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UP में चार साल में 42 साधु-संतों की हत्या ….संपत्ति का लालच मुख्य वजह

कांग्रेस ने पिछले दो साल में 20 साधुओं की हत्या का दावा करते हुए डाटा जारी किया लखनऊ। अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और प्रयागराज के बाघंबरी गद्दी मठ के महंत नरेंद्र गिरि की असमय मौत पर उत्तर प्रदेश में राजनीति शुरू हो गई है। चार साल के भीतर प्रदेश के विभिन्न जिलों में 42 साधु-संतों की हत्या हुई है। कहीं संपत्ति का विवाद था तो कहीं वर्चस्व और गद्दी को लेकर हत्या की बाते सामने आईं। 2019 में श्री निरंजनी पंचायती अखाड़ा के सचिव महंत आशीष गिरि की संदिग्ध हालात में मौत का राज अभी भी खुल नहीं सका है। इसी तरह 2018 में देवरिया में साधु सज्जाराम, हरभजन और चेले की हत्या, रायबरेली में पुजारी प्रेमदास की हत्या भी चर्चा में रही। 2019 में रायबरेली के ऊंचाहार में राम जानकी मंदिर के पुजारी बाबा प्रेमदास का मंदिर के गेट पर लटका मिला था। खास बात यह है उस समय रायबरेली के डीएम संजय खत्री थे, वही अब वर्तमान में प्रयागराज के डीएम हैं। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने पिछले दो साल में 20 साधुओं की हत्या का दावा करते हुए डाटा जारी किया था। उन्होंने सोशल मीडिया पर एक फोटो जारी किया था। जिसमें उत्तर प्रदेश के नक्शे पर जिलावार आंकड़ा जारी किया गया है। लिखा गया है कि उत्तर प्रदेश में हत्याओं का अंबार है, यह कैसा रामराज्य है। प्रयागराज में आशीष गिरि सुसाइड केस: निरंजनी अखाड़े के सचिव महंत आशीष गिरि की 17 नवंबर 2019 को संदिग्ध हालात में मौत हो गई थी। पुलिस ने रिवाल्वर से गोली मारकर आत्महत्या करने की बात कही थी। वह पिथौरागढ़ के रहने वाले थे और घटना के वक्त पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी के आश्रम दारागंज में रहते थे। औरैया का ट्रिपल मर्डर: 14 अगस्त 2018 को औरेया बिधूना कोतवाली के भयानक नाथ मंदिर में बदमाशों ने चारपाई में हाथ पैर बांधकर साधु लज्जाराम, हरभजन और सेवक की जीभ काटकर हत्या कर दी। इसके बाद स्थानीय लोगों ने जमकर बवाल किया, जिसमें आगजनी और पथराव में कई लोग घायल हुए थे। बुलंदशहर में गला रेता गया: बुलंदशहर के अनूपशहर थाना क्षेत्र में 28 अप्रैल 2020 को मंदिर में सो रहे साधु गरीबदास उर्फ जगनदास व शेर सिंह उर्फ सेवादास की गला रेतकर हत्या कर दी गई। कबीर मठ के प्रशासनिक अधिकारी की हत्या: लखनऊ में कबीर मठ के प्रशासनिक अधिकारी धीरेंद्र दास की उन्हीं के शिष्य ने साथियों के साथ मिलकर 24 अगस्त 2020 को हत्या कर दी। हत्या के पीछे प्रॉपर्टी का विवाद सामने आया था। 32 तारीखों में 42 हत्याएं 07 अप्रैल 2017: गोसाईगंज थाना क्षेत्र में मनोहर दास (50) की बेरहमी से हत्या। पुजारी के सर, पेट, सीना व गुप्तांग पर वार किया गया था। 20 जून 2017: कुशीनगर पडरौना कोतवाली क्षेत्र के बेतिया गाँव में स्थित शिव मंदिर के पुजारी जय प्रकाश व उनकी पत्नी की गला काटकर हत्या। 14 जुलाई 2018: मेरठ के भगवानपुर क्षेत्र के अब्दुल्लापुर में साधु क्रांति प्रसाद की पीट-पीटकर हत्या की गई। 18 जुलाई 2018: पीलीभीत में बाबा लाल गिरी की हत्या हुई। 19 अगस्त 2018: मेरठ में पुजारी विनोद व सेवादार सुल्तान की हत्या। 31 अगस्त 2018: पीलीभीत जिला स्थित ग्राम भूड़ कोनी दीनारपुर स्थित शिव मंदिर के पुजारी रामेश्वर दयाल (65) की गला रेत कर हत्या। 31 अगस्त 2018: बाराबंकी के रामनगर थाना क्षेत्र में थालकला गांव के बाहर काले पहाड़ बाबा मंदिर के पुजारी शमशेर सिंह (65) की धारदार हथियार से हत्या। 13 अगस्त 2018: सुल्तानपुर के पयागीपुर में स्थित पहलवान वीर बाबा मंदिर के पुजारी श्यामलाल (75) की मंदिर परिसर में पीट-पीटकर हत्या। 12 अगस्त 2018: अलीगढ़ जिला के शेखूपुर सटकना में शिव मंदिर के महंत कालिदास, मंदिर में पुजारी सोनपाल और महेंद्र उर्फ बड़ेल की हत्या। 02 जनवरी 2019: रायबरेली के ऊंचाहार में राम जानकी मंदिर के पुजारी बाबा प्रेमदास का शव मंदिर के बाहर फांसी पर लटका मिला। 14 जून 2019: मथुरा में एक साधु की हत्या । 28 अक्टूबर 2019: मुरादाबाद में साधु राजेंद्र गिरि की हत्या। 18 जनवरी 2020: चित्रकूट में महंत अर्जुनदास की हत्या। 25 फरवरी 2020: पीलीभीत में पुजारी विष्णु सहाय की हत्या। 25 अप्रैल 2020: गोरखपुर के बुजारी कोईल दास की हत्या। 14 जुलाई 2020: मेरठ में सेवादार की हत्या। 01 सितंबर 2020: हदरोई में साधु हीरादास, साध्वी मीरा दास व उनके बेटे चेतराम की हत्या। 06 सितंबर 2020: कन्नौज में साधु शालिग्राम की हत्या। 24 सितंबर 2020: बागपत टीकरी में साधु की हत्या। 24 सितंबर 2020: मेरठ की सरधना गंग नहर में साधु वेशभूषा वाले युवक का शव मिला। 09 सितंबर 2020: बिजनौर के ग्राम पहाड़पुर खुर्द में मंदिर परिसर में सो रहे योगानंद महाराज की संदिग्ध परिस्थिति में मौत। 05 अक्टूबर 2020: मथुरा में साधु कैलाश नाथ की हत्या। 10 अक्टूबर 2020: गोंडा में इटियाथोक में रामजानकी मंदिर के महंत सम्राट दास की गोली मारकर हत्या। 11 अक्टूबर 2020: गोंडा में रामजानकी मंदिर के पुजारी बाबा सम्राट दास की गोलीमारकर हत्या। 09 अक्टूबर 2020: बागपत में यमुना नदी में साधु वेशभूषा वाले अधेड़ शव मिला। 05 दिसंबर 2020: गोरखपुर के हरपुर बुदहट में साधु ललई की गला रेतकर हत्या। 04 अप्रैल 2021: गोरखपुर के चौरीचौरा में साधु परोरा की सिर कुचलकर हत्या। 26 जून 2021: बिजनौर में गांव उमरी में मां काली मंदिर के पुजारी दयानंद गिरि की पीटपीट कर हत्या। 29 जून 2021: मेरठ के मुंडाली के बढ़ला गांव में साधु चंद्रपाल की ईंट से कुचलकर हत्या। 15 जुलाई 2021: बुलंदशहर के बुगरासी चौकी के गांव बुकलाना में चामुड़ा मंदिर की साध्‍वी की गला दबाकर हत्‍या। 24 जुलाई 2021: गोरखपुर के मकरहट स्थित रामजानकी मंदिर के साधु राजेंद्र बाबा की संदिग्ध हालात में मौत।

क्या मठ की अथाह संपत्ति बनी महंत नरेंद्र गिरि की मौत की वजह?

