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राष्ट्रपति बनने के पूर्व ही पूरी दुनिया की नजरें उनके बड़े फैसलों पर टिकी, दुनिया में हो सकते हैं ये 3 बड़े बदलाव

वाशिंगटन हाल ही में अमेरिका में हुए राष्ट्रपति चुनाव में डोनाल्ड ट्रंप में ऐतिहासिक जीत हासिल की है और वो अगले साल निवर्तमान राष्ट्रपति जो बाइडन के कार्यकाल के खत्म होते ही 20 जनवरी को राष्ट्रपति पद की शपथ लेंगे। उनके राष्ट्रपति बनने के पूर्व ही पूरी दुनिया की नजरें उनके बड़े फैसलों पर टिकी हुई हैं। युआन (रेमेंबी) की जगह डॉलर का बढ़ेगा प्रभाव राष्ट्रपति चुनाव के बाद ही डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया के सामने यह साफ कर दिया है कि वो किसी भी कीमत पर डालर के प्रभाव को कम नहीं होने देंगे। उन्होंनें हाल ही में एक बयान देते हुए कहा कि अगर कोई देश डॉलर को प्रतिस्थापित करने की कोशिश भी करेगा तो अमेरिका उस देश पर इतना ट्रैफिक लगायेगा कि वह देश आर्थिक संकटों में उलझ कर रह जायेगा। ट्रंप ने ब्रिक्स देशों को भी चेताया है और उनपर 100% टैरिफ लगाने की धमकी दी है अब अगर ऐसा होता है तो निश्चित तौर पर इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दिख सकता है। अब देखना होगा कि ट्रंप अपनी नीतियों से आने वाले सालों में अमेरिका को कहां ले जाते हैं। वहीं चीन की बात करें तो चीन डालर के प्रभाव को कम कर अपनी मुद्रा युआन को हर कीमत पर आगे बढ़ाने में लगी हुई है। चीन इसके लिए दुनिया भर के तमाम देशों के साथ अपनी मुद्रा में व्यापार करने के लिए उन्हें भारी छूट भी दे रही है। पूरी दुनिया में शान्ति स्थापित होने के आसार रूस-यूक्रेन युद्ध को शुरु हुए लगभग 1100 से अधिक दिन हो चुकें हैं। डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद पूरी दुनिया की नजरें रूस और यूक्रेन युद्ध पर एक बार फिर से आकर टिक गई है। चुनाव के पहले से ही ट्रंप का मानना था कि उनके राष्ट्रपति बनने के बाद महज 24 घंटे में वो दोनों देशों के बीच युद्ध जो रुकवा देंगे। साथ ही पश्चिम एशिया में इजराइल और हमास के बीच शांति लाने का भी प्रयास करेंगें। भारत पर आयात कर बढ़ने के आसार डोनाल्ड ट्रंप ने अपने पूर्व कार्यकाल के दौरान भारत पर भारी टैरिफ लगा लगाया था। हार्ले डेविडसन मोटरसाइकिलों पर टैरिफ कम करने के मामले पर भी उन्होंनें किसी प्रकार की कोई कटौती नहीं की थी। जिस कारण इस मोटरसाइकिलों के व्यापार पर काफी असर पड़ा था। वहीं दूसरी ओर बात की जायें तो भारत ब्रिक्स देशों की सूची में भी शामिल है तो अगर ट्रंप इन देशों पर टैक्स लगाते हैं तो इसका असर प्रत्यक्ष तौर पर भारत पर देखने को मिलेगा।

चालू वित्त वर्ष के दौरान 10 दिसंबर तक 88 खनिज ब्लॉकों की सफलतापूर्वक नीलामी की गई: केंद्र सरकार

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने बताया कि चालू वित्त वर्ष के दौरान 10 दिसंबर तक 88 खनिज ब्लॉकों की सफलतापूर्वक नीलामी की गई है। इस अवधि में केंद्र सरकार द्वारा चार चरणों में 24 महत्वपूर्ण खनिज ब्लॉकों की सफल नीलामी पूरी की गई। राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण ट्रस्ट (एनएमईटी) ने 609.54 करोड़ रुपये की स्वीकृत लागत के साथ 120 खनिज अन्वेषण और खरीद परियोजनाओं को मंजूरी दी है। खान मंत्रालय ने बताया कि “एमएमडीआर अधिनियम, 1957 की दूसरी अनुसूची में संशोधन 12 महत्वपूर्ण और रणनीतिक खनिजों की रॉयल्टी दर को सही बनाने के लिए किया गया था।” पिछले सप्ताह, मंत्रालय ने भारत के अपतटीय क्षेत्रों में 13 खनिज ब्लॉकों को प्रदर्शित करने के लिए एक वेबिनार आयोजित किया, जिन्हें देश के अनन्य आर्थिक क्षेत्र (एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक जोन) के भीतर विशाल समुद्री खनिज संपदा का दोहन करने के उद्देश्य से एक ऐतिहासिक पहल के तहत ई-नीलामी के लिए रखा जा रहा है। नीलाम किए जा रहे 13 अपतटीय खनिज ब्लॉकों में केरल तट से 3 कंस्ट्रक्शन सैंड ब्लॉक और गुजरात तट से 3 लाइम मड ब्लॉक शामिल हैं। ग्रेट निकोबार द्वीप समूह से 7 अन्य पॉलीमेटेलिक और नोड्यूल्स और क्रस्ट ब्लॉक भी प्रस्तावित पहली किश्त का हिस्सा हैं। खान मंत्रालय द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, ई-नीलामी मंच के एमएसटीसी द्वारा वॉकथ्रू ने प्रतिभागियों के लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया और बोली जमा करने के चरणों को शोकेस किया। मंत्रालय ने कहा कि 7,500 किलोमीटर से अधिक समुद्र तट और 2.3 मिलियन वर्ग किलोमीटर में फैले ईईजेड के साथ, भारत हिंद महासागर में खनिज अन्वेषण के लिए अद्वितीय अवसर प्रदान करता है, जो आर्थिक विकास और स्थिरता लक्ष्यों का समर्थन करता है। चीन, जापान, नॉर्वे, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, पापुआ न्यू गिनी, नामीबिया अपतटीय खनन करने वाले प्रमुख देशों में से हैं। अपतटीय क्षेत्रों में प्रादेशिक जल, महाद्वीपीय शेल्फ, विशेष आर्थिक क्षेत्र और देश के अन्य समुद्री क्षेत्र शामिल हैं।मंत्रालय को भारत अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेला (आईआईटीएफ), 2024 में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए प्रथम स्थान (स्वर्ण) से भी सम्मानित किया गया।  

साल की वो बड़ी घटनाएं, कुछ घटनाएं ऐसी रही, जिन्होंने पूरी दुनिया को झकझोर दिया, सवाल और विवाद पैदा किए

