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उत्तर प्रदेश विधानमंडल के बजट सत्र के प्रथम दिन दोनों सदनों के संयुक्त अधिवेशन को राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने किया संबोधित

लखनऊ. उत्तर प्रदेश विधानमंडल के बजट सत्र के प्रथम दिन दोनों सदनों के संयुक्त अधिवेशन में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल का अभिभाषण प्रदेश की बदली हुई पहचान का स्पष्ट घोषणापत्र बनकर सामने आया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश ने बीते वर्षों में ‘बॉटलनेक स्टेट’ की छवि से बाहर निकलकर ‘ब्रेकथ्रू स्टेट’ के रूप में सुशासन, सुदृढ़ कानून-व्यवस्था, आर्थिक सशक्तिकरण, कृषि विस्तार, महिला सशक्तिकरण, अवसंरचना विकास और व्यापक जनकल्याण के क्षेत्रों में ठोस उपलब्धियां हासिल की हैं। राज्यपाल का अभिभाषण सरकार की नीतिगत दृढ़ता, प्रशासनिक दक्षता और विकसित उत्तर प्रदेश की ओर बढ़ते आत्मविश्वासपूर्ण कदमों का तथ्यात्मक और संवैधानिक प्रस्तुतीकरण रहा। यूपी बना देश के लिए मॉडल राज्य राज्यपाल ने कहा कि उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति आज देशभर में एक प्रभावी मानक के रूप में उभर रही है। सरकार की कठोरता और संवेदनशीलता के संतुलित दृष्टिकोण ने संगठित अपराध और माफिया तंत्र पर निर्णायक नियंत्रण स्थापित किया है। आधुनिक तकनीक के व्यापक उपयोग, पुलिस बल के सुदृढ़ीकरण, त्वरित एवं प्रभावी न्याय व्यवस्था तथा पारदर्शी प्रशासनिक प्रणालियों के माध्यम से प्रदेश में भयमुक्त और विश्वासपूर्ण वातावरण तैयार हुआ है। यही सुरक्षित परिवेश उत्तर प्रदेश को उद्योग, व्यापार, स्टार्टअप, निवेश और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन के लिए देश के सर्वाधिक आकर्षक और भरोसेमंद राज्यों में स्थापित कर रहा है। जीरो टॉलरेंस, सख्त कार्रवाई राज्यपाल ने कहा कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति ने ठोस और निर्णायक परिणाम दिए हैं। संगठित अपराध के विरुद्ध कार्रवाई में अब तक 35 माफिया व 94 सह-अपराधी दोषसिद्ध, 2 अपराधियों को मृत्युदंड, जबकि 267 अपराधी मुठभेड़ में ढेर किए गए हैं। 977 अभियुक्तों को एनएसए के तहत निरुद्ध किया गया है और माफिया तत्वों से ₹4,137 करोड़ से अधिक की अवैध संपत्ति जब्त की जा चुकी है। त्वरित पुलिसिंग के लिए यूपी-112 का रिस्पॉन्स टाइम 25 मिनट 42 सेकंड से घटकर 6 मिनट 51 सेकंड किया गया है। साइबर अपराधों से निपटने हेतु प्रदेश के सभी 75 जिलों में साइबर क्राइम थाने कार्यरत हैं, जबकि एटीएस ने 148 आतंकवादियों को गिरफ्तार किया है। 146 रोहिंग्या बांग्लादेशी, पाकिस्तानी व अन्य अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया गया है। भ्रष्टाचार पर सख्त प्रहार करते हुए भ्रष्टाचार निवारण संगठन द्वारा 999 सफल ट्रैप ऑपरेशन किए गए हैं। मजबूत हुए संस्थान राज्यपाल ने कहा कि सुरक्षा तंत्र की संस्थागत मजबूती की दिशा में 2017 के बाद 8 नई विधि विज्ञान प्रयोगशालाएं स्थापित की गई हैं और 6 अन्य निर्माणाधीन हैं। इसी अवधि में 2.19 लाख से अधिक पुलिस भर्तियां, 1.58 लाख कर्मियों को प्रोन्नति तथा 83,122 पदों पर भर्ती प्रक्रिया जारी है। पुलिस बल के सुदृढ़ीकरण हेतु बजट में लगभग 150 प्रतिशत की वृद्धि की गई है। 41,424 होमगार्ड पदों पर नामांकन, 6 नए जिला कारागारों सहित इटावा केंद्रीय कारागार का निर्माण, और 1,010 बंदियों की समयपूर्व रिहाई कारागार सुधारों की दिशा में अहम कदम हैं। न्याय व्यवस्था को सुलभ और प्रभावी बनाने के लिए 10 जिलों में एकीकृत न्यायालय परिसरों को स्वीकृति, प्रयागराज में डॉ. राजेंद्र प्रसाद राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय की स्थापना, 81 फास्ट ट्रैक न्यायालयों का स्थायीकरण, लोक अदालतों में 3.60 करोड़ मामलों का निस्तारण, तथा 2,609 विधिक साक्षरता शिविरों का आयोजन किया गया है, जिससे प्रदेश में त्वरित, पारदर्शी और जन-संवेदनशील न्याय व्यवस्था को नई मजबूती मिली है। तेज कनेक्टिविटी, तेज विकास राज्यपाल ने अवसंरचना विकास के क्षेत्र में सरकार की उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में संपर्क, परिवहन और लॉजिस्टिक्स को नई दिशा दी गई है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के 168 विकासखंड मुख्यालयों को डबल-लेन सड़कों से जोड़ा जा चुका है, जबकि 1,410 किलोमीटर लंबाई की 161 सड़कों का निर्माण कार्य पूर्ण किया गया है। राज्य सरकार ने वर्ष 2025–26 तक 46,600 किलोमीटर सड़कों के सुदृढ़ीकरण का लक्ष्य निर्धारित किया है, वहीं अब तक लगभग 28,000 किलोमीटर सड़कों का नवीनीकरण पूरा हो चुका है। अंतर्राज्यीय और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से जुड़े प्रमुख मार्गों को न्यूनतम फोर-लेन कनेक्टिविटी प्रदान करने का कार्य तेजी से प्रगति पर है, जिससे व्यापार, परिवहन, पर्यटन और औद्योगिक निवेश को व्यापक गति मिल रही है। उत्पादन, उत्पादकता और कृषि अर्थव्यवस्था तीनों मोर्चों पर तेजी से आगे बढ़ रहा है उत्तर प्रदेश: राज्यपाल विधानमंडल के संयुक्त अधिवेशन में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने अपने अभिभाषण में उत्तर प्रदेश के विकास की व्यापक और तथ्यपरक तस्वीर प्रस्तुत की। उन्होंने ऊर्जा आपूर्ति से लेकर कृषि-आधारित अर्थव्यवस्था, गन्ना किसानों के भुगतान, पशुपालन, पर्यावरण संरक्षण, खनन सुधार, सार्वजनिक परिवहन, सामाजिक सुरक्षा, महिला सशक्तिकरण, शहरी आवास और श्रमिक कल्याण तक सरकार की नीतियों और उनके ठोस परिणामों को क्रमबद्ध रूप से प्रस्तुत किया।  रोशनी, भरोसा और राहत राज्यपाल ने ऊर्जा क्षेत्र में हुए व्यापक सुधारों को रेखांकित करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में बिजली आपूर्ति व्यवस्था में ऐतिहासिक परिवर्तन दर्ज किया गया है। वर्तमान में नगरीय मुख्यालयों को 24 घंटे, तहसील मुख्यालयों को 21 घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों को 19 घंटे निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। ‘इंटेंसिव डिस्ट्रीब्यूशन स्कीम’ के अंतर्गत अब तक 59.83 लाख स्मार्ट/इलेक्ट्रिक मीटर स्थापित किए जा चुके हैं, जबकि 37.45 लाख पुराने मीटरों का प्री-पेड में प्रतिस्थापन किया गया है। राज्यपाल ने यह भी स्पष्ट किया कि पिछले 6 वर्षों में बिजली दरों में कोई वृद्धि नहीं की गई, जिससे उपभोक्ताओं को स्थायी राहत मिली है और ऊर्जा क्षेत्र में भरोसे का वातावरण मजबूत हुआ है। अन्नदाता की ताकत, प्रदेश की प्रगति राज्यपाल ने कृषि क्षेत्र में हुई ऐतिहासिक प्रगति का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश आज उत्पादन, उत्पादकता और कृषि अर्थव्यवस्था तीनों मोर्चों पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। वर्ष 2016–17 में 557.46 लाख मीट्रिक टन रहा खाद्यान्न उत्पादन 2023–24 में बढ़कर 670.80 लाख मीट्रिक टन हो गया, और 2024–25 में यह 737.40 लाख मीट्रिक टन तक पहुंचा। कृषि क्षेत्र के सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) में भी उल्लेखनीय उछाल दर्ज किया गया है, जो 2016–17 में ₹2.96 लाख करोड़ से बढ़कर वर्तमान में ₹6.95 लाख करोड़ हो गया है। यह 135 प्रतिशत वृद्धि के साथ लगभग 18 प्रतिशत वार्षिक विकास दर को दर्शाता है। बागवानी बना ग्रामीण समृद्धि का मजबूत आधार बागवानी क्षेत्र में भी प्रदेश ने नई ऊंचाइयां छुई हैं। खेती का क्षेत्रफल 21.40 लाख हेक्टेयर … Read more

महिला पुलिस बीट, एंटी-रोमियो स्क्वॉड और सेफ सिटी परियोजना से सुरक्षित हुई सार्वजनिक स्थल

