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मधुमेह के मरीजों को पंचकर्म बाद औषधियां देने से शुगर लेवल 200 तक आ गया : शोध

 भोपाल  डायबिटीज (मधुमेह) पर आयुर्वेदिक औषधियों और पंचकर्म का प्रभाव जानने के लिए एक बड़ा शोध भोपाल के पं. खुशीलाल शर्मा शासकीय आयुर्वेद कॉलेज में चल रहा है। यहां 1050 रोगियों पर किए जा रहे शोध के प्रारंभिक परिणाम उत्साहित करने वाले हैं। डॉक्टरों ने बताया कि जिन रोगियों का एचबीए1सी स्तर (वैल्यू) 13 यानी तीन महीने का औसत शुगर लेवल 350 के करीब था उन्हें पंचकर्म की वस्ति क्रिया (दस्त करवाने) के बाद औषधियां देने से कुछ मरीजों का एक सप्ताह तो कुछ का 15 दिन में ही शुगर लेवल 200 तक आ गया। 1050 रोगियों को तीन समूहों में बांटा गया शोध टीम में शामिल काय चिकित्सा के सहायक प्राध्यापक डॉ. विवेक शर्मा बताते हैं कि 1050 रोगियों को औचक (रैंडम) आधार पर बराबर संख्या वाले तीन समूहों में बांटा गया है। एक समूह को पंचकर्म के साथ औषधियां, दूसरे को मात्र औषधियां और तीसरे को सिर्फ खान-पान व जीवन शैली में परिवर्तन करवाया गया है। तीन महीने तक उन पर प्रयोग किया जाना है, हालांकि प्रारंभिक परिणामों में अधिकतर रोगियों की शुगर नियंत्रित मिल रही है। इनमें किसी को एलोपैथी दवाएं नहीं दी जा रही हैं। इस तरह के दिखे परिणाम पंचकर्म विभाग की सह प्राध्यापक डॉ. कामिनी सोनी ने बताया कि आयुष मंत्रालय के दिशानिर्देश के अनुसार जिन रोगियों का एचबीए1सी 10 से कम है उन्हें ही शोध में शामिल किया है, जिससे स्वास्थ्य को लेकर कोई जोखिम न हो। अभी एक माह में अलग-अलग समय में अस्पताल में भर्ती हुए 10 रोगियों को पंचकर्म और दवा देने के बाद देखने में आया है कि आठ का एचबीए1सी स्तर काफी सुधरा हुआ मिला। औसत रूप से मानें तो इसका स्तर 10 से घटकर छह के आसपास आ गया। इसके पहले भर्ती हुए रोगियों में परिणाम भी लगभग ऐसे ही थे। अपवादस्वरूप कुछ रोगी तो ऐसे भी थे जिनका एचबीए1सी 13 था। पंचकर्म के बाद औषधियां देने से यह छह से सात के बीच आ गया है। बता दें, एचबीए1सी जांच रक्त में शुगर का तीन महीने का औसत स्तर बताती है। यह होता है पंचकर्म     वमन – उल्टी कराना। इसके कई तरीके हैं। कई लाभ हैं पर ज्यादा उपयोग कफज रोग में होता है।     विरेचन – दस्त कराना। इसका अधिक उपयोग पित्त संबंधी बीमारियों में किया जाता है।     अनुवासन वस्ति – इसमें एनिमा की तरह काम होता है। इसके लिए अलग-अलग तरह के तेल का उपयोग किया जाता है।     निरूह वस्ति – इसमें काढ़े का उपयोग कर दस्त कराया जाता हैं। पेट और हार्मोन संबंधी बीमारी में अधिक उपयोगी है।     नस्य कर्म – इसमें नाक से औषधियां दी जाती हैं। 70 प्रतिशत काम हो गया है     कॉलेज की रिसर्च एथिक्स कमेटी की स्वीकृति के बाद 1050 रोगियों पर यह शोध किया जा रहा है। इतनी संख्या में मरीजों पर देश में पहली बार शोध हो रहा है। इसमें रोगियों से बाकायदा सहमति पत्र लिया गया है। लगभग 70 प्रतिशत काम हो गया है। शोध के शुरुआती परिणाम बहुत उत्साहजनक रहे हैं। – डॉ. उमेश शुक्ला, प्राचार्य, पं. खुशीलाल शर्मा आयुर्वेद कॉलेज औषधि पैंक्रियाज को ठीक करने का काम करेगी     हर पैथी का अपना सिद्धांत है, इसलिए उस पर संदेह नहीं करना चाहिए। डायबिटीज के उपचार में एलोपैथी व अन्य पैथी के सिद्धांत कुछ हद तक समान हो सकते हैं। जैसे जीवन शैली में बदलाव। पंचकर्म भी लगभग उसी तरह की प्रक्रिया है। जहां तक दवा की बात है जो आयुर्वेदिक औषधि पैंक्रियाज को ठीक करने या मोटापा कम करने पर काम करेगी वह डायबिटीज में भी लाभकारी होगी। अभी सामान्य जनसंख्या में शहरी क्षेत्र में लगभग 10 से 12 प्रतिशत और ग्रामीण क्षेत्र में छह से आठ प्रतिशत लोग डायबिटीज से प्रभावित हैं। – डॉ. मनुज शर्मा, हार्मोन रोग विशेषज्ञ, गांधी मेडिकल कॉलेज, भोपाल  

गैस पीड़ितों के लिए आयुष्मान भारत ‘निरामयम’ मध्यप्रदेश योजना के तहत 5 दिसम्बर तक 20 हजार 199 आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके

