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मोटरसाइकिल से डिप्टी कलेक्टर की कार की जोरदार भिड़ंत , बाइक सवार युवक की मौत

बालोद जिले के डौंडी थाना क्षेत्र के मर्चुरी के पास डिप्टी कलेक्टर की कार से टकराकर बाइक सवार युवक की मौत हो गई। मृतक की पहचान 30 वर्षीय अलख राम के रूप में हुई, जो ग्राम बोगर, भानुप्रतापपुर का निवासी था। घटना की सूचना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने शव का पंचनामा किया और उसे पोस्टमार्टम के लिए भेजकर मामले की जांच शुरू कर दी है। जानकारी के मुताबिक, डौंडी विकासखंड के रहने वाले डिप्टी कलेक्टर दिलीप उईके फिलहाल बीजापुर में नियुक्त हैं। डिप्टी कलेक्टर का ड्राइवर आज उनके माता-पिता को इलाज के लिए अस्पताल ले गया था, जहां से वापस लौटते वक्त विपरीत दिशा से आ रही मोटरसाइकिल से उनकी कार की जोरदार भिड़ंत हो गई। युवक की मौके पर हुई मौत इस हादसे की भयावहता का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि टक्कर के बाद बाइक गाड़ी के सामने इंजिन के पास जाकर फंस गई थी, जिससे उसके परखच्चे उड़ गए। वहीं बाइक सवार युवक ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। इस दौरान मौके पर राहगीरों और आसपास रहने वाले लोगों की भीड़ इकट्ठा हो गई थी। घटना की सूचना मिलते ही डौंडी पुलिस मौके पर पहुंची और शव का पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस ने मामला दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है।

तीसरी लाइन के चलते बदलाव, बिलासपुर की जगह अब उसलापुर से छूटेंगी नर्मदा और रीवा व भोपाल एक्सप्रेस

बिलासपुर। बहुत जल्द यात्रियों को बिलासपुर-इंदौर नर्मदा एक्सप्रेस, बिलासपुर-रीवा एक्सप्रेस, बिलासपुर-भोपाल एक्सप्रेस समेत कटनी रेलखंड पर चलने वाली ट्रेनों में यात्रा करने उसलापुर स्टेशन जाना पड़ेगा। रेल प्रशासन इसका प्रपोजल भी तैयार कर रहा है। हालांकि, रेलवे की ओर से अभी इसकी आधिकारिक पुष्टी नहीं हुई है। मगर, बिलासपुर रेल मंडल में इसकी सुगबुगाहट शुरू हो गई है। उसलापुर शहर का दूसरा प्रमुख रेलवे स्टेशन है। अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत इस स्टेशन को विकसित भी किया जा रहा है। आधे से ज्यादा कार्य हो चुके हैं। बचे कार्य जल्द पूरा हो जाएंगे। वहीं, बिलासपुर स्टेशन का भी कायाकल्प हो रहा है। 435 करोड़ खर्च कर रेलवे इस स्टेशन को विश्वस्तरीय बनाने के लिए तैयारी कर रही है। इस योजना के तहत जोनल स्टेशन का नया मॉडल भी बना लिया गया है। इस मॉडल पर गौर करें, तो पुरानी बिल्डिंग के सामने एक नई लाइन बिछाई जाएगी। यह पुरानी लाइन से जुड़ेगी। लाइन विस्तार के लिए ट्रेनों की आवाजाही रोकना जरूरी लाइन विस्तार तभी संभव है, जब पुरानी लाइनों पर ट्रेनों का परिचालन बंद रहे। रेलवे इसकी तैयारी भी कर रही है। जोनल स्टेशन में तीन प्लेटफार्म छह, सात और आठ ऐसे हैं, जहां कटनी रेलखंड की ट्रेनें छूटती हैं। इन ट्रेनों में नर्मदा, रीवा, भोपाल एक्सप्रेस के अलावा बिलासपुर-शहडोल, बिलासपुर-चिरमिरी पैसेंजर जैसी ट्रेनें शामिल हैं। इन ट्रेनों का परिचालन उसलापुर स्टेशन में शिफ्ट किए बिना लाइन विस्तार का कार्य संभव नहीं है। इसलिए रेलवे इस पर जोर दे रही है। बमुश्किल तीन से चार महीने में इस स्टेशन से इन ट्रेनों का परिचालन की उम्मीद है। रेलवे का मानना है कि जब तक अधिक से अधिक ट्रेनों का स्टापेज या परिचालन प्रारंभ नहीं होगा, उस स्टेशन का कद नहीं बढ़ेगा। इसी के तहत पिछले साल रायपुर से आने वाली ट्रेनों का स्टापेज उसलापुर किया गया है। नई व्यवस्था के तहत ट्रेन सीधे दाधापारा से उसलापुर पहुंचती हैं। इससे इंजन बदलने का झंझट भी खत्म हुआ है। बिलासपुर रेलवे स्टेशन पर दवाब होगा कम बिलासपुर रेलवे स्टेशन पर अधिक ट्रेनों की ठहराव की वजह से कहीं न कहीं जोनल स्टेशन में ट्रेनों का दबाव रहता है। इसी दबाव के चलते ट्रेनों को आउटर पर भी रोकना पड़ता है। कई बार मेल, आजाद हिंद एक्सप्रेस को दाधापारा रेलवे यार्ड में रोका गया है। हालांकि, यह स्थिति केवल जोनल स्टेशन में प्लेटफार्म पर जगह नहीं होने के कारण होती है। यदि कटनी रेलमार्ग की इन ट्रेनों को उसलापुर स्टेशन से रवाना किया जाता है और वापसी में इसी स्टेशन में परिचालन समाप्त किया जाता है, तो जोनल स्टेशन में काफी हद तक दबाव कम होगा। उसलापुर में अभी हो रहा है 17 ट्रेनों का ठहराव उसलापुर रेलवे स्टेशन में अभी 17 ट्रेनों का ठहराव है। इनमें आठ नियमित ट्रेनें हैं। अन्य ट्रेनें साप्ताहिक हैं। इन ट्रेनों का परिचालन शुरू होने से ट्रेनों की संख्या बढ़ जाएगी। इससे यात्री भी बढ़ जाएंगे। इसे देखते हुए ही रेल प्रशासन सुविधाओं में विस्तार कर रहा है।

