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पथरिया में बिजली व्यवस्था को नई ताकत: केबिनेट मंत्री लखन पटेल ने ₹354.50 लाख की लागत से बने 33/11 केवी उपकेंद्र का लोकार्पण किया

New strength to power system in Patharia: Cabinet Minister Lakhan Patel दमोह। ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए केबिनेट मंत्री लखन पटेल ने आज पथरिया विधानसभा के ग्राम बकैनी में आर.डी.एस.एस. योजना के अंतर्गत निर्मित ₹354.50 लाख की लागत वाले 33/11 केवी (5 एमवीए) विद्युत उपकेंद्र का लोकार्पण किया। नए और अत्याधुनिक तकनीक से सुसज्जित इस उपकेंद्र के शुरू होने से कुल 21 गाँवों को बेहतर, स्थिर और निर्बाध विद्युत आपूर्ति का सीधा लाभ मिलेगा। क्षेत्र में लंबे समय से चली आ रही वोल्टेज समस्या और बार-बार होने वाली बिजली कटौती से अब बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। लोकार्पण समारोह में मंत्री लखन पटेल ने कहा— ऊर्जा क्षेत्र में निरंतर विकास और ग्रामीण इलाकों में बिजली ढांचे को मजबूत करना हमारी शीर्ष प्राथमिकता है। यह उपकेंद्र न केवल वर्तमान आवश्यकताओं को पूरा करेगा, बल्कि आने वाले वर्षों के लिए विश्वसनीय बिजली आपूर्ति की नींव भी मजबूत करेगा। कार्यक्रम में दमोह सांसद राहुल सिंह लोधी, जिला पंचायत अध्यक्ष रंजीता गौरव पटैल, उपाध्यक्ष मंजू कटारे, भाजपा जिला महामंत्री महेश पटैल, मंडल अध्यक्ष केदार पटैल, सरपंच आशीष सिंह, तथा भूमि दानदाता शंकरलाल पटैल सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणजन मौजूद रहे। स्थानीय लोगों ने इस उपकेंद्र को क्षेत्र के विकास का महत्वपूर्ण कदम बताया। इससे कृषि पंप, घरेलू कनेक्शन और छोटे उद्योगों को मिलने वाली बिजली में उल्लेखनीय सुधार होने की संभावना है।

‘रिश्वत’ लेते रंगे हाथों पकड़ाए ‘पटवारी और सर्वेयर’, रीवा लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई

Patwari and surveyor caught red-handed taking bribe, Rewa Lokayukta takes major action रीवा। मध्यप्रदेश में रिश्वतखोरी का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। आए दिन लोकायुक्त के द्वारा भ्रष्ट अधिकारी और कर्मचारी पर शिकंजा कसा जाता है। ऐसा ही मामला रीवा जिले से सामने आया है। यहां पर नामांतरण की एवज में पटवारी और सर्वेयर रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ाए हैं। नामांतरण की एवज में मांगी रिश्वतशिकायतकर्ता ने बताया राजेंद्र साहू निवासी ग्राम बड़ोखर, पोस्ट बेलवा बड़गैयान ने बताया कि उसने अपनी पत्नी श्यामवती साहू के नाम पर 091 हेक्टेयर जमीन खरीदी थी। उसी जमीन का नक्शा तरमीम और नामांतरण के लिए पटवारी हंसराज पटेल ने 6 हजार रुपए की रिश्वत मांग रहे थे। 4800 की रिश्वत लेते पटवारी-सर्वेयर पकड़ाएमामले की शिकायत लोकायुक्त संभाग में की गई। जिसमें पटवारी हंसराज पटेल और सर्वेयर आशुतोष त्रिपाठी को 4800 रुपए की सामूहिक रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ाए। आरोपी के खिलाफ विरुद्ध भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधन)2018 की धारा-7,13(1)B, 13(2) के अंतर्गत कार्रवाई की जा रही है।

जबलपुर केंद्रीय कारागार में लगेगा विशाल निशुल्क स्वास्थ्य शिविर, बंदियों को दी जाएंगी निःशुल्क दवाएँ

A huge free health camp will be organised in Jabalpur Central Jail, free medicines will be given to the prisoners. जितेन्द्र श्रीवास्तव विशेष संवाददाता  जबलपुर। नेताजी सुभाषचंद्र बोस केंद्रीय कारागार, जबलपुर में बंदियों के लिए एक विशाल निशुल्क स्वास्थ्य शिविर आयोजित करने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए क्राइस्ट चर्च स्कूल एलुमिनाय एसोसिएशन ने जेल प्रशासन को आधिकारिक अनुरोध भेजा है। एसोसिएशन ने जेल अधीक्षक, केंद्रीय कारागार जबलपुर को लिखे पत्र में बताया कि यह शिविर 23 नवंबर 2025 (रविवार) को सुबह 10:30 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक आयोजित करने का प्रस्ताव है। इस दौरान कारागार में बंद सभी बंदियों का स्वास्थ्य परीक्षण किया जाएगा और आवश्यकता अनुसार निःशुल्क दवाइयाँ भी वितरित की जाएँगी। एसोसिएशन ने जेल प्रशासन से इस सेवा कार्यक्रम की अनुमति देने का आग्रह किया है, ताकि बंदियों को स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ मिल सके। संगठन का कहना है कि समाज के प्रत्येक वर्ग – विशेषकर बंदी जीवन जी रहे लोगों – को स्वास्थ्य सेवाएँ उपलब्ध कराना एक मानवीय दायित्व है, और इसी भावना के साथ यह शिविर आयोजित किया जा रहा है। जेल प्रशासन द्वारा अनुमति मिलने के बाद यह शिविर कारागार के स्वास्थ्य ढांचे को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

