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ऑस्ट्रेलिया में पढ़ते हैं 1.5 लाख भारतीय छात्र, इंग्लिश टेस्ट पास करना हुआ बेहद मुश्किल

नई दिल्ली  ऑस्ट्रेलिया ने विदेशी छात्रों को वीजा जारी करने के नियमों में बड़ा बदलाव किया है, जिसकी वजह से ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई करने के लिए विदेशी छात्रों को अब वीजा मिलना पहले से मुश्किल हो गया है। इससे सबसे ज्यादा प्रभावित भारतीय होंगे। इन नियमों को लेकर ऑस्ट्रेलियाई गृह मंत्री क्लेर ओ नील ने कहा था कि इन बदलावों से हाउसिंग मार्केट पर पड़ रहे दबाव को थोड़ा कम किया जा सकेगा। ऑस्ट्रेलिया में 30 सितंबर 2023 तक माइग्रेशन 60 प्रतिशत बढ़कर 5,48,800 हो गया था। 1 जुलाई से सरकार वो रास्ते बंद कर देगी जिसके तहत विजिटर वीजा और अस्थायी स्नातक वीजा होल्डर अब ऑनशोर स्टूडेंट वीजा के लिए आवेदन नहीं कर पाएंगे। दरअसल, ऑस्ट्रेलिया में कुछ भारतीय अक्सर ‘चोर दरवाजे’ से यानी टूरिस्ट वीजा लेकर आते हैं और वहां पर किसी कॉलेज में दाखिला लेकर स्टडी वीजा हासिल कर लेते हैं। ऑस्ट्रेलिया में भारतीय छात्रों की संख्या 1.5 लाख पार ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले अंतरराष्ट्रीय छात्रों की संख्या 2022-23 में 30 हजार से बढ़कर 150,000 से ज्यादा हो गई है। एक जुलाई 2023 से मई 2024 के अंत तक 36,000 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं। 2022 में ऑस्ट्रेलियाई संस्थानों में एक लाख से ज्यादा भारतीय छात्र पढ़ रहे थे। जनवरी से सितंबर 2023 की अवधि में यह संख्या 1.22 लाख थी। अब इन्हें ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई करने के लिए ज्यादा पैसे खर्च करने होंगे। ऑस्ट्रेलिया की 2021 की जनगणना के अनुसार, देश में 9,76,000 भारतवंशी रह रहे थे। पहला बदलाव: 40 से 90 हजार रुपए हुई वीजा फीस ऑस्ट्रेलियाई वीजा के लिए प्रॉसेसिंग फीस दोगुनी से ज्यादा बढ़ा दी गई है। यह बढ़ोतरी करीब 125 फीसदी है। पहले जहां यह फीस करीब 39,546 रुपए थी, वहीं अब यह बढ़कर 89,118 रुपए हो गई है। दूसरा बदलाव: छात्रों को ज्यादा बचत रखनी होगी नई वीजा पॉलिसी में ऑस्ट्रेलिया में एंट्री के लिए एक छात्र के पास बचत के रूप में जरूरी सेविंग अमाउंट को बढ़ा दिया गया है। ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने अब यह जरूरी कर दिया है कि छात्रों के पास ऑस्ट्रेलिया में रहन-सहन का खर्च उठाने के लिए पहले के मुकाबले ज्यादा बचत होनी चाहिए, जो ऑस्ट्रेलिया के राष्ट्रीय न्यूनतम वेतन का 75% होगा। विदेशी छात्रों को ऑस्ट्रेलियन वीजा के लिए क्वॉलीफाई करने के लिए कम से कम 16,29,964 रुपए की बचत दिखानी होगी। सरकार का ये कहना है कि ये बदलाव इसलिए किया जा रहा है ताकि छात्र ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई के दौरान ज़रूरी खर्च निकाल सकें। ये बदलाव वैसे तो बीते 10 मई से लागू हो गए थे, मगर अब 1 जुलाई से नए बदलावों के साथ पूरी तरह से लागू कर दिए गए हैं। तीसरा बदलाव: इंग्लिश टेस्ट बना बेहद मुश्किल ऑस्ट्रेलियाई वीजा पाने के लिए अब इंग्लिश लैंग्वेज टेस्ट में भी अच्छे नंबर लाना जरूरी कर दिया गया है। टेंपररी ग्रेजुएट वीजा आवेदकों के लिए IELTS स्कोर को 6.0 से बढ़ाकर 6.5 कर दिया गया है। जो लोग भी यह वीजा अप्लाई करना चाहते हैं, उन्हें इस टेस्ट में मिनिमम 6.0 अंक तो लाना ही होगा। सरकार छात्रों को ऐसे तरीके अपनाने से रोक रही है जिनसे वो अपना वीजा एक्सटेंड करवा सकें। चौथा बदलाव: टेंपररी ग्रेजुएट वीजा की उम्र घटी ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने छात्रों के लिए टेंपररी ग्रेजुएट वीजा (TGV) की उम्र भी घटा दी। पहले यह उम्रसीमा 50 साल हुआ करती थी, जो अब बढ़कर 35 साल रह गई है। यह नियम भी 1 जुलाई से लागू हो चुका है। पांचवा बदलाव: ऑस्ट्रेलिया में रहकर वीजा आवेदन नहीं ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने वीजा पाने की राह में एक और बाधा खड़ी कर दी है। अब ऑस्ट्रेलिया में वीजा के लिए आवेदन करना मान्य नहीं है। इसके लिए विदेश में अप्लाई करना होगा या प्रवासियों को अपने देश से ही करना होगा। इससे पहले विजिटर वीजा और टेंपररी ग्रेजुएट वीजा हासिल करने वाले लोग ऑस्ट्रेलिया में रहते हुए ही स्टूडेंट वीजा के लिए आवेदन कर दिया करते थे। यह नियम भी 1 जुलाई से लागू हो गया है। छठां बदलाव: जेनुइन स्टूडेंट टेस्ट लागू, बेहद सख्त ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने वीजा नियमों में एक नियम और जोड़ा है, वो है जेनुइन स्टूडेंट टेस्ट। यह टेस्ट सही छात्रों की पहचान करेगा। यह पहले के जेनुइन टेंपररी एनट्रैंट की जगह लेगा। इससे ऐसे लोगों पर रोक लगेगी, जो स्टूडेंट वीजा के बहाने ऑस्ट्रेलिया जाना चाहते हैं। 1 जुलाई से पहले के आवेदनों पर नहीं पड़ेगा असर ऑस्ट्रेलिया में अभी आगंतुक, अस्थायी स्नातक वीजा होल्डर और दूसरे तरह के वीजा होल्डर्स अब नए नियमों के तहत छात्र वीजा के लिए आवेदन नहीं कर सकते हैं। हालांकि, 1 जुलाई, 2024 से पहले ऑस्ट्रेलिया में पहले से ही जमा किए गए छात्र वीज़ा आवेदनों पर इन नियमों से कोई असर नहीं पड़ेगा। पर्यटक वीजा पर रहने की अवधि अधिकतम 12 महीने तक भारतीयों के लिए ऑस्ट्रेलियाई पर्यटक वीजा शुल्क 90 दिनों की अवधि के लिए लगभग 14,100 रुपए है, जिसकी वैधता 90 दिनों की है। हालांकि, वीजा फीस में बदलाव हो सकता है, जिसे वापस नहीं किया जा सकता है। पर्यटक वीज़ा पर रहने की अवधि अलग-अलग हो सकती है, लेकिन आम तौर पर यह 3, 6 या 12 महीने तक रहने की अनुमति देता है। अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा से भी महंगा हुआ स्टूडेंट वीजा नए बदलाव के बाद ऑस्ट्रेलिया में स्टूडेंट वीजा लेना अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा से भी महंगा हो गया है। अमेरिका में अभी स्टूडेंट वीजा की फीस करीब 15,433 रुपए है, वहीं, कनाडा में यह करीब 9,178 रुपए, ब्रिटेन में 51,732 रुपए है। ऑस्ट्रेलिया की सरकार ने कहा कि इन बदलावों से वीजा नियमों में खामियों को दूर करने में मदद मिलेगी। इससे वास्तविक छात्रों को ही वीजा मिल सकेगा। क्यों सख्त हुआ ऑस्ट्रेलिया में वीजा नियम, क्या दिए तर्क प्रवासियों की तेजी से बढ़ती हुई संख्या पर रोक लगाने के लिए ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने यह कदम उठाया है। दरअसल, लोग सैर-सपाटे के लिए ऑस्ट्रेलिया आते हैं और बाद में अपना टूरिस्ट वीजा स्टडी वीजा में तबदील करवा लेते हैं। वहां पर कॉलेजों में दाखिला लेकर वर्क वीजा हासिल कर लेते हैं। बाद में उन्हें टेंपररी यानी अस्थायी वीजा मिल जाता है, जिसे टी-वीजा कहते हैं।