भोपाल भोपाल गैस पीड़ितों और उनके बच्चों को स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ पहुंचाने के लिए राज्य सरकार तत्पर है। गैस पीड़ितों के लिए आयुष्मान भारत ‘निरामयम’ मध्यप्रदेश योजना के तहत 5 दिसम्बर तक 20 हजार 199 आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं। गैस पीड़ितों और उनके बच्चों के लिए भोपाल गैस त्रासदी राहत एवं पुनर्वास विभाग के तहत 6 अस्पताल और 9 औषधालय भी संचालित किए जा रहे हैं, जहां सभी प्रकार की जांच, उपचार और आवश्यक सुविधाएं निशुल्क उपलब्ध हैं। साथ ही आयुष्मान योजना के अंतर्गत भोपाल गैस राहत विभाग से अनुबंधित सभी अस्पतालों में भी गैस पीड़ितों को आवश्यकतानुसार चिकित्सा सुविधाएँ दी जा रही हैं। गंभीर बीमारियों के विशेष इलाज किडनी, लीवर ट्रांसप्लांट और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से पीड़ित के इलाज के लिए भी विशेष व्यवस्था की गई है। कैंसर उपचार के लिए विभाग ने एम्स भोपाल और 3 निजी अस्पतालों के साथ अनुबंध किया है। इसके अतिरिक्त कमला नेहरू अस्पताल में डायलिसिस यूनिट की स्थापना की गई है, जहां 13 डायलिसिस मशीनों के जरिये पीड़ित मरीजों का नि:शुल्क उपचार किया जा रहा है। अत्याधुनिक आपातकालीन सेवाएं भी जारी भोपाल गैस राहत विभाग के सभी अस्पतालों में 24×7 इमरजेंसी यूनिट संचालित की जा रही है। इन यूनिट्स में गैस पीड़ितों और उनके बच्चों को तुरंत और उन्नत चिकित्सा सेवाएं, सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। गैस प्रभावित विधवाओं (कल्याणियों) को राज्य सरकार द्वारा विशेष राहत दी जा रही है। इन्हें सामाजिक सुरक्षा पेंशन के अतिरिक्त 1,000 रुपये मासिक पेंशन दी जा रही है। वर्तमान में 4 हजार 406 विधवाओं को पेंशन का लाभ दिया जा रहा है। राज्य सरकार भोपाल गैस पीड़ितों के स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार का प्रमुख लक्ष्य कल्याण योजनाओं के तेज क्रियान्वयन और चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार से गैस पीड़ितों के जीवन स्तर में त्वरित सुधार लाना है।  

भारतीय ज्ञान परम्परा को आगे बढ़ाने, संरक्षित रखने और जीवित रखने में भारतीय महिलाओं ने बहुत बड़ी भूमिका निभाई: श्रीमती गौर

भोपाल भारतीय ज्ञान परम्परा को आगे बढ़ाने, संरक्षित रखने और जीवित रखने में भारतीय महिलाओं ने बहुत बड़ी भूमिका निभाई है। भारतीय संस्कृति में महिलाओं के ज्ञान की अनदेखी नहीं की जा सकती। भारतीय समाज में प्राचीन वैदिक काल से लेकर वर्तमान तक महिलाओं का सम्मानीय स्थान रहा है। पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्रीमती कृष्णा गौर ने उक्त आशय की बातें कहीं। राज्य मंत्री श्रीमती गौर शुक्रवार को विज्ञान भारतीय की महिला इकाई शक्ति द्वारा मौलाना आजाद नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नालॉजी में आयोजित 3 दिवसीय “स्त्री’’ सम्मेलन के शुभारंभ सत्र को संबोधित कर रही थीं। राज्य मंत्री श्रीमती गौर ने कहा कि समाज की उन्नति और अवनति का सीधा संबंध समाज में महिलाओं की प्रस्थिति और उनके सम्मान से रहा है। समाज में जब और जिस समय महिलाओं का सम्मान रहा है, उस समय के समाज ने उन्नति और प्रगति का सफर तय किया है। जब-जब समाज में महिलाओं के सम्मान में कमी आयी है, तब के समाज में पतन की स्थिति देखी जा सकती है। उन्होंने कहा कि वैदिक काल में महिलाओं की सम्मानीय स्थिति और वैदिक काल के युग में भारत विश्व गुरु के रूप में जाना जाता था। भारतीय समाज के निर्माण में नारी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। भारतीय वेदों, शास्त्रों और ऋचाओं को लिखने वाली महिलाएँ थीं। महिलाएँ अनेक अवसरों पर शास्त्रार्थ करती थीं। प्राचीन भारत में महिलाओं को स्वतंत्रता और अनेक अधिकार प्राप्त थे। राज्य मंत्री श्रीमती गौर ने कहा कि भारतीय इतिहास के मध्य काल में महिलाओं के सम्मान में कमी आयी। महिलाओं को अनेक अधिकारों से वंचित भी किया गया। उन्होंने कहा कि वर्तमान में महिलाएँ हर क्षेत्र में आगे आ रही हैं। राज्य मंत्री श्रीमती गौर ने कहा कि आज 21वीं सदी में महिलाएँ आत्म-निर्भर हैं। उन्होंने आज के युग की विभिन्न क्षेत्रों की सफल महिलाओं का उदाहरण देते हुए कहा कि महिलाओं ने हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त की है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत विश्व की तीसरी बड़ी अर्थ-व्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है। राज्य मंत्री श्रीमती गौर ने कहा कि हम टेक्नालॉजी पर आधारित 21वीं सदी में आगे बढ़ रहे हैं। हमें टेक्नालॉजी और नवाचारों के साथ आगे बढ़ना है और साथ में अपनी परम्पराओं से भी जुड़े रहना है। राज्य मंत्री श्रीमती गौर ने शक्ति के तत्वावधान में स्त्री-2024 के आयोजनकर्ताओं को बधाई दी। उन्होंने इस अवसर पर लगायी गयी प्रदर्शनी का अवलोकन किया और प्रदर्शनी में भाग ले रहे विभिन्न कलाकारों और उद्यमियों से उनके उत्पादों के संबंध में चर्चा की। स्त्री सम्मेलन को प्रो. चांसलर आरएनटीयू डॉ. अदिति चक्रवर्ती ने भी संबोधित किया। मेनिट के निदेशक प्रो. के.के. शुक्ला, महानिदेशक एमपीसीएसटी डॉ. अनिल कोठारी, निदेशक एनआईटीटीआर डॉ. सी.सी. त्रिपाठी, संयोजक स्त्री-2024 प्रो. अनुपमा शर्मा, शक्ति की राष्ट्रीय अध्यक्ष और अन्य अतिथि उपस्थित थे।  

