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प्रदेश में मोहन यादव सरकार जल्द कर सकते है मंत्रिमंडल विस्तार, कुछ मंत्रियों की पद से हो सकती है छुट्टी

भोपाल प्रदेश में मोहन यादव सरकार को डेढ़ वर्ष होने जा रहा है, लेकिन राजनीतिक नियुक्तियां नहीं हुई हैं। उधर, मंत्रिमंडल विस्तार का भी नेताओं को इंतजार है। पूर्व मंत्री गोपाल भार्गव, भूपेंद्र सिंह, जयंत मलैया, हरिशंकर खटीक, ब्रजेंद्र प्रताप सिंह और संजय पाठक को अपना नंबर आने की संभावना दिख रही है। दरअसल, पड़ोसी राज्य छत्तीसगढ़ में मंत्रिमंडल विस्तार की सुगबुगाहट है, तो मध्य प्रदेश में भी इस बात की चर्चा शुरू हो गई है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति के बाद मुख्यमंत्री डा.मोहन यादव मंत्रियों के प्रदर्शन के आधार पर मंत्रिमंडल विस्तार कर सकते हैं।   क्षेत्रीय संतुलन साधने की होगी कोशिश इसमें क्षेत्रीय संतुलन साधने के हिसाब कुछ पूर्व मंत्रियों को फिर मौका दिया जा सकता है। उनके अलावा कांग्रेस से भाजपा में आए छिंदवाड़ा जिले की अमरवाड़ा सीट से विधायक कमलेश शाह भी प्रतीक्षारत हैं। रामनिवास रावत के मंत्रिमंडल से त्याग पत्र देने के बाद मोहन कैबिनेट में मुख्यमंत्री सहित 31 मंत्री हैं। नियम के अनुसार 35 मंत्री हो सकते हैं। कुछ मंत्रियों की पद से हो सकती है छुट्टी मंत्री बनने के लिए पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह, संजय पाठक, ब्रजेंद्र प्रताप सिंह सहित अन्य पूर्व मंत्री सत्ता और संगठन में अपने संपर्कों के माध्यम से प्रयासरत भी हैं। संभावना जताई जा रही है कि रिक्त स्थानों की पूर्ति हो सकती है। कुछ मंत्रियों को खराब प्रदर्शन के आधार पर विश्राम भी दिया जा सकता है। सूत्रों का कहना है कि अभी प्राथमिकता प्रदेश भाजपा अध्यक्ष की नियुक्ति है, इसलिए यह काम इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के पहले हो सकता है। उधर, राजनीतिक नियुक्तियां भी अब की जाएंगी। इसको लेकर संगठन स्तर पर कई बार चर्चा भी हो चुकी है। इसमें कुछ पूर्व विधायकों को समायोजित भी किया जाएगा। अभी इनके पास कोई काम नहीं है। जयंत मलैया को बनाया जा सकता है वित्त आयोग का अध्यक्ष सूत्रों के अनुसार पूर्व वित्त और वाणिज्यिक कर मंत्री जयंत मलैया को छठवें राज्य वित्त आयोग का अध्यक्ष बनाया जा सकता है। पांचवें वित्त आयोग की अनुशंसाएं अप्रैल 2026 तक के लिए हैं। आयोग विभिन्न स्तरों पर चर्चा के बाद स्थानीय निकायों को दी जाने वाली राशि के संबंध में अनुशंसा करेगा। ये विधायक कर रहे इंतजार गोपाल भार्गवः नौ बार के विधायक। उमा भारती, बाबूलाल गौर और शिवराज सरकार में लगातार मंत्री रहे। बुंदेलखंड के कद्दावर नेता। भूपेंद्र सिंहः एक बार के सांसद और पांच बार के विधायक। शिवराज सरकार में लगातार आठ वर्ष मंत्री रहे। बुंदेलखंड क्षेत्र में पकड़। जयंत मलैयाः बुंदेलखंड क्षेत्र से आते हैं। आठ बार के विधायक। सुंदरलाल पटवा से लेकर शिवराज सरकार तक में मंत्री रहे। वित्त, वाणिज्यिक कर और जल संसाधन विभाग में काम करने का लंबा अनुभव। ब्रजेंद्र प्रताप सिंहः पांच बार के विधायक। दो बार मंत्री रह चुके हैं। हरिशंकर खटीकः भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के अध्यक्ष रहने के साथ संगठन में काम कर चुके हैं। चार बार के विधायक। शिवराज सरकार में मंत्री भी रहे।  

मध्य प्रदेश के लाखो कर्मचारियों को मिलेगा डबल प्रमोशन, 60 हजार पर डिमोशन का भी खतरा

भोपाल  मध्य प्रदेश में 9 साल बाद राज्य सरकार ने एक बार फिर पदोन्नति प्रक्रिया शुरू की है. अभी इसके लिए नियम बनाए जा रहे हैं. इससे मध्य प्रदेश शासन के 4 लाख से अधिक अधिकारी-कर्मचारी लाभान्वित होंगे. हालांकि सरकारी कर्मचारियों को प्रमोशन मिले 8 साल से अधिक समय बीत चुका है. ऐसे में वो डबल प्रमोशन के हकदार हैं. इस पर भी सरकार ने विचार किया है. वहीं सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश से प्रमोशन के साथ आरक्षित वर्ग के अधिकारियों-कर्मचारियों पर डिमोशन का खतरा भी मंडरा रहा है. अब देखना ये है कि सरकार इस मामले का किस प्रकार पटाक्षेप करती है. एक साथ नहीं मिलेगा डबल प्रमोशन जिन कर्मचारियों और अधिकारियों को पदोन्नति मिले 8 साल से अधिक का समय बीत चुका है, या फिर जिन्होंने साल 2014-15 के बाद ज्वाइन किया और उनकी समयावधि 8 साल पूरी हो चुकी है. ऐसे कर्मचारियों-अधिकारियों को डबल प्रमोशन का लाभ सरकार देगी. हालांकि मुख्यमंत्री ने साफ तौर पर कहा है, कि कर्मचारियों को डबल प्रमोशन का लाभ तो मिलेगा, लेकिन एक साथ नहीं. बल्कि सरकार की मंशा है कि इस वर्ष एक प्रमोशन देने के बाद दूसरा प्रमोशन उनको अगले वर्ष दिया जाए. जिससे कर्मचारियों की कमी न हो. इन कर्मचारियों पर लटकी डिमोशन की तलवार सपाक्स संगठन के प्रदेश अध्यक्ष केएस तोमर ने बताया कि “साल 2002 में तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह सरकार ने एससी-एसटी वर्ग के अधिकारियों-कर्मचारियों को प्रमोशन में आरक्षण देने का नियम बनाया था. इस नियम के तहत साल 2016 तक प्रदेश में आरक्षित वर्ग के कई अधिकारियों-कर्मचारियों के प्रमोशन हुए. इससे आरक्षित वर्ग के कर्मचारियों को काफी फायदा हुआ, लेकिन ओबीसी समेत वो कर्मचारी-अधिकारी जो अनारक्षित वर्ग में थे, वो प्रमोशन में पीछे छूटते गए और उन्होंने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. जिसमें कोर्ट ने तथ्यों पर विचार करने के बाद इस पदोन्नति प्रक्रिया को रद्द कर दिया. लेकिन इस बीच आरक्षित वर्ग के जिन अधिकारियों-कर्मचारियों को पदोन्नति मिली है, ऐसे लोगों को डिमोशन का खतरा भी बना हुआ है.” हाई कोर्ट भी सुना चुका है फैसला केएस तोमर ने बताया कि “पदोन्नति में आरक्षण नियम 2002 लागू होने के बाद से अब तक प्रदेश के 60 हजार से अधिक अधिकारियों-कर्मचारियों को प्रमोशन का लाभ मिल चुका है, लेकिन जब इसे हाईकोर्ट 2016 में रद्द कर चुका है, तो ऐसे में इसकी वैधता कितनी है. तोमर ने बताया कि अभी मध्य प्रदेश में प्रमोशन का कोई नियम नहीं है, इसलिए ठीक है, लेकिन जैसे ही सरकार नए नियम बनाएगी, जो कर्मचारी गलत तरीके से प्रमोशन का लाभ ले रहे हैं. उनको डिमोशन करना होगा. हाईकोर्ट ने भी 31 मार्च 2024 के आदेश में कहा है कि 2002 के नियम के आधार पर जिन एससी-एसटी कर्मचारियों को प्रमोशन में आरक्षण का लाभ मिला है. उन सभी का डिमोशन किया जाएग. हालांकि सरकार ऐसा करने से बचना चाहती है, इसलिए नए नियमों को ऐसा बना रही है. जिससे सबको समान रुप से पदोन्नति का लाभ मिल सके. यूपी-उत्तराखंड में डिमोट, पंजाब-हरियाणा में क्रीमीलेयर बाहर उच्च न्यायालय ने पदोन्नति को लेकर अपने आदेश में कहा है कि जब तक स्टेटस की यथा स्थिति है, तब तक ना डिमोट होंगे और ना ही प्रमोट किया जाएगा, लेकिन जिस दिन स्टेटस बैकेंड हो जाएगा, यथा स्थिति खत्म हो जाएगी. उसी दिन डिमोट करना पड़ेगा. यूपी और उत्तराखंड में भी बाद में गलत पदोन्नति नियम के कारण आरक्षित वर्ग के कर्मचारियों को डिमोट किया गया. केएस तोमर ने बताया कि सपाक्स ने अपनी याचिका में कहा है कि पदोन्नति में आरक्षण के नियम में क्रीमीलेयर को शामिल नहीं करना चाहिए. ऐसे ही मामले में पंजाब और हरियाणा में पदोन्नति के दौरान क्रीमीलेयर को आरक्षण का लाभ देने से वंचित किया गया है.