महंत नरेंद्र गिरि (Mahant Narendra Giri) की सोमवार को संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी. उनका शव उनके कमरे में फांसी के फंदे से लटका मिला था. उनके कमरे से एक सुसाइड नोट (Suicide Note) भी बरामद हुआ है. वहीं महंत की आत्‍महत्या को लेकर तमाम सवाल उठ रहे हैं. महंत नरेंद्र गिरी की मौत को बाघंबरी गद्दी मठ (Baghambari Math) और निरंजनी अखाड़े (Niranjani Akhara) की अकूत धन-संपदा और वैभव को लेकर भी जोड़ा जा रहा है. बाघंबरी गद्दी मठ और निरंजनी अखाड़े से जुड़े लोग हत्‍या की भी आशंका जता रहे हैं. बाघंबरी गद्दी मठ और निरंजनी अखाड़े की अकूत धन-संपदा (Property Dispute) को लेकर विवादों का रिश्ता पुराना रहा है. मीडिया में आई तमाम रिपोर्ट के मुताबिक, मठ और अखाड़े की सैकड़ों बीघे जमीनें बेचने, सेवादारों और उनके परिवारीजनों के नाम मकान, जमीन खरीदने को लेकर अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि और उनके करीबी शिष्य आनंद गिरि के बीच विवाद लंबे समय से रहा है. मंहत नरेंद्र गिरि के अधीन संपत्तियां: बाघंबरी मठ: प्रयागराज के अल्लापुर इलाके में बाघंबरी गद्दी और मठ है, जो करीब 5 से 6 बीघे जमीन में है. यहां निरंजनी अखाड़े के नाम एक स्कूल और गौशाला भी है. दारागंज में भी अखाड़े की जमीन है. प्रयागराज में हनुमान मंदिर जिसे संगम तट पर लेटे हुए हनुमान जी के नाम से जाना जाता है, वो भी इसी बाघंबरी मठ का ही मंदिर है. जहां प्रयागराज और संगम आने वाले सभी श्रद्धालु मत्था जरूर टेकते हैं. मांडा (प्रयागराज) में 100 बीघा और मिर्जापुर के महुआरी में भी 400 बीघे से ज्यादा की जमीन बाघंबरी मठ के नाम है. मिर्जापुर के नैडी में 70 और सिगड़ा में 70 बीघा जमीन अखाड़े की है. प्रयागराज और आसपास के इलाकों में निरंजनी अखाड़े के मठ, मंदिर और जमीन की कीमत 300 करोड़ से ज्यादा की है, जबकि हरिद्वार और दूसरे राज्यों में संपत्ति की कीमत जोड़े तो वो हजार करोड़ के पार है. निरंजनी अखाड़े की कुंभ नगरी उज्जैन और ओंकारेश्वर में 250 बीघा जमीन, आधा दर्जन मठ और दर्जनभर आश्रम हैं. कुंभ नगरी नासिक में 100 बीघा से अधिक जमीन, दर्जनभर आश्रम और मंदिर हैं. बड़ोदरा, जयपुर, माउंटआबू में भी करीब 125 बीघा जमीन, दर्जन भर मंदिर और आश्रम हैं. हरिद्वार स्थित मुख्यालय के अधीन दर्जनभर मठ-मंदिर हैं. नोएडा में मंदिर और जमीन है तो वहीं वाराणसी में मंदिर और आश्रम के साथ करोड़ों की जमीन है.

घोर कलियुग …. वृद्धाश्रम में जीते जी चार बुजुर्ग कर रहे खुद का श्राद्ध और पिंडदान

भोपाल। जिन बच्चों के लिए जिंदगी में कमरतोड़ मेहनत की। उनके सपनों को पूरा करने के लिए दिन-रात एक कर दिया। उनकी उम्मीदों को ही अपना भविष्य मान बैठे।…. और जब वो बच्चे बड़े होकर आगे बढ़े, पद मिला, पैसा मिला…लेकिन उस ‘परछाई’ को भूल गए जो ताउम्र उनके लिए ही जीती रही। यह हकीकत उन बुजुर्गों की है, जो शहर के विभिन्न वृद्धाश्रमों में रह रहे हैं। अपने ही बच्चों से धोखा खा चुके ये बुजुर्ग इस पितृपक्ष में खुद ही अपना पिंडदान कर रहे हैं। अपना घर के ही चार बुजुर्ग खुद ही अपना श्राद्ध और पिंडदान कर रहे हैं। वहीं, आसरा और आनंदधाम वृद्धाश्रम में ही अपनी देह त्याग चुके बुजुर्गों का पिंडदान करने अमावस्या के दिन तर्पण संस्कार आयोजित किया जाएगा। जिस बेटे पर ताउम्र गर्व करता रहा… उसने ही कर दिया तिरस्कार अपना घर वृद्धाश्रम में रहने वाले बुजुर्ग प्रेम नारायण सोनी(78), अजय गौड़(80), सुधीर मोहलकर(65), किशन बत्रा(85) खुद ही अपना श्राद्ध और पिंडदान कर रहे हैं। प्रेमनारायण सोनी बताते हैं कि जिस बेटे पर गर्व करता था, उसने ही तिरस्कार कर दिया। शादी के बाद उसके तेवर बदल गए। मुझसे मेरे ही एटीएम कार्ड तक छीन लिए। उसकी इन आदतों ने मुझे घर से निकलने के लिए मजबूर कर दिया इसलिए वृद्धाश्रम में रहने का निर्णय लिया। यही वजह है कि मैं जीते जी अपना श्राद्ध और पिंडदान कर रहा हूं, ताकि उसके ऊपर यह बोझ भी न रहे। अजय गौड़ बताते हैं कि जब खुद के बारे में सोचते हैं तो एक ही सवाल बार-बार सामने आता था कि हमारे मरने के बाद श्राद्ध और पिंडदान कौन करेगा। यही सोच कर जीते जी अपना श्राद्ध और पिंडदान कर रहे हैं। कुछ ऐसा ही दर्द किशन बत्रा और सुधीर मोहलकर का भी है। अब वृद्धाश्रम ही परिवार…हर बुजुर्ग की भावना की करते हैं कद्र अपना घर संचालक माधुरी मिश्रा ने बताया कि हमारे यहां जिन बुजुर्गों की पहले मौत हो चुकी है और उनके बच्चे अंतिम संस्कार तक में नहीं आए। वे वृद्धाश्रम में परिवार की तरह रह रहे। उनके लिए श्राद्ध और पिंडदान किया जाएगा। हमारे यहां पर 4 बुजुर्ग खुद का श्राद्ध और पिंडदान कर रहे हैं। उनके लिए आश्रम में व्यवस्था की हैं। आसरा वृद्धाश्रम की राधा चौबे ने बताया कि वृद्धाश्रम में जिन बुजुर्गों की पहले मौत हो चुकी है, उनका अमावस्या पर श्राद्ध किया जाएगा। आनंद वृद्धाश्रम के सचिव आरआर सुरंगे ने बताया कि मृत बुजुर्गों का अमावस्या पर पिंडदान और श्राद्ध किया जाएगा।

पीएम मोदी के बर्थडे पर बना कीर्तिमान, महज 9 घंटे में 2 करोड़ लोगों को वैक्सीन लगी

नई दिल्ली। भारत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर शुक्रवार को महज 9घंटे में ही कोरोना वायरस के खिलाफ 2 करोड़ से ज्यादा लोगों को वैक्सीन लगाने का रिकॉर्ड बनाया है। अभी भी वैक्सीनेशन जारी है। यानी यह आंकड़ा अभी और ऊपर जाएगा। इससे पहले दोपहर डेढ़ बजे तक ही एक करोड़ से ज्‍यादा डोज लगाए जा चुके थे। वैक्‍सीनेशन प्रोग्राम की रफ्तार का अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि हर सेकेंड 527 से ज्‍यादा डोज लगाए जा रहे हैं। हर घंटे 19 लाख से ज्‍यादा डोज दिए जा रहे हैं। राज्यों को 77.77 करोड़ से ज्‍यादा डोज मुहैया कराए गए स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने कहा कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को वैक्सीन के 77.77 करोड़ से ज्‍यादा डोज उपलब्ध कराए गए है। राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के पास अभी वैक्सीन के 6.17 करोड़ से ज्‍यादा डोज उपलब्ध हैं। चौथे दिन एक करोड़ से ज्यादा वैक्सीन डोज लगे इससे पहले 27 अगस्त, 31 अगस्त और 6 सितंबर को देश में एक करोड़ से ज्यादा वैक्सीन डोज लगाए गए थे। स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने गुरुवार को आह्वान किया था कि देश में वैक्सीनेशन ड्राइव को रफ्तार देनी चाहिए। यह प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन का सबसे अच्छा तोहफा होगा। भाजपा ने इस मौके पर देशभर में अपनी यूनिट्स को निर्देश दिया था कि ज्यादा से ज्यादा लोगों को वैक्सीन का डोज लगाया जाए। 20 दिनों का सेवा और समर्पण अभियान BJP अध्यक्ष जेपी नड्डा ने PM मोदी के जन्मदिन पर 20 दिनों का सेवा और समर्पण अभियान शुरू किया है, जो 7 अक्टूबर तक चलेगा। पार्टी इस दौरान मोदी के सार्वजनिक जीवन में दो दशक पूरा करने का भी जश्न मनाएगी। इसमें वह वक्‍त भी शामिल है, जिस दौरान मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री हुआ करते थे।