डाईट रायपुर मे हूई पदोन्नत प्रधान पाठक के पदस्थापना के लिए काउंसलिंग

टीचर्स एसोसिएशन ने पारदर्शिता काउंसलिंग के लिए डीईओ कार्यलय को दिया धन्यवाद रायपुर आज प्राथमिक शाला के पदोन्नत प्रधान पाठक के पद पर पदस्थापना के लिए डाईट रायपुर मे डीईओ कार्यलय रायपुर द्वारा प्राथमिक शाला पदोन्नत प्रधान पाठक के लिए दिव्यांग,गंभीर बिमारी से पीड़ित व महिला शिक्षकों की पहला दिन 102 लोगो की काउंसलिंग संपन्न हुई। कल सभी शेष 118 पुरुष शिक्षकों की काउंसलिंग होगी।  डीईओ कार्यलय रायपुर द्वारा पदस्थापना के लिए पूर्ण पारदर्शिता करते हुए काउंसलिंग की प्रक्रिया अपनाई गई। काउंसलिंग के दौरान टीचर्स एसोसिएशन व शिक्षक संघर्ष मोर्चा के पदाधिकारीगण उपस्थित थे। काउंसलिंग के दौरान पदोन्नति के लिए  मनचाही पदस्थापना पाकर शिक्षकगण खुश नजर आये। पारदर्शिता काउंसलिंग के लिए संघ के पदाधिकारियों ने डीईओ खंडेलवाल, सहायक संचालकद्वय इंदिरा गाँधी व वर्मा,टेम्भुकर मेडम, रूपेन्द्र साहू व द्रोण साहू सहित काउंसलिंग के कार्य सम्पन्न कराने वाले अधिकारी व कर्मचारियों का धन्यवाद दिया गया।  इस अवसर छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष ओमप्रकाश सोनकला,सुखनंदन साहू, टिकेश्वरी साहू,हरीश दीवान, राधेश्याम बंजारे,गंगा नागरची, पीलू राम सोनकर, पूर्णिमा साहू, शीला ठाकुर,अनिल वर्मा व मोर्चा के पदाधिकारियों मे हेम कुमार साहू, मनोज साहू व दीपक साहू सहित पदाधिकारीगण उपस्थित थे।

बीजापुर के गांव गुण्डम में महुआ पेड़ के नीचे केन्द्रीय गृह मंत्री ने लगाई चौपाल: ग्रामीणों से खुलकर की चर्चा

शासन की सभी योजनाओं का लाभ उठाने के लिए ग्रामीणों को किया प्रेरित रायपुर  माओवादी आतंक से प्रभावित बीजापुर जिले के गुण्डम गांव में केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने महुआ पेड़ के नीचे चौपाल लगाकर ग्रामीणों से आत्मीयतापूर्वक खुलकर चर्चा की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की पहल पर हमने माओवादी आतंक को 31 मार्च 2026 तक समाप्त करने का लक्ष्य रखा है, जिसका परिणाम है कि आज नक्सलवाद एक छोटे से दायरे में सिमट कर रह गया है। इस मौके पर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय एवं उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा उपस्थित थे। केन्द्रीय गृह मंत्री श्री शाह ने कहा कि माओवादी आतंक के भय से ग्रामीणों को मुक्त कराने के लिए बस्तर के विभिन्न स्थानों में सुरक्षा कैम्प स्थापित किए गए है। बस्तर अंचल में अमन और शांति का वातावरण स्थापित हो रहा है। उन्होंने ग्रामीणों से ज्यादा से ज्यादा योजनाओं से जुड़ कर विकास की मुख्यधारा में शामिल होने की अपील की। श्री शाह ने कहा कि बच्चों को स्कूल अवश्य भेंजे। शिक्षा से ही विभिन्न समस्याओं का समाधान निकलेगा। केन्द्रीय गृह मंत्री ने ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा कि गुण्डम के नजदीक स्थापित कैम्प में अस्पताल की सुविधा भी है जहां निःशुल्क उपचार हेतु ग्रामीण निःसंकोच होकर जाएं और झाड़-फूंक के भरोसे न रहें। उन्होंने ग्रामीणों को निःशुल्क 35 किलो चांवल, महतारी वंदन योजना सहित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं से अवगत कराया। उन्होंने गांव में स्थित प्राथमिक शाला का अवलोकन कर बच्चों से पढ़ाई सम्बधी जानकारी ली और नियमित स्कूल आने के लिए बच्चों को प्रेरित किया। वहीं उन्होंने महिलाओं को भी शिक्षा के लाभ से अवगत कराया। गृहमंत्री श्री अमित शाह ने ग्रामीणों हेतु जन सुविधा शिविर लगाकर आधार कार्ड, राशन कार्ड, बैंक पासबुक, आयुष्मान कार्ड सहित अन्य सभी आवश्यक दस्तावेज बनाने  के निर्देश कलेक्टर को दिए। उन्होंने कहा शासन कि समस्त योजनाओं का लाभ लेने के लिए बैंक पासबुक अनिवार्य है, इसलिए सभी का बैंक पासबुक जरूरी है। केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि एक वर्ष के भीतर गांव में सड़क, बिजली, स्कूल,अस्पताल, पेयजल जैसी सभी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएगी।

