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मुख्यमंत्री ने मोहासा में विद्युत एवं नवकरणीय ऊर्जा उपकरण विनिर्माण पार्क सहित नवीन इकाइयों का किया भूमि-पूजन

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि औद्योगिक क्षेत्र मोहासा-बाबई समूचे नर्मदापुरम के विकास का केंद्र बनेगा। सतपुड़ा का यह क्षेत्र आज नया इतिहास रचने जा रहा है। औद्योगिक विकास के लिए मध्यप्रदेश सरकार द्वारा किए गए प्रयासों से नर्मदापुरम आरआईसी में अपार सफलता प्राप्त हुई है। आरआईसी से मोहासा-बाबई सौर ऊर्जा पार्क की भूमि 227 एकड़ से बढ़कर 884 एकड़ हो गई। आरआईसी में 20 औद्योगिक इकाइयों की स्थापना के लिए भूमि आवंटन-पत्र भी वितरित किये गये। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शनिवार को औद्योगिक क्षेत्र मोहासा-बाबई में आयोजित विद्युत एवं नवकरणीय ऊर्जा उपकरण विनिर्माण क्षेत्र में इकाइयों के भूमि-पूजन समारोह को संबोधित कर रहे थे। भूमि-पूजन समारोह में लोक निर्माण विभाग एवं नर्मदापुरम जिले के प्रभारी मंत्री श्री राकेश सिंह, मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन, सांसद श्री दर्शन सिंह चौधरी, राज्यसभा सांसद श्रीमती माया नारोलिया, विधायक डॉ सीतासरन शर्मा, विधायक सोहागपुर श्री विजयपाल सिंह, विधायक सिवनीमालवा श्री प्रेम शंकर वर्मा तथा प्रमुख सचिव मध्यप्रदेश औद्योगिक निवेश एवं प्रोत्साहन विभाग श्री राघवेन्द्र सिंह सहित अन्य जन-प्रतिनिधि, विभिन्न औद्योगिक इकाइयों के प्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में जनसमूह उपस्थित रहा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि औद्योगिक क्षेत्र मोहासा-बाबई नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में नया इतिहास रचने जा रहा है। इस औद्योगिक क्षेत्र में स्थापित होने वाली औद्योगिक इकाइयों द्वारा लगभग 2 हजार करोड़ रूपये से अधिक का निवेश किया जा रहा है। इससे सोहागपुर, इटारसी, सिवनीमालवा, पिपरिया, पचमढ़ी के स्थानीय युवाओं को रोजगार प्राप्त होगा और रोजगार के लिए होने वाला पलायन इन क्षेत्रों से रुकेगा। आरआईसी में किये जा रहे निवेश के कारण महज 2 से 3 वर्षों में ही संपूर्ण नर्मदापुरम क्षेत्र का आर्थिक परिदृश्य बदलेगा। नर्मदापुरम की कर्मशील जनता औद्योगिक विकास में सहायक बनेगी। नर्मदापुरम वन संपदा, भू-संपदा, बेहतर रोड और रेल कनेक्टिविटी जैसी सुविधाओं के साथ औद्योगिक विकास के लिए सबसे अनुकूल हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश को औद्योगिक हब बनाने और रोजगार के अवसर सृजित करने के लिए उज्जैन, जबलपुर, रीवा, ग्वालियर, सागर के बाद अब 6वीं रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव नर्मदापुरम में हो रही हैं। औद्योगिक विकास के इन प्रयासों में नर्मदापुरम को कम समय में सबसे अधिक सफलता मिली है। निवेशकों को औद्योगिक पार्क मोहासा-बाबई की विशेषता तथा सरकार द्वारा दिए जा रहे वित्तीय अनुदान का सीधा फायदा निवेशकों को देने का हमने निर्णय लिया है। साथ ही अत्यंत कम दरों पर निवेशकों को जमीन उपलब्ध करवाई गई है। नर्मदापुरम औद्योगिक विकास में विश्व पटल पर होगा स्थापित – प्रभारी मंत्री श्री सिंह जिले के प्रभारी एवं लोक निर्माण मंत्री श्री राकेश सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. यादव के अथक प्रयासों एवं दूरदर्शी सोच से नर्मदापुरम का कायाकल्प होने जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने देश-विदेश का भ्रमण कर प्रदेश में औद्योगिक निवेश आकर्षित करने के साथ रोजगार सृजन करने का अभूतपूर्व काम किया हैं। नर्मदापुरम में आज हजारों करोड़ रूपये का निवेश होने जा रहा है, जिससे न केवल नर्मदापुरम के युवाओं को रोजगार प्राप्त होगा बल्कि नर्मदापुरम औद्योगिक विकास के विश्व पटल पर स्थापित होगा।

16 दिसंबर को प्रदेश कांग्रेस कमेटी विधानसभा का घेराव कर रही है, यह घेराव अभी तक का कांग्रेस का सबसे बड़ा आंदोलन होगा

