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तमिलनाडु की पटाखा फ़ैक्ट्री में आग लगने से हुआ ब्लास्ट, 6 मजदूरों की मौत, कई मजदूर अभी भी झुलसे

तमिलनाडु तमिलनाडु में पटाखा बनाने वाली एक फैक्ट्री में आग लगने की खबर सामने आ रही है। शनिवार को हुई इस घटना में 6 मजदूरों की दर्दनाक मौत हो गई है। कई मजदूर अभी भी झुलसे हुए हैं। प्रारंभिक जांच के अनुसार, विस्फोट रासायनिक मिश्रण के दौरान हुआ था। इस विस्फोट ने कम से कम एक कमरे को पूरी तरह से तबाह कर दिया। इस कमरे में ही मजदूर काम कर रहे थे। पुलिस और अन्य संबंधित अधिकारियों ने घटना स्थल पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है। इसके अलावा, तेलंगाना में भी ऐसी ही घटना हुई है। यदाद्रि-भुवनगिरि जिले में शनिवार को एक फैक्टरी में विस्फोट से एक व्यक्ति की मौत हो गई और एक अन्य घायल हो गया। पुलिस ने यह जानकारी दी। पुलिस ने बताया कि घायल व्यक्ति का अस्पताल में इलाज जारी है और उसकी हालत स्थिर है।

अमेरिका में ट्रक से कुचलने की घटना के बाद अब राजधानी वाशिंगटन डीसी में गोलीबारी हुई, 4 लोग अस्पताल में भर्ती

वाशिंगटन अमेरिका में ट्रक से कुचलने की घटना के बाद अब राजधानी वाशिंगटन डीसी में गोलीबारी हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक, फायरिंग के बाद 4 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घायलों में तीन पुरुष और एक महिला शामिल है। यह घटना रात करीब 9 बजे हुई। ताजा अपडेट यह है कि हमले की चपेट में आए सभी पीड़ित होश में हैं और सांस ले रहे हैं। मालूम हो कि गोलीबारी की यह घटना हैरी थॉमस वे नॉर्थईस्ट के 1500 ब्लॉक में हुई, जो नोमा-गैलाउडेट यू न्यूयॉर्क एवेन्यू मेट्रो स्टेशन से सिर्फ 500 फीट दूर है। रिपोर्ट के मुताबिक, हमले के बाद 2 पीड़ितों को इमरजेंसी मेडिकल सर्विस के जरिए अस्पताल पहुंचाया गया। खबर यह है कि गोलीबारी के दौरान भगदड़ मचने से कई लोग घायल भी हुए हैं। जिस जगह पर गोलीबारी हुई, वहां अक्सर काफी भीड़ देखी जाती है। फिलहाल, पुलिस टीम मौके पर तैनात है और घटनास्थल की घेराबंदी कर दी गई है। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि हमलावर के बारे में अभी तक कोई जानकारी नहीं मिल पाई है। घटनास्थल से सबूत इकट्ठा किए जा रहे हैं। आसपास जो लोग मौजूद थे उनसे भी पूछताछ का सिलसिला जारी है। नए साल का जश्न मना रहे लोगों पर चढ़ा दिया ट्रक यूएस में गोलीबारी की यह घटना ऐसे समय हुई जब न्यू ऑरलियंस में ट्रक से कुचलने वाले मामले को लेकर लोग सहमे हुए हैं। नए साल का जश्न मना रहे लोगों पर एक हमलावर ने ट्रक से हमला कर दिया जिसमें 14 लोगों की मौत हो गई। जवाबी कार्रवाई में पुलिस अधिकारियों ने हमलावर को मार गिराया था। एफबीआई की ओर से बताया गया कि शम्सुद्दीन जब्बार ने इस हमले को अकेले अंजाम दिया था। स्थानीय मीडिया ने अदालती दस्तावेजों का हवाला देते हुए बताया कि ह्यूस्टन में रहने वाले 42 वर्षीय अमेरिकी नागरिक जब्बार ने पहले अमेरिकी सेना में काम किया था और हाल के वर्षों में वित्तीय परेशानियों से जूझ रहा था। उन्होंने कहा कि यह हमला आतंकवादियों की तरफ से एक सुनियोजित हमला था। लुइसियाना के गवर्नर जेफ लैंड्री ने कहा कि बॉर्बन स्ट्रीट जैसा हमला कहीं भी हो सकता है। अमेरिकियों की रक्षा के लिए आतंकवाद का खात्मा करना बेहद जरूरी है।  

क्या शपथ से पहले ट्रंप को होगी जेल? पोर्न स्टार मामले में सुनाई जाएगी सजा; 10 जनवरी को कोर्ट में पेशी

न्यूयॉर्क न्यूयॉर्क के जज जुआन मर्चेन ने शुक्रवार (3 जनवरी) को घोषणा की कि अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को 10 जनवरी 2025 को सजा सुनाई जाएगी, जो उनके शपथ ग्रहण से 10 दिन पहले होगी. AFP की रिपोर्ट के मुताबिक ये सजा हश मनी के उस मामले से जुड़ी है, जिसमें उन्होंने पोर्न स्टार स्टॉर्मी डेनियल्स को चुप रहने के लिए पैसे दिए थे. इस पर मर्चेन ने संकेत दिया कि वे ट्रंप को जेल की सजा देने के पक्ष में नहीं हैं और बिना शर्त रिहाई की ओर झुकाव दिखाया है. इसका मतलब है कि ट्रंप किसी शर्त के अधीन नहीं होंगे, लेकिन वे दोषी के रूप में व्हाइट हाउस में प्रवेश करेंगे. 78 वर्षीय ट्रंप को 34 मामलों में दोषी ठहराया गया था, जिनमें 2016 के चुनाव से पहले पोर्न स्टार स्टॉर्मी डेनियल्स को चुप रहने के लिए पैसे का भुगतान करने के लिए व्यवसाय रिकॉर्ड में हेराफेरी शामिल है. ट्रंप को चार साल तक की जेल की सजा हो सकती है, लेकिन कानूनी विशेषज्ञों को उम्मीद है कि उन्हें जेल नहीं भेजा जाएगा. ट्रंप ने इस मामले में अपील करने की योजना बनाई है, जिससे सजा में देरी हो सकती है. ट्रंप के वकीलों ने इसे सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले और अन्य न्यायिक निर्णयों के आधार पर खारिज करने की मांग की थी, जिसमें कहा गया था कि पूर्व राष्ट्रपतियों को पद पर रहते हुए कई आधिकारिक कृत्यों के लिए अभियोजन से छूट प्राप्त है. शपथ ग्रहण के बाद ट्रंप को मिल जाएगी छूट हालांकि, न्यायाधीश ने इस तर्क को खारिज कर दिया लेकिन कहा कि शपथ ग्रहण के बाद ट्रंप को अभियोजन से छूट मिल जाएगी. ट्रंप के प्रवक्ता स्टीवन चेउंग ने इस सजा के फैसले की आलोचना की और इसे सुप्रीम कोर्ट के प्रतिरक्षा निर्णय का उल्लंघन बताया. चेउंग ने कहा कि यह मामला कभी लाया ही नहीं जाना चाहिए था और इसे तुरंत खारिज किया जाना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि ट्रंप तब तक लड़ते रहेंगे जब तक ये सभी मामले खत्म नहीं हो जाते. दो संघीय मामलों का सामना कर रहे ट्रंप ट्रंप अभी भी विशेष वकील जैक स्मिथ द्वारा लाए गए दो संघीय मामलों का सामना कर रहे हैं, लेकिन उन मामलों को न्याय विभाग की नीति के तहत खारिज कर दिया गया, जो एक बैठे राष्ट्रपति पर मुकदमा चलाने की अनुमति नहीं देती है. ट्रंप पर 2020 के चुनाव परिणामों को पलटने की साजिश और गोपनीय दस्तावेज हटाने के आरोप भी लगे हैं, लेकिन राष्ट्रपति के रूप में उनकी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इन मामलों को बंद कर दिया जाएगा. राष्ट्रपति के आपराधिक अभियोजन के संबंध में कानून अमेरिकी संविधान में राष्ट्रपति के आपराधिक अभियोजन के संबंध में सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट रूप से यह नहीं माना है कि राष्ट्रपति को अभियोजन से छूट है. यह अवधारणा न्याय विभाग की व्याख्या पर आधारित है, खासकर उसके कानूनी परामर्शदाता कार्यालय (OLC) की तरफ से दी गई सलाह के तहत. OLC का मानना है कि आपराधिक अभियोग, अभियोजन और सजा राष्ट्रपति पद को अक्षम कर सकते हैं, जिससे राष्ट्रपति अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने में असमर्थ हो सकते हैं. OLC यह भी मानता है कि किसी कार्यरत राष्ट्रपति को इस तरह से अक्षम करना असंवैधानिक होगा. इसके लिए संविधान में महाभियोग या 25वां संशोधन जैसे प्रावधान मौजूद हैं. महाभियोग के माध्यम से राष्ट्रपति को पद से हटाया जा सकता है, जबकि 25वें संशोधन के तहत किसी अक्षम राष्ट्रपति को पद से हटाया जा सकता है.

