ी है।  कब दुल्हन बनेंगी श्रद्धा? फ्री प्रेस जर्नल संग बातचीत में श्रद्धा कपूर की मौसी तेजस्विनी कोल्हापुरे ने एक्ट्रेस की शादी को लेकर बात की. श्रद्धा की वेडिंग न्यूज पर उन्होंने हैरानी जताते हुए कहा- सच में? मुझे इस बारे में नहीं पता. मुझे तो कोई आइडिया ही नहीं है।  तेजस्विनी कोल्हापुरे ने श्रद्धा की तारीफ करते हुए ये भी कहा कि उन्हें गर्व है कि एक्ट्रेस अपने परिवार की लीगेसी को आगे लेकर गई हैं. उन्होंने कहा कि श्रद्धा ने जिस ग्रेस के साथ परिवार के नाम को रोशन किया है उससे वो बहुत ज्यादा खुश हैं। श्रद्धा संग कैसा है बॉन्ड? श्रद्धा कपूर की मौसी, तेजस्विनी कोल्हापुरे ने ये भी बताया कि वो और श्रद्धा एक दूसरे के काम को डिस्कस करती हैं. दोनों सेट से तस्वीरें, वीडियो और अलग-अलग फिल्मों में एक-दूसरे के लुक शेयर करती हैं. तेजस्विनी ने यह भी बताया कि वो और श्रद्धा एक-दूसरे को सलाह तभी देती हैं, जब उन्हें लगता है कि किसी चीज में वाकई सुधार किया जा सकता है। श्रद्धा कपूर और राहुल मोदी की बात करें तो 2024 से दोनों की डेटिंग की चर्चा है, जब उन्हें डिनर डेट पर स्पॉट किया गया था. दोनों वेकेशन से लेकर कई इवेंट्स तक साथ नजर आते हैं. हालांकि, श्रद्धा और राहुल ने कभी ऑफिशियली अपने रिश्ते को कंफर्म नहीं किया है. मगर दोनों की केमिस्ट्री चर्चा में बनी रहती है. फैंस को अब उन दोनों की शादी का बेसब्री से इंतजार है। श्रद्धा के बॉयफ्रेंड राहुल मोदी पेशे से एक राइटर और फिल्ममेकर हैं. श्रद्धा की बात करें तो एक्ट्रेस जल्द ही फिल्म ‘ईथा’ में नजर आने वाली हैं।  

हिंदू नववर्ष 2026 में बदल रहा संवत: आपके भाग्य और भविष्य पर क्या होगा प्रभाव?

अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार भले ही नया साल 1 जनवरी को आता है, लेकिन भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा के अनुसार असली नववर्ष चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होता है. वर्ष 2026 में यह शुभ दिन 19 मार्च, गुरुवार को पड़ रहा है. इसी दिन से विक्रम संवत 2083 का आगाज़ होगा. इस बार का नववर्ष न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि ज्योतिषीय गणना के अनुसार भी बेहद खास होने वाला है. आइए जानते हैं क्या है संवत 2083 का नाम, इसके राजा-मंत्री और इसके महत्व के बारे में. संवत 2083 का नाम क्या है? ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, हर साल का एक विशिष्ट नाम होता है. विक्रम संवत 2083 को रौद्र संवत्सर के नाम से जाना जाएगा. रौद्र भगवान शिव का एक रूप है, जो अनुशासन, शक्ति और परिवर्तन का प्रतीक है. माना जा रहा है कि यह साल वैश्विक स्तर पर बड़े नीतिगत बदलावों और साहसिक निर्णयों का गवाह बनेगा. इस बार राजा गुरु और मंत्री मंगल इस बार नववर्ष गुरुवार से शुरू हो रहा है, इसलिए इस साल के राजा देवगुरु बृहस्पति होंगे. गुरु के राजा होने से शिक्षा, धर्म और आध्यात्मिकता के क्षेत्र में प्रगति होगी. समाज में नैतिकता बढ़ेगी और ज्ञान का प्रसार होगा. वहीं इस साल के मंत्री मंगल देव होंगे. राजा गुरु और मंत्री मंगल का यह मेल बताता है कि इस साल दुनिया भर में कड़े और अनुशासन प्रिय फैसले लिए जाएंगे. सैन्य शक्ति और तकनीक के क्षेत्र में भारत का दबदबा बढ़ सकता है. 12 नहीं, इस बार होंगे 13 महीने संवत 2083 की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह 13 महीनों का साल होगा. गणना के अनुसार, इस वर्ष ज्येष्ठ का अधिक मास (मलमास) जुड़ रहा है. अधिक मास के कारण यह साल 354 दिनों के बजाय लगभग 384 दिनों का होगा. यह समय आध्यात्मिक शुद्धि और दान-पुण्य के लिए बहुत ही अच्छा माना जाता है. नववर्ष का पौराणिक और वैज्ञानिक महत्व क्या है? मान्यता है कि इसी दिन ब्रह्मा जी ने ब्रह्मांड की रचना शुरू की थी. यह वह समय है जब पेड़ों पर नई पत्तियां आती हैं और फसलें पककर तैयार होती हैं. वैज्ञानिक रूप से भी यह ऋतु परिवर्तन का काल है जो नई ऊर्जा का संचार करता है. इसी दिन महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा, दक्षिण भारत में उगादी और उत्तर भारत में चैत्र नवरात्रि का महापर्व शुरू होता है. राशियों पर क्या प्रभाव होगा? ज्योतिषियों के अनुसार, राजा गुरु और मंत्री मंगल की यह जुगलबंदी मिथुन, तुला, धनु और मीन राशि के जातकों के लिए विशेष रूप से फलदायी रहने वाली है. इन राशियों को करियर में तरक्की और आर्थिक लाभ के प्रबल योग बनेंगे. कुल मिलाकर नया हिंदू नववर्ष नई उम्मीदों और बदलावों के साथ आ रहा है.

