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रूस-यूक्रेन युद्ध में नया मोड़- शांति वार्ता नाकाम, 315 ड्रोन से किया हमला, अब दोनों देशों के हमलों में तेजी देखी जा रही

यूक्रेन  रूस और यूक्रेन के बीच 39 महीने से चल रही जंग अब और भी भयानक होती जा रही है।  रूस के सुरक्षा बलों ने बीती रात यूक्रेन में व्यापक स्तर पर ड्रोन हमले किये जिनमें दो लोगों की मौत हो गई जबकि 60 से अधिक लोग घायल हो गए। यूक्रेन के अधिकारियों ने यह जानकारी दी। यूक्रेन की वायुसेना ने कहा कि 85 शहीद ड्रोन और अन्य प्रकार के ड्रोन ने खारकीव शहर और दूसरे इलाकों को निशाना बनाया। वायु रक्षा प्रणाली ने 40 ड्रोन को रोक दिया। खारकीव सबसे अधिक प्रभावित इलाकों में से एक रहा है, जहां दो रिहाइशी जिलों में 17 ड्रोन हमले हुए। खारकीव के मेयर इहोर तेरेखोव ने यह जानकारी दी। तेरेखोव ने टेलीग्राम पर लिखा, “वे साधारण स्थान हैं, जहां आम लोग शांतिपूर्ण तरीके से रह रहे हैं। उन्हें निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए था।” स्थानीय प्रशासन के प्रमुख ओलेह सिनिहुबोव के अनुसार दो लोगों की मौत की पुष्टि हुई है जबकि कम से कम 60 लोग घायल हुए हैं। घायलों में दो से 15 साल की उम्र के नौ बच्चे भी शामिल हैं। मंगलवार तड़के भी रूस ने यूक्रेन की राजधानी  कीव और दक्षिणी बंदरगाह शहर ओडेसा पर जबरदस्त ड्रोन और मिसाइल हमले किए, जिनमें  3 लोगों की मौत  हो गई और  13 अन्य घायल हो गए।यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की  ने इस हमले को अब तक के “सबसे बड़े हमलों में से एक” बताया है। उनके अनुसार, रूस ने रातभर में 315 ड्रोन और 7 मिसाइलें  दागीं, जिनमें से अधिकतर  ‘शहीद ड्रोन’   (ईरानी तकनीक पर आधारित) थे। ओडेसा के प्रांतीय गवर्नर ओलेह किपर ने बताया कि हमले में शहर के मातृत्व अस्पताल और कई आवासीय इमारतें  क्षतिग्रस्त हो गईं। यहां दो लोगों की मौत हुई और 9 लोग घायल हुए।वहीं कीव के ओबोलोन जिले में एक व्यक्ति की मौत हो गई और 4 अन्य घायल हो गए। राष्ट्रपति जेलेंस्की ने रूस के इन हमलों को दुनिया के लिए चेतावनी बताया और कहा कि अब  अमेरिका और यूरोप को ठोस कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने कहा, “रूसी ड्रोन और मिसाइलों की आवाज उन सभी कोशिशों से तेज़ है जो दुनिया रूस को शांति के रास्ते पर लाने के लिए कर रही है।” बता दें कि रूस-यूक्रेन युद्ध फरवरी 2022 में शुरू हुआ था और अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है। हाल ही में  तुर्की में शांति वार्ता  की कोशिश हुई थी, लेकिन कोई सहमति नहीं बन सकी। इसके उलट अब दोनों देशों के हमलों में तेजी देखी जा रही है। 

भीषण गर्मी के बीच 13 जून से उत्तर पश्चिम भारत में एक नया वेस्टर्न डिस्टर्बेंस दस्तक देने जा रहा है: मौसम विभाग

नई दिल्ली  उत्तर भारत में भीषण गर्मी का कहर देखने को मिल रहा है। मॉनसून जिस रफ्तार से शुरुआत में बढ़ रहा था, उसकी गति में कमी आई है। पहाड़ी राज्यों समेत उत्तर भारत के इलाकों में 13 जून तक हीटवेव का कहर देखने को मिलने वाला है। हालांकि, उसके बाद इसमें कमी आएगी, जिससे गर्मी की मार झेल रहे लोगों को राहत मिलेगी। यूपी, हरियाणा समेत कई राज्यों में इसके बाद बारिश हो सकती है, जोकि खुशखबरी से कम नहीं है। मौसम विभाग के अनुसार, भीषण गर्मी के बीच 13 जून से उत्तर पश्चिम भारत में एक नया वेस्टर्न डिस्टर्बेंस दस्तक देने जा रहा है। इसकी वजह से उत्तर भारत के मौसम में बदलाव आएगा। दक्षिण भारत की बात करें तो केरल, माहे, कर्नाटक, लक्षद्वीप में अगले सात दिनों तक हल्की से मध्यम बारिश जारी रहने वाली है। वहीं, तमिलनाडु, पुडुचेरी, रायलसीमा में 11 जून, तटीय आंध्र प्रदेश, यनम, तेलंगाना में 12-15 जून को भारी से बहुत भारी बरसात होगी। वहीं, केरल और माहे में 14-16 जून के बीच बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। इसके अलावा, पश्चिमी भारत की बात करें तो मध्य महाराष्ट्र, मराठवाड़, कोंकण, गोवा में 11 जून, गुजरात में 14-16 जून, मध्य महाराष्ट्र, मराठवाड़ा, कोंकण, गोवा में 12-14 जून के बीच हल्की से मध्यम बारिश रहने वाली है। गोवा, कोंकण, मध्य महाराष्ट्र में 11-17 जून, मराठवाड़ा में 11-14 जून के बीच भारी बारिश होगी। पूर्वी व मध्य भारत की बात करें तो सब हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम, ओडिशा में 11-13 जून, मध्य प्रदेश, विदर्भ, छत्तीसगढ़, गंगीय पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड में 11-15 जून को बरसात, आंधी तूफान का अलर्ट है। वहीं, उत्तर पश्चिम भारत के मौसम को लेकर अपडेट है कि हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड में 12-17 जून, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान में 13-17 जून, राजस्थान में 14-17 जून के बीच हल्की से मध्यम बारिश होगी। इससे गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद है। उत्तराखंड में 11-17 जून के बीच भारी बारिश होगी।  

आतंकी हमले के बाद सेना की वर्दी में दिखे 2 आतंकी, जम्मू कश्मीर के सांबा में हाई अलर्ट, सर्च ऑपरेशन जारी