ठंड का कहर जारी, दिल्‍ली में फिर बारिश के आसार, 4 और 5 जनवरी को बर्फबारी से देश में बढ़ सकती है ठंड

नई दिल्‍ली देश भर में इन दिनों ठंड का कहर जारी है। कई शहर शीतलहर की चपेट में हैं। उत्‍तर और मध्‍य भारत के कुछ शहरों में बीते सप्‍ताह बारिश भी हुई। इसके चलते ठिठुरन और बढ़ी है। अब मौसम विभाग का ताजा अनुमान बताता है कि अगले तीन से चार दिनों तक बारिश और सर्दी की संभावना है। उत्तर भारत के मौसम का अपडेट आईएमडी के वैज्ञानिक ने बताया कि सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ की जानकारी दी। उन्होंने अगले 4-5 दिनों में पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में हल्की से मध्यम बर्फबारी की भविष्यवाणी की। 4 और 5 जनवरी को जम्मू-कश्मीर में भारी बर्फबारी हो सकती है। उन्होंने कहा, “पश्चिमी हिमालय क्षेत्र में एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ है। अगले 4-5 दिनों में पश्चिमी हिमालय क्षेत्र में हल्की से मध्यम बर्फबारी होगी। 4 और 5 जनवरी को जम्मू-कश्मीर में भारी बर्फबारी की उम्मीद है। आस-पास के मैदानी इलाकों में भी हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। 6 जनवरी को दिल्ली में हल्की बारिश की उम्मीद है। दिल्ली का मौसम अपडेट दिल्ली में इस सप्ताह बारिश होने की उम्मीद है। आईएमडी के दिल्ली के मौसम अपडेट के अनुसार 6 जनवरी को राष्ट्रीय राजधानी में हल्की बारिश होने की उम्मीद है। दिल्ली में शुक्रवार को घने कोहरे की चादर छाने के बाद कुछ इलाकों में दृश्यता शून्य हो जाने से मौसम की स्थिति और खराब हो गई। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने कहा कि दिल्ली में न्यूनतम तापमान 7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। सोमवार से दिल्ली ठंड के दिनों से जूझ रही है और आज कोहरे ने हालात और खराब कर दिए हैं। शुक्रवार को दिल्ली में न्यूनतम तापमान 7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इस बीच, अधिकतम तापमान 17 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की उम्मीद है। दिल्ली में ठंडे दिन की स्थिति “ठंडा दिन” तब होता है जब न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से कम होता है और उच्चतम या निम्नतम तापमान किसी विशिष्ट अवधि के लिए सामान्य माने जाने वाले तापमान से कम से कम 4.5 डिग्री कम होता है।शुक्रवार को कुछ क्षेत्रों में दृश्यता शून्य हो गई। मौसम विभाग ने कहा कि दिल्ली के आईजीआई हवाई अड्डे पर बहुत घना कोहरा रहा, दृश्यता 0 मीटर दर्ज की गई। इसने कहा कि सभी रनवे CAT-III मानदंडों के तहत काम कर रहे हैं – एक नेविगेशन सिस्टम जो विमानों को कम दृश्यता के तहत उतरने में मदद करता है।

अब दिल्ली विधानसभा चुनाव के तारीखों का ऐलान बहुत जल्द होने की संभावना, फरवरी में चुनाव होने की उम्मीद

