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विजय सिंह गौड़ ने जल-जंगल-जमीन और बुनियादी अधिकारों के लिए सदन से सड़क तक किया संघर्ष: सीएम योगी

प्रदेश ने खोए जमीन से जुड़े और जनजातीय समाज के नेता: सीएम योगी मुख्यमंत्री ने विधानसभा के दिवंगत सदस्यों के प्रति अर्पित की श्रद्धांजलि सीएम बोले- प्रो. श्याम बिहारी लाल ने शिक्षण अनुभव को जनसेवा से जोड़कर लोकतंत्र को दी मजबूती विजय सिंह गौड़ ने जल-जंगल-जमीन और बुनियादी अधिकारों के लिए सदन से सड़क तक किया संघर्ष: सीएम योगी लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश विधानमंडल के बजट सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को दिवंगत विधायकों को श्रद्धांजलि अर्पित की। मुख्यमंत्री ने शोक जताते हुए सदन में कहा कि वर्तमान विधानसभा के सदस्य प्रोफेसर श्याम बिहारी लाल का निधन 2 जनवरी 2026 को 60 वर्ष की आयु में हो गया। वह दूसरी बार विधानसभा के लिए निर्वाचित हुए थे और फरीदपुर (बरेली) से भारतीय जनता पार्टी के विधायक थे। प्रोफेसर श्याम बिहारी लाल मिलनसार और जमीन से जुड़े जनप्रतिनिधि थे। शिक्षा जगत से उनका गहरा जुड़ाव रहा। वह इतिहास संकलन समिति, बरेली के अध्यक्ष तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली की कार्यसमिति के सदस्य भी रहे। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रोफेसर श्याम बिहारी लाल ने अपने निर्वाचन क्षेत्र में बुनियादी विकास कार्यों को गति दी और पिछड़े, वंचित व गरीब वर्ग के कल्याण के लिए निरंतर काम किया। शिक्षा जगत से जुड़े विद्वान जब जनप्रतिनिधि बनते हैं तो वह लोकतांत्रिक परंपराओं को सशक्त करते हैं। उनके निधन से प्रदेश और भारतीय जनता पार्टी को अपूर्णनीय क्षति हुई है। मुख्यमंत्री ने वर्तमान विधानसभा के वरिष्ठ सदस्य विजय सिंह गौड़ के निधन पर भी शोक व्यक्त किया। उन्होंने सदन को बताया कि समाजवादी पार्टी से विधायक विजय सिंह का निधन 8 जनवरी 2026 को 71 वर्ष की आयु में हो गया था। वह आठवीं बार विधानसभा सदस्य निर्वाचित हुए थे। वर्ष 1980 से उनका राजनीतिक सफर शुरू हुआ था। उन्होंने सर्वप्रथम वर्ष 1980, फिर 1985, 1989, 1991, 1993, 1996, 2002 में चुनाव जीता था। वर्ष 2024 के उप चुनाव में वह दुद्धी विधानसभा से निर्वाचित हुए थे। वह जनजातीय समाज की सशक्त आवाज के रूप में जाने जाते थे। सीएम योगी ने कहा कि विजय सिंह गौड़ ने जल, जंगल, जमीन के अधिकारों के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और रोजगार जैसे बुनियादी मुद्दों को सदैव प्राथमिकता दी। उनके निधन से न केवल जनजातीय समाज, बल्कि पूरे प्रदेश ने संघर्षशील समाजसेवी और अनुभवी राजनेता को खो दिया है। मुख्यमंत्री ने दोनों दिवंगत सदस्यों के प्रति श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए ईश्वर से शोकाकुल परिजनों को संबल देने की प्रार्थना की।

प्रकृति संरक्षण, रोजगार और निवेश का समन्वित मॉडल बने इको-टूरिज़्म, स्थानीय सहभागिता अनिवार्य: मुख्यमंत्री

निजी क्षेत्र की भागीदारी से इको-टूरिज्म स्थलों पर विश्वस्तरीय सुविधाएं विकसित हों: मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री का निर्देश, प्रदेश में इको-टूरिज्म विकास हेतु समग्र कार्ययोजना तैयार की जाए प्रकृति संरक्षण, रोजगार और निवेश का समन्वित मॉडल बने इको-टूरिज़्म, स्थानीय सहभागिता अनिवार्य: मुख्यमंत्री मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में उत्तर प्रदेश ईको-टूरिज़्म विकास बोर्ड की बैठक सप्ताहांत में दिल्ली-पलिया और लखनऊ पलिया बस सेवाएं शुरू हों: मुख्यमंत्री लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश में इको-टूरिज्म को रोजगार सृजन, पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास का प्रमुख आधार बनाते हुए इसके लिए एक समग्र एवं समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की समृद्ध जैवविविधता, वन क्षेत्रों और प्राकृतिक विरासत में इको-टूरिज्म की अपार संभावनाएं निहित हैं, जिन्हें योजनाबद्ध ढंग से धरातल पर उतारने की आवश्यकता है। इसके लिए निजी क्षेत्र की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाए, ताकि इको-टूरिज्म को एक सशक्त और टिकाऊ उद्योग के रूप में विकसित किया जा सके। सोमवार को हुई उत्तर प्रदेश इको टूरिज्म विकास बोर्ड की बैठक मेंमुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि चयनित इको-टूरिज्म स्थलों पर पर्यटकों के लिए अच्छे होटल और स्तरीय रेस्टोरेंट, गुणवत्तापूर्ण आवासीय सुविधाएं और आधुनिक बुनियादी ढांचा विकसित किया जाए, जिससे राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को आकर्षित किया जा सके। उन्होंने कहा कि गोरखपुर का कुसम्ही जंगल, अयोध्या का कुमारगंज क्षेत्र, गाजीपुर का कामाख्या वन पार्क तथा लखीमपुर खीरी की महेशपुर रेंज जैसे संभावनाशील क्षेत्रों को पीपीपी मॉडल के माध्यम से विकसित किया जाए और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित किए जाएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश की जैवविविधता, प्राकृतिक संपदा, वेटलैंड, झीलें, वन्यजीव और नदी तंत्र केवल पर्यटन का विषय नहीं, बल्कि प्रदेश के भविष्य का आधार हैं। उन्होंने कहा कि इको-टूरिज्म आने वाले वर्षों में रोजगार, अर्थव्यवस्था, संरक्षण और वैश्विक पहचान का बड़ा स्तंभ बनेगा, इसलिए प्रत्येक जिले में सुरक्षित, स्वच्छ और सस्टेनेबल इको-टूरिज़्म मॉडल विकसित किया जाए। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि इको-टूरिज्म को प्रकृति संरक्षण, स्थानीय रोजगार, निजी निवेश और ग्रामीण विकास का मजबूत मॉडल बनाया जाए तथा इसके संचालन में स्थानीय समुदाय की भागीदारी को प्राथमिकता दी जाए।  बैठक में अवगत कराया गया कि वित्तीय वर्ष 2022-23 से 2024-25 के बीच दुधवा, पीलीभीत, रानीपुर और कतरनियाघाट टाइगर रिज़र्व सहित हैदरपुर, बखिरा, सूर सरोवर, समसपुर और नवाबगंज जैसे प्रमुख वेटलैंड्स में कुल 44 इको-टूरिज़्म इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट शुरू किए गए हैं। बोर्ड अब परिसंपत्तियों के मॉनेटाइजेशन और दीर्घकालिक सस्टेनेबिलिटी पर काम कर रहा है, जिसके तहत इको लॉज, फ्लोटिंग रेस्टोरेंट और पर्यटक सुविधाओं के लिए पीपीपी मॉडल लागू किया जा रहा है।  मुख्यमंत्री ने कनेक्टिविटी सुधार पर जोर देते हुए कहा कि लखनऊ-पलिया और नई दिल्ली-पलिया के बीच सप्ताहांत एसी बस सेवा का संचालन किया जाना चाहिए। मुख्यमंत्री ने पीलीभीत-मैलानी-बहराइच के लिए क्षेत्रीय बस सेवा प्रारंभ करने के निर्देश दिए और कहा कि परिवहन निगम के सफल मॉडल को देखते हुए इन सेवाओं का विस्तार अन्य इको-टूरिज़्म स्थलों तक किया जाए। बैठक में यह भी बताया गया कि वर्ष 2025-26 में विभिन्न जिलों जैसे अयोध्या, आगरा, गोरखपुर, लखनऊ, चित्रकूट, महराजगंज, प्रयागराज, बांदा, बहराइच, सीतापुर, उन्नाव, बलिया, इटावा, मैनपुरी आदि में नए पार्क, इंटरप्रिटेशन सेंटर, वेटलैंड विकास, बर्ड वॉचिंग टॉवर, ट्रेल्स, कैंपिंग और पर्यटक सुविधाओं पर आधारित कुल 31 नई परियोजनाएं प्रस्तावित की गई हैं। बोर्ड द्वारा एक एआई चैटबॉट और मोबाइल एप भी विकसित किया जा रहा है। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने पर्यटन विकास की विभागीय गतिविधियों से मुख्यमंत्री को अवगत कराया। बैठक में वित्त मंत्री सुरेश खन्ना, कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह और वन एवं पर्यावरण मंत्री अरुण सक्सेना की गरिमामयी सहभागिता रही।

मथुरा में दिल दहला देने वाली घटना: परिवार के 5 लोग दूध में जहर मिलाकर खाते हैं, सभी की मौत

मथुरा  उत्तर प्रदेश के मथुरा से बड़ी और दुखद खबर सामने आ रही है. महावन थाना क्षेत्र के खप्परपुर गांव में एक ही परिवार के पांच लोगों ने जहर खा लिया. इस दर्दनाक घटना में पति-पत्नी सहित तीन बच्चो की मौत हो गई है. घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है. फिलहाल ज़हर खाने के कारणों का पता नहीं चल सका है. पुलिस पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर रही है. इस घटना के बाद आसपास के इलाकों में हड़कंप मच गया. सूचना मिलते ही मौके पर पुलिस पहुंची और शव को अपने कब्जे में कर पोस्टमार्टम के लिए ले गई है. मृतक परिवार के घर के बाहर भारी तादात में लोग मौजूद है.

