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‘हिंदू रीति से शादी करने वाले ST पर हिंदू मैरिज एक्ट लागू होगा’, छत्तीसगढ़ HC का अहम निर्णय

बिलासपुर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने हिंदू मैरिज एक्ट को लेकर एक अहम फैसला सुनाया है। हाई कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि हिंदू रीति-रिवाजों और परंपराओं का पालन करने वाले अनुसूचित जनजाति (ST) समुदाय के लोगों को हिंदू मैरिज एक्ट, 1955 के दायरे से बाहर नहीं रखा जा सकता है। कोर्ट ने यह टिप्पणी करते हुए जगदलपुर फैमिली कोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया है। आइए जानते हैं पूरा मामला क्या था। क्या था मामला जस्टिस संजय के. अग्रवाल और जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की डिवीजन बेंच एक मामले की सुनवाई कर रही थी। इस मामले में एक आदिवासी (ST) पति और अनुसूचित जाति (SC) की पत्नी ने आपसी सहमति से तलाक की अर्जी दी थी। दोनों ने हिंदू मैरिज एक्ट की धारा 13बी के तहत विवाह खत्म करने के लिए जगदलपुर की फैमिली कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। लेकिन फैमिली कोर्ट ने उनकी अर्जी रद्द कर दी थी। कपल की शादी 15 अप्रैल 2009 को हुई थी और वे अप्रैल 2014 से अलग रह रहे थे। हालांकि, जगदलपुर फैमिली कोर्ट ने 12 अगस्त को उनकी अर्जी यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि हिंदू मैरिज एक्ट की धारा 2(2) के अनुसार यह कानून अनुसूचित जनजाति (ST) पर तब तक लागू नहीं होता, जब तक केंद्र सरकार इसकी अधिसूचना न जारी करे। हिंदू रीति-रिवाजों से हुई थी शादी हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि दोनों पक्षों ने साफ कहा था कि उनकी शादी हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार हुआ था और इसमें ‘सप्तपदी’ जैसी पारंपरिक रस्में निभाई गई थीं। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि वे जनजातीय परंपराओं की बजाय हिंदू परंपराओं का पालन करते हैं। क्या बोला कोर्ट कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि यदि किसी जनजाति के सदस्य स्वेच्छा से हिंदू रीति-रिवाज और परंपराएं अपनाते हैं, तो उन्हें 1955 के अधिनियम के प्रावधानों से बाहर नहीं रखा जा सकता। हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि हिंदू मैरिज एक्ट की धारा 2(2) जनजातीय समुदायों की पारंपरिक प्रथाओं की रक्षा के लिए बनाई गई है, न कि उन लोगों को कानून के दायरे से बाहर रखने के लिए जो हिंदू रीति-रिवाज अपना चुके हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों का भी दिया हवाला अपने फैसले में कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पिछले निर्णयों का भी हवाला दिया और कहा कि यदि साक्ष्यों से यह साबित होता है कि जनजातीय समुदाय के लोग हिंदू परंपराओं का पालन कर रहे हैं, तो उनकी शादी और उत्तराधिकार जैसे मामलों में उन पर हिंदू कानून लागू होगा।

