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राजकोट गेमजोन हादसे में मृतक के पिता की अब यह मांग, ‘पढ़ने में होशियार इकलौता बेटा चला गया’

राजकोट गुजरात के राजकोट में लगभग डेढ़ महीने पहले हुए TRP गेम जोन आग हादसे में जान गंवाने वाले 20 साल के एक युवक के पिता ने 20 लाख रुपए का मुआवजा मांगा है। गेम जोन को चलाने वाली फर्म से इस रकम की मांग करते हुए उन्होंने जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने फर्म पर लापरवाही और दोषपूर्ण सेवा देने का आरोप लगाया है। बता दें कि इस साल 25 मई को गेम जोन में लगी आग में 27 लोगों की जान चली गई थी। मुआवजे की मांग को लेकर केस करने वाले मृतक इंजीनियरिंग छात्र के पिता का नाम रसिक वेकारिया है जो कि एक व्यापारी हैं। इस बारे में जानकारी देते हुए उनके वकील गजेन्द्र जानी ने मंगलवार को बताया कि वेकारिया ने गेम जोन चलाने वाली कम्पनी से उसके लापरवाह रवैये और सेवा में कमी के लिए 20 लाख रुपए का मुआवजा मांगा है। वेकारिया ने मुआवजे की मांग करते हुए आयोग को बताया कि हादसे में मारा गया नीरव उनका इकलौता बेटा था, जो कि पढ़ने में काफी होशियार था और इंजीनियरिंग का दूसरे वर्ष का छात्र था। लेकिन फर्म और उसके साझेदारों की लापरवाही की वजह से हादसे में उसकी असमय मौत हो गई। वकील गजेन्द्र जानी के मुताबिक इस शिकायत से सम्बन्धित सभी दस्तावेजी साक्ष्य लाने के लिए राजकोट के कलेक्टर, पुलिस कमिश्नर और नगर निगम आयुक्त को भी पक्ष बनाया गया है। उन्होंने बताया कि जज केएम दवे ने रेसवे एंटरप्राइजेज, उसके पार्टनर्स के साथ ही राजकोट कलेक्टर, पुलिस आयुक्त और नगर निगम आयुक्त सहित नौ प्रतिवादियों को नोटिस जारी किए हैं। जानी ने कहा, शिकायत में मांग की गई है कि फर्म के साझेदार और उस जगह के मालिक जहां फर्म काम करती थी, मृतक नीरव वेकारिया के परिवार को 20 लाख रुपए का मुआवजा दें। शिकायत के अनुसार, रेसवे एंटरप्राइजेज और उसके पार्टनर्स ने TRP गेम जोन के नाम से खेल, मनोरंजन और रेसिंग जैसी गतिविधियों के लिए विभिन्न प्रकार के विज्ञापनों के माध्यम से अपने उत्पादों की पेशकश की। वहीं इस तरह के विज्ञापनों से आकर्षित होकर नीरव और अन्य ग्राहक निर्धारित राशि का भुगतान करते हुए इसके विभिन्न उत्पादों जैसे ट्रैम्पोलिन, कृत्रिम दीवार पर चढ़ना, रेसिंग, बॉलिंग, जम्पिंग आदि का मजा लेने के लिए गेम जोन में गए। लेकिन 25 मई को जब आग लगी तो नीरव और अन्य लोग गेम जोन से सुरक्षित बाहर नहीं निकल सके और आग में जलने से असमय उनकी मौत हो गई। शिकायत में फर्म पर अपने ग्राहकों की सुरक्षा के प्रति लापरवाही बरतने का आरोप लगाया गया है, क्योंकि उसने न तो अग्निशमन यंत्र उपलब्ध कराए और न ही बीमा कवर प्रदान किया। फर्म के ग्राहक नीरव को फर्म से दोषपूर्ण सेवा मिली और उसकी लापरवाही के कारण उसकी मृत्यु हो गई। वेकारिया द्वारा 29 जून को शिकायत दर्ज की गई थी और नोटिस 6 जुलाई को जारी किए गए। इस मामले में सुनवाई 2 अगस्त को होगी।  

लोगों को ये बात पता ही नहीं है कि देश में सहमति से सेक्स संबंध बनाने की उम्र अब 16 साल नहीं बल्कि 18 साल है: सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली लड़का और लड़की के बीच सहमति से सेक्स संबंध बनाने की उम्र को लेकर सुप्रीम कोर्ट (SC) ने मंगलवार को बेहद अहम टिप्पणी की। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अधिकतर लोगों को ये बात पता ही नहीं है कि देश में सहमति से सेक्स संबंध बनाने की उम्र अब 16 साल नहीं बल्कि 18 साल है। उच्चतम न्यायालय ने कहा, “आम जनता को इस बात की जानकारी नहीं है कि लड़की के साथ यौन संबंध बनाने की सहमति की उम्र 16 वर्ष से बढ़ाकर 18 वर्ष कर दी गई है।” एमपी सरकार की याचिका खारिज बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, न्यायमूर्ति संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति पीवी संजय कुमार की पीठ यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम (पोस्को एक्ट) के तहत एक मामले में आरोपी को बरी करने के खिलाफ मध्य प्रदेश सरकार की अपील पर सुनवाई कर रही थी। हालांकि शीर्ष अदालत ने एमपी सरकार की याचिका खारिज कर दी। न्यायमूर्ति खन्ना ने मामले का निपटारा करने से पहले टिप्पणी करते हुए कहा, “अभी भी इस बारे में जागरूकता नहीं है कि सहमति की आयु 16 से बढ़ाकर 18 कर दी गई है।” वर्ष 2012 में भारत में सहमति से विवाह करने की आयु सीमा को 16 वर्ष से बढ़ाकर 18 वर्ष कर दिया गया था, जिसके बाद POSCO अधिनियम लागू हुआ और उसके बाद भारतीय दंड संहिता (IPC) में संशोधन किया गया। मुकदमा अक्सर पुरुष साथी के खिलाफ चलाया जाता है सहमति से सेक्स संबंध बनाने वाली लड़कियों से जुड़े POCSO मामलों में जब मुकदमे की कार्यवाही शुरू होती है तो कई समस्याएं आती हैं जिन्हें न्यायपालिका के कई सदस्यों द्वारा चिन्हित भी किया गया है। क्योंकि युवा लड़कियों के बीच सहमति से बनाए गए रोमांटिक और यौन संबंधों के कारण अक्सर पुरुष साथी के खिलाफ मुकदमा चलाया जाता है। कई बार, जब तक मुकदमा शुरू होता है, तब तक दंपति शादीशुदा हो चुके होते हैं और उनके बच्चे भी हो चुके होते हैं, जिससे आगे और भी समस्याएं खड़ी हो जाती हैं। क्योंकि अगर उस को सजा दी जाती है तो इसका मतलब होगा कि महिला और बच्चे को खुद की देखभाल करने के लिए छोड़ दिया जाएगा। भारत के मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने दिसंबर 2022 में कहा था कि अधिनियम के तहत सहमति की वर्तमान आयु ऐसे मामलों से निपटने वाले न्यायाधीशों के लिए कठिन प्रश्न खड़ी करती है, और इस मुद्दे को लेकर बढ़ती चिंता पर विधायिका को विचार करने की आवश्यकता है। सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी ने भी उसी वर्ष की शुरुआत में यही राय व्यक्त की थी। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने पिछले वर्ष केंद्र सरकार से यौन संबंध के लिए सहमति की आयु को घटाकर 16 वर्ष करने का आग्रह किया था, ताकि सहमति से यौन संबंध बनाने वाले “किशोरों के साथ हो रहे अन्याय” का निवारण किया जा सके। हालांकि, पिछले वर्ष सितंबर में न्यायमूर्ति रितु राज अवस्थी की अध्यक्षता में 22वें विधि आयोग ने यह विचार व्यक्त किया था कि सहमति की मौजूदा आयु 18 वर्ष से छेड़छाड़ नहीं की जानी चाहिए।  