प्रदेश की 12670 मिनी आंगनवाड़ी केन्द्र उन्नत, प्रत्येक में एक-एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका के पद स्वीकृत

भोपाल प्रदेश की 12670 मिनी आंगनवाड़ी केन्द्रों को पूर्ण आंगनवाड़ी केन्द्रों में उन्नयन करने का निर्णय हाल ही में मंत्रि-परिषद द्वारा लिया गया था। निर्णयानुसार इन सभी 12670 उन्नत आंगनवाड़ी केन्द्रों के लिये एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं एक आंगनवाड़ी सहायिका (प्रत्येक आंगनवाड़ी) के पद की स्वीकृति प्रदान की गई है। पूर्व में संचालित इन मिनी आंगनवाड़ी केन्द्रों को पूर्ण आंगनवाड़ी केन्द्र में एक दिसम्बर 2024 से परिवर्तित माना जायेगा। आयुक्त महिला बाल विकास सूफिया फारूकी वली ने बताया कि मिनी आंगनवाड़ी केन्द्रों में पूर्व से कार्यरत मिनी आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की उस केन्द्र में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के रूप में पदस्थ रहकर कार्य करेंगी। वर्तमान में जिन उन्नत आंगनवाड़ी केन्द्रों में कार्यकर्ता का पद रिक्त है, वहाँ निर्धारित शैक्षणिक योग्यता एवं अर्हताओं अनुसार ही नवीन आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की नियुक्ति की जायेगी। उन्नत 12670 आंगनवाड़ी केन्द्रों में सहायिका के नवीन सृजित पदों पर निर्धारित शैक्षणिक योग्यता एवं अर्हताओं अनुसार ही नियुक्ति होगी। उन्होंने बताया कि इन केन्द्रों में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के रिक्त पदों एवं आंगनवाड़ी सहायिका के सभी पदों की नियुक्ति एमपी ऑनलाइन पोर्टल https://chayan.mponline.gov.in के माध्यम से होगी। उल्लेखनीय है कि मंत्रि-परिषद द्वारा 12670 मिनी आंगनवाड़ी केन्द्रों के लिये प्रत्येक आंगनवाड़ी केन्द्र में एक कार्यकर्ता एवं एक सहायिका तथा केन्द्रों के पर्यवेक्षण के लिये कुल 476 पर्यवेक्षक के पदों के सृजन की स्वीकृति दी गई है।  

नगरीय निकायों में सहयोग अभियान से जरूरतमंदों को पहुँचाई जायेगी मदद

भोपाल प्रदेश में आगामी दिनों में तेज ठंड की स्थिति को देखते हुए नगरीय निकायों में जरूरतमंदों तक मदद पहुँचाने के लिये “सहयोग अभियान’’ चलाने का निर्णय लिया गया है। अभियान के सफल संचालन के लिये नगरीय विकास आयुक्त श्री भरत यादव ने प्रदेश के 413 नगरीय निकायों को परिपत्र जारी कर निर्देश दिये हैं। उन्होंने कहा है कि सहयोग अभियान में जन-प्रतिनिधियों की मदद से अधिक से अधिक जन-भागीदारी सुनिश्चित की जाये। यह अभियान स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत संचालित होगा। आयुक्त श्री भरत यादव ने जानकारी दी कि अभियान के लिये 625 रिसाइकिल, रियूज और रिड्यूज (आरआरआर) केन्द्रों में विशेष व्यवस्था की जा रही है। नगरीय निकायों के मैदानी अमले को कहा गया है कि नागरिकों से गर्म कपड़े एवं सामग्री एकत्र कर जरूरतमंदों तक पहुँचाने के लिये टीम भावना के साथ काम किया जाये। मिशन संचालक, स्वच्छ भारत मिशन शहरी श्री अक्षय तेम्रवाल ने बताया कि नगरीय निकाय के अमले को गर्म वस्त्र और सामग्री तत्परता से एकत्र करने और जरूरतमंद तक पहुँचाने के लिये कहा गया है। ऑनलाइन कार्यशाला का आयोजन सहयोग अभियान के सिलसिले में नगरीय विकास विभाग ने रविवार 8 दिसम्बर, 2024 को प्रात: 9 बजे प्रदेशव्यापी ऑनलाइन कार्यशाला आयोजित करने का निर्णय लिया है। कार्यशाला में जन-प्रतिनिधियों, नागरिकों और स्वयंसेवी संस्थाओं के अनुभव और सुझाव साझा किये जायेंगे। कार्यशाला में शामिल होने के लिये लिंक स्वच्छ भारत मिशन, शहरी के सोशल मीडिया पेज पर उपलब्ध होगा। प्रदेश के सभी शहरों में वर्ष 2022 में आरआरआर केन्द्र स्थापित किये गये हैं। नगरीय निकायों में इस काम के लिये विशेष वाहन भी संचालित किये जा रहे हैं। संचालनालय स्तर पर प्रदेशव्यापी अभियान की निगरानी के लिये विशेष व्यवस्था भी की गयी है।  

स्कूली बच्चों के लिये राष्ट्रीय मौसम विज्ञान ओलम्पियाड 14-15 दिसम्बर को

भोपाल भारत मौसम विज्ञान विभाग 14 और 15 दिसम्बर, 2024 को अपनी स्थापना के 150 वर्ष पूरे होने के मौके पर राष्ट्रीय मौसम विज्ञान ओलम्पियाड आयोजित कर रहा है। ओलम्पियाड में कक्षा-8, 9 और 11 के छात्र शामिल हो सकेंगे। ओलम्पियाड युवाओं के मौसम विज्ञान के क्षेत्र में गहराई से जानने और पुरस्कार अर्जित करने का शानदार अवसर है। इस संबंध में विस्तृत जानकारी मौसम कार्यालय के टेलीफोन नम्बर-0755-2550345 पर प्राप्त की जा सकती है। मौसम केन्द्र कार्यालय भोपाल के अरेरा हिल्स में स्थित है।  

