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शीतकालीन सत्र में लोकसभा की उत्पादकता 58 प्रतिशत रही, जो कि पहले के सत्रों की तुलना में काफी कम

नई दिल्ली  संसद का शीतकालीन सत्र शुक्रवार को हंगामे के बीच खत्म हो गया। इस सत्र में संविधान पर अच्छी बहस हुई। साथ ही दो अहम बिल भी पेश किए गए। एक बिल एक साथ चुनाव कराने के बारे में था। लेकिन बीआर आंबेडकर के कथित अपमान को लेकर सियासी तकरार बढ़ गई। इस वजह से सत्र का अंत कड़वाहट भरा रहा।सत्र के आखिरी दिन सत्ताधारी NDA और विपक्षी दलों के बीच तनाव बना रहा। गुरुवार को हुई तीखी बहस के बाद दोनों पक्षों में कटुता बढ़ गई थी। इसके चलते लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को सदन की कार्यवाही तीन मिनट के भीतर स्थगित करनी पड़ी। सत्र के अंत में होने वाली सारांश चर्चा भी नहीं हो पाई। राज्यसभा में भी स्थिति कुछ ख़ास बेहतर नहीं थी। गृह मंत्री अमित शाह के आंबेडकर के कथित अपमान पर विपक्षी दल लगातार विरोध कर रहे थे। हालांकि, उन्होंने सभापति जगदीप धनखड़ को अपनी विदाई भाषण पढ़ने की अनुमति दे दी। इसके बाद राज्यसभा को भी अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया। लोकसभा में प्रोडक्टिविटी 58 प्रतिशत लोकसभा सचिवालय के अनुसार,सदन की उत्पादकता(Productivity) लगभग 58 प्रतिशत रही। यह उन दिनों से काफी कम है जब यह 100 प्रतिशत या उससे भी ज्यादा होती थी। अपनी समापन टिप्पणी में,जगदीप धनखड़ ने सभी दलों से राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठने और संसदीय मर्यादा बहाल करने का आह्वान किया। विपक्ष के इस आरोप के बीच कि वे अक्सर पक्षपातपूर्ण रहे हैं,उन्होंने संतुलित रुख अपनाया। धनखड़ ने कहा कि 25 नवंबर से शुरू हुए शीतकालीन सत्र में सदन ने प्रभावी ढंग से केवल 43 घंटे और 27 मिनट काम किया। इस सत्र की उत्पादकता मात्र 40.03 प्रतिशत रही। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष, खासकर कांग्रेस पर दोष मढ़ा। उन्होंने कहा कि पहले से हुए समझौते के बावजूद विपक्ष के लगातार विरोध प्रदर्शन के कारण ही उत्पादकता कम रही। संसद को सुचारू रूप से चलाने पर सहमति बनी थी। रिजिजू ने कहा कि सभी दलों को इस चिंताजनक स्थिति पर विचार करना चाहिए। संसदीय कार्य मंत्री होने के नाते वे विपक्षी नेताओं से बातचीत जारी रखेंगे। लोकसभा में पांच बिल पेश,राज्यसभा में तीन इस सत्र के दौरान लोकसभा में पांच विधेयक पेश किए गए,जिनमें से चार पारित हुए। राज्यसभा ने तीन विधेयक पारित किए। 26 नवंबर को संविधान दिवस के उपलक्ष्य में ‘संविधान सदन’ में एक विशेष सत्र भी आयोजित किया गया। यह सत्र भारतीय संविधान की महत्ता को दर्शाता है। इस सत्र में संविधान की उपलब्धियों और चुनौतियों पर चर्चा हुई। इस सत्र में एक साथ चुनाव कराने जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी चर्चा हुई। इस बिल का उद्देश्य लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराना है। इससे समय और संसाधनों की बचत होगी। हालांकि, इस बिल पर सभी दलों की राय एक जैसी नहीं है। कुछ दलों ने इसका समर्थन किया, जबकि कुछ ने इसका विरोध किया। संसद में बवाल, 84 करोड़ स्वाहा 20 दिन संसद के शीतकालीन सत्र में कामकाज ना होने का अनुमानित नुकसान 84 करोड़ है। यह वो पैसे हैं,जो हमारे आपके टैक्स से जुटाए जाते हैं। संसद की कार्यवाही पर प्रति मिनट करीब 2.50 लाख रुपये खर्च होते हैं। संसद के सत्रों में हंगामा, विरोध प्रदर्शन और कामकाज में बाधाएं आती रहती हैं। संसद के हालिया सत्र में काफी कम कामकाज हुआ है। लोकसभा में सिर्फ 61 घंटे 55 मिनट और राज्यसभा में 43 घंटे 39 मिनट ही काम हुआ। यह बहुत कम समय है और इसका मतलब है कि संसद में जनता के महत्वपूर्ण मुद्दों पर पर्याप्त चर्चा नहीं हो पाई।

खैबर पख्तूनख्वा में पाक सुरक्षा बलों ने चलाया अभियान, आतंकियों ने किया हमला 16 पाकिस्तानी सैनिकों की मौत

इस्लामाबाद पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा के अपर जिले में एक बड़ा हमला हुआ है। मकीन क्षेत्र में महीनों में हुआ यह सबसे बड़ा हमला है। इसमें पाकिस्तान के 16 सैनिकों की मौत हो गई और 8 घायल हो गए। द खोरासान डायरी की रिपोर्ट के मुताबिक एक पुलिस अधिकारी ने कहा, ‘लिटा सर क्षेत्र में एक सुरक्षा चौकी पर देर रात हमला हुआ।’ पाकिस्तान में अफगानिस्तान से लगती सीमा पर लगातार आतंकी हमले देखे जा रहे हैं। यहां तहरीक ए तालिबान पाकिस्तान के आतंकी आए दिन हमला करते रहते हैं। इससे पहले 5 अक्तूबर को कई आतंकी हमलों में 16 पाकिस्तानी सैनिकों की मौत हो गई थी। खुर्रम जिले में हमले में सात सैनिक मारे गए थे, वहीं दो लोग घायल हुए थे। विश्व स्तर पर नामित आतंकवादी संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) ने कथित तौर पर हिंसा की जिम्मेदारी ली थी। माना जा रहा है कि शनिवार को हुए हमले में भी टीटीपी आतंकियों का हाथ है। टीटीपी का हमला पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव का कारण है। टीटीपी पर हमलों का आरोप आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक खैबर पख्तूनख्वा में टीटीपी के नेतृत्व वाले तीव्र हमलों और बलूचिस्तान प्रांत में अलगाववादी जातीय बलूच विद्रोहियों के परिणामस्वरूण अकेले इसी साल सैकड़ों सुरक्षाकर्मियों की जान चली गई। पाकिस्तान का आरोप है कि टीटीपी आतंकियों को अफगानिस्तान की तालिबान सरकार की ओर से समर्थन मिलता है। हालांकि तालिबान कहता रहा है कि वह अपनी जमीन का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों के लिए नहीं होने दे रहा है।

