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प्रदेश में 19 मार्च से शुरू होगा जल गंगा संवर्धन अभियान] 100 दिवसीय अभियान में जल संरक्षण के होंगे कार्य

म.प्र. नदियों का मायका, जल आत्मनिर्भरता से ही बनेगा समृद्ध प्रदेश नववर्ष प्रतिपदा पर शिप्रा तट उज्जैन में होगा राज्य स्तरीय अभियान का शुभारंभ वृहद् अभियान के लिए सरकार कर रही व्यापक तैयारियाँ भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जल प्रकृति का अमूल्य उपहार है। इसे बचाना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। हम हर गांव, हर शहर और हर नागरिक को जल संरक्षण के कार्यों से जोड़ना चाहते हैं। समाज और सरकार जब साथ मिलकर काम करेंगे, तो मध्यप्रदेश समृद्धि की दिशा में नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा। प्रदेश के नागरिकों को पानी बचाने के लिए सक्रिय रूप से जुड़ना होगा, इससे मध्यप्रदेश जल संचयन और प्रबंधन में देश का एक मॉडल स्टेट बनेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जल संबंधी जरूरतों की पूर्ति और भावी पीढ़ियों के लिए जल संसाधनों की सुरक्षा की मंशा से प्रदेश सरकार एक बार फिर बड़े पैमाने पर जल गंगा संवर्धन अभियान शुरु करने जा रही है। भारतीय नववर्ष प्रतिपदा (गुढ़ी पड़वा) के शुभ अवसर पर 19 मार्च को उज्जैन की शिप्रा नदी तट से इस राज्य स्तरीय अभियान का शुभारंभ किया जा रहा है। यह अभियान 30 जून तक अनवरत् चलेगा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जल संरक्षण एक सामाजिक आंदोलन बनाना है। प्रदेश की जनता, पंचायतों, स्वयंसेवी संगठनों और विभिन्न शासकीय विभागों की साझेदारी से यह अभियान प्रदेश में जल संवर्धन की नई मिसाल स्थापित करेगा। जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने की पहल मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में जल संरक्षण की परम्परा सदियों पुरानी है। प्राचीन काल से ही तालाब, कुएं और बावड़ियां सिर्फ़ जल के स्रोत न होकर सामाजिक जीवन का केंद्र हुआ करते थे। सरकार उसी परम्परा को आधुनिक तकनीक और जनभागीदारी के जरिए पुनर्जीवित करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि जल गंगा संवर्धन अभियान का उद्देश्य नई जल संरचनाएं बनाने के साथ ही प्रदेश में जल संरक्षण की संस्कृति को समृद्ध करना भी है। अभियान से गांव-गांव में लोगों को यह समझाया जाएगा कि वर्षा जल का संरक्षण, भूजल का पुनर्भरण और जल स्रोतों का संरक्षण जीवन और विकास दोनों के लिए अनिवार्य है। जनभागीदारी है अभियान की सबसे बड़ी शक्ति मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जल गंगा संवर्धन अभियान की सफलता का सबसे बड़ा आधार जनभागीदारी है। उन्होंने प्रदेश के सभी नागरिकों से अपील की है कि वे जल संरक्षण के इस महाअभियान में बढ़-चढ़कर भागीदारी करे। उन्होंने कहा कि गांव-गांव में श्रमदान कर तालाब और कुओं की सफाई की जाए। वर्षा जल के संचयन की व्यवस्था घरों में भी करने के उपाय करे। जल स्रोतों के आस-पास स्वच्छता बनाए रखें। उन्होंने कहा कि यदि समाज और सरकार मिलकर काम करेंगे, तो प्रदेश जल समृद्ध राज्य बन सकता है। जल गंगा संवर्धन अभियान से जल संरक्षण को तो बढ़ावा मिलेगा ही, साथ ही इसके दूरगामी पर्यावरणीय और आर्थिक लाभ भी होंगे। इस अभियान से भू-जल स्तर में सुधार, किसानों को सिंचाई के लिए और अधिक पानी, जल अभाव/अल्प वर्षा से प्रभावित क्षेत्रों को राहत, पर्यावरण-संरक्षण को बल और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। साथ ही भविष्य के लिए बेहतर जल प्रबंधन भी सुनिश्चित किया जा सकेगा। जलवायु परिवर्तन और अनियमित वर्षा की चुनौती के दृष्टिगत जल प्रबंधन आज समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन चुका है। मध्यप्रदेश सरकार का यह अभियान इसी दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है। पहले चरण में बनीं 2.79 लाख से अधिक जल संरचनाएं मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि मध्यप्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 2024 में राज्य स्तरीय जल गंगा संवर्धन अभियान का पहला चरण प्रारंभ किया गया था। इसमें जल संरक्षण के क्षेत्र में ऐतिहासिक कार्य किए गए। पहले चरण में कुल 2.79 लाख से अधिक जल संरचनाओं का निर्माण और पुनर्जीवन किया गया। इनमें प्रमुख रूप से तालाब निर्माण एवं पुनर्जीवन, कुएं और बावड़ियों की मरम्मत नहर निर्माण, सूखी नदियों का पुनर्जीवन एवं जल संरक्षण से जुड़ी अन्य संरचनाएं शामिल हैं। इन कामों से प्रदेश के अनेक क्षेत्रों में भूजल स्तर में सुधार देखने को मिला और किसानों को सिंचाई के लिए अतिरिक्त जल भी उपलब्ध हुआ है। दूसरे चरण के काम भी हो रहे तेजी से वर्ष-2025 में चलाए गए जल संरक्षण अभियान के दूसरे चरण में भी व्यापक स्तर पर कार्य हुए। इस चरण में प्रदेश में 72 हजार 647 से अधिक जल संरचनाओं का निर्माण कार्य पूरा किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त 64 हजार 395 जल संरचनाओं का निर्माण कार्य अभी भी प्रगति पर है। इन कार्यों में खेत तालाब, चेक डैम, स्टॉप डैम, नहर, कुएं, बावड़ियां तथा अन्य जल संचयन संरचनाएं बनाई जा रही हैं। इन परियोजनाओं से ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में जल उपलब्धता को स्थायी रूप से बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है।  

5 फीट बर्फ के बीच खुलेगा हेमकुंड साहिब धाम, 23 मई से श्रद्धालु कर सकेंगे दर्शन

देहरादून उत्तराखंड में मौसम ने अचानक करवट बदली है। पहाड़ों में बर्फबारी हो रही है। सोमवार को हेमकुंड साहिब के कपाट खोलने की तिथि की घोषणा हुई। ट्रस्ट ने घोषणा की कि सिखों के पवित्र धाम के कपाट 23 मई को खुलेंगे। उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित सिखों के पवित्र तीर्थ हेमकुंड साहिब के कपाट इस वर्ष 23 मई को श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे। हेमकुंड साहिब मैनेजमेंट ट्रस्ट के अध्यक्ष नरेंद्र जीत सिंह बिंद्रा ने राज्य के मुख्य सचिव आनंद बर्धन के साथ तीर्थयात्रा की तैयारियों पर चर्चा के बाद यह निर्णय लिया। रविवार को अचानक बदले मौसम से पहाड़ बर्फ की चादर में लिपटे हुए हैं। बदरीनाथ, हेमकुंड साहिब और फूलों की घाटी में पांच फीट तक बर्फ जमा हो गई है। गोविंद घाट गुरुद्वारे के प्रबंधक सरदार सेवा सिंह ने बताया कि आगामी यात्रा सीजन को लेकर ट्रस्ट और राज्य सरकार के अधिकारियों के बीच विस्तृत चर्चा हुई। मौजूदा मौसम और व्यवस्थाओं का आकलन करने के बाद दोनों पक्षों ने सहमति से 23 मई को कपाट खोलने का फैसला किया। सिख धर्म में खास महत्व हेमकुंड साहिब सिखों के सबसे पवित्र तीर्थ स्थलों में से एक है। मान्यता है कि यहां दसवें सिख गुरु गुरु गोबिंद सिंह ने अपने पूर्व जन्म में तपस्या की थी। इसका उल्लेख गुरु गोबिंद सिंह द्वारा रचित दशम ग्रंथ के ‘विचित्र नाटक’ अध्याय में भी मिलता है। पांच फीट तक बर्फ जमी इस समय बिगड़ते मौसम के बाद पहाड़ शीतलहर की चपेट में हैं। मैदानी इलाकों में बारिश-ओलावृष्टि के साथ पहाड़ों में बर्फबारी हो रही है। हेमकुंड साहिब और फूलों की घाटी में पांच फीट तक बर्फ जमा है। हेमकुंड साहिब हिमालय की मनोरम पर्वत श्रृंखलाओं के बीच समुद्र तल से लगभग 15,000 फीट से अधिक ऊंचाई पर स्थित है। बर्फ से ढकी चोटियों और शांत वातावरण के बीच स्थित यह गुरुद्वारा श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति और ध्यान का अद्भुत अनुभव प्रदान करता है। हर साल हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं हर वर्ष देश-विदेश से हजारों श्रद्धालु हेमकुंड साहिब की यात्रा के लिए उत्तराखंड पहुंचते हैं। यह तीर्थ यात्रा केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है। यात्रा सीजन के दौरान यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन और सेवा के लिए आते हैं, जिससे क्षेत्र में धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियां भी बढ़ जाती हैं।

