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ऑयल क्राइसिस से बचाव: पहाड़ी गुफाओं में सुरक्षित रखे गए भारत के रणनीतिक तेल भंडार

नईदिल्ली  मिडिल ईस्ट में ईरान युद्ध और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज जैसे अहम समुद्री रास्तों पर खतरे की खबरों के बीच पूरी दुनिया की नजर तेल सप्लाई पर टिक गई है. ऐसे में भारत को लेकर भी एक बड़ा सवाल उठ रहा है कि अगर वैश्विक सप्लाई अचानक रुक जाए तो देश कितने दिनों तक अपने भंडार के भरोसे चल सकता है. बहुत कम लोगों को पता है कि भारत ने इस तरह की आपात स्थिति के लिए बेहद खास इंतजाम कर रखे हैं. देश ने पहाड़ों की मजबूत चट्टानों के भीतर विशाल गुफाओं जैसी संरचनाओं में कच्चे तेल का भंडार छिपाकर रखा है. ये गुफाएं दरअसल भारत के स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व हैं. इन्हें युद्ध, आपदा या वैश्विक सप्लाई रुकने जैसी स्थिति में इस्तेमाल करने के लिए बनाया गया है. दरअसल इस पूरी योजना की शुरुआत अचानक नहीं हुई थी. इसकी कहानी 1991 के उस आर्थिक संकट से जुड़ी है जब गल्फ वॉर के दौरान भारत के सामने गंभीर ऊर्जा संकट खड़ा हो गया था. उस समय ऐसी खबरें सामने आई थीं कि देश के पास तेल का स्टॉक बेहद सीमित रह गया था. कुछ रिपोर्टों में कहा गया कि भारत के पास सिर्फ तीन दिनों का तेल बचा था, जबकि कुछ में इसे एक सप्ताह या दस दिन बताया गया. असल समस्या यह थी कि तेल खरीदने के लिए विदेशी मुद्रा भंडार तेजी से खत्म हो रहा था. उस संकट ने भारत को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना जरूरी है. 1991 के संकट ने क्यों बदली भारत की सोच     1991 के समय भारत के पास जो तेल स्टॉक था वह असल में तेल कंपनियों का कमर्शियल भंडार था. यानी वह रोजमर्रा की सप्लाई के लिए रखा जाता था. सरकार के पास अलग से ऐसा कोई रणनीतिक भंडार नहीं था जिसे सिर्फ आपात स्थिति में इस्तेमाल किया जा सके. हालांकि उस समय भी तेल कंपनियां सरकारी नियंत्रण में ही थीं, लेकिन फिर भी संकट के समय अलग से सुरक्षित रिजर्व होना जरूरी समझा गया.     दुनिया के कई बड़े देशों ने पहले से ही अपने स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) बना रखे थे. इनका मकसद यही होता है कि अगर युद्ध, वैश्विक संकट या प्राकृतिक आपदा की वजह से तेल सप्लाई रुक जाए तो देश कुछ समय तक अपने भंडार के सहारे चल सके. इसे ऐसे समझा जा सकता है जैसे पुराने स्कूटरों में पेट्रोल टैंक में एक रिजर्व सिस्टम होता था. जब टैंक का पेट्रोल खत्म हो जाता था तो रिजर्व खोलकर नजदीकी पेट्रोल पंप तक पहुंचा जा सकता था. उसी तरह यह सरकारी रिजर्व होता है जिसे सिर्फ संकट की स्थिति में ही खोला जाता है.     तेल कंपनियों के कमर्शियल भंडार आम तौर पर बड़े-बड़े तेल टैंकों या डिपो में रखे जाते हैं. लेकिन रणनीतिक भंडार के लिए ऐसी जगह चाहिए होती है जहां युद्ध या हमले का असर कम से कम हो. अगर कोई दुश्मन देश तेल डिपो को निशाना बना दे या किसी आपदा में डिपो नष्ट हो जाए तो संकट और बढ़ सकता है. इसलिए तय किया गया कि रणनीतिक भंडार जमीन के ऊपर नहीं बल्कि चट्टानों के भीतर बनाए जाएं.     इसके लिए कई भौगोलिक मानकों पर विचार किया गया. पहली शर्त थी कि वहां मजबूत चट्टानें हों, जिनमें बड़ी गुफाएं बनाई जा सकें. दूसरी शर्त यह थी कि उन चट्टानों से तेल रिसना नहीं चाहिए. तीसरी शर्त थी कि उस इलाके में भूकंप का खतरा कम हो. चौथी शर्त यह थी कि समुद्री बंदरगाह पास हो, ताकि जहाजों से तेल आसानी से लाया जा सके. और पांचवीं शर्त यह थी कि रिफाइनरी भी ज्यादा दूर न हो, ताकि पाइपलाइन से तेल पहुंचाया जा सके. भारत के पास तेल भंडारों की स्थिति:     भारत के पास करीब 5.33 मिलियन मीट्रिक टन क्षमता का स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) है.     यह भंडार आपात स्थिति में लगभग 9 से 10 दिनों की तेल जरूरत पूरी कर सकता है.     भारत ने ये रणनीतिक तेल भंडार पहाड़ों की चट्टानों के भीतर गुफाओं जैसी संरचनाओं में बनाए हैं.     देश में फिलहाल तीन प्रमुख स्थानों पर ये भंडार मौजूद हैं- विशाखापत्तनम, मंगलुरु और पडूर.     इन भंडारों का इस्तेमाल युद्ध, वैश्विक तेल संकट, प्राकृतिक आपदा या सप्लाई रुकने जैसी स्थिति में किया जाता है.     भारत सरकार इन्हें इंडियन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व लिमिटेड (ISPRL) के जरिए संचालित करती है.     भारत अब दूसरे चरण में ओडिशा के चंडीखोल और पडूर विस्तार के जरिए इस क्षमता को और बढ़ाने की योजना पर काम कर रहा है. पहले चरण में तीन जगहों पर कुल 5.33 मिलियन मीट्रिक टन क्षमता के भंडार बनाने का फैसला हुआ. भारत ने कहां बनाए रणनीतिक तेल भंडार     सभी मानकों को देखते हुए दक्षिण भारत के तटीय इलाकों को चुना गया. सरकार ने इस काम के लिए एक अलग कंपनी बनाई इंडियन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व लिमिटेड (ISPRL). इस कंपनी को जिम्मेदारी दी गई कि वह देश के लिए रणनीतिक तेल भंडार तैयार करे.     पहले चरण में तीन जगहों पर कुल 5.33 मिलियन मीट्रिक टन क्षमता के भंडार बनाने का फैसला हुआ. पहला भंडार आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में बनाया गया जिसकी क्षमता 1.33 मिलियन मीट्रिक टन है. दूसरा कर्नाटक के मंगलुरु में 1.5 मिलियन मीट्रिक टन का भंडार बनाया गया. तीसरा कर्नाटक के ही पडूर (उडुपी के पास) में 2.5 मिलियन मीट्रिक टन क्षमता का बनाया गया.     इन तीनों भंडारों को पहाड़ों की मजबूत चट्टानों के भीतर गुफाओं की तरह बनाया गया है. विशाखापत्तनम में ग्रेनाइट चट्टानों के भीतर सुरंग जैसी संरचनाएं बनाई गई हैं. यह स्थान इसलिए चुना गया क्योंकि यहां भूकंप का खतरा कम है और पास में बंदरगाह तथा HPCL की रिफाइनरी मौजूद है. यह भंडार 2015 में तैयार हुआ और इसमें इराक से लाकर तेल भरा गया.     मंगलुरु में बने भंडार को बसाल्ट चट्टानों के भीतर बनाया गया है. यह 2016 में तैयार हुआ और इसमें अबू धाबी से तेल लाकर रखा गया. तीसरा भंडार पडूर में बनाया गया जो 2018 में पूरा हुआ. यहां भी बसाल्ट … Read more