नक्सलवाद पर सरकार का अंतिम वार! अमित शाह ने बताई भारत को मुक्त करने की तारीख

रायपुर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भारत के 31 मार्च तक माओवादियों से मुक्त हो जाने का दावा करते हुए शुक्रवार को कहा कि सुरक्षा बल आंध्र प्रदेश के तिरुपति से नेपाल के पशुपति तक लाल गलियारा बनाने का सपना देखने वालों को पराजित करेंगे। शाह ने कटक जिले के मुंडाली में केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के 57वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित एक समारोह को संबोधित करते हुए यह भी कहा कि सीआईएसएफ प्रमुख प्रतिष्ठानों को सुरक्षा प्रदान करके देश की आर्थिक वृद्धि में अहम भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा, ‘आज, मैं राष्ट्र को आश्वस्त करना चाहता हूं कि देश 31 मार्च तक माओवादियों से मुक्त हो जाएगा। हमारी सेनाएं तिरुपति से पशुपति तक लाल गलियारा बनाने का सपना देखने वालों को पराजित करेंगी।’ शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में देश से नक्सलवाद को जड़ से उखाड़ फेंकना सुरक्षा बलों के लिए बड़ी उपलब्धि होगी। उन्होंने कहा, ‘हमारे सुरक्षा बल अपेक्षाओं पर खरे उतरे हैं और देश अब लाल विद्रोहियों का सफाया करने के कगार पर है।’ पांच लाख रुपये का इनामी नक्सली ढेर छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में पांच लाख रुपये का एक इनामी नक्सली मारा गया है। पुलिस अधिकारियों ने गुरुवार को यह जानकारी दी। दंतेवाड़ा जिले के पुलिस अधीक्षक गौरव राय ने बताया कि मुठभेड़ बुधवार रात गीदम पुलिस थाना इलाके के जंगल-पहाड़ी क्षेत्र में हुई, जब जिला रिजर्व गार्ड (डीआरजी) और बस्तर फाइटर्स का एक संयुक्त दल नक्सल विरोधी अभियान पर निकला था। उन्होंने बताया कि मारे गए नक्सली की पहचान बीजापुर जिले के बुरजी गांव के निवासी राजेश पुनेम के रूप में हुई है, जो माओवादियों की भैरमगढ़ एरिया कमेटी का सदस्य था। उस पर पांच लाख रुपये का इनाम घोषित था। राय ने बताया कि सुरक्षाबलों को तीन मार्च को गीदम थाना क्षेत्र के गुमलनार, गिरसापारा और नेलगोड़ा के मध्य जंगल-पहाड़ी क्षेत्र में नक्सली सामग्री और हथियार छिपाए जाने की जानकारी मिली थी। ओडिशा ने बलांगीर, बरगढ़ को नक्सल-मुक्त घोषित किया ओडिशा पुलिस ने माओवादियों के खिलाफ अभियान में बड़ी सफलता हासिल करते हुए राज्य के दो पश्चिमी जिलों बलांगीर और बरगढ़ को नक्सल प्रभाव से मुक्त घोषित किया है। पुलिस महानिदेशक वाई बी खुरानिया ने आधिकारिक रूप से इसकी घोषणा की कि बलांगीर और बरगढ़ जिले अब नक्सल-मुक्त हो गये हैं। यह घोषणा उस समय की गई जब बरगढ़ से सटे महासमुंद जिले के 15 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया। बताया गया कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सली बरगढ़-बलांगीर-महासमुंद डिवीजन में सक्रिय थे। उनके मुख्यधारा में लौटने के साथ ही इन दोनों जिलों में नक्सली गतिविधियों के पूरी तरह समाप्त होने की पुष्टि की गई।