लोकपथ ऐप ने राष्ट्रीय स्तर पर बनाई पहचान, कौन बनेगा करोड़पति में हुआ उल्लेख

भोपाल मध्यप्रदेश सरकार द्वारा क्षतिग्रस्त सड़कों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए विकसित किया गया लोकपथ मोबाइल ऐप अब राष्ट्रीय पहचान बन चुका है। हाल ही में इस ऐप का उल्लेख देश के सबसे प्रतिष्ठित टीवी शो “कौन बनेगा करोड़पति” में हुआ। इस कार्यक्रम के होस्ट, प्रख्यात अभिनेता श्री अमिताभ बच्चन ने लोकपथ ऐप से जुड़ा सवाल प्रतिभागी से पूछा। यह उल्लेख न केवल मध्यप्रदेश के लिए गर्व का विषय है, बल्कि प्रदेश में सड़कों के रखरखाव और सुधार के लिए किए गए नवाचारों को भी राष्ट्रीय स्तर पर रेखांकित करता है। नरसिंहपुर जिले के श्री रचित कुमार बेल्थरिया ने इस सवाल का सही उत्तर बिना किसी सहायता के देकर शो में सभी का ध्यान आकर्षित किया। लोक निर्माण मंत्री श्री राकेश सिंह ने कौन बनेगा करोड़पति में मध्यप्रदेश के नवाचार को स्थान देने के लिए मध्यप्रदेश सरकार की ओर श्री अमिताभ बच्चन का आभार व्यक्त किया और प्रतिभागी श्री रचित का अभिनंदन किया। उन्होंने कहा कि मात्र 6 माह में इस ऐप ने प्रदेश से निकलकर राष्ट्र स्तर पर अपनी पहचान स्थापित की है एवं पूरे देश में चर्चा का विषय बन चुकी है। लोक निर्माण मंत्री श्री सिंह ने इस घटना को गर्व का क्षण बताते हुए कहा, “लोकपथ ऐप लोक निर्माण से लोक कल्याण का सेतु है। यह देखकर प्रसन्नता होती है कि मध्यप्रदेश के नवाचार को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल रही है। लोकपथ ऐप प्रदेश की जनता के लिए एक बड़ा नवाचार है, जो सड़कों को गुणवत्तापूर्ण सुरक्षित और सुदृढ़ बनाने में सहायक है।” मंत्री श्री सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा लोकार्पित लोकपथ ऐप, लोक निर्माण विभाग की एक अनूठी पहल है। इस ऐप का उद्देश्य प्रदेश की सड़कों से जुड़ी समस्याओं का त्वरित और प्रभावी समाधान करना है। नागरिक इस ऐप के माध्यम से क्षतिग्रस्त सड़कों की रिपोर्ट सीधे विभाग को भेज सकते हैं, जिससे समस्याओं का शीघ्र समाधान हो रहा है। मंत्री श्री सिंह ने यह भी कहा कि लोकपथ ऐप सरकार की लोक कल्याणकारी सोच और प्रौद्योगिकी के कुशल उपयोग का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने कहा कि विभाग के इस अभिनव प्रयास ने साबित किया है कि प्रौद्योगिकी के माध्यम से लोक कल्याण के लक्ष्य को प्रभावी ढंग से प्राप्त किया जा सकता है। लोकपथ ऐप पर अब तक 4536 से अधिक शिकायतें प्राप्त की गई हैं, जिनमें से 95 प्रतिशत शिकायतों का निराकरण 7 दिनों के भीतर किया गया। यह आंकड़े इस बात का प्रमाण हैं कि सरकार ने नागरिकों की समस्याओं के समाधान के लिए इस तकनीक का प्रभावी ढंग से उपयोग किया है। मध्यप्रदेश सरकार की प्राथमिकता प्रदेश की सड़कों को गुणवत्तापूर्ण, सुदृढ़ और सुरक्षित बनाना है और लोकपथ ऐप इस दिशा में एक मील का पत्थर साबित हो रहा है।  

हम होंगे कामयाब अभियान: 10 दिसम्बर मानव अधिकार दिवस पर होगी जागरूकता दौड़

भोपाल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशानुसार 16 दिवसीय एक्टीविजम-लिंग आधारित हिंसा के उन्मूलन के लिये “हम होंगे कामयाब’’ अभियान की शुरूआत 25 नवम्बर से की गयी है। मानव अधिकार दिवस तक चलने वाले इस अभियान के तहत 10 दिसम्बर को जागरूकता दौड़ का आयोजन किया जा रहा है। जागरूकता दौड़ में पुलिस विभाग सहित प्रदेश के अन्य विभागों के अधिकारी, स्कूल-कॉलेज के विद्यार्थी एवं एनजीओ के लगभग 1500 प्रतिभागी भाग लेंगे। जागरूकता दौड़ का शुभारंभ महापौर श्रीमती मालती राय करेंगी। बोट क्लब पर होने वाली इस दौड़ का समापन पुलिस महानिदेशक श्री कैलाश मकवाना द्वारा किया जायेगा।  

प्रदेश ने इतिहास में पहली बार 18 हजार मेगावॉट से ऊपर विद्युत आपूर्ति की

भोपाल ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया कि मध्यप्रदेश के इतिहास में पहली बार 18 हजार मेगावॉट से ऊपर की विद्युत डिमांड बिना किसी व्यवधान के पूरी करने में सफलता प्राप्त हुई है। छ: दिसम्बर को प्रातः 9:15 बजे मध्यप्रदेश के इतिहास की सर्वाधिक विद्युत मांग 18077 मेगावॉट दर्ज की गई। इसके पूर्व 24 जनवरी 2024 को 17614 मेगावॉट अधिकतम मांग दर्ज की गई थी। अधिकतम डिमांड के समय मध्यप्रदेश की विद्युत लाइनों और सबस्टेशनों से निर्वाध विद्युत आपूर्ति की गई। ऊर्जा मंत्री श्री तोमर ने इस उपलब्धि पर विभाग के सभी विद्युत कार्मिकों को बधाई दी है।  