भोपाल 16 दिसंबर को मध्य प्रदेश की विधानसभा घेराव को लेकर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने बैठक लेकर सभी को जिम्मेदारियां सौंप दी है उन्होंने कहा है कि हर ब्लॉक से कम से कम 20 चौपाइयां वहां आंदोलन में शामिल होने के लिए भोपाल पहुंचना चाहिए इसके अतिरिक्त विधायक पूर्व विधायक और जिला एवं शहर अध्यक्षों को अलग से जिम्मेदारी दी गई है. उल्लेखनीय है कि मध्य प्रदेश की डॉक्टर मोहन यादव सरकार को 13 दिसंबर को 1 साल पूर्ण हो रहा है जबकि 16 दिसंबर को प्रदेश कांग्रेस कमेटी विधानसभा का घेराव कर रही है. प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी के मुताबिक यह घेराव अभी तक का कांग्रेस का सबसे बड़ा आंदोलन है. इसे लेकर प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने बैठक ली. प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता मुकेश नायक के मुताबिक बैठक में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि सभी जीते हुए विधायक और हारे हुए उम्मीदवारों को विशेष रूप से कार्यकर्ताओं के साथ भोपाल पहुंचना है. इसके अलावा पार्षद पूर्व पार्षद, अध्यक्ष,ञपूर्व अध्यक्ष सहित सभी को ब्लॉक स्तर पर जिम्मेदारी दी गई है. यह भी कहा गया है कि आंदोलन को भी कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता अपना खुद का आंदोलन मानकर सफल बनाने की पूरी कोशिश करें. इसके लिए ब्लॉक स्तर पर बैठक भी करें. महिला कांग्रेस के साथ-साथ अन्य संगठनों से भी अपील प्रदेश के मीडिया प्रभारी मुकेश नायक के मुताबिक प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने महिला इकाई, एनएसयूआई, युवा कांग्रेस सहित कांग्रेस के अन्य सभी संगठनों से भी आंदोलन में भाग लेने की अपील बैठक के माध्यम से की है. इसमें स्पष्ट रूप से चेतावनी भी दी गई है कि यदि कोई आंदोलन को लेकर लापरवाही बरतने की कोशिश करेगा तो आगे संगठन उस मामले में गंभीर निर्णय लेगा. मध्य प्रदेश में ब्लॉक स्तर पर बैठक प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता मुकेश नायक ने बताया कि मध्य प्रदेश में सभी 230 विधानसभा सीटों पर 450 से ज्यादा ब्लॉक है. इन ब्लॉक में कार्यकर्ताओं, नेताओं को बैठक के माध्यम से भोपाल आने का आमंत्रण दे दिया गया है. अब ब्लॉक स्तर पर भी बैठक होगी. सभी ब्लॉक से 20-20 गाड़ियों के माध्यम से कार्यकर्ताओं को भोपाल लाने की जिम्मेदारी सौंपी गई है.

मैहर में एक दूल्हे ने दहेज प्रथा के खिलाफ पेश की मिसाल, लौटा दिए शगुन के डेढ़ लाख रुपए, सिर्फ 600 रुपए लिए

मैहर दहेज की वजह से हमारे समाज में शादियां टूट जाती हैं। वहीं, एक दूल्हे ने ऐसी मिसाल पेश की है, जिसकी हर जगह चर्चा हो रही है। एमपी के मैहर जिले में एक दूल्हे को शगुन में डेढ़ लाख रुपए मिले तो उसने वापस कर मिसाल कायम की है। दूल्हे ने जब यह राशि लौटाई तो दुल्हन के पिता की आंखें भर आई। उसने सगुन के रूप में सिर्फ 600 रुपए लिए हैं। दूल्हे ने सिर्फ 600 रुपए लिए दरअसल, मध्य प्रदेश के मैहर जिले में एक दूल्हे ने बड़ी मिसाल पेश की है। रामनगर क्षेत्र के नगर परिषद वार्ड क्रमांक 02 झगरहा निवासी राकेश पटेल की शादी बड़वार निवासी आंचल के साथ 10 दिसंबर को होनी है। शादी से पहले आंचल के परिवार के लोग 5 दिसंबर को रामनगर वार्ड क्रमांक 02 झगरहा में लग्न लेकर पहुंचे थे। लग्न समारोह के दौरान जैसे ही दूल्हे का तिलक करके उसे शगुन के रूप में डेढ़ लाख रुपय के नोटों की गड्डियां दी गई तो उसने सभी का सम्मान किया। इसके बाद आपत्ति जताते हुए पैसे वापस लौटा दिए और केवल शगुन का 600 रुपए लिया है। गलत है दहेज प्रथा वहीं, दूल्हा राकेश ने अपने ससुराल पक्ष के लोगों को कहा कि आप बुरा ना मानें, दहेज प्रथा गलत है। इसलिए समाज को संदेश देने में उनकी मदद करें। उन्होंने कहा कि दहेज सबसे बड़ा अभिशाप है। हमें न तो दहेज लेना चाहिए और न ही देना चाहिए। मोटी शगुन राशि ठुकराकर दूल्हे ने लिए 600 रुपये इस कार्यक्रम में मौजूद पूर्व नगरपरिषद अध्यक्ष रामसुशील पटेल ने कहा कि इस शादी ने समाज को एक बड़ा संदेश देने की कोशिश की है। इसलिए सभी दहेज प्रथा को खत्म करने की दिशा में काम करें। रामसुशील पटेल ने कहा कि उन्होंने सगुन में हिस्सा लेकर मोटी रकम छोड़कर राकेश पटेल ने 600 रुपए लिए हैं। दुल्हन पक्ष की तरफ से डेढ़ लाख रुपए दिए थे। लेकिन दूल्हे ने लौटा दिए‌ है। राकेश के इस फैसले के बाद कार्यक्रम में मौजूद लोग कहने लगे कि ऐसे दामाद हर घर में हों. मेहमान कहने लगे कि दहेज प्रथा जैसे सामाजिक बुराई को खत्म करने के लिए इस तरह के कदम बहुत जरूरी हैं. राकेश के इस कदम ने समाज को एक सकारात्मक संदेश दिया है. अब सवाल ये उठता है कि क्या अन्य युवा भी राकेश से प्रेरणा लेंगे? कौन हैं राकेश पटेल ? बता दें कि राकेश पटेल रामनगर ब्लॉक के झगरहा गांव के रहने वाले हैं. उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई गांव में की और बाद में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में Graduation की डिग्री हासिल की. फिलहाल राकेश सऊदी अरब की एक निजी कंपनी में ऑटोमेशन इंजीनियर के तौर पर काम कर रहे हैं.