केरल में मस्तिष्क खाने वाले अमीबा के संक्रमण का एक और मामला सामने आया

कोझिकोड  केरल में मस्तिष्क खाने वाले अमीबा के संक्रमण का एक और मामला सामने आया है। ‘अमीबिक मेनिंगोएन्सेफलाइटिस’ दूषित जल में पाए जाने वाले अमीबा से होता है। एक अस्पताल के सूत्रों ने बताया कि उत्तरी केरल के कोझिकोड जिले का पय्योली निवासी 14 वर्षीय किशोर इस संक्रमण से पीड़ित है। उसी अस्पताल में किशोर का उपचार किया जा रहा है। मई के बाद से राज्य में, अमीबा से होने वाले संक्रमण का यह चौथा मामला है और अब तक के मामलों में बच्चे ही इससे पीड़ित हुए हैं। पहले के मामलों में तीनों बच्चों की मौत हो चुकी है। किशोर का इलाज कर रहे एक चिकित्सक ने कहा कि उसे एक जुलाई को अस्पताल में भर्ती कराया गया था और उसकी हालत में सुधार हो रहा है। चिकित्सक ने शनिवार को बताया कि किशोर में संक्रमण की शीघ्र पहचान कर ली गई और विदेश से दवाइयां मंगाने सहित अन्य उपचार दिए गए। इससे पहले, बुधवार रात 14 वर्षीय एक किशोर की इसी संक्रमण से मौत हो गई थी, मलप्पुरम की पांच वर्षीय लड़की और कन्नूर की 13 वर्षीय किशोरी की क्रमशः 21 मई और 25 जून को मस्तिष्क संक्रमण के कारण मृत्यु हो गई थी। संक्रमण के मामले बढ़ने के बीच केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने शुक्रवार को एक बैठक की जिसमें संक्रमण को रोकने के लिए गंदे जलाशयों में न नहाने सहित कई सुझाव दिए गए। बैठक में यह सुझाव भी दिया गया कि स्विमिंग पूल में क्लोरीन डाला जाना चाहिए और बच्चों को इनमें प्रवेश करते समय सावधान रहना चाहिए क्योंकि वे इस बीमारी से सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सभी लोगों को जलाशयों को साफ रखने का ध्यान रखना चाहिए। संक्रमण के मामले बढ़ने के बीच केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने शुक्रवार को एक बैठक की जिसमें संक्रमण को रोकने के लिए गंदे जलाशयों में न नहाने सहित कई सुझाव दिए गए। बैठक में यह सुझाव भी दिया गया कि स्विमिंग पूल में क्लोरीन डाला जाना चाहिए और बच्चों को इनमें प्रवेश करते समय सावधान रहना चाहिए क्योंकि वे इस बीमारी से सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सभी लोगों को जलाशयों को साफ रखने का ध्यान रखना चाहिए। अमीबा क्या है और इसे कैसे रोका जा सकता है? अमीबा एक सूक्ष्मजीव है जो प्रोटोजोआ वर्ग से संबंधित है। यह एक कोशिकीय जीव है, जिसका आकार और रूप बदलता रहता है। अमीबा पानी, मिट्टी, और मानव एवं पशु आंतों में पाया जाता है। यह कई प्रकार का हो सकता है, जिनमें से कुछ मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होते हैं। उदाहरण के लिए, “एंटामोएबा हिस्टोलिटिका” नामक अमीबा आमतौर पर अमीबायसिस नामक बीमारी का कारण बनता है, जो आंतों में संक्रमण पैदा करता है। अमीबा संक्रमण के लक्षण: पेट दर्द दस्त (जो खून के साथ भी हो सकता है) बुखार उल्टी कमजोरी अमीबा संक्रमण से बचाव: साफ पानी का सेवन: केवल शुद्ध और साफ पानी पीना चाहिए। अगर आप सुनिश्चित नहीं हैं कि पानी शुद्ध है या नहीं, तो उसे उबालकर या फिल्टर करके पीएं। स्वच्छता का ध्यान: खाने से पहले और बाद में, और बाथरूम इस्तेमाल करने के बाद हाथ धोना चाहिए। सुरक्षित भोजन: सड़क किनारे का खाना और अधपका भोजन खाने से बचना चाहिए। सब्जियों और फलों को अच्छी तरह धोकर ही खाएं। स्वास्थ्यवर्धक आदतें: खाने के बर्तन और पीने के पानी के बर्तन साफ रखें। संक्रमित व्यक्तियों से बचाव: अमीबा संक्रमण वाले व्यक्तियों के संपर्क में आने से बचें और उनके इस्तेमाल की चीजों का भी उपयोग न करें। मेडिकल जांच: यदि अमीबा संक्रमण के लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें और आवश्यक जांच कराएं।    