घाटी में धारा 370 हटाने के बाद काफी समय तक यहां शांति रही, लेकिन हाल के महीनों में मामला अलग हुआ

जम्मू पिछले कुछ दिनों से जम्मू-कश्मीर (Jammu Kashmir) के अलग-अलग इलाकों में आतंकवादी हमले हो रहे हैं. सोमवार को कठुआ में हुए आतंकी हमले में सेना के 5 जवानों के शहीद हुए हैं. अब सूत्रों के हवाले से जानकारी मिली है कि जम्मू में आतंकी हमलों को अंजाम देने के लिए जैश गुट OGW (ओवर ग्राउंड वर्कर्स) प्लान के तहत काम कर रहा है. इस प्लान के तहत लोकल सपोर्ट लेकर भारतीय सुरक्षा बलों पर ‘सरप्राइज अटैक’ किया जा रहा है. खुफिया सूत्रों से मिली जानकारी में सामने आया है कि जैश ने सुरक्षा बलों के मूवमेंट की जानकारी, हथियारों और बाकी लॉजिस्टिक सपोर्ट के लिए मुखबिरों और ओवर ग्राउंड वर्कर्स को एक्टिव करने का फरमान दिया था. कहां-कहां एक्टिव हैं जैश के आतंकी? साउथ पीर पंजाल जम्मू का इलाका है, जहां जैश के आतंकी सबसे ज्यादा है एक्टिव हैं. इंटरनेशनल बॉर्डर के उस पार “मसरूर बड़ा भाई” है, जो जैश का सबसे बड़ा लॉन्च पैड है. कुछ महीने पहले इस इलाके से घुसपैठ हुई थी. आतंकी कठुआ, सांबा और हीरानगर के इलाके में मौजूद ‘चोर गली’ का इस्तेमाल इनफिल्ट्रेशन के लिए करते हैं. ‘चोर गली’ इंटरनेशल बॉर्डर पर मौजूद एक जगह है, जो जंगलों और नदी-नालों से घिरी हुई है. इस इलाके में ISI और पाक रेंजर्स की शह पर आतंकियों की घुसपैट होती है. सूत्रों के मुताबिक कठुआ, सांबा, आरएसपुरा, अरनिया और अब्दुलिया सेक्टर के सामने पाकिस्तान की सीमा के उस पार जैश का सबसे बड़ा लॉंचिंग पैड ‘मसरूर बड़ा भाई’ मौजूद है. इसके अलावा ‘सुकमल’, ‘चपराल’ और लूनी में मौजूद लॉन्चिंग पैड के आस-पास सीमा पार आतंकियों का मूवमेंट पिछले कुछ दिनों में सुरक्षा बलों ने नोटिस किया गया था. नेशनल हाइवे से भाग निकलते हैं आतंकी सुरक्षा महकमे के सूत्रों के मुताबिक, ये सारे घुसपैठ के अड्डे इंटरनेशनल बॉर्डर (IB) के काफी नजदीक हैं. आतंकी इस इलाके से घुसपैठ करने की कोशिश इसलिए करते हैं क्योंकि यहां से महज 10 किलोमीटर की दूरी पर मौजूद नेशनल हाइवे का इस्तेमाल करके कहीं भी भाग सकते हैं. इसके साथ ही इन रास्तों के इस्तेमाल करके सरप्राइज अटैक करने के बाद जंगलों छिपा जा सकता है. कहां है ‘मसरूर बड़ा भाई’ ? यह जगह सांबा रीजन के कठुआ-हीरानगर सेक्टर में पहारपुर के पास बीएसएफ की बॉर्डर आउटपोस्ट (BOP) के दूसरी तरफ स्थित है. इस इलाके में लंबे वक्त से आतंकी घुसपैठ हो रही है. यह जगह इंटरनेशनल बॉर्डर से सिर्फ 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. जम्मू-कश्मीर में कई चीजें बदलती दिख रही हैं. धारा 370 हटाने के बाद काफी समय तक यहां शांति रही, लेकिन हाल के महीनों में मामला अलग हुआ. कश्मीर तो फिर भी शांत है, लेकिन जम्मू दहशतगर्दों का नया ठौर बनता दिख रहा है. वे नागरिकों, तीर्थयात्रियों समेत सेना पर भी घात लगाकर हमले कर रहे हैं. ताजा हमला कठुआ में हुआ. ये वही इलाका है, जो कश्मीर के सबसे अस्थिर दौर में आतंकियों की पनाहगाह बना हुआ था. लेकिन ऐसा क्या हुआ है, जो आतंकी एक बार फिर जम्मू की तरफ मुड़ रहे हैं. हमले को लेकर कई चौंकानेवाली बातें आ रही हैं. माना जा रहा है कि आतंकियों को लोकल शख्स ने ही गाइड किया होगा, वरना घटनास्थल से बचकर निकल सकना आसान नहीं. अटैक की जिम्मेदारी आतंकी संगठन कश्मीर टाइगर्स ने ली है. ये शैडो संगठन है, जो जैश-ए-मोहम्मद के लिए काम करता है. ये उन्हीं 7 आतंकियों का ग्रुप बताया जा रहा है जिनमें से 3 को डोडा में सुरक्षा बलों ने मार गिराया था. कठुआ क्यों बन रहा टारगेट नब्बे के दौरान कठुआ आतंकियों का बड़ा ठिकाना हुआ करता था, जहां से वे पूरे जम्मू-कश्मीर पर निशाना साधते. अब एक बार फिर ऐसा दिख रहा है. दरअसल इस जिले की बनावट ऐसी है कि यहां छिपना-छिपाना आसान है. जंगलों से सटे क्षेत्र में हमले के बाद आतंकी गायब हो सकते हैं, जैसा ताजा केस में दिख रहा है. लेकिन एक बड़ी वजह और भी है, जो है इसकी जिओग्राफी. जिले के एक तरफ पाकिस्तान की सीमा सटती है, तो दूसरी तरफ हिमाचल और पंजाब हैं. कठुआ उधमपुर, सांबा और डोडा जिलों से भी लगा हुआ है. नब्बे के दशक में यहां सुरक्षा बलों का बेस भी हुआ करता था ताकि आतंक पर रोक लगाई जा सके. क्या-क्या हो चुका जिले में सोमवार को हुआ हमला कठुआ में दूसरा बड़ा अटैक है. 11 जून को हीरानगर के एक गांव में एक सुरक्षाकर्मी समेत दो आतंकी मारे गए थे. वहीं महीनेभर के भीतर जम्मू में यह सातवां अटैक है. इसकी शुरुआत 9 जून को हुई, जब टैररिस्ट्स ने रियासी में श्रद्धालुओं की बस को टारगेट किया था. दो दिनों के हीरानगर में हमला हुआ. 12 जून को डोडा में दो अटैक हुए थे. इसके बाद 26 जून को घटना दोहराई गई. पिछले साल जम्मू में 40 से ज्यादा हमले साफ दिख रहा है कि कश्मीर में तो शांति है, लेकिन आतंकवादी जम्मू को घेर रहे हैं. इसके पीछे एक बड़ी वजह ये है कि धारा 370 हटने के बाद से घाटी में सुरक्षाबल भारी संख्या में बना हुआ है. वहां सेंध लगाना बेहद मुश्किल है. शायद इसी वजह से पाकिस्तान स्थित आतंकी जम्मू को निशाना बनाने की कोशिश में हैं. बता दें कि साल 2023 में भी ऐसी कोशिश हुई थी, जब जम्मू में 43 टैरर अटैक दर्ज किए गए. मॉनसून में बढ़ जाती है आतंकी गतिविधि! बरसात में मामला और संवेदनशील हो जाता है. इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के अनुसार, तेज बारिश के दौरान मॉनिटरिंग सिस्टम पर असर होता है, जैसे फेंसिंग और इंफ्रारेड लाइट्स कमजोर या खराब हो जाती हैं. इसका फायदा आतंकी उठाते हैं और सीमा पार से आकर आतंक मचा जाते हैं. आबादी भी हो सकती है एक वजह कश्मीर की तुलना में जम्मू की डेमोग्राफी अलग है. यहां हिंदू-मुस्लिम प्रतिशत 60:40 का मान सकते हैं. ऐसे में टैररिस्ट जानकर जिले को निशाना बना रहे हैं ताकि सांप्रदायिक भावनाएं उकसाकर दंगों जैसे हालात पैदा कर सकें. इससे उनकी आवाजाही और आसान हो जाएगी. होने वाले हैं विधानसभा चुनाव आर्टिकल 370 हटने के बाद से पहली बार यहां विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. जल्द ही इनकी तारीख फाइनल हो जाएगी. आतंकवादी गुट इसलिए भी क्षेत्र … Read more