अंबेडकरनगर में ड्रग फैक्ट्री पर छापा, 20 करोड़ का मेफेड्रोन किया गया बरामद

अंबेडकरनगर/अहमदाबाद  गुजरात एटीएस ने ड्रग्स के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए उत्तर प्रदेश के अंबेडकरनगर (Ambedkar Nagar) जिले में चल रही अवैध मेफेड्रोन (MD) फैक्ट्री का पर्दाफाश किया है. इस ऑपरेशन में करीब 20 करोड़ रुपये की ड्रग्स और केमिकल जब्त किए गए हैं. कार्रवाई के दौरान खेत में छिपाकर बनाई गई फैक्ट्री से 6 किलो मेफेड्रोन, 50 किलो लिक्विड मेफेड्रोन और भारी मात्रा में कच्चा माल बरामद हुआ है. इस मामले में दो आरोपियों को मौके से गिरफ्तार किया गया है. इससे पहले गुजरात में तीन लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी थी. इस तरह अब तक कुल पांच आरोपी पुलिस के शिकंजे में आ चुके हैं. एटीएस इस पूरे नेटवर्क को खंगालने में जुटी है. इस पूरे मामले की शुरुआत 1 मार्च को मिली एक खुफिया सूचना से हुई थी. गुजरात एटीएस के डिप्टी एसपी एसएल चौधरी को सूचना मिली थी कि अहमदाबाद में ड्रग्स की सप्लाई हो रही है. इसके आधार पर गोमतीपुर इलाके से शफात अहमद फारूकी को गिरफ्तार किया गया. उसके पास से 4.6 ग्राम एमडी बरामद की गई थी. शुरुआती पूछताछ में उसने ड्रग्स सप्लाई करने वाले दो अन्य लोगों के नाम बताए. इसके बाद जांच का दायरा तेजी से बढ़ाया गया. पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए नेटवर्क को ट्रेस करना शुरू किया. यहीं से यूपी कनेक्शन सामने आया. शफात की निशानदेही पर एटीएस ने अहमदाबाद के दाणीलीमड़ा इलाके में रहने वाले सोहेल मिर्जा और फरहान पठान को गिरफ्तार किया. सोहेल के पास से 300 ग्राम एमडी बरामद हुई. तीनों आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया. पूछताछ के दौरान सामने आया कि यह ड्रग्स उन्हें उत्तर प्रदेश से मिल रही थी. इससे जांच की दिशा पूरी तरह बदल गई. एटीएस को यह भी पता चला कि असली सप्लायर यूपी में बैठे हैं. इसके बाद टीम ने पूरे नेटवर्क को खंगालना शुरू किया. पूछताछ में खुलासा हुआ कि सोहेल को 300 ग्राम एमडी यूपी के पंकज और कपिल ने सप्लाई की थी. ये दोनों आरोपी खुद ड्रग्स बनाते थे और फिर देश के अलग-अलग हिस्सों में भेजते थे. गुजरात एटीएस ने ह्यूमन इंटेलिजेंस के जरिए दोनों का लोकेशन ट्रेस किया. लोकेशन उत्तर प्रदेश के आंबेडकरनगर जिले में