विकास की आड़ में अनावश्यक वृक्ष कटान नहीं, विकल्पों में इको-फ्रेंडली तकनीक अपनाई जाए: मुख्यमंत्री

वन्यजीव संवेदनशील क्षेत्रों में सभी विकास कार्य वैज्ञानिक मानकों और पर्यावरणीय संतुलन के साथ हों: मुख्यमंत्री वन्यजीव क्षेत्रों से जुड़े प्रत्येक प्रस्ताव में पर्यावरणीय जोखिम और जैव-विविधता का वैज्ञानिक विश्लेषण अनिवार्य: मुख्यमंत्री राज्य वन्यजीव परिषद की बैठक में विभिन्न जनपदों की अनेक विकास परियोजनाओं को मिली मंजूरी विकास की आड़ में अनावश्यक वृक्ष कटान नहीं, विकल्पों में इको-फ्रेंडली तकनीक अपनाई जाए: मुख्यमंत्री वेटलैंड्स प्राकृतिक धरोहर, सिल्ट हटाने का कार्य तत्काल कराया जाए: मुख्यमंत्री लखनऊ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि वन्यजीव संवेदनशील क्षेत्रों में प्रस्तावित सभी विकास एवं निर्माण कार्य वैज्ञानिक मानकों, न्यूनतम पर्यावरणीय प्रभाव और विधिक प्रक्रियाओं के पूर्ण अनुपालन के साथ ही किए जाएंगे। उन्होंने कहा है कि विकास की प्रत्येक प्रक्रिया में वन्यजीवों की सुरक्षा, उनके प्राकृतिक आवागमन तथा आवासीय निरंतरता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। सोमवार को राज्य वन्यजीव परिषद की 20वीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि वन्यजीव क्षेत्रों से जुड़े सभी विकास प्रस्ताव संवेदनशीलता और दूरदर्शिता के साथ तैयार किए जाएं। प्रस्ताव भेजते समय संबंधित विभाग पर्यावरणीय जोखिम, जैव-विविधता पर संभावित प्रभाव, वन्यजीव मूवमेंट, वैकल्पिक मार्गों और आधुनिक तकनीकी समाधानों का विस्तृत एवं वैज्ञानिक विश्लेषण अनिवार्य रूप से प्रस्तुत करें, ताकि विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलित एवं टिकाऊ दृष्टिकोण सुनिश्चित किया जा सके। बैठक में विभिन्न वन्य जीव क्षेत्रों में विकास की विभिन्न परियोजनाओं पर निर्णय भी हुआ। परिषद के समक्ष कुल 12 नए प्रस्ताव प्रस्तुत किए गए, जिनमें सड़क चौड़ीकरण, पेट्रोल पंप एवं फ्यूल स्टेशन स्थापना, ट्यूबवेल प्रेशर प्रणाली, भूमिगत पाइपलाइन, मोबाइल टावर, ऑप्टिकल फाइबर केबल तथा संपर्क मार्ग निर्माण जैसी विभिन्न परियोजनाएं शामिल हैं। ये प्रस्ताव इटावा, गोंडा, पीलीभीत, बरेली, बांदा सहित विभिन्न जनपदों के वन्यजीव संवेदनशील क्षेत्रों तथा इको-सेंसिटिव जोन से संबद्ध हैं। बैठक में परियोजनाओं पर सहमति प्रदान की गई। मुख्यमंत्री ने वृक्ष कटाई से संबंधित प्रस्तावों पर विशेषज्ञों की राय लेते हुए निर्देश दिए कि किसी भी परियोजना में अनावश्यक वृक्ष कटान की अनुमति न दी जाए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वृक्षों की कटाई केवल अपरिहार्य परिस्थितियों में ही की जाए और विकास की आड़ में पर्यावरण को क्षति न पहुँचे। जहां विकल्प उपलब्ध हों, वहां ट्रेंचलेस टेक्नोलॉजी, एलिवेटेड स्ट्रक्चर तथा इको-फ्रेंडली तकनीकों को प्राथमिकता दी जाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास परियोजनाओं की गति और वन्यजीव संरक्षण, दोनों राज्य सरकार की प्राथमिकताएं हैं और उत्तर प्रदेश सरकार संतुलित, वैज्ञानिक तथा दूरदर्शी नीति के साथ इन दोनों उद्देश्यों को साथ लेकर आगे बढ़ेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ वेटलैंड्स में सिल्ट जमा होने की जानकारी उनके संज्ञान में आई है, जिसका तत्काल निराकरण कराया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि यह कार्य ‘विकसित भारत-जी राम जी’ अभियान के अंतर्गत कराया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वेटलैंड्स प्राकृतिक धरोहर हैं और प्रत्येक दशा में उनका संरक्षण किया जाना चाहिए।

अंत्योदय योजना से 40.85 लाख परिवारों को लाभ, प्रदेश में अब नहीं सोता कोई भूखा

आर्थिक समीक्षा प्रदेश में अब नहीं सोता कोई भूखा, अंत्योदय श्रेणी के 40.85 लाख परिवार लाभान्वित 78,510 उचित दर दुकानें संचालित, 22.9% दुकानें महिलाओं को आवंटित ‘मॉडल फेयर प्राईस शॉप’ की बहुद्देशीय पहल के अंतर्गत 7481 अन्नपूर्णा भवन निर्मित लखनऊ  वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना द्वारा विधानमंडल में प्रस्तुत पहली आर्थिक समीक्षा के अनुसार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के अन्तर्गत प्रदेश सरकार, गरीब एवं पात्र परिवारों को निःशुल्क और रियायती दरों पर खाद्यान्न की उपलब्धता सुनिश्चित कराने के लिये प्रतिबद्ध है। इस हेतु पात्र परिवारों का चयन कर राशन कार्ड जारी किये गये हैं, जिनको डिजिटल सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से लाभान्वित किया जा रहा है। प्रदेश में दिसंबर, 2025 तक कुल 78,510 उचित दर दुकानें संचालित है, जिनमें ग्रामीण क्षेत्र की 67,114 तथा नगरीय क्षेत्र की 11,396 दुकाने हैं। इसमें 22.9% दुकानें महिलाओं को आवंटित हैं। राज्य में दिसंबर, 2025 तक जारी कुल 362.35 लाख राशनकार्ड्स में अंत्योदय श्रेणी के 40.85 लाख (11.27%) परिवार एवं पात्र गृहस्थी श्रेणी के 321.50 लाख (88 73%) परिवार हैं, जो उक्त अधिनियम के अन्तर्गत आच्छादित हैं। वन नेशन वन राशनकार्ड बना संबल वर्ष 2020-21 से प्रारम्भ वन नेशन बन राशनकार्ड’ योजनान्तर्गत अन्तर्राज्यीय पोर्टेबिलिटी (उत्तर प्रदेश के लाभार्थियों द्वारा अन्य राज्यों में प्राप्त किया) की सुविधा से वर्ष 2024-25 में 38.12 लाख राशनकार्ड धारक लाभान्वित हुए, जो योजना प्रारंभ के अग्रिम वर्ष 2021-22 में लाभान्वित 8.88 लाख के सापेक्ष (03 वर्षों में) कई गुना वृद्धि है। वर्ष 2025-26 के अंतर्गत दिसंबर, 2025 तक 28.03 लाख लाभान्वित हुए हैं। ‘मॉडल फेयर प्राईस शॉप’ के तहत 7481 अन्नपूर्णा भवन ‘मॉडल फेयर प्राईस शॉप’ की बहुद्देशीय पहल के अंतर्गत 31 जनवरी, 2026 तक कुल 7481 अन्नपूर्णा भवन निर्मित कराये गये हैं, जिनमें राशन वितरण के साथ सी एस सी सेवाएं भी संचालित की जा रही हैं। सी. पी. आई आधारित मुद्रास्फीति की दर कोविड के बाद लगातार गिरावट के साथ वर्ष 2025-26 में माह अक्टूबर, 2025 तक (-)1.71 हो गयी, जिसके फलस्वरूप महगाई नियंत्रित हुयी, क्रय शक्ति बढ़ी तथा मांग आधारित अर्थव्यवस्था में सुधार परिलक्षित हुआ। अद्यतन प्रकाशित बहुआयामी गरीबी (हेडकाउंट रेशियो आकलन) वर्ष 2013-14 में 42.59% थी. जो वर्ष 2022-23 में तेजी से घटते हुए 17.40% रह गयी, इस अवधि में प्रदेश के सर्वाधिक 5.94 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आये।

