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रेलवे वंदे भारत एक्सप्रेस के स्लीपर वर्जन को भी पटरियों पर उतारने की तैयारी में

नई दिल्ली सेमी हाईस्पीड ट्रेन वंदे भारत एक्सप्रेस का डेब्यू हुए 6 साल बीत चुके हैं। 2019 से शुरू हुई रफ्तार की यह कहानी अब 136 सेवाओं तक पहुंच चुकी है। इनमें लगातार इजाफा भी जारी है। अब रेलवे वंदे भारत एक्सप्रेस के स्लीपर वर्जन को भी पटरियों पर उतारने की तैयारी कर रहा है। इसके साथ ही यात्री लंबी दूरी का सफर आराम से तय कर सकेंगे। वंदे भारत ट्रेनें अब कई शताब्दी ट्रेन मार्गों पर उपलब्ध हैं। वंदे भारत एक्सप्रेस भारत की सबसे तेज ट्रेन है और 180 किमी/घंटा तक की गति तक पहुंचने में सक्षम है। अब तक, यह दिल्ली और वाराणसी जैसे छोटे और मध्यम दूरी के प्रमुख शहरों को जोड़ती है। कैसे हुई शुरुआत 15 फरवरी 2019 को नई दिल्ली-कानपुर-इलाहाबाद-वाराणसी मार्ग पर 160 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चलने वाली पहली वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन को हरी झंडी दिखाई गई थी। ‘मेक इन इंडिया’ अभियान के तहत इन ट्रेनों को पटरियों पर उतारा गया था। आम ट्रेनों के मुकाबले वंदे भारत एक्सप्रेस रफ्तार से लेकर सुरक्षा स्तर तक कई सुविधाओं से लैस है। क्या हैं विशेषताएं वंदे भारत एक्सप्रेस में एग्जीक्यूटिव क्लास में रिक्लाइनिंग एर्गोनोमिक सीटें, सभी कोच में सीसीटीवी और हर सीट पर मोबाइल चार्जिंग सॉकेट, ऑटोमैटिक दरवाजे, पेंट्री में हॉट केस, वॉटर कूलर, डीप फ्रीजर, हर कोच में आपातकालीन खिड़कियां, अलार्म पुश और टॉक बैक यूनिट्स हैं। ये ट्रेने 160 किमी की रफ्तार से दौड़ सकती हैं। स्लीपर वंदे भारत एक्सप्रेस रेल मंत्रालय ने 3 जनवरी को बताया था कि वंदे भारत स्लीपर ट्रेन ने पिछले तीन दिनों में अपने कई परीक्षणों में 180 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम गति प्राप्त की है। जनवरी के अंत तक यह परीक्षण जारी रहेंगे। उसके बाद देश भर के रेल यात्रियों को लंबी दूरी की यात्रा के लिए यह विश्व-स्तरीय यात्रा उपलब्ध कराई जाएगी। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसका एक वीडियो भी एक्स पर पोस्ट किया था। क्या होगा खास इन वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों को स्वचालित दरवाजे, बेहद आरामदायक बर्थ, ऑन बोर्ड वाई-फाई और विमान जैसी डिज़ाइन जैसी सुविधाओं के साथ डिज़ाइन किया गया है। देश में यात्री पहले से ही मध्यम और छोटी दूरी पर चलने वाली 136 वंदे भारत ट्रेनों का इस्तेमाल कर रहे हैं।

जब पुरुषों में हस्तमैथुन को सार्वभौमिक माना जाता है तो महिलाओं के हस्तमैथुन को कलंकित नहीं किया जा सकता : मद्रास हाईकोर्ट

चेन्नई मद्रास हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के उस आदेश को सही ठहराया जिसमें कहा गया था कि एक महिला द्वारा अकेले में पोर्न देखना और हस्तमैथुन करना उसके पति के प्रति क्रूरता नहीं हो सकती है। फैमिली कोर्ट ने इस आधार पर एक व्यक्ति को तलाक देने से इनकार कर दिया था। न्यायमूर्ति जी आर स्वामीनाथन और न्यायमूर्ति आर पूर्णिमा की खंडपीठ ने बुधवार को कहा, “जब पुरुषों में हस्तमैथुन को सार्वभौमिक माना जाता है तो महिलाओं द्वारा हस्तमैथुन को कलंकित नहीं किया जा सकता है। पुरुष हस्तमैथुन करने के तुरंत बाद संभोग में शामिल नहीं हो सकते हैं, लेकिन महिलाओं के मामले में ऐसा नहीं होगा। यह भी सिद्ध नहीं किया गया है कि अगर पत्नी को हस्तमैथुन की आदत है तो पति-पत्नी के बीच वैवाहिक संबंध प्रभावित होंगे।” इस मामले पर सुनवाई करते हुए जज ने कहा, “अगर शादी के बाद कोई महिला विवाहेतर संबंध बनाती है तो यह तलाक का आधार बन सकता है। लेकिन आत्म-सुख में लिप्त होना विवाह विच्छेद का कारण नहीं बन सकता है। किसी भी तरह से यह नहीं कहा जा सकता कि यह पति पर क्रूरता है। केवल निजी तौर पर पोर्न देखने में प्रतिवादी (पत्नी) का कृत्य अपीलकर्ता (पति) के प्रति क्रूरता नहीं माना जा सकता है। यह देखने वाले पति या पत्नी के मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है।” कोर्ट ने आगे कहा, ”अगर कोई पोर्न देखने वाला दूसरे पति या पत्नी को अपने साथ शामिल होने के लिए मजबूर करता है तो यह निश्चित रूप से क्रूरता माना जाएगा। अगर यह दिखाया जाता है कि इस लत के कारण किसी के वैवाहिक दायित्वों के निर्वहन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है तो यह कार्रवाई योग्य आधार प्रदान कर सकता है।” आपको बता दें कि अदालत करूर जिला के फैमिली कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाले व्यक्ति (अपीलकर्ता) द्वारा दायर अपील पर सुनवाई कर रही थी, जिसने तलाक की मांग करने वाले उसके आवेदन को खारिज कर दिया था। दोनों की शादी जुलाई 2018 में हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार एक मंदिर में हुई थी। यह दोनों की दूसरी शादी थी और इस विवाह से कोई बच्चा पैदा नहीं हुआ। वे दिसंबर 2020 में अलग हो गए। पत्नी ने जहां वैवाहिक अधिकारों की बहाली के लिए आवेदन दायर किया, वहीं पुरुष ने तलाक मांगा। फरवरी 2024 में फैमिली कोर्ट ने पुरुष की याचिका खारिज कर दी। आदेश को चुनौती देते हुए उन्होंने 2024 में वर्तमान अपील को प्राथमिकता दी थी। पत्नी के खिलाफ क्या-क्या लगाए आरोप पति के मुताबिक, वह एक खर्चीली है। पोर्न देखने की आदी है। अक्सर हस्तमैथुन करती है। घर के काम करने से इनकार करती है। अपने ससुराल वालों के साथ बुरा व्यवहार करती है। फोन पर लंबे समय तक बात करती है। पत्नी ने हालांकि सभी आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि अगर वे सच होते तो वे करीब दो साल से एक साथ नहीं रह रहे होते। जजों ने माना कि पति क्रूरता से संबंधित अन्य आरोपों को साबित करने में सक्षम नहीं है। पत्नी द्वारा उठाया गया दूसरा आधार यह है कि उसकी पत्नी यौन रोग से पीड़ित है। हालांकि उसने कहा था कि वह शारीरिक रूप से पीड़ित है।

कनाडा के पूर्व PM ट्रूडो के जाने के बाद अब दोनों पक्ष एक बार फिर से संबंधों को सुधारते दिख रहे

