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UP Mystery Death Case: महिला और पुरुष की अलग-अलग जगह मिली लाशें, क्या जुड़ा है दोनों का राज?

सीतापुर   उत्तर प्रदेश के सीतापुर में एक हैरान कर देने वाली घटना सामने आई है। यहां महोली के एक गांव में तीन बच्चों की मां की लाश खेत में मिली। पुलिस अभी जांच-पड़ताल कर ही रही थी कि पता चला कि एक पुरुष का शव उसके घर में फंदे से लटक रहा है। एक ही दिन दो-दो मौतों से गांव में हर कोई स्तब्ध रह गया। इन मौतों को लेकर ग्रामीणों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं होने लगीं। उधर, पुलिस ने दोनों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर अपनी जांच-पड़ताल शुरू कर दी है। घटना के बारे में महिला के परिवार वालों का आरोप है कि मरने वाले पुरुष ने पहले महिला की हत्या कर शव खेत में फेंक दिया। इसके बाद उसने खुद फांसी लगाकर जान दे दी। हालांकि पुलिस ने अभी तक किसी थ्योरी की पुष्टि नहीं की है। पुलिस, दोनों की मौत के पीछे की सच्चाई सामने लाने की कोशिशों में जुटी हे। मारी गई 40 वर्षीय महिला की 20 साल पहले शादी हुई थी। उसके तीन बच्चे हैं। काफी समय से वह अपने पति से अलग मायके में रह रही थी। पुलिस के मुताबिक गांव के ही 41 वर्षीय शख्स और महिला के बीच नजदीकियां थीं। हालांकि वह शख्स भी पहले से शादीशुदा था। उसकी पत्नी का पहले ही देहांत हो चुका था। महिला के परिवार वालों के मुताबिक वह सोमवार की शाम को घर से निकली थी। इसके बाद उसका कुछ पता नहीं चला। महिला का शव मंगलवार सुबह गांव के पास खेत में पड़ा मिला। उसकी आंख के पास और शरीर के अन्य हिस्सों में चोट के निशान मिले हैं। सूचना पर कुछ ही देर में महोली सीओ नागेन्द्र चौबे टीम के साथ मौके पर पहुंच गए। पुलिस टीम जांच पड़ताल कर ही रही थी कि तभी गांव में ही एक दूसरी मौत की खबर आई। महिला के करीब रहे एक पुरुष का शव उसके घर में फंदे से लटकता मिला। ग्रामीणों के मुताबिक दोनों के बीच बीते चार साल से नजदीकियां थीं। सीओ नागेन्द्र चौबे के मुताबिक महिला के परिवारवालों का आरोप है कि मरने वाले शख्स ने पहले महिला की हत्या की इसके बाद घर आकर फांसी लगा कर अपनी जान दे दी। सीओ के मुताबिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत का कारण स्पष्ट हो सकेगा। पुलिस घटना के सभी पहलुओं की जांच कर रही है। जो भी तथ्य सामने आएंगे उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।  

योजना के अंतर्गत राज्य सरकार को लगभग 19 हजार करोड़ रूपये की केंद्रीय सहायता

भोपाल  प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्री-मंडल ने जल जीवन मिशन की अवधि दिसंबर 2028 तक बढ़ाने और इसे जल जीवन मिशन 2.0 के रूप में पुनर्गठित कर लागू करने को मंजूरी दी है। इस निर्णय के तहत ग्रामीण पेयजल आपूर्ति को मजबूत करने के साथ सेवा आधारित, टिकाऊ और पारदर्शी प्रणाली विकसित करने पर विशेष जोर दिया जाएगा। मिशन के लिए कुल व्यय बढ़ाकर 8.69 लाख करोड़ रुपये किया गया है, जिसमें केंद्र सरकार की सहायता 3.59 लाख करोड़ रुपये होगी। जल जीवन मिशन 2.0 योजना के पहले ही दिन मध्य प्रदेश सरकार ने केंद्रीय जल शक्ति और पेयजल मंत्रालय से इस संबंध में एमओयू किया, जिसके तहत केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय पेयजल योजना के लिए पाइपलाइन बिछाने से लेकर पूरी अधोसंरचना का निर्माण करना जिससे पेयजल हर ग्रामीण तक पहुंच सके। इस योजना का मुख्य उद्देश्य पंचायत की साझेदारी से जलापूर्ति और जल संचयन छोटे-छोटे गांव तक पहुँचाना है। जल शक्ति मंत्रालय में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री  सी,आर पाटील , जल शक्ति राज्यमंत्री  वी. सोमन्ना और मध्य प्रदेश की ओर से लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री मती संपत्तिया उइके, प्रमुख सचिव  पी. नरहरि सहित केंद्र और राज्य के आला अधिकारी एमओयू के दौरान मौजूद रहे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि जल जीवन मिशन 2.0 के अनुमोदन के लिए वे प्रदेश की जनता की ओर से प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी और केंद्र सरकार का आभार व्यक्त करते हैं। उन्होंने कहा कि यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षित और शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि मध्यप्रदेश में मिशन के अंतर्गत स्वीकृत सभी ग्रामीण नल-जल योजनाओं का गुणवत्ता के साथ क्रियान्वयन किया जा रहा है और निर्धारित समय-सीमा के भीतर इन्हें पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायतों की सक्रिय भागीदारी के साथ “हर घर जल प्रमाणित” ग्राम पंचायतों में ग्रामीण पेयजल योजनाओं के विभिन्न घटकों का निरीक्षण कर “जल आकलन” किया जा रहा है, जिससे योजनाओं की गुणवत्ता और स्थायित्व सुनिश्चित हो सके। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि प्रदेश में पूर्ण हुई योजनाओं का हस्तांतरण निर्वाचित प्रतिनिधियों और ग्रामीणों की सहभागिता से “जल अर्पण” उत्सव के रूप में किया जा रहा है। देश का पहला “जल अर्पण” उत्सव 23 दिसंबर 2025 को राजगढ़ जिले के कुंडीबेय गांव में आयोजित किया गया था। उन्होंने कहा कि प्रदेश में 8 मार्च से 22 मार्च तक “जल महोत्सव” के अंतर्गत जल संरक्षण और जनजागरूकता से जुड़े विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसके साथ ही राज्य मंत्रि-परिषद ने “मध्यप्रदेश पंचायत (ग्रामीण नल जल योजना संचालन-संधारण एवं प्रबंधन नीति), 2026” को मंजूरी देकर ग्राम पंचायतों को योजनाओं के संचालन और रखरखाव में सशक्त बनाने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विश्वास जताया कि केंद्रीय जल शक्ति मंत्री  सी आर पाटिल के मार्गदर्शन में प्रदेश सरकार दिसंबर 2028 तक जल जीवन मिशन के सभी कार्य पूर्ण कर प्रत्येक ग्रामीण परिवार को नियमित रूप से गुणवत्तापूर्ण पेयजल उपलब्ध कराएगी। उन्होंने कहा कि यह मिशन ग्रामीण जीवन की गुणवत्ता सुधारने और जल सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। यह एमओयू प्रत्येक ग्रामीण परिवार तक नल से जल की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने, सेवा गुणवत्ता में सुधार, समयबद्ध लक्ष्यों की प्राप्ति, डिजिटल निगरानी प्रणाली को सुदृढ़ करने तथा पारदर्शिता और जवाबदेही को संस्थागत रूप देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश जल जीवन मिशन के क्रियान्वयन को केवल अवसंरचना विस्तार तक सीमित नहीं रखेगा, बल्कि जल स्रोतों के संरक्षण, पंचायतों की भागीदारी और सेवा की निरंतरता पर समान रूप से बल देगा। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री मती संपतिया उइके के नेतृत्व में विभाग सेवा गुणवत्ता और नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए ठोस कार्ययोजना पर आगे बढ़ रहा है।  

फेल या अनुपस्थित छात्रों के लिए मौका: MP में 9वीं-11वीं की द्वितीय वार्षिक परीक्षा का कार्यक्रम जारी