जम्मू जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद से भारतीय सुरक्षा बल हाई अलर्ट पर हैं। इस बीच बुधवार को यहां सांबा जिले के कुछ गांववालों ने सुरक्षा बलों को दो संदिग्ध आतंकवादियों की गतिविधि की सूचना दी है। सूचना मिलते ही इलाके में तलाशी अभियान शुरू किया गया है। अधिकारियों ने बताया कि सर्च ऑपरेशन जारी है, लेकिन अभी तक संदिग्ध व्यक्तियों का कोई पता नहीं चल पाया है। जानकारी के मुताबिक आतंकियों ने सेना की वर्दी पहन रखी है। अधिकारियों ने बताया कि कुछ ग्रामीणों ने कथित तौर पर रात के समय नुड गांव के आसपास के एक स्कूल के पास संदिग्ध लोगों को देखा। उन्होंने तुरंत पुलिस को इसकी सूचना दी। अधिकारियों ने बताया कि पूरे इलाके को पुलिस और सेना के संयुक्त दलों ने घेर लिया है। बुधवार तड़के सुबह तलाशी अभियान शुरू किया गया। इससे पहले बीते सोमवार को सांबा जिले के सीमावर्ती इलाके से एक मोर्टार शेल बरामद किया था। अधिकारियों ने बताया कि उसे सुरक्षित तरीके से निष्क्रिय कर दिया गया। गौरतलब है कि पहलगाम हमले के बाद से भारत के सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा एजेंसियां बेहद सतर्कता बरत रही हैं। 22 अप्रैल को आतंकियों ने पहलगाम के खूबसूरत बैसरन मैदान में 26 लोगों की बेरहमी से हत्या कर दी थी। इसके बाद भारतीय सशस्त्र बलों ने आतंकियों के गढ़ में घुसकर उनके ठिकानों को नेस्तनाबूद कर दिया। भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाक और पाक अधिकृत कश्मीर में कई आतंकी ठिकानों को ध्वस्त कर दिया। इस ऑपरेशन में 100 से ज्यादा आतंकवादी मारे भी गए।  

रिपोर्ट में बताया- चाहकर भी बच्चे पैदा नहीं कर पा रहे 14 पर्सेंट भारतीय, 38 फीसदी लोगों को एक बात का डर

नई दिल्ली संयुक्त राष्ट्र संघ की ओर से जारी एक रिपोर्ट में भारत समेत दुनिया के कई देशों में घटती जन्म दर को लेकर अलर्ट किया गया है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में जन्म दर अब प्रति कपल 1.9 ही रह गई है, जो कि रिप्लेसमेंट लेवल से कम है। जनसंख्या विज्ञानियों का मानना है कि आबादी का रिप्लेसमेंट लेवल 2.1 है, ऐसे में प्रजनन दर 1.9 ही रह जाना चिंता का विषय है। भले ही भारत की आबादी में अभी सीधे तौर पर असर नहीं दिख रहा है, लेकिन एक पीढ़ी यानी कुछ दशकों में बाद गंभीर चिंता की स्थिति बन सकती है। अब सवाल यह है कि जन्म दर में इस गिरावट के क्या कारण हैं? संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में इस सवाल का भी जवाब दिया गया है। दुनिया के 14 देशों के सर्वे के आधार पर यह रिपोर्ट तैयार की गई है। इस सर्वे में घटती जन्मदर को लेकर भी लोगों से एक सवाल भी पूछा गया कि आखिर आप जितने बच्चे पैदा करना चाहते हैं, उससे कम क्यों किए या फिर एक भी क्यों नहीं किया। इसके जो जवाब लोगों ने दिए हैं, उनसे कई चीजें स्पष्ट होते हैं और लोगों की चिंताएं भी समझ में आती हैं। भारत की बात करें तो 13 फीसदी लोगों ने कहा कि वे इसलिए बच्चे पैदा नहीं कर पाए क्योंकि वे बांझपन की समस्या से जूझ रहे हैं या फिर गर्भ ठहरने में दिक्कत आ रही है। इसके अलावा 14 फीसदी लोगों का कहना था कि वे प्रेग्नेंसी से जुड़ी मेडिकल समस्याओं से जूझ रहे हैं। वहीं 15 फीसदी लोग ऐसे हैं, जिनका कहना है कि वे खराब स्वास्थ्य या फिर किसी गंभीर बीमारी के चलते पैरेंट नहीं बन पा रहे हैं। एक चिंता आर्थिक भी है, जिसके बारे में 38 फीसदी लोगों ने राय जाहिर की है। इन लोगों का कहना है कि आर्थिक सीमाओं के चलते वे परिवार नहीं बढ़ाना चाहते। उन्हें लगता है कि यदि परिवार बहुत बढ़ा लिया तो फिर बच्चों की परवरिश, शिक्षा, रिहायश जैसी चीजें व्यवस्थित तरीके से पूरी नहीं हो सकेंगी। वहीं 22 फीसदी लोगों की चिंता आवास से जुड़ी है और 21 फीसदी लोग रोजगार के अवसरों की कमी के कारण बच्चे नहीं पैदा करना चाहते। दिलचस्प बात है कि आर्थिक चिंता के चलते परिवार बढ़ाने से बचने वालों की संख्या अमेरिका में भी 38 फीसदी ही है।  