नलखेड़ा आए मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल: जनपद अध्यक्ष प्रतिनिधि मुकेश चौहान ने किया सम्मान, विकास पर हुई अहम बैठक

Minister Prahlad Singh Patel came to Nalkheda: District President representative Mukesh Chauhan honored him, an important meeting was held on development संवाददाता चंदा कुशवाह नलखेड़ा /आगर मालवा। मंगलवार को नलखेड़ा में पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल का आगमन हुआ। जनपद पंचायत नलखेड़ा के जनपद अध्यक्ष प्रतिनिधि मुकेश चौहान ने मंत्री का भव्य स्वागत किया। कार्यक्रम में पूर्व नगर अध्यक्ष प्रेम राठौरे और जनपद उपाध्यक्ष ईश्वर साई ने भी मंत्री का सम्मान किया और उन्हें नलखेड़ा आने के लिए आमंत्रित करने की पहल की। तीनों जनप्रतिनिधियों की संयुक्त उपस्थिति ने कार्यक्रम को और महत्वपूर्ण बना दिया। स्वागत के बाद मंत्री पटेल और जनप्रतिनिधियों की बैठक में नलखेड़ा जनपद के विकास कार्यों पर विस्तार से चर्चा हुई। इसमें ग्रामीण सड़कों के पक्के निर्माण, नल-जल योजनाओं को गति, पंचायत भवनों का नवीनीकरण, मनरेगा कार्य, आवास योजना के लंबित प्रकरणों का समाधान, श्रमिक पंजीयन, नाली निर्माण, सफाई व्यवस्था और स्ट्रीट लाइट जैसी मूलभूत सुविधाओं पर विशेष रूप से बात हुई। जनपद अध्यक्ष प्रतिनिधि मुकेश चौहान ने गांवों की वास्तविक समस्याएँ सामने रखते हुए मंत्री को महत्वपूर्ण प्रस्ताव सौंपे। बैठक में पूर्व नगर अध्यक्ष प्रेम राठौरे ने नगर क्षेत्र की समस्याओं का विस्तृत विवरण रखा। उन्होंने विशेष रूप से माँ बगलामुखी मंदिर क्षेत्र के विकास पर जोर दिया। राठौरे ने कहा कि मंदिर परिसर में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु आते हैं, इसलिए सड़क सुधार, पार्किंग, सुरक्षा, प्रकाश व्यवस्था और पेयजल जैसी सुविधाओं को मजबूत किया जाना आवश्यक है। मंत्री पटेल ने इस पर गंभीरता से प्रतिक्रिया देते हुए मंदिर क्षेत्र के लिए अलग से कार्ययोजना तैयार करने का आश्वासन दिया। वहीं जनपद उपाध्यक्ष ईश्वर साई ने ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की धीमी प्रगति पर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि कई पंचायतों में आवास, नालियों, मनरेगा कार्यों और पेयजल से जुड़े कार्य समय पर पूरे नहीं हो रहे हैं। उन्होंने इन कार्यों को तेजी से पूर्ण कराने की मांग रखते हुए मंत्री के सामने जनपद की प्राथमिक आवश्यकताओं को स्पष्ट किया। मंत्री ने इस पर विभागीय अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि नलखेड़ा क्षेत्र के लंबित कार्यों पर तुरंत कार्रवाई की जाए। मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा कि नलखेड़ा जैसे उभरते जनपद में विकास कार्यों को गति देना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा, “गांवों में सड़क, पानी, स्वच्छता और रोजगार से जुड़े कार्यों को तेजी से पूरा कराया जाएगा। विभागीय योजनाओं का लाभ सीधे ग्रामीणों तक पहुँचना चाहिए।” कार्यक्रम के दौरान कई सरपंचों और ग्रामीणों ने भी अपने-अपने गाँवों की समस्याओं से जुड़े ज्ञापन मंत्री को सौंपे। मंत्री ने सभी ज्ञापनों का संज्ञान लिया और जल्द समाधान का आश्वासन दिया। समापन पर जनपद अध्यक्ष प्रतिनिधि मुकेश चौहान, पूर्व नगर अध्यक्ष प्रेम राठौरे और जनपद उपाध्यक्ष ईश्वर साई ने मंत्री का आभार व्यक्त किया। स्थानीय नागरिकों ने कहा कि मंत्री का यह दौरा नलखेड़ा में विकास कार्यों की रफ्तार को और तेज करेगा।

नलखेड़ा को बड़ी सौगात: हेलीकॉप्टर सेवा के सेक्टर-1 में शामिल हुआ नलखेड़ा, पूर्व नगर अध्यक्ष प्रेम राठौर की मेहनत से खुला रास्ता; किराया और शुरू होने की तारीख जल्द घोषित होगी