आर्थिक सर्वे 2025-26 प्रदेश में संगठित अपराध और माफिया नेटवर्क पर सख्त कार्रवाई से अपराध दर में आई गिरावट वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने विधानसभा में रखी आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट, प्रस्तुत किया सुदृढ़ कानून व्यवस्था का खाका   बोले, आधुनिक तकनीक से सशक्त हुई पुलिसिंग,सीसीटीवी, डिजिटल केस मैनेजमेंट और जवाबदेह पुलिस व्यवस्था से बढ़ा जनविश्वास महिला पुलिस बीट, एंटी-रोमियो स्क्वॉड और सेफ सिटी परियोजना से सुरक्षित हुई सार्वजनिक स्थल लखनऊ  वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने सोमवार को विधानसभा के बजट सत्र में उत्तर प्रदेश सरकार की वर्ष 2025-26 की आर्थिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट सदन के पटल पर रखी, जिसमें कानून-व्यवस्था और सुरक्षा के क्षेत्र में सरकार की उपलब्धियों का विस्तृत उल्लेख किया गया। इस दौरान उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रदेश में कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए संगठित अपराध और माफिया नेटवर्क के खिलाफ कठोर कार्रवाई की है। इसका सकारात्मक असर यह रहा कि प्रदेश में अपराध दर में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है, जिससे आम जनता के साथ-साथ निवेशकों का भी विश्वास बढ़ा है। महिला पुलिस बीट, सीसीटीवी और एंटी रोमियो स्क्वायड ने महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित की वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार, आधुनिक तकनीक आधारित पुलिसिंग को बढ़ावा देकर पुलिस सुधारों को नई दिशा दी गई है। सीसीटीवी, डिजिटल केस मैनेजमेंट सिस्टम और अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई से पुलिस की कार्यक्षमता और जवाबदेही में वृद्धि हुई है। इससे जनता में निर्भीक होकर शिकायत दर्ज कराने का वातावरण तैयार हुआ है और अपराध नियंत्रण को मजबूती मिली है। महिला सुरक्षा को लेकर प्रदेश सरकार ने जीरो टॉलरेंस नीति को प्रभावी ढंग से लागू किया है। सेफ सिटी परियोजना के तहत महिला पुलिस बीट, सीसीटीवी नेटवर्क और एंटी-रोमियो स्क्वॉड्स की तैनाती से सार्वजनिक स्थलों और कार्यस्थलों पर महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित की गई है। साथ ही उत्तर प्रदेश फैक्ट्री अधिनियम (संशोधित) 2025 के माध्यम से महिलाओं को औद्योगिक कार्यों, विशेषकर नाइट शिफ्ट में, समान अवसर प्रदान किए गए हैं। मिशन शक्ति से सामाजिक सहभागिता को नई गति मिली मिशन शक्ति के तहत सुरक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार सेवाओं के एकीकरण से महिलाओं की आत्मनिर्भरता और सामाजिक सहभागिता को नई गति मिली है। वहीं न्यायिक सहयोग को सुदृढ़ करने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट और ई-कोर्ट्स की स्थापना की गई है, जिससे न्यायिक प्रक्रिया में तेजी आई है। आर्थिक सर्वेक्षण में यह भी उल्लेख है कि जन विश्वास अधिनियम के माध्यम से छोटे प्रक्रियात्मक अपराधों का अपराधीकरण समाप्त कर पारदर्शिता आधारित शासन मॉडल को मजबूती दी गई है। कुल मिलाकर, कानून-व्यवस्था, महिला सुरक्षा और न्यायिक सुधारों के क्षेत्र में सरकार के इन कदमों ने उत्तर प्रदेश को सुरक्षित और निवेश के अनुकूल राज्य बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

विधान मंडल के बजट सत्र में योगी सरकार ने प्रस्तुत किया आर्थिक सर्वेक्षण

कृषि, पशुपालन व मत्स्य पालन किसानों के लिए अब खुशी का माध्यम बनी कृषि  विधान मंडल के बजट सत्र में योगी सरकार ने प्रस्तुत किया आर्थिक सर्वेक्षण   विकसित उत्तर प्रदेश 2047- कृषि को आधुनिक व किसानों को समृद्ध बनाने के लिए लक्ष्य निर्धारित  लखनऊ,  योगी सरकार ने विधान मंडल के बजट सत्र में आर्थिक सर्वेक्षण प्रस्तुत किया। योगी सरकार ने प्रदेश के विकास में कृषि व किसान को प्राथमिकता में रखा। लागत कम और उत्पादन अधिक पर जोर देकर योगी सरकार ने अन्नदाता किसानों को समृद्ध किया। योगी सरकार ने कृषि, पशुपालन व मत्स्य पालन में आर्थिक सर्वेक्षण में उत्तर प्रदेश की सफलतम कहानी का जिक्र किया।  कृषि व संबद्ध क्षेत्रों का अर्थव्यवस्था में योगदान बढ़कर हुआ 24.9 प्रतिशत  आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक 2017-18 के सापेक्ष 2024-25 में कृषि व संबद्ध क्षेत्रों का अर्थव्यवस्था में योगदान 24 प्रतिशत से बढ़कर 24.9 प्रतिशत हो गया। 2024-25 में 737.4 लाख मीट्रिक टन के साथ खाद्यान्न उत्पादन में उत्तर प्रदेश अग्रणी राज्य है। 2017-18 से 2024-25 की अवधि में कुल खाद्यान्न उत्पादन में 28.5 प्रतिशत तथा उत्पादकता में 11.8 प्रतिशत की वृद्धि के साथ प्रदेश में कुल खाद्यान्न उत्पादन का देश में योगदान 18.1 प्रतिशत से बढ़कर 20.6 प्रतिशत हो गया। फसलों का प्रति हेक्टेयर सकल मूल्यवर्धन वर्ष 2017-18 में 0.98 लाख प्रति हेक्टेयर से बढ़कर 2024-25 में 1.73 लाख प्रति हेक्टेयर हो गया है। 2023-24 व 2024-25 में खरीफ, रबी फसलों के क्षेत्रफल, उत्पादन व उत्पादकता में काफी परिवर्तन हुआ। राज्य के कृषि सकल मूल्य वर्धन (जीवीओ) में धान की हिस्सेदारी 13.1 प्रतिशत है। धान के क्षेत्रफल में 19.4 प्रतिशत, उत्पादन में 23.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। उत्पादकता भी 3.6 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 2024-25 में 29.4 कुंतल प्रति हेक्टेयर हो गई है। रबी फसलों की बात करें तो 2023-24 व 2024-25 में प्रदेश की क्षेत्रफल, उत्पादन व उत्पादकता में भी वृद्धि हुई है। रबी फसल गेहूं की कृषि सकल मूल्य वर्धन (जीवीओ) में 18.7 प्रतिशत हिस्सेदारी है। इसके क्षेत्रफल में 2.6 प्रतिशत, उत्पादन में 6.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। उत्पादकता भी 3.5 प्रतिशत बढ़कर 41.2 कुंतल प्रति हेक्टेयर हो गई है। राज्य सरकार की नीतियों (दलहन-तिलहन मिशन, बागवानी विकास कार्यक्रम, एमएसपी और सूक्ष्म सिंचाई योजनाओं ने फसल विविधीकरण को भी बढ़ावा दिया है। 2017-18 से 2024-25 के बीच दलहन का क्षेत्रफल 22.64 से बढ़कर 25.66 लाख हेक्टेयर हो गया है। तिलहन का क्षेत्रफल 10.87 से बढ़कर 28.8 लाख हेक्टेयर (लगभग 165 प्रतिशत वृद्धि) हो गया।  कृषि विकास के लिए संचालित की जा रहीं महत्वपूर्ण योजनाएं व कार्यक्रम  उर्वरक वितरण: 2017-18 से नवम्बर, 2025 तक कुल 806.70 लाख मीट्रिक टन उर्वरकों का वितरण किया गया। कृषि रक्षा रसायनः 2017-18 से नवम्बर, 2025 तक कुल 1,52,960.11 मीट्रिक टन/किलोलीटर कृषि रक्षा रसायन वितरित किए गए। फसली ऋण वितरणः 2017-18 से नवम्बर, 2025 तक कुल रु.1,34,2978.3 करोड़ फसली ऋण वितरित किया गया। पीएम-किसान सम्मान निधि : वर्ष 2018-19 से माह नवम्बर 2025 तक कुल 21 किस्तों में 3.12 करोड़ किसानों को कुल रु० 94,668.58 करोड़ की धनराशि डी०बी०टी० के माध्यम से हस्तांतरित की गयी। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजनाः वर्ष 2017-18 से वर्ष 2024-25 तक कुल 61.98 लाख बीमित किसानों को रु० 5110.23 करोड़ धनराशि की क्षतिपूर्ति दी गई। वित्तीय वर्ष 2025-26 के माह नवम्बर तक कुल 2.03 लाख कृषकों को रु० 138.89 करोड़ की क्षतिपूर्ति का भुगतान किया जा चुका है। खेत तालाब योजनाः वर्ष 2017-18 से नवम्बर, 2025 तक कुल 32,732 खेत तालाब का निर्माण कराया गया। एम-पैक्स सदस्यता महाअभियान-2025- इसके तहत 24 लाख सदस्य बनाये गए। 43 करोड़ की राशि एकत्र एवं जिला सहकारी बैंक में 2 लाख से अधिक खाते खोले गए एवं 550 करोड़ रुपये जमा किए गए। प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाअभियान (पीएम कुसुम) योजनाः वर्ष 2017-18 से नवम्बर, 2025 तक किसानों के प्रक्षेत्रों पर कुल 86,128 सोलर पम्प की स्थापना की गई।  भारत का बीज उत्पादन केंद्र बनने की क्षमता प्राप्त करेगा उत्तर प्रदेश  सीड पार्क- उत्तर प्रदेश में बीज पार्कों की स्थापना : कृषि आत्मनिर्भरता की ओर बड़ा कदम उठाते हुए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 5 कृषि-जलवायु क्षेत्रों में एक-एक उन्नत बीज पार्क की स्थापना की जा रही है। यह निर्णय प्रदेश को कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में ऐतिहासिक साबित होगा। पहला पार्क लखनऊ के अटारी क्षेत्र में 130.63 एकड़ भूमि पर 266.70 करोड़ के निवेश से बनेगा, जहाँ बीज प्रसंस्करण, स्पीड ब्रीडिंग, हाइब्रिड बीज विकास की सुविधा होगी। इससे ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार के नये अवसर भी उत्पन्न होंगे। *सीड पार्कों की स्थापना से बाहर से बीज आयात पर निर्भरता घटने के साथ उच्च गुणवत्ता वाले बीजों से उत्पादकता बढ़ेगी, जिससे बेहतर उत्पादन होगा और आय में वृद्धि होगी। यह कदम उत्तर प्रदेश को कृषि आत्मनिर्भरता की दिशा में अग्रसर करेगा तथा आने वाले वर्षों में प्रदेश भारत का बीज उत्पादन केंद्र बनने की क्षमता प्राप्त करेगा। बागवानी फसलों के संवर्धन हेतु संचालित योजनाएं एवं कार्यक्रम प्रदेश में 2024-25 में कुल बागवानी का क्षेत्रफल 2566.4 हेक्टेयर व उत्पादन 60339.8 मीट्रिक टन है। आम, आलू, मटर, सब्जी, शहद के उत्पादन में यूपी देश का अग्रणी राज्य है। केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा बागवानी क्षेत्र के विकास के लिए एकीकृत बागवानी विकास मिशन, राष्ट्रीय कृषि विकास योजना, पर ड्राप मोर क्राप योजना तथा फल पट्टियों के विकास हेतु अनेक कार्यक्रमों का संचालन किया जा रहा है। प्रदेश में हाईटेक नर्सरी की स्थापना, टिश्यू कल्चर से केला, पपीता जैसे फलदार बागों के रोपण, मशरूम उत्पादन, पोली हाउस व शेडनेट हाउस की स्थापना, मधुमक्खी पालन, शीत गृहों की स्थापना एवं क्षमता विस्तार हेतु अनुदान भी दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना-पर ड्राप मोर क्रॉप माइक्रोइरीगेशन के अन्तर्गत वित्तीय वर्ष 2022-23 से पर ड्राप मोर क्राप माइक्रोइरीगेशन उपघटक के रूप में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अन्तर्गत समस्त जनपदों में संचालित की जा रही है। वर्ष 2023-24 के 18,257 हे० की तुलना में 2024-25 के 37,627 हे० तथा ड्रिप सिंचाई में 42,450 हे० के सापेक्ष 64,711 हे० माइक्रोइरीगेशन किया गया। आलू बीज उत्पादन एवं वितरण कार्यक्रम के अंतर्गत प्रदेश में उच्च गुणवत्तायुक्त आलू उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए आलू उत्पादकों को उच्चकोटि के रोग रहित आलू बीज उपलब्ध कराने के लिए केंद्रीय आलू अनुसंधान … Read more