बिजली कर्मियों से मारपीट करने पर दो आरोपियों के विरूद्ध एफ.आई.आर. दर्ज

भोपाल मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा भोपाल शहर वितरण केन्‍द्र अंतर्गत शासकीय कार्य के दौरान बिजली कंपनी के अधिकारियों एवं कर्मचारी से अभद्र व्यवहार एवं मारपीट करने के आरोप में दो आरोपियों पर अलग – अलग थानों में एफ.आई.आर. दर्ज कराई गई है। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी भोपाल शहर के पिपलानी वितरण केन्‍द्र अंतर्गत लाइन परिचारक (संविदा) श्री रवि अहिरवार द्वारा साथी स्‍टॉफ श्री रामआश्रय साहू, श्री हेमराज लोधी एवं श्री साहिबराव के साथ बकाया राशि राजस्‍व वसूली का कार्य किया जा रहा था। इस दौरान उपभोक्‍ता श्री नवनीत सिंह से बकाया राशि जमा नहीं करने के चलते कंपनी द्वारा कनेक्‍शन विच्‍छेदित करने की बात कही गई। उसी समय उपभोक्‍ता द्वारा मारपीट की गई तथा जान से मारने की धमकी दी गई। बाद में जूनियर इंजीनियर श्री राहुल पांडे के साथ पहुंचकर एफआईआर दर्ज कराई गई। इसी तरह एक अन्‍य मामले में आरोपी श्री कदरउल्‍ला खां के खिलाफ थाना श्‍यामला हिल्‍स में मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के टीटी नगर जोन में पदस्‍थ सहायक प्रबंधक श्री संजू कुमार उईके ने एफआईआर दर्ज कराई है। उन्‍होंने बताया कि आरोपी पर बिजली बिल की राशि 21975 रुपये बकाया होने पर लाइन काटने की कार्रवाई की गई। बाद में आरोपी श्री कदरउल्‍ला ने स्‍टॉफ के साथ शासकीय कार्य में बाधा डालते हुए जान से मारने की धमकी दी। इसकी थाना श्‍यामलाहिल्‍स में एफआईआर दर्ज की गई है। दोनों आरोपियों क्रमश श्री नवनीत सिंह व श्री कदरउल्‍ला खान के खिलाफ कंपनी के अधिकारियों/कर्मचारियों से मारपीट, अभद्र व्‍यवहार तथा जान से मारने की धमकी देने तथा शासकीय कार्य में बाधा डालने के आरोप में कंपनी द्वारा कार्यवाही करते हुए थाना पिपलानी तथा थाना श्‍यामला हिल्‍स में एफआईआर दर्ज की गई है। आरोपी श्री नवनीत सिंह पर धारा 121(1) एवं 132 में एफाआई दर्ज की गई है, जबकि आरोपी श्री कदरउल्‍ला खान के खिलाफ भारतीय न्‍याय संहिता (बीएनएस) 2023 की धारा 121(1), 132, 296, 351 (2) में एफआईआर दर्ज कराई गई है। थाना पिपलानी तथा थाना श्‍यामला हिल्‍स द्वारा दोनों आरोपियों के विरूद्ध अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना प्रारंभ कर दी गई है। मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के प्रबंध संचालक श्री क्षितिज सिंघल ने ड्यूटी पर तैनात अधिकारी/कर्मचारियों से दुर्व्यवहार या मारपीट के मामलों को शासकीय कामकाज में बाधा डालने के तौर पर लिया जाकर तुरंत कानूनी कार्यवाही के निर्देश दिए हैं। कंपनी ने मैदानी अधिकारी कर्मचारियों से कहा है कि विद्युत आपूर्ति की स्थिति पर लगातार नजर रखें और जिले के कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक से संपर्क कर किसी भी अप्रिय स्थिति में उनसे आवश्यक सहयोग प्राप्त करें।  

बिजली कंपनी ने सार्वजनिक किये बड़े बकायादारों के नाम, उपभोक्ताओं से अपील : बिजली बिल का भुगतान करें

भोपाल मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी ने कंपनी कार्यक्षेत्र के भोपाल, नर्मदापुरम, ग्वालियर एवं चंबल संभाग के 16 जिलों के अंतर्गत आने वाले ऐसे बिजली उपभोक्ता जिनके द्वारा अपने बकाया बिजली बिलों का समय पर भुगतान नहीं किया जा रहा है, उनके नाम, पते और बकाया राशि की जानकारी को सार्वजनिक कर दिया है। कंपनी द्वारा बकायादारों के नामों की सूची कंपनी के पोर्टल पर सार्वजनिक की गई है। इन बकायादरों के नाम आमजन और उपभोक्ताओं द्वारा क्षेत्रवार देखा जा सकता है। इसके लिए कंपनी की वेबसाइट portal.mpcz.in पर जाकर होम पेज पर Consumer Arrears List पर क्लिक करते ही वृत्त के आधार पर कुल बकायादारों की सूची उपलब्ध हो जाएगी। इसी लिंक को कंपनी के सोशल मीडिया प्लेटफार्म जैसे फेसबुक, एक्स, इंस्टाग्राम आदि पर भी साझा कर दिया गया है। कम्पनी द्वारा इस सूची को प्रति सोमवार अद्यतन किया जा रहा है। जो उपभोक्ता अपने बिजली बिल की बकाया राशि जमा कर रहे हैं, उनके नाम पोर्टल पर जारी सूची से तथा सोशल मीडिया से हटा दिए जाते हैं। इसलिए बकाया राशि समय पर जमा करें, ताकि बकायादारों की सूची से नाम हटाया जा सके।

हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, डॉक्टर्स की हड़ताल अब नहीं होगी गैरकानूनी, लंबित मांगों का समाधान करेगी हाई लेवल कमेटी प्रदर्शन