नई दिल्ली/ ओट्टावा  कनाडा में जस्टिन ट्रूडो के प्रधानमंत्री पद से हटने के बाद अब नई भारत-कनाडा संबंध में सुधार के संकेत दिखाई देने लगे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, दोनों देशों की सुरक्षा एजेंसियों के बीच फिर से संपर्क शुरू हो गया है और नए उच्चायुक्तों की नियुक्ति की संभावना पर नजर गड़ाए हुए हैं। इसके पहले खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की जून 2023 में हत्या के बाद राजनयिक तनाव पैदा हो गया था, जिसने दोनों देशों के संबंधों को निचले स्तर पर पहुंचा दिया था। कनाडा के पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने भारत पर हत्या में शामिल होने का बेबुनियाद आरोप लगाया था। दोनों देशों के बीच शुरू हुई चर्चा रिपोर्ट के अनुसार, दोनों देशों के बीच राजनयिक और सुरक्षा चैनलों के माध्यम से दिसम्बर के आसपास चर्चा फिर से शुरू हुई। इसके पहले अक्टूबर में दोनों पक्षों के बीच रिश्तों में तनाव आ गया। भारत ने अपने उच्चायुक्त और 5 अन्य राजनियकों को वापस बुला दिया था, जिन्हें निज्जर की हत्या में पर्सन ऑफ इंटरेस्ट घोषित किया गया था। बदले में भारत ने 6 कनाडाई राजनियकों को निष्कासित कर दिया था। राजनयिक तैनाती पर हो रहा विचार अब एक बार फिर दोनों देश राजनयिकों की तैनाती पर विचार कर रहे हैं। ओट्टावा में राजदूत पद के लिए नई दिल्ली ने कुछ नामों पर विचार किया है। HT की रिपोर्ट के अनुसार, नियुक्ति के लिए स्पेन में भारत के राजदूत दिनेश के पटनायक का नाम इस पद के लिए सबसे आगे हैं। पटनायक 1990 बैच के भारतीय विदेश सेवा के अधिकारी हैं और भारत के वरिष्ठ राजनयिकों में से एक हैं। वे 2016-18 के दौरान ब्रिटेन में उप-राजदूत के रूप में काम कर चुके हैं। ब्रिटेन में काम करने के चलते उनके पास खालिस्तान मामले को लेकर भी समझ का अनुभव है, जो कनाडा में नियुक्ति के लिए अहम है। मामले से परिचित लोगों ने बताया है कि नई दिल्ली में उच्चायुक्त पद के लिए कनाडा की तरफ से क्रिस्टोफर कूटर का नाम है, जो हाल तक दक्षिण अफ्रीका में राजदूत थे। कूटर का नाम कनाडा ने पहले ही प्रस्तावित किया था। इसे साल 2024 के मध्य में भारत की तरफ से भी सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई थी। यह नियुक्तियां कब तक होंगी, इस बारे में अभी साफ नहीं है। कुछ हलकों का यह मानना है कि दूतों की नियुक्ति से पहले दोनों पक्षों के शीर्ष नेतृत्व की बैठक होनी चाहिए ताकि संबंधों को फिर से स्थापित करने का संकेत दिया जा सके।

चीन में दुर्लभ खनिज तत्वों रेयर अर्थ एलिमेंट का एक बड़ा भंडार मिला, दुनिया के 60% दुर्लभ पृथ्वी उत्पादन पर नियंत्रण

बीजिंग  चीन में दुर्लभ खनिज तत्वों (रेयर अर्थ एलिमेंट) का एक बड़ा भंडार मिला है। इसे चीन में मिला मध्यम और भारी खनिज का सबसे बड़ा भंडार माना जा रहा है। इससे चीन को इलेक्ट्रिक वाहनों और रक्षा क्षेत्र के लिए जरूरी खनिजों के उत्पादन में मदद मिलेगी। जनवरी में इस खोज के बारे में पहली बार जानकारी सामने आई थी। इसके बाद चीन के भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (CGS) ने इसकी जांच करते हुए अब इस भंडार की पुष्टि कर दी है। चीन के युन्नान प्रांत में ये खोज हुई है। यह प्रांत खनिजों से भरपूर है। यहां एल्यूमीनियम, जस्ता और टिन के बड़े भंडार हैं। CGS के अनुसार इस भंडार में 1.15 मिलियन टन तक संसाधन हो सकते हैं। इनसे 470,000 टन खनिज निकाले जा सकते हैं। इसमें प्रमुख दुर्लभ तत्व प्रेजोडियम, नियोडिमियम, डिस्प्रोसियम और टेरबियम भी शामिल हैं। ये खनिज काफी महंगे हैं और इनकी वैश्विक स्तर पर बहुत मांग है। जाहिर कि इससे चीन का कई क्षेत्रों में दबदबा बढ़ जाएगा। चीन को होगा बड़ा फायदा चीनी मीडिया का कहना है कि यह खोज खनिज अन्वेषण (मिनरल एक्सपलोरेशन) में एक बड़ी सफलता है। ऐसे भंडार में दुर्लभ पृथ्वी खनिज प्राकृतिक रूप से जमा होते हैं और मिट्टी की सतह पर अवशोषित होते हैं। इससे ‘आयन एक्सचेंज’ जैसे पर्यावरण के अनुकूल तरीकों से उन्हें जमीन से निकालना आसान होता है। इससे पहले इस तरह की आखिरी खोज 1969 में पूर्वी चीन के जियांग्शी प्रांत में हुई थी। CGS के विशेषज्ञों के अनुसार, इस नए भंडार में मुख्य रूप से मध्य और भारी दुर्लभ पृथ्वी खनिज हैं। ये सब इलेक्ट्रिक वाहनों, रिन्यूबल एनर्जी और रक्षा सुरक्षा उपकरणों के लिए जरूरी कच्चा माल हैं। चीन को यह विशाल दुर्लभ भंडार हाल ही में स्थापित राष्ट्रीय भूरासायनिक बेसलाइन नेटवर्क के बाद मिला है। यह नेटवर्क व्यापक डेटा तैयार करने और खनिज अन्वेषण तकनीकों को बेहतर करने के लिए है। एक्सपर्ट का कहना है कि चीन की खोज से दुर्लभ पृथ्वी खनन के क्षेत्र में दुनिया में स्थिति और मजबूत होगी, जहां वह पहले ही अपना दबदबा रखता है। एशिया की बड़ी ताकत चीन के पास करीब 60 फीसदी दुर्लभ पृथ्वी उत्पादन और 85 प्रतिशत प्रसंस्करण क्षमता पर नियंत्रण है। साल 2023 तक चीन का कुल खनन उत्पादन 240,000 टन था, जो दुनिया के सबसे ताकतवर देश अमेरिका से छह गुना ज्यादा है।

भारत-ताइवान मिलकर करने जा रहे ये काम, भारत को चीन पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी, ट्रंप की भी नजर

