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रातपानी एमपी का 8वां टाइगर रिजर्व बन गया है. सरकार ने इसका नोटिफिकेशन जारी कर दिया

भोपाल मध्य प्रदेश के बड़ी खुशखबरी है. राज्य को एक और टाइगर रिजर्व मिल गया है. रातापानी प्रदेश का 8वां टाइगर रिजर्व होगा. सरकार ने इसका नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया है. इस टाइगर रिजर्व में 90 बाघ हैं. नेशनल टाइगर कंजर्वेशन ऑथोरिटी ने साल 2022 में रातापानी को टाइगर रिजर्व बनाने की मंजूरी दी थी. इसके बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस साल जून में रातापानी को टाइगर रिजर्व के रूप में नोटिफाई करने के निर्देश दिए थे. सीएम यादव ने इसे पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में मील का पत्थर कहा है. जानकारी के मुताबिक, रातापानी टाइगर रिजर्व का फोरेस्ट एरिया 1271.465 स्क्वेयर किमी है. इसमें से 763.812 स्क्वेयर किमी कोर और 507.653 स्क्वेयर किमी बफर एरिया होगा. इस टाइगर रिजर्व में 3 हजार से ज्यादा जानवर हैं. इसमें 90 बाघ, 70 तेंदुए, 500 से ज्यादा सांभर, 600 से ज्यादा चीतल, 8 भेड़िये हैं. इसका कोर एरिया भोपाल, रायसेन और सीहोर में होगा. बता दें, इस टाइगर रिजर्व में 9 गांव शामिल होंगे. इसके बनने से गांववालों के अधिकारों में सरकार कोई बदलाव नहीं करेगी. इससे टूरिज्म बढ़ेगा, रोजगार पैदा होंगे. इसके अलावा केंद्र सरकार से बजट मिलने से एनिमल मैनेजमेंट और बेहतर होगा. इसके अलावा यहां ईको सिस्टम डेवलप होगा. इससे भी गांववालों को लाभ मिलेगा. रातापानी टाइगर रिजर्व बनने से मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल की पहचान ही बदल जाएगी. लंबे समय से पेंडिंग था मामला यह फैसला काफी समय से लंबित था। 2008 में NTCA से सैद्धांतिक मंजूरी मिलने के बाद भी राज्य सरकार ने टाइगर रिजर्व बनाने में देरी की थी। याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट से राज्य सरकार को अधिसूचना प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश देने का आग्रह किया था। उन्होंने इंसानों और जानवरों के बीच बढ़ते संघर्ष और बाघों की आबादी की रक्षा की जरूरत का हवाला दिया था। इस फैसले पर खुशी जाहिर करते हुए अजय दुबे ने कहा कि मैं सरकार के फैसले से बहुत खुश हूं। इस अधिसूचना को खनन माफिया और क्षेत्र में निहित स्वार्थ रखने वाले लोग रोक रहे थे। रायसेन और सीहोर जिले में है स्थित रातपानी वन्यजीव अभ्यारण्य रायसेन और सीहोर जिलों में स्थित है। यह मध्य प्रदेश में बाघों के एक महत्वपूर्ण आवास का हिस्सा है। हाल के वर्षों में, सतपुड़ा पर्वत श्रृंखला से बाघ इस अभ्यारण्य और आसपास के वन क्षेत्रों में आने लगे हैं। बाघों के इन इलाकों में आने के बाद, 2007 में राज्य सरकार ने रतपानी और सिंघोरी अभ्यारण्यों को टाइगर रिजर्व घोषित करने की प्रक्रिया शुरू की थी। 2008 में मिल गई थी मंजूरी NTCA ने 2008 में रिजर्व के लिए सैद्धांतिक मंज़ूरी दे दी थी। राज्य वन विभाग को रिजर्व की सीमाओं और कोर क्षेत्रों के लिए विस्तृत प्रस्ताव प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया था। इसके बावजूद, अंतिम अधिसूचना प्रक्रिया में कई देरी हुई। 2012 में, NTCA ने राज्य सरकार को रिमाइंडर जारी किए, जिसमें तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता पर ज़ोर दिया गया था। देरी की वजह से बढ़ रहे थे बाघ और इंसानों के संघर्ष PIL में याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि रतपानी टाइगर रिजर्व को अंतिम रूप देने में देरी के कारण बाघ-मानव संघर्ष में वृद्धि हुई है। बाघ भोजन की तलाश में आबादी वाले इलाकों में भटक रहे हैं। अतिक्रमण और आवास क्षरण के कारण अभ्यारण्य के भीतर पर्याप्त शिकार की कमी ने इस स्थिति को और बदतर बना दिया है। 2011 में, स्थानीय रिपोर्टों ने भोपाल के बाहरी इलाके में बाघों और तेंदुओं की उपस्थिति पर प्रकाश डाला था। बढ़ती मांसाहारी आबादी का समर्थन करने के लिए ‘शिकार आधार’ की मांग की गई थी। संघर्ष तब एक दुखद मोड़ पर पहुंच गया जब 2012 में, एक बाघ भोजन की तलाश में मानव बस्तियों में भटक गया और ग्रामीणों द्वारा उसे बेरहमी से मार डाला गया। NTCA ने तुरंत इस स्थिति का संज्ञान लिया, लेकिन राज्य द्वारा रिजर्व अधिसूचना को पूरा करने में विफलता ने इस क्षेत्र को असुरक्षित छोड़ दिया। बफर जोन में कई बुनियादी परियोजनाओं को मंजूरी दी इस मुद्दे को और जटिल बनाते हुए, मध्य प्रदेश के राज्य वन्यजीव बोर्ड (SWB) ने रिजर्व के प्रस्तावित बफर ज़ोन में कई बड़े बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को मंज़ूरी दे दी। इनमें कोयला आधारित थर्मल पावर प्लांट, 765kV ट्रांसमिशन लाइन और एक रेलवे लाइन शामिल हैं। ये मंजूरियां बाघों के आवास पर संभावित प्रभाव पर विचार किए बिना दी गई थीं। उच्च न्यायालय में दायर PIL ने इन मुद्दों की ओर ध्यान आकर्षित किया। अदालत से राज्य सरकार को तुरंत रिजर्व को अधिसूचित करने का निर्देश देने की मांग की गई। याचिकाकर्ताओं ने SWB द्वारा अनुमोदित परियोजनाओं को निलंबित करने की भी मांग की जो प्रस्तावित टाइगर रिजर्व के कोर और बफर क्षेत्रों को नुकसान पहुंचा सकती हैं। याचिका के जवाब में, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने कहा कि NTCA की वैधानिक मंज़ूरी और संरक्षण की ज़रूरत के बावजूद, राज्य के अधिकारियों ने अभ्यारण्य के नाज़ुक पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा के लिए पर्याप्त तेज़ी से काम नहीं किया। अदालत ने राज्य सरकार से टाइगर रिजर्व की अधिसूचना को अंतिम रूप देने के लिए तत्काल कदम उठाने का आग्रह किया था। प्रबंधन एक चुनौती है उन्होंने कहा है कि अधिसूचना एक महत्वपूर्ण पहला कदम है, लेकिन अब असली चुनौती रिजर्व के प्रभावी प्रबंधन को सुनिश्चित करने में है। इसमें स्पष्ट सीमाएं स्थापित करना, शिकार को रोकना और वन्यजीव-अनुकूल प्रथाओं को बढ़ावा देने के लिए स्थानीय समुदायों के साथ जुड़ना शामिल है। सीएम यादव ने कही ये बात इस टाइगर रिजर्व के बनने के बाद सीएम मोहन यादव ने सोशल मीडिया पर लिखा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी सोच और कुशल मार्गदर्शन में मध्यप्रदेश ने पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक और मील का पत्थर स्थापित किया है. रायसेन जिले में स्थित रातापानी को अब प्रदेश का 8वां टाइगर रिजर्व घोषित किया गया है. यह निर्णय न केवल बाघों की सुरक्षा को सुदृढ़ करेगा, बल्कि जैव विविधता संरक्षण और पर्यावरण संतुलन को भी नई दिशा देगा.

