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अदृश्य दुश्मनों के हमलों से न्यायपालिका संकट में, इंटरपोल से सहयोग की मांग

रायपुर अदालतों को मिल रहे लगातार धमकी भरे ई-मेल ने सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है। अदालत परिसरों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है, लेकिन जांच एजेंसियों के हाथ अब तक खाली होने से उनके साइबर सुरक्षा तंत्र और तकनीकी क्षमता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। इसे देखते हुए अब इन अदृश्य दुश्मनों का सुराग लगाने के लिए ही इंटरपोल से मदद ली जा रही है। राज्य साइबर सेल की ओर से इस संबंध में अब पहल की गई है। जिला अदालतों को बम से उड़ाने की धमकी भरे ई-मेल देश के विभिन्न राज्यों की अदालतों के साथ ही बिलासपुर हाई कोर्ट, रायपुर, दुर्ग और कोरबा जैसी जिला अदालतों को बम से उड़ाने की धमकी भरे ई-मेल भेजे गए थे। एक महीने से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी स्थिति यह है कि जांच एजेंसियों के पास ठोस सुराग के नाम पर कुछ भी नहीं है। अत्याधुनिक डिजिटल हथियारों का उपयोग किया राज्य पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत मामले तो दर्ज किए हैं, लेकिन एनआइए से लेकर साइबर सेल तक की सक्रियता के बावजूद नतीजा सिफर (शून्य) है। जांच में यह बात सामने आई है कि ई-मेल भेजने वाले ने अपनी पहचान छिपाने के लिए वीपीएन (वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क) और टोर (ओपन-सोर्स साफ्टवेयर) ब्राउजर जैसे अत्याधुनिक डिजिटल हथियारों का उपयोग किया है। विदेशी सर्वर पर स्थित कंपनियों से डेटा प्राप्त करने में होने वाली महीनों की देरी और इंटरपोल की लंबी कागजी प्रक्रिया ने जांच की रफ्तार को पूरी तरह कुंद कर दिया है। संसाधनों का अभाव बनी चुनौती पुलिस मुख्यालय के अधिकारी यह स्वीकार करते हैं कि हमारे पास फिलहाल ऐसी कोई स्पेशल रिस्पांस टीम नहीं है, जो अंतरराष्ट्रीय सर्वर के पीछे छिपे अपराधियों को 24 घंटे के भीतर बेनकाब कर सके। अदालतों के बाहर सघन चेकिंग, बैग स्कैनिंग और अतिरिक्त सुरक्षा घेरे के कारण लोग और वकील परेशान हैं। सिर्फ शरारत मान लेना बड़ी चूक अब तक कोई अप्रिय घटना नहीं होने के कारण जांच एजेंसियां इसे सिर्फ डराने वाली शरारत के रूप में देख रही हैं। लेकिन विदेशी धरती से बैठकर देश की संवैधानिक संस्थाओं को चुनौती देना किसी बड़ी साजिश का हिस्सा हो सकता है। मामले की तह तक जाना राज्य की सुरक्षा के लिए अनिवार्य है। विशेषज्ञों की कमी पर हाई कोर्ट जता चुका है नाराजगी बिलासपुर हाई कोर्ट ने पिछले दिनों साइबर एक्सपर्ट्स की नियुक्तियां न होने पर नाराजगी जताई थी। गृह विभाग की ओर से जवाब दिया गया कि भर्ती प्रक्रिया जारी है, लेकिन बम की इन धमकियों ने यह साफ कर दिया है कि डिजिटल सुरक्षा के क्षेत्र में हम कितने पीछे हैं। जब तक राज्य में उच्चस्तरीय साइबर विशेषज्ञ और त्वरित डेटा रिकवरी तंत्र नहीं होगा, तब तक अदृश्य अपराधी इसी तरह हमारी व्यवस्था को चुनौती देते रहेंगे। भविष्य में ऐसी धमकियां और गंभीर रूप ले सकती हैं विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी घटनाएं केवल सुरक्षा एजेंसियों की तकनीकी क्षमता ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साइबर सहयोग की आवश्यकता को भी रेखांकित करती हैं। यदि समय रहते अत्याधुनिक उपकरण, प्रशिक्षित विशेषज्ञ और त्वरित डेटा एक्सेस व्यवस्था विकसित नहीं की गई, तो भविष्य में ऐसी धमकियां और गंभीर रूप ले सकती हैं।

वन मंत्री कश्यप ने बेतबेड़ा में 83.50 लाख रुपये के विकास कार्यों का किया भूमिपूजन

रायपुर वन मंत्री  कश्यप ने ग्राम बेतबेड़ा में 83 लाख 50 हजार रुपये के 14 विकास कार्यों का किया भूमिपूजन प्रदेश के वन मंत्री  केदार कश्यप ने शनिवार को कोंडागांव विकासखंड अंतर्गत ग्राम बेतबेड़ा में 83 लाख 50 हजार रुपये की लागत से स्वीकृत 14 विकास कार्यों का विधिवत भूमिपूजन किया। इस अवसर पर वन मंत्री  कश्यप ने कहा कि सरकार द्वारा क्षेत्र के समग्र विकास एवं मूलभूत सुविधाओं के विस्तार के लिए लगातार कार्य किए जा रहे हैं। इन कार्यों से क्षेत्र के विकास को नई गति मिलेगी। वन मंत्री  कश्यप ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की पूर्व संध्या में महिलाओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भारत में प्राचीन समय से महिलाओं को सम्मान देने की समृद्ध परंपरा रही है। सरकार की  जनकल्याणकारी योजनाओं से प्रदेश की महिलाएं सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की दिशा में लगातार आगे बढ़ रही हैं। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में विकसित भारत जीरामजी योजना प्रारंभ की गई है, जो ग्रामीण आजीविका को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने योजना के लाभों की जानकारी देते हुए बताया कि इसके माध्यम से गांवों में आवश्यक कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर लिया जाएगा। योजना के अंतर्गत अब 125 दिनों का रोजगार उपलब्ध होगा तथा मजदूरी का भुगतान 15 दिनों के भीतर किया जाएगा। इसके अलावा बेरोज़गारी भत्ता का भी प्रावधान किया गया है। वन मंत्री  कश्यप ने परंपरागत एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने पर जोर देते हुए कहा कि आज हमारे पारंपरिक अनाज एवं वनोपज की मांग देश-विदेश में तेजी से बढ़ रही है, जिससे किसानों एवं ग्रामीणों को बेहतर अवसर मिल रहे हैं। कार्यक्रम को जिला पंचायत सदस्य मती यशोदा कश्यप, जनपद पंचायत अध्यक्ष मती अनीता कोर्राम, जनपद पंचायत उपाध्यक्ष  टोमेन्द्र ठाकुर सहित अन्य अतिथियों ने भी संबोधित किया। भूमिपूजन किए गए कार्यों में ग्राम पंचायत मुंगवाल में पंचायत भवन के पास सांस्कृतिक मंच निर्माण लागत 5 लाख रूपए, ग्राम पंचायत चमई में कोकड़भाटा में जैतराम नेताम के खेत के पास 3 मीटर पुलिया निर्माण लागत 9 लाख रूपए, ग्राम पंचायत मड़ागांव में बावड़ी पटेलपारा में सांस्कृतिक भवन के पास 1.50 मीटर पुलिया निर्माण लागत 4.50 लाख रूपए, ग्राम पंचायत बेतबेड़ा में मुख्य मार्ग जाने वाले रोड में लखूराम के खेत के पास 2 मीटर पुलिया निर्माण लागत 6 लाख रुपए, ग्राम पंचायत बोरगांव अंतर्गत खंडम मार्ग में फूलसिंह के खेत के पास 1.5 मीटर पुलिया निर्माण लागत 4.50 लाख रूपए, ग्राम पंचायत बोटीकनेरा अंतर्गत मांझीपारा फरसू घर के पास 1.50 मीटर पुलिया निर्माण लागत 4.50 लाख रुपए, ग्राम पंचायत मड़ानार के बड़ेपारा में सामुदायिक भवन निर्माण लागत 5 लाख रुपए, ग्राम पंचायत हथकली के हासेल में मुख्य मार्ग से गोट गोंदी पारा मानू खेत के पास 2 मीटर पुलिया निर्माण लागत 6 लाख रुपए, ग्राम पंचायत तुमड़ीवाल में आलवाड़पारा के बीच 2 मीटर पुलिया निर्माण लागत 6 लाख रुपए, ग्राम पंचायत कुधूर में मुख्य मार्ग से चंडेला मार्ग में 2 मीटर पुलिया निर्माण लागत 6 लाख रुपए, ग्राम पंचायत मटवाल में जटानाथ घर के पास 2 मीटर पुलिया निर्माण लागत 6 लाख रूपए, ग्राम पंचायत बड़े कुरूषनार के पुरन बेड़ापारा मार्ग में चिंतु लोहार घर के पास 3 मीटर पुलिया निर्माण लागत 9 लाख रूपए, ग्राम पंचायत मूलनार में इन्द्रू यादव के घर के पीछे 2 मीटर पुलिया निर्माण लागत 6 लाख रुपए तथा ग्राम पंचायत नवागांव के खोड़सानार में पीलू घर के पास 2 मीटर पुलिया निर्माण लागत 6 लाख रुपए के कार्य शामिल हैं। इस अवसर पर स्थानीय जनप्रतिनिधिगण, एसडीएम सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने चन्द्रनाहू कुर्मी क्षत्रिय समाज के अधिवेशन में की शिरकत