भोपाल इंटरसिटी एक्सप्रेस में यात्रियों को बड़ी राहत, 2 स्लीपर कोच बढ़ाए, बढ़ती भीड़ के चलते रेलवे ने किया फैसला

भोपाल भोपाल और ग्वालियर के मध्य चलने वाली इंटरसिटी गाड़ी क्रमांक 12197 और 12198 में दो स्लीपर कोच जोड़े जाने से रेल यात्रियों को लाभ हो रहा है। यह व्यवस्था दिनांक 10 अप्रैल से प्रभावी हो चुकी है। इस परिवर्तन के बाद अब ट्रेन में 14 सामान्य श्रेणी, 2 स्लीपर श्रेणी, 2 कुर्सीयान, 1 वातानुकूलित कुर्सीयान समेत कुल 21 कोच हो गए हैं। भाजपा नेता और  पूर्व प्रदेश प्रवक्ता धैर्यवर्धन शर्मा ने बताया कि इंटरसिटी ट्रेन दो कोच बढ़ाए जाने से में शिवपुरी, गुना, अशोकनगर के नागरिकों को ग्वालियर और भोपाल आना-जाना अब अधिक सुविधाजनक हो गया है। पश्चिम मध्य जोन की सलाहकार समिति के सदस्य रहे धैर्यवर्धन ने इस निर्णय पर यात्रियों को बधाई देते हुए केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और रेल विभाग के अधिकारियों के प्रति आभार व्यक्त किया है। भाजपा नेता धैर्यवर्धन ने बुधवार और रविवार के दिनों को जोड़कर सातों दिन इंटरसिटी चलाए जाने के लिए क्षेत्रीय सांसद एवं केंद्रीय मंत्री सिंधिया का भी आभार माना है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में मंडल रेल प्रबंधक देवाशीष त्रिपाठी ने अवगत कराया है कि यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए ट्रेन संख्या 12197/12198 ग्वालियर-भोपाल-ग्वालियर एक्सप्रेस में दो स्लीपर श्रेणी के कोच स्थायी रूप से जोड़े जा रहे हैं। इस संबंध में भोपाल के वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक सौरभ कटारिया ने बताया कि ग्रीष्मकालीन भीड़ और बढ़ती हुई यात्रियों की संख्या को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। यह व्यवस्था दिनांक 10 अप्रैल से प्रभावी हो चुकी है। इस परिवर्तन के बाद अब इस ट्रेन में 14 सामान्य श्रेणी, 2 स्लीपर श्रेणी, 2 कुर्सीयान, 1 वातानुकूलित कुर्सीयान सहित कुल 21 कोच होंगे।

इंदौर-खंडवा रोड पर बना ब्रिज, निकलने लगे वाहन, मार्ग पर बनेंगे एनिमल कॉरिडोर, वन्यजीवों की सुरक्षा

इंदौर  इंदौर-खंडवा राजमार्ग का निर्माण कार्य निर्धारित समयसीमा में पूरा नहीं हो पाया है। निर्माण कार्य के चलते वाहन चालकों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कई बार राजमार्ग पर वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं। इसी कारण भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने पहला ब्रिज वाहनों के लिए खोल दिया है। बीते कुछ दिनों से वाहन ब्रिज के माध्यम से निकाले जा रहे हैं, ताकि चमेली देवी कालेज के सामने बने ब्रिज के आसपास की सड़क को दुरुस्त किया जा सके। वर्तमान में यहां अंडरपास का कार्य भी प्रगति पर है। अधिकारियों के मुताबिक मई माह में दतोदा वाले ब्रिज से भी वाहन निकल सकेंगे। 216 किलोमीटर लंबे इस राजमार्ग पर तीन सुरंगों के साथ सात ब्रिज और अंडरपास बनाए जा रहे हैं। ये ब्रिज और अंडरपास चमेली देवी कालेज, उमेरीखेड़ा, चोखी ढाणी, सिमरोल, भेरूघाट, बाईग्राम और बड़वाह में बन रहें हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंचने के लिए इन स्थानों पर अंडरपास की सुविधा रहेगी। इन सभी ब्रिजों को जनवरी तक तैयार किया जाना था, लेकिन कार्य की धीमी गति के कारण निर्धारित समयसीमा से छह महीने की और मोहलत दी गई है। अब तैयार होगी सर्विस लेन चमेली देवी ब्रिज का कार्य अप्रैल के पहले सप्ताह में पूर्ण कर लिया गया है। अब वाहनों को इस ब्रिज से निकाला जा रहा है, ताकि सर्विस लेन का निर्माण शुरू किया जा सके। निर्माण एजेंसी आने वाले दिनों में सर्विस लेन को बंद कर कार्य शुरू करेगी। इसके साथ ही ब्रिज के नीचे बन रहे दो अंडरपास का कार्य अंतिम चरण में है। मेघा इंजीनियरिंग के प्रोजेक्ट मैनेजर नागेश्वर राव का कहना है कि मई के अंतिम सप्ताह तक अंडरपास और सर्विस लेन का निर्माण पूर्ण किया जाएगा। जानवरों के लिए बनेंगे एनिमल कॉरिडोर वाहनों के साथ इस राजमार्ग के निर्माण में वन्यजीवों का भी विशेष ध्यान रखा जा रहा है। जंगलों से गुजरने वाले मार्गों पर पांच से छह स्थानों पर ‘एनिमल कॉरिडोर’ यानी अंडरपास बनाए जाएंगे, जो केवल जानवरों के लिए होंगे। इनकी मदद से वन्यप्राणी एक ओर से दूसरी ओर आसानी से जा सकेंगे। वन विभाग ने इन स्थानों की पहचान कर ली है और इनका निर्माण कार्य आगामी कुछ सप्ताहों में शुरू होने की संभावना है। सिमरोल ब्रिज शुरू करने की योजना     चमेली देवी कॉलेज के बाद दतोदा ब्रिज से वाहन गुजर सकेंगे। मई तक लोगों को थोड़ा इंतजार करना होगा। वैसे एनएचएआई ने जून तक सिमरोल ब्रिज शुरू करने की योजना बनाई है। इसके लिए निर्माण एजेंसी को निर्देश दिए हैं। – सुमेश बांझल प्रोजेक्ट डायरेक्टर, एनएचएआई  