मध्य प्रदेश में अब जनता सीधे करेगी नगर पालिका और परिषद के अध्यक्ष का चुनाव

 भोपाल  मध्य प्रदेश में अब नगर पालिका और परिषद के अध्यक्ष का चुनाव प्रत्यक्ष प्रणाली से होगा, यानी जनता सीधे अध्यक्ष का चुनाव करेगी। शिवराज सरकार के समय लागू की गई चुनाव की अप्रत्यक्ष प्रणाली यानी पार्षदों के माध्यम से अध्यक्ष को चुनने की व्यवस्था को बदला जाएगा। नई व्यवस्था में सीधे मतदाता ही अध्यक्ष का चुनाव करेंगे। जब यह व्यवस्था लागू होगी तो फिर अध्यक्ष को वापस बुलाने का ‘खाली कुर्सी भरी कुर्सी’ का प्रावधान भी पुन: लागू कर दिया जाएगा। कैसे-कैसे बदलती रही व्यवस्था     अभी तक प्रदेश में नगर निगम के महापौर, नगर पालिका और नगर परिषद के अध्यक्ष का चुनाव सीधे मतदाता द्वारा कराने का प्रावधान है। कमल नाथ सरकार ने पार्षदों के माध्यम से महापौर और अध्यक्ष का चुनाव कराने का निर्णय किया लेकिन यह अमल में नहीं आ पाया।     मार्च 2020 में फिर शिवराज सिंह चौहान मुख्यमंत्री बने और उन्होंने पुरानी व्यवस्था से ही चुनाव कराने के लिए अध्यादेश जारी किया, पर संशोधन विधेयक विधानसभा से पारित नहीं हो पाया।     निकाय चुनाव से पहले मई 2022 में फिर प्रावधान में संशोधन किया गया और महापौर का चुनाव सीधे जनता से कराने का निर्णय लिया। नगर पालिका और नगर परिषद के अध्यक्ष का चुनाव अप्रत्यक्ष प्रणाली यानी पार्षद के माध्यम से कराने की व्यवस्था लागू कर दी। क्यों बदलना पड़ रही व्यवस्था पार्षदों को साथ लेकर नहीं चल पाने के कारण कुछ निकायों में अविश्वास प्रस्ताव प्रस्तुत कर दिए गए। इस स्थिति से निपटने के लिए सरकार ने अध्यादेश के माध्यम से नगर पालिका अधिनियम 1961 की धारा 43 (क) में नया प्रावधान किया। इसके अनुसार अविश्वास प्रस्ताव दो के स्थान पर तीन वर्ष की कालावधि पूर्ण होने पर ही लाया जा सकता है और इसे पारित करने के लिए दो-तिहाई के स्थान पर तीन-चौथाई पार्षदों का समर्थन अनिवार्य कर दिया। यही व्यवस्था अब नगर निगम के अध्यक्ष/सभापति के लिए भी लागू की जा रही है। इसके साथ ही नगर पालिका और नगर परिषद के अध्यक्ष का चुनाव सीधे जनता से कराने की तैयारी है।

स्कूल शिक्षा विभाग परीक्षा परिणाम को सुधारने के लिए कर रहा है प्रयास, स्कूल में वार्डन टीचर होंगे तैनात

