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स्विस ओपन बैडमिंटन: किरण जॉर्ज बाहर, मन्नेपल्ली ने दूसरे दौर में किया प्रवेश

बासेल भारतीय शटलर किरण जॉर्ज यहां स्विस ओपन बैडमिंटन टूर्नामेंट के पुरुष एकल के प्री क्वार्टरफाइनल में हांगकांग के जेसन गुणावन से हारकर बाहर हो गए जबकि युवा थारुन मन्नेपल्ली ने जापान के अपने प्रतिद्वंदी केंटा निशिमोटो के निर्णायक सेट में रिटायर होने के बाद दूसरे दौर में जगह बनाई। जॉर्ज ने कड़ी टक्कर दी लेकिन 70 मिनट तक चले राउंड 16 मैच में 18-21, 21-16, 16-21 से हार गए। भारत के हरिहरन अम्साकारुनन और एम आर अर्जुन की पुरुष युगल जोड़ी भी प्री क्वार्टर फाइनल में हार गई। उन्हें चीनी ताइपे के चेन चेंग कुआन और लिन बिंग-वेई ने 32 मिनट में 17-21, 11-21 से हराया। भारत के सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी की स्टार पुरुष युगल जोड़ी का मुकाबला आज रात प्री क्वार्टर फाइनल मैच में जापान के हिरोकी ओकामुरा और क्योहेई यामाशिता की जोड़ी से होगा। विश्व रैंकिंग में 43वें स्थान पर काबिज मन्नेपल्ली बुधवार की रात खेले गए इस मैच में तब 16-21 21-16 7-2 से आगे चल रहे थे, जब पांचवीं वरीयता प्राप्त निशिमोटो ने कंधे में दर्द के कारण मैच से हटने का फैसला किया। पिछले साल मकाऊ ओपन के सेमीफाइनल में पहुंचने वाले 24 वर्षीय मन्नेपल्ली का अगला मुकाबला मलेशिया के जस्टिन होह से होगा। इस बीच महिला एकल में मालविका बंसोड़ थाईलैंड की विश्व में चौथे नंबर की खिलाड़ी पोर्नपावी चोचुवोंग से एकतरफा मुकाबले में 11-21, 15-21 से हार गईं। थाईलैंड की खिलाड़ी के खिलाफ यह उनकी चौथी हार है।  

अब्राहम लिंकन एयरक्राफ्ट करियर पर ईरान की मिसाइल हमला रिपोर्ट, अमेरिका ने खतरा नाकाम बताया

तेहरान पश्चिम एशिया के समुद्र में ईरान और अमेरिका के बीच सैन्य टकराव एक बेहद खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है. ईरान की ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (IRGC) ने दावा किया है कि उसने अमेरिकी विमानवाहक पोत USS अब्राहम लिंकन पर सटीक मिसाइल और ड्रोन हमला किया है, जिससे पोत को भारी नुकसान पहुंचा है. हालांकि, अमेरिका ने इन दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए इसे एक असफल खतरा बताया है।  ईरानी सरकारी मीडिया ‘प्रेस टीवी’ के अनुसार, IRGC ने ओमान के पास समुद्र में एक “सटीक ऑपरेशन” को अंजाम दिया. ईरान का दावा है कि उसके उन्नत हथियारों ने ईरानी सीमा से 340 किमी दूर इस युद्धपोत को निशाना बनाया।  IRGC के बयान में कहा गया है कि इस हमले के बाद ‘लिंकन’ ऑपरेशनल नहीं रहा और उसे उच्च गति के साथ क्षेत्र से हटने के लिए मजबूर होना पड़ा. इसके साथ ही ईरान ने बहरीन स्थित अमेरिका के मीना सलमान नौसैनिक अड्डे पर भी दो लहरों में ड्रोन हमले करने का दावा किया है।  अमेरिका का पलटवार: ईरानी जहाज को मार गिराया दूसरी ओर, अमेरिकी अधिकारियों ने ईरान के दावों को कोरी कल्पना बताया है. ‘सीबीएस न्यूज’ की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी नौसेना ने विमानवाहक पोत के बेहद करीब आ रहे एक ईरानी जहाज को समय रहते रोक दिया।  अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि पहले ‘मार्क-45’ गन से चेतावनी दी गई और बाद में हेलफायर मिसाइलों से लैस हेलीकॉप्टर ने उस ईरानी जहाज पर दो सटीक प्रहार किए. अमेरिका ने स्पष्ट किया कि उसका कोई भी पोत सुरक्षित है और उसने खतरे को सफलतापूर्वक खत्म कर दिया है।  यह सैन्य टकराव ईरान के नए क्रांतिकारी नेता मुजतबा खामेनेई के उस बयान के कुछ ही घंटों बाद हुआ है, जिसमें उन्होंने दुश्मनों को “पछताने” वाली कार्रवाई की चेतावनी दी थी. वहीं, इराक में ईरान समर्थित गुटों द्वारा एक अमेरिकी रिफ्यूलिंग एयरक्राफ्ट (KC-135) को मार गिराने की खबरों ने स्थिति को और भी गंभीर बना दिया है. फिलहाल, दोनों महाशक्तियां अपनी सैन्य श्रेष्ठता का दावा कर रही हैं, जिससे खाड़ी क्षेत्र में पूर्ण युद्ध का खतरा मंडरा रहा है। 

PM किसान की 22वीं किस्त का इंतजार खत्म: बिहार के 73 लाख किसानों को आज मिलेगा ₹2000, ऐसे देखें स्टेटस

नई दिल्ली देशभर के करोड़ों किसान प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना (PM-Kisan) की अगली यानी 22वीं किस्त का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। वहीं अब उनका इंतजार खत्म होने वाला है। आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 13 मार्च को असम के दौरे पर होंगे और इस दौरान 22वीं किस्त जारी करेंगे। जिससे किसानों को बड़ी राहत मिल सकती है। इसके माध्यम से देशभर के करोड़ों किसानों के बैंक खातों में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के जरिए सहायता राशि भेजी जाएगी। बता दें कि पीएम किसान योजना की किस्तें आमतौर पर हर चार महीने के अंतराल पर जारी की जाती हैं। वहीं बिहार के 73 लाख से अधिक पात्र किसानों के बैंक खातों में लगभग 1,467 करोड़ रुपये से अधिक की राशि को सीधे ट्रांसफर की जाएगी।   सालाना ₹6,000 की मदद इस योजना के तहत हर पात्र किसान परिवार को सालाना ₹6,000 की आर्थिक सहायता दी जाती है। यह रकम DBT (Direct Benefit Transfer) के ज़रिए तीन समान किस्तों—₹2,000-₹2,000 में दी जाती है। इस कारण रुक सकती है आपकी किस्त e-KYC अधूरी होना आधार से बैंक खाता लिंक न होना DBT (Direct Benefit Transfer) बंद होना भू-सत्यापन न होना वहीं कई मामलों में नाम की स्पेलिंग, खाता नंबर, जमीन के रिकॉर्ड में त्रुटि जैसी छोटी गलतियों के कारण भी भुगतान रोक दिया जाता है। किसान PM Kisan पोर्टल पर जाकर अपना स्टेटस ऑनलाइन चेक कर सकते हैं, जिससे पता चल जाता है कि किस्त क्यों रुकी है। इनमें से कोई भी समस्या किस्त रोक सकती है, लेकिन अच्छी बात यह है कि इन सबको आसानी से ठीक किया जा सकता है। पीएम किसान (PM Kisan) का स्टेटस कैसे देखें:- सबसे पहले pmkisan.gov.in पर जाएं। Farmers Corner’ पर क्लिक करें। Beneficiary Status ऑप्शन चुनें। आधार नंबर, मोबाइल नंबर या रजिस्ट्रेशन नंबर डालें।