नई दिल्ली भारत और ताइवान के बीच आर्थिक सहयोग को और मजबूत करने के लिए एक मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) करने की जरूरत है। इससे न केवल भारत को इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के लिए चीन पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी, बल्कि उच्च तकनीक वाले क्षेत्रों में ताइवानी कंपनियों के निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा। यह कहना है ताइवान के उप राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार सू चिन शू का, जो इस समय भारत दौरे पर हैं। सू चिन शू ने भारत में अपने दौरे के बीच प्रतिष्ठित रायसीना डायलॉग में भाग लिया और वरिष्ठ भारतीय अधिकारियों से भी वार्ता की। उन्होंने कहा कि ताइवान की तकनीक और भारत की विशाल युवा जनसंख्या के संयुक्त प्रयास से भारत में उच्च श्रेणी के तकनीकी उपकरणों का उत्पादन मुमकिन हो सकता है, जिससे चीन से आयात पर निर्भरता घटेगी। चीन पर निर्भरता कम करने की रणनीति भारत का चीन के साथ व्यापार घाटा काफी बड़ा है। वर्ष 2023-24 में भारत ने चीन से लगभग 101.75 अरब अमेरिकी डॉलर के उत्पाद आयात किए, जबकि निर्यात मात्र 16.65 अरब डॉलर का ही रहा। भारत चीन से मुख्य रूप से इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, कंप्यूटर हार्डवेयर, दूरसंचार उपकरण, रसायन और दवा उद्योग के कच्चे माल का आयात करता है। ताइवान इस क्षेत्र में भारत की मदद कर सकता है, क्योंकि यह विश्व के कुल सेमीकंडक्टर उत्पादन का लगभग 70 प्रतिशत और उच्चतम तकनीक वाले चिप्स का 90 प्रतिशत से अधिक उत्पादन करता है। ये चिप्स स्मार्टफोन, ऑटोमोबाइल, डेटा सेंटर, रक्षा उपकरण और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसी कई अहम तकनीकों में इस्तेमाल किए जाते हैं। मुक्त व्यापार समझौते की क्यों होगी जरूरत? ताइवान भारत के साथ एक व्यापार समझौता करने को उत्सुक है, जिसकी पहल लगभग 12 वर्ष पहले हुई थी। शू ने बताया कि ताइवान की कंपनियां भारत में निवेश करने की इच्छुक हैं, लेकिन उच्च आयात शुल्क एक बड़ी बाधा है। अगर एक व्यापार समझौता किया जाता है, तो यह दोनों देशों के लिए लाभकारी साबित होगा। ताइवान की कई प्रमुख कंपनियां अपने उत्पादन संयंत्रों को चीन से हटाकर यूरोप, अमेरिका और भारत में ट्रांसफर करने पर विचार कर रही हैं। इसका एक कारण अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक तनाव और दूसरा ताइवान के प्रति चीन के आक्रामक रुख को लेकर चिंताएं हैं। सू चिन शू का मानना है कि ताइवान की उन्नत तकनीक और भारत की विशाल श्रमशक्ति मिलकर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत की भूमिका को और मजबूत कर सकती है। भारत-ताइवान संबंधों में बढ़ती मजबूती हाल के वर्षों में भारत और ताइवान के बीच संबंधों में सकारात्मक बदलाव आया है। दोनों देशों ने पिछले साल एक प्रवासन और गतिशीलता समझौते (Migration and Mobility Agreement) पर हस्ताक्षर किए थे, जिससे भारतीय श्रमिकों के लिए ताइवान में रोजगार के अवसर बढ़ने की संभावना है। हालांकि भारत और ताइवान के बीच औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं, लेकिन व्यापार और सांस्कृतिक स्तर पर दोनों देशों का सहयोग लगातार बढ़ रहा है। वर्ष 1995 में भारत ने ताइपे में ‘इंडिया-ताइपे एसोसिएशन’ (ITA) की स्थापना की थी।     यह दोनों देशों के बीच व्यापार, पर्यटन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इसी वर्ष ताइवान ने भी दिल्ली में ‘ताइपे इकोनॉमिक एंड कल्चरल सेंटर’ की स्थापना की थी। भारत में ताइवान का कुल निवेश 4 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक हो चुका है, जो मुख्य रूप से जूते, मशीनरी, ऑटोमोबाइल पार्ट्स, पेट्रोकेमिकल्स और आईसीटी उत्पादों के क्षेत्रों में केंद्रित है। ताइवानी कंपनियां ‘मेक इन इंडिया’ नीति के तहत भारत में निवेश के नए अवसर तलाश रही हैं। चीन-ताइवान विवाद और भारत की स्थिति गौरतलब है कि चीन ताइवान को अपना एक भाग मानता है और आवश्यक होने पर बल प्रयोग कर उसे मुख्य भूमि में मिलाने की धमकी देता है। हालांकि, ताइवान खुद को स्वतंत्र राष्ट्र मानता है। भारत ने अब तक इस मुद्दे पर संतुलित रुख अपनाया है और ताइवान के साथ अपने व्यापारिक एवं सांस्कृतिक संबंधों को बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया है। भारत और ताइवान के बीच एक व्यापार समझौता न केवल दोनों देशों को आर्थिक रूप से मजबूत करेगा, बल्कि एशिया की व्यापारिक रणनीतियों में भी एक नए युग की शुरुआत कर सकता है।

मुंबई एयरपोर्ट पर पाकिस्तानी पासपोर्ट दिखाया तो एयरपोर्ट के अधिकारी भी हैरान, बिताए 6 घंटे

मुंबई पाकिस्तान के उद्यमी वकार हसन ने एक चौंकाने वाला खुलासा किया कि उन्होंने बिना वीजा के इंडिगो की फ्लाइट से भारत यात्रा की। हसन ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर कर बताया कि जब उन्होंने मुंबई एयरपोर्ट पर पाकिस्तानी पासपोर्ट दिखाया तो एयरपोर्ट के अधिकारी भी हैरान रह गए थे। हालांकि यह यात्रा पूरी तरह से कानूनी थी और वकार को किसी भी तरह की कानूनी समस्या का सामना नहीं करना पड़ा। क्या था मामला? वकार सिंगापुर से सऊदी अरब जा रहे थे और इसके लिए उन्होंने इंडिगो की कनेक्टिंग फ्लाइट ली थी जिसमें मुंबई में छह घंटे का लेओवर था। हालांकि वह एयरपोर्ट से बाहर नहीं निकल सकते थे लेकिन इसके बावजूद उनका भारत में रहना पूरी तरह से वैध था। वकार ने बताया कि बहुत से लोग यहां तक कि वह खुद भी इस बात से अनजान थे कि पाकिस्तानी नागरिक बिना वीजा के कनेक्टिंग फ्लाइट से भारत यात्रा कर सकते हैं।

पति ने मांगा तलाक तो कोर्ट ने कहा- ‘ये कोई गुनाह नहीं’, पत्नी पोर्नोग्राफी देखती है या आत्म-संतुष्टि में संलग्न होती है

मद्रास मद्रास हाईकोर्ट ने एक तलाक संबंधी याचिका पर फैसला सुनाते हुए साफ किया कि यदि कोई पत्नी पोर्नोग्राफी देखती है या आत्म-संतुष्टि में संलग्न होती है, तो इसे हिंदू विवाह अधिनियम के तहत पति के प्रति क्रूरता नहीं माना जाएगा। अदालत ने पति की तलाक की याचिका खारिज करते हुए कहा कि यह कोई अपराध नहीं है और न ही तलाक का वैध कारण बन सकता है।  क्या था मामला? करूर जिले के एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी के खिलाफ तलाक की याचिका दायर की थी, जिसमें उसने आरोप लगाया कि उसकी पत्नी महंगी चीजें खरीदती है, अश्लील फिल्में देखने की आदी है और घर के कामों से बचती है। इसके अलावा, उसने यह भी दावा किया कि पत्नी ससुराल वालों के साथ गलत व्यवहार करती है और फोन पर घंटों समय बिताती है। पति का यह भी कहना था कि उसकी पत्नी किसी यौन रोग से पीड़ित है, जिससे उनका वैवाहिक जीवन प्रभावित हुआ। न्यायालय ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि विवाहेतर संबंध तलाक का आधार हो सकता है, लेकिन आत्म-संतुष्टि को किसी भी स्थिति में पति के प्रति क्रूरता नहीं माना जा सकता।  जज ने कहा: “यदि शादी के बाद कोई महिला विवाह के बाहर संबंध स्थापित करती है, तो यह तलाक का कारण बन सकता है। हालांकि, आत्म-संतुष्टि में संलग्न होना तलाक का आधार नहीं हो सकता।” कब हुई थी शादी? पति-पत्नी की शादी 1 जुलाई 2018 को अरुलमिघु पसुपतीश्वर मंदिर, करूर में हुई थी। हालांकि, 9 दिसंबर 2020 से वे अलग रह रहे थे। यह दोनों की दूसरी शादी थी। फरवरी 2024 में फैमिली कोर्ट ने पति की याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट में अपील की थी। पत्नी ने पति के सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि अगर ये सभी बातें सही होतीं, तो वे दोनों लगभग दो साल तक एक साथ नहीं रह पाते। अदालत ने पाया कि पति अपनी पत्नी पर क्रूरता से जुड़े आरोपों को साबित करने में असफल रहा, जिसके चलते उसकी तलाक की याचिका खारिज कर दी गई।