कानपुर: NICU में नवजात की मौत पर बड़ा कदम, राजा नर्सिंग होम की रजिस्ट्रेशन निरस्तीकरण

 कानपुर बिठूर के ब्रह्मनगर स्थित राजा नर्सिंग होम में एनआईसीयू के भीतर वार्मर मशीन में आग लगने से नवजात बच्ची की जलकर मौत के मामले में जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है. जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह के निर्देश पर कराई गई जांच में सामने आया कि अस्पताल में बिना अनुमति के एनआईसीयू यूनिट संचालित की जा रही थी. मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. हरिदत्त नेमी द्वारा सौंपी गई जांच रिपोर्ट के अनुसार, नर्सिंग होम का पंजीकरण तो था, लेकिन एनआईसीयू संचालन की अनुमति कभी नहीं ली गई. इसके बावजूद परिसर में अवैध रूप से एनआईसीयू चलाया जा रहा था.  निरीक्षण के दौरान अग्निशमन यंत्रों की वैधता अवधि समाप्त पाई गई, जो गंभीर सुरक्षा लापरवाही को दर्शाता है. इसके चलते मौके पर ही अवैध एनआईसीयू यूनिट को सील कर दिया गया. गंभीर अनियमितताओं को देखते हुए राजा नर्सिंग होम (पंजीकरण संख्या RMEE2122829) का पंजीकरण तत्काल प्रभाव से रद्द कर अस्पताल को पूरी तरह बंद करने के आदेश दिए गए हैं. प्रबंधन को तीन कार्य दिवसों के भीतर स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने का नोटिस भी जारी किया गया है. आदेशों की अवहेलना करने पर सख्त कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है. वहीं, पीड़ित परिजनों की तहरीर के आधार पर बिठूर थाने में अस्पताल के डॉक्टरों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 106(1) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है. इस मामले को लेकर परिजनों में भारी आक्रोश है. उन्होंने सख्त एक्शन की मांग की है.  गौरतलब है कि यह घटना निजी अस्पतालों की संवेदनहीनता और लचर व्यवस्था को उजागर करती है. पहली संतान खोने वाले परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है. स्थानीय प्रशासन अब अस्पताल की अन्य कमियों की भी फाइल खंगाल रहा है. पुलिस ने परिजनों को आश्वासन दिया है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा. फिलहाल अस्पताल परिसर में तनाव को देखते हुए पुलिस बल तैनात है और स्वास्थ्य विभाग की टीम अपनी अंतिम रिपोर्ट तैयार करने में जुटी है.

औद्योगिक क्षेत्र बना प्रदेश की अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार

लखनऊ.  वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना द्वारा विधानमंडल में प्रस्तुत पहली आर्थिक समीक्षा के अनुसार उत्तर प्रदेश का औद्योगिक क्षेत्र बीते वर्षों में अभूतपूर्व विस्तार के साथ प्रदेश की अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार बनकर उभरा है। इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा उत्पादन, टेक्सटाइल, खाद्य प्रसंस्करण और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में निवेश में तेज वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2025 में विभिन्न औद्योगिक प्रोत्साहन योजनाओं के अंतर्गत लगभग ₹4,000 करोड़ की इंसेंटिव राशि का भुगतान किया गया, जिससे निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ। औद्योगिक गलियारों, एक्सप्रेसवे नेटवर्क और आधुनिक अवसंरचना परियोजनाओं ने प्रदेश को उद्योगों के लिए आकर्षक गंतव्य बनाया है। दोगुने से ज्यादा बढ़ी कारखानों की संख्या आर्थिक समीक्षा में बताया गया कि कारखाना अधिनियम, 1948 के अंतर्गत पंजीकृत कारखानों की संख्या में दोगुने से अधिक की वृद्धि हुई है। वर्ष 2016-17 में जहां प्रदेश में 14,169 कारखाने पंजीकृत थे, वहीं वित्तीय वर्ष 2025-26 के नवंबर माह तक यह संख्या बढ़कर 30,695 तक पहुंच गई है। इसे प्रदेश की औद्योगिक प्रगति, निवेश आकर्षण और रोजगार सृजन की दिशा में बड़ा संकेत माना गया है। इसके साथ ही वार्षिक उद्योग सर्वेक्षण की नवीनतम रिपोर्ट में राज्य के उद्योगों के सकल मूल्य वर्धन में गत वर्ष की तुलना में 25 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जो देश के प्रमुख राज्यों में प्रथम स्थान पर है और अखिल भारतीय औसत वृद्धि दर (11.9 प्रतिशत) से दोगुनी से भी अधिक है। निर्यात में भी दोगुने से अधिक वृद्धि निर्यात के मोर्चे पर भी उत्तर प्रदेश ने उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। आर्थिक समीक्षा के अनुसार वर्ष 2016-17 में जहां प्रदेश से कुल ₹0.84 लाख करोड़ का निर्यात हुआ था, वहीं वर्ष 2024–25 में यह दोगुने से भी अधिक बढ़कर ₹1.86 लाख करोड़ तक पहुंच गया। वित्तीय वर्ष 2025-26 में नवंबर माह तक ₹1.31 लाख करोड़ का निर्यात किया जा चुका है। यह वृद्धि प्रदेश की विनिर्माण क्षमता, नीति आधारित विकास और वैश्विक बाजारों में उत्तर प्रदेश की बढ़ती उपस्थिति को दर्शाती है। भारत सरकार द्वारा जनवरी 2026 में जारी एक्सपोर्ट प्रिपेयर्डनेस इंडेक्स 2024 में उत्तर प्रदेश ने चौथा स्थान प्राप्त किया है, जबकि वर्ष 2022 में प्रदेश सातवें स्थान पर था। लैंडलॉक्ड राज्यों की श्रेणी में उत्तर प्रदेश इस सूचकांक में प्रथम स्थान पर रहा, जिसे निर्यात अवसंरचना, लॉजिस्टिक्स सुधार और नीतिगत मजबूती का परिणाम माना गया है।  निवेश आकर्षण में उत्तर प्रदेश अग्रणी उत्तर प्रदेश निवेश आकर्षित करने में भी अग्रणी राज्य है। हाल ही में दावोस में आयोजित वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम 2026 में उत्तर प्रदेश ने ₹2.94 लाख करोड़ से अधिक के निवेश समझौते किए, जिनमें एआई रेडी डेटा सेंटर, फूड प्रोसेसिंग, रिन्यूएबल एनर्जी, वेस्ट-टू-एनर्जी और रक्षा निर्माण जैसे प्रमुख क्षेत्र शामिल हैं। भारत सरकार द्वारा जारी स्टेट स्टार्ट अप इकोसिस्टम रैंकिंग के 5वें संस्करण में उत्तर प्रदेश टॉप परफॉर्मर कैटेगरी ‘ए-1’  में शामिल है।  स्थानीय उद्योगों को मिला बढ़ावा वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ओडीओपी) योजना के तहत स्थानीय उद्योगों को वैश्विक पहचान दिलाते हुए वर्ष 2018–19 से दिसंबर 2025 तक कुल ₹890.44 करोड़ की मार्जिन मनी वितरित की गई, जिससे 3.22 लाख से अधिक रोजगार सृजित हुए। सितंबर 2025 में ग्रेटर नोएडा स्थित एक्सपो मार्ट में आयोजित तीसरे इंटरनेशनल ट्रेड शो में लगभग 70 देशों के बायर्स की भागीदारी ने प्रदेश के एक जिला एक उत्पाद को वैश्विक मंच प्रदान किया। उत्तर प्रदेश अब ट्रस्ट बेस्ड गवर्नेस मॉडल की ओर आर्थिक समीक्षा के अनुसार ईज ऑफ डूइंग बिजनेस से आगे बढ़ते हुए उत्तर प्रदेश अब ट्रस्ट बेस्ड गवर्नेस मॉडल की ओर अग्रसर है। कंप्लायंस रिडक्शन में प्रदेश देश में प्रथम स्थान पर है। डिरेगुलेशन, निवेश मित्र के माध्यम से सिंगल विंडो सिस्टम, और भूमि से श्रम तक किए गए सुधारों ने पारदर्शी, तेज और निवेश-अनुकूल वातावरण सुनिश्चित किया है।

हरित ऊर्जा में उत्तर प्रदेश की बड़ी छलांग, सौर व जैव ऊर्जा से बनेगा ऊर्जा आत्मनिर्भर राज्य

