LATEST NEWS

ट्रेंड नहीं, सेहत चुनें—आंखों पर सोच-समझकर पहनें चश्मा

आंखों की रोशनी धूमिल होने या किसी अन्य प्रकार की समस्या होने पर विशेषज्ञ चश्मा या लेंस लगाने की सलाह देते हैं। कई लोगों को तेज धूप की वजह से भी आंखों से जुड़ी परेशानियां हो सकती हैं, ऐसे में अच्छी गुणवत्ता वाले सनग्लासेस लगाने की जरूरत होती है। लेकिन कई बार ऐसा होता है कि लोग फैशन में भी यह फिर आंखों की सुंदरता बढ़ाने के लिए भी तरह-तरह के लेंसेस या फिर कोई भी सनग्लास आंखों पर लगा लेते हैं। इससे फैशनेबल दिखने का उद्देश्य तो पूरा हो जाता है लेकिन आंखों की सेहत पर बुरा प्रभाव पड़ता है। डेकोरेटिव लेंसेस होते हैं खतरनाक… आंखों के कलर को बदलने के लिए कॉस्मैटिक उद्देश्य से लगाए जाने वाले लेंसेस आंखों के लिए नुकसादायक होते हैं। इन्हें नियमित रूप से लगाने से आंखें स्थाई रूप से क्षतिग्रस्त हो सकती हैं। इन्फेक्शन: कॉन्टैक्ट लेंस लगाने से सबसे सामान्य प्रकार का इन्फेक्शन कैराटिटिस कहलाता है। लेंसेस को बिना साफ किए लगातार लगाए रहने से भी इन्फेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। किसी और का कॉन्टैक्ट लेंस लगाने या किसी और को अपना कॉन्टैक्ट लेंस लगाने देने से आई इन्फेक्शन की समस्या को बढ़ावा मिलता है। कॉर्नियल इन्फेक्शन वायरल, बैक्टीरियल या पैरासिटिक हो सकता है। स्वीमिंग करने के दौरान कलर्ड कॉन्टैक्ट लेंस पहनने से या उसे धोने से भी आंखों का इन्फेक्शन हो सकता है। ये होते हैं लक्षण: आंखों के इन्फेक्शन के प्रमुख लक्षणों में आंखों का लाल होना, लगातार आंसू बहना, धुंधलापन, रोशनी के प्रति संवेदनशीलता। कैराटिटिस की परेशानी बढ़ने पर इन्फेक्शन की गंभीर समस्या हो सकती है। इसलिए जितनी जल्दी हो सके लक्षणों के लिए अपने डॉक्टर से मिलें। कॉर्नियल अल्सर: यदि कॉर्नियल इन्फेक्शन को बिना इलाज के छोड़ दिया जाए तो अल्सर की समस्या हो सकती है, जो कि कॉर्निया में अत्यधिक सूजन पैदा कर सकता है। खो जाती है आंखों की रोशनी: कलरफुल कॉन्टैक्ट लेंसेस के कारण आंखों की रोशनी प्रभावित हो सकती है या अंधापन भी हो सकता है। कॉर्नियल अल्सर के कारण होने वाली क्षति आंखों को स्थाई रूप से खराब कर सकती है। यदि इन्फेक्शन को बढ़ने के लिए छोड़ दिया जाए तो अल्सर के कारण आंखों के कई हिस्सों में छेद जैसे बन जाते हैं। सस्ते चश्मे आंखों के दुश्मन… गर्मी के दिनों में या फिर धूप की तेज किरणों से बचने के लिए सनग्लासेस लगाते हैं लेकिन उसकी क्वालिटी से समझौता कर लेते हैं। सड़क किनारे मिलने वाले या खराब क्वालिटी वाले सनग्लासेस लगाने से आंखों से जुड़े कई सारे इन्फेक्शन और रिफ्रेक्टिव एरर हो जाती है। इस प्रकार के सनग्लासेस लगाने से आंखों में खुजली, पानी निकलना, धुंधलापन, सिरदर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि प्लास्टिक लेंस वाले विभिन्न रिफ्रेक्टिव इंडेक्स वाले, असमान ग्लास कलर वाले सनग्लासेस जो सस्ते कीमतों पर उपलब्ध होते है, इन्हें लगातार पहने रहने से आंखों से जुड़ी कई सारी परेशानियां और मायोपिया की समस्या हो सकती है। इस प्रकार के चश्मे आमतौर पर ग्लास या फाइबर से बने होते हैं, खराब क्वालिटी के सनग्लासेस से रंगों को ना पहचान पाने की परेशानी पैदा हो सकती है।  

डिजिटल दुनिया में ऋतिक रोशन की वापसी: प्राइम वीडियो संग ‘मेस’ का ऐलान

मुंबई,  प्राइम वीडियो आने वाली ऑरिजनल फिल्म ‘मेस’, ऋतिक रोशन और ईशान रोशन द्वारा उनके बैनर ‘एचआरएक्स फिल्म्स’ (फिल्मक्राफ्ट प्रोडक्शंस की एक डिवीजन) के तहत बनाई जा रही है। इस प्रोजेक्ट में राजेश ए. कृष्णन की ‘सोडा फिल्म्स लैब’ भी उनके साथ जुड़ी है।राजेश ए. कृष्णन के निर्देशन में बनने वाली इस फिल्म का प्रोडक्शन जल्द ही शुरू होने वाला है। यह कॉमेडी फिल्म स्ट्रीमिंग सर्विस और एचआरएक्स फिल्म्स (फिल्मक्राफ्ट प्रोडक्शंस की एक डिवीजन) के बीच दूसरा कोलैबोरेशन है, इससे पहले थ्रिलर सीरीज ‘स्टॉर्म’ का एलान हो चुका है। इस फिल्म की ओरिजिनल पटकथा अमेरिकी लेखक पॉल सोटर ने लिखी है, जबकि अडैप्टेड स्क्रीनप्ले और डायलॉग्स कपिल सावंत ने लिखे हैं। ‘मेस’ की कहानी लुटेरों के एक ऐसे अजीबोगरीब ग्रुप के बारे में है, जो एक ओसीडी से पीड़ित आदमी के घर में घुस जाते हैं। धीरे-धीरे उन्हें एहसास होता है कि खतरा उस परिवार को नहीं, बल्कि खुद उन्हें है और इस रात भर चलने वाली खींचतान में उनका बचना मुश्किल है। निर्माता ऋतिक रोशन ने कहा, “‘स्टॉर्म’ के साथ प्राइम वीडियो के साथ एक खास सफर की शुरुआत हुई थी और ‘मेस’ हमारी कंपनी ‘एचआरएक्स फिल्म्स’ के लिए एक अगला और स्वाभाविक कदम है।” उन्होंने कहा, “प्राइम वीडियो के साथ हमारी साझेदारी ने हमें कुछ अलग और नया कर दिखाने का मौका दिया है, और यह प्रोजेक्ट उसी सोच को पूरी तरह से दर्शाता है। राजेश (राजेश ए. कृष्णन) एक प्रोड्यूसर और डायरेक्टर के तौर पर अपनी एक अलग पहचान रखते हैं; उनके पास कॉमेडी को एक बेहतरीन कहानी के साथ जोड़ने का शानदार हुनर है। ‘मेस’ के लिए उनका नजरिया शुरू से ही कमाल का रहा है। जैसे-जैसे फिल्म का काम आगे बढ़ रहा है, मैं और ईशान इस प्रोजेक्ट को लेकर काफी उत्साहित हैं। हमारा मानना है कि यह फिल्म उन दर्शकों को बहुत पसंद आएगी जो लीक से हटकर और नई तरह की कहानियों को देखना पसंद करते हैं।”  