Nalkheda gets a big gift: Nalkheda joins Sector-1 of helicopter service चंदा कुशवाह संवाददाता नलखेड़ा । मध्यप्रदेश सरकार द्वारा आरंभ की गई नई हवाई पर्यटन सेवा में अब नलखेड़ा का नाम भी शामिल कर लिया गया है। इस निर्णय के बाद नलखेड़ा को आधिकारिक रूप से प्रथम सेक्टर की सूची में स्थान मिल गया है। यह कदम नलखेड़ा के विकास और धार्मिक पर्यटन के विस्तार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस पूरे प्रयास का सबसे बड़ा श्रेय पूर्व नगर अध्यक्ष प्रेम राठौर को दिया जा रहा है, जिन्होंने लगातार प्रयास करते हुए नलखेड़ा को इस हवाई मार्ग में जोड़ने की माँग को मजबूती से उठाया। विभागीय अधिकारियों से मुलाकातें, लिखित प्रस्ताव और लगातार आग्रह—इन सभी प्रयासों के कारण अंततः नलखेड़ा को इस सेवा से जोड़ने की मंजूरी मिल पाई। नलखेड़ा माँ बगलामुखी धाम के कारण देशभर के श्रद्धालुओं का प्रमुख धार्मिक केंद्र है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहाँ पहुँचते हैं, ऐसे में हवाई सेवा शुरू होने से श्रद्धालुओं को भारी सुविधा मिलेगी और यात्रा का समय भी कम होगा। पर्यटन विभाग का मानना है कि इस सेवा से क्षेत्र में व्यापार, आवागमन, होटल व्यवसाय और स्थानीय रोजगार को बड़ा लाभ मिलेगा। इससे नलखेड़ा का नाम धार्मिक पर्यटन के मानचित्र पर और अधिक प्रमुखता से उभरेगा। विभाग ने अभी उड़ानों के मार्ग, समय और किराये की अंतिम घोषणा नहीं की है, परंतु संकेत मिले हैं कि अन्य धार्मिक स्थलों की तरह नलखेड़ा का किराया भी पाँच से सात हजार रुपये के बीच रह सकता है। अधिकारियों के अनुसार, नलखेड़ा के हेलीपैड का निरीक्षण अगले सप्ताह किया जाएगा, जिसके बाद परीक्षण उड़ान कराई जाएगी। परीक्षण पूरा होते ही सेवा के शुरू होने की तारीख सार्वजनिक कर दी जाएगी। अनुमान है कि यह सेवा अगले तीन से चार सप्ताह में प्रारंभ हो सकती है, यदि सभी तकनीकी औपचारिकताएँ समय पर पूरी हो जाएँ। सेवा को लेकर नलखेड़ा में भारी उत्साह देखा जा रहा है। मंदिर क्षेत्र, दुकानदारों और स्थानीय जनता का कहना है कि यह कदम नलखेड़ा को नई पहचान देगा और श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। पूर्व नगर अध्यक्ष प्रेम राठौर ने इसे नलखेड़ा के विकास की दिशा में ऐतिहासिक निर्णय बताया और कहा कि यह सफलता जनता के सहयोग और निरंतर प्रयासों का परिणाम है।

एसआईआर सर्वे का निरीक्षण करने पहुंची टीम पर पत्थरों से हमला -नायब तहसील और बीएलओ घायल

The team that arrived to inspect the SIR survey was attacked with stones – Naib Tehsildar and BLO injured रतलाम। जिले में मतदाता सूची के एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण ) का कार्य जारी है। इसी के तहत जिले की सैलाना विधानसभा क्षेत्र में बुधवार को एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण ) कार्य का निरीक्षण करने पहुंची टीम पर पत्थरों से हमला किया गया। इसमें तहसीलदार व बीएलओ घायल हो गए।घटना रावटी थाना क्षेत्र के जुलवानिया पंचायत के अधरशिला गांव की हैं। यहां नायब तहसीलदार रामकलेश साकेत और बीएलओ विक्रम सिंह राठौड़ घायल हुए। दोनों को प्राथमिक उपचार के बाद रतलाम मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया है। सूचना के बाद एडीएम शालिनी श्रीवास्तव और एएसपी राकेश खाखा मेडिकल कॉलेज पहुंचे और घायलों से घटना की जानकारी ली।टीआई रावटी ने बताया कि एफआईआर दर्ज की हैं। तहसीलदार एवं बीएलओ की टीम पर हमला करने वाले तीन लोगों मे से दो लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है। गिरफ्तार आरोपील ग्राम उमर के निवासी हैं। पुलिस टीम ने कार्रवाई करते हुए हमले में शामिल सायसिंह पिता रायसिंह गामड़ (28)साल निवासी ग्राम उमर और बापू ताड़ पिता बज्या ताड़ (55 )निवासी ढोल फंटा, ग्राम उमर को गिरफ्तार किया। वहीं शोकसिंह पिता रायसिंह गामड़ (31 ) निवासी उमर फरार हैं।नशे में थे आरोपीनायब तहसीलदार रामकलेश साकेत के साथ गए पटवारी बाबूलाल मुनिया ने बताया कि वे अधरशिला गांव की नहर पुलिया के पास बीएलओ विक्रमसिंह और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता से एसआईआर कार्य की जानकारी ले रहे थे। इसी दौरान बाइक पर सवार तीन लोग, जो नशे की हालत में थे, मौके पर पहुंचे और गाली-गलौज करने लगे। उन्होंने टीम से पूछा कि रोड पर क्यों खड़े हो और पथराव शुरू कर दिया।