धान खरीद में छत्तीसगढ़ का डेटा-संचालित एआई मॉडल, तकनीकी नवाचार से बनी नई मिसाल

रायपुर  छत्तीसगढ़ में धान खरीद व्यवस्था को पारदर्शी, जवाबदेह और भ्रष्टाचार मुक्त बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी विपणन संघ (मार्कफेड) द्वारा अपनाई गई आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित निगरानी प्रणाली ने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि तकनीक का सही दिशा में उपयोग किया जाए, तो न केवल प्रशासनिक प्रक्रियाएं सुदृढ़ होती हैं, बल्कि सरकारी खजाने को भी बड़े पैमाने पर होने वाले नुकसान से बचाया जा सकता है। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के विजन और मार्कफेड के चेयरमैन जितेंद्र कुमार शुक्ल (IAS) के नेतृत्व में इस तकनीकी पहल के माध्यम से राज्य ने बिना किसी न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में कटौती किए, सिस्टम की कमियों को दूर कर लगभग ₹2,780 करोड़ की प्रत्यक्ष बचत सुनिश्चित की है। वित्तीय वर्ष 2025–26 की धान खरीद प्रक्रिया के समापन के बाद आए आंकड़े चौंकाने वाले और सुखद हैं। इस अवधि के दौरान राज्य में कुल 141.04 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की गई, जिस पर सरकार का कुल व्यय ₹43,720 करोड़ रहा। इसके विपरीत, यदि पिछले वित्तीय वर्ष 2024–25 के आंकड़ों पर नज़र डालें, तो 149.24 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद पर लगभग ₹46,500 करोड़ खर्च हुए थे। आंकड़ों का तुलनात्मक अध्ययन करने पर पता चलता है कि इस बार खरीद की मात्रा में करीब आठ लाख मीट्रिक टन की कमी आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कमी उत्पादन घटने के कारण नहीं, बल्कि गैर-प्रामाणिक प्रविष्टियों, फर्जी पंजीकरण और अन्य सीमावर्ती राज्यों से लाये जाने वाले धान की अवैध रूप से ख़रीदारी पर कड़ाई से लगाए गए नियंत्रण का प्रत्यक्ष परिणाम है। चुनौतियां और तकनीकी समाधान: विगत वर्षों में धान खरीदी के दौरान फर्जी किसान पंजीकरण, रिकॉर्ड में हेराफेरी और भंडारण केंद्रों से धान की चोरी जैसी गंभीर चुनौतियां सामने आती रही थीं। विशेषज्ञों के विश्लेषण के अनुसार, इस विशाल प्रक्रिया में यदि मात्र एक प्रतिशत की भी लीकेज या गड़बड़ी होती है, तो सरकारी खजाने को सालाना कई सौ करोड़ की चपत लगती है। इन्हीं गंभीर चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए मार्कफेड ने सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम ‘आईटीआई लिमिटेड’ के साथ हाथ मिलाया। आईटीआई लिमिटेड ने इस परियोजना के लिए आवश्यक नेटवर्क प्रबंधन, अत्याधुनिक उपकरणों की स्थापना और निरंतर तकनीकी सहायता प्रदान कर इस मॉडल को धरातल पर उतारा। ये कैमरे संदिग्ध गतिविधियों को स्वतः पहचानने में सक्षम हैं। रायपुर में एक केंद्रीय नियंत्रण कक्ष के रूप में इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC) स्थापित किया गया है, जहां लाइव फीड के जरिए पूरे प्रदेश की गतिविधियों पर नजर रखी जाती है। किसी भी प्रकार की अनियमितता सामने आने पर यहीं से तत्काल आवश्यक निर्देश जारी किए जाते हैं। मार्कफेड के प्रबंध निदेशक जितेंद्र कुमार शुक्ल ने इस उपलब्धि पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि, “इस प्रणाली ने न केवल वित्तीय अनुशासन को मजबूत किया है, बल्कि वास्तविक किसानों के हक को भी सुरक्षित किया है। अब बिचौलियों के लिए व्यवस्था में सेंध लगाना लगभग मुश्किल हो गया है।” महज़ ₹48.92 करोड़ की कुल लागत से तैयार इस परियोजना ने निवेश के अनुपात में कई गुना अधिक प्रतिफल (Return on Investment) सुनिश्चित किया है। आईटीआई लिमिटेड के अनुसार, “यह परियोजना ‘मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस (Minimum government, maximum governance)’ का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। आज छत्तीसगढ़ का यह डेटा-संचालित मॉडल न केवल देश के अन्य राज्यों के लिए एक अनुकरणीय मानक बन गया है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि डिजिटल क्रांति कैसे ग्रामीण अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदल सकती है।” छत्तीसगढ़ का यह मॉडल यह स्पष्ट करता है कि पारदर्शी सुशासन के लिए तकनीक का अपनाना अनिवार्य है। ₹2,780 करोड़ की यह बचत न केवल वित्तीय सफलता है, बल्कि यह उन हजारों किसानों की जीत है जिन्हें अब बिना किसी बिचौलिए या परेशानी के उनकी फसल का सही दाम मिल रहा है। यह सफलता ‘डिजिटल इंडिया’ के सपने को ग्रामीण स्तर पर हकीकत में बदल रही है।

बिलासपुर: पुलिस टीम पर भीड़ का हमला, महिला सिपाही से बदसलूकी, सात आरोपित गिरफ्तार

