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नलखेड़ा में प्रशासनिक कार्यशैली पर सवाल: विवादों में घिरे एसडीएम सर्वेश यादव, मिलिंद ढोके का कार्यकाल बना मिसाल

Questions on administrative working style in Nalkheda: SDM Sarvesh Yadav surrounded by controversies, tenure of Milind Dhoke became an example संवाददाता चंदा कुशवाह  नलखेड़ा । नलखेड़ा स्थित मां बगलामुखी मंदिर से जुड़े हालिया घटनाक्रम के बाद एसडीएम सर्वेश यादव की कार्यशैली को लेकर तीखी नाराजगी सामने आ रही है। मंदिर के पंडितों और स्थानीय लोगों का आरोप है कि वर्तमान एसडीएम ने धार्मिक मामलों में अनावश्यक दखल दिया, बिना संवाद के फैसले थोपे और मर्यादित भाषा व व्यवहार का पालन नहीं किया। लोगों का कहना है कि ऐसे रवैये के कारण ही मंदिर में हवन-अनुष्ठान तक रोकने जैसी स्थिति बनी और माहौल तनावपूर्ण हो गया। पंडितों की चेतावनी और बढ़ते आक्रोश के बाद प्रशासन को हस्तक्षेप करना पड़ा और अंततः एसडीएम को मंदिर कार्यों से हटाने का निर्णय लिया गया, जिसे कई लोग देर से लिया गया कदम बता रहे हैं। इसी बीच नलखेड़ा में पूर्व एसडीएम मिलिंद ढोके के कार्यकाल की खुलकर सराहना होने लगी है। स्थानीय नागरिकों और मंदिर से जुड़े लोगों का कहना है कि ढोके के समय प्रशासनिक कामकाज संतुलित, संवेदनशील और संवाद आधारित रहा। उनके कार्यकाल में मंदिर में चांदी से संबंधित महत्वपूर्ण कार्य कराए गए, व्यवस्थाएं बेहतर हुईं और किसी भी प्रकार का विवाद सामने नहीं आया। पंडित समाज और श्रद्धालु उस दौर को शांति और सहयोग का उदाहरण बताते हैं। लोगों का मानना है कि मिलिंद ढोके की कार्यप्रणाली अलग थी, जहां आदेश से पहले संवाद और शक्ति से पहले समझदारी को प्राथमिकता दी जाती थी। इसी तुलना के बीच अब क्षेत्र में यह चर्चा तेज है कि नलखेड़ा जैसे संवेदनशील धार्मिक स्थल के लिए विवाद पैदा करने वाली नहीं, बल्कि भरोसा बनाने वाली प्रशासनिक शैली की जरूरत है, जैसी पूर्व में देखने को मिली थी।

मां बगलामुखी मंदिर विवाद: एसडीएम की तानाशाही से भड़के पंडित, हवन बंद कर प्रशासन को झुकाया

Maa Baglamukhi Temple Dispute: Pandits enraged by SDM’s dictatorship, stopped havan and forced the administration to bow down संवाददाता चंदा कुशवाह  नलखेड़ा । नलखेड़ा स्थित मां बगलामुखी मंदिर में उत्पन्न विवाद ने प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मंदिर के पंडितों का आरोप है कि सुसनेर के एसडीएम ने लगातार मंदिर के धार्मिक कार्यों में अनावश्यक दखल दिया, बिना किसी समन्वय के आदेश थोपे और पूजा-पद्धति को बाधित किया। पंडितों का कहना है कि एसडीएम का व्यवहार तानाशाहीपूर्ण रहा और उन्होंने बातचीत के दौरान अभद्र भाषा का प्रयोग किया। इतना ही नहीं, आरोप है कि एसडीएम स्वयं को मुख्यमंत्री का रिश्तेदार बताकर पंडितों और मंदिर प्रबंधन पर दबाव बनाते रहे, जिससे भय और असंतोष का माहौल बना। इस रवैये से आक्रोशित होकर पंडितों ने हवन-अनुष्ठान बंद कर दिया और खुली चेतावनी दी कि यदि एसडीएम को तत्काल नहीं हटाया गया तो उन्हें जूतों की माला पहनाकर मंदिर परिसर से बाहर छोड़ा जाएगा। स्थिति के बिगड़ते ही प्रशासन पर दबाव बढ़ा, जिसके बाद एडीएम ने सख्ती दिखाते हुए एसडीएम को तत्काल प्रभाव से मंदिर से जुड़े सभी कार्यों से मुक्त कर दिया। इस कार्रवाई को पंडितों ने प्रशासन की मजबूरी में उठाया गया कदम बताया और कहा कि यदि समय रहते एसडीएम को नहीं रोका जाता तो मंदिर की गरिमा और धार्मिक स्वतंत्रता को गहरा नुकसान पहुंचता।

घरौला रोड पर नलखेड़ा पुलिस का जागरूकता अभियान, नागरिकों ने हेलमेट पहनने का लिया संकल्प।