प्रकृति संरक्षण भारतीय परंपरा का हिस्सा: मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का बयान

भारतीय संस्कृति में धरती को मां का दर्जा, प्रकृति संरक्षण हमारी परंपरा : मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ग्रीन इकोनॉमी के क्षेत्र में नई पहचान बना रहा है छत्तीसगढ़ : मुख्यमंत्री रायपुर  छत्तीसगढ़ देश की अर्थव्यवस्था का पावर इंजन है और अब हमारा राज्य ग्रीन इकोनॉमी के क्षेत्र में भी अपनी भूमिका लगातार मजबूत कर रहा है।मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर के पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय स्थित ऑडिटोरियम में आयोजित दूसरे छत्तीसगढ़ हरित शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए यह बात कही।  मुख्यमंत्री  साय ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ हरित सम्मेलन की उपयोगिता इसलिए और बढ़ जाती है क्योंकि इसके माध्यम से पॉलिसी मेकिंग से जुड़े लोग, उद्योग जगत, शैक्षणिक संस्थान, शोधकर्ता और पर्यावरणविद एक मंच पर आकर महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जलवायु संकट लगातार बढ़ रहा है, ऐसे में यह आवश्यक है कि हम पर्यावरण संरक्षण के उपायों पर केवल चिंतन ही न करें, बल्कि उन्हें व्यवहार में भी उतारें। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली डबल इंजन सरकार हमेशा से विरासत के साथ विकास की पक्षधर रही है। पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली हमारी हजारों वर्षों पुरानी परंपरा रही है और उसकी रक्षा के लिए सरकार नीतिगत स्तर पर लगातार ठोस कदम उठा रही है।    मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ देश में स्टील उत्पादन का एक बड़ा केंद्र है और इस क्षेत्र में कार्बन फुटप्रिंट कम करने के लिए ग्रीन स्टील जैसे नवाचारों को अपनाया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि भारतीय वन सर्वेक्षण रिपोर्ट 2023 के अनुसार संयुक्त वन एवं वृक्ष आवरण वृद्धि के मामले में छत्तीसगढ़ ने देश में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि राज्य सरकार की नीतियों के साथ-साथ प्रदेशवासियों की जागरूकता और पर्यावरण के प्रति उनकी जिम्मेदारी का परिणाम है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि राज्य में सोलर रूफटॉप योजना के माध्यम से उपभोक्ताओं को ऊर्जादाता बनाया जा रहा है और बायो-एथेनॉल जैसे क्षेत्रों में भी निवेश की व्यापक संभावनाएं उभर रही हैं। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार द्वारा “एक पेड़ मां के नाम” जैसे अभियान चलाकर लोगों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत की संस्कृति में धरती को मां का दर्जा दिया गया है, इसलिए संसाधनों का उपयोग करते समय पर्यावरण और धरती के स्वास्थ्य का ध्यान रखना हमारी जिम्मेदारी है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि राज्य सरकार ने सभी विभागों में ई-ऑफिस व्यवस्था लागू की है, जिससे समय और संसाधनों की बचत होने के साथ-साथ कागज के उपयोग में भी कमी आई है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ जनजातीय बहुल राज्य है और लगभग 44 प्रतिशत क्षेत्र वनों से आच्छादित है।  साय ने बताया कि वनांचल में वृक्षों को सरना (देवता) के रूप में पूजा जाता है और सरना को राजस्व रिकॉर्ड में भी देवस्थल के रूप में दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रकृति से जुड़ाव और उसके संरक्षण का भाव जनजातीय समाज से सहज ही सीखा जा सकता है। मुख्यमंत्री  साय ने बताया कि राज्य की नई औद्योगिक नीति में हरित पहल पर विशेष जोर दिया गया है और इस दिशा में कार्य करने वाले उद्योगों को विशेष रियायतें भी दी जा रही हैं। उन्होंने छत्तीसगढ़ ग्रीन समिट के मंच से प्रदेशवासियों से पर्यावरण संरक्षण के लिए आगे आने तथा इसकी शुरुआत स्वयं से करने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री  साय ने इस अवसर पर सम्मेलन में प्रस्तुत शोधों के संकलन पर आधारित पुस्तक “एब्स्ट्रेक्ट”, सम्मेलन की प्रमुख चर्चाओं पर आधारित “हाइलाइट्स ऑफ द समिट” तथा जनजातीय कहानियों और परम्पराओं पर आधारित पुस्तक “कथा कंथली” का विमोचन किया। इस अवसर पर मेघालय के लोकायुक्त  सी पी मारक, पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. सच्चिदानंद शुक्ल, पीसीसीएफ  व्ही निवास राव, विबग्योर फाउंडेशन के अध्यक्ष  शंखदीप चौधरी, विषय विशेषज्ञ, प्रोफेसर, प्रबुद्धजन, स्कॉलर और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

भोपाल नगर निगम में करोड़ों के फर्जी बिल घोटाले पर लोकायुक्त की कार्रवाई, जांच शुरू