नई दिल्ली दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर राजनीति गरमाती जा रही है। आम आदमी पार्टी (AAP), भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। इसके बीच ही चुनाव आयोग ने अपनी तैयारी पूरी कर ली है और अब दिल्ली विधानसभा चुनाव के तारीखों का ऐलान बहुत जल्द होने की संभावना है। सूत्रों से मिल रही जानकारी के अनुसार, केंद्रीय चुनाव आयोग 7 या 8 जनवरी को दिल्ली विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान कर सकता है। चुनावों की तिथि फरवरी के दूसरे हफ्ते में रखे जाने की संभावना जताई जा रही है। इसके बाद चुनाव परिणाम 15 या 16 फरवरी के आसपास घोषित होने की उम्मीद है। एक ही चरण में होंगे दिल्ली विधानसभा चुनाव केंद्र सरकार और चुनाव आयोग की ओर से तैयारियां अंतिम चरण में हैं। सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली विधानसभा चुनाव एक ही चरण में होंगे और मतदान 11 से लेकर 13 फरवरी के बीच हो सकते हैं। यदि यह तारीखें तय होती हैं, तो चुनाव परिणाम की घोषणा 15 या 16 फरवरी तक की जा सकती है। इसके साथ ही, 6 जनवरी तक चुनाव आयोग नई वोटर लिस्ट भी जारी करेगा, जिससे नए मतदाताओं के नाम और वोटरों की संख्या में होने वाले बदलाव का पता चलेगा। इस लिस्ट के आधार पर ही चुनावी प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया जाएगा। नई वोटर लिस्ट जारी होने के बाद दिल्ली के चुनावी क्षेत्र में एक नई उम्मीद और उत्साह का माहौल बनेगा। यह लिस्ट दिल्ली की राजनीतिक दिशा को भी प्रभावित कर सकती है, क्योंकि नई वोटर लिस्ट में खासतौर पर युवा वोटरों और नए नागरिकों की संख्या बढ़ने की संभावना है। इससे पहले, 2015 और 2020 के चुनावों में भी युवा वोटर्स ने बड़ी भूमिका निभाई थी। फोकस  शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, पानी और विकास के मुद्दों पर दिल्ली विधानसभा चुनावों को लेकर तीन प्रमुख दलों के बीच राजनीति और रणनीति का घमासान तेज हो गया है। आम आदमी पार्टी, जो पिछले कुछ वर्षों में दिल्ली में सत्तारूढ़ रही है, ने अपनी चुनावी तैयारियों को तेज कर दिया है। पार्टी का लक्ष्य 2020 की तरह एक बार फिर एकतरफा जीत हासिल करना है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पार्टी के वरिष्ठ नेता चुनावी मैदान में अपनी पूरी ताकत लगा रहे हैं। उनका फोकस मुख्य रूप से शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, पानी और विकास के मुद्दों पर है। पार्टी का दावा है कि दिल्ली में पिछले 5 वर्षों में हुए विकास कार्यों के आधार पर जनता उनके साथ है। वहीं भारतीय जनता पार्टी (BJP), जो दिल्ली में पिछले 27 साल से सत्ता से बाहर है, इस बार हर संभव कोशिश कर रही है ताकि वह दिल्ली में अपना खोया हुआ प्रभाव फिर से बना सके। पार्टी के नेताओं का कहना है कि दिल्ली में विकास के नाम पर आम आदमी पार्टी ने केवल घोषणाएं की हैं और वास्तविक सुधारों की कमी है। बीजेपी इस चुनाव में नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता और केंद्रीय योजनाओं के माध्यम से दिल्ली की जनता को आकर्षित करने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस पार्टी, जो कभी दिल्ली में एक प्रमुख राजनीतिक शक्ति थी, अब अपनी खोई हुई जमीन को वापस पाने की कोशिश कर रही है। पिछले कुछ वर्षों में कांग्रेस का वोट बैंक लगातार घटता जा रहा है। हालांकि, कांग्रेस दिल्ली के पुराने वफादारों और उन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित कर रही है जहां उनका प्रभाव था। पार्टी के नेता यह दावा कर रहे हैं कि वे एक नई शुरुआत के साथ मैदान में हैं और आने वाले चुनावों में अपनी खोई हुई साख को पुनः हासिल करेंगे। जानिए दिल्ली के चुनावी का इतिहास दिल्ली विधानसभा चुनावों के इतिहास पर नजर डालें तो पिछले कुछ चुनावों में AAP ने अपनी मजबूत स्थिति कायम रखी है। 2020 के चुनाव में, AAP ने बीजेपी और कांग्रेस दोनों को मात देते हुए 70 सीटों में से 62 पर विजय प्राप्त की थी। AAP के उम्मीदवारों ने कई सीटों पर कम अंतर से जीत हासिल की थी, जो दर्शाता है कि दिल्ली के मतदाता इस बार भी सटीक चुनावी रणनीतियों को प्राथमिकता देंगे।दिल्ली विधानसभा में कुल 70 सीटें हैं, और इनमें से अधिकतर सीटें ऐसी हैं, जहां जीत का अंतर काफी कम होता है। इसलिए इस चुनाव में उम्मीदवारों के व्यक्तिगत प्रभाव और क्षेत्रीय समीकरणों का भी अहम योगदान हो सकता है। दिल्ली की सियासत में एक नई जनधारा का आना और विभिन्न क्षेत्रों में बदलते हुए मतदाता स्वरूप के कारण चुनावी परिणामों का पूर्वानुमान करना कठिन हो गया है। चुनाव में किसी भी मतदाता को समस्या न हो 6 जनवरी तक केंद्रीय चुनाव आयोग नई वोटर लिस्ट जारी करेगा, जिसमें नए वोटरों के नाम जोड़े जाएंगे और पुराने नामों में बदलाव किया जाएगा। दिल्ली में हर चुनाव से पहले इस लिस्ट का अपडेट किया जाता है ताकि चुनाव में किसी भी मतदाता को समस्या न हो। इस बार दिल्ली में बड़ी संख्या में युवा मतदाता हैं, जो पहली बार वोट डालने जा रहे हैं। इसके अलावा, कई प्रवासी नागरिक जो हाल ही में दिल्ली में आए हैं, उनके नाम भी वोटर लिस्ट में जोड़े जा सकते हैं। नई वोटर लिस्ट का प्रभाव यह भी हो सकता है कि दिल्ली के विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में प्रत्याशियों की जीत-हार के अंतर में बदलाव आए। साथ ही, यह लिस्ट चुनावी प्रचार में एक नया मोड़ ला सकती है क्योंकि पार्टियों को अब नए वोटर्स तक पहुंचने के लिए अपनी रणनीतियों को फिर से डिजाइन करना होगा।  

संजीव खन्ना, बीआर गवई के बाद सूर्यकांत 2025 में SC को मिलेंगे तीन चीफ जस्टिस और रिटायर होंगे सात जज