सरकार ने बदले AC के नियम! अब नहीं मिलेगी 20°C से नीचे की बर्फीली हवा, जानिए Plan

नई दिल्ली भारत सरकार अब एयर कंडीशनर (AC) के उपयोग को लेकर एक नया नियम लागू करने जा रही है. केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने ऐलान किया है कि अब देशभर में ACs के तापमान को एक तय सीमा में रखा जाएगा. इस नई योजना के तहत AC को 20 डिग्री सेल्सियस से कम ठंडा नहीं किया जा सकेगा, जबकि अधिकतम तापमान सीमा 28 डिग्री सेल्सियस रखी जाएगी. मनोहर लाल खट्टर ने बताया साहसिक कदम मंत्री ने इसे ऊर्जा दक्षता (energy efficiency) की दिशा में एक “साहसिक कदम” बताया है. उनका कहना है कि ये कदम AC के जरिए जरूरत से ज्यादा बिजली खपत को रोकने में मदद करेगा. खासतौर पर गर्मियों के मौसम में जब बिजली की मांग तेजी से बढ़ती है, तब ऐसे छोटे बदलाव भी बड़े असर डाल सकते हैं. लक्ष्य है बिजली की बचत करना भारत में अक्सर देखा गया है कि घरों और दफ्तरों में AC का तापमान 18 डिग्री या उससे भी कम तक सेट कर दिया जाता है. इससे बिजली की खपत बहुत ज्यादा हो जाती है और बिजली ग्रिड पर दबाव बढ़ता है. अब सरकार चाहती है कि सभी यूजर्स के लिए एक समान नियम हो, जिससे बिजली की बचत की जा सके. क्यों जरूरी हुआ ये बदलाव? केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने बताया कि जितना कम तापमान पर एसी चलता है, उतनी ही ज्यादा बिजली की खपत होती है. इससे न केवल ऊर्जा की बर्बादी होती है, बल्कि पर्यावरण पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है. इस कदम से क्लाइमेट चेंज से लड़ने और बिजली की बचत में मदद मिलेगी. जापान और इटली में पहले से लागू है ऐसा नियम प्रेस कॉन्फ्रेंस में खट्टर ने बताया कि दुनिया के कई देशों में यह प्रणाली पहले से लागू है. जापान में एसी का तापमान 26°C पर फिक्स किया गया है. इटली में यह सीमा 23°C है. भारत भी अब इसी दिशा में कदम बढ़ा रहा है ताकि 2030 और 2047 के विजन को पूरा किया जा सके. अभी कितने डिग्री पर चलते हैं एसी? वर्तमान में बाजार में उपलब्ध अधिकतर एसी 16°C तक के न्यूनतम तापमान पर चल सकते हैं. लेकिन सरकार के इस प्रस्ताव के बाद नई तकनीक वाले एसी में यह लिमिट पहले से फिक्स होगी. यानी उपभोक्ता चाहकर भी एसी को 20 डिग्री से कम या 28 डिग्री से अधिक पर सेट नहीं कर पाएंगे. यूजर्स पर क्या असर होगा? अगर यह नियम लागू होता है, तो बाजार में मौजूद ऐसे AC जिनका तापमान 16°C या 18°C तक जाता है, वे अब 20°C से कम पर कूल नहीं करेंगे और अधिकतम तापमान 28°C तक सीमित रहेगा. इससे न केवल बिजली की बचत होगी, बल्कि लंबे समय में उपभोक्ताओं को बिजली के बिल में राहत भी मिलेगी. जनता से राय मांगी गई सरकार ने इस फैसले से पहले mygov.in पोर्टल पर एक पब्लिक सर्वे भी शुरू किया है, जिसमें लोगों से पूछा गया है कि उनके लिए सबसे उपयुक्त AC का तापमान क्या है. यह सर्वे 25 मार्च 2025 तक खुला रहेगा, और इसका उद्देश्य जनता की आदतों और कूलिंग की जरूरतों को समझना है. बिजली बचत में कितना असर पड़ेगा? ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (BEE) के अनुसार, AC का तापमान बढ़ाकर बिजली की खपत को काफी हद तक कम किया जा सकता है. उदाहरण के तौर पर, यदि AC को 20°C से 24°C पर सेट किया जाए, तो करीब 24% तक बिजली की बचत होती है. हर 1 डिग्री तापमान बढ़ाने पर लगभग 6% बिजली की बचत होती है. अगर भारत के 50% AC उपयोगकर्ता यह आदत अपना लें, तो 10 अरब यूनिट बिजली सालाना बचाई जा सकती है, करीब ₹5,000 करोड़ की बचत हो सकती है और 8.2 मिलियन टन CO₂ उत्सर्जन भी घटाया जा सकता है. यह न सिर्फ पर्यावरण के लिए फायदेमंद है, बल्कि देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए भी जरूरी कदम है. 

‘युवा पीढ़ी अदालत के तौर-तरीके नहीं सीखना चाहती: सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली  सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को टिप्पणी की कि आज की पीढ़ी अदालत के तौर-तरीके (कोर्ट क्राफ्ट) नहीं सीखना चाहती। न्यायमूर्ति एस वी एन भट्टी और न्यायमूर्ति पी बी वराले की पीठ ने यह टिप्पणी उस समय की, जब एक युवा वकील अदालत का आदेश पढ़े जाते समय बहुत सामान्य तरीके से वहां से जाने लगीं। जब मामला सुनवाई के लिए आया तो वकील ने अदालत से कहा कि कार्य स्थगन के लिए एक पत्र वितरित किया गया है। जब पीठ ने आदेश पढ़ना शुरू किया तो वह वहां से जाने लगीं। पीठ ने इस पर नाखुशी जताते हुए कहा, ‘युवा पीढ़ी अदालत के तौर-तरीके नहीं सीखना चाहती। मामलों को पढ़ना केवल 30 प्रतिशत है, बाकी 70 प्रतिशत अदालत के तौर-तरीके हैं।’ जब कोर्ट में अचानक सिगरेट पीने लगा वादी मामला मार्च का है। दिल्ली के एक कोर्ट में सुनवाई के बीच वादी सुशील कुमार वीडियो कॉन्फ्रेंस के दौरान सिगरेट पीने लगे। तीस हजारी कोर्ट के अतिरिक्त जिला न्यायाधीश शिव कुमार सुनवाई कर रहे थे। कोर्ट ने सुशील कुमार से सवाल किया है कि कोर्ट की कार्यवाही के बीच वीसी पर सिगरेट पीने के लिए आपके खिलाफ ऐक्शन क्यों न लिया जाए? आदेश में कहा गया है कि जब दूसरे मामलों की सुनवाई चल रही थी, तब कुमार को फोन पर बात करते हुए देखा गया था। तब उन्हें ऐसा न करने की चेतावनी दी गई थी, क्योंकि इससे अदालत की कार्यवाही पर असर पड़ रहा था। हालांकि, उन्होंने कोर्ट की आपत्ति पर ध्यान नहीं दिया और उसके बाद उनका ऑडियो म्यूट कर दिया गया। जब उनके केस पर सुनवाई शुरू हुई, तो इस बर्ताव के बारे में पूछा गया। उन्होंने अदालत से माफी मांगी और दोबारा ऐसा नहीं करने का वादा किया।  

राहुल गांधी ने हाशिए पर पड़े छात्रों को बेहतर छात्रावास और समय पर छात्रवृत्ति के लिए पीएम मोदी को लिखा पत्र

 नई दिल्ली कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर वंचित समुदायों के छात्रों के लिए छात्रवृत्ति में देरी की ओर ध्यान दिलाया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अपने पत्र में देश के दलित, अनुसूचित जनजाति, अति पिछड़ा वर्ग, अन्य पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक छात्रों के हित में फैसले लेने की अपील की है। उन्होंने कहा कि आवासीय छात्रावासों की स्थिति ‘दयनीय’ है। कांग्रेस सांसद ने मैट्रिक पास करने के बाद  हाशिए पर पड़े समुदायों के छात्रों को मिलने वाली छात्रवृत्ति के भुगतान में होने वाली देरी का मुद्दा भी उठाया। 90 फीसदी छात्रों की पढ़ाई बाधित होती है राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री से अपील की है कि छात्रों से जुड़े इन दो मुद्दों पर तत्काल ध्यान देने की अपील की है। उन्होंने अपने पत्र में लिखा है कि हाशिए पर पड़े समुदायों से आने वाले 90 प्रतिशत छात्रों की शिक्षा में छात्रवृत्ति और छात्रावास के कारण बाधा आती है। बिहार दौरे पर छात्रों से मुलाकात का भी जिक्र अपने बिहार दौरे के अनुभव का उल्लेख कर राहुल ने कहा, बिहार के दरभंगा में आंबेडकर छात्रावास के हाल के दौरे के दौरान छात्रों ने शिकायत की। एक ही कमरे में 6-7 छात्रों को रहने के लिए मजबूर होना पड़ता है। शौचालय बदहाल हैं। पीने का पानी भी असुरक्षित है। भोजनालय की सुविधा नहीं मिलती। पुस्तकालयों या इंटरनेट जैसी बुनियादी सेवाएं भी नदारद हैं। पोर्टल ठप रहने के कारण छात्रवृत्ति नहीं मिली राहुल ने कहा, हाशिए पर पड़े समुदायों से आने वाले छात्रों को मैट्रिक के बाद सही समय पर छात्रवृत्ति नहीं मिल रही है। बिहार का उदाहरण देते हुए राहुल ने अपने पत्र में दावा किया कि छात्रवृत्ति पोर्टल तीन साल तक ठप रहा। 2021-22 में किसी भी छात्र को छात्रवृत्ति नहीं मिली।