सूरत में 5 मंजिला इमारत गिरी, अब तक 7 लोगों की मौत, सर्च और रेस्क्यू अब भी जारी, अब भी मलबे में दबे होने की आशंका

सूरत गुजरात के सूरत शहर के पाल इलाके में शनिवार दोपहर 5 मंजिला इमारत ढहने से अब तक 7 लोगों की मौत हो चुकी है और कई लोगों के अब भी मलबे में दबे होने की आशंका जताई जा रही है। घटनास्थल पर कल दोपहर से ही तलाशी अभियान जारी है। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें लगातार रेक्स्यू ऑपरेशन चला रही हैं। सूरत के डीसीपी राजेश परमार ने कहा कि बचाव अभियान 12 घंटे से चल रहा है। एक महिला को बचा लिया गया है और 7 शव बरामद कर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिए गए हैं। सूरत के मुख्य अग्निशमन अधिकारी बसंत पारीक ने रविवार सुबह कहा कि सूरत नगर निगम की फायर एंड इमरजेंसी सर्विसेज के कंट्रोल रूम में शनिवार दोपहर 3.55 मिनट पर एक 5 मंजिला इमारत ढहने का कॉल मिला था। इमारत का साइज देखकर हमने ब्रिगेड-4 डिक्लेयर किया था। उसमें करीब 80 फायरमैन और 20 फायर ऑफिसर के साथ निगम की सभी टीमों के कर्मचारी तुरंत यहां पहुंच गए थे। हमने यहां सर्च ऑपरेशन चलाया और कड़ी मेहनत के बाद एक महिला को जिंदा बचा लिया। बसंत पारीक ने कहा कि पूरी रात तलाशी अभियान जारी रहा। अब तक 7 लोगों की शव निकाले जा चुके हैं और कोई भी मिसिंग नहीं है। अब अंदर और लोगों के फंसे होने की भी उम्मीद नहीं है। हमने आसपास के रहने वालों से भी इस बारे में कन्फर्म कर लिया है, फिर भी ऐहतियातन हम मलबा हटाकर ट्रक में डालते समय गहनता से इसकी जांच कर रहे हैं। इमारत कैसे गिरी यह जांच का विषय है। वहीं, एनडीआरएफ इंस्पेक्टर बाबूलाल यादव ने कहा कि हमें 5 मंजिला इमारत के ढहने की सूचना मिली थी और मलबे में कुछ लोग फंसे हुए थे। 7 शव निकाले गए हैं और एक व्यक्ति को जीवित भी निकाला गया है। रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। हम यह नहीं बता सकते कि कितने और लोग फंसे हुए हैं, लेकिन संख्या बढ़ सकती है। करीब 7 साल पहले बनी थी इमारत मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सूरत शहर में यह घटना शनिवार दोपहर में करीब 2.45 बजे पर हुई थी। स्थानीय लोगों का दावा है कि इस इमारत का निर्माण 2016-17 में ही हुआ था। सूरत के पुलिस कमिश्नर अनुपम सिंह गहलोत ने कल बताया था कि इमारत ढहने के तुरंत बाद एक महिला को सुरक्षित बचा लिया गया, जबकि रात में मलबे से एक व्यक्ति का शव निकाला गया। उन्होंने कहा, ‘‘करीब पांच फ्लैटों में लोग रहते थे, जिनमें से ज्यादातर इस इलाके के कारखानों में काम करने वाले लोग थे। जब बचाव कार्य शुरू हुआ, तो हमें फंसे हुए लोगों की चीखें सुनाई दीं। हमने मलबे से एक महिला को निकाला और उसे अस्पताल पहुंचाया। बाद में एक व्यक्ति का शव बरामद किया गया।’’  

NHRC ने महिलाओं से ‘जबरन देह व्यापार’ मामले में राज्यों को नोटिस

नयी दिल्ली  राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने नौकरी दिलाने के बहाने महिलाओं को असामाजिक तत्वों द्वारा कथित तौर पर देह-व्यापार में धकेले जाने के संबंध में मीडिया में आई खबरों को लेकर सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों एवं पुलिस प्रमुखों को नोटिस जारी किया है। आयोग ने  एक बयान में कहा कि एक छापेमारी के दौरान गिरफ्तार की गईं महिलाओं के बयानों को उद्धृत करने वाली खबर यदि सही है तो यह महिलाओं के जीवन, स्वतंत्रता, समानता और गरिमा के लिए गंभीर चिंता पैदा करती है। आयोग ने कहा, ”समाचार पत्रों में एक जुलाई को प्रकाशित खबर में संकेत दिया गया कि झारखंड के रांची में एक होटल में छापेमारी के दौरान गिरफ्तार की गईं अधिकांश महिलाएं मजबूरी के कारण देह व्यापार में शामिल हुई थीं। उनमें से कई महिलाओं को उनके रिश्तेदारों ने ही इस दलदल में धकेला था और कुछ को अपने परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए मजबूरन देह व्यापार में शामिल होना पड़ा। असामाजिक तत्वों के चंगुल में फंसने के बाद वे इससे बाहर नहीं निकल सकीं।” आयोग के बयान में कहा गया है कि खबरों से पता चलता है कि पीड़ित महिलाएं अलग-अलग स्थानों की रहने वाली हैं और उन्हें नौकरी दिलाने के बहाने देह-व्यापार में धकेला गया। महिलाओं को इस दलदल में धकेलने वाले लोग कथित तौर पर दूरस्थ स्थानों से यह कृत्य कर रहे हैं। इससे, इस आपराधिक गिरोह का देशभर में नेटवर्क फैले होने का संकेत मिलता है, इसलिए इस तरह के आपराधिक तत्वों के खिलाफ व्यापक स्तर पर कार्रवाई करने की आवश्यकता है। मीडिया में आई खबर का स्वत: संज्ञान लेते हुए आयोग ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों और पुलिस महानिदेशकों को नोटिस जारी कर महिलाओं को देह व्यापार में धकेलने वाले असामाजिक तत्वों से निपटने के लिए उठाए गए और प्रस्तावित कदमों पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने नोटिस जारी करते हुए कहा कि महिलाओं की सुरक्षा, संरक्षण और कल्याण के लिए देश में कई कानून और योजनाएं होने के बावजूद असामाजिक और आपराधिक तत्व समाज के कमजोर वर्गों, विशेषकर महिलाओं को निशाना बनाते हैं। आयोग ने शुक्रवार को जारी किए गए एक अन्य बयान में कहा कि उसने मीडिया में आई उन खबरों का स्वत: संज्ञान लिया है जिसमें बताया गया कि मध्य प्रदेश के इंदौर जिले में स्थित एक आश्रम में 30 बच्चे कथित तौर पर बीमार पड़ गए और उनमें से पांच की मौत हो गई। बयान के अनुसार, ‘इन बच्चों की उम्र 5 से 15 साल के बीच है। बताया जा रहा है कि रक्त संक्रमण और भोजन की विषाक्तता के कारण ये बच्चे बीमार हुए। आश्रम में रहने वाले ज्यादातर बच्चे अनाथ हैं।’ आयोग ने मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर एक सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। नोटिस में कहा गया है इलाज के लिए अस्पताल में कथित तौर पर भर्ती बच्चों की मौजूदा स्वास्थ्य स्थिति की जानकारी भी रिपोर्ट में शामिल रहनी चाहिए।  