भोपाल मध्य प्रदेश के हजारों छात्रों के लिए बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। शैक्षणिक सत्र 2025-2026 के लिए कक्षा 9वीं और 11वीं की द्वितीय वार्षिक परीक्षा (Second Annual Exam) का कार्यक्रम जारी कर दिया गया है। यह परीक्षा उन छात्रों के लिए आयोजित की जा रही है जो मुख्य वार्षिक परीक्षा में अनुपस्थित रहे थे या अनुत्तीर्ण हो गए थे।  किन छात्रों को मिलेगा मौका? यह परीक्षा खास तौर पर उन छात्रों के लिए है जो किसी कारणवश मुख्य परीक्षा में शामिल नहीं हो पाए या फेल हो गए थे। ऐसे विद्यार्थियों को अब अपने प्रदर्शन को सुधारने और अगली कक्षा में जाने का एक और अवसर मिलेगा।  प्रश्नपत्र कहां तैयार होंगे? द्वितीय वार्षिक परीक्षा के प्रश्नपत्र राज्य मुक्त स्कूल शिक्षा परिषद और जिला स्तर पर तैयार किए जाएंगे। इससे परीक्षा की पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।  दिव्यांग छात्रों के लिए खास निर्देश दिव्यांग श्रेणी के छात्रों के लिए विशेष दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। इन छात्रों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए परीक्षा का संचालन और मूल्यांकन अलग से निर्धारित नियमों के अनुसार किया जाएगा।  परीक्षा संचालन और मूल्यांकन प्रक्रिया परीक्षा का आयोजन और मूल्यांकन पहले से तय गाइडलाइंस के तहत किया जाएगा, जिससे सभी छात्रों को निष्पक्ष अवसर मिल सके। शिक्षा विभाग ने सभी स्कूलों को निर्देश जारी कर दिए हैं।  छात्रों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह परीक्षा? फेल या अनुपस्थित छात्रों को दूसरा मौका अगली कक्षा में प्रमोशन का अवसर साल बर्बाद होने से बचाव आत्मविश्वास बढ़ाने का मौका

सोशल मीडिया पर ‘आयुष्मान खुराना एरा’ का जादू, ‘साड़ी गली’ के नए वर्ज़न ने जीता दिल

मुंबई, बॉलीवुड अभिनेता-गायक आयुष्मान खुराना ने अपने सुपरहिट गाना ‘साड़ी गली’ का नया वर्ज़न सोशल मीडिया पर साझा किया है। आयुष्मान खुराना के संगीत को हमेशा से दर्शकों के दिलों में खास जगह मिली है। उनकी पहली फिल्म विकी डोनर के गीत ‘पानी दा रंग’ से शुरू हुआ यह सफर आगे चलकर ‘मिट्टी दी खुशबू’, ‘इक वारी’, ‘साड़ी गली’ जैसे कई लोकप्रिय गीतों तक पहुंचा। पिछले कुछ हफ्तों से इंस्टाग्राम पर एक दिलचस्प ट्रेंड देखने को मिल रहा है, जहां फैंस आयुष्मान के पुराने गानों को दोबारा सुनते और शेयर करते हुए “आयुष्मान खुराना एरा” को सेलिब्रेट कर रहे हैं। कई पोस्ट्स में कैप्शन लिखा जा रहा है।“अनुव जैन से पहले हमारे पास आयुष्मान खुराना थे।” इन पोस्ट्स के जरिए यह बताया जा रहा है कि कैसे आयुष्मान के संगीत ने मेनस्ट्रीम में भावनात्मक और एकॉस्टिक स्टोरीटेलिंग की जगह बनाई। फैंस के इस ऑर्गेनिक ट्रेंड को देखते हुए आयुष्मान खुराना ने अब अपने सोशल मीडिया पर ‘साड़ी गली’ का एक नया वर्ज़न साझा किया है। इस वीडियो के जरिए वह अपने संगीत के सफर का जश्न मनाते हुए उस सिंगर-सॉन्गराइटर को फिर से सामने लाते हैं, जिसने पहली बार दर्शकों का दिल जीता था। ‘साड़ी गली’ का यह नया वर्ज़न उनके शुरुआती हिट गानों से जुड़ी पुरानी यादों को ताजा करता है और यह भी साबित करता है कि सोशल मीडिया के दौर में भी उनके संगीत का श्रोताओं से गहरा जुड़ाव बना हुआ है।  

ब्राजील को झटका: नेमार नहीं खेलेंगे वर्ल्ड कप वॉर्मअप मैच, फिटनेस पर सवाल

रियो डी जनेरियो दुनिया के सबसे मशहूर फुटबॉल खिलाड़ियों में से एक नेमार को सोमवार को फ्रांस और क्रोएशिया के खिलाफ फ्रेंडली मुकाबलों के लिए ब्राजील की टीम में जगह नहीं दी गई। यह मैनेजर कार्लो एंसेलोटी के लिए इस साल के फीफा वर्ल्ड कप के लिए अपनी टीम को फाइनल करने से पहले खिलाड़ियों को परखने का आखिरी मौका है। नेमार रविवार को अपनी हालिया चोट से उबरने के बाद मैदान पर लौटे। वह ब्राजील के सीरी ए में 90 मिनट तक मैदान पर खेले और उन्होंने कोरिंथियंस के साथ सैंटोस के 1-1 के घरेलू ड्रॉ में एक असिस्ट भी किया। सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, 27 लोगों की लिस्ट में नेमार के न होने के बावजूद एंसेलोटी ने 34 साल के खिलाड़ी के संयुक्त राज्य अमेरिका, मैक्सिको और कनाडा में होने वाले वर्ल्ड कप में खेलने की संभावनाओं से इनकार नहीं किया। एंसेलोटी ने कहा, “मैंने इस बार उन्हें टीम में क्यों नहीं रखा, क्योंकि वह 100 प्रतिशत फिट नहीं है और हमें ऐसे खिलाड़ियों की जरूरत है जो 100 प्रतिशत फिट हों। नेमार अगर पूरी तरह से फिट हो जाते हैं, तो वह अभी वर्ल्ड कप की टीम में शामिल हो सकते हैं।” ब्राजील 26 मार्च को बोस्टन में फ्रांस से और पांच दिन बाद ऑरलैंडो में क्रोएशिया से खेलेगा। साउथ अमेरिकन टीम अपना वर्ल्ड कप कैंपेन 13 जून को मोरक्को के खिलाफ शुरू करेगी। इसके बाद 19 जून को हैती और 24 जून को ग्रुप सी में स्कॉटलैंड से ब्राजील का सामना होगा। एंसेलोटी ने कहा कि नेमार को तकनीकी स्तर पर कुछ साबित करने की जरूरत नहीं है। नेमार को बाहर रखने का फैसला उनके बैकरूम स्टाफ के साथ मिलकर लिया गया था। रियल मैड्रिड के पूर्व बॉस ने कहा, “यह एक शारीरिक मूल्यांकन है, तकनीकी नहीं। बॉल के साथ वह बहुत अच्छे हैं, लेकिन उन्हें शारीरिक तौर पर सुधार करने की जरूरत है, क्योंकि कोचिंग स्टाफ और मेरे लिए वह अपनी काबिलियत के हिसाब से 100 प्रतिशत फिट नहीं हैं। यही वजह है कि उन्हें अपनी क्षमता के 100 प्रतिशत तक पहुंचने के लिए काम करना होगा। यह मेरी और स्टाफ में हर उस व्यक्ति की राय है जो उनके गेम देखते हैं।” ब्राजील की टीम में फ्लैमेंगो के सेंटर-बैक लियो परेरा, गैलाटसराय के मिडफील्डर गैब्रियल सारा, ब्रेंटफोर्ड के स्ट्राइकर इगोर थियागो और बोर्नमाउथ के फॉरवर्ड रेयान के रूप में 4 नए खिलाड़ियों को जगह दी गई है। ल्योन की तरफ से खेलते हुए शानदार फॉर्म में चल रहे युवा खिलाड़ी एंड्रिक को भी टीम में रखा गया है। ब्राजील टीम का स्क्वॉड गोलकीपर: एलिसन (लिवरपूल), बेंटो (अल-नासर), एडरसन (फेनरबाचे) डिफेंडर: वेस्ली (एएस रोमा), एलेक्स सैंड्रो (फ्लेमेंगो), डगलस सैंटोस (जेनिट सेंट पीटर्सबर्ग), मार्क्विनहोस (पेरिस सेंट जर्मेन), गेब्रियल मैगलहेस (आर्सेनल), ब्रेमर (जुवेंटस), डैनिलो (फ्लेमेंगो), इबानेज (अल-अहली), लियो परेरा (फ्लेमेंगो) मिडफील्डर: एंड्री सैंटोस (चेल्सी), कैसेमिरो (मैनचेस्टर यूनाइटेड), डैनिलो (बोटाफोगो), फैबिन्हो (अल-इत्तिहाद), गेब्रियल सारा (गैलाटासराय) फॉरवर्ड: एंड्रिक (ओलंपिक लियोनिस), इगोर थियागो (ब्रेंटफोर्ड), लुइज हेनरिक (जेनिट सेंट पीटर्सबर्ग), रेयान (बोर्नमाउथ), जोआओ पेड्रो (चेल्सी), गेब्रियल मार्टिनेली (आर्सेनल), माथियस कुन्हा (मैनचेस्टर यूनाइटेड), राफिन्हा (बार्सिलोना), विनीसियस जूनियर (रियल मैड्रिड)।  

