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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा हुक्म : अब पत्रकारों पर मुकदमा दर्ज करना आसान नहीं

सुप्रीम कोर्ट का आदेश, पत्रकारों की अभिव्यक्ति की आज़ादी का संरक्षण सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, पत्रकारों की स्वतंत्रता को मिला संरक्षण सुप्रीम कोर्ट का बड़ा हुक्म : अब पत्रकारों पर मुकदमा दर्ज करना आसान नहीं सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकार की आलोचना के आधार पर किसी पत्रकार के खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं किया जा सकता। यह फैसला अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए अहम है। नई दिल्ली  पत्रकारों की स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति के अधिकार की रक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि सरकार की आलोचना के आधार पर किसी भी पत्रकार के खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं किया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 19(1) के तहत प्रत्येक नागरिक को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार प्राप्त है। इस अधिकार के तहत किसी भी पत्रकार को सरकार की आलोचना करने का पूरा हक है। कोर्ट ने कहा कि सिर्फ सरकार के खिलाफ बोलने या नीतियों पर सवाल उठाने के आधार पर किसी पत्रकार के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई नहीं की जा सकती। सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा, “स्वतंत्र पत्रकारिता लोकतंत्र का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। यदि सरकार की आलोचना करने पर पत्रकारों को प्रताड़ित किया जाएगा तो इससे प्रेस की स्वतंत्रता खतरे में पड़ जाएगी। सरकार को आलोचना सहन करने की क्षमता विकसित करनी होगी।” पत्रकारों की स्वतंत्रता पर सकारात्मक संदेश सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को पत्रकारों की स्वतंत्रता के लिए एक बड़ी जीत माना जा रहा है। इस फैसले से साफ संकेत मिलता है कि सरकार की आलोचना करना किसी भी नागरिक का संवैधानिक अधिकार है और इस अधिकार पर अंकुश लगाने की कोशिश लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। भारतीय प्रेस परिषद (PCI) ने भी सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का स्वागत किया है। PCI ने कहा कि यह फैसला प्रेस की स्वतंत्रता को मजबूत करेगा और पत्रकारों को बिना डर के सच को सामने लाने की प्रेरणा देगा। राजनीतिक हलकों में हलचल सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद राजनीतिक हलकों में भी हलचल मच गई है। विपक्षी दलों ने इस फैसले का स्वागत किया है और इसे लोकतंत्र के लिए सकारात्मक कदम बताया है। वहीं, सरकार के प्रवक्ताओं ने कहा है कि वे इस फैसले का सम्मान करते हैं और कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे की रणनीति तैयार करेंगे। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला भारत में पत्रकारिता की स्वतंत्रता को नया आयाम देगा। इससे पत्रकारों को सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने और जनहित के मुद्दों को उठाने का हौसला मिलेगा। अभिव्यक्ति की आज़ादी का यह संरक्षण न केवल लोकतंत्र की बुनियाद को मजबूत करेगा, बल्कि सरकार को भी अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाएगा।

यदि गरीब लोगों का अस्पताल में मुफ्त इलाज उपलब्ध नहीं किया तो वह एम्स को अपने नियंत्रण में लेने को कहेगा: सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि गरीब लोगों का इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल में मुफ्त इलाज उपलब्ध नहीं किया जाएगा तो वह अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) को इसे अपने नियंत्रण में लेने को कहेगा। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की बेंच ने सीज समझौते के कथित उल्लंघन को गंभीरता से लिया, जिसके तहत अस्पताल को अपने यहां एक तिहाई गरीब मरीजों को भर्ती करना था और ओपीडी में 40 प्रतिशत मरीजों को बिना किसी भेदभाव मुफ्त इलाज करना था। बेंच ने कहा, ‘अगर हमें पता चला कि गरीब लोगों को मुफ्त इलाज नहीं दिया जा रहा है तो हम अस्पताल को एम्स को सौंप देंगे।’ बेंच ने कहा कि अपोलो समूह की ओर से दिल्ली के पॉश इलाके में 15 एकड़ भूमि पर बनाए गए अस्पताल के लिए एक रुपये के प्रतीकात्मक पट्टे पर यह जमीन दी गई थी और उसे ‘बिना लाभ और बिना हानि’ के फॉर्मूले पर चलाया जाना था, लेकिन यह एक शुद्ध वाणिज्यिक उद्यम बन गया है, जहां गरीब लोग मुश्किल से इलाज करा पाते हैं। आईएमसीएल की ओर से पेश वकील ने कहा कि अस्पताल एक संयुक्त उद्यम के रूप में चलाया जा रहा है और दिल्ली सरकार की इसमें 26 प्रतिशत हिस्सेदारी है। उसे भी कमाई से बराबर का फायदा हुआ है। जस्टिस सूर्यकांत ने वकील से कहा, ‘अगर दिल्ली सरकार गरीब मरीजों की देखभाल करने के बजाय अस्पताल से मुनाफा कमा रही है, तो यह सबसे दुर्भाग्यपूर्ण बात है।’ पीठ ने कहा कि अस्पताल को 30 साल के लिए पट्टे पर जमीन दी गई थी और इस पट्टे की अवधि 2023 में समाप्त होनी थी । सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और दिल्ली सरकार से यह पता लगाने को कहा कि इसका लीज रिन्यू किया गया है या नहीं। शीर्ष अदालत आईएमसीएल की एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें दिल्ली हाई कोर्ट के 22 सितंबर, 2009 के आदेश को चुनौती दी गई थी। हाई कोर्ट ने कहा था कि अस्पताल प्रशासन ने अंदरूनी (इनडोर-भर्ती) और बाह्य (आउटडोर) गरीब मरीजों को मुफ्त इलाज देने के समझौते की शर्त का उल्लंघन किया है। शीर्ष अदालत ने केंद्र और दिल्ली सरकार से पूछा कि अगर पट्टा समझौता नहीं बढ़ाया गया है तो उक्त जमीन के संबंध में क्या कानूनी कवायद की गई है। पीठ ने अस्पताल में मौजूदा कुल बिस्तरों की संख्या भी पूछी तथा पिछले पांच वर्षों के ओपीडी मरीजों का रिकॉर्ड मांगा।

SC ने HC के देश पर रोक लगा दी जिसमें कहा गया था कि ‘ब्रेस्ट पकड़ना’ और पजामे का नाड़ा तोड़ना बलात्कार का प्रयास नहीं