भोपाल मध्य प्रदेश बोर्ड 10वीं व 12वीं की परीक्षा फरवरी के अंतिम सप्ताह से शुरू होने वाली है। अब करीब तीन माह का समय शेष है। स्कूल शिक्षा विभाग इस बार सरकारी स्कूलों का 10वीं व 12वीं बोर्ड परीक्षा का परिणाम सुधारने के लिए नई पहल कर रहा है। खासतौर पर 10वीं में इस बार बेस्ट ऑफ फाइव योजना समाप्त हो गई है। इस कारण परिणाम सुधारने के लिए विभाग विशेष तैयारी में जुटा है। इस बार राज्य स्तर पर विषयवार मास्टर ट्रेनर चयनित किए गए हैं, जो जिले के सीएम राइज स्कूलों के शिक्षकों को ऑनलाइन प्रशिक्षण देकर बोर्ड परीक्षा की तैयारी कराएंगे। 10वीं और 12वीं के शिक्षकों को दूसरे कार्य में नहीं लगाया जाएगा साथ ही सभी स्कूलों में वार्डन शिक्षक तैनात किए जा रहे हैं, जो प्रत्येक विद्यार्थी की मॉनीटिरंग करेंगे। इस संबंध में लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) ने सभी जिले के संयुक्त संचालक, जिला शिेंक्षा अधिकारी और प्राचार्यों को बोर्ड परीक्षाओं में सुधार के लिए आवश्यक कदम उठाए जाने के संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए हैं। निर्देशित किया गया है कि 10वीं व 12वीं में पढ़ाने वाले शिक्षकों को किसी भी स्थिति में गैर शैक्षणिक कार्य में नहीं लगाया जाए। मास्टर ट्रेनर को प्रशिक्षित किया गया है इस बार प्रोजेक्ट बेस लर्निंग पद्धति अपनाई गई है। इसमें विद्यार्थियों की समस्या को पहचानकर प्रोजेक्ट द्वारा हल कराने का प्रयास किया जाता है। प्रदेश के 274 सीएम राइज स्कूलों के 32 शिक्षकों को मास्टर ट्रेनर चयनित किया गया है। इन्हें एक स्वयंसेवी संस्था की ओर से पांच दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया है। ये मास्टर ट्रेनर प्रत्येक संभाग के शिक्षकों को प्रशिक्षित करेंगे। वार्डन शिक्षक पांच विद्यार्थियों की लेंगे जिम्मेदारी प्रत्येक स्कूल में वार्डन शिक्षक बनाए जाएंगे।इन वार्डन शिक्षकों को पांच विद्यार्थियों की जिम्मेदारी दी जाएगी।ये वार्डन शिक्षक विद्यार्थियों को परीक्षा तैयारी से लेकर खान-पान,जागने व सोने से लेकर प्रत्येक गतिविधि पर नजर रखेंगे ।हर सप्ताह की रिपोर्ट तैयार करेंगे।साथ ही प्रत्येक सप्ताह टेस्ट लेकर तैयारी को परखा जाएगा। छमाही परीक्षा के दौरान कक्षा लगाई जाएगी छमाही परीक्षा सोमवार से शुरू होने वाली है। इस बार परीक्षा के बाद भी कक्षाएं लगाई जाएंगी,ताकि अगले दिन के विषय की तैयारी कराई जाए।सभी गतिविधियों के स्थान पर मुख्य विषयों को पढ़ाया जाए। शीतकालीन अवकाश के दौरान तीन वर्षों के प्रश्नपत्रों का अभ्यास कराया जाए। विषय शिक्षक द्वारा निरीक्षण कर कमजोर बिंदुओं पर शैक्षणिक कार्य कराया जाए। कुछ स्कूल रविवार सहित छुट्टियों के दिन भी क्लास लगाकर तैयारी करा रहे हैं। मेधावी विद्यार्थियों की उत्तरपुस्तिकाओं को दिखाया जाए विद्यार्थियों को विगत वर्षों में बोर्ड परीक्षाओं में अधिकतम अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों की उत्तरपुस्तिकाओं को दिखाकर उन्हें अच्छे अंक लाने के लिए मार्गदर्शित किया जाए। मंडल की वेबसाइट पर उपलबध है। ये पहल की जा रही है     तिमाही परीक्षा के परिणात के आधार पर वीडियो कांफ्रेंसिंग की जाए।     30 प्रतिशत से कम परिणाम वाले स्कूलों से चर्चा की जाए।     गणित, विज्ञान, अंग्रेजी, सामाजिक विज्ञान में कम परिणाम वाले शिक्षकों से चर्चा की जाए।     परीक्षा के तनाव को कम करने के लिए विद्यार्थी हेल्पलाइन नंबर 18002330175 पर काल करें।     प्रेरणादायी वीडियो दिखाएं।     परीक्षा के बाद अधिकतम अंक लाने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित या पुरस्कृत किया जाएगा।     तिमाही परीक्षा में खराब प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों की अलग से कक्षा लगाई जाए। मास्टर ट्रेनर तैयार किए गए     विभाग इस बार बोर्ड परीक्षा के परिणाम को बेहतर करने के लिए राज्य स्तर पर मास्टर ट्रेनर तैयार किए हैं। ये संभाग स्तर पर शिक्षकों को तैयारी के संबंध में टिप्स देंगे। इसके अलावा प्रत्येक स्कूल में वार्डन शिक्षक भी बनाए गए हैं। – डीएस कुशवाहा, अपर संचालक, डीपीआई  

छात्रों ने दोपहर में मध्यान भोजन में दाल-चावल और सब्जी खाई थी, जिसके बाद शुरू हुए उल्टी-दस्त, कई छात्र बीमार

सिंगरौली सिंगरौली के शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय पिपराछापी में फूड प्वाइजनिंग से 10 से अधिक छात्र-छात्राएं बीमार हो गए। इन छात्रों ने दोपहर में मध्यान भोजन में दाल-चावल और सब्जी खाई थी, जिसके बाद उनके शरीर में दर्द और अन्य लक्षण दिखाई दिए। सबसे ज्यादा प्रभावित कक्षा 8 के छात्र-छात्राएं रहे। घटना के बाद 12 से ज्यादा छात्र-छात्राओं को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी हालत पर चिकित्सकों की टीम नजर बनाए हुए है। कुछ बच्चों की हालत गंभीर बताई जा रही है। जिला कलेक्टर चंद्रशेखर शुक्ला, पुलिस अधीक्षक मनीष खत्री, एसडीएम सृजन वर्मा और अन्य प्रशासनिक अधिकारी अस्पताल में मौजूद हैं और स्थिति पर लगातार निगरानी रख रहे हैं। थाना प्रभारी अशोक सिंह परिहार भी मौके पर पहुंचे और मामले की जांच की। प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के आदेश दे दिए हैं, ताकि फूड प्वाइजनिंग की वजह का पता चल सके।

12वीं के छात्र मेधांश ने मानव ड्रोन किया तैयार, जो चार किमी ऊंचाई तक जा सकता है, एमटीएलडी-01 नाम दिया