प्रदेश में एलपीजी आपूर्ति सुचारु:कमर्शियल उपभोक्ताओं के लिए प्राथमिकता आधारित वितरण व्यवस्था लागू

रायपुर  खाद्य सचिव मती रीना बाबा साहेब कंगाले के दिशानिर्देश पर छत्तीसगढ़ में निर्बाध एलपीजी आपूर्ति सुनिश्चित करने के साथ-साथ कमर्शियल गैस कनेक्शन वाले संस्थानों एवं प्रतिष्ठानों के लिए संतुलित और प्राथमिकता आधारित वितरण व्यवस्था केंद्रीय पेट्रोलियम एवं नैसर्गिक गैस मंत्रालय के अधीन लागू करने का निर्णय लिया गया है। खाद्य सचिव मती रीना कंगाले ने कहा कि प्रदेश में घरेलू एलपीजी की आपूर्ति सुचारु रूप से जारी रहे और आम उपभोक्ताओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि भारत सरकार एवं ऑयल कंपनियों के दिशा-निर्देशों के अनुरूप कमर्शियल उपभोक्ताओं को विगत माहों की खपत के आधार पर अधिकतम 20 प्रतिशत की सीमा के अंदर एलपीजी प्रदाय करने पर सहमति बनी है। कमर्शियल एलपीजी की उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए आवश्यक सेवाओं को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया गया है। इसके तहत शैक्षणिक संस्थानों एवं चिकित्सालयों के साथ-साथ सैन्य एवं अर्द्धसैन्य कैंप, जेल, हॉस्टल, समाज कल्याण संस्थान, रेलवे एवं एयरपोर्ट कैंटीन को पूर्ण प्राथमिकता देते हुए 100 प्रतिशत आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। वहीं शासकीय कार्यालयों, सार्वजनिक उपक्रमों एवं उनके गेस्ट हाउस और कैंटीन के लिए 50 प्रतिशत, पशु आहार उत्पादक संयंत्र एवं बीज उत्पादक इकाई  तथा रेस्टोरेंट एवं होटल के लिए 20 प्रतिशत आपूर्ति निर्धारित की गई है। उन्होंने कहा कि कमर्शियल एलपीजी के वितरण की दैनिक समीक्षा ऑयल कंपनियों द्वारा की जाएगी तथा इसकी जानकारी प्रतिदिन खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग को उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी एवं प्रभावी बनी रहे।  खाद्य सचिव मती रीना बाबासाहेब कंगाले ने कहा कि आम नागरिकों को निर्बाध एलपीजी आपूर्ति उपलब्ध कराने के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है और यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि आवश्यक सेवाओं पर किसी प्रकार का प्रभाव न पड़े, साथ ही सभी वर्गों तक संतुलित रूप से गैस की उपलब्धता बनी रहे।  

इस्लामिक दुनिया में दरार: क्यों ईरान को अलग-थलग देखना चाहते हैं उसके पड़ोसी?

वाशिंगटन अमेरिका के हमले के बाद भड़का ईरान अपने ही पड़ोसी खाड़ी देशों को निशाना बना रहा है। इसपर खाड़ी देशों ने अमेरिका से कहा है कि उसका अभियान इतना तेज होना चाहिए कि ईरान कमजोर हो जाए। हालांकि इस युद्ध में सीधे तौर पर कोई भी देश शामिल नहीं होना चाहता। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक खाड़ी देशों को डर है कि ईरान उनके तेल के ठिकानों, पोर्ट्स और समुद्री रास्तों को निशाना बना सकता है। ऐसे में उनके पास अमेरिका की ओर देखने के अलावा कोई विकल्प ही नहीं है।   अमेरिका चाहता है, खाड़ी देश भी युद्ध में कूदें अमेरिका चाहता है कि इस युद्ध में खाड़ी देश भी कूद पड़ें और होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने का खुलकर विरोध करें। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मुद्दे पर बाकी देशों का आह्वान किया है। वह चाहते हैं कि ईरान समझ जाए कि उसके ही क्षेत्र में उसके खिलाफ सारे देश खड़े हैं। सऊदी में गल्फ रिसर्टे सेंटर के चेयरमैन अब्दुलअजीज सेगर ने कहा कि सारे खाड़ी देश सोचते हैं कि ईरान ने सारी सीमाएं लांघदी हैं। उन्होंने कहा, शुरू में हमने ईरान का पक्ष लिया और अमेरिका के युद्ध का विरोध किया। हालांकि इसके बाद जब हवाई हमले हम पर भी होने लगे तो ईरान दुश्मन हो गया। ईरान से बढ़े हुए तनाव के बीच भी खाड़ी देश युद्ध में सीधे हिस्सा नहीं लेना चाहते हैं। ईरान ने यूएई समेत कई देशों के एयरपोर्ट्स को भी निशाना बनाया है। बहरीन, कुवैत, कतर, सऊदी अरब और ओमान में एयरपोर्टस पर धमाके हुए हैं। इसके अलावा ईरान के खतरनाक कदमों की वजह से समुद्री व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। युद्ध को 16 दिन से ज्यादा बीत चुके हैं। ईरान लगातार खाड़ी देशों में अमेरिका के ठिकानों और आम नागरिको को निशाना बना रहा है। डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि उनके हमलो की वजह से ईरान की सेना की कमर टूट गई है। वहीं जब होर्मुज के मुद्दे पर अमेरिका के साथ कोई नहीं आया तो वह अपने मित्र देशों पर ही नाराज हो गए। ट्रंप ने कहा, हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य मार्ग को सुरक्षित करने के लिए उन्होंने जिस गठबंधन का प्रस्ताव रखा है, उसके प्रति सहयोगियों में “उत्साह” की कमी है। हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य से ही दुनिया के ऊर्जा संसाधनों के पाँचवें हिस्से की जहाज़ों से जरिये आपूर्ति की जाती है। डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार देर रात ओवल ऑफिस में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि ईरान के साथ संघर्ष जल्द ही खत्म हो सकता है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि इस हफ़्ते किसी समाधान की संभावना कम है। उन्होंने इस सैन्य अभियान का बचाव करते हुए कहा कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए यह ज़रूरी था। गौरतलब है कि ईरान ने 28 फ़रवरी को अमेरिका और इज़रायल द्वारा किए गए हमलों के जवाब में इस क्षेत्र से होकर गुजरने वाले जहाज़ों को निशाना बनाने की धमकी दी थी जिसके बाद फ़ारस की खाड़ी से होने वाली जहाज़ों की आवाजाही काफ़ी हद तक कम हो गई है। ट्रंप ने ब्रिटेन की प्रतिक्रिया पर असंतोष ज़ाहिर करते हुए कहा ” ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर द्वारा इस संघर्ष में नाटो को शामिल करने में दिखाई गई हिचकिचाहट से मैं “खुश नहीं हैं” और “बहुत हैरान हूँ। मैं ब्रिटेन के रवैये से खुश नहीं था। मुझे लगता है कि शायद वे इसमें शामिल होंगे, लेकिन उन्हें पूरे उत्साह के साथ शामिल होना चाहिए।”  

पार्टी लाइन तोड़ी तो सजा तय! क्रॉस वोटिंग के बाद कांग्रेस के तीन विधायक निलंबित, सदस्यता पर तलवार