Awareness campaign of Nalkheda Police on Gharaula Road, citizens took a pledge to wear helmets. चंदा कुशवाह (सहारा समाचार) नलखेड़ा। आज घरौला रोड पर नलखेड़ा पुलिस द्वारा यातायात सुरक्षा जागरूकता अभियान चलाया गया। अभियान में बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक मौजूद रहे। पुलिस टीम ने लोगों को सड़क सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण नियमों की जानकारी देते हुए हेलमेट पहनने की आवश्यकता और महत्व पर विशेष रूप से जोर दिया। कार्यक्रम के दौरान पुलिस द्वारा हादसों से संबंधित जागरूकता वीडियो भी प्रदर्शित किए गए, जिनमें यह दिखाया गया कि हेलमेट न पहनने की छोटी सी गलती किस तरह बड़े हादसे और नुकसान का कारण बन सकती है। वीडियो देखने के बाद उपस्थित नागरिकों ने विषय को गंभीरता से समझा। पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट रूप से बताया कि हेलमेट केवल कानूनी नियम नहीं, बल्कि जीवन सुरक्षा का महत्वपूर्ण कवच है। अभियान के अंत में सभी नागरिकों ने नियमित रूप से हेलमेट पहनने का संकल्प लिया और सड़क सुरक्षा नियमों का पालन करने का भरोसा भी दिलाया।

नलखेड़ा में प्रशासनिक कार्रवाई के बाद दुकानदार की मौत

Shopkeeper dies after administrative action in Nalkheda चंदा कुशवाह संवाददातानलखेड़ा। बगलामुखी मंदिर के पास स्थित राम मंदिर की भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के अगले ही दिन स्थानीय दुकानदार ललित चौहान की मौत ने पूरे कस्बे में गहरा आक्रोश पैदा कर दिया है।परिजनों का सीधा आरोप है कि SDM, तहसीलदार, SDOP और TI की मौजूदगी में बिना किसी पूर्व सूचना उनकी दुकान गिरा दी गई, जिसके सदमे में ललित चौहान गंभीर मानसिक तनाव में चले गए और आज सुबह 4 बजे हार्ट अटैक से उनकी मौत हो गई।बिना बताए तोड़ी दुकान… रातभर सो नहीं पाए”—परिवार का आरोप परिजनों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार: परिवार का कहना है—“ललित जी रातभर यही बोलते रहे—मेरी रोज़ी-रोटी खत्म हो गई… और सुबह उनकी सांस ही रुक गई।”कस्बे में प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल—‘क्या यह मौत टाली जा सकती थी?’ स्थानीय व्यापारियों और नागरिकों का कहना है कि: प्रशासन ने राम मंदिर की भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई में अत्यधिक तेजी और सख्ती दिखाई। मौके पर SDM सर्वेश यादव, तहसीलदार प्रियांक श्रीवास्तव, SDOP, TI, व राजस्व अमला मौजूद था,पर दुकानदारों को सामान निकालने या तैयारी करने का मौका नहीं दिया गया। लोग सवाल उठा रहे हैं कि:“धार्मिक भूमि खाली कराना सही है, लेकिन बिना नोटिस लोगों की रोज़ी-रोटी तोड़ देना क्या उचित है?”कस्बे में यह चर्चा तेज है कि प्रशासन की जल्दबाजी और संवेदनहीनता ने यह त्रासदी पैदा की।कुछ जगह विरोध, कई दुकानें गिरीं—ललित पर सबसे ज्यादा असर प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार: कई लोगों ने विरोध किया, लेकिन प्रशासन ने कार्रवाई जारी रखी।कई दुकानों पर JCB चली। परिजनों का दावा है कि दुकान टूटते ही ललित चौहान मानसिक रूप से टूट गए,क्योंकि उनकी पूरी आजीविका उसी दुकान पर निर्भर थी।परिजनों ने SDM–तहसीलदार–SDOP–TI पर गंभीर आरोप लगाए, जांच की मांग मृतक के परिवार ने कहा: “अगर प्रशासन थोड़ी संवेदनशीलता दिखाता… नोटिस देता… तैयारी का समय देता… तो यह मौत नहीं होती।” परिवार ने संबंधित अधिकारियों पर मानवीय लापरवाही का आरोप लगाते हुएउच्चस्तरीय जांच और कार्रवाई की मांग की है। कस्बे में व्यापारियों के बीच भी यह मांग उठ रही है किअतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया कानूनन सही लेकिन मानवता के साथ होनी चाहिए।