Bangladesh में फिर हिंदू मंदिरों को निशाना बना रहे उपद्रवी, 8 मूर्तियों को तोड़ा

दिनाजपुर बांग्लादेश के मैमनसिंह और दिनाजपुर में बदमाशों ने दो दिनों में तीन हिंदू मंदिरों में आठ मूर्तियों को तोड़ दिया. एक मीडिया रिपोर्ट में यह दावा किया गया. पुलिस ने एक मंदिर में तोड़फोड़ के सिलसिले में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है. बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के खिलाफ घटनाओं की श्रृंखला में यह नई घटना है. पहले दो मंदिरों की तीन मूर्तियों को तोड़ा मैमनसिंह के हलुआघाट उप-जिले में  शुक्रवार की सुबह दो मंदिरों की तीन मूर्तियों को तोड़ दिया गया. मंदिर के सूत्रों और स्थानीय लोगों के हवाले से हलुआघाट पुलिस स्टेशन के प्रभारी अधिकारी (ओसी) अबुल खैर ने कहा कि बदमाशों ने शुक्रवार की सुबह हलुआघाट के शाकुई संघ में बोंडेरपारा मंदिर की दो मूर्तियों को तोड़ दिया. उन्होंने कहा कि इस घटना में अभी तक कोई मामला दर्ज नहीं किया गया है और कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है. एक आरोपी जेल भेजा गया एक अन्य घटना में अपराधियों ने गुरुवार की सुबह हलुआघाट के बीलडोरा संघ में पोलाशकंडा काली मंदिर में एक मूर्ति को तोड़ दिया. पुलिस ने शुक्रवार को पोलाशकांडा गांव के 27 वर्षीय एक व्यक्ति को घटना में शामिल होने के आरोप में गिरफ्तार किया. पूछताछ के दौरान, अलल उद्दीन नामक व्यक्ति ने अपराध कबूल कर लिया. उन्होंने बताया कि उसे मैमनसिंह की अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया. इससे पहले  पोलाशकांडा काली मंदिर समिति के अध्यक्ष सुवाश चंद्र सरकार ने अज्ञात व्यक्तियों पर आरोप लगाते हुए मामला दर्ज कराया था. दिनाजपुर के बीरगंज उप-जिले में, मंगलवार को झारबारी शासन काली मंदिर में पांच मूर्तियों को क्षतिग्रस्त कर दिया गया. रिपोर्ट के अनुसार, यह घटना गुरुवार को सामने आई. मंदिर समिति के अध्यक्ष जनार्दन रॉय ने कहा, ‘हमने यहां ऐसा गलत काम कभी नहीं देखा.’ प्रभारी अधिकारी अब्दुल गफूर ने कहा कि वे घटना की जांच कर रहे हैं. लगातार हो रहे हमले पिछले सप्ताह, कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने उत्तरी बांग्लादेश के सुनामगंज जिले में एक हिंदू मंदिर और समुदाय के घरों और दुकानों में तोड़फोड़ और क्षति पहुंचाने के आरोप में चार लोगों को गिरफ्तार किया था. इससे पहले 29 नवंबर को बांग्लादेश के चटगांव में नारे लगाने वाली भीड़ ने तीन हिंदू मंदिरों में तोड़फोड़ की थी, जहां इस्कॉन के एक पूर्व सदस्य पर देशद्रोह के आरोप लगाए जाने के बाद से विरोध प्रदर्शन और हिंसा देखी गई. 5 अगस्त को छात्रों के नेतृत्व वाले विरोध प्रदर्शन के बाद अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना के देश छोड़कर भाग जाने के बाद मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के सत्ता में आने के बाद भारत और बांग्लादेश के बीच संबंध तनावपूर्ण हो गए थे. हाल के हफ्तों में हिंदुओं पर लगातार हमले हुए. हिंदू विरोधी घटनाओं की बढ़ती संख्या ने भारत और बांग्लादेश के बीच कूटनीतिक विवाद को जन्म दिया है. भारत सरकार ने चिंता जाहिर की बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा के संबंध में लोकसभा में एक प्रश्न के उत्तर में विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने सदन को बताया, ‘8 दिसंबर 2024 तक बांग्लादेश में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा के 2,200 मामले और अक्टूबर 2024 तक 112 मामले दर्ज किए गए. अन्य पड़ोसी देशों (पाकिस्तान और बांग्लादेश को छोड़कर) में हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा का कोई मामला नहीं है. सरकार ने इन घटनाओं को गंभीरता से लिया है और बांग्लादेश सरकार के साथ अपनी चिंताओं को शेयर किया है. भारत को उम्मीद है कि बांग्लादेश सरकार हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगी.’  