 नई दिल्ली नए साल 2025 में सुप्रीम कोर्ट तीन मुख्य न्यायाधीशों के नेतृत्व में काम करेगा. इस साल दो चीफ जस्टिस समेत सात जज रिटायर होंगे. मौजूदा मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव खन्ना 13 मई 2025 को सेवानिवृत्त होंगे. जस्टिस खन्ना दिल्ली हाईकोर्ट से 18 जनवरी 2019 को सुप्रीम कोर्ट में आए थे. चीफ जस्टिस के रूप में उनका कार्यकाल 11 नवंबर 2024 से 13 मई 2025 तक होगा. सीजेआई खन्ना के बाद जस्टिस बी.आर गवई चीफ जस्टिस बनेंगे. वह अगले छह महीने यानी 23 नवंबर तक इस पद पर रहेंगे. इसी साल तीसरे चीफ जस्टिस सूर्यकांत बनेंगे. उनका कार्यकाल करीब सवा साल फरवरी 2027 तक होगा. इस साल 2025 में सेवानिवृत्त होने वाले अन्य पांच जजों में जस्टिस सी.टी. रवि कुमार सबसे पहले हैं. वो तीन साल से अधिक का कार्यकाल पूरा कर 5 जनवरी 2025 को रिटायर होंगे. जस्टिस रवि कुमार 31 अगस्त, 2021 को केरल हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट में आए थे. इसके बाद जस्टिस हृषिकेश रॉय चार साल से अधिक का सेवाकाल पूरा कर 31 जनवरी को रिटायर होंगे. जस्टिस हृषिकेश रॉय गुवाहटी हाईकोर्ट और फिर केरल हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रहे. जस्टिस रॉय 23 सितंबर, 2019 को सुप्रीम कोर्ट आए थे. न्यायमूर्ति अभय श्रीनिवास ओक 24 मई, 2025 को अपना तीन साल से अधिक का सेवाकाल पूरा कर रिटायर होंगे. वह बॉम्बे हाईकोर्ट के न्यायाधीश बने फिर 2019 में कर्नाटक हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बनाए. जस्टिस ओक 31 अगस्त 2021 को सुप्रीम कोर्ट आए थे. जस्टिस ओक के रिटायरमेंट के अगले महीने जस्टिस बेला माधुर्य त्रिवेदी 9 जून, 2025 को रिटायर होंगी. वह 31 अगस्त 2021 को गुजरात हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट आईं थीं. इसके बाद जस्टिस सुधांशु धूलिया 9 अगस्त 2025 को सेवानिवृत्त होंगे. ये उत्तराखंड हाईकोर्ट से जनवरी 2021 में गुवाहटी हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस नियुक्त किए गए थे. जस्टिस धूलिया वहां से 9 मई, 2022 को सुप्रीम कोर्ट आए थे. इसके बाद चीफ जस्टिस पद से जस्टिस बी.आर. गवई 23 नवंबर, 2025 को रिटायर होंगे. जस्टिस गवई बॉम्बे हाईकोर्ट से 24 मई, 2019 को सुप्रीम कोर्ट आए. वो मई में चीफ जस्टिस बनेंगे और छह महीने से ज्यादा वक्त तक देश की सर्वोच्च न्यायपालिका का नेतृत्व करेंगे. सुप्रीम कोर्ट के कितने न्यायाधीश 2025 में होंगे रिटायर? जस्टिस सीटी रविकुमार साल 2025 में सबसे पहले जस्टिस सीटी रविकुमार रिटायर होंगे. उन्होंने 31 अगस्त 2021 में सुप्रीम कोर्ट में बतौर न्यायाधीश के तौर पर सेवा देना शुरू किया था. जस्टिस सीटी रविकुमार इसी हफ्ते 5 जनवरी को रिटायर हो रहे हैं. उन्होंने केरल राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष, केरल न्यायिक अकादमी के अध्यक्ष और केरल राज्य मध्यस्थता और सुलह केंद्र के अध्यक्ष सहित कई प्रमुख पदों पर काम किया है. बतौर न्यायाधीश उनके कुछ अहम फैसलों में पॉक्सो अधिनियम के अनुपालन से जुड़े मामलों पर महत्वपूर्ण फैसले, चुनावी वादों का सरकार के वित्त पर असर और गुरमेल सिंह मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 149 की व्याख्या शामिल है. हाल के फैसलों (2024) में, उन्होंने जुवेनाइल जस्टिस समय-सीमा और बाल हिरासत मामलों पर अहम फैसले लिए हैं. जस्टिस ऋषिकेष रॉय जस्टिस ऋषिकेष रॉय इस साल रिटायर होने पर दूसरे सुप्रीम कोर्ट जज होंगे. 31 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में उनका आखिरी दिन होगा. इससे पहले वह केरल हाईकोर्ट में बतौर चीफ जस्टिस कार्यरत थे. चीफ जस्टिस संजीव खन्ना चीफ जस्टिस संजीव खन्ना इसी साल मई में रिटायर हो जाएंगे. उन्हें साल 2019 में दिल्ली हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट में प्रमोट किया गया था. पिछले साल नवंबर में संजीव खन्ना शीर्ष न्यायालय के चीफ जस्टिस बने थे. उन्होंने एक ऐतिहासिक 7 न्यायाधीशों के बेंच के फैसले में अहम भूमिका निभाई थी. इस फैसले में बिना मुहर वाले मध्यस्थता समझौतों पर कानून को स्पष्ट किया था. बतौर न्यायाधीश चीफ जस्टिस संजीव खन्ना शिल्पा शैलेश बनाम वरुण श्रीनिवासन केस (2023) में एक अहम संवैधानिक पीठ के फैसले में शामिल थे. इस फैसले में अनुच्छेद 142 के तहत तलाक के लिए एक वैध आधार की व्याख्या की थी. इसमें तय किसी गया था कि ‘जब किसी शादी में जुड़ाव की कोई गुंजाइश न बच जाए’ तो वह तलाक का आधार माना जा सकता है. इसके अलावा अन्ना मैथ्यूज बनाम भारत का सर्वोच्च न्यायालय (2023) मामले में, उन्होंने न्यायिक नियुक्तियों में पात्रता और उपयुक्तता के बीच महत्वपूर्ण अंतर को परिभाषित किया था. यह फैसला देते हुए कि पात्रता न्यायिक समीक्षा के अधीन है, उपयुक्तता इसके दायरे से बाहर है. जस्टिस अभय श्रीनिवास ओका जस्टिस अभय श्रीनिवास ओका भी मई में रिटायर होंगे. 24 मई में सुप्रीम कोर्ट में उनका आखिरी दिन होगा. जस्टिस अभय बॉम्बे हाईकोर्ट में न्यायाधीश थे, इसके बाद वह कर्नाटक हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस बने. साल 2021 में जस्टिस अभय सुप्रीम कोर्ट में जज बने थे. जस्टिस बेला एम त्रिवेदी जस्टिस बेला एम त्रिवेदी भी इसी साल रिटायर होंगी. 9 जून 2025 को सुप्रीम कोर्ट में उनका आखिरी कार्यदिवस होगा. जस्टिस बेला 2021 के अगस्त में सुप्रीम कोर्ट की जज बनी थीं, इससे पहले वह गुजरात हाईकोर्ट में जज रही चुकीं हैं. जस्टिस सुधांशु धुलिया जस्टिस सुधांशु धुलिया 9 अगस्त 2025 को रिटायर होंगे. 9 मई 2022 को उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में बतौर न्यायाधीश पद की शपथ ली थी. इससे पहले वह उत्तराखंड हाईकोर्ट में जज रह चुके हैं. साल 2021 से मई 2022 तक वह गुवाहाटी हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस भी रह चुके हैं. जस्टिस बीआर गवई जस्टिस बीआर गवई इसी साल 23 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट से रिटायर हो जाएंगे. रिटायरमेंट से पहले मई 2025 में चीफ जस्टिस संजीव खन्ना की जगह ले लेंगे. बीआर गवई उस पीठ का हिस्सा थे जिसने अधिवक्ता प्रशांत भूषण (2020) के खिलाफ अवमानना मामले की सुनवाई की थी और न्यायिक गरिमा बनाए रखने के महत्व पर जोर देते हुए 1 रुपये का प्रतीकात्मक जुर्माना लगाया था. इसके अलावा बीआर गवई ने पट्टाली मक्कल काची मामले (2022) में आरक्षण नीति पर महत्वपूर्ण फैसला दिया था. उन्होंने पुराने डेटा पर निर्भरता के कारण वन्नियार समुदाय के लिए तमिलनाडु सरकार के 10.5% आरक्षण के खिलाफ फैसला सुनाया था. जस्टिस बीआर गवई को न्याय से जुड़े फिलॉस्फी के जानकार के तौर पर माना जाता है. उन्होंने एक बार कहा था, कानून की प्रैक्टिस सीखने की एक शाश्वत प्रक्रिया है … Read more