भारत के एस्ट्रोनॉट प्राइवेट कंपनी के साथ मिलकर अंतरिक्ष में जाएंगे

नई दिल्ली भारतीय स्पेस एजेंसी इसरो अपने गगनयान मिशन की तैयारी में जुटी है। ये भारत का पहला मानव युक्त अंतरिक्ष मिशन है। गगनयान मिशन के लिए चार एस्ट्रोनॉट को ट्रेनिंग दी गई है। इन चार में से दो एस्ट्रोनॉट को इस साल के अंत में इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) पर भेजने के लिए चुना गया है। ये मिशन अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा के साथ मिलकर पूरा किया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक इन दो एस्ट्रोनॉट में से सिर्फ एक ही स्पेस स्टेशन जाएगा। नासा की वेबसाइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार यह मिशन अक्टूबर 2024 के बाद शुरू होगा। अमेरिका में दी जाएगी मिशन की ट्रेनिंग भारत के जो एस्ट्रोनॉट इस मिशन के तहत स्पेस स्टेशन पर जाएंगे, उन्हें पहले अमेरिका में खास ट्रेनिंग दी जाएगी। इन अंतरिक्ष यात्रियों को स्पेस में जाने और रहने की तो ट्रेनिंग पहले ही मिल चुकी है। लेकिन उनकी ये ट्रेनिंग गगनयान मिशन पर केंद्रित थी, ऐसे में अब उन्हें इंटरनेशनल स्पेस के मॉड्यूल और वहां रहने के तरीकों को भी समझना होगा। प्राइवेट कंपनी के साथ मिलकर अंतरिक्ष में जाएंगे एस्ट्रोनॉट बता दें कि एस्ट्रोनॉट को इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन ले जाने वाला मिशन एक्सिओम-4 है। इस मिशन को अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा और एक प्राइवेट कंपनी एक्सिओम स्पेस मिलकर अंजाम देंगी। ये एक्सिओम का चौथा निजी अंतरिक्ष यात्री मिशन है। इस मिशन के तहत एस्ट्रोनॉट अंतरिक्ष स्टेशन पर करीब 14 दिन रुकने की उम्मीद है। स्पेसएक्स भी देगा साथ नासा ने पिछले साल एक्सिओम-4 मिशन की घोषणा करते हुए बताया था कि एक्सिओम-4 मिशन के क्रू इस उड़ान के लिए नासा, इंटरनेशनल स्पेस एजेंसियों और स्पेसएक्स के साथ मिलकर ट्रेनिंग लेंगे। एक्सिओम स्पेस ने स्पेसएक्स के साथ एस्ट्रोनॉट को अंतरिक्ष में लाने और ले जाने के लिए लॉन्चर की डील की है। इसके साथ ही अंतरिक्ष यात्रियों को चीन स्पेसयान का सिस्टम, मिशन के प्रोसेस और इमरजेंसी तैयारियों के बारे में ट्रेनिंग देगा। पिछले साल अमेरिका ने किया था ऐलान इस स्पेस मिशन के लिए काफी वक्त से एजेंसियां काम कर रही हैं। पिछले साल पीएम मोदी की अमेरिका यात्रा के दौरान भारत और अमेरिका ने एक संयुक्त बयान में बताया था कि नासा भारतीय एस्ट्रोनॉट को खास ट्रेनिंग देगा। इसके बाद दिल्ली दौरे पर आए नासा के अधिकारी बिल नेल्सन ने कहा था कि अमेरिकी स्पेस एजेंसी 2024 के अंत तक आईएसएस के लिए भारतीय एस्ट्रोनॉट को ट्रेनिंग देगी।

जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले में एक सैनिक शहीद हुआ, चार आतंकवादियों को सुरक्षा बलों ने मार गिराया

श्रीनगर जम्मू कश्मीर के कुलगाम जिले में सुरक्षा बलों और आतंकवादियों के बीच मुठभेड़ में चार आतंकवादी मारे गए हैं। इस मुठभेड़ में एक सुरक्षाकर्मी भी शहीद हो गया। अधिकारियों ने ये जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले में शनिवार को एक अलग मुठभेड़ में कम से कम एक सैनिक शहीद हो गया, जबकि चार आतंकवादियों को सुरक्षा बलों ने मार गिराया। खुफिया जानकारी के आधार पर सुरक्षा बलों द्वारा इलाके में तलाशी अभियान शुरू करने के बाद कुलगाम जिले के मोदरगाम गांव में पहली मुठभेड़ शुरू हुई। सुरक्षा बलों ने कम से कम दो से तीन आतंकवादियों को उनके ठिकाने पर घेर लिया है। मुठभेड़ की जानकारी देते हुए कश्मीर जोन पुलिस ने माइक्रोब्लॉगिंग साइट एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “कुलगाम जिले के मोदरगाम गांव में मुठभेड़ शुरू हो गई है। पुलिस और सुरक्षा बल काम पर लगे हुए हैं। आगे की जानकारी बाद में दी जाएगी।” पहले ऑपरेशन के शुरू होने के कुछ घंटों बाद ही कुलगाम जिले के फ्रिसल चिन्नीगाम गांव में एक और मुठभेड़ शुरू हो गई। सुरक्षा बलों को इलाके में लश्कर समूह के आतंकवादियों के होने की संभावना के बारे में सूचना मिली थी, जिसके बाद उन्होंने तुरंत कार्रवाई की। सुरक्षा बलों के गांव में पहुंचते ही गांव के एक घर में छिपे आतंकवादियों ने गोलीबारी शुरू कर दी, जिसके बाद मुठभेड़ शुरू हो गई। दोनों स्थानों पर भीषण गोलीबारी जारी है। पिछले महीने की शुरुआत में, पाकिस्तान स्थित लश्कर-ए-तैयबा की शाखा द रेजिस्टेंस फ्रंट के दो शीर्ष कमांडर पुलवामा जिले में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ के दौरान एक घर में फंस गए थे, जिसे वे छिपने के लिए इस्तेमाल कर रहे थे। सुरक्षाबलों ने सभी को मौत के घाट उतार दिया था। इस क्षेत्र में हाल ही में आतंकवादी गतिविधियों में वृद्धि देखी गई है। पिछले महीने ही, सुरक्षा बलों ने डोडा जिले के गंडोह इलाके में तीन आतंकवादियों को सफलतापूर्वक मार गिराया था।  