रायपुर समाज के लिए सामुदायिक भवन हेतु 50 लाख और पारागांव में सीसी रोड निर्माण के लिए 20 लाख रुपये देने की घोषणा जब समाज स्वयं अपने बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी लेता है, तब नई पीढ़ी और अधिक आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ती है। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने आज रायपुर जिले के पारागांव में आयोजित चन्द्रनाहू कुर्मी क्षत्रिय समाज के दो दिवसीय वार्षिक अधिवेशन को संबोधित करते हुए यह बात कही।   इस अवसर पर मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने समाज के विकास के लिए महत्वपूर्ण घोषणाएं करते हुए सामुदायिक भवन निर्माण के लिए 50 लाख रुपये देने की घोषणा की। साथ ही पारागांव में सीसी रोड निर्माण के लिए 20 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की। मुख्यमंत्री  साय ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर उपस्थित सभी माताओं-बहनों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि आज महतारी वंदन योजना को दो वर्ष पूर्ण हो गए हैं और इस अवसर पर प्रदेश की लगभग 70 लाख महिलाओं के खातों में योजना की 25वीं किश्त की राशि अंतरित की गई है। उन्होंने कहा कि यह योजना महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने कहा कि चन्द्रनाहू कुर्मी क्षत्रिय समाज का गौरवशाली इतिहास रहा है और इस समाज ने देश और प्रदेश को अनेक प्रतिभाशाली व्यक्तित्व दिए हैं। उन्होंने समाज द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि समाज के माध्यम से 2000 से अधिक विद्यार्थियों को शिक्षा का अवसर मिल रहा है, जो अत्यंत सराहनीय है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि  राज्य सरकार गरीब और जरूरतमंद परिवारों को पक्के मकान उपलब्ध कराने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।  मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ को देश का धान का कटोरा कहा जाता है और किसानों के हित में राज्य सरकार लगातार निर्णय ले रही है। उन्होंने कहा कि होली पर्व के पूर्व 25.28 लाख किसानों के खातों में कृषक उन्नति योजना के अंतर्गत 10 हजार 324 करोड़ रुपये की राशि अंतरित की गई है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि रामलला दर्शन योजना के माध्यम से पिछले दो वर्षों में 42 हजार से अधिक श्रद्धालु अयोध्या जाकर भगवान राम के दर्शन कर चुके हैं। इसके साथ ही मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना को भी पुनः प्रारंभ किया गया है, जिससे बुजुर्गों और श्रद्धालुओं को विभिन्न तीर्थस्थलों के दर्शन का अवसर मिल रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2026 के बजट में राज्य के सभी वर्गों के विकास को ध्यान में रखते हुए प्रावधान किए गए हैं। उन्होंने समाज के युवाओं से आग्रह किया कि जो बेटा-बेटी उद्यम करना चाहते हैं, वे राज्य की नई उद्योग नीति का अध्ययन करें। मुख्यमंत्री ने बताया कि छत्तीसगढ़ को लगभग 8 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं और इन निवेश प्रस्तावों को जमीन पर उतारने की दिशा में कार्य प्रारंभ हो चुका है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट उपलब्धि प्राप्त करने वाले प्रतिभावान व्यक्तियों को सम्मानित किया। सम्मानित होने वालों में  दीपक चंद्राकर (सिविल जज में चयनित), कु. लक्ष्मी चंद्राकर (पीएससी में चयनित, वाणिज्यिक कर अधिकारी), डॉ. प्रीति करण चंद्राकर (हेड ऑफ डिपार्टमेंट, कंप्यूटर एंड साइंस, एनआईटी रायपुर), डॉ. करण चंद्राकर (आईआईटी दिल्ली से टेक्सटाइल एवं फाइबर इंजीनियरिंग में पीएचडी), कु. लक्ष्मी चंद्राकर (इंडो-नेपाल टेस्ट सीरीज बॉल बैडमिंटन में गोल्ड मेडल), डॉ. दिव्या चंद्राकर एवं डॉ. राहुल चंद्राकर (एमबीबीएस, शासकीय चिकित्सालय महासमुंद) शामिल हैं। कार्यक्रम को केबिनेट मंत्री  गुरु खुशवंत साहेब, विधायक  ललित चंद्राकर तथा विधायक  योगेश्वर राजू सिन्हा ने भी संबोधित किया और समाज के संगठन, शिक्षा और सामाजिक विकास में योगदान की सराहना की। इस अवसर पर समाज के पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित थे।