पुलिस की बात मानते हुए वे बुलेटप्रूफ गाड़ी का ही इस्तेमाल करें, भाजपा के फायरब्रांड नेता को पुलिस की सलाह

हैदराबाद भाजपा के फायरब्रांड नेता और तेलंगाना के विधायक टी राजा सिंह से हैदराबाद पुलिस ने कहा है कि उन्हें जान का खतरा है, इसलिए पुलिस की बात मानते हुए वे बुलेटप्रूफ गाड़ी का ही इस्तेमाल करें। गोशामहल विधान सभा का प्रतिनिधित्व करने वाले राजा सिंह को हैदराबाद पुलिस ने बुधवार (19 मार्च) को एक नोटिस भेजा है, जिसमें ये कहा गया है। पुलिस ने नोटिस में कहा है कि वे सरकार द्वारा आवंटित बुलेटप्रूफ का ही इस्तेमाल करें और साथ में सुरक्षाकर्मियों को भी रखें। उन्हें अक्सर बुलेट पर भी देखा गया है। एक पुलिस अधिकारी ने ये जानकारी दी है। अधिकारी ने बताया कि विधायक राजा सिंह को नोटिस भेजकर उन्हें बुलेटप्रूफ वाहन का उपयोग करने और आवंटित सुरक्षा कर्मियों का इस्तेमाल करने के लिए कहा गया है ताकि किसी भी प्रकार की अनहोनी या अप्रिय घटना से बचा जा सके। दरअसल, हैदराबाद पुलिस ने भाजपा विधायक को यह नोटिस इसलिए जारी किया है क्योंकि विधायक कई बार बिना सुरक्षाकर्मियों के भी घूमते देखे गए हैं। एहतियातन दी गई है चेतावनी: पुलिस अधिकारी ने कहा कि यह ऐहतियाती सुरक्षा उपायों के तौर पर एक नियमित चेतावनी है। सिंह को भेजे गए नोटिस में कहा गया है, “आपको लगातार धमकी भरे कॉल आ रहे हैं और यह देखा गया है कि आप अक्सर बिना किसी सुरक्षाकर्मी के आवास और कार्यालय से बाहर निकल जा रहे हैं और जनता के बीच घूम रहे हैं, जो आपके जीवन और सुरक्षा के प्रति लापरवाही दर्शाता है।” औरंगजेब विवाद के बाद चिंता बढ़ी बता दें कि हाल ही में औंरगजेब की कब्र विवाद के बीच नागपुर में हुई हिंसा के बाद हिन्दूवादी नेता टी राजा सिंह ने भी कब्र हटाने की मांग की है। उन्होंने कहा, “मैं विहिप और बजरंग दल की मांग का समर्थन करता हूं।” माना जा रहा है कि उनके इस बयान से कुछ लोगों में नाराजगी है। इसलिए उन पर हमले हो सकते हैं। इससे पहले भी राजा सिंह ऐसे कई बयान दे चुके हैं, जिस पर किसी खास समुदाय ने नाराजगी जाहिर की है।

टीशर्ट्स में नारा लिखा था, तमिलनाडु लड़ेगा, तमिलनाडु जीतेगा, परिसीमन में न्याय हो, जिस पर लोकसभा में मच गया हंगामा

नई दिल्ली लोकसभा में गुरुवार को सदन की कार्यवाही शुरू होते ही जमकर हंगामा हुआ। इसके बाद कार्यवाही को दो बार शुरू किया गया, लेकिन हंगामे के चलते कुछ ही मिनटों में सदन स्थगित हो गया। अंत में शुक्रवार सुबह 11 बजे तक के लिए कार्यवाही को स्थगित किया गया। यह पूरा बवाल डीएमके सांसदों की ओर से खास नारे वाली टीशर्ट पहनकर आने को लेकर हुआ। इन टीशर्ट्स में डीएमके सांसदों ने एक नारा लिखवाया था, जिस पर स्पीकर ने ऐतराज जताया। वहीं भाजपा समेत एनडीए के सांसदों ने भी खूब हंगामा किया। टीशर्ट्स में जो नारा लिखा था, वह था- तमिलनाडु लड़ेगा, तमिलनाडु जीतेगा, परिसीमन में न्याय हो। सांसदों के इस तरह नारे लिखी टीशर्ट पहनकर पहुंचने पर स्पीकर ओम बिरला ने सख्त आपत्ति जाहिर की। उन्होंने कहा कि कुछ सदस्य सदन की मर्यादा और गरिमा का पालन नहीं कर रहे हैं। ऐसा करना संसद की गरिमा का खुला उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि ऐसी हरकत करने से पहले सांसदों को संसद का नियम 349 पढ़ लेना चाहिए। स्पीकर बिरला ने डीएमके सांसदों से कहा, ‘यदि आप नारे लिखी टीशर्ट पहनकर आएंगे तो सदन की कार्यवाही नहीं चलेगी। यदि आप इन टीशर्ट्स को उतारकर आएं, तभी सदन चलेगा।’ टीशर्ट पहनकर आने वाले ज्यादातर सांसद डीएमके के थे। उनका कहना था कि आगामी परिसीमन में तमिलनाडु को नुकसान हो सकता है। इसलिए हम पहले से ही आगाह कर रहे हैं कि ऐसा कोई अन्याय न किया जाए। हंगामे के चलते स्पीकर ने पहले सदन की कार्य़वाही को 12 बजे तक के लिए स्थगित किया। फिर कार्यवाही को दो बजे तक के लिए स्थगित किया गया। अंत में पूरे दिन के लिए सेशन को स्थगित करना पड़ा। बता दें कि लोकसभा सीटों के परिसीमन को लेकर एमके स्टालिन लगातार हमलावर हैं। उनका कहना है कि नई जनगणना के अनुसार यदि परिसीमन हुआ तो तमिलनाडु में लोकसभा की सीटें 39 की बजाय 31 ही रह जाएंगी। इसी तरह वह केरल, आंध्र, तेलंगाना और कर्नाटक को भी सीटों के कम होने का डर दिखा रहे हैं। स्टालिन और सिद्धारमैया जैसे नेताओं का कहना है कि लोकसभा सीटों का परिसीमन 1971 की जनगणना के अनुसार ही रहना चाहिए।

एक शख्स अपनी पत्नी के खिलाफ पुलिस के पास पहुंचा, सेक्स के लिए 5 हजार रुपये मांगती है पत्नी, निजी अंगों पर चोट