मैच शुरू होने से 30 मिनट पहले न्यूजीलैंड ने रद्द किया पाकिस्तान का दौरा, पीएम इमरान की नहीं सुनी

रावलपिंडी। न्यूजीलैंड क्रिकेट टीम ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए पाकिस्तान का दौरा रद्द कर दिया है। कीवी क्रिकेट बोर्ड ने रावलपिंडी में पहला वनडे शुरू होने से 30 मिनट पहले यह फैसला लिया। इस दौरे पर 3 वनडे और 5 टी-20 मैच खेले जाने थे। न्यूजीलैंड को टीम की सुरक्षा से जुड़ा इंटेलिजेंस अलर्ट मिला था। अब टीम को जल्द से जल्द पाकिस्तान से निकालने की तैयारी हो रही है। इमरान खान ने की थी न्यूजीलैंड की PM से बात पाकिस्तान ने इस दौरे को बचाने की पूरी कोशिश की। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने न्यूजीलैंड की प्रधानमंत्री जेसिंडा अर्डर्न को फोन कर सुरक्षा का पूरा आश्वासन देने का वादा भी किया। इमरान ने कहा कि पाकिस्तान के पास दुनिया का सबसे अच्छा इंटेलिजेंस सिस्टम है और कीवी टीम के ऊपर किसी भी तरह का खतरा नहीं है। हालांकि उनका आश्वासन भी काम नहीं आया और न्यूजीलैंड ने दौरा रद्द करने का फैसला ले लिया। होटल से बाहर नहीं आईं दोनों टीमें पहला वनडे मैच भारतीय टाइमिंग के अनुसार दोपहर 3 बजे से शुरू होना था, यानी टॉस दोपहर 2.30 बजे होना था, लेकिन दोनों टीमों में से कोई भी टीम होटल से बाहर नहीं आई। खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ को होटल में ही रुकने को कहा गया। 2009 में श्रीलंकाई टीम पर हुआ था आतंकी हमला पाकिस्तान में क्रिकेट टीमों की सुरक्षा हमेशा चिंता का विषय रही है। 2009 में लाहौर में श्रीलंकाई टीम की बस पर आतंकी हमला हुआ था। इसमें किसी की जान तो नहीं गई थी, लेकिन कुछ खिलाड़ी घायल हुए थे। इसके बाद सभी टीमों ने पाकिस्तान का दौरा करना बंद कर दिया था। पाकिस्तान अपने घरेलू मुकाबले UAE में खेलने पर मजबूर हो गया था। पिछले कुछ सालों से पाकिस्तान ने दोबारा अपने शहरों में अंतरराष्ट्रीय मैचों का आयोजन करना शुरू किया था, जिसके बाद साउथ अफ्रीका, वेस्टइंडीज, जिम्बाब्वे जैसी टीमों ने पाकिस्तान जाकर खेला भी। अफगानिस्तान संकट के कारण खतरा बढ़ा हाल ही में तालिबान ने अफगानिस्तान की सत्ता हासिल कर ली है। इसके बाद से पाकिस्तान में भी सुरक्षा को लेकर खतरा पैदा हो गया है। टी-20 वर्ल्ड कप से पहले इंग्लैंड को भी पाकिस्तान का दौरा करना है। अब देखना है कि इंग्लैंड टीम आती है या नहीं।

PM मोदी के जन्मदिन पर टि्वटर पर राष्ट्रीय बेरोजगार दिवस ट्रेंड, लोग बोले- दो करोड़ नौकरियां कहां हैं?

नई दिल्ली। पीएम मोदी के जन्मदिन के मौके पर राष्ट्रीय बेरोजगार दिवस नाम का टॉपिक ट्रेंड हो रहा है। जिसमें उनसे ‘दो करोड़ नौकरियां कहां हैं’ पूछा जा रहा है। सवाल पूछने वालों की फेरहिस्त में युवाओं के साथ-साथ कई राजनीतिक दिग्गज और रिटायर्ड IAS अधिकारी भी हैं। यूथ कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने पीएम पर कटाक्ष करते हुए लिखा है कि देश अपने पीएम को राष्ट्रीय बेरोजगार दिवस की शुभकामनाएं दे रहा है। राम तीरथ (@IESramteerath) नाम के यूजर ने एक अखबार की रिपोर्ट के हवाले से बताया कि अगस्त महीने में 15 लाख से ज्यादा लोगों की नौकरियां गईं। ग्रेजुएट बड़ी संख्या में बेरोजगार हैं। वहीं गगनदीप कौर (@ikaur_deep) नाम की यूजर लिखती हैं जब से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सत्ता में आए हैं भारत रोजगार मुक्त देश हो गया है। मोदी आपको एक और मास्टर स्ट्रोक के लिए साधुवाद। तो वहीं रिटायर्ड IAS अधिकारी सूर्य प्रताप सिंह ने पीएम मोदी को जन्मदिन की शुभकामनाएं देते हुए पूछा है कि 2 करोड़ नौकरियां कहां हैं। प्रधानमंत्री की तस्वीरों का इस्तेमाल कर तमाम फनी मीम्स भी बनाए जा रहे हैं। इसके अलावा पूर्व क्रिकेटर और बीजेपी नेता रहे किर्ती आजाद (@KirtiAzaad) ने हैशटैग राष्ट्रीय बेरोजगार दिवस का इस्तेमाल करते हुए लिखा, नहीं चाहिए अच्छे दिन, बुरे दिन ही लौटा दो प्लीज। वहीं प्रतीक मिश्रा (@Prateek79077318) नाम के यूजर लिखते हैं कि सरकार रोजगार के नाम पर पैसा कमाती है, सबसे पहले वह कम सीटों वाली भर्तियों की जानकारी प्रकाशित करवाती है, इसके बाद आवेदन शुल्क के नाम पर 600 से 2000 रुपये लिए जाते हैं, फिर सेंटर्स के बारे में विकल्प पूछते हैं और आखिर में सेंटर को शहर से बाहर कर देते हैं। ट्विटर पर ट्रेंड के बीच मुकाबला: ट्विटर पर भी ट्रेंड के बीच एक तरह की रेस चल रही है, कभी राष्ट्रीय बेरोजगार दिवस ट्रेंड कर रहा है तो कभी हैप्पी बर्थडे मोदी जी ट्रेंड में आगे निकल जा रहा है। इसके अलावा जुमला दिवस और श्री नरेंद्र मोदी का ट्रेंड भी लगातार रेस में बना हुआ है। यूथ कांग्रेस ने किया था ऐलान: पीएम मोदी के जन्मदिन को यूथ कांग्रेस द्वारा ​’राष्ट्रीय बेरोजगार दिवस’ मनाने का ऐलान किया गया था। इसकी तैयारियों में यूथ कांग्रेस पहले से जुटी हुई थी। इसके लिए नुक्कड़ नाटक किए जाएंगे, देश के कई शहरों में पद यात्रा निकालने का भी ऐलान किया गया है। इधर, NDA ने कांग्रेस की इस तैयारी पर कहा है कि वह अपनी बेरोजगारी दूर करने के लिए बेरोजगार दिवस मना रही है।

विश्लेषण : एक झटके में क्यों बदल गई पूरी बीजेपी सरकार? क्या फेल हो गया गुजरात मॉडल ?