नलखेड़ा: हाईकोर्ट के आदेश पर राम मंदिर की भूमि से हटाया गया अतिक्रमण

Nalkheda: Encroachment removed from Ram Temple land on High Court orders नलखेड़ा। बगलामुखी मंदिर के पास स्थित राम मंदिर की भूमि पर वर्षों पुराने विवाद का अध्याय आखिरकार शनिवार को बंद हो गया। हाईकोर्ट के आदेश के बाद प्रशासन ने विवादित भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की कार्रवाई शुरू की। कार्रवाई के दौरान राजस्व और पुलिस अमले की भारी संख्या में मौजूदगी रही। मौके पर पहुंचे अधिकारी, विरोध के बीच शुरू हुई कार्रवाई सुबह होते ही SDM सर्वेश यादव, तहसीलदार प्रियांक श्रीवास्तव मौके पर पहुँचे। उनके साथ पटवारी पंकज वर्मा,पटवारी चिराग शर्मा,पटवारी राजेश घावरी, पटवारी रामपाल सिंह तोमर, अन्य पटवारी, राजस्व अमला तथा पुलिस टीम तैनात की गई। कार्रवाई शुरू होते ही कुछ लोगों ने विरोध जताया, जिस कारण थोड़ी देर के लिए विवाद की स्थिति बनी। पुलिस और प्रशासन की समझाइश के बाद माहौल नियंत्रित किया गया। कई लोगों ने समझाइश के बाद खुद ही हटाया अतिक्रमण हाईकोर्ट के आदेश का हवाला देने पर कई दुकानदारों ने स्वेच्छा से अपनी दुकानें, शेड और सामान हटाना शुरू कर दिया। प्रशासन ने इसे सकारात्मक माना और कहा कि स्वेच्छा से हटाया गया अतिक्रमण प्रक्रिया को काफी आसान बना देता है। कुछ जगह नहीं माने लोग, SDM के निर्देश पर चलाई गई JCB जहाँ लोगों ने अतिक्रमण हटाने में सहयोग नहीं किया, वहाँ SDM सर्वेश यादव के निर्देश पर JCB लगाई गई। सीमांकन के आधार पर अतिक्रमण हटवाया गया और विवादित भूमि को पूरी तरह साफ करवाया गया। पुलिस बल पूरे समय मौजूद रहा जिससे किसी तरह की अव्यवस्था नहीं हुई। भूस्वामी क्षेत्र को किया गया अतिक्रमण मुक्त, प्रशासन की सख्त चेतावनी कार्रवाई पूरी होने के बाद प्रशासन की ओर से स्पष्ट कहा गया कि धार्मिक एवं सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे किसी भी हालत में स्वीकार नहीं किए जाएंगे। हाईकोर्ट के आदेश का पालन सर्वोपरि है और भविष्य में भी इस तरह की कार्रवाई जारी रहेगी।

संगठन को नई दिशा: रोहित सकलेचा ने संभाली नलखेड़ा मंडल अध्यक्ष की कमान

New direction to the organization: Rohit Saklecha took over as Nalkheda Mandal President चंदा कुशवाह (संवाददाता) नलखेड़ा। भारतीय जनता पार्टी संगठन में नलखेड़ा मंडल को नई ऊर्जा और दिशा देते हुए पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष एवं विधायक हेमंत खंडेलवाल ने सुसनेर विधानसभा के नलखेड़ा मंडल के नए मंडल अध्यक्ष के रूप में रोहित सकलेचा की नियुक्ति की है। यह निर्णय सामने आते ही पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर दौड़ गई। कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने ढोल-ढमाकों और फूल मालाओं के साथ उनका जोरदार स्वागत किया। रोहित सकलेचा अपने सरल स्वभाव, मिलनसार व्यक्तित्व और संगठन के प्रति समर्पण के लिए जाने जाते हैं। लंबे समय से वे पार्टी की विचारधारा को घर–घर तक पहुंचाने और युवा कार्यकर्ताओं को जोड़ने में सक्रिय रहे हैं। उनकी नियुक्ति को संगठन में नई ऊर्जा के रूप में देखा जा रहा है। मंडल अध्यक्ष बनने के बाद रोहित सकलेचा ने सबसे पहले मां बगलामुखी मंदिर में जाकर माता के दर्शन कर आशीर्वाद लिया। वहां उन्होंने नलखेड़ा के विकास और पार्टी की मजबूती के लिए संकल्प लिया। इसके पश्चात उन्होंने अपने गुरुदेव महामंडलेश्वर संदीपेंद्र जी महाराज से आशीर्वाद प्राप्त किया। रोहित सकलेचा ने कहा— “यह पद मेरे लिए सम्मान के साथ बड़ी जिम्मेदारी भी है। मैं संगठन को मजबूत करने, कार्यकर्ताओं को जोड़ने और नलखेड़ा के विकास कार्यों को गति देने के लिए पूरी निष्ठा से कार्य करूंगा।” कार्यकर्ताओं ने इसे संगठन की नई दिशा बताते हुए कहा कि सकलेचा के नेतृत्व में पार्टी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। स्थानीय नागरिकों ने भी उनके चयन को सराहनीय बताते हुए कहा कि वे हर वर्ग के लोगों से जुड़े हुए हैं और हमेशा सेवा भाव के साथ उपलब्ध रहते हैं। नगर व क्षेत्र के वरिष्ठ नागरिकों, युवा कार्यकर्ताओं, व्यापारियों और समाजसेवियों ने भी रोहित सकलेचा को शुभकामनाएं प्रेषित की।

नलखेड़ा आए मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल: जनपद अध्यक्ष प्रतिनिधि मुकेश चौहान ने किया सम्मान, विकास पर हुई अहम बैठक