भोपाल  नगर निगम में शुक्रवार की सुबह उस वक्त हड़कंप मच गया, जब लोकायुक्त पुलिस की विशेष टीम ने फतेहगढ़ स्थित कार्यालय और एक अन्य दफ्तर पर दबिश दी।यह कार्रवाई निर्माण कार्यों के नाम पर फर्जी बिलों के जरिए करोड़ों रुपये के भुगतान की शिकायतों के बाद की गई है। लोकायुक्त की टीम शुक्रवार सुबह ठीक उस वक्त निगम दफ्तर पहुँची जब कर्मचारी अपनी सीटें संभाल ही रहे थे। फायनेंस और कंप्यूटर शाखा लोकायुक्त के घेरे में टीम ने सबसे पहले फायनेंस और कंप्यूटर शाखा को अपने घेरे में लिया। जानकारी के अनुसार, फतेहगढ़ ऑफिस खुलते ही लोकायुक्त की टीम वहाँ पहुँच गई थी। बताया जा रहा है कि लोकायुक्त को लंबे समय से शिकायतें मिल रही थीं कि निगम में बिना किसी जमीनी काम के, केवल कागजों पर फर्जी बिल लगाकर भुगतान का खेल चल रहा है। लोकायुक्त की दो अलग-अलग टीमें दोनों कार्यालयों में जांच कर रही हैं। कम्प्यूटर शाखा में नगर निगम से जुड़े महत्वपूर्ण ऑनलाइन रिकॉर्ड और लेखा-जोखा रखा जाता है, इसलिए दस्तावेजों की बारीकी से जांच की जा रही है। संबल योजना के दस्तावेज खंगाले टीम ने संबल योजना से जुड़े रिकॉर्ड और ऑनलाइन एंट्री की जांच शुरू की है। इसके साथ ही अन्य डिजिटल रिकॉर्ड में संभावित गड़बड़ियों की भी पड़ताल की जा रही है। फतेहगढ़ स्थित कार्यालय में मौजूद तीन कर्मचारियों वसीम, सोहेल और पंकज से अंदर पूछताछ की जा रही है। टीम ने सुबह करीब 11:30 बजे दोनों स्थानों पर एक साथ छापे की कार्रवाई शुरू की। 22 फरवरी को नए भवन में हुई थी शिफ्टिंग फतेहगढ़ में स्थित नगर निगम की कम्प्यूटर शाखा को 22 फरवरी को लिंक रोड नंबर-2 पर बने नए भवन में शिफ्ट किया गया था। रेड के दौरान दोनों इमारतों में रखे दस्तावेजों की जांच की जा रही है। कम्प्यूटर शाखा में होते हैं ये ऑनलाइन कार्य नगर निगम की कम्प्यूटर शाखा में संबल योजना, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, प्रॉपर्टी टैक्स और अन्य ऑनलाइन सेवाओं से जुड़े काम संचालित होते हैं। लोकायुक्त टीम इनसे संबंधित रिकॉर्ड की जांच कर रही है। दस साल पुराना रिकार्ड को जब्त किया जा रहा इस दौरान पिछले करीब 10 साल के रिकॉर्ड और दस्तावेजों की जांच की जा रही है। लोकायुक्त पुलिस इस मामले में नगर निगम के दो ऑफिस बॉय और एक ऑपरेटर से पूछताछ कर रही है। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक फर्जी बिल लगाकर भुगतान कराने का मामले से जुड़ी शिकायत के बाद कार्रवाई की गई है। लोकायुक्त की टीम पुराने दस्तावेजों और भुगतान से जुड़ी फाइलों की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की स्पष्ट जानकारी सामने आ पाएगी। फिलहाल लोकायुक्त की कार्रवाई जारी है। संबल योजना और कर्मकार मंडल के तहत 2023 में 2 करोड़ से अधिक के फर्जीवाड़े मामले से जुड़े रिकॉर्ड लोकायुक्त की टीम खंगाल रही है। एक दशक पुराने दस्तावेजों की जब्ती कार्रवाई की सबसे बड़ी बात यह है कि पुलिस ने शिकायतों के आधार पर पिछले 10 वर्षों के पुराने रिकॉर्ड और दस्तावेज जब्त किए हैं। यह संकेत देता है कि यह घोटाला किसी एक कार्यकाल का नहीं, बल्कि एक दशक से चल रहा एक संगठित भ्रष्टाचार है। जांच टीम अब इन दस्तावेजों का मिलान जमीनी हकीकत से करने की तैयारी में है।

‘उनका करियर खतरे में’—SC ने पीरियड लीव याचिका पर सुनवाई को ठुकराया

 नई दिल्ली सरकार के पास जाइए…’ पूरे देश में छात्राओं और कामकाजी महिलाओं के लिए मासिक धर्म अवकाश की मांग वाली याचिका सुनने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार कर दिया है. सीजेआई सूर्यकांत की पीठ के सामने ये मामला उठाया गया था. ये याचिका शैलेन्द्र मणि त्रिपाठी ने दायर की थी. मामले की सुनवाई के दौरान सीजेआई सूर्यकांत ने कहा- इस तरह की याचिकाए कभी-कभी महिलाओं को कमजोर या कमतर दिखाने का माहौल बना देती हैं. ऐसी याचिकाएं यह डर पैदा करती हैं कि मासिक धर्म महिलाओं के साथ कुछ बुरा होने जैसा है. इससे उन्हें ही नुकसान होगा। महिलाओं को जिम्मेदार पद देने से हिचकेंगे… सीजेआई सूर्यकांत ने याचिका की सुनवाई के दौरान यह भी कहा कि यदि ऐसी व्यवस्था अनिवार्य कर दी गई तो नियोक्ता महिलाओं को जिम्मेदार पद देने से हिचक सकते हैं. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि न्यायिक सेवाओं में भी महिलाओं को सामान्य ट्रायल जैसे महत्वपूर्ण काम सौंपने से बचा जा सकता है, जिससे उनके करियर पर असर पड़ सकता है।  सभी कामकाजी महिलाओं और छात्राओं के पीरियड्स से जुड़ी तकलीफों के लिए अवकाश का प्रावधान बनाने को लेकर दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इंकार किया है. मुकदमा सामने लाए जाने पर CJI जस्टिस सूर्यकांत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर कोई कंपनी अपनी मर्जी से (पीरियड्स) इसके दौरान छुट्टी दे रही है तो बहुत अच्छी बात है। प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) ने इस पर कहा कि स्वैच्छिक नीतियां स्वागतयोग्य हैं लेकिन उन्होंने ऐसे प्रावधानों को कानून के जरिये अनिवार्य बनाए जाने के प्रति आगाह किया. उन्होंने कहा, “स्वेच्छा से अवकाश दिया जाना बहुत अच्छी बात है लेकिन जैसे ही आप कहेंगे कि यह कानून के तहत अनिवार्य है तो कोई उन्हें नौकरी नहीं देगा. उन्हें न्यायपालिका या सरकारी नौकरियों में कोई नहीं लेगा; उनका करियर खत्म हो जाएगा.” पीठ ने ऐसी व्यवस्थाओं के कार्यस्थल पर प्रभाव और महिलाओं की पेशेवर प्रगति पर पड़ने वाले संभावित असर को भी रेखांकित किया. पीठ ने याचिकाकर्ता की दलीलों पर गौर करते हुए कहा कि याचिका दायर करने वाला व्यक्ति संबंधित प्राधिकारियों को पहले ही अभ्यावेदन दे चुका है। क्या नियोक्ता इससे खुश होंगे?  जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने भी इस मुद्दे के आर्थिक और व्यावहारिक पहलुओं की ओर इशारा करते हुए कहा कि व्यापारिक मॉडल के बारे में सोचिए. क्या नियोक्ता इससे खुश होंगे? याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कहा कि केरल, कर्नाटक और ओडिशा जैसे राज्यों में कुछ संस्थानों में मासिक धर्म अवकाश या रियायतें दी जाती हैं, इसलिए इसे पूरे देश में लागू किया जा सकता है।    उन्होंने आगे कहा कि जैसे ही आप इस को कानून के तौर पर सख्ती से लागू करेंगे तो इसके दूसरे पहलुओं को भी ध्यान रखना पड़ेगा. अब जैसे हो सकता है कि महिलाओं को नौकरी पाने में दिक्कत हो. उन्हें सरकारी नौकरी, न्यायपालिका या बाकी नौकरियों में रखा ही न जाए। उन्होंने कहा कि उनका करियर ही बर्बाद हो जाए. ऐसे मे उन्हें कह दिया जाए कि वो घर पर ही रहें. इसके अलावा CJI ने याचिकाकर्ता से कहा कि आप पहले ही केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के सामने अपनी बात रख चुके हैं. सरकार को सभी पक्षों से बात करके एक पॉलिसी बनाने पर विचार करना चाहिए। दरअसल सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की गई याचिका में कहा गया था कि गर्भावस्था के लिए तो अवकाश मिलता है, पर मासिक धर्म सके लिए नहीं. कुछ राज्यों और कंपनियों ने महीने में 2 दिन छुट्टी का प्रावधान बनाया है. ऐसे मे सुप्रीम कोर्ट सब राज्यों को ही ऐसे नियम बनाने का निर्देश दे।  

