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आतंकियों को पनाह देने वालों पर गिरी गाज, NIA ने जम्मू में 12 ठिकानों पर मारी रेड

नई दिल्ली राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने पाकिस्तान से जुड़े आतंकवादियों की घुसपैठ की घटनाओं पर संज्ञान लेते हुए बड़ा एक्शन लिया है। बीते दिनों सीमा पार से घुसपैठ की घटनाओं में इजाफा होने के बाद NIA ने जम्मू में 12 ठिकानों पर रेड किया है। अधिकारियों ने बताया है कि जिन लोगों के खिलाफ एक्शन लिया गया है उनमें आतंकवादी समूहों को मदद करने वाले ओवरग्राउंड वर्कर (ओजीडब्ल्यू) शामिल हैं जो भारत में आने वाले आतंकवादियों को लॉजिस्टिक्स, सुरक्षित ठिकाने और रास्ता मुहैया कराने में मदद करते हैं। इससे पहले NIA ने पिछले साल 24 अक्टूबर को हुए घुसपैठ से संबंधित घटनाओं में इन लोगों के खिलाफ मामले दर्ज किए थे जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय सीमा और LOC के जरिए भारत में लश्कर और जैश से जुड़े सक्रिय आतंकवादियों को मदद पहुंचाई थी। एनआईए के एक अधिकारी के मुताबिक, “जम्मू क्षेत्र के गांवों में रहने वाले ओजीडब्ल्यू और अन्य आतंकी गुटों ने इन घुसपैठियों की मदद की थी। इन्होंने आतंकवादियों को खाना पीना, शरण और पैसे भी दिए थे।” अधिकारी ने बताया कि संदिग्ध हाइब्रिड आतंकवादी और ओजीडब्ल्यू प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों की शाखाओं से जुड़े हुए हैं। इस बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस साल अब तक जम्मू-कश्मीर पर केंद्रित तीन सुरक्षा समीक्षा बैठक कर चुके हैं। इस दौरान उन्होंने सुरक्षा बलों को आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने का निर्देश दिया है।

देश अपने हितों की रक्षा के लिए इनका इस्तेमाल करते हैं, पसंद हो या न हो, टैरिफ वॉर पर जयशंकर की दो टूक

नई दिल्ली विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने वैश्विक व्यापार में बढ़ते शुल्क (टैरिफ) और प्रतिबंधों की प्रवृत्ति को एक सच्चाई बताते हुए कहा कि विभिन्न देश अपने आर्थिक हितों की रक्षा के लिए इनका इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि “चाहे हमें यह पसंद हो या न हो, टैरिफ और प्रतिबंध आज एक हकीकत हैं, और देश अपने हितों की रक्षा के लिए इनका इस्तेमाल करते हैं।” उनके इस बयान को हाल के वैश्विक घटनाक्रमों के संदर्भ में देखा जा रहा है, जहां व्यापार और वित्त को रणनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की प्रवृत्ति बढ़ी है। जयशंकर ने यह टिप्पणी नई दिल्ली में आयोजित रायसीना डायलॉग के दौरान “कमिसार्स एंड कैपिटलिस्ट्स: पॉलिटिक्स, बिजनेस एंड न्यू वर्ल्ड ऑर्डर” नामक पैनल चर्चा में की। आर्थिक गतिविधियों का बढ़ता सैन्यीकरण जयशंकर ने कहा, “टैरिफ और प्रतिबंध आज की हकीकत हैं, देश इनका उपयोग करते हैं। यदि हम पिछले एक दशक पर नजर डालें, तो हमने देखा है कि किसी भी प्रकार की क्षमता या आर्थिक गतिविधि का बड़े पैमाने पर सैन्यीकरण किया गया है। इसमें वित्तीय प्रवाह, ऊर्जा आपूर्ति और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्र भी शामिल हैं।” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि व्यापार केवल लाभ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह रोजगार और समग्र राष्ट्रीय शक्ति से भी जुड़ा हुआ है। जयशंकर ने कहा, “आप अपने व्यवसाय के लिए लड़ते हैं, क्योंकि यह आपके रोजगार और समग्र राष्ट्रीय शक्ति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।” अंतरराष्ट्रीय संबंधों में आ रही “कम प्रतिबंधित संस्कृति” जयशंकर ने बताया कि आज अंतरराष्ट्रीय संबंध पहले की तुलना में कम प्रतिबंधित हो गए हैं। उन्होंने कहा, “आज विभिन्न डोमेन के बीच विभाजन की रेखाएं मिट रही हैं। अंतरराष्ट्रीय संबंधों में भी यह बदलाव स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। यदि हम एक दशक पहले की स्थिति देखें, तो आज की तुलना में वह ज्यादा संतुलित थी।” अमेरिका-भारत व्यापारिक तनाव पर व्हाइट हाउस की प्रतिक्रिया गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका ने भारत सहित विभिन्न देशों से आयातित वस्तुओं पर नए टैरिफ लगाने की घोषणा की है। इससे पहले, 13 मार्च को व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलीन लेविट ने अमेरिका पर विभिन्न देशों द्वारा लगाए गए टैरिफ पर चिंता जताई थी। उन्होंने भारत द्वारा अमेरिकी शराब और कृषि उत्पादों पर लगाए गए टैरिफ का विशेष रूप से उल्लेख किया। प्रेस वार्ता के दौरान लेविट ने कहा, “मेरे पास विभिन्न देशों द्वारा लगाए गए टैरिफ का एक चार्ट है। अगर आप कनाडा की बात करें तो अमेरिकी पनीर और मक्खन पर लगभग 300% शुल्क है।” उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप निष्पक्ष और संतुलित व्यापार नीति में विश्वास रखते हैं और जवाबी (रेसिप्रोसिटी) के सिद्धांत का पालन करना चाहते हैं। वैश्विक व्यापार में शक्ति संतुलन की नई दिशा जयशंकर के बयान इस बात की ओर संकेत करते हैं कि आज के दौर में व्यापार केवल आर्थिक गतिविधि तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भू-राजनीतिक और राष्ट्रीय शक्ति समीकरण का भी अहम हिस्सा बन चुका है। ऐसे में आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय व्यापार नीतियों में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

प्राइवेट फर्म की मिनीबस में आग लगने से ऑफिस जा रहे कंपनी के चार कर्मचारियों की जलकर मौत, हुआ दर्दनाक हादसा