मंत्री गुरु खुशवंत साहेब बोले – मनखे-मनखे एक समान के सिद्धांत पर चल रही है हमारी सरकार

अनुसूचित जाति विकास विभाग के लिए 573 करोड़ रूपए की अनुदान मांग पारित अनुसूचित जाति उपयोजना में 12 हजार 970 करोड़ का प्रावधान, छात्रों और आजीविका पर जोर सीजी एसीई, यूपीएससी, सीजीपीएससी सहित बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए उड़ान, शिखर और मंजिल’ से मिलेगा युवाओं को विशेष अवसर छात्रावास नहीं मिलने वाले विद्यार्थियों के लिए मुख्यमंत्री शिक्षा सहयोग योजना: ढाई करोड़ रूपए का प्रावधान विभिन्न जिलों में छात्रावास भवनों के लिए 25 करोड़ का प्रावधान सतनाम पंथ के तीर्थ स्थलों का होगा विकास, गिरौदपुरी-भण्डारपुरी क्षेत्र में नई सुविधाएं रायपुर अनुसूचित जाति विकास मंत्री गुरु खुशवंत साहेब के विभाग के लिए 12 हजार 970 करोड़ रूपए की अनुदान मांगें विधानसभा में आज पारित कर दी गई है।            मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने विधानसभा में वर्ष 2026-27 के लिए अनुसूचित जाति विकास विभाग के अनुदान मांगों पर चर्चा के जवाब में कहा कि हमारी सरकार समाज के अंतिम छोर पर खड़े अनुसूचित जाति वर्गों के सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक उत्थान के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में हमारी सरकार प्रातः स्मरणीय, विश्ववंदनीय परम् पूज्य बाबा गुरु घासीदास बाबा जी के मनखे-मनखे एक समान के संदेश पर चल रही है। इसी कड़ी में सरकार अनुसूचित जातियों की सांस्कृतिक विरासत का सम्मान करते हुए उनके समग्र विकास के लिए लगातार कार्य कर रही है।            मंत्री साहेब  ने बताया कि अनुसूचित जाति कल्याण हेतु 7 करोड़ 15 लाख 39 हजार रुपये तथा अनुसूचित जाति उपयोजना हेतु 565 करोड़ 89 लाख 8 हजार रुपये का प्रावधान किया गया है। इस प्रकार कुल बजट 573 करोड़ 4 लाख 47 हजार रुपये बजट का प्रावधान किया गया है, जो पिछले वर्ष के मुख्य बजट 531 करोड़ 17 लाख 64 हजार रुपये की तुलना में 7.88 प्रतिशत अधिक है। अनुसूचित जाति उपयोजना में बड़ा प्रावधान            मंत्री गुरू खुशवंत साहेब ने बताया कि राज्य के मुख्य बजट में अनुसूचित जाति उपयोजना के अंतर्गत विभिन्न विभागों के माध्यम से 12,970 करोड़ 2 लाख 45 हजार रुपए का समेकित बजट प्रावधान किया गया है।  यह राशि विकास और अधोसंरचना से जुड़ी योजनाओं पर खर्च की जाएगी। नई योजनाओं पर विशेष ध्यान देते हुए          गुरु खुशवंत साहेब ने सदन में बताया कि बजट में कई नई योजनाओं के लिए प्रावधान किया गया है। इनमें अनुसूचित जाति विकास संचालनालय की स्थापना के लिए 30 नए पदों के सृजन हेतु 2 करोड़ 26 लाख 4 हजार रुपये का प्रावधान शामिल है। परंपरागत चर्म शिल्प व्यवसाय से जुड़े लोगों की आजीविका सुधारने के लिए प्रशिक्षण और सामग्री उपलब्ध कराने हेतु 2 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। छात्रावास और शैक्षणिक सुविधाओं का विस्तार         मंत्री ने बताया कि प्रदेश में वर्तमान में अनुसूचित जाति वर्ग के विद्यार्थियों के लिए 342 प्री-मैट्रिक छात्रावास, 92 पोस्ट-मैट्रिक छात्रावास और 51 आश्रम संचालित हैं, जिनमें कुल 25 हजार 927 सीटें स्वीकृत हैं। उन्होंने बताया कि भवन विहीन संस्थाओं के लिए नए भवनों के निर्माण हेतु 25 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके तहत बिलासपुर, मुंगेली, रायपुर, जशपुर और बेमेतरा जिलों में छात्रावास, क्रीड़ा परिसर और आवासीय विद्यालय बनाए जाएंगे। प्रदेश के बड़े शहरों छात्रावासों में प्रवेश नहीं मिल पाने पर विद्यार्थियों को सहायता देने के लिए मुख्यमंत्री शिक्षा सहयोग योजना के अंतर्गत 2 करोड़ 50 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है। साथ ही विद्यार्थियों के शैक्षणिक अध्ययन भ्रमण के लिए एक करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए नई योजना के तहत            अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों को उच्च प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार करने हेतु सीजी-अस्सिटेंस फॉर कम्पेटीटिव एक्जामिनेशन योजना शुरू किया जाएगा। इसके तीन घटक क्रमशः ‘उड़ान’, ‘शिखर’ और ‘मंजिल’ के लिए कुल 7 करोड़ 47 लाख 70 हजार रुपये का प्रावधान किया गया है। इस योजना के माध्यम से इंजीनियरिंग, मेडिकल, यूपीएससी, सीजीपीएससी, एसएससी, रेलवे और बैंकिंग परीक्षाओं की तैयारी हमारे युवा प्रतिभागी कर सकेंगे। धार्मिक-सांस्कृतिक स्थलों का विकास          मंत्री साहेब ने बताया कि सतनाम पंथ के प्रवर्तक गुरु  घासीदास से जुड़े तीर्थ स्थलों के विकास के लिए भी बजट में प्रावधान किया गया है। गिरौदपुरी-भण्डारपुरी क्षेत्र में सोलर स्ट्रीट लाइट, सतनाम मार्ग के विकास और सामुदायिक भवन निर्माण के लिए राशि का प्रावधान की गई है। इसके लिए कुल 2.50 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है। अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण को बढ़ी राशि सरकार ने अनुसूचित जाति बाहुल्य जिलों के विकास के लिए गठित प्राधिकरण के बजट में 25 करोड़ रुपये की वृद्धि करते हुए इसे 75 करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव रखा है।  मंत्री साहेब  ने कहा कि सामाजिक समरसता के संदेश “मनखे-मनखे एक समान” को आधार बनाकर सरकार अनुसूचित जाति वर्ग के उत्थान और विकास के लिए निरंतर कार्य करती रहेगी।    

जालोर में योगी का संबोधन: जौहर को आत्मसम्मान का तेज बताया, बंदरों की मिसाल देकर लोभ छोड़ने की सीख