बस्तर की धरती से मातृशक्ति को बड़ा संबल : महतारी वंदन योजना की 25वीं किश्त जारी

रायपुर अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर 69 लाख 48 हजार महिलाओं के खातों में 25वीं किश्त के रूप में 641 करोड़ 58 लाख रुपये अंतरित मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर बस्तर के लाल बहादुर शास्त्री मिनी स्टेडियम में आयोजित वृहद महतारी वंदन सम्मेलन–2026 में प्रदेश की माताओं-बहनों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की मातृशक्ति समाज की सबसे बड़ी शक्ति है। उन्होंने कहा कि महिलाओं का आर्थिक और सामाजिक सशक्तिकरण ही विकसित छत्तीसगढ़ की मजबूत नींव है और राज्य सरकार का हर निर्णय महिलाओं के कल्याण, सम्मान और आत्मनिर्भरता को केंद्र में रखकर लिया जा रहा है।  मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने इस अवसर पर महतारी वंदन योजना की 25वीं किश्त जारी करते हुए प्रदेश की 69 लाख 48 हजार महिलाओं के खातों में 641 करोड़ 58 लाख रुपये अंतरित किए। इसके साथ ही इस योजना के अंतर्गत अब तक महिलाओं को 16 हजार 237 करोड़ रुपये की राशि प्रदान की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि यह योजना केवल आर्थिक सहायता का माध्यम नहीं, बल्कि माताओं-बहनों के आत्मविश्वास, सम्मान और आत्मनिर्भरता को मजबूत करने वाला जनकल्याणकारी अभियान बन चुकी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें 10 मार्च 2024 का वह दिन याद है, जब प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने महतारी वंदन योजना का शुभारंभ किया था। उसी समय यह संकल्प लिया गया था कि प्रदेश की प्रत्येक पात्र महिला के खाते में हर महीने निर्धारित तिथि पर एक हजार रुपये की राशि पहुंचेगी। पिछले 25 महीनों से यह संकल्प लगातार पूरा किया जा रहा है और इस किश्त के साथ अब तक प्रत्येक हितग्राही महिला को 25 हजार रुपये की राशि प्राप्त हो चुकी है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने जो वादा किया था, उसे पूरी प्रतिबद्धता के साथ निभाया है। मुख्यमंत्री  साय ने बताया कि महतारी वंदन योजना को निर्बाध रूप से जारी रखने के लिए राज्य सरकार ने इस वर्ष के बजट में 8 हजार 200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। उन्होंने कहा कि यह राशि माताओं-बहनों के जीवन में प्रत्यक्ष बदलाव ला रही है। महिलाएं इस सहायता का उपयोग बच्चों की पढ़ाई, स्वास्थ्य, घरेलू जरूरतों, बचत और स्वरोजगार जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में कर रही हैं। इससे परिवारों में आर्थिक स्थिरता बढ़ रही है और समाज के समग्र विकास को नई दिशा मिल रही है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रदेश की माताएं-बहनें केवल परिवार का संचालन ही नहीं करतीं, बल्कि वे उत्कृष्ट वित्तीय प्रबंधक भी होती हैं। उन्होंने कहा कि महतारी वंदन योजना से प्राप्त राशि का महिलाओं ने अत्यंत समझदारी से उपयोग किया है। किसी ने बेटियों के भविष्य के लिए बचत की, किसी ने स्वरोजगार शुरू किया, किसी ने परिवार के छोटे व्यवसाय को बढ़ाया, तो किसी ने बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य पर खर्च कर घर की स्थिति को मजबूत बनाया। यह इस योजना की सबसे बड़ी सफलता है कि महिलाओं ने इसे स्वयं और परिवार की उन्नति का माध्यम बनाया। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय गृह मंत्री  अमित शाह के दृढ़ संकल्प तथा सुरक्षा बलों के अदम्य साहस से नक्सलवाद अब अंतिम चरण में पहुंच चुका है। नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों और आत्मसमर्पित नक्सलियों के पुनर्वास के लिए राज्य सरकार ने 15 हजार आवास स्वीकृत किए हैं। उन्होंने कहा कि बस्तर सहित दूरस्थ अंचलों में शांति, विकास और विश्वास का नया वातावरण बन रहा है, जिसमें महिलाओं की भागीदारी विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के सम्मान और सामाजिक सशक्तिकरण के लिए राज्य सरकार अनेक स्तरों पर कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के अंतर्गत पिछले दो वर्षों में 21 हजार 754 बेटियों के विवाह कराए गए हैं। महिलाओं को सुरक्षित, सुविधाजनक और गरिमापूर्ण कार्यस्थल उपलब्ध कराने के लिए प्रदेश में 368 महतारी सदन बनाने की स्वीकृति दी गई है, जिनमें से 137 महतारी सदन का निर्माण पूर्ण हो चुका है। ग्राम पंचायत स्तर पर इनका उपयोग महिलाओं की बैठकों, प्रशिक्षण, विपणन और सामुदायिक गतिविधियों के केंद्र के रूप में किया जाएगा। मुख्यमंत्री  साय ने बताया कि स्व-सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं की आय बढ़ाने के लिए राज्य सरकार लगातार पहल कर रही है। प्रदेश में अब तक 8 लाख महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ बनाया जा चुका है और अब सरकार का लक्ष्य इसे बढ़ाकर 10 लाख लखपति दीदी बनाने का है। उन्होंने कहा कि महिलाएं अब केवल सहभागी नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की नई नेतृत्वकारी शक्ति बनकर उभर रही हैं। इसी दिशा में महिला स्वसहायता समूहों के माध्यम से  रेडी टू ईट फूड निर्माण का कार्य पुनः प्रारंभ कराया गया है और इसे चरणबद्ध रूप से प्रदेश के शेष जिलों में भी लागू किया जा रहा है, ताकि स्थानीय स्तर पर महिलाओं को व्यापक रोजगार के अवसर मिल सकें। मुख्यमंत्री ने बस्तर क्षेत्र के संदर्भ में कहा कि नियद नेल्ला नार योजना के माध्यम से नक्सल प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाएं पुनः प्रारंभ की गई हैं, बंद पड़े स्कूलों को दोबारा शुरू कराया गया है, बिजली पहुंची है, मोबाइल टावर लगाए जा रहे हैं तथा स्वच्छ पेयजल और बेहतर सड़कों की सुविधा दूरस्थ बसाहटों तक पहुंच रही है। उन्होंने कहा कि केवल सड़कों का निर्माण ही नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री बस सेवा योजना के माध्यम से बस्तर और सरगुजा अंचल के ग्रामीण क्षेत्रों में परिवहन सुविधा भी मजबूत की गई है, जिससे लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसरों तक पहुंचने में आसानी हो रही है। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री  साय ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से धमतरी की नीतू साहू, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी की मिथलेश चतुर्वेदी, जांजगीर-चांपा की सरस्वती केंवट, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही की अनीता साहू तथा सरगुजा की निधि जायसवाल से संवाद किया।  मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी की मिथलेश चतुर्वेदी ने बताया कि पति के निधन के बाद उनके सामने परिवार चलाने की बड़ी चुनौती थी। शासन से मिली सहायता राशि और महतारी वंदन योजना के संबल से उन्होंने ई-रिक्शा खरीदकर आजीविका का नया साधन शुरू किया, जिससे अब वे अपने परिवार का भरण-पोषण आत्मसम्मान के साथ कर पा रही हैं। धमतरी की नीतू साहू ने बताया कि मजदूरी से होने वाली सीमित आय के कारण बेटियों के भविष्य के लिए बचत करना कठिन था, लेकिन महतारी वंदन योजना से मिलने वाली राशि से … Read more

विधायक उसेण्डी के मुख्य आतिथ्य में संपन्न हुआ कार्यक्रम

रायपुर लखपति दीदी पहल के अंतर्गत 04 महिलाओं को ई-रिक्शा वितरित अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर  कोंडागांव जिले की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में लखपति दीदी पहल के अंतर्गत चार महिलाओं को ई-रिक्शा प्रदान किया गया। बस्तर विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष एवं कोंडागांव विधायक  लता उसेंडी ने रविवार को मोर सुआद में जिले की चार महिलाओं को ई-रिक्शा वितरित किया गया। इस अवसर पर नगर पालिका अध्यक्ष श्री नरपति पटेल, कलेक्टर श्रीमती नूपुर राशि पन्ना एवं पुलिस अधीक्षक श्री पंकज चंद्रा भी उपस्थित रहे। इस दौरान विधायक  उसेंडी एवं कलेक्टर श्रीमती पन्ना ने सभी महिलाओं को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि इस पहल से महिलाओं को स्वरोजगार का अवसर मिलेगा और वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ सकेंगी। दीदी ई-रिक्शा योजना के अंतर्गत छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल में पंजीकृत हितग्राहियों को ई-रिक्शा प्रदान किया गया। इनमें ग्राम सातगांव की श्रीमती मेहन्दी बाई पाण्डे, ग्राम पंचायत दुधगांव चिखलपुटी की श्रीमती बुका कश्यप और श्रीमती सोमारी बाई तथा ग्राम संबलपुर निवासी श्रीमती मीना पटेल शामिल हैं। इस पहल से महिलाओं को रोजगार के नए अवसर प्राप्त होंगे तथा वे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकेंगी। जिला पंचाययत के सीईओ श्री अविनाश भोई के मार्गदर्शन में राष्ट्रीय ग्रामीण आजिविका मिशन बिहान की टीम का स्वसहायता समूह की महिलाओं को शासन की महात्वाकांक्षी योजना का लाभ दिलाने में महत्वपूर्ण योगदान रहा। इस अवसर पर एनआरएलएम के जिला मिशन प्रबंधक श्री विनय सिंह, डीपीएम श्री कुंजलाल सिंन्हा एवं श्री दुर्योधन मेघ, बीपीएम श्री फागूराम साहू, श्रम विभाग के अधिकारी कर्मचारी सहित समूह की महिलाएं उपस्थित रहीं।