देश की 2032 तक रिन्यूएबल एनर्जी भंडारण की क्षमता 60 गीगावाट तक हो जाएगी: रिपोर्ट

नई दिल्ली सेंटर फॉर फाइनेंशियल अकाउंटेबिलिटी की एक रिपोर्ट के अनुसार, रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट में प्रोजेक्ट फाइनेंस फ्लो को लेकर 2022 की तुलना में 2023 में 63 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो 30,255 करोड़ रुपये (3.66 बिलियन डॉलर) के स्तर को छू गई है। प्रोजेक्ट फाइनेंस लेंडिंग में वृद्धि ‘2024 में कोयला बनाम नवीकरणीय ऊर्जा निवेश’ शीर्षक वाली रिपोर्ट में कहा गया है कि रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट में प्रोजेक्ट फाइनेंस लेंडिंग में वृद्धि हुई है, लेकिन लगातार तीसरे वर्ष नए कोयला बिजली प्रोजेक्ट को कोई फाइनेंस लेंडिंग नहीं दी गई। हालांकि, कोयला बिजली और खनन कंपनियों की कॉर्पोरेट फाइनेंस लेंडिंग कुल 3 बिलियन डॉलर थी। रिन्यूएबल एनर्जी सौदों में सोलर पावर प्रोजेक्ट का रहा दबदबा 2023 में रिन्यूएबल एनर्जी सौदों में सोलर पावर प्रोजेक्ट का दबदबा रहा, जो कुल सौदों का 49 प्रतिशत था, इसके बाद हाइब्रिड प्रोजेक्ट का 46 प्रतिशत और विंड एनर्जी का हिस्सा 6 प्रतिशत था। सेंटर फॉर फाइनेंशियल अकाउंटेबिलिटी के कार्यकारी निदेशक जो अथियाली ने कहा, “हमने सोलर और विंड पावर प्रोजेक्ट के लिए प्रोजेक्ट फाइनेंस में लगातार वृद्धि देखी है। यह दर्शाता है कि रिन्यूएबल पावर प्रोजेक्ट में निवेशकों का विश्वास है।” 2023 में भारत में कोयला-लिंक्ड कंपनी के फाइनेंस का 96 प्रतिशत से अधिक अंडरराइटिंग के जरिए कमर्शियल बैंक से था, जबकि बचे 4 प्रतिशत का योगदान लोन से था। अमेरिका स्थित बैंकों ने कोयला-लिंक्ड कंपनियों को कॉर्पोरेट फाइनेंसिंग की सुविधा उपलब्ध कराई, जो कुल का 65 प्रतिशत योगदान देता है। कमर्शियल बैंकों ने रिन्यूएबल एनर्जी लोन का 68 प्रतिशत प्रदान किया रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत ने 2023 में 188 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन कैपेसिटी हासिल कर ली है। रिपोर्ट में कहा गया है कि प्राइमरी फाइनेंसिंग ने प्रोजेक्ट सौदों का 77 प्रतिशत हिस्सा लिया जबकि रिफाइनेंसिंग ने बचे 23 प्रतिशत का योगदान दिया। कमर्शियल बैंकों ने रिन्यूएबल एनर्जी लोन का 68 प्रतिशत प्रदान किया, जो कुल 20,625 करोड़ रुपये (2,497 मिलियन डॉलर) था। राज्यवार आंकड़े बताते हैं कि गुजरात को फाइनेंस कैपेसिटी का 25 प्रतिशत प्राप्त हुआ, जो 9,857 करोड़ रुपये (1,193 मिलियन डॉलर) है, उसके बाद कर्नाटक को 4,593 करोड़ रुपये (556 मिलियन डॉलर) मिले।केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने इस सप्ताह की शुरुआत में कहा था कि भारत ने चालू वित्त वर्ष में अप्रैल-नवंबर के दौरान लगभग 15 गीगावाट रिन्यूएबल एनर्जी कैपेसिटी जोड़ी है, जो पिछले वर्ष इसी अवधि के दौरान जोड़े गए 7.54 गीगावाट से लगभग दोगुना है। पिछले वर्ष की तुलना में 14 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि यहां सीआईआई अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा सम्मेलन और प्रदर्शनी (आईईसीई) को संबोधित करते हुए, अक्षय ऊर्जा मंत्री ने आगे कहा कि गैर-जीवाश्म ईंधन ऊर्जा क्षेत्र में भारत की कुल स्थापित क्षमता 214 गीगावाट तक पहुंच गई है, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 14 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि को दर्शाता है। इसके अलावा, उन्होंने बताया कि अकेले नवंबर 2024 में 2.3 गीगावाट की नई कैपेसिटी जोड़ी गई, जो नवंबर 2023 में जोड़ी गई 566 मेगावाट की तुलना में चार गुना वृद्धि को दर्शाती है। केंद्रीय मंत्री जोशी ने 2030 तक 500 गीगावाट गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित क्षमता हासिल करने की सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। 2032 से 5 प्रतिशत की बढ़ातरी देश का ऊर्जा भंडारण परिदृश्य तेजी से विकसित हो रहा है. भंडारण समाधानों को शामिल करने वाली अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं का अनुपात काफी बढ़ रहा है, जो वित्त वर्ष 20 में 5 प्रतिशत से बढ़कर वित्त वर्ष 24 में 23 प्रतिशत हो गया है. वित्त वर्ष 32 तक, बिजली उत्पादन में परिवर्तनीय अक्षय ऊर्जा (VRE) की हिस्सेदारी तीन गुना होने की उम्मीद है, जिससे ग्रिड की स्थिरता के बारे में चिंता बढ़ रही है. VRE की वृद्धि ग्रिड को अस्थिर कर सकती है जब तक कि बिजली प्रणाली में महत्वपूर्ण परिवर्तन न हो. खास कर ऊर्जा भंडारण प्रणालियों (ESS) के एकीकरण के साथ, जो इस प्रबंधन में महत्वपूर्ण हैं. असल चुनौती VRE के उत्पादन और बिजली की अधिकतम मांग के बीच चली आ रही मिसमैच की वजह से है. यह मिसमैच अक्सर ग्रिड अस्थिरता, पीक प्रोड्क्शन घंटों के दौरान सरप्लस एनर्जी और गैर-सौर अवधि के दौरान फॉसिल फ्युल पर निरंतर निर्भरता की ओर ले जाता है. ESS उच्च उत्पादन समय के दौरान एक्सट्रा रिन्यूएबल एनर्जी को जमा करके और मांग के चरम पर इसे जारी करके समाधान प्रदान करता है, जिससे ग्रिड स्थिर होता है और दिन के दौरान आपूर्ति और मांग में अंतर (Diurnal Duck Curve) जैसी समस्याओं को कम करता है. BESS क्षमता 375 गुना बढ़ जाएगी बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS) और पंप स्टोरेज प्रोजेक्ट्स (PSP) के ऊर्जा भंडारण बाजार पर हावी होने की उम्मीद है, विशेष रूप से BESS अपने स्थानिक लचीलेपन, त्वरित प्रतिक्रिया समय और टेक्नोलॉजी में सुधार के कारण प्रमुख टेक्नोलॉजी के रूप में उभर रहा है, जो लागत को और कम कर रहा है. वित्त वर्ष 32 तक, BESS क्षमता 375 गुना बढ़कर 42 GW हो जाने की उम्मीद है, जबकि PSP क्षमता चार गुना बढ़कर 19 GW हो जाएगी. BESS में 3.5 लाख करोड़ निवेश का अवसर वर्तमान में, BESS की लगभग 80 प्रतिशत लागत बैटरी सेल और संबंधित घटकों पर आती है, जिनमें से अधिकांश चीन से आते हैं. इससे भारत को आयात पर अपनी निर्भरता कम करने और अपने बैटरी पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने में मदद मिलेगी. प्रमुख खिलाड़ी पहले से ही बैटरी निर्माण और घटक उत्पादन में भारी निवेश कर रहे हैं, लगभग 120 GWh सेल क्षमता की घोषणा की गई है, हालांकि अनुमानित मांग को पूरा करने के लिए अधिक निवेश की आवश्यकता होगी. BESS पारिस्थितिकी तंत्र के लिए वित्त पोषण क्षमता महत्वपूर्ण है, जिसमें वित्त वर्ष 32 तक 3.5 लाख करोड़ रुपये का अनुमानित अवसर है, जो परियोजना-स्तरीय निवेश और अपस्ट्रीम विनिर्माण वृद्धि के संयोजन से प्रेरित है. PSP अपनी लंबी गर्भावधि अवधि के कारण धीमी वृद्धि का सामना कर रहे हैं, फिर भी वित्त वर्ष 32 तक 1.2 ट्रिलियन रुपये के निवेश का योगदान करने की उम्मीद है.  