देशभर में कोरोना की बढ़ रही रफ्तार, अबतक 74 मौत…इस नए वेरिएंट की हुई एंट्री

नई दिल्ली  देश में एक बार फिर कोरोना वायरस के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। मंगलवार को कर्नाटक में कोरोना से 3 मौतों के बाद देश में कुल मृतकों की संख्या 71 हो गई है। इसी के साथ एक्टिव मरीजों की संख्या 7121 पहुंच गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा मंगलवार को जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, बीते 24 घंटे में 306 नए मामले और 6 लोगों की मौत हुई है। इनमें कर्नाटक के दो, केरल और दिल्ली में 1 मरीज ने संक्रमण के कारण अपनी जान गंवाई है। महाराष्ट्र में कोरोना से सबसे ज्यादा मौतें कोरोना से अब तक महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा 19 मौतें हुई हैं। इसके बाद केरल में 19, दिल्ली में 8 और कर्नाटक में 11 लोगों ने कोरोना संक्रमण के कारण अपनी जान गंवाई है।  इसके साथ ही गुजरात में 114 और कर्नाटक में 100 नए मामले सामने आए हैं। आंकड़ों के अनुसार, देश में बीते 10 दिन में 3000 से ज्यादा कोरोना के मामले दर्ज किए गए हैं। वहीं, इस दौरान 40 से ज्यादा लोगों की मौत हुई है। केरल में कोरोना के सर्वाधिक मामले देश में कोरोना वायरस से केरल के हालात सबसे ज्यादा नाजुक बने हुए हैं। केरल में एक्टिव मरीजों की संख्या 2941 से ज्यादा हो चुकी है। राज्य में बढ़ते मामलों के बीच सरकार और स्वास्थ्य विभाग एक्टिव हो चुका है। मीडिया को संबोधित करते हुए केरल के स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि कोरोना का नया वैरिएंट बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों के लिए ज्यादा खतरनाक है। स्वास्थ्य मंत्री ने लोगों से मास्क का इस्तेमाल और सैनिटाइजर का उपयोग करने की अपील की है। कोरोना के खिलाफ युद्ध स्तर पर तैयारी चालू देश में कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों को देखते हुए एक बार फिर इससे बचाव के लिए युद्ध स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं। विभिन्न राज्यों में कोरोना के मरीजों के लिए आइसोलेशन वॉर्ड का निर्माण किया जा रहा है। ऑक्सीजन और अन्य दवाओं की पूर्ति के लिए अस्पताल और प्रशासन तैयारी कर रहा है। PM से मिलने के पहले कराना होगा RT-PCR टेस्ट कोरोना के बढ़ते आंकड़ों के बीच प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा आदेश जारी किया गया है कि मंत्रियों और अन्य अधिकारियों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने से पहले अपना आरटी-पीसीआर टेस्ट कराना होगा। टेस्ट कराने के बाद ही मंत्री प्रधानमंत्री से मुलाकात कर पाएंगे। आरटी-पीसीआर की रिपोर्ट नेगेटिव आने के बाद ही अधिकारी और मंत्री पीएम मोदी से मुलाकात कर पाएंगे। क्या है RT-PCR टेस्ट? जानकारी के लिए बता दें कि रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन-पॉलीमरेज चेन रिएक्शन (RT-PCR) टेस्ट कोरोना का का पता लगाने के लिए किया जाता है। इस टेस्ट के जरिए कोरोना संक्रमण के आनुवंशिक पदार्थ (RNA) का पता लगाने के लिए नाक-गले से स्वाब नमूने लेते हैं। आरटी-पीसीआर टेस्ट के जरिए 4 स 5 घंटों के भीतर ही इस बात की जानकारी मिल जाती है कि कोई व्यक्ति कोरोना से संक्रमित है या नहीं। कोरोना के 4 नए वैरिएंट का डर भारत में वर्तमान में कोरोना वायरस के 4 नए वैरिएंट देखें जा रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, भारत में कोविड-19 के ओमिक्रोन की सब‑वैकिएंट XFG, LF.7, JN.1, NB.1.8.1 के मामले सामने आ रहे हैं। कोरोना के इन नए वैरिएंट के सामान्य लक्षणों में बुखार, सूखी खांसी, गले में खराश, थकान शामिल हैं । कोरोना से बचाव के उपाय कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों को मद्देनजर रखते हुए एक बार फिर इससे बचाव के लिए उपायों को अपनाना जरूरी है। आइए जानते हैं इसके बारे में।     भीड़भाड़ वाले क्षेत्र जैसे बाजार और मॉल में जाने से बचें।     सार्वजनिक स्थान और वाहन का इस्तेमाल करते समय मास्क लगाएं।     बार-बार साबुन और पानी से हाथ धोए।     अगर आपके पास पानी मौजूद नहीं है तो सैनेटाइजर का उपयोग करें।     खांसी और छींकते समय नैपकिन या कोहनी मुंह के पास रखें। अगर आपको स्वयं या अपने परिवार के किसी सदस्य में कोरोना के लक्षण नजर आते हैं, तो तुरंत आरटी-पीसीआर टेस्ट करवाएं। टेस्ट का रिजल्ट पॉजिटिव आने पर डॉक्टर से सलाह लें।

पीएम मोदी से मिलने के पहले मंत्रियों को कराना होगा RT-PCR टेस्ट, कोरोना के बढ़ते केस के बीच फैसला

नई दिल्ली कोरोना वायरस के मरीजों की बढ़ती संख्या के बीच सरकार भी अलर्ट मोड पर है। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करने वाले मंत्रियों को आरटी पीसीआर टेस्ट कराना जरूरी होगा। हालांकि, इसे लेकर सरकार की ओर से आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा गया है। यह फैसला ऐसे समय पर लिया जा रहा है, जब कई राज्यों में कोविड-19 के एक्टिव केस तेजी से बढ़ रहे हैं। इंडिया टुडे की रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि पीएम मोदी से मिलने वाले मंत्रियों को RT-PCR टेस्ट कराना होगा। आंकड़े बता रहे हैं कि देश में एक्टिव केस की संख्या 7 हजार के पार हो चुकी है। भारत में कोविड के हाल केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के बुधवार के आंकड़ों के अनुसार, देश में 7 हजार 121 एक्टिव केस हैं। सबसे ज्यादा केस केरल में 2 हजार 223 हैं। वहीं, गुजरात में उनकी संख्या 1 हजार 223 है। तीसरे स्थान पर 757 एक्टिव केस के साथ राजधानी दिल्ली है। इनके अलावा पश्चिम बंगाल में 747, महाराष्ट्र में 615, उत्तर प्रदेश में 229, कर्नाटक में 459, तमिलनाडु में 204, राजस्थान में 138, हरियाणा में 125 हैं। आंध्र प्रदेश में 72, असम में 6, बिहार में 47, चंडीगढ़ में 3, छत्तीसगढ़ में 48, गोवा में 6, हिमाचल प्रदेश में 2, जम्मू और कश्मीर में 9, झारखंड में 10, मध्य प्रदेश में 65, मणिपुर में 1, ओडिशा में 41, पुडुचैरी में 10, पंजाब में 33, सिक्किम में 33, तमिलनाडु में 204, तेलंगाना में 11, त्रिपुरा में 1, उत्तराखंड में 3 मरीजों का इलाज जारी है।