लखनऊ. उत्तर प्रदेश आर्थिक समीक्षा 2025-26 के अनुसार राज्य स्वच्छ, हरित और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में तेजी से उभर रहा है। उत्तर प्रदेश सौर ऊर्जा नीति-2022 के अंतर्गत आगामी पांच वर्षों में 22,000 मेगावाट विद्युत उत्पादन का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिससे प्रदेश की ऊर्जा जरूरतों को पर्यावरण-संवेदनशील तरीके से पूरा किया जा सकेगा। 22 हजार मेगावाट सौर ऊर्जा का रोडमैप आर्थिक समीक्षा में बताया गया है कि प्रस्तावित 22,000 मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन में 6,000 मेगावाट रूफटॉप सोलर संयंत्रों से, 14,000 मेगावाट यूटिलिटी स्केल एवं सोलर पार्कों से तथा 2,000 मेगावाट पीएम-कुसुम योजना के माध्यम से प्राप्त किए जाएंगे। नीति के तहत 13.50 लाख घरों को रूफटॉप सोलर प्लांट से आच्छादित कर राज्य अनुदान प्रदान किया जाएगा, जिससे आम उपभोक्ताओं को सस्ती और स्वच्छ बिजली मिलेगी। अयोध्या मॉडल सोलर सिटी, 16 नगर निगम होंगे सौर नगर प्रदेश सरकार ने अयोध्या को मॉडल सोलर सिटी के रूप में विकसित करने का लक्ष्य तय किया है। इसके साथ ही 16 नगर निगमों एवं नोएडा को सोलर सिटी बनाया जाएगा। बैटरी स्टोरेज को बढ़ावा देने, बुंदेलखंड और पूर्वांचल क्षेत्रों में ट्रांसमिशन सहायता, सार्वजनिक व निजी भूमि पर रियायती लीज तथा 30,000 युवाओं के कौशल विकास को भी इस नीति का हिस्सा बनाया गया है। नेट-मीटरिंग व्यवस्था के माध्यम से ग्रिड से जुड़ी रूफटॉप परियोजनाओं को केंद्र और राज्य सरकार के अनुदान से प्रोत्साहित किया जा रहा है। सौर ऊर्जा क्षमता में दस गुना से अधिक वृद्धि आर्थिक समीक्षा के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2017 में प्रदेश में जहां मात्र 288 मेगावाट की सौर ऊर्जा परियोजनाएं स्थापित थीं, वहीं वर्तमान में यह क्षमता बढ़कर 2,815 मेगावाट तक पहुंच चुकी है। यह वृद्धि प्रदेश की ऊर्जा नीति और निवेश-अनुकूल वातावरण का प्रत्यक्ष प्रमाण है। जैव ऊर्जा में देश में नंबर वन उत्तर प्रदेश उत्तर प्रदेश जैव ऊर्जा नीति-2022 के सकारात्मक परिणाम भी आर्थिक समीक्षा में सामने आए हैं। जैव अपशिष्टों के उपयोग, कम्प्रेस्ड बायो गैस (सीबीजी) प्लांट, बायो-कोल, बायो-डीजल और बायो-एथेनॉल की स्थापना को बढ़ावा देने के चलते प्रदेश 213 टन प्रतिदिन की सीबीजी उत्पादन क्षमता के साथ देश में प्रथम स्थान पर है। कृषि क्षेत्र में सौर ऊर्जा का विस्तार कृषि में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए पीएम-कुसुम योजना के अंतर्गत बड़े स्तर पर कार्य किया गया है। योजना के घटक सी-1 के तहत वर्ष 2023-24 एवं 2024-25 में 3,024 कृषि पम्पों का सोलराइजेशन कराया गया। वहीं घटक सी-2 के अंतर्गत पृथक कृषि विद्युत फीडरों के सोलराइजेशन हेतु प्रथम चरण में 22 सबस्टेशनों पर 34.8 मेगावाट क्षमता की सौर परियोजनाओं के लिए पीपीए हस्ताक्षरित किए गए हैं। द्वितीय चरण में 567 सबस्टेशनों पर 1,586.44 मेगावाट क्षमता की सौर परियोजनाओं के लिए लेटर ऑफ अवार्ड जारी किए जा चुके हैं। स्वच्छ हवा और ऊर्जा का साझा लक्ष्य आर्थिक समीक्षा में यह भी उल्लेख किया गया है कि केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा एनसीएपी (नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम) के अंतर्गत चयनित 130 शहरों में स्वीकृत गतिविधियों के प्रभावी क्रियान्वयन और वायु गुणवत्ता में सुधार के प्रयास किए जा रहे हैं।

देश कमजोर हुआ तो सनातन के समक्ष होगा अस्तित्व का संकटः योगी

सीतापुर  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सोमवार को तपोधाम सतगुरु गिरधारी नाथ जी महाराज तपोधाम आश्रम में मूर्ति स्थापना दिवस व भंडारा में शामिल हुए। सीएम ने यहां फिर समाज को चेताया और कहा कि सनातन कमजोर होगा तो देश कमजोर होगा। देश कमजोर होगा तो सनातन के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा होगा, इसलिए बांटने वालों से सावधान रहें। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में मरने और जलाए जाने वाले हिंदुओं पर सभी मौन हैं। मरने वाले दलित हिंदू हैं। धर्माचार्यों व कुछ हिंदु संगठनों को छोड़ दिया जाए तो कोई मानवाधिकार या दुनिया का संगठन उनकी वकालत करने वाला नहीं है।  पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत लंबी यात्रा के लिए खुद को तैयार कर रहा है। भारत दुनिया की बड़ी ताकत बनेगा, इसे कोई रोक नहीं सकता है। भारतवासियों का दायित्व है कि इस यात्रा में सहभागी बनें और मिलकर कार्य करें। यदि ऐसा कर सके तो वर्तमान व भावी पीढ़ी के लिए परिणाम बेहतर होगा।  भारत ने विपत्ति में सभी का साथ दिया, लेकिन कुछ लोगों ने यहां आकर गला दबाने का प्रयास किया सीएम योगी ने कहा कि दुनिया में तमाम सभ्यता-संस्कृति समय के साथ समाप्त हो गई, लेकिन सनातन संस्कृति तमाम तूफानों को झेलते हुए आज भी गरिमा-गौरव के साथ खड़ी है और दुनिया को मैत्री, करुणा के साथ वसुधैव कुटुम्बकम का संदेश दे रही है। इसे तोड़ने के लिए अनेक प्रयास हुए। सनातन धर्मावलंबियों ने विपत्ति के समय हर किसी को शरण देकर उसे पुष्पित-पल्लवित होने का अवसर दिया, लेकिन कुछ लोगों ने शरणार्थी धर्म का निर्वहन नहीं किया, बल्कि यहां आकर हाथ की अंगुली पकड़कर गला दबाने का प्रयास किया और देश को लूटने में कसर नहीं छोड़ी।  वसुधैव कुटुम्बम् का भाव सनातन धर्मावलंबियों के जीवन का व्रत सीएम योगी ने कहा कि सनातन धर्मावलंबियों के पास बल, वैभव व बुद्धि भी थी, लेकिन कभी दुरुपयोग नहीं किया, बल्कि इसका उपयोग मानव कल्याण के लिए किया। वसुधैव कुटुम्बम् का भाव सनातन धर्मावलंबियों के जीवन का व्रत है। हमने चराचर जगत के कल्याण की बात की है। हमारे यहां पहला ग्रास गोमाता और अंतिम ग्रास कुत्ते का होता है। गाय और कुत्ते को भी हमने अपना हिस्सा प्रदान किया है। चींटी को आटा-चीनी तो जहरीले सांप को भी दूध-बताशा चढ़ाते हैं।  सभ्यता और संस्कृति के साथ समृद्धि की चिंता साथ-साथ चलती है तो परिणाम भी आते दिखाई देते हैं  सीएम योगी ने 11 वर्ष में पीएम मोदी के नेतृत्व में बदलते भारत की प्रगति का जिक्र किया। बोले कि सभ्यता और संस्कृति के साथ समृद्धि की चिंता साथ-साथ चलती है तो परिणाम भी आते दिखाई देते हैं। भारत फिर से तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनने जा रहा है। अमेरिका व चीन को छोड़कर शेष देश भारत से पीछे होंगे। भारत तेज गति से बढ़ रहा है तो इसका कारण है कि भारत ने अपने मूल्यों-आदर्शों को पहचाना, विरासत को पुनर्स्थापित करने के अभियान को अपने कंधे पर लिया।  विकास की नई बुलंदियों को छू रहा सीतापुर सीएम योगी ने कहा कि 1947 में योगीराज गिरधारी नाथ जी महाराज को पाकिस्तान के हिंगलाज देवी के धाम को छोड़कर कुरुक्षेत्र होते हुए सीतापुर आना पड़ा। इस स्थान पर उन्होंने गुफा बनाई और वर्षों तक यहां साधना की। उनके उपरांत गुरु योगीराज चरणनाथ जी महाराज ने योग आश्रम बनाया, गुफा बनाई और महीनों साधना की। बिना कुछ खाए महीनों तक साधना योग से ही संभव है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने सीतापुर को भारत के सनातन धर्म का पौराणिक स्थल बताते हुए कहा कि सीतापुर आज भी विकास की नई बुलंदियों को छू रहा है। मत-संप्रदाय की दीवारों को फांदकर पूरे भारत को जोड़ने वाली है राम और भारतीयों की आत्मीयता सीएम योगी ने कहा कि कुंभ की परंपरा भारत में हजारों वर्षों की है, लेकिन पहली बार 2019 में प्रयागराज कुंभ को पहली बार वैश्विक मान्यता तब मिली, जब पीएम मोदी ने यूनेस्को के माध्यम से इस मेले को विश्व की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर के रूप में मान्यता दिलाई। यह विरासत पर गौरव की अनुभूति करने वाला क्षण था। 22 जनवरी 2024 को पीएम मोदी के करकमलों से अयोध्या में प्रभु रामलला की भव्य प्रतिमा की प्राणप्रतिष्ठा हो रही थी तो हर आंखों में श्रद्धा व गौरव के आंसू थे। हर भारतीय ने राम से आत्मीयता का रिश्ता जोड़ा है। यह आत्मीयता राजनीति की दीवारों से हटकर और मत-संप्रदाय की दीवारों को फांदकर पूरे भारत को जोड़ने वाली है।  इस दौरान राजस्थान के विधानसभा सदस्य बालक नाथ, योगी तेजनाथ, पीर महंत हरिनाथ, महंत कृष्णनाथ, महंत सुंदरनाथ, यूपी के मंत्री राकेश राठौर ‘गुरु’, सुरेश राही, विधायक ज्ञान तिवारी, मनीष रावत, रामकृष्ण भार्गव, शशांक त्रिवेदी, निर्मल वर्मा, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रद्धा सागर आदि की मौजूदगी रही।