एमपी गज़ब: विकास या बर्बादी? जिम्मेदार कौन इंजीनियरिंग या सरकार

MP Ghazab: Development or ruin? Who is responsible: engineering or government? Whether it’s the municipal corporation, the Bhopal Metro, or the Public Works Department… they’re all tainted by corruption. भोपाल। प्रदेश की राजधानी भोपाल एक बार फिर सरकारी इंजीनियरिंग की गंभीर खामियों को लेकर सुर्खियों में है। विपक्ष का आरोप है कि राज्य में मानो इंजीनियरों के बीच यह होड़ चल रही है कि कौन जनता के पैसों की सबसे ज्यादा बर्बादी कर सकता है। इसी सवाल के साथ कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव को कठघरे में खड़ा किया है। भोपाल विकास की 3 तस्वीरें राज्य के सिस्टम पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहीं हैं पहली तस्वीर: सेकंड स्टॉप के पास बन रहा नगर निगम का प्रदेश का अनोखा 40 करोड़ का “नया ऑफिस”। इसकी बेसिक प्लानिंग में भारी चूक सामने आ रहीं है। भोपाल नगर निगम का नया आठ मंजिला कार्यालय 40 करोड़ रुपये में तैयार किया गया। विपक्ष का आरोप है कि इतनी बड़ी बिल्डिंग में मीटिंग हॉल की बुनियादी प्लानिंग तक सही नहीं की गई। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह फैसला नहीं हो पा रहा कि यह इमारत ऑफिस है या इंजीनियरों का “प्रैक्टिकल लैब”, जहां जनता के पैसों पर प्रयोग किए जा रहे हैं। दूसरी तस्वीर: भोपाल मेट्रो… मानक से कम ऊंचाई पर बना स्टेशन प्रगति पेट्रोल पंम्प और केंद्रीय रिजर्व बैंक के पास भोपाल मेट्रो स्टेशन की ऊंचाई मानकों से कम पाए जाने के बाद बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। इन दोनों जगह सड़क और स्टेशन के बीच इतनी कम जगह छोड़ी गई कि बड़ी गाड़ियाँ स्टेशन से टकराने लगीं। तीसरी मुसीबत की तस्वीर: एशबाग के 90 डिग्री रेलवे ओवर ब्रिज की राजधानी के बरखेड़ी स्थित यह सवाल रेलवे ओवरब्रिज बनाने में पीडब्ल्यूडी की इंजीनियरिंग बड़ी फेलुअर साबित हुई है। यहां 90 डिग्री मोड़ वाला ओवर ब्रिज बना दिया, जो बनने से पहले ही जानलेवा बन गया है। करोड़ों रुपये से तैयार ओवर ब्रिज जनता के उपयोग लायक नहीं है। अब इसको उपयोगी बनाने के लिए फिर से करोड़ों रुपये खर्च करने की प्लानिंग बन रहीं है, जिसमें 3 महीने का समय लगना है। विपक्ष का कहना है कि…“यह सिर्फ इंजीनियरिंग गलत नहीं, बल्कि जनता के हजारों करोड़ की योजनाओं के साथ खिलवाड़ है।” विपक्ष का तीखा तंज… मध्यप्रदेश के इंजीनियर बिल्डिंग ब्लॉक गेम खेल रहे हैं”। कांग्रेस ने मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री दोनों पर हमला बोलते हुए कहा कि “मध्यप्रदेश के इंजीनियर्स पहले बिल्डिंग बनाते हैं, फिर तोड़ते हैं, फिर बनाते हैं और फिर से तोड़ देते हैं। मानो यह सरकारी निर्माण नहीं, बच्चों का बिल्डिंग-ब्लॉक गेम हो।” भारी गलतियों के लिए अधिकारी जिम्मेदार कांग्रेस प्रवक्ता संगीता शर्मा और कांग्रेस एससी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार समेत अन्य नेताओं ने सवाल उठाया कि जब एक आम आदमी अपने घर की छोटी से छोटी प्लानिंग में सावधानी रखता है तो फिर सरकारी परियोजनाओं में बार-बार ऐसी भारी गलतियाँ क्यों हो रही हैं? और अगर गलती इंजीनियर की है तो “भरपाई जनता क्यों करे? कार्रवाई इंजीनियर और जिम्मेदार अधिकारियों पर क्यों नहीं होती?” पीएम मोदी और राज्य सरकार पर विपक्ष का सीधा हमला कांग्रेस ने आरोप लगाया कि प्रदेश में निर्माण कार्यों की बार-बार की खामियाँ साबित करती हैं कि “मध्यप्रदेश में सिस्टम नहीं, बर्बादी का मौन राज चल रहा है।” विपक्ष की मांग है कि दोषी इंजीनियरों पर तत्काल सख्त कार्रवाई हो। निर्माण के हर चरण की थर्ड-पार्टी जांच अनिवार्य की जाए और जनता के पैसों की भरपाई उन अधिकारियों से कराई जाए, जिन्होंने योजनाओं को गलत तरीके से पास किया। प्रदेश में लगातार सामने आ रही इंजीनियरिंग की ये गलतियाँ अब एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुकी हैं और जनता पूछ रही है। “विकास के नाम पर आखिर किसके हाथों खेल रही है जनता की गाढ़ी कमाई?”