जालोर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को जालोर के प्रसिद्ध सिरे मंदिर में रत्नेश्वर महादेव मंदिर की 375वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित महायज्ञ में शिरकत की। कड़े सुरक्षा घेरे और संतों के भारी जमावड़े के बीच योगी का यह दौरा आध्यात्मिक होने के साथ-साथ राजस्थान की वीरता को नमन करने वाला रहा। राजस्थान की परंपरा : ‘जौहर’ केवल बलिदान नहीं, स्वाभिमान है योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में राजस्थान की वीरांगनाओं को नमन करते हुए ‘जौहर’ को परंपरा का ‘तेज’ बताया। उन्होंने चित्तौड़गढ़ की महारानी पद्मिनी और जालोर के इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि यह वह शक्ति है जिसने शत्रुओं के सामर्थ्य को भस्म कर दिया। उन्होंने महाराजा मानसिंह द्वारा शिलालेखों के माध्यम से इतिहास सहेजने के कार्य को भी अद्भुत बताया। बंदरों से सीखा ‘साधना’ का पाठ: “लोभ से बचना ही योग है” मंदिर जाते समय ‘बंदरों के चौराहे’ पर योगी ने एक दिलचस्प वाकया साझा किया। उन्होंने लंगूरों को फल और रोटियां खिलाईं और गौर किया कि एक बंदर ने तब तक दूसरी रोटी नहीं ली जब तक उसने पहली खा नहीं ली। सीख : योगी ने कहा कि मनुष्य में ‘संचय’ करने की प्रवृत्ति ही अशांति की जड़ है। अगर इंसान भी बंदरों की तरह लोभ छोड़ दे और केवल जरूरत भर का रखे, तो समाज से अराजकता खत्म हो सकती है। युवाओं को चेतावनी : “स्मार्टफोन और नशा, सोचने की शक्ति के दुश्मन” योगी आदित्यनाथ ने आज के दौर की सबसे बड़ी समस्याओं— नशा और स्मार्टफोन पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा: स्मार्टफोन का अधिक उपयोग सोचने की शक्ति को खत्म कर रहा है। लोग डिप्रेशन का शिकार हो रहे हैं और ऑनलाइन गेम्स जीवन बर्बाद कर रहे हैं। उन्होंने सलाह दी कि भोजन और पूजा के समय फोन को खुद से दूर रखें और परिवार को समय दें। भव्य स्वागत और संतों का सानिध्य मंच पर योगी के साथ तिजारा विधायक बाबा बालकनाथ और मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग समेत राजस्थान भर के बड़े साधु-संत मौजूद रहे। मंदिर समिति ने 5 किलो फूलों का हार पहनाकर उनका भव्य स्वागत किया। करीब 40 मिनट के भाषण में उन्होंने योग और व्यायाम को जीवन का हिस्सा बनाने पर जोर दिया। सत्ता और साधना का संगम योगी आदित्यनाथ का यह दौरा धार्मिक कम और ‘संस्कार निर्माण’ का कार्यक्रम अधिक लगा। उन्होंने जालोर के प्राचीन वैभव (सिरे मंदिर की कारीगरी) की तुलना आज के आधुनिक मूल्यों से की और यह संदेश दिया कि तकनीक के युग में भी हमारे मूल्य और परंपराएं ही हमें सुरक्षित रख सकती हैं।

चुनाव आयोग का सख्त एक्शन: शिकायतों पर 100 मिनट की डेडलाइन, 5000 उड़नदस्ते करेंगे निगरानी

नई दिल्ली चुनाव आयोग ने विधानसभा चुनावों के लिए 5 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों (असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी) में सख्त आदर्श आचार संहिता के निर्देश जारी किए हैं। 16 मार्च को चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही इन क्षेत्रों में एमसीसी तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है। चुनाव आयोग ने सुनिश्चित किया है कि चुनाव निष्पक्ष और स्वतंत्र तरीके से हों, इसलिए केंद्रीय सरकार सहित सभी संबंधित पक्षों पर MCC के प्रावधान लागू किए गए हैं। मुख्य सचिवों और मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे इसका सख्ती से पालन सुनिश्चित करें। इस बार कुल 824 विधानसभा सीटों पर चुनाव होंगे, जहां लगभग 17.4 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। करीब 2.19 लाख मतदान केंद्र स्थापित किए जाएंगे और लगभग 25 लाख कर्मी चुनाव प्रक्रिया में तैनात रहेंगे। चुनाव आयोग ने आदर्श आचार संहिता के उल्लंघनों पर त्वरित कार्रवाई के लिए 5,000 से अधिक फ्लाइंग स्क्वॉड्स (उड़नदस्ते) और 5,200 से ज्यादा स्टेटिक सर्विलांस टीमों की तैनाती की है। शिकायतों का निपटारा 100 मिनट के अंदर करने का लक्ष्य रखा गया है। नागरिकों की शिकायतों के लिए 1950 टोल-फ्री नंबर और सी-विजिल ऐप के माध्यम से रिपोर्टिंग की व्यवस्था की गई है। राजनीतिक दलों को रैलियां, जुलूस या सभाओं के लिए पहले से पुलिस को सूचित करना अनिवार्य है, लाउडस्पीकर आदि की इजाजत लेनी होगी। सार्वजनिक स्थलों जैसे मैदानों या हेलीपैड के उपयोग के लिए सुविधा पोर्टल पर पहले आओ पहले पाओ के आधार पर आवेदन करना होगा। EC का सख्त निर्देश मंत्रियों और अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे आधिकारिक कार्यों को चुनाव प्रचार से न जोड़ें व सरकारी मशीनरी, वाहनों या कर्मचारियों का दुरुपयोग न होने दें। निजी संपत्तियों पर बिना मालिक की अनुमति के पोस्टर, बैनर या झंडे नहीं लगाए जा सकेंगे। नागरिकों की निजता का सम्मान सुनिश्चित किया जाएगा व निजी आवासों के बाहर प्रदर्शन या धरना प्रतिबंधित रहेगा। चुनाव आयोग ने सभी स्तर के अधिकारियों से निष्पक्षता बरतने और सभी दलों के साथ समान व्यवहार करने का आह्वान किया है। मतदान की तिथियां चार चरणों में निर्धारित की गई हैं। 9 अप्रैल को केरल, असम और पुडुचेरी में एक ही चरण में, 23 अप्रैल को पश्चिम बंगाल का पहला चरण और तमिलनाडु, जबकि 29 अप्रैल को पश्चिम बंगाल का दूसरा चरण होगा। सभी राज्यों में मतगणना 4 मई 2026 को होगी। साथ ही 6 राज्यों में उपचुनाव भी घोषित किए गए हैं। चुनाव आयोग का उद्देश्य है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी, निष्पक्ष और कानून के अनुसार चले, जिससे लोकतंत्र की मजबूती बनी रहे।  

Government Offers Incentives with a 50% Subsidy; Floriculture Forges a New Identity for Farmers

  सरकारी योजनाओं का असर: पारंपरिक खेती छोड़ किसान अपना रहे हैं जरबेरा जैसी उच्च लाभ वाली खेती लखनऊ, योगी सरकार की योजनाओं का सीधा लाभ किसानों को मिल रहा है जिससे वे अच्छा लाभ कमा रहे हैं। इन योजनाओं के सहयोग से किसान अब आधुनिक और उच्च लाभ वाली खेती की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है बाराबंकी जिले के युवा किसान नीरज पटेल की, जिन्होंने फूलों की खेती के माध्यम से आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश की है। उन्हें उत्तर प्रदेश की ‘राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजना’ के अंतर्गत लाभ मिला। उत्तर प्रदेश सरकार के सहयोग से बदला नीरज का जीवन नीरज पटेल ने अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद खेती को ही अपना भविष्य बनाने का निर्णय लिया। वैसे उनके घर में पारंपरिक खेती ही की जाती है। लेकिन उन्होंने कुछ अलग करने का सोचा और एक दिन वह उद्यान विभाग के एक कार्यक्रम में पहुंचे, जहां उन्हें जरबेरा फूलों की खेती के बारे में जानकारी मिली। यह जानकारी उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट बन गई। उन्होंने आधुनिक तकनीक के साथ जरबेरा की खेती शुरू करने का फैसला किया। उन्होंने सरकार द्वारा चलाई जा रही ‘राष्ट्रीय बागवानी मिशन योजना’ का लाभ उठाया। उन्हें इस योजना के अंतर्गत वर्ष 2018 में 29 लाख 50 हजार का ऋण मिला और कुछ महीने बाद उन्हें 50% की सब्सिडी भी मिली।    राष्ट्रीय बागवानी मिशन से मिली नई राह सरकार की महत्वाकांक्षी ‘नेशनल हॉर्टिकल्चर मिशन’ और संरक्षित खेती के तहत पॉलीहाउस तकनीक से फूलों की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी योजना के अंतर्गत नीरज पटेल ने अपने एक एकड़ खेत में पॉलीहाउस स्थापित किया। पॉलीहाउस लगाने में लगभग 70 से 75 लाख रुपये की लागत आई। सरकार की योजना के अंतर्गत उन्हें ऋण और अनुदान मिला जिससे यह खेती करना उनके लिए काफी आसान हो गया। जरबेरा की खेती से आत्मनिर्भर बने नीरज आज नीरज के पॉलीहाउस में करीब 25 हजार जरबेरा पौधे लगे हुए हैं। यह पौधे रोजाना उत्पादन देते हैं और एक बार लगाए जाने के बाद लगभग छह साल तक लगातार उत्पादन देते हैं। अभी नीरज ने 5 अन्य लोगों को रोजगार दिया है, जिससे आसपास के ग्रामीणों को भी आय का नया स्रोत मिला है। आधुनिक ड्रिप सिंचाई प्रणाली के जरिए पौधों को बूंद-बूंद पानी दिया जाता है। इससे पानी की बचत होती है और उत्पादन की गुणवत्ता भी बेहतर रहती है। यह तकनीक इजरायली पद्धति पर आधारित है, जो खेती को अधिक लाभकारी बनाती है। हर साल 10 लाख रुपये तक की कमाई जरबेरा के फूलों की बाजार में काफी मांग है। शादी-समारोह, सजावट और विभिन्न आयोजनों में इन फूलों का उपयोग बड़े पैमाने पर होता है। इसी कारण नीरज पटेल को अपने फूलों की बिक्री में भी कोई कठिनाई नहीं आती। उन्होंने बताया कि साल भर में सभी खर्च निकालने के बाद उन्हें लगभग 8 से 10 लाख रुपये की बचत हो जाती है। नीरज की यह पहल केवल उनकी व्यक्तिगत सफलता तक सीमित नहीं है, वह अन्य किसानों को भी पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर फूलों की आधुनिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