दो दिवसीय आयोजन के समापन समारोह में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय होंगे शामिल

रायपुर उपमुख्यमंत्री  विजय शर्मा अंतरराष्ट्रीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान, नया रायपुर (IIIT-NR) में आयोजित 21वें छत्तीसगढ़ युवा वैज्ञानिक सम्मेलन (सीवाईएससी–2026) का शुभारंभ आज उपमुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने किया। दो दिवसीय इस सम्मेलन का संयुक्त आयोजन छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद तथा ट्रिपलआईटी नया रायपुर द्वारा किया जा रहा है।       उपमुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए कहा कि राज्य के विकास में विज्ञान, नवाचार और शोध की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने अपने छात्र जीवन और विज्ञान अध्ययन की यादें साझा करते हुए कहा कि विज्ञान पढ़ने से पहले मुझे अंग्रेजी पढ़नी पड़ती थी जिसके कारण कई लेक्चर मैंने छोड़ दिए पर धीरे धीरे सब सिख गया, आज जो रिसर्च पेपर आए हैं सभी अंग्रेजी में है और शायद परंपरागत शायद अंग्रेजी में ही होते हैं पर हमें अब क्षेत्रीय भाषाओं में भी विज्ञान के अध्ययन और रिसर्च पेपर लाने की आवश्यकता है ताकि एक ग्रामीण परिवेश का व्यक्ति भी ज्ञान अर्जित कर सके इस पर ध्यान देना चाहिए।      उन्होंने भारत में विज्ञान के उद्भव पर चिंतन करते हुए कहा कि विभिन्न विषयों पर भारत के मनीषियों एवं ऋषियों ने उस समय कितने चिंतन कर लिए थे जो आज भी चिंतन का विषय है। किसी एक विषय को समझने के लिए आप प्रायोगिक तरीकों से भी जा सकते हैं और वैचारिक तरीकों से भी जा सकते हैं पर आपको उस विषय को समझना है तो प्रायोगिक के साथ वैचारिक तरीकों का समावेश आवश्यक है। आर्यभट्ट जी ने जो किताब लिखी तो चार भागों में उसमें तीन सूत्र दिए जिनमें न्यूटन के तीन नियमों के संबंध में जानकारी प्राप्त हो जाती है।        उन्होंने कहा कि हमारे छत्तीसगढ़ के यंग साइंटिस्ट के द्वारा प्रस्तुत किए गए 194 पेपर्स को जांचने के लिए देश भर से जो हमारे 45 परीक्षक आए हैं मैं उनका हृदय से आभार करना चाहता हूं। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ की सरकार ने राज्य में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी को प्रोत्साहित करने के लिए शोधकर्ताओं को भारत के विज्ञान तीर्थों का दर्शन कराने के लिए विज्ञान तीर्थ दर्शन योजना शुरू की जा रही है। जिसमें विज्ञान के विद्यार्थी सीवी रमन, शांति स्वरूप भटनागर, बीरबल साहनी, जगदीश चंद्र बोस, डॉ. होमी जहांगीर भाभा, विक्रम सारा भाई, सत्येंद्रनाथ बोस, हरगोविंद खुराना, सुब्रमण्यम चंद्रशेखर, अबुल कलाम आजाद जैसे भारत के महान वैज्ञानिकों के कार्यस्थल को जाकर देख सकेंगें और विज्ञान के अनुसंधानों की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।         प्रमुख सचिव  सोनमणि बोरा ने अपने संबोधन में कहा कि ने छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद द्वारा समर्थित विभिन्न योजनाओं और शोध परियोजनाओं का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि राज्य शासन किस प्रकार वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देने के लिए अनुसंधान अनुदान और तकनीकी सहायता प्रदान कर रहा है।         इस अवसर पर प्रो. ओम प्रकाश व्यास ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि ट्रिपल आईटी नया रायपुर में इस सम्मेलन का आयोजन संस्थान की शोध एवं नवाचार को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि विज्ञान के बदलते स्वरूप और ‘इंटरडिसिप्लिनरी’ सहयोग पर जोर दिया। उन्होंने उपमुख्यमंत्री से अनुरोध किया कि वर्तमान में युवा वैज्ञानिक कांग्रेस में 20 विषय श्रेणियाँ निर्धारित हैं। ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अंतरविषयी अनुप्रयोग’ को 21वीं श्रेणी के रूप में जोड़ा जाए, ताकि उभरती डिजिटल तकनीकों में युवा प्रतिभाओं को विशेष मंच मिल सके।”        छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के महानिदेशक  पी. कवीश्वर ने कहा कि छत्तीसगढ़ युवा वैज्ञानिक सम्मेलन राज्य की एक प्रमुख पहल है, जिसका उद्देश्य युवा वैज्ञानिक प्रतिभाओं की पहचान कर उन्हें प्रोत्साहित करना और गुणवत्तापूर्ण शोध को बढ़ावा देना है। प्रो. एस. के. पांडेय ने कहा कि विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों की भूमिका वैज्ञानिक सोच विकसित करने और गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान को प्रोत्साहित करने में अत्यंत महत्वपूर्ण है। कार्यक्रम में प्रमुख सचिव  सोनमणि बोरा, महानिदेशक, छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद  पी. कवीश्वर, पूर्व कुलपति पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय प्रो. एस. के. पांडेय तथा कुलपति एवं निदेशक ट्रिपल आई टी नया रायपुर प्रो. ओम प्रकाश व्यास  उपस्थित रहे।       इस सम्मेलन में ऑनलाइन सबमिशन पोर्टल के माध्यम से कुल 194 शोध-पत्र प्राप्त हुए, जो देश भर के युवा शोधकर्ताओं ने अपने शोध-पत्र 20 विविध वैज्ञानिक विषयों में प्रस्तुत किए हैं। इस दो दिवसीय सम्मेलन के दौरान स्वीकृत शोध-पत्रों को उनके संबंधित विषय-क्षेत्र में विशेषज्ञों के पैनल के समक्ष प्रत्यक्ष रूप से प्रस्तुत किया जा रहा है, जिससे शोधार्थियों को अपने कार्य पर विशेषज्ञों की महत्वपूर्ण टिप्पणियाँ और सुझाव प्राप्त होंगे। निर्णायकगण विभिन्न विषय-धाराओं में प्रस्तुत शोध-पत्रों का मूल्यांकन कर प्रत्येक क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ शोध-पत्र का चयन करेंगे। इसके माध्यम से उभरते हुए युवा वैज्ञानिकों की पहचान कर उन्हें आगे के मार्गदर्शन, परामर्श और शोध के अवसरों के लिए प्रोत्साहित एवं सम्मानित किया जाएगा।        सम्मेलन के समापन समारोह में 18 मार्च को मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय भी शामिल होंगे। इस अवसर पर वे विभिन्न विषय-धाराओं में चयनित सर्वश्रेष्ठ शोध-पत्र प्रस्तुत करने वाले युवा वैज्ञानिकों को सम्मानित करेंगे और उन्हें पुरस्कार प्रदान करेंगे। इस समारोह में इटली की प्रतिष्ठित कंपनी स्मार्ट मी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. एंजेलो ज़ाइया भी शामिल होंगे।

पत्नी नहीं, मेरी सबसे बड़ी सपोर्ट सिस्टम – सूर्यकुमार यादव ने देविशा को दिया खास सम्मान