नक्सल मोर्चे पर तैनात जवानों के बीच पहुंचे केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह

  गुण्डम कैम्प में सीआरपीएफ, कोबरा बटालियन, डीआरजी सहित सुरक्षा बल के जवानों से किया सीधा संवाद केन्द्रीय गृहमंत्री से संवाद कर जवानों के हौंसले हुए बुलंद नक्सलमुक्त भारत में सुरक्षा बलों के जवानों का नाम स्वर्णिम अक्षर में लिखा जाएगा रायपुर केन्द्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह नक्सल गतिविधियों पर अंकुश लगाने के अपने मिशन के तहत आज बीजापुर के सुदूर एवं माओवाद प्रभावित क्षेत्र गुण्डम में तैनात सुरक्षाबलों के जवानों के बीच पहुंचे। उन्होंने स्थित केन्द्रीय रिजर्व बल 153वीं वाहिनी बटालियन के कैम्प में सीआरपीएफ, कोबरा, डीआरजी सहित सुरक्षा बल के जवानों के साथ संवाद कर उनका उत्साहवर्धन किया। केन्द्रीय गृह मंत्री श्री शाह ने नक्सल मोर्चे पर तैनात जवानों से सीधे नक्सल ऑपरेशन की मैदानी स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने जवानों के साथ दोपहर का भोजन भी किया। इस मौके पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय, उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा और पुलिस महानिदेशक श्री अशोक जुनेजा भी उपस्थित थे।     केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा की विगत एक वर्ष में बस्तर को नक्सल मुक्त करने नवीन सुरक्षा कैम्पों की स्थापना की गई है, जिसका सकारात्मक परिणाम यह रहा है की हमारे जवानों को नक्सल ऑपरेशन में लगातार सफलता मिली। बहुत बड़ी संख्या में नक्सली मारे गये, नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया और उनकी गिरफ्तारी हुई। वह दिन दूर नहीं जब बस्तर और हमारा देश नक्सल प्रभाव से पूरी तरह मुक्त हो जाएगा। मार्च 2026 तक नक्सलमुक्त भारत बनाना हमारी सबसे बड़ी प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि नक्सलमुक्त अभियान में सीआरपीएफ, बीएसएफ, कोबरा, छत्तीसगढ़ पुलिस, बस्तरिया बटालियन सहित सभी सुरक्षाबलों का महत्वपूर्ण योगदान है।     श्री अमित शाह ने अपने उद्बोधन में कहा कि आज नक्सलवाद समाप्त होने की कगार पर पहुंच गया है। उन्होने कहा कि सुरक्षा कैम्प के दायरे में आने वाले गांवों में सुरक्षाबल के अधिकारी यह अवश्य देखें की शासन की योजनाओं का क्रियान्वयन जमीनी स्तर पर कितनी अच्छी तरह हो रहा है, लोगों को उनके अधिकार मिल रहे हैं कि नही। शासन की योजनाओं का समुचित ढंग से लाभ ग्रामीणों को मिलते रहेगा तो वे शासन और प्रशासन के प्रति समर्पित भाव से सहयोग करेंगे और विकास की ओर अग्रसर होंगे। गृहमंत्री ने कैम्प परिसर पर एक पेड़ मां के नाम अभियान अर्न्तगत किया वृक्षारोपण गुण्डम की शासकीय उचित मूल्य दुकान का किया शुभारंभ बीजापुर के गुण्डम प्रवास के दौरान केन्द्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह ने कैम्प परिसर में बरगद का पौधा तथा मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने सल्फी का पौधा रोपा। उन्होंने इस मौके पर कैम्प परिसर के सामने नवीन शासकीय उचित मूल्य दुकान का शुभारंभ किया। इस अवसर पर सीआरपीएफ, पुलिस एवं जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

केन्द्रीय मंत्री शाह ने छत्तीसगढ़ के रायपुर में राज्य में वामपंथी उग्रवाद की स्थिति की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की

केन्द्रीय गृह मंत्री ने सभी बलों और एजेंसियों को मार्च, 2026 तक वामपंथी उग्रवाद को पूर्णतया समाप्त करने के लक्ष्य की प्राप्ति की दिशा में संयुक्त प्रयास करने को कहा प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में केन्द्र सरकार मार्च, 2026 तक नक्सलवाद को पूर्णतया समाप्त करने के प्रति कटिबद्ध है हमारे सुरक्षाबलों के कारण पिछले एक साल में नक्सलियों को सबसे ज़्यादा नुकसान पहुंचा है जो एक बहुत बड़ी सफलता है रायपुर केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज छत्तीसगढ़ के रायपुर में राज्य में वामपंथी उग्रवाद की स्थिति की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय, उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा, केन्द्रीय गृह सचिव श्री गोविंद मोहन, छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव श्री अमिताभ जैन, पुलिस महानिदेशक श्री अशोक जुनेजा और केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के महानिदेशक उपस्थित थे। समीक्षा बैठक के दौरान केन्द्रीय गृह मंत्री ने सभी बलों और एजेंसियों को मार्च, 2026 तक वामपंथी उग्रवाद को पूर्णतया समाप्त करने के लक्ष्य की प्राप्ति की दिशा में संयुक्त प्रयास करने को कहा। बैठक के बाद अपने समापन संबोधन में केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में छत्तीसगढ़ पुलिस और अन्य सुरक्षाबलों ने बहुत अच्छे और समन्वित तरीके से काम किया है। उन्होंने कहा कि हमारे सुरक्षाबलों के कारण पिछले एक साल में नक्सलियों को सबसे ज़्यादा नुकसान पहुंचा है जो एक बहुत बड़ी सफलता है। श्री शाह ने कहा कि मार्च, 2026 से पहले नक्सलवाद को खत्म करने की दिशा में अभी हमें काफी काम करना बाकी है और इसमें NIA की बहुत प्रमुख भूमिका रहेगी। उन्होंने कहा कि CRPF, ITBP, BSF, छत्तीसगढ़ पुलिस और DRG मिलकर एक साल में बहुत बड़े लक्ष्य की ओर बढ़े हैं और निश्चित रूप से मार्च, 2026 से पहले ही हम नक्सलवाद को समाप्त कर देंगे। इससे पहले, आज केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने बीजापुर में गुण्डम फॉरवर्ड ऑपरेटिंग बेस का दौरा किया और बलों की ऑपरेशनल तैयारियों की समीक्षा की। श्री अमित शाह ने जवानों को 2024 में नक्सलवाद के खिलाफ मिली अप्रत्याशित सफलता पर बधाई दी और उन्हें इसी जोश के साथ नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई जारी रखने के लिए प्रोत्साहित किया, जिससे मार्च, 2026 तक देश को पूरी तरह से इस समस्या से मुक्ति दिलाई जा सके।