स्वर्गीय दिलीप सिंह जूदेव की जयंती पर मुख्यमंत्री साय ने किया श्रद्धापूर्वक नमन

रायपुर, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने पूर्व लोकसभा सांसद स्वर्गीय दिलीप सिंह जूदेव की जयंती के अवसर पर आज राजधानी रायपुर के मुख्यमंत्री निवास परिसर में उनके छायाचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धापूर्वक नमन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री साय ने स्वर्गीय दिलीप सिंह जूदेव के दीर्घ सामाजिक-राजनीतिक जीवन और समाज के प्रति उनके उल्लेखनीय योगदानों को स्मरण करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी।उन्होंने कहा कि स्वर्गीय दिलीप सिंह जूदेव का संपूर्ण जीवन समाज सेवा, जनकल्याण और विशेष रूप से जनजातीय समाज के उत्थान के लिए समर्पित रहा। उन्होंने निस्वार्थ भाव से समाज के कमजोर और वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए निरंतर कार्य किया। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि जूदेव जी के विचार, उनके आदर्श और सेवा का भाव आज भी समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं। हमें उनके बताए मार्ग पर चलकर समाज और प्रदेश के विकास के लिए निरंतर प्रयास करना चाहिए। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि वनांचल क्षेत्रों में आदिवासी समाज की पहचान, स्वाभिमान और सामाजिक जागरूकता को मजबूत करने में स्वर्गीय जूदेव का योगदान सदैव स्मरणीय रहेगा। उनके प्रयासों से जनजातीय समाज में आत्मगौरव की भावना सशक्त हुई और समाज में सकारात्मक चेतना का संचार हुआ। इस अवसर पर विधायक गोमती साय, विधायक  रायमुनि भगत, प्रबल प्रताप सिंह जूदेव, मुख्यमंत्री के प्रेस अधिकारी आलोक सिंह सहित अन्य गणमान्यजन उपस्थित थे।

कबीरधाम की महिलाओं को 24 किश्तों में मिले 563.49 करोड़ रुपए

रायपुर अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर उपमुख्यमंत्री  विजय शर्मा कवर्धा में जिलास्तरीय महतारी वंदन कार्यक्रम में हुए शामिल अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय ने महतारी वंदन योजना की 25 वीं किश्त की राशि बस्तर में आयोजित कार्यक्रम से जारी की। इस अवसर पर कवर्धा के वीर सावरकर भवन में महतारी वंदन सम्मेलन का आयोजन किया। इस आयोजन में उपमुख्यमंत्री  विजय शर्मा एवं सांसद  संतोष पाण्डेय भी कार्यक्रम में शामिल हुए।            सम्मेलन में विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिलाओं को उपमुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने प्रशस्ति पत्र और प्रतीक चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया। इस दौरान जिला पंचायत अध्यक्ष  ईश्वरी साहू, नगर पालिका अध्यक्ष  चन्द्र प्रकाश चंद्रवंशी, उपाध्यक्ष  कैलाश चंद्रवंशी,  जनपद पंचायत अध्यक्ष मती सुषमा बघेल, जिला पंचायत सदस्य  राम कुमार भट्ट, डॉ वीरेन्द्र साहू, सभापति मती सुष्मिता पटेल,  नितेश अग्रवाल,  विजय पटेल,  मनीराम, मती मधु तिवारी, मती सुषमा चंद्रवंशी, जिला पंचायत सीईओ  अभिषेक अग्रवाल, जिला कार्यक्रम अधिकारी  आनंद तिवारी, पार्षदगण सहित बड़ी संख्या में महिलाएं उपस्थित रही।      उपमुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने विश्व महिला दिवस की बधाई देते हुए कहा कि सिर्फ आज ही नहीं हर दिन महिला दिवस है। समाज में जब भी कुछ सकारात्मक बदलाव लाना होता है इसकी शुरुआत महिलाओं से होती है। पुरातन काल और हजारों वर्षों से यह हमारी परम्परा है, जहां माताओं का स्थान समाज में सर्वोच्च है। हमारे देश में माताएं देवियों के रूप में पूजित हैं। आदि शंकराचार्य ने जब मंडन मिश्रा से शास्त्रार्थ किया था तो निर्णायक की भूमिका भी एक विदुषी महिला उभय भारती जो कि मंडन मिश्रा की पत्नी थी, उन्होंने निभाई थी।        भारत में परिवर्तन के लिए महिला शक्ति को स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से आगे बढ़ाने का कार्य कर रहे हैं। महिलाओं को स्व रोजगार, उद्यमिता और सहकारिता से जोड़ते हुए लखपति दीदी के रूप आगे बढ़ाया जा रहा है। महतारी वंदन पूरे प्रदेश में सबसे बड़ी योजना है। महतारी वंदन योजना महिला सशक्तिकरण की हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। हर माह 1 हजार रुपए की राशि महिलाओं को मिल रही है। आज योजना की 25 वीं किश्त जारी हो रही है। यह राशि महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बना रही है। महिलाएं स्व रोजगार और उद्यमिता को अपनाकर आय अर्जित कर रही हैं। जिससे वे अपने बच्चों और घर परिवार से जुड़े आर्थिक जरूरतों की पूर्ति खुद करने में सक्षम हो रही हैं।      उन्होंने आगे कहा कि महिलाओं के हाथ में योजना की राशि मिले और वे स्वयं अपने खाते से राशि निकाल सकें, इसके लिए हर पंचायत में अटल डिजिटल केंद्र खोल जा रहे हैं। जिससे महिलाओं को दूर शहरों में बैंक या सोसायटी तक जाना न पड़े। महिला स्व सहायता समूहों के लिए महतारी सदन का निर्माण किया जा रहा है, यह विशेष रूप से महिलाओं के लिए ही होगा। इसका निर्माण क्लस्टर लेवल फेडरेशन स्तर पर किया जा रहा है। प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सदन में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है। यह नीति निर्धारण में महिलाओं की सहभागिता को बढ़ाएगा। राजनांदगांव सांसद  संतोष पांडे ने अपने सम्बोधन में कहा कि महिला एक परिवार ही नहीं बल्कि पूरे समाज और देश की नींव तैयार करती है। माँ के रूप में महिला शक्ति अपने संतान को जो शिक्षा और सीख देती है वैसा ही उसका विकास होता है।     जिला पंचायत अध्यक्ष  ईश्वरी साहू ने कहा कि देश के प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी और प्रदेश के मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय के नेतृत्व में महिला सशक्तिकरण के लिए लगातार कार्य कर रही है, जिससे महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक जीवन स्तर को और बेहतर बनाया जा सके। महतारी वंदन की राशि देने का वायदा किया था। सरकार बनने के बाद यह राशि जारी करने की शुरुआत की गईं अब तक 25 किश्त जारी की जा चुकी है।  उल्लेखनीय है कि कबीरधाम जिले की 2.48 लाख से अधिक महिलाओं को महतारी वंदन योजना से अब तक 24 किश्तों में 563.49 करोड़ रुपए जारी किए जा चुके हैं।  ये हुए सम्मानित उपमुख्यमंत्री  विजय शर्मा ने विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली महिलाओं और सामाजिक संस्थाओं को सम्मानित किया गया। सम्मान प्राप्त करने वालों में मती गंगोत्री, मती यशोधरा मानिकपुरी, मती प्रीति सिंह परिहार, मती श्वेता शर्मा, मती पायल वास्तव, मती सरस्वती निषाद, मती चंद्र कुमारी, मती रंजना भट्ट, मती सुकून चंद्रवंशी, मती अनीता पाली, मती खुशबू, अनीता केसरवानी, रीना शर्मा, अश्वनी वास्तव, विवेका हैरिस, मती सरोज शर्मा, निकिता डड़सेना एवं संगीता साहू शामिल हैं। इसके साथ ही सामाजिक संस्था नई सोच नई राह नारी शक्ति टीम को भी समाज में महिलाओं के सशक्तिकरण और जनसेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया।