Minister Prahlad Singh Patel came to Nalkheda: District President representative Mukesh Chauhan honored him, an important meeting was held on development संवाददाता चंदा कुशवाह नलखेड़ा /आगर मालवा। मंगलवार को नलखेड़ा में पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा श्रम मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल का आगमन हुआ। जनपद पंचायत नलखेड़ा के जनपद अध्यक्ष प्रतिनिधि मुकेश चौहान ने मंत्री का भव्य स्वागत किया। कार्यक्रम में पूर्व नगर अध्यक्ष प्रेम राठौरे और जनपद उपाध्यक्ष ईश्वर साई ने भी मंत्री का सम्मान किया और उन्हें नलखेड़ा आने के लिए आमंत्रित करने की पहल की। तीनों जनप्रतिनिधियों की संयुक्त उपस्थिति ने कार्यक्रम को और महत्वपूर्ण बना दिया। स्वागत के बाद मंत्री पटेल और जनप्रतिनिधियों की बैठक में नलखेड़ा जनपद के विकास कार्यों पर विस्तार से चर्चा हुई। इसमें ग्रामीण सड़कों के पक्के निर्माण, नल-जल योजनाओं को गति, पंचायत भवनों का नवीनीकरण, मनरेगा कार्य, आवास योजना के लंबित प्रकरणों का समाधान, श्रमिक पंजीयन, नाली निर्माण, सफाई व्यवस्था और स्ट्रीट लाइट जैसी मूलभूत सुविधाओं पर विशेष रूप से बात हुई। जनपद अध्यक्ष प्रतिनिधि मुकेश चौहान ने गांवों की वास्तविक समस्याएँ सामने रखते हुए मंत्री को महत्वपूर्ण प्रस्ताव सौंपे। बैठक में पूर्व नगर अध्यक्ष प्रेम राठौरे ने नगर क्षेत्र की समस्याओं का विस्तृत विवरण रखा। उन्होंने विशेष रूप से माँ बगलामुखी मंदिर क्षेत्र के विकास पर जोर दिया। राठौरे ने कहा कि मंदिर परिसर में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु आते हैं, इसलिए सड़क सुधार, पार्किंग, सुरक्षा, प्रकाश व्यवस्था और पेयजल जैसी सुविधाओं को मजबूत किया जाना आवश्यक है। मंत्री पटेल ने इस पर गंभीरता से प्रतिक्रिया देते हुए मंदिर क्षेत्र के लिए अलग से कार्ययोजना तैयार करने का आश्वासन दिया। वहीं जनपद उपाध्यक्ष ईश्वर साई ने ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की धीमी प्रगति पर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि कई पंचायतों में आवास, नालियों, मनरेगा कार्यों और पेयजल से जुड़े कार्य समय पर पूरे नहीं हो रहे हैं। उन्होंने इन कार्यों को तेजी से पूर्ण कराने की मांग रखते हुए मंत्री के सामने जनपद की प्राथमिक आवश्यकताओं को स्पष्ट किया। मंत्री ने इस पर विभागीय अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि नलखेड़ा क्षेत्र के लंबित कार्यों पर तुरंत कार्रवाई की जाए। मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा कि नलखेड़ा जैसे उभरते जनपद में विकास कार्यों को गति देना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा, “गांवों में सड़क, पानी, स्वच्छता और रोजगार से जुड़े कार्यों को तेजी से पूरा कराया जाएगा। विभागीय योजनाओं का लाभ सीधे ग्रामीणों तक पहुँचना चाहिए।” कार्यक्रम के दौरान कई सरपंचों और ग्रामीणों ने भी अपने-अपने गाँवों की समस्याओं से जुड़े ज्ञापन मंत्री को सौंपे। मंत्री ने सभी ज्ञापनों का संज्ञान लिया और जल्द समाधान का आश्वासन दिया। समापन पर जनपद अध्यक्ष प्रतिनिधि मुकेश चौहान, पूर्व नगर अध्यक्ष प्रेम राठौरे और जनपद उपाध्यक्ष ईश्वर साई ने मंत्री का आभार व्यक्त किया। स्थानीय नागरिकों ने कहा कि मंत्री का यह दौरा नलखेड़ा में विकास कार्यों की रफ्तार को और तेज करेगा।

नलखेड़ा को बड़ी सौगात: हेलीकॉप्टर सेवा के सेक्टर-1 में शामिल हुआ नलखेड़ा, पूर्व नगर अध्यक्ष प्रेम राठौर की मेहनत से खुला रास्ता; किराया और शुरू होने की तारीख जल्द घोषित होगी