नपा के आउटसोर्स कर्मचारियों ने कार्यालय के सामने किया प्रदर्शन 2 माह से नहीं मिला वेतन

Outsourced employees of the Municipal Corporation protested in front of the office, not getting salary for 2 months. इटारसी। नगरपालिका में कार्यरत आधा सैकड़ा से अधिक आउटसोर्स सफाई कर्मचारियों ने मंगलवार को सुबह नगरपालिका कार्यालय के बाहर प्रदर्शन कर अपना विरोध जताया है, कर्मचारियों को दो माह का वेतन नहीं मिलने से नाराज हैं। उन्हें की पारिवारिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। आउटसोर्स कर्मचारियों पर शहर की सफाई व्यवस्था का जिम्मा है, ऐसे में शहर की सफाई व्यवस्था डगमगा सकती है।कर्मचारियों ने बताया की उन्हें कलेक्टर रेट के हिसाब से भी वेतन नहीं दिया जाता है। पिछले दो माह से वेतन नहीं मिला है,जिससे उन्हें आर्थिक परेशानी से जूझना पड़ रहा है। सुबह के प्रदर्शन के बाद कर्मचारियों ने दोपहर में सम्बंधित अधिकारी से मिलकर इस समस्या का समाधान करवाने की बात कही है।

भारतीय मजदूर संघ ने 46 सूत्रीय मांगें सीएम तक पहुंचाईं, कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा

Bharatiya Mazdoor Sangh conveyed its 46-point demands to the CM and submitted a memorandum to the Collector. शिवपुरी। भारतीय मजदूर संघ, मध्यप्रदेश ने जिला मुख्यालय पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नाम एक 46 सूत्रीय मांगपत्र कलेक्टर को सौंपा। इस ज्ञापन के माध्यम से प्रदेश के लाखों श्रमिक और कर्मचारियों की लंबित मांगों के समाधान की अपील की गई है। संगठन ने बताया कि प्रदेश में विभिन्न वर्गों जैसे दैनिक वेतनभोगी, संविदा कर्मी, आउटसोर्स स्टाफ, अतिथि शिक्षक-विद्वान, बिजली कंपनी कर्मचारी, आंगनवाड़ी-आशा कार्यकर्ता, हम्माल-तुलावटी, पटवारी और पंचायत सचिवों की समस्याएं लंबे समय से अनसुलझी हैं। इन सभी के निराकरण के लिए यह विस्तृत ज्ञापन प्रस्तुत किया गया है। ज्ञापन में प्रमुख मांगों में आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए हरियाणा मॉडल की तर्ज पर सुरक्षा नीति लागू करना, 10 वर्ष पूरे कर चुके दैनिक वेतनभोगियों को नियमित करना और संविदा नीति 2023 की विवादित धाराओं को हटाना शामिल है। इसके अतिरिक्त, अतिथि विद्वानों को 65 वर्ष तक सेवा सुरक्षा प्रदान करने और बिजली कर्मचारियों की वेतन विसंगतियों को दूर करने की मांग भी की गई है। अन्य महत्वपूर्ण मांगों में नवनियुक्त कर्मचारियों की स्टाइपेंड व्यवस्था समाप्त कर नियुक्ति से पूर्ण वेतन बहाल करना, स्वास्थ्य बीमा का प्रावधान, पदोन्नति प्रक्रिया फिर से शुरू करना, आशा, आंगनवाड़ी, रसोईया और हम्मालों का मानदेय बढ़ाना शामिल है। ज्ञापन सौंपते समय भारतीय मजदूर संघ के जिला अध्यक्ष फतेह सिंह गुर्जर, जिला मंत्री जितेंद्र श्रीवास्तव सहित बड़ी संख्या में कर्मचारी और पदाधिकारी उपस्थित रहे।

सीसीएफ पी.एन. मिश्रा की कार्यशैली पर गंभीर सवाल — अवैध लकड़ी परिवहन से उत्खनन तक फाइलों में दबी कार्रवाई