बृहस्पति के चांद पर एवरेस्ट की ऊंचाई से 4 गुना मोटी बर्फ, जीवन की संभावना मुश्किल

न्यूयॉर्क दुनिया भर के एस्ट्रोबायोलॉजिस्ट ये सोच रहे थे कि बृहस्पति के बर्फीले चांद यूरोपा की मोटी बर्फीली परत के नीचे जीवन होगा. क्योंकि इसके नीचे नमकीन पानी का समंदर है. जीवन की संभावना हो सकती है. लेकिन हाल ही में हुए खुलासे में उनकी ये धारणा बदल गई है. क्योंकि यहां पर इतनी मोटी बर्फ है, जो उम्मीद से बहुत ज्यादा है.        यूरोपा की सतह पर बर्फ की जो परत है, वो 35 km गहरी है. ये जांच नासा के स्पेसक्राफ्ट जूनो ने की. वह 2016 से लगातार बृहस्पति और उसके चंद्रमाओं के चक्कर लगा रहा है. उसने माइक्रोवेव रेडियोमीटर (MWR) के जरिए सतह की मोटाई नापने की कोशिश की. पता चला 35 किलोमीटर गहरी तो सिर्फ बर्फ की परत ही है.       जूनो के प्रोजेक्ट साइंटिस्ट स्टीवन लेविन ने कहा कि ये औसत मोटाई है. कहीं कहीं ये इससे कई गुना ज्यादा है. ये ऊंचाई चार माउंट एवरेस्ट की ऊंचाई जितनी है. इंसानों ने धरती पर सबसे गहरी जो ड्रिलिंग की है, उससे तीन गुना ज्यादा गहरी बर्फ है. ये हम सभी वैज्ञानिकों की उम्मीद से बहुत ज्यादा है और हैरान करने वाला है. पर्ड्यू यूनिवर्सिटी के प्लैनेटरी साइंटिस्ट ब्रैंडन जॉन्सन कहते हैं कि अगर ये आंकड़ें सही हैं तो ये हैरान करने वाले हैं. हमारी धरती पर मौजूद कई चीजों से कई गुना ज्यादा बड़ी, गहरी और ऊंची है यूरोपा की बर्फ की परत. ये 35 km मोटी परत भी कई लेयर्स में बंटी है. पहली 7 km वाली सख्त लेयर. दूसरी 13 km वाली मोबाइल लेयर.         अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा NASA ने यूरोपा पर अंतरिक्ष के कचरों के टकराने से बने गड्ढे देखे हैं. यहां पर कई स्थानों पर प्राचीन गड्ढे, घाटियां, दरारें आदि हैं. यूरोपा पर इन सब चीजों के साथ काफी तीव्र रेडिएशन भी है. लेकिन इसकी ऊपरी ऊबड़-खाबड़ बर्फीली सतह के बीच कुछ गहरे रंग की आकृतियां भी दिखाई दीं है. यूरोपा पर कई छोटे-छोटे इम्पैक्ट क्रेटर हैं. वैज्ञानिकों को लगता था कि मोटी परत के नीचे से जो पानी निकलता है उससे जीवन के बाहर आने की भी संभावना है. पानी के बाहर आने का सिस्टम इम्पैक्ट गार्डेनिंग नाम की एक प्रक्रिया की वजह से बाधित हो रही है. यूरोपा की सतह पर करोड़ों छोटे गड्ढे हैं, जो करीब 12 इंच गहरे हैं. इन छोटे गड्ढों पर अगर किसी भी तरह के केमिकल बायोसिग्नेचर मिलते हैं तो इसका मतलब ये है कि यहां पर जीवन की उत्पत्ति के रासायनिक सबूत मिल रहे हैं. ये गहराई में जीवन को पैदा कर सकते हैं. अभी की स्थिति ऐसी है कि रेडिएशन की वजह से चीजें टूट जाती हैं.जीवन की उत्पत्ति के लिए जरूरी कणों का विभाजन हो जा रहा है. अंतरिक्ष से आकर यूरोपा से टकराने वाली चीजों में भी जीवन के होने की उम्मीद रहती है. लेकिन इस समय यूरोपा पर चल रहे विनाशकारी रेडिएशन की वजह से केमिकल बायोसिग्नेचर जीवन के रूप में पनप नहीं पा रहे हैं. भविष्य में जैसे-जैसे रेडिएशन कम होगा, वैसे ही जीवन की उत्पत्ति की संभावना बढ़ जाएगी. नासा के जेट प्रोपल्शन लेबोरेटरी की यूरोपा साइंटिस्ट सिंथिया फिलिप्स ने कहा कि हम लगातार अपनी स्टडी को और गहन कर रहे हैं. हम सौर मंडल की वजह से यूरोपा पर पड़ने वाले सभी प्रभावों का अध्ययन कर रहे हैं. अगर हमें किसी ग्रह की उत्पत्ति और उसपर जीवन के संकेतों का अध्ययन करना है.