वंदे भारत स्लीपर का ट्रायल, 180 किलोमीटर की रफ्तार से पटरियों पर दौड़ी

नई दिल्ली वंदे भारत ट्रेन ने लोगों का सफर पहले से आरामदायक बना दिया है. अब वंदे भारत स्लीपर को चलाने की तैयारियां आखिरी चरण में है. इसके लिए राजस्थान, उत्तरप्रदेश और मध्यप्रदेश में 180 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार में वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का ट्रायल रन किया जा रहा है. रेल यात्री लंबे समय से वंदे भारत स्लीपर का इंतजार कर रहे हैं. फिलहाल देश की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का ट्रायल रन चल रहा है. कोच में वजन लोड किया जा रहा ट्रायल राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में रेलवे पटरियों पर वंदे भारत स्लीपर को फर्राटा भरते हुए देखा जा सकता है. मध्यप्रदेश के खजुराहो, यूपी के महोबा रेल खंड और राजस्थान के कोटा रेल खंड पर वंदे भारत स्लीपर का ट्रायल रन हो रहा है. ट्रायल रन के दौरान स्लीपर वंदे भारत के खाली कोचों में वजन लोड कर किया जा रहा है. वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का ट्रायल रन लखनऊ स्थित रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडर्ड्स ऑर्गनाइजेशन (आरडीएसओ) द्वारा किया जा रहा है. किस जगह पर ट्रायल हुआ पूरा वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का ट्रायल रन पिछले सप्ताह शुरू हुआ था और इसे दो चरणों में दो स्थानों पर चलाया जाएगा. इनमें से आरडीएसओ ने सोमवार 30 दिसंबर, 2024 को उत्तर मध्य रेलवे (एनसीआर) के झांसी डिवीजन में ट्रायल रन पूरा कर लिया.  वंदे भारत स्लीपर का विभिन्न मोडों – लोडेड (फुलाया/डिफ्लेट किया हुआ) और खाली (फुलाया/डिफ्लेट किया हुआ) में 180 किमी प्रति घंटे (परीक्षण गति) तक दोलन परीक्षण वंदे स्लीपर जेएचएस डिवीजन में कार्य पूरा हो चुका है. जल्द वंदे भारत स्लीपर में कर सकेंगे सफर अब ट्रायल रन का दूसरा चरण पश्चिम मध्य रेलवे (WCR) के कोटा डिवीजन में हुआ है. कोटा डिवीजन में किए जाने वाले वंदे स्लीपर ट्रायल के दूसरे चरण में शामिल हैं. विभिन्न मोड में 180 किमी प्रति घंटे (टेस्ट स्पीड) तक ऑसिलेशन ट्रायल, विभिन्न ब्रेकिंग मोड में ब्रेक परफॉर्मेंस ट्रायल और विभिन्न ऑपरेटिंग + ब्रेकिंग मोड में कपलर फोर्स ट्रायल किया गया है. ट्रायल रन पूरा होने के बाद वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की सौगात देश वासियों को मिलेगी. 26 जनवरी से पहले वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की सौगात मिल सकती है. वंदे भारत की 180KM स्पीड, रेलमंत्री वैष्णव ने वीडियो किया ट्वीट देश की पहली AC स्लीपर वंदे भारत ट्रेन का ट्रायल हो गया है। कोटा रेल मंडल में दिल्ली-मुंबई रेलवे ट्रैक पर 180 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार के साथ ट्रेन का ट्रायल किया गया। लखनऊ की रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडर्ड ऑर्गेनाइजेशन (RDSO) ट्रेन का ट्रायल कर रही है। मूवमेंट इंस्पेक्टर सुशील जेठवानी और लोको निरीक्षक आरएन मीना ने RDSO लखनऊ टीम के साथ को-ऑर्डिनेट किया। नागदा, सवाई माधोपुर से कोटा के बीच ट्रायल किया गया। ट्रायल का वीडियो रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अपने X हैंडल पर पोस्ट किया। वीडियो में देख सकते हैं कि वंदे भारत स्लीपर ट्रेन 180 की स्पीड से दौड़ रही है और वीडियो में ट्रेन के एक कोच में रखा पानी का गिलास भी नजर आएगा, जिसे देखकर यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि वंदे भारत ट्रेन की इतनी ज्यादा स्पीड होने पर भी गिलास डगमगाया नहीं। इससे पानी छलका तक नहीं। ट्रेन का ट्रायल अलग-अलग इलाकों में जनवरी के पूरे महीने तक चलता रहेगा। ट्रायल पूरा होने के बाद रिपोर्ट रेल मंत्रालय और रेलवे बोर्ड को भेजी जाएगी। एक रूट पर अलग-अलग स्पीड से लिया गया ट्रायल मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, राजस्थान को इस साल वंदे भारत AC स्लीपर ट्रेन मिलेगी, जो मारवाड़ से रवाना होकर दिल्ली-मुंबई रूट पर दौड़ेगी। इसका किराया चेयर कार और एग्जीक्यूटिव कैटेगरी जितना ही होगा। वहीं ट्रेन के फीचर्स ऐसे होंगे कि यात्रियों को जरा-सी परेशानी न होगी। ट्रेन के नए AC स्लीपर मॉडल के लिए जोधपुर में सेंट्रलाइज मेंटेनेंस डिपो बनेगा, जिसे बनाने पर करीब 166 करोड़ खर्च होंगे। सिर्फ यही ट्रेन नहीं, बल्कि पूरे देश में जो भी वंदे भारत ट्रेन दौड़ेंगी, उनका मेंटेनेंस यहीं होगा। सीनियर DCM सौरभ जैन ने बताया कि वंदे भारत को कोटा के नागदा रेल खंड में रोहल खुर्द और चौमहला के बीच दौड़ाया गया और इसमें यात्रियों के बराबर वजन रखकर ही ट्रायल किया गया था। 31 दिसंबर को पहले 130, फिर 140 और फिर 150 की स्पीड से ट्रायल हुआ। 1 जनवरी 2025 को 160 और रोहल खुर्द विक्रमगढ़ के बीच 177 किलोमीटर की स्पीड से ट्रायल किया गया। इसके बाद रोहल खुर्द से कोटा के बीच 40 किलोमीटर की दूरी ट्रेन ने 180 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तय की।  

केंद्रीय कर्मचारियों की लगेगी लॉटरी, कर्मचारियों-पेंशनरों को नए साल में मिलेगा बड़ा गिफ्ट

नईदिल्ली केंद्र सरकार नए साल में केंद्रीय कर्मचारियों को तोहफा दे सकती है। सरकार जनवरी में महंगाई भत्ते (DA) में बढ़ोतरी का ऐलान कर सकती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस बार सरकार केंद्रीय कर्मचारियों के लिए 3-4 प्रतिशत तक की DA बढ़ोतरी की घोषणा कर सकती है। डीए में यह बढ़ोतरी 1 जनवरी 2025 से लागू मानी जाएगी। हालांकि, अगर पिछले सालों का रिकॉर्ड देखें तो सरकार जनवरी के डीए बढ़ाने का ऐलान मार्च में करती है। सरकार डीए बढ़ाने का ऐलान कभी भी करें लेकिन इसे लागू 1 जनवरी से ही माना जाता है। सरकार साल में 2 बार डीए बढ़ाती है 1 जनवरी और 1 जुलाई। अभी 53 फीसदी है महंगाई भत्ता और महंगाई राहत पिछले साल भी DA में बढ़ोतरी अक्टूबर के पहले सप्ताह में की गई थी। लेकिन इसे लागू 1 जुलाई से माना गया था। सरकार ने अक्टूबर में डीए में 3 फीसदी की बढ़ोतरी की थी। तब डीए बढ़कर 53 फीसदी हो गया था। इससे पहले मार्च 2024 में डीए 4 फीसदी की बढ़ोतरी की थी। तब महंगाई भत्ता 4 प्रतिशत बढ़ने से बेसिक पे का 50 प्रतिशत हो गया था। अब डीए बेसिक सैलरी का 53 फीसदी है। साथ ही पेंशनर्स के लिए महंगाई राहत (DR) भी 53 फीसदी है। DA और DR हर साल दो बार बढ़ाए जाते हैं। DA केंद्रीय कर्मचारियों को दिया जाता है, जबकि DR पेंशनर्स को दिया जाता है। क्या 57 फीसदी होगा महंगाई भत्ता? अगर सरकार 4 फीसदी डीए बढ़ाती है तो डीए बढ़ाकर 57 फीसदी होगा। अगर सरकार नए साल में डीए 3 फीसदी बढ़ाती है तो ये बढ़कर 56 फीसदी होगा। COVID-19 के दौरान रुके हुए DA बकाए का क्या होगा? हाल ही में संसद के मानसून सत्र के दौरान केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने स्पष्ट किया कि सरकार COVID-19 महामारी के दौरान रोके गए 18 महीने के DA और DR के बकाए को जारी करने की संभावना नहीं देख रही है। मंत्री पंकज चौधरी ने एक सवाल के जवाब में कहा कि सरकार केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के 18 महीने के DA और DR बकाए को जारी करने पर विचारनहीं कर रही है जिसे COVID-19 के दौरान रोका गया था। कोविड महामारी के कारण आर्थिक परेशानी के चलते जनवरी 2020, जुलाई 2020 और जनवरी 2021 की तीन किश्तों को रोका गया था।