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस विवादित आदेश पर रोक लगा दी जिसमें कहा गया था कि ‘ब्रेस्ट पकड़ना’ और पजामे का नाड़ा तोड़ना बलात्कार या बलात्कार का प्रयास नहीं है. सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश का स्वत: संज्ञान लिया था. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस फैसले में संवेदनशीलता की कमी दिखाई देती है. जस्टिस भूषण आर गवई ने सुनवाई के दौरान कहा कि हमें एक जज द्वारा ऐसे कठोर शब्दों का प्रयोग करने के लिए खेद है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमने हाईकोर्ट के आदेश को देखा है. हाईकोर्ट के आदेश के कुछ पैराग्राफ जैसे 24, 25 और 26 में जज द्वारा संवेदनशीलता की पूर्ण कमी को दर्शाता है. ऐसा भी नहीं है कि फैसला जल्द में लिया गया है. इस मामले में सुनवाई पूरी होकर निर्णय रिजर्व होने के 4 महीने बाद निर्णय सुनाया गया है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पीड़िता की मां ने भी अदालत का दरवाजा खटखटाया है. उसकी याचिका को भी इसके साथ ही जोड़ा जाए. उससे दोनों पर साथ सुनवाई आगे बढ़ेगी. दरअसल,  इलाहाबाद हाईकोर्ट के 17 मार्च को दिए विवादित फैसले पर सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को सुनवाई हुई. जस्टिस बी आर गवई और जस्टिस ऑगस्टिन जॉर्ज मसीह की बेंच ने इस मामले पर सुनवाई के दौरान कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज की कुछ टिप्पणियों पर रोक लगाई. सुप्रीम कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल और अटॉर्नी जनरल को सुनवाई के दौरान कोर्ट की सहायता करने को कहा है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम केंद्र, उत्तर प्रदेश को नोटिस जारी करते हैं. कोर्ट ने कहा कि हम दो हफ्ते बाद मंगलवार को इस पर सुनवाई करेंगे. इलाहाबाद कोर्ट ने क्या फैसला सुनाया था? इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि पीड़ित के ब्रेस्ट को पकड़ना, और पाजामे के नाड़े को तोड़ने के आरोप के चलते ही आरोपी के खिलाफ रेप की कोशिश का मामला नहीं बन जाता. फैसला देने वाले जज जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्रा ने 11 साल की लड़की के साथ हुई इस घटना के तथ्यों को रिकॉर्ड करने के बाद यह कहा था कि इन आरोप के चलते यह महिला की गरिमा पर आघात का मामला तो बनता है. लेकिन इसे रेप का प्रयास नहीं कह सकते. पहले क‍िया था इनकार इससे पहले नाबालिग लड़की के साथ रेप की कोशिश से जुड़े फैसले को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट ने इनकार किया था. याचिका में जजमेंट के उस विवादित हिस्से को हटाने की मांग की गई है, जिसमें कोर्ट ने कहा था कि ‘इस केस में पीड़ित के ब्रेस्ट को पकड़ना,और पजामे के नाड़े को तोड़ने के आरोप के चलते ही आरोपी के खिलाफ रेप की कोशिश का मामला नहीं बन जाता’. याचिका में क्या था इलाहाबाद हाई कोर्ट के 17 मार्च को दिए विवादित फैसले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दाखिल जनहित में सुप्रीम कोर्ट से जजमेंट के विवादित हिस्से को हटाने की मांग की गई थी। याचिका में मांग की गई थी कि कोर्ट केन्द्र सरकार/ हाई कोर्ट रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश दे कि वो फैसले के इस विवादित हिस्से को हटाया जाए। इसके साथ ही याचिका में मांग की गई थी कि जजों की ओर से की जाने वाली ऐसी विवादित टिप्पणियों को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट अपनी ओर से दिशानिर्देश जारी करें। क्यों की खारिज समाचार एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार, न्यायमूर्ति बेला त्रिवेदी और प्रसन्ना बी वराले की पीठ ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि न्यायालय इस पर विचार करने के लिए इच्छुक नहीं है। याचिकाकर्ता के वकील ने “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” योजना का हवाला देते हुए अपनी दलीलें शुरू कीं, तो न्यायमूर्ति त्रिवेदी ने उन्हें बीच में ही रोक दिया। उन्होंने कहा कि इस विषय पर अपने मामले पेश करने वाले वकीलों को “लेक्चरबाजी” नहीं करनी चाहिए। इसके बाद न्यायालय ने याचिका खारिज कर दी। क्या है मामला यह फैसला पवन और आकाश नामक दो लोगों से जुड़े एक मामले पर आया है, जिन्होंने कथित तौर पर नाबालिग के स्तनों को पकड़ा, उसके पायजामे का नाड़ा फाड़ दिया और उसे एक पुलिया के नीचे खींचने की कोशिश की। शुरुआत में, उन पर आईपीसी की धारा 376 (बलात्कार) और यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण (POCSO) अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत आरोप लगाए गए थे। हालांकि, इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने फैसला सुनाया कि उनका कृत्य बलात्कार या बलात्कार के प्रयास के रूप में योग्य नहीं था, बल्कि यह गंभीर यौन हमले के कम गंभीर आरोप के अंतर्गत आता है, जो कि भारतीय दंड संहिता की धारा 354 (बी) और पोक्सो अधिनियम की धारा 9 (एम) के तहत दंडनीय है।  

USCIRF ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में किया दावा; भारत में अल्पसंख्यक सेफ नहीं, RAW करा रहा विदेशों में हत्याएं