तीन स्कीम, तीन फैक्टर और ममता का मैजिक: पश्चिम बंगाल में टीएमसी की ताकत का राज, भाजपा कहां खड़ी?

नई दिल्ली, कोलकाता पश्चिम बंगाल में चुनाव का ऐलान हो चुका है। 4 मई को नई सरकार बन जाएगी और उससे पहले 23 और 29 अप्रैल को मतदान होने वाला है। इस इलेक्शन को लेकर भाजपा काफी उत्साहित है और उसे लगता है कि वह 2021 के मुकाबले और मजबूत हो सकती है। वहीं ममता बनर्जी लगातार चौथे कार्यकाल के लिए मैदान में उतरेंगी। ममता बनर्जी को केंद्र सरकार से टकराव और तुनकमिजाजी के लिए जाना जाता है। 2021 के विधानसभा चुनाव के दौरान उन्होंने सघन प्रचार किया था और हाईवोल्टेज चुनाव में उन्होंने लगातार तीसरी बार विजय पाई थी। हालांकि वह खुद शुभेंदु अधिकारी के मुकाबले अपनी सीट नंदीग्राम में हार गई थीं। चुनाव की तारीखें आते ही एक ओपिनियन पोल भी सामने आया है, जिसमें ममता बनर्जी को बढ़त दिखाई गई है। अब सवाल है कि आखिर क्यों टीएमसी और ममता तीन कार्यकालों के बाद भी इतनी मजबूत हैं। इसके पीछे तीन योजनाओं और तीन फैक्टर को वजह माना जा रहा है। ये तीन योजनाएं हैं- लक्ष्मी भंडार, स्वास्थ्य साथी और युवा साथी। इनके माध्यम से ममता बनर्जी ने महिला, युवा और बुजुर्ग तीनों वर्ग साधने के प्रयास किए हैं। इसके अतिरिक्त उनकी कोशिश रही है कि SIR को एक बड़ा मुद्दा बना दें और वोटरों के खिलाफ इसे लेकर केंद्र सरकार के प्रति गुस्सा पैदा किया जाए। अब तीन फैक्टरों की बात करें तो पहला यह कि ममता बनर्जी की महिलाओं के बीच अच्छी पकड़ मानी जाती है। आरजी कर मेडिकल कॉलेज रेप कांड के मामले में भले ही उनकी पार्टी घेरे में आई थी, लेकिन अब भी महिलाओं का उन पर भरोसा दिखता है। इसके अतिरिक्त वह बांग्ला अस्मिता का सवाल उठाने में भी आगे रही हैं। इसके जरिए उन्होंने अकसर यह कोशिश की है कि किसी भी मामले को दिल्ली बनाम बंगाल की शक्ल दे दी जाए। इसके जरिए उन्होंने बांग्ला राष्ट्रवाद को मजबूत करने के प्रयास किए हैं। अब यदि भाजपा की बात करें तो उसके पास बांग्ला अस्मिता वाला कार्ड कमजोर पड़ जाता है। इसके अलावा उसके पास ममता बनर्जी जैसे एक बड़े चेहरे का अभाव है, जो पूरे राज्य में वोटरों को लुभा सके। हालांकि टीचर घोटाला, आरजी कर रेप और मर्डर केस जैसे मामलों ने भाजपा को कुछ मुद्दे दिए हैं। इसके अतिरिक्त बंगाल में बांग्लादेशियों की अवैध घुसपैठ हमेशा से एक बड़ा मामला रहा है। ऐसे में देखना होगा कि भाजपा इस बार अपने हाथ लगने मुद्दों को किस तरह से भुना पाती है।  

योगी सरकार में डिजिटल क्रॉप सर्वे को मिली रफ्तार, खरीफ और रबी दोनों सीजन में बड़े पैमाने पर सर्वे पूरा

किसानों के हित में बड़ा कदम, यूपी में तेजी से आगे बढ़ रहा ‘फार्मर रजिस्ट्री’ अभियान लखनऊ,  उत्तर प्रदेश में कृषि क्षेत्र को डिजिटल और पारदर्शी बनाने की दिशा में योगी सरकार लगातार महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। प्रदेश में डिजिटल क्रॉप सर्वे और फार्मर रजिस्ट्री अभियान के माध्यम से किसानों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने और कृषि व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित बनाने का कार्य तेजी से किया जा रहा है। खरीफ और रबी दोनों सीजन में डिजिटल क्रॉप सर्वे को तेजी से आगे बढ़ाया गया है। इसके तहत प्रदेश के राजस्व गांवों में बड़ी संख्या में खेतों और फसलों का डिजिटल सर्वे किया जा रहा है, जिससे फसल से संबंधित सटीक आंकड़े उपलब्ध हो सकें। इसके अलावा किसानों को योजनाओं का लाभ पारदर्शी तरीके से मिल सके।   प्रदेश में कुल 1,08,935 राजस्व गांवों में से 95,765 गांवों का जियो रेफरेंसिंग कार्य पहले ही पूरा किया जा चुका है। इसके आधार पर खरीफ और रबी दोनों सीजन में लाखों खेतों का डिजिटल सर्वे किया गया है। खरीफ सीजन में 5,37,08,511 से अधिक प्लॉट का सर्वे अंतिम रूप से स्वीकृत किया गया है, जबकि रबी सीजन में भी 5,56,44,677 से अधिक प्लॉट का सर्वे पूरा किया जा चुका है। फार्मर रजिस्ट्री अभियान को मिली गति योगी सरकार द्वारा किसानों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने के लिए फार्मर रजिस्ट्री अभियान को भी मिशन मोड में चलाया जा रहा है। केंद्र सरकार के अनुसार प्रदेश में पीएम किसान योजना के लाभार्थियों की संख्या लगभग 2,88,70,495 है। सत्यापन अभियान के बाद 2,31,36,350 से अधिक किसानों का डेटा उपलब्ध हुआ है। इनमें से अब तक 1, 67,01,996 से अधिक पीएम किसान सम्मान योजना के लाभार्थी फार्मर रजिस्ट्री में शामिल हो चुके हैं, जो कुल लक्ष्य का लगभग 72.19 प्रतिशत है। इसके अतिरिक्त करीब 28, 37,162 वे किसान भी फार्मर रजिस्ट्री में पंजीकृत किए गए हैं जो पीएम किसान सम्मान योजना में शामिल नहीं हैं।    डिजिटल तकनीक से कृषि व्यवस्था होगी मजबूत योगी सरकार का मानना है कि डिजिटल क्रॉप सर्वे और फार्मर रजिस्ट्री के माध्यम से किसानों का सटीक डाटाबेस तैयार होगा, जिससे फसल बीमा, कृषि अनुदान, आपदा राहत और अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ सही किसान तक पहुंचाने में आसानी होगी। इससे कृषि क्षेत्र में पारदर्शिता भी बढ़ेगी और योजनाओं के क्रियान्वयन में गति आएगी।    योगी सरकार के कृषि क्षेत्र में डिजिटल तकनीक के प्रयोग को बढ़ावा देने से उत्तर प्रदेश देश के अग्रणी राज्यों में शामिल होता जा रहा है। आने वाले समय में इन पहल के माध्यम से किसानों को योजनाओं का लाभ और अधिक प्रभावी तरीके से मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