हर साल प्रदेश में बंद पड़ी खदानों में डूबने से हो जाती है 50 लोगो की मौतें

रायपुर जिले में छह वर्षों में 300 से अधिक लोगों की मौत बंद पड़ी खदानों में डूबने से हुई है। ये आंकड़े जिला आपदा प्रबंधन से मिले हैं। खदान में डूबने से हर साल औसतन 50 से अधिक लोगों की जान चली जाती है। इसी तरह आगजनी और सर्पदंश से मौतों का आंकड़ा दूसरे नंबर पर है। जिले में आगजनी और सर्पदंश से भी हर वर्ष औसतन 20 से 25 लोगों की मौत हो जाती है। पिछले 11 महीनों में प्राकृतिक आपदा से मृत्यु के 191 प्रकरण हैं, जिनमें मृतक के स्वजनों को सात करोड़ 52 लाख रुपये की सहायता राशि स्वीकृत की गई है। साल 2014 से 2024 तक लंबित प्रकरणों में भी मृतकों के स्वजनों को सहायता राशि दी गई है। चार-चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्राकृति आपदा से मृत्यु होने पर मृतकों के स्वजनों को चार-चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता राशि दी जाती है। इस राशि से मृतक के स्वजनों को अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने में बड़ी मदद मिलती है। इसमें पानी में डूबने के अलावा बिच्छूदंश, आकाशीय बिजली गिरने, भारी बारिश होने से पेड़ व मकान गिरने, खदान धसकने जैसी घटनाएं भी शामिल हैं। हालांकि, ऐसी घटनाओं से मौतों की संख्या बंद खदानों में डूबने, आगजनी और सर्पदंश से मृत्यु की तुलना में बहुत कम हैं। आर्थिक सहायता से होगा लाभ प्राकृतिक आपदा से जिन लोगों की मौत हुई है, उनमें ऐसे कई ऐसे थे जिनकी आय से ही परिवार का जीवन-यापन निर्भर था। ऐसे में उनकी मृत्यु से परिवार में आय के साधन भी बंद हो गए थे। इस सहायता राशि से मृतक के परिवार अब कोई व्यवसाय या अन्य किसी काम में लगा पाएंगे, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। इनका कहना प्राकृतिक आपदा से मृत्यु के 191 प्रकरणों में सहायता राशि की स्वीकृति दी गई है। मृतकों के स्वजनों को सात करोड़ 52 लाख रुपये बांटे गए हैं। ऐसे प्रकरणों में तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। डॉ. गौरव सिंह, कलेक्टर, रायपुर

जल्द ही उसलापुर से छूटेंगी नर्मदा, रीवा और भोपाल एक्सप्रेस, बिलासपुर रेलवे स्टेशन का दवाब होगा कम