वन एवं पर्यावरण संरक्षण की नई मिसाल, सतत विकास की अवधारणा को साकार कर रहा उत्तर प्रदेश

 लखनऊ.  उत्तर प्रदेश ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कुशल नेतृत्व और मार्गदर्शन में भूमि एवं वन सम्पदा के संरक्षण और संवर्धन के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। पौध रोपण को जन अभियान बनाते हुए वर्ष 2017-18 से वर्ष 2025-26 तक प्रदेश में 242.13 करोड़ पौधों का रोपण किया गया है। जिसमें एक पेड़ मां के नाम अभियान में रिकॉर्ड पौध रोपण के साथ पेड़ लगाओ, पेड़ बचाओ एवं सेवा पर्वों पर रिकॉर्ड संख्या में पौध रोपण किया गया है। परिणामस्वरूप घनी आबादी वाला प्रदेश होने के बाद भी उत्तर प्रदेश में वन एवं वृक्षावरण में देश में दूसरा स्थान है। साथ ही वन्यजीव संरक्षण अभियानों के सफल संचालन से प्रदेश की जैव विविधता का भी संरक्षण किया जा रहा है। वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सतत एवं संपोषणीय विकास की अवधारणा को साकार करते हुए प्रदूषण निवारण और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भी उत्तर प्रदेश ने उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के तहत वर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड 37.20 करोड़ पौधे रोपित पर्यावरण संरक्षण को जन आंदोलन का रूप देते हुए प्रदेश सरकार ने वर्ष 2025 में ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान को व्यापक स्तर पर सफल बनाया। अभियान के अंतर्गत वर्ष 2025-26 के लिए निर्धारित लक्ष्य 37 करोड़ के सापेक्ष अक्टूबर 2025 तक 37.20 करोड़ पौधे रोपित कर प्रदेश ने अभूतपूर्व प्रदर्शन किया। साथ ही 01 से 07 जुलाई 2025 तक चले “पेड़ लगाओ, पेड़ बचाओ” अभियान के तहत 1,86,053 एवं सेवा पर्वों पर चलाए गए अभियानों में 15,49,137 पौधों का रोपण किया गया। इससे न केवल प्रदेश के हरित आवरण में वृद्धि हुई, बल्कि जलवायु परिवर्तन से निपटने और कार्बन अवशोषण को भी बढ़ावा मिला। भारतीय वन सर्वेक्षण, देहरादून की इंडिया स्टेट फॉरेस्ट रिपोर्ट 2023 के अनुसार उत्तर प्रदेश वनावरण व वृक्षाच्छादन की दृष्टि से देश में दूसरे स्थान पर है। पर्यावरणीय सहभागिता को संस्थागत स्वरूप देते हुए वर्ष 2025 में प्रत्येक ग्राम पंचायत में ‘ग्रीन चौपाल’ का गठन किया गया है। इसका उद्देश्य स्थानीय स्तर पर पर्यावरण संरक्षण, वृक्षारोपण, जल संरक्षण और जैव विविधता के प्रति जनजागरूकता को बढ़ावा देना है। साथ ही सामाजिक वानिकी के अंतर्गत वन महोत्सव 2025, सेवा पर्व और ग्रीन गोल्ड सर्टिफिकेट जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से लाखों पौधों का रोपण किया गया, जिससे समाज के हर वर्ग की भागीदारी के साथ प्रदेश के वृक्षावरण और वनावरण में उल्लेखनीय वृद्धि सुनिश्चित की गई। वन्यजीव संरक्षण में प्रदेश ने हासिल की उल्लेखनीय उपलब्धि वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में भी प्रदेश ने महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। गोरखपुर के कैम्पियरगंज रेंज में स्थापित जटायु संरक्षण एवं प्रजनन केंद्र रेड-हेडेड गिद्ध के संरक्षण के लिए देश का पहला समर्पित केंद्र है। वहीं राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण की स्टेटस ऑफ टाइगर्स-2022 रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में बाघों की संख्या वर्ष 2018 के 173 से बढ़कर वर्ष 2022 में 205 हो गई है, जो राष्ट्रीय स्तर पर बाघों की आबादी का लगभग 5.6 प्रतिशत है। साथ ही पीलीभीत टाइगर रिजर्व को बाघ संरक्षण में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए टीएक्स-2 अवार्ड से सम्मानित किया गया। इसके साथ ही प्रदेश में गंगा डॉल्फिन, सारस पक्षी, बारासिंघा, काला हिरण, चिंकारा, भालू, लंगूर जैसे वन्यजीवों के संरक्षण के भी विशेष अभियान चलाए गए। स्वच्छ वायु सर्वेक्षण में वर्ष 2025 में आगरा, झांसी और मुरादाबाद को राष्ट्रीय सम्मान उत्तर प्रदेश देश का पहला राज्य है जिसने कार्बन क्रेडिट फाइनेंस योजना लागू की है, जिससे किसानों की आय में बढ़ोतरी के साथ पर्यावरण संरक्षण के लिए भी प्रोत्साहन दिया जा रहा है। वर्ष 2025 में स्वच्छ वायु सर्वेक्षण के अंतर्गत आगरा, झांसी और मुरादाबाद जैसे शहरों को शहरी हरियाली, मियावाकी वृक्षारोपण और अपशिष्ट प्रबंधन में बेहतर प्रदर्शन के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान प्राप्त हुआ। वहीं उत्तर प्रदेश सौर ऊर्जा नीति-2022 के अंतर्गत वर्तमान में 2815 मेगावॉट की सौर ऊर्जा परियोजनाएं स्थापित की जा चुकी हैं। साथ ही कम्प्रेस्ड बायो गैस (सीबीजी) में 213 टन प्रतिदिन की क्षमता के साथ यूपी देश में प्रथम स्थान पर है। प्रदेश सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक वनावरण एवं वृक्षावरण को 15 प्रतिशत तक बढ़ाना है। वर्ष 2025 के आंकड़े दर्शाते हैं कि सतत एवं संपोषणीय विकास और पर्यावरण संरक्षण में जनभागीदारी के समन्वय से उत्तर प्रदेश भूमि एवं वन सम्पदा के क्षेत्र में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ग्रीन यूपी के संकल्प की सिद्धि की ओर तेजी से बढ़ रहा है।

सीएम के निर्देश पर हरकत में आया लखीमपुर खीरी जिला प्रशासन, स्पॉन्सरशिप योजना का दिया गया लाभ