इंदौर  अब डॉक्टर्स की हड़ताल गैरकानूनी नहीं मानी जाएगी। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने डॉक्टर्स को महत्वपूर्ण राहत प्रदान की है, यह निर्णय चिकित्सा सेवाओं की अनिवार्यता को ध्यान में रखते हुए लिया गया। क्योंकि डॉक्टर्स की हड़ताल से मरीजों की देखभाल पर खतरा आ सकता है, इसलिए हड़ताल पर जाने की छूट नहीं दी जाती थी। आमतौर पर, यदि डॉक्टर्स किसी आदेश या घटना से आहत होकर हड़ताल पर जाते थे, तो यह हड़ताल गैरकानूनी मानी जाती थी। कई मामलों में सरकार और विभाग ने हड़ताल पर गए डॉक्टर्स के खिलाफ कार्रवाई भी की थी। एक मामले की सुनवाई के दौरान, एमपी हाईकोर्ट ने डॉक्टर्स को राहत दी है। डॉक्टर्स को हड़ताल से रोकने के कारण डॉक्टर्स को हड़ताल पर जाने की अनुमति नहीं दी जाती है, क्योंकि इससे मरीजों के इलाज में गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। भारतीय चिकित्सा परिषद (पेशेवर आचरण, शिष्टाचार और नैतिकता) विनियम, 2002 के तहत भी डॉक्टरों को हड़ताल से मना किया गया है। इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट भी कह चुका है कि न्यायाधीश और डॉक्टर हड़ताल पर नहीं जा सकते, क्योंकि उनका काम जीवन और स्वतंत्रता से जुड़े मामलों से संबंधित होता है। हड़ताल पर जाने से पहले अनुमति की जरूरत हाई कोर्ट ने डॉक्टरों को हड़ताल पर जाने की छूट दी है, लेकिन इसके लिए उन्हें पहले कोर्ट से अनुमति लेनी होगी। जबलपुर हाईकोर्ट ने सरकारी डॉक्टरों के हड़ताल से संबंधित मामले में स्पष्ट किया कि अगर डॉक्टर सरकार के किसी निर्णय से आहत होते हैं, तो वे हड़ताल कर सकते हैं, बशर्ते कोर्ट को पहले सूचित किया जाए। इसके साथ ही, कोर्ट ने राज्य सरकार को डॉक्टरों की लंबित मांगों को हल करने के लिए 2 सप्ताह में एक उच्च स्तरीय समिति बनाने का आदेश दिया है। पूरा मामला यह मामला 2023 में प्रदेशभर के डॉक्टरों की हड़ताल से जुड़ा था। 3 मई को चिकित्सक महासंघ के आह्वान पर राज्यभर के मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल, सीएससी और पीएचसी के डॉक्टर हड़ताल पर गए थे। उन्होंने अपनी कार्यकाल, वेतन और सुविधाओं से संबंधित कई महत्वपूर्ण मांगें राज्य सरकार के सामने रखी थीं, जिनका समाधान न होने पर डॉक्टरों ने हड़ताल और विरोध प्रदर्शन जारी रखा। हाई कोर्ट ने चिकित्सक महासंघ को एक हफ्ते का समय दिया है, ताकि वे अपनी सभी लंबित मांगों और सुझावों को राज्य सरकार तक पहुंचा सकें। पहले कोर्ट ने इस हड़ताल को गैरकानूनी करार दिया था और भविष्य में किसी भी हड़ताल के लिए कोर्ट से अनुमति अनिवार्य कर दी थी। 1 हफ्ते में मांग-सुझाव सरकार तक प​हुंचाएं     हाई कोर्ट ने चिकित्सक महासंघ को एक हफ्ते का समय दिया है, ताकि वे अपनी सभी लंबित मांगों और सुझावों को राज्य सरकार तक पहुंचा सकें।     यह मामला 2023 में प्रदेशभर के चिकित्सकों की हड़ताल से जुड़ा था। तब 3 मई को चिकित्सक महासंघ के आह्वान पर राज्यभर के मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल, सीएससी और पीएचसी के डॉक्टर हड़ताल पर चले गए थे।     चिकित्सक महासंघ ने राज्य सरकार से डॉक्टरों के कार्यकाल, वेतन और सुविधाओं को लेकर कई महत्वपूर्ण मांगें रखी हैं। इन मांगों का समाधान न होने पर डॉक्टर लगातार हड़ताल और विरोध प्रदर्शन कर रहे थे।     शासकीय-स्वशासी चिकित्सा महासंघ मप्र के मुख्य संयोजन डॉक्टर राकेश मालवीय के मुताबिक पहले हाई कोर्ट ने प्रदेश के डॉक्टरों की हड़ताल को गैरकानूनी करार दिया था। साथ ही भविष्य में किसी भी टोकन स्ट्राइक के लिए कोर्ट की अनुमति लेना अनिवार्य कर दिया था। इसके बाद डॉक्टरों ने अपनी आवाज उठाने के लिए अन्य विकल्प तलाशे।  

पांच वाहनों से लगभग 30 आरोपित हमला करने आए थे, बंदूक-तलवारों से दलित परिवार पर किया हमला, महिला की मौत