एडल्ट कंटेंट की तुलना में अधिक आकर्षक विकल्प देना ज्यादा महत्वपूर्ण : राष्ट्रपति पुतिन

मॉस्क रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने  पोर्नोग्राफिक कंटेन्ट के विकल्प तैयार करने का आह्वान किया। उन्होंने सुझाव दिया कि लोगों का ध्यान आकर्षित करने के लिए कुछ अधिक रोचक और जुनून पैदा करने वाले कंटेंट विकसित किए जाने चाहिए। रशिया टुडे को दिए इंटरव्यू में पुतिन ने दुनिया भर में एडल्ट कंटेंट की लोकप्रियता को स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ रूस की बात नहीं है। इससे पूरी दुनिया प्रभावित है। पुतिन ने कहा, “दुनिया भर में पोर्न साइट्स देखे जाते हैं। यह सिर्फ हमारे लिए मुद्दा नहीं है। यह सबके लिए है। ऐसी सामग्री पर प्रतिबंध लगाना एक उपाय हो सकता है, लेकिन एडल्ट कंटेंट की तुलना में अधिक आकर्षक विकल्प देना ज्यादा महत्वपूर्ण है।” रूसी राष्ट्रपति ने कहा, “प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं, लेकिन हमेशा विकल्प के साथ आना होगा। पोर्न वेबसाइट की तुलना में अधिक आकर्षक और दिलचस्प कंटेंट देना होगा। इससे लोगों में रुचि पैदा होगी और यह पोर्न कंटेंट की जगह ले सकेगा।” पुतिन ने रूस के लोगों से कहा था- ‘काम से मिली छुट्टी के दौरान सेक्स करें’ रूस ऐसे देशों में शामिल है जिसका जन्म दर घट रहा है। इससे आबादी कम हो रही है। सरकार की ओर से जन्म दर बढ़ाने के लिए पहल की जा रही है। व्लादिमीर पुतिन ने हाल ही में रूस की घटती जन्म दर से निपटने के लिए एक अनोखा सुझाव दिया था जो सुर्खियों में आया था। पुतिन ने रूसियों को काम के समय मिलने वाले लंच और कॉफी ब्रेक के दौरान सेक्स करने की सलाह दी थी। कहा था कि इससे प्रजनन दर बढ़ाने में मदद मिलेगी। रूस में प्रति महिला प्रजनन दर करीब 1.5 है। आबादी स्थिर रह इसके लिए प्रजनन दर 2.1 होना चाहिए। 1.5 प्रजनन दर रहने से रूस की आबादी तेजी से कम होगी। यह एक बड़ा संकट है। प्रजनन दर बढ़ाने के लिए रूस की सरकार कई तरह के योजनाओं को चला रही है। 18 से 40 साल की महिलाओं के लिए मुफ्त प्रजनन जांच की व्यवस्था है।

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के सलाहकार महफूज आलम के एक फेसबुक पोस्ट को लेकर मचा बवाल, विदेश मंत्रालय किया विरोध

नई दिल्ली एक तरफ जहां बांग्लादेश में हिंदुओं पर हमले बंद नहीं हो रहे। वहीं, दूसरी ओर बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के सलाहकार महफूज आलम ने भारत विरोधी टिप्पणी की है, जिस पर विदेश मंत्रालय ने कड़ा विरोध जाहिर किया है। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के सलाहकारों में से एक महफूज आलम के एक फेसबुक पोस्ट को लेकर बवाल मचा हुआ है। उन्होंने पश्चिम बंगाल, असम और त्रिपुरा को बांग्लादेश का हिस्सा बताया था। हालांकि, उन्होंने पोस्ट को बाद में हटा दिया था। भारत ने जताया कड़ा विरोध विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि हमने इस मुद्दे पर बांग्लादेश पक्ष के समक्ष अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया है। भारत सरकार ने अनुरोध किया है कि बांग्लादेश की तरफ से कोई ऐसे कमेंट न किए जाएं जो भारत विरोधी है। हालांकि, महफूज आलम ने बाद में फेसबुक पोस्ट डिलीट कर दिया था। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, “हमने इस मुद्दे पर बांग्लादेश पक्ष के समक्ष अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया है। हम समझते हैं कि जिस पोस्ट का उल्लेख किया जा रहा है, उसे कथित तौर पर हटा दिया गया है। हम सभी संबंधित पक्षों को याद दिलाना चाहेंगे कि वे अपनी सार्वजनिक टिप्पणियों के प्रति सचेत रहें। पोस्ट में क्या लिखा था? महफूज ने फेसबुक पोस्ट में दावा किया था कि उनका सपना समग्र बंगाल का है। भारत, पाकिस्तान की राजनीति के कारण बंगाल खंडित है। उन्होंने पोस्ट में लिखा,”विजय तो मिल गई है, लेकिन पूर्ण मुक्ति अभी भी दूर है। हम हिमालय से लेकर बंगाल की खाड़ी तक टाउनशिप बहाल किए बिना पूर्वी पाकिस्तान के जरिए बांग्लादेश से मुक्ति नहीं पा सकते। भले ही वो बांग्लादेश के अंतरिम सरकार में मंत्री नहीं है, लेकिन वो प्रभावशाली लोगों में से एक हैं।”

देश के उत्तरी राज्‍यों में कड़ाके की सर्दी पड़ रही, तापमान में गिरावट जारी, पारा 0º, बर्फ जमी

नई दिल्‍ली देश के उत्तरी राज्‍यों में कड़ाके की सर्दी पड़ रही है। तापमान में गिरावट जारी है। हरियाणा और हिमाचल के कुछ शहरों में तापमान शून्य डिग्री  सेल्सियस तो जम्मू-कश्‍मीर और उत्तराखंड में पारा माइनस 4 डिग्री  सेल्सियस तक पहुंच गया है। राजस्‍थान, मध्‍य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और दिल्ली में सर्दी रिकॉर्ड तोड़ रही है। मौसम विभाग की मानें तो मैदानी इलाकों में हरियाणा का हिसार सबसे ठंडा रहा। राजस्थान के पांच शहरों में तापमान 4 डिग्री सेल्सियस से नीचे रिकॉर्ड किया है। शनिवार-रविवार में तापमान और गिरेगा। भीषण शीतलहर भी चलेगी। कुछ राज्‍यों में बारिश भी होगी। यहां कई जिलों में पारा 0 डिग्री पहुंच गया है। मौसम विभाग ने कहा- मैदानी इलाकों में हरियाणा का हिसार सबसे ठंडा रहा। यहां तापमान 0.8 डिग्री तक दर्ज किया गया। वहीं, हिमाचल के भुंतर में तापमान शून्य डिग्री के करीब पहुंच गया। ओस की बुंदे जमकर बन रही बर्फ मध्य भारत के राज्यों, राजस्थान और मध्य प्रदेश में भी सर्दी कम नहीं हो रही है। राजस्थान के करौली में तापमान 1.3 डिग्री पहुंच गया। सीकर, झुनझुन समेत कई जगहों पर पत्तों में जमी बर्फ देखने को मिल रही है। बीते 24 घंटे में राजस्थान के 5 शहरों में रात का पारा 4 डिग्री से नीचे रिकॉर्ड हुआ। माउंट आबू में 2.0°, फतेहपुर 2.2°, संगरिया 3.3°, चूरू 3.5° और करौली में 3.4 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। एमपी और दिल्ली में भी कड़ाके की ठंड मध्य प्रदेश के 12 शहरों का न्यूनतम तापमान 8 डिग्री से नीचे रहा। सबसे कम तापमान 3.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। दिल्ली में भी तापमान 5 डिग्री रिकॉर्ड किया गया। यहां आज तापमान में और गिरावट हो सकती है।  