नई दिल्ली टी20 विश्व कप विजेता कप्तान सूर्यकुमार यादव ने अपनी जिंदगी और करियर में पत्नी देविशा शेट्टी की भूमिका पर खुलकर बात की है। इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि कैसे करीब 8 साल पहले पत्नी से एक बहुत ही छोटी सी बातचीत ने उनकी जिंदगी बदल दी, करियर को लेकर नजरिया बदल दिया। उनकी पत्नी के सीधे सरल सवाल ने ही उन्हें राष्ट्रीय टीम में जगह बनाने के लिए कड़ी मेहनत करने को प्रेरित किया और अब जबकि सूर्यकुमार यादव विश्व कप विजेता कप्तान बन चुके हैं, तो वे अपनी ‘बेहद निश्छल’ पत्नी देविशा की जितनी भी प्रशंसा करें वह कम है क्योंकि उन्होंने ही उन्हें इस मुकाम पर पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। यह साल 2018 की बात है जब देविशा शेट्टी ने सूर्यकुमार से एक सरल सवाल पूछा, ‘अगर आप भारत के लिए खेलना चाहते हैं, तो आपकी क्या योजना है?’ उस ‘बेहद सादगीपूर्ण बातचीत’ के आठ साल बाद सूर्यकुमार की अगुवाई में भारत ने टी20 विश्व कप में अपने खिताब का सफलतापूर्वक बचाव किया। सूर्यकुमार ने ‘पीटीआई वीडियो’ के साथ एक पॉडकास्ट साक्षात्कार के दौरान उस बातचीत को याद करते हुए कहा, ‘हमारी शादी 2016 में हुई थी जब मैं केकेआर के लिए खेल रहा था। सब कुछ बहुत सहजता से आगे बढ़ रहा था। मैं अच्छा खेल रहा था, खेल का आनंद ले रहा था। जब मैं 2018 में मुंबई इंडियंस में शामिल हुआ तो वह तब तक के मेरे सफर और दिनचर्या को देखती रही। मुझे लगता है कि इसके बाद हमने चीजों को थोड़ा अलग तरीके से करना शुरू कर दिया था।’ उन्होंने कहा, ‘उसने (सूर्यकुमार की पत्नी) मुझसे कहा कि आपके साथ आयु वर्ग में खेलने वाले सभी खिलाड़ी अब भारत के लिए खेल रहे हैं। आपके मन में क्या है? मैंने कहा, ‘मुझे भी भारत के लिए खेलना है।’ उसने पूछा, ‘कैसे खेलोगे?’ इस 35 वर्षीय खिलाड़ी ने अपनी पत्नी के साथ उनके करियर को बदलने वाली बातचीत के बारे में कहा, ‘वह संक्षिप्त सी बातचीत थी। वह किसी तरह की बहस नहीं बल्कि संक्षिप्त चर्चा थी। लेकिन निश्चित तौर पर यह इस बारे में चर्चा थी कि आप अपने लक्ष्य की ओर एक कदम आगे कैसे बढ़ा सकते हैं। अगर मैं भारत के लिए खेलना चाहता हूं और भारत को जीत दिलाना चाहता हूं, तो मैं यह कैसे कर सकता हूं?’ एक बार जब अंतिम लक्ष्य हासिल करने की दिशा में अतिरिक्त प्रयास करने का फैसला कर लिया गया तो उनकी जिंदगी में कुछ चुनौतियां भी सामने आई लेकिन सूर्यकुमार और देविशा ने एक जोड़े के रूप में उस रास्ते पर चलना शुरू कर दिया। उन्होंने कहा, ‘हमें कई चीजों में कटौती करनी पड़ी। इनमें खान-पान से लेकर सप्ताहांत में दोस्तों से मिलना, शनिवार-रविवार को आराम, सोमवार से शुक्रवार तक के कार्यक्रम शामिल थे। हमने इस तरह से शुरुआत की और 2018 में आईपीएल में मेरा प्रदर्शन (512 रन) बहुत अच्छा रहा। मैंने घरेलू क्रिकेट में भी अच्छा प्रदर्शन किया।’ सूर्यकुमार ने कहा, ‘उस साल मुझे मुंबई इंडियंस की तरफ से पारी की शुरुआत करने का भी मौका मिला और मैंने रन भी बनाए। हमने 2019 और 2020 में भी यही सिलसिला जारी रखा और मैं एक अलग ही मूड में था। उसने देखा कि वह चीजों का अधिक आनंद लेने लगा है। मेरे लिए 2020 (आईपीएल में फिनिशर के तौर पर 480 रन) और भी बेहतर रहा और फिर 2021 में मुझे भारतीय टीम में चुना गया।’ बेहद मिलनसार कप्तान ने कहा कि देविशा पर्दे के पीछे रहकर उनकी ताकत बनी रहीं। उन्होंने कहा, ‘उसने सच्ची बातें बताकर नेपथ्य में रहते हुए मुझ पर बहुत प्रभाव डाला है। अगर वह आपकी अर्धांगिनी है तो वह हमेशा आपके प्रति ईमानदार रहेगी क्योंकि वह सिर्फ आपकी तरक्की चाहती हैं। अगर आप साथ मिलकर आगे बढ़ना चाहते हैं तो आपके बीच बातचीत में निश्छलता होना जरूरी है।’ भारतीय कप्तान ने कहा, ‘कई बार ऐसा करना मुश्किल भी रहा लेकिन कुल मिलाकर यह अच्छा रहा। अगर आज मैं इस मुकाम पर खड़ा हूं तो इसमें उन बातचीत का बहुत बड़ा योगदान रहा है।’ देविशा ने कभी भी उनकी क्रिकेट को लेकर हस्तक्षेप नहीं किया क्योंकि वह उनका क्षेत्र नहीं था, लेकिन उन्होंने उन्हें क्रिकेट से परे जीवन के बारे में सलाह दी। सूर्यकुमार ने कहा, ‘मैं उसे इसका पूरा श्रेय देता हूं क्योंकि उसने मुझे सिर्फ क्रिकेट में मेरे करियर को लेकर सलाह ही नहीं दी, बल्कि जीवन से जुड़ी कई बातें बताईं। मुझे क्या करना चाहिए? किसी खास परिस्थिति से कैसे निपटना चाहिए? मुझे खुद को कैसे पेश करना चाहिए?’ और सबसे महत्वपूर्ण उन्होंने घर में प्रवेश करने से पहले क्रिकेट को दरवाजे पर छोड़ने के लिए कहा। घर पर वह सुपरस्टार सूर्यकुमार यादव नहीं बल्कि सिर्फ सूर्या हैं। उन्होंने कहा, ‘उसने मुझसे कहा कि क्रिकेट को घर के अंदर लेकर मत आना। यह सब महत्वपूर्ण बातें थी जो मैंने सीखी। आपको अपनी उपलब्धियों के बावजूद विनम्र और जमीन से जुड़े रहना चाहिए। घर पर आप सूर्यकुमार यादव नहीं हैं इसलिए सहज व्यवहार करें। खाना खाने के बाद प्लेट को बर्तन धोने वाले स्थान पर रख दें। यह छोटी-छोटी बातें आपके जीवन में बहुत महत्व रखती हैं।’  

बंगाल की सियासत गरमाई: ममता बनर्जी और शुभेंदु अधिकारी आमने-सामने, सीट का ऐलान

कोलकाता पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और नेता विपक्ष शुभेंदु अधिकारी के बीच सीधा चुनावी मुकाबला तय हो गया है। भाजपा ने सोमवार को बंगाल में 144 उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की थी। इसमें शुभेंदु अधिकारी का भी नाम था। उन्हें नंदीग्राम सीट से उतारा गया है, जहां से उन्होंने पिछली बार ममता बनर्जी को हराया था। इसके अलावा भबानीपुर से भी वह मुकाबले में उतरे हैं, जहां से फिलहाल ममता बनर्जी विधायक हैं। अब ममता बनर्जी ने भी ऐलान कर दिया है कि वह खुद भबानीपुर से ही उतरेंगी। इस तरह साफ हो गया है कि पिछली बार नंदीग्राम वाली स्थिति भबानीपुर में दोहराएगी। नंदीग्राम से ममता बनर्जी के शुभेंदु अधिकारी के मुकाबले हार जाने की काफी चर्चा हुई थी। माना जा रहा है कि इस बार भबानीपुर में हाईवोल्टेज मुकाबला देखने को मिल सकता है। ममता बनर्जी ने मंगलवार को यह भी कहा कि हम राज्य में 226 सीटें जीतकर लगातार चौथी बार सत्ता हासिल करेंगे। ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर भी तीखा हमला बोला है। दीदी ने कहा कि ईद से ठीक पहले बड़े-बड़े अधिकारियों के ट्रांसफर चुनाव आयोग कर रहा है। ऐसा लगता है कि बंगाल चुनाव से पहले राज्य में दंगे कराने की तैयारी है। ऐसा कुछ भी हुआ तो इसके लिए जिम्मेदार चुनाव आयोग ही रहेगा। ममता ने कहा कि भाजपा के इशारे पर चुनाव आयोग ऐसा कर रहा है। यदि राज्य में कोई भी अप्रिय घटना हुई तो उसकी जिम्मेदारी चुनाव आयोग और भाजपा की ही रहेगी। उन्होंने कहा कि पूरा खेल चुनाव आयोग भाजपा के इशारे पर कर रहा है। अच्छा तो यही होगा कि वह सीधे तौर पर भाजपा के लिए चुनाव प्रचार भी करे। इस तरह ममता बनर्जी ने संकेत दे दिए हैं कि वह चुनाव आयोग पर भी सीधे निशाना साधेंगी। पहले ही वह SIR को लेकर इलेक्शन कमिशन को टारगेट करती रही हैं। बता दें कि 2021 के विधानसभा चुनाव में भाजपा और टीएमसी के बीच हाईवोल्टेज मुकाबला हुआ था। 2021 में हाईवोल्टेज चुनाव में 77 सीटें जीती थी भाजपा यहां तक कयास लगने लगे थे कि भाजपा कहीं पहली बार सत्ता ही हासिल ना कर ले। हालांकि नतीजे आए तो भाजपा को 77 सीटें ही मिलीं। वहीं वामपंथी दलों और कांग्रेस का तो सूपड़ा ही साफ हो गया। फिर भी भाजपा के लिए यह बड़ी सफलता थी क्योंकि 2016 में उसे तीन सीटें ही मिली थीं। इस तरह 5 साल के अंदर तीन सीटों वाली पार्टी यदि 77 पर आ गई तो वह बड़ी चुनावी सफलता था। इस बार भी भाजपा टफ फाइट के मूड में नजर आ रही है और इसी क्रम में उसने करीब आधी सीटों पर उम्मीदवारों के नामों का ऐलान पहले ही कर दिया है।