Nalkheda gets a big gift: Nalkheda joins Sector-1 of helicopter service चंदा कुशवाह संवाददाता नलखेड़ा । मध्यप्रदेश सरकार द्वारा आरंभ की गई नई हवाई पर्यटन सेवा में अब नलखेड़ा का नाम भी शामिल कर लिया गया है। इस निर्णय के बाद नलखेड़ा को आधिकारिक रूप से प्रथम सेक्टर की सूची में स्थान मिल गया है। यह कदम नलखेड़ा के विकास और धार्मिक पर्यटन के विस्तार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस पूरे प्रयास का सबसे बड़ा श्रेय पूर्व नगर अध्यक्ष प्रेम राठौर को दिया जा रहा है, जिन्होंने लगातार प्रयास करते हुए नलखेड़ा को इस हवाई मार्ग में जोड़ने की माँग को मजबूती से उठाया। विभागीय अधिकारियों से मुलाकातें, लिखित प्रस्ताव और लगातार आग्रह—इन सभी प्रयासों के कारण अंततः नलखेड़ा को इस सेवा से जोड़ने की मंजूरी मिल पाई। नलखेड़ा माँ बगलामुखी धाम के कारण देशभर के श्रद्धालुओं का प्रमुख धार्मिक केंद्र है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहाँ पहुँचते हैं, ऐसे में हवाई सेवा शुरू होने से श्रद्धालुओं को भारी सुविधा मिलेगी और यात्रा का समय भी कम होगा। पर्यटन विभाग का मानना है कि इस सेवा से क्षेत्र में व्यापार, आवागमन, होटल व्यवसाय और स्थानीय रोजगार को बड़ा लाभ मिलेगा। इससे नलखेड़ा का नाम धार्मिक पर्यटन के मानचित्र पर और अधिक प्रमुखता से उभरेगा। विभाग ने अभी उड़ानों के मार्ग, समय और किराये की अंतिम घोषणा नहीं की है, परंतु संकेत मिले हैं कि अन्य धार्मिक स्थलों की तरह नलखेड़ा का किराया भी पाँच से सात हजार रुपये के बीच रह सकता है। अधिकारियों के अनुसार, नलखेड़ा के हेलीपैड का निरीक्षण अगले सप्ताह किया जाएगा, जिसके बाद परीक्षण उड़ान कराई जाएगी। परीक्षण पूरा होते ही सेवा के शुरू होने की तारीख सार्वजनिक कर दी जाएगी। अनुमान है कि यह सेवा अगले तीन से चार सप्ताह में प्रारंभ हो सकती है, यदि सभी तकनीकी औपचारिकताएँ समय पर पूरी हो जाएँ। सेवा को लेकर नलखेड़ा में भारी उत्साह देखा जा रहा है। मंदिर क्षेत्र, दुकानदारों और स्थानीय जनता का कहना है कि यह कदम नलखेड़ा को नई पहचान देगा और श्रद्धालुओं की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। पूर्व नगर अध्यक्ष प्रेम राठौर ने इसे नलखेड़ा के विकास की दिशा में ऐतिहासिक निर्णय बताया और कहा कि यह सफलता जनता के सहयोग और निरंतर प्रयासों का परिणाम है।

कलेक्टर की फटकार भी बेअसर! महीनों पुराना ड्यूटी चार्ट आज भी टंगा — कौन संभाल रहा अस्पताल?

Even the Collector’s reprimand is ineffective! Months-old duty charts still hang—who’s managing the hospital? चंदा कुशवाहनलखेड़ा ! सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नलखेड़ा की अव्यवस्थाएँ अब नियंत्रण से बाहर होती जा रही हैं। आलम यह है कि कुछ माह पूर्व कलेक्टर के आकस्मिक निरीक्षण के दौरान डॉक्टरों का जो ड्यूटी चार्ट लगाया गया था, वह आज भी 24/09/25 की उसी तारीख के साथ जस का तस टंगा हुआ है। न तारीख बदली गई, न नई सूची जारी हुई। यह देखकर साफ होता है कि अस्पताल प्रबंधन के लिए मरीजों की सुविधा किसी मजाक से कम नहीं है। ड्यूटी चार्ट न होने के कारण रोजाना सैकड़ों मरीज अस्पताल में भटकते रहते हैं। कौन-सा डॉक्टर कब उपलब्ध होगा—इसकी जानकारी तक उन्हें नहीं मिलती। इससे बड़ी शर्म की बात और क्या हो सकती है कि सरकारी अस्पताल में लोगों को घंटों इंतज़ार करना पड़ता है, जबकि कई डॉक्टर अपने सरकारी समय में खुलेआम निजी क्लीनिकों पर बैठकर कमाई में लगे रहते हैं। अस्पताल में मरीज तड़पते रहें, यह उनकी प्राथमिकता में ही नहीं है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह अव्यवस्था कोई नई नहीं है। अस्पताल में अनुशासन नाम की चीज़ बची ही नहीं है। ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर डॉ. विजय यादव तो मानो पूरे मामले से पूरी तरह पल्ला झाड़ चुके हैं। उनकी उदासीनता और कुप्रबंधन ने अस्पताल की प्रणाली को लगभग ठप कर दिया है। डॉक्टरों और कर्मचारियों पर किसी प्रकार की अनुशासनात्मक पकड़ नहीं रह गई है — जो चाहे जब चाहे मनमानी कर रहा है। नागरिकों का आरोप है कि डॉ. यादव की लापरवाही अब सीधे मरीजों की जान पर बन आई है। करोड़ों रुपये खर्च कर सरकार अस्पतालों में इलाज की व्यवस्था करती है, लेकिन यहां डॉक्टर सरकारी अस्पताल में उपलब्ध ना होकर मरीजों को उनके निजी क्लीनिकों पर बुला रहे हैं। इस तरह की हरकतें न सिर्फ सेवा शर्तों का खुला उल्लंघन हैं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर सीधी लूट है। मरीजों और उनके परिजनों ने मीडिया के माध्यम से स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से मांग की है कि नलखेड़ा अस्पताल की अव्यवस्थाओं और बीएमओ डॉ. विजय यादव की लापरवाही की उच्च स्तरीय जांच कर कठोर कार्रवाई की जाए। साथ ही तत्काल अपडेटेड ड्यूटी चार्ट जारी किया जाए, ताकि मरीजों को इस जानलेवा अव्यवस्था से राहत मिल सके।

नलखेड़ा में बाल दिवस पर पूर्व नगर अध्यक्ष प्रेम राठौर ने बच्चों संग बिताया समय, दिए संस्कार और प्रेरणा से भरे संदेश