पुणे महाराष्ट्र में पुणे के पास से बुधवार को एक दर्दनाक खबर सामने आई है। यहां एक प्राइवेट फर्म की मिनीबस में आग लगने से ऑफिस जा रहे कंपनी के चार कर्मचारियों की जलकर मौत हो गई। जानकारी के मुताबिक मिनी बस में सुबह करीब साढ़े 7 बजे पिंपरी चिंचवाड़ इलाके के हिंजेवाड़ी में आग लग गई। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि यह हादसा तब हुआ जब मिनी बस में पीछे की तरफ मौजूद इमरजेंसी गेट खुल नहीं पाया और कुछ कर्मचारी गाड़ी के अंदर फंस गए। जांच के दौरान पता चला है कि गाड़ी में व्योम ग्राफिक्स कंपनी के कर्मचारी सवार थे। घटना के समय फर्म के 12 कर्मचारी वारजे से हिंजेवाड़ी में काम करने के लिए दफ्तर जा रहे थे। अधिकारियों के मुताबिक जब गाड़ी डसॉल्ट सिस्टम्स के पास पहुंचा, तो ड्राइवर की सीट के नीचे आग लग गई। ड्राइवर ने गाड़ी को स्पीड कम कर दी जिसके बाद कुछ कर्मचारी मिनीबस से उतर गए। हालांकि कुछ लोग अंदर ही फंस गए। हिंजेवाड़ी पुलिस स्टेशन के वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक कन्हैया थोरात ने पीटीआई को बताया, “खतरे को भांपते हुए चार कर्मचारी तुरंत मिनीबस से उतर गए। गाड़ी के पीछे बैठे लोगों ने पीछे की तरफ से इमरजेंसी एग्जिट गेट से भागने की कोशिश की लेकिन वे कामयाब नहीं हो पाए।” वहीं पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम के एक दमकल अधिकारी ने बताया कि आग आगे से पीछे की तरफ तेजी से फैली जिससे कर्मचारियों को भागने का मौका नहीं मिला और वे अंदर फंसे लोगों को बचाने में कामयाब रहे। बाद में आग पर काबू पा लिया गया है।

भाषण ने इलाके में सांप्रदायिक तनाव को भड़काया, जिससे हिंसा भड़क उठी, फहीम खान निकला मास्टरमाइंड

नागपुर नागपुर में सोमवार रात हुई हिंसा के बाद स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन शहर के कई संवेदनशील इलाकों में कर्फ्यू जारी है। इस बीच नागपुर पुलिस ने बुधवार को फहीम शमीम खान की पहली फोटो जारी की है। फहीम 17 मार्च को शहर में हुए सांप्रदायिक हिंसा का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। इस हिंसा में कई लोग घायल हो गए थे।फहीम खान एमडीपी का नगर अध्यक्ष है और नागपुर के यशोधरा नगर में संजय बाग कॉलोनी में रहता है। सांप्रदायिक झड़पों के सिलसिले में दर्ज की गई एफआईआर में उसका नाम आधिकारिक तौर पर शामिल किया गया है। प्रारंभिक जांच से पता चला है कि फहीम खान ने झड़प शुरू होने से कुछ समय पहले कथित तौर पर भड़काऊ भाषण दिया था। पुलिस अधिकारियों ने दावा किया कि उनके भाषण ने इलाके में सांप्रदायिक तनाव को भड़काया, जिससे हिंसा भड़क उठी। गडकरी के खिलाफ लड़ा था चुनाव फहीम खान ने 2024 के लोकसभा चुनाव में नागपुर सीट से अल्पसंख्यक डेमोक्रेटिक पार्टी (MDP) के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा था। बीजेपी के दिग्गज नेता और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से 6.5 लाख से अधिक वोटों के बड़े अंतर से हार गया था। नागपुर के पुलिस आयुक्त रविंद्र कुमार सिंघल ने बताया कि दोपहर बाद स्थिति की समीक्षा की जाएगी। वहीं, एक अन्य अधिकारी ने बताया कि संवेदनशील इलाकों में दो हजार से अधिक सशस्त्र पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है। उन्होंने कहा कि इसी तरह, त्वरित प्रतिक्रिया दल (क्यूआरटी) और दंगा नियंत्रण पुलिस (आरसीपी) द्वारा पुलिस उपायुक्त रैंक के अधिकारी के नेतृत्व में गश्त की जा रही है। औरंगजेब की कब्र को लेकर हुई थी झड़प सोमवार रात साढ़े सात बजे के करीब मध्य नागपुर में हिंसा भड़क गई थी और पुलिस पर पथराव किया गया था। अधिकारियों ने बताया कि यह हिंसा इस अफवाह के बाद फैली कि औरंगजेब की कब्र हटाने के लिए एक दक्षिणपंथी संगठन द्वारा किए गए प्रदर्शन के दौरान एक समुदाय के धार्मिक ग्रंथ को जला दिया गया। हिंसा में 34 पुलिसकर्मी घायल हो गए थे। इसके बाद शहर के संवेदनशील इलाकों में कर्फ्यू लगा दिया गया, जिससे लोगों और वाहनों की आवाजाही पर रोक लग गई। पुलिस के अनुसार, अब कोतवाली, गणेशपेठ, तहसील, लकडगंज, पाचपावली, शांति नगर, सक्करदरा, नंदनवन, इमामवाडा, यशोधरा नगर और कपिल नगर पुलिस थाना क्षेत्र में आने वाले इलाकों में कर्फ्यू प्रभावी है। पुलिस के द्वारा कहा गया कि कर्फ्यू के दौरान संबंधित इलाकों के पुलिस उपायुक्त सड़कों पर वाहनों की आवाजाही के बारे में निर्णय लेंगे। अधिकारियों के अनुसार, सोमवार रात हुई हिंसा में तीन पुलिस उपायुक्तों समेत 12 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। पथराव और आगजनी के सिलसिले में अब तक करीब 50 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पड़ोसी मुल्क को ‘बुरा देश’ करार दे दिया, भारत से भी ले चुका है पंगा

वाशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नाराजगी कनाडा को लेकर शांत नहीं हुआ है। अब उन्होंने पड़ोसी मुल्क को ‘बुरा देश’ करार दे दिया है। इससे पहले भी वह कनाडा के खिलाफ ज्यादा टैरिफ लगाने का कदम उठा चुके हैं। साथ ही पूरे देश को अमेरिका का राज्य बनाने की इच्छा जाहिर कर चुके हैं। खास बात है कि कनाडा में जस्टिन ट्रूडो के पद छोड़ने के बाद जल्द ही प्रधानमंत्री चुनाव होने हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जारी टैरिफ वॉर के बीच ट्रंप ने कहा, ‘काम करने के मामले में सबसे बुरे देशों में से एक कनाडा है। अब ट्रूडो है। अच्छे जस्टिन। मैं उन्हें गवर्नर ट्रूडो बुलाता हूं। उनके लोग बुरे हैं और वे सच्चाई नहीं बता रहे हैं।’ वह कनाडा को ‘अमेरिका का 51वां’ राज्य बनाने की इच्छा जता चुके हैं। हालांकि, कनाडा ने इसपर आपत्ति जताई है। एक इंटरव्यू के दौरान जब पूछा गया कि ट्रंप की नीतियां लिबरल पार्टी के लिए चुनाव में मददगार हो सकती हैं? तो इसपर ट्रंप ने कहा कि कंजर्वेटिव्स के मुकाबले लिबरल्स के साथ काम करना आसान होगा। उन्होंने कहा, ‘मुझे फर्क नहीं पड़ता है। मुझे लगता है कि उनके साथ काम करना आसान है। हो सकता है कि वे जीत जाएं, लेकिन मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है।’ इधर, उन्होंने कनाडा में विपक्षी दल पर भी सवाल उठाए हैं। साथ ही पीएम की रेस में माने जा रहे पियरे पोलिवरे पर भी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने बगैर नाम लिए कहा, ‘चुनाव की दौड़ में है जो वह कंजर्वेटिव मेरे कोई दोस्त नहीं हैं। मैं उन्हें नहीं जानता, लेकिन उन्होंने कुछ नकारात्मक बातें कही हैं।’ भारत से भी जारी हैं तनावपूर्ण रिश्ते खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के तार भारतीय अधिकारियों से जोड़ने की कोशिश के बाद कनाडा और भारत के रिश्ते तनावपूर्ण हो गए थे। खास बात है कि तत्कालीन पीएम जस्टिन ट्रूडो ने भरी सभा में भारत पर सवालिया निशान लगाए थे, लेकिन इस संबंध में कोई सबूत पेश नहीं किया था। इसके बाद भारत ने कनाडा के राजनयिकों को बाहर करने की कार्रवाई की थी।

PM मोदी ग्रेट लीडर हैं, पुतिन ने उनसे बात करने के बाद ही रोकी जंग, मुरीद हुए पोलैंड के नेता

मॉस्को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और डोनाल्ड ट्रंप के बीच दो घंटे लंबी वार्ता हुई। इसके बाद यूक्रेन और रूस के बीच तीन सालों से चली आ रही जंग में सीजफायर पर सहमति बन गई। इस तरह एक जंग के रुकने के पीछे पीएम नरेंद्र मोदी को भी वजह माना जा रहा है। पोलैंड के उप-विदेश मंत्री व्लादिस्लॉ बारतोसज्विस्की ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी के रुख के चलते ऐसा हुआ है। उन्होंने कहा, ‘व्लादिमीर पुतिन लगातार परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की धमकी दे रहे थे। उनका कहना था कि यूक्रेन पर इन हथियारों का इस्तेमाल किया जाएगा। अमेरिकी लगातार उनसे कह रहे थे कि ऐसा न किया जाए। व्लादिमीर पुतिन को इस हमले के अंजाम के बारे में बचाया जा रहा था। लेकिन वह नहीं माने।’ पोलैंड के लीडर ने कहा, ‘फिर व्लादिमीर पुतिन के पास दो फोन कॉल आए। एक चीन से और दूसरा भारत से पीएम नरेंद्र मोदी का। चीन और भारत दोनों ने ही परमाणु जंग करने को मंजूरी नहीं दी। दोनों देशों ने कहा कि ऐसा करना गलत होगा। हम ऐसी जंग का समर्थन नहीं करते हैं। रूस इन दोनों देशों को अपना दोस्त मानता है। इसके बाद भी उनकी ओर से जंग के लिए मना करने से उन्हें पीछे हटना ही सही लगा। इसलिए पीएम मोदी ने यूक्रेन और रूस की जंग को रुकवाने में अहम भूमिका अदा की। वह एक महान राजनेता हैं।’ बता दें कि यूक्रेन के नेता वोलोदिमीर जेलेंस्की भी कह चुके हैं कि पीएम नरेंद्र मोदी इसमें अहम भूमिका अदा कर सकते हैं। उनका कहना था कि व्लादिमीर पुतिन से अच्छे संबंधों का इस्तेमाल करते हुए वह जंग रुकवा सकते हैं। मंगलवार की शाम को दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत के बाद क्रेमलिन ने कहा कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन यूक्रेन के ऊर्जा ठिकानों पर 30 दिनों के लिए हमले रोकने पर सहमत हो गए हैं। ट्रंप ने 20 जनवरी को अमेरिकी राष्ट्रपति का कार्यभार संभालने के पांच दिनों बाद दुनियाभर के कई नेताओं से बात की थी, जिनमें रूसी राष्ट्रपति पुतिन भी शामिल थे। तभी से माना जा रहा था कि ट्रंप अब पुतिन के साथ अपने रिश्तों का इस्तेमाल करते हुए जंग रुकवा सकते हैं। इसके लिए उन्होंने पहले यूक्रेनी नेता वोलोदिमीर जेलेंस्की को राजी किया और फिर व्लादिमीर पुतिन को भी सहमत किया गया। इसके लिए सऊदी अरब ने मध्यस्थ की भूमिका अदा की और वहीं पर यूक्रेन और रूस के प्रतिनिधियों की बात भी हुई।

महिला पुलिस की वर्दी उतारने की कोशिश, हिंसा के 19 आरोपियों को 21 मार्च तक के लिए पुलिस रिमांड पर भेजा गया