बोले, पिछले नौ वर्षों में मेडिकल कॉलेजों की संख्या में हुई ऐतिहासिक वृद्धि, वर्ष 2017 के 36 से बढ़कर 2025 में 81 हुए मेडिकल कॉलेज

प्रदेश में नए मेडिकल कॉलेजों से बढ़े डॉक्टर्स, चिकित्सा शिक्षा को मिला विस्तार वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने विधानसभा में रखी आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट, प्रस्तुत किया मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर का खाका  बोले, पिछले नौ वर्षों में मेडिकल कॉलेजों की संख्या में हुई ऐतिहासिक वृद्धि, वर्ष 2017 के 36 से बढ़कर 2025 में 81 हुए मेडिकल कॉलेज ग्रामीण क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच हुई मजबूत, 54 जनपदों में 170 मोबाइल मेडिकल यूनिट से 2.05 करोड़ मरीजों का हुआ उपचार लखनऊ वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने सोमवार को विधानसभा के बजट सत्र में उत्तर प्रदेश सरकार की वर्ष 2025-26 की आर्थिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट सदन के पटल पर रखी, जिसमें उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा स्वास्थ्य सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण और मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार पर सभी का ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच, गुणवत्ता और क्षमता बढ़ाने के लिए योजनाबद्ध ढंग से किए गए प्रयासों का असर अब जमीनी स्तर पर साफ दिखाई देने लगा है। राजकीय और निजी मेडिकल कॉलेजों की संख्या में हुई ऐतिहासिक वृद्धि, ग्रामीण क्षेत्रों तक चिकित्सा सेवाओं की पहुंच और आधुनिक तकनीक आधारित टेली मेडिसिन सेवाएं इसकी प्रमुख मिसाल हैं। प्रदेश में मेडिकल कॉलेज की संख्या में बढ़ोत्तरी से स्वास्थ्य सेवाएं हुईं बेहतर वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि प्रदेश में वर्ष 2017 तक कुल 36 मेडिकल कॉलेज संचालित थे, जिनमें 15 राजकीय और 21 निजी मेडिकल कॉलेज शामिल थे। पिछले कई वर्षों में प्रदेश सरकार ने मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार को प्राथमिकता देते हुए कई नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना की। वर्ष 2025 के अंत तक प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों की कुल संख्या बढ़कर 81 हो गई है। इनमें 45 राजकीय और 36 निजी मेडिकल कॉलेज शामिल हैं। मेडिकल कॉलेजों की संख्या में इस निरंतर वृद्धि से न केवल प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता बेहतर हुई है, बल्कि हर वर्ष बड़ी संख्या में नए डॉक्टरों को चिकित्सा शिक्षा प्राप्त करने का अवसर भी मिल रहा है। इससे भविष्य में प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था और अधिक मजबूत होने की उम्मीद है। 22 लाख से अधिक लोगों ने ई संजीवनी टेली परामर्श सेवा का उठाया लाभ वित्त मंत्री ने बताया कि प्रदेश में मेडिकल और डेंटल शिक्षा के पाठ्यक्रमों तथा परीक्षाओं के स्तर में एकरूपता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से अटल बिहारी वाजपेयी राज्य चिकित्सा विश्वविद्यालय की स्थापना की गई। प्रदेश के ग्रामीण और सुदूरवर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों तक स्वास्थ्य सेवाएं उनके द्वार तक पहुंचाने के लिए प्रदेश सरकार ने मोबाइल मेडिकल यूनिट सेवा की शुरुआत की है। वर्तमान में प्रदेश के 54 जनपदों में कुल 170 मोबाइल मेडिकल यूनिट का संचालन किया जा रहा है। इन मोबाइल मेडिकल यूनिट्स के जरिए अब तक कुल 2.05 करोड़ रोगियों का उपचार किया जा चुका है। यह सेवा उन लोगों के लिए विशेष रूप से लाभकारी साबित हो रही है, जिन्हें दूर-दराज के क्षेत्रों से अस्पतालों तक पहुंचने में कठिनाई होती है। प्रदेश में आधुनिक तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देते हुए प्रदेश में टेली मेडिसिन सेवाओं का भी विस्तार किया गया है। भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप 11 मई 2021 से ई-संजीवनी टेली परामर्श सेवाएं प्रारंभ की गईं। वर्तमान में प्रदेश के 26 मेडिकल कॉलेजों में यह सेवा संचालित हैं, जिसके माध्यम से अब तक 22,53,320 ओपीडी परामर्श प्रदान किए जा चुके हैं। इससे मरीजों को घर बैठे विशेषज्ञ चिकित्सकों से परामर्श लेने की सुविधा मिली है।

कुल बजट का 6.1 प्रतिशत स्वास्थ्य क्षेत्र को हुआ आवंटित, राष्ट्रीय औसत से अधिक निवेश का दावा