प्रदेश का आठवां टाइगर रिजर्व क्षेत्र बना रातापानी – मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि रातापानी सैंक्चुअरी टाइगर रिजर्व बफर एरिया घोषित होने से मध्यप्रदेश अब वास्तविक रूप में टाइगर स्टेट बन गया है। मध्यप्रदेश के लिये यह बहुत बड़ी सौगात है। केन्द्र सरकार के अनुमोदन के बाद रातापानी, मध्यप्रदेश का 8वां टाइगर रिजर्व क्षेत्र घोषित किया गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को धन्यवाद देते हुए कहा कि उन्होंने वन्य जीवों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए मध्यप्रदेश को हमेशा प्राथमिकता दी है, जिसके परिणामस्वरूप श्योपुर के कूनो में चीते और उसके बाद रातापानी को टाइगर बफर क्षेत्र का अनुमोदन मिला है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि रातापानी सैंक्चुअरी टाइगर रिजर्व बफर जोन की विशेष बात यह है कि यह देश का एकमात्र ऐसा टाइगर रिजर्व है जो राजधानी (भोपाल) के बेहद नजदीक है। इससे यह माना जा सकता है कि राजधानी इस अभयारण्य का हिस्सा है। इस अभयारण्य के दायरे में रायसेन, भोपाल और सीहोर जिले का क्षेत्र भी आएगा। यहां लगभग 90 से ज्यादा बाघ और अन्य वन्य जीव भी हैं। उन्होंने कहा कि रातापानी को टाइगर रिजर्व घोषित करने से पर्यटन को प्रोत्साहन मिलेगा। टाइगर रिजर्व का संपूर्ण कोर क्षेत्र रातापानी अभयारण्य की सीमा के भीतर है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ग्रामीणों के वर्तमान अधिकार में कोई परिवर्तन नहीं होगा बल्कि स्थानीय ग्रामीणों को पर्यटन से रोजगार के नये अवसर मिलेंगे और उन्हें आर्थिक रूप से लाभ भी मिलेगा। मध्यप्रदेश में सबसे ज्यादा टाइगर भी हैं और टाइगर पार्क भी हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि रातापानी टाइगर रिजर्व घोषित होने से राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण, केंद्र सरकार एवं राज्य द्वारा आवंटित बजट से वन्य-प्राणियों का और बेहतर ढंग से प्रबंधन किया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि इससे रातापानी को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी तथा राजधानी भोपाल की पहचान टाईगर कैपिटल के रूप में होगी।  

वार्ड क्रमांक 43 में 1 करोड़ की लागत से होने वाले निर्माण का विधायक, महापौर एवं निगम अध्यक्ष ने किया भूमिपूजन

 सिंगरौली नगर पालिक निगम सिंगरौली के वार्ड क्रमांक 43 में 1 करोड़ 2 लाख की लागत से निर्मित होने वाली पीसीसी नाली, पीसीसी सड़क, एवं सामुदायिक भवन के कार्य का सिंगरौली विधानसभा के विधायक श्री राम निवास शाह मुख्य अतिथि एवं नगर पालिक निगम सिंगरौली की महापौर श्रीमती रानी अग्रवाल, नगर निगम अध्यक्ष श्री देवेश पाण्डेंय , मेयर इंन काउसिल के सदस्य राम गोपाल पाल के विशिष्ट अतिथि में विधवत पूजा अर्चन कर किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्ष वार्ड पार्षद एवं मेयर इंन काउसिल के सदस्य श्री खुर्शिद आलम ने की। इस अवसर पर सिंगरौली विधानसभा के विधायक श्री राम निगम शाह ने कहा कि  नगर  विकास के लिए नगर  सरकार और हम सब मिलकर नगर के चौमुखी विकास के लिए काम कर रहे हैं। नगर का कोई भी हिस्सा नगर से अलग नहीं है।नगर का विकास व्यवस्थित विकास योजना बनाकर काम करेंगे। निर्माण कार्य में गुणवत्ता का ध्यान रखा जाए किसी भी प्रकार की गड़बड़ी न हो इसका पूरा ध्यान रखा जाएगा‌। उन्होने कहा कि नगर के विकास में किसी भी प्रकार की कमी नही होने दी जायेगी। हमारी सरकार का संकल्प है कि सिंगरौली का सिंगापुर बनाना है इसी उद्देश्य को लेकर हमे कार्य करना होगा। इस अवसर पर नगर निगम की महापौर श्रीमती रानी अग्रवाल ने कहा कि हमे नगर का समुचित विकास हो इसकी सदैव चिंता हर समय रहती है। उन्होंने कहा निगम के क्षेत्र के सभी वार्डो का चहुमुखी विकास हो इसके लिए कार्य योजना बनाकर कार्य किया जा रहा है। आज वार्ड क्रमांक 43 में 1 करोड़ 2 लाख की लागत से निर्मित होने वाली पीसीसी नाली, सड़क एवं सामुदायिक भवन के निर्माण की सौगत वार्डवासियों को मिली है। इसी प्रकार निगम क्षेत्र के प्रत्येक वार्ड में विकास के कार्य कराये जायेगे।  नगर निगम के अध्यक्ष ने वार्डवासियों को संबोधित करते हुये कि आज आप लोगो को नाली, सड़क एवं सामुदायिक भवन की सौगात मिली है इसके लिए मै आप सब का अभिनंदन करता हू। उन्होंने कहा कि कहा कि शहरी क्षेत्र में विकास कार्यों को तेजी से करवाने के लिए संबंधित विभागों के अधिकारियों को निर्देशित किया गया है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में बिजली, पानी, शिक्षा सहित सभी मूलभूत आवश्यकताओं के लिए तेजी से विकास कार्य करवाएं जाएंगे।इस असवर पर नगर निगम के सहायक यंत्री प्रवीण गोस्वामी, उपयंत्री विष्णुपाल सिंह, अक्षत उपाध्याय सहित वार्डवासी उपस्थित रहे।