भोपाल में 60 हजार बकायादारों से बिजली कंपनी को 300 करोड़ वसूलना, अब कटेगा कनेक्शन!

भोपाल  एमपी के भोपाल शहर में 60 हजार बकायादारों से बिजली कंपनी को 300 करोड़ वसूलना है। बीते वित्तीय वर्ष के आखिरी दिनों में एमडी मध्यक्षेत्र क्षितिज सिंघई ने बताया कि अब बिल जमा न करने वालों के बिजली कनेक्शन काटे जाएंगे। उन्होंने बताया कि शहर में 1900 से ज्यादा बकायादार 1 लाख से अधिक राशि वाले हैं, जबकि दस हजार रुपए से अधिक व एक लाख से कम बकाया राशि वाले 56 हजार के करीब बिजली उपभोक्ता हैं। सूची से हटाए बड़े नाम कंपनी की सूची में शामिल करीब 60 हजार नाम वो हैं जो कहीं कोई बड़ा रसूख नहीं रखते। हालांकि कंपनी जो सूची अपडेट कर रही है उसमें राजनीतिक और प्रशासनिक कार्यालयों का ध्यान में रखा जा रहा। इन्हें भी शामिल कर लें तो बकाया राशि 450 करोड़ रुपए से ज्यादा हो सकती है। कंपनी की सूची में 2.90 लाख उपभोक्ताओं पर दस हजार से कम का बकाया है। वसूली के लिए ये प्रयोग -बंदूक लाइसेंस रद्द करने को पत्र। -बैंक खातों को ब्लॉक करने बैंकों को पत्र। -वरिष्ठ इंजीनियर्स, अफसरों को फील्ड में उतारा। -हर बकायादार के घर कंपनी की टीमें भेंजी। बिजली के बकायादारों की सूची अपडेट की जा रही है। काफी बकायादार हैं। वसूली के लिए लगातार दबाव बनाया जा रहा है।- क्षितिज सिंघई, एमडी मध्यक्षेत्र

जलगंगा संवर्धन अभियान के तहत प्रदेश में 50 हजार खेत तालाब बनाए जाएंगे: मंत्री पटेल

भोपाल मध्य प्रदेश सरकार ने जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत प्रदेश के सभी 52 जिलों में 50 हजार खेत तालाब बनाने का लक्ष्य रखा है। ये खेत तालाब प्रदेश के किसानों की सिंचाई में मदद करने के साथ जल संरक्षण को मजबूती देने का काम करेंगे। यह पहल वर्तमान जल संचयन संरचनाओं की मरम्मत के साथ नई संरचनाओं के निर्माण पर आधारित है। खेत तालाब निजी खेत पर बनी जल भंडारण की संरचना होती है। ये तालाब कृषि से जुड़े कई कार्यों में काम आते हैं, जैसे रबी और खरीफ फसलों की सिंचाई, मछली पालन, सिंघाड़े की खेती, पशुओं के लिए पीने का पानी आदि। टीओआई की रिपोर्ट के अनुसार, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा सभी जिला पंचायतों के सीईओ को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि इन 50 हजार खेत तालाबों के निर्माण के लिए विशिष्ट जिलाों के हिसाब से लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। इस बड़े पैमाने की परियोजना के लिए वित्तीय संसाधन महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) और प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) – वाटरशेड विकास घटक से रणनीतिक रूप से तैयार किए जाएंगे।   इस अभियान के तहत कई कारकों को ध्यान में रखकर इंदौर में कम से कम 55 तालाब और नीमच में कम से कम 57 तालाब खोदने का लक्ष्य दिया गया है। वहीं, बालाघाट को अधिकतम 3,900 तालाब खोदने का लक्ष्य दिया गया है। इसी तरह शहडोल जिले में 3,746 तालाब खोदने का लक्ष्य दिया गया है। खेत तालाबों के निर्माण के लिए सही जगह का चयन अभियान का एक महत्वपूर्ण पहलू होगा। इस अभियान के तहत तालाबों के निर्माण के लिए खेतों के निचले हिस्सों को प्राथमिकता दी जाएगी। खेत के निचले हिस्से में प्राकृतिक प्रवाह के कारण सबसे अधिक पानी जमा होता है। इसी तरह तालाब वहीं बनाए जाएंगे जहां उनके ऊपर की तरफ (अपस्ट्रीम) से इतना पानी आ सके जो तालाब की जरूरत को पूरा कर सके। राज्य में जितनी औसतन बारिश होती है और जो खेती के तरीके हैं उन्हें देखते हुए सरकार ने तय किया है कि कुल खेती योग्य जमीन में से करीब 10% जमीन पर ही फार्म पोंड बनाए जाएंगे। कुशल जल प्रबंधन सुनिश्चित करने और केंद्रित जल प्रवाह को रोकने के लिए तालाब खोदने की जगह चयन प्रक्रिया एक चरणबद्ध तरीके का पालन करेगी। इस तरीके में विभिन्न खेतों में प्रस्तावित जगहों को एक सीधी रेखा के बजाए जिग-जैग पैटर्न में चुना जाएगा। सबसे उपयुक्त स्थानों के चयन में सहायता के लिए एक सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल भी किया जाएगा। मनरेगा के तहत किसानों की जरूरतों के आधार पर 400 क्यूबिक मीटर, 800 क्यूबिक मीटर, 1000 क्यूबिक मीटर और 3600 क्यूबिक मीटर की भंडारण क्षमता वाले खेत तालाबों का निर्माण किया जा सकता है। इन तालाबों के आकार के लिए डिजाइन और परियोजना अनुमान प्रदान किए गए हैं। पीएमकेएसवाई-वाटरशेड विकास योजना के तहत निर्मित खेत तालाबों की न्यूनतम भंडारण क्षमता 3600 क्यूबिक मीटर होगी। खेत तालाबों से अत्यधिक रिसाव को नियंत्रित करने के उपाय लागू किए जाएंगे। इन तालाबों से निकली मिट्टी का उपयोग तटबंध बनाने में किया जाएगा। ग्रामीण अभियांत्रिकी सेवा के इंजीनियर (कार्यपालन अभियंता, सहायक अभियंता, उप अभियंता) इन खेत तालाबों के निर्माण की गुणवत्ता की निगरानी के लिए जिम्मेदार होंगे। 50 हजार खेत तालाब बनाने की घोषणा आयोजित पंच-सरपंच सम्मेलन में मंत्री पटेल ने ग्राम पंचायतों के विकास को लेकर सरकार की योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश सरकार ने सभी ग्राम पंचायतों को ई-ग्राम पंचायत के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया है। इसके अंतर्गत पंचायतों के लिए सुविधायुक्त भवनों का निर्माण प्राथमिकता पर किया जा रहा है। जलगंगा संवर्धन अभियान के तहत प्रदेश में 50 हजार खेत तालाब बनाए जाएंगे। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश में कई पंचायत भवन आज भी अधूरे हैं या उपर नहीं हैं, जबकि अन्य राज्यों में दो से तीन मंजिला पंचायत भवन बन रहे हैं। इसी कमी को दूर करने के लिए अब नए मॉडल के अनुसार पंचायत भवनों का निर्माण किया जाएगा। आयोजन में मौजूद लोग बलिदान गाथाओं का हुआ स्मरण- कार्यक्रम में मंचासीन अतिथियों द्वारा रानी अवंती बाई लोधी के बलिदान को याद करते हुए उनके साहस और समर्पण की कहानियों का उल्लेख किया गया। सभी ने बुजुर्ग दानदाता बेटी बाई लोधी के योगदान की सराहना की और पुष्पमालाएं अर्पित कर सम्मानित किया। इस दौौन बड़वारा विधायक धीरेंद्र बहादुर सिंह, जिला पंचायत सदस्य कविता राय, अजय गोटिया, राकेश सिंह लोधी, जनपद अध्यक्ष सुनीता दुबे, जनपद उपाध्यक्ष दुर्गा पटेल, मंडल अध्यक्ष मनीष बागरी, आशीष चौरसिया, जिला पंचायत सीईओ शिशिर गेमावत, एसडीएम विंकी सिंहमारे, जनपद सीईओ यजुर्वेद्र कोरी, पूर्व जनपद अध्यक्ष प्रकाश सिंह बागरी, शंकर महतो, पूर्व मंडल अध्यक्ष डॉ. प्रशांत राय, पंकज राय, सरपंच कैलाश चंद्र जैन आदि मौजूद रहे।