Serious questions arise about the working style of CCF P.N. Mishra – actions ranging from illegal timber transportation to excavation remain buried in files. इंदौर। इंदौर वृत का वन विभाग इन दिनों सवालों के कटघरे में है। मुख्य वन संरक्षक (सीसीएफ) पी.एन. मिश्रा के कार्यभार संभालने के बाद क्षेत्र में अवैध लकड़ी परिवहन,फर्जी टीपी,उत्खनन और अन्य वन अपराधों पर ठोस कार्रवाई न होने से विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर संदेह गहराया है। आरोप है कि पिछले कई महीनों में न तो बड़ी कार्रवाई हुई और न ही आरोपियों पर वह सख्ती दिखाई दी,जो लगातार बढ़ते वन अपराधों को रोक सके। फर्जी टीपी,पकड़ी गई गाड़ियां और गायब कार्रवाई! एक शिकायतकर्ता के अनुसार,इंदौर स्थित संदीप इंटरप्राइजेस के परिसर में फर्जी ट्रांजिट पास के जरिए दो वाहन अवैध लकड़ी खाली करते पकड़े गए,लेकिन आज तक विभाग यह तय नहीं कर पाया कि आरोपी कौन थे। गाड़ियां कैसे छोड़ दी गईं और आरा मशीन क्यों नहीं सील की गई— इन सवालों पर विभाग मौन है। मामला दबाने की कोशिश होने का आरोप भी सामने आया है। धार से आलीराजपुर तक नेटवर्क सक्रिय — फिर भी हल्की कार्रवाई! धार,पीथमपुर,सागौर कुटी,बदनावर,झाबुआ, आलीराजपुर, धामनोद, पेटलावद,मानपुर, मनावर और कुक्षी सहित इंदौर वृत क्षेत्रों में अवैध लकड़ी परिवहन और उत्खनन में शामिल वाहनों को पकड़ा गया, जिन्हें नियमों के अनुसार राजसात किया जाना चाहिए था। पर आरोप है कि सीसीएफ मिश्रा ने अपने अधिकार क्षेत्र में सुमोटो कार्रवाई करते हुए गाड़ियों को मामूली दंड लगाकर छोड़ दिया, जिससे वन माफियाओं के हौसले और बुलंद हुए। ‘नेता के पट्ठे’ के दबाव में काम करने के आरोप विशेष सूत्रों का दावा है कि सीसीएफ मिश्रा एक प्रभावशाली नेता के इशारे पर फैसले ले रहे हैं,जो लगातार सरकार की आलोचना करने के लिए भी पहचाने जाते हैं। आरोप यह भी कि भोपाल के कुछ शीर्ष अधिकारी भी इसी प्रभाव में विभागीय तबादलों और निर्णयों को प्रभावित कर रहे हैं। सत्ता पक्ष में बढ़ती नाराज़गी — “अधिकारियों ने काम रोका तो चुनाव में पड़ेगी मार” सत्ता पक्ष के कई नेता विभाग की इस कार्यवाहीहीनता से बेहद नाराज़ हैं। उनका कहना है कि“सरकार हमारी है लेकिन अधिकारी उन्हीं लोगों के इशारे पर काम कर रहे हैं जो सरकार पर सवाल उठाते हैं।” कुछ नेताओं का यह भी कहना है कि“अगर जनता के काम नहीं होंगे तो वोट मांगने जाएंगे कैसे? इस ढीले रवैये का असर आगामी चुनाव तक पड़ेगा।” इंदौर वृत में लगातार बढ़ते वन अपराधों और विभाग की कमजोर कार्रवाई को लेकर अब माहौल तेज होता दिख रहा है। मामला जल्द ही बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले सकता है।

कलेक्टर की फटकार भी बेअसर! महीनों पुराना ड्यूटी चार्ट आज भी टंगा — कौन संभाल रहा अस्पताल?

Even the Collector’s reprimand is ineffective! Months-old duty charts still hang—who’s managing the hospital? चंदा कुशवाहनलखेड़ा ! सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नलखेड़ा की अव्यवस्थाएँ अब नियंत्रण से बाहर होती जा रही हैं। आलम यह है कि कुछ माह पूर्व कलेक्टर के आकस्मिक निरीक्षण के दौरान डॉक्टरों का जो ड्यूटी चार्ट लगाया गया था, वह आज भी 24/09/25 की उसी तारीख के साथ जस का तस टंगा हुआ है। न तारीख बदली गई, न नई सूची जारी हुई। यह देखकर साफ होता है कि अस्पताल प्रबंधन के लिए मरीजों की सुविधा किसी मजाक से कम नहीं है। ड्यूटी चार्ट न होने के कारण रोजाना सैकड़ों मरीज अस्पताल में भटकते रहते हैं। कौन-सा डॉक्टर कब उपलब्ध होगा—इसकी जानकारी तक उन्हें नहीं मिलती। इससे बड़ी शर्म की बात और क्या हो सकती है कि सरकारी अस्पताल में लोगों को घंटों इंतज़ार करना पड़ता है, जबकि कई डॉक्टर अपने सरकारी समय में खुलेआम निजी क्लीनिकों पर बैठकर कमाई में लगे रहते हैं। अस्पताल में मरीज तड़पते रहें, यह उनकी प्राथमिकता में ही नहीं है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह अव्यवस्था कोई नई नहीं है। अस्पताल में अनुशासन नाम की चीज़ बची ही नहीं है। ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर डॉ. विजय यादव तो मानो पूरे मामले से पूरी तरह पल्ला झाड़ चुके हैं। उनकी उदासीनता और कुप्रबंधन ने अस्पताल की प्रणाली को लगभग ठप कर दिया है। डॉक्टरों और कर्मचारियों पर किसी प्रकार की अनुशासनात्मक पकड़ नहीं रह गई है — जो चाहे जब चाहे मनमानी कर रहा है। नागरिकों का आरोप है कि डॉ. यादव की लापरवाही अब सीधे मरीजों की जान पर बन आई है। करोड़ों रुपये खर्च कर सरकार अस्पतालों में इलाज की व्यवस्था करती है, लेकिन यहां डॉक्टर सरकारी अस्पताल में उपलब्ध ना होकर मरीजों को उनके निजी क्लीनिकों पर बुला रहे हैं। इस तरह की हरकतें न सिर्फ सेवा शर्तों का खुला उल्लंघन हैं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर सीधी लूट है। मरीजों और उनके परिजनों ने मीडिया के माध्यम से स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से मांग की है कि नलखेड़ा अस्पताल की अव्यवस्थाओं और बीएमओ डॉ. विजय यादव की लापरवाही की उच्च स्तरीय जांच कर कठोर कार्रवाई की जाए। साथ ही तत्काल अपडेटेड ड्यूटी चार्ट जारी किया जाए, ताकि मरीजों को इस जानलेवा अव्यवस्था से राहत मिल सके।