नई दिल्ली 2024 का साल भारत के लिए कई दर्दनाक, चौंकाने वाली और दिल दहला देने वाली घटनाओं से भरा रहा। यह साल न केवल राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना, बल्कि इसने कई संवेदनशील मुद्दों को भी सामने लाया। कुछ घटनाएं ऐसी रही, जिन्होंने पूरी दुनिया को झकझोर दिया और देश में बड़े पैमाने पर आक्रोश, सवाल और विवाद पैदा किए। आइए जानते हैं कुछ ऐसी प्रमुख घटनाओं के बारे में जिन्होंने इस साल भारतीय समाज को प्रभावित किया। 1. कोलकाता रेप कांड 9 अगस्त को कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में एक दिल दहला देने वाली घटना हुई। यहां पर एक महिला ट्रेनी डॉक्टर के साथ बलात्कार किया गया और उसके बाद बेरहमी से हत्या कर दी गई। इस घटना ने ना केवल पश्चिम बंगाल, बल्कि पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। इस घटना के बाद राज्यभर में व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए। लोग सरकार से सख्त कानून बनाने की मांग करने लगे, ताकि इस तरह के अपराधों पर काबू पाया जा सके। राज्य की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठे और पुलिस की कार्यशैली पर भी सवालिया निशान लगे। यह घटना उस समय सामने आई, जब देशभर में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों को लेकर चर्चा हो रही थी, जिससे इसे और भी संवेदनशील बना दिया। 2. वायनाड भूस्खलन 30 जुलाई को केरल के वायनाड जिले में एक भीषण भूस्खलन हुआ, जिसने कई किलोमीटर के इलाके को तबाह कर दिया। इस त्रासदी में 231 से ज्यादा लोगों की मौत की पुष्टि हुई, जबकि अन्य रिपोर्टों में मरने वालों की संख्या 420 से अधिक बताई गई। यह घटना मानसून के दौरान आई, और इसका असर इतना बड़ा था कि कई गांव पूरी तरह से बर्बाद हो गए। भारी बारिश और भूस्खलन के कारण बचाव कार्य भी मुश्किल हो गया। इस दुर्घटना में लगभग 1200 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ और केरल सरकार ने पीड़ितों के लिए राहत उपायों की घोषणा की। यह घटना जलवायु परिवर्तन के असर को भी उजागर करती है, जिससे पर्यावरणीय संकट और बढ़ते हैं। 3. कर्नाटक का हैरान करने वाला मर्डर 2024 का एक और चौंकाने वाला मामला कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु से सामने आया। यहां एक युवक ने अपनी प्रेमिका महालक्ष्मी की हत्या कर उसके शरीर के 59 टुकड़े किए और उन्हें फ्रिज में रख दिया। आरोपी ने अपने सुसाइड नोट में लिखा कि उसने यह हत्या इसलिए की, क्योंकि वह अपनी प्रेमिका के व्यवहार से परेशान था। यह एक ऐसा अपराध था, जिसने न केवल कर्नाटक बल्कि पूरे देश को हैरान कर दिया। इस घटना के बाद महिला सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दे पर नए सिरे से बहस छिड़ी। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार किया और मामले की जांच शुरू की, लेकिन इस घटना ने रिश्तों और मानसिक तनाव से जुड़ी समस्याओं को सामने लाया।   4. तिरुपति लड्डू विवाद 18 सितंबर को तिरुपति मंदिर के प्रसाद लड्डू में जानवरों की चर्बी मिलाए जाने का विवाद सामने आया। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री और टीडीपी सुप्रीमो चंद्रबाबू नायडू ने आरोप लगाया कि मंदिर के प्रसाद में चर्बी का उपयोग किया जा रहा है। इस आरोप ने तिरुपति मंदिर प्रशासन को कठघरे में खड़ा कर दिया और मंदिर के प्रसाद के पवित्रता को लेकर सवाल उठने लगे। यह विवाद तब बढ़ा जब अन्य धार्मिक नेताओं और भक्तों ने इस आरोप को चुनौती दी। इस मुद्दे ने एक बड़ा धार्मिक और राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया, जो पूरे राज्य में चर्चा का विषय बन गया। 5. रियासी आतंकी हमला 9 जून को जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले के पौनी इलाके में आतंकवादियों ने एक बस पर हमला किया। बस शिव खोरी से कटरा जा रही थी, तभी आतंकवादियों ने उस पर गोलीबारी की। इसके बाद बस खाई में गिर गई, जिससे 9 लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए। इस हमले ने कश्मीर में सुरक्षा की स्थिति को लेकर सवाल उठाए और पूरे राज्य में आतंकवादियों द्वारा किए जा रहे हमलों के खिलाफ आक्रोश पैदा किया। जम्मू-कश्मीर में आतंकवादियों के हमलों की बढ़ती संख्या ने सुरक्षा एजेंसियों को और अधिक सतर्क कर दिया। 6. हाथरस भगदड़ कांड उत्तर प्रदेश के हाथरस में 2 जुलाई को एक धार्मिक सत्संग के बाद भगदड़ मच गई, जिसमें 123 लोगों की मौत हो गई। यह हादसा उस समय हुआ जब हजारों लोग एकत्रित हुए थे और पुलिस एवं प्रशासन की ओर से कोई सुरक्षा व्यवस्था नहीं की गई थी। भगदड़ मचने से लोग दबकर मारे गए, और इस हादसे ने सुरक्षा व्यवस्थाओं के खिलाफ सवाल खड़े कर दिए। धार्मिक आयोजनों में भारी भीड़ के दौरान सुरक्षा इंतजामों की कमी ने प्रशासन की लापरवाही को उजागर किया। घटना के बाद आयोजक को गिरफ्तार किया गया और कई बड़े सवाल प्रशासन की कार्यशैली पर उठे। 7. इतिहास का सबसे गर्म साल 2024 को अब तक का सबसे गर्म साल माना गया है। जलवायु परिवर्तन के कारण वैश्विक तापमान में रिकॉर्ड वृद्धि देखी गई है, और भारत भी इससे अछूता नहीं रहा। देश में जुलाई और अगस्त के महीने में भीषण गर्मी पाई गई, जिसने लोगों के जीवन को कठिन बना दिया। तापमान की वृद्धि के कारण जल संकट और सूखा जैसी समस्याएं सामने आईं। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि यदि जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को रोकने के लिए तत्काल कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में और भी गंभीर परिणाम हो सकते हैं।

जल्द पूरा होगा भारत का सपना, लॉन्च होने वाला है ISRO का SPADEX मिशन… जानिए क्यों है खास ?