MMLP में उद्योगों के लिए सभी सुविधाएं होगी, पहले चरण में एक 5 सितारा होटल भी बनने जा रहा

पीथमपुर प्रदेश के पीथमपुर में बन रहे मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक पार्क (एमएमएलपी) आधुनिक सुविधाओं वाला बनाया जाएगा। न केवल इसका जुड़ाव रेलवे से होगा बल्कि एयरपोर्ट तक पहुंचने के लिए सिंगल विंडो सिस्टम होगा ताकि कस्टम की औपचारिकताएं भी यहीं से पूरी हो जाए और कंटेनर सीधे जहाज में लोड हो सके। एमएमएलपी में उद्योगों के लिए सभी सुविधाएं होगी। पहले चरण में एक 5 सितारा होटल भी बनने जा रहा है। जल्द पूरा करने के निर्देश करीब 2 महीने से काम में तेजी आई है। प्रोजेक्ट को केंद्रीय सडक़ परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने अपनी प्राथमिकता में लिया है। दो बार वे इंदौर दौरे पर इस प्रोजेक्ट के बारे चर्चा कर चुके हैं। उन्होंने एनएचएआइ के अधिकारियों को इसे जल्द पूरा करने के निर्देश दिए हैं। गडकरी ने सागोर से पार्क तक ट्रेन पहुंचाने के लिए नई रेलवे लाइन का उद्घाटन कर दिया है। इंदौर और आसपास से होने वाले माल का एक्सपोर्ट विदेश तक आसानी से हो जाएगा। सिंगल विंडो सिस्टम के तहत कस्टम का भी ऑफिस बनेगा। तीन चरणों में होगा काम एनएचएआइ के प्रोजेक्ट डायरेक्टर सुमेश बांझल ने बताया, 250 एकड़ में बन रहे पार्क का निर्माण 1100 करोड़ रुपए की लागत से किया जा रहा है। तीन चरणों में काम होना है। जरूरत के हिसाब से वेयर हाउस, ऑफिस, कोल्ड स्टोरेज समेत पहले चरण में एक 5 स्टार होटल भी होगी। पहले चरण के निर्माण में 1100 करोड़ खर्च होंगे पहला चरण 1100 करोड़ रुपए का है। इसमें पीथमपुर के जामोदी में रेलवे यार्ड बनेगा। इसमें दो तरह की रेलवे की पटरियां बिछाई जाएंगी, जिससे बड़े-छोटे कंटेनर आसानी से ट्रेन में लोड हो सकें। रेलवे तक माल लाने और यहां से अंदर तक ले जाने के लिए बड़ा ट्रक पार्किंग एरिया बनेगा, जिसमें एक समय पर एक हजार ट्रक खड़े हो सकें। यहां पेट्रोल-डीजल पंप भी बनेगा और होटल आदि भी होगा। इंदौर से अब इंटरनेशनल एयर कार्गो सेवा की शुरुआत भी हो चुकी है। यह लॉजिस्टिक्स हब हवाई, सड़क और रेल तीनों माध्यमों को जोड़ते हुए इंदौर को एक इंटरनेशनल सप्लाई चेन नेटवर्क से जोड़ेगा। यह हब टेक्सटाइल, फार्मा, ऑटोमोबाइल, फूड प्रोसेसिंग जैसे क्षेत्रों में काम कर रहे उद्यमियों को न केवल तेज़ सप्लाई सिस्टम देगा, बल्कि निर्यात के नए रास्ते भी खोलेगा। लालवानी ने कहा यह लॉजिस्टिक्स पार्क सिर्फ इन्फ्रास्ट्रक्चर नहीं, रोजगार और विकास की नींव है। यह पार्क वेस्टर्न रिंग रोड और इंदौर-अहमदाबाद मार्ग से जुड़ेगा। दिल्ली-मुंबई नेशनल हाईवे से इसकी दूरी मात्र 150 किलोमीटर है। इंदौर-दाहोद रेल परियोजना के सागौर रेलवे स्टेशन के पास इस पार्क का निर्माण तेजी से चल रहा है। गडकरी ने बताया कि इस परियोजना से क्षेत्र को कई फायदे होंगे। लॉजिस्टिक पार्क बनने के बाद परिवहन समय और लागत दोनों में कमी आएगी। साथ ही युवाओं को रोजगार के अवसर भी मिलेंगे। कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री सावित्री ठाकुर, मध्य प्रदेश के नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, इंदौर सांसद शंकर लालवानी और धार विधायक नीना विक्रम वर्मा मौजूद थे। सुरक्षा व्यवस्था के लिए 5 पुलिस थानों का बल तैनात किया गया था। धार कलेक्टर प्रियंक मिश्र, भाजपा जिला अध्यक्ष नीलेश भारती और नेशनल हाईवे अथॉरिटी के कई अधिकारी भी कार्यक्रम में शामिल हुए। भारत में अब तक कुल 35 मल्टी लॉजिस्टिक पार्क का निर्माण किया जा चुका है। 255 एकड़ भूमि पर इस पार्क का निर्माण चल रहा है।