ओडिशा ओडिशा में क्रॉस वोटिंग के चलते राज्यसभा चुनाव में हारने वाली कांग्रेस ने अब बागी विधायकों पर ऐक्शन लेना शुरू कर दिया है। पार्टी ने भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार दिलीप रे के लिए वोट डालने वाले तीन विधायकों को निलंबित कर दिया है। ये विधायक हैं सनाखेमुंडी रमेश चंद्र जेना, मोहाना के दसरथी गोमांगो और कटक से विधायक सोफिया फिरदौस। इन लोगों ने सोमवार को हुए राज्यसभा चुनाव में पार्टी की हिदायत के बाद भी दिलीप रे के समर्थन में वोट दिया था। इन लोगों के निलंबन की जानकारी देते हुए ओडिशा कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘कांग्रेस को धोखा देने वालों ने देश के साथ विश्वासघात किया है।’ ओडिशा कांग्रेस के मीडिया सेल के प्रभारी अरबिंद दास ने कहा कि यह निर्णय पूरी प्रक्रिया की समीक्षा करने के बाद लिया गया है। इन लोगों ने राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस के हितों के खिलाफ काम किया। वह भी तब जबकि सभी विधायकों को पहले से ही हिदायत दी गई थी। उन्होंने कहा कि अब इन लोगों की विधानसभा की सदस्यता ही खत्म कराई जाएगी। इसके लिए हम स्पीकर को जल्दी ही नोटिस देने वाले हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भक्त चरण दास ने कहा कि इन लोगों से ऐसी उम्मीद नहीं थी। इन विधायकों ने पार्टी के साथ गद्दारी की है। हम तय करेंगे कि कैसे संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत इन लोगों को विधानसभा से बाहर कराया जाए। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि इस ऐक्शन की हाईकमान ने भी सराहना की है। लीडरशिप मानती है कि इन लोगों के खिलाफ ऐक्शन लिया जाना जरूरी था। इन कांग्रेस विधायकों के अलावा मुख्य विपक्षी दल बीजेडी के भी 8 विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की थी। इसी के चलते विपक्ष के साझा उम्मीदवार दत्तेश्वर होता की हार हो गई। होता को बीजेडी ने उतारा था, लेकिन कांग्रेस ने भी उनके समर्थन का ऐलान किया था। माना जा रहा है कि कांग्रेस ऐसा ही ऐक्शन बिहार और हरियाणा जैसे राज्यों में भी ले सकती है। बिहार में भी विपक्षी कैंडिडेट को हार मिली है, जबकि वह एक उम्मीदवार जिताने की स्थिति में आसानी से था। हरियाणा में किसी तरह जीत पाई कांग्रेस, 9 वोट थे ज्यादा हरियाणा में किसी तरह कांग्रेस के कैंडिडेट कर्मवीर सिंह बौद्ध को जीत मिल गई। फिर भी भाजपा की रणनीति के आगे पार्टी हांफती नजर आई। यहां भी 5 विधायकों ने पार्टी से अलग रुख अपनाया और क्रॉस वोटिंग कर दी। इसके अलावा 4 वोट अवैध करार दिए गए। इस तरह 37 सीटों वाली कांग्रेस के कैंडिडेट को महज 28 वोट ही मिले। ऐसी स्थिति में कांग्रेस यह पड़ताल करने में जुटी है कि आखिर हरियाणा और बिहार में किन नेताओं ने उसके ही कैंडिडेट को वोट नहीं दिया।

LPG यूजर्स के लिए बड़ी खबर: गैस बुकिंग में e-KYC का सच क्या है? जानें मंत्रालय की नई गाइडलाइंस

नई दिल्ली मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और देश के कुछ हिस्सों में गैस संकट की खबरों के बीच, केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय ने एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए ई-केवाईसी (e-KYC) को लेकर बनी असमंजस की स्थिति को पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है। सरकार ने साफ किया है कि बायोमेट्रिक आधार प्रमाणीकरण सभी के लिए हर बार अनिवार्य नहीं है। किसे करानी होगी e-KYC और किसे नहीं? मंत्रालय द्वारा जारी स्पष्टीकरण के अनुसार, केवाईसी की आवश्यकता केवल विशिष्ट स्थितियों में ही होगी…      सामान्य उपभोक्ता: यदि आप उज्ज्वला योजना के तहत नहीं आते हैं और अपनी केवाईसी प्रक्रिया पहले ही पूरी कर चुके हैं, तो आपको इसे दोबारा कराने की कोई जरूरत नहीं है।      अधूरे दस्तावेज वाले ग्राहक: बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण केवल उन ग्राहकों के लिए अनिवार्य है, जिनकी केवाईसी प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हुई है।      उज्ज्वला योजना (PMUY) लाभार्थी: इस योजना के 10.51 करोड़ लाभार्थियों को अपनी सब्सिडी जारी रखने के लिए साल में एक बार केवाईसी अपडेट कराना होगा। 15 मार्च के आदेश पर स्पष्टीकरण गौरतलब है कि 15 मार्च को मंत्रालय ने एक आदेश जारी कर सभी घरेलू उपभोक्ताओं के लिए बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण की बात कही थी, जिससे आम जनता में भ्रम फैल गया था। मंगलवार को मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि उस आदेश का उद्देश्य केवल उन उपभोक्ताओं को प्रोत्साहित करना था जिन्होंने अभी तक यह प्रक्रिया पूरी नहीं की है।  

जितना पूछा जाए, उतना ही बताएं — मंत्री के लंबे जवाब पर ओम बिरला का सख्त रुख

नई दिल्ली लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने प्रश्नकाल में सदस्यों से संक्षिप्त प्रश्न पूछने और मंत्रियों से छोटे जवाब देने का अपना आग्रह दोहराते हुए मंगलवार को कहा कि क्या मंत्री ‘संक्षिप्त जवाब देने की कोशिश नहीं कर सकते।’ प्रश्नकाल में सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री बीएल वर्मा तेलुगुदेशम पार्टी (तेदेपा) के सदस्य जीएम हरीश बालयोगी के पूरक प्रश्न का उत्तर दे रहे थे। इस दौरान बिरला ने उन्हें टोकते हुए कहा, ‘आप भाषण क्यों दे रहे हैं। आप तो जवाब दो।’ इसके बाद जब वर्मा दूसरे पूरक प्रश्न का उत्तर दे रहे थे तो अध्यक्ष ने कहा, ‘आप लोग संक्षिप्त जवाब देने की कोशिश नहीं कर सकते। मैंने कितनी बार सदन में यह आग्रह किया है। हर बार विस्तृत जवाब देते हो आप। जितना (सदस्य) पूछें आप उतना जवाब दे दो।’ इससे पहले प्रश्नकाल शुरू होने के दौरान भी बिरला ने सदस्यों से संक्षिप्त प्रश्न पूछने और मंत्रियों से उनके संक्षिप्त जवाब देने का अपना आग्रह दोहराया। उन्होंने कहा, ‘मेरा प्रयास है कि प्रश्नकाल में सूचीबद्ध सभी 20 पूरक प्रश्न आ जाएं।’ उन्होंने दोपहर 12 बजे प्रश्नकाल समाप्त होने से पहले एक सदस्य को आज का अंतिम पूरक प्रश्न पूछने का निर्देश देते हुए हल्के-फुल्के अंदाज में यह भी कहा, ‘समय कम है, मत्रीजी को लंबा जवाब देना है।’ विपक्ष के आठ लोकसभा सदस्यों का निलंबन रद्द लोकसभा ने मंगलवार को उन आठ विपक्षी सदस्यों का निलंबन रद्द कर दिया जिन्हें संसद के बजट सत्र के पहले चरण में सदन की अवमानना के मामले में निलंबित किया गया था। बिरला ने सोमवार को सभी दलों के नेताओं की एक बैठक बुलाई थी, जिसमें आठ विपक्षी सदस्यों का निलंबन वापस लेने पर सहमति बनी थी। सदन में कांग्रेस के मुख्य सचेतक कोडिकुनिल सुरेश ने आसन से निलंबन रद्द करने का अनुरोध किया और विपक्षी सदस्यों के आचरण पर खेद भी जताया। इसके बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने निलंबन खत्म करने का प्रस्ताव सदन में रखा जिसे सदन ने ध्वनिमत से मंजूरी दी। क्यों हुआ था निलंबन बजट सत्र के पहले चरण के दौरान तीन फरवरी को आसन की ओर कागज फेंकने के बाद, सदन की अवमानना के मामले में विपक्ष के आठ सांसदों को बजट सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित कर दिया गया था। निलंबित सांसदों में कांग्रेस के मणिकम टैगोर, अमरिंदर सिंह राजा वडिंग, गुरजीत सिंह औजला, हिबी ईडन, डीन कुरियाकोस, प्रशांत पडोले, किरण कुमार रेड्डी और मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के एस. वेंकटेशन शामिल हैं। निलंबन के बाद से ये सांसद कार्यवाही वाले दिन संसद के मकर द्वार पर धरना दे रहे थे।  