लड़की का रेप कर बनाया अश्लील वीडियो, फिर धमकाया, शिकायत के बाद हुआ फरार, दिल्ली क्राइम ब्रांच ने किया अरेस्ट

नई दिल्ली दिल्ली क्राइम ब्रांच ने रेप के एक आरोपी को गुजरात के सूरत से गिरफ्तार कर बड़ी सफलता हासिल की है। 25 वर्षीय आरोपी कुलदीप को पकड़ने के लिए दिल्ली पुलिस ने 1500 किलोमीटर का सफर तय किया। कुलदीप, जो दिल्ली से फरार हो गया था, सूरत के जय अंबे नगर में छिपा हुआ था। दिल्ली पुलिस ने गुजरात पुलिस के सहयोग से इस मिशन को अंजाम दिया। पुलिस के अनुसार, मामला दर्ज होने के बाद आरोपी फरार हो गया था, और उसके खिलाफ उद्घोषणा की प्रक्रिया भी शुरू की गई थी। आखिरकार एनआर-आई क्राइम ब्रांच की टीम ने उसे गुजरात के सूरत के जय अंबे नगर से पकड़ा। दोस्ती का नाजायज फायदा दिल्ली पुलिस ने बताया कि शिकायतकर्ता और आरोपी बागवानपुरा में एक ही स्थान पर काम करते थे। आरोपी ने दोस्ती का फायदा उठाते हुए विश्वास हासिल किया। उसने पीड़िता को नशीला पदार्थ पिलाकर उसका यौन उत्पीड़न किया। इसके बाद उसने अश्लील तस्वीरें और वीडियो बना लिए। आरोपी ने इन रिकॉर्डिंग का इस्तेमाल कर पीड़िता को ब्लैकमेल किया और जबरन शारीरिक संबंध बनाने पर मजबूर किया। खुफिया जानकारी और गिरफ्तारी पुलिस के मुताबिक, 16 दिसंबर को खुफिया जानकारी के आधार पर पता चला कि आरोपी गुजरात के सूरत में छिपा हुआ है। इसके बाद क्राइम ब्रांच की टीम ने तेजी से कार्रवाई करते हुए सूरत में छापेमारी की और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी का बैकग्राउंड गिरफ्तार आरोपी कुलदीप उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले का रहने वाला है। उसने 8वीं कक्षा तक पढ़ाई की है और पिछले 5-6 साल से दिल्ली के बवाना इलाके में रह रहा था। कुलदीप एक लोकल फैक्ट्री में वेल्डर के रूप में काम करता था। सबूत और कार्रवाई पुलिस ने आरोपी के मोबाइल फोन से ब्लैकमेल और सेक्सटॉर्शन के लिए इस्तेमाल किए गए अश्लील वीडियो और फोटो बरामद किए हैं। पुलिस ने बताया कि आरोपी पीड़िता को बार-बार धमकाकर अपने जघन्य अपराधों को अंजाम दे रहा था।

पुणे में दर्दनाक हादसा, तम्हानी घाट के पास अचानक पलटी बस, 5 की मौत, 14 घायल

पुणे महाराष्ट्र के पुणे में एक दर्दनाक हादसा हुआ है, जब यात्रियों से भरी एक बस अचानक पलट गई, जिसमें 5 लोगों की मौत हो गई। यह हादसा पुणे के तम्हानी घाट के पास हुआ है, जहां 13-14 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। बस चाकन से महाड जा रही थी, और अचानक बस का संतुलन बिगड़ने के बाद यह खड्डे में गिर गई और पलट गई। हादसे की तस्वीरें बेहद चौंकाने वाली हैं। बस में 40 यात्री थे सवार खबरों के मुताबिक, यह हादसा शुक्रवार सुबह करीब 8 बजे हुआ। बस में तकरीबन 40 यात्री सवार थे, जो एक शादी समारोह में शामिल होने जा रहे थे। जैसे ही बस खतरनाक मोड़ पर पहुंची, बस का नियंत्रण खो बैठा और यह एक तरफ झुकते हुए खड्डे में गिर गई, जिससे बस पलट गई। तम्हानी घाट पर हुआ हादसा सूत्रों के अनुसार, पुणे के तम्हानी घाट में एक खतरनाक मोड़ है, जहां यह हादसा हुआ। मोड़ पर खड्डे में गिरने के बाद बस बेकाबू हो गई और पलट गई। इस हादसे में 5 यात्रियों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 13-14 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।  स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी, और पुलिस मौके पर पहुंच गई। शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है, जबकि घायलों को इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया। पुलिस ने बस को भी कब्जे में ले लिया है। हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई है, और मृतकों के परिजनों का बुरा हाल हो गया है।