वरिष्ठ कश्मीरी अधिवक्ता मियां कयूम को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में

जम्मू विशेष अदालत ने शनिवार को वरिष्ठ कश्मीरी अधिवक्ता मियां कयूम को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। मियां कयूम को राज्य जांच एजेंसी (एसआईए) ने 25 जून को श्रीनगर में अधिवक्ता बाबर कादरी की हत्या की जांच के दौरान गिरफ्तार किया था। कादरी की सितंबर 2020 में श्रीनगर शहर के हवाल इलाके में उनके घर में आतंकवादियों ने हत्या कर दी थी। बाबर कादरी ने मियां कयूम पर उन्हें मारने की साजिश रचने का आरोप लगाया था। पुलिस ने कहा था कि कादरी की हत्या में लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) का कमांडर साकिब मंजूर शामिल था। मंजूूर और एक अन्य आतंकवादी 2022 में श्रीनगर में पुलिस के साथ मुठभेड़ में मारे गए थे। शनिवार को मियां कयूम को उसकी दूसरी रिमांड की अवधि समाप्त होने पर विशेष न्यायाधीश जतिंदर सिंह जामवाल की अदालत में पेश किया गया। अदालत ने उसे 20 जुलाई तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा- पुलिस को असामाजिक तत्वों के मन में भय पैदा करना चाहिए, ताकि ऐसे तत्व अपराध करनेे से डरें

बेंगलुरु कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने शनिवार को कहा कि पुलिस को असामाजिक तत्वों के मन में भय पैदा करना चाहिए, ताकि ऐसे तत्व अपराध करनेे से डरें। उन्होंने कहा कि यह शर्म की बात है कि कुछ पुलिसकर्मियों को यह भी नहीं पता कि ई-बीट सिस्टम लागू है। सिद्धारमैया ने यहां पुलिस मुख्यालय में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के सम्मेलन के उद्घाटन के बाद राज्य पुलिस से सवाल किया कि आपको बंदूकें क्यों दी जाती हैं? उपद्रवी इससे क्यों नहीं डरते? उन्होंने इस अवसर पर एक नया सॉफ्टवेयर भी जारी किया। सीएम नेे कहा कि संबंधित थानों के अधिकारियों को पता होता है कि उपद्रवी तत्व व नशे के कारोबारी कौन हैं, तो उन पर लगाम क्यों नहीं लग पा रहा है। उन्होंने पिछले एक साल में राज्य में सांप्रदायिक दंगों के बिना कानून और व्यवस्था बनाए रखने के लिए गृह मंत्री परमेश्वर और कर्नाटक पुलिस को बधाई दी। सीएम ने पुलिस मैनुअल के अनुसार प्रत्येक एसपी-डीसीपी-आईजी को अपने अधिकार क्षेत्र के थानों के निरीक्षण का निर्देश दिया।

रेलवे ने कहा- राहुल गांधी ने उन लोको पायलटों से मुलाकात की जो दिल्ली डिवीजन के नहीं थे और बाहर से लाए गए थे