जनजातीय जीवन और प्रकृति पर आधारित डॉक्युमेंट्री फिल्मों का होगा प्रदर्शन

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केन्द्रीय वन-पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेन्द्र यादव मध्यप्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों में वन पुनर्स्थापन, जलवायु परिवर्तन और समुदाय-आधारित आजीविका जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर शुक्रवार को दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का शुभारंभ करेंगे। नरोन्हा प्रशासन अकादमी, भोपाल में आयोजित होने वाली कार्यशाला में विकसित भारत @2047 के लक्ष्यों में वनों की भूमिका पर मंथन होगा। कार्यशाला में प्रदेश के जनजातीय कार्य मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह स्वागत उद्बोधन देंगे। दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला की रूपरेखा डॉ. राहुल मूँगीकर प्रस्तुत करेंगे। इस अवसर पर जनजातीय समुदाय और प्राकृतिक संरक्षण पर केंद्रित ऑडियो-विजुअल प्रस्तुति भी दी जाएगी। प्रमुख विषय : वन संरक्षण, पारंपरिक ज्ञान और सामुदायिक प्रबंधन राष्ट्रीय कार्यशाला के विभिन्न सत्रों में वन संरक्षण की वर्तमान कानूनी व्यवस्थाएं, उनकी सीमाएं और समाधान, जैव विविधता संशोधन अधिनियम-2023, सामुदायिक वन अधिकार, पारंपरिक ज्ञान का दस्तावेजीकरण और वन पुनर्स्थापन जैसे मुद्दों पर विस्तृत चर्चा होगी। बैंगलुरू से आ रहे प्रो. रमेश विशेषज्ञ वक्तव्य भी देंगे। कार्यशाला में डॉ. योगेश गोखले, डॉ. राजेन्द्र दहातोंडे आदि वक्ता विभिन्न सत्रों को संबोधित करेंगे। राष्ट्रीय कार्यशाला के दूसरे दिन राज्यपाल पटेल समापन सत्र को करेंगे संबोधित राज्यपाल मंगुभाई पटेल राष्ट्रीय कार्य शाला के समापन-सत्र में मुख्य अतिथि होंगे। पूर्व राष्ट्रीय जनजातीय आयोग अध्यक्ष हर्ष चौहान समापन वक्तव्य देंगे। कार्यशाला में वनीकरण, जलवायु संवेदनशीलता और वनवासी समुदायों की समावेशी भागीदारी पर केन्द्रित डॉक्युमेंट्री फिल्मों का भी प्रदर्शन किया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत @2047 के दृष्टिकोण में वनों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह कार्यशाला वनों, जैव विविधता, प्राकृतिक संसाधनों और जनजातीय आजीविका को केंद्र में रखते हुए एक सतत और न्यायसंगत विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।  

CM Mohan Yadav ने प्रदेश के किसानों के लिए खोल दिया पिटारा, पराली नहीं जलाने वाले को मिलेगी प्रोत्साहन राशि !

भोपाल मप्र में पराली जलाने के बढ़ते मामलों के बीच सरकार किसानों के लिए एक नई स्कीम लेकर आ रही है। इसके तहत जो किसान सरकार की पांच शर्तों को पूरा करेंगे उन्हें सरकार की तरफ से प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। एक एकड़ खेत वाले किसान को 1500 रुपए से लेकर 3 हजार रुपए प्रोत्साहन राशि देने की योजना है। सरकार ने इस नई स्कीम को अन्नदाता मिशन (कृषक कल्याण मिशन) नाम दिया है। इसके जरिए किसानों की आय बढ़ाने के साथ साथ उन्हें जलवायु अनुकूल खेती और फसलों के सही दाम दिलाना है। बता दें कि मंगलवार यानी 15 अप्रैल को हुई कैबिनेट मीटिंग में इस मिशन को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। सरकार ने मिशन के लिए 2028 तक का टारगेट भी तय किया है। इसमें 2.69 लाख वनाधिकार ( एफआरए) पट्टाधारी किसानों को 100 फीसदी फायदा देना है। पहले जानिए सरकार ने क्यों लागू किया मिशन मप्र में लघु और सीमांत किसानों की संख्या सबसे ज्यादा है, मगर उन तक तकनीक और संसाधनों की सीमित पहुंच है। मानसून पर निर्भरता की वजह से ये किसान फसल का सही उत्पादन भी नहीं कर पाते। जिसकी वजह से उन्हें फसल के उचित दाम नहीं मिलते। कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बताया कि अन्नदाता की आय बढ़ाने के साथ वे खेती के साथ और भी व्यवसाय कर सके इसके लिए सरकार ने पॉलिसी बनाई है। कृषि विभाग के अलावा उद्यानिकी एवं फूड प्रोसेसिंग, खाद एवं नागरिक आपूर्ति, सहकारिता, पशुपालन एवं डेयरी और मछुआ कल्याण एवं मत्स्य विकास विभाग को भी इसमें जोड़ा गया है। किसानों को इस बात के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा कि वे जलवायु अनुकूल खेती करें। साथ ही ऐसी फसलों का उत्पादन करें जो पोषण और खाद्य सुरक्षा तय करते हैं। विजयवर्गीय ने कहा कि इस पॉलिसी के जरिए गौशालाओं को बढ़ावा देने का काम भी किया जाएगा। इसके लिए आहार, डॉक्टर्स, पैरामेडिकल स्टाफ की व्यवस्था भी सरकार करेगी। 5 शर्तें पूरी की ताे मिलेंगे 3 हजार रु. प्रति एकड़ तक कृषि विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक अन्नदाता मिशन के तहत किसानों को 1500 रुपए से लेकर 3000 रुपए प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। इसके लिए किसानों को 5 शर्तों को पूरा करना होगा। इनमें तीन शर्तें अहम है। पहली- पराली जलाने से मुक्त खेती को अपनाना, दूसरी- खेती के लिए लिए गए लोन का समय पर भुगतान। तीसरी शर्त के रूप में कीटनाशकों का कम इस्तेमाल यानी जैविक खेती की पद्धति को अपनाना है। इन तीनों शर्तों के अलावा तिलहन और दलहन की फसलें और ड्रिप इरिगेशन पद्धति को बढ़ावा देना भी शामिल है। अधिकारी के मुताबिक मप्र के किसानों को पीएम किसान सम्मान निधि और मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के तहत 12 हजार रुपए प्रतिवर्ष मिल रहे हैं। इन पांच शर्तों को किसान पूरा करते हैं तो उन्हें 15 हजार रु. तक मिल सकते हैं। ये एक तरह से इन्सेंटिव होगा। एमपी में तीन साल में पराली जलाने की 32 हजार से ज्यादा घटनाएं कृषि विभाग के अधिकारी बताते हैं कि हरियाणा,पंजाब, दिल्ली के बाद पराली जलाने की घटना मध्यप्रदेश में बढ़ती जा रही है। पिछले तीन साल के आंकड़े देखें तो रबी और खरीफ सीजन मिलाकर 32 हजार से ज्यादा घटनाएं हुई है। इनमें भोपाल संभाग अव्वल है। दूसरे नंबर पर चंबल संभाग है। अधिकारी के मुताबिक किसान अगली फसल के लिए खेत तैयार करने के लिए आसान रास्ता अपनाते हैं। नर्मदापुरम और हरदा के बेल्ट में गेहूं की फसल काटने के बाद मूंग की फसल लेने के लिए खेत में आग लगा दी जाती है। इससे खेत तो साफ हो जाता है, लेकिन उसकी मृदा शक्ति पर विपरीत असर पड़ता है। किसान बोले- जुर्माने से ज्यादा महंगा खेत की सफाई कराना पराली जलाना किसानों की मजबूरी है। राजगढ़ जिले के किसान मुकेश नागर कहते हैं कि फसल कटाई के बाद जो अवशेष बचते हैं उसे हटाने के लिए बक्खर चलाना पड़ता है। मजदूर एक एकड़ का 4 से 5 हजार रुपए लेते हैं। अब किसी किसान का दो से तीन एकड़ का खेत है तो उसे कम से कम 10 से 15 हजार रुपए खेत की सफाई के लिए लिए देना पड़ते हैं। नागर कहते हैं कि इससे अच्छा तो जुर्माना देकर पराली जलाना है। पांच एकड़ खेत में पराली जलाने पर 5 हजार रुपए जुर्माना है। किसान की अगली फसल की लागत भी नहीं बढ़ती है। यदि सरकार किसानों को पराली न जलाने पर कोई आर्थिक सहायता देगी तो किसान पराली नहीं जलाएगा।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा- मध्यप्रदेश में वन्य जीव पर्यटन में नए आयाम जुड़ रहे हैं