बिलासपुर बहुत जल्द यात्रियों को बिलासपुर-इंदौर नर्मदा एक्सप्रेस, बिलासपुर-रीवा एक्सप्रेस, बिलासपुर-भोपाल एक्सप्रेस समेत कटनी रेलखंड पर चलने वाली ट्रेनों में यात्रा करने उसलापुर स्टेशन जाना पड़ेगा। रेल प्रशासन इसका प्रपोजल भी तैयार कर रहा है। हालांकि, रेलवे की ओर से अभी इसकी आधिकारिक पुष्टी नहीं हुई है। मगर, बिलासपुर रेल मंडल में इसकी सुगबुगाहट शुरू हो गई है। उसलापुर शहर का दूसरा प्रमुख रेलवे स्टेशन है। अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत इस स्टेशन को विकसित भी किया जा रहा है। आधे से ज्यादा कार्य हो चुके हैं। बचे कार्य जल्द पूरा हो जाएंगे। वहीं, बिलासपुर स्टेशन का भी कायाकल्प हो रहा है। 435 करोड़ खर्च कर रेलवे इस स्टेशन को विश्वस्तरीय बनाने के लिए तैयारी कर रही है। इस योजना के तहत जोनल स्टेशन का नया मॉडल भी बना लिया गया है। इस मॉडल पर गौर करें, तो पुरानी बिल्डिंग के सामने एक नई लाइन बिछाई जाएगी। यह पुरानी लाइन से जुड़ेगी। लाइन विस्तार के लिए ट्रेनों की आवाजाही रोकना जरूरी लाइन विस्तार तभी संभव है, जब पुरानी लाइनों पर ट्रेनों का परिचालन बंद रहे। रेलवे इसकी तैयारी भी कर रही है। जोनल स्टेशन में तीन प्लेटफार्म छह, सात और आठ ऐसे हैं, जहां कटनी रेलखंड की ट्रेनें छूटती हैं। इन ट्रेनों में नर्मदा, रीवा, भोपाल एक्सप्रेस के अलावा बिलासपुर-शहडोल, बिलासपुर-चिरमिरी पैसेंजर जैसी ट्रेनें शामिल हैं। इन ट्रेनों का परिचालन उसलापुर स्टेशन में शिफ्ट किए बिना लाइन विस्तार का कार्य संभव नहीं है। इसलिए रेलवे इस पर जोर दे रही है। बमुश्किल तीन से चार महीने में इस स्टेशन से इन ट्रेनों का परिचालन की उम्मीद है। रेलवे का मानना है कि जब तक अधिक से अधिक ट्रेनों का स्टापेज या परिचालन प्रारंभ नहीं होगा, उस स्टेशन का कद नहीं बढ़ेगा। इसी के तहत पिछले साल रायपुर से आने वाली ट्रेनों का स्टापेज उसलापुर किया गया है। नई व्यवस्था के तहत ट्रेन सीधे दाधापारा से उसलापुर पहुंचती हैं। इससे इंजन बदलने का झंझट भी खत्म हुआ है। बिलासपुर रेलवे स्टेशन पर दवाब होगा कम बिलासपुर रेलवे स्टेशन पर अधिक ट्रेनों की ठहराव की वजह से कहीं न कहीं जोनल स्टेशन में ट्रेनों का दबाव रहता है। इसी दबाव के चलते ट्रेनों को आउटर पर भी रोकना पड़ता है। कई बार मेल, आजाद हिंद एक्सप्रेस को दाधापारा रेलवे यार्ड में रोका गया है। हालांकि, यह स्थिति केवल जोनल स्टेशन में प्लेटफार्म पर जगह नहीं होने के कारण होती है। यदि कटनी रेलमार्ग की इन ट्रेनों को उसलापुर स्टेशन से रवाना किया जाता है और वापसी में इसी स्टेशन में परिचालन समाप्त किया जाता है, तो जोनल स्टेशन में काफी हद तक दबाव कम होगा। उसलापुर में अभी हो रहा है 17 ट्रेनों का ठहराव उसलापुर रेलवे स्टेशन में अभी 17 ट्रेनों का ठहराव है। इनमें आठ नियमित ट्रेनें हैं। अन्य ट्रेनें साप्ताहिक हैं। इन ट्रेनों का परिचालन शुरू होने से ट्रेनों की संख्या बढ़ जाएगी। इससे यात्री भी बढ़ जाएंगे। इसे देखते हुए ही रेल प्रशासन सुविधाओं में विस्तार कर रहा है।

शिवनाथ नदी में दूषित पानी छोड़ने का मामले में हाईकोर्ट कोर्ट ने टीम बनाकर निगरानी के दिए निर्देश

 बिलासपुर बिलासपुर हाईकोर्ट में शिवनाथ नदी में शराब फैक्ट्री के वेस्ट मटेरियल को छोड़ने और जल प्रदूषण के मामले में लगातार सुनवाई जारी है. जस्टिस रमेश कुमार सिन्हा और जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की बेंच के समक्ष पर्यावरण नियंत्रण बोर्ड ने अपनी रिपोर्ट पेश की. सुनवाई में रिपोर्ट पेश कर बताया गया कि प्रदूषण कम हुआ है. जिस पर कोर्ट ने टीम बनाकर निगरानी करने निर्देशित किया है. अब मामले में 3 फरवरी, 2025 को अगली सुनवाई होगी. पूरा मामला मुंगेली जिले धूमा स्थित भाटिया वाइन फैक्ट्री का है. फैक्ट्री के वेस्ट मटेरियल और दूषित पानी को नियमों का उल्लंघन करते हुए शिवनाथ नदी में छोड़ा जा रहा था। जिससे लाखों मछलियां मर गई. हाईकोर्ट ने इस पर मीडिया रिपोर्ट को आधार बनाकर जनहित याचिका मानते हुए सुनवाई शुरू की. बिलासपुर हाईकोर्ट ने 23 सितंबर 2024 को मामले में दूषित पानी के स्त्रोत की पहचान का आदेश दिया था. जिसके बाद 23 अक्टूबर 2024 को केस में सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि दूषित पानी कहां से बह रहा है, इसका पता नहीं लगाया जा सकता है. हालांकि नदी में पानी की गुणवत्ता में सुधार देखा गया है. कोर्ट ने इसे देखते हुए 16 दिसंबर, 2024 को आगे की निगरानी के लिए फिर से सूचीबद्ध किया था। जिसमें पर्यावरण नियंत्रण बोर्ड की तरफ से शासकीय अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि 21 नवंबर और 4 दिसंबर को जांच कर रिपोर्ट पेश की गई, जिसमें पानी का स्तर सामान्य पाया गया। वहीं कोर्ट ने पानी की स्थिति पर टीम बनाकर निगरानी करने निर्देशित दिया है. बता दें कि धूमा के पास शिवनाथ नदी में मछलियां मरी हुई मिली थी. शराब फैक्ट्री के अपशिष्ट से दूषित पानी छोड़ने से मौत की आशंका जताई गई. कुछ महीने पहले पथरिया एसडीएम भरोसा राम ठाकुर ने भाटिया शराब फैक्ट्री मर्चेंट के प्रबधंक को नोटिस जारी किया था. एसडीएम ने शराब फैक्ट्री के दूषित पानी को नदी में छोड़ने से जलीय जीव जंतु के खतरे को लेकर आशंका जताई थी.