भारत की अविरल संस्कृति और सभ्यता को आगे बढ़ाने वाली भारत की महिलाएं हैं –उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा

रायपुर 2000 से अधिक महिलाओं की ऐतिहासिक भागीदारी, रायपुर में गूंजा राष्ट्रभक्ति और नारी शक्ति का संदेश2000 से अधिक महिलाओं की ऐतिहासिक भागीदारी, रायपुर में गूंजा राष्ट्रभक्ति और नारी शक्ति का संदेश अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर राजधानी रायपुर में “मैं भारत हूं” थीम पर भव्य बाइक-स्कूटी रैली का आयोजन किया गया। मातृशक्ति की ऐतिहासिक भागीदारी से सजी इस रैली में 2000 से अधिक महिलाओं ने हिस्सा लिया और राष्ट्रभक्ति, अनुशासन तथा महिला सशक्तिकरण का सशक्त संदेश दिया। यह रैली अपनी विशिष्टता और व्यापक सहभागिता के कारण गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज की गई।        रैली का शुभारंभ माँ काली मंदिर से हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत सामूहिक वंदे मातरम् गान के साथ हुई। इसके बाद अखिल भारतीय धर्मजागरण समन्वय कार्यसमिति सदस्य  राजेंद्र प्रसाद वास्तव और  विभा अवस्थी ने हरी झंडी दिखाकर रैली को रवाना किया। रैली का नेतृत्व महिला पुलिस कर्मियों के अनुशासित दस्ते ने किया, जिसके पीछे हजारों महिलाएं हाथों में तिरंगा लिए उत्साहपूर्वक आगे बढ़ीं। यह रैली माँ काली मंदिर से प्रारंभ होकर शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए राम मंदिर, वीआईपी चौक पर संपन्न हुई। रास्ते भर नागरिकों ने पुष्पवर्षा कर रैली का स्वागत किया। कार्यक्रम की संयोजिका डॉ. भारवि वैष्णव और सह-संयोजिका तथा नगर निगम पार्षद डॉ. अनामिका सिंह के नेतृत्व में पूरे आयोजन का सफल संचालन किया गया।          समापन समारोह में उपमुख्यमंत्री  विजय शर्मा भी शामिल हुए। उन्होंने महिलाओं का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि समाज में यातायात नियमों का पालन करने का संदेश देने के लिए आज महिलाओं ने जो स्कूटी रैली निकाली वह गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में शामिल हो गयी है यह हमारे लिए गर्व का विषय है। उन्होंने अपने जीवन में अपनी बुआ अपनी मां अपनी पत्नी जैसी सशक्त महिलाओं के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि महिलाएं पुरुषों से अधिक सहनशील और ज्यादा मजबूत होती हैं।  उन्होंने स्वामी विवेकानंद के प्रेरक प्रसंग को याद करते हुए कहा कि यदि आज भारत की संस्कृति शाश्वत है, इस अविरल संस्कृति और सभ्यता को कोई आगे लेकर जाने वाला है तो वह भारत की महिलाएं हैं। अगर जीजा बाई ना होती तो शिवाजी का अस्तित्व नहीं होता और कौशल्या माता के संस्कार से ही तो भगवान  राम का अस्तित्व है। हर कामियाब व्यक्ति के पीछे महिला का हाथ होता है।          उन्होंने कहा कि आज महिलाएं शासन की योजनाओं का लाभ लेकर लखपति दीदी से करोड़पति दीदी तक का सफर तय कर रहीं हैं और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ करने का भी कार्य कर रही हैं। महिलाओं के संकल्प के आगे कोई टिक नहीं सकता आज नक्सलावाद के नासूर को जड़ से मिटाने के लिए दिन रात पहाड़ों में रहकर कार्य करने वाली पुलिस विभाग की महिलाओं का भी उन्होंने अभिनंदन किया। गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड के अधिकृत उद्घोषक सोनल शर्मा ने घोषणा करते हुए कहा कि समाज में सकारात्मक संदेश देने और यातायात नियमों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से आयोजित यह स्कूटी रैली गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में शामिल की गई है, जो रायपुर और पूरे प्रदेश के लिए गर्व का विषय है।           अखिल भारतीय धर्मजागरण विभाग के प्रमुख  राजेंद्र सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि संगठित मातृशक्ति ही राष्ट्र की वास्तविक शक्ति और संस्कृति की संरक्षक है। वहीं बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ वर्णिका शर्मा ने कहा कि आज की नारी हर क्षेत्र में अग्रणी है और यह आयोजन महिलाओं के आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता का प्रतीक है। आयोजन की संयोजिका डॉ. भारवि वैष्णव ने कहा कि रायपुर की सड़कों पर उमड़ा मातृशक्ति का यह जनसैलाब भारतीय नारी के राष्ट्रप्रेम और समर्पण का प्रमाण है। वहीं डॉ. अनामिका सिंह ने कहा कि महिला सशक्तिकरण तभी पूर्ण है जब नारी मानसिक और सामाजिक रूप से सशक्त हो। उन्होंने कार्यक्रम के सफल आयोजन में सहयोग देने के लिए पुलिस प्रशासन और स्वयंसेवकों का आभार व्यक्त किया।          इस अवसर पर विभिन्न महिला संगठनों ने इस आयोजन में सहभागिता की और सभी प्रतिभागियों को हेलमेट भी प्रदान किया गया। सभी ने राष्ट्र की एकता, अखंडता और आदर्श नागरिक कर्तव्यों के पालन का संकल्प लिया। हाथों में तिरंगा और “भारत माता की जय” के उद्घोष के साथ संपन्न हुई यह रैली महिला शक्ति, संस्कार और आत्मविश्वास का प्रेरक उदाहरण बन गई।

स्व-सहायता समूह से जुड़कर पूनम देवी बनीं आत्मनिर्भर, अब ‘लखपति दीदी’ के रूप में बना रहीं नई पहचान लखपति दीदी’ के रूप में बना रहीं नई पहचान

रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय के कुशल नेतृत्व में प्रदेश की महिलाएं विभिन्न योजनाओं से जुड़कर आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रही हैं। राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। जशपुर जिले के दुलदुला विकासखंड के ग्राम सिमड़ा की  पूनम देवी भी इसी बदलाव की एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभरी हैं।       पूनम देवी,जो गणेश महिला स्व-सहायता समूह की सदस्य हैं, आज ‘लखपति दीदी’ के रूप में जानी जाती हैं। कभी सीमित संसाधनों के साथ घर-परिवार की जिम्मेदारियों में लगी रहने वाली पूनम देवी ने स्व-सहायता समूह से जुड़कर अपने जीवन की दिशा बदल दी।      पूनम देवी बताती हैं कि पहले वे घर-गृहस्थी के कामकाज तक ही सीमित थीं और परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए मजदूरी का सहारा लेना पड़ता था। आर्थिक स्थिति सामान्य थी, जिससे परिवार की आवश्यकताओं को पूरा करना कठिन हो जाता था। इसी दौरान उन्होंने गणेश महिला स्व-सहायता समूह से जुड़ने का निर्णय लिया। समूह से जुड़ने के बाद उन्हंन बचत, ऋण सुविधा और स्वरोजगार के विभिन्न अवसरों की जानकारी मिली। समूह की अन्य महिलाओं को मछली पालन, बकरी पालन और अन्य आजीविका गतिविधियों से जुड़कर आय अर्जित करते देख उन्हें भी प्रेरणा मिली। वर्ष 2025 के मार्च माह मं  उन्होंने मुद्रा योजना के तहत 1 लाख रुपये का ऋण     प्राप्त किया। इस राशि का उपयोग उन्होंने अपने छोटे से किराना दुकान के विस्तार में किया।      किराना दुकान को व्यवस्थित और बड़ा करने के बाद उनके व्यवसाय में धीरे-धीरे बढ़ोतरी होने लगी। वर्तमान में उनकी दुकान से हर माह लगभग 30 से 35 हजार रुपये तक की बिक्री हो जाती है। इस आय से वे अपने परिवार का भरण-पोषण करने के साथ ही बच्चों की पढ़ाई-लिखाई भी अच्छी तरह से कर पा रही हैं।      पूनम देवी का कहना है कि स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद उनके जीवन में आत्मविश्वास और आर्थिक स्थिरता दोनों आए हैं। आज वे न केवल अपने परिवार के लिए सहारा बनी हैं, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गई हैं।      ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से जिले में महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।