यूपी में टीचर, वकील और पत्रकारों के लिए फ्लैट्स, सीएम योगी ने किया बड़ा ऐलान

 लखनऊ सीएम योगी ने प्रदेश में शिक्षकों, वकीलों और पत्रकारों के लिए भी आवासीय योजनाएं विकसित करने की बात कही है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने साफ किया है कि जिन लोगों के पास अपनी जमीन नहीं है, उनके लिए बहुमंजिला मकान  तैयार किए जाएंगे. सीएम योगी ने कहा कि माफियाओं ने सरकारी जमीनों पर कब्जा कर रखा था, जिन्हें अब मुक्त कराकर उपयोग में लाया जा रहा है. जहां ऐसी जमीन शेष है, उसे भी खाली कराया जाएगा और मकान बनवाकर शिक्षकों, वकीलों और पत्रकारों को दिया जाएगा। मुख्यमंत्री ने  कहा कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में बड़ी मात्रा में सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जे थे. इन जमीनों को अब मुक्त कराया गया है और उनका उपयोग आम लोगों के हित में किया जा रहा है. उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जहां भी ऐसी जमीनें अब भी कब्जे में हैं, उन्हें प्राथमिकता से खाली कराया जाए. इन जमीनों पर हाईराइज मकान विकसित किए जाएंगे, ताकि अधिक से अधिक लोगों को इसका लाभ मिल सके. मुख्यमंत्री ने यह भी संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर माफिया की जब्त की गई संपत्तियों का इस्तेमाल भी इसी उद्देश्य के लिए किया जा सकता है। अब सिर्फ गरीब ही नहीं, हर वर्ग पर फोकस अधिकारियों का कहना है कि अब तक आवास योजनाएं मुख्य रूप से आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए केंद्रित थीं, लेकिन इस बार सरकार ने दायरा बढ़ाने की बात कही है. वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी 2.0) के तहत 90 हजार लाभार्थियों को डीबीटी के माध्यम से 900 करोड़ रुपये की पहली किस्त जारी की गई. यह राशि सीधे लाभार्थियों के खातों में भेजी गई, जिससे वे अपने घर के निर्माण की प्रक्रिया शुरू कर सकें. सरकार का कहना है कि पारदर्शिता बनाए रखने के लिए इस तरह की व्यवस्था को प्राथमिकता दी जा रही है, ताकि बिचौलियों की भूमिका खत्म हो सके। जो हक छीना, अब वही लौटेगा मुख्यमंत्री ने सख्त शब्दों में कहा कि जिन लोगों ने वर्षों तक गरीबों का हक छीना और जमीनों पर कब्जा किया, अब समय आ गया है कि वही संसाधन समाज के हित में वापस आएं. उनका कहना था कि यह केवल योजना नहीं, बल्कि एक तरह से सामाजिक न्याय की प्रक्रिया है, जिसमें छिने हुए अधिकार वापस दिलाने का प्रयास किया जा रहा है. सरकार के अनुसार, प्रदेश में अब तक करीब 62 लाख परिवारों को विभिन्न योजनाओं के तहत आवास उपलब्ध कराया जा चुका है. मुख्यमंत्री ने कहा कि हर व्यक्ति का सपना होता है कि उसका अपना घर हो. यह केवल एक भौतिक जरूरत नहीं, बल्कि सुरक्षा और सम्मान से जुड़ा विषय भी है. उन्होंने इस उपलब्धि का श्रेय केंद्र और राज्य सरकार के समन्वय को दिया। 25 करोड़ जनता ही परिवार  मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 से पहले योजनाएं होने के बावजूद उनका लाभ जरूरतमंदों तक नहीं पहुंच पाता था. अब सरकार 25 करोड़ प्रदेशवासी ही परिवार हैं” की सोच के साथ काम कर रही है. इसी कारण बिना भेदभाव हर वर्ग तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है. उनका कहना था कि जब शासन का नजरिया व्यापक होता है, तभी योजनाओं का असर जमीन पर दिखता है। बीमारू से ग्रोथ इंजन तक का दावा मुख्यमंत्री ने प्रदेश की बदलती छवि का जिक्र करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश अब ‘बीमारू राज्य’ की छवि से निकलकर देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है. उन्होंने इसे विकास योजनाओं, बुनियादी ढांचे में सुधार और जनकल्याणकारी नीतियों का परिणाम बताया. सरकार का कहना है कि अब केवल घर देना ही लक्ष्य नहीं है, बल्कि उसके साथ सभी जरूरी सुविधाएं भी सुनिश्चित की जा रही हैं. लाभार्थियों को शौचालय, बिजली, पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं के साथ-साथ अन्य योजनाओं का भी लाभ दिया जा रहा है. जैसे कि उज्ज्वला योजना के तहत गैस कनेक्शन, आयुष्मान योजना के तहत स्वास्थ्य बीमा और सामाजिक सुरक्षा पेंशन जैसी सुविधाएं भी इसमें शामिल हैं।