14 उत्पादों की बिक्री रोक दी है, जिनके निर्माण लाइसेंस अप्रैल में निलंबित हुए थे, पतंजलि ने सुप्रीम कोर्ट में बताया

नई दिल्ली बाबा रामदेव की पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि उसने उन 14 उत्पादों की बिक्री रोक दी है, जिनके निर्माण लाइसेंस उत्तराखंड राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरण ने अप्रैल में निलंबित कर दिए थे। कंपनी ने जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ को बताया कि उसने 5,606 फ्रेंचाइजी स्टोर को इन उत्पादों को वापस लेने का निर्देश दिया है। पतंजलि आयुर्वेद ने कहा कि मीडिया प्लैटफॉर्म्स को भी इन 14 उत्पादों के सभी विज्ञापन वापस लेने का निर्देश दिया गया है। पीठ ने पतंजलि आयुर्वेद को दो हफ्ते के भीतर एक हलफनामा दायर कर यह बताने का निर्देश दिया कि क्या विज्ञापन हटाने के लिए सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म्स से किए गए अनुरोध पर अमल किया गया है और क्या इन 14 उत्पादों के विज्ञापन वापस ले लिए गए हैं। पीठ ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 30 जुलाई की तारीख तय की। सुप्रीम कोर्ट में भारतीय चिकित्सा संघ (आईएमए) की ओर से दायर उस याचिका पर सुनवाई हो रही है, जिसमें पतंजलि पर कोविड टीकाकरण अभियान और आधुनिक चिकित्सा प्रणालियों के खिलाफ दुष्प्रचार अभियान चलाने का आरोप लगाया गया है। उत्तराखंड राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरण ने न्यायालय को बताया था कि पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड और दिव्य फार्मेसी के 14 उत्पादों के निर्माण लाइसेंस को ‘तत्काल प्रभाव से निलंबित’ कर दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने भ्रामक विज्ञापन मामले में योग गुरु रामदेव, उनके सहयोगी बालकृष्ण और पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड को जारी अवमानना ​​नोटिस पर 14 मई को अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी कई उत्पादों के विज्ञापन प्रकाशित करने को लेकर कोर्ट ने  कड़ी फटकार लगाई थी। इसके बाद पतंजलि ने एक सार्वजनिक माफीनामा प्रकाशित करवाकर कहा था कि यह गलती दोहराई नहीं जाएगी।  

बारिश का दौर अगले दो तीन दिनों तक जारी रहेगा, कहीं होगी राहत तो कहीं पर पानी-पानी