MP के कई जिलों में ठंड का कहर, नौगांव के बाद राजगढ़ मध्य प्रदेश का दूसरा सबसे ठंडा जिला

 भोपाल  मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों में ठंड का कहर देखने को मिल रहा है। रविवार-सोमवार की रात नौगांव के बाद राजगढ़ की मप्र में सबसे ठंडी रात के रूप में दर्ज किया गया है। राजगढ़ का न्यूनतम तापमान 8.0 डिग्री रिकॉर्ड किया गया है। सर्दी बढ़ने के कारण कलेक्टर ने कक्षा पहली से आठवीं तक के स्कूल खुलने का समय सुबह 9 बजे से कर दिया। उल्लेखनीय है कि पिछले तीन-चार दिनों से जिले में सर्द हवाएं चल रही हैं। इस कारण न सिर्फ दिन, बल्कि रातें भी सर्द हो रही है। नवंबर के अंतिम सप्ताह से ही जिले में सर्दी अपना असर दिखा रही है। इस सीजन में दूसरी बार 8 डिग्री तक तापमान गिर चुका है। जबकि शनिवार-रविवार की रात सबसे कम सात डिग्री तापमान दर्ज किया था। जो इस सीजन का सबसे कम तापमान था। इसके बाद रविवार-सोमवार की दरमियानी रात को तापमान में एक डिग्री की बढ़ोतरी तो हुई है, लेकिन फिर भी सर्दी शबाब पर रही। इस बार राजगढ़ मप्र का दूसरा सबसे ठंडा जिला रहा है। मप्र में सबसे कम तापमान नौगांव में 7.8 डिग्री दर्ज किया गया, इसके बाद राजगढ़ का 8.0 डिग्री तापमान रिकॉर्ड किया गया है। राजगढ़ जिले में सर्दी को देखते हुए कलेक्टर डॉ. गिरीश कुमार मिश्रा द्वारा स्कूलों के समय में बदलाव किया गया है। भोपाल में दो दिन से पारा 11.5 डिग्री के करीब ठहरा राजधानी भोपाल में दो दिन से पारा 11.5 डिग्री के करीब ठहरा सागर। दो दिन से न्यूनतम पारा 11 डिग्री के पास ठहरा हुआ है। दिन और रात का तापमान सामान्य से कम होने के कारण ठंडी का असर बढ़ा है। दिन का तापमान 26 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया है जो सामान्य से 2 डिग्री कम है। वहीं रात का पारा 11.5 डिग्री पर लुढ़ककर आ गया जो सामान्य से 3 डिग्री सेल्सियस कम है। पारे में गिरावट आने से दिन और रात के समय कंपकपा देने वाली सर्दी पड़ रही है। अगले 48 घंटे कैसा रहेगा मौसम मौसम विभाग के अनुसार मध्यप्रदेश में अगले 48 घंटे बाद मौसम में परिवर्तन आने का अनुमान है। कड़ाके की ठंड का दौर शुरू हो सकता है। बर्फीली हवाओं से पूरा प्रदेश ठिठुर सकता है। उत्तरी हिस्से में इसका ज्यादा असर देखने को मिलेगा। उत्तर-पश्चिमी भारत के ऊपर एक वेस्टर्न डिस्टरबेंस एक्टिव है। इस कारण से पहाड़ों में बर्फबारी होगी और उत्तरी हवाएं मध्यप्रदेश में तेजी से आएंगी। जिससे प्रदेश में दिन और रात में ठंड बढ़ने का अनुमान है। मौसम वैज्ञानिक रितेश कुमार के मुताबिक, अभी तमिलनाडु में चक्रवात सक्रिय है, जिसके प्रभाव से आसमान पर हल्के बादल छाए हुए हैं। इससे तापमान में बढ़ोत्तरी होना थी, लेकिन जम्मू कश्मीर में बारिश और बर्फबारी होने से उत्तरी हवाएं तेज हो गई हैं। इससे अगले तीन दिन तक तापमान में एक से दो डिसे की मामूली गिरावट आएगी।

15 दिसंबर 2024 तक जारी रहेगा अभियान, नागरिक उठाएं लाभ

राजस्व महा अभियान 3.0 अनूपपुर  कलेक्टर श्री हर्षल पंचोली के मार्गदर्शन में जिले में राजस्व महा अभियान 3.0 के तहत राजस्व प्रकरणों का निराकरण प्राथमिकता के साथ राजस्व विभाग के मैदानी अमले द्वारा किया जा रहा है। इस अभियान के तहत राजस्व अमला गाँव-गाँव जाकर किसानों की समस्याओं को सुन रहे हैं और मौके पर ही निराकरण सुनिश्चित कर रहे हैं। अभियान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसानों को राजस्व संबंधी कार्यों के लिए बार-बार तहसील कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।       जिले में राजस्व महा अभियान के तहत सीमांकन के लक्ष्य के विरुद्ध शत-प्रतिशत प्रकरणों का किया जा चुका है। अभियान के तहत लक्ष्य के विरुद्ध नामांकन के 647 प्रकरणों, बटंवारा के 253 प्रकरणों, नक्शा में बटांकन के 15922 प्रकरणों, अभिलेख दुरुस्तगी के 16 प्रकरणों, आधार से आरओआर की लिंकिंग के 5208 प्रकरणों, फॉर्मर रजिस्ट्री के 11169 प्रकरणों का निराकरण तथा आरसीएमएस में दर्ज नवीन प्रकरणों में से 223 प्रकरणों का निराकरण किया जा चुका है। राजस्व महा अभियान 15 दिसंबर 2024 तक जारी रहेगा। नागरिक इस अवसर का लाभ उठा सकते हैं।