बांग्लादेश क्रिकेट में नया विवाद, ICC लगाएगी बैन चेतावनी, सरकार को मिली हिदायत

 नई दिल्ली  बांग्लादेश क्रिकेट में इस वक्त बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (BCB) ने सरकार को साफ चेतावनी दी है कि बोर्ड के मामलों में हस्तक्षेप से इंटरनेशनल लेवल पर गंभीर परिणाम हो सकते हैं। दरअसल, खेल मंत्रालय ने पिछले साल हुए BCB चुनाव में कथित गड़बड़ियों की जांच के लिए 5 सदस्यीय कमेटी बनाई है. इस कमेटी को 11 मार्च से 15 कार्यदिवस के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है. जांच में ‘अनियमितता, हेरफेर और सत्ता के दुरुपयोग’ जैसे आरोपों की पड़ताल की जाएगी। क्रिकइंफो की र‍िपोर्ट के मुताब‍िक- BCB ने अपने बयान में साफ किया कि इस मामले को लेकर इंटरनेशनल क्रिकेट काउंस‍िल (ICC) के वरिष्ठ अधिकारियों से चर्चा हो चुकी है. बोर्ड का कहना है कि किसी भी लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए क्रिकेट बोर्ड में सरकारी दखल ICC के नियमों के खिलाफ माना जाता है, जिससे बांग्लादेश पर बैन का खतरा भी पैदा हो सकता है. इससे पहले जिम्बाब्वे और श्रीलंका जैसे देशों पर इसी वजह से कार्रवाई हो चुकी है. ध्यान रहे ICC ने पहले भी सरकारी दखल के लिए जिम्बाब्वे और श्रीलंका समेत कई क्रिकेट बोर्ड को सस्पेंड किया था। सरकार से सीधे बातचीत की मांग BCB ने कहा कि वह शिकायत करने से पहले नेशनल स्पोर्ट्स काउंसिल से सीधे बात करना चाहता है, ताकि गजट के ‘इरादे और असर’ को समझा जा सके. साथ ही बोर्ड ने जांच कमेटी को पूरी तरह खत्म करने की मांग भी रखी है, ताकि क्रिकेट की स्थिरता बनी रहे। तमीम इकबाल के आरोप से भड़का विवाद पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब बांग्लादेश के पूर्व कप्तान तमीम इकबाल ने BCB अध्यक्ष अमीनुल इस्लाम पर चुनाव प्रक्रिया में दखल देने का आरोप लगाया. तमीम का दावा था कि चुनाव से पहले अमीनुल ने खेल मंत्रालय को पत्र लिखकर कुछ जिलों के काउंसलर बदलने को कहा. इसके अलावा नामांकन की तारीख दो बार बढ़ाने का भी आरोप लगाया गया. हालांकि, अमीनुल इस्लाम ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया था। चुनाव के बाद भी नहीं थमा बवाल 1 अक्टूबर को तमीम इकबाल ने अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली थी. 6 अक्टूबर को चुनाव हुए, लेकिन इसके बाद भी विवाद थमा नहीं. ढाका क्लब अधिकारियों और कई अन्य समूहों ने चुनाव में ‘इंजीनियरिंग’ का आरोप लगाया. नतीजों के कुछ घंटों के भीतर ही खेल मंत्रालय को अपने एक निदेशक उम्मीदवार को वापस लेना पड़ा. उनके राजनीतिक संबंध सोशल मीडिया पर सामने आ गए। ढाका लीग का बहिष्कार BCB चुनाव के बाद हालात और बिगड़ गए. ढाका के कई क्लब (कैटेगरी-2) ने मौजूदा बोर्ड को ‘गैरकानूनी’ करार दिया और 2025-26 सीजन की ढाका लीग का बहिष्कार कर दिया।

उद्धव ठाकरे का बड़ा बयान: धर्मांतरण विरोधी कानून के समर्थन में, क्या हिंदुत्व ने प्रभावित किया?

मुंबई  महाराष्ट्र की राजनीति में इन दिनों एक बड़ा उलटफेर देखने को मिल रहा है. जो उद्धव ठाकरे पिछले कुछ सालों से ‘सेकुलर’ राजनीति के पाले में खड़े नजर आ रहे थे, वे अब फिर से अपनी पुरानी राह यानी हिंदुत्व की ओर मुड़ते दिख रहे हैं. इसका सबसे बड़ा संकेत है महाराष्ट्र धर्मांतरण विरोधी बिल को उनका समर्थन. इसे राजनीतिक ‘घर-वापसी‘ भी कहा जा रहा है। उद्धव ठाकरे की राजनीति का सफर पिछले पांच सालों में किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं रहा है. साल 2019 में जब उन्होंने दशकों पुराना बीजेपी का साथ छोड़कर कांग्रेस और शरद पवार से हाथ मिलाया, तो इसे भारतीय राजनीति का सबसे बड़ा ‘यू-टर्न’ कहा गया। गठबंधन बदलने के साथ ही उद्धव पर आरोप लगने लगे कि उन्होंने सत्ता के लिए बाल ठाकरे की विचारधारा को तिलांजलि दे दी है. मुख्यमंत्री रहते हुए जब पालघर में साधुओं की हत्या हुई या सावरकर के मुद्दे पर कांग्रेस ने कड़ा रुख अपनाया, तब उद्धव की चुप्पी ने उनके कट्टर समर्थक कैडर को बेचैन कर दिया. नतीजा यह हुआ कि उनके हिंदुत्व के एजेंडे पर सवाल उठने लगे. इस दौरान मुस्लिम मतदाताओं के बीच उद्धव की स्वीकार्यता जरूर बढ़ी, लेकिन उनकी अपनी मूल पहचान धुंधली होती गई। वक्फ बिल और शिंदे का प्रहार पार्टी में टूट के बाद जब वक्फ संशोधन कानून की बात आई, तो उद्धव की पार्टी (यूबीटी) ने इसका विरोध किया. इस मौके को मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने हाथ से जाने नहीं दिया. शिंदे ने सीधा हमला बोलते हुए कहा कि उद्धव अब वही भाषा बोल रहे हैं जो ओवैसी बोलते हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि उद्धव अब ‘जनाब’ सेना बन चुके हैं। महाराष्ट्र चुनाव परिणाम और हकीकत का सामना हालिया विधानसभा चुनावों के नतीजों ने उद्धव ठाकरे को आईना दिखा दिया. पार्टी न केवल दो फाड़ हुई, बल्कि चुनावी मैदान में भी धराशायी हो गई. मुस्लिम वोटों के भरोसे वे अपनी पुरानी जमीन नहीं बचा सके. अब जब अस्तित्व पर संकट आया है, तो उद्धव को फिर से उसी हिंदुत्व की याद आई है जिसके दम पर शिवसेना खड़ी हुई थी. धर्मांतरण विरोधी बिल का समर्थन करना इसी ‘घर वापसी’ की कोशिश का हिस्सा है. वे यह संदेश देना चाहते हैं कि भले ही वे विपक्षी गठबंधन में हैं, लेकिन हिंदुत्व के बुनियादी मुद्दों पर समझौता नहीं करेंगे। क्या है महाराष्ट्र धर्मांतरण विरोधी बिल और इसकी बारीकियां? महाराष्ट्र की देवेंद्र फडणवीस सरकार जिस धर्मांतरण विरोधी कानून को लाने की तैयारी में है, वह केवल एक कानून नहीं बल्कि देश में एक बड़ी बहस और विवाद भी है. इस बिल के जरिए सरकार राज्य में जबरन या लालच देकर कराए जाने वाले धर्म परिवर्तन पर लगाम लगाना चाहती है। -बिल में अवैध धर्मांतरण की परिभाषा लंबी-चौड़ी है. जबरदस्ती. लालच. धोखा. भ्रम. प्रलोभन. गलत बयानी. दबाव. या किसी की मजबूरी का फायदा उठाना. नाबालिगों का मामला भी शामिल है। -अगर कोई शादी के जरिए धर्म बदलवाता है तो वह शादी भी रद्द मानी जाएगी. बच्चे का धर्म भी तय करने का प्रावधान है. अगर शादी अवैध तरीके से हुई तो बच्चे का धर्म मां या बाप के मूल धर्म के हिसाब से होगा। -कोई धर्म बदलना चाहे तो 60 दिन पहले जिला अधिकारी को सूचना देनी होगी. पुलिस खुद से भी कार्रवाई कर सकती है. एफआईआर कोई भी रिश्तेदार दे सकता है. मां बाप भाई बहन या खून का रिश्ता रखने वाला। -सबूत का बोझ उल्टा है. आरोपी को साबित करना होगा कि धर्मांतरण वैध था. पीड़ित को नहीं। -सजा भी भारी है. अवैध धर्मांतरण पर सात साल जेल और एक लाख रुपए जुर्माना. सामूहिक धर्मांतरण पर सात साल जेल और पांच लाख जुर्माना. दोबारा अपराध पर दस साल तक जेल हो सकती है। महाराष्ट्र सरकार का टारगेटः देवेंद्र फडणवीस और बीजेपी इस बिल के जरिए अपने कोर हिंदू वोट बैंक को यह भरोसा दिलाना चाहते हैं कि वे उनकी संस्कृति और अधिकारों के रक्षक हैं. साथ ही, इस बिल पर उद्धव ठाकरे का समर्थन हासिल करना बीजेपी की एक बड़ी रणनीतिक जीत है. इससे विपक्ष की एकजुटता में दरार भी दिखती है और उद्धव की मजबूरी भी उजागर होती है। भारत के अन्य राज्यों में क्या है धर्मांतरण विरोधी कानून की स्थिति धर्मांतरण विरोधी कानून बनाने वाला महाराष्ट्र पहला राज्य नहीं है. अब तक भारत के लगभग 10-12 राज्यों में इस तरह के कानून लागू हैं या प्रक्रिया में हैं. इनमें से ज्यादातर बीजेपी शासित राज्य हैं: उत्तर प्रदेश: यहां सबसे पहले और सबसे कड़ा कानून लाया गया. उत्तराखंड: यहां भी सख्त प्रावधान लागू हैं. मध्य प्रदेश और गुजरात: इन राज्यों ने भी अपने पुराने कानूनों को और कड़ा किया है. कर्नाटक (पिछली सरकार में) और हरियाणा: यहां भी कानून पारित किए गए हैं. उद्धव ठाकरे का इस बिल को समर्थन देना सत्ता से दोबारा करीबी बनाने की एक छटपटाहट भी हो सकती है और अपनी खोई हुई साख को बचाने का आखिरी दांव भी. लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या जनता इस ‘सुविधाजनक हिंदुत्व’ पर दोबारा भरोसा करेगी? महाराष्ट्र की राजनीति अब उस मोड़ पर है जहां विचारधारा और सत्ता की भूख के बीच की लकीर बहुत पतली हो गई है. क्या उद्धव फिर से शेर की तरह दहाड़ पाएंगे या यह केवल एक चुनावी पैंतरेबाजी बनकर रह जाएगी?