18 दिसम्बर को मद्य निषेध दिवस पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित करने परिपत्र जारी

 गौरेला पेण्ड्रा मरवाही बाबा गुरू घासीदास जयंती 18 दिसम्बर को मद्य निषेध दिवस के रूप में प्रतिवर्ष मनाया जाता है। कलेक्टर लीना कमलेश मंडावी ने समाज कल्याण संचालनालय के दिशा निर्देशों के अनुरूप 18 दिसम्बर को मद्य निषेध दिवस पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित करने जिला शिक्षा अधिकारी, सभी मुख्य कार्यपालन अधिकारी, नगरपालिका परिषद अधिकारी गौरेला एवं पेण्ड्रा, मुख्य नगर पंचायत अधिकारी मरवाही एवं सभी प्राचार्य शासकीय महाविद्यालय गौरेला पेण्ड्रा एवं मरवाही को परिपत्र जारी किया है।            कलेक्टर ने मद्य निषेध दिवस पर ग्राम पंचायत स्तरों पर गठित भारत माता वाहिनी स्वसहायता समूहों के सहयोग से नशा मुक्ति प्रदर्शनी, रैली, गोष्ठी, नुक्कड़ नाटक, नारे, दीवार लेखन आदि आयोजित करने कहा है। इसके साथ ही रेडियों एवं दूरदर्शन से नशा मुक्ति कार्यक्रमों का प्रसारण, यथा संभव नशा पीड़ितों से प्रत्यक्ष संवाद विकसित कर उन्हें नशापान के दुष्परिणामों के जानकारी देने, नशा मुक्ति साहित्यों का वितरण, सोशल मीड़िया में प्रेरक स्लोगन, विद्यार्थियों में नशापान के विरूद्ध जागरूकता लाने तथा नशामुक्त भारत अभियान के अन्तर्गत ग्राम पंचायतों एवं नगरीय निकायों में चयनित मास्टर, वालिंटियर्स के माध्यम से नशापान के विरूद्ध विभिन्न कार्यक्रम आयोजित कराने कहा है। कार्यक्रम आयोजित करने के पश्चात पालन प्रतिवेदन भी उपलब्ध कराने कहा गया है।

सरकार ने जारी किया नया आदेश, अब रजिस्ट्री में भूमि पर वृक्ष का नहीं होगा मूल्यांकन

रायपुर  छत्तीसगढ़ सरकार ने लोगों को वृक्षों वाली भूमि के कारण रजिस्ट्री में होने वाली परेशानी से बचाने के लिए नया आदेश जारी किया है. अब रजिस्ट्री में भूमि पर वृक्ष का मूल्यांकन नहीं होगा, इससे रजिस्ट्री शुल्क के साथ पटवारी के पास चक्कर लगाने से मुक्ति मिल जाएगी. बता दें कि अब तक भूमि पर लगे वृक्ष का भी रजिस्ट्री के दौरान हिसाब देना होता था. इसमें सागौन, सरई जैसे मूल्यवान लकड़ियों के पेड़ों के लिए दर निर्धारित थी, जो भूमि के गाइडलाइन रेट में जुड़ जाती थी. इस कवायत से रजिस्ट्री शुल्क में वृद्धि तो होती ही थी, लेकिन उससे ज्यादा परेशानी पटवारियों के पास बिना वृक्ष की भूमि के प्रमाणपत्र बनाने में होती थी. पटवारी इस छोटी सी कवायद के लिए बार-बार चक्कर लगाते थे, और आखिर में लेन-देन से ही बात बनती थी.

खुलासा : शादी करने वाले कैडर आंदोलन से मुंह मोड़ सकते हैं, नतीजतन, शादी करने वाले किसी भी कैडर के लिए नसबंदी अनिवार्य है