चेन्नई भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) वर्ष 2024 शानदार  विदाई देने के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुये अपने दोहरे रिकॉर्ड कायम करने वाले ‘स्पैडेक्स’ अंतरिक्ष मिशन के लिए उलटी गिनती काम आज से शुरू करेगा। इसके तहत पहली अंतरिक्ष डॉकिंग तकनीक पर – स्पैडेक्स उपग्रह से जुड़ी डॉकिंग और अनडॉकिंग श्रृंखला है और दूसरा पीएसएलवी-सी60 प्रक्षेपण यान पर पीओईएम-4 के हिस्से के रूप में 24 वैज्ञानिक प्रयोगों का पीएसएलवी का चौथा चरण शामिल है। पीएसएलवी-सी60 स्पैडेक्स मिशन का प्रक्षेपण 30 दिसंबर को श्रीहरिकोटा के पहले अंतरिक्ष बंदरगाह पर पैड से 2158 बजे निर्धारित है। पीएसएलवी मिशन के लिए उलटी गिनती का काम जो आम तौर पर 24 से 25 घंटे का होता है, कल से शुरू होने की उम्मीद है, जिसके दौरान चार चरण वाले वाहन में प्रणोदक भरने का कार्य किया जाएगा। इसरो ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, प्रक्षेपण के करीब एक कदम और बढ़ाते हुये स्पैडेक्स के प्रक्षेपण यान के साथ दो उपग्रह एकीकृत हो गए है। कहा गया, “एकीकरण मील का पत्थर है, एसडीएससी शार ‘लिफ्टऑफ़’ के एक कदम और करीब स्पैडेक्स उपग्रहों को पीएसएलवी-सी60 के साथ सफलतापूर्वक एकीकृत किया गया है।” बताया गया,“ पीएसएलवी-सी60 पर पहली बार पीआईएफ सुविधा में पीएस 4 (चौथे चरण इंजन) तक पूरी तरह से एकीकृत कर इसे पहले लॉन्च पैड पर ले जाया गया।” इसरो अपने पहले सफल अंतरिक्ष डॉकिंग प्रदर्शन के साथ वर्ष 2024 की शानदार विदाई करने के लिए उत्सुक है, क्योंकि यह अग्रणी मिशन भारत को चौथा देश बनने के लिए प्रेरित करेगा। इससे दुनिया को पता चलेगा कि देश जटिल अंतरिक्ष डॉकिंग तकनीक में महारत हासिल कर रहा है” इसरो के लिए यह एक ऐतिहासिक और अभूतपूर्व मिशन होगा जिसके तहत अंतरिक्ष डॉकिंग प्रदर्शन के लिए दो उपग्रह चेज़र और टारगेट वाले स्पैडेक्स लॉन्च के अलावा, स्पैडेक्स मिशन के साथ पीएसलवी ऑर्बिटल एक्सपेरिमेंट मॉड्यूल-4 (पीओईएम-4) पर अंतरिक्ष में रिकॉर्ड 24 वैज्ञानिक प्रयोग किये जायेंगे।  क्या है यह मिशन? अंतरिक्ष में डॉकिंग तकनीक तब बहुत जरूरी होती है जब साझा मिशन उद्देश्यों को हासिल करने के लिए कई रॉकेट लॉन्च करने की जरूरत होती है। इसरो के अनुसार, स्पेडेक्स मिशन में दो छोटे अंतरिक्ष यान (प्रत्येक लगभग 220 किग्रा) शामिल हैं, जिन्हें पीएसएलवी-सी60 के जरिये स्वतंत्र रूप से और एक साथ, 55 डिग्री झुकाव पर 470 किमी वृत्ताकार कक्षा में प्रक्षेपित किया जाएगा, जिसका स्थानीय समय चक्र लगभग 66 दिन का होगा। अंतरिक्ष डॉकिंग प्रयोग का प्रदर्शन के लिए मिशन इस मिशन के माध्यम से, भारत अंतरिक्ष डॉकिंग तकनीक रखने वाला दुनिया का चौथा देश बनने की ओर अग्रसर है। 9 दिसंबर को पीएसएलवी-सी59/प्रोबास-3 मिशन के सफल प्रक्षेपण के बाद, इसरो के अध्यक्ष और अंतरिक्ष विभाग के सचिव, एस सोमनाथ ने कहा कि दिसंबर में ही पीएसएलवी-सी60 के प्रक्षेपण के साथ एक समान मिशन आने वाला है। सोमनाथ ने कहा, ‘यह (पीएसएलवी-सी60 मिशन) स्पैडेक्स नामक अंतरिक्ष डॉकिंग प्रयोग का प्रदर्शन करने जा रहा है। रॉकेट अब तैयार है और हम प्रक्षेपण की ओर ले जाने वाली गतिविधियों के अंतिम चरण के लिए तैयार हो रहे हैं, संभवतः दिसंबर में ही।’ बताया जाता है कि अंतरिक्ष में डॉकिंग की यह प्रक्रिया सबसे कठिन होती है और इसमें जरा सी चूक बड़ी मुसीबतें पैदा कर सकती है।   गोलाकार कक्षा में लॉन्च किया जाएगा मिशन इसरो के अनुसार, स्पेडेक्स मिशन को दो छोटे अंतरिक्ष यानों (एसडीएक्स01, जो कि चेजर है और एसडीएक्स02, जिसका नाम टारगेट है) के पृथ्वी की निचली वृत्ताकार कक्षा में तेज गति में मिलन, डॉकिंग और अनडॉकिंग को प्रदर्शित किया जाएगा। पीएसएलवी कक्षीय प्रयोग मॉड्यूल (पीओईएम) अंतरिक्ष में विभिन्न प्रौद्योगिकियों का प्रदर्शन करने के लिए 24 प्रयोग करेगा। इनमें 14 प्रयोग भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की विभिन्न प्रयोगशालाओं से और प्रयोग 10 निजी विश्वविद्यालयों तथा ‘स्टार्ट-अप’ से संबंधित हैं। डॉकिंग प्रक्रिया से ही बने हैं अमेरिका और रूस के स्पेस स्टेशन गौरतलब है कि अमेरिका और रूस धरती पर एक-दूसरे के दुश्मन हैं, हालांकि अंतरिक्ष में अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन (आईएसएस) स्थापित करने में दोनों देशों ने साथ काम किया है। जहां नासा के स्पेस शटल ने आईएसएस के एक भाग का निर्माण किया है, वहीं रूस ने भी अपने कई स्पेस शटल्स का इस्तेमाल किया। नासा के पा मौजूदा समय में कोलंबिया, चैलेंजर, डिस्कवरी, अटलांटिस, एंडियेवर जैसे स्पेस शटल हैं, वहीं रूसी स्पेस एजेंसी रॉस्कॉस्मोस ने अपने स्पेस शटल का नाम बुरान रखा है।  

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच युद्ध की स्थिति बनी, तालिबान का काउंटर अटैक, दो चौकियों पर किया कब्जा

काबूल पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच युद्ध की स्थिति बन रही है। पाकिस्तान की ओर से अफगानिस्तान पर लगातार एयर स्ट्राइक हो रही है, जिसकी वजह से दोनों के बीच तनाव काफी बढ़ गया है। इसी बीच तालिबान के 15 हजार लड़ाके पाकिस्तान की ओर बढ़ रहे हैं। तालिबान के लड़ाकों से निपटने के लिए पाकिस्तान की सेना और वायुसेना ने पेशावर और क्वेटा में सेना तैनात कर दिया है। सीमा पर डटे हैं तालिबान के लड़ाके और पाकिस्तान की सेना पाकिस्तानी सेना की कुछ टुकड़ियां अफगान सीमा पर पहुंच गई है। दूसरी ओर अफगान के तालिबान लड़ाके मीर अली सीमा पर पहुंच चुके हैं। शनिवार को अफगानिस्तान की तालिबान सेना ने पाकिस्तान सीमा के नजदीक गोलीबारी की। वहीं, जानकारी सामने आई है कि तालिबान के लड़ाकों ने पाकिस्तान दो चौकियों को तबाह कर दिया है। वहीं, कई सैनिकों के मारे जाने की खबर सामने आई है।   दोनों देश क्यों आए आमने-सामने अल जजीरा के अनुसार, अफगानिस्तान ने पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच की सीमा डूरंड रेखा को खारिज कर दिया है, जो 19वीं सदी में अंग्रेजों द्वारा खींची गई थी। तालिबान इसे सीमा के दोनों ओर पश्तूनों के बीच विभाजनकारी रेखा के रूप में देखता है। हालांकि, तालिबान के प्रवक्ता इनायतुल्ला खोवाराजमी ने कहा, “हम इसे पाकिस्तान का क्षेत्र नहीं मानते हैं। खोस्त और पख्तिया प्रांतों से लगी सीमा पर आज सुबह से झड़प चल रही है। अफगानिस्तान का पाकिस्तान के साथ एक जटिल इतिहास रहा है। अफगानिस्तान में तालिबान को स्थापित करने में पाकिस्तान ने बड़ी भूमिका निभाई थी। हालांकि,अब तालिबान पाकिस्तान को ही आंख दिखा रहा है।