लखनऊ. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को जनता दर्शन में लखीमपुर खीरी के दो बेहारा बच्चों की आपबीती सुनी तो उन्होंने तत्काल लखीमपुर खीरी जिला प्रशासन को दोनों अनाथ बच्चों हर संभव मदद के निर्देश दिये। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश के बाद लखीमपुर खीरी जिला प्रशासन हरकत में आया गया। जनता दर्शन में आए दोनों अनाथ बच्चों के खीरी पहुंचने से पहले ही दोनों बच्चों की पढ़ाई दोबारा शुरू कराने के लिए स्कूल में दाखिला करा दिया गया। इसके साथ ही बच्चों को 50 हजार नगद के साथ खाद्यान्न व सीएसआर किट सौंपी गई। वर्ष 2018 में एक दुर्घटना में माता पिता की हो गयी थी मृत्यु लखीमपुर खीरी की जिलाधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल ने बताया कि धौरहरा के सरसवा गांव के शिवांशु और अजय कुमार के माता की वर्ष 2018 में एक दुर्घटना में मृत्यु हो गयी थी जबकि पिता ने उपचार के दौरान 41 दिनों बाद दम तोड़ दिया। माता-पिता के निधन से दोनों बच्चों के समक्ष भरण-पोषण एवं शिक्षा का गंभीर संकट उत्पन्न हो गया। ऐसे में आर्थिक संसाधनों के अभाव में पढ़ाई बाधित हो गई। धौरहारा के शिवांशु और अजय ने अपने बाबा दादी के साथ सोमवार को जनता दर्शन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की और अपनी समस्या बतायी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तत्काल जिला प्रशासन को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।  दोनों बच्चों को दिया गया स्पॉन्सरशिप योजना का लाभ, दोनों को स्कूल में कराया गया दाखिला डीएम दुर्गा शक्ति नागपाल ने बताया कि दोनों बच्चों का स्पॉन्सरशिप योजना में आवेदन कराकर सक्षम स्तर से स्वीकृति प्राप्त कर ली गई है। अब दोनों बच्चों को चार-चार हजार रुपये प्रतिमाह आर्थिक सहायता मिलेगी। वहीं, पात्र गृहस्थी राशन कार्ड को अंत्योदय कार्ड में परिवर्तित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, ताकि भरण पोषण की समस्या दोबारा सामने न आए। इसके साथ ही प्रदेश सरकार की विभिन्न योजनाओं से जोड़ने की कार्रवाई शुरू कर दी गयी है। इतना ही नहीं अजय कुमार का गांव के ही विद्यालय में कक्षा सात में प्रवेश करा दिया गया है, जबकि शिवांशु का कक्षा नौ में दाखिला दिलाने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। परिवार को 50 हजार की मदद के साथ खाद्यान्न व सीएसआर किट सौंपी डीएम दुर्गा शक्ति नागपाल के निर्देश पर सीडीओ अभिषेक कुमार ने विकास भवन में संबंधित परिवार से मुलाकात की। इस दौरान परिवार को 50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की गई। साथ ही खाद्यान्न किट में आटा, चावल, दाल, तेल, बिस्किट, हल्दी, धनिया, मिर्च, भुना चना, नमक, माचिस व आलू उपलब्ध कराए गए। इसके अतिरिक्त सीएसआर किट के तहत पानी की बोतल, छाता, टॉर्च (बैट्री सहित) व मच्छरदानी दी गई। दोनों बच्चों को स्कूल बैग, ज्योमेट्री बॉक्स, स्कूली ड्रेस, जूते, मौजे व स्वेटर, कंबल भी प्रदान किए गए। बाद में परिवार को सरकारी वाहन से उनके घर भिजवाया गया।

हर घर नल, हर घर जल : यूपी में जल जीवन मिशन ने रचा इतिहास

लखनऊ उत्तर प्रदेश आर्थिक समीक्षा 2025-26 की रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश में जल जीवन मिशन और स्वच्छ पेयजल योजनाओं की अभूतपूर्व उपलब्धियों का विस्तृत खाका सामने आया है। आर्थिक समीक्षा के अनुसार, जल जीवन मिशन के तहत प्रदेश में पेयजल आपूर्ति का दायरा अब केवल बसाहटों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि हर ग्रामीण परिवार तक शुद्ध और नियमित जल पहुंचाने का लक्ष्य तेजी से हासिल किया जा रहा है। मिशन के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्र में प्रति व्यक्ति प्रतिदिन औसतन 55 लीटर शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने की दिशा में निरंतर कार्य किया जा रहा है। पेयजल आपूर्ति की बड़ी चुनौती निर्बाध बिजली की उपलब्धता रही है। इसे ध्यान में रखते हुए दुर्गम क्षेत्रों में सौर ऊर्जा आधारित पेयजल परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं। जनवरी 2026 तक 40,955 परियोजनाओं में से 33,157 परियोजनाएं सौर ऊर्जा से संचालित हो रही हैं, जिनकी क्षमता लगभग 900 मेगावाट है। इन परियोजनाओं से 67,013 गांवों को लाभ मिलेगा और 13.30 करोड़ ग्रामीण आबादी संतृप्त होगी। सौर ऊर्जा के उपयोग से परियोजनाओं के समय पर पूर्ण होने में मदद मिली है, साथ ही संचालन लागत में भारी बचत और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिला है। अनुमान है कि 30 वर्षों में संचालन लागत में लगभग 37,395 करोड़ रुपये की बचत होगी। इसके साथ ही 13 लाख मीट्रिक टन कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में कमी आएगी, जो पर्यावरणीय दृष्टि से बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। 91 प्रतिशत घरों तक पहुंचा नल से जल प्रदेश में जल जीवन मिशन योजना के माध्यम से दिसंबर तक 2.67 करोड़ घरों की 16.69 करोड़ ग्रामीण आबादी को संतृप्त करने का लक्ष्य रखा गया था। इसके सापेक्ष दिसंबर 2025 तक 2.43 करोड़ घरेलू नल कनेक्शन प्रदान कर 15.12 करोड़ ग्रामीण जनसंख्या को शुद्ध पेयजल से जोड़ा जा चुका है, जो लक्ष्य का लगभग 91 प्रतिशत है। वर्तमान में 46,303 राजस्व ग्रामों में नियमित, गुणवत्तायुक्त और पर्याप्त मात्रा में पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। युवा और महिलाएं बने मिशन की ताकत जल जीवन मिशन के तहत पंचायत स्तर पर बड़े पैमाने पर कौशल विकास भी किया गया है। जनवरी 2026 तक 7.56 लाख युवाओं को इलेक्ट्रिशियन, पम्प ऑपरेटर, प्लम्बर, फिटर और मोटर मैकेनिक जैसे कार्यों का प्रशिक्षण दिया गया है। इसके साथ 5.51 लाख महिलाओं को फील्ड टेस्ट किट के माध्यम से जल गुणवत्ता परीक्षण के लिए प्रशिक्षित कर उन्हें जल सुरक्षा की जिम्मेदारी से जोड़ा गया है। स्वच्छता और जागरूकता पर जोर राज्य पेयजल एवं स्वच्छता मिशन द्वारा ‘स्टॉप डायरिया कैंपेन’ के तहत ‘अपने पानी को जानो’, पानी के रिसाव की पहचान और मरम्मत जैसे अभियानों को जिला, ब्लॉक और गांव स्तर तक पहुंचाया गया है।

आर्थिक समीक्षा में ग्राम विकास क्षेत्र की उपलब्धियों का ब्योरा, ग्राम पंचायतों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी

लखनऊ. उत्तर प्रदेश सरकार की वर्ष 2025-26 की आर्थिक समीक्षा के अनुसार, ‘विकसित उत्तर प्रदेश’ की परिकल्पना को साकार करने के लिए योगी सरकार ने ग्रामीण विकास पर खर्च लगातार बढ़ाया है। वर्ष 2017-18 में जहां ग्राम विकास पर 10,508 करोड़ रुपये व्यय हुए थे,  जो 2025-26 में बढ़कर 20,081 करोड़ रुपये हो गया। बीते आठ वर्षों में ग्राम विकास कार्यों में व्यय में 8.43 प्रतिशत की वार्षिक चक्रवृद्धि दर से वृद्धि हुई है। मानव दिवस सृजन में देश में पहला स्थान वर्ष 2017-18 के 1814.34 लाख मानव दिवसों की तुलना में 2024-25 में 85.41 प्रतिशत वृद्धि के साथ 3363.97 लाख मानव दिवस सृजित किए गए, जिससे यूपी को देश में प्रथम स्थान मिला। वित्तीय वर्ष 2025-26 में दिसंबर 2025 तक 1805 लाख से अधिक मानव रोजगार दिवस सृजित हो चुके हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार संवर्धन के लिए वीबी-जी राम जी योजना के तहत आजीविका, पर्यावरण संरक्षण और बुनियादी ढांचे के कार्य तेजी से कराए गए। योजना के अंतर्गत 266 प्रकार के सामुदायिक और व्यक्तिगत लाभार्थीपरक कार्यों को लागू किया गया। तकनीक, पारदर्शिता और नवाचार का असर बुंदेलखंड की जल समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में अभिनव पहल करते हुए ललितपुर के बिरधा विकास खंड में विलुप्त शहजाद नदी के 1500 मीटर हिस्से का पुनरुद्धार किया गया, जिससे 9859 मानव दिवसों का सृजन हुआ और भूजल व सिंचाई संसाधनों को मजबूती मिली। कार्यों में पारदर्शिता के लिए ई-एमबी मॉड्यूल, त्रि-स्तरीय जियो टैगिंग, ऑनलाइन सॉफ्टवेयर, आधार आधारित मजदूरी भुगतान, नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम ऐप, एरिया ऑफिसर ऐप और ड्रोन तकनीक का उपयोग किया गया। 2024-25 में 65.26 लाख परिवारों के 75.83 लाख श्रमिकों को रोजगार मिला। जबकि 6.16 लाख परिवारों को पूर्ण 100 दिन का काम दिया गया। 2025-26 में अक्तूबर 2025 तक 47 लाख से अधिक परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराया गया। तमिलनाडु के बाद यूपी दूसरा सबसे अधिक परिवारों को रोजगार देने वाला राज्य है। पर्यावरण, खेल और सामाजिक सहभागिता वीबी-जी राम जी योजना के तहत ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान में 2024-25 में 13.54 करोड़ और 2025-26 में 13.23 करोड़ पौधरोपण किया गया। वहीं, नवंबर 2025 तक 19 हजार से अधिक अमृत सरोवरों का निर्माण/पुनरुद्धार कर यूपी देश में अग्रणी रहा। इसके साथ ही 2025-26 में अक्तूबर 2025 तक 3550 खेल मैदान और 1706 आंगनबाड़ियों का निर्माण पूरा किया गया। महिलाओं की भागीदारी बढ़कर 42 फीसदी पहुंची वीबी-जी राम जी के तहत महिलाओं की भागीदारी भी बढ़ी है। यह 2018-19 में 35 प्रतिशत से बढ़कर 2024-25 में 42 प्रतिशत तक पहुंच गई। वहीं, सोशल ऑडिट के जरिए पारदर्शिता सुनिश्चित करते हुए 2024-25 में 55,991 ग्राम पंचायतों में और 2025-26 में दिसंबर तक 51,648 ग्राम पंचायतों में ऑडिट पूरा किया गया।