सरकार ने दो वर्षों में 11 हजार 107 करोड़ रुपए की सिंचाई परियोजनाएं की स्वीकृत: 25 हजार हेक्टेयर सिंचाई क्षमता का किया गया सृजन

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के विभागों से संबंधित 10 हजार 617 करोड़ 73 लाख 49 हजार रूपए की अनुदान मांगे विधानसभा में पारित की गई। इसमें सामान्य प्रशासन विभाग के लिए 612 करोड़ 29 लाख 20 हजार रूपए, सामान्य प्रशासन विभाग से संबंधित अन्य व्यय 30 करोड़ 92 लाख रूपए, जल संसाधन विभाग के लिए 3 हजार 105  करोड़ 11 लाख 80 हजार रूपए, खनिज साधन विभाग से संबंधित व्यय 1145 करोड़ 89 लाख 99 हजार रूपए, विमानन विभाग से संबंधित व्यय 314 करोड़ 99 लाख 90 हजार रूपए, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग 416 करोड़ 99 लाख 99 हजार रूपए, सुशासन एवं अभिसरण विभाग से संबंधित व्यय 77 करोड़ रूपए, जनसम्पर्क विभाग से संबंधित व्यय 469 करोड़ 99 लाख रूपए, ऊर्जा विभाग से संबंधित व्यय 4236 करोड़ 01 लाख 61 हजार रूपए, जिला परियोजनाओं से संबंधित व्यय 208 करोड़ 50 लाख रूपए शामिल हैं।  मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने अनुदान मांगों की चर्चा के जवाब में कहा कि पिछले दो वर्षों से राज्य सरकार संकल्पित भाव से छत्तीसगढ़ महतारी की सेवा में जुटी है और विकसित छत्तीसगढ़ की दिशा में यात्रा प्रारंभ हो चुकी है। उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य को साकार करने में बजट प्रबंधन की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका है।  मुख्यमंत्री ने विधानसभा में अपने विभागों से संबंधित अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान कहा कि पहले दो बजटों की थीम ‘ज्ञान’ और ‘गति’ थी, जबकि इस बार बजट की थीम ‘संकल्प’ रखी गई है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस और डिजिटल गवर्नेंस की नीति अपनाकर व्यवस्थागत लिकेज समाप्त किए हैं, जिसके कारण आम जनता की गाढ़ी कमाई का पैसा अब सीधे जनकल्याण में खर्च हो रहा है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि पूर्ववर्ती सरकार में आबकारी विभाग का राजस्व 5 हजार 110 करोड़ रुपए था, जो वर्तमान सरकार में बढ़कर 11 हजार करोड़ रुपए अनुमानित है। यह अंतर फर्जीवाड़े पर रोक लगने के कारण आया है। मुख्यमंत्री  साय ने नक्सलवाद के विरुद्ध चल रहे अभियान को लोकतंत्र की बड़ी जीत बताते हुए कहा कि राज्य सरकार ने माओवादी आतंकवाद के अंत का लक्ष्य तय कर उसी दिशा में प्रभावी कार्य किया है। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर लोकतंत्र और संविधान पर विश्वास जताया है। उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए उत्सव का क्षण बताया और कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय गृह मंत्री  अमित शाह के मार्गदर्शन, जवानों की वीरता और प्रदेशवासियों के विश्वास से राज्य माओवादी हिंसा के अंधकार से बाहर निकल रहा है। अब नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासनिक तंत्र को मजबूत कर शांति, पुनर्निर्माण और समग्र विकास के लक्ष्य को साकार किया जा रहा है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रदेश के आर्थिक विकास और रोजगार सृजन में खनिज राजस्व की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2021-22 में 12 हजार 305 करोड़ रुपए रहा वहीं वर्ष 2024-25 में खनिज राजस्व बढ़कर 14 हजार 592 करोड़ रुपए हो गया है, जो राज्य के सकल घरेलू उत्पाद का 11 प्रतिशत है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंत तक 17 हजार करोड़ रुपए राजस्व प्राप्ति का अनुमान है। उन्होंने कहा कि इस अतिरिक्त राजस्व का उपयोग किसानों, माताओं-बहनों और आम नागरिकों के लिए जनकल्याणकारी योजनाओं में किया जा रहा है।  मुख्यमंत्री ने कहा कि डीएमएफ को पुनः पारदर्शी बनाते हुए दो वर्षों में 4 हजार करोड़ रुपए से अधिक की राशि प्राप्त हुई और 19 हजार से अधिक कार्य स्वीकृत किए गए। डीएमएफ कार्यों का सोशल ऑडिट भी कराया जा रहा है तथा शिकायत निवारण तंत्र विकसित किया गया है। खनिज ब्लॉकों की नीलामी प्रक्रिया को भी गति दी गई है और अब तक 62 ब्लॉकों की सफल नीलामी हो चुकी है। उन्होंने कहा कि रेयर अर्थ, क्रिटिकल और स्ट्रैटजिक खनिजों के अन्वेषण के लिए प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों से एमओयू किए गए हैं, जिससे क्लीन एनर्जी और नए निवेश के अवसर बढ़ेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि सुव्यवस्थित खनन के साथ पर्यावरण संतुलन बनाए रखना सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। राज्य के कुल वन क्षेत्र के मात्र 0.96 प्रतिशत क्षेत्र में खनिज रियायतें स्वीकृत हैं और केवल 0.24 प्रतिशत वन क्षेत्र में ही खनन कार्य की अनुमति दी गई है। उन्होंने कहा कि खनन कार्यों के एवज में बड़े पैमाने पर पौधारोपण किया गया है और ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत दो वर्षों में करीब 7 करोड़ पौधे लगाए गए हैं।  भारतीय वन अनुसंधान संस्थान, देहरादून की रिपोर्ट का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में वन एवं वृक्ष आवरण में 683 वर्ग किलोमीटर की वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने यह भी बताया कि खनिज विभाग में पारदर्शिता के लिए ‘खनिज ऑनलाइन 2.0’ पोर्टल तथा डीएमएफ पोर्टल 2.0 लागू किया गया है। आम जनता को रियायती दरों पर रेत उपलब्ध कराने और माफिया पर अंकुश लगाने के लिए छत्तीसगढ़ गौण खनिज साधारण रेत नियम 2025 लागू किए गए हैं तथा रेत की ई-नीलामी शुरू की गई है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि विकसित भारत और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में प्रदेश एक प्रमुख ऊर्जा प्रदाता के रूप में अपनी अग्रणी भूमिका निभाने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के पावर प्लांट्स की कुल विद्युत क्षमता 30 हजार मेगावाट है, जिसमें ताप विद्युत संयंत्रों की क्षमता 24 हजार मेगावाट है। राज्य की विद्युत उत्पादन क्षमता और प्लांट लोड फैक्टर देश के अग्रणी राज्यों में है।  मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में निरंतर नए कीर्तिमान स्थापित कर रही है। एनर्जी समिट के माध्यम से लगभग साढ़े तीन लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं और 32 हजार मेगावाट क्षमता की परियोजनाओं के लिए विभिन्न संस्थाओं से एमओयू किए गए हैं। उन्होंने बताया कि कोरबा पश्चिम में 660-660 मेगावाट की दो सुपर क्रिटिकल इकाइयों का काम प्रगति पर है तथा 8300 मेगावाट क्षमता की पम्प स्टोरेज जल विद्युत परियोजनाओं के लिए 6 स्थलों का चिन्हांकन किया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आम उपभोक्ताओं को रियायती दरों पर बिजली की सतत आपूर्ति सरकार की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। इसके लिए बीपीएल परिवारों को 30 यूनिट तक निःशुल्क बिजली देने हेतु 354 करोड़ रुपए, मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत जन अभियान के तहत … Read more

मुख्यमंत्री डेयरी प्लस और कामधेनु योजना का लाभ बढ़ाने पर जोर, हितग्राहियों तक पहुंचाने के निर्देश