अहमदाबाद। गुजरात में बीजेपी सरकार के नए मंत्रिमंडल ने शपथ ले ली है. नई कैबिनेट में पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी की सरकार वाले एक भी मंत्री को जगह नहीं दी गई है. बीजेपी ने सभी पुराने मंत्रियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया है. यानी एक तरह से आगामी विधानसभा चुनावों से क़रीब एक साल पहले बीजेपी ने गुजरात में पूरी सरकार को बदल दिया है. विश्लेषक मानते हैं कि बीजेपी ने ये फेरबदल गुजरात में दरकती सियासी ज़मीन को रोकने और देशभर के बेजीपी नेताओं को संदेश देने के लिए किया है. सवाल ये भी उठ रहा है कि जिस गुजरात मॉडल का प्रचार बीजेपी ने देशभर में किया है, क्या अब वो कमज़ोर पड़ गया है? नए मंत्रियों में से चुनिंदा के पास ही सरकार में रहने का अनुभव है. इनमें से राघवजी पटेल 90 के दशक में शंकरसिंह वघेला सरकार में मंत्री रह चुके हैं, जबकि कृष्णानाथ राणा राज्य की नरेंद्र मोदी सराकर में मंत्री थे. राजेंद्र त्रिवेदी आनंदीबेन पटेल की सरकार में मंत्री थे. क्यों हुआ इतना बड़ा फ़ेरबदल? वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक जतिन देसाई मानते हैं कि बीजेपी को लग रहा था कि गुजरात में उसका मज़बूत किला दरक रहा है और अगर तुरंत कुछ नहीं किया गया तो हालात हाथ से बाहर हो जाएँगे. देसाई कहते हैं, “रूपाणी और उनकी टीम का प्रदर्शन बहुत ख़राब था और बीजेपी नेताओं को लगा कि इसके दम पर चुनाव नहीं लड़ा जा सकता है. बीजेपी ने सरकार विरोधी लहर को कम करने और लोगों की नाराज़गी से बचने के लिए सरकार को बदला है.” वहीं बीबीसी गुजराती सेवा के संपादक अंकुर जैन कहते हैं, “इसके दो बड़े कारण हैं. पहला तो ये कि बीजेपी जनता को ये संदेश देना चाहती है कि अगर मंत्री भी काम नहीं कर करेंगे तो हम उन्हें भी हटा देंगे. आने वाले दिनों में हो सकता है कि बीजेपी इस बात को ज़ोर-शोर से जनता में उठाए कि पार्टी के लिए जनता पहले है और अपने नेता बाद में.” अंकुर कहते हैं, “भारतीय जनता पार्टी के लिए गुजरात मॉडल बेहद अहम है. नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने गुजरात में कई प्रयोग कर किए हैं. ऐसे में दूसरा कारण ये हो सकता है कि नरेंद्र मोदी और अमित शाह बाक़ी राज्यों के मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों को ये संदेश दे रहे हों कि अगर वो भी काम ठीक से नहीं करेंगे, तो उन्हें भी हटाया जा सकता है.” अंकुर जैन के मुताबिक़, “अमित शाह और नरेंद्र मोदी ने गुजरात में इतना बड़ा फेरबदल करके देशभर के बीजेपी नेताओं और मंत्रियों को ये संदेश दे दिया है कि पूर्ण इम्यूनिटी या सुरक्षा किसी के पास नहीं हैं. पार्टी जब चाहे, जिसे चाहे हटा सकती है. यूपी या दूसरे राज्यों के सीएम को ये संदेश देने की कोशिश की गई होगी कि अगर आप पार्टी की नीति या लाइन के हिसाब से काम नहीं कर रहे हैं तो आपको भी बदला जा सकता है.” ख़तरे को भांप लिया है अमित शाह और नरेंद्र मोदी ने? गुजरात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का गृह राज्य है. बीजेपी शीर्ष नेतृत्व इस बात को अच्छी तरह से समझता है कि अगर गुजरात में सियासी ज़मीन दरकी, तो वह केंद्र में उनकी सत्ता पर भी सवाल उठेंगे. विश्लेषक मानते हैं कि गुजरात में लोगों के असंतोष और नाराज़गी से नेतृत्व वाकिफ़ था और ऐेसे में पार्टी ने बड़ा क़दम उठाते हुए पूरी सरकार को ही बदल दिया है. अंकुर जैन कहते हैं, “कोरोना महामारी के दौरान बीजेपी सरकार ने अपनी रही-सही साख भी गँवा दी थी, ख़ासकर कोविड प्रबंधन को लेकर सरकार को तीखी आलोचना का सामना करना पड़ा. बीजेपा के शीर्ष नेता नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने इस ख़तरे को भाँप लिया था. उन्हें लगने लगा था कि अगर ऐसे ही सब चलता रहा, तो 2022 के चुनाव में पार्टी को गुजरात में हार का सामना भी करना पड़ सकता है.” वहीं जतिन देसाई कहते हैं, “सरकारी आँकड़ों के मुक़ाबले वास्तविकता में कहीं अधिक लोगों की मौत कोरोना की वजह से हुई है और इसे लेकर गुजरात के लोगों में भारी असंतोष है. बीजेपी पूरी सरकार को हटाकर उस असंतोष को ही ख़त्म करने का प्रयास कर रही है.” “एंटी इन्कम्बेंसी और सरकार के ख़राब प्रदर्शन की वजह से लोगों में बीजेपी के ख़िलाफ़ जो भावना बन रही थी, उसे रोकने के लिए सरकार को बदला गया है. ख़ासकर मोदी और शाह के लिए गुजरात बेहद अहम है, ऐसे में पार्टी यहाँ कोई रिस्क नहीं लेना चाहती है.” कुछ महीने पहले केंद्र सरकार में मंत्रिमंडल में फ़ेरबदल हुआ था और अन्य पिछड़ा वर्ग से बड़ी तादाद में मंत्रियों को रखा गया था. प्रधानमंत्री मोदी की नई सरकार में 12 दलित मंत्री हैं और 27 ओबीसी मंत्री हैं. जतिन देसाई कहते हैं, “जिस तरह यूपी चुनाव को ध्यान में रखते हुए मोदी सरकार में ओबीसी मंत्रियों को जगह दी गई है उसी तरह गुजरात की नई सरकार में भी जातिगत समीकरणों को साधने की कोशिश की गई है.” गुजरात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का गृह राज्य है. पार्टी यहां कोई जोख़िम उठाना नहीं चाहती है गुजरात में सीएम और मंत्रियों को बदले जाने से पहले ही ये चर्चाएँ चलने लगी थीं कि सरकार में फ़ेरबदल हो सकता है. लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि ना सिर्फ़ मुख्यमंत्री को बदला बल्कि पूरी कैबिनेट को ही बदल दिया गया. क्या गुजरात मॉडल नाकाम हो गया है, इस सवाल पर देसाई कहते हैं, “गुजरात के विकास मॉडल की बात होती है, लेकिन अगर आप आँकड़ें देखेंगे तो सामाजिक विकास के सूचकांकों में गुजरात देश के बाक़ी राज्यों के मुक़ाबले काफ़ी पीछे है.” ”बीजेपी हाई कमान को ये लगता रहा था कि गुजरात उनका गढ़ है और वहाँ पार्टी का कुछ नहीं हो सकता. लेकिन अब पार्टी ने गुजरात के गढ़ में अपने सभी कमांडरों को हटा दिया है इससे ये तो बिल्कुल स्पष्ट है कि गुजरात में बीजेपी में और सरकार में सबकुछ ठीक नहीं है. पार्टी ने अपने अंदरूनी आकलन में ये भी स्वीकार किया होगा कि यहाँ क़िला दरक गया है.” समूची सरकार को हटाने के बाद ये सवाल उठा है कि ऐसे करके बीजेपी सरकार … Read more

‘हैप्पी बर्थडे, मोदी जी’, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री को दी कुछ इस अंदाज में बधाई

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज (Prime Minister Narendra Modi) यानी 17 नवंबर को अपना 71वां जन्मदिन मना रहे हैं. साल 1950 में इसी तारीख को उनका जन्म हुआ था और वे इस बार 72वें साल में प्रवेश कर रहे हैं. उम्र के इस पड़ाव पर आकर भी नरेंद्र मोदी ऊर्जावान बने हुए हैं. वहीं इस मौके पर देशभर के तमाम नेता उन्हें जन्मदिन की बधाई दे रहे हैं. कई वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएं दी है. इस बीच कांग्रेस सांसद राहुल गांधी (Congress MP Rahul Gandhi) ने भी उन्हें जन्मदिन की बधाई देते हुए ट्वीट किया है. राहुल गांधी ने ट्विटर पर लिखा, “Happy birthday, Modi ji.” वहीं दूसरी तरफ सोशल मीडिया (Social Media) पर कई लोग उनकी लंबी उम्र की कामना कर रहे हैं. गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने भी ट्वीट कर पीएम को उनके खास दिन की बधाई दी है. अमित शाह ने अपने ट्वीट में लिखा, “मोदी जी ने सुरक्षा, गरीब-कल्याण, विकास व ऐतिहासिक सुधारों के समांतर समन्वय का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया है. पीएम मोदी जी के संकल्प व समर्पण ने देशवासियों में एक नई ऊर्जा व आत्मविश्वास पैदा किया है, जिससे आज देश नित नए कीर्तिमान स्थापित कर आत्मनिर्भरता की ओर अग्रसर है.’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मिदन को भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कार्यकर्ता ऐतिहासिक बनाने में जुटे हैं. इसके लिए कई तरह के अभियान चलाए जा रहे हैं. संस्कृति मंत्रालय 17 सितंबर से प्रधानमंत्री को मिले उपहारों और स्मृति-चिन्हों की ई-नीलामी आयोजित करने जा रहा है. इस नीलामी से मिलने वाली राशि नमामि गंगे मिशन को दी जाएगी. बीजेपी इस दिन को बनाना चाहती है एतिहासिक वहीं बीजेपी आज ज्यादा से ज्यादा संख्या में Covid-19 वैक्सीनेशन (Covid-19 Vaccination) का रिकॉर्ड बनाना चाहती है. इस रिकॉर्ड को पूरा करने के लिए पार्टी ने हेल्थ वॉलेंटियर्स को यह सुनिश्चित करने के लिए तैयार किया है कि आज एक दिन में ज्यादा से ज्यादा लोगों को वैक्सीन लगाई जा सके. भारत ने इससे पहले एक दिन में एक करोड़ से ज्यादा COVID-19 टीके लगाने का रिकॉर्ड कायम किया है.