प्रदेश में प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा तक सरकार के अभूतपूर्व प्रयास

लखनऊ. प्रदेश सरकार ने वर्ष 2017-18 से अब तक शिक्षा को सर्वसुलभ, गुणवत्तापरक और रोजगारोन्मुख बनाने के लिए अनेक ठोस और दूरदर्शी कदम उठाए हैं। युवाओं को कौशल विकास, नवाचार और स्टार्टअप संस्कृति से जोड़ते हुए शिक्षा को प्रदेश की प्रगति का प्रमुख आधार बनाया जा रहा है। बजट सत्र के पहले दिन प्रस्तुत आर्थिक समीक्षा में यह स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है कि प्राथमिक शिक्षा में ड्रॉपआउट रोकने से लेकर उच्च शिक्षा को वैश्विक मानकों के अनुरूप विकसित करने तक में सरकार ने उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। विद्यालयों का विस्तृत नेटवर्क  केन्द्र की राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 को उत्तर प्रदेश में क्रियान्वित करने और सबके लिए शिक्षा को सुलभ बनाने के लिए 2 लाख 62 हजार 358 विद्यालयों का एक विस्तृत नेटवर्क तैयार किया गया है। इनमें 1 लाख 35 हजार 658 प्राथमिक, 90 हजार 243 उच्च प्राथमिक, 11 हजार 938 सेकेंडरी, 24 हजार 519 हायर सेकेंडरी स्कूल शामिल हैं। वहीं प्रधानमंत्री स्कूल फॉर राइजिंग इंडिया (पीएमश्री) योजना के अंतर्गत प्रदेश के 1722 विद्यालयों का चयन किया गया जिन्हें “हरित विद्यालय” के रूप में विकसित किया जा रहा है।  साक्षरता दर में वृद्धि 2017-18 से लेकर 2023-24 तक उत्तर प्रदेश में शैक्षिक उपलब्धता, आधारभूत ढांचे, बच्चों के नामांकन, शिक्षा में लोगों की सामुदायिक सहभागिता जैसे क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। साक्षरता दर की बात करें तो जहां 2017-18 में पुरुष साक्षरता दर 80.6% व महिला साक्षरता दर 62.9% थीं, वहीं 2023-24 में यह बढ़कर क्रमश: 86% व 70.4% हो गई है।  बढ़ाया गया प्राथमिक शिक्षा का बजट सुदृढ़ शैक्षिक ढांचे के लिए आर्थिक प्रोत्साहन के महत्व को समझते हुए प्रदेश सरकार ने 2024-25 में प्राथमिक शिक्षा पर कुल 68.46 हजार करोड़ और 2025-26 में 82.34 हजार करोड़ रुपये व्यय किए, जो कि वर्ष 2016-17 में केवल 32.91 हजार करोड़ था। अर्थात 2017-18 की तुलना में 2025-26 में लगभग 2.08 गुना की वृद्धि दर्ज की गई। प्रदेश में समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत स्कूली शिक्षा संवर्धन के लिए वर्ष 2017-18 में कुल 6322.07 करोड़ रुपये खर्च किए गए, जो कि 2024-25 में बढ़कर 8263.37 करोड़ रुपये हो गया। समग्र शिक्षा योजना के ही अंतर्गत 2274 उच्च प्राथमिक एवं कम्पोजिट स्कूलों में लर्निंग-बाई-डूइंग कार्यक्रम चल रहा है, जो 2025-26 में 3288 स्कूलों तक पहुंच चुका है।  योजनाएं, जिनसे हो रहा है प्राथमिक शिक्षा का उन्नयन  शैक्षिक सत्र 2025-26 में कक्षा 1 से 8 के 1 करोड़ 47 लाख बच्चों को नि:शुल्क पाठ्य पुस्तकें व कार्य पुस्तिकाएं वितरित की गई हैं। सभी परिषदीय व एडेड स्कूलों में कक्षा 1 से 8 तक के बच्चों को यूनिफॉर्म, स्कूल-बैग, जूता-मोजा व स्टेशनरी उपलब्ध कराने के लिए उनके माता-पिता के खाते में डीबीटी के माध्यम से 1200 रुपये प्रति छात्र/छात्रा उपलब्ध कराए जा रहे हैं। डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए 25 हजार 790 परिषदीय उच्च प्राथमिक, कम्पोजिट व कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में स्मार्ट क्लास सेटअप बनाए गए हैं। साथ ही 880 विकासखंडों के ब्लॉक संसाधन केन्द्रों व 4688 स्कूलों में आईसीटी लैब की स्थापना की गई है। वर्ष 2025-26 में 5810 उच्च प्राथमिक व कम्पोजिट स्कूलों में स्मार्ट क्लास सेटअप व 8291 स्कूलों में आईसीटी लैब की स्थापना की जा रही है।  शिक्षा के पंखों से उड़ान भरती बालिकाएं प्रदेश में बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सभी 746 कस्तूरबा गांधी विद्यालयों में 87700 बालिकाएं शिक्षा ग्रहण कर रही है। आईआईटी गांधीनगर, गुजरात के सहयोग से लगभग 68000 बालिकाओं में रोचक गतिविधियों के माध्यम से विज्ञान विषय में रुचि व क्षमता बढ़ाने के लिए क्यूरियोसिटी प्रोग्राम चल रहे हैं। खेलों के प्रति बालिकाओं की रुचि बढ़ाने के लिए “एक केजीबीवी एक खेल” कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। बालिकाओं में आत्मरक्षा कौशल बढ़ाकर उन्हें सशक्त बनाने के लिए रानी लक्ष्मीबाई आत्मरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत अब तक 10 लाख 22 हजार 508 बालिकाओं को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। शिक्षा को सर्वोन्मुखी बनाने के लिए सरकार के अन्य प्रयास दिव्यांग बच्चों की गुणवत्तापरक समावेशी शिक्षा के लिए 6 से 14 वर्ष के दिव्यांग बच्चों को चिन्हित करने व ऑनलाइन ट्रैकिंग करने के लिए समर्थ पोर्टल विकसित किया गया है। दृष्टि दिव्यांग बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ते हुए 2793 पूर्ण दृष्टि दिव्यांग बच्चों को ब्रेल पाठ्य-पुस्तकें, 4438 अल्प दृष्टि दिव्यांग बच्चों को इन्लार्ज प्रिंट की पाठ्य पुस्तकें उपलब्ध कराई गई हैं। साथ ही विशिष्ट दिव्यांग बच्चों को उनकी जरूरत के हिसाब से उपकरण भी उपलब्ध कराए गए हैं। सरकार के प्रयासों से हुए उल्लेखनीय सुधार यूनीफाइड डिस्ट्रिक्ट इन्फॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन प्लस, भारत सरकार की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार शैक्षिक सत्र 2017-18 में उच्च प्राथमिक विद्यालयों में बच्चों की सकल नामांकन दर 75.3% थी जो वर्ष 2024-25 में 83.9% हो गई है। प्राथमिक विद्यालयों में सत्र 2017-18 में ड्रॉपआउट की दर 7.2 थी जो 8 वर्षों में घटकर शून्य हो चुकी है। वहीं उच्च प्राथमिक विद्यालयों में ड्रॉपआउट 7.4 से घटकर आठ वर्षों में 3.0 हो गया है। सरकार के प्रयासों से स्कूलों में रिटेंशन (ठहराव) भी बढ़ा है। वर्ष 2017-18 के मुकाबले यह रिटेंशन 77.8% से बढ़कर 2025-26 में 86.9% हो चुका है।  सुदृढ़ हुआ माध्यमिक शिक्षा का ढांचा वर्तमान में प्रदेश में 29 हजार 532 माध्यमिक विद्यालय संचालित हैं जिनमें 2814 राजकीय, 4523 अशासकीय सहायता प्राप्त व 22195 स्ववित्तपोषित विद्यालय हैं। माध्यमिक शिक्षा का ढांचा सुदृढ़ करने के लिए परख, प्रज्ञान, पहुंच पोर्टल विकसित किए गए हैं। “पंख पोर्टल” से करियर गाइडेंस दिया जा रहा है। बोर्ड परीक्षाओं के दौरान राज्य स्तरीय कंट्रोल रूप से सभी 8373 परीक्षा केन्द्रों में वॉयस रिकॉर्डर से लैस सीसीटीवी कैमरों द्वारा लाइव मॉनीटिरिंग करवाई गई। प्रोजेक्ट अलंकार व समग्र शिक्षा अभियान के अंतर्गत कुल 500 स्कूलों में विज्ञान प्रयोगशालाएं बनाने का लक्ष्य है। राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में कुल 1084 आईसीटी लैब स्थापित हो चुके हैं।  पिछले एक दशक में महाविद्यालयों की संख्या 6681 से बढ़कर 8030 हो गई है, यानी लगभग 20% की वृद्धि हुई है। कुल 75 निर्माणाधीन राजकीय महाविद्यालयों में से 70 महाविद्यालय संचालित भी हो चुके हैं। प्रदेश में वर्तमान में कुल 38 राज्य विश्वविद्यालय और 52 निजी विश्वविद्यालय संचालित हैं। उच्च शिक्षा में शोध, नवाचार व ज्ञान सृजन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से वित्तीय वर्ष 2025-26 में 26916.03 लाख रुपये के बजट … Read more