नई दिल्ली दिल्ली समेत पश्चिम यूपी और कई अन्य इलाकों में आज सुबह फिर से बारिश हुई है। कई दिनों तक मौसम खुशनुमा रहने के बाद रात से ही थोड़ी उमस बढ़ी थी और अब बारिश ने फिर से राहत दी है। इस बीच मौसम विभाग ने अनुमान जाहिर किया है कि अगले कुछ दिनों तक यह राहत जारी रह सकती है। मंगलवार को जारी अनुमान के मुताबिक असम, मणिपुर समेत पूर्वोत्तर के राज्यों में भारी बारिश का दौर अगले दो तीन दिनों तक जारी रहेगा। बाढ़ से जूझ रहे पूर्वोत्तर भारत के लिए यह चिंता की बात है। हालांकि गर्मी से जूझ रहे दिल्ली, यूपी जैसे राज्यों के लिए बारिश का जारी रहना खुशखबरी जैसा है। इसके अलावा बंगाल, झारखंड और बिहार जैसे पूर्वी राज्यों में भी अगले 2 से 3 दिन अच्छी बारिश होगी। इसके बाद बारिश कम हो जाएगी। वहीं पश्चिमी भारत में महाराष्ट्र, गोवा और तटीय कर्नाटक में अच्छी अगले 5 दिनों तक अच्छी बारिश होगी। गोवा में अच्छी खासी बारिश होने की संभावना है। पहले ही यहां लगातार बारिश हो रही है और इससे मुंबई-गोवा एक्सप्रेसवे को भी नुकसान पहुंचा है। यही नहीं उत्तर प्रदेश के लिए भी अच्छी खबर है। मौसम विभाग का कहना है कि अगले 5 दिनों तक बारिश का दौर जारी रहेगा। यही नहीं मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में भी बारिश का मौसम बना रहेगा। पश्चिम उत्तर भारत कहलाने वाले जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर में भी रुक-रुक कर बारिश होगी। उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ के अलावा राजस्थान में भी लगातार 5 दिनों तक बारिश का अनुमान है। इस तरह मॉनसून ने पूरे देश को कवर कर लिया है। फिलहाल मॉनसून अपने सबसे अच्छे दौर में चल रहा है। यूपी की बात करें तो पश्चिम से लेकर अवध, पूर्वांचल और बुंदेलखंड तक में रुक-रुक कर बारिश का दौर जारी है। इसके चलते फसलों की बुआई भी शुरू हो चुकी है। खासतौर पर ऐसे इलाकों के लिए मॉनसूनी बारिश बड़ी राहत लाती है, जहां सिंचाई के लिए मॉनसून पर ही निर्भरता है। मौसम विभाग का कहना है कि मध्य प्रदेश में 9 से 13 तारीख तक अच्छी बारिश होगी। इसके अलावा पूर्वी यूपी में 10 से 13 तक भारी बारिश का अनुमान है। उत्तराखंड में 10 से 12 जुलाई और हिमाचल प्रदेश एवं पश्चिम यूपी में 11 और 12 जुलाई को भारी बारिश का अनुमान है। जम्मू, उत्तर हरियाणा और उत्तर पंजाब में 12 जुलाई को अच्छी बारिश की संभावना है। पूर्वी राजस्थान में 9 से 11 जुलाई तक बारिश जारी रहेगी। इसके अलावा पश्चिमी राजस्थान और छत्तीसगढ़ में भी 11 से 13 जुलाई तक बारिश रहेगी।    

देवेंद्र फडणवीस पर बड़ा जिम्मा, महाराष्ट्र में 11 विधान परिषद सीटों के लिए 12 जुलाई को मतदान होना है

महाराष्ट्र महाराष्ट्र में 11 विधान परिषद सीटों के लिए 12 जुलाई को मतदान होना है। यह चुनाव रोचक हो गया है क्योंकि 11 सीटों के लिए 12 कैंडिडेट उतारे गए हैं। ऐसे में चर्चा तेज है कि क्रॉस वोटिंग की कोशिश भी हो सकती है। ऐसे में विपक्ष का महाविकास अघाड़ी गठबंधन अलर्ट हो गया है और वोटिंग से पहले ही विधायकों को रिजॉर्ट भेजा जा सकता है ताकि एनडीए के नेता उनसे संपर्क न साध सकें। कांग्रेस, उद्धव सेना और शरद पवार की एनसीपी के विधायकों को होटलों में रखने की योजना है। खासतौर पर उद्धव सेना के विधायकों से कहा जा सकता है कि वे चुनाव से पहले साथ रहें। इसी तरह सीएम एकनाथ शिंदे की शिवसेना और अजित पवार की एनसीपी के विधायकों को भी एक ही होटल में ठहराया जा सकता है। ऐसा इसलिए होगा ताकि चुनाव से पहले हॉर्स ट्रेडिंग न हो। विधायकों की टूट का डर इस बार दोनों ही तरफ बराबर है। लोकसभा चुनाव में एनडीए को 17 सीटें ही मिलने के बाद ऐसे तमाम नेता हैं, जिनका अब मन बदल रहा है। ऐसे में विधानसभा चुनाव से पहले कई विधायक अपनी वफादारी दूसरे नेता के प्रति दिखा सकते हैं। इसलिए एनडीए से लेकर महाविकास अघाड़ी तक में सतर्कता का माहौल है। दो दिन पहले ही सीएम एकनाथ शिंदे, डिप्टी सीएम देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार की मीटिंग हुई थी। इस मीटिंग में तीनों दलों ने संयुक्त रणनीति पर विचार किया। इसके अलावा वोटिंग पैटर्न तय करने का फैसला किया है। बैठक में इस बात पर निर्णय लिया गया कि तीनों दलों को प्रथम और द्वितीय वरीयता के वोट कैसे दिए जाएंगे। दरअसल 2022 में भाजपा ने राज्यसभा और विधान परिषद के चुनावों में अच्छा प्रदर्शन किया था। तब कमान देवेंद्र फडणवीस के हाथों में थी। उस अनुभव को देखते हुए इस बार भी एनडीए की कमान फडणवीस को ही दी गई है। भाजपा ने 2022 में पर्याप्त संख्या न होने के बावजूद 3 राज्यसभा सीटें और 5 विधान परिषद सीटें जीती थीं। बता दें कि कुल 11 सीटों के लिए जो 12 कैंडिडेट उतरे हैं, उनमें से 5 भाजपा के हैं। इसके अलावा दो-दो उम्मीदवार एकनाथ शिंदे की शिवसेना और अजित पवार के हैं। विपक्ष के महाविकास अघाड़ी के तीनों दलों ने एक-एक कैंडिडेट उतारा है।    

यूक्रेन में संयुक्त राष्ट्र चार्टर और यूक्रेन की क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करना होगा, रत ने दिया करारा जवाब

रूस पीएम मोदी की रूस यात्रा वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय बनी हुई है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने  भारतीय प्रधानमंत्री मोदी के रूस दौरे पर पूछे गए सवाल पर कहा कि हमनें भारत सहित सभी देशों से कहा था कि अगर वह रूस से बात करते हैं तो यह बात स्पष्ट तौर पर रखें कि यूक्रेन में संघर्ष के समाधान के लिए संयुक्त राष्ट्र चार्टर और यूक्रेन की क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करना होगा। अब भारत की तरफ से इसका जबाव दिया गया है। सरकारी सूत्रों के अनुसार भारत की तरफ से कहा गया है कि भारत ने रूस-यूक्रेन संघर्ष के संदर्भ में संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता सहित संयुक्त राष्ट्र चार्टर का सम्मान करने का आह्वान किया है और इस बात पर जोर दिया है कि समाधान युद्ध के मैदान पर नहीं पाया जा सकता है। युक्रेन के मुद्दे पर भारत ने रूस से दोहराई पुरानी बात पीएम मोदी लगभग 5 वर्षों के बाद रूस की अपनी पहली यात्रा पर गए हुए हैं। कल उन्होंने राष्ट्रपति पुतिन के घर पर अनौपचारिक रूप से डिनर में  हिस्सा लिया, जिसमें दोनों नेताओं के बीच में बेहतर बातचीत हुई, जो लगभग दो घंटे तक चल। सूत्रों के मुताबिक यूक्रेन संघर्ष को लेकर भी दोनों नेताओं ने बात की। भारत ने हमेशा ही क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता सहित संयुक्त राष्ट्र चार्टर का सम्मान करने के लिए कहा है। युद्ध के मैदान पर कोई भी समाधान नहीं है। संवाद और कूटनीति के अनुसार ही आगे बढ़ने का रास्ता है। हमेशा डिप्लोमैटिक समाधान के पक्ष में रहा है भारत सूत्रों के अनुसार भारतीय पक्ष ने सोमवार को यह स्पष्ट कर दिया था कि मोदी की यात्रा का ध्यान आर्थिक एजेंडे पर होगा जिसमें ऊर्जा, उर्वरक, व्यापार और इन्फ्रास्ट्क्चर निर्माण में द्विपक्षीय सहयोग शामिल होगा। यूक्रेन संघर्ष को लेकर भारतीय पक्ष इस बात पर जोर देगा कि युद्ध के मैदान पर समाधान नहीं खोजा जा सकता है। पीएम मोदी ने आखिरी बार सितंबर 2022 में SCO की बैठक के दौरान कहा था कि यह युद्ध का युग नहीं है, भारत हमेशा से ही इस संघर्ष के डिप्लोमैटिक समाधान के पक्ष में रहा है।