बेंगलुरु पति और पत्नी के बीच झगड़े की यह खबर आपको हैरान कर देगी। यहां पति ने पत्नी पर मानसिक, शारीरिक उत्पीड़न के बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। दावा किया जा रहा है कि पत्नी सोने के बदले रुपयों की मांग करती है। इसके अलावा उसे शारीरिक कष्ट भी देती है। इतना ही नहीं ऑफिस की मीटिंग के दौरान कैमरे पर पत्नी की अभद्र हरकतों के चलते युवक को अपनी नौकरी भी गंवानी पड़ गई। निजी अंगों पर चोट पहुंचाई मामला कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु का है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एक शख्स पत्नी के खिलाफ पुलिस के पास पहुंचा है। उसके आरोप हैं कि पत्नी ने कई बार उसके निजी अंग पर चोट पहुंचाई है। पत्नी के अलावा उसके सास-ससुर पर भी रुपयों की लगातार मांग करने के आरोप लगाए गए हैं। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। सेक्स के बदले मांगती है रुपये रिपोर्ट्स के अनुसार, पति के आरोप हैं कि पत्नी साथ सोने के लिए भी हर रोज 5 हजार रुपये मांगती है। फिलहाल, इस संबंध में महिला की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। पति के आरोप हैं कि साल 2022 में शादी के बाद से ही पत्नी ने उसके साथ संबंध बनाने से मना कर दिया था और इसकी वजह वह बच्चे बताती है। आरोप हैं कि जब पति ने निरोध के साथ सेक्स की बात कही, तो पत्नी ने रुपयों की मांग कर दी थी। तलाक चाहिए तो रुपये दो खबर है जब शख्स ने पत्नी से तलाक चाहा, तो उसने 45 लाख रुपये की डिमांड रख दी। इसके अलावा आरोप ये भी हैं कि महिला पति को सुसाइड की धमकी देकर ब्लैकमेल कर रही है। नौकरी भी गंवाई शख्स ने नौकरी जाने की वजह भी पत्नी को बताया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पत्नी पर आरोप हैं कि पति के वर्क फ्रॉम होम के दौरान वह मीटिंग के बीच आकर नाचती थी और झगड़ा भी करती थी। पति की मीटिंग के बीच ही जोर से चिल्लाती थी। इन घटनाओं के चलते पीड़ित को नौकरी गंवानी पड़ गई थी।

सरकार ने स्थानीय रूप से निर्मित 307 तोपों के साथ-साथ टोइंग व्हीकल्स के लिए 7,000 करोड़ के सौदे पर लगाई मुहर

नई दिल्ली भारतीय सेना जल्द ही स्वदेशी आर्टिलरी गन से लैस होगी। देश के रक्षा विनिर्माण के क्षेत्र में आत्मनिर्भता को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने 7000 करोड़ रुपए के सौदे को मंजूरी दे दी है। मामले से अवगत अधिकारियों ने गुरुवार को बताया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति (CCS) ने स्थानीय रूप से निर्मित 307 तोपों के साथ-साथ टोइंग व्हीकल्स के लिए 7,000 करोड़ रुपये के सौदे पर मुहर लगा दी है। अधिकारियों ने नाम न बताने की शर्त पर बताया है कि इस ATAGS ( एडवांस्ड टॉड आर्टिलरी गन सिस्टम) सौदे में 327 टोइंग ट्रक भी शामिल हैं, जिससे मार्च के अंत तक अनुबंध पर हस्ताक्षर करने का रास्ता साफ हो गया है। 155 मिमी/52-कैलिबर की इस तोप की रेंज लगभग 48 किमी है। नई तोपों की खरीद से भारत में आधुनिकीकरण को बढ़ावा मिलेगा और इससे भारतीय सेना की तैयारी भी बढ़ेगी। सेना ने 2017 से अब तक 720 मिलियन डॉलर के अनुबंध के तहत 100 ऐसी तोपों को अपने बेड़े में शामिल किया है और उनमें से कई को पहाड़ों में संचालन को सक्षम करने के लिए अपग्रेड करने के बाद लद्दाख सेक्टर में तैनात किया गया है। तोपों को मूल रूप से रेगिस्तानी इलाकों के लिए खरीदा गया था। ATAGS प्रोजेक्ट क्या है? बता दें कि DRDO ने 2013 में ATAGS प्रोजेक्ट की शुरुआत की थी, जिसका उद्देश्य सेना की पुरानी तोपों को आधुनिक 155mm आर्टिलरी गन सिस्टम से बदलना था। DRDO ने तोप के निर्माण के लिए दो निजी फर्मों, भारत फोर्ज और टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड के साथ समझौता किया है। यह ऑर्डर दोनों कंपनियों के बीच विभाजित किया जाएगा। भारत फोर्ज, जो ATAGS टेंडर के लिए सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी के रूप में उभरी है, 60% तोपों का निर्माण और आपूर्ति करेगी। वहीं बचे हुए 40 फीसदी तोपों का उत्पादन TASL द्वारा किया जाएगा। रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा इससे पहले 1 फरवरी को भारत ने केंद्रीय बजट में रक्षा बजट के लिए 6.81 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि निर्धारित की थी। इसमें सेना के आधुनिकीकरण के लिए 1.8 लाख करोड़ रुपये का आवंटन किया गया था। सेना की खरीदारी सूची में फिलहाल कई लड़ाकू जेट, हेलीकॉप्टर, युद्धपोत, पनडुब्बी, टैंक, तोपें, ड्रोन, रॉकेट और मिसाइल शामिल हैं। आधुनिकीकरण के बजट का 75% रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने के लिए घरेलू स्रोतों से हथियार और उपकरण खरीदने पर खर्च किया जाएगा। गौरतलब है कि हाल ही में स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट द्वारा प्रकाशित एक रिपोर्ट से पता चला है कि 2015-19 और 2020-24 के बीच भारत का हथियार आयात 9.3 फीसदी तक कम हो गया है।

टैरिफ में बड़ी कटौती करने जा रहा भारत, लेकिन 2 अप्रैल से, हम उन पर वही टैरिफ लगाएंगे जो वे हम पर लगाते हैं

वाशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि भारत जल्द ही अमेरिकी वस्तुओं पर लगाए गए टैरिफ में बड़ी कटौती करेगा। इसके साथ ही ट्रंप ने फिर दोहराया कि अमेरिका 2 अप्रैल से भारत के खिलाफ जवाबी कदम उठाएगा। ट्रंप ने भारत पर अमेरिकी वस्तुओं पर भारी टैरिफ लगाने का आरोप लगाते हुए कहा कि इससे अमेरिकी कंपनियों के लिए भारतीय बाजार में प्रवेश करना लगभग असंभव हो गया। ट्रंप ने कहा, “मुझे लगता है कि भारत संभवतः इन टैरिफों को काफी हद तक कम करने जा रहा है। लेकिन 2 अप्रैल से, हम उन पर वही टैरिफ लगाएंगे जो वे हम पर लगाते हैं।” ट्रंप ने पहले घोषणा की थी कि 2 अप्रैल से उन देशों के खिलाफ जवाबी टैरिफ लागू होंगे, जो अमेरिकी उत्पादों पर ऊंचे शुल्क लगा रहे हैं। इससे कुछ दिन पहले ही ट्रंप ने दावा किया था कि भारत टैरिफ कम करने को तैयार हो गया है। उन्होंने कहा, “किसी ने आखिरकार उन्हें बेनकाब कर दिया है कि वे क्या कर रहे थे।” “किसी ने आखिरकार उन्हें बेनकाब कर दिया” ट्रंप ने कहा, “भारत हम पर बड़े पैमाने पर टैरिफ लगाता है। बहुत बड़े पैमाने पर। आप वहां कुछ भी नहीं बेच सकते… लेकिन अब वे सहमत हो गए हैं; वे अब अपने टैरिफ को बहुत नीचे लाना चाहते हैं क्योंकि किसी ने आखिरकार उन्हें बेनकाब कर दिया है।” ट्रंप ने पहले भी भारत को “टैरिफ किंग” और “बड़ा दुरुपयोगकर्ता” कहकर संबोधित किया था। पिछले दिनों व्हाइट हाउस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने भारत के साथ व्यापारिक बाधाओं पर चर्चा की और अमेरिकी उत्पादों के लिए भारतीय बाजार में आ रही कठिनाइयों का जिक्र किया था। ट्रंप ने भारत के साथ करीब 100 अरब डॉलर के व्यापार घाटे की ओर भी इशारा किया और कहा कि इस असंतुलन को दूर करने के लिए बातचीत जारी है। भारत में अमेरिकी शराब पर 150 प्रतिशत टैरिफ व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलीन लेविट ने भी भारत की व्यापार नीति की आलोचना करते हुए कहा कि भारत अमेरिकी शराब पर 150 प्रतिशत और कृषि उत्पादों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाता है। उन्होंने कहा, “मेरे पास एक चार्ट है, जिसमें दिखाया गया है कि न केवल कनाडा, बल्कि अन्य देशों में भी अमेरिकी उत्पादों पर भारी शुल्क लगता है। अगर आप कनाडा को देखें, तो अमेरिकी चीज और मक्खन पर लगभग 300 प्रतिशत टैरिफ है। भारत में अमेरिकी शराब पर 150 प्रतिशत टैरिफ है। क्या आपको लगता है कि इससे केंटकी बॉर्बन को भारत में निर्यात करने में मदद मिलेगी? मुझे नहीं लगता। भारत के कृषि उत्पादों पर भी 100 प्रतिशत टैरिफ है।” ट्रंप प्रशासन की इस घोषणा से भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों में नए मोड़ आने की संभावना है। अब देखना होगा कि भारत अपने टैरिफ में कितनी कटौती करता है और इस पर भारत सरकार की क्या प्रतिक्रिया होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह कटौती होती है, तो इससे दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ावा मिल सकता है, लेकिन भारतीय घरेलू उद्योगों पर इसका असर भी देखने को मिलेगा।

पुलिस ने बताया- कुरान पर एक अफवाह और 140 पोस्ट, नागपुर में देखते ही देखते बिगड़ा माहौल, हुआ उपद्रव

नागपुर सोमवार की शाम को नागपुर में जो बवाल मचा, वह अब थम गया है। लेकिन अब भी महल समेत शहर के कई इलाकों में कर्फ्यू लागू है। अब तक इस मामले में पुलिस ने 84 लोगों को अरेस्ट किया है, जिसमें ने से एक मास्टरमाइंड फहीम खान भी शामिल है। इस बीच पुलिस का कहना है कि यह पूरा बवाल एक अफवाह पर हुआ कि हिंदूवादी संगठनों के प्रदर्शन के दौरान एक कपड़े को जलाया गया है। इस कपड़े में कुरान की आयतें लिखी थीं। इसी अफवाह पर उस जगह भीड़ जुटी, जहां हिंदू संगठनों का प्रदर्शन हो रहा था। देखते ही देखते माहौल खराब हो गया। महल इलाके में हिंदू समाज की दुकानों, घरों और प्रतिष्ठानों को टारगेट करते हुए उपद्रवी भीड़ ने जमकर पत्थरबाजी की। यह बलवा ऐसा था कि करीब एक दर्जन पुलिस वाले घायल हो गए और इतने ही नागरिकों को चोटें आईं। पुलिस का कहना है कि कुरान की आयतें लिखे कपड़े को जलाने की अफवाह और कुल 150 के करीब उकसाने वाली पोस्ट ने माहौल बिगाड़ दिया। इन अफवाहों ने ऐसा काम किया कि देखते ही देखते मुस्लिम वर्ग के लोग बड़ी संख्या में जुटने लगे। हिंदू संगठनों के प्रदर्शन के दौरान ही ये लोग जुटे तो माहौल खराब हो गया। इस पूरी साजिश में एक फेसबुक अकाउंट ऐसा भी पाया गया है, जिसका संचालन बांग्लादेश से हो रहा था। साफ है कि इस हिंसा के पीछे एक गहरी साजिश भी है। शुरुआती जांच में पता चला है कि विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के प्रदर्शन के दौरान एक चादर को जलाया गया। इस चादर में कुरान की आयतें लिखी थीं। इस मामले में पुलिस ने 7 लोगों को अरेस्ट किया था, जिन्हें गुरुवार को बेल पर ही रिहा कर दिया गया। नागपुर पुलिस के साथ मिलकर महाराष्ट्र साइबर सेल ने जो जांच की है, उससे पता चला है कि करीब 140 पोस्ट और वीडियो ऐसे थे, जिनसे लोगों को उकसाने की कोशिश हुई। इन अकाउंट्स को नोटिस भेजा गया है। फेसबुक से इन अकाउंट्स को चलाने वालों की पहचान पूछी गई है। इसके अलावा ऐसी आपत्तिजनक सामग्री हटाने को भी कहा गया है। महाराष्ट्र साइबर सेल का कहना है कि इन पोस्ट को इस तरह से लिखा गया था कि एक वर्ग की भावनाएं आहत हों। इसी के नतीजे में जो उपद्रव हुआ, उसने माहौल बिगाड़ दिया। सीएम फडणवीस ने कहा था- हिंसा के पीछे कोई साजिश है फिलहाल प्रशासन ने नागरिकों को अलर्ट किया है कि वे सोशल मीडिया पर कोई भी पोस्ट सोच-समझकर ही शेयर करें। बांग्लादेश से संचालित होने वाले एक फेसबुक अकाउंट पर तो यह भी लिखा गया कि अभी यह एक छोटी घटना है। भविष्य में ऐसे कई वाकये होंगे। साइबर सेल ने फेसबुक से ऐसी सभी सामग्रियों को ब्लॉक करने को कहा है। अब तक पुलिस ने इस केस में 10 एफआईआर दर्ज की हैं और कुल 84 लोग अरेस्ट किए जा चुके हैं। बता दें कि सीएम देवेंद्र फडणवीस ने भी कहा था कि नागपुर हिंसा के पीछे कोई साजिश है। इस केस में अरेस्ट फहीम खान के बारे में भी पता चला है कि वह लोगों को उकसाता था। यहां तक कि वह पुलिस को भी हिंदुओं की फोर्स कहता था।