ग्वालियर सिंधिया स्कूल फोर्ट के छात्र मेधांश त्रिवेदी ने मानव ड्रोन तैयार किया है, जो एक व्यक्ति को बैठाकर उड़ने भरने में सक्षम है। कक्षा 12वीं के छात्र मेधांश ने इस ड्रोन का नाम एमटीएलडी-01 नाम दिया है। मेधांश बताते हैं कि इस ड्रोन को बनाने में तीन माह का समय लगा। इस दौरान कई बार असफलता भी हाथ लगी। इसमें लगभग चार लाख रुपये खर्च आया है। इस ड्रोन का खाली वजन 32 किलोग्राम है और उड़ान का समय आठ मिनट है। यह ड्रोन कुल 50 हार्सपावर का है, जो ट्रैक्टर से भी ज्यादा ताकतवर है। मेधांश ने बताया कि यह ड्रोन चार किलोमीटर की ऊंचाई तक जा सकता है। ड्रोन की अधिकतम गति 80 किलोमीटर प्रति घंटा है। एयर टैक्‍सी कंपनी शुरू करने के लिए फंडिंग की तलाश ड्रोन सिर्फ 1.8 मीटर चौड़ा और 1.8 मीटर लंबा है और यह 90 किलोग्राम वजन उठा सकता है। मेधांश बताते हैं कि ड्रोन को पूरा करने में काफी जोखिम उठाना पड़ा। ड्रोन में बैठे व्यक्ति के ठीक बगल में 50 इंच व्यास वाले प्रोपेलर बहुत तेजी से घूम रहे हैं। मेधांश ड्रोन को और बेहतर बनाने और अपनी एयर टैक्सी कंपनी शुरू करने के लिए फंडिंग की तलाश कर रहे हैं। इसके साथ ही वह लोगों के लिए सस्ता हेलीकॉप्टर भी उपलब्ध कराना चाहते हैं। अलग-अलग प्लेटफार्म पर चीन के ड्रोन देख आया आइडिया वह बताते हैं कि मैंने अलग-अलग प्लेटफार्म पर चीन के ड्रोन देखे थे। उनको देखने के बाद उसके मन में भी कुछ अलग करने का विचार आया। इस ड्रोन के लिए मेधांश को ज्योतिरादित्य सिंधिया और इसरो के सीईओ एस सोमनाथ से पुरस्कार भी मिला। मेधांश ने इस ड्रोन का प्रदर्शन सिंधिया स्कूल फोर्ट के स्थापना दिवस पर किया था।  

इटली सहित देश-विदेश से कान्हा की खूबसूरती का दीदार करने पहुंचे थे, मुक्की गेट पर पर्यटकों और मजिस्ट्रेट के बीच विवाद

बालाघाट विश्व प्रसिद्ध कान्हा राष्ट्रीय उद्यान के बालाघाट अंतर्गत मुक्की गेट में शनिवार की सुबह बैहर सिविल न्यायालय के न्यायिक मजिस्ट्रेट (प्रथम श्रेणी) और पर्यटकों के बीच ‘हाई वोल्टेज ड्रामा’ हो गया। ये ड्रामा लगभग तीन घंटे तक चला। इटली, गोवा, फ्रांस सहित देश-विदेश से कान्हा की खूबसूरती का दीदार करने पहुंचे थे। मुक्की गेट पर 170 से अधिक पर्यटकों और न्यायिक मजिस्ट्रेट के बीच तीखी बहस हो गई। हालात बिगड़ते देख वन विभाग, कान्हा प्रबंधन और बैहर पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। दरअसल, मामला न्यायिक मजिस्ट्रेट दयाल सिंह सूर्यवंशी मुक्की गेट में पर्यटकों की गाड़ियों की चेकिंग से जुड़ा है। सुबह-सुबह जांच करने पहुंच गए पर्यटक सुबह करीब 5.30 बजे सूर्यवंशी मुक्की गेट पहुंचे और कान्हा के अंदर जाने वालीं जिप्सियों के दस्तावेज और लाइसेंस की चेकिंग शुरू कर दी। इस पर जिप्सी चालकों ने न्यायिक मजिस्ट्रेट को गाड़ी के वैध दस्तावेज कान्हा प्रबंधन के पास होने तथा परमिट होने की जानकारी दी। इसके बाद भी मजिस्ट्रेट चेकिंग की जिद पर अड़े रहे। इस दौरान देश-विदेश से आए पर्यटक सफारी का समय निकलने तथा सफारी के बाद गाड़ियों की चेकिंग का गुजारिश करते रहे, लेकिन मजिस्ट्रेट की जिद कम नहीं हुई। इसके बाद पर्यटक न्यायिक मजिस्ट्रेट पर भड़क गए और उन्होंने सूर्यवंशी को घेर लिया। पर्यटकों ने सूर्यवंशी से चेकिंग से जुड़ा आदेश दिखाने कहा। पर्यटकों ने मजिस्ट्रेट पर ‘देख लेने’ की धमकी देने का आरोप भी लगाया है। बात करने पर बिजी मिले मजिस्ट्रेट इस संबंध में न्यायिक मजिस्ट्रेट दयाल सिंह सूर्यवंशी से उनकी प्रतिक्रिया जानने फोन पर संपर्क किया। उन्होंने ‘अभी कोर्ट टाइम है। अभी लाइव कोर्ट चल रही है…’ कहकर फोन रख दिया। कान्हा के फील्ड डायरेक्टर पुणित गोयल ने बताया कि मामला संज्ञान में आने के बाद समझाइश देकर पर्यटकों को शांत कराया गया है। पर्यटकों को वाहनों से कान्हा भ्रमण के लिए रवाना किया गया।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नर्मदापुरम से 100 दिवसीय नि-क्षय अभियान का शुभारंभ किया