बीजेपी के नेता के दामाद ने जहर खाकर जान, गाड़ी में ही जहर खाया

बेंगलुर कर्नाटक सरकार में पूर्व मंत्री रहे और भाजपा नेता के दामाद प्रताप ने आज दोपहर जहर खाकर आत्महत्या कर ली। प्रताप, जिनकी शादी बीसी पाटिल की बड़ी बेटी से हुई थी, ने आज दोपहर 3:30 बजे दावणगेरे के होन्नाली तालुक के अरकेरे में एक जंगल के पास अपनी कार में जहर खा लिया। ऐसा करने के बाद, उसने अपने परिवार को फोन करके अपने इरादे बताए। पुलिस सतर्क हो गई और उसे होन्नाली अस्पताल ले गई। बाद में उन्हें शिवमोग्गा के मैकगैन अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया, जहां उनका निधन हो गया। उन्होंने कोई सुसाइड नोट नहीं छोड़ा, पुलिस उस कारण की जांच कर रही है जिसके कारण उन्होंने आत्महत्या कर ली। 2008 में हुई थी बीजेपी नेता की बेटी से शादी पुलिस के अनुसार, बीजेपी नेता बी सी पाटिल की बड़ी बेटी सौम्या की शादी 2008 में प्रताप कुमार से हुई थी। प्रताप अपने ससुर के कारोबार और राजनीति में मदद करते थे। शादी के काफी दिन बाद भी उन्हें संतान नहीं हुई, इससे प्रताप दुखी रहने लगे। उन्होंने शराब पीना शुरू कर दिया और उनकी सेहत खराब होने लगी। शराब की आदत और मानसिक परेशानियों के कारण 43 साल के प्रताप डिप्रेशन में चले गए। दावणगेरे पुलिस अधीक्षक उमा प्रशांत ने बताया कि सोमवार को दोपहर करीब साढे तीन बजे प्रताप अपनी कार से दावणगेरे जिले के होन्नाली के जंगलों में चले गए। वहां उन्होंने हरिहरा-शिवमोग्गा हाइवे पर कार में बैठकर जहर खा लिया। एसपी ने बताया कि स्थानीय लोगों ने उन्हें कार में तड़पते देखा। वे प्रताप कुमार को शिवमोग्गा के मेगन अस्पताल ले गए, जहाँ उसने अंतिम सांस ली। कर्नाटक सरकार में मंत्री रहे हैं बी सी पाटिल बीजेपी नेता बी सी पाटिल ने कहा कि प्रताप उनके बेटे की तरह था, जिसने उनकी पॉलिटिक्स और कारोबार को संभाल रखा था। बता दें कि बी सी पाटिल कन्नड़ फिल्मों के सफल अभिनेता भी रहे। बाद में उन्होंने राजनीति में कदम रखा। वह बी एस येदियुरप्पा की सरकार में फरवरी 2020 से मई 2023 तक कृषि राज्य मंत्री भी रहे। बीसी पाटिल की दो बेटियाँ हैं, सौम्या और सृष्टि। आत्महत्या करने वाले प्रताप उनकी बड़ी बेटी के पति थे। सूत्रों के मुताबिक प्रताप ने जहर खाने के बाद अपने परिवार को फोन करके इसकी जानकारी दी। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और प्रताप को पहले होन्नाली अस्पताल ले गई। उसके बाद पुलिस ने पीड़ित को शिवमोग्गा के मैकगैन अस्पताल में भर्ती करा दिया, जहां उसकी मृत्यु हो गई। उसकी कार से जहर की शीशी भी बरामद हुई है। पुलिस के मुताबिक, आत्महत्या का कारण अभी तक पता नहीं चल पाया है। होन्नल्ली पुलिस ने शिकायत दर्ज कर ली है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है।

नमो भारत ट्रेन का मोदीनगर नॉर्थ स्टेशन से मेरठ साउथ स्टेशन तक संचालन जल्द शुरू होगा, 42 KM का सफर चंद मिनटों में

नई दिल्ली नमो भारत ट्रेन जल्द ही साहिबाबाद से मेरठ तक दौड़ती दिखेगी और इसमें यात्रा के बाद घंटों का सफर चंद मिनटों में पूरा हो जाएगा। नमो भारत ट्रेन का मोदीनगर नॉर्थ स्टेशन से मेरठ साउथ स्टेशन तक संचालन जल्द शुरू किया जाएगा। एनसीआरटीसी प्रबंध निदेशक शलभ गोयल ने सोमवार को मेरठ साउथ स्टेशन से लेकर सराय काले खां स्टेशन दिल्ली तक आरआरटीएस कॉरिडोर के निरीक्षण के दौरान यह बात कही। गोयल ने कहा कि मेरठ साउथ स्टेशन तैयार हो चुका है और जल्द यहां नमो भारत का संचालन शुरू होगा। तैयारियों को परखते हुए पार्किंग का भी जायजा लिया। उन्होंने कहा कि इसी स्टेशन से मेरठ मेट्रो की शुरुआत होगी, जो मेरठ साउथ से मोदीपुरम तक मेरठवासियों के जीवन को आरामदायक बनाएगी। इस स्टेशन में तीन प्लैटफॉर्म बनाए गए हैं, जिनमें से दो प्लैटफॉर्म नमो भारत ट्रेनों के लिए और एक प्लैटफॉर्म मेरठ मेट्रो के लिए होगा। नमो भारत में सफर के बाद लोग कुछ ही मिनटों में मेरठ साउथ से गाजियाबाद तक पहुंच सकेंगे। वर्तमान में मोदीनगर नॉर्थ से मेरठ साउथ स्टेशन के बीच नमो भारत ट्रेनों का ट्रायल रन जारी है। इसके बाद उन्होंने मोदीनगर नॉर्थ से साहिबाबाद तक कॉरिडोर का जायजा लिया। स्वच्छता बढ़ाने पर जोर एनसीआरटीसी के एमडी शलभ गोयल ने यात्रियों के साथ यात्री केंद्रित सुविधा और सुरक्षा जैसे पुश बटन, पीएसडी और इनसाइड स्ट्रेचर स्पेस और ट्रेन की तीव्र रफ्तार का अनुभव किया। इसके साथ स्टेशनों की स्वच्छता की सराहना करते हुए अधिकारियों से कहा कि स्वच्छता के स्तर को दिनों दिन बेहतर से बेहतर बनाने के लिए कदम उठाते रहना चाहिए। वर्तमान में साहिबाबाद से मोदीनगर नॉर्थ तक 34 किमी के सेक्शन में 8 स्टेशनों पर नमो भारत ट्रेनों का संचालन जारी है। मोदीनगर नॉर्थ से आगे मेरठ साउथ तक नमो भारत सेवाएं शुरू होने के बाद आरआरटीएस के परिचालित सेक्शन की लंबाई 42 किलोमीटर हो जाएगी।  