RSS और RAW को लेकर US आयोग सख्त, ट्रंप प्रशासन से प्रतिबंध पर विचार करने की सलाह

वाशिंगटन संयुक्त राज्य अमेरिका की अंतर्राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग ने ट्रंप प्रशासन से ‘राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ’ और भारत की खुफिया एजेंसी ‘रॉ ‘पर लक्षित प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की है। आयोग का आरोप है कि इनकी वजह से भारत में धार्मिक स्वतंत्रता घटी है। भारत को धार्मिक स्वतंत्रता के मामले में’विशेष चिंता का देश’ बताते हुए आयोग ने वाशिंगटन सरकार से कहा है कि वह भारत के साथ हथियार बिक्री और व्यापार नीतियों पर भी ध्यान दे। अभी तक भारतीय विदेश मंत्रालय ने USCIRF की इस नई रिपोर्ट पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन पिछले वर्षों में आई रिपोर्ट्स को भारत सरकार ने सिरे से खारिज करते हुए पक्षपाती करार दिया था। USCIRF ने हाल ही में जारी की गई अपनी वार्षिक रिपोर्ट में कहा है कि भारत में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। इतना ही नहीं रिपोर्ट में धार्मिक अल्पसंख्यकों को और पूजा स्थलों को निशाना बनाए जाने का भी आरोप लगाया। रिपोर्ट में कहा गया, “भारत के कई राज्यो में धर्म परिवर्तन विरोधी कानूनों को लागू करने का प्रयास किया गया है। इन कानूनों में आरोपियों के खिलाफ कड़ी सजा का भी प्रावधान रखा गया है। भारतीय अधिकारियों ने नागरिकों और धार्मिक शरणार्थियों को जेल में डालने या उन्हें देश से बाहर निकालने को भी सुगम बनाया है। इसके अलावा भारत में धार्मिक अल्पसंख्यक समुदायों के ऊपर भीड़ द्वारा किए जाने वाले हमलों में भी वृद्धि हुई है।” गौरतलब है कि भारत के ऊपर आरोप वह अमेरिका लगा रहा है, जहां पिछले एक साल में हिंसा और नृजातीय भेदभाव की घटनाएं बढ़ी हैं। ट्रंप प्रशासन के आने के बाद अमेरिका में भारतीय, अफ्रीकियों और एशिया के लोगों के प्रति भेदभाव की घटनाएं बढ़ी हैं। ट्रंप के कई करीबी इस्लाम विरोधी माने जाते हैं। वक्फ संशोधन अधिनियम की आलोचना USCIRF ने अपनी रिपोर्ट में भारत सरकार द्वारा लाए गए वक्फ संशोधन अधिनियम की भी आलोचना की है। बता दें, सरकार द्वारा यह अधिनियम इस्लामी धर्मार्थ संपत्तियों के नियमन और प्रबंधन में व्यापक बदलाव करने और इन्हें कानूनी रूप से ढालने के लिए लाया गया था। रिपोर्ट में इसके अलावा उत्तराखंड सरकार द्वारा लाए गए अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण अधिनियम की भी आलोचना की गई है। USCIRF ने महाराष्ट्र, ओडिशा और उत्तर प्रदेश में हुए सांप्रदायिक झड़पों का उल्लेख किया और हिंसा के लिए विश्व हिंदू परिषद विश्व हिंदू परिषद जैसे संगठनों (जो RSS से संबद्ध है) को जिम्मेदार ठहराया। ट्रंप प्रशासन को सिफारिश USCIRF ने ट्रंप प्रशासन से सिफारिश की कि वह भारत सरकार पर धार्मिक मुद्दों को लेकर दबाव डाले। उन्होंने सुझाव दिया, “अमेरिकी सरकार को भारत को हथियार बेचने से परहेज करना चाहिए, क्योंकि भारत सरकार की तरफ से क्योंकि अमेरिका के नागरिकों और धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ डराने-धमकाने और उत्पीड़न की घटनाएँ जारी हैं। आपको बता दें, 1998 में अमेरिकी कांग्रेस द्वारा पारित किए गए एक अधिनियम के आधार पर बना यह आयोग दुनिया भर के देशों की धार्मिक स्थिति पर अपने हिसाब से रिपोर्ट तैयार करता है। इस रिपोर्ट के आधार पर यह अमेरिकी राष्ट्रपति, विदेश मंत्री और अमेरिकी कांग्रेस को सिफारिश देता है। यह एजेंसी कहती है कि वह स्वतंत्र रूप से काम करती है, लेकिन इसके नौ आयुक्तों की नियुक्ति अमेरिकी राष्ट्रपति और प्रतिनिधि सभा तथा सीनेट के वरिष्ठ राजनीतिक नेता करते हैं। विदेश मंत्रालय ने बताया था पक्षपाती भारत सरकार लगातार इस आयोग की रिपोर्ट के पक्षपाती और राजनैतिक रूप से प्रेरित करार देती रही है। 2025 में जब इसकी वार्षिक रिपोर्ट आई थी तब विदेश मंत्रालय ने कहा था कि यह रिपोर्ट अलग-थलग घटनाओं को बढा-चढ़ाकर पेश करती है और भारत के विविधता में एकता वाले समाज पर सवाल उठाने का एक सुनियोजित एजेंडा पेश कर रही है। इसे किसी भी देश की धार्मिक स्वतंत्रता की चिंता नहीं है। आपको बता दें, इससे पहले भी 2019 में लागू किए गए नागरिकता संसोधन एक्ट की भी इस एजेंसी ने आलोचना की थी, जिसके बाद भारत सरकार ने इसकी टीम को वीजा देने से इनकार कर दिया था। यह एजेंसी दुनिया भर के देशों में होने वाली घटनाओं को बढ़ाचढ़ाकर पेश करती है, जबकि अमेरिका में होने वाली घटनाओं को कमतर करके दिखाती है। अगर स्वतंत्र एजेंसियों की रिपोर्ट को देखा जाए, तो अमेरिका में पिछले कुछ सालों में धार्मिक और नृजातीय भेदभाव और हिंसा के मामले बढ़े हैं। इसके अलावा अमेरिका में गोलीबारी की घटनाएं आम हैं।

संगीत नाटक अकादमी के पुरस्कारों की घोषणा, विभिन्न विधाओं के कलाकार होंगे सम्मानित