नई दिल्ली ट्रेन चालक यूनियनों ने रेलवे के इस दावे का खंडन किया है कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने उन लोको पायलटों से मुलाकात की जो दिल्ली डिवीजन के नहीं थे और बाहर से लाए गए थे। शुक्रवार को जब गांधी ने नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर लोको पायलटों की क्रू लॉबी का दौरा किया, तो उत्तर रेलवे (एनआर), जिसके अंतर्गत दिल्ली डिवीजन आता है, के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी (सीपीआरओ) ने कहा कि ऐसा लग रहा था कि गांधी ने उन लोको पायलटों से मुलाकात की, जो नई दिल्ली रेलवे स्टेशन की क्रू लॉबी से नहीं थे। एनआर के सीपीआरओ दीपक कुमार ने कहा, “ऐसा लगता है कि इन्हें बाहर से लाया गया है।” लोको-पायलटों ने सीपीआरओ के बयान का विरोध किया राहुल गांधी ने स्टेशन पर क्रू लॉबी का दौरा किया और कुछ लोको-पायलटों से बात कर उनकी समस्याओं और चुनौतियों के बारे में जाना। विभिन्न लोको पायलट एसोसिएशनों, जिनके सदस्य गांधी के दौरे के दौरान लॉबी में मौजूद थे, ने सीपीआरओ के बयान का विरोध किया और कहा कि जब तक लोको पायलटों की शिकायतें एक जैसी हैं, तब तक उनके डिवीजनों और कार्य क्षेत्रों पर ध्यान देना बेमानी है। दक्षिण जोन के अध्यक्ष का बयान अखिल भारतीय लोको रनिंग स्टाफ एसोसिएशन के दक्षिण जोन के अध्यक्ष आर. कुमारेसन, जिन्होंने गांधी और लोको पायलटों के बीच इस बातचीत के आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, ने कहा, “मैं विनम्रतापूर्वक कहना चाहता हूं कि राहुल गांधी ने विभिन्न रेल डिवीजनों के लोको पायलटों के साथ बातचीत की, न कि केवल दिल्ली के लोगों के साथ।” उन्होंने कहा, ” राहुल गांधी ने क्रू लॉबी का दौरा किया और उसी भवन में बाहर से आने वाले पायलटों के लिए एक रनिंग रूम भी है, जहां वे आराम कर सकते हैं। उन्होंने सभी से बात की, चाहे वे किसी भी डिवीजन से आते हों।” ‘यह कोई मुद्दा नहीं है’ राहुल गांधी के दौरे के दौरान मौजूद भारतीय रेलवे लोको रनिंगमैन संगठन (आईआरएलआरओ) के केंद्रीय कोषाध्यक्ष कमलेश सिंह ने कहा कि सभी रेल नेटवर्क में लोको पायलटों को समान चुनौतियों का सामना करना पड़ता है और उनकी शिकायतें भी समान होती हैं। सिंह ने कहा, “चाहे वह लंबे ड्यूटी घंटों का मामला हो, साप्ताहिक आराम से इनकार या शौचालय और लंच ब्रेक की कमी, ये आम मुद्दे हैं जिनका सामना सभी डिवीजनों और जोनों में सभी ट्रेन चालक करते हैं। इसलिए यह कोई मुद्दा नहीं है कि उन्होंने दिल्ली डिवीजन या किसी अन्य डिवीजन के लोको पायलट से मुलाकात की।”आईआरएलआरओ के कार्यकारी अध्यक्ष संजय पांधी ने कहा कि भारतीय रेलवे के सभी रनिंग रूम में केवल अन्य स्टेशनों से आए लोको रनिंग स्टाफ ही आराम करते हैं। पांधी ने कहा, “एक सांसद, जो विपक्ष का नेता भी होता है, सभी रेलवे कर्मचारियों सहित किसी से भी कहीं भी मिल सकता है।” कुमारेसन ने स्पष्ट किया कि गांधी रनिंग रूम में नहीं गए क्योंकि इससे लोको-पायलटों को परेशानी होती, जो अपनी अगली पारी से पहले आराम कर रहे थे। जानिए क्या बोले लोको पायलट लोको पायलटों ने यह भी कहा कि लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा रेल चालकों से मुलाकात के बाद रेल मंत्रालय ने अपने अधिकारियों को ट्रेन चालकों की शिकायतों का समाधान करने के लिए भेजा था। सिंह ने कहा, “गांधी के जाने के बाद रेल मंत्रालय के अधिकारी हमारी शिकायतें सुनने के लिए नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर आये।” सिंह ने कहा कि यह पहली बार है कि रेलवे बोर्ड के किसी अधिकारी ने उनकी समस्याओं पर इतनी त्वरित प्रतिक्रिया दिखाई है। राहुल गांधी के साथ साझा की समस्याएं सिंह ने कहा, “हमने अधिकारी के साथ वही मुद्दे साझा किए जो हमने गांधी के साथ साझा किए थे। लंबे समय तक ड्यूटी करने के कारण काम का तनाव रहता है और ट्रेन चलाने के दौरान शौचालय और लंच ब्रेक की सुविधा नहीं मिलती, ये हमारी कुछ समस्याएं हैं जिन्हें हमने गांधी और रेल मंत्रालय के अधिकारियों के साथ साझा किया।” कुमारेसन के अनुसार, उन्होंने गांधी के साथ जो मुद्दे साझा किए थे, वे मंत्रालय को पहले से ही ज्ञात थे, क्योंकि लोको एसोसिएशन नियमित रूप से मंत्रालय को पत्र लिख रहे थे।

फरीदाबाद में हुआ हादसा, जर्जर मकान के छज्जा गिरने से 3 बच्चों की दर्दनाक मौत

हरियाणा हरियाणा में फरीदाबाद के सीकरी इलाके में एक जर्जर मकान के छज्जा के गिर जाने से तीन बच्चों की मौत हो गई। पुलिस ने यह जानकारी दी। उसने बताया कि तीनों की पहचान 12 वर्षीय आदित्य कुमार, 10 वर्षीय मुस्कान और आठ वर्षीय आकाश के रूप में हुई है जो आपस में भाई-बहन थे। एक पुलिस प्रवक्ता ने बताया कि शुक्रवार शाम करीब सात बजे ये बच्चे घर के बाहर छज्जे के नीचे खेल रहे थे, तभी अचानक उसका छज्जा उनके ऊपर गिर गया। सीकरी चौकी प्रभारी ललित ने बताया कि इस घटना की जानकारी मिलते ही एक पुलिस टीम मौके पर पहुंची और बच्चों का मलबे से निकालकर बादशाह खान सिविल अस्पताल ले गई लेकिन तब तक बच्चों की मौत हो चुकी थी। फरीदाबाद के सेक्टर 58 थाना के प्रभारी कृष्ण कुमार ने बताया कि तीनों बच्चे आपस में भाई-बहन थे और उनका पिता धर्मेंद्र कंपनी में काम करता है, जबकि मां रेहड़ी पर सामान बेचती है। उनके अनुसार इस घटना के समय घर में माता-पिता में से कोई नहीं था। लोगों का कहना है कि धर्मेंद्र का परिवार जिस मकान में रहता है, वह मकान जर्जर हो चुका था और संभवत: इसी वजह से छज्जा गिरा है। पुलिस मामले की छानबीन कर रही है।  

सूरत में बड़ा हादसा: भरभराकर गिरी पांच मंजिला इमारत, इमारत में करीब 10-15 लोग दबे होने की आशंका

सूरत सूरत में बड़ा हादसा हो गया है। यहां पांच मजिंला इमारत गिर गई है। इस घटना में 15 लोगों के घायल होने की खबर है जबकि कई अन्य लोगों के दबे होने की आशंका है। बताया जा रहा है कि सूरत के सचिन जीआईडीसी इलाके में मौजूद पांच मंजिला इमारत अचानक भरभराकर गिर गई। रिपोर्ट के मुताबिक इमारत के गिरने के पीछे भारी बारिश वजह बताई जा रही है। घटना की सूचना मिलते ही रेस्क्यू टीम तुरंत मौके पर पहुंची और रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। फिलहाल इमारत का मलबा हटाने का काम किया जा रहा है। मलबे के नीचे कुछ लोगों के फंसे होने की आशंका है। रिपोर्ट के मुताबिक इमारत में करीब 10-15 लोग रह रहे थे। इमारत के गिरने के बाद आसपास रहने वाले लोग तुरंत दौड़ कर आए और घायलों की मदद की। बताया जा रहा है कि इमारत जर्जर हो चुकी थी लेकिन फिर भी लोग अपनी जान जोखिम में डालकर वहां रह रहे थे। पुलिस और रेस्क्यू टीम मलबा हटाने की काम में जुटी हुई है. हालांकि मलबे के नीचे अभी तक कोई फंसा हुआ नहीं पाया गया है।  जिन लोगों को रेस्क्यू किया गया है उन्हें मामूली चोटें आई हैं। दिल्ली में भी ऐसा हादसा इससे पहले दिल्ली में भी एक ऐसा हादसा हो गया था जिसमें 6 साल के बच्चे की मौत हो गई थी। जानकारी के मुताबिक दिल्ली में एक पुरानी इमारत का छत का हिस्सा ढह गया था जिसमें 6 साल के बच्चे को अपनी जान गंवानी पड़ गई। घटना हर्ष विहार इलाके की थी। घटना उस समय हुई जब बच्चा छत पर खेल रहा था। इस हादसे में वह गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।  