महतारी वंदन योजना की 25वीं किस्त जारी, 69 लाख ‘महतारियों’ के खाते में पहुंचे 641 करोड़ रुपये

बस्तर अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर बस्तर के लाल बहादुर शास्त्री स्टेडियम में ‘महतारी वंदन उत्सव’ का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने लगभग 69 लाख महिलाओं के खातों में योजना की 25वीं किस्त के रूप में 641 करोड़ रुपये की राशि अंतरित की। मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार अब तक दो वर्षों में इस योजना के तहत 16 हजार करोड़ रुपये वितरित कर चुकी है। ‘लक्ष्मी सखी मिलेट कार्ट’ का वितरण मुख्यमंत्री ने वर्चुअल माध्यम से पांच जिलों की महिलाओं से संवाद किया और ‘लक्ष्मी सखी मिलेट कार्ट’ का वितरण भी किया। इसके साथ ही, पुनर्वासित महिलाओं को सक्षम योजना के अंतर्गत ऋण प्रदान किया गया। इस अवसर पर महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी रजवाड़े, वन मंत्री केदार कश्यप और विधायक किरण देव भी उपस्थित रहे। कैफे एवं मिलेट कार्ट खोले जाने की योजना प्रारंभ महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा लक्ष्मी सखी मिलेट कार्ट के लिए सक्षम योजना से हितग्राहियों को एक-एक लाख रुपए की वित्तीय सहायता प्रद्दत की जा रही है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के आव्हान पर मिलेट उत्पाद को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा कृषि महाविद्यालय के साथ साथी परियोजना (प्रशिक्षण कार्यक्रम) अंतर्गत स्व सहायता समूहों एवं युवा महिला उद्यनियों के माध्यम से मिलेट कैफे एवं मिलेट कार्ट खोले जाने की योजना प्रारंभ की गई है। 400 मिलेट कैफे एवं मिलेट कार्ट खोला जाएगा योजना अंतर्गत राज्य के समस्त शैक्षणिक संस्थानो, कार्यालयों एवं पर्यटन स्थलो में स्व सहायता समूहों एवं युवा महिला उद्यमियों के माध्यम से प्रथम चरण में 400 मिलेट कैफे एवं मिलेट कार्ट खोला जाएगा। साथी परियोजना अतर्गत स्व सहायता समूहो एवं महिला उद्यमियों को निःशुल्क प्रशिक्षण प्रदाय किया जावेगा, जो महिलाओं के आर्थिक उन्नयन की दृष्टि में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।  

जशपुर के सुंदर और हरिभरी वादियों का पर्यटक ले रहे आनंद

रायपुर ग्रामीणों को मिला रहा है रोजगार के अवसर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश में ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में जशपुर जिले में भी पर्यटन गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है, जिसके सकारात्मक परिणाम अब देखने को मिल रहे हैं। जिले में संचालित होमस्टे में बाहरी क्षेत्रों से पर्यटक पहुंच रहे हैं और यहां की प्राकृतिक सुंदरता तथा स्थानीय संस्कृति का अनुभव कर रहे हैं।     जिला प्रशासन भी ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है। इन प्रयासों के कारण जशपुर के गांवों में स्थित होमस्टे धीरे-धीरे पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बनते जा रहे हैं। इससे स्थानीय लोगों को रोजगार और आय के नए अवसर भी मिल रहे हैं। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ के रायपुर से आए दो पर्यटक केरे स्थित महुआ होमस्टे में ठहरे थे। पर्यटकों ने यहां के शांत वातावरण, प्राकृतिक सौंदर्य और गांव के सादगीपूर्ण जीवन का अनुभव किया। उन्होंने स्थानीय खान-पान और ग्रामीण आतिथ्य की भी सराहना की।      वहीं मध्य प्रदेश के सीधी जिले से आए चार पर्यटक देवोबरा (मयाली) स्थित बनफूल होमस्टे में ठहरे। इन पर्यटकों ने भी क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता और गांव के माहौल को बेहद पसंद किया। ग्रामीणों द्वारा की गई आत्मीय मेहमाननवाजी उनके लिए खास अनुभव रही।      स्थानीय होमस्टे में पर्यटक कार्तिकेय सिंह, कुसुम, अरविन्द पटेल,निधि , रोशन साहू प्रीति साहू आदि अन्य पर्यटकों के ठहरने के लिए सुविधा दी जा रही है। जशपुर में ग्रामीण पर्यटन को नई पहचान मिल रही है और आने वाले समय में इसके और विस्तार की उम्मीद जताई जा रही है।

महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय में 07 से 09 मार्च तक आयोजन, विशेषज्ञों ने साझा किए विरासत संरक्षण के अनुभव

रायपुर महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय में 07 से 09 मार्च तक आयोजन, विशेषज्ञों ने साझा किए विरासत संरक्षण के अनुभव प्रदेश की पुरातत्त्वीय धरोहरों के संरक्षण, संवर्धन और जनभागीदारी को सुदृढ़ बनाने की दिशा में संस्कृति विभाग द्वारा एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। संस्कृति मंत्री  राजेश अग्रवाल के निर्देश पर संस्कृति विभाग अंतर्गत पुरातत्त्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय संचालनालय, रायपुर द्वारा “जिला पुरातत्त्वीय संघों के निर्माण एवं कार्यविधियाँ” विषय पर तीन दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। यह कार्यशाला 07 से 09 मार्च 2026 तक महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय, सिविल लाइन्स, रायपुर में आयोजित की जा रही है। महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय में 07 से 09 मार्च तक आयोजन, विशेषज्ञों ने साझा किए विरासत संरक्षण के अनुभव      कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य राज्य के विभिन्न जिलों में जिला पुरातत्त्वीय संघों के गठन, उनके कार्य एवं दायित्वों को स्पष्ट करना तथा पुरातत्त्वीय धरोहरों के संरक्षण में उनकी सक्रिय भूमिका सुनिश्चित करना है। इस आयोजन के माध्यम से जिला स्तर पर पुरातत्त्वीय धरोहरों के संरक्षण के लिए एक मजबूत संस्थागत ढांचा तैयार करने और स्थानीय स्तर पर जनसहभागिता को प्रोत्साहित करने का प्रयास किया जा रहा है। कार्यशाला के दौरान पुरातत्त्व, संग्रहालय प्रबंधन तथा विरासत संरक्षण से जुड़े विशेषज्ञों द्वारा विभिन्न तकनीकी सत्रों का आयोजन किया जा रहा है। इन सत्रों में जिला पुरातत्त्वीय संघों के प्रतिनिधियों को प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है, ताकि वे अपने-अपने जिलों में धरोहर संरक्षण से जुड़े कार्यों को अधिक प्रभावी ढंग से संचालित कर सकें।      प्रथम तकनीकी सत्र में “संग्रहालयों के संचालन में जिला पुरातत्त्वीय संघों की भूमिका” विषय पर मुख्य व्याख्यान प्रो. आर. एन. विश्वकर्मा, सेवानिवृत्त प्राध्यापक एवं पूर्व विभागाध्यक्ष, प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्त्व, इंदिरा कला एवं संगीत विश्वविद्यालय द्वारा दिया गया। उन्होंने अपने व्याख्यान में संग्रहालयों के सुचारु संचालन, स्थानीय समुदाय की भागीदारी तथा पुरातत्त्वीय धरोहरों के संरक्षण में जिला स्तर के संगठनों की महत्ता पर विस्तार से प्रकाश डाला।      इसके बाद आयोजित परिचर्चा सत्र में राज्य के विभिन्न जिलों से आए प्रतिनिधियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में जिला पुरातत्त्वीय संघों के माध्यम से संचालित गतिविधियों की जानकारी साझा की। साथ ही उन्होंने कार्यान्वयन के दौरान आने वाली चुनौतियों और समस्याओं पर भी चर्चा की, जिन पर विशेषज्ञों ने व्यावहारिक और समाधानकारी सुझाव प्रस्तुत किए।      पुरातत्त्व, अभिलेखागार एवं संग्रहालय संचालनालय के संचालक  विवेक आचार्य ने बताया कि इस कार्यशाला के माध्यम से जिला स्तर पर पुरातत्त्वीय धरोहरों के संरक्षण के लिए संस्थागत व्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास किए जा रहे हैं। इससे प्रदेश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण को नई गति मिलेगी।      कार्यक्रम के सफल आयोजन में कार्यक्रम प्रभारी डॉ. पी.सी. पारख, प्रभात कुमार सिंह, डॉ. अरुंधति परिहार, मती रोशनी शर्मा, डॉ. वृषोत्तम साहू, प्रवीन तिर्की, डॉ. राजीव मिंज, विष्णु नेताम, समीर टल्लू, मुकेश जोशी, अमर भरतद्वाज, नूतन एक्का एवं अरुण निर्मलकर सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