बिलासपुर बिलासपुर जिले के बिल्हा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम निपनिया में पुलिस कार्रवाई के दौरान पुलिस टीम पर हमला किए जाने का मामला सामने आया है। आरोपितों ने पुलिस जवानों के साथ धक्का-मुक्की और मारपीट की। इस घटना में एक आरक्षक की वर्दी फाड़ दी गई, जबकि कुछ पुलिसकर्मियों को चोटें भी आईं। पुलिस ने मामले में सात आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है और अन्य की तलाश जारी है। मारपीट की शिकायत पर गांव पहुंची थी पुलिस जानकारी के अनुसार बिल्हा पुलिस को होली के दिन सूचना मिली कि पेंडरवा निवासी जलेश्वर साहू के साथ गांव के कुछ युवकों ने मारपीट की है। शिकायत मिलने के बाद पुलिस की टीम गांव पहुंची और जलेश्वर साहू को अपने साथ थाने ले आई। वह मारपीट के मामले में एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया कर रहा था। इसी दौरान जलेश्वर साहू की बेटी ने पुलिस को फोन कर बताया कि जिन लोगों ने उसके पिता से मारपीट की थी, वही लोग उसके घर के सामने हंगामा कर रहे हैं। आरोपितों की कार मिली क्षतिग्रस्त सूचना मिलने पर बिल्हा थाना प्रभारी अवनीश पासवान अपनी टीम के साथ गांव के लिए रवाना हुए। रास्ते में निपनिया के पास आरोपित युवकों की कार क्षतिग्रस्त हालत में मिली। पुलिस टीम कार चालक को पकड़कर थाने ले जा रही थी। पुलिस कार्रवाई का विरोध, जवानों से धक्का-मुक्की इसी दौरान गांव में रहने वाले जावेद, अजीम, कार्तिक श्रीवास, पप्पू और अन्य लोग वहां पहुंच गए और पुलिस कार्रवाई का विरोध करने लगे। आरोपितों ने कार चालक को पुलिस के कब्जे से छुड़ाने की कोशिश की। बताया गया कि जावेद और अजीम ने गांव के श्याम बंसल, राहुल बंसल और अन्य लोगों को भी मौके पर बुला लिया। इसके बाद युवकों ने महिला आरक्षक चंदा यादव से धक्का-मुक्की की। साथ ही दूसरी आरक्षक मौसम साहू की वर्दी फाड़ दी और उनके साथ मारपीट की। बीच-बचाव करने पहुंचे आरक्षक संतोष मरकाम के साथ भी आरोपितों ने मारपीट की। स्थिति को संभालने के दौरान थाना प्रभारी अवनीश पासवान को भी चोटें आईं। अतिरिक्त बल पहुंचते ही भीड़ हुई तितर-बितर घटना की सूचना मिलने पर थाने से अतिरिक्त पुलिस बल भी मौके पर पहुंच गया। पुलिस बल को देखते ही वहां मौजूद भीड़ तितर-बितर हो गई। इसके बाद पुलिस टीम किसी तरह कार चालक को पकड़कर थाने ले आई। थाना प्रभारी की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। घटना में शामिल सात आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि अन्य लोगों की तलाश जारी है। जानिए क्या है पूरा मामला ? दरअसल, 4 मार्च को होली ड्यूटी के दौरान पेंडरवा का रहने वाला जलेश्वर साहू शिकायत लेकर थाने पहुंचा था। इसी दौरान उनकी बेटी ने सूचना दी कि कुछ लोग शराब के नशे में उनके घर के पास आकर गाली-गलौज कर रहे हैं और जान से मारने की धमकी दे रहे हैं। सूचना मिलते ही थाना प्रभारी अवनीश पासवान पेट्रोलिंग टीम के साथ ग्राम पेंडरवा के लिए रवाना हुए। रास्ते में ग्राम निपनिया पीपल चौक के पास एक स्विफ्ट डिजायर कार (CG 10 N 2288) डिवाइडर से टकराकर दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। पुलिस ने आसपास के लोगों की मदद से कार को सड़क से हटवाया। इसके बाद ड्राइवर और गाड़ी को थाने ले जाने की तैयारी की जा रही थी। इसी दौरान जावेद, अजिम, कार्तिक श्रीवास और पप्पू वहां पहुंचे और पुलिसकर्मियों से विवाद करने लगे। दोस्तों को बुलाकर पुलिस टीम को घेरा विवाद के दौरान आरोपियों ने अपने अन्य साथियों श्याम बंसल, राहुल बंसल और यश बंसल को भी मौके पर बुला लिया। इसके बाद सभी ने मिलकर पुलिसकर्मियों से बदतमीजी की, अश्लील गाली-गलौज की और सरकारी काम में बाधा डालते हुए मारपीट शुरू कर दी। समझाइश देने पर TI से भी की झूमाझटकी बदमाशों की संख्या अधिक होने के कारण टीआई अवनीश पासवान उन्हें समझाकर शांत कराने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन शराब के नशे में आरोपियों ने उन्हें भी घेर लिया और झूमाझटकी शुरू कर दी। जिससे उनकी कलाई में चोट आ गई। कॉन्स्टेबल की वर्दी फाड़ी, लेडी कॉन्स्टेबल से धक्का-मुक्की हंगामे के दौरान आरोपियों ने कॉन्स्टेबल मौसम साहू की वर्दी फाड़ दी। वहीं लेडी कॉन्स्टेबल चंदा यादव के साथ धक्का-मुक्की की गई। मारपीट में कॉन्स्टेबल संतोष मरकाम घायल हो गए। बाद में किसी तरह पुलिस टीम मौके से निकल पाई। 8 आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज इस मामले में TI अवनीश पासवान ने बताया कि जावेद, अजिम, श्याम बंसल, राहुल बंसल, यश बंसल, कार्तिक श्रीवास और पप्पू सहित अन्य साथियों के खिलाफ BNS की धारा 115(2), 121(1), 132, 191(2), 221, 296 और 351(3) के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस सभी आरोपियों की तलाश कर रही है।