चुनाव के कारण विकास कार्य कई महीनों तक ठप हो जाते हैं, ‘एक राष्ट्र एक चुनाव’ समय की मांग है: CM माणिक साहा

त्रिपुरा त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने कहा कि ‘एक देश, एक चुनाव’ समय की मांग है क्योंकि बार-बार होने वाले चुनाव के दौरान लागू होने वाली आचार संहिता से विकास गतिविधियां प्रभावित होती हैं। साहा ने कहा कि लोकसभा चुनाव के बाद राज्य में पंचायत, स्वायत्त परिषद और नगर निकाय के चुनाव होने हैं। उन्होंने यहां एक सरकारी कार्यक्रम में कहा, ”चुनाव के कारण विकास कार्य कई महीनों तक ठप हो जाते हैं। ‘एक राष्ट्र एक चुनाव’ समय की मांग है।” देश के पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति ने मार्च में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ पर अपनी रिपोर्ट सौंपी थी। रिपोर्ट में उन्होंने पहले कदम के रूप में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के लिए एक साथ चुनाव कराने तथा उसके बाद 100 दिन के भीतर स्थानीय निकाय चुनाव कराने की सिफारिश की थी। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने सरकारी अधिकारियों से आग्रह किया कि वे अपना कार्य निर्धारित समय में पूरा करें। साहा ने कहा कि सरकार प्रशासनिक कार्यों के डिजिटलीकरण के तहत पहले ही ई-विधानसभा और ई-कैबिनेट की शुरुआत कर चुकी है। उन्होंने कहा, ”अब अधिकारियों को फाइल ले जाने की जरूरत नहीं है क्योंकि ई-कैबिनेट सुविधा का उपयोग करके सभी काम किए जा रहे हैं। इससे काम में पारदर्शिता और प्रभावकारिता आती है।”

व्लादिमीर पुतिन ने एक बार फिर परमाणु हमले की धमकी दी, यूक्रेन में NATO के दखल पर बिफरे

रूस उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (NATO) देशों के यूक्रेन के पक्ष में उतरने पर बिफरे व्लादिमीर पुतिन ने एक बार फिर परमाणु हमले की धमकी दी है। उन्होंने कहा कि उन्हें यूक्रेन के खिलाफ जीत हासिल करने के लिए परमाणु हथियारों का इस्तेमाल करने की आवश्यकता नहीं है लेकिन यदि यूक्रेन की मदद कर रहे पश्चिमी देश सोचते हैं कि मॉस्को ऐसा कभी नहीं करेगा तो यह उनकी गलती है। पुतिन ने इन नाटो सदस्यों को स्पष्ट संदेश दिया कि यूक्रेन को सैन्य सहायता मुहैया कराने पर उनका रूस के साथ संघर्ष हो सकता है जो परमाणु संघर्ष में बदल सकता है। मॉस्को ने हाल में दक्षिणी रूस में सहयोगी बेलारूस के साथ मिलकर अपने परमाणु हथियार संबंधी सामरिक तैयारी के लिए अभ्यास किया। पश्चिमी देश यूक्रेन में नाटो सैनिकों की तैनाती और रूसी क्षेत्र में सीमित हमलों के लिए उसे लंबी दूरी के हथियारों का उपयोग करने की अनुमति देने पर विचार कर रहे हैं। रूस ने अपने सैन्य अभ्यास को पश्चिमी देशों के इसी कदम की प्रतिक्रिया बताया। पुतिन ने यूक्रेन में 24 फरवरी 2022 को हमला शुरू किया था और इसके बाद से वह युद्ध में पश्चिमी देशों के हस्तक्षेप को हतोत्साहित करने के लिए रूस की परमाणु ताकत का कई बार जिक्र कर चुके हैं। पुतिन ने रूस की हालिया सैन्य सफलताओं के बीच कहा कि मॉस्को को यूक्रेन में जीत के लिए परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की आवश्यकता नहीं है लेकिन, ‘यूरोप में खासकर छोटे देशों समेत नाटो के सदस्यों के प्रतिनिधियों को यह अंदाजा होना चाहिए कि वह किसके साथ खेल रहे हैं।’ उन्होंने चेतावनी दी कि यदि रूस उन पर हमला करता है तो अमेरिकी सुरक्षा पर भरोसा करना उनकी गलती हो सकती है। पुतिन ने कहा, ‘लगातार तनाव के गंभीर परिणाम हो सकते हैं। यदि यूरोप में ये गंभीर परिणाम होते हैं, तो सामरिक हथियारों के मामले में हमारी क्षमता को देखते हुए अमेरिका क्या कदम उठाएगा ? कहना मुश्किल है। क्या वे वैश्विक संघर्ष चाहते हैं?’  

आतंकवादियों की मौजूदगी की खुफिया जानकारी मिलने के बाद कुलगाम में मुठभेड़ जारी, 1 जवान शहीद

श्रीनगर जम्मू कश्मीर के कुलगाम जिले में सुरक्षा बलों और आतंकवादियों के बीच मुठभेड़ जारी है। इस मुठभेड़ में एक सुरक्षा कर्मी शहीद हो गया है। मोदरगाम गांव में आतंकवादियों की मौजूदगी की खुफिया जानकारी मिलने के बाद सीआरपीएफ, सेना और स्थानीय पुलिस द्वारा शुरू किए गए संयुक्त अभियान के बाद मुठभेड़ शुरू हुई। तलाशी अभियान के दौरान, आतंकवादियों ने सुरक्षा बलों पर गोलीबारी शुरू कर दी, जिसके जवाब में सुरक्षा बलों ने भी गोलीबारी की। जैसे ही सुरक्षा बल गांव में पहुंचे, स्थिति तेजी से बिगड़ गई और आतंकवादियों को पकड़ने के लिए उन्होंने तुरंत घेराबंदी कर दी। शुरुआती गोलीबारी में एक सुरक्षाकर्मी घायल हो गया था। घायल सुरक्षा कर्मी को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। इलाके को घेर लिया गया है और सुरक्षा बलों द्वारा आतंकवादियों को पकड़ने के लिए ऑपरेशन जारी है। कश्मीर जोन पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “कुलगाम जिले के मोदरगाम गांव में मुठभेड़ शुरू हो गई है। पुलिस और सुरक्षा बल काम पर हैं। आगे की जानकारी बाद में दी जाएगी।” इस क्षेत्र में हाल ही में आतंकवादी गतिविधियों में वृद्धि देखी गई है। पिछले महीने ही, सुरक्षा बलों ने डोडा जिले के गंडोह इलाके में तीन आतंकवादियों को सफलतापूर्वक मार गिराया था।  