10 दिनों में 2 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने किये बाबा बर्फानी के दर्शन

श्रीनगर  29 जून को शुरू हुई अमरनाथ यात्रा में अब तक दो लाख से ज्यादा श्रद्धालु बाबा बर्फानी के दर्शन कर चुके हैं। मंगलवार को 5,433 यात्रियों का एक और जत्था घाटी के लिए रवाना हुआ। श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड के अधिकारियों ने बताया कि पिछले 10 दिनों में दो लाख से ज्यादा यात्रियों ने अमरनाथ यात्रा की है। आधार शिविर भगवती नगर जम्मू से 5,433 तीर्थयात्रियों का एक और जत्था रवाना हुआ। 89 वाहनों में 1,971 यात्रियों को लेकर पहला सुरक्षा काफिला मंगलवार की सुबह 3:13 बजे उत्तरी कश्मीर के बालटाल आधार शिविर के लिए रवाना हुआ। अधिकारियों ने कहा, 124 वाहनों में 3,462 यात्रियों को लेकर दूसरा सुरक्षा काफिला मंगलवार को सुबह 4:03 बजे दक्षिण कश्मीर के नुनवान (पहलगाम) आधार शिविर के लिए रवाना हुआ। मौसम विभाग ने दोनों यात्रा मार्गों पर आंशिक रूप से बादल छाए रहने और दिन में हल्की बारिश की संभावना का अनुमान लगाया है। तीर्थयात्री या तो 48 किलोमीटर लंबे पारंपरिक पहलगाम गुफा मंदिर मार्ग या 14 किलोमीटर लंबे छोटे बालटाल गुफा मंदिर मार्ग से यात्रा करते हैं। पहलगाम मार्ग से जाने वालों को गुफा मंदिर तक पहुंचने में चार दिन लगते हैं, जबकि बालटाल मार्ग का उपयोग करने वाले लोग गुफा मंदिर के अंदर दर्शन करने के बाद उसी दिन आधार शिविर में वापस आ जाते हैं। समुद्र तल से 3,880 मीटर की ऊंचाई पर स्थित अमरनाथ गुफा को दुनिया भर के लाखों हिंदू भगवान शिव के घर के रूप में पूजते हैं। इस साल लगभग 300 किलोमीटर लंबे जम्मू-श्रीनगर राजमार्ग पर, दोनों यात्रा मार्गों, दो आधार शिविरों और गुफा मंदिर पर सुरक्षा के व्यापक प्रबंध किए गए हैं, ताकि यात्रा सुचारु और दुर्घटना मुक्त रहे। दोनों मार्गों पर 124 से ज्यादा लंगर स्थापित किए गए हैं। वहीं 7,000 से ज्यादा सेवादार यात्रियों की सेवा कर रहे हैं। यात्रियों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए, रेलवे ने अतिरिक्त ट्रेनें चला रही है। दोनों मार्गों पर यात्रियों के लिए हेलीकॉप्टर सेवाएं भी उपलब्ध हैं। अमरनाथ यात्रा 19 अगस्त को समाप्त होगी। डिस्क्लेमरः यह आईएएनएस न्यूज फीड से सीधे पब्लिश हुई खबर है. इसके साथ न्यूज नेशन टीम ने किसी तरह की कोई एडिटिंग नहीं की है. ऐसे में संबंधित खबर को लेकर कोई भी जिम्मेदारी न्यूज एजेंसी की ही होगी.

मोदी का पुतिन से मिलना शांति के लिए किए जा रहे प्रयासों के लिए एक विनाशकारी घटना है: जेलेंस्की

कीव पीएम नरेंद्र मोदी फिलहाल रूस के दौरे पर हैं, जहां उन्होंने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की। इस दौरान व्लादिमीर पुतिन ने प्रधानमंत्री का गर्मजोशी से स्वागत किया और गले लग गए। इस बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने इस मुलाकात पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि यह मुलाकात ऐसे समय में हुई, जब रूस के हमले में 40 लोग मारे गए। इस हमले में कैंसर के मरीजों और बच्चों तक को नहीं छोड़ा गया। दरअसल पीएम नरेंद्र मोदी के रूस दौरे के वक्त ही यूक्रेन के एक बच्चों के अस्पताल पर हमला हुआ है। हमले के बाद जेलेंस्की ने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘ऐसे समय में जब रूस लगातार यूक्रेन पर हमले कर रहा है तब दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के नेता का वहां जाकर दुनिया के सबसे बड़े अपराधी के साथ गले मिलना बहुत ही दुखद है। यह शांति के लिए किए जा रहे प्रयासों के लिए एक विनाशकारी घटना है।’ दो दिवसीय दौरे पर हैं पीएम मोदी पीएम मोदी रूस में भारत और रूस के बीच होने वाली 22वीं वार्षिक समिट में हिस्सा लेने के लिए रूस पहुंचे हुए हैं। रूस की तरफ से पीएम मोदी को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। राष्ट्रपति पुतिन ने पीएम को अपने आवास पर डिनर के लिए बुलाया, जहां पर दोनों नेताओं के बीच में अनौपचारिक बातचीत हुई। पुतिन ने पीएम मोदी को लोकसभा चुनावों में जीत दर्ज करने के लिए बधाई दी तो वहीं मोदी ने बातचीत के लिए रूस बुलाने पर राष्ट्रपति का धन्यवाद दिया। दो सालों से जारी है रूस यूक्रेन युद्ध फरवरी 2022 में रूस ने यूक्रेन पर हमला बोल दिया था। शुरुआत में दुनिया को लगा कि रूसी सेना के सामने यूक्रेन जल्दी ही घुटने टेक देगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ। यूक्रेन लगातार रूस से टक्कर लेता रहा। इस युद्ध के दौरान पश्चिमी देशों ने भी यूक्रेन की काफी मदद की। भारत ने शुरूआत से ही इससे दूरी बनाए रखी और दोनों देशों को डिप्लोमेसी के जरिए विवाद सुलझाने के लिए कहा। 2022 में SCO की बैठक के दौरान पीएम मोदी ने पुतिन से कहा कि यह “युद्ध का युग नहीं है।” पीएम मोदी की यह बात पश्चिमी देशों को खूब पसंद आई। भारत ने इस दौरान कभी भी रूस की तीखी आलोचना नहीं की। पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों के बाद भी भारत लगातार रूस से अपने व्यापारिक संबंधों को बचाने में कामयाब रहा और पश्चिमी देशों को यह समझाने में कामयाब रहा कि रूस के साथ बेहतर संबंध भारत की अर्थव्यवस्था के लिए जरूरी है।