भोपाल  पशुपालन एवं डेयरी विभाग राज्‍यमंत्री स्‍वतंत्र प्रभार  लखन पटेल ने मंगलवार को मंत्रालय में पशुपालन एवं डेयरी विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की। राज्यमंत्री  पटेल ने 1 अप्रैल को मंडला जिले के ग्राम कान्‍हारी कला में राज्‍यपाल  मंगुभाई पटेल की ग‍र‍िमामयी उपस्‍थ‍िति‍में होने वाले मुख्‍यमंत्री दुधारू पशु प्रदाय योजना के अंतर्गत पशु वितरण के प्रस्‍तावित कार्यक्रम की तैयारियों की समीक्षा की और अधिकारियों को आवश्‍यक दिशा निर्देश दिए। बैठक में पशुपालन एवं डेयरी विभाग के प्रमुख स‍च‍िव  उमाकांत उमराव, संचालक पशुपालन एवं डेयरी डॉ. पी.एस. पटेल सहित अन्‍य अधिकारी उपस्‍थ‍ित रहे। बैठक में राज्‍यमंत्री  पटेल ने मुख्यमंत्री डेयरी प्लस योजना, कामधेनु योजना की समीक्षा एवं योजनान्तर्गत हितग्राही चयन, पशु वितरण, लक्ष्य पूर्ति, व्यापक प्रचार-प्रसार एवं सतत मॉनिटरि‍ग करने के निर्देश दिए। उन्होंने मुख्यमंत्री डेयरी प्लस अंतर्गत गाय का भी प्रावधान करने का सुझाव दिया गया। इसके साथ ही स्वावलंबी गोशाला के लिए LOA जारी कर कार्य शुरू करने के लिये विभाग को प्रक्रिया को तीव्र करने, पशु प्रदायकर्ताओं की संख्या बढ़ाने एवं मापदंण्ड अनुसार पशुओं की अधिकतम राशि का उल्लेख कर सूची ऑनलाइन करके हितग्राहियों को अधिक विकल्प उपलब्ध कराने एवं पशु मेला के माध्यम से पशु चयन करने पर भी चर्चा की गई। बैठक में सड़कों पर विचरण कर रहे निराश्रित पशुओं को स्वावलंबी गोशालाओं में रखने और राजमार्गों को निराश्रित पशु मुक्त बनाने के संबंध में भी चर्चा की गई।  

डिजिटल दौर में बदली तस्वीर: फैंसी स्टोर से प्रीति यादव बनीं नई पीढ़ी की आत्मनिर्भर उद्यमी

रायपुर आज के आधुनिक और तेजी से बदलते दौर में जहां डिजिटल तकनीक और आत्मनिर्भरता सफलता की नई परिभाषा बन चुके हैं, वहीं विकासखंड भरतपुर के ग्राम पंचायत तिलौली की  प्रीति यादव ने अपने हौसले और समझदारी से इस बदलाव को अवसर में बदल दिया है। उन्होंने यह साबित कर दिया कि यदि सोच आधुनिक हो और इरादे मजबूत हों, तो गांव में रहकर भी सफलता की नई ऊंचाइयों को छुआ जा सकता है। एक साधारण परिवार से आने वाली प्रीति यादव के सामने भी आर्थिक चुनौतियां थीं, लेकिन उन्होंने परिस्थितियों से हार मानने के बजाय खुद को बदलते समय के साथ ढालने का फैसला किया। उन्होंने “दुर्गा महिला स्व सहायता समूह” से जुड़कर न केवल आर्थिक सहयोग प्राप्त किया, बल्कि आत्मविश्वास और आगे बढ़ने की नई दिशा भी हासिल की। समूह से मिले 60 हजार रुपये के ऋण का उपयोग करते हुए प्रीति ने अपने गांव में चूड़ी, कॉस्मेटिक्स और फैंसी आइटम का स्टोर शुरू किया। लेकिन उनकी सोच केवल पारंपरिक दुकान तक सीमित नहीं रही। उन्होंने ग्राहकों की पसंद को समझते हुए आधुनिक ट्रेंड के अनुसार उत्पाद उपलब्ध कराना शुरू किया, जिससे उनकी दुकान जल्दी ही युवाओं और महिलाओं के बीच लोकप्रिय हो गई। प्रीति ने अपने व्यवसाय में छोटे-छोटे आधुनिक प्रयोग भी किए-जैसे ग्राहकों से बेहतर संवाद, मांग के अनुसार नए प्रोडक्ट लाना, और त्योहारों व विशेष अवसरों पर आकर्षक कलेक्शन उपलब्ध कराना। यही कारण है कि उनकी दुकान अब सिर्फ एक दुकान नहीं, बल्कि गांव में एक “ट्रेंडिंग शॉप” के रूप में पहचान बना चुकी है। आज प्रीति यादव अपने इस व्यवसाय से प्रतिवर्ष लगभग 80 से 85 हजार रुपये की आय अर्जित कर रही हैं। यह आय न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रही है, बल्कि उन्हें आत्मसम्मान और आत्मनिर्भरता का नया एहसास भी दे रही है। अब वे अपने बच्चों की शिक्षा, घर के खर्च और भविष्य की योजनाओं को आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ा रही हैं। आधुनिक युग में सफलता केवल कमाई तक सीमित नहीं होती, बल्कि सोच, आत्मविश्वास और पहचान में बदलाव भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है। प्रीति यादव इस बदलाव की जीवंत मिसाल बन चुकी हैं। आज वे न केवल आर्थिक रूप से सशक्त हैं, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं को भी यह सिखा रही हैं कि बदलते समय के साथ खुद को ढालना ही सफलता की कुंजी है। उनकी प्रेरक यात्रा से प्रभावित होकर अब कई महिलाएं स्व सहायता समूहों से जुड़कर स्वरोजगार की दिशा में कदम बढ़ा रही हैं। प्रीति यादव की यह कहानी बताती है कि आधुनिक सोच, सही अवसर और मेहनत के साथ गांव की महिलाएं भी नए भारत की मजबूत उद्यमी बन सकती हैं।

जदयू को झटका: केसी त्यागी का इस्तीफा, नए सियासी सफर के संकेत

नई दिल्ली पिछले कुछ दिनों से अपनी ही पार्टी के खिलाफ बोल कर चर्चा में रहने वाले केसी त्यागी ने जनता दल यूनाइटेड से इस्तीफा दे दिया है। केसी त्यागी ने अपना इस्तीफा पत्र सोशल मीडिया पर शेयर कर साफ किया है कि वो जदयू की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे रहे हैं और आगे सदस्यता नहीं लेंगे। JDU को भेजे गए इस्तीफे में केसी त्यागी ने अपने भविष्य का प्लान भी बताया है। केसी त्यागी ने लिखा है कि 22 मार्च को वो अपने समर्थकों के साथ बैठक करेंगे। केसी त्यागी ने लिखा, ’30 अक्तूबर, 2003 को जदयू अस्तित्व में आया और समता पार्टी तथा जनता दल का विलय हुआ। उस वक्त जॉर्ज फर्नांडिस ने अध्यक्ष और मैंने महासचिव के तौर पर एक साथ काम किय। मैंने शरद यादव और नीतीश कुमार की अध्यक्षता में भी काम किया। मैं पार्टी का मुख्य प्रवक्ता और राजनीतिक सलाहकार भी रह। अब पार्टी का सदस्यता अभियान खत्म हो गया है और मैंने दोबारा पार्टी की सदस्यता नहीं ली है। नीतीश कुमार के प्रति मेरा सम्मान कभी नहीं बदलेगा।’ केसी त्यागी ने बताया है भविष्य का प्लान केसी त्यागी ने आगे लिखा, ‘मेरे कुछ राजनीतिक साथी, समर्थक और वर्करों ने 22 मार्च को एक बैठक आयोजित की है। इस बैठक में देश के राजनीतिक हालात पर चर्चा होगी। मैं जल्द ही आगे की रणनीति पर फैसला लूंगा। बता दें कि केसी त्यागी मूल रूप से उत्तर प्रदेश से आते हैं। पश्चिमी यूपी में उनके काफी समर्थक भी हैं। कुछ मीडिया रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि केसी त्यागी अब उत्तर प्रदेश की राजनीति का रूख भी कर सकते हैं। मीडिया रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि केसी त्यागी की इच्छा अब यूपी की राजनीति करने की है। केसी त्यागी की गिनती जदयू के पुराने और दिग्गज नेताओं के तौर पर होती थी। केसी त्यागी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के करीबी भी माने जाते थे। वो जदयू के पक्ष में हर मंच पर मजबूती से अपनी बात भी रखते थे। इसी साल केसी त्यागी ने नीतीश कुमार को भारत रत्न दिए जाने की मांग भी उठाई थी और पीएम मोदी को खत लिखा था। हालांकि, लंबे समय से जदयू ने केसी त्यागी से दूरी बना रखी थी। इस मुद्दे पर भी जदयू ने खुद को उनसे अलग कर लिया था। केसी त्यागी ने आईपीएल में बांग्लादेशी खिलाड़ियों को हटाने के फैसला का विरोध किया था। इसके अलावा फिलिस्तीन के मुद्दे पर भी वो भारत सरकार के स्टैंड से अलग खड़े नजर आए थे। पिछले काफी समय से पार्टी केसी त्यागी को तवज्जो नहीं दे रही थी जिससे इस बात का इशारा मिल रहा था कि अब वो पार्टी में नहीं है। हालांकि, अब केसी त्यागी ने खुद जदयू से इस्तीफे का ऐलान किया है।  