वॉशिंगटन  दुनिया भर के देशों के प्रवासियों को हथकड़ी पहनाकर आतंकियों की तरह मिलिट्री जहाजों में भेजने वाले अमेरिका ने धार्मिक स्वतंत्रता पर भारत को ज्ञान दिया है। अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता पर अमेरिकी आयोग ने मंगलवार को भारत में अल्पसंख्यकों की स्थिति पर टिप्पणी की है। इसमें कहा गया है कि भारत में अल्पसंख्यकों के साथ बुरा व्यवहार हो रहा है। अमेरिकी आयोग ने भारत की जासूसी एजेंसी रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) के खिलाफ प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की है। इसके लिए उसने सिख अलगाववादियों की कथित हत्या में भारतीय एजेंसी की संलिप्तता के बेबुनियाद आरोपों को आधार बनाया है। क्या ट्रंप लगाएंगे प्रतिबंध? रिपोर्ट में उस भारत की जासूसी एजेंसी के खिलाफ ऐक्शन की बात कही है, जिसके साथ वॉशिंगटन ने चीन की साझा चिंताओं को देखते हुए घनिष्ठ संबंध बनाने की कोशिश की है। विश्लेषकों का कहना है कि वॉशिंगटन ने लंबे समय से नई दिल्ली को एशिया और अन्य जगहों पर चीन के बढ़ते प्रभाव के प्रतिकार के रूप में देखा है। रॉयट्स ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि इस बात की संभावना बहुत कम है कि अमेरिकी सरकार भारत की जासूसी संस्था RAW के खिलाफ प्रतिबंध लगाएगी, क्योंकि पैनल की सिफारिशें बाध्यकारी नहीं है। बाइडन प्रशासन के दौरान भारत पर लगा था आरोप बाइडन प्रशासन के दौरान अमेरिका में कथित तौर पर सिख अलगाववादियों को निशाना बनाए जाने के आरोपों को लेकर नई दिल्ली और वॉशिंगटन के संबंधो में असहजता देखने को मिली थी। वॉशिंटन ने एक पूर्व भारतीय खुफिया अधिकारी विकास यादव पर एक अमेरिकी नागरिक गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की नाकाम साजिश रचने का आरोप लगाया था। भारत ने इसमें शामिल होने से इनकार किया था। हालांकि, भारत सरकार पन्नू को सिख आतंकवादी मानती है और उसे सुरक्षा के लिए खतरे के रूप में देखती है। मोदी सरकार पर लगाया आरोप मंगलवार को जारी अमेरिकी आयोग की रिपोर्ट में कहा गया है कि ‘साल 2024 में भारत में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति और खराब होती गई, क्योंकि धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ हमले और भेदभाव बढ़ता रहेगा।’ इसमें कहा गया कि ‘हिंदू राष्ट्रवादी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी भारतीय जनता पार्टी’ ने पिछले साल के चुनाव अभियान के दौरान ‘मुसलमानों और अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ घृणित बयानबाजी और गलत सूचनाओं का प्रचार किया।’ आयोग ने अमेरिकी सरकार से धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन करने के लिए भारत को विशेष चिंता का देश घोषित करने और यादव एवं रॉ के खिलाफ लक्षित प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की। रिपोर्ट में कम्युनिस्ट शासित वियतनाम को भी विशेष चिंता वाले देशों में शामिल करने की सिफारिश की गई है।

दक्षिण कोरिया, जापान और अमेरिका के जंगलों में भीषण आग ने मचाई तबाही, 18 की मौत, कई हुए बेघर

सियोल अमेरिका के कैलिफोर्निया में उत्पात मचाने के बाद अब जंगल की आग ने साउथ कोरिया में भीषण तबाही मचाई है। देश के दक्षिणी क्षेत्र में लगी इस आग में अब तक कम से कम 18 लोगों की मौत हो गई है। अधिकारियों के अनुसार 18 मृतकों में चार अग्निशामक और सरकारी कर्मचारी भी शामिल हैं। बुधवार को अधिकारियों ने बताया है कि आग में 200 से ज्यादा इमारतें राख हो चुकी हैं। वहीं लगभग 27 हजार से ज्यादा लोगों को अपना घर छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा है। इसे कोरिया के इतिहास की सबसे भीषण जंगल की आग बताया जा रहा है। दक्षिण कोरिया के कार्यवाहक राष्ट्रपति हान डक-सू ने बताया है कि यह आग बीते शुक्रवार को लगी थी और यह पहले से कहीं ज्यादा खतरनाक है। हान ने कहा, “नुकसान बढ़ता जा रहा है। ऐसी भीषण आग पहले कभी नहीं देखी गई। हम इस सप्ताह पूरी क्षमता के साथ आग को बुझाने की कोशिश करनी होंगी।” हान ने कहा कि रात भर तेज हवाएं चलने की वजह से जंगल में लगी आग को बुझाने के लिए कर्मचारियों को संघर्ष करना पड़ रहा है। हान ने आगे बताया कि बुधवार को लगभग 4,650 दमकल कर्मी, सैनिक और अन्य कर्मचारी लगभग 130 हेलीकॉप्टरों की मदद से जंगल में लगी आग को बुझाने के लिए काम कर रहे थे। उन्होंने कहा कि गुरुवार को थोड़ी राहत मिलने की की उम्मीद है। पांच जगह लगी भीषण आग दक्षिण कोरिया में पांच अलग-अलग स्थानों पर जंगल में भीषण आग लगी है। कोरिया वन सेवा के मुताबिक शनिवार को सानचियोंग में आग की चपेट में आने से चार दमकल कर्मियों की जान गई है। कार्यवाहक प्रधानमंत्री हान डक-सू ने आग को रोकने के लिए हरसंभव प्रयास करने करने की बात कही है। उन्होंने लोगों से भी सतर्कता बरतने को कहा है। 5500 लोगों को घर छोड़ना पड़ा अंडोंग और उसके पड़ोसी उइसियोंग व सानचियोंग काउंटियों तथा उल्सान शहर के 5500 से ज्यादा लोगों को अपने घरों को छोड़ना पड़ा है। दक्षिण कोरिया के आंतरिक एवं सुरक्षा मंत्रालय के मुताबिक आग ने यहां सबसे भीषण रूप धारण कर रखा है। उइसोंग काउंटी में लगी आग तेजी से आगे फैल रही है। अब अंडोंग और उइसोंग काउंटी के अधिकारियों ने कई गांवों और अंडोंग विश्वविद्यालय के पास रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने का आदेश दिया है। 130 हेलीकॉप्टर आग बुझाने में जुटे अधिकारियों का कहना है कि दमकल कर्मियों ने काफी हद तक आग बुझा दी थी। मगर शुष्क मौसम और तेज हवाओं के कारण आग ने दोबारा प्रचंड रूप धारण कर लिया। आग बुझाने में लगभग 9,000 दमकल कर्मी, 130 से अधिक हेलीकॉप्टर और सैकड़ों वाहनों की मदद ली जा रही है। 7वीं शताब्दी का मंदिर नष्ट कोरिया हेरिटेज सर्विस के अधिकारियों के मुताबिक उइसोंग में लगी आग ने 1300 साल पुराने बौद्ध मंदिर गौंसा को तबाह कर दिया है। इस मंदिर लकड़ी का बना था। इसे 7वीं शताब्दी में बनाया गया था। हालांकि यहां किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। मंदिर तक आग पहुंचने से पहले ही भगवान बुद्ध की प्रतिमा और कुछ राष्ट्रीय धरोहरों को निकाल लिया गया था। 2600 कैदियों को दूसरी जगह भेजा जा रहा आग की वजह से योंगदेओक शहर में सड़कों को बंद कर दिया गया है। चार गांवों के लोगों से अपने घरों को छोड़ने को कहा गया है। चेओंगसोंग काउंटी की एक जेल से लगभग 2600 कैदियों को दूसरी जगह भेजा जा रहा है। हालांकि दक्षिण कोरिया के न्याय मंत्रालय ने अभी इसकी पुष्टि नहीं की। 1,300 साल पुराना बौद्ध मठ जलकर खाक सरकार के आपातकालीन प्रतिक्रिया केंद्र ने बताया कि इस आग में 1,300 साल पुराना बौद्ध मठ भी जलकर खाक हो गया है। कोरिया हेरिटेज सर्विस के अधिकारियों के मुताबिक उइसोंग में लगी आग में 7वीं शताब्दी में निर्मित गौंसा नाम के मठ को काफी नुकसान पहुंचा। अनुमान के मुताबिक आग अब तक करीब 43,330 एकड़ जमीन को अपने अंदर लील चुकी है। शुष्क हवाओं ने बढ़ाई मुश्किलें इससे पहले देश के दक्षिण-पूर्वी शहरों और कस्बों के अधिकारियों ने मंगलवार को लोगों को शहर खाली करने के निर्देश जारी किए थे। दक्षिण कोरिया के गृह मंत्रालय के अनुसार सबसे ज्यादा नुकसान एंडोंग, पड़ोसी काउंटी उइसोंग और सांचोंग और उल्सान जैसे शहरों में हुआ है। वहीं इससे पहले मंगलवार को अधिकारियों ने कहा था कि दमकलकर्मियों ने कुछ क्षेत्रों में लगी आग की अधिकांश लपटों को बुझा दिया है लेकिन हवा और शुष्क परिस्थितियों के कारण आग फिर से भड़क गई।