पश्चिमी देश रूस के साथ भारत के बढ़ते संबंधों से असंतुष्ट, चीन दोनों के करीबी रिश्तों को खतरे के रूप में नहीं देखता – ग्लोबल टाइम्स

बीजिंग पीएम मोदी के रूस दौरे पर पड़ोसी चीन का बयान सामने आया है। चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है कि भारतीय पीएम नरेंद्र मोदी की इस रूस यात्रा को पश्चिमी देश  आशंका के साथ देख रहे हैं। वह यह उम्मीद कर रहे हैं कि चीन के साथ रूस के बढ़ते संबंध संभावित रूप से भारत और रूस के संबंधों में तनाव पैदा कर सकते हैं। इससे नई दिल्ली को लेकर पश्चिम का नजरिया उजागर हो रहा है। कुछ अमेरिकी मीडिया आउटलेट्स ने इस संबंध में दावा किया है कि मोदी की रूस यात्रा यह सुनिश्चित करने के लिए है कि रूस अब चीन के और करीब न जा पाए। रूस- भारत के करीबी रिश्तों को खतरे की तरह नहीं देखता चीन ग्लोबल टाइम्स ने लिखा कि पश्चिम भारत के रूस के साथ गहरे होते संबंधों से अधिक चिंतित है, जबकि चीन, भारत और रूस के करीबी संबंधों को खतरे के रूप में नहीं देखता है, जबकि पश्चिमी देश रूस के साथ भारत के बढ़ते संबंधों से असंतुष्ट हैं। रूस-यूक्रेन संघर्ष को लेकर चीन को अमेरिका और पश्चिम से दबाव और आलोचना का सामना करना पड़ा है तो उसके विपरीत भारत को रूस की निंदा न करने या प्रतिबंध न लगाने को लेकर कम आलोचना का सामना करना पड़ा। इसकी बजाय भारत ने रूस से संबंध बनाए रखे और रूस से तेल खरीदकर उसे यूरोपीय देशों को बेचकर खूब लाभ कमाया है। दबाव के बाद भी रूस आए पीएम मोदी टाइम्स ने लिखा कि पश्चिमी दबाव के बावजूद भी भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने तीसरे कार्यकाल को शुरू करने के बाद पहली द्विपक्षीय विदेश यात्रा के लिए रूस गए। विश्लेषकों के अनुसार, उनके इस कदम का उद्देश्य न केवल रूस के साथ भारत के संबंधों को मजबूत करना है, बल्कि अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों के दबाव से निपटने में भारत की ताकत को भी बढ़ाना है। भारत की विदेश नीति तारीफ के योग्य टाइम्स ने लिखा कि वर्तमान में पश्चिमी देश भारत, चीन और रूस के बीच कलह करवाने का प्रयास कर रहा है। पश्चिम और रूस दोनों के साथ भारत के संबंध एक जटिल अंतर्राष्ट्रीय परिदृश्य को दर्शाते हैं, जो इस कठिन वैश्विक माहौल में संतुलन तलाश करने की कोशिश कर रहे हैं और इसके साथ-साथ में अपने हितों को भी साधने की कोशिश कर रहे हैं। पश्चिम उम्मीद कर रहा था कि भारत उनके साथ गठबंधन करके रूस के खिलाफ खड़ा है लेकिन ऐसा नहीं है, इसके लिए पश्चिम ने भारत पर दबाव बनाने की भी कोशिश की लेकिन वह सफल नहीं हो पाया। भारत की विदेश नीति किसी भी पक्ष में पूरी तरह न झुककर अपने हितों को साधने की है। यह दोनों तरफ संतुलन बनाए रखने का प्रयास करती है।  

अदालत ने कहा समलैंगिक विवाह मामले में याचिकाओं पर खुले मंच पर सुनवाई नहीं होगी

नई दिल्ली  समलैंगिक विवाह को लेकर देश की सर्वोच्च अदालत ने एक बड़ा फैसला लिया है। दरअसल, अदालत ने पिछले वर्ष इस मामले में सुनवाई की थी। अदालत ने उस दौरान समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता देने से इनकार कर दिया था। अब अदालत का कहना है कि इस मामले में याचिकाओं पर खुले मंच पर सुनवाई नहीं होगी। अलग चैंबर में होगी मामले की सुनवाई इससे पहले मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षा में पांच न्यायाधीशों की पीठ ने 17 अक्तूबर को समलैंगिक विवाह को कानूनी तौर पर वैधता देने से इनकार कर दिया था। पांच न्यायाधीशों की पीठ में मुख्य न्यायाधीश के अलावा न्यायमूर्ति संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति हिमा कोहली, न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना और न्यायमूर्ति पी एस नरसिम्हा भी शामिल थे। शीर्ष अदालत में 10 जुलाई को एक अलग चैंबर में समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता देने से इनकार करने वाले फैसले की समीक्षा की मांग वाली याचिका पर सुनवाई होगी। ‘विधायी मामलों में हस्तक्षेप नहीं कर सकती अदालत’ वरिष्ठ वकील अभिषेक सिंघवी और एनके कौल ने अदालत में इस मामले पर जोर डालते हुए अनुरोध किया था कि मुख्य न्यायाधीश को खुले मंच पर याचिकाओं की समीक्षा करनी चाहिए। इसके जवाब में मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि इस मामले में संविधान पीठ द्वारा समीक्षा की जाएगी और इसे चैंबर में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है। पीठ ने कहा कि समलैंगिकों के पास वैधानिक प्रावधानों के तहत विवाह करने का हक है। अदालत ने यह भी कहा कि इस तरह की अनुमति सिर्फ कानून के जरिए ही दी जा सकती है और कोर्ट द्वारा विधायी मामलों में हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता। मामले से जुड़ी 21 याचिकाओं पर सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में पांच न्यायाधीशों की पीठ ने समलैंगिक मामलों से जुड़ी 21 याचिकाओं पर सुनवाई की। पीठ ने समलैंगिक विवाह को विशेष विवाह अधिनियम में शामिल करने से इनकार किया है। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा है कि ऐसे मामलों में कानून में बदलाव लाना, संसद के अधिकार क्षेत्र में आता है। प्रधान न्यायाधीश ने केंद्र, राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि समलैंगिक समुदाय के साथ भेदभाव नहीं किया जाए।  