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार को नर्मदापुरम से “100 दिवसीय नि-क्षय अभियान” का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश को टी.बी. मुक्त बनाने की दिशा में यह “100 दिवसीय निक्षय अभियान” एक सकारात्मक पहल है। इस अभियान को सफल बनाने के लिए इसे जन-आंदोलन बनाना जरूरी है। समाज के सभी वर्गों के सहयोग से इस अभियान को सफल बनाना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष-2018 में देश को वर्ष-2025 तक टी.बी. अर्थात क्षय रोग से मुक्त कराने का संकल्प लिया था। यह अभियान उसमें एक सार्थक भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि नागरिकों की जिंदगी बचाने के लिए आज शुरू हुआ यह अभियान देश के 347 जिलों में प्रारंभ हो रहा है, जिसमें मध्यप्रदेश के 23 जिले भी शामिल हैं। इस अभियान का उद्देश्य टी.बी. प्रकरणों की पहचान, मृत्यु दर में कमी और नए टी.बी. प्रकरणों में कमी लाना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में नि-क्षय मित्र पहल के तहत हम टी.बी. मरीजों को पोषण सहायता प्रदान कर हर संभव मदद पहुंचा रहे हैं। इसमें हम टी.बी. के मरीजों को प्रतिमाह पूरक खाद्य बास्केट प्रदान करते हैं, जिससे उनके शरीर को बीमारी से लड़ने के लिए जरूरी ताकत मिल सके। उन्होंने कहा कि अब टी.बी लाइलाज बीमारी नहीं है, टी.बी. का इलाज संभव है, टी.बी. से डरने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों के अनुसार सभी देशों ने वर्ष-2030 तक टी.बी. उन्मूलन का लक्ष्य तय किया है, लेकिन केन्द्र सरकार ने इससे पहले वर्ष-2025 तक टीबी उन्मूलन का लक्ष्य रखा है। इसी संकल्प को पूरा करने के लिए प्रत्येक स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि वर्ष-2015 से 2023 तक भारत में टी.बी. के मामलों में 17.7 प्रतिशत की गिरावट आई है। यह दर वैश्विक गिरावट 8.3 प्रतिशत से दोगुना से भी अधिक है। उन्होंने यह एक उल्लेखनीय उपलब्धि है कि वर्ष 2015 में भारत में प्रति 1 लाख जनसंख्या पर टी.बी. के प्रकरण 237 थे, जो वर्ष-2023 में घटकर 195 रह गए हैं। मध्यप्रदेश ने इस उपलब्धि में अहम भूमिका निभाई है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2015 में टी.बी. से होने वाली मृत्यु दर प्रति 1 लाख जनसंख्या पर 28 थी, जो वर्ष 2023 में घटकर 22 हो गई है। वर्ष 2025 तक इसे घटाकर मात्र 3 तक लाने का लक्ष्य हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं के मामले में लगातार विकास हो रहा है। प्रदेश में शासकीय मेडिकल कॉलेज के साथ पीपीपी मोड पर भी मेडिकल कॉलेज प्रारंभ किए गए हैं। उन्होंने कहा कि हमारा संकल्प है कि मध्यप्रदेश के प्रत्येक संसदीय क्षेत्र में कम से कम एक मेडिकल कॉलेज की सुविधा नागरिकों को उपलब्ध हो। इस दिशा में प्रदेश लगातार आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने नागरिकों से की अपील मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रदेश के सभी नागरिकों, जन-प्रतिनिधियों, और सरकारी एवं गैर सरकारी संगठनों से अपील की कि वे इस 100 दिवसीय नि-क्षय अभियान का हिस्सा बनकर टी.बी. मरीजों की मदद करें और उन्हें बताए कि “अब टी.बी. लाइलाज बीमारी नहीं है, इसका इलाज संभव है।”  

प्रदेश में सर्वाधिक विद्युत आपूर्ति का बना नया रिकॉर्ड: एक दिन में 3360 लाख यूनिट की हुई खपत: ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर

भोपाल ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया कि मध्यप्रदेश के ऊर्जा क्षेत्र ने फिर एक नया इतिहास रच दिया है। 6 दिसंबर को मध्यप्रदेश में किसी एक दिन सर्वाधिक विद्युत आपूर्ति कर बिजली कंपनियों ने  एक नया रिकॉर्ड बनाया। ऊर्जा मंत्री श्री तोमर ने प्रदेश के ऊर्जा विभाग के  सभी कार्मिकों की सराहना करते हुए इस उपलब्धि पर बधाई दी है। ऊर्जा मंत्री श्री तोमर ने बताया कि 6 दिसंबर को  प्रदेश में   बिना किसी व्यवधान के  3360 लाख यूनिट बिजली आपूर्ति   की गई ,जो किसी भी एक दिन में सर्वाधिक आपूर्ति करने का प्रदेश में रिकॉर्ड है। उल्लेखनीय है कि शुक्रवार को ही प्रदेश ने ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए 18077 मेगावाट विद्युत डिमांड को पूरा करने में सफलता प्राप्त की थी। ऊर्जा मंत्री श्री तोमर ने बताया कि 6 दिसंबर को पश्चिम क्षेत्र में 1259 लाख यूनिट, पूर्व क्षेत्र में 929 लाख यूनिट तथा मध्य क्षेत्र में 1070 लाख यूनिट तथा अन्य  क्षेत्र में 102 लाख यूनिट विद्युत आपूर्ति की गई।  

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सशस्त्र सेना झण्डा दिवस पर सैनिक कल्याण के लिए प्रदान की सहयोग राशि

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को आज सशस्त्र सेना झंडा दिवस पर मुख्यमंत्री निवास पुहंचकर सैनिक कल्याण संचालनालय के अधिकारियों ने ध्वज लगाया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सशस्त्र सेना झण्डा दिवस सशस्त्र सेना के प्रति राष्ट्रवासियों की ओर से कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सैनिक कल्याण कोष के लिए सहयोग राशि भी प्रदान की। इस अवसर पर कर्नल संजय प्रधान (सेना मेडल) और कैप्टन आर एन सिंह तोमर उपस्थित थे।  

हाई कोर्ट ने शासन से पूछा कि अन्य पिछड़ा वर्ग को जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण का लाभ क्यों नहीं दिया