कोलकाता में पीली टैक्सियां अब लगभग गायब होने की कगार पर, ड्राइवरों ने जताई चिंता

कोलकाता कभी कोलकाता शहर की पहचान और परिवहन का मुख्य साधन मानी जाने वाली पीली टैक्सियां अब लगभग गायब होने की कगार पर हैं। एक समय ऐसा था जब हावड़ा और सियालदह रेलवे स्टेशन के बाहर पीली टैक्सियों की लंबी कतारें यात्रियों का इंतजार करती नजर आती थीं लेकिन अब इनकी संख्या लगातार घटती जा रही है। तेजी से घट रही टैक्सियों की संख्या : पहले कोलकाता में 27,000 से 28,000 पीली टैक्सियां सड़कों पर दौड़ती थीं। : अब यह संख्या घटकर 3000-4000 रह गई है। : अगले एक महीने में लगभग 1,000 और टैक्सियां बंद होने की आशंका है। ऑनलाइन कैब सेवाओं का बढ़ता दबदबा कोलकाता की पीली एंबेसेडर टैक्सियां धीरे-धीरे हो रही हैं गायब, 50% से अधिक बेड़ा होगा सेवानिवृत्त कोलकाता की पीली एंबेसेडर टैक्सियां धीरे-धीरे हो रही हैं गायब, 50% से अधिक बेड़ा होगा सेवानिवृत्त CM भजनलाल के काफिले को टक्कर मारने वाले टैक्सी ड्राइवर की मौत, विदेश से बताया जा रहा कनेक्शन CM भजनलाल के काफिले को टक्कर मारने वाले टैक्सी ड्राइवर की मौत, विदेश से बताया जा रहा कनेक्शन विदेश सचिव मिसरी 9 दिसंबर को करेंगे बांग्लादेश का दौरा, हिंदुओं पर हमलों को लेकर भारत ने जताई चिंता विदेश सचिव मिसरी 9 दिसंबर को करेंगे बांग्लादेश का दौरा, हिंदुओं पर हमलों को लेकर भारत ने जताई चिंता पीली टैक्सियों की घटती लोकप्रियता का मुख्य कारण ऑनलाइन ऐप-आधारित कैब सेवाएं हैं। ये कैब्स आधुनिक सुविधाओं से लैस हैं और यात्रियों को बेहतर अनुभव देती हैं। : एयर कंडीशनिंग जैसी सुविधाएं ऑनलाइन कैब्स को अधिक पसंदीदा बना रही हैं। : वहीं पीली टैक्सियां अभी भी पुरानी तकनीक और सीमित सुविधाओं के साथ काम कर रही हैं। : ऐप बेस्ड कैब्स का किराया भी कई बार पीली टैक्सियों से कम होता है जिससे लोग इन्हें ज्यादा पसंद कर रहे हैं। ड्राइवरों की परेशानियां पीली टैक्सी चलाने वाले ड्राइवर इस बदलाव से सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। : हजारों परिवार पीली टैक्सियों पर निर्भर हैं। : कई ड्राइवरों ने सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया है। : उनका कहना है कि अगर पीली टैक्सियां बंद हो गईं तो उनकी आजीविका खत्म हो जाएगी। टैक्सी ड्राइवरों की मांगें : ड्राइवर चाहते हैं कि सरकार पीली टैक्सियों को बचाने के लिए कोई ठोस कदम उठाए। : उनका कहना है कि सरकार को पीली टैक्सियों के लिए आधुनिक तकनीक और सुविधाओं को लागू करना चाहिए। : यदि पीली टैक्सियां बंद होती हैं तो सरकार को उनके लिए विकल्प तैयार करना चाहिए। पुरानी यादों का हिस्सा बनती पीली टैक्सियां पीली टैक्सियां कभी कोलकाता की शान थीं और शहर के परिवहन का अहम हिस्सा थीं लेकिन अब ये सिर्फ पुरानी यादों का हिस्सा बनती जा रही हैं। : आज पीली टैक्सी का उपयोग लोग केवल विशेष अनुभव या पुरानी यादों को ताजा करने के लिए कर रहे हैं। : आधुनिक परिवहन साधनों ने पीली टैक्सियों के महत्व को कम कर दिया है। बता दें कि कोलकाता की पीली टैक्सियां सिर्फ एक साधारण वाहन नहीं बल्कि शहर की संस्कृति और विरासत का हिस्सा हैं। इन्हें बचाने के लिए सरकार और टैक्सी ऑपरेटरों को मिलकर काम करना होगा। यदि ऐसा नहीं किया गया तो पीली टैक्सियां जल्द ही इतिहास का हिस्सा बन जाएंगी और हजारों परिवार अपनी आजीविका से हाथ धो बैठेंगे।

ओम बिरला ने कहा सदन की गरिमा बनाए रखें, संसद भवन के द्वार पर धरना-प्रदर्शन करने पर लगाया प्रतिबंध

नई दिल्ली लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शुक्रवार को सदन में एक अहम घोषणा की। उन्होंने कहा कि कोई भी राजनीतिक दल, संसद सदस्य या सदस्यों का समूह संसद भवन के द्वार पर धरना या प्रदर्शन आयोजित नहीं करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि संसद भवन का परिसर और उसकी प्रतिष्ठित संस्था की गरिमा को बनाए रखना सभी सांसदों की सामूहिक जिम्मेदारी है। ओम बिरला ने कहा कि संसद क्षेत्र में किसी भी दरवाजे पर धरना-प्रदर्शन करना सही नहीं है। अगर कोई सदस्य या समूह ऐसा करता है, तो इसका असर उनकी प्रतिष्ठा पर पड़ेगा और उनके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। इस प्रकार की गतिविधियों से सदन की कार्यवाही और संसद की गरिमा को नुकसान पहुंचता है, जिससे लोकतंत्र की असल भावना प्रभावित होती है। उन्होंने सांसदों ने आग्रह किया कि वह सदन की गरिमा बनाए रखें और संसद भवन के भीतर या उसके आसपास किसी भी प्रकार के प्रदर्शन से बचें। उन्होंने सांसदों की जिम्मेदारी की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा कि संसद लोकतंत्र का सबसे महत्वपूर्ण मंदिर है, और इसे हर किसी को आदर देना चाहिए। दरअसल, गुरुवार को संसद भवन परिसर में हुए विरोध-प्रदर्शन के दौरान भाजपा के दो सांसद प्रताप सारंगी और मुकेश राजपूत सीढ़ियों से गिरकर चोटिल हो गए थे। भाजपा सांसदों का आरोप है कि कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने उन्हें धक्का दिया, जिसके बाद वह गिर गए और घायल हो गए। हालांकि, कांग्रेस ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। इस घटना पर भाजपा नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया जाहिर की थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दोनों चोटिल सांसदों का हालचाल भी जाना था। धक्का-मुक्की कांड पर कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने कहा था कि राहुल गांधी बीआर अंबेडकर की फोटो लेकर शांति पूर्वक ‘जय भीम’ के नारे लगाते हुए संसद में जा रहे थे। संसद में जाने से किसने रोका? हम इतने दिनों से साइड में प्रदर्शन कर रहे हैं। जो भी आ रहा है, जा रहा है, उसके लिए पूरा रास्ता है। इन्होंने पहली बार प्रदर्शन किया और सबको रोक दिया, धक्का-मुक्की और गुंडागर्दी की। अमित शाह को बचाने के लिए यह साजिश हुई है। बता दें कि संसद भवन परिसर में इंडिया ब्लॉक के नेता केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा बाबा साहेब अंबेडकर के संदर्भ में की गई टिप्पणी को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारी नेता अमित शाह का इस्तीफा मांग रहे हैं। यह विरोध प्रदर्शन डॉ अंबेडकर की प्रतिमा से लेकर मकर द्वार तक किया जा रहा है।  

कोलसेवाड़ी पुलिस थाने के अंतर्गत डोंबिवली में बांग्लादेशी नागरिकों की गिरफ्तारी का सिलसिला जारी