नागपुर नागपुर में हुई हिंसा की जांच जारी है। इसी बीच खबर है कि हिंसा के दौरान एक उपद्रवी ने ड्यूटी पर तैनात महिला पुलिसकर्मी के साथ बदसलूकी की गई है। खबर है कि उनकी वर्दी भी उतारने की कोशिश की गई। फिलहाल, इसे लेकर पुलिस ने आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा है। फिलहाल, हिंसा के 19 आरोपियों को 21 मार्च तक के लिए पुलिस रिमांड पर भेजा गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एक आरोपी ने कथित तौर पर महिला पुलिस कर्मी की वर्दी और शरीर को आपत्तिजनक तरीके से छुआ, अश्लील इशारे किए और बदसलूकी की। इस संबंध में गणेशपेठ पुलिस स्टेशन में FIR भी दर्ज कराई गई है। महिला पुलिस अधिकारी RCP स्क्वॉड में शामिल थीं। खबरें ये भी हैं कि आरोपी ने उनकी वर्दी उतारने की भी कोशिश की थी। फिलहाल, यह साफ नहीं है कि आरोपी की पहचान हो चुकी है या नहीं और उसे गिरफ्तार किया गया है या नहीं। हिंसा के लगातार दूसरे दिन भी नागपुर शहर का माहौल पूरी तरह से शांत नहीं है। 11 पुलिस थाना क्षेत्रों में कर्फ्यू के साथ भारी पुलिस बंदोबस्त तैनात रहा। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इसे साजिश करार दिया था। साथ ही उन्होंने पुलिसकर्मियों पर हमला करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का भरोसा जताया था। शिकायत में यह भी बताया गया है कि उसी आरोपी ने वहां मौजूद अन्य महिला पुलिसकर्मियों के साथ भी बदसलूकी की थी। कहा जा रहा है कि भीड़ ने ड्यूटी पर तैनात पुलिस अधिकारियों को डराने कि लिए उनकी ओर देखकर गंदे इशारे किए और अभद्र टिप्पणियां की थीं। अब क्या हैं नागपुर के हाल पुलिस आयुक्त रविंद्र कुमार सिंघल ने बताया कि दोपहर बाद स्थिति की समीक्षा की जाएगी। वहीं, एक अन्य अधिकारी ने बताया कि संवेदनशील इलाकों में दो हजार से अधिक सशस्त्र पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है। उन्होंने कहा कि इसी तरह, त्वरित प्रतिक्रिया दल (क्यूआरटी) और दंगा नियंत्रण पुलिस (आरसीपी) द्वारा पुलिस उपायुक्त रैंक के अधिकारी के नेतृत्व में गश्त की जा रही है। सोमवार रात साढ़े सात बजे के करीब मध्य नागपुर में हिंसा भड़क गई थी और पुलिस पर पथराव किया गया था। अधिकारियों ने बताया कि यह हिंसा इस अफवाह के बाद फैली कि औरंगजेब की कब्र हटाने के लिए एक दक्षिणपंथी संगठन द्वारा किए गए प्रदर्शन के दौरान एक समुदाय के धार्मिक ग्रंथ को जला दिया गया। हिंसा में 34 पुलिसकर्मी घायल हो गए थे। इसके बाद शहर के संवेदनशील इलाकों में कर्फ्यू लगा दिया गया, जिससे लोगों और वाहनों की आवाजाही पर रोक लग गई।

अमेरिकी रक्षा विभाग निकाल रहा 60 हजार लोगों को, इन लोगों पर लटकी तलवार

वाशिंगटन अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) में 50,000 से 60,000 असैन्य नौकरियों में कटौती की जा रही है। इस कटौती प्रक्रिया में अब तक लगभग 21,000 कर्मचारियों ने स्वैच्छिक इस्तीफा योजना को स्वीकार किया है, जो कुल लक्षित कटौती का लगभग एक तिहाई है। एक वरिष्ठ रक्षा अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी। रक्षा विभाग का लक्ष्य 900,000 से अधिक असैन्य कर्मचारियों में से 5% से 8% की कटौती करना है। इसके लिए, प्रत्येक माह लगभग 6,000 पदों को हटाया जाएगा। इसके अलावा, नियमित रूप से रिटायर होने वाले या नौकरी छोड़ने वाले कर्मचारियों की जगह नहीं भरी जाएगी। यह कटौती रक्षा सचिव पीट हेगसेथ के नेतृत्व में लागू की जा रही है, जिसका उद्देश्य विभाग के बजट को कम करना और सरकारी खर्च में कमी लाना है। इस योजना को “फोर्क इन द रोड” प्रस्ताव के रूप में जाना जाता है और ये कर्मचारियों को सितंबर तक वेतन और लाभों के साथ स्वैच्छिक रूप से नौकरी छोड़ने का विकल्प देती है। सैन्य कर्मियों पर बढ़ सकता है बोझ अधिकारियों की चिंता है कि खाली हुए असैन्य पदों को भरने के लिए सैन्य कर्मियों को तैनात किया जा सकता है, जिससे उनकी कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है। हालांकि, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने यह सुनिश्चित करने के लिए निर्देश दिए हैं कि इन कटौतियों से सैन्य तैयारियों पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े। ये कटौतियां ट्रंप प्रशासन के करीबी सलाहकार और अरबपति कारोबारी एलन मस्क के ‘डिपार्टमेंट ऑफ गवर्नमेंट एफिशिएंसी सर्विस’ (DOGE) के तहत की जा रही हैं, जिसका उद्देश्य संघीय कार्यबल को कम करना और सरकारी एजेंसियों को पुनर्गठित करना है। रक्षा विभाग तीन प्रमुख तरीकों से कर्मचारियों की संख्या घटा रहा है: स्वैच्छिक इस्तीफे – “फॉर्क इन द रोड” योजना के तहत, कुछ कर्मचारियों ने स्वेच्छा से इस्तीफे दिए, लेकिन सभी को अनुमति नहीं दी गई। प्रोबेशनरी कर्मचारियों की बर्खास्तगी – विभाग ने लगभग 5,400 प्रोबेशनरी कर्मचारियों की छंटनी की योजना बनाई थी, लेकिन इसे अदालत में चुनौती दी गई। नए कर्मचारियों की नियुक्ति पर रोक – हर साल लगभग 70,000 असैन्य कर्मियों की भर्ती की जाती है, लेकिन इस प्रक्रिया को सीमित किया जा रहा है। प्रोबेशनरी कर्मचारियों की छंटनी पर अदालतों ने रोक लगा दी है और प्रशासन को हजारों कर्मचारियों को वापस काम पर रखने का आदेश दिया है। न्यायालयों ने छंटनी की कानूनी प्रक्रियाओं में खामियां पाई हैं। रक्षा विभाग के प्रमुख हेगसेथ का कहना है कि इन कटौतियों से सैन्य कार्यप्रणाली पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। जर्मनी में हाल ही में उन्होंने कहा था कि “मुख्यालय में कई अनावश्यक पद और प्रशासनिक खर्चे हैं, जिन्हें हटाने की जरूरत है।” संघीय सरकार में भी बड़े पैमाने पर छंटनी रक्षा विभाग ही नहीं, बल्कि पूरे अमेरिकी संघीय तंत्र में करीब 75,000 कर्मचारियों को ‘डीफर्ड रेजिग्नेशन प्रोग्राम’ के तहत हटाया जा रहा है। इसके अलावा, प्रारंभिक दौर में 24,000 प्रोबेशनरी कर्मचारियों को हटाया गया था, लेकिन इसे भी कानूनी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। इस बीच, अमेरिकी कांग्रेस में डेमोक्रेटिक सांसदों ने केंद्रीय नौकरशाही में बड़े पैमाने पर कटौतियों को लेकर चिंता व्यक्त की है। हाउस ज्यूडिशियरी और हाउस ओवरसाइट कमेटी ने सूचना के अधिकार (FOIA) के तहत प्रशासन से इन कटौतियों के कानूनी पहलुओं की जानकारी मांगी है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सरकार के आकार को छोटा करने और नौकरियों में कटौती के लिए एक बड़े स्तर पर ‘रिडक्शन इन फोर्स’ (RIF) योजना लागू करने का आदेश दिया है। हालांकि, पेंटागन में इसके प्रभावों को लेकर कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है। अमेरिकी रक्षा मंत्री हेगसेथ ने शीर्ष सैन्य अधिकारियों को हटाया कुछ दिन पहले ही अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा कि उन्होंने सैन्य सेवा के लिए शीर्ष अधिकारियों को हटा दिया है क्योंकि उन्हें लगता है कि वे इस काम के लिए ‘‘योग्य’’ नहीं थे। सऊदी अरब के रक्षा मंत्री के साथ एक बैठक से पहले हेगसेथ ने उस सवाल का जवाब देने से इनकार कर दिया जिसमें उनसे पूछा गया था कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने अगले संयुक्त प्रमुख अध्यक्ष के रूप में एक सेवानिवृत्त जनरल का चयन क्यों किया, जबकि वह इस कार्य के लिए कानूनी योग्यता को पूरा नहीं करते हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को अचानक चेयरमैन, वायु सेना जनरल सीक्यू ब्राउन जूनियर को निकाल दिया और इसके बाद हेगसेथ ने नौसेना संचालन की प्रमुख नेवी एडमिरल लिसा फ्रैंचेटी, वायु सेना के उपाध्यक्ष एयरफोर्स जनरल जेम्स स्लिफ को पद से हटा लिया।