MP शिक्षा विभाग का बड़ा कदम, 800 प्रोफेसरों का डिमोशन, संस्थानों में भारी प्रतिक्रिया

भोपाल  उच्च शिक्षा विभाग की ओर से सहायक प्राध्यापकों (असिस्टेंट प्रोफेसर) की अंतरिम वरिष्ठता सूची जारी करते ही प्रदेश के कॉलेज प्रोफेसरों में हड़कंप मच गया है। विभाग ने यह सूची 1 अप्रैल 2012 की स्थिति के आधार पर विषयवार प्रकाशित की है। सूची जारी होने के बाद सामने आया कि इसमें करीब 800 ऐसे प्रोफेसरों के नाम असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में दर्ज कर दिए गए क है, जिन्हें वर्ष 2006, 2007 और 2009 में ही प्रोफेसर का पदनाम दिया जा चुका था। सूची में सामने आई गड़बड़ियां वरिष्ठता सूची के अनुसार ये सभी नाम सहायक प्राध्यापक की श्रेणी में दिखाए गए हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि इनमें से कई शिक्षकों को वर्षों पहले प्रोफेसर का पदनाम मिल चुका है। इतना ही नहीं, इन प्रोफेसरों में से कई वर्तमान में उच्च पदों पर भी कार्यरत है। कुछ लोग अतिरिक्त संचालक (एडी), विश्वविद्यालयों में रजिस्ट्रार और यहां तक कि कुलपति जैसे पदों पर भी जिम्मेदारी संभाल चुके है। 15 दिनों के भीतर दर्ज करा सकते है आपत्ति विभाग ने सूची जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि यह लोक सेवकों की अंतरिम वरिष्ठता सूची है। यदि किसी को इसमें त्रुटि या आपत्ति है तो वह प्रकाशन की तारीख से 15 दिनों के भीतर अपने दावे-आपत्तियों के साथ अभ्यावेदन उचित माध्यम से आयुक्त, उच्च शिक्षा, मध्यप्रदेश को भेज सकता है। निर्धारित समय सीमा के बाद प्राप्त होने वाले अभ्यावेदनों पर विचार नहीं किया जाएगा। तालमेल की कमी- प्रांताध्यक्ष विभाग और राज्य शासन के बीच तालमेल की कमी है। इस तरह की स्थिति कई मामलों में बनती है। यह स्थिति ठीक नहीं है। यह कोर्ट केस की स्थिति बनती है तो इससे न्यायलय में शासन का पक्ष कमजोर होगा।- डॉ. आनंद शर्मा, प्रांताध्यक्ष, प्रांतीय शासकीय महाविद्यालयीन प्राध्यापक 

भवानी चौक पर 14 मार्च को कवि सम्मेलन, रात 8 बजे से रंगीन कार्यक्रम में होंगे हास्य और व्यंग्य के प्रदर्शन

भोपाल  होली और रंगपंचमी के उत्सव के बीच राजधानी में साहित्यिक रंग भी घुलेंगे। शहर के सोमवारा स्थित भवानी चौक में 14 मार्च शनिवार को अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा। रात 8 बजे से शुरू होने वाले इस कार्यक्रम में देश के विभिन्न शहरों से आए कवि अपनी रचनाओं के माध्यम से श्रोताओं को वीर रस, हास्य और व्यंग्य की प्रस्तुतियां सुनाएंगे। कार्यक्रम का आयोजन हिंदू उत्सव समिति भोपाल द्वारा किया जा रहा है। समिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने बताया कि होली और रंगपंचमी केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और साहित्यिक अभिव्यक्ति का भी उत्सव है। इसी परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए हर वर्ष की तरह इस बार भी कवि सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। ये कवि पहुंचेंगे भोपाल कवि सम्मेलन का संचालन सबरस कवि शशिकांत यादव ‘शशि’ (देवास) करेंगे। मंच पर कविता तिवारी (लखनऊ), राम भदावर (जयपुर) और सूर्यकांत चतुर्वेदी (भोपाल) वीर रस की रचनाएं प्रस्तुत करेंगे। वहीं हास्य और व्यंग्य की प्रस्तुति से दिनेश ‘देसी घी’ (शाजापुर), मुन्ना बैट्री (मंदसौर) और अमित शुक्ला (प्रयागराज) माहौल को हल्का और रोचक बनाएंगे। कार्यक्रम के संयोजक हिंदू उत्सव समिति के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अनिल चौधरी होंगे, जो आयोजन की व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी संभालेंगे। समिति ने शहर के साहित्य प्रेमियों और नागरिकों से कार्यक्रम में शामिल होकर कवि सम्मेलन का आनंद लेने की अपील की है।

PWD की योजना: MP में 3 नई सड़कें और 50 अतिक्रमणों पर कड़ा एक्शन

ग्वालियर शहर और आसपास के क्षेत्रों में यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने तीन महत्वपूर्ण सड़कों के निर्माण की तैयारी पूरी कर ली है। कुल 5.80 किलोमीटर लंबाई वाली इन सड़कों पर करीब 7 करोड़ 17 लाख रुपए की लागत आएगी। टेंडर प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और अप्रैल माह से निर्माण कार्य शुरू होने की संभावना है। पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों के अनुसार ये सड़कें मास्टर प्लान के तहत विकसित की जा रही हैं। निर्माण कार्य के दौरान सडक़ों पर मौजूद करीब 50 अतिक्रमणों को चिह्नित कर हटाया जाएगा, जिससे सड़कें चौड़ी और सुरक्षित बन सकें। ये हैं प्रस्तावित तीन सड़कें नयागांव रायरू बायपास से रेडियो रूम तक लंबाई: 0.50 किमी अनुमानित लागत: 104.95 लाख रुपए सिकरवार मार्केट से पुरानी छावनी चौराहा मार्ग (नाला निर्माण सहित) लंबाई: 1.30 किमी अनुमानित लागत: 232.95 लाख रुपए रायरू गांव से बॉडन का पुरा होते हुए जोर वाले बाबा गंगापुर वाया प्यारा सिंह का पुरा तक लंबाई: 4.00 किमी अनुमानित लागत: 362.55 लाख रुपए कुल लंबाई 5.80 किमी और कुल अनुमानित लागत 7.17 करोड़ रुपए है। यातायात और जल निकासी में सुधार इन सड़कों के निर्माण से स्थानीय निवासियों को आवागमन में बड़ी राहत मिलेगी। व्यापारिक गतिविधियों, स्कूल-कॉलेज और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच आसान होगी। विशेष रूप से सिकरवार मार्केट से पुरानी छावनी मार्ग पर नाला निर्माण से जल निकासी की समस्या भी दूर होगी। 5.80 किमी लंबाई वाली तीन सड़कों को सात करोड़ से ज्यादा की लागत से बनाया जाएगा। अभी सड़कों को लेकर टेंडर लगाए जा चुके हैं, टेंडर ओपन होते ही अप्रैल से निर्माण कार्य शुरू होगा। – देवेंद्र भदौरिया, कार्यपालन यंत्री पीडब्ल्यूडी  

सीएम युवा योजना का असर: ऑयल मिल शुरू कर वंदना बनी ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा

सीएम युवा योजना से बदली वंदना की किस्मत, ऑयल मिल शुरू कर बनीं आत्मनिर्भर  स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर, आसपास के गांवों में हो रही उत्पाद की आपूर्ति योजना के पहले चरण में पात्र युवाओं को दिया जाता है 5 लाख रुपये तक का ब्याजमुक्त ऋण  लखनऊ उत्तर प्रदेश में ‘मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान’ के माध्यम से योगी आदित्यनाथ सरकार युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित कर रही है। इस योजना का लाभ उठाकर कई महिलाएं आत्मनिर्भर बनने की दिशा में कदम बढ़ा रहीं हैं। ऐसी ही एक मिसाल है यूपी की राजधानी लखनऊ के मोहनलालगंज की वंदना यादव की, जिन्होंने इस योजना के तहत ऋण लेकर अपनी ऑयल मिल स्थापित की और आज अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गईं हैं। सीएम युवा योजना से मिली वित्तीय सहायता, शुरु की ऑयल मिल  वंदना यादव बताती हैं कि उन्होंने राज्य सरकार की सीएम युवा योजना के तहत ऋण प्राप्त कर अपने उद्यम की शुरुआत की। उन्हें इस योजना के माध्यम से वित्तीय सहायता के साथ आवश्यक मार्गदर्शन भी मिला। उन्होंने बैंक ऑफ इंडिया से ऋण लेकर अपने पति के साथ मिलकर ऑयल मिल की स्थापना की। यहां सरसों के शुद्ध तेल का उत्पादन किया जा रहा है और उन्होंने अपने उत्पाद का एक ब्रांड भी लॉन्च किया है। मोहनलालगंज के गांव मजरा खुजेहटा में वंदना ने ऑयल मिल लगाई और वर्तमान में इससे तैयार सरसों का तेल आसपास के कई गांवों और जिलों में पहुंच रहा है। इस उद्यम के जरिए उन्होंने न केवल खुद को आत्मनिर्भर बनाया है, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित किए हैं। उनके इस प्रयास से क्षेत्र की अन्य महिलाओं को भी स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिल रही है। योगी सरकार की योजनाओं से महिला उद्यमिता को मिल रही नई पहचान मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान के तहत 21 से 40 वर्ष की आयु के युवाओं को अपना व्यवसाय शुरू करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। योजना के पहले चरण में पात्र युवाओं को 5 लाख रुपये तक का ब्याजमुक्त ऋण दिया जाता है। समय पर ऋण चुकाने पर दूसरे चरण में 10 लाख रुपये तक के ऋण की व्यवस्था भी की गई है। राज्य सरकार का लक्ष्य हर वर्ष एक लाख नए उद्यमी तैयार करना है।

पहले चरण में सीमित संचालन, एक रनवे से उड़ान भरेगा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट

पहले चरण में एक रनवे के साथ संचालित होगा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट सालाना 1.20 करोड़ यात्रियों की क्षमता होगी, पहले चरण में प्रतिदिन औसतन 150 उड़ानें संचालित होंगी  लखनऊ गौतमबुद्ध नगर जिले के जेवर क्षेत्र में बन रहा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तेजी से अपने संचालन की ओर बढ़ रहा है। प्रदेश सरकार की इस महत्वाकांक्षी परियोजना में पहले चरण का करीब 95 प्रतिशत निर्माण कार्य संपन्न हो गया है। शेष कार्य 10 नवंबर तक पूरा कर लिया जाएगा। पहले चरण में एयरपोर्ट एक रनवे के साथ संचालित होगा और इसकी वार्षिक यात्री क्षमता 1 करोड़ 20 लाख यात्रियों की होगी। औसतन प्रतिदिन करीब 150 उड़ानों के संचालन का अनुमान लगाया गया है। अधिकारियों के अनुसार, जैसे ही यात्रियों की संख्या एक करोड़ को पार करेगी, एयरपोर्ट पर दूसरे रनवे के निर्माण की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। दो रनवे के साथ यह एयरपोर्ट करीब 7 करोड़ यात्रियों को सेवा देने में सक्षम होगा। जेवर एयरपोर्ट के पहले चरण में लगभग 3,300 एकड़ क्षेत्र में विकसित किए जा रहे हिस्से का लोकार्पण किया जाएगा। परियोजना के लिए कुल 6,700 एकड़ भूमि का अधिग्रहण पहले ही किया जा चुका है, जबकि शेष 5,100 एकड़ भूमि अगले तीन महीनों में अधिग्रहित किए जाने की योजना है। एयरपोर्ट के लिए भूमि खरीद पर लगभग 5000 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं, जबकि निर्माण कार्य पर करीब 7000 करोड़ रुपये की लागत आ रही है। जेवर एयरपोर्ट को देश के सबसे बड़े और आधुनिक हवाई अड्डे के रूप में विकसित करने की योजना है। परियोजना के पूर्ण होने पर इस एयरपोर्ट पर कुल पांच रनवे होंगे और इसका कुल क्षेत्रफल लगभग 11,750 एकड़ तक पहुंच जाएगा। अंतिम रूप से तैयार होने के बाद एयरपोर्ट की वार्षिक यात्री क्षमता 30 करोड़ यात्रियों तक पहुंचने का अनुमान है, जिससे यह दुनिया के सबसे बड़े हवाई अड्डों में शामिल हो सकता है। परियोजना के साथ क्षेत्र में व्यापक आर्थिक और औद्योगिक विकास की भी उम्मीद जताई जा रही है। एयरपोर्ट के आसपास लॉजिस्टिक्स, पर्यटन, व्यापार और औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही बड़ी संख्या में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। प्रदेश सरकार का मानना है कि जेवर एयरपोर्ट दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए एक महत्वपूर्ण परिवहन केंद्र के रूप में उभरेगा। इसके संचालन से क्षेत्रीय कनेक्टिविटी मजबूत होगी और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए एक नया विकल्प उपलब्ध होगा। विशेषज्ञों के अनुसार जेवर एयरपोर्ट के शुरू होने से दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर बढ़ते दबाव को भी काफी हद तक कम किया जा सकेगा। साथ ही यह परियोजना उत्तर प्रदेश को वैश्विक निवेश और व्यापार के नक्शे पर और मजबूती से स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