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश में वन्य जीव पर्यटन में नए आयाम जुड़ रहे हैं। पारिस्थितिकी तंत्र में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले गिद्धों का संरक्षण न केवल जैव विविधता की रक्षा के लिए आवश्यक है, अपितु पर्यावरण संतुलन बनाए रखने की दृष्टि से भी अनिवार्य है। प्रदेश में गिद्ध संरक्षण को भी नई दिशा दी जा रही है। भोपाल स्थित केरवा गिद्ध प्रजनन केन्द्र से 6 गिद्धों को बुधवार को पहली बार प्राकृतिक वातावरण में छोड़ा गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोशल मीडिया एक्स पर कहा कि राज्य सरकार ने गिद्धों सहित अन्य पशु पक्षियों की संकटग्रस्त प्रजातियों के संरक्षण के लिए सतत प्रयास किए हैं। एशिया से लुप्त हो रहे चीतों के पुनर्वास के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में दक्षिण अफ्रीका के देशों से चीते लाकर कूनो अभ्यारण में उनका संरक्षण एवं संवर्धन किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्राकृतिक वातावरण में छोड़े गए गिद्धों पर जीपीएस ट्रैकर लगाए गए हैं,जिससे उनके आवागमन, व्यवहार एवं सुरक्षा की सतत निगरानी सुनिश्चित की जा सके।  

स्कूल शिक्षा की गुणवत्ता के लिये विद्यार्थियों से जुड़े सभी कार्य निर्धारित कैलेण्डर के अनुसार पूरे हों : स्कूल शिक्षा मंत्री सिंह

भोपाल स्कूल शिक्षा मंत्री श्री उदय प्रताप सिंह ने कहा है कि प्रदेश में स्कूल शिक्षा की गुणवत्ता के लिये विद्यार्थियों से जुड़े सभी कार्य निर्धारित कैलेण्डर में पूरा किया जाना सुनिश्चित किया जाये। उन्होंने शिक्षकों की उपस्थिति के लिये ऑनलाइन व्यवस्था की प्रशंसा की। मंत्री श्री सिंह ने कहा कि ऑनलाइन शिक्षकों की अटेंडेंस को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर उज्जैन और नरसिंहपुर जिले में तत्काल लागू किया जाये। मंत्री श्री सिंह गुरूवार को लोक शिक्षण संचालनालय में विभागीय अधिकारियों की बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक में सचिव स्कूल शिक्षा श्री संजय गोयल, आयुक्त लोक शिक्षण श्रीमती शिल्पा गुप्ता, संचालक राज्य शिक्षा केन्द्र श्री हरजिंदर सिंह, पाठ्य पुस्तक निगम के एमडी श्री विनय निगम विशेष रूप से उपस्थित थे। स्कूल शिक्षा मंत्री श्री सिंह ने विभाग में लंबित अनुकंपा नियुक्ति के प्रकरणों के निराकरण में संवेदनशील रूख रखने के निर्देश दिये। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि स्कूल शिक्षा से जुड़ी केन्द्रीय योजनाओं में राज्य को मिलने वाली राशि को प्राप्त करने के लिये विशेष पहल की जाये। मंत्री श्री सिंह ने कहा कि विभाग में ऐसी व्यवस्था की जाये कि सेवानिवृत्त होने के बाद शिक्षकों और कर्मचारियों के स्वत्वों का भुगतान समय पर हो जाये। जन-प्रतिनिधियों से प्राप्त होने वाले पत्र पर विभाग की ओर से शीघ्र कार्यवाही पत्र भेजने की व्यवस्था की जाये। योजना के क्रियान्वयन की स्थिति बैठक में बताया गया कि शैक्षणिक सत्र 2025-26 में 82 लाख विद्यार्थियों को पाठ्‌य पुस्तकों का वितरण होना है। विभाग द्वारा 60 प्रतिशत पाठ्य पुस्तकों के वितरण का कार्य पूरा किया जा चुका है। कक्षा 1 से 8 तक के करीब 60 लाख विद्यार्थियों को यूनिफार्म डीबीटी के माध्यम से दिये जाने की व्यवस्था की जा रही है। बैठक में निशुल्क साइकिल, छात्रवृत्ति, लैपटॉप, स्कूटी वितरण की प्रक्रिया समय-सीमा में किये जाने की जानकारी दी गई। बैठक में माध्यमिक शाला से हाई स्कूल, हाई स्कूल से हायर सेकण्डरी स्कूल के उन्न्यन की जानकारी दी गई। उन्नयन की कार्यवाही इस वर्ष 15 जून तक पूरी कर ली जायेगी। सचिव स्कूल शिक्षा डॉ. गोयल ने बताया कि ग्रीष्म काल में उन स्कूलों की पहचान कर ली जायेगी, जो जर्जर हो गये हैं। उनके वैकल्पिक स्थान, अतिरिक्त कक्ष निर्माण मरम्मत संबंधी कार्य प्राथमिकता के साथ किये जायेंगे। मरम्मत कार्य के लिये 149 करोड़ और अतिरिक्त कक्षा निर्माण के लिये 100 करोड़ रूपये का प्रावधान रखा गया है। बैठक में स्मार्ट क्लास, आईसीटी लेब की भी जानकारी दी गई। बैठक में बताया गया कि 45 हजार 500 हायर सैकेण्डरी, एक लाख 62 हजार प्राथमिक शिक्षकों को टेबलैट प्रदाय किये जा चुके हैं। 75 हजार माध्यमिक शिक्षकों को टेबलैट प्रदान किये जाने की कार्रवाई की जा रही है। स्टार्स प्रोजेक्ट के अंतर्गत 52 सीएम राइज स्कूलों में रोबोटिक्स लैब की स्थापना की जा रही है। 458 पीएमश्री विद्यालयों में अटल टिंकेरिंग लेब स्थापित की जा रही है। बैठक में फर्नीचर व्यवस्था के संबंध में भी चर्चा की गई।  