अब वोटर आईडी से लिंक होगा आधार, मुख्य चुनाव आयुक्त की अध्यक्षता में हुई हाई लेवल मीटिंग में हुआ फैसला

नई दिल्ली चुनाव आयोग ने वोटर आईडी (EPIC) को आधार से जोड़ने को लेकर बड़ा फैसला लिया है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की अध्यक्षता में हुई हाई लेवल मीटिंग में इस पर चर्चा हुई। आयोग ने साफ किया कि यह प्रक्रिया पूरी तरह संविधान और सुप्रीम कोर्ट के फैसले के तहत ही होगी। कानूनी ढांचे के तहत होगी प्रक्रिया चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि वोटर आईडी को आधार से जोड़ने की प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 326 और जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 23(4), 23(5) और 23(6) के तहत होगी। आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि आधार कार्ड सिर्फ पहचान का प्रमाण है, नागरिकता का नहीं। इसलिए आधार से लिंक करने की प्रक्रिया यह सुनिश्चित करेगी कि सिर्फ भारतीय नागरिक ही मतदाता सूची में दर्ज हों। आयोग ने कहा, “संविधान के अनुसार, मतदान का अधिकार केवल भारतीय नागरिकों को ही मिल सकता है। आधार सिर्फ व्यक्ति की पहचान साबित करता है, उसकी नागरिकता नहीं। इसलिए इस प्रक्रिया को कानूनी दायरे में रखा जाएगा और सुप्रीम कोर्ट के सिविल के फैसले के अनुरूप आगे बढ़ाया जाएगा।” तकनीकी विशेषज्ञों के साथ चर्चा होगी शुरू चुनाव आयोग और आधार कार्ड जारी करने वाली संस्था यूआईडीएआई के तकनीकी विशेषज्ञ जल्द ही इस पर काम शुरू करेंगे। इस पूरी प्रक्रिया को साइबर सुरक्षा और डेटा प्राइवेसी का ध्यान रखते हुए किया जाएगा, ताकि कोई भी नागरिकता से जुड़ा भ्रम न फैले। राजनीतिक दलों से सुझाव मांगे मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने पद संभालने के बाद चुनाव सुधारों को तेज कर दिया है। चुनाव आयोग आगामी चुनावों को ज्यादा पारदर्शी और समावेशी बनाने के लिए कई नए कदम उठा रहा है। चुनाव आयोग ने पहली बार राष्ट्रीय और राज्य स्तर की सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक पार्टियों से 30 अप्रैल 2025 तक सुझाव मांगे हैं। इसके अलावा, 31 मार्च 2025 तक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों, जिला निर्वाचन अधिकारियों और मुख्य निर्वाचन अधिकारियों के साथ बैठकों का आयोजन किया जाएगा। इन बैठकों में राजनीतिक दलों की चिंताओं और सुझावों पर विचार किया जाएगा, ताकि चुनाव प्रक्रिया में विश्वास और पारदर्शिता बनी रहे।

धरती ने आपको मिस किया, अंतरिक्ष से विलियम्स की वापसी पर पीएम का संदेश

 नई दिल्ली सुनीता विलियम्स की धरती पर सकुशल वापसी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बधाई दी है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक संदेश में उन्होंने लिखा, ” आपका स्वागत है, क्रू9 ! धरती ने आपको मिस किया।” पीएम ने लिखा, “उनका यह अनुभव धैर्य, साहस और असीम मानवीय भावना की परीक्षा रहा है। सुनीता विलियम्स और क्रू 9 के अंतरिक्ष यात्रियों ने एक बार फिर हमें दिखाया है कि दृढ़ता का सही अर्थ क्या है। विशाल अनिश्चितता के सामने उनका अटूट दृढ़ संकल्प हमेशा लाखों लोगों को प्रेरित करेगा।” पीएम नरेद्र मोदी ने क्रू 9 का वापसी अभियान पूरा होने के बाद अपने संदेश में कहा, “अंतरिक्ष अन्वेषण का मतलब है मानवीय क्षमता की सीमाओं को आगे बढ़ाना, सपने देखने का साहस करना और उन सपनों को हकीकत में बदलने का साहस करना।” पीएम ने सुनीता विलियम्स के बारे में कहा कि वे एक पथप्रदर्शक और एक आइकन हैं। उन्होंने अपने पूरे करियर में इस भावना का उदाहरण दिया है। हम उन सभी पर अविश्वसनीय रूप से गर्व करते हैं जिन्होंने उनकी सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के लिए अथक परिश्रम किया। उन्होंने दिखाया है कि जब सटीकता जुनून से मिलती है और तकनीक दृढ़ता से मिलती है तो क्या होता है।”