देश में LPG का हाल: डेढ़ करोड़ घरों में PNG कनेक्शन, हर घर में मिलेगा दो सिलेंडर

नई दिल्ली युद्ध की वजह से कई देशों में तेल और गैस की किल्लतें बढ़ती जा रही हैं. भारत संकट से पहले अलर्ट हो गया है, और जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं. सरकार का कहना है कि देश के लोग घबराएं, फिलहाल तेल और गैस को लेकर कोई संकट नहीं है। दरअसल, 140 करोड़ आबादी वाले देश भारत तेल और रसोई गैस के लिए काफी हदतक दूसरे देशों पर निर्भर है. यानी सीधा रसोई से जुड़ा हुआ मामला है, गैस की किल्लत की खबर से लोग परेशान हैं. लेकिन खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हालात पर नजर बनाए हुए हैं, और जरूरी आदेश दे रहे हैं, ताकि देश में रसोई गैस की कोई किल्लत न हो। केंद्र सरकार के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अनुसार देश में करीब 33 करोड़ घरेलू LPG कनेक्शन हैं. अधिकतर घरों में दो सिलेंडर होते हैं, इस हिसाब से देश में LPG सिलेंडर कुल संख्या करीब 66 करोड़ तक हो सकती है. इनमें से बड़ी संख्या प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत दिए गए कनेक्शनों की है, जिससे ग्रामीण और गरीब परिवारों तक भी रसोई गैस की पहुंच बढ़ी है. इसके अलावा देश में कमर्शियल सिलेंडर की संख्या भी करोड़ों में है।  देश में 33 करोड़ गैस कनेक्शन  सरकारी आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2014 में देश में LPG कनेक्शनों की संख्या लगभग 14.5 करोड़ थी. पिछले 10 वर्षों में यह संख्या करीब दोगुनी होकर 33 करोड़ तक पहुंच गई है. प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत करीब 10.4 करोड़ गरीब परिवारों को मुफ्त या सब्सिडी वाले LPG कनेक्शन दिए गए हैं. गांव-गांव तक रसोई गैस की उपलब्धता बढ़ाने के लिए देशभर में गैस एजेंसियों और डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क का भी तेजी से विस्तार किया गया है. दूसरी ओर, शहरों में पाइप के जरिए घरों तक गैस पहुंचाने की व्यवस्था यानी PNG (पाइप्ड नेचुरल गैस) भी धीरे-धीरे बढ़ रही है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार फिलहाल देश में करीब 1.5 करोड़ घरों में PNG कनेक्शन उपलब्ध हैं. यह सुविधा मुख्य रूप से महानगरों और बड़े शहरों में उपलब्ध है,  जहां सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क के जरिए घरों तक पाइपलाइन से गैस पहुंचाई जाती है.  PNG नेटवर्क का इस्तेमाल केवल घरों तक ही सीमित नहीं है. इसके अलावा देशभर में करीब 45 हजार से ज्यादा कमर्शियल प्रतिष्ठान, जैसे होटल और रेस्टोरेंट, 20 हजार से ज्यादा उद्योग भी पाइप गैस का इस्तेमाल कर रहे हैं. इससे ऊर्जा आपूर्ति अधिक सुविधाजनक और सुरक्षित मानी जाती है, क्योंकि इसमें सिलेंडर की जरूरत नहीं होती है.  PNG की सप्लाई बड़े शहरों में  यही नहीं, सरकार आने वाले वर्षों में PNG नेटवर्क का और विस्तार करने की योजना बना रही है. पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन परियोजनाओं के माध्यम से 2032 तक करीब 12.5 करोड़ घरों तक PNG पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है. इसके लिए देश के कई नए शहरों और जिलों में गैस पाइपलाइन बिछाने का काम जारी है.  हालांकि फिलहाल भारत में रसोई गैस की जरूरतों का बड़ा हिस्सा LPG सिलेंडरों के जरिए ही पूरा होता है, क्योंकि PNG नेटवर्क अभी सीमित शहरों तक ही पहुंच पाया है. भारत में साल 2025 के आसपास लगभग 31–33 मिलियन मीट्रिक टन LPG की खपत हुई. इस हिसाब से लगभग 85 हजार टन LPG की रोजाना खपत होती है. जबकि भारत की कुल प्राकृतिक गैस खपत लगभग 188 मिलियन स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर प्रतिदिन (MMSCMD) के आसपास है.  इसके अलावा सरकारी आंकड़ों के मुताबिक भारत के पास करीब 8 हफ्ते का तेल भंडार उपलब्ध है. भारत के तेल आयात का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आता है और इसका एक महत्वपूर्ण भाग होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते से गुजरता है. जिस वजह से वैश्विक स्तर पर संकट दिख रहा है.  बता दें, भारत ने जोखिम कम करने के लिए पिछले कुछ वर्षों में अपनी रणनीति बदली है. देश ने रूस, अमेरिका और अफ्रीकी देशों से भी कच्चे तेल की खरीद बढ़ाई है. लेकिन अगर वैश्विक स्तर पर लंबे समय तक तेल संकट बना रहता है तो इससे पेट्रोल-डीजल की कीमतों, महंगाई और देश के आयात बिल पर दबाव बढ़ सकता है. इस बीच राहत की बात ये है कि कच्चे तेल की कीमतों में लगातार गिरावट देखी जा रही है. ब्रेंट क्रूड की कीमत सोमवार की हाई 120 डॉलर प्रति बैरल से फिसलकर 90 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है.

रसोई गैस संकट LIVE: सिलेंडर की किल्लत, ब्लैक मार्केट में कीमत 300 रुपये प्रति किलो तक पहुंची