जबलपुर हाई कोर्ट ने मध्य प्रदेश शासन से पूछा है कि अन्य पिछड़ा वर्ग को जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण का लाभ क्यों नहीं दिया जा रहा है। इस सिलसिले में सरकार को जवाब पेश करने के निर्देश दिए गए हैं। एडवोकेट यूनियन फार डेमोक्रेसी एंड सोशल जस्टिस संस्था ने जनहित याचिका दायर कर ओबीसी वर्ग को उसकी जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण की मांग की गई थी। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर एवं विनायक प्रसाद शाह व राज्य शासन की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता हरप्रीत सिंह रूपराह व अमित सेठ ने पक्ष रखा। 10 दिन के स्थान पर एक माह का समय दिया शुक्रवार को सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सुरेश कुमार कैत व न्यायमूर्ति विवेक जैन की युगलपीठ ने सरकार से पूछा कि क्यों न ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण का अंतरिम आदेश देकर समस्त याचिकाओं पर अंतिम फैसला इसके अधीन कर दिया जाए। इस पर सरकार की ओर से आपत्ति पेश की गई और कहा गया कि इन मामलों में सालिसिटर जरल तुषार मेहता पक्ष रखेंगे। पांच भागों में बांटें प्रकरण मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने महाधिवक्ता प्रशांत सिंह को निर्देश दिए कि ओबीसी आरक्षण से जुड़े सभी मामलों को पांच भागों में वर्गीकृत करें। पहली वो याचिकाएं जो ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण देने के विरोध में हैं और दूसरी वो जो इसके समर्थन में हैं। एक वर्ग में उन मामलों को रखा जाए जिसमें सामान्य प्रशासन विभाग तथा महाधिवक्ता के अभिमत के अनुसार 87:13 प्रतिशत फार्मूले को चुनौती दी गई है। एक वर्ग में उन याचिकाओं को रखा जाए जिनमें अभ्यर्थियों की नियुक्ति होल्ड करने को चुनौती दी गई है। वहीं पांचवें वर्ग में ओबीसी को उनकी जनसंख्या के अनुपात में आरक्षण की मांग वाला याचिकाओं को शामिल किया जाए। मंदिर की भूमि बेचने पर 20 दिसंबर तक मांगा जवाब हाई कोर्ट की जबलपुर बेंच के मुख्य न्यायाधीश सुरेश कुमार कैत व न्यायमूर्ति विवेक जैन की युगलपीठ ने मंदिर की भूमि बेचे जाने के रवैये पर जवाब-तलब कर लिया है। इस सिलसिले में राज्य शासन, प्रमुख सचिव, टीकमगढ़ के कलेक्टर, एसडीएम व व टीआई सहित अन्य को नोटिस जारी किए गए हैं। अगली सुनवाई 20 दिसंबर को नियत की गई है। जनहित याचिकाकर्ता खेमचंद अहिरवार की ओर से पक्ष रखा गया। दलील दी गई कि ग्राम बगौरा जिला टीकमगढ़ में ग्रामवासियों के सहयोग से हनुमान मंदिर की स्थापना की गई थी। हनुमान मंदिर शासकीय जमीन पर बनाया गया था। मंदिर लोगों की आस्था का प्रतीक है और बड़ी संख्या में लोग दर्शन करने आते हैं।

7 बच्चे और एक टीचर की स्कूल में खाना खाने के बाद बिगड़ी तबीयत, कलेक्टर और एसपी पहुंचे अस्पताल, जाना बच्चों का हाल

सिंगरौली सिंगरौली जिले के शासकीय पिपरा झांपी पूर्व माध्यमिक विद्यालय के 17 बच्चे और एक टीचर दोपहर के बाद अचानक बीमार हो गए। सभी बच्चे शरीर में दर्द और अजीब हरकत की शिकायत करने लगे। जिसके बाद उन्हें जिला चिकित्सालय में भर्ती करवाया गया है। मनोवैज्ञानिक डॉक्टर सहित कलेक्टर और एसपी अस्पताल पहुंचे और बच्चों का हाल-चाल लिया। फिलहाल सभी बच्चे खतरे से बाहर हैं। सिंगरौली कलेक्टर चंद्रशेखर शुक्ला ने बताया कि, दोपहर के बाद सूचना आई थी कि पिपरा झांपी स्कूल के कई बच्चे अचानक बीमार हो गए हैं। सभी बीमार 17 बच्चों को बैढ़न के ट्रामा सेंटर लाया गया है। डॉक्टरों की टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही है। सभी बच्चे ठीक हैं। जानकारी के अनुसार किसी अज्ञात डर की वजह से बच्चों की हालत खराब हुई है। वहीं इस मामले पर बच्चों के परिजन का कहना है कि, बच्चों को उन्होंने सुबह स्कूल भेजा था। अब बच्चे बता रहे हैं कि किसी महिला का उन्हें हाथ दिखा। जिसकी वजह से वह डर गए। वहीं कई बच्चियों तो यह कह रही है कि खाना खाने के बाद उनके शरीर पर अचानक दर्द होने लगा। बहरहाल देर शाम 5:00 तक 17 बच्चे और एक टीचर को अस्पताल लाया जा चुका है। और सभी का उपचार किया जा रहा है। लेकिन बच्चों के बीमार होने की असली वजह अब तक सामने नहीं आ पाई है। यह कोई अंधविश्वास है या कोई और वजह यह पूरी तरह से स्पष्ट नहीं है। घटना की सूचना मिलने के बाद एसपी कलेक्टर के अलावा स्थानीय विधायक और भारी संख्या में परिजन और स्थानीय लोग अस्पताल के बाहर मौजूद हैं।

खजुराहो अंतर्राष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल में पुरातत्वविद डॉ शिवकांत बाजपेयी सम्मानित

खजुराहो खजुराहो मे चल रहे 10 अंतरराष्ट्रिय फिल्म फेस्टिवल का शुभारंभ मध्य प्रदेश के राज्यपाल मांगुभाईपटेल ने खजुराहो क्षेत्र के सांसद विष्णुदत्त शर्मा, क्षेत्रीय विधायक अरविंद पटेरिया की उपस्थिति मे किया! इस शुभ अवसर के  दौरान भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के पुरातत्वविद डॉ शिवकांत बाजपेयी दीपक , अभिनेता दीपक परासर, मुकेश खन्ना, गायिका संजीवनी को सम्मानित किया गया! महापुरुषो के सोर्य को फिल्म मे दिखाने की बात कही. हजारों वर्ष पुराना खजुराहो के इतिहास से अपने संबोधन का प्रारम्भ किया! पुरातत्वविद डॉ शिवकांत बाजपेयी जो खासकर खजुराहो , पन्ना सहित अन्य जगह से मिलने वाले इतिहासिक तत्वों की पड़ताल मे अपने कार्यो को निरंतरता प्रदान कर रहे! पन्ना जिला सहित आस पास के अन्य जिलों मे लगातार विश्वधरोहर को सुरक्षित करने के प्रयास के साथ हजारों वर्ष से छिपे तथ्यो को उजागर करने मे लगे हुए है! जल्द ही कोई नया अध्याय मध्य प्रदेश ही नही अपितु विश्व के सामने रख सकते है.