नलखेड़ा में बाल दिवस पर पूर्व नगर अध्यक्ष प्रेम राठौर ने बच्चों संग बिताया समय, दिए संस्कार और प्रेरणा से भरे संदेश

Former city president Prem Rathore spent time with children on Children’s Day in Nalkheda, imparting values and inspirational messages. चंदा कुशवाह नलखेड़ा । बाल दिवस के अवसर पर आज नलखेड़ा में एक स्नेहपूर्ण और प्रेरणादायी कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें पूर्व नगर अध्यक्ष प्रेम राठौर ने स्थानीय बच्चों को आमंत्रित कर उनके साथ समय बिताया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बच्चों को अच्छे संस्कार, आत्मविश्वास और जीवन में सही दिशा देने का था। प्रेम राठौर ने बच्चों से सरल और प्रेरक शब्दों में कहा कि— “जीवन में इंसान की असली पहचान उसके व्यवहार और कर्मों से होती है। हमेशा सच बोलें, अच्छे कर्म करें और कभी भी गलत रास्ते पर न चलें। वही बच्चा भविष्य में सफल होता है जो ईमानदारी और मेहनत को अपना साथी बनाता है।” उन्होंने बच्चों को शिक्षा का महत्व समझाया और बताया कि पढ़ाई सिर्फ नौकरी के लिए नहीं, बल्कि एक बेहतर इंसान बनने की समझ देती है। कार्यक्रम के दौरान प्रेम राठौर ने बच्चों के साथ हँसी-खुशी समय बिताया, उनके साथ खेल-कूद भी किए और बाल दिवस की शुभकामनाएँ दीं। माहौल पूर्णतः पारिवारिक और सौहार्दपूर्ण रहा। बच्चों को दिए उपहार: इस अवसर पर प्रेम राठौर ने बच्चों को टॉफ़ी, टिफिन बॉक्स, कॉपी-पेंसिल, स्टोरी बुक्स और चॉकलेट्स भेंट किए। उपहार पाकर बच्चों के चेहरों पर खुशी साफ दिखाई दे रही थी। स्थानीय लोगों ने पूर्व नगर अध्यक्ष की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि “बच्चों के बीच जाकर समय बिताना ही असली बाल दिवस है। इससे बच्चों में सामाजिक मूल्यों और संस्कारों को बढ़ावा मिलता है।” नलखेड़ा में बाल दिवस का यह आयोजन बच्चों के लिए यादगार रहा और समाज में सकारात्मक संदेश छोड़ गया।

शासकीय अधिवक्ता किशोर सिंह राजपूत ने किया पत्रकार राजेश शर्मा का सम्मान, विभागीय तालमेल का उत्कृष्ट उदाहरण

Government Advocate Kishore Singh Rajput honored journalist Rajesh Sharma, an excellent example of departmental coordination. नलखेड़ा । प्रशासन और मीडिया के बीच बेहतर तालमेल और आपसी सहयोग की मिसाल शुक्रवार को तब देखने को मिली, जब शासकीय अधिवक्ता (Govt. Lawyer) किशोर सिंह राजपूत ने अपनी ओर से पत्रकार राजेश शर्मा का सम्मान किया। यह सम्मान न केवल व्यक्तिगत सौहार्द का प्रतीक है, बल्कि विभागीय समन्वय और जनहित के प्रति साझा जिम्मेदारी को भी प्रदर्शित करता है। सम्मान समारोह के दौरान अधिवक्ता किशोर सिंह राजपूत ने कहा कि “पत्रकार समाज की सशक्त आवाज़ होते हैं। जनहित, समस्याओं और स्थानीय मुद्दों को ईमानदारी से सामने लाने वाला पत्रकार प्रशासन की बड़ी ताकत होता है। राजेश शर्मा जैसे जिम्मेदार पत्रकारों का सम्मान करना वास्तव में गर्व की बात है।” पत्रकार राजेश शर्मा ने भी सम्मान के लिए धन्यवाद व्यक्त करते हुए कहा कि “नलखेड़ा में प्रशासन, न्यायिक विभाग और मीडिया हमेशा एक-दूसरे के सहयोगी रहे हैं। शासकीय अधिवक्ता किशोर सिंह राजपूत जैसे अनुभवी और विनम्र अधिकारी हमें सत्य और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए प्रेरित करते हैं।” स्थानीय स्तर पर शासकीय अधिवक्ता और पत्रकार के बीच इस सौहार्दपूर्ण रिश्ते को लोगों ने “सकारात्मक संवाद और मजबूत विभागीय तालमेल” की अनूठी मिसाल बताया। नलखेड़ा क्षेत्र में यह पहल मीडिया और प्रशासन के बीच भरोसे और सहयोग को और मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