वर्ष 2021 से लेकर वर्ष 2024 तक के अकादमी पुरस्कारों के लिए कलाकारों के नामों की घोषणा अकादमी पुरस्कार के साथ सफदर हाशमी एवं बी.एम.शाह पुरस्कारों के लिए कलाकारों के नामों का हुआ चयन लखनऊ,  राज्य में संगीत, नृत्य, नाटक एवं लोक कलाओं के संरक्षण, संवर्धन और प्रसार के लिए समर्पित संगीत नाटक अकादमी, उत्तर प्रदेश की ओर से अकादमी पुरस्कारों की घोषणा की गई। इस अवसर पर अकादमी के अध्यक्ष प्रो. जयंत खोत ने बताया कि संगीत नाटक अकादमी उत्तर प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखने एवं उसके संवर्धन में योगदान देने वाले कलाकारों को अकादमी पुरस्कारों से सम्मानित करती है। इसी क्रम में अकादमी की ओर से वर्ष 2021 से लेकर वर्ष 2024 तक के चार वर्षों के अकादमी पुरस्कार के साथ नाटक एवं रंगमंच के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले कलाकारों को बी.एम. शाह पुरस्कार और सफदर हाशमी पुरस्कार प्रदान किए जाने की घोषणा की गई है।    संगीत नाटक अकादमी, उत्तर प्रदेश की ओर से वर्ष 2021 के अकादमी पुरस्कार के लिए शास्त्रीय गायन के क्षेत्र में पं. दीनानाथ मिश्रा,  लोक गायन के लिए श्रीकांत वैश्य, नक्कारा वादन के लिए कानपुर के प्रभु दयाल और शहनाई वादन के लिए वाराणसी के जवाहर लाल के नामों की घोषणा की गई। इस क्रम में रंगमंच निर्देशन के लिए भूमिकेश्वर सिंह, रंगमंच तकनीकी-प्रकाशन के लिए जगमोहन रावत, नौटंकी निर्देशन के लिए राजकुमार श्रीवास्तव एवं नाट्य लेखन के लिए विजय पंडित को सम्मानित किया जाएगा। कला उन्नयन के लिए मथुरा के मोहन स्वरूप भाटिया और वाराणसी की माला होम्बल के नामों का चयन किया गया है। जबकि नृत्य विधा में मथुरा,वृदांवन की भरतनाट्यम नृत्यांगना प्रतिभा शर्मा को पुरस्कार दिया जाएगा। इसके साथ ही वर्ष 2021 के सफदर हाशमी पुरस्कार के लिए रीवा के मनोज कुमार मिश्रा एवं बी.एम. शाह पुरस्कार के लिए दिल्ली के सतीश आनन्द पुरस्कृत करने की घोषणा की गई है। इसी क्रम में वर्ष 2022 के अकादमी पुरस्कार के लिए शास्त्रीय गायन एवं लोक गायन के लिए मथुरा के आनन्द कुमार मलिक व माधुरी शर्मा, जबकि कथक नृत्य के लिए लखनऊ के पं. अनुज मिश्रा, पखावज वादन के लिए शशिकांत पाठक और तबला वादन के लिए प्रयागराज के पंकज कुमार श्रीवास्तव के नामों की घोषणा की गई है। वहीं गिटार वादन के लिए सुनील पावगी, बांसुरी वादन के लिए मोहन लाल कुंवर, रंगमंच अभिनय के लिए मंजू कौशल तथा रंगमंच तकनीक-कठपुतली के लिए मेराज आलम को पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। नाट्य लेखन,संगीत, नृत्य एवं रंगमंच के लिए वाराणसी के विजय शंकर मिश्रा एवं कला समीक्षा के लिए सीतापुर के पद्मकांत शर्मा को सम्मानित करने की घोषणा की गई है। जबकि वर्ष 2022 के सफदर हाशमी पुरस्कार के लिए नई दिल्ली के राजेश सिंह एवं बी.एम. शाह पुरस्कार के लिए भोपाल के कमल जैन के नामों का चयन किया गया है। संगीत नाटक अकादमी की ओर से वर्ष 2023 के लिए शास्त्रीय गायन की श्रेणी में डॉ. रामशंकर, सुगम गायन के लिए मनोज गुप्ता एवं लोक गायन के लिए राकेश श्रीवास्तव को सम्मानित करने की घोषणा की गई। जबकि कथक नृत्य के लिए लखनऊ की डॉ. आकांक्षा श्रीवास्तव, तबला वादन के लिए अनूप बनर्जी और बांसुरी वादन के लिए चेतन कुमार जोशी के नामों का चयन किया गया है। वहीं नाटक एवं रंगमंच के क्षेत्र में निर्देशन के लिए राजकुमार उपाध्याय, अभिनय के लिए संजय देगलुरकर, लेखन-संगीत एवं नृत्य के लिए उमा त्रिगुणायत, कला उन्नयन के लिए डॉ. ओमेन्द्र कुमार एवं कला समीक्षा के लिए अर्जुनदास केसरी को पुरस्कृत किया जाएगा। वहीं सफदर हाशमी पुरस्कार के लिए गाजियाबाद के अजय कुमार और बी.एम. शाह पुरस्कार के लिए गोरखपुर के रविशंकर खरे के नाम का चयन किया गया है। इसी क्रम में वर्ष 2024 के अकादमी पुरस्कार में शास्त्रीय गायन के लिए रीतेश-रजनीश मिश्रा, सुगम गायन के लिए मुक्ता चटर्जी और लोकगायन (आल्हा) के लिए रामस्थ पाण्डेय को सम्मानित करने की घोषणा की गई है। वहीं लोक नृत्य के लिए सुगम सिंह शेखावत, दुक्कड़ वादन के लिए मंगल प्रसाद, वायलिन वादन के लिए सुखदेव मिश्रा एवं सितार वादन के लिए वाराणसी के राजेश शाह को पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। जबकि रंगमंच के क्षेत्र में निर्देशन के लिए सुषमा शर्मा, अभिनय क्षेत्र में रविकांत शुक्ला ‘शिब्बू’, कला उन्नयन के लिए राजेश पंडित एवं कला समीक्षा के लिए शशिप्रभा तिवारी को सम्मानित किया जाएगा। इसके साथ ही वर्ष 2024 के लिए सफदर हाशमी पुरस्कार के लिए लखनऊ के शुभदीप राहा और बी.एम. शाह पुरस्कार के लिए भोपाल के संजय मेहता के नामों का चयन किया गया है।अध्यक्ष प्रो. जयंत ने बताया कि अकादमी की ओर से जल्द ही विशेष कार्यक्रम का आयोजन कर इन सभी कलाकारों को पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया जाएगा।

बारामती में परिवार की सियासत: सुप्रिया सुले ने सुनेत्रा पवार को दिया सीधा रास्ता

नई दिल्ली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने सोमवार को कहाकि उनकी पार्टी आगामी बारामती विधानसभा उपचुनाव में डिप्टी सीएम और राकांपा नेता सुनेत्रा पवार के खिलाफ कोई उम्मीदवार नहीं उतारेगी। निर्वाचन आयोग ने रविवार को घोषणा की कि पुणे के बारामती और अहिल्यानगर के राहुरी में उपचुनाव 23 अप्रैल को होंगे। बारामती और राहुरी उपचुनाव क्रमश: पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक शिवाजी कर्डिले के निधन के कारण जरूरी हो गए हैं। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) की अध्यक्ष सुनेत्रा पवार के बारामती से उपचुनाव लड़ने की संभावना है। चुनाव पर क्या कहा सुले ने दिल्ली में पत्रकारों से कहाकि मैंने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि राकांपा (शप) बारामती उपचुनाव नहीं लड़ेगी। हम सुनेत्रा वहिनी (भाभी) के खिलाफ अपना उम्मीदवार नहीं उतारेंगे। राहुरी सीट के संबंध में (विपक्षी) महा विकास आघाडी (एमवीए) के सहयोगी इस सीट पर विचार-विमर्श करेंगे और अगले कुछ दिनों में निर्णय लिया जाएगा। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने रविवार को कहा था कि बारामती और राहुरी विधानसभा सीट पर उपचुनाव आम सहमति से निर्विरोध कराए जाने के लिए हरसंभव प्रयास किया जाएगा, लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर मुकाबला होता है तो भाजपा इसके लिए तैयार है। साल 2024 के आम चुनावों में राकांपा (शप) प्रमुख शरद पवार की बेटी सुले ने अपने चचेरे भाई अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार को हराकर बारामती लोकसभा सीट बरकरार रखी थी, जो पहली बार चुनाव लड़ रही थीं। बाद में सुनेत्रा पवार राज्यसभा सदस्य चुनी गईं। इस साल 28 जनवरी को पुणे जिले के बारामती हवाई पट्टी के पास एक विमान दुर्घटना में उनके पति अजित पवार और चार अन्य लोगों की मौत हो गई, जिसके बाद उन्हें उपमुख्यमंत्री और राकांपा का अध्यक्ष नियुक्त किया गया। अजित पवार की मौत की हो जांच अजित पवार के विमान दुर्घटना की जांच के संबंध में सुले ने कहाकि वे इस मामले में पारदर्शी जांच की मांग कर रहे हैं। पश्चिम एशिया संघर्ष के बीच एलपीजी की स्थिति के बारे में सुले ने कहा कि केंद्र को एक सर्वदलीय बैठक बुलानी चाहिए और सभी को विश्वास में लेना चाहिए। उन्होंने कहाकि होटल उद्योग सहित व्यवसायों को भू-राजनीतिक अस्थिरता के कारण कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। बारामती की सांसद ने इस मुद्दे पर संसद में चर्चा की भी मांग की। सुले ने कहाकि मुझे आश्चर्य हो रहा है कि राज्य और केंद्र सरकार एलपीजी संकट को स्वीकार क्यों नहीं कर रही हैं। इसे दबाने की कोशिशें क्यों की जा रही हैं? इस संकट से निपटने के लिए एक व्यापक कार्य योजना तैयार की जानी चाहिए।  