डोंबिवली (महाराष्ट्र) कोलसेवाड़ी पुलिस थाने के अंतर्गत दो दिन पहले बांग्लादेशी दंपति की गिरफ्तारी के बाद अब डोंबिवली की मानपाड़ा पुलिस ने फिर से कार्रवाई करते हुए छह और बांग्लादेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किए गए लोगों में एक महिला भी शामिल है। पुलिस के अनुसार, ये सभी अवैध तरीके से भारत में रह रहे थे। पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार किए गए लोग लगभग 15 दिन पहले बांग्लादेश से आए थे और इनमें से कुछ कपड़ा कंपनी में काम कर रहे थे। पुलिस ने वहीं से ही यह गिरफ्तारी की है। बता दें कि मानपाड़ा पुलिस ने पांच पुरुष और एक महिला समेत 6 को पकड़ा है। इनकी पहचान अभी स्पष्ट नहीं की गई है, लेकिन पुलिस ने इन्हें तत्काल हिरासत में लेकर बांग्लादेश वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि ये लोग फर्जी पहचान पत्रों और दस्तावेजों का इस्तेमाल करके रह रहे थे। डोंबिवली और आसपास के इलाकों में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों की संख्या बढ़ती जा रही है। इससे न केवल स्थानीय प्रशासन पर दबाव बढ़ा है, बल्कि सुरक्षा संबंधी चिंताएं भी बढ़ी हैं। इस मामले में पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने सतर्कता बढ़ाने का निर्णय लिया है। नागरिकों से अपील की गई है कि अगर उनके आसपास संदिग्ध व्यक्तियों की गतिविधियां दिखाई दें, तो तुरंत पुलिस को सूचना दें। इस तरह की कार्रवाइयों से स्थानीय नागरिकों में सुरक्षा की भावना मजबूत हो रही है। हालांकि स्थानीय लोग पुलिस की इस कार्रवाई की तारीफ कर रहे हैं, लेकिन यह सवाल भी उठा रहे हैं कि इन अवैध निवासियों को रोकने के लिए पहले कदम क्यों नहीं उठाए गए। बांग्लादेशी नागरिकों की बढ़ती संख्या यह संकेत देती है कि सीमावर्ती इलाकों से भारत में घुसपैठ के खिलाफ सख्त कार्रवाई की आवश्यकता है। मानपाड़ा पुलिस के एक अधिकारी ने बताया, ”हमें खबर मिली कि कपड़ा कंपनी में कुछ बांग्लादेशी नागरिकों अवैध रूप से काम कर रहे है। हमने उनकी गिरफ्तारी कर उन्हेंा आज कोर्ट में पेश किया। उन्हें अब हिरासत में रखा जाएगा, जहां उनसे पूछताछ की जाएगी कि वह भारत कैसे आए।” आगे बताया कि आरोपियों के पास कोई दस्तारवेज नहीं है। उनके पास केवल मोबाइल थे जिन्हेंा कब्जेत में ले लिया गया है।  

इसरो ने शार रेंज से अपने पहले अंतरिक्ष डॉकिंग मिशन स्पेसडेक्स उपग्रह के लिए तैयारियां पूरी की

चेन्नई भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) अपनी अंतरिक्ष यात्रा में एक और मील का पत्थर कायम करने और चंद्रयान-4 (चौथे चंद्र मिशन) और गगनयान सहित भविष्य के मिशनों के लिए गेम चेंजर साबित होने के लिए पूरी तरह तैयार है। उसने 30 दिसंबर को शार रेंज से अपने पहले अंतरिक्ष डॉकिंग मिशन स्पेसडेक्स उपग्रह के लिए तैयारियां पूरी कर ली है। इसरो मिशन के लिए अपने विश्वसनीय और ‘वर्कहॉर्स’ प्रक्षेपण वाहन पीएसएलवी -सी 60 का उपयोग करेगा और पूरी संभावना है कि इसे श्रीहरिकोटा के स्पेसपोर्ट में पहले लॉन्च पैड से प्रक्षेपित किया जायेगा। इसरो ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा: “आंतरिक स्रोतों के माध्यम से, हमने पुष्टि की है कि स्पैडेक्स के अलावा, इसरो अपने अगले मिशन-पीएसएलवी-सी 60 पर रोबोटिक आर्म प्रयोग के माध्यम से अपने टेथर्ड सैटेलाइट कैप्चर का संचालन करने के लिए भी तैयार है!” यह भी कहा गया, “अब तक, हम इस प्रयोग के बारे में पहले से ही जानते हैं कि इसमें पीओईएम प्लेटफॉर्म से जुड़े एक प्रकार के मुक्त उड़ान क्यूबसैट को शामिल किया जाएगा, जिसे पीओईएम पर लगे रोबोटिक हाथ की मदद से कैप्चर किया जाएगा।” इसरो ने पोस्ट किया, “इस तकनीक का प्रदर्शन अंतरिक्ष मलबे को पकड़ने और डीऑर्बिट के साथ-साथ कक्षा में अंतरिक्ष यान की सर्विसिंग और ईंधन भरने की क्षमताओं को विकसित करने की इसरो की भविष्य की योजनाओं की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।”  

‘एक राष्ट्र एक चुनाव’ विधेयक संसद की संयुक्त समिति को भेजा, इस समिति ने 39 सदस्य हैं, ये सदस्य करेंगे विमर्श

नई दिल्ली लोकसभा ने बहुचर्चित ‘एक राष्ट्र एक चुनाव’ विधेयक शुक्रवार को संसद की संयुक्त समिति (जेपीसी) को भेज दिया। विधेयक पर विचार के लिए गठित जेपीसी में कुल 39 सदस्य हैं, जिनमें 27 सदस्य लोकसभा से और 12 राज्यसभा के हैं। ये सदस्य इस विधेयक में संशोधन से जुड़े सभी पहलुओं पर गहनता से विचार विमर्श करेंगे। समिति में लोकसभा के सदस्यों में पीपी चौधरी, डॉ सीएम रमेश, सुश्री बांसुरी स्वराज, पुरुषोत्तम भाई रूपला, अनुराग सिंह ठाकुर, विष्णु दयाल राम, भर्तृहरि महताब, डॉ समित पात्रा, अनिल बलूनी, विष्णु दत्त शर्मा, बैजयंत पांडा, डॉ संजय जयसवाल, प्रियंका गांधी वाड्रा, मनीष तिवारी, सुखदेव भगत, धर्मेंद्र यादव, छोटेलाल, कल्याण बनर्जी, टीएम सेल्वगणपति, जीएम हरिध बालयोगी, अनिल यशवंत देसाई, सुप्रिया सुले, डॉ. श्रीकांत एकनाथ शिंदे, श्रीमती शाम्भवी, के. राधा कृष्णन, चंदन चौहान तथा बी बल्लभानेनी शामिल हैं। समिति में 12 सदस्य राज्यसभा के हैं।  

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