प्रदेश में चावल के परिवहन एवं भंडारण की गुणवत्ता की होगी कड़ी निगरानी: मंत्री राजपूत

भोपाल प्रदेश के विभिन्न जिलों के मध्य रेक/एलआरटी के माध्यम से चावल का परिवहन एक निरंतर प्रक्रिया है, जो सार्वजनिक वितरण प्रणाली के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इस प्रक्रिया की पारदर्शिता, गुणवत्ता और मानक संचालन प्रक्रिया के अनुरूप क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री श्री गोविंद सिंह राजपूत ने अधिकारियों को निर्देशित किया है। मंत्री श्री राजपूत ने अपर मुख्य सचिव खाद्य श्रीमती रश्मि अरुण शमी को कहा है कि पूर्व में जारी मानक संचालन प्रक्रिया के अनुपालन की जमीनी स्थिति की व्यापक समीक्षा की जाए। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि यदि एसओपी के पालन में प्रेषण अथवा प्राप्तकर्ता जिलों द्वारा किसी भी प्रकार की लापरवाही होती है, तो इससे अमानक गुणवत्ता के चावल के जमा होने की संभावना बन सकती है। इससे न केवल उपभोक्ताओं को नुकसान हो सकता है, बल्कि शासन की साख भी प्रभावित हो सकती है। खाद्य मंत्री श्री राजपूत ने इस संदर्भ में आयुक्त, खाद्य के स्तर से एक विशेष जांच दल गठित करने के निर्देश दिए हैं। यह दल रेण्डम आधार पर प्रदेश के विभिन्न जिलों में चावल के परिवहन और भंडारण की संपूर्ण प्रक्रिया का औचक निरीक्षण करेगा। यह जांच दल संबंधित जिलों द्वारा की गई कार्यवाही का अभिलेखीय परीक्षण करेगा। इसमें प्रेषण व प्राप्ति रजिस्टर, परिवहन अनुबंध, गुणवत्ता परीक्षण रिपोर्ट, भंडारण स्थल का भौतिक सत्यापन आदि शामिल होंगे। खाद्य मंत्री श्री राजपूत ने स्पष्ट किया है कि विभाग द्वारा पूर्व में जारी मानक निर्देश एवं एसओपी सभी जिलों के लिए बाध्यकारी हैं। इसमें किसी भी स्तर पर की गई लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा। सभी जिलों को निर्देशित किया गया है कि वे चावल के प्रेषण और प्राप्ति से जुड़ी कार्यवाहियों को एसओपी के अनुरूप ही निष्पादित करें तथा जांच दल को आवश्यक दस्तावेज एवं सूचनाएं उपलब्ध कराते हुए पूर्ण सहयोग सुनिश्चित करें। निर्धारित समय-सीमा में प्रस्तुत हो प्रतिवेदन मंत्री श्री राजपूत ने अपर मुख्य सचिव खाद्य को यह भी निर्देश दिया है कि जांच दल द्वारा की गई निरीक्षण की कार्रवाई का विस्तृत प्रतिवेदन निर्धारित समय-सीमा में प्रस्तुत किया जाये, ताकि उसके आधार पर आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। उन्होंने अधिकारियों को यह भी निर्देशित किया कि कोई भी गड़बड़ी पाए जाने पर दोषियों के विरुद्ध कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए। खाद्य आपूर्ति व्यवस्था में सुधार हेतु निरंतर प्रयासरत है राज्य सरकार खाद्य मंत्री श्री राजपूत ने कहा है कि प्रदेश सरकार नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण खाद्यान्न उपलब्ध कराने तथा सार्वजनिक वितरण प्रणाली को पारदर्शी एवं सुदृढ़ बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। इस दिशा में किए जा रहे सुधारात्मक उपायों के अंतर्गत यह कदम एक महत्त्वपूर्ण पहल है, जिससे शासन की खाद्य नीति और वितरण व्यवस्था को और अधिक भरोसेमंद बनाया जा सकेगा।  

जनसहभागिता की अभिनव पहल, आइए मिलकर जल स्त्रोतों को सहेजें

भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अभिकल्पना को साकार करते हुए “जल गंगा संवर्धन” अभियान अब जन अभियान बन गया है। अभियान की अवधारणा “जनसहभागिता से जल संरक्षण और संवर्धन” पर केन्द्रित है। इस अभियान के अंतर्गत नवीन जल संग्रहण संरचनाओं के साथ पूर्व से मौजूद जल संग्रहण संरचनाओं का जीर्णोद्धार, जल स्त्रोतों और जल वितरण प्रणालियों की साफ-सफाई जल स्त्रोतों के आस-पास पौध-रोपण के कार्य प्राथमिकता से किये जा रहे है। समाज की सहभागिता के लिये जल संरक्षण जागरूकता के विभिन्न कार्यक्रम पूरे प्रदेश में आयोजित किये जा रहे हैं। दतिया के उन्नाव बालाजी धाम पर स्वच्छता कार्यक्रम दतिया जिले के उन्नाव बालाजी धाम/तीर्थस्थान की नदी पर वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ताओं, जनप्रतिनिधियों, आम नागरिकों ने स्वच्छता कार्य किया एवं जल संरक्षण की शपथ भी दिलायी गई। नदी की गंदगी को कार्यकर्ताओं ने हटाकर नदी को स्वच्छ किया और सभी को संदेश दिया कि हर व्यक्ति अपने गांवों और पंचायतों में प्राचीन जल स्रोतों की सफाई करें एवं लोगों को उनके संरक्षण एवं संवर्धन के लिये जागरूक करें। मंदसौर के पिपलिया मंडी में निकाली गई कलश यात्रा मंदसौर जिले के पिपलिया मंडी अयोध्या बस्ती में जन अभियान परिषद ने कलश यात्रा निकालकर जल संरक्षण का संदेश दिया। पिपलिया मंडी के तालाब में कलश यात्रा के साथ ही श्रमदान किया गया। इस अवसर पर परिषद के संभाग समन्वयक, ब्लॉक समन्वयक, सामाजिक कार्यकर्ता, छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। उमरिया में युवा टीम ने प्राचीन सगरा तालाब के घाटों में गीत गाकर नागरिकों को किया जागरूक उमरिया जिले की सक्रिय युवाओं की टोली द्वारा जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत पाली नगर के ऐतिहासिक प्राचीन सगरा तालाब के हरिहर बाबा घाट में बैठकर जल संरक्षण गीत गाकर नागरिकों को जल को सहेजने के लिये जागरूक किया। विवाह के निमंत्रण के साथ भेजा जल संरक्षण का संदेश उमरिया जिले के विकासखंड मानपुर के ग्राम बचहा में नवाचार करते हुए विवाह के निमंत्रण के साथ जल संरक्षण का संदेश भेजा जा रहा है। ग्राम बचहा के भूतपर्व सरपंच कमला प्रसाद जायसवाल ने अपनी बेटी सुधा जायसवाल के विवाह के निमंत्रण में “जल है तो कल है, लोग प्रेम के बिना रह सकते है, मगर पानी के बिना नही” का संदेश दिया। उनकी इस पहल का आमजनों ने स्वागत किया तथा जल संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। शहडोल मेंपानी की एक-एक बूंद सहजने एवं महत्व बताने जन-प्रतिनिधि एवं अधिकारियों ने लगाई चौपाल कलेक्टर डॉ. केदार सिंह, जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों की उपस्थिति में शहडोल जिले के जनपद पंचायत पड़मनिया खुर्द में लोगों को पानी की एक-एक बूंद सहेजने एवं जल का महत्व बताने के लिए जन चौपाल लगाई गई। जन-चौपाल में कलेक्टर श्री सिंह ने कहा कि जल के बिना जीवन संभव नही है, जल अमूल्य है, इसे बचाने के लिए हम सभी को सामूहिक प्रयास करना होगा, जल को बचाने के लिए केवल एक व्यक्ति की जिम्मेदारी नही बल्कि हम सभी कि जिम्मेदारी है कि आने वाले पीढ़ियों के लिए पानी का संचयन करें। देवास में बारिश के पानी को सहेजने के लिए किया जा रहा है तालाब गहरीकरण देवास जिले में “जल गंगा संवर्धन अभियान संचालित किया जा रहा है। अभियान के माध्यम से जल संरचनाओं के निर्माण एवं गहरीकरण का कार्य किया जा रहा है। जिला प्रशासन एवं ग्रामीणों के जनसहयोग से जनपद पंचायत कन्‍नौद की ग्राम पंचायत कोठड़ी में बारिश के पानी को सहजने के लिए तालाब गहरीकरण कार्य किया जा रहा है। तालाब के गहरीकरण के बारिश के दिनों में पानी संग्रहित होगा तथा वॉटर लेवल भी बढ़ेगा, जिससे पेयजल के साथ खेती करने के लिए भी पानी मिल सकेगा।