Former city president Prem Rathore spent time with children on Children’s Day in Nalkheda, imparting values and inspirational messages. चंदा कुशवाह नलखेड़ा । बाल दिवस के अवसर पर आज नलखेड़ा में एक स्नेहपूर्ण और प्रेरणादायी कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें पूर्व नगर अध्यक्ष प्रेम राठौर ने स्थानीय बच्चों को आमंत्रित कर उनके साथ समय बिताया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य बच्चों को अच्छे संस्कार, आत्मविश्वास और जीवन में सही दिशा देने का था। प्रेम राठौर ने बच्चों से सरल और प्रेरक शब्दों में कहा कि— “जीवन में इंसान की असली पहचान उसके व्यवहार और कर्मों से होती है। हमेशा सच बोलें, अच्छे कर्म करें और कभी भी गलत रास्ते पर न चलें। वही बच्चा भविष्य में सफल होता है जो ईमानदारी और मेहनत को अपना साथी बनाता है।” उन्होंने बच्चों को शिक्षा का महत्व समझाया और बताया कि पढ़ाई सिर्फ नौकरी के लिए नहीं, बल्कि एक बेहतर इंसान बनने की समझ देती है। कार्यक्रम के दौरान प्रेम राठौर ने बच्चों के साथ हँसी-खुशी समय बिताया, उनके साथ खेल-कूद भी किए और बाल दिवस की शुभकामनाएँ दीं। माहौल पूर्णतः पारिवारिक और सौहार्दपूर्ण रहा। बच्चों को दिए उपहार: इस अवसर पर प्रेम राठौर ने बच्चों को टॉफ़ी, टिफिन बॉक्स, कॉपी-पेंसिल, स्टोरी बुक्स और चॉकलेट्स भेंट किए। उपहार पाकर बच्चों के चेहरों पर खुशी साफ दिखाई दे रही थी। स्थानीय लोगों ने पूर्व नगर अध्यक्ष की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि “बच्चों के बीच जाकर समय बिताना ही असली बाल दिवस है। इससे बच्चों में सामाजिक मूल्यों और संस्कारों को बढ़ावा मिलता है।” नलखेड़ा में बाल दिवस का यह आयोजन बच्चों के लिए यादगार रहा और समाज में सकारात्मक संदेश छोड़ गया।

शासकीय अधिवक्ता किशोर सिंह राजपूत ने किया पत्रकार राजेश शर्मा का सम्मान, विभागीय तालमेल का उत्कृष्ट उदाहरण

Government Advocate Kishore Singh Rajput honored journalist Rajesh Sharma, an excellent example of departmental coordination. नलखेड़ा । प्रशासन और मीडिया के बीच बेहतर तालमेल और आपसी सहयोग की मिसाल शुक्रवार को तब देखने को मिली, जब शासकीय अधिवक्ता (Govt. Lawyer) किशोर सिंह राजपूत ने अपनी ओर से पत्रकार राजेश शर्मा का सम्मान किया। यह सम्मान न केवल व्यक्तिगत सौहार्द का प्रतीक है, बल्कि विभागीय समन्वय और जनहित के प्रति साझा जिम्मेदारी को भी प्रदर्शित करता है। सम्मान समारोह के दौरान अधिवक्ता किशोर सिंह राजपूत ने कहा कि “पत्रकार समाज की सशक्त आवाज़ होते हैं। जनहित, समस्याओं और स्थानीय मुद्दों को ईमानदारी से सामने लाने वाला पत्रकार प्रशासन की बड़ी ताकत होता है। राजेश शर्मा जैसे जिम्मेदार पत्रकारों का सम्मान करना वास्तव में गर्व की बात है।” पत्रकार राजेश शर्मा ने भी सम्मान के लिए धन्यवाद व्यक्त करते हुए कहा कि “नलखेड़ा में प्रशासन, न्यायिक विभाग और मीडिया हमेशा एक-दूसरे के सहयोगी रहे हैं। शासकीय अधिवक्ता किशोर सिंह राजपूत जैसे अनुभवी और विनम्र अधिकारी हमें सत्य और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए प्रेरित करते हैं।” स्थानीय स्तर पर शासकीय अधिवक्ता और पत्रकार के बीच इस सौहार्दपूर्ण रिश्ते को लोगों ने “सकारात्मक संवाद और मजबूत विभागीय तालमेल” की अनूठी मिसाल बताया। नलखेड़ा क्षेत्र में यह पहल मीडिया और प्रशासन के बीच भरोसे और सहयोग को और मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

नलखेड़ा के जंगलों में वन विभाग की लापरवाही: रात में हो रही अवैध पेड़ कटाई और लकड़ी तस्करी बेखौफ जारी