अब माता वैष्णो देवी के दर्शन के लिए जा रहे है तो करना होगा इन नियमों का पालन, जाने क्या है नियम

जम्मू माता वैष्णो देवी के दर्शन करने जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए जरूरी खबर है। माता वैष्णो देवी भवन और कटड़ा के आसपास के क्षेत्रों को पवित्र घोषित किया गया है। ऐसे में इन जगहों पर कुछ नियम कानून बनाए गए हैं जिनका उल्लंघन करने पर सख्त कार्रवाई हो सकती है।   जानकारी के अनुसार अगर आप भी माता वैष्णो देवी के दर्शन करने जा रहे हैं तो आपको कुछ नियम कानूनों को पालन करना होगा। ये नियम इस प्रकार हैं – – कटड़ा और उसके आसपास के 10 किलोमीटर के क्षेत्र में नशे, मांस और शराब का सेवन और बेचना और खरीदने पर पूर्ण पाबंदी है। इन नियमों को तोड़ने वालों पर सख्त से सख्त कार्रवाई करने का प्रावधान है।   – माता वैष्णो देवी भवन के एंट्री गेट पर जिन चीजों पर पाबंदी लगाई गई है, उनमें तंबाकू, सिगरेट, बीड़ी और नशीला पदार्थ शामिल है। – माचिस, लाइटर, खिलौना हथियार, वीडियो कैमरा आप भवन में नहीं ले जा सकते। – धातू की बनी नुकीली चीजें जैसे कुल्हाड़ी, कृपाण, तलवार, ब्लेड, चाकू, कटर आदि ले जाना मना है। आप सेफ्टी रेजर ले जा सकते हैं। – गोला-बारूद, बंदूकें और हथियार नहीं ले जा सकते। गौरतलब है कि कुछ दिन पहले बॉलीवुड एक्टर ओरी और उसके दोस्तों पर कटड़ा  के होटल में शराब पीने के चलते केस दर्ज हुआ था। साथ ही एक महिला को भी माता वैष्णो देवी के एक्सरे-प्वाइंट पर रिवॉल्वर सहित काबू किया गया है। इसके अलावा एक व्यक्ति को भी 2 गोलियों सहित पकड़ा गया है। ऐसे में आप पहले से ही इन नियम कानूनों को जान लें ताकि आपके ऊपर किसी प्रकार की कोई परेशानी न आए।

माँ ने सालों बाद कबूला काला सच, बेटी के एक्स से हो गई थी गर्भवती

लंदन 16साल से एक काला सच दबाकर बैठी थी। लेकिन जब दबाना हुआ मुश्किल तो सोशल मीडिया पर कबूल किया कि उसने अपनी बेटी के पति के साथ शारीरिक रिश्ता बनाया था। पूरी कहानी दंग कर देगी। आज जो हकीकत आप पढ़ने जा रहे हैं वो किसी कहानी सरीखी लगती है, लेकिन ये एक सच्ची कहानी है। ये एक मां का कुबूलनामा है जिसने अपनी बेटी से ऊपर हमेशा ड्रग्स और नशे को रखा। ये हकीकत है उस महिला की ज़िंदगी की जिसने नशे में डूबकर एक ऐसी शर्मनाक हरकत कर डाली, जिसके बाद वो अपनी ही बेटी से नज़र नहीं मिला सकी। लेकिन घटना के 16 साल बाद इस मां ने दुनिया के सामने आकर अपना सच बताया है। एक ऐसा सच जिसे जिस किसी ने सुना, जिस किसी ने पढ़ा, हैरान हो गया। इस महिला के मन पर उस घटना का ऐसा भार था, जिसे कम करने के लिए उसने Reddit पर स्वीकार किया कि वो अपनी बेटी के एक्स ब्वायफ्रेंड के साथ हमबिस्तर हुई। लेकिन उसे धक्का तब लगा जब इस घटना के कुछ समय बाद एक बार फिर उसकी बेटी और ब्वॉयफ्रेंड रिलेशनशिप में दोबारा आ गए। वो बताती हैं, ‘मैं 38 साल की थी और मेरी बेटी 18 साल की थी। मेरी बेटी हैरी से डेटिंग कर रही थी जो 24 साल का था। मैं शराबी थी और दूसरे नशीले पदार्थों का सेवन करती थी, खासकर कोकीन का। मैं एक अच्छी इंसान नहीं थी, मां तो दूर की बात है। ऐसा नहीं है कि मैं अपनी बेटी के साथ दुर्व्यवहार करती थी या कुछ और लेकिन मैं आमतौर पर लापरवाह थी। अपनी बेटी से ज़्यादा अपनी शराब और नशीले पदार्थों के बारे में सोचती थी, खासकर जब वह किशोरावस्था में थी। बेटी ने नशे की वजह से ब्वॉयफ्रेंड को छोड़ दिया था उसने आगे लिखा, ‘मैं अब 14 साल से शराब नहीं पी रही हूं। मैंने हमेशा अपनी बेटी को हैरी के साथ डेटिंग को गलत बताया लेकिन मैं उसे कभी भी इसकी वजह नहीं बता सकी। वह लगातार मेरे साथ फ्लर्ट करता था। वो भी मेरी तरह ड्रग्स और नशे का आदि था। हम दोनों के बीच उम्र का अंतर भी मुझे परेशान करता था। एक बात हम दोनों में कॉमन थी, वो ये कि वो भी मेरी तरह शराबी और ड्रग्स का नशा करने वाला था। उसकी इसी आदत की वजह से मेरी बेटी उससे अलग हो गई। इसके तुरंत बाद वह दूर चली गई, बहुत दूर नहीं, लेकिन फिर भी वह अब मेरे साथ नहीं रहती थी।’ बेटी के एक्स से हो गई थी गर्भवती बेटी के साथ रिश्ता हैरी का भले ही खत्म हो गया था। लेकिन मां को वो ड्रिंक और घूमने के नाम पर बुलाता रहा। कई बार महिला ने उसे मना किया, लेकिन आखिरकार हार मान ली और उससे मिलने चली गई। इसी के साथ दोनों के बीच टॉक्सिक रिलेशनशिप की शुरुआत हुई। एक दिन वो बहुत सारा कोक लेकर आया और मैं उसका विरोध नहीं कर पाई। हमने कोक का सेवन किया और फिर सेक्स। इसके बात करीब चार महीने तक हम कभी-कभी मिलते थे और सेक्स करते थे। कोई भी ड्रग एडिक्ट जानता है कि इस तरह से ड्रग एडिक्ट दोस्त होना कैसा होता है। फिर मैं गर्भवती हो गई। मुझे पता था कि यह उसी की वजह से है, मैंने बेवकूफी में कई बार बिना कंडोम के सेक्स किया। मैंने उसे कभी नहीं बताया कि मैं गर्भवती हूं, और मैंने जाकर गर्भपात करवा लिया और इसे गुप्त रखा।’ बेटी एक्स से दोबारा मिली और कर ली शादी इसके बाद मैंने उससे मिलना बंद कर दिया। दो साल बाद मेरी बेटी ने हैरी के बदलाव के बारे में बताया। उसने बताया कि वो शराब पीना छोड़ चुका है और वो पूरी तरह बदल गया है। वो दोनों फिर से साथ हैं। उनका रिश्ता ठीक चल रहा है। महिला आगे बताती है कि मैं सच में बेटी की बात सुनकर शर्मिदा थी। मैं उसे बताने वाली थी कि हम एक साथ सोए। मुझे इस बात का अहसास था कि वो मुझसे अब सारी ज़िंदगी नफरत करेगी। लेकिन एक दिन हैरी मेरी बेटी के साथ मुझसे मिलने आया। मेरी बेटी की गैर मौजूदगी में उसने मुझसे कहा कि जो कुछ भी हमारे बीच हुआ, उसके बारे में उसे बताने की कोई वजह नहीं है। मैंने उसकी बात मान ली। उनकी शादी को अब 16 साल हो चुके हैं और उनका एक बच्चा भी है। हैरी को कैंसर हुआ लेकिन वो कैंसर से जंग जीत गया। नाती को देखकर चीजें अजीब लगती है “मैं उनसे हमेशा नहीं मिल पाती। वे टेक्सास में रहते हैं और मैं ईस्ट कोस्ट पर रहती हूं। लेकिन हम जब भी मिलते हैं मेरे और हैरी के बीच एक तनाव सा रहता है। तमाम बातें दिमाग में आती हैं। सेक्स के बारे में नहीं लेकिन अक्सर लगता है हमने ऐसा क्यों किया या हमें ऐसा क्यों करना पड़ा? ख़ासकर जब मैं अपने नाती को देखती हूं तो लगता है कि चीज़ें अलग होतीं तो वो मेरा बेटा हो सकता था। लेकिन अगर मैंने उस बच्चे को रखने का फैसला कर लिया होता तो कितनी बड़ी दिक्कत खड़ी हो सकती थी।” ये एक मां की सच्चाई थी जिसे वो सालों से जी रही है, लेकिन अंदर की घुटन को शांत करने के लिए उन्होंने अपना सच दुनिया के सामने रखा, ये जानते हुए भी कि अगर उनकी बेटी ये जान जाती है तो उन सभी की ज़िंदगी में कितना बड़ा तूफान आ सकता है