ईरान तनाव के बीच भारत का फैसला, 8 LPG टैंकर होर्मुज से गुजरेंगे, घर-घर गैस की सप्लाई सुरक्षित

मुंबई  ईरान जंग का असर भारत में भी दिख रहा है. एलपीजी सिलेंडर को लेकर जगह-जगह हाय-तौबा मची है. गैस की कालाबाजारी चरम पर पहुंच गई है. आम जनता परेशान है. लोगों को डर सता रहा है कि एलपीजी गैस की कमी से उन्हें खाने-पीने की दिक्कत हो जाएगी. मगर सरकार का कहना है कि देश में एलपीजी गैस की दिक्कत नहीं है. होर्मुज के बंद होने से इंधन संकट की चिंताओं के बीच सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. बहुत जल्द आठ एलपीजी टैंकर होर्मुज को पार कर भारत की सरजमीं पर होंगे. जी हां, इसके लिए भारत सरकार ने ईरान से बातचीत तेज कर दी है।  दरअसल, एक सरकारी सूत्र ने बताया कि भारत ईरान से बातचीत कर रहा है और उसे जल्द ही LPG की आपूर्ति मिलने की उम्मीद है. अधिकारी स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहे हैं, क्योंकि इस क्षेत्र में हो रही बाधाओं के कारण ऊर्जा शिपमेंट पर लगातार असर पड़ रहा है. बता दें कि ईरान ने जंग के कारण होर्मुज को बंद कर दिया है. हालांकि, उसने भारत को इससे छूट दी है।  होर्मुज के पास 8 टैंकर इंतजार कर रहे हैं सूत्रों के अनुसार, आठ LPG टैंकर इस समय स्ट्रेट ऑफ होर्मुज यानी होर्मुज जलडमरूमध्य से ठीक पहले खड़े हैं. इन जहाजों की आवाजाही को आसान बनाने के लिए सरकार ईरान के संपर्क में है. अधिकारियों ने बताया कि ईरानी अधिकारी इस प्रक्रिया में सहयोग कर रहे हैं और उन्हें अपने उन नाविकों की भी चिंता है जो इस समय भारत में हैं. लगभग 250 ईरानी नाविक भारत में हैं, जो अपने घर लौटने का इंतज़ार कर रहे हैं. भारतीय अधिकारियों ने उन्हें रहने की जगह दी है, जबकि उनके लौटने की व्यवस्था की जा रही है।  सरकार है एक्टिव एलपीजी गैस और तेल के संकट को टालने के लिए सरकार का क्राइसिसि मैनेजमेंट ग्रुप यानी संकट प्रबंधन समूह (Crisis Management Group) एक पूरी योजना पर काम कर रहा है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि भारत को किसी भी तरह की ईंधन किल्लत का सामना न करना पड़े. अधिकारी स्थिति का जायज़ा ले रहे हैं और LPG कुकिंग गैस की सप्लाई को संभालने के लिए संबंधित अधिकारियों के साथ तालमेल बिठा रहे हैं।  LPG आयात पर भारत की निर्भरता भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का लगभग 60 से 67 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है. इस आयात का एक बड़ा हिस्सा सऊदी अरब और कतर जैसे खाड़ी देशों के सप्लायरों से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते आता है. इस रास्ते में किसी भी तरह की रुकावट देश में LPG की उपलब्धता पर असर डाल सकती है।  भारतीय जहाज़ों की सुरक्षित आवाजाही के लिए कूटनीतिक बातचीत भारत एलपीजी शिपमेंट के लिए सुरक्षित रास्ता सुनिश्चित करने के लिए उच्च-स्तरीय बातचीत कर रहा है. इसमें विदेश मंत्री एस. जयशंकर और ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची के बीच कई बार फ़ोन पर बातचीत शामिल है. इतना ही नहीं, अपने ईंधन वाले जहाजों को सुरक्षित वापस लाने के लिए भारत नेवी के एस्कॉर्ट पर भी विचार कर रहा है। 

चर्रा की योगेश्वरी देवांगन की सफलता कहानी, आजीविका मिशन से मिला महिला सशक्तिकरण का रास्ता