इस साल ई-श्रम पोर्टल पर श्रमिकों का रजिस्ट्रेशन 30 करोड़ के पार , एनसीएस पोर्टल ने 3.89 करोड़ वैकेंसी जुटाई: सरकार

नई दिल्ली सरकार ने शनिवार को बताया कि इस साल ई-श्रम पोर्टल पर श्रमिकों का रजिस्ट्रेशन 30 करोड़ के पार हो गया है, जो असंगठित श्रमिकों के बीच इसके तेजी और व्यापक रूप से अपनाए जाने को दर्शाता है। असंगठित श्रमिकों को विभिन्न सामाजिक क्षेत्र की योजनाओं तक पहुंच प्रदान करने के लिए इस साल 21 अक्टूबर को ई-श्रम पोर्टल लॉन्च किया गया था। रजिस्ट्रेशन की संख्या तेजी से बढ़ रही है और अक्टूबर के दौरान औसतन 60,000 प्रतिदिन रही। अब तक 12 सामाजिक सुरक्षा/कल्याण योजनाओं को ई-श्रम के साथ इंटीग्रेट और मैप किया गया है। इनमें ‘वन नेशन, वन राशन कार्ड’, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विकलांगता पेंशन योजना, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना, राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना और महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम शामिल हैं। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने कहा, “यह एक ऑनगोइंग प्रोसेस है, जिसमें अन्य योजनाओं को भी चरणबद्ध तरीके से ई-श्रम के साथ इंटीग्रेट किया जाएगा। यह प्लेटफॉर्म एजेंसियों को श्रमिकों की एलिजिबिलिटी वेरिफाई करने और राज्य एवं जिला स्तर पर संभावित लाभार्थियों को लक्षित करने के लिए ई-श्रम डेटा का उपयोग करने की सुविधा देता है।” ई-श्रम सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को ई-श्रम पर रजिस्टर लोगों की डिटेल्स शेयर कर रहा है, ताकि श्रमिकों की कल्याणकारी योजनाओं तक पहुंच बन सके। इस बीच, नेशनल करियर सर्विस (एनसीएस) सभी करियर-संबंधी सेवाओं के लिए एक ‘वन स्टॉप प्लेटफॉर्म’ बन गई है, जिसमें निजी और सरकारी क्षेत्रों की नौकरियां, ऑनलाइन और ऑफलाइन जॉब फेयर, कौशल/प्रशिक्षण कार्यक्रम आदि की जानकारी शामिल है। 1 जनवरी से 15 दिसंबर तक एनसीएस पोर्टल पर 1,89,33,219 वैकेंसी पेश की गई, जिससे स्थापना के बाद से जुटाई गई कुल रिक्तियां 3.89 करोड़ हो गईं। मंत्रालय ने बताया कि इस साल, एक्टिव वैकेंसी की संख्या एक दिन में 20 लाख के शिखर को पार कर गई, जबकि एनसीएस पोर्टल पर किसी भी समय औसतन 15 लाख नौकरी के अवसर उपलब्ध हैं। विदेश मंत्रालय के रजिस्टर्ड एजेंटों द्वारा एनसीएस पोर्टल पर कुल 11,451 विदेशी वैकेंसी को पोस्ट किया गया। एनएसई को ‘मायभारत’ प्लेटफॉर्म के साथ इंटीग्रेट किया गया है, ताकि युवाओं, संस्थानों और संगठनों को यूजर फ्रेंडली एक्सपीरियंस दिया जा सके।  

पाकिस्तानी सेना ने कहा- पाकिस्तानी सेना का दावा, 2024 में मार गिराए 925 आतंकवादी

इस्लामाबाद पाकिस्तानी सेना का कहना है कि उसने 2024 में पूरे पाकिस्तान में 59,775 ऑपरेशन किए जिनमें 925 आतंकवादी मारे गए और 383 सुरक्षाकर्मियों की मौत हो गई। यह दावा ऐसे समय में किया गया है कि जब अफगानिस्तान और पाकिस्तान में तनाव चरम पर है और दोनों पक्ष सीमा पर सैनिक झड़पों में उलझे हुए हैं। समाचार के अनुसार, इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (आईएसपीआर) के महानिदेशक अहमद शरीफ चौधरी ने शुक्रवार को एक प्रेस ब्रीफिंग में बताया कि ऑपरेशन के दौरान प्रतिबंधित ‘तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान’ और अन्य आतंकवादी समूहों के 73 ‘हाई-वैल्यू वाले टारगेट’ मारे गए। चौधरी ने कहा, “इस साल पिछले पांच वर्षों के मुकाबले सबसे अधिक संख्या में आतंकवादियों को मार गिराया गया है।” आईएसपीआर प्रमुख ने कहा कि इस साल पाकिस्तान की सेना, कानून प्रवर्तन और खुफिया एजेंसियों और पुलिस की ओर से रोज 179 से अधिक ऑपरेशन किए गए। चौधरी ने कहा कि पाकिस्तानी सेना ने आतंकवाद विरोधी प्रयासों और सीमा सुरक्षा प्रबंधन में महत्वपूर्ण प्रगति की है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी सेना ने तस्करी, ड्रग्स तस्करी, बिजली चोरी और जमाखोरी से निपटने के लिए अपने अभियानों का विस्तार किया है। अधिकारी ने कहा, “सेना और कानून प्रवर्तन एजेंसियां ​​आतंकवादियों से लड़ती हैं, लेकिन राष्ट्र आतंकवाद से लड़ता है।” समाज के सभी वर्ग और राजनीतिक दल इस मोर्चे पर एकजुट हैं। एक ओर जहां पाकिस्तानी सेना यह दावा कर रही है वहीं इस बीच पाकिस्तान की सीमा से लगे पूर्वी अफगानिस्तान के खोस्त और पक्तिका प्रांतों में भीषण झड़पें जारी हैं। सीमा चौकियों पर हुए भीषण संघर्ष में 19 पाकिस्तानी सैनिक और तीन अफगान नागरिकों की मौत हो गई। यह झड़पें मंगलवार रात को पक्तिका प्रांत में पाकिस्तानी एयर स्ट्राइक के बाद हुई हैं। हवाई हमले में महिलाओं और बच्चों सहित 51 लोग मारे गए। इस्लामाबाद और काबुल के बीच दुश्मनी की सबसे बड़ी वजह तहरीक ए तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी या पाकिस्तानी तालिबान) है। टीटीपी का उद्देश्य पाकिस्तानी सशस्त्र बलों और राज्य के खिलाफ आतंकवादी अभियान चलाकर पाकिस्तान सरकार को उखाड़ फेंकना है। मीडिया रिपोट्स् के मुताबिक यह पाकिस्तान की निर्वाचित सरकार को हटाकर इस्लामी कानून की अपनी व्याख्या के आधार पर एक कट्टरवादी शासन की नींव रखना चाहता है। हाल के दिनों में, इस्लामाबाद ने बार-बार अफगान सरकार पर सशस्त्र समूहों, विशेष रूप से टीटीपी को पनाह देने का आरोप लगाया है। हालांकि काबुल इस आरोप को खारिज करता रहा है।