पुणे में जार में 7 नवजात शिशुओं के शव, लाशों का ढेर देखकर हड़कंप

पुणे  महाराष्ट्र के पुणे जिले में एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। दौंड कस्बे के बोरावकेनगर इलाके में कचरे के ढेर में 6-7 नवजात शिशुओं के शव मिले है। इससे पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है। पुलिस इस मामले की जांच कर रही है। कचरे में शिशुओं के शव प्लास्टिक के जार में बंद थे। पुलिस को मंगलवार सुबह सूचना मिली। उन्हें बताया गया कि बोरावकेनगर में प्राइम टाउन के पीछे कचरे के ढेर में नवजात शिशु और मानव अवशेष मिले हैं। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची। पुलिस ने बताया कि उन्हें 6-7 नवजात शिशु मिले। वे प्लास्टिक के जार में भरकर फेंके गए थे। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इन शिशुओं को यहां कौन और क्यों फेंक गया। फिलहाल पुलिस इस मामले की गहराई से जांच कर रही है। ऐसे हुआ खुलासा जानकारी के अनुसार एक शख्स सुबह टहलने निकला था। तभी उसकी नजर कूड़े के ढेर पर पड़ी। उसे कचरे के ढेर में नवजात शिशुओं के शव दिखे। उसने तुरंत पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने इन शवों को कब्जे में ले लिया है। पुलिस हर पहलू से जांच कर रही है। वे यह भी देख रहे हैं कि क्या यह मामला गर्भपात से जुड़ा है। पुलिस का कहना है कि वे दोषियों को पकड़ने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे। वहीं इस घटना के बाद पूरे इलाके में शोक का माहौल है। लोग हैरान हैं कि कोई ऐसा कैसे कर सकता है। पुलिस लोगों से अपील कर रही है कि वे शांति बनाए रखें और जांच में सहयोग करें। पुलिस ने लोगों से की अपील मामले की गंभीरता को देखते हुए मेडिकल टीम को भी मौके पर बुलाया गया। मेडिकल टीम शिशुओं की जांच कर रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि शिशुओं की मौत कैसे हुई। पुलिस का कहना है कि वे जल्द ही इस मामले को सुलझा लेंगे। वे दोषियों को कड़ी सजा दिलाएंगे। पुलिस लोगों से अपील कर रही है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और पुलिस पर भरोसा रखें। यह घटना मानवता को शर्मसार करने वाली है।

वैज्ञानिकों को समुन्द्र तल में 540 बिलियन डॉलर का विशाल लिथियम भंडार मिला, अमेरिका की हुई बल्ले -बल्ले

वॉशिंगटन  अमेरिकी वैज्ञानिकों ने बहुत बड़े लिथिमय भंडार की खोज की है। इस बेशकीमती भंडार की खोज कैलिफोर्निया के साल्टन सागर के धुंधले पानी के नीचे की गई है। एक अनुमान के अनुसार, इस भंडार की कीमत 540 अरब अमेरिकी डॉलर हो सकती है। लिथियम को सफेद सोना कहा जाता है, जो अमेरिका को इस धातु के मामले में आत्मनिर्भर बनने का एक मौका प्रदान कर सकता है। इससे विदेशी आयात पर उसकी निर्भरता काफी कम हो जाएगी। सफेद सोने को हासिल करने में चुनौती यह खोज अमेरिका के लिए बहुत फायदेमंद हो सकती है, लेकिन इस खजाने को निकालने के लिए कई चुनौतियां भी आती हैं, जो स्थानीय समुदायों, पर्यावरण और भू-राजनीतिक परिदृश्य को प्रभावित कर सकती हैं। दक्षिणी कैलिफोर्निया के इंपीरियल काउंटी में स्थित साल्टन सागर लंबे समय से आकर्षण और चिंता का विषय रहा है। कभी पर्यटकों के लिए एक लोकप्रिय गंतव्य रहा यह झील पिछले कुछ वर्षों में महत्वपूर्ण पर्यावरणीय चुनौतियों का सामना कर रहा है। लिथियम का बड़ा भंडार इसकी सतह के नीचे दुनिया में लिथियम ब्राइन के सबसे बड़े भंडारों में से एक है। अमेरिकी ऊर्जा विभाग की फंडिंग से किए गए हाल के अध्ययन बताते हैं कि झील के नीचे लगभग 1.8 करोड़ टन लिथियम दबा हुआ है। यह पहले पुष्ट किए गए 40 लाख टन से कहीं ज्यादा है। लिथियम का इस्तेमाल इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की बैटरी बनाने में होता है। यह ईवी बैटरी उद्योग का नया रूप दे सकता है। इससे 38.2 इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी के लिए पर्याप्त लिथियम उपलब्ध होगा। यह वर्तमान में अमेरिकी सड़कों पर चलने वाले वाहनों की कुल संख्या से भी ज्यादा है। चीन पर खत्म होगी निर्भरता अध्ययन में योगदान देने वाले कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, रिवरसाइड के प्रोफेसर ने खोज के महत्व पर जोर देते हुए कहा, यह दुनिया के सबसे बड़े लिथियम ब्राइन भंडारे में से एक है। इससे अमेरिका लिथियम में पूरी तरह से आत्मनिर्भर हो सकता है और चीन से इसका आयात बंद कर सकता है। बैटरी के लिए अपनी महत्वपूर्ण भूमिका के चलते सफेद सोना कहे जाने वाले लिथियम के भंडार ने कैलिफोर्निया के राजनीतिक हलकों में भी उत्साह जगाया है। गवर्नर गेविन न्यूजॉम ने खोज के बाद साल्टन सागर को लिथियम का सऊदी अरब कहा है। इलेक्ट्रिक वाहनों की लहर के कारण लिथियम की वैश्विक मांग आसमान छू रही है। ऐसे में अमेरिका के पास लिथियम उत्पादन में वैश्विक नेता के रूप में खुद को स्थापित करने का एक अनूठा अवसर है। संभवतः यह प्राथमिक आपूर्तिकर्ता के रूप में चीन को पीछे छोड़ सकता है।