चीन में एचएमपीवी के प्रकोप के बाद इस वायरस के प्रसार को रोकने और निगरानी बढ़ाने की शीघ्र जरूरत, केंद्र सरकार हुई सतर्क

नई दिल्ली पड़ोसी देश चीन में ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस (एचएमपीवी) के फैलने की खबरों के बीच भारत सरकार भी अलर्ट हो गई है। राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC) ने श्वसन और मौसमी इन्फ्लूएंजा के मामलों पर नजर रखना शुरू कर दिया है। विभाग अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के संपर्क में भी है। सूत्रों के मुताबिक केंद्र ने कहा कि हम स्थिति पर बारीकी से नजर रखेंगे। जानकारी की जांच करेंगे और इसके आधार पर अपडेट करेंगे। निगरानी और रोकथाम की जरूरत डॉ. डैंग्स लैब के सीईओ डॉ. अर्जुन डैंग ने बताया कि चीन में ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस (एचएमपीवी) के प्रकोप के बाद इस वायरस के प्रसार को रोकने और निगरानी बढ़ाने की शीघ्र जरूरत है। अधिक घनत्व वाली आबादी में यह वायरस अधिक घातक हो सकता है। उन्होंने कहा कि डॉ. डैंग्स लैब में हमने फ्लू सीजन के दौरान एचएमपीवी को छोटे बच्चों, वृद्धों और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों में नियमित रिपोर्ट किया। मगर चीन में इसका फैलना वायरस के निगरानी और शुरुआती जांच की जरूरत को उजागर करता है। ऐसे होते हैं एचएमपीवी के लक्षण डॉ. डांग के मुताबिक एचएमपीवी के लक्षण अन्य श्वास संबंधी वायरसों जैसे होते हैं। अगर इसके प्रसार पर तुरंत काबू नहीं पाया गया तो यह स्वास्थ्य सेवा पर अधिक दबाव डाल सकता है। डॉ. अर्जुन डांग के अनुसार इस वायरस के लक्षणों में बुखार आना, खांसी, नाक बंद होना, सांस लेने में तकलीफ और घबराहट होती हैं। गंभीर मामलों में ब्रोंकियोलाइटिस या निमोनिया भी हो सकता है। हालांकि यह खतरा बच्चों और बुजुर्गों में अधिक होता है। अभी कोई इलाज नहीं डॉ. अर्जुन डांग ने कहा कि एचएमपीवी के लिए कोई विशिष्ट एंटीवायरल इलाज नहीं है। रोकथाम ही इसका सबसे प्राथमिक इलाज है। उन्होंने कहा कि अभी इस वायरल का पॉलीमरेज चेन रिएक्शन (पीसीआर) परीक्षण ही निदान का मानक है। गंभीर मामलों में बुखार को नियंत्रित करके और ऑक्सीजन थेरपी से इलाज किया जाता है। इस तरह कर सकते अपना बचाव कुछ अच्छी आदतों को अपनाकर वायरस के जोखिम को कम किया जा सकता है। डॉ. अर्जुन डांग का कहना है कि बार-बार हाथ धो कर, खांसते और छींकते समय मुंह ढंकना, संक्रमित व्यक्ति से दूरी बनाकर काफी हद तक जोखिम से बचा जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकारी अधिकारियों को जनजागरूकता अभियान भी चलाना चाहिए।

‘हमने चीन के होटन प्रान्त में दो नए काउंटी बनाने से संबंधित घोषणा देखी है, बढ़ी टेंशन, भारत-चीन फिर आमने-सामने

नई दिल्ली भारत ने शुक्रवार को कहा कि उसने होटन प्रान्त में दो नए काउंटी बनाने पर चीन के समक्ष गंभीर विरोध दर्ज कराया है। भारत का कहना है कि इन क्षेत्रों के कुछ हिस्से भारतीय केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में आते हैं। नई दिल्ली ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि नए काउंटी बनाने से न तो क्षेत्र पर अपनी संप्रभुता के संबंध में भारत की दीर्घकालिक और सुसंगत स्थिति पर कोई असर पड़ेगा और न ही चीन के अवैध और जबरन कब्जे को वैधता मिलेगी। अवैध कब्जा स्वीकार नहीं: विदेश मंत्रालय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत ने क्षेत्र में भारतीय क्षेत्र पर अवैध चीनी कब्जे को कभी स्वीकार नहीं किया है। उन्होंने कहा, ‘हमने चीन के होटन प्रान्त में दो नए काउंटी बनाने से संबंधित घोषणा देखी है। इन तथाकथित काउंटी के अधिकार क्षेत्र के कुछ हिस्से भारत के केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में आते हैं।’ उन्होंने कहा, ‘हमने इस क्षेत्र में भारतीय क्षेत्र पर अवैध चीनी कब्जे को कभी स्वीकार नहीं किया है।’ जायसवाल ने कहा, ‘नए देशों के निर्माण से न तो इस क्षेत्र पर हमारी संप्रभुता के बारे में भारत की दीर्घकालिक और सुसंगत स्थिति पर कोई असर पड़ेगा और न ही चीन के अवैध और जबरन कब्जे को वैधता मिलेगी।’ उन्होंने आगे कहा, ‘हमने कूटनीतिक चैनलों के माध्यम से चीनी पक्ष के समक्ष गंभीर विरोध दर्ज कराया है।’ बांध बनाने के फैसले पर भी जताई चिंता इसके अलावा भारत ने चीन की ओर से ब्रह्मपुत्र नदी पर बांध बनाए जाने के फैसले पर भी चिंता जताई है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस संबंध में शुक्रवार को कहा कि नई दिल्ली ने तिब्बत में यारलुंग जांगबो नदी पर पनबिजली बांध बनाने की चीन की योजना के बारे में बीजिंग को अपनी चिंताएं बताई हैं। गौरतलब है कि यह नदी भारत में भी बहती है। हालांकि, इस पर चीनी अधिकारियों का कहना है कि तिब्बत में पनबिजली परियोजनाओं से पर्यावरण या नीचे की ओर पानी की आपूर्ति पर कोई बड़ा प्रभाव नहीं पड़ेगा, लेकिन भारत और बांग्लादेश ने बांध को लेकर अपनी चिंताएं जताई हैं। बता दें कि यारलुंग जांगबो तिब्बत से निकलकर भारत के अरुणाचल प्रदेश और असम राज्यों में बहती हुई ब्रह्मपुत्र नदी बन जाती है और अंत में बांग्लादेश में मिल जाती है। निगरानी जारी रखेंगे: भारत ब्रह्मपुत्र पर विशाल बांध बनाने की चीन की योजना पर विदेश मंत्रालय ने कहा कि हम अपने हितों की रक्षा के लिए निगरानी जारी रखेंगे और आवश्यक कदम उठाएंगे। मंत्रालय ने कहा कि चीनी पक्ष से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया गया कि ब्रह्मपुत्र के निचले इलाकों के राज्यों के हितों को नुकसान न पहुंचे। क्या है चीन का प्लान? बता दें कि चीन ने हाल ही में ब्रह्मपुत्र पर बांध को बनाने का एलान किया है। ये बांध तिब्बत में यारलुंग जंग्बो के निचले हिस्से में बनाया जाना है। हिमालयी क्षेत्र में जहां ब्रह्मपुत्र नदी अरुणाचल में प्रवेश करती है, वहां एक बड़ा और शार्प यू-टर्न लेती है। इसी जगह पर एक विशाल घाटी मौजूद है। बांध का निर्माण यहीं किया जाना है। इसके निर्माण में 137 बिलियन डॉलर खर्च होने की उम्मीद है। चीन में पहले से ही थ्री गोरजेस बांध मौजूद है, जो वर्तमान में दुनिया में सबसे बड़ा है, लेकिन अगर ब्रह्मपुत्र पर बनने वाला बांध चीन के प्लान मुताबिक तैयार हो गया तो यह थ्री गोरजेस से भी बड़ा होगा। इसका मतलब ये हुआ कि दुनिया का सबसे बड़ा बांध चीन फिर से बनाने वाला है। शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग वहीं, विदेश मंत्रालय ने बांग्लादेश की यूनूस सरकार की ओर से वहां की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण के मामले में कहा है कि इस समय इस मुद्दे पर कहने के लिए कुछ भी नहीं है। इससे जुड़े एक सवाल का जवाब देते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, ‘एक सप्ताह पहले मैंने पुष्टि की थी कि हमें पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के संबंध में बांग्लादेश के अधिकारियों से एक पत्र प्राप्त हुआ है। इसके अलावा, इस समय मेरे पास कहने के लिए कुछ नहीं है।’