कई क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश, ओले गिरने और तेज हवाओं की भविष्यवाणी, नए साल का मजा होगा ख़राब

नई दिल्ली पूरे उत्तर भारत को सर्दी ने अपने आगोश में ले लिया है। दिल्ली-एनसीआर में कई जगहों पर ओले पड़ने से ठंड में इजाफा देखने को मिला है। वहीं भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अपनी हालिया भविष्यवाणी में वेस्टर्न डिस्टर्बेंस और पूर्वी हवाओं के आपसी प्रभाव के कारण कई क्षेत्रों में हल्की से मध्यम बारिश, ओले गिरने और गरज-चमक के साथ तेज हवाओं की भविष्यवाणी की है। उत्तर-पश्चिम भारत में बारिश और हिमालयी क्षेत्र में बर्फबारी हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में भारी बारिश और बर्फबारी की संभावना जताई गई है। हिमाचल और उत्तराखंड आज भी बारिश को अलर्ट जारी किया गया है। पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में भी व्यापक बारिश-बर्फबारी हो सकती है। वहीं दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा, चंडीगढ़, पंजाब, पश्चिम उत्तर प्रदेश और राजस्थान में भी गरज के साथ बारिश होने की उम्मीद है। इन राज्यों में कोहरे का भी सितम उत्तर भारत के कई हिस्सों में घने से अति घने कोहरे की संभावना है। राजस्थान, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में कोहरा यातायात और दैनिक जीवन को प्रभावित कर सकता है। हिमाचल प्रदेश में 29 से 31 दिसंबर के बीच शीतलहर की चेतावनी जारी की गई है। सर्द हवाओं और तापमान में बदलाव की संभावना उत्तर और पश्चिम भारत में न्यूनतम तापमान अगले दो दिनों में 2 डिग्री तक गिर सकता है। मध्य भारत और पूर्वी भारत के कुछ हिस्सों में तापमान सामान्य से थोड़ा ऊपर रहने की उम्मीद है। पश्चिमी विक्षोभ के कारण हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में शीतलहर और बर्फबारी का सिलसिला जारी रहेगा। प्रायद्वीपीय राज्यों में भी बारिश का दौर तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और ओडिशा में पिछले हफ्ते भारी बारिश ने मौसम को बदल दिया। यह निम्न दबाव क्षेत्र के कारण इन इलाकों में गरज के साथ बारिश हुई। अगले कुछ दिनों में तमिलनाडु, पुदुचेरी और आंध्र प्रदेश में हल्की से मध्यम बारिश जारी रहने की संभावना है। दक्षिण भारत में इस बार मानसून के बाद की बारिश सामान्य से 15% ज्यादा रही है।

भारत और पाकिस्तान के बीच रक्षा क्षेत्र में कंपटीशन बढ़ने की संभावना, पाक चीन से खरीदेगा 40 J-35 स्टील्थ फाइटर जेट्स

इस्लामाबाद पाकिस्तान ने चीन से 40 J-35 फिफ्थ-जेनरेशन स्टील्थ फाइटर जेट्स खरीदने की योजना को मंजूरी दे दी है। इससे भारत और पाकिस्तान के बीच रक्षा क्षेत्र में कंपटीशन बढ़ने की संभावना है। ये विमान अगले दो वर्षों में पाकिस्तान को डिलीवर किए जाएंगे। J-35, चीन के J-31 का एक नया वर्जन है जिसे उसने बेचने के उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए बनाया है। कहा जा रहा है कि इन विमानों की डिलीवरी के साथ पाकिस्तान आसमानी ताकत में भारत से 12 साल आगे निकल जाएगा। हालांकि ये दावा चीनी विशेषज्ञों का है। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट (SCMP) की रिपोर्ट के अनुसार, यह विमान हवा में महारत के साथ और जमीनी व समुद्री लक्ष्यों पर हमला करने के लिए डिजाइन किया गया है। इसमें अगली पीढ़ी के एवियोनिक्स और एडवांस स्टील्थ तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। SCMP का कहना है कि यह विमान पाकिस्तान के पुराने अमेरिकी F-16 और फ्रांसीसी मिराज फाइटर जेट्स को बदलने के लिए तैयार किया गया है। चीन द्वारा किसी मित्र राष्ट्र को फिफ्थ-जेनरेशन फाइटर जेट्स का यह पहला निर्यात होगा। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम दक्षिण एशिया में शक्ति संतुलन को बदल सकता है। पाकिस्तान का रणनीतिक कदम पाकिस्तानी वायुसेना (PAF) ने पहले ही J-35 के लिए चीन में अपने पायलटों को प्रशिक्षण देना शुरू कर दिया है। जनवरी में पाकिस्तानी एयर चीफ मार्शल जहीर अहमद बाबर सिद्दू ने कहा था कि J-35 प्राप्त करने की नींव रखी जा चुकी है। SCMP के मुताबिक, ये विमान पाकिस्तान को भारत पर रणनीतिक बढ़त दिला सकते हैं। PAF के रिटायर्ड अधिकारी जिया उल हक शम्सी का कहना है कि J-35 विमानों की तैनाती से पाकिस्तान को अगले 12-14 वर्षों तक भारत पर बढ़त मिल सकती है। हालांकि, कुछ विशेषज्ञ इस अवधि को 7-8 वर्षों तक सीमित मानते हैं। बता दें कि पाकिस्तान द्वारा सामना किए जा रहे गंभीर आर्थिक संकट के बावजूद नए विमानों की खरीद प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है। बीजिंग में इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है और न ही यहां के सरकारी मीडिया में इस तरह के सौदे का कोई उल्लेख है। जे-35 को मुख्य रूप से चीनी विमानवाहक पोतों के लिए लड़ाकू जेट माना जाता है। इस विमान को पिछले महीने झुहाई शहर में आयोजित वार्षिक एयर शो में प्रदर्शित किया गया था, जिसमें पीएएफ के शीर्ष अधिकारियों ने भाग लिया था। चीन वर्तमान में इस क्षेत्र का एकमात्र देश है जिसने स्टील्थ विमान विकसित किया है। चीन और पाकिस्तान गहरे सैन्य संबंध साझा करते हैं। पाकिस्तान की सेना के तीनों अंगों के आधुनिकीकरण में चीन मदद कर रहा है। चीन ने अपने स्वयं के सशस्त्र बलों का अरबों डॉलर के रक्षा व्यय के साथ आधुनिकीकरण किया है। चीन ने पाकिस्तान को जे-17 थंडर लड़ाकू विमान को संयुक्त रूप से विकसित करने और संचालित करने में मदद की है। भारत की स्वदेशी योजना इसके विपरीत, भारत ने फिफ्थ-जेनरेशन फाइटर जेट्स विकसित करने के लिए अपने स्वदेशी एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) कार्यक्रम पर ध्यान केंद्रित किया है। संसद की रक्षा स्थायी समिति की 2024-25 की रिपोर्ट के अनुसार, AMCA विमानों की डिलीवरी अगले दशक में शुरू होने की उम्मीद है। हालांकि, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) को इस परियोजना में कई तकनीकी और समयसीमा से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। विशेषज्ञों की राय SCMP से बात करते हुए अमेरिकी एयरफोर्स के चीन एयरोस्पेस स्टडीज इंस्टीट्यूट के निदेशक ब्रेंडन मुलवेनी ने कहा, “पाकिस्तान का यह कदम पश्चिमी देशों से दूर और चीन की ओर झुकाव को दर्शाता है।” हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि J-35 कितना असरदार है ये सब चीन द्वारा प्रदान किए गए हथियार, सेंसर और C4ISR (कमांड, कंट्रोल, कम्युनिकेशन, कंप्यूटर, इंटेलिजेंस, सर्विलांस और रिकॉनिसेंस) पर निर्भर करेगा। वहीं, आलोचकों ने पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति और ऐसे एडवांस प्लेटफॉर्म को बनाए रखने की क्षमता पर सवाल उठाए हैं। कर्ज और भुखमरी से जूझ रहा पाकिस्तान पाकिस्तान एक और कर्ज पर कर्ज ले रहा और उसकी बड़ी आबादी भुखमरी से जूझ रही है लेकिन भारत से बराबरी की सनक हावी है। हाल ही में विश्व बैंक की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि पाकिस्तान को कर्ज देने के मामले में चीन शीर्ष पर है। उसने सबसे अधिक करीब 29 अरब डॉलर का कर्ज दिया है। वहीं सऊदी अरब करीब 9.16 अरब डॉलर के कर्ज के साथ दूसरे स्थान पर है। रिपोर्ट के अनुसार हालांकि पाकिस्तान के कुल विदेशी ऋण में चीन की हिस्सेदारी घटी है। यह 2023 में 25 प्रतिशत थी जो अब घटकर 22 प्रतिशत पर आ गई है। जबकि सऊदी अरब की हिस्सेदारी 2023 में दो प्रतिशत से बढ़कर 2024 में सात प्रतिशत पर आ गई। रिपोर्ट के अनुसार हालांकि पाकिस्तान के कुल विदेशी ऋण में चीन की हिस्सेदारी घटी है। यह 2023 में 25 प्रतिशत थी जो अब घटकर 22 प्रतिशत पर आ गई है। जबकि सऊदी अरब की हिस्सेदारी 2023 में दो प्रतिशत से बढ़कर 2024 में सात प्रतिशत पर आ गई।  