योगी ने युवा पीढ़ी को दी सीख- विफलता मिली है तो कारण ढूंढ़कर उसे सफलता में बदलें, परिवार के लिए समय निकालिए, बातचीत कीजिए

जालोर (राजस्थान) में श्री रत्नेश्वर महादेव मंदिर के 375 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित दो दिवसीय महायज्ञ एवं विशाल धर्मसभा में शामिल हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री ने मातृशक्ति का किया आह्वान- बच्चों को रोने और नाराज होने दें, लेकिन स्मार्टफोन कतई न दें जालोर/लखनऊ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मातृशक्ति का आह्वान किया कि छोटी आयु के बच्चों को रोने-नाराज होने दें, कुछ देर में वे ठीक हो जाएंगे, लेकिन स्मार्टफोन कतई न दें। स्मार्ट फोन का अधिकाधिक प्रयोग समय की हानि के साथ आंखों को नुकसान पहुंचा रहा है। यह सोचने की सामर्थ्य को कम और बुद्धि को कुंठित कर रहा है। लोग डिप्रेशन के शिकार हो रहे हैं। स्मार्टफोन के तमाम गेम नकारात्मक दिशा की ओर ले जा रहे हैं। बच्चा जितना समय स्मार्टफोन पर खर्च कर रहा है, उतना समय यदि अच्छी पुस्तकों, योग, व्यायाम पर लगाएगा तो जीवन सुंदर-व्यवस्थित होगा। स्मार्टफोन का लगातार प्रयोग नशे जैसा ही खतरनाक है। राजस्थान दौरे के दूसरे दिन सोमवार को गोरक्षपीठाधीश्वर व उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जालोर के श्री रत्नेश्वर महादेव मंदिर (सिरे मंदिर) के 375 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित दो दिवसीय महायज्ञ एवं विशाल धर्मसभा में शामिल हुए। युवा पीढ़ी को दी सीख- परिवार के लिए समय निकालिए, बातचीत कीजिए धर्मसभा को संबोधित करते हुए सीएम ने युवा पीढ़ी को सीख दी कि जितना आवश्यक है, उतना ही स्मार्टफोन प्रयोग कीजिए। परिवार के लिए समय निकालिए, बातचीत कीजिए। भोजन, पूजा के समय फोन न उठाइए, बाद में कॉलबैक कीजिए। स्मार्टफोन एक समय बाद डिप्रेशन की बीमारी पैदा करने वाला है। छोटी-छोटी बातों के कारण आत्महत्याओं की प्रवृत्ति बढ़ी है। कभी विफलता मिली है तो कारण ढूंढ़कर उसे सफलता में बदलना ही जीवन है। विफलता से घबराना नहीं, बल्कि चुनौतियों का मुकाबला करना है। कोई भाग्य नहीं ले सकता, सब कुछ ईश्वरीय कृपा से ही मिलता है। लोभ-लालच से मुक्त रहकर देश, समाज के लिए सोचिए। नशे के सौदागरों को परिवार, समाज, नगर, कस्बे, गांव में घुसने न देना सीएम ने कहा कि देश के दुश्मन और नशे के सौदागर युवा पीढ़ी को नशे के आगोश में ले जाना चाहते हैं। नशे के कारोबारियों को सफल नहीं होने देना है। किसी देश के भविष्य को देखना है तो युवा पीढ़ी को देखें। यह सही दिशा में है तो देश नई ऊंचाई तक पहुंचता है। सीएम ने अपील की कि नशे के सौदागरों को परिवार, समाज, नगर, कस्बे या गांव, कहीं नहीं घुसने देना है। मनुष्य हड़पने की बजाय जरूरतमंद तक पहुंचाने का भाव रखे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि दुनिया में 200 से अधिक देश हैं, लेकिन भारत जैसा कोई नहीं। भारत दुनिया में अलग क्यों है, इसके लिए त्योहारों, परंपराओं, ऋषियों-मुनियों, विद्वानों, सैनिकों, किसानों, नौजवानों, बहन-बेटियों तथा माताओं के योगदान की विशिष्टता को समझना होगा। सीएम ने सिरे मंदिर के आसपास बंदरों के चौराहे का जिक्र करते हुए कहा कि कल जब हम लोग यहां रुके तो ढेर बंदर आ गए। हमने एक बंदर को रोटी दी तो वह खाने लगा, लेकिन जब तक उसने पहली रोटी खा नहीं ली, तब तक दूसरी रोटी नहीं ली। मनुष्यों को यह शालीनता सीखनी चाहिए। मनुष्य हड़पने व संचय की बजाय जरूरतमंद तक पहुंचाने का भाव रखे। लोभ संवरण साधना है और इसे जीवन का हिस्सा बनाना परम साधना है। विरोध को भी अपने में समाहित करने का सामर्थ्य रखता है भारत सीएम योगी ने कहा कि ऋषि-मुनि जहां साधना करते थे, उस पूरे क्षेत्र का प्रभाव इतना आध्यात्मिक होता था कि शेर और गाय एक ही घाट पर पानी पीते थे। सीएम ने शिव परिवार का जिक्र किया। कहा कि मां पार्वती दुर्गा की प्रतीक हैं, उनकी सवारी शेर और भोलेनाथ की सवारी बैल है। गणपति की सवारी चूहा, भोलेनाथ के गले में नाग और कार्तिकेय की सवारी मोर है, फिर भी सब साथ मिलकर जीवन चक्र को संचालित कर रहे हैं। जहां विरोध को भी अपने में समाहित करने का सामर्थ्य हो और समतामूलक समाज को एकता के सूत्र में आगे बढ़ाने की ताकत हो,  वही भारत है। भारत ने दुनिया को जीने की कला सिखाई। ऋषि-मुनियों की साधना, वीर-वीरांगनाओं के बलिदान, अन्नदाता किसानों के परिश्रम, कारीगरों की उद्यमिता, हस्तशिल्पियों के कार्य व श्रमिकों के पसीने से भारत का निर्माण हुआ है। समाज का हर तबका जुड़कर योगदान देता है तो देश ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ बनता है। धर्म जोड़ता है और जातिवाद व्यवस्था को कमजोर करता है सीएम योगी ने मत्स्यनाथ पीठ, फतेहपुर में बाबा अमृतनाथ पीठ आदि का जिक्र किया और कहा कि मंच पर बैठे सभी योगेश्वर गुरु परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। इन पीठों के द्वारा समाज व समिष्टि के लिए स्वास्थ्य, शिक्षा, लोक कल्याण के लिए अनेक कार्यक्रम संचालित हो रहे हैं। भक्ति, साधना व सामर्थ्य के माध्यम से लोककल्याण का बड़ा अभियान चल रहा है। हम भी इस परंपरा को बढ़ाने में अपनी ओर से प्रयास प्रारंभ करें। भारत छोड़कर किसी भी देश में ऋषि-मुनियों की परंपरा से जुड़ने का अवसर नहीं मिलेगा। हमारे पास लंबी विरासत-परंपरा है। सनातन धर्मावलंबी आश्रम व संतों-योगेश्वरों के साथ संवाद-संबंध जोड़कर परंपरा से रच-बस जाता है। उसे यहां परिवार, अपनत्व, अभिभावक का भाव दिखता है। ईश्वर के अवतार की भूमि भी सिर्फ भारत ही बनती है। धर्म जोड़ने का माध्यम है, लेकिन जातिवाद व्यवस्था को कमजोर करता है। गोरक्षपीठाधीश्वर ने कहा कि नाथ संप्रदाय की परंपरा हर काल खंड में धराधाम पर विराजमान है। संत, योगी, योगेश्वर सदैव अजर-अमर हैं। इनकी कृपा भक्तों व आस्थावान श्रद्धालुओं पर बरसती है। हम भी प्रयास करें क्योंकि देश, समाज, धर्म के लिए किया गया योगदान कभी व्यर्थ नहीं जाता। समाज को बांटने का पाप करने वाले को समझाएं और उसे दूर करने का प्रयास करें। वीरों-वीरांगनाओं के बलिदान से बना है यह देश सीएम ने वीरमदेव, कीर्ति चौहान आदि वीरों को याद करते हुए कहा कि यह देश वीरों व वीरांगनाओं के बलिदान से बना है। चित्तौड़गढ़ में रानी पद्मिनी ने हजारों वीरांगनाओं के साथ जौहर किया था। जालोर में भी अलाउद्दीन खिलजी और उसके बाद भी यह परंपरा देखने को मिली। सीएम ने सिरे मंदिर की बारीक कारीगरी, दुर्लभ कला, शिलालेखों का जिक्र करते हुए महाराजा मान सिंह … Read more