आई.आई.टी., आई.आई.एम., एन.आई.टी., नार्म जैसे राष्ट्रीय संस्थानों के विशेषज्ञ दे रहे हैं प्रशिक्षण

रायपुर इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में शिक्षण एवं अनुसंधान में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीकों के प्रभावी उपयोग पर पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रारंभ किया गया। कृषि महाविद्यालय रायपुर में 16 से 20 मार्च तक आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की विभिन्न प्रविधियों एवं उपकरणों का प्रभावी उपयोग कर इन क्षेत्रों में उत्कृष्टता हासिल करने के गुर सिखाये जा रहे हैं। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के अंतर्गत संचालित 17 महाविद्यालयों के प्राध्यापक एवं वैज्ञानिक भाग ले रहे हैं।  प्रशिक्षण कार्यक्रम में आई.आई.टी. भिलाई, आई.आई.आई.टी. नया रायपुर, एन.आई.टी. रायपुर, आई. आई. एम. रायपुर, हिदायतुल्लाह नेशनल लॉ यूनिर्वसिटी नया रायपुर, गुरू घासीदास केन्द्रीय विश्वविद्यालय बिलासपुर, आई.सी.ए.आर. – नार्म हैदराबाद तथा आई.सी.ए.आर – एन.आई.बी.एस.एम. बरोण्डा जैसे राष्ट्रीय संस्थानों के विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षणार्थियों को कृषि शिक्षा अनुसंधान में आर्टिफिशयल इंटेलिजेंस की विभिन्न टेकनिक्स एवं टूल्स के प्रभावी उपयोग के बारे में मार्गदर्शन दिया जा रहा है। इस पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ इदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने किया।  इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आई.आई.टी.), भिलाई के निदेशक डॉ. राजीव प्रकाश तथा आई.सी.ए.आर.-राष्ट्रीय जैविक तनाव प्रबंधन संस्थान (एन.आई.बी.एस.एम.) बरोण्डा के निदेशक डॉ. पी.के. राय ने प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया। इस अवसर पर इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. कपिलदेव दीपक सहित कृषि विश्वविद्यालय के निदेशकगण तथा विभिन्न महाविद्यालयों के अधिष्ठातागण उपस्थित थे।     प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने कहा कि विगत कुछ वर्षों में हमारे जीवन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग निरंतर बढ़ता जा रहा है और अब यह हमारी सामान्य दिनचर्या का एक हिस्सा बन गया है। उन्होंने कहा विशेषकर उच्च शिक्षा अनुसंधान एवं प्रौद्योगिकी विकास में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने अहम योगदान दिया है। यह शिक्षण, शोध और अकादमिक कार्यों को अधिक प्रभावी बना रही है। डॉ. चंदेल ने कहा कि कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान के क्षेत्र में भी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। कृषि शिक्षा जैसे पेशेवर क्षेत्रों में ए आई का उपयोग शिक्षण गुणवत्ता, नवाचार और शोध को बेहतर बनाने के लिए अनिवार्य हो गया है। उन्होंने कहा कि इस पांच दिवसीय प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को पाठ योजना निर्माण, पाठ्य सामग्री निर्माण, मूल्यांकन आदि शिक्षण संबंधी कार्यों तथा शोध लेखन, साहित्य समीक्षा, संदर्भ प्रबंधन आदि शोध संबंधी कार्यों के संबंध में विशेषज्ञों द्वारा विस्तृत जानकारी दी जाएगी।  इस प्रशिक्षण में प्रतिभागी अपनी कक्षाओं, प्रयोगशाला तथा शोध कार्यों में विभिन्न ए आई तकनीक एवं टूल्स का प्रभावी उपयोग करना सीखेंगे जिससे उनकी कार्यक्षमता और नवाचार क्षमता वृद्धि होगी। आई.आई.टी. भिलाई के निदेशक डॉ. राजीव प्रकाश ने इस अवसर पर कहा कि कोविड काल से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग बढ़ने लगा है। कोविड के दौरान आई.आई.टी. कानपुर ने विभिन्न ए आई टूल्स का उपयोग कर कोविड के केसेस के प्रतिदिन के आकड़ों तथा उसके पीक पीरियड के बारे में सटीक पूर्वानुमान जारी किए थे। उन्होंने कहा कि कृषि के क्षेत्र में भी ए आई तकनीक का उपयोग कर किसानों के लिए मौसम संबंधी पूर्वानुमान तथा कृषि सलाह उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि विभिन्न ए आई टूल्स के माध्यम से वर्षा जल एवं उपलब्ध भूजल के आंकड़ों का उपयोग कर किसानों के लिए उपयुक्त फसलों का चयन किया जा सकता है। इसके साथ ही विगत वर्षों में घटित कीट-बीमारियों के प्रकोप तथा वर्तमान जलवायविक परिस्थितियों का अध्ययन कर फसलों को कीटों एवं बीमारियों के प्रकोप से बचाया जा सकता है।  इसी प्रकार फसल उत्पादन एवं इनके विक्रय हेतु भी ए आई टूल्स का उपयोग किया सकता है। एन.आई.बी.एस.एम. के निदेशक डॉ. पी.के. राय ने भी प्रतिभागियों को संबोधित किया। एन.आई.टी. रायपुर के निदेशक डॉ. एन.वी. रमन्ना ने भी प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया। गौरतलब है कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम दो प्रमुख घटकों में आयोजित किया गया है। पहला घटक नव नियुक्त संकाय सदस्यों के लिए ओरिएंटेशन कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य उन्हें विश्वविद्यालय की दृष्टि, मिशन और शैक्षणिक ढांचे से परिचित कराना है। दूसरा घटक शिक्षण एवं अनुसंधान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर प्रशिक्षण है, जिसके माध्यम से प्रतिभागियों को आधुनिक ए आई टूल्स और तकनीकों से परिचित कराया जाएगा, ताकि वे इनका प्रभावी उपयोग कक्षाओं, प्रयोगशालाओं, विस्तार गतिविधियों तथा अनुसंधान कार्यों में कर सकें। इन पाँच दिनों के दौरान विशेषज्ञ व्याख्यान, विचार-विमर्श तथा प्रायोगिक सत्रों के माध्यम से प्रतिभागियों को आधारित शिक्षण एवं अनुसंधान की नवीनतम प्रवृत्तियों से अवगत कराया जाएगा। प्रशिक्षण कार्यक्रम की संयोजक कृषि महाविद्यालय रायपुर की अधिष्ठाता डॉ. आरती गुहे हैं।

रमजान में हमला, अहमदियों पर जुल्म… UN में भारत ने पाकिस्तान को घेरा, दुनिया के सामने रखी सच्चाई