जनवरी में ESI स्कीम के तहत हुए 18 लाख नए रजिस्ट्रेशन, जानिए योजना के फायदे

नई दिल्ली  कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) से इस साल जनवरी में 18.19 लाख नए सदस्य जुड़े हैं। यह जानकारी  श्रम और रोजगार मंत्रालय द्वारा दी गई। जनवरी में जुड़े नए सदस्यों में 8.67 लाख या 47.66 प्रतिशत 25 वर्ष तक की आयु वर्ग के हैं, जो दिखाता है कि देश में नौकरियों के अवसर बढ़ रहे हैं और अर्थव्यवस्था की स्थिति अच्छी बनी हुई है। जनवरी 2025 में 27,805 नए संस्थाओं को भी ईएसआई योजना के सामाजिक सुरक्षा दायरे में लाया गया है, जिससे अधिक वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित होगी। पेरोल डेटा का लिंगवार विश्लेषण दिखाता है कि इस साल जनवरी में 3.65 लाख महिला सदस्यों का पंजीकरण हुआ है। इसके अलावा, समीक्षा अवधि में 85 ट्रांसजेंडर सदस्यों ने ईएसआईसी की योजना के तहत पंजीकरण कराया है। ईएसआईसी के जनवरी पेरोल में वृद्धि दिसंबर 2024 में जोड़े गए 17.01 लाख नए कर्मचारियों की तुलना में अधिक है, जो अर्थव्यवस्था में रोजगार के बढ़ते ट्रेंड को दर्शाता है। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने कहा कि माह के दौरान जोड़े गए कुल 17.01 लाख सदस्यों में से 8.22 लाख कर्मचारी, जो कुल पंजीकरण का लगभग 48.35 प्रतिशत है, 25 वर्ष तक की आयु वर्ग के हैं। पिछले हफ्ते कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) की ओर से जारी किए गए आंकड़ों में बताया गया था कि इस साल जनवरी में संगठन से 17.89 लाख सदस्यों के जुड़े हैं। यह आंकड़ा दिसंबर 2024 के मुकाबले मासिक आधार पर 11.48 प्रतिशत अधिक है। ईपीएफओ के आधिकारिक बयान के अनुसार, पेरोल में जनवरी 2024 के मुकाबले 11.67 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। यह दिखाता है कि कर्मचारी फायदों को लेकर पहले के मुकाबले जागरूकता बढ़ी है।

देश ने घरेलू रक्षा उत्पादन में 1.27 लाख करोड़ रुपये का रिकॉर्ड हासिल किया..

नई दिल्ली भारत ने ‘मेक इन इंडिया’ पहल की शुरुआत के बाद से 2023-24 में स्वदेशी रक्षा उत्पादन में अब तक की सबसे अधिक वृद्धि हासिल की है। खास बात यह है कि ये वृद्धि रिकॉर्ड एक लाख 27 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गई है। रक्षा उत्पादन का मूल्य 2014-15 में 46 हजार 429 करोड़ से 174 प्रतिशत बढ़ गया जी हां, इस संबंध में रक्षा मंत्रालय ने कहा कि रक्षा उत्पादन का मूल्य 2014-15 में 46 हजार 429 करोड़ से 174 प्रतिशत बढ़ गया है। वहीं रक्षा निर्यात की बात करें तो 2023-24 में यह रिकॉर्ड 21,083 करोड़ रुपये तक पहुंचा, जो पिछले दशक में 30 गुना बढ़ा है। आईडेक्स और सामर्थ्य से स्वदेशी तकनीकी प्रगति को मिल रहा बढ़ावा यही नहीं, आईडेक्स और सामर्थ्य जैसी पहलों के माध्यम से स्वदेशी तकनीकी प्रगति को बढ़ावा मिल रहा है जो AI साइबर युद्ध और स्वदेशी हथियार प्रणालियों में महत्वपूर्ण विकास कर रही हैं। 2029 तक 3 लाख करोड़ रुपये का रक्षा उत्पादन का रखा लक्ष्य भारत ने 2029 तक 3 लाख करोड़ रुपये उत्पादन और 50,000 करोड़ रुपये निर्यात का लक्ष्य रखा। इस संबंध में मंत्रालय ने कहा कि कभी विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भर रहने वाला देश अब स्वदेशी विनिर्माण में एक उभरती हुई ताकत के रूप में खड़ा है, जो घरेलू क्षमताओं के माध्यम से अपनी सैन्य ताकत को आकार दे रहा है। रक्षा निर्यात में भी 30 गुना वृद्धि रक्षा निर्यात भी 2013-14 में 686 करोड़ से बढ़कर 2023-24 में 21 हजार करोड़ रुपये से अधिक के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया है, जो पिछले एक दशक में 30 गुना वृद्धि दर्शाता है। मंत्रालय ने कहा कि सरकार ने रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में व्यापार करने में आसानी को बेहतर बनाने के लिए कई उपाय किए हैं। रक्षा उत्पादन और निर्यात में भारत की उल्लेखनीय प्रगति एक आत्मनिर्भर और वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी सैन्य विनिर्माण केंद्र के रूप में इसके परिवर्तन को रेखांकित करती है। रणनीतिक नीतिगत हस्तक्षेप, घरेलू भागीदारी में वृद्धि और स्वदेशी नवाचार पर ध्यान केंद्रित करने के संयोजन ने देश की रक्षा क्षमताओं को काफी मजबूत किया है। उत्पादन में उछाल, निर्यात में तेजी से वृद्धि और मेक इन इंडिया जैसी पहलों की सफलता रक्षा में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। 2029 के लिए निर्धारित महत्वाकांक्षी लक्ष्यों के साथ, भारत अपने वैश्विक पदचिह्न का और विस्तार करने के लिए तैयार है, जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक विकास को बढ़ाते हुए अंतर्राष्ट्रीय रक्षा बाजार में एक भरोसेमंद भागीदार के रूप में अपनी स्थिति को मजबूत किया जा सके।  