गाजा में राहत सामग्री लाने की कोशिश में फिलीस्तीनियों पर फिर से गोलीबारी , 36 की मौत, 207 अन्य जख्मी हो गए

गाजा   गाजा में सहायता सामग्री तक पहुंचने की कोशिश कर रहे फलस्तीनियों पर फिर से गोलीबारी की गई जिसमें 36 लोगों की मौत हो गई जबकि 207 अन्य जख्मी हो गए। फलस्तीन के स्वास्थ्य मंत्रालय ने यह जानकारी दी। विशेषज्ञों और मानवीय सहायता कार्यकर्ताओं का कहना है कि इजराइल की नाकाबंदी और 20 महीने के सैन्य अभियान ने गाजा को भुखमरी के कगार पर पहुंचा दिया है। इजराइली और अमेरिकी समर्थन वाले ‘गाजा ह्मूमेनिटेरियन फाउंडेशन’ द्वारा संचालित सहायता वितरण स्थलों के पास गोलीबारी में कम से कम 163 लोगों की मौत हो गई है जबकि 1495 लोग जख्मी हुए हैं। इज़राइली सेना ने पहले उन लोगों पर चेतावनी के तौर पर गोलियां चलाने की बात स्वीकार की है, जो उसके अनुसार संदिग्ध तरीके से उसकी सेना की ओर बढ़ रहे थे। फाउंडेशन का कहना है कि वितरण केन्द्रों में या उसके आसपास कोई हिंसा नहीं हुई है। लेकिन इसने लोगों को निर्धारित पहुंच मार्गों पर ही रहने की चेतावनी दी है। नासेर अस्पताल के अनुसार, दक्षिणी गाजा में रफह के आसपास सहायता प्राप्त करने का प्रयास करते समय कम से कम आठ लोग मारे गए। अल-अवदा अस्पताल के प्रवक्ता नादेर गरगून के अनुसार, उत्तरी गाजा में मंगलवार को दो पुरुष और एक बच्चे की मौत हो गई और कम से कम 130 लोग घायल हो गए। अस्पताल में ही घायलों को भर्ती किया गया था। उन्होंने बताया कि ज़्यादातर लोगों को गोली लगी है। प्रत्यक्षदर्शियों ने ‘एसोसिएटेड प्रेस’ को बताया कि इज़राइली सेना ने मध्य गाजा में सहायता स्थल से कई सौ मीटर की दूरी पर देर रात करीब दो बजे गोलीबारी की। लोग सहायता सामग्री लेने की ‍उम्मीद में भोर से पहले ही सामग्री वितरण स्थल पर पहुंचना शुरू कर देते हैं। इज़राइली सेना ने कहा कि उसने लोगों पर चेतावनी के तौर पर गोलियां चलाईं और उसने लोगों को संदिग्ध बताया। उसने कहा कि लोग सहायता स्थल के खुलने के समय से पहले ही वहां पहुंचने लगे थे और उसके सैनिकों से कुछ मीटर दूर थे। इसके अतिरिक्त, स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, मंगलवार को गाजा शहर में इजराइली हमले में तीन फलस्तीनी चिकित्सक मारे गए। स्वास्थ्य मंत्रालय की आपातकालीन सेवा के चिकित्सक गाजा शहर के जाफा स्ट्रीट में एक घर पर हुए इजराइली हमले को लेकर प्रतिक्रिया दे रहे थे, तभी दूसरा हमला इमारत पर हुआ। इजराइली सेना ने हमले पर कोई टिप्पणी नहीं की, लेकिन कहा कि पिछले दिनों वायु सेना ने रॉकेट लांचरों सहित हमास के सैन्य ढांचे से संबंधित दर्जनों लक्ष्यों को निशाना बनाया है। इस बीच प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने मंगलवार को कहा कि संभावित युद्ध विराम समझौते पर “सार्थक प्रगति” हुई है, जिससे गाजा में बंधक के तौर पर रखे गए 55 लोगों में से कुछ को वापस लाया जा सकेगा, लेकिन उन्होंने कहा कि “अभी उम्मीद करना जल्दबाजी होगी।” विदेश मंत्री गिदोन सार ने भी मंगलवार को उल्लेख किया कि युद्ध विराम वार्ता में प्रगति हुई है। नेतन्याहू आगे के कदमों पर चर्चा करने के लिए मंगलवार शाम को इजराइली वार्ता दल और रक्षा मंत्री के साथ बैठक कर रहे थे।    

बकरीद पर नमाज नहीं पढ़ने दी, कुर्बानी से रोका; मुस्लिमों को भी नहीं छोड़ रहे कट्टर पाकिस्तानी