वित्तीय वर्ष 2025–26 में ₹36 लाख करोड़ तक पहुंचने की ओर अग्रसर है यूपी की इकॉनमी

लखनऊ.  वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने सोमवार को विधानमंडल के बजट सत्र के पहले दिन उत्तर प्रदेश की पहली आर्थिक समीक्षा सदन के पटल पर प्रस्तुत की। समीक्षा में प्रदेश की अर्थव्यवस्था, निवेश, प्रति व्यक्ति आय, राजकोषीय स्थिति और क्षेत्रीय योगदान को विस्तार से सामने रखा गया है। वित्त मंत्री ने बताया कि उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था ने बीते आठ वर्षों में ऐतिहासिक विस्तार किया है। वर्ष 2016–17 में ₹13.30 लाख करोड़ की अर्थव्यवस्था, वर्ष 2024–25 में बढ़कर ₹30.25 लाख करोड़ पार कर चुकी है। वित्तीय वर्ष 2025–26 में इसके ₹36 लाख करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। यह वृद्धि उत्तर प्रदेश को देश की सबसे बड़ी राज्य अर्थव्यवस्थाओं में मजबूती से स्थापित करती है। राज्य की प्रगति, जन-आकांक्षाओं और भविष्य की संभावनाओं का जीवंत दस्तावेज वित्त मंत्री ने सदन में कहा कि आज हम सब एक ऐतिहासिक पल के साक्षी बन रहे हैं, जब उत्तर प्रदेश भी भारत सरकार की तरह अपनी आर्थिक समीक्षा पहली बार सदन के समक्ष प्रस्तुत कर रहा है। प्रदेश की आर्थिक समीक्षा केवल आंकड़ों का संकलन नहीं, बल्कि राज्य की प्रगति, जनता की आकांक्षाओं और भविष्य की संभावनाओं का जीवंत दस्तावेज है। भारत की सांस्कृतिक धरोहर और ऐतिहासिक गौरव का प्रतीक, उत्तर प्रदेश आज नई आर्थिक दृष्टि और ऊर्जा के साथ अपने लक्ष्यों की ओर अग्रसर है। प्रदेश की अर्थव्यवस्था 25 करोड से अधिक नागरिकों की आकांक्षाओं का प्रतिबिंब है, जो इसे कृषि उत्पादन, औद्योगिक विकास और तकनीकी नवाचार का प्रमुख केंद्र बना रहा है। निवेशकों का बदला नजरिया, ₹50 लाख करोड़ से अधिक के मिले निवेश प्रस्ताव वित्त मंत्री ने कहा कि एक समय निवेशकों की प्राथमिकता सूची में न रहने वाला उत्तर प्रदेश अब औद्योगिक निवेश का प्रमुख केंद्र बन चुका है। पारदर्शी नीतियों, समयबद्ध स्वीकृतियों और ‘ट्रिपल एस’ (सेफ्टी, स्टेबिलिटी और स्पीड) की गारंटी के चलते प्रदेश को अब तक ₹50 लाख करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। यह निवेश वातावरण में आए निर्णायक बदलाव को दर्शाता है। राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में बढ़ा उत्तर प्रदेश का योगदान आर्थिक समीक्षा के अनुसार, राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में उत्तर प्रदेश का योगदान वर्ष 2016–17 के 8.6 प्रतिशत से बढ़कर वर्ष 2024–25 में 9.1 प्रतिशत तक पहुंच गया है। यह वृद्धि प्रदेश की आर्थिक मजबूती और राष्ट्रीय विकास में बढ़ती भूमिका को रेखांकित करती है। प्रति व्यक्ति आय में ऐतिहासिक बदलाव समीक्षा में बताया गया कि स्वतंत्रता के बाद पहली बार उत्तर प्रदेश ने प्रति व्यक्ति आय में गिरावट के लंबे रुझान को पलटा है। वर्ष 2016–17 में ₹54,564 रही प्रति व्यक्ति आय (प्रति व्यक्ति निवल उत्पाद) वर्ष 2024–25 में बढ़कर ₹1,09,844 हो गई है। वित्तीय वर्ष 2025–26 के लिए इसके ₹1,20,000 तक पहुंचने का अनुमान लगाया गया है। राष्ट्रीय औसत की तुलना में भी प्रति व्यक्ति आय अनुपात में सुधार दर्ज किया गया है। 2014-15 में यह राष्ट्रीय औसत का केवल 50.2% रह गई थी, जबकि 2024-25 में गिरावट के रुख में बदलाव करते हुए प्रतिव्यक्ति अनुपात बढ़कर 53.5% हो गया।  कृषि, उद्योग और सेवा तीनों क्षेत्र में संतुलित विकास आर्थिक समीक्षा के अनुसार, वर्ष 2024–25 में प्रदेश की जीएसडीपी में कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों की हिस्सेदारी 25.8 प्रतिशत, औद्योगिक क्षेत्र की 27.2 प्रतिशत तथा सेवा क्षेत्र की 47 प्रतिशत रही है। यह दर्शाता है कि उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था अब केवल कृषि आधारित न रहकर बहु-क्षेत्रीय विकास की ओर अग्रसर है। बजट आकार में अभूतपूर्व वृद्धि वित्त मंत्री ने बताया कि प्रदेश के बजट आकार में भी विगत 9 वर्षों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। वर्ष 2016–17 में ₹3.47 लाख करोड़ का बजट अब बढ़कर वर्ष 2025–26 में ₹8.33 लाख करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। समीक्षा में बताया गया कि यह वृद्धि 4.86 लाख करोड़) पूर्ववर्ती सरकारों की तुलना में कहीं अधिक तेज रही है। 2008-09 से 2016-17 (8 वर्ष) में यह वृद्धि मात्र 2.34 लाख करोड़ थी। पूंजीगत व्यय से विकास को गति उन्होंने बताया कि सार्वजनिक निवेश को प्राथमिकता देते हुए पूंजीगत व्यय में दो गुने से अधिक वृद्धि की गई है। वर्ष 2016–17 में पूंजीगत व्यय ₹69.79 हजार करोड़ रहा, जबकि वर्ष 2024–25 में यह बढ़कर ₹147.72 हजार करोड़ हो गया है। इसका सीधा असर अवसंरचना, औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन पर पड़ा है। वित्तीय अनुशासन की मिसाल बना उत्तर प्रदेश आर्थिक समीक्षा में प्रदेश की राजकोषीय स्थिति को संतुलित और अनुशासित बताया गया है। सार्वजनिक ऋण-से-जीसडीपी अनुपात वर्ष 2016–17 के 29.3 प्रतिशत से घटकर वर्ष 2024–25 में 28.0 प्रतिशत हो गया है, जो राष्ट्रीय और वैश्विक औसत से काफी कम है। यह प्रदेश की मजबूत वित्तीय प्रबंधन नीति को दर्शाता है। कर राजस्व में ढाई गुना वृद्धि प्रदेश का अपना कर राजस्व भी उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है। वर्ष 2016–17 में ₹0.86 लाख करोड़ रहा स्टेट ओन टैक्स रेवेन्यू वर्ष 2024–25 में लगभग ढाई गुना बढ़कर ₹2.09 लाख करोड़ तक पहुंच गया है। आर्थिक समीक्षा में इसे कर सुधारों और प्रशासनिक दक्षता का परिणाम बताया गया है।

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