बृजभूषण शरण सिंह को कोर्ट से झटका, न्यायालय में झूठी गवाही देने के मामले में लगाया जुर्माना

गोंडा भारतीय कुश्ती संघ के पूर्व अध्यक्ष व कैसरगंज के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह को न्यायालय ने पांच सौ रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश /न्यायाधीश (एमपी-एमएलए) राजेश कुमार तृतीय ने पूर्व सांसद के विरुद्ध विचाराधीन, न्यायालय में झूठी गवाही देने के मामले में फैसला सुनाते हुए आदेश दिया है। पूर्व सांसद के अधिवक्ता ने जुर्माने की धनराशि जमा करा दी है। बता दें कि करीब 35 वर्ष पूर्व सांसद ने थाना नवाबगंज में हत्या के प्रयास समेत अन्य धाराओं में तीन आरोपित के विरुद्ध मुकदमा कराया था। बीते 11 सितंबर 2024 को तृतीय अपर सत्र न्यायालय में विचारण के दौरान घटना फर्जी मिली थी, जबकि तीन आरोपितों में से दो की विचारण के दौरान ही मृत्यु हो गई थी। न्यायालय ने कथित घटना के जीवित बचे एक मात्र आरोपित ग्राम पंड़रीकृपाल कोतवाली देहात निवासी वीरेंद्र कुमार मिश्र को दोषमुक्त किया था। वहीं, न्यायालय ने पूर्व सांसद के विरुद्ध न्यायालय में झूठी गवाही देने के आरोप में प्रकीर्ण मुकदमा चलाने का आदेश दिया था। विशेष न्यायालय ने प्रकीर्ण मामले का निस्तारण करते हुए पूर्व सांसद को अर्थदंड से दंडित किया है। क्या है मामला पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के द्वारा थाना नवाबगंज में दर्ज कराए गए मुकदमे के अनुसार, आठ सितंबर 1990 शाम चार बजे थाना नवाबगंज के मुहल्ला पड़ाव स्थित आवास शक्तिभवन में बृजभूषण अपने निवास पर बैठकर कुछ लोगो से बात कर रहे थे। तभी कोतवाली नगर के ग्राम रुद्रपुर विसेन निवासी उग्रसेन सिंह उर्फ उग्री, ग्राम पाठकपुरवा, खैरा कालोनी निवासी रमेश चंद्र मिश्र व ग्राम पड़रीकृपाल कोतवाली देहात निवासी वीरेंद्र कुमार मिश्र पहुंच गए और पीड़ित से तारिक लाठी के संबंध में वार्ता करने लगे। मना करने पर तीनो आरोपितों ने देशी तमंचे और चाकू से पूर्व सांसद पर हमला कर दिया था। इसी दौरान शोरगुल सुन गस्त पर निकली थाना नवाबगंज पुलिस टीम मौके पर पहुंच गई थी और आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया था। तीन आरोपितों के खिलाफ पूर्व सांसद ने दर्ज कराया था मुकदमा पूर्व सांसद ने तीनों आरोपितों के विरुद्ध हत्या के प्रयास समेत अन्य धाराओं में मुकदमा कराया था। न्यायालय में विचारण के दौरान आरोपित उग्रसेन सिंह उर्फ उग्री व रमेश चंद्र मिश्र की मौत हो गई थी। न्यायालय में गवाही के दौरान पूर्व सांसद, आरोपित द्वारा हमला करने की बात से मुकर गए थे और पहचान भी नही पाए थे। न्यायालय ने फैसला सुनाते हुए आरोपित को दोषमुक्त किया और पूर्व सांसद के विरुद्ध सीआरपीसी की धारा 344 के अंतर्गत मुकदमा चलाने का आदेश दिया था। कोर्ट में हाजिर न होने पर पूर्व सांसद के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया गया था। सोमवार को अदालत में पूर्व सांसद ने उपस्थित होकर क्षमा याचना की थी, इसके बाद वारंट निरस्त कर दिया गया था।