एक साथ कई जोड़े बने जीवनसाथी, छत्तीसगढ़ का सामूहिक विवाह विश्व रिकॉर्ड में शामिल

6,412 जोड़ों के साथ सामाजिक समरसता के साथ ऐतिहासिक मिसाल रायपुर, छत्तीसगढ़ ने सामाजिक समरसता, जनभागीदारी और संवेदनशील शासन की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए विश्व स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान दर्ज कराई है। मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के अंतर्गत आयोजित राज्य स्तरीय सामूहिक विवाह समारोह को गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में स्थान मिला है। एक ही दिन में हजारों जोड़ों का विवाह संपन्न कराकर छत्तीसगढ़ ने सामाजिक एकता और अंत्योदय की भावना का ऐसा प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत किया है, जिसकी देशभर में सराहना हो रही है। 10 फरवरी को राजधानी रायपुर के साइंस कॉलेज मैदान में आयोजित इस भव्य समारोह में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के सान्निध्य में पूरे प्रदेश से कुल 6,412 जोड़े वैवाहिक बंधन में बंधे। इनमें से 1,316 जोड़ों का विवाह रायपुर में प्रत्यक्ष रूप से संपन्न हुआ, जबकि शेष जोड़े प्रदेश के विभिन्न जिलों से वर्चुअल माध्यम से इस ऐतिहासिक आयोजन से जुड़े। सभी विवाह धार्मिक परंपराओं और सामाजिक रीति-रिवाजों के अनुरूप संपन्न कराए गए, जिससे यह आयोजन केवल एक सरकारी कार्यक्रम न रहकर सामाजिक समरसता और सामूहिक खुशियों का विराट उत्सव बन गया। इस ऐतिहासिक आयोजन को गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया जाना छत्तीसगढ़ के लिए गर्व और गौरव का विषय है। इस समारोह की विशेषता यह भी रही कि इसमें हिंदू, मुस्लिम, ईसाई, बौद्ध तथा विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा समुदाय के जोड़ों ने अपने-अपने धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार विवाह संपन्न किए। यह आयोजन छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विविधता, आपसी सद्भाव और सर्वधर्म समभाव की भावना का जीवंत प्रतीक बन गया। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इस अवसर पर कहा कि मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए सम्मान, विश्वास और सामाजिक सुरक्षा का मजबूत आधार बन गई है। उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा था जब आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए बेटियों का विवाह बड़ी चिंता का विषय होता था, लेकिन इस योजना ने उस चिंता को दूर कर हजारों परिवारों के जीवन में नई खुशियां और विश्वास का संचार किया है। योजना के अंतर्गत प्रत्येक नवविवाहित दंपति को 35 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की गई। महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना की शुरुआत पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में की गई थी और वर्तमान सरकार इसे और अधिक व्यापक स्वरूप देते हुए समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचे और सामाजिक समरसता को और मजबूत बनाया जाए। यह ऐतिहासिक आयोजन इस बात का प्रमाण है कि जब शासन की योजनाएं संवेदनशीलता, जनभागीदारी और सामाजिक सहयोग के साथ लागू होती हैं, तब वे केवल सरकारी योजनाएं नहीं रह जातीं, बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन की प्रेरणा बन जाती हैं। गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ को सामाजिक समरसता और जनकल्याण के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान प्रदान करती है।

पश्चिम बंगाल चुनाव में रालोजपा की तैयारी, 100 सीटों पर अकेले मैदान में उतरेगी: राजकुमार राज

कोलकाता राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी के झारखंड प्रदेश अध्यक्ष राजकुमार राज ने कहा कि आगामी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में अपने दम पर 100 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। राज ने बताया कि पार्टी पश्चिम बंगाल में अपने संगठन को लगातार मजबूत कर रही है और प्रदेश अध्यक्ष सोमनाथ पांडे के नेतृत्व में राज्य भर में रैली और बैठकों का आयोजन किया जा रहा है। पश्चिम बंगाल के कई क्षेत्रों में पार्टी अपने उम्मीदवार उतारेगी राज ने बताया कि इसी क्रम में 29 मार्च को बांकुरा में पार्टी की ओर से एक विशाल जनसभा आयोजित की जाएगी, जिसमें पार्टी के कई केंद्रीय नेता शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि वह स्वयं झारखंड से सह-प्रभारी के रूप में इस कार्यक्रम में मौजूद रहेंगे। राज ने कहा कि पश्चिम बंगाल में पद्म भूषण से सम्मानित स्वर्गीय रामविलास पासवान के समर्थकों की बड़ी संख्या है, जिसका लाभ पार्टी को आगामी विधानसभा चुनाव में मिलने की उम्मीद है। झारखंड से सटे पश्चिम बंगाल के कई क्षेत्रों में पार्टी अपने उम्मीदवार उतारेगी। इनमें पुरुलिया, बांकुरा, मेदिनीपुर, खड़गपुर और आसनसोल प्रमुख रूप से शामिल हैं। राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी भाजपा के साथ है राज ने आगे कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी भारतीय जनता पार्टी के साथ है, लेकिन संगठन के विस्तार और मजबूती के उद्देश्य से पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में पार्टी अकेले चुनाव लड़ेगी। राज ने दावा किया कि पार्टी ने अधिकतर सीटों पर मजबूत उम्मीदवार तैयार किए हैं और उन्हें पूरा विश्वास है कि आगामी विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी न सिर्फ अपना खाता खोलेगी बल्कि पश्चिम बंगाल की राजनीति में अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज कराएगी।  

देश में पीएम मोदी की लहर, हर चुनाव में भाजपा को मिलेगा समर्थन: कंगना रनौत

शिमला एनडीए के सांसदों ने असम, पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में होने वाले विधानसभा चुनावों में जीत का दावा किया है। उन्होंने कहा कि जनता को पता है कि कौन सी सरकार इनका विकास कर सकती है, इसीलिए एनडीए को जिताएगी। भाजपा सांसद कंगना रनौत ने चुनावी तारीखों की घोषणा के बाद कहा, “हम निश्चित रूप से जीतेंगे। सारे कार्यकर्ता इस काम में जुट गए हैं और हर जगह हम भाजपा का परचम लहराएंगे।” उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में नई परियोजनाओं का उद्घाटन हो रहा है और जनता को भरोसा रखना चाहिए। महंगाई और एलपीजी संकट से संबंधित अफवाहों को गलत बताते हुए जनता से प्रधानमंत्री पर विश्वास रखने की अपील की। कंगना ने कहा कि जनता विपक्ष के बहकावे में नहीं आने वाली है। जनता को एनडीए की सरकार और प्रधानमंत्री पर विश्वास है। विपक्ष को जनता के हित में सोचना चाहिए। एलपीजी आपूर्ति को लेकर केंद्रीय मंत्री सुरेश गोपी ने कहा कि सरकार इस समस्या से निपटने के लिए वैकल्पिक उपाय तलाश रही है। विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें आलोचना करने के बजाय जनता के खाने-पीने के मामलों में सहयोग देना चाहिए। सुरेश गोपी ने पश्चिम एशिया के मुद्दे के कारण उत्पन्न कठिनाई का हवाला देते हुए जनता से संयम और अच्छे नतीजों की प्रतीक्षा करने का आग्रह किया। पश्चिम बंगाल चुनाव की तैयारियों और प्रशासनिक निर्णयों पर केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने चुनाव आयोग की तारीफ की। उन्होंने कहा कि कुछ अफसर ईडी की छापेमारी में बाधा डालने का प्रयास कर रहे हैं और ऐसे अफसरों को हटाना जरूरी था। उन्होंने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर आरोप लगाया कि वह प्रशासनिक पदों का इस्तेमाल अपने राजनीतिक हित में करती हैं। भाजपा पूरी तरह तैयार है और पश्चिम बंगाल में सरकार बनाने के लक्ष्य के प्रति आश्वस्त है। केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने कहा कि भाजपा इन राज्यों में उम्मीदवार उतारेगी या समर्थन देगी और उम्मीद है कि एनडीए सत्ता में आएगा। आठवले ने असम और पुडुचेरी में पुनः जीत की उम्मीद जताई और पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु व केरल में भी अच्छे प्रदर्शन की संभावना व्यक्त की।

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