भिंड में एक अनोखा शादी का निमंत्रण पत्र सोशल मीडिया पर छाया, कुरीति के खिलाफ उठाई आवाज

भिंड ज़िले में एक अनोखा शादी का निमंत्रण पत्र सोशल मीडिया पर छाया हुआ है। इस कार्ड पर लिखे संदेश ने सबका ध्यान खींचा है। खनेता धाम के महंत के भाई के बेटे सत्यदीप की शादी में मेहमानों से हथियार ना लाने की अपील की गई है। यह अपील चंबल इलाके में हथियारों के प्रदर्शन और हर्ष फायरिंग की परंपरा को चुनौती देती है। भिंड-मुरैना में 56,000 से ज़्यादा लाइसेंसी हथियार हैं, जिन्हें लेकर घूमना यहां स्टेटस सिंबल माना जाता है। ख़ासकर शादियों में हथियार लाना और हर्ष फायरिंग करना आम है। हालांकि, इससे कई दुर्घटनाएं भी हुई हैं। प्रशासन के प्रयासों के बावजूद, इस प्रथा पर रोक नहीं लग पाई है। कुरीति के खिलाफ उठाई आवाज सत्यदीप के परिवार ने इस कुरीति के खिलाफ आवाज़ उठाई है। उन्होंने अपने शादी के कार्ड पर एक संदेश छपवाया है। इस संदेश में लिखा है, ‘करबद्ध निवेदन है- हमारे यहां दो परिवारों के बीच प्रेम के संबंध होने जा रहे हैं, लड़ाई झगड़ा नहीं कृपया शादी समारोह में हथियार लेकर ना आए।’ लोग कर रहे सराहना यह संदेश सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। लोग इस पहल की सराहना कर रहे हैं। खनेता धाम, गोहद इलाके का एक प्रसिद्ध मंदिर है। इस मंदिर के महंत के परिवार द्वारा उठाया गया यह कदम समाज के लिए एक मिसाल है। चंबल में हथियारों का चलन चंबल क्षेत्र में हथियारों का चलन काफी पुराना है। लोग इसे अपनी शान और शौकत से जोड़कर देखते हैं। शादियों जैसे खुशी के मौकों पर हर्ष फायरिंग करना आम बात है। लेकिन कई बार यह खुशी मातम में बदल जाती है। हर्ष फायरिंग की वजह से कई लोगों की जान जा चुकी है और कई लोग घायल हुए हैं। प्रशासन ने इस पर रोक लगाने की कोशिश की है, लेकिन पूरी तरह से सफलता नहीं मिली है। जागरूकता फैलाने की कोशिश सत्यदीप के परिवार ने इस सामाजिक बुराई के खिलाफ एक अनूठा कदम उठाया है। इससे लोगों में जागरूकता फैलाने की कोशिश की है। उम्मीद है कि उनकी यह पहल रंग लाएगी और लोग हथियारों के प्रदर्शन से दूर रहेंगे।  

72 हजार करोड़ के प्रोजेक्ट से दो राज्यों का होगा कायापलट, बनेंगे 21 बांध-बैराज

भोपाल केंद्र सरकार के सहयोग से बनने वाला पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक प्रोजेक्ट देश के दो प्रमुख राज्यों राजस्थान और मध्यप्रदेश की कायापलट कर देगा। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री, मध्यप्रदेश और राजस्थान के मुख्यमंत्री तथा दोनों राज्यों के अपर मुख्य सचिव व सचिवों की उपस्थिति में 28 जनवरी को इस प्रोजेक्ट का डीपीआर बनाने के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए थे। 72 हजार करोड़ के इस प्रोजेक्ट में कुल 21 बांध, बैराज और बैलेंसिंग रिजर्वायर आदि बनाए जाएंगे। प्रोजेक्ट अगले 5 साल में पूर्ण कर लिया जाएगा। इससे संबंधित एक अहम अपडेट सामने आया है।  पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक प्रोजेक्ट में मालवा इलाके के सभी घटकों का काम अब पहले चरण में ही होगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट के प्रयासों के बाद यह संशोधन किया गया है। पहले सिंचाई और पेयजल संबंधित घटकों का निर्माण फेस-2 में रखा गया था। संशोधन के बाद मालवा को सिंचाई, पेयजल और औद्योगिक प्रयोजन के लिए योजना के पहले चरण में ही पर्याप्त पानी उपलब्ध हो जाएगा। संशोधित पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक प्रोजेक्ट से प्रदेश के चंबल और मालवा इलाके के लाखों किसानों का जीवन बदल जाएगा। उन्हें न केवल सिंचाई और पेयजल के लिए पर्याप्त पानी मिलेगा बल्कि यहां पर्यटन और उद्योग को भी बढ़ावा मिलेगा। प्रोजेक्ट में मध्यप्रदेश की 17 परियोजनाएं और राजस्थान की पूर्वी राजस्थान नहर परियोजना शामिल है। प्रोजेक्ट पूरा हो जाने के बाद मध्यप्रदेश के करीब 6.11 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिलेगी। पेयजल और उद्योगों के लिए 172 मि.घ.मी. पानी भी मिलेगा। प्रदेश के करीब 40 लाख परिवार लाभान्वित होंगे। प्रोजेक्ट में मध्यप्रदेश से निकलनेवाली वाली पार्वती, कूनो, कालीसिंध, चंबल, क्षिप्रा और अन्य सहायक नदियों के पानी का अधिकतम उपयोग किया जाएगा। प्रदेश में प्रोजेक्ट में कुल 35 हजार करोड़ रूपए के काम प्रस्तावित हैं। पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक प्रोजेक्ट के अंतर्गत श्रीमंत माधवराव सिंधिया सिंचाई कॉम्पलेक्स में 4 बांध बनेंगे। ये बांध कटीला, सोनपुर, पावा और धनवाड़ी में बनाए जाएंगे। इसके साथ ही श्यामपुर, नैनागढ में 2 बैराज बनेंगे। कुम्भराज कॉम्पलेक्स में 2 बांध तथा 7 अन्य बांध भी इसमें शामिल हैं। गांधी सागर बांध की अप-स्ट्रीम में चंबल, क्षिप्रा और गंभीर नदियों पर छोटे-छोटे कई बांधों का निर्माण भी किया जाएगा। प्रोजेक्ट से एमपी के मुरैना, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, भिंड, श्योपुर, इंदौर, उज्जैन, धार, आगर-मालवा, शाजापुर, देवास एवं राजगढ़ को लाभ होगा। इन 13 जिलों में सिंचाई, पेयजल, और औद्योगिक प्रयोजन के लिए भरपूर पानी मिल सकेगा। प्रोजेक्ट में मध्यप्रदेश और राजस्थान के बीच मौजूदा चंबल दायीं मुख्य नहर और मध्यप्रदेश में CRMC सिस्टम को अंतिम छोर तक आधुनिक बनाया जाएगा। इससे प्रदेश के श्योपुर, मुरैना, भिंड जिलों को आवंटित पानी मिल सकेगा। अधिकारियों के अनुसार संशोधित पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक प्रोजेक्ट में मध्यप्रदेश की श्रीमंत माधवराव सिंधिया सिंचाई कॉम्पलेक्स की 6 परियोजनाओं की डीपीआर तैयार हो चुकी है।इन्हें राष्ट्रीय जल विकास अभिकरण को भेजा जा चुका है। शेष डीपीआर की प्रक्रिया चल रही है।