नलखेड़ा के जंगलों में वन विभाग की लापरवाही: रात में हो रही अवैध पेड़ कटाई और लकड़ी तस्करी बेखौफ जारी

Forest department negligence in Nalkheda forests: Illegal tree felling and timber smuggling continue unabated at night चंदा कुशवाह  नलखेड़ा । क्षेत्र के जंगलों में इन दिनों अवैध पेड़ कटाई और लकड़ी तस्करी के मामले गंभीर रूप ले चुके हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, वन विभाग के नाक के नीचे लगातार पेड़ों पर कुल्हाड़ी चल रही है, लेकिन विभाग की ओर से न तो किसी तरह की निगरानी बढ़ाई गई है और न ही कोई ठोस कार्रवाई की गई है। ग्रामीण बताते हैं कि रात के समय जंगलों में ट्रैक्टर, पिकअप और ट्रॉलियां घूमती दिखाई देती हैं, जिनमें सागौन, बबूल और अन्य मूल्यवान लकड़ी को भरकर बाहर ले जाया जाता है। कई लोगों ने रात में चेनसॉ से पेड़ काटने की आवाजें भी सुनी हैं, जिससे साफ होता है कि यह पूरा काम संगठित तरीके से चल रहा है। एक समय घने पेड़ों से आच्छादित यह क्षेत्र अब धीरे-धीरे उजाड़ होता जा रहा है। कई जगहों पर कटे हुए ठूंठ साफ दिखाई देते हैं, जिससे पता चलता है कि यहां बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई की गई है। ग्रामीणों का कहना है कि यह सब बिना किसी आंतरिक सहयोग के संभव नहीं है। उनका आरोप है कि कुछ वनकर्मी तस्करों से मिलकर काम कर रहे हैं, जिसकी वजह से तस्करी रात में बेरोक-टोक जारी रहती है और दिन में इस पूरे मुद्दे पर सन्नाटा पसरा रहता है। लोगों में यह भी चर्चा है कि केवल लकड़ी ही नहीं, बल्कि अन्य जंगली उत्पादों और संसाधनों की भी तस्करी की आशंका है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है। ग्रामीणों के मुताबिक, उन्होंने कई बार विभाग और प्रशासन को इस बारे में सूचित किया, परंतु अब तक कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया है। सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा होता है कि आखिर यह पूरा अवैध नेटवर्क किसकी शह पर चल रहा है। क्या वन विभाग को इन गतिविधियों की जानकारी नहीं है या यह जानबूझकर अनदेखा किया जा रहा है। यदि नहीं, तो इतने समय से हो रही पेड़ कटाई और तस्करी पर कार्रवाई अभी तक क्यों नहीं हुई। ग्रामीणों ने मांग की है कि जंगलों में रात के गश्त को बढ़ाया जाए, संदिग्ध वाहनों की जांच की जाए, वन विभाग के कर्मचारियों की भूमिका की जांच कर जिम्मेदारों पर कार्यवाही की जाए और जंगलों में सुरक्षा के उपायों को मजबूत किया जाए। उनका कहना है कि यदि इस अवैध कटाई पर तुरंत रोक नहीं लगाई गई, तो आने वाले वर्षों में नलखेड़ा का पर्यावरण गंभीर संकट का सामना करेगा और क्षेत्र की हरियाली हमेशा के लिए खत्म हो सकती है।

नलखेड़ा – निजी स्कूल बस संचालकों की मनमानी से बढ़ रहा है खतरा, प्रशासन मौन!

Nalkheda – The danger is increasing due to the arbitrariness of private school bus operators, the administration is silent! चंदा कुशवाह  नलखेड़ा। नगर में निजी स्कूल बस संचालकों द्वारा परिवहन नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। न तो वाहनों का फिटनेस प्रमाणपत्र जांचा जा रहा है, न ही सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा है। इन बस संचालकों ने नियम-कायदों को ताक पर रखकर अपनी मनमर्जी से बसें चलाना आम बात बना ली है। हर सुबह और दोपहर के समय इन बसों के कारण नगर की सड़कों पर भारी जाम की स्थिति बनी रहती है। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि बसें अब गलियों और मोहल्लों तक ले जाई जा रही हैं, जिससे आम नागरिकों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बसें ऐसी हैं जिनका फिटनेस, परमिट और बीमा तक संदिग्ध है, पर फिर भी वे रोजाना बच्चों को लेकर सड़कों पर दौड़ रही हैं। यह लापरवाही किसी बड़े हादसे को न्योता दे सकती है। फिर सवाल उठता है — आखिर प्रशासन कहाँ है? क्या जिम्मेदार अधिकारी किसी बड़ी दुर्घटना के इंतजार में हैं? जब तक कोई अप्रिय घटना नहीं होगी, क्या तब तक यह अनदेखी जारी रहेगी? जनता ने मांग की है कि प्रशासन तत्काल इस पर सख्त कार्रवाई करे, बसों का फिटनेस व परमिट जांच अभियान चलाए, और नलखेड़ा में नियम विरुद्ध बस संचालन पर रोक लगाए — ताकि बच्चों की सुरक्षा और आम जनता की सुविधा सुनिश्चित की जा सके।

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