नई दिल्ली अमेरिका और इजरायल के खिलाफ ईरान की जंग का असर भारत के करोड़ों लोगों पर पड़ता दिख रहा है. पश्चिम एशिया में जारी इस युद्ध के बीच उत्तर प्रदेश, बिहार से लेकर तेलंगाना और तमिलनाडु तक लाखों लोग एलपीजी सिलेंडर की किल्लत से जूझ रहे हैं. एलपीजी सप्लाई बंद होने जयपुर स्थित बोरोसिल के कारखाने में काम बंद करना पड़ा और कंपनी प्रबंधन ने करीब तीन हजार श्रमिकों को बुधवार से काम पर नहीं आने के लिए कह दिया है. वहीं दिल्ली हाईकोर्ट की लॉयर्स कैंटीन में एलपीजी गैस सिलेंडर उपलब्ध न होने के कारण फिलहाल मुख्य भोजन (मेन कोर्स) तैयार और परोसा नहीं जा रहा है। बिहार सहित कई राज्यों में कमर्शियल गैस सिलेंडरों की सप्लाई रोक दी गई है. वहीं पटना से लेकर अयोध्या तक कई लोग सुबह ही गैस एजेंसी के गोदाम के बाहर लाइन लगाकर खड़े हैं. कई लोगों की शिकायत है कि गैस सिलेंडर की बुकिंग करवाने के बावजूद 4-5 दिनों तक एलपीजी सिलेंडर उन्हें नहीं मिल पाई है। रसोई गैस की सप्लाई में दिक्कत की खबरों के सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. पूरे देश में केंद्र सरकार ने ईसीए यानी एसेंशियल कमोडिटी एक्ट लागू कर दिया है. केंद्र सरकार ने एलपीजी और सीएनजी की आपूर्ति तय करने के लिए बड़ा फैसला लिया है. सरकार के मुताबिक, आवश्यक सेवाओं को प्राथमिकता दी जाएगी और कुछ उद्योगों को सीमित गैस आपूर्ति मिलेगी। प्रधानमंत्री मोदी ने भी कैबिनेट मीटिंग में मंत्रियों को साफ निर्देश दिए कि पश्चिम एशिया में जारी संकट का असर आम आदमी पर बिल्कुल नहीं पड़ना चाहिए. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इस वैश्विक उथल-पुथल के समय जनता का भरोसा बनाए रखना सबसे ज़रूरी है. प्रधानमंत्री ने मंत्रियों से कहा कि तेल की क़ीमतें स्थिर हैं, ये बात लोगों तक पहुंचाएं और ये भी बताएं कि देश में तेल का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है. प्रधानमंत्री ने ये भी कहा कि भारत ने सप्लाई चेन मैनेजमेंट सिस्टम इस संकट को ध्यान में रखकर तैयार किया है, इसे भी जनता तक पहुंचाया जाए। भारत सरकार ने दावा किया है कि इस जंग का तेल की कीमतों पर कोई असर नहीं पड़ेगा और देश में घरेलू उपभोक्ता के लिए गैस की कोई कमी नहीं है. सरकार की तरफ से बताया गया कि भारत में फ़िलहाल पेट्रोल और डीज़ल के दाम स्थिर ही रहेंगे वो नहीं बढ़ेंगे. वहीं गैस क़ीमतों में हुआ 60 रुपये का इजाफा मौजूदा हालत की वजह से नहीं, बल्कि पिछले साल की अंडरकवरी की वजह से बढ़े हैं। दरअसल इजरायल और अमेरिका के खिलाफ ईरान की जंग के चलते मिडिल ईस्ट के प्रमुख ऊर्जा परिवहन मार्गों में आई बाधाओं के चलते पिछले एलपीजी सिलेंडरों की कीमतों में शनिवार को ही इजाफा किया गया था. घरेलू एलपीजी सिलेंडरों की कीमत में 60 रुपये और कमर्शियल रसोई गैस सिलेंडरों की कीमत में 115 रुपये की बढ़ोतरी की गई। न रसोई गैस की बुकिंग हो रही, न एलपीजी सिलेंडर मिल रहा… ब्लैक मार्केट में 300 रुपये किलो पहुंचा दाम एलपीजी गैस सिलेंडर की किल्लत से देशभर के लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. नोएडा के रहने वाले लोगों का कहना है कि पिछले 5-6 दिनों से ऑनलाइन गैस बुकिंग नहीं हो पा रही है. जब लोग गैस एजेंसी से संपर्क करते हैं तो उन्हें बताया जाता है कि सिस्टम में तकनीकी खराबी है. वहीं एजेंसी पर जाकर पूछने पर भी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी जा रही है. गैस बुक कराने के लिए लोगों को घंटों लाइन में लगना पड़ रहा है, लेकिन इसके बाद भी सिलेंडर मिलने की कोई गारंटी नहीं है। गैस बुकिंग में दिक्कत के चलते लोगों को ब्लैक में गैस खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है. स्थानीय लोगों का आरोप है कि एक किलो गैस के लिए 300 से 400 रुपये तक देने पड़ रहे हैं. गैस बुकिंग कराने आई महिलाओं ने बताया कि एजेंसी वाले उनका नंबर लिखकर बाद में फोन करने की बात कहते हैं, लेकिन कई दिनों बाद भी न तो फोन आता है और न ही गैस मिलती है. लोगों का कहना है कि एजेंसी के बाहर कहा जा रहा है कि गैस उपलब्ध नहीं है, जबकि इलाके में ब्लैक में गैस बेची जा रही है। एक महिला ने नाराजगी जताते हुए कहा कि वे दिल्ली-नोएडा कमाने आए हैं, भूखे रहने के लिए नहीं. अगर सारी कमाई गैस खरीदने में ही खर्च हो जाएगी तो परिवार का गुजारा कैसे होगा. गैस की कमी के कारण कई परिवारों को मजबूरन बाहर से खाना खरीदकर गुजारा करना पड़ रहा है. रसोई गैस हुई खत्म तो इंडक्शन खरीदने भागे लोग, दुकानों पर भीड़ रसोई गैस संकट की खबरों के बीच अब इलेक्ट्रिकल शॉप्स पर इंडक्शन की मांग में इजाफा देखने को मिल रहा है. दिल्ली के दरियागंज की एक इलेक्ट्रिकल शॉप्स के मालिक विकास ने बताया कि पिछले दो तीन दिन से इंडक्शन की मांग और इंक्वायरी बढ़ गई है. इंडक्शन खरीदने आए एक ग्राहक मोहम्मद शफी ने बताया कि गैस की दिक्कत है इसलिए खरीद रहे हैं. गैस की बुकिंग नहीं हो पा रही है. फिलहाल के लिए गैस है, लेकिन सेफ साइड के लिए ले रहे हैं, अगर नहीं मिली तो इंडक्शन रहे।  दिल्ली हाईकोर्ट की कैंटीन में एलपीजी खत्म, मेन कोर्स हुआ बंद दिल्ली हाईकोर्ट की लॉयर्स कैंटीन में एलपीजी गैस सिलेंडर उपलब्ध न होने के कारण फिलहाल मुख्य भोजन (मेन कोर्स) तैयार और परोसा नहीं जा रहा है. कैंटीन प्रबंधन की ओर से जारी सूचना के अनुसार, वर्तमान में एलपीजी गैस सिलेंडर उपलब्ध नहीं है, जिसके चलते मुख्य भोजन की तैयारी संभव नहीं हो पा रही है. गैस सप्लाई कब तक बहाल होगी, इसकी अभी कोई जानकारी नहीं है. गैस उपलब्ध होते ही मुख्य भोजन की तैयारी फिर से शुरू कर दी जाएगी. हालांकि इस दौरान सैंडविच, सलाद, फ्रूट चाट और अन्य हल्के नाश्ते उपलब्ध रहेंगे और इन्हें परोसा जाता रहेगा। एलपीजी सप्लाई बंद होने जयपुर का बोरोसिल प्लांट ठप, 3000 मजदूरों की कर दी गई छुट्टी अमेरिका-इजरायल के साथ ईरान की जंग का असर अब भारत के उद्योगों पर भी दिखने लगा है. जयपुर के गोविंदगढ़ क्षेत्र में स्थित बोरोसिल लिमिटेड की फैक्ट्री में एलपीजी गैस की … Read more

सरकार का कदम: संपत्ति रजिस्ट्री का खर्च सरकार देगी, योजनाओं के फीडबैक के लिए हजारों युवाओं को लगाया मैदान में

भोपाल  मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में 33,000 करोड़ रुपए से अधिक की विभिन्न विभागों की योजनाओं को निरंतरता दी गई। इस बड़े वित्तीय आवंटन के माध्यम से प्रदेश में जारी विकास कार्यों और जन-कल्याणकारी योजनाओं को निर्बाध रूप से जारी रखने का मार्ग प्रशस्त हुआ है। सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चैतन्य काश्यप ने जानकारी देते हुए बताया कि राज्य सरकार भूमि स्वामित्व योजना के तहत 46 लाख लोगों की संपत्ति रजिस्ट्री का स्टांप शुल्क खुद वहन करेगी, जिससे सरकार पर करीब 3000 करोड़ रुपए का अतिरिक्त खर्च आएगा। कैबिनेट ने प्रदेश में योजनाओं के जमीनी फीडबैक के लिए सीएम यंग इंटर्न्स फॉर गुड गवर्नेंस प्रोग्राम शुरू करने का फैसला भी किया है। यह कार्यक्रम तीन साल तक चलेगा। इसके लिए हर विकास खंड से 15 युवाओं का चयन किया जाएगा। चयन प्रक्रिया अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण स्कूल के माध्यम से होगी। कार्यक्रम तीन साल तक चलेगा     हर विकासखंड से 15 युवाओं का चयन होगा     कुल 4865 युवाओं की नियुक्ति होगी     युवाओं को 10 हजार रुपए मासिक मानदेय मिलेगा एक साल के अनुबंध पर नियुक्ति होगी इन युवाओं की जिम्मेदारी अपने विकासखंड में संचालित योजनाओं का फीडबैक और जमीनी रिपोर्ट तैयार करना होगी। यह रिपोर्ट सीधे सुशासन एवं नीति विश्लेषण स्कूल के माध्यम से मुख्यमंत्री और संबंधित विभागों तक पहुंचेगी। इस कार्यक्रम पर करीब 170 करोड़ रुपए खर्च होंगे। भूमि स्वामित्व योजना क्या है     भूमि स्वामित्व योजना की शुरुआत केंद्रीय पंचायती राज मंत्रालय ने 2020 में की थी।     ड्रोन सर्वे के जरिए गांवों की जमीन का सीमांकन किया जाता है।     ग्रामीणों को प्रॉपर्टी कार्ड (स्वामित्व कार्ड) दिए जाते हैं।     इससे भूमि विवाद कम होते हैं।     बैंक से लोन लेना आसान होता है। अनुबंध पर रखे जाएंगे युवा चयनित युवाओं को 10 हजार रुपए मासिक मानदेय दिया जाएगा और एक साल के अनुबंध पर सेवा में रखा जाएगा। कुल 4865 युवाओं का चयन होगा और इस कार्यक्रम पर तीन साल में करीब 170 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इन युवाओं की जिम्मेदारी अपने विकासखंड में संचालित योजनाओं की जमीनी स्थिति और फीडबैक की रिपोर्ट तैयार करना होगी। यह रिपोर्ट सीधे सुशासन स्कूल के माध्यम से मुख्यमंत्री और संबंधित विभागों तक पहुंचेगी। इसके लिए डैशबोर्ड और पोर्टल भी विकसित किया जाएगा। रजिस्ट्री का खर्च उठाएगी सरकार भूमि स्वामित्व योजना में प्रदेश के करीब 46 लाख ग्रामीण नागरिकों को जमीन का स्वामित्व मिलेगा। इस योजना की शुरुआत केंद्रीय पंचायती राज मंत्रालय ने वर्ष 2020 में की थी। ड्रोन तकनीक के माध्यम से ग्रामीण आबादी की जमीन का सीमांकन कर प्रॉपर्टी कार्ड (कानूनी स्वामित्व कार्ड) दिए जाते हैं, जिससे भूमि विवाद कम होते हैं और बैंक से ऋण लेना भी आसान होता है। सात विभागों की योजनाएं 2031 तक जारी कैबिनेट ने ऊर्जा, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, योजना-आर्थिक एवं सांख्यिकी, जनजातीय कार्य और महिला-बाल विकास सहित सात विभागों की योजनाओं को 2031 तक जारी रखने के लिए 33,240 करोड़ रुपए की मंजूरी दी है। इसमें महिला आयोग, बाल संरक्षण आयोग, छात्रवृत्ति योजनाएं, आरडीएसएस, दिव्यांगों के लिए प्रोफेशनल टैक्स में छूट और स्टार्टअप के लिए 600 करोड़ रुपए का प्रावधान शामिल है। स्वास्थ्य केंद्रों में 51 पदों पर भर्ती मंत्री काश्यप ने बताया कि मैहर, निमरानी और कैमोर में पीएफआईसी के तहत अस्पतालों के लिए स्टाफ भर्ती की जाएगी। श्रम विभाग के माध्यम से डॉक्टर और अन्य कर्मचारियों सहित कुल 51 पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी। इसके अलावा चितरंगी में व्यवहार न्यायाधीश के पद को भी कैबिनेट ने मंजूरी दी है। एक जिला-एक उत्पाद को मिलेगा बढ़ावा राज्य सरकार ने एक जिला-एक उत्पाद योजना के तहत स्थानीय उत्पादों की ब्रांडिंग के लिए 37.50 करोड़ रुपए की डीपीआर तैयार की है। इस योजना में एमएसएमई, उद्योग, कुटीर एवं ग्रामोद्योग विभाग संयुक्त कार्ययोजना के तहत काम करेंगे।                          