राज्यपाल पटेल भोपाल गैस त्रासदी श्रद्धांजलि सभा में हुए शामिल, त्रासदी में दिवंगतों को दी मौन श्रद्धांजलि

भोपाल राज्यपाल मंगुभाई पटेल मंगलवार को भोपाल गैस त्रासदी की 40वीं बरसी पर दिवंगतों की स्मृति में सेंट्रल लाइब्रेरी बरकतउल्ला भवन में आयोजित श्रद्धांजलि एवं सर्वधर्म सभा में शामिल हुए। सभा में दिवंगतों की स्मृति में विभिन्न धर्माचार्यों द्वारा पाठ किया गया। राज्यपाल पटेल और उपस्थितजनों ने सभा में दिवंगतों की स्मृति में दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि भी दी। श्रद्धांजलि सभा में जनजातीय कार्य, भोपाल गैस त्रासदी एवं पुनर्वास मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास सारंग, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण, राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर, महापौर श्रीमती मालती राय, मुख्य सचिव अनुराग जैन, प्रमुख सचिव संदीप यादव सहित अन्य गणमान्य नागरिक भी मौजूद रहें।  

भगवान श्रीमहाकाल से प्रभावितों के उत्तम स्वास्थ्य के लिए की कामना

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल गैस त्रासदी की 40वीं बरसी पर दिवंगतों को भावभीनी श्रद्धांजलि दीं। उन्होंने कहा कि दुनिया की इस भीषण त्रासदी के दिन मैं भोपाल प्रवास पर ही था। इसकी तकलीफ सिर्फ वो ही समझ सकता है, जिसने इसे वास्तविक रूप से भोगा है। उन्होंने कहा कि मैंने स्वयं जाकर गैस प्रभावित क्षेत्रों में भ्रमण किया था। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गैस त्रासदी में प्रभावितों के अच्छे स्वास्थ्य के लिए भगवान महाकाल से प्रार्थना की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि दुर्घटना में अनेक लोग असमय काल के ग्रास में समा गए, जो बचे वो किसी न किसी रूप से एमआईसी गैस के दुष्प्रभावों से कई साल पीड़ित रहे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने ईश्वर से दिवंगत एवं पीड़ितों के प्रति अपनी संवेदनाएं एवं सहानुभूति व्यक्त की।  

मध्य प्रदेश में आज से धान खरीदी शुरू, किसानों को मिलेगा उपज का इतना दाम

भोपाल मध्य प्रदेश में खरीफ विपणन मौसम 2024-25 के लिए धान की खरीदी 2 दिसंबर से शुरू हो जाएगी. धान कॉमन का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2300 और धान ग्रेड-ए का 2320 रुपये प्रति क्विंटल है. किसानों की एफएक्यू गुणवत्ता की उपज इन्हीं दरों पर खरीदी की जाएगी. धान की खरीदी 3  दिसंबर से 20 जनवरी 2025 तक किया जाएगा. उपार्जन सोमवार से शुक्रवार तक होगा. 45 लाख मीट्रिक टन होगी धान की खरीदी केन्द्र सरकार की ओर से निर्धारित मात्रा के अनुसार, समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी 45 लाख मीट्रिक टन की जाएगी. गोदाम स्तर पर खाद्यान्न की गुणवत्ता का परीक्षण उपार्जन एजेंसी के गुणवत्ता सर्वेयर द्वारा स्टेक लगाने के पहले किया जाएगा. वहीं परिवहनकर्ता की ओर से उपार्जित खाद्यान्न का परिवहन समय-सीमा में नहीं करने पर पेनाल्टी की व्यवस्था साप्ताहिक रूप से की जाएगी. कब तक होगी धान की खरीदी मध्य प्रदेश सरकार धान की खरीदी 2 दिसंबर से 20 जनवरी 2025 तक करेगी. वहीं किसान सोमवार से शुक्रवार तक केंद्र में धान बेच सकते हैं. अवैध बिक्री रोकने के लिए कलेक्टर को दिए गए निर्देश समर्थन मूल्य पर धान की खरीदी के बाद भुगतान कृषक पंजीयन के दौरान आधार नम्बर से लिंक बैंक खाते में किया जाएगा. धान उपार्जन अवधि के दौरान पड़ोसी राज्यों से उपार्जन केन्द्र पर लायी जाने वाली उपज की अवैध बिक्री को रोकने के लिए सभी जिले के कलेक्टर को निर्देश दिए गए हैं. ऑनलाइन निगरानी की व्यवस्था बनाई गई खाद्य नागरिक आपूर्ति विभाग के अधिकारियों ने बताया कि सामान्य किस्म की धान 2,300 और ग्रेड ए धान का समर्थन मूल्य 2,320 रुपये प्रति क्विंटल पर खरीदी जाएगी। गुणवत्तायुक्त उपज का ही उपार्जन हो, इसके लिए ऑनलाइन निगरानी की व्यवस्था बनाई गई है। उपज में कचरा मिला तो उसे लौटा देंगे राज्य और जिला स्तर पर उपार्जन पोर्टल पर दर्ज होने वाली उपज संबंधी जानकारी के आधार पर आकलन किया जाएगा। यदि उपज में कचरा, टूटन या नमी अधिक होती है तो उसे लौटा दिया जाएगा। जब किसान उपज ठीक कराकर निर्धारित मापदंड के अनुसार लाएगा, तब ही उसे स्वीकार किया जाएगा। दरअसल, धान किसान से लेने के बाद उसे चावल बनाने के लिए मिलर्स को दी जाती है। उस समय कई बार नमी, कचरा और टूटन अधिक होने की शिकायत सामने आती है। ऐसी उपज मिलर्स नहीं लेते हैं क्योंकि प्रति क्विंटल धान से 67 किलोग्राम चावल लिया जाता है। जब यह मात्रा नहीं मिलती है तो मिलर्स को नुकसान होता है। यही कारण है कि इस बार गुणवत्तायुक्त उपज की खरीदी पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। सभी उपार्जन केंद्रों पर नमी की जांच करने के लिए नमी मापक यंत्र (मायश्चर मीटर) रखे जाएंगे। मिलिंग भी समय पर होगी नमी जांचने के बाद धान लेकर सीधे उपार्जन केंद्र से ही मिलिंग के लिए मिर्लस को दी जाएगी। इससे परिवहन और भंडारण व्यय में कमी आने के साथ मिलिंग भी समय पर होगी। भारतीय खाद्य निगम ने मिलिंग के लिए अंतिम सीमा जून रखी है। मंत्री, प्रमुख सचिव और आयुक्त करेंगे औचक निरीक्षण उपार्जन के दौरन या उसके बाद होने उपार्जन में होने वाली गड़बड़ियों को रोकने के लिए खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री गोविंद सिंह राजपूत, प्रमुख सचिव रश्मि अरुण शमी और आयुक्त सिबि चक्रवर्ती औचक निरीक्षण करेंगे। किसी भी स्तर पर लापरवाही या अनियमितता पाए जाने पर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उड़नदस्ते भी जिला स्तर पर गठित होंगे, जो उपार्जन केंद्रों का निरीक्षण करेंगे। किसानों को समाधान के लिए किए गए ये व्यवस्था पंजीयन और उपार्जन में आने वाली तकनीकी समस्याओं के समाधान के लिए जिले में और राज्य स्तर पर भी तकनीकी सेल का गठन किया गया है. जिला स्तरीय समिति उपार्जन संबंधी सभी विवादों का अंतिम निराकरण और उपार्जित खाद्यान्न की गुणवत्ता की निगरानी करेगी. इसके अलावा राज्य स्तर पर एक कंट्रोल-रूम भी स्थापित किया गया है. अगर आप किसी भी जानकारी के लिए कंट्रोल रूम में संपर्क करना चाहते हैं इस नंबर 0755-2551471 पर कॉल कर हैं. ये उपार्जन अवधि में सुबह 9 से रात 7 बजे तक संचालित रहेगा.