एक्सप्रेस-वे : मुंबई से दिल्ली का सफर होगा सिर्फ 13 घंटे में

नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली और आर्थिक राजधानी मुंबई को जोड़ने के लिए महत्वाकांक्षी ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे (Delhi Mumbai Expressway) बनाया जा रहा है. करीब 1 लाख करोड़ रुपए खर्च कर यह 8 लेन का महामार्ग तैयार किया जा रहा है. इससे खास बात यह होगी कि मुंबई से दिल्ली के बीच की दूरी 150 किलोमीटर कम हो जाएगी और मुंबई से दिल्ली का सफ़र सिर्फ़ 13 घंटों का रह जाएगा. केंद्रीय महामार्ग विकास और परिवहन मंत्री नितिन गडकरी (Nitin Gadkari, Minister of Road Transport and Highways) के मुताबिक देश के दो महानगरों को जोड़ने वाला 1350 किलोमीटर लंबा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे का काम जनवरी 2023 तक पूरा करने का लक्ष्य है.एक अनुमान के मुताबिक एक्सप्रेस-वे की वजह से हर साल 32 करोड़ लीटर ईंधन की बचत होगी. फिलहाल एक्सप्रेस वे के 350 किलोमीटर तक का काम पूरा हो गया है. एक्सप्रेस-वे से ना सिर्फ मुंबई और दिल्ली के बीच की दूरियां कम होंगी, बल्कि महामार्ग के किनारे इंडस्ट्रियल टाउनशिप और स्मार्ट शहर भी बनाए जाएंगे. पूरे महामार्ग में 92 जगहों में इंटरवल स्पॉट विकसित किए जाएंगे. ई-वाहनों के लिए 4 लेन रिजर्व रखे जाएंगे एक्सप्रेस-वे में वैसे तो 8 लेन की व्यवस्था होगी, लेकिन इन 8 लेन में से दोनों ओर के दो-दो लेन रिजर्व रखे जाएंगे. इस तरह से 4 लेन सिर्फ ई वाहन के आने-जाने के लिए ही रिजर्व होंगे. इस तरह का यह देश का पहला एक्सप्रेस-वे होगा. यानी यह एक्सप्रेस-वे पर्यावरण के हिसाब से भी सही साबित होगा. इस वजह से इसमें ईंधन की अच्छी-खासी बचत होगी. महामार्ग में थोड़े-थोड़े अंतर में ई वाहनों की चार्जिंग की सुविधा रहेगी. 16 सितंबर को अब तक हुए कामों का जायजा लेंगे नितिन गडकरी महामार्ग का 245 किलोमीटर तक का रास्ता मध्य प्रदेश से होकर जाएगा. इन 245 किलोमीटर में से 100 किलोमीटर तक का काम पूरा हो चुका है. अब तक हुए काम का केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी 16 सितंबर को जायजा लेने आ रहे हैं. महामार्ग की बजाए स्लिप लेन में टोल प्लाजा बनाया जाएगा. इससे यह होगा कि यात्री जिस शहर में प्रवेश कर रहे होंगेस उन्हें सिर्फ वहीं टोल देने की ज़रूरत होगी. अब तक मुंबई से दिल्ली जाने के लिए लोग या तो रेल मार्ग का सहारा लेते हैं या हवाई मार्ग का. सड़क मार्ग से आम यात्री जाना कम ही पसंद करते हैं. उसकी वजह है कि सड़क मार्ग की यात्रा लंबी और थकाऊ है और कहीं-कहीं सड़कें अच्छी ना होने की वजह से यात्रा में परेशानियां भी होती हैं. कई जगहों पर ट्रैफिक भी जाम हो जाता है. लेकिन जब दिल्ली मुंबई एक्सप्रेस-वे तैयार हो गया, तो इन सभी समस्याओं को निजात मिल जाएगा.

EXCLUSIVE : टीम इंडिया में कलह, रोहित को उपकप्तानी से हटाना चाहते थे कोहली

नई दिल्ली। विराट कोहली ने गुरुवार को टीम इंडिया के टी-20 फॉर्मेट की कप्तानी छोड़ने का ऐलान कर दिया। कोहली अक्टूबर में होने वाले टी-20 वर्ल्ड कप के बाद इस फॉर्मेट की कप्तानी छोड़ देंगे। हालांकि वे टेस्ट और वनडे मैचों के कप्तान बने रहेंगे। कोहली ने सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर कर कप्तानी छोड़ने के फैसले की जानकारी दी और सभी को हैरानी में डाल दिया। विराट के कप्तानी छोड़ने के ऐलान के बाद एक चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। न्यूज एजेंसी PTI के सूत्रों के मुताबिक विराट कोहली उपकप्तानी के पद से रोहित शर्मा को हटाना चाहते थे। विराट लिमिटेड ओवर्स में रोहित को उपकप्तानी से हटाने के प्रस्ताव के साथ चयनकर्ताओं के पास गए थे। भारतीय कप्तान का ऐसा कहना था कि रोहित अब 34 साल के हो गए हैं। ऐसे में वनडे में केएल राहुल और टी-20 में ऋषभ पंत को उपकप्तान बनाना चाहिए। हालांकि कोहली का यह प्रस्ताव बोर्ड को पसंद नहीं आया, क्योंकि उनका मानना था कि विराट वास्तव में अपना कोई उत्तराधिकारी नहीं चाहते। पहले भी आई विवादों की बात वैसे से ये कोई पहला मौका नहीं है जब विराट कोहली और रोहित शर्मा के बीच विवादों की खबरें सामने आई हो। 2019 के वनडे वर्ल्ड कप के दौरान ऐसी खबरें आई थी कि विराट और रोहित एक दूसरे से बात तक नहीं करते। हालांकि बाद में हेड कोच रवि शास्त्री ने इन सभी बातों से इनकार किया था। इतना ही नहीं एक खबर तो ये भी सामने आई थी कि रोहित ने विराट को सोशल मीडिया पर अनफॉलो तक कर दिया है। इस बात में कोई सच्चाई नहीं निकली थी। युवा खिलाड़ियों पर भरोसा नहीं करते कोहली रिपोर्ट में साथ ही ये भी कहा गया है कि भारतीय कप्तान को टीम में सभी खिलाड़ियों को समर्थन हासिल नहीं है। खासतौर पर विराट टीम के जूनियर खिलाड़ियों को बीच मझधार में छोड़ देते हैं। पीटीआई से बात करते हुए एक पूर्व क्रिकेटर ने कहा- विराट के साथ समस्या संवाद की है। महेंद्र सिंह धोनी का कमरा 24 घंटे खुला रहता था और कोई भी खिलाड़ी अंदर जा सकता था। उनके साथ वीडियो गेम खेल सकता था, खाना खा सकता था और जरूरत पड़ने पर क्रिकेट के बारे में बात भी कर सकता था, लेकिन मैदान के बाहर कोहली से संपर्क कर पाना बेहद मुश्किल काम है। उपकप्तानी के लिए 3 दावेदार विराट कोहली के कप्तानी छोड़ने पर रोहित शर्मा को टी-20 टीम का कप्तान बनाए जाने के पूरे चांस है और उपकप्तानी की जिम्मेदारी ऋषभ पंत और केएल राहुल को मिल सकती है। साथ ही तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह भी इस पद के रेस में आगे रहेंगे। BCCI के सूत्र ने कहा- पंत का दावा मजबूत है लेकिन लोकेश राहुल को नकारा नहीं जा सकता क्योंकि वह भी IPL कप्तान है। इतना ही नहीं तेज गेंदबाज जसप्रीत बुमराह भी छुपा रुस्तम साबित हो सकते हैं।