पाकिस्तान के हमले और जवाबी कार्रवाई के बाद से पाकिस्तान-अफगानिस्तान के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा

इस्लामाबाद दक्षिण एशिया में एक बार फिर युद्ध की आहट सुनाई दे रही है। पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव चरम पर है और दोनों देश युद्ध के कगार पर खड़े नजर आ रहे हैं। टीटीपी यानि तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान के हमले और पाकिस्तान की जवाबी कार्रवाई के बाद से दोनों देशों के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है। इस बीच तालिबान के 15 हजार लड़ाके पाकिस्तान की सीमा की ओर बढ़ रहे हैं। वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान ने भी पेशावर और क्वेटा से अपनी सेना को सीमा पर तैनात कर दिया है। पिछले दिनों पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में टीटीपी के ठिकानों पर हवाई हमले किए हैं, जिसके जवाब में तालिबान ने पाकिस्तान को चेतावनी दी है। तालिबान के हजारों लड़ाके पाकिस्तानी सीमा पर तैनात हैं और दोनों देशों की सेनाएं आमने-सामने हैं। हालांकि, अभी तक कोई बड़ी झड़प नहीं हुई है, लेकिन दोनों देशों के बीच हालात काफी नाजुक हैं। पाकिस्तानी दूतावास को तलब किया पाकिस्तान की एयरस्ट्राइक के बाद अफगानिस्तान के विदेश मंत्रालय ने काबुल में पाकिस्तानी दूतावास के प्रभारी को तलब किया है। अफगानिस्तान ने इस हमले की कड़ी निंदा की है और इसे दोनों देशों के संबंधों में दरार डालने का प्रयास बताया है। दोनों देशों के बीच क्यों बढ़ तनाव? टीटीपी, पाकिस्तान के लिए एक बड़ा सुरक्षा खतरा बना हुआ है। यह संगठन पाकिस्तान में कई हमले कर चुका है और पाकिस्तानी सेना के जवानों को निशाना बनाता रहा है। वहीं अफगानिस्तान में तालिबान के सत्ता में आने के बाद से ही देश की स्थिति अस्थिर है। देश में आर्थिक संकट है और सुरक्षा चुनौतियां बनी हुई हैं। पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच लंबे समय से सीमा विवाद भी रहा है और अब तक दोनों देश अपनी-अपनी सीमा रेखा को लेकर आज तक स्पष्ट नहीं हैं। क्या होंगे इस संघर्ष के परिणाम? अगर पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच युद्ध छिड़ता है तो इसका असर पूरे क्षेत्र पर पड़ेगा। इस युद्ध से लाखों लोग प्रभावित होंगे और क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ेगी। इसके अलावा, इस युद्ध का असर आतंकवाद पर भी पड़ सकता है। इस संकट का क्या है समाधान? इस संकट से निपटने के लिए दोनों देशों को बातचीत का रास्ता अपनाना होगा। दोनों देशों को एक-दूसरे के साथ मिलकर आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए काम करना होगा। इसके अलावा, दोनों देशों को सीमा विवाद का शांतिपूर्ण समाधान निकालना होगा। पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव बढ़ना क्षेत्र के लिए एक बड़ी चुनौती है। दोनों देशों को इस संकट से निपटने के लिए तत्काल कदम उठाने होंगे। अगर दोनों देश युद्ध के रास्ते पर चलते हैं तो इसका असर पूरे क्षेत्र पर पड़ेगा।

मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने कुकी उग्रवादियों की ओर से की गई अंधाधुंध गोलीबारी की निंदा