केंद्र सरकार लंबे समय से डीए बढ़ोतरी पर विचार कर रही है, जल्‍द बढ़ सकता है महंगाई भत्‍ता

नई दिल्ली केंद्र सरकार के कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (डीए) और महंगाई राहत (डीआर) में बढ़ोतरी की घोषणा करने की संभावना है, जिससे एक करोड़ से अधिक केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को बहुत जरूरी राहत मिलेगी। इस कदम का कर्मचारियों के वेतन और सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन पर सीधा असर पड़ेगा। कैबिनेट बैठक के बाद आज डीए बढ़ोतरी की घोषणा होने की संभावना केंद्र सरकार लंबे समय से डीए बढ़ोतरी पर विचार कर रही है। शुरुआत में यह अनुमान लगाया जा रहा था कि इसकी घोषणा होली से पहले हो सकती है। लेकिन हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट 19 मार्च, 2025 को अपनी अगली बैठक में इस पर अंतिम फैसला ले सकती है। अगर इसे मंजूरी मिल जाती है तो देश भर के लाखों सरकारी कर्मचारियों और सेवानिवृत्त लोगों को इसका फायदा मिलेगा। 2% बढ़ोतरी की उम्मीद सरकार कथित तौर पर डीए को मौजूदा 53% से बढ़ाकर 55% करने की योजना बना रही है, यानी 2% की बढ़ोतरी। सरकारी कर्मचारी के वेतन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा महंगाई भत्ता होता है, जिसे मुद्रास्फीति से निपटने में मदद के लिए साल में दो बार जनवरी और जुलाई में संशोधित किया जाता है। महंगाई भत्ता सरकारी कर्मचारियों के वेतन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसे बढ़ती महंगाई से राहत देने के लिए हर साल दो बार (जनवरी और जुलाई) में संशोधित किया जाता है।   डीए बढ़ोतरी जनवरी 2025 में लागू होगी, बकाया का आकलन किया जाएगा चूंकि अद्यतन डीए 1 जनवरी, 2025 से लागू होने की उम्मीद है, इसलिए जनवरी से मार्च 2025 तक का बकाया कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को भुगतान किया जाएगा। अक्टूबर 2024 में हाल ही में 3% की बढ़ोतरी के बाद, डीए को 1 जुलाई, 2024 से 50% से बढ़ाकर 53% कर दिया गया है। अब सभी की निगाहें 19 मार्च को होने वाली कैबिनेट बैठक पर टिकी हैं, जहां सरकार यह तय करेगी कि बढ़ोतरी को 2% पर जारी रखा जाए या अधिक राहत देने के लिए इसे और बढ़ाया जाए।  

व्हाइट हाउस का खुलासा- इजरायल ने गाजा पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए, एयर स्ट्राइक से पहले अमेरिका से की चर्चा

वाशिंगटन इजरायल ने मंगलवार तड़के गाजा पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए, जिनमें सैंकड़ों फिलिस्तीनियों की मौत हो गई। इस बीच अमेरिका ने कहा कि यहूदी राष्ट्र ने सोमवार को हमले से पहले उसके साथ विचार-विमर्श किया था। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक एक अमेरिकी न्यूज चैनल के कार्यक्रम में व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा, “आज रात गाजा में अपने हमलों के बारे में इजरायल ने ट्रंप प्रशासन और व्हाइट हाउस से परामर्श किया।” गाजा में फिलिस्तीनी चिकित्सकों का कहना है कि 19 जनवरी को इजरायल और हमास आतंकवादियों के बीच युद्ध विराम होने के बाद से फिलिस्तीनी क्षेत्र पर यह इजरायल का सबसे बड़ा हवाई हमला है। हमास के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इजरायल ने एकतरफा तरीके से युद्धविराम समझौते को पलट दिया है। व्हाइट हाउस की प्रवक्ता ने कहा, “जैसा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है – हमास, हूती, ईरान, वे सभी जो न केवल इजरायल, बल्कि संयुक्त राज्य अमेरिका को भी आतंकित करना चाहते हैं, उन्हें इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी। सब कुछ तहस-नहस हो जाएगा,” ट्रंप पहले ही सार्वजनिक रूप से इसी तरह के शब्दों का इस्तेमाल करते हुए चेतावनी जारी कर चुके हैं जिसमें कहा गया था कि हमास को गाजा में सभी बंधकों को रिहा कर देना चाहिए या ‘तबाही होने देनी चाहिए।’ इजरायल का गाजा में ताजा हमला ऐसे समय में हुआ जब अमेरिका ने शनिवार से यमन में एयर स्ट्राइक का सिलसिला शुरू किया। ट्रंप प्रसाशन का कहना है कि हूती ग्रुप के दर्जनों सदस्य उसके हमलों में मारे गए हैं। वहीं हूती विद्रोहियों ने कहा कि कम से कम 53 लोग मारे गए। बता दें उत्तरी यमन के अधिकांश हिस्से पर नियंत्रण करने वाला हूती ग्रुप ने फिलिस्तीनियों के समर्थन में नवंबर 2023 से लाल सागर में ‘इजरायल से जुड़े’ जहाजों को निशाना बनाना शुरू किए और करीब 100 से अधिक हमले किए। उनका कहना था कि वे गाजा में इजरायल के युद्ध के खिलाफ फिलिस्तीनियों के प्रति एकजुटता दर्शाने के लिए यह कार्रवाई कर रहे हैं। दशकों पुराने इजरायल-फिलिस्तीनी संघर्ष में नवीनतम रक्तपात 7 अक्टूबर, 2023 को शुरू हुआ, जब फिलिस्तीनी ग्रुप हमास ने इजरायल पर बड़ा हमला किया। हमले में 1,200 लोग मारे गए और लगभग 250 से अधिक को बंधक बना लिया गया। हमास के जवाब में यहूदी राष्ट्र ने फिलिस्तीनी ग्रुप के कब्जे वाली गाजा पट्टी में सैन्य अभियान शुरू किया। इजरायली हमलों ने गाजा शहर को खंडहर में तब्दील कर दिया और हजारों फिलिस्तीनियों की मौत हुई।

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