बैडमिंटन कोर्ट से ओलंपिक पोडियम तक, भारतीय महिला खिलाड़ी की प्रेरणादायक कहानी

नई दिल्ली भारतीय बैडमिंटन की दिग्गज खिलाड़ी साइना नेहवाल आज अपना 36वां जन्मदिन मना रही हैं। अपने शानदार खेल और ऐतिहासिक उपलब्धियों के दम पर उन्होंने बैडमिंटन की दुनिया में भारत का नाम ऊंचा किया है। साइना उन खिलाड़ियों में शामिल हैं जिन्होंने भारतीय बैडमिंटन को अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई पहचान दिलाई। साइना नेहवाल का जन्म और शुरुआती सफर साइना नेहवाल का जन्म 17 मार्च 1990 को हरियाणा के हिसार में हुआ था। बचपन से ही उन्हें खेलों में रुचि थी और उन्होंने कम उम्र में ही बैडमिंटन को अपना करियर बनाने का फैसला कर लिया था। कड़ी मेहनत और लगातार अभ्यास की बदौलत साइना ने जल्दी ही राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना ली। धीरे-धीरे वह भारतीय बैडमिंटन की सबसे भरोसेमंद खिलाड़ियों में शामिल हो गईं और देश को कई बड़े टूर्नामेंट में यादगार जीत दिलाई। लंदन ओलंपिक में रचा इतिहास साइना नेहवाल ने साल 2012 के लंदन ओलंपिक में इतिहास रचते हुए भारत को बैडमिंटन में पहला ओलंपिक मेडल दिलाया। उन्होंने इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर पूरे देश को गर्व महसूस कराया। यह उपलब्धि इसलिए भी खास थी क्योंकि इससे पहले किसी भी भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी ने ओलंपिक में पदक नहीं जीता था। साइना की इस जीत ने भारत में बैडमिंटन को नई लोकप्रियता दिलाई और युवा खिलाड़ियों को इस खेल की ओर आकर्षित किया। इंडोनेशिया ओपन में ऐतिहासिक जीत साल 2009 में साइना ने एक और बड़ा कारनामा किया था। उन्होंने इंडोनेशिया ओपन सुपर सीरीज बैडमिंटन टूर्नामेंट का खिताब अपने नाम किया। इस उपलब्धि के साथ वह यह प्रतिष्ठित खिताब जीतने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बनीं। इस जीत ने अंतरराष्ट्रीय बैडमिंटन सर्किट में साइना की पहचान को और मजबूत कर दिया और वह दुनिया की शीर्ष खिलाड़ियों में गिनी जाने लगीं। कॉमनवेल्थ गेम्स में शानदार प्रदर्शन साइना नेहवाल ने कॉमनवेल्थ गेम्स में भी भारत के लिए कई मेडल जीते हैं। उन्होंने कुल तीन गोल्ड मेडल अपने नाम किए हैं। सिंगल्स इवेंट में उन्होंने 2010 और 2018 के कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड जीतकर इतिहास रचा। इसके अलावा 2018 में उन्होंने मिक्स्ड डबल्स में भी गोल्ड मेडल जीता था। वहीं 2010 के कॉमनवेल्थ गेम्स में मिक्स्ड टीम इवेंट में सिल्वर और 2006 में मिक्स्ड टीम इवेंट में ब्रॉन्ज मेडल भी हासिल किया। इस तरह साइना कॉमनवेल्थ गेम्स में कुल पांच मेडल जीत चुकी हैं। साइना पर बनी बॉलीवुड फिल्म साइना नेहवाल की प्रेरणादायक कहानी पर साल 2021 में बॉलीवुड फिल्म भी बनाई गई थी। इस फिल्म का नाम साइना रखा गया था। फिल्म में अभिनेत्री परिणीति चोपड़ा ने साइना का किरदार निभाया था, जबकि इसका निर्देशन अमोल गुप्ते ने किया था। आज भी साइना नेहवाल खेल जगत में एक प्रेरणा मानी जाती हैं। वह सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय रहती हैं और अपने फैंस के साथ अक्सर तस्वीरें और वीडियो साझा करती रहती हैं।  

आदि पर्व 2026 में चमकी अबूझमाड़ की वनिता नेताम, वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज हुआ नाम

रायपुर अबूझमाड़ की बेटी वनिता नेताम ने ‘आदि पर्व 2026’ में रचा इतिहास नवा रायपुर स्थित आदिवासी संग्रहालय में 13 एवं 14 मार्च 2026 को आयोजित ‘आदि पर्व 2026’ में छत्तीसगढ़ की समृद्ध आदिवासी संस्कृति और परंपराओं की भव्य झलक देखने को मिली। इस आयोजन में प्रदेश की विभिन्न जनजातियों के प्रतिभागियों ने अपनी पारंपरिक वेशभूषा, लोक नृत्य, गीत और सांस्कृतिक परंपराओं की आकर्षक प्रस्तुति दी। इस कार्यक्रम में नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ क्षेत्र से शामिल हुई प्रतिभागी वनिता नेताम ने पारंपरिक जनजातीय वेशभूषा में मंच पर अपनी संस्कृति की शानदार प्रस्तुति दी। उनकी पारंपरिक पोशाक और आभूषणों ने कार्यक्रम में विशेष आकर्षण पैदा किया और उपस्थित दर्शकों का ध्यान अपनी ओर खींचा। कार्यक्रम के दौरान आयोजित ट्राइबल अटायर शो को गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज किया गया। इस ऐतिहासिक उपलब्धि में भाग लेकर वनिता नेताम ने भी अपना नाम वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज कराया, जो नारायणपुर जिले और अबूझमाड़ क्षेत्र के लिए गर्व का विषय है। आदि पर्व 2026 का आयोजन आदिवासी संस्कृति, परंपरा और विरासत को संरक्षित करने तथा उसे देश-दुनिया तक पहुंचाने के उद्देश्य से किया गया। इस मंच के माध्यम से जनजातीय समाज की समृद्ध परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान को व्यापक पहचान मिल रही है।