मिली. इसके बाद अहमदाबाद से एटीएस की टीम यूपी के लिए रवाना हुई. स्थानीय पुलिस से भी संपर्क किया गया. संयुक्त ऑपरेशन की योजना बनाकर रेड की तैयारी की गई. ड्रग्स फैक्ट्री का खुलासा एटीएस की टीम ने आंबेडकरनगर पुलिस के साथ मिलकर रामपुर करई इलाके में एक खेत में छापा मारा. यहां एक टीन शेड बनाया गया था, जो बाहर से देखने पर पोल्ट्री फार्म जैसा लगता था. लेकिन अंदर मेफेड्रोन बनाने की फैक्ट्री चल रही थी. इसी जगह से पंकज और कपिल को गिरफ्तार किया गया. दोनों पिछले करीब चार महीने से यहां ड्रग्स बना रहे थे. फैक्ट्री को बेहद गुप्त तरीके से तैयार किया गया था ताकि किसी को शक न हो. यह पूरा ऑपरेशन बेहद योजनाबद्ध तरीके से चल रहा था. रेड के दौरान एटीएस को बड़ी सफलता मिली. मौके से 6 किलो मेफेड्रोन, 50 किलो लिक्विड मेफेड्रोन, 88 किलो 2-ब्रोमो-4 मिथाइल प्रोपियोफेनोन और 200 किलो केमिकल बरामद किया गया. इन सभी की बाजार कीमत करीब 20 करोड़ रुपये आंकी गई है. जांच में यह भी सामने आया कि बरामद 88 किलो केमिकल से करीब 25 किलो और एमडी बनाई जा सकती थी. यानी यह फैक्ट्री बड़े स्तर पर ड्रग्स उत्पादन कर रही थी. एटीएस ने पूरे सामान को जब्त कर लिया है. गिरफ्तार आरोपियों में कपिल (31) और पंकज (30) शामिल हैं. कपिल 12वीं पास है जबकि पंकज 10वीं तक पढ़ा है. दोनों एक ही गांव के रहने वाले हैं और पिछले चार महीने से ड्रग्स का कारोबार कर रहे थे. गुजरात एटीएस उन्हें यूपी से अहमदाबाद लेकर गई है. कोर्ट में पेश करने के बाद 12 दिन का रिमांड हासिल किया गया है. रिमांड के दौरान उनसे नेटवर्क, सप्लाई चेन और अन्य साथियों के बारे में पूछताछ की जाएगी. पुलिस को उम्मीद है कि इससे बड़े नेटवर्क का खुलासा होगा. अब तक कुल पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है. अधिकारियों का कहना है कि आरोपियों के मोबाइल फोन का डेटा खंगाला जा रहा है. इससे यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि ड्रग्स की सप्लाई देश के किन-किन हिस्सों में की गई. साथ ही यह भी जांच हो रही है कि इन्हें ड्रग्स बनाने की तकनीक और कच्चा माल कहां से मिला. एटीएस का कहना है कि जल्द ही इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों को भी गिरफ्तार किया जाएगा.

सावधान! परिवार की ये 4 बातें अगर बाहर गईं, तो हो सकता है भारी नुकसान!