यूक्रेन युद्ध के चलते रूस में खड़ा हो गया है आबादी का संकट, स्कूली लड़कियों को बच्चे पैदा करने के लिए तैयार कर रहा

मॉस्को रूस ऐसा देश बन गया है जो स्कूली छात्राओं को बच्चे पैदा करने के बदले में पैसे देने की पेशकश कर रहा है। मध्य रूस के ओर्योल क्षेत्र इसकी शुरुआत करने वाला पहला क्षेत्र बना है। यह इलाका रूस के उन 40 क्षेत्रों में है, जो महिला विश्वविद्यालय की छात्राओं को मां बनने पर कम से कम 100000 रूबल (करीब 1200 डॉलर) प्रदान करता है। मीडिया आउटलेट 7×7 की रिपोर्ट के अनुसार, नये फरमान में कम उम्र की स्कूली लड़कियों को भी भुगतान देने की बात कही गई है। क्षेत्र के गवर्नर आंद्रेई क्लिचकोव ने गुरुवार को इस कार्यक्रम का विस्तार किया। 25 साल में सबसे कम जन्मदर दरअसल, रूस इस समय तेजी से गिरती आबादी के संकट का सामना कर रहा है। देश की जन्म दर पहले से ही कम बनी हुई है। आधिकारिक डेटा से पता चलता है कि रूस में जन्म दर 25 साल के निचले स्तर पर आ गई है। वहीं, मृत्यु दर में वृद्धि जारी है। यूक्रेन में युद्ध से मौतों ने इस संकट को और बढ़ा दिया है। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने जन्म दर को बढ़ाने पर जोर दिया है और तीन या उससे अधिक बच्चों वाले परिवारों को आदर्श बताया है। राष्ट्रपति पुतिन रूस को पारंपरिक मूल्यों के गढ़ के रूप में पेश करते रहे हैं, जो उनके विचार में पश्चिम के पतनशील समाज के साथ संघर्ष कर रहा है। उन्होंने महिलाओं को कम से कम तीन बच्चे पैदा करने के लिए प्रोत्साहित किया है। उनका कहना है कि इसके रूस के भविष्य को सुरक्षित करने में मदद मिलेगी। इसके लिए पहले ही वित्तीय और अन्य प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं। क्या कहते हैं आंकड़े? साल 2024 की पहली छमाही में रूस में लगभग 599,600 बच्चे पैदा हुए, जो 2023 की पहली छमाही की तुलना में 16,000 कम हैं। यह 1999 के बाद सबसे कम संख्या है। वहीं, मौतों की संख्या में 49,0000 की वृद्धि हुई। इस दौरान में देश में अप्रवास में 20% की वृद्धि हुई। सितंबर में जारी आधिकारिक आंकड़ों ने जन्म दर को एक चौथाई सदी में सबसे कम बताया, जबकि मृत्यु दर में वृद्धि हुई है। इसकी प्रमुख वजह मॉस्को में यूक्रेन का युद्ध है। क्रेमलिन ने इन आंकड़ों को देश के लिए विनाशकारी कहा है।

अर्थव्यवस्थाओं पर अमेरिका के बढ़ते शुल्क और वैश्वीकरण पर पड़ने वाले दबाव का असर पड़ेगा

नई दिल्ली देश की इकोनॉमी को लेकर एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने बुरी खबर सुनाई है। रेटिंग एजेंसी ने अगले वित्त वर्ष 2025-26 के लिए भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर के अनुमान को घटाकर 6.5 प्रतिशत कर दिया है। रेटिंग एजेंसी का अनुमान है कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र की अर्थव्यवस्थाओं पर अमेरिका के बढ़ते शुल्क और वैश्वीकरण पर पड़ने वाले दबाव का असर पड़ेगा। इन बाहरी दबावों के बावजूद उम्मीद है कि अधिकतर उभरती-बाजार इकोनॉमी में घरेलू मांग की गति मजबूत बनी रहेगी। क्या कहा रेटिंग एजेंसी ने एसएंडपी ने कहा- हमारा अनुमान है कि 31 मार्च, 2026 को समाप्त होने वाले वित्त वर्ष में भारत की अर्थव्यवस्था 6.5 प्रतिशत की दर से बढ़ेगी। यह हमारे पहले लगाए गए 6.7 प्रतिशत के अनुमान से कम है। पूर्वानुमान में आगामी मानसून सामान्य रहने तथा जिंस खासकर कच्चे तेल की कीमतें नरमी रहने की संभावना जाहिर की गई है। ब्याज दर में और होगी कटौती एसएंडपी ने कहा- हमारा अनुमान है कि भारतीय रिजर्व बैंक आने वाले दिनों में ब्याज दर में 0.75 प्रतिशत से एक प्रतिशत तक की कटौती करेगा। खाद्य मुद्रास्फीति में कमी और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से कुल मुद्रास्फीति मार्च, 2026 को समाप्त होने वाले वित्त वर्ष में केंद्रीय बैंक के चार प्रतिशत के लक्ष्य के पास आ जाएगी और राजकोषीय नीति नियंत्रित रहेगी। रेटिंग एजेंसी ने कहा कि एशिया-प्रशांत की अर्थव्यवस्थाएं खासकर बढ़ते अमेरिकी शुल्क और सामान्य रूप से वैश्वीकरण पर पड़ने वाले दबाव का असर महसूस करेंगी। हालांकि, हम घरेलू मांग की गति को व्यापक रूप से बरकरार रहते हुए देख रहे हैं, खासकर क्षेत्र की उभरती बाजार अर्थव्यवस्थाओं में। बता दें कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने पिछले महीने अपनी मौद्रिक नीति समीक्षा में प्रमुख नीतिगत दर को 0.25 प्रतिशत की कटौती कर 6.50 प्रतिशत से 6.25 प्रतिशत कर दिया था।