आर्थिक सर्वे 2025-26:  प्रदेश में मजबूत हो रहा मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर, आमजन पर कम हुआ स्वास्थ्य खर्च का बोझ – वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने विधानसभा में रखी आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट, प्रस्तुत किया स्वास्थ्य क्षेत्र की उपलब्धियों का ब्यौरा – स्वास्थ्य बजट में रिकॉर्ड बढ़ोतरी, 46,728.48 करोड़ रुपये का अब तक का सर्वाधिक आवंटन – कुल बजट का 6.1 प्रतिशत स्वास्थ्य क्षेत्र को हुआ आवंटित, राष्ट्रीय औसत से अधिक निवेश का दावा – सरकारी निवेश बढ़ने से आउट ऑफ पॉकेट एक्सपेंडिचर में आई कमी, सेवाओं की पहुंच और गुणवत्ता में  हुआ सुधार लखनऊ वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने सोमवार को विधानसभा के बजट सत्र में उत्तर प्रदेश सरकार की वर्ष 2025-26 की आर्थिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट सदन के पटल पर रखी। पटल पर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण की दिशा में किए गए प्रयासों और उपलब्धियों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया गया। आर्थिक सर्वे के आंकड़े के अनुसार, प्रदेश सरकार चिकित्सा इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने, चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण के विस्तार और आमजन को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। वर्ष 2025-26 में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य के लिए आवंटित किया गया 46,728.48 करोड़ का बजट वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने पटल पर आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए कुल 46,728.48 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया गया। यह अब तक का सर्वाधिक आवंटन है, जिससे यह साफ है कि प्रदेश सरकार ने चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। बजट में अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों, चिकित्सा शिक्षा संस्थानों, स्वास्थ्य अवसंरचना और जनकल्याणकारी स्वास्थ्य कार्यक्रमों के लिए पर्याप्त धनराशि सुनिश्चित की गई। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की “स्टेट फाइनेंस: ए स्टडी ऑफ बजट ऑफ 2025-26” रिपोर्ट का हवाला देते हुए आर्थिक सर्वे में बताया गया है कि वर्ष 2025-26 में उत्तर प्रदेश का स्वास्थ्य बजट कुल बजट का 6.1 प्रतिशत रहा है, जो राष्ट्रीय औसत से भी अधिक है। यह तथ्य दर्शाता है कि प्रदेश सरकार स्वास्थ्य सेवाओं के लिए अन्य राज्यों की तुलना में अधिक निवेश कर रही है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा समय-समय पर प्रकाशित राष्ट्रीय लेखा अनुमानों और अद्यतन रिपोर्टों के अनुसार, प्रदेश के कुल स्वास्थ्य व्यय में सरकार द्वारा वहन किए जा रहे खर्च में निरंतर वृद्धि हो रही है। इसके साथ ही आम लोगों के आउट ऑफ पॉकेट एक्सपेंडिचर में कमी दर्ज की गई है। आर्थिक सर्वे के अनुसार यह बदलाव इस बात का संकेत है कि सरकारी निवेश बढ़ने से नागरिकों पर स्वास्थ्य संबंधी आर्थिक बोझ कम हो रहा है। अस्पताल, क्लीनिक, टीकाकरण, राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों और स्वास्थ्य अवसंरचना में सुधार के लिए अधिक बजट आवंटन किया गया है, जिससे सेवाओं की पहुंच और गुणवत्ता दोनों में सुधार हुआ है। वर्ष 2024-25 में गैर-संस्थागत प्रसव की संख्या घटकर 1.66 लाख पहुंची आर्थिक सर्वे में यह भी बताया गया है कि प्रदेश में राज्य सरकार के सुधारात्मक प्रयासों और जननी सुरक्षा योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान जैसी योजनाओं के प्रभाव से संस्थागत प्रसव में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। ग्रामीण क्षेत्रों में आशा कार्यकर्ताओं और एएनएम की सक्रिय भूमिका से गर्भवती महिलाओं को अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में प्रसव के लिए लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा। वर्ष 2021-22 में प्रदेश में कुल 34.74 लाख संस्थागत प्रसव हुए थे, जो वर्ष 2024-25 में 18.02 प्रतिशत की वृद्धि के साथ बढ़कर 41 लाख तक पहुंच गए। वर्ष 2024-25 में प्रदेश में कुल प्रसव का 96.12 प्रतिशत संस्थागत प्रसव रहा। इसके विपरीत गैर-संस्थागत प्रसव की संख्या वर्ष 2021-22 में 3.35 लाख थी, जो वर्ष 2024-25 में 50.44 प्रतिशत की कमी के साथ घटकर 1.66 लाख रह गई। यह उपलब्धि सरकार के सकारात्मक प्रयासों और स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतर पहुंच का प्रत्यक्ष परिणाम मानी जा रही है। वर्ष 2024-25 में 100 प्रतिशत बच्चों को टीकाकरण किया गया प्रदेश में टीकाकरण के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। आर्थिक सर्वे के अनुसार, प्रदेश के सभी जनपदों में 0 से 5 वर्ष तक के बच्चों को 12 जानलेवा बीमारियों पोलियो, टीबी, गलाघोंटू, टिटनेस, काली खांसी, हीमोफिलस इन्फ्लुएंजा टाइप-बी (हिब), हेपेटाइटिस-बी, निमोनिया, जापानी इंसेफेलाइटिस (जे.ई.), खसरा, रूबेला और डायरिया से बचाव के लिए नियमित रूप से निःशुल्क टीकाकरण किया जा रहा है। साथ ही गर्भवती महिलाओं को टिटनेस से बचाव के लिए टीके लगाए जा रहे हैं। नियमित टीकाकरण कार्यक्रम के तहत एचएमआईएस (HMIS)डाटा के अनुसार वर्ष 2024-25 में प्रदेश में 100 प्रतिशत बच्चों का पूर्ण टीकाकरण किया गया। वहीं वर्ष 2025-26 में सितंबर 2025 तक 28.62 लाख बच्चे (98 प्रतिशत) पूर्ण रूप से प्रतिरक्षित किए जा चुके हैं। आर्थिक सर्वे में इसे जन-जागरूकता अभियानों, सेवा प्रदायगी में सुधार और स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण का सकारात्मक परिणाम बताया गया है। आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट में नवजात, शिशु और बाल मृत्यु दर को कम करने के लिए किए जा रहे प्रयासों का भी उल्लेख किया गया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत प्रदेश में सिक न्यू बॉर्न केयर यूनिट (SNCU),न्यूट्रीशन रिहैबिलिटेशन सेंटर (पोषण पुनर्वास केंद्र), गृह आधारित नवजात शिशु देखभाल कार्यक्रम (HBNC)और कंगारू मदर केयर (KMC)जैसी महत्वपूर्ण योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से कमजोर और कुपोषित बच्चों को विशेष देखभाल प्रदान की जा रही है, जिससे बाल स्वास्थ्य संकेतकों में निरंतर सुधार हो रहा है।

67.50 लाख वृद्धजनों तथा 22.89 लाख दिव्यागजनों को पेंशन, 17.48 लाख छात्रों को मिली छात्रवृत्ति

सामाजिक सुरक्षा और कल्याण पर विशेष फोकस, वर्ष 2025-26 के लिए 34,504 करोड़ रुपये प्रस्तावित ‘सबका साथ- सबका विकास- सबका विश्वास, सबका प्रयास’ अभियान को मिली गति, वंचित और पिछड़ों को मिला संबल 67.50 लाख वृद्धजनों तथा 22.89 लाख दिव्यागजनों को पेंशन, 17.48 लाख छात्रों को मिली छात्रवृत्ति लखनऊ  उत्तर प्रदेश आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के अनुसार योगी आदित्यनाथ सरकार द्वारा प्रदेश में सामाजिक सुरक्षा तथा कल्याण के लिए वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए 34,504 करोड़ रुपये व्यय प्रस्तावित है। वित्त वर्ष 2024-25 में इसके लिए 30,530 करोड़ रुपये का खर्च किए गए थे। वहीं 2017-18 में सामाजिक सुरक्षा और कल्याण के लिए केवल 18,674 करोड़ व्यय किए गए थे। पिछले 9 वर्षों में ये वृद्धि दिखाती है कि वर्तमान सरकार ‘सबका साथ- सबका विकास- सबका विश्वास, सबका प्रयास’ के दृष्टिकोण को धरातल पर उतारने के लिए प्रतिबद्ध है। विधानमंडल में वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने सोमवार को बजट सत्र में उत्तर प्रदेश सरकार का वर्ष 2025-26 का आर्थिक सर्वेक्षण प्रस्तुत करते हुए ये जानकारी दी।  वृद्धजनों और दिव्यांगों को आर्थिक संबल प्रदेश सरकार का वृद्धजनों और दिव्यांगों के आर्थिक उन्नयन पर विशेष फोकस रहा है। आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि वर्ष 2025-26 में दिसंबर, 2025 तक 67.50 लाख वृद्धजनों तथा जनवरी, 2026 तक 22.89 लाख दिव्यांगजनों को पेंशन से लाभान्वित किया गया है। वर्ष 2024-25 में 7363.55 करोड़ रुपये से 60.99 लाख वृद्धजनों को लाभान्वित किया गया जो 2017-18 के मुकाबले 62.79 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है।  छात्रवृत्ति योजना बनी 17.48 लाख निर्धन छात्रों का सहारा  छात्रवृत्ति योजना के माध्यम से वर्तमान सरकार गरीब और पिछड़े छात्रों की शिक्षा के लिए पर्याप्त धन उपलब्ध करा रही है। वर्ष 2025-26 में दिसंबर, 2025 तक पूर्वदशम एव दशमोत्तर छात्रवृत्ति से अनु. जा.वर्ग के 3.42 लाख, पिछड़ावर्ग के 12.76 लाख तथा सामान्य वर्ग के 1.30 लाख छात्र-छात्राओं को लाभान्वित किया गया है। वर्ष 2024-25 में पूर्वदशम एवं दशमोत्तर छात्रवृत्ति से अनु. जा. वर्ग के 14.98 लाख विद्यार्थियों को रु.636.34 करोड़, पिछडावर्ग के 29.94 लाख विद्यार्थियों को रु. 2454.32 करोड़ एवं सामान्य वर्ग के 8.78 लाख विद्यार्थियों को रु. 909.99 करोड़ व्यय कर लाभान्वित किया गया।  मुख्यमंत्री अभ्युदय योजना से 23,801 अभ्यर्थी प्रशिक्षित समीक्षा में कहा गया है कि वर्ष 2021-22 से आरम्भ मुख्यमंत्री अभ्युदय योजनान्तर्गत वर्ष 2024-25 में रु. 34.92 करोड़ व्यय कर 23,017 अभ्यर्थियों को लाभान्वित किया गया। वर्ष 2025-26 में (दिसंबर, 2025 की स्थिति) रु. 10.57 करोड़ व्यय कर 23,801 अभ्यर्थियों द्वारा प्रशिक्षण प्राप्त किया जा रहा है। मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना से 26.81 लाख बेटियां लाभान्वित आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार वर्ष 2024-25 में सामूहिक विवाह योजनान्तर्गत 95,466 कन्याओं के विवाह सम्पन्न हुए। 2017-18 के मुकाबले विवाहों की संख्या लगभग 5 गुना और व्यय 7 गुना बढ़ा है। जनवरी, 2026 तक कन्या सुमंगला से 26.81 लाख बालिकाएं लाभान्वित हुईं। 53,607 आश्रितों को 162.50 करोड़ की मदद बी.पी.एल. परिवार के कमाऊ मुखिया की मृत्यु होने पर राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना के तहत सरकार द्वारा 2017-18 में 86.26 हजार आश्रितों को आर्थिक सहायता प्रदान की गयी थी, वर्ष 2024-25 में लाभार्थियों की संख्या में 31.35% की वृद्धि हुई। साथ ही लाभार्थियों को वितरित धनराशि वर्ष 2017-18 में रु. 258.77 करोड़ थी, जो वर्ष 2024-25 में 14.53% बढ़कर रु. 296.36 करोड़ हो गयी। वर्ष 2025-26 में दिसंबर, 2025 तक 53,607 आश्रित व्यक्तियों को 162.50 करोड़ रुपये की धनराशि वितरित की गयी।

उत्तर प्रदेश विधानमंडल का बजट सत्र शुरू, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने पहले दिन किया संबोधन