रंग पंचमी के अवसर पर महिलाओं ने खेली फूलों वाली होली

रायपुर लोकभवन में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर ज़मीनी स्तर पर काम कर रही महिलाओं का हुआ सम्मान अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस और रंग पंचमी के अवसर पर लोकभवन में महिला सम्मान समारोह और फूलों की होली कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शिक्षा, स्वास्थ्य, चिकित्सा, उद्यम और पत्रकारिता के क्षेत्र मेें उल्लेखनीय भूमिका अदा करने वाली महिलाएं शामिल हुई। इस अवसर पर राज्यपाल  रमेन डेका ने प्रदेश के विभिन्न स्थानों से आई शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, स्वच्छता, आदिवासी विकास के क्षेत्र में ज़मीनी स्तर पर कार्य कर रही महिलाओं का सम्मान किया। उन्होंने स्वास्थ्य कार्यकर्ता, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का सम्मान कर प्रदेश में जन कल्याणकारी योजनाओं को जमीनी स्तर पर पहुंचाने और समाज के सभी लोगों की निःस्वार्थ भाव से सेवा के लिए उनके योगदान की सराहना की।  डेका ने देश के विकास में महिलाओं के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि नारी शक्ति इस देश के विकास की धुरी है और मेरी सरकार अंतिम पंक्ति की महिलाओं तक विकास पहुंचाने के लिए कृत संकल्पित है। उन्होंने महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस हम सभी के लिए एक गौरवशाली दिन है। यह दिन महिला समानता की दिशा में कार्य करने प्रेरित करता है। अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाते हुए, हम सभी को एक ऐसे विश्व के निर्माण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को पुनः मजबूत करने की आवश्यकता है जहाँ सभी महिलाओं को सशक्त, सम्मानित और समावेशी बनाया जा सके। लोकभवन में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर ज़मीनी स्तर पर काम कर रही महिलाओं का हुआ सम्मान  डेका ने कहा कि भारत सरकार की बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, महिला शक्ति केंद्र, उज्ज्वला योजना, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना, प्रधानमंत्री महिला शक्ति केंद्र योजना, वन स्टॉप सेंटर और महिला हेल्पलाइन जैसी योजनाएं महिलाओं के सशक्तिकरण में मददगार साबित हुई है। महिला सशक्तिकरण एक सतत और प्रगतिशील समाज के निर्माण का एक शक्तिशाली साधन है। इसलिए, छत्तीसगढ़ सरकार ने भी महिलाओं के उत्थान और सशक्तिकरण के लिए कई योजनाएँ और नीतियाँ विकसित की हैं। इनमें से कुछ हैं महतारी वंदन योजना, जो समाज के कमजोर वर्ग की महिलाओं को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करती है। मुख्यमंत्री नोनी सशक्तीकरण सहायता योजना, किशोरी शक्ति योजना और सुकन्या योजना का उद्देश्य लड़कियों को लाभ पहुँचाना है। इस अवसर पर स्पीकर के रूप में आमंत्रित डॉ. शम्पा चौबे ने कहा कि महिलाओं को सशक्त होने के लिए सबसे पहले अपनी मनःस्थिति को मजबूत करना आवश्यक है। शिक्षिका रंजीता साहू ने सुदूर क्षेत्रों में शिक्षा का अलख जगाने की यात्रा के अनुभव साझा करते हुए कहा कि समाज से हमें बहुत कुछ मिलता हैं उसे धीरे-धीरे कर समाज को लौटाना हम सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि लोकभवन के प्रति उनके मन में बहुत आदर है क्योंकि 2005 में उनके पति को तात्कालिक राज्यपाल  के. एम. सेठ ने शिक्षा के लिए आर्थिक सहयोग प्रदान किया था। इसलिए वे और उनके पति गरीब बच्चों की बेहतर शिक्षा की दिशा में काम कर रहे है। उन्होंने 12 लाख रूपए का बैंक लोन लेकर वनांचल क्षेत्रों में 162 स्कूलों में स्मार्ट टी.व्ही. के माध्यम से आधुनिक शिक्षा के लिए काम किया। इसके अलावा गुल्लक कार्यक्रम चलाकर बचत हेतु प्रेरित किया। अंतरर्राष्ट्रीय खिलाड़ी सु नेहा यादव ने अपनी सफलता के पीछे अपनी मां की भूमिका को रेखांकित करते हुए बताया कि उनकी मां ने एक सिंगल पैरेंट के रूप में उनका पालन पोषण किया। जबकि उनके जन्म के पहले ही पिता द्वारा त्याग दिए जाने के बाद उनके पास आय का कोई जरिया नहीं था फिर भी उन्होंने अकेले ही अपनी बेटी को अच्छी परवरिश दी और अंतरर्राष्ट्रीय खिलाड़ी बनाया। कार्यक्रम में डॉ प्रीति सतपथी ने महिलाओं से जुडे़ आवश्यक कानूनों और अधिनियमों की जानकारी दी। इस अवसर पर मती प्रदीपा प्रसन्ना ने वनांचल क्षेत्रों में कार्य के अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की महिलाओं की सराहना करते हुए कहा कि यहाँ की महिलाएं संघर्ष करते हुए भी मजबूती से अपने घर और समाज के विकास में योगदान दे रही हैं, जो प्रेरणादायक है।  राज्यपाल के गोद ग्राम से आए सोनपुरी जिला खैरागढ़ की मती निलेश्वरी वर्मा, मती सोहद्रा पाल, ग्राम बिजली गरियाबंद की मती हेम कुमारी निषाद, मती पुरईन निषाद, ग्राम टेमरी जिला बेमेतरा की मती रितु देवांगन, मती पूजा घृतलहरे का सम्मान किया साथ ही उन्होंने स्वास्थ्य विभाग, धरसींवा मती अनुबाला चक्रवर्ती, BETEO तिल्दा सामुदायिक विकासखण्ड अधिकारी सु शिखा कुशवाहा, अस्पताल परिचालक AIIMS  मती आरती देवांगन, मती माधूरी बरवा, महिला बाल विकास, निमोरा की सहायिका कार्यकर्ता मती रामवती साहू, महिला बाल विकास, तुता की सहायिका कार्यकर्ता मती लक्ष्मी यादव, नगर निगम, रायपुर सुपरवाईजर मती पिंकी तांडी, मती वर्षा तांडेकर, पं. रविशंकर शुक्ल विवि, रायपुर की कर्मचारी टी मोहिनी, कलेक्टोरेट, रायपुर ज्योति साहू, पूनम सिंह ठाकुर, सुजाता शेष, रूद्राणी सिंह राजपूत, गोपा सान्याल, डॉ. प्रीति सतपथी, लोकभवन कर्मचारी कुसुम मानिकपुरी, अन्नपूर्णना महोबिया, श्यामा वर्मा, महिला आरक्षक को सम्मानित किया गया। इस अवसर राज्यपाल ने जी. एस. टी. से संबंधित ई-बुक का भी विमोचन किया। कार्यक्रम का संचालक मती सोनालिका शुक्ला ने किया।                                          लोकभवन में आयी महिलाओं ने रंग पंचमी के अवसर पर फूलों वाली होली खेलकर एक-दूसरे को शुभकामनाएं दी।  इस अवसर पर महिला बाल विभाग द्वारा क्विज प्रतियोगिता का आयोजन किया गया एवं विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ भी हुईं और विजेताओं को पुरस्कृत किया गया।  इस अवसर पर राज्यपाल के सचिव डॉ. सी.आर.प्रसन्ना एवं लोकभवन के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।