सीएम फडणवीस ने कहा- बिना जानकारी वाले कोई भी हुक्का पार्लर चलते पाए गए तो पुलिस अधिकारियों को निलंबित किया जाएगा

मुंबई महाराष्ट्र में ई-सिगरेट और हुक्का का प्रचलन काफी बढ़ गया है। इस बीच महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि अगर बिना जानकारी वाले कोई भी हुक्का पार्लर चलते पाए गए तो पुलिस अधिकारियों को निलंबित किया जाएगा। महाराष्ट्र के सीएम ने कहा कि हुक्का पार्लर के मामलों में बार-बार अपराध करने वालों को गिरफ़्तार भी किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इससे पहले ऐसा नहीं किया जाता था। बता दें कि राज्य की फडणवीस सरकार ने ई-सिगरेट और हुक्का के खिलाफ अपना अभियान तेज कर दिया है। विधानसभा में उठा हुक्का पार्लरों का मुद्दा दरअसल, महाराष्ट्र विधानसभा में बजट सत्र के दौरान कांग्रेस विधायक विश्वजीत कदम और नाना पटोले ने राज्य भर में बढ़ते हुक्का पार्लरों और ई-सिगरेट की खपत में वृद्धि पर सवाल उठाया था। इसके जवाब में सीएम फडणवीस ने कहा कि हुक्का पीना एक स्टाइल स्टेटमेंट बन गया है। कई जगहों पर तंबाकू का इस्तेमाल किया जाता है। कुछ जगहों पर अन्य नशीले पदार्थों का भी इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे प्रतिष्ठानों के खिलाफ अभियान चल रहा है। लेकिन, इसे और तेज किया जाएगा। कांग्रेस विधायक ने पूरे राज्य में की कार्रवाई की मांग गौरतलब है कि कांग्रेस विधायक विश्वजीत कदम मांग की कि पूरे राज्य में कार्रवाई की जरूरत है। इसके अलावा कांग्रेस के विधायक नाना पटोले ने पुलिस विभाग पर हुक्का पार्लरों को चलने देने का आरोप लगाया। विधानसभा में पटोले ने सवाल किया कि कार्रवाई करने के लिए जिम्मेदार लोग खुद हुक्का पार्लरों को चलने दे रहे हैं। क्या सरकार पुलिस अधिकारियों पर कोई कार्रवाई करेगी? इस सवाल के जवाब में गृह विभाग के प्रमुख देवेंद्र फडणवीस ने सदस्यों को आश्वस्त किया कि ड्रग्स या हुक्का पार्लरों के खिलाफ कार्रवाई के मामले में सरकार की मंशा बिल्कुल साफ है। सीएम ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर हुक्का पार्लरों के संचालन के बारे में पुलिस अधिकारियों के अलावा किसी और ने जानकारी दी तो संबंधित क्षेत्र के कर्मियों को निलंबित कर दिया जाएगा।

देश में प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता पिछले एक दशक में 48 प्रतिशत बढ़ी है: राज्य मंत्री एस.पी. सिंह बघेल

नई दिल्ली भारत का दूध उत्पादन पिछले 10 वर्षों में 63.56 प्रतिशत बढ़कर 2014-15 में 146.3 मिलियन टन से 2023-24 के दौरान 239.2 मिलियन टन हो गया है, जिसकी वार्षिक वृद्धि दर 5.7 प्रतिशत है। जबकि विश्व दूध उत्पादन 2 प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से बढ़ रहा है। यह जानकारी मंगलवार को संसद में दी गई। मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी राज्य मंत्री एस.पी. सिंह बघेल ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर में कहा, “देश में प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता पिछले एक दशक में 48 प्रतिशत बढ़ी है, जो वर्ष 2023-24 के दौरान 471 ग्राम/व्यक्ति/दिन से भी अधिक है, जबकि विश्व में प्रति व्यक्ति उपलब्धता 322 ग्राम/व्यक्ति/दिन है। भारत 1998 से दूध उत्पादन में पहले स्थान पर है और अब वैश्विक दूध उत्पादन में 25 प्रतिशत का योगदान देता है। राज्य मंत्री एस.पी. सिंह बघेल ने डेयरी क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार द्वारा कार्यान्वित की जा रही विभिन्न योजनाओं की भी जानकारी दी। मंत्री ने कहा कि केंद्र के राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम (एनपीडीडी) को पूरे देश में लागू किया जा रहा है, ताकि राज्य सरकारों द्वारा दूध उत्पादन और दूध प्रोसेसिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए किए गए प्रयासों को सफल किया जा सके। एनपीडीडी का घटक ‘ए’ डेयरी क्षेत्र में राज्य सहकारी समितियों और किसान उत्पादक संगठनों के लिए क्वालिटी मिल्क टेस्टिंग इक्विपमेंट के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण और मजबूती पर केंद्रित है। ‘सहकारिता के माध्यम से डेयरी’ योजना के घटक ‘बी’ का उद्देश्य संगठित बाजारों तक किसानों की पहुंच बढ़ाकर, डेयरी प्रोसेसिंग सुविधाओं और मार्केटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड करने के साथ ही उत्पादक-स्वामित्व वाली संस्थाओं की क्षमता बढ़ाकर दूध और डेयरी उत्पादों की बिक्री बढ़ाना है। उन्होंने आगे बताया कि पशुपालन अवसंरचना विकास निधि (एएचआईडीएफ) का क्रियान्वयन व्यक्तिगत उद्यमियों, डेयरी सहकारी समितियों, किसान उत्पादक संगठनों, निजी फर्मों, एमएसएमई और धारा 8 कंपनियों द्वारा पशुपालन क्षेत्र में प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन के लिए निवेश हेतु स्थापित पात्र परियोजनाओं की फंडिंग के लिए किया जा रहा है। इस योजना के तहत डेयरी प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन इंफ्रास्ट्रक्चर, पशु आहार विनिर्माण संयंत्र, नस्ल सुधार टेक्नोलॉजी और ब्रीड मल्टीप्लिकेशन फार्म, पशु अपशिष्ट से धन प्रबंधन (कृषि अपशिष्ट प्रबंधन) और पशु चिकित्सा टीका और औषधि उत्पादन सुविधाओं की स्थापना के लिए ऋण सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी हैं। गोजातीय पशुओं के दूध उत्पादन और उत्पादकता को बढ़ाने के लिए सरकार देशी नस्लों के विकास और संरक्षण के लिए ‘राष्ट्रीय गोकुल मिशन’ को क्रियान्वित कर रही है। नेशनल लाइव स्टॉक मिशन (एनएलएम) की शुरुआत उद्यमिता विकास और मुर्गी पालन, भेड़, बकरी और सुअर पालन में नस्ल सुधार पर विशेष ध्यान देने के लिए की गई है। इसके तहत उद्यमिता विकास के लिए व्यक्ति, एफपीओ, एसएचजी, सेक्शन 8 कंपनियों और नस्ल सुधार के लिए राज्य सरकार को प्रोत्साहन दिया जाएगा।  