इस्लामाबाद  पाकिस्तान में अब मुसलमानों को भी प्रताड़ित किया जाने लगा है। अहमदिया समुदाय को ईद-उल-अजहा के मौके पर कम से कम सात शहरों में नमाज अदा करने और कुर्बानी देने से रोक दिया गया। जमात-ए-अहमदिया पाकिस्तान (JAP) ने मंगलवार को यह जानकारी दी। समुदाय ने आरोप लगाया कि धार्मिक उग्रवादियों और स्थानीय प्रशासन की मिलीभगत से यह उत्पीड़न किया गया। JAP के अनुसार, पंजाब पुलिस ने दो अहमदियों को गिरफ्तार किया और तीन के खिलाफ देश के विवादास्पद ईशनिंदा कानून (सेक्शन 298-सी) के तहत केस दर्ज किया गया। आरोप है कि वे परंपरागत कुर्बानी देने की कोशिश कर रहे थे, जिसे पाकिस्तान में अहमदियों के लिए प्रतिबंधित किया गया है। अहमदियों को जिन शहरों में ईद की नमाज पढ़ने से रोका गया, उनमें खुशाब, मीरपुर खास, लोधरां, भक्कर, राजनपुर, उमरकोट, लरकाना और कराची शामिल हैं। JAP का कहना है कि इन शहरों में स्थानीय प्रशासन और तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (TLP) जैसे कट्टरपंथी संगठनों ने मस्जिदों तक में समुदाय को नमाज नहीं पढ़ने दी। लाहौर में स्थित गढ़ी शाही की सबसे पुरानी अहमदिया इबादतगाह को ईद के दिन पुलिस ने TLP के दबाव में सील कर दिया। जबरन कलमा पढ़वाकर धर्म परिवर्तन का दावा कराची के नाजिमाबाद इलाके में एक चौंकाने वाली घटना में TLP कार्यकर्ताओं ने अहमदिया समुदाय के इरफान-उल-हक और उनके बेटे को उनके कुर्बानी के जानवर समेत पुलिस थाने ले जाकर धमकाया। जेएपी ने कहा, “जान बचाने के लिए उन्हें कलमा पढ़ने को मजबूर किया गया, जिसके बाद TLP ने इसे ‘धर्म परिवर्तन’ कहकर जश्न मनाया और उन्हें माला पहनाई।” पुलिस की दलील और JAP का विरोध पंजाब पुलिस ने पुष्टि की कि उन्होंने दो अहमदियों को गिरफ्तार किया और तीन के खिलाफ कार्रवाई की। पुलिस ने कहा, “298-C के तहत अहमदियों को इस्लामी रस्में निभाने की इजाजत नहीं है।” वहीं, जमात-ए-अहमदिया ने इस कदम को न सिर्फ भेदभावपूर्ण बल्कि संविधान के खिलाफ बताया। उन्होंने कहा, “पाकिस्तान के संविधान का अनुच्छेद 20 हर नागरिक को धार्मिक स्वतंत्रता की गारंटी देता है, लेकिन अहमदियों को यह अधिकार नहीं दिया जा रहा।” यह घटना ऐसे समय पर हुई है जब अहमदिया समुदाय पर हमलों की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। मई में एक वरिष्ठ अहमदिया डॉक्टर की हत्या की गई थी और पंजाब में 100 से अधिक अहमदिया कब्रों को अपवित्र किया गया था। 1974 में पाकिस्तान की संसद ने अहमदियों को “गैर-मुस्लिम” घोषित किया था और 1984 में उनके लिए इस्लामिक प्रतीकों और रिवाजों का पालन करना भी गैरकानूनी बना दिया गया। मानवाधिकार संकट JAP ने कहा, “कट्टरपंथी संगठनों का बढ़ता दुस्साहस हमारे समुदाय की सुरक्षा के लिए खतरा बन गया है। जबरन धर्मांतरण और धार्मिक स्वतंत्रता पर प्रतिबंध गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन हैं।”

भारतीय शुभांशु शुक्ला का Axiom 04 मिशन फिर स्थगित, सामने आई ये बड़ी वजह

नई दिल्ली भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुंभाशु शुक्ला का Axiom-4 मिशन एक बार फिर टल गया है. ‘स्टैटिक फायर’ परीक्षण के बाद बूस्टर की जांच के दौरान लिक्विड ऑक्सीजन (LOx) रिसाव का पता चलने के बाद मिशन पर ब्रेक लगाने का निर्णय लिया गया. इस मिशन के तहत भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को ISS भेजा जाना था. स्पेसएक्स ने इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) के लिए निर्धारित Axiom-4 मिशन का लॉन्च स्थगित किए जाने की पुष्टि की है. शुभांशु को लेकर Axiom-4 मिशन बुधवार शाम 5.30 बजे लॉन्च होने वाला था. Axiom-4 मिशन में भारत, पोलैंड और हंगरी के अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं. स्पेसएक्स ने X पर पोस्ट करते हुए लिखा, Ax-4 मिशन के लिए फाल्कन 9 रॉकेट का कल होने वाला लॉन्च स्थगित किया जा रहा है ताकि स्पेसएक्स की टीमें LOx रिसाव को ठीक कर सकें. कंपनी ने आगे कहा कि मरम्मत पूरी होने और रेंज की उपलब्धता के आधार पर नई लॉन्च तारीख शेयर की जाएगी. इससे पहले स्पेसएक्स ने एक बयान में कहा था, ”लॉन्च के लिए मौसम की अनुकूलता 85 प्रतिशत है. हालांकि एसेंट कॉरिडोर (चढ़ाई मार्ग) में तेज हवाओं की निगरानी जारी है.” शुभांशु को 2023 में अमेरिका की यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने Ax-4 मिशन के लिए चुना था. यह मिशन भारत और नासा के बीच सहयोग का परिणाम है. शुभांशु ने स्पेसएक्स और एक्सिओम स्पेस से विशेष ट्रेनिंग ली है. यह चौथी बार है जब Axiom-4 मिशन को टाला गया है. कुछ दिन पहले भी लॉन्च को टालना पड़ा था. उस समय मौसम की स्थिति अनुकूल नहीं थी और बारिश की 45 प्रतिशत संभावना थी. तेज हवाएं लॉन्च साइट पर रिपोर्ट की गई थीं. एक बार लॉन्च होने के बाद Ax-4 मिशन के अंतर्गत अंतरिक्ष यात्री लगभग 14 दिन अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर बिताएंगे. इस दौरान वे माइक्रोग्रैविटी, जीवन विज्ञान और Material साइंस से जुड़े कई वैज्ञानिक प्रयोग करेंगे. ये प्रयोग दुनियाभर के 30 से ज्यादा देशों के शोधकर्ताओं के सहयोग से किए जाएंगे. यह मिशन ना सिर्फ भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में एक मील का पत्थर है, बल्कि यह राकेश शर्मा के 1984 के ऐतिहासिक मिशन की याद दिलाता है. शुभांशु शुक्ला भारतीय वायु सेना के ग्रुप कैप्टन हैं और गगनयान कार्यक्रम के चार अंतरिक्ष यात्रियों में से एक हैं.   

ट्रेन यात्रियों के लिए Good news! अब सफर से 24 घंटे पहले मिलेगा सीट कन्फर्मेशन का अपडेट