राज्यपाल अभिभाषण-Copy 2 उत्पादन, उत्पादकता और कृषि अर्थव्यवस्था तीनों मोर्चों पर तेजी से आगे बढ़ रहा है उत्तर प्रदेश: राज्यपाल लखनऊ विधानमंडल के संयुक्त अधिवेशन में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने अपने अभिभाषण में उत्तर प्रदेश के विकास की व्यापक और तथ्यपरक तस्वीर प्रस्तुत की। उन्होंने ऊर्जा आपूर्ति से लेकर कृषि-आधारित अर्थव्यवस्था, गन्ना किसानों के भुगतान, पशुपालन, पर्यावरण संरक्षण, खनन सुधार, सार्वजनिक परिवहन, सामाजिक सुरक्षा, महिला सशक्तिकरण, शहरी आवास और श्रमिक कल्याण तक सरकार की नीतियों और उनके ठोस परिणामों को क्रमबद्ध रूप से प्रस्तुत किया।  रोशनी, भरोसा और राहत राज्यपाल ने ऊर्जा क्षेत्र में हुए व्यापक सुधारों को रेखांकित करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में बिजली आपूर्ति व्यवस्था में ऐतिहासिक परिवर्तन दर्ज किया गया है। वर्तमान में नगरीय मुख्यालयों को 24 घंटे, तहसील मुख्यालयों को 21 घंटे और ग्रामीण क्षेत्रों को 19 घंटे निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। ‘इंटेंसिव डिस्ट्रीब्यूशन स्कीम’ के अंतर्गत अब तक 59.83 लाख स्मार्ट/इलेक्ट्रिक मीटर स्थापित किए जा चुके हैं, जबकि 37.45 लाख पुराने मीटरों का प्री-पेड में प्रतिस्थापन किया गया है। राज्यपाल ने यह भी स्पष्ट किया कि पिछले नौ वर्षों में बिजली दरों में कोई वृद्धि नहीं की गई, जिससे उपभोक्ताओं को स्थायी राहत मिली है और ऊर्जा क्षेत्र में भरोसे का वातावरण मजबूत हुआ है। अन्नदाता की ताकत, प्रदेश की प्रगति राज्यपाल ने कृषि क्षेत्र में हुई ऐतिहासिक प्रगति का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश आज उत्पादन, उत्पादकता और कृषि अर्थव्यवस्था तीनों मोर्चों पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। वर्ष 2016–17 में 557.46 लाख मीट्रिक टन रहा खाद्यान्न उत्पादन 2023–24 में बढ़कर 670.80 लाख मीट्रिक टन हो गया, और 2024–25 में यह 737.40 लाख मीट्रिक टन तक पहुंचा। कृषि क्षेत्र के सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) में भी उल्लेखनीय उछाल दर्ज किया गया है, जो 2016–17 में ₹2.96 लाख करोड़ से बढ़कर वर्तमान में ₹6.95 लाख करोड़ हो गया है। यह 135 प्रतिशत वृद्धि के साथ लगभग 18 प्रतिशत वार्षिक विकास दर को दर्शाता है। बागवानी बना ग्रामीण समृद्धि का मजबूत आधार बागवानी क्षेत्र में भी प्रदेश ने नई ऊंचाइयां छुई हैं। खेती का क्षेत्रफल 21.40 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 26 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है, जबकि उत्पादन 3.80 करोड़ मीट्रिक टन से बढ़कर 6 करोड़ मीट्रिक टन हो गया है। बागवानी उत्पादों के निर्यात में ₹400 करोड़ से बढ़कर ₹1,700 करोड़ तक की उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इन उपलब्धियों का सीधा लाभ किसानों को मिला है, जिससे फलों और सब्जियों से किसानों की आय ₹41,000 करोड़ से बढ़कर ₹1,25,000 करोड़ तक पहुंच गई है। गन्ना किसानों को रिकॉर्ड भुगतान, चीनी उद्योग को नई मजबूती राज्यपाल ने चीनी उद्योग और गन्ना किसानों को लेकर सरकार की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश ने गन्ना मूल्य भुगतान के क्षेत्र में अभूतपूर्व कीर्तिमान स्थापित किए हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 के बाद से अब तक किसानों को ₹3,04,321 करोड़ से अधिक का भुगतान किया गया है, जो 1995 से 2017 के बीच हुए कुल भुगतान ₹2,13,519 करोड़ से ₹90,802 करोड़ अधिक है। राज्यपाल ने बताया कि 2017 के बाद पिपराइच, मुंडेरवा और रामाला में तीन नई चीनी मिलों की स्थापना से प्रदेश की पेराई क्षमता में प्रतिदिन 1.25 लाख क्विंटल की वृद्धि हुई है। किसानों के हित में गन्ना मूल्य में ₹30 प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई है, वहीं गन्ना उत्पादकता 72.38 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर से बढ़कर लगभग 84 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर तक पहुंच गई है। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से 59.75 करोड़ पौध किसानों तक पहुंचाई गईं तथा ₹76.88 करोड़ की वित्तीय सहायता प्रदान की गई। इन समन्वित प्रयासों का परिणाम है कि चीनी उद्योग और गन्ना क्षेत्र से जुड़े 10 लाख से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर प्राप्त हुए हैं। गो-कल्याण ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को दी नई मजबूती राज्यपाल ने पशुपालन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सुदृढ़ीकरण पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में गो-कल्याण को केवल संरक्षण नहीं, बल्कि स्थायी आजीविका के सशक्त माध्यम के रूप में विकसित किया गया है। प्रदेश के 7,497 गो-आश्रय स्थलों में 12,38,547 निराश्रित गोवंश की देखभाल की जा रही है। मुख्यमंत्री सहभागिता योजना और पोषण मिशन के अंतर्गत 1,81,418 गोवंश गो-पालकों को सुपुर्द किए गए हैं, जिससे 1,13,631 परिवारों को स्थायी आजीविका प्राप्त हुई है। गो-पालन को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने के लिए प्रति पशु प्रतिदिन ₹50 की दर से सहायता राशि सीधे डीबीटी के माध्यम से हस्तांतरित की जा रही है, जिसके अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2025–26 में अब तक ₹1,484 करोड़ से अधिक का भुगतान किया गया है। इन समन्वित प्रयासों से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को ठोस आधार मिला है और पशुपालन आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रभावी साधन बनकर उभरा है। जनभागीदारी से मजबूत हुआ पर्यावरण संरक्षण राज्यपाल ने वनों और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में प्रदेश की उल्लेखनीय उपलब्धियों को रेखांकित करते हुए बताया कि वर्ष 2017 के बाद से अब तक 242.13 करोड़ पौधों का रोपण किया जा चुका है, जिसके परिणामस्वरूप प्रदेश का वनावरण बढ़कर 9.96 प्रतिशत तक पहुंच गया है। पर्यावरण संरक्षण को केवल सरकारी अभियान न मानकर सामाजिक जनभागीदारी से जोड़ने की रणनीति ने उत्तर प्रदेश को इस क्षेत्र में एक प्रभावी और अनुकरणीय मॉडल के रूप में स्थापित किया है। पौधरोपण, संरक्षण और संवर्धन के समन्वित प्रयासों से प्रदेश ने सतत विकास और पर्यावरणीय संतुलन की दिशा में ठोस प्रगति की है। पारदर्शी खनन से बढ़ा राजस्व राज्यपाल ने खनन क्षेत्र में किए गए व्यापक सुधारों का उल्लेख करते हुए बताया कि वर्ष 2017 के बाद से अब तक प्रदेश को ₹28,920 करोड़ का खनन राजस्व प्राप्त हुआ है, जबकि 2012–17 की अवधि में यह मात्र ₹7,712 करोड़ था। तकनीक-सक्षम निगरानी, ई-टेंडरिंग और पारदर्शी नीलामी व्यवस्था के चलते न केवल राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, बल्कि अवैध खनन पर भी प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित हुआ है। -सार्वजनिक परिवहन को नई गति* उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए राज्यपाल ने बताया कि निगम की 13,621 बसों ने 103.37 करोड़ किलोमीटर का संचालन किया, जिससे 37.10 करोड़ यात्रियों को सुरक्षित और सुलभ परिवहन सेवाएं उपलब्ध कराई गईं। इस कुशल प्रबंधन के परिणामस्वरूप निगम ने ₹3,810.63 करोड़ का राजस्व अर्जित किया, जो … Read more

हमारी सरकार का यह 10वां बजट, 20 फरवरी तक चलेगा सदनः सीएम योगी

संवाद से समस्या के समाधान में विश्वास करती है सरकारः मुख्यमंत्री बजट सत्र प्रारंभ होने से पहले मीडियाकर्मियों से बात की मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हमारी सरकार का यह 10वां बजट, 20 फरवरी तक चलेगा सदनः सीएम योगी  उत्तर प्रदेश का आर्थिक सर्वेक्षण पहली बार किसी राज्य सरकार द्वारा उठाया गया कदमः मुख्यमंत्री   लखनऊ  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बजट सत्र प्रारंभ होने से पहले सोमवार को मीडियाकर्मियों से बातचीत की। सीएम ने कहा कि उत्तर प्रदेश विधानमंडल आज से बजट सत्र प्रारंभ कर रहा है। यह हमारी सरकार का 10वां बजट है। सीएम ने सभी सदस्यों से अपील करते हुए कहा कि विधानमंडल लोकतंत्र का महत्वपूर्ण आधार स्तंभ है। किसी भी सदस्य को कोई मुद्दा उठाना है तो कार्यवाही बाधित करने के बजाय संवाद करे, क्योंकि सरकार संवाद से समस्या के समाधान में विश्वास करती है। राज्यपाल के अभिभाषण से होगी शुरुआत  सीएम योगी ने कहा कि संसदीय परंपराओं के अनुरूप इसकी शुरुआत राज्यपाल जी के अभिभाषण से होगी। बजट सत्र में दो महत्वपूर्ण एजेंडे होते हैं। पहला- माननीय राज्यपाल का अभिभाषण और दूसरा- सामान्य बजट। राज्यपाल का अभिभाषण सरकार की उपलब्धियों व भारी कार्ययोजना का दस्तावेज होता है, जिसे उनके द्वारा सदन के माध्यम से जनता जनार्दन को समर्पित किया जाता है। सभी सदस्य इस पर चर्चा करते हैं। आज राज्यपाल द्वारा समवेत सदन को संबोधन के माध्यम से अपना अभिभाषण दिया जाएगा।  20 फरवरी तक चलेगा बजट सत्र  सीएम योगी ने कहा कि 2026-27 का सामान्य बजट 11 फरवरी को प्रस्तुत होगा। इसके उपरांत इस पर चर्चा होगी। बजट सत्र 9 फरवरी से 20 फरवरी तक चलेगा।  उत्तर प्रदेश का आर्थिक सर्वेक्षण भी प्रस्तुत होगा  सीएम योगी ने कहा कि राज्यपाल के अभिभाषण के तुरंत बाद सदन के पटल पर उत्तर प्रदेश का आर्थिक सर्वेक्षण भी प्रस्तुत होगा। पहली बार कोई राज्य सरकार अपनी आर्थिक उपलब्धियों को लेकर यह कदम उठाएगी। हमने यूपी को बीमारूपन से उबारकर भारत की इकॉनमी के ब्रेकथ्रू के रूप में स्थापित किया है। इन सभी कारकों और यूपी के आर्थिक उन्नयन की इस यात्रा को जानने का अधिकार जनप्रतिनिधियों व जनता जनार्दन को भी होना चाहिए। हमने कितना आर्थिक उन्नयन किया है, यूपी में प्रति व्यक्ति आय में क्या वृद्धि हुई है, रोजगार सृजन की स्थिति क्या है, वित्तीय प्रबंधन में कैसे हमने विषम परिस्थितियों से उबार कर पिछले पांच वर्षों से लगातार यूपी को रेवेन्यू सरप्लस स्टेट के रूप में स्थापित किया है। इन सभी बिंदुओं को लेकर आर्थिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट भी सदन में प्रस्तुत होगी। सदस्यों के लिए डेटा प्रस्तुत करने और चर्चा के लिए यह रिपोर्ट महत्वपूर्ण दस्तावेज होगी। हर सदस्य के बहुमूल्य सुझावों को स्वीकार करेगी सरकार  सीएम योगी ने कहा कि विधानमंडल लोकतंत्र का महत्वपूर्ण आधार स्तंभ है। यह कार्यवाही को बाधित करके नहीं, बल्कि संवाद से चलता है। किसी भी सदस्य को कोई मुद्दा उठाना है तो संवाद करे, क्योंकि सरकार संवाद से समस्या के समाधान में विश्वास करती है। हर सदस्य के बहुमूल्य सुझावों को स्वीकार करने के साथ ही सरकार हर मुद्दे पर चर्चा करते हुए राज्य के हित में आवश्यक कदम उठाने को सदैव तत्पर है। सीएम ने विपक्षी सदस्यों से अपील की कि कार्यवाही को बाधित न किया जाए, अनावश्यक शोरगुल से बचा जाए।  यूपी के विकास की गति को और तेज करने में बड़ी भूमिका का निर्वहन करेगा बजट सत्र  सीएम योगी ने कहा कि पिछले 9 वर्षों के दौरान विधानमंडल में कार्यवाही के नए कीर्तिमान स्थापित हुए हैं। बजट सत्र पर प्रदेश-देश की निगाहें होंगी। माननीय सदस्यों द्वारा यह अपने महत्वपूर्ण मुद्दों को भी उठाने का मंच बनेगा। बजट सत्र उत्तर प्रदेश के विकास की इस स्पीड को और तेज करने में बड़ी भूमिका का निर्वहन करेगा। सीएम ने सभी पक्षों के सदस्यों से अपील की कि विधायिका के सर्वोच्च मंच पर जनता से जुड़े मुद्दों पर सार्थक चर्चा को आगे बढ़ाएं। इस दौरान उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य व ब्रजेश पाठक, कैबिनेट मंत्री सुरेश खन्ना, स्वतंत्र देव सिंह व राकेश सचान, राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख आदि मौजूद रहे।