प्रदेश के सभी संभागों में होंगे किसान मेले : कृषि मंत्री कंषाना

भोपाल किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री श्री एदल सिंह कंषाना ने कहा है कि राज्य सरकार प्रदेश के सभी संभागों में किसान मेला आयोजित करेगी। उज्जैन संभाग में 3 मई को मंदसौर में पहला किसान मेला आयोजित किया जाएगा। मध्यप्रदेश सरकार ने राज्य के सभी संभागों में किसान मेलों का आयोजन करने का निर्णय लिया है। इन मेलों में किसानों को कृषि, खाद्य प्र-संस्करण, उद्यानिकी और पशुपालन से संबंधित नवीनतम जानकारी दी जायेगी। साथ ही सरकार की विभिन्न योजनाओं की जानकारी के साथ किसानों की समस्याओं का समाधान भी किया जाएगा। मेले में प्रदर्शनी के माध्यम से भी किसानों को कृषि तकनीकों और कृषि उपकरणों की जानकारी दी जायेगी। मंत्री श्री कंषाना ने बताया कि अक्टूबर में एक राज्य स्तरीय किसान मेला भी आयोजित किया जाएगा। इसके अलावा राज्य सरकार ने एक साल में 10 लाख सोलर पंप लगाने का लक्ष्य रखा है, जिससे किसानों को ऊर्जादाता बनने में मदद मिलेगी। सरकार ने इसके लिए अभियान शुरू कर किसानों से आवेदन आमंत्रित किए हैं। कृषि मंत्री श्री कंषाना ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत@2047 के विजन के अनुरूप राज्य सरकार ने गरीब, युवा, अन्नदाता किसान और नारी कल्याण के लिए मिशन शुरू कर दिया है। मंत्रि-परिषद द्वारा मध्यप्रदेश कृषक कल्याण मिशन को सैद्धांतिक स्वीकृति दे दी गई है। ‘मध्यप्रदेश कृषक कल्याण मिशन’ के तहत अब कृषि से सम्बद्ध विभागों की योजनाएं एक मंच पर समन्वित रूप से क्रियान्वित होंगी। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश कृषि आधारित राज्य है और इस क्षेत्र में यहां अपार संभावनाएं हैं। किसानों की आय, कृषि उत्पादन, पशुपालन, मत्स्य पालन में वृद्धि के साथ खाद्य प्र-संस्करण और कृषि से उत्पादित कच्चे माल पर आधारित औद्योगिक इकाई स्थापित करने जैसे हरसंभव प्रयास किये जा रहे हैं। किसानों और गौ-पालकों की आय बढ़ाने के साथ कुपोषण दूर करने की दिशा में सरकार योजनाबद्ध तरीके से पूरी ऊर्जा के साथ कार्य कर रही है।  

प्रदेश का पहला जिला नर्मदापुरम, जहां चारों प्रकार के रेशम का होता है उत्पादन : मंत्री जायसवाल

भोपाल कुटीर एवं ग्रामोद्योग राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री दिलीप जायसवाल ने कहा है कि नर्मदापुरम, प्रदेश का पहला जिला है, जहां चारों प्रकार के रेशम का उत्पादन होता है। नर्मदापुरम में टसर रेशम, मलबरी रेशम, इरी रेशम और मूँगा रेशम (गोल्डन सिल्क) का उत्पादन किया जाता है। ये चारों प्रकार के रेशम जिले में तैयार किए जाते हैं और देशभर में प्रसिद्ध हैं। रेशम उद्योग के विकास को मिलेगी गति राज्यमंत्री श्री जायसवाल ने कहा कि नर्मदापुरम में रेशम केंद्र है, जहाँ रेशम के धागे और कपड़ों का उत्पादन किया जाता है। रेशम केंद्र में अब परंपरागत डिजाइनों से हटकर नए डिजाइनों को शामिल करने की तैयारी की जा रही है। जिले में मालाखेड़ी में मध्यप्रदेश की पहली ककून मंडी है, जहाँ रेशम के ककून का बाजार लगता है। नर्मदापुरम जिले की महिलाएं रेशम उत्पादन से जुड़कर अपना सशक्तिकरण कर रही हैं। मढ़ई रेशम उत्पादन केंद्र को सिल्क टूरिज्म के लिए विकसित किया जा रहा है। रेशम के धागे का उपयोग करके दवाइयां भी बनाई जा रही हैं। जिले में रेशम उत्पादन के विस्तार के लिए विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। नर्मदापुरम रेशम उत्पादन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण केंद्र है और रेशम से संबंधित विभिन्न गतिविधियों और योजनाओं के साथ भी जुड़ा हुआ है। राज्यमंत्री श्री जायसवाल ने कहा कि नर्मदापुरम में रेशम का उत्पादन बढ़ाने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। जिले के किसानों को रेशम उत्पादन के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिससे उनकी आय में वृद्धि हो सके। रेशम उत्पादन के लिए जिले में अनुकूल जलवायु और परिस्थितियाँ हैं। किसानों को रेशम के कीड़ों का पालन करने और रेशम उत्पादन के लिए प्रशिक्षण दिया जा रहा है। रेशम उत्पादन से किसानों को अतिरिक्त आय का साधन मिलेगा और जिले की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। उन्होंने कहा कि सरकार रेशम उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए किसानों को हरसंभव सहायता प्रदान कर रही है। नर्मदापुरम में रेशम उत्पादन के बढ़ने से जिले के किसानों को लाभ होगा।

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