पन्ना में 4 दिसंबर से शुरू होगा हीरों का मेला, नीलामी में करीब 4.17 करोड़ मूल्य के127 Diamond

पन्ना  हीरा नगर पन्ना में एक बार फिर हीरों का बाजार सजने जा रहा है। इस साल भी, हर वर्ष की तरह, पन्ना के कलेक्ट्रेट भवन में 4 दिसंबर से 3 दिन तक हीरों की नीलामी का आयोजन किया जाएगा। इस नीलामी में देशभर से हीरा व्यापारी भाग लेंगे, जहां विभिन्न आकारों और प्रकारों के 127 हीरे बिक्री के लिए रखे जाएंगे। इन हीरों की अनुमानित कीमत 4 करोड़ 17 लाख 49 हजार 726 रुपए बताई गई है। पांच प्रमुख हीरों पर सबकी रहेगी नजर नीलामी में पांच प्रमुख हीरे आकर्षण का केंद्र होंगे। इनमें सबसे बड़ा हीरा 32.80 कैरेट का है, जबकि अन्य बड़े हीरे क्रमशः 19.22 कैरेट, 16.10 कैरेट, 6.97 कैरेट और 6.65 कैरेट के हैं। इन हीरों पर व्यापारियों की नजरें रहेंगी। इस बार नीलामी में कुल 313 कैरेट के हीरे रखे जाएंगे। सुरक्षा का विशेष ध्यान हीरा निरीक्षक नूतन जैन ने जानकारी दी कि नीलामी में सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा गया है। नीलामी प्रक्रिया के दौरान व्यापारियों के लिए विशेष लेंस की व्यवस्था की गई है ताकि वे आसानी से हीरों का परीक्षण कर सकें। नीलामी की प्रक्रिया सुबह 9:00 बजे से 2:00 बजे तक होगी, जिसके बाद आधे घंटे के भोजन के बाद बोली प्रक्रिया शुरू होगी। शासन के राजस्व में जमा होगी 11% राशि नीलामी के अंत में जो भी व्यापारी सफल बोली लगाकर हीरे खरीदेंगे, उन्हें कुल राशि का 11% शासन के राजस्व में जमा करना होगा, जबकि बाकी राशि सीधे हीरे के मालिक के खाते में जाएगी। पन्ना में यह हीरा मेला हर वर्ष विशेष महत्व रखता है, क्योंकि यहां की उथली खदानों से प्राप्त हीरे देशभर में प्रसिद्ध हैं। पन्ना जिले की इस नीलामी में व्यापारियों के लिए नए अवसर पैदा होंगे। यह गांव के गरीब लोगों को लखपति बनने का बड़ा अवसर देता है। खनिज एवं हीरा निरीक्षक नूतन जैन ने बताया कि व्यापारियों के लिए सर्वसुविधायुक्त नीलामी हॉल तैयार किया गया है. इसमें एलईडी लाइट्स, सीसीटीवी कैमरे और सुरक्षा गार्ड तैनात किए गए हैं. नीलामी में भाग लेने के लिए व्यापारियों को मात्र 5,000 रुपये की अमानत राशि जमा करनी होगी. बता दें नीलामी में 4 करोड़ 17 लाख 49 हजार 726 रूपये अनुमानित कीमत के कुल 127 नग छोटे-बड़े हीरे रखे जाएंगे. इसके साथ ही कलेक्टर की अध्यक्षता में आयोजित नीलामी में अन्य छोटे-बड़े हीरे भी नीलाम किए जाएंगे. खनिज अधिकारी रवि पटेल ने बताया कि ऐसे व्यापारी जो बोली लगाकर रॉयल्टी जमा नहीं करते, उन्हें ब्लैकलिस्ट किया जाएगा. इससे न केवल हीरा मालिक बल्कि सरकार को भी नुकसान होता है. नीलामी से पहले व्यापारियों को हीरों का निरीक्षण करने का मौका दिया जाएगा. पिछले अनुभवों को देखते हुए इस बार सुरक्षा और पारदर्शिता के लिए अतिरिक्त उपाय किए गए हैं. सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए यह नीलामी तीन दिनों तक चलेगी, जिसमें लगभग 127 हीरे रखे जाएंगे. इनका कुल वजन 300.13 कैरेट बताया जा रहा है. जिसकी कीमत 4 करोड़ 11 लाख रुपये बताई जा रही है. इसमें दूर-दूर से ई-पेपर के माध्यम से पोर्टल के माध्यम से व्यापारियों को सूचित कर दिया गया है. साथ ही, सूरत मुंबई और दिल्ली से व्यापारी इसमें शामिल होने के लिए आने वाले हैं.