गाजा में कहीं भी नागरिक सुरक्षित नहीं हैं, 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सा आदेशों के अधीन है: संयुक्त राष्ट्र के मानवीय संगठन

संयुक्त राष्ट्र संयुक्त राष्ट्र के मानवीय संगठनों ने कहा है कि गाजा में कहीं भी नागरिक सुरक्षित नहीं हैं और गाजा पट्टी का 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सा इजरायल के निकासी आदेशों के अधीन है। फिलीस्तीनी शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र राहत एजेंसी (यूएनआरडब्ल्यूए) के महाआयुक्त फिलिप लाजारिनी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा, “यहां कोई मानवीय क्षेत्र तो दूर, ‘सुरक्षित क्षेत्र’ भी नहीं है।” रिपोर्ट के अनुसार, लाजारिनी ने भ्रामक निकासी आदेशों और नागरिकों की हत्या को रोकने की अपील की, साथ ही चेतावनी दी कि बिना युद्धविराम के हर दिन और अधिक त्रासदी लेकर आ रहा है। मानवीय मामलों के समन्वय के लिए संयुक्त राष्ट्र कार्यालय (ओसीएचए) ने कहा कि इजरायली सेना ने इजरायल में रॉकेट फायर का हवाला देते हुए गाजा के भीतर बड़े क्षेत्रों को खाली करने का आदेश दिया। कार्यालय ने कहा कि प्रारंभिक विश्लेषण से पता चलता है कि नए आदेश उत्तरी गाजा और देइर अल बलाह प्रांतों में लगभग 3 वर्ग किमी को कवर करते हैं। अल मवासी क्षेत्र में हमलों की सूचना मिली है, जहां लोगों को स्थानांतरित करने और शरण लेने का आदेश दिया गया था। ओसीएचए ने कहा, “गाजा पट्टी का 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सा इजरायली निकासी आदेशों के अधीन है, जिन्हें वापस नहीं लिया गया है। कार्यालय ने चेतावनी दी कि गाजा में जरूरतमंद लोगों की सहायता करने के लिए मानवीय संगठनों की क्षमता और कम होती जा रही है। मानवतावादियों ने कहा कि पिछले महीने मानवीय गतिविधियों पर सबसे सख्त प्रतिबंध लगाए गए थे। इनमें आपूर्ति एकत्र करने के लिए सीमा क्षेत्रों तक पहुंच को ब्लॉक करना, माल और सेवाएँ पहुंचाने के प्रयासों को नकारना या गाजा में जरुरतों का आकलन करना शामिल है। कुल मिलाकर, गाजा में कहीं भी सहायता कार्यकर्ताओं को ले जाने के संयुक्त राष्ट्र के 39 प्रतिशत प्रयासों को इजरायली अधिकारियों ने अस्वीकार कर दिया, जबकि अन्य 18 प्रतिशत को बाधित किया गया या हस्तक्षेप किया गया।  

नई दिल्ली हमेशा हिंद महासागर द्वीपसमूह के साथ खड़ा है, जब उसे चुनौतीपूर्ण समय में मदद की जरुरत होती है: एस. जयशंकर

नई दिल्ली विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शुक्रवार को कहा कि मालदीव भारत की ‘पड़ोसी पहले’ नीति की एक ‘मजबूत अभिव्यक्ति’ बना हुआ है। उन्होंने कहा कि नई दिल्ली हमेशा हिंद महासागर द्वीपसमूह के साथ खड़ा है, खासकर जब उसे चुनौतीपूर्ण समय में मदद की जरुरत होती है। विदेश मंत्री जयशंकर ने यह बात शुक्रवार को नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में मालदीव के विदेश मंत्री अब्दुल्ला खलील के साथ बैठक के दौरान कही। जयशंकर ने कहा, “हमने विभिन्न क्षेत्रों में अपने संबंधों को बढ़ाया है और मैं इस बात पर जोर देना चाहता हूं कि भारत हमेशा मालदीव के साथ खड़ा है। आप हमारी ‘पड़ोसी पहले’ नीति की मजबूत अभिव्यक्ति हैं।” इस दौरान दोनों पक्षों ने भारत सरकार की मदद से मालदीव में चरण-III के अंतर्गत सामुदायिक विकास परियोजनाओं के लिए एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। दोनों मंत्रियों ने अक्टूबर 2024 में मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू की राजकीय यात्रा के दौरान हुई सहमतियों पर प्रगति का जायजा लिया। इसके अलावा उन मुद्दों पर चर्चा की जिन पर और अधिक ध्यान देने की जरुरत है। खलील ने भारत की ओर से मालदीव को जरूरत के समय में दी गई आपातकालीन वित्तीय सहायता की सराहना की। उन्होंने कहा कि 2025 मालदीव-भारत संबंधों के लिए एक महत्वपूर्ण वर्ष है क्योंकि दोनों देश औपचारिक राजनयिक संबंधों की स्थापना के 60 वर्ष पूरे हो रहे हैं। मालदीव के विदेश मंत्री ने कहा, “हमारी साझेदारी सदियों पुरानी है। हमारी साझेदारी आपसी समझ, सम्मान और साझा प्रतिबद्धता पर आधारित है। दशकों के विश्वास और मित्रता के साथ, यह आगे भी फलती-फूलती रहेगी… भारत की ‘पड़ोसी पहले’ नीति के लाभार्थी के रूप में, मालदीव की सरकार भारत द्वारा दिए गए महत्व को समझती है। हमारे पास ऐसे कई उदाहरण हैं जहां भारत सरकार ने जरूरत के समय तत्काल मदद पहुंचाई है।”

पाक विदेश मंत्री इशाक डार ने नई दिल्ली के साथ बेहतर रिश्ते बनाने की इच्छा जाहिर की, पाकिस्तान ने गाया ‘दोस्ती का तराना’