नई दिल्ली  ट्रेन में सफर करने वालों के लिए एक अच्छी खबर है। रेलवे अब एक नया नियम लाने की सोच रहा है। इससे ट्रेन में सीट मिलने को लेकर यात्रियों को होने वाली परेशानी कम हो जाएगी। नए नियम के मुताबिक रेलवे ट्रेन खुलने से 24 घंटे पहले ही चार्ट जारी करने की योजना बना रहा है। ऐसे में यात्री 24 घंटे पहले ही अपनी सीट की स्थिति जान सकेंगे। अभी ट्रेन खुलने से सिर्फ 4 घंटे पहले पता चलता है कि आपकी सीट पक्की हुई या नहीं। इससे दूर से आने वाले यात्रियों को बहुत दिक्कत होती है। उन्हें आखिरी समय तक पता नहीं चलता कि उनका टिकट कन्फर्म हुआ है या नहीं। बता दें कि चार्ट में यह जानकारी होती है कि किस यात्री को कौन सी सीट मिली है। बीकानेर डिवीजन में शुरू हुई योजना एक रेलवे अधिकारी ने बताया कि यह योजना अभी राजस्थान के बीकानेर डिवीजन में 6 जून से शुरू की गई है। अभी तक कोई परेशानी नहीं आई है। उन्होंने कहा, ‘हम कुछ और हफ्तों तक इसे चलाकर देखेंगे। इससे पता चलेगा कि कोई दिक्कत तो नहीं आ रही है। अगर कोई परेशानी आती है, तो उसे कैसे ठीक किया जाए।’ अधिकारी ने आगे कहा कि कई बार यात्रियों को स्टेशन पहुंचने से कुछ घंटे पहले ही पता चलता है कि उनका वेटिंग लिस्ट वाला टिकट कन्फर्म नहीं हुआ है। इससे उन्हें बहुत परेशानी होती है। 24 घंटे पहले चार्ट जारी होने से लोगों को अपनी यात्रा की योजना बनाने में मदद मिलेगी और तनाव भी कम होगा। यात्रियों को यह होगी सुविधा रेलवे अधिकारियों का कहना है कि इस नए सिस्टम से यात्रियों को अपनी यात्रा को बेहतर तरीके से प्लान करने में मदद मिलेगी। उदाहरण के लिए जो यात्री 100 किमी या उससे ज्यादा दूर से आ रहे हैं, उन्हें स्टेशन पहुंचने के लिए बेहतर जानकारी और समय मिलेगा। इससे आखिरी समय में होने वाली परेशानी कम हो जाएगी। सूत्रों के अनुसार, इस नए नियम का उन लोगों पर कोई असर नहीं पड़ेगा जो आखिरी समय में यात्रा करने की योजना बनाते हैं और तत्काल टिकट बुक करते हैं। एक अन्य अधिकारी ने कहा कि चूंकि तत्काल टिकट ट्रेन के चलने से 24 घंटे पहले बुक किए जाते हैं। इसलिए एक दिन पहले पूरा चार्ट जारी करने से कोई समस्या नहीं होगी। बीकानेर में शुरू हुआ पायलट प्रोजेक्ट रेलवे के अधिकारियों के अनुसार, इस नई प्रणाली का परीक्षण 6 जून से राजस्थान के बीकानेर डिवीजन में शुरू कर दिया गया है. अब तक इस ट्रायल में किसी तरह की कोई समस्या सामने नहीं आई है. अधिकारी ने बताया कि कुछ और हफ्तों तक इस पायलट प्रोजेक्ट को चलाया जाएगा ताकि सभी तकनीकी पहलुओं को सही तरीके से जांचा जा सके. तत्काल टिकटों पर नहीं पड़ेगा असर रेलवे अधिकारियों का कहना है कि चूंकि तत्काल टिकटों की बुकिंग ट्रेन के प्रस्थान से 48 घंटे पहले ही होती है, इसलिए 24 घंटे पहले सीट कन्फर्मेशन देने में कोई दिक्कत नहीं होगी. हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि रेलवे कन्फर्म टिकट रद्द होने की स्थिति में दूसरी और तीसरी चार्ट लिस्ट भी जारी करेगा या नहीं. अभी क्या है मौजूदा व्यवस्था? फिलहाल, रेलवे दो बार आरक्षण चार्ट तैयार करता है. पहला चार्ट ट्रेन के प्रस्थान से चार घंटे पहले और अंतिम चार्ट ट्रेन छूटने से 30 मिनट पहले तैयार किया जाता है. यदि नई व्यवस्था लागू होती है तो यात्रियों को ट्रेन चलने से एक दिन पहले ही कन्फर्म सीट की जानकारी मिल जाएगी, जिससे सफर की तैयारी बेहतर तरीके से की जा सकेगी. रेलवे का यह कदम यात्रियों की सुविधा और समय प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है. पायलट प्रोजेक्ट सफल रहा तो जल्द ही देशभर में इसे लागू किया जा सकता है. क्या और भी लिस्ट जारी होंगी? अभी यह साफ नहीं है कि रेलवे कन्फर्म रिजर्वेशन वाले यात्रियों की दूसरी और तीसरी लिस्ट जारी करेगा या नहीं। क्योंकि ऐसा हो सकता है कि कई यात्री कन्फर्म टिकट होने के बावजूद आखिरी 24 घंटों में अपनी बुकिंग कैंसिल कर दें। एक सूत्र ने कहा कि पहले पायलट प्रोजेक्ट पूरा हो जाने दीजिए, उसके बाद यात्रियों के हित को ध्यान में रखते हुए फैसले लिए जाएंगे। पहले रेलवे रिजर्वेशन चार्ट आमतौर पर दो बार तैयार किए जाते थे। पहला चार्ट ट्रेन के निर्धारित प्रस्थान समय से चार घंटे पहले तैयार किया जाता था और दूसरा या अंतिम, चार्ट ट्रेन के प्रस्थान से 30 मिनट पहले तैयार किया जाता था। रेलवे को उम्मीद है कि यह नया नियम यात्रियों को पसंद आएगा।

लॉस एंजिल्स में आईफोन लूट ले गए प्रदर्शनकारी, हुड़दंगियों ने एप्पल स्टोर में की तोड़ फोड़