इंफाल मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने शनिवार को इंफाल ईस्ट जिले के दो गांवों में कुकी उग्रवादियों की ओर से की गई अंधाधुंध गोलीबारी की निंदा की। उन्होंने कहा ये राज्य की सुख शांति बिगाड़ने का प्रयास है। हिंसा के मद्देनजर शांति और एकता की अपील करते हुए बीरेन सिंह ने कहा कि स्थिति को संभालने के लिए सभी आवश्यक उपाय किए गए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “इंफाल पूर्व के सनसाबी और थमनापोकपी में कुकी आतंकवादियों की ओर से की गई अंधाधुंध गोलीबारी की कड़ी निंदा करता हूं, जिसमें नागरिक और सुरक्षाकर्मी घायल हो गए। निर्दोष जिंदगियों पर यह कायरतापूर्ण और अकारण हमला शांति और सद्भाव पर हमला है।” उन्होंने पोस्ट में आगे लिखा, “प्रभावित क्षेत्रों में पर्याप्त सुरक्षाकर्मी भेजे गए हैं। घायलों को आवश्यक चिकित्सा सहायता मिल रही है, और सरकार ऐसी चुनौतियों का सामना करने के लिए शांति और सद्भाव का आह्वान करती है। ऐसी स्थितियों से निपटते समय केंद्रीय बलों और राज्य पुलिस को उचित समन्वय और समझ होनी चाहिए।” शुक्रवार को सशस्त्र समूहों के साथ गोलीबारी के दौरान एक पुलिस अधिकारी सहित दो लोग घायल हो गए। हिंसा तब भड़की जब पहाड़ों से हथियारबंद लोगों ने जिले के सनसाबी और थमनापोकपी गांवों पर बंदूक और बम से हमला किया। सुरक्षाबलों ने जवाबी कार्रवाई की। सनसाबी गांव में झड़प के दौरान दो लोग घायल हो गए। वहीं 37 वर्षीय पुलिस अधिकारी के हरिदास को बाएं कंधे में गोली लगी, जिसके बाद उन्हें जवाहरलाल नेहरू आयुर्विज्ञान संस्थान ले जाया गया। हमले के कारण अफरा-तफरी मच गई और स्थानीय लोग अपनी जान बचाने के लिए भाग गए। मणिपुर उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश सिद्धार्थ मृदुल ने बीते मंगलवार को कहा, “जब भी मणिपुर में स्थिति बेहतर होती दिखती है, तो नई हिंसा भड़क जाती है। मुझे लगता है कि कुछ ताकतें बाहरी हैं, आंतरिक नहीं। अगर ये ताकतें बाहरी भी हैं तो स्थानीय स्तर पर उनके सहयोगी हैं, जो यह सुनिश्चित करते हैं कि मणिपुर को जलाने के एजेंडे को सख्ती से आगे बढ़ाया जाए।”  

भारी बर्फबारी के चलते पीर पंजाल सुरंग और श्रीनगर शहर के बीच जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर सैकड़ों वाहन फंसे

श्रीनगर भारी बर्फबारी के कारण घाटी में जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। पीर पंजाल सुरंग और श्रीनगर शहर के बीच जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर सैकड़ों वाहन फंसे रहे। भारी बर्फबारी शुरू हो गई, जो शनिवार सुबह तक जारी रही। सड़क पर अत्यधिक फिसलन से पीर पंजाल सुरंग और श्रीनगर शहर के बीच सैकड़ों वाहन अटके पड़े हैं। भारी बर्फबारी और शून्य से नीचे के तापमान के कारण राष्ट्रीय राजमार्ग पर बर्फ की मोटी चादर जम गई। जिसकी वजह से हाइवे पर गाड़ियां कई घंटों तक सुरंग के अंदर फंसी रहीं। स्थानीय अधिकारी सड़क पर फंसी हुई गाड़ियों को निकालने के लिए काफी प्रयास कर रहे थे, लेकिन बर्फबारी के कारण वाहन लगातार कई घंटों तक फंसे रहे। कुलगाम और अनंतनाग जिलों में वरिष्ठ नागरिक और पुलिस अधिकारी बर्फ हटाने वाली मशीनों के साथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर फंसे वाहनों को निकालने के लिए पहुंचे। शनिवार सुबह तक यातायात पूरी तरह से बहाल नहीं हो सका। श्रीनगर शहर और अन्य जिलों जैसे बडगाम, गांदरबल, बांदीपोरा, बारामुल्ला, कुपवाड़ा, पुलवामा, अनंतनाग, कुलगाम और शोपियां में भारी बर्फबारी के कारण सभी सड़कें बंद हो गईं। बर्फ हटाने वाली मशीनों को सुबह भेजा गया ताकि यातायात बहाल किया जा सके। श्रीनगर शहर के कुछ हिस्सों को छोड़कर बिजली आपूर्ति पूरी तरह से बंद हो गई। भारी बर्फबारी के कारण बिजली के खंभे उखड़ गए, ट्रांसमिशन लाइनें टूट गईं और बिजली ग्रिड बाधित हो गए। हालांकि इस बर्फबारी से स्थानीय लोग काफी खुश हैं। क्योंकि लंबे समय से सूखा चल रहा था और लोग अब अच्छी फसल की उम्मीद कर रहे है। पिछले चार महीनों में बारिश न होने के कारण घाटी के अधिकांश झरने और कुएं सूख गए थे। श्रीनगर शहर और आसपास के इलाकों में यह मौसम की पहली बर्फबारी थी। बर्फबारी से घाटी में छुट्टियां मना रहे पर्यटकों के चेहरे भी खिल उठे। गुलमर्ग, पहलगाम, सोनमर्ग और अन्य पर्यटन स्थलों में करीब 10 इंच ताजा बर्फबारी हुई है। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों में और बर्फबारी और बारिश का अनुमान जताया है।  

उत्तरकाशी के गंगोत्री और यमुनोत्री धाम में जमी बर्फ, बारिश का अलर्ट जारी: मौसम विभाग

उत्तरकाशी उत्तरकाशी के गंगोत्री और यमुनोत्री धाम में लगभग एक फीट बर्फ जमा होने से निचले इलाकों में भी ठंड बढ़ गई है। बर्फबारी के कारण प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। मौसम विभाग ने उत्तरकाशी जिले में भारी बर्फबारी और बारिश का अलर्ट जारी किया है। विभाग के अनुसार, जनपद के 2200 मीटर की ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मौसम में तीव्र परिवर्तन होने की संभावना है। इन क्षेत्रों में भारी बर्फबारी और बारिश हो सकती है, जिससे सर्दी और बढ़ सकती है और यातायात प्रभावित हो सकता है। इस अलर्ट के मद्देनजर प्रशासन ने संबंधित क्षेत्रों में सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। यात्रियों और स्थानीय निवासियों को खराब मौसम के कारण सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है। सड़क मार्गों पर बर्फ जमने और दुर्घटनाओं के खतरे को देखते हुए यातायात व्यवस्था को लेकर भी अतिरिक्त इंतजाम किए जा रहे हैं। यह अलर्ट विशेष रूप से गंगोत्री, यमुनोत्री और अन्य ऊंचाई वाले क्षेत्रों के लिए है, जहां बर्फबारी और बारिश की अधिक संभावना है। उत्तरकाशी जनपद के मुख्यालय सहित अन्य क्षेत्रों में जबरदस्त बारिश हुई है, जिससे ठंड में और भी वृद्धि हो गई है। भारी बारिश के कारण तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। इस मौसम में ठंड से बचने के लिए लोग अब अलाव का सहारा ले रहे हैं। जिला प्रशासन ने आपातकालीन स्थिति से निपटने के आदेश दिए हैं। आदेश के तहत स्वास्थ्य विभाग, पुलिस, स्थानीय प्रशासन, और आपदा प्रबंधन टीमों को अलर्ट रहने को कहा गया है। साथ ही राजस्व विभाग, ग्राम विकास अधिकारी (वीडीओ), ग्राम प्रधान और अन्य संबंधित अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्र में रहकर निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं। इन अधिकारियों को आपातकालीन स्थिति में त्वरित कार्रवाई करने और स्थानीय समुदाय को किसी भी प्रकार के संकट से बचाने के लिए सतर्क रहने को कहा गया है। उत्तरकाशी में बढ़ती ठंड और खराब मौसम को देखते हुए जिला प्रशासन ने खासतौर पर बच्चों और बुजुर्गों को बाहर जाने से मना किया है। केवल अति आवश्यक काम होने पर ही बाहर जाने की अनुमति दी गई है, ताकि ठंड और बर्फबारी के कारण होने वाली बीमारियों से बचाव किया जा सके। वहीं लोक निर्माण विभाग को भी विशेष निर्देश दिए गए हैं कि वे बर्फबारी वाले क्षेत्रों में अपनी निगरानी बढ़ाएं और सड़कों पर फिसलन को कम करने के लिए जरूरी उपाय करें।  