ऑनर किलिंग : UP के प्रेमी जोड़े का दिल्ली से अपहरण, लड़के का शव ग्वालियर और लड़की का राजस्थान में फेंका

ग्वालियर। उत्तम यादव। उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद ऑनर किलिंग का मामला तीन स्टेट से जुड़ गया। प्रेमी जोड़े का दिल्ली से लड़की के परिवार वालों ने अपहरण किया था। ग्वालियर के आंतरी में दोनों की बेरहमी से हत्या की। युवक का प्राइवेट पार्ट भी काट दिया गया। लड़की के परिजन हत्या के बाद लड़के का शव ग्वालियर में आंतरी के पास झाड़ियों में जबकि यहां से 100 किलोमीटर दूर मुरैना और धौलपुर के बीच लड़की का शव झाड़ियों में फेंक कर चले गए। शव मिलने के 42 दिन बाद हत्या का खुलासा हुआ है। ग्वालियर के आंतरी स्थित भरथरी की पुलिया के पास 5 अगस्त को युवक का शव सड़े-गले अवस्था में मिला था। पहली नजर में मामला संदिग्ध था। तत्काल पुलिस ने फॉरेंसिक एक्सपर्ट को बुलाया था। फॉरेंसिक एक्सपर्ट ने मृतक का गुप्तांग काटे जाने की पुष्टि की थी, लेकिन मृतक की पहचान नहीं हो सकी थी। इस मामले में पुलिस अभी पड़ताल ही कर रही थी कि बुधवार शाम को बड़ा खुलासा हुआ। यूपी के फिरोजाबाद स्थित सिरसागंज थाना पुलिस ग्वालियर आई। पुलिस ने बताया है कि मृतक का शव जहांगीरपुर निवासी उत्तम सिंह यादव (20) का है। यूपी से फिरोजाबाद से शुरू कहानी ग्वालियर में खत्म यूपी में जिला फिरोजाबाद के थाना सिरसागंज में जहांगीरपुर निवासी सुगड़ सिंह ने अपने बेटे उत्तम यादव की गुमशुदगी 10 अगस्त को दर्ज कराई थी। 12 अगस्त को जान से मारने की नीयत से अपहरण करने के संबंध में गांव के ही कुछ लोगों के नाम दर्ज कराए। सिरसागंज पुलिस मामले की जांच में जुटी। जांच में यह पता चला कि उत्तम यादव का पड़ोसी नेहा पुत्री देवीराम यादव (16) से प्रेम प्रसंग था। दोनों 31 जुलाई को घर से दिल्ली भाग गए। उत्तम के एक दोस्त से नेहा के परिवार वालों को इसकी जानकारी मिली। दोनों को नेहा के पिता देवीराम यादव, चाचा शेरनाम सिंह और दो अन्य लोगों ने 2 अगस्त को दिल्ली में पकड़ लिया और पिनाहट ले आए। यहां दोनों को समझाया, लेकिन वे नहीं माने। इसके बाद दोनों को कार में डालकर भिंड ले आए। यहां से ग्वालियर के आंतरी के भरथरी पुलिया के पास 2 से 3 अगस्त की रात दोनों की गला घोंटकर हत्या कर दी। यमुना नदी में शव तलाशती रही पुलिस इस मामले में जब पुलिस ने लड़की के चाचा, पिता और भाई को संदेह के आधार पर हिरासत में लिया तो उन्होंने उत्तम यादव के साथ अपनी बेटी की हत्या की बात कुबूल ली। उन्होंने हत्या करके शव यमुना नदी में फेंकने की बात कही। इस पर तय हो गया कि हत्या कर दी गई है। शव को पुलिस युमना नदी में तलाश करती रही, लेकिन कुछ नहीं मिला। ऐसे पता चला फिरोजाबाद पुलिस ने आरोपियों का मोबाइल लोकशन खंगाला। जहां-जहां सभी गए थे, उस रूट पर पड़ने वाले थानों में अज्ञात लाशों की जानकारी जुटाई। धौलपुर और आंतरी में मिले दोनों शवों की हत्या एक तरीके से की गई थी। दोनों शवों के गले पर रस्सी के गांठ के 8 निशान मिले। उम्र और हाइट एक जैसी थी। इसके बाद पुलिस दोनों जगहों पर गई और पूरी डिटेल निकाली और पूरे हत्याकांड का खुलासा किया।