अब विकास की राह पर बोधघाट: माओवादी हिंसा के अंत के बाद बदल सकता है जंगल का आर्थिक मॉडल

जगदलपुर बस्तर के जंगलों में इन दिनों महुआ की खुशबू फैली हुई है। सुबह होते ही आदिवासी महिलाएं और बच्चे टोकरी लेकर पेड़ों के नीचे गिरे फूल बीनने निकल पड़ते हैं। यही महुआ कई परिवारों के लिए नकदी का बड़ा सहारा है। कुछ महीनों बाद बारिश आएगी और खेतों में धान, कोदो व कोसरा बोया जाएगा। फसल कटते ही खेत फिर खाली हो जाएंगे और ग्रामीणों के हाथ भी। यही कारण है कि प्रकृति से संपन्न होने के बावजूद बस्तर का बड़ा हिस्सा आज भी आर्थिक रूप से कमजोर बना हुआ है। दरअसल यहां की खेती पूरी तरह मानसून पर निर्भर है। बरसात खत्म होते ही खेत सूख जाते हैं और सिंचाई के अभाव में खेती रुक जाती है। ऐसे में ग्रामीणों की आय का बड़ा हिस्सा महुआ, तेंदूपत्ता और अन्य लघु वनोपज पर टिका रहता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की यही कमजोरी लंबे समय तक इस इलाके में माओवादी प्रभाव के फैलने की एक बड़ी वजह बनी। ऐसे में दक्षिण बस्तर की जीवनरेखा कही जाने वाली इंद्रावती नदी पर प्रस्तावित बोधघाट परियोजना को इस स्थिति को बदलने वाली योजना के रूप में देखा जा रहा है। यदि यह परियोजना जमीन पर उतरती है तो बीजापुर, दंतेवाड़ा और सुकमा जैसे जिलों में करीब सात लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचाई मिल सकती है। इससे खेती की तस्वीर बदलने के साथ-साथ उस ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा मिल सकती है, जिसने कभी माओवादी आंदोलन को यहां जमीन दी थी। 60 साल बाद भी अधूरी इंद्रावती की सिंचाई योजनाएं     इंद्रावती नदी पर सिंचाई परियोजनाओं की परिकल्पना वर्ष 1960 में पं. जवाहरलाल नेहरु के दौर में की गई थी।     जनवरी 1979 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई ने बहुउद्देशीय बोधघाट परियोजना की आधारशिला रखी थी।     इसके लिए केंद्र सरकार ने विश्व बैंक से करीब 300 करोड़ रुपये का ऋण भी लिया था।     करीब तीन वर्ष तक काम चलने के बाद वन एवं पर्यावरण संबंधी आपत्तियों और प्रभावित लोगों के विरोध के चलते 1986 में परियोजना पूरी तरह रोक दी गई।     दरअसल 1974 में बस्तर में 233 किमी बहने वाली इंद्रावती नदी पर बोधघाट सहित नौ सिंचाई परियोजनाएं प्रस्तावित हुई थीं।     1975 में नदी जल बंटवारे को लेकर ओडिशा से सहमति भी मिल गई थी, लेकिन आज तक एक भी परियोजना पूरी नहीं हो सकी।     नतीजतन दक्षिण-मध्य बस्तर में केवल लगभग 12 प्रतिशत कृषि भूमि तक ही सिंचाई पहुंच पाई है, जिसके कारण किसान रबी की फसल मुश्किल से ले पाते हैं। बोधघाट पर राजनीति हावी, इसलिए रफ्तार सुस्त राज्य सरकार ने बोधघाट परियोजना को नए स्वरूप में आगे बढ़ाने की पहल की है और केंद्र से भी स्वीकृति मिल चुकी है। लेकिन डूबान क्षेत्र में आने वाले 52 जनजातीय गांवों के पुनर्वास और विस्थापन की चुनौती के कारण परियोजना की रफ्तार सुस्त है। यहीं कारण है कि एक ऐसी परियोजना जो पूरे बस्तर का भविष्य बदल सकती है, राजनीतिक दलों के नेता खुलकर पहल करने से बचते दिख रहे हैं, क्योंकि उन्हें डर है कि यदि विरोध हुआ तो उनकी राजनीतिक जमीन खिसक सकती है। प्रस्ताव के अनुसार बोधघाट को बहुउद्देशीय डैम के रूप में विकसित किया जाएगा, जिससे सिंचाई के साथ बिजली उत्पादन भी संभव होगा। साथ ही इसे नदी जोड़ो योजना से जोड़कर इंद्रावती के जल से बस्तर के बड़े हिस्से तक सिंचाई पहुंचाने की योजना है। इसके अलावा देउरगांव, मटनार और जगदलपुर की महादेव बैराज परियोजनाओं को भी इस बार राज्य बजट में शामिल किया गया है। यदि ये योजनाएं साकार होती हैं, तो बस्तर के हजारों गांवों की कृषि व्यवस्था में बड़ा बदलाव आ सकता है। बोधघाट बनता तो कमजोर पड़ती माओवाद की जड़ें बस्तर में सिंचाई संकट के समाधान के लिए 1960 के दशक में इंद्रावती नदी की जल क्षमता के उपयोग हेतु बोधघाट परियोजना की अवधारणा बनाई गई थी। यदि यह योजना समय पर पूरी हो जाती, तो दक्षिण बस्तर की कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बड़ा बदलाव संभव था। सिंचाई के विस्तार से रोजगार के अवसर बढ़ते और गांवों में आर्थिक स्थिरता आती। 1980 के दशक में जब माओवादी संगठन दंडकारण्य क्षेत्र में सक्रिय हुए, तब उन्होंने इस परियोजना का विरोध शुरू कर दिया। उन्हें आशंका थी कि बड़े विकास कार्यों से क्षेत्र में उनकी पकड़ कमजोर हो जाएगी। विकास के अभाव और कमजोर ग्रामीण अर्थव्यवस्था का लाभ उठाकर माओवादियों ने अगले चार दशकों तक इस इलाके में अपनी जड़ें मजबूत कर लीं। इधर पड़ोसियों ने बदली तस्वीर     बस्तर की तुलना यदि पड़ोसी राज्य तेलंगाना और ओडिशा से की जाए तो अंतर साफ दिखाई देता है। बस्तर की सीमा से सटे राज्य महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्रप्रदेश और ओडिशा जलप्रबंधन और सिंचाई योजनाओं के मामले में 10 गुना आगे है।     इन राज्यों में बड़े पैमाने पर सिंचाई परियोजनाओं, जल प्रबंधन और तालाबों के पुनर्जीवन से खेती की स्थिति में बड़ा सुधार हुआ है।     कई क्षेत्रों में किसान साल में दो से तीन फसल ले रहे हैं।     आंध्रप्रदेश में पोलावरम, तेलंगाना में समक्का सागर परियोजना व गोदावरी-कृष्णा-कावेरी लिंक परियोजना, ओडिशा में खातीगुड़ा, कोलाब व तेलांगिरी डैम जैसी जल प्रबंधन योजनाओं के कारण कृषि उत्पादन और किसानों की आय में वृद्धि हुई है।     इसके विपरीत बस्तर में खेती आज भी मानसून पर निर्भर है। सिचांई परियोजना बदल सकती है जंगल का गणित बस्तर की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि यहां नदियां और वर्षा तो भरपूर हैं, लेकिन खेतों तक पानी नहीं पहुंच पाता। दशकों पहले तैयार विकास योजनाओं में बताया गया था कि पूरे बस्तर में केवल एक प्रतिशत क्षेत्र में ही सिंचाई उपलब्ध थी। चार दशक बाद भी यह आंकड़ा मुश्किल से 1.5 से 2 प्रतिशत तक ही पहुंच पाया है, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर देश के करीब 44 प्रतिशत कृषि क्षेत्र में सिंचाई सुविधा उपलब्ध है। सिंचाई की कमी के कारण बस्तर के अधिकांश किसान साल में केवल एक ही फसल ले पाते हैं। पानी की नियमित उपलब्धता हो तो किसान दो या तीन फसल उगा सकते हैं, जिससे उनकी आय कई गुना बढ़ सकती है। बस्तर में लगभग छह से सात लाख किसान परिवार खेती पर निर्भर हैं। ऐसे … Read more