धमतरी : आजीविका मिशन से बदली तस्वीर: चर्रा की योगेश्वरी देवांगन बनीं महिला सशक्तिकरण की प्रेरणा मार्केटिंग  के लिए सोशल मीडिया  का सहारा लिया  धमतरी दीनदयाल अन्त्योदय योजना–राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इस योजना के माध्यम से महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़कर उन्हें स्वरोजगार, प्रशिक्षण, वित्तीय सहयोग और बाजार से जोड़ने का अवसर मिल रहा है। परिणामस्वरूप कई महिलाएं आत्मनिर्भर बनकर अपने परिवार और समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बन रही हैं। ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी धमतरी जिले के विकासखंड कुरूद के ग्राम चर्रा की श्रीमती योगेश्वरी देवांगन की है, जो आजीविका मिशन से जुड़कर न केवल अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत कर पाईं, बल्कि क्षेत्र की अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं।   योगेश्वरी देवांगन जैसे उदाहरण यह साबित करते हैं कि यदि महिलाओं को सही मार्गदर्शन और अवसर मिले तो वे अपनी मेहनत और लगन से सफलता की नई मिसाल कायम कर सकती हैं। आजीविका मिशन के तहत कलेक्टर अबिनाश मिश्रा के मार्गदर्शन में योगेश्वरी देवांगन, अध्यक्ष जय माँ परमेश्वरी स्वयं सहायता समूह ग्राम चर्रा का चयन राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित छठवें जेण्डर संवाद के लिए किया गया था ।इस संवाद में वे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से “महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए लैंगिक निवेश क्यों आवश्यक है” विषय पर अपने अनुभव साझा किए ।   योगेश्वरी देवांगन बताती हैं कि समूह से जुड़ने से पहले उनका परिवार आर्थिक रूप से कमजोर था। परिवार की आजीविका कृषि और मजदूरी पर निर्भर थी, जिससे बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य और दैनिक जरूरतों को पूरा करना कठिन हो जाता था। लेकिन स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उनकी सोच और जीवन दोनों में बड़ा बदलाव आया।   राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के सहयोग से उन्होंने बैंक से ऋण प्राप्त किया तथा पशुपालन विभाग, कृषि विज्ञान केन्द्र और आर-सेटी से मुर्गीपालन का प्रशिक्षण लिया। प्रशिक्षण और मार्गदर्शन के बाद उन्होंने अपने गांव में देशी मुर्गी फार्म की स्थापना की। शुरुआत में सामाजिक दबाव और कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति और परिवार के सहयोग ने उन्हें आगे बढ़ने की ताकत दी।   आज योगेश्वरी देवांगन का मुर्गी फार्म सफल उद्यम बन चुका है। उनके फार्म में तैयार होने वाली मुर्गियां और चूजे देश के विभिन्न क्षेत्रों तक पहुंच रहे हैं। उनके  फ़ार्म में करीब 7 मुर्गी की नस्लें, बटेर, बत्तख, गिनी फाउल, टर्की  है । अंडों से बच्चे निकालने की मशीन है।  उन्होंने  बताया कि शुरू में मालूम नहीं था कहा किस बाजार में बेचना है । उन्होंने मार्केटिंग  के लिए सोशल मीडिया  का सहारा लिया है । देवांगन देशी मुर्गी फार्म चर्रा कुरूद” नाम से यूट्यूब चैनल भी संचालित कर रही हैं, जिसके माध्यम से वे अन्य ग्रामीण महिलाओं और युवाओं को भी स्वरोजगार के लिए प्रेरित कर रही हैं।    योगेश्वरी देवांगन का सपना है कि उनके समूह की अधिक से अधिक महिलाएं भी स्वरोजगार से जुड़कर अपनी आय बढ़ाएं। इसी उद्देश्य से वे समूह की अन्य महिलाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें भी मुर्गीपालन जैसे व्यवसाय से जोड़ने का प्रयास कर रही हैं। साथ ही भविष्य में वे खरगोश पालन जैसे नए उद्यम की भी शुरुआत करने की योजना बना रही हैं।    योगेश्वरी देवांगन की यह सफलता कहानी दर्शाती है कि यदि महिलाओं को सही दिशा, प्रशिक्षण और अवसर मिले तो वे न केवल अपनी जिंदगी बदल सकती हैं, बल्कि पूरे समाज में सकारात्मक बदलाव की नींव भी रख सकती हैं। आज वे अपने गांव और जिले की महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता, आत्मविश्वास और संघर्ष से सफलता पाने की जीवंत मिसाल बन चुकी हैं।

टेनिस में बड़ा मुकाबला तय, सबालेंका और सिनर पहुंचे BNP Paribas सेमीफाइनल

इंडियन वेल्स एरिना सबालेंका ने बीएनपी परीबस ओपन क्वार्टर फाइनल में विक्टोरिया एमबोको को 7 . 6, 6 . 4 से हराकर इंडियन वेल्स टेनिस खिताब की ओर अगला कदम बढा दिया । यानिक सिनर , अलेक्जेंडर ज्वेरेव और दानिल मेदवेदेव भी पुरूष वर्ग के सेमीफाइनल में पहुंच गए । मेदवेदेव ने विवादास्पद अंपायर कॉल का फायदा उठाकर गत चैम्पियन जैक ड्रेपर को 6 . 1, 7 . 5 से हराया । मेदवेदेव का सामना अब कार्लोस अल्काराज या कैमरन नॉरी से होगा जबकि दूसरे सेमीफाइनल में सिनर की टक्कर ज्वेरेव से होगी । सबालेंका सेमीफाइनल में चेक गणराज्य की 14वीं वरीयता प्राप्त लिंडा नोस्कोवा से खेलेंगी जिन्होंने आस्ट्रेलिया की गैर वरीय तालिया गिब्सन को 6 . 2, 4 . 6, 6 . 2 से मात दी । नौवीं वरीयता प्राप्त यूक्रेन की एलिना स्वितोलिना भी पोलैंड की दूसरी वरीयता प्राप्त इगा स्वियातेक को 6 . 2, 4 . 6, 6 . 4 से हराकर सेमीफाइनल में पहुंच गई । अब उनका सामना एलेना रिबाकिना से होगा जिसने अमेरिका की जेसिका पेगुला को 6 . 1, 7 . 6 से मात दी ।  

प्रीति पाल ने जीता स्वर्ण, फिर भी खुद से नाराज—कहा ‘मैदान में कर दी बड़ी गलती’

नई दिल्ली महिलाओं की 100 मीटर टी35 इवेंट में गोल्ड जीतने के बाद भी 2024 पैरालिंपिक में दो कांस्य पदक जीतने वालीं प्रीति पाल निराश हैं। प्रीति को इस बात का मलाल रह गया कि वह यहां वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स ग्रां प्री में अपना सर्वश्रेष्ठ नहीं दे पाईं। प्रीति ने कहा कि वह पिछले एक महीने से लगातार प्रैक्टिस कर रही थीं, इसके बावजूद भी उन्होंने वो गलतियां कीं, जो वह प्रैक्टिस में भी नहीं करती हैं। प्रीति ने उम्मीद जताई है कि वह अगली रेस में बेहतर प्रदर्शन करने की पूरी कोशिश करेंगी। भारतीय पैरा धावक ने बुधवार को जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स ग्रां प्री के पहले दिन 14.46 सेकंड का समय निकालकर टॉप स्थान हासिल किया। हालांकि, प्रीति ने कहा कि रेस के आखिर में थकान की वजह से वह अपना बेस्ट प्रदर्शन नहीं कर सकीं। प्रीति ने ‘आईएएनएस’ को बताया, “यह मेरी 100 मीटर रेस थी। आखिर में मैं थक गई थी और मुझे उस पल इसका एहसास नहीं हुआ। बाद में मैंने रेस फिर से देखी तो मुझे समझ आया।” गोल्ड मेडल जीतने के बाद भी भारतीय एथलीट ने जोर देकर कहा कि टाइमिंग ज्यादा महत्व रखती है, खासकर जब आगे बड़े टूर्नामेंट होने वाले हों। उन्होंने कहा, “ग्रैंड प्रिक्स में गोल्ड मेडल जीतना सबसे जरूरी बात नहीं है — टाइमिंग ज्यादा मायने रखती है, क्योंकि मेरा असली लक्ष्य एशियन गेम्स और पैरालिंपिक में गोल्ड जीतना है।” रेस का रिव्यू करने के बाद प्रीति ने माना कि कुछ टेक्निकल गलतियां थीं, जो वह ट्रेनिंग के दौरान बहुत कम करती हैं। उन्होंने कहा, “जब मैंने अपनी रेस का रिव्यू किया और दूसरों ने भी मुझे बताया, तो मुझे एहसास हुआ कि कुछ गलतियां हुई थीं। ये चीजे आमतौर पर ट्रैक पर प्रैक्टिस के दौरान नहीं होतीं, लेकिन यहां ऐसा हुआ। पिछले एक महीने से मैं लगातार पर्सनल बेस्ट टाइमिंग दे रही थी, लेकिन यहां ऐसा नहीं हुआ।” निराशा के बावजूद, प्रीति ने कहा कि वह अपनी गलतियों से सीखकर अपने इवेंट में बेहतर प्रदर्शन करने की कोशिश करेंगी। प्रीति ने बताया, “मैंने गलतियों और सीखों को समझ लिया है और मैं उन्हें कल की 200 मीटर रेस में लागू करूंगी। मैं वहां अपना बेस्ट देने की कोशिश करूंगी। पिछली रेस में मैंने देखा कि मेरा ड्राइव फेज बहुत खराब हो गया था, इसलिए मैं अगली रेस में इसे सुधारने की कोशिश करूंगी।” प्रीति ने कहा कि उन्हें यहां पर कड़ा मुकाबला नहीं मिला। उन्होंने कहा, “मुझे यहां सच में उस स्तर का मुकाबला नहीं मिला जहां कोई मुझे हरा सके। दूसरों ने भी अपना बेस्ट दिया, लेकिन अगर मेरे पास कोई दूसरा एथलीट होता जो साइड से पुश कर रहा होता, तो शायद मैं खुद को और भी ज्यादा पुश कर पाती। इस वजह से मुझे लगता है कि मैं अपना पूरा ज़ोर नहीं लगा पाई।” प्रीति का मानना है कि कई इंटरनेशनल मीट में हिस्सा लेने से उन्हें एशियन गेम्स और पैरालिंपिक जैसे बड़े इवेंट्स की तैयारी के लिए सुधार की जगहों को पहचानने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा, “यह अनुभव हमें सीखने और डर दूर करने में मदद करते हैं। जब तक एशियन गेम्स आएंगे, तब तक हमें प्रेशर से निपटने की ज्यादा आदत हो जाएगी।”  

मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय की पहल रंग लाई, रायपुर में जर्जर पुल का निर्माण कार्य शुरू

रायपुर : मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय की पहल से जर्जर पुल के निर्माण की शुरुआत वर्षों से जोखिम उठाकर गुजर रहे राहगीरों को मिलेगी सुरक्षित आवागमन की सुविधा रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के निर्देश पर जशपुर जिले में सिंगीबहार से कछुआकानी मुख्य मार्ग पर स्थित जर्जर पुल के निर्माण कार्य की शुरुआत कर दी गई है। लंबे समय से पुल की जर्जर स्थिति के कारण क्षेत्र के लोग जान जोखिम में डालकर आवागमन करने को मजबूर थे। मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय के संज्ञान में मामला आने के बाद त्वरित कार्रवाई करते हुए संबंधित विभाग को निर्माण कार्य प्रारंभ करने के निर्देश दिए गए। बताया गया है कि सिंगीबहार–कछुआकानी मार्ग क्षेत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग है, जो छत्तीसगढ़ को पड़ोसी राज्यों झारखंड और ओडिशा से जोड़ने में अहम भूमिका निभाता है। पुल के खराब होने के कारण इस मार्ग से गुजरने वाले ग्रामीणों, किसानों और मजदूरों को लंबे समय से कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय बगिया को जानकारी मिलने के बाद अधिकारियों को तत्काल आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए। निर्देश मिलते ही संबंधित विभाग ने स्थल पर पहुंचकर पुल निर्माण का कार्य प्रारंभ कर दिया है। निर्माण कार्य पूर्ण होने के बाद क्षेत्रवासियों को सुरक्षित और सुगम आवागमन की सुविधा मिल सकेगी। पुल निर्माण कार्य शुरू होने से क्षेत्र में खुशी का माहौल है। स्थानीय ग्रामीणों और राहगीरों ने मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वर्षों पुरानी समस्या का अब समाधान होने जा रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि पुल बनने से आवागमन सुरक्षित होने के साथ ही आसपास के गांवों के विकास और व्यापारिक गतिविधियों को भी नई गति मिलेगी।

बस्तर में बारिश और तेज हवाओं का अलर्ट, छत्तीसगढ़ में मौसम लेगा करवट

रायपुर छत्तीसगढ़ में लगातार बढ़ रही गर्मी के बीच मौसम विभाग ने दक्षिण छत्तीसगढ़ के लिए बारिश और तेज हवाओं का अलर्ट जारी किया है। विशेष रूप से बस्तर संभाग के कई जिलों में शुक्रवार से मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है। मौसम विभाग के अनुसार 13 से 15 मार्च के बीच बस्तर क्षेत्र में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने और गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। यदि बारिश होती है तो तापमान में हल्की गिरावट दर्ज की जा सकती है, जिससे लोगों को गर्मी से कुछ राहत मिल सकती है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक बिहार और झारखंड के बीच समुद्र तल से करीब 0.9 किलोमीटर की ऊंचाई पर एक ट्रफ लाइन सक्रिय है। इसी सिस्टम के प्रभाव से छत्तीसगढ़ के कई हिस्सों में बादल छाने और बारिश होने के संकेत मिल रहे हैं। जगदलपुर, बीजापुर समेत बस्तर संभाग के अधिकांश जिलों में तेज हवाओं के साथ बारिश हो सकती है। मौसम विभाग का अनुमान है कि इन इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ गरज-चमक की स्थिति भी बन सकती है। प्रदेश में बढ़ रही गर्मी फिलहाल प्रदेश के कई हिस्सों में तापमान तेजी से बढ़ रहा है। राजनांदगांव में अधिकतम तापमान करीब 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जबकि रायपुर और बिलासपुर संभाग के अधिकांश जिलों में पारा लगभग 37 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है। वहीं न्यूनतम तापमान के मामले में अंबिकापुर सबसे ठंडा रहा, जहां तापमान करीब 13.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विभाग का अनुमान है कि राज्य में मार्च के दूसरे और तीसरे पखवाड़े में गर्मी और तेज हो सकती है। कई जिलों में अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना जताई गई है।

विधानसभा में राजस्व विभाग की 3502 करोड़ से अधिक की अनुदान मांगों को मिली स्वीकृति