सीएम ने बच्चों को दी सीख- मन लगाकर पढ़ाई करो, मोबाइल से दूर रहो

जनता दर्शन  हर नागरिक की सेवा, सुरक्षा को प्रतिबद्ध है सरकारः मुख्यमंत्री शासकीय दायित्वों की व्यस्तताओं के बीच भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया ‘जनता दर्शन’  हापुड़ से आए सैनिक ने जमीन कब्जे की शिकायत की, मुख्यमंत्री ने स्थानीय प्रशासन को तत्काल मामले की जांच कर कार्रवाई का दिया निर्देश  सीएम ने बच्चों को दी सीख- मन लगाकर पढ़ाई करो, मोबाइल से दूर रहो  लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शासकीय दायित्वों की व्यस्तताओं के बीच भी सोमवार को ‘जनता दर्शन’ किया। उन्होंने यहां आए प्रत्येक नागरिक से मुलाकात की और उनकी समस्याओं को सुना। हापुड़ से आए दो सैनिकों ने मुख्यमंत्री से जमीन पर कब्जे की शिकायत की। इस पर मुख्यमंत्री ने स्थानीय प्रशासन को तत्काल मामले की जांच कर उचित निस्तारण का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार 25 करोड़ प्रदेशवासियों की सेवा व सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने अपराधियों के खिलाफ लगातार सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए। सीएम ने बच्चों को सीख दी कि खूब मन लगाकर पढ़ाई करो और मोबाइल से दूर रहो। सैनिकों ने की जमीन पर कब्जे की शिकायत  हापुड़ से आए दो सैनिक भी ‘जनता दर्शन’ में पहुंचे। एक सैनिक ने मुख्यमंत्री के समक्ष अपनी पीड़ा व्यक्त की। बताया कि वह और उनके भाई सेना में रहकर देश की सेवा कर रहे हैं। उनके पिता नेत्रहीन हैं। उनकी जमीन ताऊ के लड़कों ने कब्जा कर ली है, जिनकी आपराधिक छवि है। ताऊ के लड़के हथियार के बल पर धमकी भी देते हैं। इस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनका प्रार्थना पत्र लेते हुए हापुड़ प्रशासन को निर्देश दिया कि पूरे मामले की तत्काल जांच कराएं और दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई करें।  आप एस्टिमेट दीजिए, सरकार इलाज कराएगी  मुख्यमंत्री के समक्ष कुछ लोग इलाज के लिए आर्थिक सहायता की मांग लेकर भी पहुंचे। मुख्यमंत्री ने उनसे कहा कि आप हॉस्पिटल से एस्टिमेट बनवाकर दें, सरकार इलाज में हरसंभव मदद करेगी। मुख्यमंत्री ने आश्वस्त किया कि आप मरीज के स्वास्थ्य की चिंता कीजिए, इलाज की चिंता सरकार की जिम्मेदारी है। इसके अतिरिक्त बिजली, नगर निगम, राजस्व आदि से जुड़े मामले भी आए, जिस पर मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को उचित निस्तारण का निर्देश दिया।  सीएम ने बच्चों को दुलारा और सीख भी दी  ‘जनता दर्शन’ में अभिभावकों के साथ कुछ बच्चे भी पहुंचे। मुख्यमंत्री ने अभिभावकों से समस्याएं जानीं तो बच्चों का हालचाल पूछा। उनकी पढ़ाई के बारे में भी जाना। फिर कहा कि खूब मन लगाकर पढ़ाई करना और मोबाइल से दूर रहना। सीएम ने इन बच्चों पर स्नेह बरसाने के साथ उन्हें चॉकलेट भी दी।

तेज रफ्तार कार ने मारी 8 लोगों को टक्कर, रायबरेली में चार की मौत, हादसा गंभीर

  रायबरेली रायबरेली जिले में निर्माणाधीन गंगा एक्सप्रेसवे पर एक तेज रफ्तार कार ने आठ लोगों को टक्कर मार दी. इस हादसे में चार लोगों की मौत हो गई. पुलिस ने बताया कि यह हादसा जगतपुर पुलिस थाना क्षेत्र के सुल्तानपुर जनौली गांव के पास तब हुआ, जब कोडर गांव के निवासी चुली गांव में आयोजित सामुदायिक भोज से लौट रहे थे. दो महिलाओं की मौके पर ही मौत पुलिस के मुताबिक ये लोग एक्सप्रेसवे से होकर गुजर रहे थे तभी पीछे से आ रही तेज रफ्तार कार ने उन्हें टक्कर मार दी. पुलिस ने बताया कि हिमांशी (23) और शालिनी (22) नाम की दो महिलाओं की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि घायलों को जिला अस्पताल ले जाया गया. अस्पताल में रश्मी (14) और आसमा (22) ने बाद में दम तोड़ दिया. घायल जिला अस्पताल में भर्ती पुलिस के मुताबिक हादसे में रिया पटेल (14), प्रिया पटेल (12), साधना (नौ), मीना (22) और रेशमा (14) घायल हुई हैं. उन्हें जिला अस्पताल पहुंचाया गया है. पुलिस ने बताया कि हादसे के बाद चालक कार छोड़कर मौके से फरार हो गया. उसे गिरफ्तार करने की कोशिश की जा रही है. ड्राइवर को गिरफ्तार करने के प्रयास जारी घटना की जानकारी होने पर जिलाधिकारी हर्षिता माथुर तथा पुलिस अधीक्षक रवि कुमार जिला अस्पताल पहुंचे और घायलों के बेहतर इलाज के निर्देश दिए. पुलिस अधीक्षक ने बताया कि यह दुर्घटना निर्माणाधीन गंगा एक्सप्रेसवे पर तेज रफ्तार कार के कारण हुई. गाड़ी को को जब्त कर लिया गया है और ड्राइवर को गिरफ्तार करने के प्रयास जारी हैं.

कानपुर: वार्मर मशीन में नवजात को छोड़कर भागे डॉक्टर, तड़पते हुए बच्ची ने तोड़ा दम

 कानपुर कानपुर के बिठूर इलाके में स्थित राजा नर्सिंग होम में शाम अरुण निषाद की नवजात बच्ची की वार्मर मशीन में जलने से मौत हो गई. शालू नाम की महिला ने शाम करीब 4-5 बजे एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया था. अस्पताल की नर्सों ने बच्ची को ठंड से बचाने के लिए उसे आईसीयू की वार्मर मशीन पर रखा था. नर्सिंग स्टाफ मशीन चलाकर उसकी निगरानी करना भूल गया, जिससे मशीन का तापमान अत्यधिक बढ़ गया. इस तकनीकी और मानवीय लापरवाही के कारण मासूम का शरीर काला पड़ गया और उसकी तड़प-तड़प कर मौत हो गई. परिजनों का हंगामा, डॉक्टर फरार  बच्ची के जन्म के बाद परिवार में खुशी का माहौल था, लेकिन लापरवाही ने इसे मातम में बदल दिया. जब परिजनों ने बच्ची को देखने की जिद की, तो नर्सों ने उन्हें टाल दिया. शक होने पर परिजन जबरन आईसीयू में घुसे तो देखा कि मासूम का सिर और हाथ बुरी तरह जल चुके थे. इस घटना के बाद अस्पताल में भारी हंगामा मच गया. स्थिति बिगड़ती देख डॉक्टर विवेक मिश्रा और पूरा स्टाफ अस्पताल छोड़कर मौके से फरार हो गया. पुलिस की कार्रवाई   सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को संभाला. डीसीपी एसएम कासिम आबिदी ने बताया कि बच्ची के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है और अस्पताल के आईसीयू को सील कर दिया गया है.स्वास्थ्य विभाग को भी इस संबंध में सूचित किया गया है. पुलिस का कहना है कि परिजनों की तहरीर के आधार पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी. उधर, अस्पताल संचालक ने इसे महज एक ‘हादसा’ करार दिया है. पीड़ित परिवार का बुरा हाल यह अरुण की पहली संतान थी, जिसकी मौत ने परिवार को तोड़कर रख दिया है. बच्ची की दादी प्रेमा और अन्य रिश्तेदारों का रो-रोकर बुरा हाल है. सबसे दुखद पहलू यह है कि अभी तक बच्ची की मां शालू को उसकी मौत की खबर नहीं दी गई है. परिजनों की मांग है कि इस आपराधिक लापरवाही के जिम्मेदार लोगों को तुरंत गिरफ्तार किया जाए और अस्पताल का लाइसेंस रद्द हो.