मध्य प्रदेश के जंगल में अब आजाद हो जाएंगे चीते, कूनो में पर्यटकों की भी मौज

भोपाल अंतर्राष्ट्रीय चीता दिवस, 4 दिसंबर को, कूनो नेशनल पार्क में चीते अग्नि और वायु को खुले जंगल में छोड़ा जाएगा। यदि सब ठीक रहा, तो बाकी चीतों को भी चरणबद्ध तरीके से उनके बाड़ों से आजाद किया जाएगा। यह चीता पुनर्स्थापना परियोजना का एक महत्वपूर्ण कदम है, जो लगभग 70 वर्षों के बाद भारत में चीतों की आबादी को पुनर्जीवित करने के लिए महत्वपूर्ण है। पर्यटकों को इन राजसी जानवरों को उनके प्राकृतिक आवास में देखने का अनोखा अवसर मिलेगा। आधे से अधिक हैं शावक कूनो में 24 चीते, जिनमें से आधे शावक हैं, एक साल से भी ज्यादा समय से सुरक्षा के लिए बाड़ों में रह रहे हैं। कई चीतों की मौत हो गई है, कुछ का कारण भारतीय परिस्थितियों के अनुकूल होने में कठिनाई बताया गया है, और कुछ की मौत के कारण अस्पष्ट हैं। भटकने वाला पवन नाम का चीता अकेला जंगल में था, लेकिन इस साल अगस्त में रहस्यमय परिस्थितियों में मृत पाया गया। उसकी मौत एक बड़ा झटका थी और बाकी 24 चीतों के जंगल में छोड़ने पर एक सवालिया निशान लग गया। चीता दिवस पर मिलेगी खुशखबरी लेकिन 2024 का चीता दिवस खुशियों की किरण लाने वाला है। राजेश गोपाल की अध्यक्षता वाली एक संचालन समिति 3 दिसंबर को कूनो का दौरा करेगी। यह चीतों को छोड़ने की अंतिम तैयारियों की समीक्षा करेगी। समिति यह सुनिश्चित करेगी कि संरक्षित बाड़ों से जंगल में सुचारु रूप से बदलाव के लिए सभी साजो-सामान, सुरक्षा और बचाव के उपाय मौजूद हों। अग्नि और वायु हैं सबसे मजबूत अग्नि और वायु सबसे तेज और सबसे मजबूत चीतों में से हैं, इसलिए उन्हें पथप्रदर्शक के रूप में चुना गया है। जंगल में उन पर कड़ी नजर रखी जाएगी ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वे अपने नए वातावरण में अच्छी तरह से ढल जाएं। अधिकारियों ने कहा कि पर्यटकों को इन राजसी जानवरों को उनके प्राकृतिक आवास में देखने का अनोखा अवसर मिलेगा। चीतों को देखने का मिलेगा मौका पिछले चीता रिलीज के विपरीत, जहां आगंतुक केवल तेज चीतों की दूर से झलक ही पाते थे, खुला जंगल करीब से देखने का मौका दे सकता है, हालांकि उनकी सुरक्षा के लिए अभी भी एक नियंत्रित वातावरण में। भाग्यशाली लोग चीतों को शिकार करते हुए भी देख सकते हैं। 70 साल बाद चीते देखने को मिलेंगे चीतों को जंगल में छोड़ना चीता पुनर्स्थापना परियोजना में एक मील का पत्थर होगा। यह लगभग 70 वर्षों के बाद जंगली चीता आबादी को पुनर्जीवित करने के लिए महत्वपूर्ण है। कई चीतों की मौत चिंता का विषय रही है। कुछ मौतें भारतीय परिस्थितियों के अनुकूलन की कठिनाई के कारण हुईं, जबकि कुछ अस्पष्टीकृत रहीं। पवन की रहस्यमयी मौत ने लोगों की चिंता बढ़ा दी थी। यह चीता पुनर्स्थापना परियोजना के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ है, जो भारत में चीतों की आबादी को पुनर्जीवित करने का प्रयास है। संचालन समिति चीतों के जंगल में सफलतापूर्वक संक्रमण सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं करने के लिए प्रतिबद्ध है।

कोतवाली पुलिस द्वारा नाबालिग बालिका के अपहरण के मामले में चार वर्षों से फरार ईनामी स्थाई वांरटी गिरफ्तार

अनूपपुर      पुलिस अधीक्षक  अनूपपुर श्री मोती उर रहमान जी के निर्देशन में जिले में फरार चल रहे अपराधियों एवं  गिरफ्तारी वारंटी  की लगातार धरपकड़ कर गिरफ्तारी की जा रही है।         इसी क्रम में  मंगलवार की सुबह टी. आई कोतवाली निरीक्षक अरविंद जैन के नेतृत्व में उपनिरीक्षक सतानंद कोल  एवं आरक्षक पूर्णानंद मिश्रा ने नाबालिक बालिका के अपहरण  एवं बलात्कार के मामले में चार वर्षो से फरार चल रहे  स्थाई वारंटी शंकर रौतेल उर्फ सलोने पिता मोतीलाल रोतेल उम्र 20 साल निवासी ग्राम करिवाह  अनूपपुर को गिरफ्तार करने में सफलता प्राप्त की है।         गिरफ्तार आरोपी शंकर उर्फ़ सलोने रोतेल के विरुद्ध  दिनांक 17. 09.2020 को 15 वर्षीय नाबालिक बालिका को  भगाकर ले जाने के  थाना कोतवाली में दर्ज अपराध क्रमांक 389/ 20 में  धारा 363, 366 ए, 376 (3) 376(2 ) भारतीय दंड विधान एवं 3/4, 5/6 पाक्सो एक्ट  में गिरफ्तार किया जाकर  नयायालय पेश किया गया था जो आरोपी  लगातार फरार होने से माननीय न्यायालय अंजलि शाह प्रिंसिपल मजिस्ट्रेट,  किशोर न्याय बोर्ड, अनूपपुर के द्वारा प्रकरण क्रमांक 49 / 20 धारा 363, 366 ए, 376 (दो ) भारतीय दंड विधान एवं 3/4, 5/6  पाकसो एक्ट में स्थाई गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया था। उक्त फरार आरोपी के गिरफ्तारी के लिए पुलिस अधीक्षक अनूपपुर श्री मोती उर रहमान जी द्वारा ₹2000 इनाम भी  उद्घोषित  किया गया था