राहुल गांधी ने कहा- भाजपा वाले झूठे हिन्दू हैं, ये धर्म की दलाली करते हैं

नई दिल्ली . कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने बुधवार को एक बार फिर से BJP पर निशाना साधा। उन्होंने तंज कसते हुए पूछा कि भाजपा ने जब GST लागू किया तो दुकानदारों के घर में लक्ष्मी डाली या निकाली? कांग्रेस ने जब मनरेगा लागू किया तब लोगों के घर में लक्ष्मी डाली या निकाली? राहुल ने कहा कि हमने RTI लागू करके करोड़ों लोगों के हाथों में दुर्गा की शक्ति डाली। उन्होंने कहा कि भाजपा वाले अपने आपको हिंदू पार्टी कहते हैं और पूरे देश में लक्ष्मी और दुर्गा पर आक्रमण करते हैं। ये झूठे हिन्दू हैं। ये हिन्दू धर्म का प्रयोग करते हैं। ये धर्म की दलाली करते हैं। राहुल ने ये बातें महिला कांग्रेस के स्थापना दिवस पर दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में कही। संघ और भाजपा की विचारधारा से कभी समझौता नहीं करूंगा आज देश में RSS वाली बीजेपी की सरकार है। इनकी विचारधारा और हमारी विचारधारा दोनों अलग हैं। या एक विचारधारा देश पर राज करेगी या दूसरी विचारधारा देश पर राज करेगी। कांग्रेस का कार्यकर्ता होने के नाते मैं बाकी दूसरी विचारधाराओं के साथ समझौता कर सकता हूं, लेकिन भाजपा और संघ की विचारधारा से कभी समझौता नहीं कर सकता। गांधीजी, सावरकर और गोडसे की विचारधारा में क्या अंतर है? ये एक बड़ा और गहरा सवाल है। RSS की विचारधारा ने उस हिन्दू की छाती में 3 गोली क्यों मारी? बीजेपी और संघ के लोग कहते हैं कि वो हिन्दू पार्टी हैं। पिछले सौ-दो सौ साल में किसी एक व्यक्ति ने हिन्दू धर्म को समझा हो और उसे अपने प्रैक्टिस बनाई है तो उस व्यक्ति का नाम महात्मा गांधी है। इसे हम भी मानते हैं और भाजपा-RSS के लोग भी मानते हैं। अगर महात्मा गांधी ने हिन्दू धर्म को समझा और उन्होंने पूरी जिंदगी हिन्दू धर्म को समझने में लगा दी तो RSS की विचारधारा ने उस हिन्दू की छाती में तीन गोली क्यों मारीं? जिसको पूरी दुनिया एक उदाहरण मानती है। नेल्सन मंडेला से लेकर मार्टिन लूथर किंग तक कहते थे कि महात्मा गांधी एक उदाहरण थे और गांधी ने अहिंसा को सबसे अच्छे तरीके से समझा और सिखाया। राहुल ने लक्ष्मी और दुर्गा का मतलब भी बताया राहुल ने लक्ष्मी और दुर्गा का मतलब भी बताया। उन्होंने कार्यक्रम में मौजूद महिला कांग्रेस की कार्यकर्ताओं से पूछा कि लक्ष्मी का मतलब क्या है? किसी ने नारी शक्ति तो किसी ने धन से जोड़कर जवाब दिया। इस पर राहुल ने बताया कि जम्मू में मैंने किसी से ये सवाल पूछा तो उन्होंने बताया, लक्ष्मी वो शक्ति है जो घर में पैसा लाती है। गलत इंटरप्रिटेशन। लक्ष्मी शब्द लक्ष्य से आता है। लक्ष्य को जो शक्ति पूरा करती है उसे लक्ष्मी कहा जाता है। राहुल ने फिर दुर्गा का मतलब बताया। उन्होंने कहा- देखिए हमारा धर्म जो है बड़ा लॉजिकल है। दुर्गा शब्द आता है दुर्ग से। दुर्ग का मतलब किला। दुर्गा मतलब वो शक्ति जो रक्षा करती है। मतलब साफ है। जो लक्ष्य को पूरा करे वो लक्ष्मी और जो रक्षा करे वो दुर्गा।  लक्ष्मी और दुर्गा को भाजपा और कांग्रेस की योजनाओं से जोड़ा राहुल ने लक्ष्मी और दुर्गा को आज की राजनीति से जोड़ते हुए कहा- राजनेता का काम दुर्गा (रक्षा) और लक्ष्मी (लक्ष्य) की शक्तियों को हर व्यक्ति तक पहुंचाने का होता है। बिना भेदभाव के हर व्यक्ति के घर में दुर्गा मतलब रक्षा, लक्ष्मी मतलब लक्ष्य पूरा करने की शक्ति डालने का काम हर राजनेताओं का होता है। मैंने कुछ गलत बोला? ठीक पटरी पर चल रही है गाड़ी? अब सवाल पूछता हूं… जब मोदी जी ने नोटबंदी की तब उन्होंने हमारी माताओं-बहनों के घर में लक्ष्मी की शक्ति बढ़ाई या कम की? कम की न…। जब नरेंद्र मोदी जी ने किसानों पर तीन कानून लागू किए उनसे लक्ष्य पूरे करने वाली शक्ति उन्होंने छीनी या उनको दी?…छिनी। जब जीएसटी लागू किया। छोटे दुकानदारों के घर में उन्होंने लक्ष्मी और दुर्गा डाली या निकाली? और जब कांग्रेस पार्टी ने मनरेगा लागू किया तो करोड़ों लोगों के घर में लक्ष्मी की शक्ति डाली या निकाली? जब हमने आरटीआई लागू किया तो करोड़ों लोगों के हाथों में दुर्गा की शक्ति डाली है या नहीं? जब हमने संविधान की लड़ाई लड़ी? वन मैन वन बोर्ड दिया तो हमने दुर्गा की शक्ति बढ़ाई या कम की? लक्ष्मी की शक्ति ज्यादा की या कम की? …तो ये हो क्या रहा है? वो पूरे देश में लक्ष्मी और दुर्गा पर आक्रमण करते हैं वो अपने आपको हिन्दू पार्टी कहते हैं। और पूरे देश में लक्ष्मी और दुर्गा पर आक्रमण करते हैं। जहां ये जाते हैं। कहीं ये लक्ष्मी को मारते हैं तो कहीं ये दुर्गा को मारते हैं। और फिर कहते हैं कि हम हिन्दू हैं। ये किस प्रकार के हिन्दू हैं? ये झूठे हिन्दू हैं। ये हिन्दू धर्म का प्रयोग करते हैं। ये हिन्दू धर्म की दलाली करते हैं। मगर ये हिन्दू नहीं हैं। राहुल ने भीड़ से पूछा…बात समझ आई..क्लियर थी? मीडिया को भी घेरा, कहा-टीवी पर ये मेरा भाषण नहीं दिखाएंगे राहुल ने अपने संबोधन में मीडिया को भी घेरा। उन्होंने कहा कि अभी जो मैं भाषण दे रहा हूं। यह टीवी पर चल ही नहीं सकता। यहां मीडिया के कई साथी हैं। उनसे पूछिए क्या ये भाषण उनके चैनल पर चलेगा? मैं बताता हूं, ये चल ही नहीं सकता। इस पर भीड़ में ठहाके गूंजने लगे। महात्मा गांधी के आसपास इसलिए रहती थीं महिलाएं.. राहुल गांधी ने आगे बताया कि महात्मा गांधी की तस्वीरों में आप लोगों ने देखा होगा कि उनके आसपास दो-तीन महिलाएं होती थीं। क्या आपने RSS प्रमुख मोहन भागवत के आसपास किसी महिला को देखा है? ऐसा इसलिए क्योंकि कांग्रेस महिलाओं का सम्मान करती है और उन्हें मंच देती है। मोदी और RSS देश को महिला प्रधानमंत्री नहीं दे सकते। कांग्रेस ने ऐसा किया है। कांग्रेस के निशान हाथ को हर धर्म से जोड़ा राहुल ने स्थापना दिवस पर महिला कांग्रेस का नया लोगो जारी जारी किया। उन्होंने सभा में मौजूद लोगों से इसका मतलब भी पूछा और आखिरी में खुद इसके बारे में बताया। राहुल ने कहा आपने भगवान शिव, महावीर, बुद्ध, गुरुनानक, जीसस क्राइस्ट, साईं बाबा सबकी तस्वीरों में सामने हाथ होता है। मुस्लिम धर्म में चिह्न … Read more

NCRB की रिपोर्ट … UP रेप के मामले में टॉप पर, बच्चों के खिलाफ सबसे ज्यादा अपराध MP में

नई दिल्ली। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) ने बुधवार को 2020 में हुए अपराधों का डेटा जारी किया है। इसके मुताबिक 2020 में हर रोज औसतन 80 मर्डर हुए। सबसे ज्यादा हत्या के मामले उत्तर प्रदेश में आए। कुल अपराधों की बात करें तो 2019 के मुकाबले 2020 में क्राइम रेट में 28% का इजाफा हुआ है। किडनैपिंग, महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध के मामले कम हुए हैं। 2020 में देश में कुल 66,01,285 मामले दर्ज हुए। जो 2019 के 51,56,158 मुकाबले 14,45,127 ज्यादा हैं। 2019 के मुकाबले 1% बढ़े मर्डर के मामले रिपोर्ट कहती है कि 2020 में देश में कुल 29,193 मर्डर हुए। यानी हर दिन औसतन 80 मर्डर। जो 2019 के 28,915 के मुकाबले 79 ज्यादा हैं। सबसे ज्यादा 10,404 लोगों की हत्याएं आपसी विवाद की वजह से हुईं, वहीं 4,034 हत्याएं पुरानी दुश्मनी की वजह से हुईं। सबसे ज्यादा हत्या के मामले उत्तर प्रदेश में आए। उत्तर प्रदेश के बाद सबसे ज्यादा हत्याएं बिहार (3,150), महाराष्ट्र (2,163), मध्य प्रदेश (2,101) और पश्चिम बंगाल (1,948) में हुई हैं। राजधानी दिल्ली में पिछले साल 472 हत्याएं हुईं। जिन लोगों की हत्या हुई उनमें 38.5% की उम्र 30 से 45 साल के बीच थी, वहीं 35.9% की उम्र 18 से 30 साल के बीच थी। 16.4% की उम्र 45 से 60 साल के बीच थी, वहीं 4% ऐसे बुजुर्गों की हत्या हुई जिनकी उम्र 60 साल से ज्यादा थी। देश में महिलाओं के खिलाफ अपराध के 3,71,503 मामले दर्ज हुए। जो 2019 के 4,05,326 मामलों के मुकाबले 8.3% कम थे। इनमें सबसे ज्यादा 30% मामले पति और उसके रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता करने के थे। वहीं 23% मामले शील भंग करने के इरादे से महिलाओं पर हमला करने के थे। 16.8% मामले किडनैपिंग के तो 7.5% मामले रेप के थे। बच्चों के खिलाफ अपराध के 42.6% मामले किडनैपिंग के बच्चों के खिलाफ अपराध के देश में 1,28,531 मामले दर्ज हुए। जो 2019 के मुकाबले 13.2% कम हैं। बच्चों खिलाफ होने वाले अपराधों में सबसे ज्यादा 42.6% मामले किडनैपिंग के हैं। बच्चों के खिलाफ यौन हिंसा मामले भी 38.8% दर्ज हुए। दलितों के खिलाफ अपराध में 9.4% का इजाफा 2020 में दलितों के खिलाफ अपराध के कुल 50,291 मामले दर्ज हुए, जो 2019 के मुकाबले 9.4% ज्यादा हैं। इनमें 32.9% मामले मारपीट से आई साधारण चोट के थे। 8.5% मामले SC/ST एक्ट के थे। आदिवासियों के खिलाफ अपराध में भी 9.3% का इजाफा 2020 में आदिवासियों के खिलाफ अपराध के कुल 8,272 मामले दर्ज हुए। 2019 के मुकाबले आदिवासियों के खिलाफ अपराध में 9.3% का इजाफा हुआ है।