US Parliament तक पहुंचा भोपाल गैस त्रासदी का मामला, ये प्रस्ताव हुआ पेश

भोपाल भोपाल गैस त्रासदी की 40वीं बरसी के अवसर पर अमेरिकी संसद में 3 दिसंबर को ‘राष्ट्रीय रासायनिक आपदा जागरूकता दिवस’ के रूप में मनाने का प्रस्ताव पेश किया गया। यह प्रस्ताव सीनेटर जेफ मर्कले और प्रतिनिधि सभा की सदस्य प्रमिला जयपाल और रशीदा तलैब द्वारा पेश किया गया। प्रस्ताव में 2001 में हुए भारत-अमेरिका समझौते का जिक्र किया गया है, जिसमें न्याय के लिए सहयोग की बात कही गई थी। यूनियन कार्बाइड के मालिक डॉव इंक से न्यायिक जिम्मेदारियों को पूरा करने की अपील भी की गई।   सुरक्षा की अनदेखी का खामियाजा सीनेटर जेफ मर्कले ने कहा, रासायनिक आपदाएं अक्सर कंपनियों द्वारा सुरक्षा की अनदेखी और मुनाफे को प्राथमिकता देने का नतीजा होती हैं। भोपाल त्रासदी ने लाखों जिंदगियों को तबाह कर दिया और इसका असर आज भी महसूस किया जा रहा है। यूनियन कार्बाइड की लापरवाही प्रस्ताव में यूनियन कार्बाइड और उसके सीईओ वॉरेन एंडरसन पर गैर-इरादतन हत्या के आरोपों का जिक्र किया गया। भारतीय अदालत में चल रही कार्यवाही के बावजूद, कंपनी और उसके प्रतिनिधि अदालत में पेश नहीं हुए।   मुआवजे की मांग प्रमिला जयपाल ने कहा कि यूनियन कार्बाइड और डाउ केमिकल को पीड़ितों को मुआवजा देना चाहिए। रशीदा तलैब ने कहा, डाउ ने यूनियन कार्बाइड का अधिग्रहण करते वक्त त्रासदी की जिम्मेदारी ली थी। 40 साल बाद भी पीड़ित न्याय की आस लगाए बैठे हैं। अब डाउ को नुकसान की भरपाई करनी ही होगी।   जागरूकता दिवस का उद्देश्य वहीं सांसदों ने त्रासदी पीड़ितों के संघर्षों की सराहना की और इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए जागरूकता फैलाने पर जोर दिया। इस पहल का उद्देश्य रासायनिक आपदाओं के खतरों के प्रति लोगों को जागरूक करना और मानवाधिकारों की रक्षा को प्राथमिकता देना है। यह अमेरिका की विदेश नीति का एक अहम हिस्सा है। भोपाल गैस त्रासदी पर एक नजर     भारतीय इतिहास में 2-3 दिसंबर 1984 की रात एक ऐसी भयावह घटना के रूप में दर्ज है, जिसे भुला पाना मुश्किल है। यह घटना भोपाल गैस त्रासदी थी, जिसने मानवता पर अमिट छाप छोड़ी। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में स्थित यूनियन कार्बाइड इंडिया लिमिटेड (यूसीआईएल) के कीटनाशक संयंत्र से लीक हुई मिथाइल आइसोसाइनेट (एमआईसी) गैस ने हजारों लोगों की जान ले ली और लाखों लोगों को शारीरिक और मानसिक पीड़ा पहुंचाई। इस औद्योगिक दुर्घटना को दुनिया की सबसे भीषण औद्योगिक दुर्घटनाओं में से एक माना जाता है। इस घटना में करीब 30 हजार लोग मारे गए भोपाल गैस त्रासदी के तत्काल प्रभाव से एक लाख से ज़्यादा लोग प्रभावित हुए थे। हालांकि, इस त्रासदी में मरने वालों की संख्या पर अभी भी विवाद है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस घटना में लगभग 30  हजार लोग तत्काल मारे गए थे। जबकि अन्य मानवाधिकार संगठनों और विशेषज्ञों का कहना है कि यह संख्या इससे कहीं ज्यादा थी। कुछ रिपोर्ट्स में यह संख्या 8 हजार से 10 हजार बताई गई है। गैस के प्रभाव से न केवल मौतें हुईं, बल्कि हजारों लोग गंभीर रूप से घायल भी हुए। इनमें से कई लोग शारीरिक और मानसिक रूप से प्रभावित हुए और आज भी पीड़ित हैं। जब हम दीर्घकालिक प्रभावों पर विचार करते हैं तो यह आंकड़ा और भी बढ़ जाता है। त्रासदी के बाद लंबे समय तक कई लोग सांस की बीमारियों, कैंसर, आँखों में जलन, त्वचा के घावों और मानसिक विकारों से पीड़ित रहे। इसके अलावा, गर्भवती महिलाओं ने विकलांग बच्चों को जन्म दिया और अजन्मे बच्चों के स्वास्थ्य पर भी गंभीर असर पड़ा।

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