छिंदवाड़ा में बस हुई हादसे का शिका , अयोध्या से दर्शन कर लौट रहे 15 श्रद्धालु घायल

 छिंदवाड़ा छिंदवाड़ा में मगंलवार (3  दिसंबर) को बड़ा सड़क हादसा हो गया. यहां चौरई के पास यात्रियों से भरी बस पलट गई. इस हादसे में 15 श्रद्धालु घायल हो गए. बताया जा रहा है कि ये श्रद्धालु अयोध्या से दर्शन करके लौट रहे थे, तब ही ये दुर्घटना हुई. ये एक्सीडेंट की घटना छिंदवाड़ा के चौरई में केंद्रीय विद्यालय हुई. जानकारी के मुताबिक बस में छिंदवाड़ा के यात्री सवार थे जो अयोध्या दर्शन कर छिंदवाड़ा लौट रहे थे. घायलों को पुलिस 108 एंबुलेंस वाहन द्वारा अस्पताल भेज रही है. एसपी अजय पांडेय ने बताया कि हादसे में कुल 21 लोग घायल हुए हैं। श्रद्धालु 27 नवंबर को छिंदवाड़ा से काशी विश्वनाथ और अयोध्या दर्शन के लिए निकले थे। 108 एम्बुलेंस वाहन द्वारा घायलों को सिविल अस्पताल या जिला अस्पताल रवाना कर दिया गया है। छिंदवाड़ा एडिशनल एसपी अवधेश प्रताप सिंह ने बताया कि जिस बस का एक्सीडेंट हुआ है वह छिंदवाड़ा की राहुल बस है, जो श्रद्धालुओं को लेकर अयोध्या दर्शन से लौट रही थी।

निगम ने शहर की वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए टॉस्क फोर्स और कार्य योजना बनाई

भोपाल भोपाल में लगातार बढ़ते वायु प्रदूषण के चलते निगम प्रशासन को मैदान में उतरकर अब कमान संभालनी पड़ रही है, निगम ने शहर की वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए टॉस्क फोर्स और कार्य योजना बनाई है निगम ने शहर में अलाव जलाने को पूर्णतः प्रतिबंधित करने, आग जलाने की घटना पर सख्त कार्यवाही करने, वाहनों का प्रदूषण नियंत्रित करने और नागरिकों में जागरूकता हेतु अनाउंसमेंट कर व्यापक प्रचार-प्रसार करने जैसे महत्वपूर्ण कदम उठाए जायेंगे। अहम बैठक में लिया फैसला निगम आयुक्त हरेन्द्र नारायन की अध्यक्षता में वायु गुणवत्ता सुधार हेतु अहम बैठक में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी भी मौजूद थे। बैठक में पी.सी.बी. के अधिकारियों ने निगम द्वारा फागर मशीन से जल के छिड़काव की सराहना करते हुए कहा कि इसके सकारात्मक प्रभावी परिणाम भी देखने को मिल रहे है। निगम आयुक्त श्री नारायन ने कचरा जलाने की प्रवृत्ति को रोकने के लिए सहायक स्वास्थ्य अधिकारियों का एक टॉस्क फोर्स भी गठित किया और इसकी सूचना फोन नंबर (155304) पर देने हेतु कहा साथ ही रहवासी संघों, मैरिज गार्डन, होटल आदि को पत्र लिखा जाएगा। बनी कार्ययोजना, लगेगा इन पर प्रतिबंध बैठक में शहर की वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए टॉस्क फोर्स और कार्य योजना बनाई गई। शहर में अलाव जलाने को पूर्णतः प्रतिबंधित करने, आग जलाने की घटना पर सख्त कार्रवाई करने, मैरिज गार्डनों, रहवासी संघ, होटलों को पत्र लिखकर अलाव न जलाने हेतु निर्देशित किया जाएगा। निगम के रैन बसेरों, बस स्टैंडों में अलाव के स्थान पर इलेक्ट्रॉनिक हीटर जैसे वैकल्पिक संसाधन उपलब्ध कराए जायेंगे। इसके साथ ही जागरूकता हेतु निगम के वाहनों से अनाउंसमेंट किया जाएगा और कचरा, सूखी पत्तिया, लकड़ी, टायर न जलाने तथा पर्यावरण प्रदूषित होने से बचाने हेतु सचेत किया जाएगा। निगम आयुक्त हरेन्द्र नारायन ने वायु गुणवत्ता में सुधार हेतु आग लगाने की घटना को रोकने हेतु रात्रिकालीन सुपरवाईजर, वाहन चालकों एवं सहायक स्वास्थ्य अधिकारियों का एक टॉस्क फोर्स गठित किया और सख्त निर्देश दिए कि कचरा, पत्तिया, अलाव जलते पाए जाने पर फोन नंबर (155304) पर कॉल करें। स्पॉट फाईन की कार्रवाई को और सख्त करने के निर्देश निगम आयुक्त हरेन्द्र नारायन ने स्पॉट फाईन की कार्रवाई को और सख्त करने, सेंट्रल वर्ज एवं साईड वर्ज के दोनों ओर की धूल को हटाने तथा 10 मेकनाईज्ड रोड स्वीपिंग वाहन को शीघ्र ही सड़क की साफ-सफाई हेतु संलग्न करने के निर्देश दिए। निगम आयुक्त श्री नारायन ने निगम के संसाधनों और टीम के साथ वायु गुणवत्ता सुधार हेतु प्रतिबद्धता जताई और इस कार्य में सभी रहवासियों को भी जागरूक होकर वायु प्रदूषण रोकने में सहयोग और योगदान देने का आव्हान किया। निगम आयुक्त ने आग जलाने के स्थलों को चिन्हित कर वहां पर जन-जागरूकता और संवाद आयोजित करने के निर्देश दिए। वही निगम आयुक्त ने आर.टी.ओ. से वाहनों के पी.यू.सी चेक कराने हेतु सघन अभियान हेतु पत्र व समन्वय करने के लिए भी  कहा है, साथ ही सभी विभागों के साथ मिलकर सतत् रूप से प्रयास किये जायेंगे। ट्राफिक पुलिस द्वारा जहां सिग्नल नहीं है उन स्थानों पर यातायात बाधित न हो और प्रदूषण न बढ़े इस हेतु अतिरिक्त टीम की तैनाती की जाएगी और इसके लिए पत्राचार किया जाएगा।

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