यूपी में प्रियंका गाँधी के मास्टर स्ट्रोक से अन्य दलों में खलबली

लखनऊ। यूपी चुनाव को लेकर सभी पार्टियां ताल ठोक रही हैं. कांग्रेस कांग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी के मास्टर स्ट्रोक से अन्य दलों में खलबली मच गयी है। अगले साल होने वाले UP विधानसभा चुनाव में कांग्रेस महासचिव और UP प्रभारी प्रियंका गांधी वाड्रा रायबरेली या अमेठी की किसी सीट से मैदान में उतर सकती हैं। यदि ऐसा हुआ तो प्रियंका, गांधी परिवार की पहली सदस्य होंगी जो विधानसभा चुनाव लड़ेंगी। इससे पहले गांधी परिवार के सभी सदस्यों ने सिर्फ लोकसभा चुनाव लड़ा है। सूत्रों का कहना है कि प्रियंका की पहली पसंद अमेठी है, क्योंकि वहां राहुल गांधी की हार का बदला लेने के लिए अमेठी में लोकसभा चुनावों की जमीन तैयार करेंगी, जिससे स्मृति ईरानी को 2024 के लोकसभा चुनावों में चुनौती दी जा सके। प्रशांत किशोर ने भी प्रियंका को दिया है सुझाव बीते दिनों लखनऊ में हुई मीटिंग में एडवायजरी कमेटी ने भी प्रियंका से कहा था कि उनके चुनाव मैदान में आने से कांग्रेस को UP में नई ताकत मिलेगी। चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने भी प्रियंका को सुझाव दिया था कि उन्हें विधानसभा चुनाव में खुद मैदान में उतरना चाहिए। प्रियंका के चुनाव के लिए कांग्रेसियों ने कसी कमर प्रियंका गांधी ने चुनाव लड़ने या ना लड़ने को लेकर खुद कोई संकेत नहीं दिए हैं, लेकिन सूत्रों का कहना है कि प्रियंका गांधी के ऑफिस की तरफ से चुनावी तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। इसके लिए रायबरेली और अमेठी के डेटा जुटाए जा रहे हैं। रायबरेली या अमेठी ही क्यों? राजनीतिक जानकारों का कहना है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में अमेठी से राहुल गांधी के चुनाव हार जाने के बाद वहां गांधी परिवार का दबदबा कम हुआ है। वहीं, कांग्रेस चेयरपर्सन सोनिया गांधी की सेहत ठीक नहीं होने के चलते रायबरेली में भी गांधी परिवार का जनता से संपर्क कम हुआ है। ऐसे में प्रियंका के चुनाव लड़ने से अमेठी और रायबरेली क्षेत्र की जनता के साथ कांग्रेस के संबंधों को मजबूती मिल सकती है। रायबरेली और अमेठी बरसों से गांधी परिवार का गढ़ रहा है और प्रियंका इस रिश्ते को कमजोर नहीं होने देना चाहती हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद तो औपचारिक रूप से कह चुके हैं कि UP विधानसभा चुनाव में प्रियंका कांग्रेस का चेहरा होंगी। रायबरेली में अब तक सिर्फ 3 बार हारी है कांग्रेस रायबरेली में 1952 से लेकर 2019 तक लोकसभा चुनाव में सिर्फ तीन बार कांग्रेस हारी है। 1977, 1988 और 1996 में इस सीट पर कांग्रेस को हार मिली थी। इस सीट से फिरोज गांधी, इंदिरा गांधी, शीला कौल, अरुण नेहरू और सतीश शर्मा चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचे थे। अमेठी में 18 चुनाव में 16 बार कांग्रेस की जीत अमेठी में 17 लोकसभा और 2 उपचुनाव में कांग्रेस ने 16 बार जीत हासिल की है। सिर्फ तीन बार 1977, 1998 और 2019 में कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा है। 1977 में इमरजेंसी के बाद हुए चुनाव में पहली बार कांग्रेस हारी थी। इसके बाद 1980 में संजय गांधी यहां से सांसद बने। संजय की मौत के बाद राजीव गांधी ने अमेठी की बागडोर संभाली। फिर 1999 में सोनिया गांधी ने चुनाव जीता। इसके बाद 2004, 2009 और 2014 में राहुल गांधी यहां से जीते , लेकिन 2019 में स्मृति ईरानी ने राहुल को हरा दिया था। कांग्रेस ने फंड जुटाने के लिए UP में नया तरीका भी निकाला है। प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने एक सर्कुलर जारी कर कहा है कि जिसे भी टिकट चाहिए उसे 25 दिसंबर तक पार्टी फंड में 11 हजार रुपए जमा कराने होंगे। टिकट के लिए पहले आवेदन पत्र जमा करना होगा।

दिल्ली में बारिश से हाहाकार, टूटा 46 साल का रिकॉर्ड

नई दिल्ली. भारत मौसम विज्ञान विभाग ने शनिवार को बताया कि इस साल मानसून के अत्यधिक असामान्य मौसम में दिल्ली (Delhi Weather News) में अभी तक 1100 मिलीमीटर बारिश हुई जो कि 46 वर्षां में सबसे अधिक और पिछले साल दर्ज की गई बारिश से लगभग दोगुनी है. हालांकि ये आंकड़ें बदल सकते हैं, क्योंकि शहर में दिन में और बारिश का अनुमान है. बता दें कि दिल्ली में भारी बारिश की वजह से न सिर्फ इंदिरा गांधी एयरपोर्ट (IGI Airport) के कुछ हिस्सों में पानी भर गया है बल्कि दिल्ली के कई इलाके पानी-पानी हो गए हैं. वहीं, कई जगह जलजमाव की वजह से ट्रैफिक जाम लग गया है. आईएमडी के एक अधिकारी ने कहा, ‘सफदरजंग वेधशाला ने 1975 के मानसून के मौसम में 1,150 मिलीमीटर बारिश दर्ज की थी. इस साल बारिश पहले ही 1,100 के आंकड़ें को पार कर गयी है और मानसून का मौसम अभी खत्म नहीं हुआ है.’ आईएमडी के अनुसार, सामान्य तौर पर दिल्ली में मानसून के मौसम के दौरान 648.9 मिमी बारिश दर्ज की जाती है. मानसून का मौसम शुरू होने पर एक जून से 11 सितंबर तक शहर में सामान्य तौर पर 590.2 मिमी बारिश होती है। मानसून 25 सितंबर तक दिल्ली से चला जाता है. इसके अलावा अगले दो दिनों में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है. 17-18 सितंबर के आसपास बारिश आने का अनुमान है. इस बारिश बना रही रिकॉर्ड साल 2003 में राष्ट्रीय राजधानी में 1,050 मिमी बारिश हुई थी. दिल्ली में 2011, 2012, 2013, 2014 और 2015 में मानसून के मौसम के दौरान क्रमश: 636 मिमी, 544 मिमी, 876 मिमी, 370.8 मिमी और 505.5 मिमी बारिश हुई. जबकि आईएमडी के आंकड़ों के अनुसार, 2016 में 524.7 मिमी, 2017 में 641.3 मिमी, 2018 में 762.6 मिमी, 2019 में 404.3 मिमी और 2020 में 576.5 मिमी बारिश दर्ज की गयी. दिल्ली के लिए सितंबर में प्रचुर मात्रा में बारिश हुई। अभी तक इस महीने में 343.6 मिमी बारिश दर्ज की गयी जो कम से कम 12 वर्षों में सबसे अधिक है. इस साल सितंबर में हुई बारिश पिछले साल की तुलना में सबसे कम रही. पिछले साल सितंबर में शहर में 20.9 मिमी बारिश हुई थी. बहरहाल, दिल्ली में इस महीने की शुरुआत में लगातार दो दिन 100 मिमी से अधिक बारिश दर्ज की गयी. एक सितंबर को 112.1 मिमी और दो सितंबर को 117.7 मिमी बारिश दर्ज की गयी. जबकि शनिवार को शहर में 94.7 मिमी बारिश दर्ज की गयी. वहीं, दिल्ली में मानसून के 19 साल में सबसे देर से 13 जुलाई को दस्तक देने के बावजूद राजधानी में उस महीने 16 दिन बारिश दर्ज की गयी थी जो पिछले चार वर्षों में सबसे अधिक है. दिल्ली में बारिश के दिनों में 507.1 मिमी बारिश हुई जो औसत से तकरीबन 141 प्रतिशत अधिक है. जुलाई 2003 के बाद से यह इस महीने में हुई सबसे अधिक बारिश है. इसके अलावा शहर में अगस्त में महज 10 दिन बारिश हुई थी जो सात वर्षों में सबसे कम है और कुल मिलाकर 214.5 मिमी. बारिश हुई जो 247 मिमी की औसत बारिश से कम है.

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