Forest department negligence in Nalkheda forests: Illegal tree felling and timber smuggling continue unabated at night चंदा कुशवाह  नलखेड़ा । क्षेत्र के जंगलों में इन दिनों अवैध पेड़ कटाई और लकड़ी तस्करी के मामले गंभीर रूप ले चुके हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, वन विभाग के नाक के नीचे लगातार पेड़ों पर कुल्हाड़ी चल रही है, लेकिन विभाग की ओर से न तो किसी तरह की निगरानी बढ़ाई गई है और न ही कोई ठोस कार्रवाई की गई है। ग्रामीण बताते हैं कि रात के समय जंगलों में ट्रैक्टर, पिकअप और ट्रॉलियां घूमती दिखाई देती हैं, जिनमें सागौन, बबूल और अन्य मूल्यवान लकड़ी को भरकर बाहर ले जाया जाता है। कई लोगों ने रात में चेनसॉ से पेड़ काटने की आवाजें भी सुनी हैं, जिससे साफ होता है कि यह पूरा काम संगठित तरीके से चल रहा है। एक समय घने पेड़ों से आच्छादित यह क्षेत्र अब धीरे-धीरे उजाड़ होता जा रहा है। कई जगहों पर कटे हुए ठूंठ साफ दिखाई देते हैं, जिससे पता चलता है कि यहां बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई की गई है। ग्रामीणों का कहना है कि यह सब बिना किसी आंतरिक सहयोग के संभव नहीं है। उनका आरोप है कि कुछ वनकर्मी तस्करों से मिलकर काम कर रहे हैं, जिसकी वजह से तस्करी रात में बेरोक-टोक जारी रहती है और दिन में इस पूरे मुद्दे पर सन्नाटा पसरा रहता है। लोगों में यह भी चर्चा है कि केवल लकड़ी ही नहीं, बल्कि अन्य जंगली उत्पादों और संसाधनों की भी तस्करी की आशंका है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो पाई है। ग्रामीणों के मुताबिक, उन्होंने कई बार विभाग और प्रशासन को इस बारे में सूचित किया, परंतु अब तक कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया है। सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा होता है कि आखिर यह पूरा अवैध नेटवर्क किसकी शह पर चल रहा है। क्या वन विभाग को इन गतिविधियों की जानकारी नहीं है या यह जानबूझकर अनदेखा किया जा रहा है। यदि नहीं, तो इतने समय से हो रही पेड़ कटाई और तस्करी पर कार्रवाई अभी तक क्यों नहीं हुई। ग्रामीणों ने मांग की है कि जंगलों में रात के गश्त को बढ़ाया जाए, संदिग्ध वाहनों की जांच की जाए, वन विभाग के कर्मचारियों की भूमिका की जांच कर जिम्मेदारों पर कार्यवाही की जाए और जंगलों में सुरक्षा के उपायों को मजबूत किया जाए। उनका कहना है कि यदि इस अवैध कटाई पर तुरंत रोक नहीं लगाई गई, तो आने वाले वर्षों में नलखेड़ा का पर्यावरण गंभीर संकट का सामना करेगा और क्षेत्र की हरियाली हमेशा के लिए खत्म हो सकती है।

नलखेड़ा – निजी स्कूल बस संचालकों की मनमानी से बढ़ रहा है खतरा, प्रशासन मौन!

Nalkheda – The danger is increasing due to the arbitrariness of private school bus operators, the administration is silent! चंदा कुशवाह  नलखेड़ा। नगर में निजी स्कूल बस संचालकों द्वारा परिवहन नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। न तो वाहनों का फिटनेस प्रमाणपत्र जांचा जा रहा है, न ही सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा है। इन बस संचालकों ने नियम-कायदों को ताक पर रखकर अपनी मनमर्जी से बसें चलाना आम बात बना ली है। हर सुबह और दोपहर के समय इन बसों के कारण नगर की सड़कों पर भारी जाम की स्थिति बनी रहती है। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि बसें अब गलियों और मोहल्लों तक ले जाई जा रही हैं, जिससे आम नागरिकों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बसें ऐसी हैं जिनका फिटनेस, परमिट और बीमा तक संदिग्ध है, पर फिर भी वे रोजाना बच्चों को लेकर सड़कों पर दौड़ रही हैं। यह लापरवाही किसी बड़े हादसे को न्योता दे सकती है। फिर सवाल उठता है — आखिर प्रशासन कहाँ है? क्या जिम्मेदार अधिकारी किसी बड़ी दुर्घटना के इंतजार में हैं? जब तक कोई अप्रिय घटना नहीं होगी, क्या तब तक यह अनदेखी जारी रहेगी? जनता ने मांग की है कि प्रशासन तत्काल इस पर सख्त कार्रवाई करे, बसों का फिटनेस व परमिट जांच अभियान चलाए, और नलखेड़ा में नियम विरुद्ध बस संचालन पर रोक लगाए — ताकि बच्चों की सुरक्षा और आम जनता की सुविधा सुनिश्चित की जा सके।

नलखेड़ा में विकास के नाम पर विनाश! देवीलोक के पास ब्लास्टिंग से हिली मंदिर की नींव – प्रशासन खामोश क्यों?