मंत्री  टंक राम वर्मा के राजस्व विभाग की 3502 करोड़ रुपए से अधिक की अनुदान मांगें विधानसभा में पारित राजस्व सेवाओं में डिजिटल पारदर्शिता और आपदा प्रबंधन को मिलेगा नया बल मुंगेली जिला के विजयपुर और सरगुजा जिला के देवगढ को उप तहसील बनाने की घोषणा रायपुर छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज राजस्व मंत्री  टंक राम वर्मा के विभागों के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 हेतु कुल 4 हजार 808 करोड़ 73 लाख 96 हजार रुपए की अनुदान मांगें पारित कर दी गईं। इसमें भू-राजस्व एवं जिला प्रशासन के लिए 2,206 करोड़ 2 लाख 97 हजार रुपए, राजस्व विभागीय व्यय के लिए 20 करोड़ 62 लाख 64 हजार रुपए, पुनर्वास के लिए 2 करोड़ 94 लाख 50 हजार रुपए, प्राकृतिक आपदाओं एवं सूखाग्रस्त क्षेत्रों में राहत हेतु 1,272 करोड़ 99 लाख 2 हजार रुपए तथा उच्च शिक्षा विभाग के लिए 1,306 करोड़ 14 लाख 83 हजार रुपए शामिल हैं।      अनुदान मांगों पर चर्चा का जवाब देते हुए राजस्व मंत्री  टंकराम वर्मा ने कहा कि राज्य सरकार राजस्व प्रशासन को अधिक पारदर्शी, सरल और तकनीक आधारित बनाने की दिशा में लगातार काम कर रही है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग में 3,502 करोड़ रुपए का बजट प्रावधान किया गया है, ताकि नागरिकों को त्वरित और गुणवत्तापूर्ण सेवाएं मिल सकें।      राजस्व मंत्री  वर्मा ने बताया कि राज्य सरकार भूमि अभिलेखों के आधुनिकीकरण, डिजिटल सेवाओं के विस्तार और नागरिक सुविधाओं को सुदृढ़ करने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। डिजिटल ऋण पुस्तिका, भू-अभिलेखों का डिजिटलीकरण, ऑटो डायवर्जन तथा लोक सेवा गारंटी जैसी व्यवस्थाओं से राजस्व सेवाओं में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ी है l उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में भी सरकार पूरी तरह सजग है। बाढ़, सूखा, अतिवृष्टि और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित लोगों को त्वरित सहायता देने के लिए राहत और पुनर्वास व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। आधुनिक तकनीक और पूर्व चेतावनी प्रणाली के माध्यम से आपदाओं के प्रभाव को कम करने के प्रयास किए जा रहे हैं।       राजस्व प्रशासन में हुए प्रमुख बदलाव      मंत्री ने बताया कि प्रशासनिक पुनर्गठन के तहत राज्य में जिलों, तहसीलों और राजस्व ढांचे का विस्तार किया गया है। राज्य गठन के समय जहां 16 जिले थे, वहीं अब इनकी संख्या बढ़कर 33 हो गई है। इसी प्रकार राजस्व अनुविभाग, तहसील, राजस्व निरीक्षक मंडल और पटवारी हल्कों की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे प्रशासनिक कार्यों में तेजी आई है। ऑटो डायवर्सन और डिजिटल किसान किताब    मंत्री  वर्मा ने बताया कि सरकार ने भूमि उपयोग परिवर्तन की प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन करते हुए ऑटो डायवर्सन प्रणाली लागू की है, जिसके तहत आवेदन के 15 दिनों के भीतर भूमि का उपयोग परिवर्तन स्वतः हो जाता है। इससे नागरिकों को कार्यालयों के चक्कर लगाने से राहत मिली है। इसके साथ ही डिजिटल किसान किताब की सुविधा भी शुरू की गई है, जिससे किसानों को भूमि स्वामित्व, ऋण स्थिति और अन्य जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध हो रही है। इससे बैंक से फसल ऋण लेने में भी सुविधा मिल रही है। भूमिहीन मजदूरों को आर्थिक संबल       मंत्री ने बताया कि दीनदयाल उपाध्याय भूमिहीन कृषि मजदूर कल्याण योजना के तहत भूमिहीन खेतिहर मजदूरों और पारंपरिक ग्रामीण व्यवसाय से जुड़े परिवारों को प्रतिवर्ष 10 हजार रुपए की आर्थिक सहायता दी जा रही है। वर्ष 2025-26 में लगभग 4.96 लाख हितग्राहियों को लाभ देने के लिए 496 करोड़ रुपए स्वीकृत किए गए थे, जबकि वर्ष 2026-27 के लिए 605 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। आधुनिक तकनीक से कृषि निगरानी       राजस्व मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने उपहार (UPHAR) योजना के माध्यम से कृषि क्षेत्र की निगरानी और सलाहकारी प्रणाली विकसित करने का निर्णय लिया है। इसमें सैटेलाइट इमेजरी, रिमोट सेंसिंग और ड्रोन तकनीक के जरिए फसल क्षेत्र, उत्पादन अनुमान और आपदा से होने वाले नुकसान का आंकलन किया जाएगा। इस योजना के लिए 25 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। स्वामित्व योजना से ग्रामीणों को भूमि अधिकार    राजस्व मंत्री ने कहा कि स्वामित्व योजना के तहत ग्रामीण आबादी को भूमि का अधिकार देने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। राज्य में लगभग 10.50 लाख हितग्राहियों को अधिकार अभिलेख देने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें से अब तक 1.60 लाख लोगों को अधिकार पत्र वितरित किए जा चुके हैं। पंजीयन के साथ स्वतः नामांतरण      मंत्री ने बताया कि राज्य में जमीन की खरीदी-बिक्री के बाद स्वतः नामांतरण (ऑटो म्यूटेशन) की व्यवस्था लागू की गई है। पंजीयन होते ही जमीन का नामांतरण क्रेता के नाम पर स्वतः हो जाता है, जिससे नागरिकों को लंबी प्रक्रिया और परेशानियों से राहत मिली है।    आपदा प्रबंधन के लिए मजबूत प्रावधान           वर्मा ने बताया कि सरकार ने प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए वित्तीय प्रावधान भी किए हैं। वित्तीय वर्ष 2026-27 में राज्य आपदा मोचन निधि (SDRF) में 588 करोड़ रुपए, राष्ट्रीय आपदा मोचन निधि (NDRF) में 50 करोड़ रुपए तथा राज्य आपदा न्यूनीकरण निधि (SDMF) में 147 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।        मंत्री  वर्मा ने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य डिजिटल राजस्व प्रशासन, पारदर्शी व्यवस्था और प्रभावी आपदा प्रबंधन के माध्यम से नागरिकों को बेहतर सेवाएं प्रदान करना है।

कलेक्टर का बड़ा कदम: भोपाल में भू-जल स्तर गिरने पर नए नलकूप खनन पर प्रतिबंध, पूरे जिले को जल अभावग्रस्त घोषित