इस्लामाबाद आर्थिक संकट का सामना कर रहे पाकिस्तान को अब भारत से दोस्ती की जरुरत महसूस हो रही है। पाकिस्तानी उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने नई दिल्ली के साथ बेहतर रिश्ते बनाने की इच्छा जाहिर की। खबर के मुताबिक एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारत के साथ व्यापारिक संबंधों पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि रिश्तों को बेहतर बनाने के लिए ‘दो लोगों की जरूरत होती है’। उन्होंने भारत से संबंधों को बेहतर बनाने के लिए माहौल बनाने की अपील की। 2022 में आई विनाशकारी बाढ़, उच्च मुद्रास्फीति और राजनीतिक अस्थिरता के कारण पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था बेहद खराब स्थिति में है। खस्ता आर्थिक हालात के कारण आबादी की खाद्य और ऊर्जा जरुरतों को पूरा करने से संबंधित कई संकट पैदा हो गए हैं। पाकिस्तान की सारी उम्मीदें अब सिर्फ अंतरराष्ट्रीय कर्ज पर ही टिकी हैं जिसके लिए उसे कभी अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) या फिर सऊदी अरब और चीन जैसे दोस्तों की तरफ देखना पड़ता है। ऐसे में भारत के साथ व्यापार में रुकावट के कारण उसके खुशहाली के रास्ते की एक बड़ी बाधा है। रिपोर्ट के मुताबिक डार ने द्विपक्षीय और बहुपक्षीय बातचीत के जरिए पाकिस्तान की कूटनीतिक स्थिति में सुधार और आर्थिक स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए सरकारी कोशिशों के बारे में जानकारी दी। इनमें सबसे हालिया कोशिश 2025-2026 के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के गैर-स्थायी सदस्य के रूप में पाकिस्तान के दो साल के कार्यकाल की शुरुआत थी। डार ने कहा कि पाकिस्तान को परमाणु शक्ति से आर्थिक शक्ति में बदलने और अंतरराष्ट्रीय क्षेत्र में अपनी खोई हुई प्रतिष्ठा को फिर से हासिल करने की कोशिशें जारी है। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार ने अपने पहले 10 महीनों के दौरान पाकिस्तान के कूटनीतिक प्रभाव को बढ़ाने का प्रयास किया, जिसके कारण ‘अलग-थलग पड़े पाकिस्तान’ की छवि को खत्म करने में मदद मिली।

आईएमडी ने जारी किया ऑरेंज और येलो अलर्ट, शीतलहर की चपेट में उत्तर भारत के कई राज्य

नई दिल्ली दिल्ली एनसीआर समेत देश के तमाम राज्य शीतलहर की चपेट में है। उत्तर भारत के कई राज्यों में कोहरे और ठंड को लेकर येलो और ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। दिल्ली में हवाओं की वजह से तापमान में गिरावट देखने को मिल सकती है। वेस्टर्न डिस्टरबेंस के कारण 6 जनवरी तक तेज हवाओं और बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। भारत मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक, राजधानी दिल्ली में न्यूनतम तामपान 7.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। आईएमडी के अनुसार दिल्ली में गुरुवार को लगातार चौथे दिन भीषण ठंड की स्थिति बनी रही। पश्चिम दिल्ली में कोहरे और ठंड को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। पंजाब के तरनतारन, गुरदासपुर, जालंधर, अमृतसर में भी अत्यधिक ठंड की आशंका जताते हुए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। वहीं, हरियाणा के कुछ इलाकों में येलो अलर्ट जारी किया गया है। गाजियाबाद में भी हालात वैसे ही हैं। शुक्रवार सुबह न्यूनतम तापमान 7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं दिन में अधिकतम तापमान 18 डिग्री सेल्सियस पहुंचने का अनुमान है। दिन में दाेपहर बाद हल्की धूप खिलने का अनुमान है। आज हवा की गति 10 किमी प्रति घंटा से चल रही है। मौसम विभाग के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में पछुआ ने ठंड बढ़ाई है। इस वजह से यहां पारा 4 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है। कानपुर शहर में पारा 5 डिग्री सेल्सियस पहुंच चुका है। ग्रामीण क्षेत्रों में भी गलन पड़ रही है। लखनऊ में न्यूनतम तापमान 7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि अधिकतम तापमान 17.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। अगले 24 घंटे में प्रदेश का अधिकतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस का इजाफा दर्ज किया जा सकता है। मौसम विभाग ने उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती, बहराइच, लखीमपुर खीरी, लखनऊ, गोंडा, बलरामपुर, बहराइच, अयोध्याश समेत कई जिलों में आज के लिए कड़ाके की ठंड पड़ने को लेकर येलो अलर्ट जारी किया है। उधर, उत्तर प्रदेश के छोटे शहरों और कस्बों में भी सर्दी ने लोगों को परेशान कर दिया है। आज से यूपी में मौसम शुष्क रहने का संकेत जारी किया है। विभाग के अनुसार, आगामी दिनों में ठंड और कोहरे का प्रकोप जारी रहने वाला है। मौसम विभाग ने ये भी अनुमान जताया है कि 6 जनवरी को सहारनपुर, मुजफ्फरनगर सहित आसपास के कुछ जिलों में बूंदाबांदी हो सकती है। जौनपुर में गलन व ठिठुरन भरी ठंड लगातार जारी है। सड़कें खेत खलिहान कोहरे की चादरों में ढक गए है। कड़ाके की ठंड से जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया है। न्यूनतम तापमान सुबह 8 बजे तक 8 डिग्री मापी गयी है। विजिबिलिटी बहुत कम है।  

मनसुख मांडविया ने बताया- मोदी सरकार के 10 वर्षों के कार्यकाल में 17.19 करोड़ नौकरियां हुईं पैदा

नई दिल्ली केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडविया द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, देश में रोजगार 2014-15 में 47.15 करोड़ से 36 प्रतिशत बढ़कर 2023-24 में 64.33 करोड़ हो गया है, जो कि एनडीए कार्यकाल के दौरान रोजगार सृजन में सुधार को दर्शाता है। केंद्रीय मंत्री ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि यूपीए के कार्यकाल के दौरान भारत में रोजगार में लगभग 7 प्रतिशत की वृद्धि हुई और 2.9 करोड़ अतिरिक्त नौकरियां पैदा हुईं। वहीं, मोदी सरकार के तहत, 2014-24 के बीच 10 वर्षों में 17.19 करोड़ नौकरियां सृजित हुईं। केंद्रीय मंत्री द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, मोदी सरकार के कार्यकाल के दौरान अलग-अलग क्षेत्रों में रोजगार का सृजन हुआ। उन्होंने बताया कि 2014 से 2023 के बीच कृषि क्षेत्र में रोजगार में 19 प्रतिशत की वृद्धि हुई, वहीं यूपीए के कार्यकाल में 2004 से 2014 के बीच कृषि क्षेत्र में 16 प्रतिशत की गिरावट आई। 2014 से 2023 के बीच मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में रोजगार में 15 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि यूपीए के कार्यकाल में 2004 से 2014 के बीच इस क्षेत्र में केवल 6 प्रतिशत की वृद्धि हुई। 2014-2023 के बीच सर्विस सेक्टर में रोजगार में 36 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि यूपीए के कार्यकाल में 2004 से 2014 के बीच इस क्षेत्र में यह वृद्धि 25 प्रतिशत रही थी। केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया ने कहा कि बेरोजगारी दर 2017-18 में 6 प्रतिशत से घटकर 2023-24 में 3.2 प्रतिशत हो गई है, जबकि रोजगार दर (डब्ल्यूपीआर) 2017-18 में 46.8 प्रतिशत से बढ़कर 2023-24 में 58.2 प्रतिशत हो गई है। केंद्रीय मंत्री के अनुसार, “श्रम बल भागीदारी दर (एलएफपीआर) 2017-18 में 49.8 प्रतिशत से बढ़कर 2023-24 में 60.1 प्रतिशत हो गई है।” इसके अलावा, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) से अक्टूबर में 13.41 लाख सदस्य जुड़े हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, बीते साल अक्टूबर में ईपीएफओ से करीब 7.50 लाख नए सदस्य जुड़े हैं, जिनमें से 58.49 प्रतिशत 18-25 आयु वर्ग के थे। युवा आयु वर्ग की कुल संख्या 5.43 लाख है।  

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