हैंडपंपों में लगने वाली भीड़ से मिला छुटकारा, सामाजिक सुरक्षा भी बढ़ी

सिर्फ आधार कार्ड दिया और कनैक्शन हो गया, सार्वजनिक नल भी लगे लखनऊ, बुंदेलखंड के लोगों के लिए यह किसी सपने से कम नहीं कि आज उन्हें उनके घर में ही पानी मिल रहा है। इस क्षेत्र में पानी की किल्लत से भुखमरी और गरीबी की जाने कितनी कहानियां हैं। सिर पर घड़ा रखकर दूरदराज से पानी लाती एक महिला की तस्वीर ही यहां के जिलों की पहचान बन गई थी। सालों साल तक यहां की महिलाओं ने पानी का संकट भुगता है। दूरदराज के कुंओं तक जाकर पानी खींचने के साथ ही हैंडपंप पर पानी के लिए लाइनें लगाई हैं। लेकिन अब यह सब अतीत की बातें हैं। अब सड़कों पर दूर से ही दिखनेवाली पानी की टंकियां उम्मीदों की जलधारा हैं। बात महोबा की करें तो यहां के लोगों ने पानी की किल्लत से लंबे समय तक दुर्दिन भरे दिन देखे हैं। कभी यहां वाटर ट्रेन से पानी पहुंचाने की नौबत आ गई थी। लोग घड़ा भर पानी के लिए जाने कहां-कहां तक भटकते थे। अब यहां दूर से ही दिखाई देने वाले वाटर टैंक नई कहानी कहते हैं। इस जिले में जल जीवन मिशन के तहत पांच परियोजनाओं के सहारे एक लाख 12 हजार से अधिक घरों को पाइपलाइन की कनेक्टिविटी दी जा चुकी है। हालांकि इसके लिए 1131 किलोमीटर सड़कों को क्षतिग्रस्त किया गया। क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत के दौरान लोगों को थोड़ी परेशानी का सामना अवश्य करना पड़ा। महोबा के अरशद कहते हैं कि कोई योजना शुरू होने पर थोड़ी-बहुत परेशानी तो होती ही है। लेकिन, अब हर घर नल यहां के लिए एक बहुत बड़ी उम्मीद है। चित्रकूट में सिलौटा ग्राम मुस्तकिल समूह योजना की बात करें तो इससे जुड़े विकास खंड पहाड़ी, रामनगर और मानिकपुर में सवा लाख लोगों के लिए पानी की समस्या खत्म हो गई है। मानिकपुर के उन लोगों का दर्द महसूस कीजिए जो कभी लगभग एक किमी दूर से पानी लाया करते थे।…और इस समस्या की वजह से वहां लोग अपनी बेटियां ब्याहने को आसानी से तैयार नहीं होते थे। उनके लिए यह पानी जिंदगी है, बच्चों का भविष्य है। योजना के तहत पूरे क्षेत्र में 576 किमी की पाइप लाइन बिछाई जानी है, जिसमें 572 किमी बिछा दी गई है। 17 ओवरहेड टैंक हैं जहां वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से रोज पानी लाया जा रहा। यमुना नदी से पानी लाकर इस प्लांट में संशोधित करके टैंकों में चढ़ाकर लोगों के घरों तक पहुंचाया जा रहा। बरहट की ग्राम प्रधान श्रीमती रज्जन देवी इस योजना का चर्चा करते हुए भावुक हो जाती हैं। कहती हैं कि हम योगी-मोदी सरकार के कृतज्ञ हैं कि उन्होंने हमारे बच्चों को बीमारियों से बचाने का इंतजाम कर दिया। हमारे बच्चे अब नहो-धोकर स्कूल जाते हैं। उनमें स्वच्छता का भाव स्वतः ही आने लगा है। चित्रकूट में सिलौटा के साथ ही रैपुरा, चांदी बांगर ग्राम समूह पेयजल योजनाएं चल रही हैं और यह सारी योजनाएं उम्मीद की वह धारा हैं जिसके बारे में लोगों ने सोचा तक नहीं था। रैपुरा ग्राम समूह पेयजल योजना के तहत 19570 परिवारों को नल से पानी उपलब्ध कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। इन सभी घरों में नल लग गए हैं और 60 राजस्व ग्रामों में जलापूर्ति शुरू कर दी गई है। योजना के तहत आच्छादित मदना गांव के निवासी चुनबाद यादव बताते हैं कि हमारी बड़ी समस्या दूर हुई है। अपने लिए पानी का इंतजाम मुश्किल था, जानवरों की तो बात ही दूर। अब हमें परेशान नहीं होना पड़ रहा। लोगों के लिए यह सिर्फ एक नल की बात हो सकती है लेकिन बुंदेलखंड के लिए यह वरदान है। यह वस्तुतः उस संकल्प की सिद्धि है, जिसे मोदी-योगी सरकार ने साधना के रूप में लिया। झांसी के बडा गांव, चिरगांव और बंगरा में अंतिम छोर के गांव तक जल जीवन मिशन की पाइप लाइन बिछ गई है। झासी जिले के बंगरा विकासखंड में स्थित गैरहा ग्राम पंचायत के 65 साल के कामता प्रसाद भावुक हो गए। बोले कि यह दिन देखने के लिए आंखें तरस गईं थीं। जिला मुख्यालय से दूर बसे इस गांव की विवाहिता शगुन बताती हैं कि उन्हें पहले गांव से आधा किमी दूर पानी लेना जाना पड़ता था और बारिश के समय बड़ी मुश्किल होती थी। झांसी जिले के बंगरा ब्लाक की ग्राम पंचायत पचवारा में बहू बन कर जब रागिनी आईं तो उन्हें सरकारी हैंड पंप से पानी ले जाना पडता था। अब वे टोंटी खोलते हुए दिखाती हैं कि देखिये कितना साफ पानी है। गरीब परिवार की बहू खुश है कि मजदूरी करने वाले उनके पति मुकेश कुमार को एक पैसा तक नहीं देना पड़ा और नल का कनेक्शन हो गया। ग्राम पंचायत प्रधान अखिलेश रावत बताते हैं कि उनके गांव में एक हजार कनेक्शन हुए हैं। दलित बाहुल्य गांव में योगी सरकार में बनाए गए आरोग्य मंदिर में भी जल जीवन मिशन के तहत नल लगा है, जहां मरीजों, तीमारदारों के लिए स्वच्छ जल उपलब्ध है। सरकारी स्कूलों में भी बच्चे स्वच्छ पानी पी रहे हैं। जल जीवन मिशन के अधिशाषी अभियंता रणविजय सिंह बताते हैं कि इस स्कीम के तहत 42 गांव आच्छादित हैं और इन गांवों में 11 हजार 437 कनेक्शन हुए हैं। बांदा का नाम आते ही सूखा, पानी की कमी और प्यास आदि शब्द अपने आप दिमाग में कौंधने लगते थे। अब यहां अमलीकौर पेयजल परियोजना और खटान पेयजल परियोजना से 544 गावों में पानी पहुंचा है। 82266 घरों में कनेक्शन किए जा चुके हैं। बड़ोखर खुर्द ब्लाक के बांधा पुरवा गांव के रहने वाले परदेशी ने बताया कि पहले हमें पानी के लिए पहले परेशान होना पड़ता था। वहीं अब हमको हमारे घरों में ही स्वच्छ पानी मिल रहा है। जल निगम के अधिशासी अभियंता विमल कुमार वर्मा ने बताया कि पाइपलाइन डालने के लिए जिन सड़कों को खोदा गया था। उनको भी ठीक कर दिया गया है। हमीरपुर में भी दो पेयजल परियोजनाएं चल रही हैं जहां 322 में से 320 गांवों में घरों तक नल से पानी पहुंचाया जा रहा है। यहां के लोगों की जिंदगी में यह योजना बहुत महत्वपूर्ण होने जा रही है।