रिश्वतखोरी पर वार: भोपाल में हाउसिंग बोर्ड का ऑपरेटर 5 हजार लेते रंगे हाथों पकड़ा गया

भोपाल राजधानी के जवाहर चौक स्थित मध्य प्रदेश गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल (हाउसिंग बोर्ड) के कार्यालय में मंगलवार को लोकायुक्त की टीम ने बड़ी कार्रवाई की है। टीम ने संपदा शाखा प्रक्षेत्र-एक में पदस्थ आउटसोर्स डाटा एंट्री ऑपरेटर ज्ञानेंद्र कुमार पटेल को 5,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया। आरोपित ने एक सेवानिवृत्त कर्मचारी से उनके ईडब्ल्यूएस मकान की लीज नवीनीकरण के बदले 10 हजार रुपये की मांग की थी। जानकारी के अनुसार, सुल्तानाबाद निवासी आवेदक दूधनाथ शुक्ला, जो उपभोक्ता संघ से सेवानिवृत्त कर्मचारी हैं, ने वर्ष 1993 में कोटरा सुल्तानाबाद स्थित हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में अपनी पत्नी के नाम से एक ईडब्ल्यूएस मकान लिया था। इस मकान की लीज के नवीनीकरण के लिए आरोपित ज्ञानेंद्र पटेल लगातार रिश्वत की मांग कर रहा था। परेशान होकर आवेदक ने इसकी शिकायत लोकायुक्त कार्यालय में की। पुलिस महानिदेशक,याेगेश देशमुख विशेष पुलिस स्थापना ( लोकायुक्त संगठन) के निर्देश और उप पुलिस महानिरीक्षक मनोज कुमार सिंह के मार्गदर्शन में शिकायत का सत्यापन कराया गया। शिकायत सही पाए जाने पर पुलिस अधीक्षक दुर्गेश राठौर के नेतृत्व में ट्रैप टीम का गठन किया गया। मंगलवार को जैसे ही आरोपित ने पहली किश्त के रूप में 5,000 रुपये लिए, लोकायुक्त की टीम ने उसे उसके कार्यालय कक्ष में ही धर दबोचा। आरोपित के विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (संशोधन) 2018 के तहत मामला दर्ज कर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।  

एक बार फिर करुणा पांडे संग स्क्रीन शेयर, मुस्कान बामने ने जताई खुशी

मुंबई, अभिनेत्री मुस्कान बामने का कहना कि करुणा पांडे के साथ एक बार फिर स्क्रीन शेयर करना उनके लिये बेहद खास अनुभव रहा है। सोनी सब के शो पुष्पा इम्पॉसिबल की कहानी के केंद्र में है पुष्पा (करुणा पांडे), जिसकी ताक़त, अपनापन और हिम्मत हर मुश्किल में परिवार को एकजुट रखती है। शो में एक और भावनात्मक परत जोड़ रही हैं मुस्कान बामने, शनाया मेहता का किरदार निभा रही हैं, जो पुष्पा के मूल्यों और विश्वासों को चुनौती देती है। करुणा पांडे के साथ एक बार फिर स्क्रीन शेयर करना मुस्कान के लिए बेहद खास अनुभव रहा है।मुस्कान के लिए करुणा के साथ दोबारा काम करना एक ‘फुल-सर्कल मोमेंट’ जैसा है। दोनों कलाकारों ने पहले भी साथ काम किया था, जब करुणा ने मुस्कान की ऑन-स्क्रीन माँ का किरदार निभाया था। करुणा पांडे के साथ दोबारा काम करने के अनुभव पर मुस्कान बामने ने कहा, “पुष्पा इम्पॉसिबल में करुणा मैम के साथ फिर से काम करना मेरे लिए बेहद खास एहसास है। सालों पहले उन्होंने मेरी ऑन-स्क्रीन माँ का किरदार निभाया था और अब हम एक बिल्कुल अलग डायनामिक में स्क्रीन शेयर कर रहे हैं। इसे और दिलचस्प बनाता है कि हमारे किरदार लगातार एक-दूसरे से टकराते रहते हैं। शनाया बाग़ी और ज़िद्दी है, जबकि पुष्पा अनुशासन और मूल्यों में गहरा विश्वास रखती है, इसलिए उनकी पर्सनैलिटी नैचुरली क्लैश करती है। लेकिन बतौर कलाकार करुणा मैम बेहद गर्मजोशी से भरी और सपोर्टिव हैं, जिसकी वजह से इन इंटेंस सीन को निभाना और भी मज़ेदार हो जाता है। ‘पुष्पा इम्पॉसिबल’, सोमवार से शनिवार रात 9:30 बजे सोनी सब पर प्रसारित होता है।  

slot server thailand super gacor

spaceman slot gacor

slot gacor 777

slot gacor

Nexus Slot Engine

bonus new member

olympus

situs slot bet 200

slot gacor

slot qris

link alternatif ceriabet

slot kamboja

slot 10 ribu

https://mediatamanews.com/

slot88 resmi

slot777

https://sandcastlefunco.com/

slot bet 100

situs judi bola

slot depo 10k

slot88

slot 777

spaceman slot pragmatic

slot bonus

slot gacor deposit pulsa

rtp slot pragmatic tertinggi hari ini

slot mahjong gacor

slot deposit 5000 tanpa potongan

mahjong

spaceman slot

https://www.deschutesjunctionpizzagrill.com/

spbo terlengkap

cmd368

368bet

roulette

ibcbet

clickbet88

clickbet88

clickbet88

bonus new member 100

slot777

https://bit.ly/m/clickbet88

https://vir.jp/clickbet88_login

https://heylink.me/daftar_clickbet88

https://lynk.id/clickbet88_slot

clickbet88

clickbet88

https://www.burgermoods.com/online-ordering/

https://www.wastenotrecycledart.com/cubes/

https://dryogipatelpi.com/contact-us/

spaceman slot gacor

ceriabet link alternatif

ceriabet rtp

ceriabet

ceriabet link alternatif

ceriabet link alternatif

ceriabet login

ceriabet login

cmd368

sicbo online live

Ceriabet Login

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

casino online

clickbet88

login kudahoki88

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

slot olympus

sbobet

slot thailand

sbobet