हर फैमिली की कुछ प्राइवेट बातें होती हैं, जो घर की चारदीवारी तक ही रहें तो बेहतर होता है। लेकिन कई बार हम अपने पड़ोसी, रिश्तेदारों या दोस्तों के साथ इन्हें शेयर कर बैठते हैं। उस समय तो सिर्फ यही लगता है कि मन हल्का हो रहा है और शायद बात इतनी सीरियस भी नहीं है। लेकिन फिर बाद में यही बातें जब आपके खिलाफ काम करने लगती हैं, तब पछतावे के सिवा कुछ और बचता ही नहीं है। अगर जीवन में सफलता और सम्मान चाहिए तो एक बात गांठ बांध लें कि परिवार से जुड़ी कुछ बातें खुद तक ही रखें ताकि लोगों को आपके खिलाफ ताकत ना मिले। ऐसी ही कुछ 4 जरूरी बातें हैं जो अपने तक रखना बहुत जरूरी है, भले ही ये आपको नॉर्मल लगें लेकिन जरा सी चूक और लोग आपको जज करने में समय नहीं लगाते। आइए जानते हैं कौन सी वो बातें हैं। अपने परिवार की आर्थिक स्थिति कभी किसी को ना बताएं पहली और सबसे जरूरी बात है कि अपने परिवार की आर्थिक स्थिति किसी और के साथ साझा ना करें। चाहे घर की आर्थिक स्थिति मजबूत चल रही हो या कमजोर, दोनों ही बातें सिर्फ खुद तक रखनी चाहिए। इससे लोग आपके सामर्थ्य का गलत अनुमान लगा सकते हैं, जो आगे चलकर नुकसान का कारण बन सकता है। घर के अंदर होने वाले कलेश या विवाद अपना मन हल्का करने के लिए अगर आप भी बाहर वालों के साथ घर में चल रहे कलेश या विवाद शेयर कर देते हैं, तो ये आदत भारी पड़ सकती है। यही वो बातें हैं जो समय आने पर आपके खिलाफ काम कर सकती हैं और परिवार में फूट डालने का कारण भी बन सकती हैं। लोग आपके कलेश सुन तो लेते हैं और सामने से सहानुभूति भी दिखाते हैं, लेकिन पीठ पीछे अक्सर मजाक बनाते हैं और आपके लड़ाई-झगड़े उनके लिए सिर्फ एंटरटेनमेंट का एक सोर्स होते हैं। अपने परिवार की फ्यूचर प्लानिंग अगले कुछ सालों में घर खरीदना हो, बच्चों के करियर से जुड़ी कोई प्लानिंग हो या नया बिजनेस शुरू करना हो; परिवार से जुड़ी फ्यूचर प्लानिंग लोगों के साथ कभी शेयर नहीं करनी चाहिए। नजर लगने जैसी चीज भले ही अंधविश्वास हो लेकिन ये भी सच है कि हर कोई आपकी सफलता से खुश नहीं होता है। ज्यादा चर्चा से दबाव भी बढ़ता है और फिर असफल होने पर अक्सर लोगों के ताने और मजाक भी झेलने पड़ते हैं। इसलिए बेहतर रहेगा कि जब तक काम पूरा ना हो जाए, योजनाओं को अपने तक ही सीमित रखें। हर परिवार में कुछ ना कुछ कमजोरियां होती हैं, भले ही वह आर्थिक हों, भावनात्मक हों या फिर आपस के मतभेद हों। लेकिन इन कमजोरियों को कभी भी बाहर वालों के साथ शेयर नहीं करना चाहिए, भले भी वो आपके कितनी भी करीबी हों। ये बातें सामने आने से लोगों को आपके खिलाफ पावर मिलती है, जिसका लोग कभी भी फायदा उठा सकते हैं।