संयुक्त राष्ट्र संयुक्त राष्ट्र (UN) में ‘इस्लामोफोबिया से निपटने के अंतर्राष्ट्रीय दिवस’ के अवसर पर भारत ने पाकिस्तान पर तीखा प्रहार किया है। भारत ने कहा कि पाकिस्तान की पड़ोसी देशों में ‘इस्लामोफोबिया’ की ‘काल्पनिक कहानियां गढ़ने की आदत है। भारतीय दूत ने सवाल उठाया कि इस्लामाबाद के अपने ही देश में अहमदिया समुदाय के क्रूर दमन या रमजान के दौरान अफगानिस्तान पर हवाई बमबारी को कैसे देखा जाए। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि, राजदूत पर्वतनेनी हरीश ने महासभा को संबोधित करते हुए भारत का कड़ा रुख स्पष्ट किया। पाकिस्तान का दोहरा चरित्र और क्रूरता राजदूत हरीश ने पाकिस्तान पर कटाक्ष करते हुए कहा कि भारत का पश्चिमी पड़ोसी (पाकिस्तान) अपने पड़ोस में इस्लामोफोबिया की काल्पनिक कहानियां गढ़ने का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने सवाल उठाया कि पाकिस्तान में अहमदियों के क्रूर दमन, असहाय अफगान शरणार्थियों को जबरन वापस भेजने और रमजान के पवित्र महीने में अफगानिस्तान पर किए गए हवाई हमलों को आखिर क्या नाम दिया जाएगा? बता दें कि भारत ने पाकिस्तान को ऐसे समय पर फटकार लगाई है जब पिछली रात ही पाक ने अफगानिस्तान की राजधानी काबुल पर हवाई हमला कर 400 लोगों की जान ले ली। अफगानिस्तान ने पाकिस्तान पर काबुल के एक अस्पताल पर हवाई हमले का बड़ा आरोप लगाया है, जिसमें कम से कम 400 लोग मारे गए और करीब 250 घायल हुए हैं। यह घटना 16 मार्च की रात करीब 9 बजे हुई, जब पाकिस्तानी वायुसेना ने काबुल में हमला किया। अफगानिस्तान की तालिबान सरकार के उप-प्रवक्ता हमदुल्लाह फितरत ने X पर पोस्ट करके बताया कि हमला काबुल स्थित ओमिद नामक 2000 बेड वाले ड्रग रिहैबिलिटेशन अस्पताल (नशामुक्ति केंद्र) पर हुआ, जहां नशेड़ी मरीजों का इलाज चल रहा था। उन्होंने कहा कि अस्पताल के बड़े हिस्से तबाह हो गए, आग लग गई और बचाव दल अब भी शव निकालने और आग बुझाने में जुटे हैं। अधिकांश मृतक और घायल नशे की लत से मुक्ति पा रहे मरीज थे। तालिबान के प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने इसे मानवता के खिलाफ अपराध करार दिया और कहा कि अस्पताल साफ तौर पर चिह्नित था। उन्होंने पत्रकारों और राजनयिकों को साइट पर आने का न्योता भी दिया। अफगानिस्तान ने पाकिस्तान पर नागरिक स्थलों को जानबूझकर निशाना बनाने का आरोप लगाया है। भारत पहले भी की मौकों पर पाकिस्तान के खिलाफ यूएन में अफगानिस्तान का साथ देता आया है। OIC का दुरुपयोग भारत ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पाकिस्तान ने ‘इस्लामिक सहयोग संगठन’ (OIC) को भारत के खिलाफ एक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की सुनियोजित कोशिश की है और इस मंच से भारत के खिलाफ बार-बार झूठे और निराधार आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि भारत 20 करोड़ से अधिक मुसलमानों का घर है जो दुनिया की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादियों में से एक है। हरीश ने कहा कि जम्मू-कश्मीर सहित पूरे भारत में मुस्लिम समुदाय अपने प्रतिनिधि खुद चुनता है जो उनकी आवाज उठाते हैं। पाकिस्तान की ‘असली फोबिया’ और आतंकी मानसिकता भारतीय राजदूत ने कहा कि पाकिस्तान का असली ‘फोबिया’ (डर) भारत के उस बहुसांस्कृतिक और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के खिलाफ है, जिसका आनंद मुस्लिम समुदाय सहित सभी भारतीय उठाते हैं। पाकिस्तान का नैरेटिव उसकी उस सांप्रदायिक और आतंकवादी मानसिकता को दर्शाता है जिसे उसने अपने जन्म से ही पाला-पोसा है। संयुक्त राष्ट्र को नसीहत – ‘रिलीजिओफोबिया’ पर हो बात भारत ने स्पष्ट किया कि धर्म का राजनीतिकरण कभी भी समस्याओं का समाधान नहीं करता, बल्कि यह ध्रुवीकरण को बढ़ावा देता है। भारत ने संयुक्त राष्ट्र से आग्रह किया कि वह केवल एक धर्म (इस्लाम) पर केंद्रित ढांचों से बचे और सभी प्रकार के ‘रिलीजिओफोबिया’ (धर्म-आधारित घृणा) से निपटने पर ध्यान दे। हरीश ने कहा कि इतिहास गवाह है कि धर्म का राजनीतिकरण समस्याओं का समाधान नहीं करता, बल्कि इससे विभाजनकारी सोच को बढ़ावा मिलता है। उन्होंने कहा, ‘संयुक्त राष्ट्र एक ऐसी संस्था है जो धर्म, संस्कृति और राजनीति से ऊपर है। इसकी विश्वसनीयता इसकी सार्वभौमिकता और निष्पक्षता में है। इसलिए हम ऐसे ढांचों से सावधान रहने की अपील करते हैं जो केवल एक धर्म पर केंद्रित हों।’ भारत ने खुद को हिंदू, बौद्ध, जैन और सिख धर्म की जन्मस्थली बताते हुए कहा कि ‘सर्व धर्म समभाव’ यानी सभी धर्मों के प्रति समान सम्मान भारत की सभ्यतागत जीवन शैली रही है। भारत ने 1981 के उस घोषणापत्र का भी समर्थन किया जो बिना किसी विशेषाधिकार के सभी धर्मों के अनुयायियों के अधिकारों की रक्षा करता है। अंत में भारत ने संयुक्त राष्ट्र से आग्रह किया कि वह अपना समय और सीमित संसाधन ध्रुवीकरण करने वाले नैरेटिव्स के बजाय संघर्ष समाधान, गरीबी उन्मूलन और हर धर्म के व्यक्ति के लिए समानता और गरिमा पर आधारित समाज के निर्माण में लगाए।  

बुरहानपुर हत्याकांड: फर्नीचर कारोबारी के भाई ने एकतरफा प्रेम में महिला कर्मचारी की ली जान

बुरहानपुर मंगलवार दोपहर शहर के गणपति थाना क्षेत्र में हत्या की सनसनीखेज वारदात सामने आई है। एक फर्नीचर शोरूम संचालक ने अपने ही शोरूम में बुलाकर अपनी महिला कर्मचारी को मौत के घाट उतार दिया। मामला एकतरफा प्रेम प्रसंग से जुड़ा बताया जा रहा है। पुलिस के अनुसार गणपति थाने से चंद मीटर दूर स्थित राजकुमार फर्नीचर के संचालक अर्जुन सुगंधी ने अपने यहां काम करने वाली निकिता सुराड़े को बातचीत करने के लिए बुलाया था। जहां उसके साथ पहले अर्जुन के बड़े भाई की पत्नी ने मारपीट की और जब वह भाग कर घर जाने लगी तो अर्जुन ने धारदार हथियार से उसके सीने पर वार कर दिए। इससे वह वहीं ढेर हो गई। निकिता के साथ गई उसकी छोटी बहन स्नेहा सुराड़े ने तुरंत अपनी मां को फोन कर जानकारी दी। कुछ देर बाद मौके पर पहुंचे स्वजन एम्बुलेंस से निकिता को लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। जहां मौजूद सर्जन दर्पण टोके ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। गणपति थाना प्रभारी सुरेश महाले ने बताया कि हत्या के आरोपित अर्जुन सुगंधी को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि परिवार के अन्य सदस्य घर छोड़ कर फरार हो गए हैं। निकिता बड़ा भाई करता था पसंद मृतका निकिता की छोटी बहन स्नेहा ने बताया कि निकिता बीते दो साल से फर्नीचर शोरूम में काम कर रही थी। इस बीच अर्जुन का बड़ा भाई अजय सुगंधी निकिता को पसंद करने लगा था, लेकिन निकिता ने उसे मना कर दिया था। इसी के चलते एक दिन पहले यानी सोमवार को ही निकिता ने काम छोड़ दिया था। इसकी जानकारी 00 की पत्नी को लगी तो घर में विवाद शुरू हो गया। मंगलवार सुबह से अर्जुन के घर से लगातार फोन आने के कारण वह बातचीत करने के लिए गई थी। जहां उसे अपनी जान गंवानी पड़ी। दस दिन बाद होने वाला था विवाह शहर के आलमगंज क्षेत्र में रहने वाली निकिता के स्वजन ने बताया कि निकिता का विवाह पुणे में तय हो गया था। दस दिन बाद उसका विवाह होने वाला था। परिवार उसकी तैयारी में लगा हुआ था। निकिता के परिवार में दो छोटी बहनें और मां है। उसके पिता का देहांत काफी पहले हो चुका था। मां मारवाड़ी परिवार में भोजन बना कर परिवार चलाती थी। निकिता और स्नेहा कालेज में पढ़ रही थीं और कॉलेज की फीस आदि के लिए ही वे काम करती थीं। इस घटना से पूरे क्षेत्र में शोक का माहौल है। सीसीटीवी का डीवीआर किया जब्त पुलिस ने फर्नीचर दुकान में लगे सीसीटीवी कैमरे का डीवीआर जब्त किया है। बताया जाता है कि हत्या की यह पूरी घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद हुई है। पुलिस इसे खंगाल कर सबूत के तौर पर न्यायालय में प्रस्तुत करेगी। अर्जुन के परिवार के शहर में दो से तीन फर्नीचर शोरूम हैं। इस घटना से अर्जुन का परिवार भी आहत है।  

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