MP में नया फोरलेन मार्ग: 50 से ज्यादा गांवों से गुजरेगा, PM मोदी ने दी हरी झंडी

भोपाल  मोदी कैबिनेट ने मध्यप्रदेश को बड़ी सौगात दी है। मोदी कैबिनेट की बैठक में बदनावर-पेटलावाद-थंदला-तिमारवानी खंड से 80.45 किलोमीटर लंबे चार लेन के कॉरिडोर के विकास को मंजूरी दे दी है, जिसकी कुल पूंजी लागत 3,839.42 करोड़ रुपये है। स्वीकृत कॉरिडोर उज्जैन को दिल्ली मुंबई एक्सप्रेसवे (डीएमई) पर तिमारवानी इंटरचेंज से जोड़ेगा। इस खंड को अपग्रेड करने से उज्जैन से दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे (डीएमई) पर तिमारवानी इंटरचेंज तक सीधी 4-लेन कनेक्टिविटी पूरी हो जाएगी, जिस पर गति 80-100 किमी प्रति घंटा होगी। 50 गांवों से होकर 80 किमी लंबा फोरलेन बदनावर से पेटलावद व्हाया टिमरवानी इंटरचेंज नया फोरलेन 80.45 किमी लंबा है। इसके लिए केंद्र सरकार द्वारा 3839.42 करोड़ रुपए की मंजूरी दी है। संभावना जताई जा रही है कि अगले दो साल में इस प्रोजेक्ट का काम पूरा होगा। शासन-प्रशासन स्तर पर तैयारियां चल रही है। यह फोरलेन करीब 50 से अधिक गांवों से होकर गुजरेगा। जिनमें बदनावर क्षेत्र के 14 गांव भी शामिल हैं। इस फोरलेन रोड के बनने के बाद यात्रा का समय करीब एक घंटे तक कम होने की उम्मीद है। प्रशासनिक सर्वे पूरा, जल्द अवॉर्ड मिलेगा बदनावर से पेटलावद व्हाया टिमरवानी इंटरचेंज फोरलेन निर्माण में कई जगह सरकारी जमीन के साथ ही निजी जमीन का उपयोग होना है। इसके लिए सभी सरकारी विभागों द्वारा एक ज्वाइंट सर्वे किया गया है।  बदनावर एसडीएम प्रियंका मिमरोट द्वारा सभी विभागों के साथ एक मीटिंग की गई है। इसमें सर्वे पर विस्तृत चर्चा हुई। तहसीलदार सुरेश नागर ने बताया कि सड़क निर्माण के संबंध में सभी शासकीय और निजी जमीन का अधिग्रहण होना है। किस गांव में कितनी जमीन का भू-अर्जन किया जाना है। इसकी रिपोर्ट बनाई गई है। किसानों के खेत, कुएं, पेड़-पौधों के साथ बोरिंग आदि की जानकारी जुटाई गई है। इसके बाद सर्वे रिपोर्ट का प्रकाशन किया जाएगा और दावे-आपत्ति बुलाए जाएंगे। ये होगा फायदा     यह कॉरिडोर उज्जैन को दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे (DME) पर स्थित टिमरवानी इंटरचेंज से सीधे जोड़ेगा।     इस फोरलेन के बनने से यात्रा के समय में लगभग एक घंटे की कमी आने की उम्मीद है।     यह मार्ग धार और झाबुआ जिलों के आदिवासी क्षेत्रों से होकर गुजरेगा, जिससे अंतरराज्यीय संपर्क मजबूत होगा और व्यापार को बढ़ावा मिलेगा।     इस कॉरिडोर के अपग्रेडेशन से अप्रैल-2028 में होने वाले सिंहस्थ कुंभ मेले के दौरान बढ़ने वाले यातायात को संभालने में भी मदद मिलेगी।

Horoscope Today: 12 मार्च 2026 को इन राशियों को मिलेगा फायदा, कुछ को रहना होगा सावधान