मंदसौर सरकारी जमीन पर गाय बांधने के विवाद में शुक्रवार को फायरिंग कर महिला की हत्या कर दी गई। वहीं चार लोग घायल हो गए है इनका उपचार जिला अस्पताल में चल रहा है। मामला गरोठ तहसील के ढाकनी गांव का है। पांच वाहनों से लगभग 30 आरोपित हमला करने आए थे। हमलावर बंदूकें, तलवार और लाठी-डंडे लेकर आए थे। हमले में महिला की मौत के बाद आरोपितों को जल्द गिरफ्तार करने को लेकर गरोठ में चक्काजाम भी किया। लगभग दो घंटे बाद पुलिस अधिकारियों के आश्वासन के बाद चक्काजाम खोला। पुलिस ने कुछ लोगों को हिरासत में लिया है। शुक्रवार सुबह ग्राम ढाकनी में पांच चार पहिया वाहनों से आए 30 लोगों ने दलित परिवार पर हमला कर दिया। फायरिंग में सुगनाबाई पत्नी बालाराम सूर्यवंशी की मौत हो गई। जबकि चार लोग घायल है। हमले के बाद घायलों को गरोठ अस्पताल ले जाया गया। वहां से एक घायल रामगोपाल को जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। सुगना के बेटे सुखदेव और पति बलराम ने बताया कि गांव के नरेंद्रसिंह और उसके पिता ने हमला कराया है। बलराम के हाथ में भी गोली लगी है। उन्हें मंदसौर रेफर कर दिया गया है। घटना के बाद गरोठ अस्पताल में काफी भीड़ जमा हो गई। गरोठ एएसपी हेमलता कुरील भी अस्पताल पहुंची। लोगों ने किया चक्काजाम हमले के बाद समाज के लोगों ने सड़क पर शव रखकर प्रदर्शन किया। हत्या के आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए दलित समाज के लोगों ने गरोठ नगर में थाने के पास सरदार वल्लभ भाई पटेल चौराहे पर धरने पर बैठ गए। इससे जाम लग गया। इसके अलावा बोलिया रोड, शामगढ़ रोड पर भी चक्काजाम किया गया। लगभग दो घंटे में बोलिया, शामगढ़, भानपुरा, खड़ावदा आने-जाने वाले रास्तों पर आवागमन करने वाले परेशान होते रहे। शामगढ़, भानपुरा, सुवासरा आदि थानों का पुलिस बल भी तैनात रहा है। लगभग 2 घंटे में पुलिस अधिकारियों के आश्वासन के बाद लोगों ने चक्काजाम समाप्त किया। गरोठ एएसपी हेमलता कुरील ने बताया कि शुरुआती पूछताछ में हमलावरों के नाम अर्जुनसिंह, नरेंद्रसिंह, जेलरसिंह, प्रतापसिंह पता चले हैं। सभी की तलाश की जा रही है। ग्राम ढाकनी निवासी बालराम और उसके परिवार का विवाद शासकीय भूमि पर शेड निर्माण को लेकर हुआ। जानकारी के अनुसार बालाराम का बैंड व्यवसाय है। घटना के समय वह शासकीय भूमि पर अपनी गायों के लिए शेड बना रहा था, जिसको लेकर विवाद हो गया। विवाद में गोली चली और सुगनाबाई मौके पर ही मौत हो गई। घायलों में शामिल मृतका के ससुर रामगोपाल की स्थिति गंभीर बनी हुई है।

नि-क्षय शिविर का मुख्यमंत्री डॉ. यादव वर्चुअली करेंगे अभियान का शुभारंभ

भोपाल उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने कहा है कि टीबी, जिसे कभी लाइलाज माना जाता था, अब सघन और समर्पित प्रयासों से समाप्ति के करीब है। राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम को और प्रभावी बनाने के लिए 7 दिसंबर 2024 से 25 मार्च 2025 तक “100 दिवसीय निक्षय शिविर” आयोजन किया जा रहा है। इस अभियान का उद्देश्य टीबी उन्मूलन के प्रयासों को और अधिक गति देना और जन-जागरूकता को बढ़ावा देना है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अभियान का वर्चुअल शुभारंभ करेंगे। उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ल ने स्वास्थ्य कर्मियों और आमजन से इस अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि जैसे हमने कोविड महामारी में एकजुट होकर हर व्यक्ति तक जाँच और उपचार सुनिश्चित किया, वैसे ही इन 100 दिनों में हमें टीबी की व्यापक स्तर पर स्क्रीनिंग, जाँच, उपचार और जन-जागरूकता को सुनिश्चित करना है। उन्होंने स्वास्थ्य कर्मियों से आह्वान किया कि पूर्ण समर्पण से अभियान को सफल बनाने के लिए अपना योगदान दें। उन्होंने आमजन से स्वास्थ्य कर्मियों को सहयोग प्रदान करने की अपील की है, जिससे समाज का सशक्त और स्वस्थ भविष्य सुनिश्चित किया जा सके। 100 दिवसीय नि-क्षय शिविर अंतर्गत गतिविधियाँ प्रदेश में क्षय रोग (टी.बी.) के उन्मूलन के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत 100 दिवसीय नि-क्षय शिविर का आयोजन किया जा रहा है। यह अभियान प्रदेश के 23 उच्च-प्राथमिकता वाले जिलों नरसिंहपुर, दतिया, सिंगरोली, डिन्डौरी, खण्डवा, कटनी, अनुपपूर, अलिराजपुर जबलपुर, नीमच, रतलाम, मंदसौर, छतरपुर, उज्जैन, सीधी, श्योपुर, बैतूल, छिन्दवाडा, विदिशा, दमोह, मंडला, सीहोर और सिवनी में 7 दिसंबर से प्रारंभ होगा। इस शिविर का उद्देश्य उच्च जोखिम वाले मरीजों की स्क्रीनिंग, जांच, और उचित उपचार प्रदान करना है। इस अभियान के अंतर्गत समस्त आयुष्मान आरोग्य मंदिर (उपस्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, शहरी/ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्र, और मुख्यमंत्री संजीवनी क्लीनिक) के माध्यम से उच्च जोखिम वाले व्यक्तियों और टी.बी. के मरीजों की स्क्रीनिंग एवं जांच की जाएगी। 100 दिवसीय नि-क्षय शिविर के तहत विभिन्न स्वास्थ्य कार्यक्रमों और जागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा। इसमें प्रमुख रूप से मधुमेह पीड़ित, कुपोषित, धूम्रपान करने वाले, शराब सेवन करने वाले, पूर्व टीबी मरीज, संपर्क व्यक्ति और एचआईवी संक्रमित व्यक्तियों की जानकारी जुटाई जाएगी। शिविरों का आयोजन प्रमुख सार्वजनिक स्थानों जैसे रेलवे और बस स्टेशनों, सामूहिक स्थानों, छात्रावास, आयुष्मान आरोग्य मंदिर (AAM), और स्थानीय स्वास्थ्य केंद्रों पर किया जाएगा। नि-क्षय शिविरों का आयोजन कारखानों, उद्योगों, ईंट भट्टों, निर्माण स्थलों, पत्थर क्रशरों और अन्य ऐसे कार्यस्थलों पर भी किया जाएगा, जिससे श्रमिक वर्ग और अन्य संवेदनशील वर्गों तक इस अभियान का लाभ पहुँच सके। शिविरों का आयोजन पंचायत संस्थाओं, शहरी स्थानीय निकायों, स्वसहायता समूहों, जन आरोग्य समिति, महिला आरोग्य समिति, और ग्राम स्वास्थ्य पोषण एवं स्वच्छता समिति के साथ मिलकर जागरूकता कार्यक्रम चलाया जायेगा। नए निक्षय मित्रों और टीबी चैंपियंस/विजेताओं की पहचान की जाएगी, जिससे उनकी सहभागिता से अभियान को और गति दी जा सके। त्यौहारों और मेलों के दौरान धार्मिक गुरुओं के माध्यम से जागरूकता संदेश प्रसारित किए जाएंगे। स्कूलों और कॉलेजों में कला और सांस्कृतिक गतिविधियाँ, रैलियाँ आयोजित की जाएंगी। स्वास्थ्य विभाग के अलावा अन्य सरकारी विभागों में “नि-क्षय सप्ताह” के आयोजन के अन्तर्गत जागरूकता सत्र, निक्षय शिविर, टीबी शपथ एवं प्रतियोगिताएँ भी आयोजित की जाएंगी।  