जगदलपुर छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में गृहमंत्री अमित शाह के साथ मिलने आए पूर्व नक्सलियों ने नक्सली नेताओं के बारे में कई खुलासे किए हैं. उनका कहना है कि यदि कोई नक्सल कैडर शादी करना चाहता है, तो उसे पहले नसबंदी करवानी पड़ती है. माओवादी शब्दावली में नसबंदी एक बहुत ही आम शब्द है. शादी से वरिष्ठ सीपीआई (माओवादी) नेताओं के निर्देश पर इस प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है. तेलंगाना के एक पूर्व नक्सली को शादी से पहले नसबंदी की प्रक्रिया से गुजरने का निर्देश दिया गया था. कई साल बाद जब उसने सरेंडर किया, तो प्रक्रिया को उलटने के लिए दूसरी सर्जरी करवाई. इसके बाद एक लड़के का पिता बन पाया. ज्यादातर नक्सली सरेंडर के बाद इसी तरह परिवार शुरू करने के लिए प्रक्रिया को चुनते हैं.  केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को इसके प्रभाव से अवगत कराया गया. पूर्व नक्सली ने बताया, “जब मैं सीपीआई (माओवादी) का सदस्य था, तो मुझे शादी से पहले नसबंदी करवानी पड़ी. लेकिन जब मैं सरेंडर के बाद मुख्यधारा में शामिल हो गया, तो मैंने एक ऑपरेशन करवाया ताकि मैं पिता बन सकूं. दूसरे ऑपरेशन के बाद, मैं एक बच्चे का पिता बन गया.” दरअसल, नक्सल नेताओं के बीच ये धारणा है कि बच्चे पैदा होने के बाद उनके कैडर के लोग परिवार के मोह में पड़ जाएंगे. इस वजह से नक्सल आंदोलन को नुकसान पहुंचेगा. इस बात की भी आशंका है कि शादी करने वाले कैडर आंदोलन से मुंह मोड़ सकते हैं. नतीजतन, शादी करने वाले किसी भी कैडर के लिए नसबंदी अनिवार्य है. छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली मरकम दुला ने कहा कि नक्सली नेता नहीं चाहते कि कोई भी सदस्य भावनात्मक रूप से अपनी संतान से जुड़े, इसलिए ‘नसबंदी’ करवा दी जाती है. ओडिशा के मलकानगिरी के एक पूर्व माओवादी ने भी ऐसी ही कहानी साझा की है. सुकांति मारी ने कहा, “मेरे साथी कैडर से शादी करने से पहले उसे ‘नसबंदी’ करवानी पड़ी.” उसके पति को पुलिस मुठभेड़ में मार दिया गया. इसके बाद में उसने अधिकारियों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया. इस बातचीत के दौरान अमित शाह ने कहा कि वो इस बात से बेहद संतुष्ट हैं कि युवा हिंसा का रास्ता छोड़कर हथियार डाल रहे हैं. उन्होंने नक्सलियों से हथियार छोड़ने और मुख्यधारा में शामिल होने की अपील करते हुए कहा कि उनका पुनर्वास सरकार की जिम्मेदारी है. उन्होंने कहा, “मैं नक्सलियों से अपील करता हूं कि कृपया आगे आएं. हथियार छोड़ दें, आत्मसमर्पण करें और मुख्यधारा में शामिल हों. आपका पुनर्वास हमारी जिम्मेदारी है.” केंद्र ने आत्मसमर्पण करने वाले उग्रवादियों और नक्सलियों के लिए पुनर्वास नीति बनाई है.  

इण्डियन वाटर वर्क्स एसोशिएशन ने राष्ट्रीय सम्मेलन में अध्यक्षता के लिए उप मुख्यमंत्री साव को दिया आमंत्रण

रायपुर इंडियन वाटर वर्क्स एसोशिएशन ने रायपुर में होने वाले अपने 57वें राष्ट्रीय सम्मेलन के शुभारंभ कार्यक्रम की अध्यक्षता के लिए उप मुख्यमंत्री तथा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री अरुण साव को आमंत्रित किया है। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अधिकारियों एवं एसोशिएशन के सदस्यों ने उप मुख्यमंत्री श्री साव से मुलाकात कर इसके लिए आमंत्रण दिया। श्री साव ने अधिकारियों के आमंत्रण को स्वीकार करते हुए शुभारंभ सत्र की अध्यक्षता की सहमति दी है। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के प्रमुख अभियंता डॉ. एम.एल. अग्रवाल और मुख्य अभियंता श्री राजेश गुप्ता सहित विभागीय अभियंताओं की टीम ने उप मुख्यमंत्री से मिलकर आयोजन की अध्यक्षता का आमंत्रण दिया। इंडियन वाटर वर्क्स एसोशिएशन ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय को राष्ट्रीय सम्मेलन के शुभारंभ कार्यक्रम के मुख्य आतिथ्य के लिए आमंत्रित किया है। उल्लेखनीय है कि इंडियन वाटर वर्क्स एसोशिएशन के 57वें राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन रायपुर के जैनम मानस भवन में आगामी 10 जनवरी से 12 जनवरी तक किया गया है। तीन दिवसीय इस आयोजन में वाटर वर्क्स से जुड़े देश-विदेश के जाने-माने 400 से अधिक वरिष्ठ एवं अनुभवी इंजीनियर हिस्सेदारी करेंगे। छत्तीसगढ़ को दूसरी बार इस आयोजन की मेजबानी मिली है।