WhatsApp ने 9967000 भारतीय अकाउंट्स को किया चलता! बैन की बताई ये वजह

नई दिल्ली व्हाट्सऐप ने अपनी लेटेस्ट इंडिया मंथली रिपोर्ट में खुलासा किया है कि जनवरी 2025 में 99 लाख भारतीय अकाउंट्स को बैन किया गया. यह कार्रवाई प्लेटफॉर्म पर बढ़ते स्कैम, स्पैम और फ्रॉड को रोकने के लिए की गई है ताकि इसकी सुरक्षा और विश्वसनीयता बनी रहे. इस प्लेटफॉर्म ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि यूजर्स नियमों का उल्लंघन करना जारी रखते हैं, तो और अधिक अकाउंट्स पर प्रतिबंध लगाया जाएगा. आईटी नियमों के तहत कार्रवाई व्हाट्सऐप की यह रिपोर्ट सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 के नियम 4(1)(डी) और नियम 3ए(7) के अनुपालन में पब्लिश की गई है. इस रिपोर्ट में व्हाट्सऐप द्वारा अपने यूजर्स के लिए एक सुरक्षित और भरोसेमंद प्लेटफॉर्म बनाए रखने के प्रयासों पर जोर दिया गया है. कितने अकाउंट हुए बैन? व्हाट्सऐप ने जनवरी 2025 में 9,967,000 भारतीय अकाउंट्स बैन किए. इनमें से 1,327,000 अकाउंट्स को प्लेटफॉर्म ने प्रोएक्टिव रूप से बैन कर दिया, यानी यूजर्स की शिकायतों से पहले ही इन पर कार्रवाई कर दी गई. यह बैन व्हाट्सऐप के इंटिग्रेटेड डिटेक्शन सिस्टम के आधार पर किया गया, जो संदिग्ध व्यवहार की पहचान करता है. Meta की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा Meta की ट्रांसपेरेंसी रिपोर्ट बताती है कि WhatsApp ने भारत में 8.45 मिलियन (84 लाख से ज्यादा) अकाउंट्स पर बैन लगाया। यह कार्रवाई Information Technology Act की धारा 4(1)(d) और धारा 3A(7) के प्रावधानों का पालन करने के लिए की गई थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह बैन 1 अगस्त से 31 अगस्त के बीच लागू किया गया। WhatsApp ने किन अकाउंट्स को किया बैन? 1.66 मिलियन अकाउंट्स को गंभीर उल्लंघनों के कारण तुरंत ब्लॉक कर दिया गया। बाकी के अकाउंट्स की जांच के बाद उन्हें संदिग्ध गतिविधियों में शामिल पाए जाने पर बैन किया गया। 1.6 मिलियन से अधिक अकाउंट्स को WhatsApp की निगरानी के दौरान प्रोएक्टिव रूप से बैन कर दिया गया, जिनमें यूजर शिकायतों की जरूरत नहीं पड़ी, क्योंकि वे पहले भी प्लेटफॉर्म के दुरुपयोग में लिप्त पाए गए थे। WhatsApp ने बड़े पैमाने पर बैन क्यों किया? सर्विस की कंडीशन का उल्लंघन (Violation of Terms of Service):     बल्क मैसेज भेजना     स्पैमिंग और फ्रॉड एक्टिविटीज     गुमराह करने या हानिकारक जानकारी साझा करना     गैरकानूनी गतिविधियां (Illegal Activities):     लोकल कानूनों के उल्लंघन में पाए गए अकाउंट्स पर प्रतिबंध लगाया गया। यूजर शिकायतें (User Complaints): 10,707 यूजर्स की शिकायतें मिलीं, जिनमें से 93% शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई की गई। उत्पीड़न, दुर्व्यवहार, या अनुचित व्यवहार की शिकायतों के आधार पर कार्रवाई की गई। यूजर्स की सुरक्षा के लिए WhatsApp की बड़ी पहल WhatsApp के ये प्रोएक्टिव कदम यूजर्स के लिए एक सुरक्षित और भरोसेमंद माहौल बनाने के लिए उठाए गए हैं। Meta के द्वारा लाखों अकाउंट्स को बैन करने का निर्णय यह दर्शाता है कि कंपनी WhatsApp को एक सुरक्षित और भरोसेमंद प्लेटफॉर्म बनाए रखने के लिए लगातार कोशिश कर रही है। कितनी शिकायतें आईं और कितनी पर कार्रवाई हुई? जनवरी 2025 के दौरान व्हाट्सऐप को 9,474 शिकायतें मिलीं. इनमें से 239 मामलों में अकाउंट्स पर प्रतिबंध लगाया गया या अन्य सुधारात्मक कार्रवाई की गई. इन शिकायतों में यूजर्स द्वारा भेजे गए ईमेल और डाक पत्र भी शामिल थे, जो व्हाट्सऐप के भारत स्थित शिकायत अधिकारी को भेजे गए थे. व्हाट्सऐप कैसे करता है अकाउंट्स को डिटेक्ट और बैन? व्हाट्सऐप ने बताया कि वह मल्टी-लेयर्ड सिक्योरिटी सिस्टम का इस्तेमाल करता है, जिससे हानिकारक गतिविधियों में शामिल अकाउंट्स की पहचान की जाती है. यह सिस्टम तीन स्तरों पर काम करता है – 1. रजिस्ट्रेशन के दौरान: जब कोई नया अकाउंट बनता है, तो संदिग्ध गतिविधियों वाले अकाउंट्स को फ्लैग कर दिया जाता है. 2. मैसेजिंग के दौरान: व्हाट्सऐप के ऑटोमेटेड सिस्टम्स ऐसे अकाउंट्स की पहचान करते हैं जो बल्क मैसेजिंग या स्पैमिंग कर रहे होते हैं. 3. यूजर रिपोर्ट्स के आधार पर: यदि कोई यूजर किसी अकाउंट की शिकायत करता है, तो व्हाट्सऐप उस अकाउंट की जांच करता है और जरूरी कार्रवाई करता है. व्हाट्सऐप अकाउंट्स क्यों किए जाते हैं बैन? अगर आप भी व्हाट्सऐप का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं, तो आपका अकाउंट भी बैन हो सकता है. व्हाट्सऐप अकाउंट्स को बैन करने के पीछे तीन प्रमुख कारण होते हैं – 1. नियमों का उल्लंघन: बल्क मैसेजिंग, स्पैम, फ्रॉड और फेक न्यूज फैलाने वाले अकाउंट्स को व्हाट्सऐप के नियमों के तहत बैन किया जाता है. 2. अवैध गतिविधियां: जो अकाउंट्स भारतीय कानूनों के खिलाफ गतिविधियों में संलिप्त होते हैं, उन्हें प्लेटफॉर्म हटा देता है. 3. यूजर की शिकायतें: यदि किसी अकाउंट से परेशान करने वाले, अपमानजनक या अनुचित संदेश भेजे जा रहे हैं तो यूजर्स इसकी रिपोर्ट कर सकते हैं, जिससे उस अकाउंट पर कार्रवाई हो सकती है. व्हाट्सऐप से बैन होने से कैसे बचें? अगर आप व्हाट्सऐप का उपयोग सही तरीके से नहीं कर रहे हैं, तो आपका अकाउंट भी बैन हो सकता है. इससे बचने के लिए – • व्हाट्सऐप के नियमों और शर्तों का पालन करें. • बल्क मैसेजिंग, स्पैम या किसी भी संदिग्ध गतिविधि में शामिल न हों. • यदि आपको किसी अकाउंट से स्पैम मैसेज या स्कैम कॉल्स मिलते हैं, तो तुरंत उसकी रिपोर्ट करें. इससे व्हाट्सऐप को उन अकाउंट्स के खिलाफ कार्रवाई करने में मदद मिलेगी और आप तथा अन्य यूजर्स सुरक्षित रहेंगे.  