एनएमडीएफसी अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में है, 85 प्रतिशत महिलाएं शामिल

नई दिल्ली राष्ट्रीय अल्पसंख्यक विकास एवं वित्त निगम (एनएमडीएफसी) ने अपनी स्थापना के बाद से 24.84 लाख से अधिक लाभार्थियों को 9,228.19 करोड़ रुपये से अधिक वितरित किए हैं, जिनमें से 85 प्रतिशत से अधिक लाभार्थी महिलाएं हैं। यह जानकारी सरकार ने शनिवार को दी। एनएमडीएफसी अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में है। इसकी स्थापना अल्पसंख्यक समुदायों के बीच पिछड़े वर्गों के सामाजिक-आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए की गई है। वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान एनएमडीएफसी ने 1.84 लाख से अधिक लाभार्थियों को 765.45 करोड़ रुपये का रियायती ऋण जारी किया। एनएमडीएफसी ने आवेदकों, एससीए और एनएमडीएफसी के बीच ऋण लेखा प्रक्रियाओं को डिजिटल बनाने के लिए मिलन (एनएमडीएफसी के लिए अल्पसंख्यक ऋण लेखा सॉफ्टवेयर) ऐप लॉन्च किया है, जिसमें एनएमडीएफसी के एमआईएस पोर्टल का इंटीग्रेशन भी शामिल है। इस ऐप पर 14.57 लाख लाभार्थियों का डेटा उपलब्ध है। मंत्रालय ने कहा कि मिलन मोबाइल ऐप का एंड्रॉइड और आईओएस एडिशन भी लॉन्च किया गया है। हाल ही में, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन बैंक और पंजाब ग्रामीण बैंक ने रिफाइनेंस मोड पर एनएमडीएफसी योजनाओं के कार्यान्वयन के लिए समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए। अपनी 100-दिवसीय कार्य योजना के तहत, मंत्रालय ने जुलाई में ‘लोक संवर्धन पर्व’ का आयोजन किया, जिसमें पूरे भारत के अल्पसंख्यक कारीगरों को एक साथ लाया गया। इस मंच ने कारीगरों को अपनी स्वदेशी कला, शिल्प और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करने का अवसर प्रदान किया। पर्व में विभिन्न अल्पसंख्यक समुदायों से संबंधित 162 कारीगरों द्वारा बनाए गए विभिन्न राज्यों के 70 से अधिक हस्तशिल्प और हथकरघा उत्पादों का प्रदर्शन किया गया। इसके अलावा, तीर्थयात्रा के अनुभव को बढ़ाने और सूचना प्रौद्योगिकी का लाभ उठाने के लिए ‘हज सुविधा ऐप’ लॉन्च किया गया। इस वर्ष 9,000 से अधिक शिकायतों और 2,000 से अधिक एसओएस मामलों का समाधान किया गया। इस वर्ष अब तक की सबसे अधिक संख्या 4,557 महिला तीर्थयात्रियों की रही। ‘जियो पारसी’ पारसी समुदाय की जनसंख्या में गिरावट को रोकने के लिए एक और योजना है। यह योजना 2013-14 में शुरू की गई थी। मंत्रालय ने चिकित्सा घटक के तहत वित्तीय सहायता चाहने वाले पारसी जोड़ों के लिए एक पोर्टल भी शुरू किया है। मंत्रालय द्वारा अगस्त में लोकसभा में वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024 पेश किया गया। इसके बाद, विधेयक को संसद की संयुक्त समिति (जेपीसी) के पास भेज दिया गया है।  

कल से शुरू होगी इसरो के अनूठे रिकॉर्ड कायम करने वाले मिशन ‘स्पैडेक्स’ की उलटी गिनती

चेन्नई भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) वर्ष 2024 शानदाई विदाई देने के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुये अपने दोहरे रिकॉर्ड कायम करने वाले ‘स्पैडेक्स’ अंतरिक्ष मिशन के लिए उलटी गिनती काम कल से शुरू करेगा। इसके तहत पहली अंतरिक्ष डॉकिंग तकनीक पर – स्पैडेक्स उपग्रह से जुड़ी डॉकिंग और अनडॉकिंग श्रृंखला है और दूसरा पीएसएलवी-सी60 प्रक्षेपण यान पर पीओईएम-4 के हिस्से के रूप में 24 वैज्ञानिक प्रयोगों का पीएसएलवी का चौथा चरण शामिल है। पीएसएलवी-सी60 स्पैडेक्स मिशन का प्रक्षेपण 30 दिसंबर को श्रीहरिकोटा के पहले अंतरिक्ष बंदरगाह पर पैड से 2158 बजे निर्धारित है। पीएसएलवी मिशन के लिए उलटी गिनती का काम जो आम तौर पर 24 से 25 घंटे का होता है, कल से शुरू होने की उम्मीद है, जिसके दौरान चार चरण वाले वाहन में प्रणोदक भरने का कार्य किया जाएगा। इसरो ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, प्रक्षेपण के करीब एक कदम और बढ़ाते हुये स्पैडेक्स के प्रक्षेपण यान के साथ दो उपग्रह एकीकृत हो गए है। कहा गया, “एकीकरण मील का पत्थर है, एसडीएससी शार ‘लिफ्टऑफ़’ के एक कदम और करीब स्पैडेक्स उपग्रहों को पीएसएलवी-सी60 के साथ सफलतापूर्वक एकीकृत किया गया है।” बताया गया,“ पीएसएलवी-सी60 पर पहली बार पीआईएफ सुविधा में पीएस 4 (चौथे चरण इंजन) तक पूरी तरह से एकीकृत कर इसे पहले लॉन्च पैड पर ले जाया गया।” इसरो अपने पहले सफल अंतरिक्ष डॉकिंग प्रदर्शन के साथ वर्ष 2024 की शानदार विदाई करने के लिए उत्सुक है, क्योंकि यह अग्रणी मिशन भारत को चौथा देश बनने के लिए प्रेरित करेगा। इससे दुनिया को पता चलेगा कि देश जटिल अंतरिक्ष डॉकिंग तकनीक में महारत हासिल कर रहा है” इसरो के लिए यह एक ऐतिहासिक और अभूतपूर्व मिशन होगा जिसके तहत अंतरिक्ष डॉकिंग प्रदर्शन के लिए दो उपग्रह चेज़र और टारगेट वाले स्पैडेक्स लॉन्च के अलावा, स्पैडेक्स मिशन के साथ पीएसलवी ऑर्बिटल एक्सपेरिमेंट मॉड्यूल-4 (पीओईएम-4) पर अंतरिक्ष में रिकॉर्ड 24 वैज्ञानिक प्रयोग किये जायेंगे।  

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