मेष राशि मेष राशि वालों के लिए समय अभी खास है, आपको इस समय किसी भी तरह का गुस्सा नहीं करना है। इस समय आपको नौकरी के कारण विदेश यात्रा भी करनी पड़ सकती है या फिर नौकरी में बदलाव के साथ परिवार से दूर किसी दूसरे स्थान पर जा सकते हैं। खर्चों में वृद्धि भी संभव है। वृषभ राशि वृषभ रासि वालों के लिए शैक्षिक और बौद्धिक कार्यों में आपका मन लगेगा। इस समय वृषभ राशि के लोगों को अपना काम ईमानदारी और आत्मविश्वास से करना होगा। आपकी इनकम भी इस समय बढञ सकती है। कारोबार में भागदौड़ अधिक रहेगी। लाभ के मौके भी आपके पास आ सकते हैं। मिथुन राशि मिथुन राशि वालों के लिए आपके पास कई ऐसे मौके आ रहे हैं, जब आपकी जिम्मेदारियां प्रोफेशनल लाइफ में बढ़ सकती हैं। इस समय आपको अपने इमोशंस को भी काबू में रखना है। आत्मविश्वास भरपूर रहेगा, परंतु संयत रहें। कर्क राशि कर्क राशि वालों के लिए आर्थिक मामलों में दिक्कतों वाला समय रहेगा, धन हानि के संकेत हैं। इस समय कोशिश करें कि किसी भी तरह के निवेश करने से बचें। अगर आपकी फैमिली में तू-तू,मैं-मैं की स्थिति है, तो जुबान पर कंट्रोल रखें। सिंह राशि सिंह राशि वालों के लिए अच्छा समय रहेगा। आपको इस समय बिजनेस और हेल्थ दोनों पर ध्यान देना चाहिए। फैसले सोच समझकर लें। हेल्थ भी थोड़ी दिक्कत दे सकती है। लवलाइफ अच्छी रहेगी। संतान की तरफ से अच्छी खबर मिल सकती है। कन्या राशि कन्या राशि के लोगों को पर्सनल लाइफ में इस समय दिक्कतें आ सकती हैं। आपको बीपी के लिए खास ध्यान देना चाहिए। बीपी लो और हाई हो सकता है।लेकिन घबराएं नहीं, तुरंत डॉक्टर को दिखाएं। बिजनेस आज ठीकठाक रहेगा। तुला राशि तुला राशि वालों के लिए मेंटली स्थिति परेशान करने वाली हो सकती है। आप बहुत लो फील करेंगे। हेल्थ आपकी मीडियम रहेगी। बिजनेस भी आपका मीडियम दिख रहा है। कुल मिलाकर आपको आज आराम करना चाहिए। धनु राशि धनु राशि के लोगों को खास तौर पर ध्यान देना है और आपके लिए यह समय पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ दोनों में खास रहेगा। आपको हर तरह से सपोर्ट दिखाना है, अपने पार्टनर को लेकर। पर्सनल लाइफ आपकी अच्छी है। वृश्चिक राशि वृश्चिक वालों के लिए समय अभी अनुकूल है। आपको खास तौर पर पार्टनर की हेल्थ पर ध्यान देना है। नोकरी में भी समस्याएं आ सकती है। प्रेम-संतान लगभग ठीक रहेगा। मकर राशि खर्च की अधिकता के कारण आप परेशान हो सकते हैं, लेकिन इसका बहुत अधिक असर आपकी लाइफ परनहीं होगा। घर में लाइफ पार्टनर से लड़ाई के संकेत हैं। हेल्थ, लव और बिजनेस आपके लिए सही है। कुंभ राशि कुंभ राशि के लोगों की इनकम में बहुत अधिक वृद्धि होगी। आपका मन इस समय परेशानी दे सकता है। लो फील करेंगे। स्वास्थ्य ठीक है। लवलाइफ और व्यापार अच्छा है। पिता के स्वास्थ्य पर ध्यान दें। मीन राशि मीन राशि : मीन राशि के लोगों के लिए परिस्थितियां प्रतिकूल होने वाली हैं। आपको अपनी हेल्थ पर ध्यान देना होगा। आपकी लवलाइफ भी आज लगभग ठीक है। कुल मिलाकर आपको इस समय हेल्थ और पर्सनल लाइफ पर खास ध्यान देना है।

मेंटल हेल्थ को बढ़ावा देने के लिए शक्ति संवाद कार्यक्रम में हुआ अहम एमओयू

भोपाल  वो शक्ति हैं, सशक्त हैं, वो भारत की नारी हैं… न कम हैं, न ज़्यादा हैं, वो सब में बराबरी की अधिकारी हैं।” प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के इस विचार को उद्धृत करते हुए राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष  विजया रहाटकर ने कहा कि आज का भारत महिलाओं की शक्ति, क्षमता और नेतृत्व से नई दिशा प्राप्त कर रहा है।  रहाटकर भोपाल में आज रवीन्द्र भवन में “शक्ति संवाद” कार्यक्रम को सम्बोधित कर रहीं थी। कार्यक्रम में महिला सशक्तिकरण, सरकारी नीतियों, सामाजिक पहलों और महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य व समग्र कल्याण से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई।  विजया रहाटकर ने कहा कि राष्ट्रीय महिला आयोग महिलाओं की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए देशभर में “आयोग आपके द्वार” के तहत जनसुनवाई कार्यक्रम आयोजित कर रहा है, ताकि किसी भी महिला को न्याय मिलने में देरी न हो। उन्होंने बताया कि इस पहल की पहली जनसुनवाई भोपाल से प्रारंभ हुई थी और आज सौवीं जनसुनवाई भी भोपाल में आयोजित होना इस शहर के लिए विशेष महत्व रखता है। उन्होंने कहा कि भारत की बदलती तस्वीर में महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है और यह परिवर्तन केवल व्यक्तिगत नहीं बल्कि नीतिगत और योजनाओं के समन्वित प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने महिलाओं के अधिकारों को सशक्त करने के लिए किए गए कानूनी सुधारों का भी उल्लेख किया।  रहाटकर ने बताया कि हाल के वर्षों में 4 नए श्रम कानून लागू किए गए हैं, जिनमें महिलाओं के हितों का विशेष ध्यान रखा गया है। इसमें महिलाएँ सुरक्षा के साथ नाइट शिफ्ट कार्य भी कर सकती हैं। साथ ही समान वेतन की भी हकदार होंगी। साथ ही लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने के लिए “शक्ति वंदन” अधिनियम के माध्यम से लगभग 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है।  रहाटकर ने तकनीक और नवाचार की भूमिका पर भी जोर देते हुए कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का सकारात्मक उपयोग महिलाओं के कौशल विकास, स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और उद्यमशीलता को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। महिलाओं के लिए विशेष एआई आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार किए जा रहे हैं, ताकि वे अपने व्यवसाय और लक्ष्यों को नई ऊँचाइयों तक ले जा सकें। राष्ट्रीय महिला आयोग विभिन्न क्षेत्रों में कार्य कर रही महिलाओं को एआई प्रशिक्षण देकर सशक्त किया जा रहा है। आयुक्त महिला एवं बाल विकास विभाग  निधि निवेदिता ने कहा कि भारत का संविधान महिलाओं को समान अधिकार और सम्मान प्रदान करता है। उन्होंने मध्यप्रदेश में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा संचालित लाड़ली लक्ष्मी योजना, लाड़ली बहना योजना, महिला सुरक्षा के लिए वन स्टॉप सेंटर और महिला हेल्पलाइन के संबंध में विस्तृत जानकारी दी कि इन योजनाओं से महिलाओं और बालिकाओं के सशक्तिकरण, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है। महिला सुरक्षा शाखा के स्पेशल डीजी  अनिल कुमार ने कहा कि परिवार समाज की मूल इकाई है और जब परिवार में मनमुटाव या असंतुलन उत्पन्न होता है तो परिस्थितियाँ गंभीर हो जाती हैं। उन्होंने कहा कि समाज में कई बार लोग गलत को गलत कहना बंद कर देते हैं, जिससे समस्याएँ बढ़ती हैं। शिकायत यदि सही समय पर और सही स्थान पर की जाए तो सत्य स्वयं सामने आ जाता है और न्याय त्वरित मिलता है। कार्यक्रम में सैनिक परिवारों के कल्याण से जुड़े विषयों पर भी विशेष चर्चा हुई। मध्यप्रदेश राज्य महिला आयोग ने आर्मी वाइव्स वेलफेयर एसोसिएशन के साथ मिलकर आर्मी पर्सनल की पत्नियों और वीर नारियों के लिए आर्थिक और सामाजिक सहयोग की योजनाएँ संचालित करने की पहल की है। इसके अंतर्गत आर्मी कैंट क्षेत्र में “तेरे मेरे सपने” केंद्र स्थापित करने का प्रस्ताव रखा गया है, जहाँ सैनिक परिवारों की महिलाओं के लिए कौशल विकास, सामाजिक सहयोग और वित्तीय समन्वय से जुड़े कार्यक्रम संचालित किए जाएंगे। राज्य महिला आयोग के सचिव  सुरेश तोमर ने बताया कि जल्द ही झाबुआ में सायबर वेलबीइंग सेन्टर खोला जाएगा। उन्होंने बताया कि समाज में फैली कुप्रथाओं को चिन्हांकित कर इसके समाधान और कानून के लिए लॉ यूनिवर्सिटी के साथ कार्य किया जा रहा है। कार्यक्रम में समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली महिलाओं का सम्मान भी किया गया। इस अवसर पर महिलाओं और बालिकाओं के मानसिक स्वास्थ्य तथा साइको-सोशल वेलबीइंग को सुदृढ़ करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए मध्यप्रदेश राज्य महिला आयोग और स्काई सोशल संस्था के बीच एक एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। इसके माध्यम से राज्य में मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता, परामर्श और सहायता से जुड़े कार्यक्रम संचालित किए जाएंगे।  