जंगल से गांव तक बाघ का खौफ: छत्तीसगढ़–महाराष्ट्र सीमा पर दिन में हमला, ग्रामीणों ने पेड़ पर चढ़कर बचाई जान

 मोहला-मानपुर जिला अंतर्गत छत्तीसगढ़–महाराष्ट्र सीमा में बाघ का आतंक एक बार फिर सामने आया है। बीते 12 फरवरी से अब तक एक माह के भीतर एक ग्रामीण समेत दो मवेशियों को मौत के घाट उतार चुके बाघ की इस बार औंधी तहसील क्षेत्र अंतर्गत बागडोंगरी ग्राम पंचायत क्षेत्र में आमद हुई, जहां 6 मार्च को दिन-दहाड़े बाघ ने आतंक मचाया और मवेशियों पर हमला किया। वहीं 6 और 7 मार्च की दरमियानी रात बाघ इंसानी बस्ती में पहुंच गया, जिससे ऐसे खौफनाक हालात बन गए कि ग्रामीणों को पेड़ पर चढ़कर अपनी जान बचानी पड़ी। बता दें, मानपुर दक्षिण वन परिक्षेत्र अंतर्गत औंधी क्षेत्र के बागडोंगरी गांव निवासी ग्रामीण का बैल, जो गांव के आसपास चर रहा था, उस पर बाघ ने हमला कर दिया। जैसे-तैसे बाघ के चंगुल से छूटकर बैल अपने पालक के घर पहुंचा तो पता चला कि बैल के शरीर में बाघ के पंजों की खरोंचें हैं और बाघ के दांतों ने भी बैल की गर्दन में छेद कर दिए हैं। यही नहीं, बाघ ने इसी बागडोंगरी ग्राम पंचायत के आश्रित मोहल्ले मरकाटोला में भी आतंक मचाया, जहां खेत में भुट्टे की फसल की रखवाली के लिए घूम रहे दो ग्रामीणों को इस बाघ ने दौड़ाया। हालांकि ये ग्रामीण फुर्ती से एक पेड़ पर चढ़ गए, जिससे वे बाघ के हमले से बच गए, लेकिन जिस पेड़ पर ये ग्रामीण चढ़े, उसके इर्द-गिर्द ही बाघ मंडराते हुए ग्रामीणों पर हमले की फिराक में जुटा रहा। इसी बीच गांव में लोगों को इस हालात की जानकारी लगी और बड़ी संख्या में ग्रामीण टॉर्च जलाते हुए मौके की ओर बढ़े। तब जाकर टॉर्च की रोशनी और ग्रामीणों की आहट से घबराकर बाघ मौके से भागा और पेड़ पर चढ़े ग्रामीण सुरक्षित नीचे उतर सके। क्षेत्रवासी ग्रामीण बाघ की लगातार आमद और उसके द्वारा किए जा रहे शिकार से खासे भयभीत हैं। यह महुआ जैसे अहम वनोपज के संग्रहण का दौर है, लेकिन महुआ संग्रहण और बिक्री से आय अर्जित करने वाले ग्रामीणों के सामने बाघ के भय के चलते महुआ व अन्य वनोपज के लिए जंगल जाना दूभर होता दिख रहा है। दूसरी ओर वन महकमा भी अपनी यथासंभव कसरतों में जुटा हुआ है। ट्रैप कैमरों का उपयोग किया जा रहा है। वन महकमे ने ग्रामीणों से भी अपील की है कि सुरक्षित रहें, सतर्क रहें। क्योंकि यह केवल वनोपज संग्रहण का मसला नहीं है, बल्कि स्कूली बच्चे भी जंगल के रास्ते स्कूलों का सफर तय करते हैं। और बाघ की चहलकदमी से स्कूली बच्चों की राह भी खौफजदा प्रतीत हो रही है। गौरतलब है कि बाघ का आतंक इस इलाके में बीते करीब डेढ़ पखवाड़े से फैला हुआ है। बीते 12 फरवरी को बाघ ने गहनगट्टा गांव में एक मवेशी का शिकार किया था। इसके बाद बाघ ने इसी औंधी इलाके से लगे महाराष्ट्र के केहकावाही में एक ग्रामीण को मार डाला था। यही नहीं, ग्रामीण को मारने के अगले रोज फिर छत्तीसगढ़ में आकर पीटेमेटा गांव में एक मवेशी को भी बाघ ने शिकार बनाया था। इन घटनाक्रमों के बाद अब बाघ ने बागडोंगरी इलाके में आतंक मचाया है।

साय का दिल छूने वाला बयान: पिता के जाने के बाद मां ने निभाई दोनों की भूमिका, महिला पत्रकारों से बातचीत

रायपुर  अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने महिला पत्रकारों से बातचीत में अपने निजी जीवन और महिलाओं के सशक्तिकरण पर खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि 10 साल की उम्र में पिता के निधन के बाद उनकी मां ने परिवार को संभाला और वही उनकी सबसे बड़ी प्रेरणा बनी। सीएम ने कहा कि 26 साल की उम्र में विधायक बनने के बाद पत्नी ने घर और बच्चों की जिम्मेदारी संभाली, जिससे उन्हें राजनीति में ध्यान केंद्रित करने का अवसर मिला। घर में सभी फैसले सामूहिक रूप से लिए जाते हैं और परिवार की महिलाएं उन्हें हमेशा प्रोत्साहित करती हैं। महिला सशक्तिकरण पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि पहले महिलाएं अधिकतर घर तक सीमित रहती थीं, लेकिन अब स्व-सहायता समूहों और सरकार की योजनाओं से महिलाएं हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं। छत्तीसगढ़ में लगभग 8 लाख महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं और सरकार का लक्ष्य इसे 10 लाख तक पहुंचाना है। बस्तर में नक्सलवाद के बाद महिलाओं के लिए विशेष योजनाओं का जिक्र करते हुए सीएम ने कहा कि सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसर बढ़ाए जा रहे हैं। महिलाओं का योगदान प्रदेश की सामाजिक और आर्थिक प्रगति में निर्णायक है। घर की महिलाएं हमेशा प्रोत्साहित करती हैं सीएम साय ने कहा घर में कोई भी बड़ा फैसला हम सब मिलकर लेते हैं। मां हैं, पत्नि हैं सभी की राय ली जाती है। मेरे घर की महिलाएं हमेशा मुझे प्रोत्साहित करती है। मेरे ज्यादातर कपड़े श्रीमती जी खरीदतीं हैं सीएम ने कहा कि एक समय घर में सबके कपड़े मैं ही खरीदता था लेकिन 10 साल से बढ़ी व्यस्तता के कारण मेरे ज्यादातर कपड़े श्रीमति जी ही खरीदतीं हैं।

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