विपक्षी सांसदों ने जज के घर में कैश मामले में चुप्पी पर सरकार को घेरा, इससे न्यायपालिका की छवि पर गहरा असर पड़ा

नई दिल्ली दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा के आवास पर मिले अधजले नोटों पर देश में बवाल मचा हुआ है। संसद के बजट सत्र के दौरान विपक्षी सांसदों ने इस मुद्दे पर सरकार की चुप्पी को लेकर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने कहा कि कानून मंत्री को इस मामले पर संसद में बयान देना चाहिए। यदि सरकार न्यायपालिका की स्वतंत्रता का हवाला देते हुए इस पर कोई बयान नहीं देती, तो यह संविधान की मर्यादाओं का उल्लंघन होगा। उन्होंने कहा कि संविधान के तहत संसद को न्यायपालिका पर निगरानी रखने का अधिकार प्राप्त है और जजों के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया भी संसद द्वारा की जाती है। इस मामले में यदि सरकार चुप रहती है तो यह संवैधानिक जिम्मेदारी से भागने जैसा होगा। राजद के राज्यसभा सांसद मनोज झा ने कहा कि इस घटना ने पूरी न्यायपालिका पर सवाल उठाए हैं और अब देश भर में न्यायपालिका को शक की निगाहों से देखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल एक जज से जुड़ा हुआ नहीं है, बल्कि इससे न्यायपालिका की छवि पर गहरा असर पड़ा है। उन्होंने कहा कि जस्टिस वर्मा को दिल्ली से इलाहाबाद ट्रांसफर कर दिया गया है, लेकिन यह कदम न्यायपालिका की स्वायत्तता और पारदर्शिता पर सवाल उठाता है। उन्होंने इसे मामले पर पर्दा डालने की कार्रवाई करार दिया। भाजपा के राज्यसभा सांसद डॉ. के. लक्ष्मण ने तेलंगाना सरकार द्वारा इफ्तार पर खर्च किए गए 74 करोड़ रुपये पर आपत्ति जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार कर्ज में डूबी हुई है और मुख्यमंत्री के नेतृत्व में तेलंगाना पर भारी कर्ज का बोझ है। पिछली सरकार ने राज्य पर छह लाख करोड़ रुपये का कर्ज डाला था, और वर्तमान सरकार ने पिछले एक साल में एक लाख करोड़ रुपये का कर्ज लिया है। इसके बावजूद राज्य सरकार इस प्रकार के बड़े खर्चे कर रही है और दावा कर रही है कि उसके पास पैसा नहीं है। राजस्थान के भीलवाड़ा से भाजपा सांसद दामोदर अग्रवाल ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के खिलाफ नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के बयान पर कहा कि कांग्रेस सांसद बिना वजह आरएसएस पर अनर्गल बयानबाजी करते हैं, जबकि आरएसएस एक देशभक्त संगठन है, जो राष्ट्रहित के लिए काम करता है। उन्होंने कहा कि संघ का उद्देश्य राष्ट्र की सेवा करना है और राहुल गांधी के बयान पर 140 करोड़ भारतीय अपनी प्रतिक्रिया देंगे।

गाजा में कत्लेआम कर रहे इजराइल की अब खैर नहीं, इस क्रूर कार्रवाई के कारण पूरी दुनिया में इजराइल की हो रही आलोचना

इजराइल इजराइल ने एक बार फिर गाजा पर हमला शुरू कर दिया है, जिससे अब तक 900 से अधिक फिलिस्तीनी मारे जा चुके हैं। इस क्रूर कार्रवाई के कारण पूरी दुनिया में इजराइल की आलोचना हो रही है। इसके साथ ही इजराइल सरकार ने गाजा से फिलिस्तीनियों को हटाने के लिए एक विशेष एजेंसी बनाने की भी घोषणा की है, जिसने मुस्लिम देशों के बीच नाराजगी की लहर पैदा कर दी है। मुस्लिम वर्ल्ड लीग का कड़ा बयान इजराइल की इन नीतियों से परेशान होकर मुस्लिम वर्ल्ड लीग (MWL) ने एक कड़ा बयान जारी किया है। इस बयान में इजराइल द्वारा फिलिस्तीनियों को विस्थापित करने की योजना की कड़ी निंदा की गई है। साथ ही, वेस्ट बैंक में 13 अवैध बस्तियों को अलग करने के फैसले को भी अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन बताया गया है। मुस्लिम वर्ल्ड लीग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपने महासचिव शेख डॉ. मोहम्मद बिन अब्दुलकरीम अल-इस्सा का बयान साझा किया। इस बयान में उन्होंने कहा कि, “यह इजराइली कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय और मानवीय कानूनों का बर्बर उल्लंघन है।” उन्होंने यह भी जोर दिया कि ऐसे कदम शांतिपूर्ण समाधान की संभावनाओं को खत्म कर रहे हैं और क्षेत्रीय व वैश्विक स्थिरता के लिए बाधा बन रहे हैं। अरब-इस्लामिक मंत्रिस्तरीय समिति की रणनीति अरब-इस्लामिक मंत्रिस्तरीय समिति ने इजराइल पर दबाव बनाने के लिए एक रणनीति तैयार की है। काहिरा में यूरोपीय संघ के विदेश नीति प्रमुख काजा कलस के साथ बैठक के दौरान, समिति ने गाजा में युद्धविराम टूटने पर चिंता व्यक्त की और इजराइली हमलों की आलोचना की। मुस्लिम वर्ल्ड लीग क्या है? मुस्लिम वर्ल्ड लीग (MWL) एक अंतरराष्ट्रीय संगठन है, जो मुस्लिम देशों और समुदायों के बीच एकता और सहयोग बढ़ाने का काम करता है। इस संगठन की स्थापना 1962 में सऊदी अरब के मक्का में हुई थी। इसका मुख्य उद्देश्य इस्लामिक मूल्यों का प्रचार-प्रसार करना, मुस्लिमों के अधिकारों की रक्षा करना और वैश्विक स्तर पर शांति बनाए रखना है।  

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