डबरी निर्माण से किसान मोहित हुआ आत्मनिर्भर

एमसीबी छत्तीसगढ़ के मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के  मनेंद्रगढ़ जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत महाई के एक छोटे से किसान श्री मोहित/पिता श्री लल्ला की जिंदगी हर बीतते दिन के साथ सूखती फसल की तरह निराशा में घिरता जा रहा था । मोहित के पास तीन एकड़ जमीन तो थी, लेकिन बिना सिंचाई साधन के वह जमीन सिर्फ बारिश की भरोसे पर निर्भर था । हर साल अनिश्चित बारिश और पानी की कमी ने उनके लिए खेती को घाटे का सौदा बना रहा था । जैसे-जैसे फसलें असफल हो रही थीं, मोहित का आत्मविश्वास टूटता जा रहा था। खेती के घाटे ने उन्हें मजबूर कर दिया कि वे अब मजदूरी का सहारा लें। एक किसान जिसकी जमीन कभी उसके जीवन का आधार थी, अब उसके लिए एक बोझ बन चुका था । लेकिन यह कहानी यहीं खत्म नहीं हुआ। यह कहानी मोहित के संघर्ष और उनकी किस्मत बदलने वाले एक अद्भुत बदलाव की है। मोहित का बारिश के भरोसे से आत्मनिर्भरता तक का सफर जब ग्राम पंचायत महाई में जिला प्रशासन ने किसानों की समस्याओं पर ध्यान दिया, तो मोहित की हालत ने अधिकारियों को सोचने पर मजबूर कर दिया। उनकी जमीन को देखकर यह साफ हो गया कि अगर सिंचाई की सुविधा मिल जाए, तो यह जमीन सिर्फ उपजाऊ ही नहीं, बल्कि समृद्धि का साधन बन सकती है। यहीं से शुरू हुआ बदलाव का सफर। मनरेगा योजना के तहत डबरी निर्माण कार्य को स्वीकृति मिली। डबरी निर्माण के लिए 2 लाख 28 हजार रुपए का प्रशासनिक स्वीकृत बजट पास किया गया। लेकिन सिर्फ बजट ही पर्याप्त नहीं था। सही स्थान का चयन, निर्माण सामग्री की उपलब्धता और जल संग्रहण को सुनिश्चित करना, इन सभी चुनौतियों का सामना ग्राम पंचायत महाई और जिला प्रशासन ने किया। विशेषज्ञों की मदद से मोहित के खेत में जलभराव वाली उपयुक्त जगह का चयन किया गया और मनरेगा के माध्यम से निर्माण कार्य शुरू हुआ। मोहित के साथ-साथ गांव वालों को भी मिला रोजगार इस डबरी निर्माण कार्य में न केवल मोहित का परिवार लाभान्वित हुआ, बल्कि गांव के कई मजदूरों को भी लाभ मिला । डबरी निर्माण ने पूरे गांव को 100 दिनों का रोजगार दिया । यह काम सिर्फ मोहित की जमीन को सिंचाई योग्य बनाने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह पूरे समुदाय को सशक्त बनाने की दिशा में भी एक बड़ा कदम था। जब डबरी का निर्माण पूरा हुआ, तो यह केवल एक जलाशय नहीं था, बल्कि मोहित के सपनों को नया आधार मिला । उनकी जमीन पर अब सिर्फ पानी का इंतजार नहीं था; यह एक ऐसी जमीन बन गई थी, जो सालभर पूरी तरह उपजाऊ होने वाला था । इस डबरी ने मोहित को न केवल पारंपरिक फसलों की पैदावार बढ़ाने का मौका दिया, बल्कि उन्हें नए प्रयोग करने का आत्मविश्वास भी दिया। उन्होंने अपनी जमीन पर सब्जी की खेती शुरू की और पहली बार मछली पालन का साहस किया। इस बार उन्हें मछली पालन से 50 हजार रुपए का मुनाफा हो रहा है। वहीं धान की फसल से 40 हजार रुपए की आय हो रहा है। मोहित कहते हैं कि “पहले मैं सिर्फ बारिश के भरोसे रहता था। फसल खराब होती थी, तो हाथ में कुछ भी नहीं बचता था। लेकिन अब मेरे पास अपनी डबरी है। मैं सब्जी और मछली पालन से भी अच्छी आय अर्जित कर रहा हूं। अब मुझे भविष्य के लिए चिंता नहीं बल्कि नई उम्मीदें हैं।” डबरी निर्माण ने दी मोहित की आत्मविश्वास को नई राह डबरी निर्माण ने सिर्फ उनकी आय नहीं बढ़ाई, बल्कि आत्मनिर्भरता की भावना भी जगाई। अब मोहित अपनी जमीन पर गर्व महसूस करते हैं। उनकी मेहनत और योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन ने उनके जीवन को पूरी तरह बदल दिया। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने जिस तरह से किसानों की समस्याओं को समझते हुए ठोस कदम उठाए हैं, वह ग्रामीण विकास का एक बेहतरीन उदाहरण है। डबरी निर्माण जैसी योजनाएं इस बात का प्रमाण हैं कि सही नीति और दृढ़ इच्छाशक्ति से छोटे किसानों की जिंदगी बदली जा सकती है। मोहित की डबरी सिर्फ एक जलाशय नहीं, बल्कि उनके संघर्ष की जीत का प्रतीक है। यह कहानी साबित करती है कि छोटे और प्रभावशाली बदलाव किस तरह से बड़े परिणाम ला सकते हैं। डबरी ने मोहित को न केवल आर्थिक स्थिरता दी, बल्कि आत्मनिर्भरता और आत्मसम्मान का तोहफा भी दिया। मोहित की कहानी हर उस किसान के लिए एक प्रेरणा है, जो संसाधनों की कमी के बावजूद बेहतर भविष्य का सपना देखता है। यह सिर्फ एक किसान की नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के ग्रामीण विकास की भी कहानी है, जहां हर बूंद से खुशहाली की फसल उगाई जा रही है।

एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों में कक्षा 6 वीं में प्रवेश हेतु ऑनलाइन आवेदन करने की तिथि में संशोधन अब अंतिम तिथि 31 दिसम्बर तक

 गौरेला पेण्ड्रा मरवाही, जिले में संचालित एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालयों-डोंगरिया, लाटा एवं नेवसा में शैक्षणिक सत्र 2025-26 में कक्षा 6वीं में प्रवेश हेतु प्रवेश हेतु ऑनलाइन आवेदन प्रारंभ हो गया है। आवेदन करने की तिथि में संशोधन किया गया है। अब अंतिम तिथि 10 दिसम्बर से बढ़ाकर 31 दिसम्बर (रात्रि 11.59 बजे) तक किया गया है। ऑनलाइन भरे गए फार्म में त्रुटि सुधार की तिथि 01 जनवरी से 08 जनवरी 2025 (रात्रि 11.59 बजे) तक निर्धारित है। प्रवेश परीक्षा 16 फरवरी 2025 रविवार को होगा। विद्यार्थियों के प्रवेश हेतु ऑनलाइन आवेदन फार्म संबंधित विकासखण्ड के एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय डोंगरिया, लाटा एवं नेवसा में संपर्क कर निर्धारित तिथि में निःशुल्क भरा जा सकता है। प्रवेश हेतु नियमावली एवं प्रवेश नीति 2025-26 का अवलोकन तथा ऑनलाइन पंजीयन वेबसाइट https://eklavya.cg.nic.in/ पर किया जा सकता है।

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