भारत ने क्रिकेट इंडस्ट्री खड़ी कर ली और हम तो…PSL की उड़ाई धज्जियां: राशिद लतीफ

नई दिल्ली पाकिस्तान के पूर्व कप्तान राशिद लतीफ ने अपने देश के क्रिकेट ढांचे में खामियों को लेकर नाराजगी का इजहार किया है। उन्होंने खुलासा किया कि कैसे पाकिस्तान क्रिकेट को मैनेज करने में नाकाम रहा। लतीफ ने भारत में क्रिकेट मैनेजमेंट की तारीफ की है। उन्होंने कहा कि भारत ने एक क्रिकेट इंडस्ट्री खड़ी करने में कामयाबी हासिल की जबकि पाकिस्तान ऐसा करने में बुरी तरह विफल रहा। बता दें कि इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) पैसे के लिहाज से दुनिया की सबसे बड़ी  क्रिकेट लीग। आईपीएल ग्लोबल ब्रांड चुका है, जिसमें बड़े-बड़े खिलाड़ी खेलने के लिए बेकरार रहते हैं। वहीं, पाकिस्तान सुपर लीग (पीएसएल) का स्तर वैसा नहीं। लतीफ का दर्द टी20 वर्ल्ड कप 2024 समाप्त होने के बाद छलका है। भारत ने टूर्नामेंट जीतकर 11 साल का आईसीसी ट्रॉफी का सूखा खत्म किया है। दूसरी ओर, पाकिस्तान टीम लीग चरण से ही बाहर हो गई थी। न्यूज18 की रिपोस्ट के अनुसार, लतीफ ने कहा, ”भारत ने अपनी फिल्म इंडस्ट्री की तरह क्रिकेट क्रिकेट इंडस्ट्री भी विकसित की है। हम क्रिकेट को एक शौक के रूप में देखते हैं, इसलिए हम इसे बिजनेस में नहीं बदल पाए। पीएसएल अभी भी वहीं है, जहां से इसकी शुरुआत हुई थी। हाईएस्ट सैलरी 1.40 लाख डॉलर है। वे इसे और आगे क्यों नहीं बढ़ा सकते? हमारी लीग में मिचेल स्टार्क या पैट कमिंस जैसे खिलाड़ी क्यों नहीं हो सकते? क्योंकि हमारे पास पैसे नहीं हैं, इसलिए कोई बिजनेस नहीं है।” पूर्व कप्तान ने आगे कहा, ”ऐसा नहीं है कि भारत हाल ही में वर्ल्ड कप के बाद विश्व क्रिकेट में एक बड़ी ताकत बना है। 2007, 2011, 2015 को देखें तो उन्होंने विदेशी कोचों से बहुत ज्ञान प्राप्त किया है। साथ ही वे बिना किसी की नजर में आए जमीनी स्तर पर काम कर रहे हैं। और फिर आईपीएल आया। और अब उनके पास सभी बेहतरीन दिमाग हैं। उनके पास डीसी, हसी और ब्रावो के साथ पोंटिंग हैं। लेकिन हम क्या कर रहे हैं।” लतीफ ने कहा कि पीएसल की तुलना में बांग्लादेश प्रीमियर लीग (बीपीएल) भी काफी आगे बढ़ चुकी है। उन्होंने कहा कि बीपीएल में पीएसल से ज्यादा विदेशी खिलाड़ी खेलते हैं। लतीफ ने कहा, ”जिन लोगों ने पीएसएल की परिकल्पना की थी, उन्हें एक साल के भीतर ही बाहर निकाल दिया गया। उनके पास इसे विस्तार देने का विजन था, लेकिन ऐसा कभी नहीं हुआ। हमारे यहां से ज्यादा विदेशी खिलाड़ी बांग्लादेश में खेल रहे हैं। मोईन अली और डेविड मिलर वहां हैं क्योंकि उनके पास पैसा है। हम आगे नहीं बढ़ सके।”  

दुनिया की सबसे बड़ी इकॉनमी अमेरिका पर फिर से मंदी के बादल मंडरा रहे, कोरोना महामारी के बाद सबसे तेज गिरावट

न्यूयॉर्क दुनिया की सबसे बड़ी इकॉनमी अमेरिका पर फिर से मंदी के बादल मंडरा रहे हैं। जून में देश में सर्विसेज एक्टिविटी में कोरोना महामारी शुरू होने के बाद सबसे तेज गिरावट रही। देश का आईएसएम सर्विसेज पीएमआई इंडेक्स बीते महीने पांच अंक गिरकार 48.8 पर आ गया है। इसके 52.5 रहने की उम्मीद की जा रही थी। बिजनस एक्टिविटी इंडेक्स में गिरावट के कारण ऐसा हुआ। यह इंडेक्स जून में 11.6 अंक की गिरावट के साथ अप्रैल 2020 के बाद सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। पिछले 30 साल में सर्विस एक्टिविटी में इस तरह की गिरावट केवल मंदी के समय देखी गई है। इसी तरह नए ऑर्डर में 2022 के बाद पहली बार गिरावट आई है। जानकारों का कहना है कि ये मंदी के संकेत हो सकते हैं। इस बीच लेबर मार्केट में भी कमजोरी दिख रही है। कोरोना काल में अमेरिका ने स्टीम्यूलस दिया था लेकिन अब उसका असर घटता दिख रहा है। इस बीच देश में पिछले 20 महीनों में 19 बार मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में गिरावट आई है। यह महामंदी के बाद के इसका सबसे लंबा दौर है। अतीत में में मंदी के दौर में ही सर्विसेज और मैन्यूफैक्चरिंग इंडेक्स में गिरावट आई है। इससे साफ है कि अमेरिका की इकॉनमी में तेजी से गिरावट आ रही है जो मंदी का संकेत है। उधर अमेरिकी सरकार का खर्च मई में 6.5 ट्रिलियन डॉलर पहुंच गया और बजट डेफिसिट जीडीपी का 6.2 फीसदी हो गया है। बड़े आर्थिक संकट में ही ऐसा होता आया है। अमेरिका का कर्ज अमेरिका का कर्ज नए रेकॉर्ड पर पहुंच गया है। अप्रैल के आंकड़ों के मुताबिक फेडरल गवर्नमेंट का कर्ज 34.6 अरब डॉलर पहुंच चुका है जो उसकी जीडीपी का करीब 125% है। पिछले चार साल में देश का कर्ज 47 फीसदी यानी करीब 11 ट्रिलियन डॉलर बढ़ा है। हर टैक्सपेयर पर करीब 267,000 डॉलर यानी करीब 2,21,75,778 रुपये का कर्ज है। अगर यही रफ्तार रही तो अमेरिका का कर्ज 2025 तक 40 ट्रिलियन पहुंचने का अनुमान है। अगर फेड रिजर्व ब्याज दरों में कटौती नहीं करता है तो इस कर्ज पर अमेरिका को सालाना 1.6 ट्रिलियन डॉलर ब्याज देना होगा। माना जा रहा है कि इस साल पहली बार अमेरिका का इंटरेस्ट पेमेंट उसके डिफेंस बजट और मेडिकेयर खर्च से ऊपर पहुंच जाएगा।

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