दिल्ली हाईकोर्ट में उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता की याचिका पर सुनवाई नहीं हो सकी, अगली तारीख 28 मार्च तय

नई दिल्ली दिल्ली हाईकोर्ट ने उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता की ओर से दायर उस याचिका पर सुनवाई टाल दी है, जिसमें उसने अपने पिता की हिरासत में हुई मौत के मामले में दोषियों की सजा बढ़ाने की मांग की है। इस याचिका में मुख्य आरोपी और पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर समेत अन्य आरोपियों की सजा बढ़ाने की अपील की गई है। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने संबंधित पक्ष को जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय देने की अनुमति दे दी। कोर्ट ने कहा कि संबंधित पक्षों को अपना जवाब दाखिल करने के लिए और समय दिया जाता है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 28 मार्च के लिए तय कर दी है। उन्नाव रेप पीड़िता ने कोर्ट में याचिका दाखिल कर अपने पिता की कथित हिरासत में मौत के मामले में दोषियों के खिलाफ सजा बढ़ाने की मांग की है। पीड़िता के मुताबिक कहा गया है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए दोषियों को कड़ी सजा दी जानी चाहिए। उन्नाव दुष्कर्म मामले में पीड़िता के परिवारवालों ने अब दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।  पीड़िता ने अपने पिता की कथित पुलिस हिरासत में मौत के मामले में दोषी करार दिए गए पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की सजा बढ़ाने की मांग की है। निचली अदालत ने पीड़िता के पिता की मौत मामले में सेंगर को गैर इरादतन हत्या का दोषी ठहराते हुए 10 वर्ष की सजा सुनाई थी और उस पर 10 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया गया था। निचली अदालत ने अपने फैसले में कहा था कि परिवार के इकलौते कमाने वाले सदस्य की मौत के मामले में किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरती जा सकती। हालांकि, पीड़िता का पक्ष है कि यह सजा अपराध की गंभीरता के अनुरूप नहीं है और इसे बढ़ाया जाना चाहिए।

तरनजीत सिंह संधू के नेतृत्व में चलेगी दिल्ली सरकार: सीएम रेखा गुप्ता

नई दिल्ली दिल्ली के नए उपराज्यपाल के तौर पर बुधवार को तरनजीत सिंह संधू ने पदभार ग्रहण किया। इस दौरान दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि भाजपा सरकार उपराज्यपाल के नेतृत्व में काम करेगी। सीएम रेखा गुप्ता ने कहा कि मैं दिल्ली के विकास को तेज करने में मदद करने के लिए आपका दिल्ली में स्वागत करती हूं। हमें पूरा भरोसा है कि आपकी मौजूदगी से दिल्ली की तरक्की और तेज़ होगी, शहर की समस्याओं का बेहतर समाधान मिलेगा और दिल्ली सरकार आपके मार्गदर्शन और दिशा में काम करेगी। हम आपका आशीर्वाद चाहते हैं। सीएम रेखा गुप्ता ने एक्स पोस्ट में लिखा कि दिल्ली के नवनियुक्त उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू को पदभार ग्रहण करने पर हार्दिक बधाई। उनके शपथ ग्रहण समारोह में सम्मिलित हुई। दिल्ली हम सबकी साझा विरासत है। इसकी प्रगति और समावेशी समृद्धि के लिए हम सभी मिलकर कार्य करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। मुझे पूर्ण विश्वास है कि आपके व्यापक और दीर्घ प्रशासनिक अनुभव से दिल्ली में चल रहे विकास कार्यों को नई गति और ऊंचाइयां प्राप्त होंगी। आपके सफल और यशस्वी कार्यकाल के लिए हार्दिक मंगलकामनाएं। दिल्ली सरकार में मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने एक्स पोस्ट में लिखा कि सीएम रेखा गुप्ता की उपस्थिति में दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय ने सरदार तरनजीत सिंह संधू को दिल्ली के उपराज्यपाल के रूप में शपथ दिलाई। इसी के साथ उपराज्यपाल के रूप में तरनजीत सिंह संधू ने पदभार ग्रहण किया। मुझे पूरा विश्वास है कि उनके अनुभव, दूरदृष्टि और कुशल मार्गदर्शन में दिल्ली के विकास और सुशासन को नई दिशा और गति मिलेगी। मैं पुन उन्हें उनके आगामी कार्यकाल के लिए बहुत-बहुत बधाईयां देता हूं। मंत्री प्रवेश वर्मा ने एक्स पोस्ट में लिखा कि दिल्ली के नवनियुक्त उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू को पदभार ग्रहण करने पर हार्दिक बधाई। मुझे विश्वास है कि आपके समृद्ध प्रशासनिक अनुभव और दूरदर्शी नेतृत्व में दिल्ली के विकास कार्यों को नई गति मिलेगी तथा राजधानी प्रगति नए आयाम स्थापित करेगी। आपके सफल एवं जनसेवा से परिपूर्ण कार्यकाल के लिए हार्दिक शुभकामनाएं।

वन्य-जीव तस्कर वारंटी आरोपी मिश्रीलाल गिरफ्तार ग्वालियर से सीबीआई ने एसटीएसएफ के सहयोग से आरोपी को पकड़ा

भोपाल स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स मध्यप्रदेश की शिवपुरी इकाई एवं केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो द्वारा 9 वर्षों से फरार एवं स्थाई वारंटी वन्य-जीव तस्कर आरोपी मिश्रीलाल माहौर पिता ख्याली राम माहौर निवासी गोहद जिला भिण्ड को मुखबिर से प्राप्त सूचना के आधार पर ग्वालियर की परमासीस ईस्ट कॉलोनी के पास से घेराबंदी कर संयुक्त कार्रवाई करते हुए गिरफ्तार किया गया। आरोपी को बुधवार 11 मार्च को सीबीआई द्वारा भोपाल न्यायालय में प्रस्तुत किया जायेगा। स्टेट टाइगर फोर्स मध्यप्रदेश द्वारा चंबल नदी में पाये जाने वाले अत्यंत दुर्लभ प्रजाति के वन्य-प्राणी टर्टल्स, रेड क्राउन रूफ टर्टल की विदेशों में बड़े पैमाने पर तस्करी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश कर 5 मई, 2017 को वन अपराध प्रकरण दर्ज किया गया था। इस प्रकरण में कुल 16 आरोपियों को देश के 4 राज्यों से गिरफ्तार किया गया था। इसमें 11 विदेशी नागरिकों को आरोपी बनाया गया था। इस प्रकरण को सीबीआई को हस्तांतरित किया गया। सीबीआई द्वारा उक्त प्रकरण में कार्रवाई करते हुए 3 अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया जा चुका है।

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