भोपाल  मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में लगातार गिरते भू-जल स्तर को देखते हुए जिला प्रशासन ने बड़ा फैसला लिया है। कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने मध्यप्रदेश पेयजल परिरक्षण अधिनियम 1986 के तहत आदेश जारी करते हुए पूरे भोपाल जिले को जल अभावग्रस्त क्षेत्र घोषित कर दिया है। इसके साथ ही जिले में नए निजी और अशासकीय नलकूपों के खनन पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया गया है। भू-जल के अत्यधिक दोहन से संकट गहराया लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के कार्यपालन यंत्री ने प्रशासन को जानकारी दी कि जिले में कृषि और व्यावसायिक गतिविधियों के लिए भू-जल स्रोतों का अत्यधिक उपयोग हो रहा है। इसके कारण नलकूपों और पेयजल स्रोतों का जल स्तर तेजी से गिरता जा रहा है। यदि यह स्थिति जारी रही तो आगामी गर्मियों में भोपाल जिले में गंभीर पेयजल संकट उत्पन्न होने की आशंका जताई गई है। बिना अनुमति नहीं हो सकेगा बोरिंग मशीन का प्रवेश जारी आदेश के अनुसार जिले की राजस्व सीमाओं में बिना अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) की अनुमति के कोई भी बोरिंग मशीन प्रवेश नहीं कर सकेगी और नए निजी नलकूपों का खनन नहीं किया जा सकेगा। हालांकि सार्वजनिक सड़कों से गुजरने वाली मशीनों को इस प्रावधान से छूट दी गई है। अवैध बोरिंग पर जब्ती और एफआईआर प्रशासन ने राजस्व और पुलिस अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि यदि कोई बोरिंग मशीन अवैध रूप से जिले में प्रवेश करती है या प्रतिबंधित स्थानों पर नलकूप खनन का प्रयास करती है तो उसे तुरंत जप्त किया जाए और संबंधित थाने में एफआईआर दर्ज की जाए। विशेष परिस्थितियों में मिल सकेगी अनुमति कलेक्टर ने सभी अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) को निर्देश दिया है कि यदि किसी क्षेत्र में अपरिहार्य परिस्थिति हो तो उचित जांच के बाद नलकूप खनन की अनुमति दी जा सकती है। आदेश उल्लंघन पर सख्त सजा आदेश का उल्लंघन करने पर मध्यप्रदेश पेयजल परिरक्षण अधिनियम 1986 के तहत दो हजार रुपये तक का जुर्माना, दो वर्ष तक का कारावास या दोनों का प्रावधान है। सरकारी योजनाओं पर नहीं लागू होगा प्रतिबंध यह आदेश सरकारी योजनाओं के तहत किए जाने वाले नलकूप खनन पर लागू नहीं होगा। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग आवश्यकतानुसार योजनाओं के अंतर्गत नलकूप खनन का कार्य जारी रख सकेगा। प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि आवश्यकता पड़ने पर निजी जल स्रोतों को सार्वजनिक पेयजल व्यवस्था के लिए अधिग्रहित किया जा सकता है।

महंगी गैस पर कांग्रेस का विरोध: खाली सिलिंडर लेकर किया प्रदर्शन, फूंका सरकार का पुतला

जयपुर देशभर में लोग एलपीजी गैस सिलिंडर की कमी से परेशान हैं। ईरान–इस्राइल युद्ध के कारण गैस की सप्लाई प्रभावित होने की चर्चा के बीच कई जगह गैस एजेंसियों पर लंबी लाइनें देखी जा रही हैं। इसी मुद्दे को लेकर राजस्थान में कांग्रेस ने विरोध प्रदर्शन किया। शुक्रवार को कांग्रेस ने पूरे राज्य के सभी जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन किया। इसी क्रम में जयपुर के चांदपोल इलाके में कांग्रेस कार्यकर्ता इकट्ठा हुए और सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने सरकार का पुतला भी जलाया। साथ ही गैस सिलिंडर की प्रतीकात्मक शवयात्रा भी निकाली गई।  अजमेर में चूल्हा जलाकर जताया विरोध अजमेर में भी रसोई गैस की कमी और बढ़ती कीमतों के विरोध में कांग्रेस ने जोरदार प्रदर्शन किया। शहर जिला कांग्रेस कमेटी के नेतृत्व में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता जिला कलेक्ट्रेट पहुंचे और भाजपा सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ता खाली गैस सिलिंडर ठेले पर रखकर कलेक्ट्रेट पहुंचे और उन्हें सड़क पर रखकर सरकार के खिलाफ विरोध जताया। वहीं महिला कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जिला कलेक्ट्रेट के बाहर चूल्हा जलाकर प्रतीकात्मक रूप से खाना बनाते हुए महंगाई और गैस सिलिंडर की किल्लत के खिलाफ प्रदर्शन किया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार से गैस सिलिंडर की कीमतों में कमी करने और आम लोगों को राहत देने की मांग की। इस मौके पर राजस्थान सरकार के पूर्व चिकित्सा मंत्री डॉ. रघु शर्मा ने कहा कि देश में महंगाई लगातार बढ़ती जा रही है और आम लोगों का जीवन कठिन होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि हालात ऐसे हो गए हैं कि लोगों को गैस सिलिंडर लेने के लिए लंबी लाइनों में खड़ा होना पड़ रहा है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि कोरोना काल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से थाली और ताली बजाने की अपील की थी, लेकिन अब जनता को गैस सिलिंडर के लिए फिर से लाइनों में लगना पड़ रहा है। यह सरकार की नीतियों की विफलता को दिखाता है। वहीं किशनगढ़ से कांग्रेस विधायक डॉ. विकास चौधरी ने भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी महंगाई कम करने का वादा करके सत्ता में आए थे, लेकिन इसके बावजूद महंगाई लगातार बढ़ती जा रही है। उन्होंने कहा कि आज आम आदमी की हालत बहुत खराब हो चुकी है और घरेलू गैस सिलिंडर के लिए भी लोगों को घंटों लाइन में खड़ा रहना पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार के पास महंगाई को नियंत्रित करने के लिए कोई ठोस नीति नहीं है, जिससे आम जनता को परेशानी हो रही है।   श्रीगंगानगर में भी जोरदार विरोध श्रीगंगानगर में भी गैस सिलिंडर की किल्लत और बढ़ती कीमतों के विरोध में कांग्रेस ने जिला कलेक्ट्रेट के बाहर प्रदर्शन किया। एनएसयूआई और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला फूंका। प्रदर्शन के दौरान महिलाएं और युवा कार्यकर्ता बैरिकेडिंग पर चढ़ गए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। कांग्रेस जिलाध्यक्ष रूपिंदर सिंह कुन्नर ने कहा कि 56 इंच की छाती वाले प्रधानमंत्री ने अमेरिका के सामने घुटने टेक दिए हैं। इसका नतीजा अब देश में गैस सिलिंडर की भारी कमी के रूप में सामने आ रहा है। उन्होंने कहा कि इस समय शादी-ब्याह का सीजन चल रहा है, लेकिन लोग गैस सिलिंडर के लिए परेशान हैं और गैस एजेंसियों के चक्कर काट रहे हैं। उनका आरोप है कि केंद्र सरकार की नीतियों के कारण देशभर में यह संकट पैदा हुआ है। जिलाध्यक्ष ने कहा कि यह प्रदर्शन सरकार को चेतावनी देने के लिए किया गया है। अगर जल्द ही राजस्थान और देश में गैस की कीमतों और किल्लत को कम नहीं किया गया तो कांग्रेस उग्र आंदोलन करेगी। प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए कलेक्ट्रेट के बाहर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। इस मौके पर एनएसयूआई के जिलाध्यक्ष ईशानवीर सिंह मान, पूर्व विधायक राजकुमार, सूरतगढ़ विधायक डूंगरराम गेदर सहित कई कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे।  

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