लाखों महिलाओं के लिए बड़ी खुशखबरी, सरोगेसी से मां बनी इंप्लॉयी मैटर्निटी लीव की हकदार: हाईकोर्ट

भुवनेश्वर सरोगेसी से मां बनने वाली को महिला कर्मचारी को मैटरनिटी लीव पर कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि सरोगेसी से मां बनने वाली महिला कर्मचारी भी मैटरनिटी लीव की पूरी हकदार है। कोर्ट ने कहा कि यह न सिर्फ महिला के लिए लाभदायक है, बल्कि नवजात शिशु के स्वास्थ्य के लिए भी काफी बेहतर होगा। ओडिशा हाई कोर्ट में जस्टिस संजीब कुमार पाणिग्रही की सिंगल बेंच ने एक महिला कर्मचारी के केस में यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि संविधान के आर्टिकल 21 के तहत जीवन का अधिकार, मां बनने के अधिकार के साथ-साथ बच्चों के पूरे विकास का भी अधिकार देता है। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर सरकार एडॉप्टिव मां को मैटरनिटी लीव दे सकती है तो सरोगेसी से मां बनने वाली कर्मचारी को इससे वंचित रखना गलत होगा। यह है मामला इस मामले में याचिकाकर्ता गोपाबंधु एकेडमी ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन में ज्वॉइंट डायरेक्टर (अकाउंट्स) है। याचिकाकर्ता 20 अक्टूबर 2018 को सरोगेसी से मां बनी थी। उसने 25 अक्टूबर 2018 से 22 अप्रैल 2019 तक के लिए मैटरनिटी लीव के लिए अप्लाई किया था। इसके साथ ही महिला ने 23 अप्रैल 2019 से 9 सितंबर 2019 के लिए ईएल भी अप्लाई किया था। उसने 10 सितंबर 2019 को वापस ज्वॉइन कर लिया गया था। महिला की छुट्टी का आवेदन सैंक्शन के लिए फाइनेंस डिपार्टमेंट में भेजा गया था। फाइनेंस डिपार्टमेंट के अंडर सेक्रेटरी ने महिला का आवेदन लौटा दिया था। साथ ही अधिकारियों से निवेदन किया था कि वह गवर्नमेंट सर्वेंट्स रूल्स के तहत इस तरह की छुट्टियां अप्लाई की जा सकती हैं या नहीं। ऐसा भी संकेत दिया गया था कि रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी या सरोगेसी के जरिए मां बनने पर छुट्टी का कोई प्रावधान नहीं है। कोर्ट पहुंची महिला कर्मचारी इसके बाद महिला ने हाई कोर्ट का रुख किया था। मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने नोट किया कि ओडिशा सर्विस कोड के रूल 194 के तहत महिला कर्मचारी 180 दिनों की मैटर्निटी लीव की हकदार है। इतना ही नहीं, अगर महिला कर्मचारी किसी एक साल तक के बच्चे को गोद लेती है तो उस स्थिति में इस छुट्टी को एक साल के लिए बढ़ाया भी जा सकता है। हालांकि चौंकाने वाली बात यह थी कि इसमें सरोगेसी से मां बनने को लेकर कोई प्रावधान नहीं था। इसके बाद कोर्ट ने राजस्थान हाई कोर्ट द्वारा श्रीमती चंदा केसवानी बनाम स्टेट ऑफ राजस्थान मामले में सुनाए गए फैसले का रेफरेंस लिया। इस फैसले के मुताबिक अगर सरोगेसी असिस्टेंट रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (रेगुलेशंस) ऐक्ट, 2021 के तहत की गई है तो महिला कर्मचारी को मैटरनिटी लीव से इनकार नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कही यह बात जस्टिस पाणिग्रही ने बॉम्बे हाई कोर्ट के डॉ. मिसेज हेमा विजय मेनन वर्सेस स्टेट ऑफ महाराष्ट्र से भी रेफरेंस लिया। जस्टिस पाणिग्रही ने अपने फैसले में कहा कि सरोगेसी से मां बनने वाली कर्मचारी को भी मैटरनिटी लीव मिलनी चाहिए। इससे सभी नई मांओं को समानता का भाव मिलेगा और समर्थन मिलेगा। कोर्ट ने आगे कहा कि इसके अलावा बच्चे के जन्म के बाद के शुरुआती महीने बेहद अहम होते हैं। इस दौरान बच्चा अपनी मां से घुलता-मिलता है। उसके अधिक देख-रेख की काफी ज्यादा जरूरत होगी। यह बच्चे के विकास के लिए बेहद अहम है। पूरी तरह से अनुचित- हाईकोर्ट हाईकोर्ट ने आगे कहा कि यदि सरकार गोद लेकर मां बनने वाली महिला को मातृत्व अवकाश दे सकती है तो उस माता को मातृत्व अवकाश से वंचित करना पूरी तरह से अनुचित होगा जिसे किराये की कोख देने वाली महिला के गर्भ में संतान पाने को इच्छुक दंपति के अंडाणु या शुक्राणु से तैयार भ्रूण के अधिरोपण के बाद इस प्रक्रिया से बच्चा मिला हो. हाईकोर्ट ने व्यवस्था दी कि सभी नई माताओं के प्रति समान बर्ताव एवं सहायता सुनिश्चित करने के लिए उन (महिला) कर्मियों को भी मातृत्व अवकाश दिया जाए, भले ही वह किसी भी तरह मां क्यों न बनी हों. सरकार को निर्देश उड़ीसा हाईकोर्ट ने कहा कि इन माताओं को मातृत्व अवकाश देने से यह सुनिश्चित होता है कि उनके पास अपने बच्चे के लिए स्थिर एवं प्यार भरा माहौल तैयार करने के लिए जरूरी वक्त होता है और जच्चा एवं बच्चा की देखभाल और वेलफेयर को बढ़ावा मिलता है. कोर्ट ने राज्य सरकार को इस आदेश की सूचना मिलने के तीन महीने के अंदर याचिकाकर्ता को 180 दिन का मातृत्व अवकाश प्रदान करने का निर्देश दिया.

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