Destruction in the name of development in Nalkheda! Blasting near Devilok shakes the foundation of a temple – why is the administration silent? चंदा कुशवाह संवाददाता नलखेड़ा। एक ओर अधिकारी कागज़ों पर “विकास” के दावे कर रहे हैं, वहीं जमीन पर विनाश की तस्वीर साफ दिखाई दे रही है। नलखेड़ा में विश्वप्रसिद्ध माँ बगलामुखी देवी मंदिर के पीछे बनाए जा रहे पुल निर्माण में खुलेआम ब्लास्टिंग की जा रही है — और यह सब प्रशासन की नाक के नीचे हो रहा है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, ठेकेदार द्वारा लगातार पत्थर तोड़ने के लिए विस्फोटक (ब्लास्टिंग) का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे इतना कंपन होता है कि मंदिर की दीवारें तक हिल जाती हैं। यह वही मंदिर है, जहाँ लाखों श्रद्धालु हर साल अपनी आस्था लेकर पहुँचते हैं। पर अब सवाल ये है — टेंडर किसने जारी किया? ब्लास्टिंग की अनुमति किस आधार पर दी गई? और सबसे बड़ा सवाल — इतिहासिक मंदिर की सुरक्षा का सर्वे कराया भी गया या नहीं? इन सवालों का जवाब न तो निर्माण एजेंसी दे रही है, न ही प्रशासन के पास कोई स्पष्ट बयान है। स्थानीय लोग गुस्से में हैं। उनका कहना है कि अगर यही “विकास” है, तो फिर यह मंदिर की नींव हिला देने वाला विकास है, न कि नलखेड़ा का गौरव बढ़ाने वाला। लोगों ने आरोप लगाया है कि “यह पूरा खेल भ्रष्टाचार की ब्लास्ट के नीचे दबा हुआ है — जहाँ पैसे की चमक ने श्रद्धा की दीवारें तक हिला दी हैं।” अब वक्त आ गया है कि अगर यही विकास की परिभाषा है, तो जनता पूछेगी — “देवीलोक में विकास नहीं, विनाश हो रहा है — और प्रशासन तमाशा देख रहा है।”

नशे की गिरफ्त में नलखेड़ा नगर, बढ़ रहा बच्चों में लत का खतरा

Nalkheda town in the grip of drug addiction, increasing risk of addiction among children चंदा कुशवाहनलखेड़ा । जिले में हाल ही में 253 किलो गांजे की बड़ी खेप जब्त करने के दावे के बावजूद नलखेड़ा क्षेत्र में खुलेआम गांजा विक्रय जारी है। इसके पीछे पुलिस प्रशासन की भारी लापरवाही और संभवतः मिलीभगत की कड़ियों से इंकार करना मुश्किल है। क्या नलखेड़ा की पुलिस इस गंभीर अपराध से बेदखल हो गई है या जान-बूझकर आंखें बंद किए बैठी है? स्थानीय लोगों की शिकायत है कि पुलिस सिर्फ दिखावे की पकड़ में लगी है, जबकि असल गिरोह खुली हवा में कारोबार कर रहा है। यह स्थिति पुलिस की जिम्मेदारी और ईमानदारी पर सवाल खड़े करती है। जहां जिले के बड़े स्तर पर नशा तस्करों को दबोचने की खबरें आ रही हैं, वहीं नलखेड़ा में पुलिस की सक्रियता नाममात्र की प्रतीत होती है।पुलिस को चाहिए कि इस गंभीर स्थिति से आंखें न मूंदे और अपने दायित्वों का निर्वहन करे। सार्वजनिक जगहों पर खुलेआम मादक पदार्थ बिक रहे हों और पुलिस मूकदर्शक बनी रहे, इससे समाज और खासकर युवाओं का भविष्य गंभीर खतरे में पड़ता है। गांजा जैसे नशे की लत मानसिक, शारीरिक और सामाजिक नुकसान पहुंचाती है, खासकर किशोरों और बच्चों के लिए इसका प्रभाव विनाशकारी होता है। सवाल उठता है कि जब इतने बड़े नेटवर्क पर पुलिस कार्रवाई कर रही है, तो स्थानीय स्तर पर खुलेआम नशा बिकने से अवगत होकर भी कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?यह स्थिति सिर्फ पुलिस की नाकामी नहीं, बल्कि गांजा तस्करों को संरक्षण देने वाली सांठगांठ की भी ओर इशारा करती है। यह दीगर है कि कई बार बड़े नशा सिंडिकेट में परस्पर जुड़े रसूखदारों और पुलिस अधिकारियों का नेटवर्क भी सामने आता रहा है। ऐसे में नलखेड़ा में भी पुलिस प्रशासन की मिलीभगत की अटकलें लगना स्वाभाविक है। जिला प्रशासन और पुलिस विभाग को इस मामले की गंभीरता को समझते हुए तत्काल सख्त कार्रवाई करनी होगी, अन्यथा यह पूरी व्यवस्था के प्रति जनता का विश्वास घटना शुरू हो जाएगा। एक तरफ तस्करों की गिरफ्तारी की रिपोर्ट आयें, तो दूसरी ओर खुले बाजार में नशा बिके—यह विपत्ति की घड़ी है।समाज और प्रशासन के लिए यह स्पष्ट संदेश है कि अब और कोई ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए। नलखेड़ा की पुलिस को चाहिए कि वह जनता के प्रति अपनी जवाबदेही निभाए, तस्करों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करे और युवा पीढ़ी को नशे की गिरफ्त से बचाने की दिशा में ठोस कदम उठाए। यह लड़ाई सिर्फ कानून का अभाव नहीं, ईमानदारी और तत्परता की लड़ाई भी है, जिसमें पुलिस को अब कमजोरी दिखाने का कोई रास्ता नहीं है। ऐसा न होने पर नशे के व्यापार को बढ़ावा देने वाले अधिकारी खुद सवालों के घेरे में आ सकते हैं, और समाज का आक्रोश गहराता जाएगा।

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