7500 गोशालाएं बनेंगी कैटल फूड सिक्योरिटी हब

हर गोशाला से जुड़ेंगे 50-100 किसान, संरक्षण केंद्र के साथ गोशालाओं को हरा चारा उत्पादन का बेहतर स्रोत बनाएगी योगी सरकार गोशालाओं में बड़े पैमाने पर लगाए जाएंगे सहजन के पौधे व नेपियर घास, किसानों की आमदनी व ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी मजबूती लखनऊ, प्रदेश की गोशालाओं को अब केवल गोवंश संरक्षण तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि उन्हें कैटल फूड सिक्योरिटी हब के रूप में विकसित करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। योगी सरकार की इस दूरदर्शी पहल के तहत प्रदेश की 7500 गोशालाओं और उनके आसपास के क्षेत्र को हरा चारा उत्पादन का सशक्त केंद्र बनाया जाएगा, जिससे गोवंश संरक्षण के साथ-साथ किसानों की आमदनी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी। संरक्षण से उत्पादन की ओर गोशालाएं उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि “मिशन फॉडर” के नाम से शुरू हो रहे इस प्रदेशव्यापी अभियान का उद्देश्य गोशालाओं को आत्मनिर्भर इकाइयों के रूप में विकसित करना है। इसके तहत हर गोशाला को 50 से 100 किसानों के नेटवर्क से जोड़ा जाएगा, ताकि चारा उत्पादन, विपणन और उचित मूल्य की व्यवस्थित श्रृंखला तैयार हो सके। इससे किसान भी आत्मनिर्भर बनेंगे और गोशालाओं को सतत रूप से पौष्टिक हरा चारा उपलब्ध होगा। मोरिंगा-नेपियर से बदलेगी तस्वीर मिशन फॉडर के अंतर्गत गोशालाओं की उपलब्ध भूमि का अधिकतम उपयोग करते हुए मोरिंगा (सहजन) और नेपियर घास का बड़े पैमाने पर रोपण कराया जाएगा। इसमें गन्ना घास, सुबबूल, ढैंचा और मौसमी चारे जैसे लोबिया, मक्का, ज्वार, बाजरा, बरसीम आदि को भी शामिल किया गया है। उत्तर प्रदेश की जलवायु में लगभग 50 प्रकार के पशु चारे सहज रूप से उगाए जा सकते हैं, जिनमें एकदलीय और बहुदलीय दोनों प्रकार के चारे शामिल हैं। यही विविधता इस मिशन की सबसे बड़ी ताकत बनेगी। दीर्घकालिक समाधान, कम लागत मोरिंगा पौधे लगभग 12–15 वर्षों और नेपियर घास 7–8 वर्षों तक लगातार हरा चारा उपलब्ध कराने में सक्षम हैं। मोरिंगा न केवल उच्च प्रोटीन और खनिज तत्वों से भरपूर है, बल्कि गोशालाओं में प्राकृतिक छाया और जैविक फेंसिंग का भी काम करेगा। वहीं नेपियर घास अपनी उच्च उत्पादन क्षमता और नियमित कटिंग के कारण सतत चारा स्रोत के रूप में महत्वपूर्ण है। हर गोवंश को पर्याप्त हरा चारा योजना के अनुसार गोशालाओं में संरक्षित प्रत्येक गोवंश को पर्याप्त हरा चारा प्रतिदिन उपलब्ध कराया जाएगा। हरा चारा पोषण की दृष्टि से सूखे चारे की तुलना में अधिक लाभकारी है। इससे गोवंश के स्वास्थ्य तथा दुग्ध उत्पादन में उल्लेखनीय सुधार होगा। साथ ही चारा उत्पादन में आत्मनिर्भरता से बाहरी निर्भरता घटेगी और गोशालाओं की संचालन लागत में कमी आएगी। हरित आवरण बढ़ेगा, भूमि की उर्वरता सुधरेगी श्याम बिहारी गुप्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में तैयार इस समग्र कार्ययोजना के केंद्र में गोवंश संरक्षण, पोषण सुरक्षा, प्राकृतिक खेती, पर्यावरण संतुलन और ग्रामीण-शहरी सहभागिता को रखा गया है। मिशन फॉडर के माध्यम से न केवल गोशालाओं का दीर्घकालिक संचालन मजबूत होगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर हरित आवरण बढ़ेगा और भूमि की उर्वरता सुधरेगी। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। चरणबद्ध तरीके से लागू की जाएगी योजना प्रदेश सरकार के मार्गदर्शन में उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग इस योजना को चरणबद्ध तरीके से लागू करेगा। यह पहल आत्मनिर्भर गोशाला, प्राकृतिक खेती और सशक्त ग्रामीण अर्थव्यवस्था के उस विजन को जमीन पर उतारने की दिशा में निर्णायक कदम मानी जा रही है, जिसकी नींव योगी सरकार ने रखी है।

बसपा में नई रणनीति की तैयारी? मायावती ने अहम पद किए समाप्त

लखनऊ विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटी बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने पार्टी संगठन में बड़ा बदलाव करते हुए बूथ और सेक्टर स्तर तक संगठन को नए सिरे से खड़ा करने का फैसला लिया है। इसके तहत संगठन में 50 प्रतिशत युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। पार्टी प्रमुख ने दो-दो जिला प्रभारियों की व्यवस्था को समाप्त कर दिया है और उन्हें विधानसभा प्रभारी बनाया गया है। अब विधानसभा अध्यक्ष, महासचिव और प्रभारी अपने-अपने क्षेत्रों में बूथ और सेक्टर गठन की जिम्मेदारी संभालेंगे। 15 हजार नए बूथों पर संगठन का गठन अभी नहीं हुआ निर्वाचन आयोग द्वारा प्रति बूथ मतदाताओं की संख्या 1500 से घटाकर 1200 किए जाने के बाद प्रदेश में बूथों की संख्या 1.62 लाख से बढ़कर 1.77 लाख हो गई है। इसके चलते पहले से गठित बूथ और सेक्टर स्तर के संगठन प्रभावी नहीं रह गए हैं। लगभग 15 हजार नए बूथों पर संगठन का गठन अभी नहीं हुआ है।   एक सेक्टर में औसतन 10 बूथ होते हैं पार्टी के अनुसार एक सेक्टर में औसतन 10 बूथ होते हैं, ऐसे में पूरे प्रदेश में नए सिरे से संगठन खड़ा करने में लगभग तीन माह का समय लग सकता है। जिलाध्यक्षों और मंडल प्रभारियों को इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी के निर्देश दिए गए हैं। कांशीराम और आंबेडकर जयंती धूमधाम से मनाने के निर्देश बसपा प्रमुख ने पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि पार्टी संस्थापक कांशीराम की जयंती 15 मार्च को लखनऊ और नोएडा में भव्य रूप से मनाई जाए। वहीं 14 अप्रैल को डॉ. भीमराव आंबेडकर की जयंती भी पूरे उत्साह के साथ मनाने को कहा गया है। उन्होंने बताया कि 12 मंडलों के पदाधिकारी और कार्यकर्ता लखनऊ में, जबकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के छह मंडलों के कार्यकर्ता नोएडा स्थित स्मारक पर पहुंचेंगे। संगठन मजबूत करने के लिए जिलों में उतरेंगे शीर्ष नेता एसआईआर और बूथ-सेक्टर गठन का कार्य पूरा होने के बाद पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद, राष्ट्रीय महासचिव सतीश चंद्र मिश्र, प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल, विधायक उमा शंकर सिंह और मंडल स्तरीय मुस्लिम भाईचारा प्रभारियों द्वारा जिलों का दौरा किया जाएगा। सभी जिलों में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे बैठक में मायावती ने कहा कि अगले वर्ष सरकार बनाने के लक्ष्य के साथ सभी जिलों में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2007 में बसपा ने अकेले दम पर पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई थी। हालांकि इसके बाद पार्टी का जनाधार कमजोर हुआ है और वर्तमान में विधानसभा में बसपा का केवल एक विधायक है। पिछले लोकसभा चुनाव में पार्टी का खाता भी नहीं खुल सका था।

प्रदेश में राही टूरिस्ट लॉज के नेटवर्क विस्तार से धार्मिक, सांस्कृतिक और इको टूरिज्म को मिलेगा बढ़ावा

एटा के पटना पक्षी विहार, हरदोई की सांडी झील और बुलंदशहर के नरौरा में भी बनेंगे लॉज लखनऊ, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप प्रदेश में धार्मिक, सांस्कृतिक और इको टूरिज्म को नई पहचान मिली है। प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों काशी, मथुरा, आगरा, अयोध्या, प्रयागराज में पिछले कुछ सालों से देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। इसे देखते हुए योगी सरकार राज्य में छोटे शहरों में भी पर्यटन अवसंरचना को सुदृढ़ करने के लिए ठोस कदम उठा रही है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम (यूपीएसटीडीसी) प्रदेश के विभिन्न जनपदों में राही टूरिस्ट लॉज का निर्माण करा रहा है। इसके साथ ही वर्तमान में मौजूद लॉजों का रेनोवेशन व सौंदर्यीकरण भी कराया जा रहा है। इसका उद्देश्य प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों के साथ-साथ नये विकसित किये जा रहे धार्मिक, सांस्कृतिक और इको टूरिज्म स्थलों पर टूरिस्टों को बेहतर आवासीय  व खानपान की सुविधा उपलब्ध कराना है। विभिन्न जनपदों में 11 राही टूरिस्ट लॉजों/बंगलों का निर्माण   पर्यटन विभाग विभिन्न जनपदों में 11 राही टूरिस्ट लॉजों/बंगलों का निर्माण करा रहा है। इन्हें पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल के तहत विकसित किया जाएगा। मथुरा के गोकुलगांव, आगरा के बटेश्वर, कासगंज के सोरों और सीतापुर में राही टूरिस्ट बंगलों का निर्माण कराया जाएगा। साथ ही प्राकृतिक पर्यावासों के समीप एटा के पटना पक्षी विहार, हरदोई की सांडी झील, बुलंदशहर के नरौरा में राही टूरिस्ट लॉजों का निर्माण कराया जा रहा है। इसके अलावा प्रतापगढ़ के भूपियामऊ, औरैया के देवकली, बदायूं के कछला घाट और शामली के कांधला में भी टूरिस्ट लॉजों का निर्माण कराया जा रहा है। योगी सरकार का उद्देश्य इन परिसंपत्तियों के माध्यम से पर्यटकों को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराना और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देना है। यूपीएसटीडीसी के ‘राही’ टूरिस्ट बंगले न केवल प्रदेश में पर्यटन अवसंरचना को मजबूती प्रदान करेंगे,  बल्कि यूपी को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगें। प्रयागराज, वाराणसी और चित्रकूट में टूरिस्ट होटलों का रेनोवेशन महाकुम्भ और माघ मेले जैसे भव्य आयोजनों के समय प्रयागराज में सर्वाधिक पर्यटकों का आगमन होता है। इसे देखते हुए यूपीएसटीडीसी की ओर से प्रयागराज में यमुना नदी के किनारे होटल राही त्रिवेणी दर्शन में नए भवन का निर्माण कराया गया है। इससे पर्यटकों की आवसीय क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। साथ ही प्रयागराज में यूपीएसटीडीसी के होटल राही इलावर्त में इंटीरियर डेकोरेशन का कार्य भी पूरा किया जा चुका है। इसी क्रम में वाराणसी के सारनाथ में स्थित राही टूरिस्ट लॉज में सुविधाओं का विकास और नवीनीकरण का कार्य किया जा रहा है। जबकि धार्मिक स्थल चित्रकूट में स्थित राही टूरिस्ट लॉज के पार्ट-ए और पार्ट-बी के नवीनीकरण का कार्य भी पूरा किया जा चुका है। बलरामपुर में भी टूरिस्ट लॉज के नवीनीकरण का कार्य तेज गति से चल रहा है।

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