JNV Class 6 Result 2026: आगे की प्रक्रिया, डॉक्यूमेंट्स और एडमिशन स्टेप्स समझें

नई दिल्ली  नवोदय विद्यालय समिति (NVS) ने क्लास 6 एडमिशन टेस्ट का रिजल्ट जारी कर दिया है। जवाहर नवोदय विद्यालय (जेएनवी) क्लास 6 में एडमिशन के लिए फेज-I की जवाहर नवोदय विद्यालय चयन परीक्षा (JNVST) दिसंबर 2025 में आयोजित की गई थी। लाखों विद्यार्थियों ने ने इस एडमिशन टेस्ट के लिए आवेदन किया था। रिजल्ट जारी होने के बाद अब मेरिट लिस्ट के आधार पर डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन (डीवी) और एडमिशन की प्रक्रिया शुरू होगी। अलॉट हुए स्कूल जाकर जरूरी डॉक्यूमेंट्स दिखाने होंगे। जवाहर नवोदय विद्यालय में एडमिशन के लिए कोई फीस नहीं ली जाती। अब कैसे होगा दाखिला महज प्रवेश परीक्षा पास कर उसमें चयन होने से जवाहर नवोदय विद्यालय में दाखिला सुरक्षित नहीं होगा। वास्तविक एडमिशन लेने के दौरान प्रत्येक चयनित विद्यार्थी को नवोदय विद्यालय समिति द्वारा निर्धारित सभी संबंधित ऑरिजनल सर्टिफिकेट दिखाने होंगे। एडमिशन तक परीक्षा में चयन केवल प्रोविजनल है। उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि वे संबंधित जेएनवी द्वारा दस्तावेजों के सत्यापन और एडमिशन की पुष्टि किए जाने के बाद ही मूल स्कूल से टीसी के लिए आवेदन करें। रिजल्ट के बाद की चयन प्रक्रिया – डॉक्यूमेंट वेरीफिकेशन, मेडिकल चेकअप, एडमिशन फॉर्म भरना, स्कूल अलॉटमेंट । एनवीएस चयनित छात्र-छात्राओं के साथ-साथ प्रतीक्षा में रखे गए स्टूडेंट्स के लिए वेट-लिस्ट भी जारी करेगा। दाखिले के लिए पैरेंट्स को अपने जिले के नवोदय विद्यालय में संपर्क करना होगा। तैयार रखें ये डॉक्यूमेंट- वेरीफिकेशन के लिए जरूरी डॉक्यूमेंट्स की लिस्ट जन्म प्रमाण पत्र आधार कार्ड निवास (Residence) प्रमाण कास्ट/कैटेगरी सर्टिफिकेट (यदि लागू) पासपोर्ट साइज फोटो पिछली कक्षा की मार्कशीट ट्रांसफर सर्टिफिकेट कक्षा 6 से 8 तक कोई फीस नहीं नवोदय विद्यालय में कक्षा 6 से 8 तक कोई फीस नहीं लगती। पढ़ाई, हॉस्टल,भोजन, किताबें, यूनिफॉर्म सब कुछ फ्री मिलता है। जवाहर नवोदय विद्यालय में कक्षा 9 से 12 तक मामूली फीस ली जाती है। यूं देखें रिजल्ट – जवाहर नवोदय विद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट, navodaya.gov.in पर जाएं। – JNVST Class 6 Admission Test 2025 के लिंक पर क्लिक करें। – रजिस्ट्रेशन नंबर व डेट ऑफ बर्थ डालें। सब्मिट करने पर रिजल्ट सामने आ जाएगा।

फर्जी इलाज पर सख्ती: प्रशासन ने दो अवैध क्लीनिक बंद किए, दवाओं को किया जब्त

सक्ती/रायपुर. बगैर दस्तावेजों के चल रहे 2 क्लीनिक को सील किया गया है। साथ ही बडी संख्या में दवाईयां भी जब्त की गई है। मामला सक्ती एवं टेमर गांव का है। उक्त कार्रवाई नर्सिंग होम एक्ट के तहत की गई है। जिसके चलते अवैध क्लीनिक संचालकों में हडकंप मच गया है। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने जिले के विभिन्न क्षेत्रों में जाकर क्लीनिक एवं पैथॉलाजी लैब में जाकर जांच पडताल की। इस दौरान स्टेशन रोड सक्ती स्थित एक मकान में बिना वैध डिग्री और पंजीयन के मरीजों का इलाज करते हुए पाया गया। वहीं ग्राम टेमर क्षेत्र में भी बिना आवश्यक शैक्षणिक योग्यता और पंजीयन के चिकित्सा कार्य किए जाने की पुष्टि हुई। जांच के दौरान संबंधित व्यक्तियों द्वारा कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए जा सके, जिससे अवैध रूप से चिकित्सा कार्य करना स्पष्ट हुआ। मामले की गंभीरता को देखते हुए टीम ने तत्काल प्रभाव से दोनों क्लीनिकों को बंद करा दिया। साथ ही आगे की वैधानिक कार्रवाई जारी है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने निर्देश दिए हैं कि बिना वैध डिग्री, पंजीयन और अनुमति के किसी भी प्रकार का चिकित्सा कार्य पूर्णतः प्रतिबंधित है। ऐसे मामलों में संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ नर्सिंग होम एक्ट सहित अन्य कानूनी प्रावधानों के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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