विकसित रेल-विकसित भारत विश्व स्तरीय से श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ: एम. जमशेद

भारतीय रेलवे, भारत की विकास कहानी का क्राउचिंग टाइगर, दुनिया की सबसे उल्लेखनीय और कम चर्चित कहानियों में से एक है कि कैसे बुनियादी ढांचे और कनेक्टिविटी के प्रति जागरूक सार्वजनिक नीति में रणनीतिक निवेश राष्ट्रीय विकास के लिए प्रभावशाली लाभांश हो सकता है। पिछले दशक (2014-2024) के दौरान भारतीय रेलवे ने जो प्रगति की है, वह विकास और प्रगति का स्वर्णिम काल हो सकता है, और यह प्रणाली आज विश्व स्तर पर सबसे तेजी से बढ़ते रेलवे नेटवर्क में से एक है। इसके संदर्भ में, भारत की कहानी को क्या अलग बनाता है और इसे विकास के लिए समान महत्वाकांक्षा वाले देशों और क्षेत्रों के लिए एक सबक बनाता है? मुख्य बात एक सार्वजनिक नीति दृष्टिकोण था जिसे सबसे अच्छे ढंग से यह कहकर संक्षेप में प्रस्तुत किया जा सकता है कि रेलवे के लिए योजना भारत के साथ और भारत के लिए बनाई गई है। इसका मतलब यह चिन्हित करना था कि यह प्रणाली आम आदमी के लिए रेलवे के रूप में अपनी आवश्यक भूमिका में विश्व स्तरीय और किफायती बनी रहनी चाहिए, साथ ही भारत के 22.4 मिलियन लोगों के दैनिक प्रयासों के साथ-साथ, जो अपने आर्थिक जीवन के एक हिस्से के रूप में इस सेवा का उपयोग करते हैं – और यह कि इसे एक ऐसी प्रणाली के रूप में समानांतर रूप से विकसित होना चाहिए जो भारत के उद्योग, वाणिज्य और 5 ट्रिलियन डालर की अर्थव्यवस्था की महत्वाकांक्षा का समर्थन करती है। इसके लिए व्यापार करने के तरीके में क्रांतिकारी बदलाव की आवश्यकता थी। अतीत में रेलवे अपनी धीमी विकास दर, आधुनिकीकरण और बुनियादी ढांचे की क्षमता संतृप्ति आदि के लिए आलोचना के घेरे में आया था। यह अभी भी उन लोगों से आता है जो पर्याप्त ज्ञान के बिना जानकारी प्राप्त किए पुरानी मानसिकता से चिपके हुए हैं जैसे कि नेटवर्क विकास की अक्सर 1950 के बाद से केवल 68000 किमी तक क्रमिक वृद्धि के लिए आलोचना की जाती है, बिना यह जाने कि लाइन क्षमता वृद्धि के लिए महत्वपूर्ण बढोतरी ट्रैक किलोमीटर की है जो आज 132000 किमी से अधिक हो गई है। पिछले दशक के साथ इसके प्रदर्शन की दस साल की व्यापक तुलना इस बात को साबित करती है। 2014-2024 के दौरान, 2004-2014 के 14900 की तुलना में कुल 31000 किलोमीटर नये ट्रैक की स्थापना की गई है। इसी तरह कुल संचयी माल लदान 8473 मिलियन टन यानी 12660 मिलियन टन तक बढ़ गया तथा भारतीय रेल ने 8.64 लाख करोड़ के मुकाबले 18.56 लाख करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया। इसके साथ ही विद्युतीकरण के फलस्वरूप कार्बन फुटप्रिंट पर बचत 5188 किलोमीटर की तुलना में 44000 किलामीटर से अधिक हो गई है। पिछले दशक में शून्य के मुकाबले 2741 किमी लंबे विश्व स्तरीय डेडीकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का निर्माण, लोको का उत्पादन 4695 से बढ़कर 9168 हो गया है और कोचों का निर्माण 32000 से बढ़कर 54000 हो गया। भारतीय रेल ने उत्पादकता और प्रदर्शन के सभी मापदंडों में नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। प्रशासनिक व्यवस्था में प्रमुख सुधार मुख्य बजट के साथ रेलवे बजट के विलय के साथ आया, जिसे स्टीम एज माइंड सेट वाले कई बूमर्स अभी भी बिना किसी स्पष्ट कारण के याद करते हैं। रेलवे को वित्तीय कमी के कारण संसाधनों की कमी का सामना करना पड़ा, जिसके कारण स्वीकृत परियोजनाओं की बड़ी संख्या में लंबित थी, लेकिन पिछले दशक में जीबीएस में 8.25 लाख करोड़ रुपये का निवेश हुआ, जबकि पिछले दस वर्षों में यह केवल 1.56 लाख करोड़ रुपये था। रेलवे जल्द ही श्रीनगर के लिए अपनी पहली ट्रेन चलाएगा, घाटी में सफर के लिए ट्रैक का निर्माण पूरा हो चुका है, इस रेल मार्ग में सबसे ऊंचे पुलों और विशाल पहाड़ों पर नेटवर्क को जोड़ने वाली सबसे लंबी रेल सुरंगों का निर्माण हो चुका है। भारतीय रेलवे अपनी निर्बाध कनेक्टिविटी के लिए 100% विद्युतीकरण को प्राप्त करने वाला पहला प्रमुख रेलवे बनने वाला है, जिससे जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम होगी और कार्बन फुटप्रिंट में भारी कमी आएगी। रेलवे नेटवर्क में टक्कर रोधी कवच का उपयोग भी यातायात रेलवे प्रणाली में सबसे बड़ा है। भारत मे संचालित रेलगाड़ियां भी ‘विश्व स्तरीय’ से आगे निकल रही हैं। भारतीय रेलवे ने घरेलू आवश्यकताओं के साथ उन्नत वैश्विक तकनीकों का सफलतापूर्वक क्रियान्वयन किया है, जिसका लक्ष्य संरक्षित, तेज, स्वच्छ और अधिक आरामदायक रेलगाड़ियां बनाना है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि भारतीय रेल सभी के लिए आसानी से उपलब्ध हो सके। भारतीय रेलवे अपने अनूठे बिजनेस मॉडल के साथ अपने माल ढुलाई राजस्व से यात्री परिहवन के मद के घाटे को वहन करती है और फिर भी लाभदायक बनी रहती है। प्रमुख विकसित रेलवे प्रणालियाँ या तो निजीकरण कर दी गई हैं और उच्च टैरिफ तय करने के लिए स्वतंत्र हैं या अपने घाटे के लिए सरकारी सब्सिडी पर निर्भर हैं, इसके विपरीत भारतीय रेलवे अपने सभी परिचालन और कार्य व्यय का ध्यान रखती है और अपने कैपेक्स के लिए सकल बजटीय सहायता प्राप्त करती है। अन्य साधनों से कड़ी प्रतिस्पर्धा और उत्पन मांग पर निर्भर होने के बावजूद, इसके राजस्व सृजन लक्ष्य साल दर साल रिकॉर्ड प्रदर्शन दर्ज करते हुए सफलतापूर्वक हासिल किए जा रहे हैं। यह बात उन बुमर्स और 90 के दशक के बच्चों के लिए आश्चर्य की बात हो सकती है जो भारत में एक साधारण युग को याद करते हैं। “निर्यात गुणवत्ता“ का लेबल लगाने वाली किसी भी चीज़ की कीमत प्रीमियम हुआ करती थी, जबकि सबसे अच्छे उत्पाद – जिन्हें विश्व स्तरीय कहा जाता था – वे यूरोप और अमेरिका के समृद्ध देशों के लिए आरक्षित थे। भारतीयों को अक्सर कुछ गलत सामाजिक-आर्थिक सोच की आड़ में घटिया सामान या सेवाएँ प्रदान की जाती थीं। पीढ़ियों को भारतीय रेलवे जैसी महत्वपूर्ण सेवाओं के लिए भी अपनी अपेक्षाएँ कम करने के लिए मजबूर होना पड़ा। हालाँकि, 2014 के बाद सरकार के फोकस ने विकास और बुनियादी ढाँचे के निर्माण के प्रति एक दृढ़ प्रगतिशील और प्रेरक दृष्टिकोण अपनाया है। आधुनिक भारत एक ऐसे राष्ट्रीय ट्रांसपोर्टर का हकदार है जो नवाचार की कमी और रूढ़िवादी अंतर्मुखी एजेंडे से मुक्त हो। यह प्रगति आवश्यक रेलवे घटकों के लिए उच्च स्तर के स्थानीयकरण को बनाए रखते हुए और विनिर्माण सुविधाओं को अभूतपूर्व स्तर … Read more

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