लॉस एंजिल्स  अमेरिका के शहर लॉस एंजिल्स में चल रहे प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने एप्पल स्टोर और जॉर्डन फ्लैगशिप समेत तमाम स्टोर्स को लूट लिया। कथित तौर पर यह घटना क्रम रविवार की रात हुआ। सोशल मीडिया पर इस घटनाक्रम का वीडियो भी वायरल हो रहा है। कथित तौर पर जिस वक्त प्रदर्शनकारी एप्पल स्टोर में लूटपाट कर रहे थे उसी वक्त वहां पर स्थानीय पुलिस पहुंच गई, जिसके बाद कई लुटेरे एप्पल स्टोर के अंदर ही फंस गए। एफपीजे की रिपोर्ट के मुताबिक लॉस एंजिल्स के डाउनटाउन में स्थित एप्पल स्टोर पर प्रदर्शनकारियों ने रविवार रात 9 जून को धावा बोल दिया। एक वायरल वीडियो में काले रंग की हुडी पहने हुए मास्क पहने हुए कई व्यक्तियों ने स्टोर पर हमला बोल दिया। इसमें से एक व्यक्ति एप्पल स्टोर से एक डिब्बा उठाते हुए और स्टोर में तोड़फोड़ करते हुए नजर आ रहा है। व्यक्ति एक सामान उठाता है और जोर से एक शीशे पर मार देता है इसके बाद उसमें दरार वीडियो में पुलिस का सायरन और गोलियों की आवाज भी सुनी जा सकती है। इससे पहले डोनाल्ड ट्रंप की आव्रजन नीति के खिलाफ लॉस एंजिल्स की सड़कों पर हजारों प्रदर्शनकारी उतर आए। ट्रंप ने इनको रोकने के लिए नेशनल गॉर्ड्स की तैनाती कर दी थी। लेकिन 300 नेशनल गॉर्ड्स को हजारों लोगो को संभालने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। लोग मास्क लगाकर कैमरों से अपनी पहचान छिपाकर, आंसू गैस और रबर की गोलियों का सामना करते हुए प्रदर्शन करते रहे। गुस्साए ट्रंप ने प्रदर्शनकारियों के मास्क पहनने पर रोक लगा दी। इसके साथ ही आदेश दिया कि अगर कोई प्रदर्शनकारी मास्क लगाए दिखे तो उसे तत्काल प्रभाव से गिरफ्तार किया जाए। ट्रंप के लॉस एंजिल्स में नेशनल गार्ड्स को तैनात करने के फैसले ने वहां के गर्वनर गेविन न्यूजम को नाराज कर दिया। गेविन ने राष्ट्रपति के इस फैसले की आलोचना करते हुए इसके विरोध में मुकदमा दायर करने का ऐलान किया। लॉस एंजिल्स में क्यों हो रही है हिंसा बता दें कि लॉस एंजिल्स पिछले तीन दिनों से प्रदर्शन और हिंसा की चपेट में है. ये हिंसा यहां ट्रंप प्रशासन की ओर से अवैध घुसपैठियों की गिरफ्तारी शुरू किए जाने के खिलाफ हो रही है.  अवैध प्रवासियों के खिलाफ काम कर रही अमेरिकी एजेंसी आईसीई ने कहा उसने एक जगह से  40 से अधिक संदिग्ध अवैध प्रवासियों को गिरफ्तार किया है. उन्होंने आईसीई डेटा का हवाला देते हुए कहा कि शुक्रवार को ग्रेटर एल.ए. क्षेत्र में आईसीई और दूसरी एजेंसियों ने 77 अन्य लोगों को गिरफ्तार किया गया.  अवैध प्रवासियों के खिलाफ एक्शन ट्रंप का चुनावी वादा अवैध प्रवासियों के खिलाफ एक्शन ट्रंप का चुनावी वादा रहा है. अब वे इस मिशन पर सख्ती से काम कर रहे हैं. यह पहली बार है जब किसी राष्ट्रपति ने दशकों में राज्य के अनुरोध के बिना किसी राज्य में सैनिकों को भेजा था. अमेरिका में ये बड़ा मुद्दा बन गया है. ट्रंप की राजनीतिक धारा के विरोधी गेविन डेमोक्रेट पार्टी के हैं जबकि ट्रंप स्वयं रिपब्लिकन हैं.  बता दें कि लॉस एंजिल्स में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सख्त आव्रजन नीतियों और इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट (ICE) की छापेमारी के खिलाफ हो रहे हैं. 6-7 जून को शुरू हुई छापेमारी में फैशन डिस्ट्रिक्ट, कॉम्पटन और होम डिपो जैसे क्षेत्रों में 118 अवैध प्रवासियों को हिरासत में लिया गयाय इससे लैटिनो समुदाय में आक्रोश फैल गया, जिसके बाद हजारों लोग सड़कों पर उतरे. प्रदर्शनकारियों ने 101 फ्रीवे को अवरुद्ध किया, वाहनों में आग लगाई, और सरकारी भवनों पर हमला किया. पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पों में आंसू गैस, रबर बुलेट और फ्लैश-बैंग ग्रेनेड का उपयोग हुआ. ट्रंप प्रशासन ने स्थिति नियंत्रित करने के लिए 2,000 नेशनल गार्ड और 700 मरीन सैनिक तैनात किए, जिसे गवर्नर गैविन न्यूसम ने “भड़काऊ” कदम बताया.  गैविन न्यूसम ने कहा कि यह सार्वजनिक सुरक्षा का मसला नहीं है, यह एक खतरनाक राष्ट्रपति के अहंकार को सहलाने के बारे में है. वहीं ट्रंप ने मेयर कैरेन बास और न्यूसम पर सार्वजनिक सुरक्षा को खतरे में डालने का आरोप लगाया है.   

50 सालों से जल रहा ‘गेटवे टू हेल’ क्रेटर अब ‘अंतिम सांसे’ ले रहा, तुर्कमेनिस्तान में बना ‘नर्क का दरवाजा’ क्या अब बंद हो जाएगा

नई दिल्ली तुर्कमेनिस्तान में 50 सालों से जल रहा ‘गेटवे टू हेल’ क्रेटर अब ‘अंतिम सांसे’ ले रहा है। विज्ञानियों का कहना है कि यह अद्भुत क्रेटर अब बुझने वाला है। आइए जानते हैं क्यों अब तक जल रहा है यह क्रेटर? क्या है गेटवे टू हेल? ‘गेटवे टू हेल’, जिसे आधिकारिक तौर पर ‘शाइनिंग ऑफ काराकुम’ के नाम से जाना जाता है। यह तुर्कमेनिस्तान के काराकुम रेगिस्तान में स्थित 230-फुट चौड़ा (70 मीटर) सिंकहोल है। यह गड्ढा मीथेन के विशाल भूमिगत भंडार से जुड़ा हुआ है, जिससे इसे जलाने के लिए गैस की लगभग असीमित आपूर्ति मिलती है। इस गड्ढे में सैकड़ों गैस की आग लगी हुई है, जो इसे एक अलौकिक चमक देती है। एक दुर्घटना के कारण बना था क्रेटर जब यह क्रेटर बना था उस समय तुर्कमेनिस्तान सोवियत संघ का हिस्सा था। तब अधिकारियों ने क्रेटर से जुड़ी जानकारी को सार्वजनिक नहीं किया था। अब क्रेटर को लेकर सबसे आम सिद्धांत यह है कि यह प्राकृतिक गैस की खोज में हुई दुर्घटना के कारण बना था। 1971 में एक सोवियत गैस ड्रिलिंग स्टेशन ने एक गैस पाकेट को छेद दिया, जिससे एक गड्ढा बन गया और हवा में गैस लीक होने लगी। विज्ञानियों ने जहरीली गैसों को बाहर निकलने से रोकने के लिए गड्ढे को जलाने का निर्णय लिया। विज्ञानियों को उम्मीद थी कि आग कुछ दिनों में बुझ जाएगी, लेकिन नरक के प्रवेश द्वार की आग तब से जल रही है। सरकारी स्वामित्व वाली ऊर्जा कंपनी तुर्कमेनगाज की निदेशक इरिना लुरीवा कहती हैं कि पहले आग की एक चमक कई किलोमीटर दूर से दिखाई देती थी, अब इसे केवल आस-पास के इलाकों से ही देखा जा सकता है। आज केवल आग का एक हल्का स्रोत बचा हुआ है। तुर्कमेनिस्तान में दुनिया का चौथा सबसे बड़ा प्राकृतिक गैस भंडार है, जो रेगिस्तान के नीचे बड़े पैमाने पर फैला हुआ है। आग बुझाने के लिए शुरू की थी परियोजना? पहले की तुलना में तीन गुना छोटी हो गई आग 2022 में तत्कालीन राष्ट्रपति बर्डीमुखमेदोव ने आग को बुझाने के लिए एक परियोजना शुरू की थी। उन्होंने कहा था कि हम मूल्यवान प्राकृतिक संसाधनों को खो रहे हैं। इस परियोजना के तहत आग को बढ़ाने वाली गैस को बाहर निकालने के लिए कई नए गैस कुएं खोदे गए। प्राकृतिक ज्वलनशील गैस के कम प्रवाह के कारण क्रेटर में लपटें कम होने लगी हैं। आग अब पहले की तुलना में तीन गुना छोटी हो गई है।

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