मध्य प्रदेश में लाड़ली बहनों के लिए खुशियों की घंटी फिर बजने वाली, 1 करोड़ 29 लाख बहनों के खाते में योजना की अगली किस्त की राशि जल्द आने वाली

भोपाल  मध्य प्रदेश में लाड़ली बहनों के लिए खुशियों की घंटी फिर बजने वाली है. प्रदेश की 1 करोड़ 29 लाख बहनों के खाते में लाड़ली बहना योजना की अगली किस्त की राशि आने वाली है. ये इस बरस की आखिरी किस्त है. ऐसी उम्मीद जताई जा रही है कि साल के आखिरी किस्त तय तारीख से पहले भी आ सकती है. माना जा रहा है कि इस बार तय तारीख 10 दिसम्बर के पहले लाड़ली बहनों को इस योजना की 19वी किस्त के रुप में 1250 रुपए की धनराशि भेजी जा सकती हैं. वहीं संभावना ऐसी भी है कि जनवरी 2025 से मोहन सरकार लाड़ली बहनों की किस्त में इजाफा भी कर सकती है. तारीख से पहले आ सकती है लाड़ली बहना की किस्त ! लाड़ली बहना योजना की दिसंबर महीने की किस्त क्या 10 दिसम्बर से पहले भी आ सकती है. ये इस बरस की आखिरी किस्त है. 1250 की ये किस्त समय से पहले भी लाड़ली बहनों के खाते में डाली जा सकती है. ये लाड़ली बहना योजना की 19वी किस्त होगी. त्योहार के समय में जिस तरह से नियत समय से पहले ये राशि लाड़ली बहनों के खाते में डाली गई, क्या इस बार भी ऐसा होगा. हालांकि इस बारे में सरकार की ओर से कोई पुष्टि नहीं की गई है. क्या अगले महीने से बढ़ जाएगी लाड़ली बहना की राशि चर्चा ये भी है कि जनवरी 2025 से लाड़ली बहना योजना की राशि में इजाफा हो सकता है. असल में बुधनी और विजयपुर विधानसभा चुनाव के दौरान सीएम डॉ मोहन यादव ने इस बात के संकेत दिए थे कि वे लाड़ली बहना योजना की राशि में वादे के मुताबिक किस्त की राशि बढ़ाई भी जा सकती है. सीएम डॉ मोहन यादव ने कहा था कि जो वादा किया गया है. लाड़ली बहनों से पूरा किया जाएगा. उसी के बाद से ये अटकलें तेज हो गई कि क्या नए वर्ष की शुरुआत से सरकार लाड़ली बहनों की राशि बढ़ा सकती है. बीजेपी के मीडिया प्रभारी आशीष अग्रवाल कहते हैं, “इसमें दो राय नहीं कि लाड़ली बहन-बेटियों के लिए समर्पित है. हमारी सरकार और उनके आर्थिक आत्मनिर्भरता से लेकर उन्हें हर तरह का संबल देने के प्रयास सरकार की ओर से किए जा रहे हैं. सरकार ने लाड़ली बहनों से जो वादा किया है. वो भी पूरे होंगे. बीजेपी की सरकार ने पूर्व में भी अपने वचन पूरे किए हैं और इस बार भी सरकार पूरी तरह से प्रतिबद्ध है.” कब शुरु हुई थी योजना, लाड़ली बहनों का कितना बजट एमपी में लाड़ली बहना अकेली ऐसी योजना है. जिसके लिए सरकार ने बजट में हमेशा विशेष प्रावधान किए हैं. 2023 में शुरु की गई योजना में पहले साल 12 हजार करोड़ का प्रावधान किया गया था. 23 से साठ वर्ष की महिलाओं के लिए हर महीने हजार रुपए की धनराशि का प्रावधान शुरुआत में किया गया, जो बढ़कर 1250 रुपए का प्रावधान कर दिया गया. पांच वर्षों लक्ष्य में इसे 60 हजार करोड़ इसका बजट माना गया था. जब किस्त की धनराशि 1250 कर दी गई, तो बजट में भी प्रावधान किया गया. अब तैयारी ये है कि 2025 के बजट में महिला बाल विकास विभाग के साथ महिलाओं पर केन्द्रित योजनाओं के लिए धनराशि बढ़ाई जाए.  

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