Maoist Encounter: ₹5 लाख का इनामी माओवादी दंतेवाड़ा-बीजापुर सीमा पर ढेर, हथियारों का जखीरा बरामद

दंतेवाड़ा छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा और बीजापुर जिलों की सीमा से लगे जंगल-पहाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा बलों और माओवादियों के बीच हुई मुठभेड़ (Dantewada Maoist encounter) में एक इनामी माओवादी मारा गया। पुलिस ने मौके से हथियार और बड़ी मात्रा में माओवादी सामग्री बरामद की है। घटना के बाद इलाके में सर्चिंग अभियान तेज कर दिया गया है। सर्चिंग अभियान के दौरान हुई मुठभेड़ पुलिस के अनुसार दंतेवाड़ा जिले के थाना गीदम क्षेत्र के अंतर्गत गुमलनार, गिरसापारा और नेलगोड़ा के बीच स्थित जंगल-पहाड़ इलाके में माओवादियों द्वारा हथियार और सामग्री डम्प किए जाने की सूचना मिली थी। इस सूचना के आधार पर डीआरजी (डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड) और बस्तर फाइटर्स के जवानों की संयुक्त टीम को सर्चिंग अभियान के लिए रवाना किया गया। सुरक्षा बल इलाके में तलाशी अभियान चला रहे थे, इसी दौरान माओवादियों के साथ उनका आमना-सामना हो गया। माओवादियों ने अचानक शुरू की फायरिंग जानकारी के मुताबिक अभियान के दौरान रात करीब 8:30 से 9 बजे के बीच पहले से घात लगाए बैठे भैरमगढ़ एरिया कमेटी के लगभग 8 से 10 सशस्त्र माओवादियों ने अचानक जवानों पर फायरिंग शुरू कर दी। अचानक हुई इस गोलीबारी के बाद सुरक्षा बलों ने मोर्चा संभालते हुए जवाबी कार्रवाई की। कुछ समय तक दोनों ओर से गोलीबारी चलती रही। हालांकि सुरक्षा बलों की कार्रवाई के दौरान माओवादी घने जंगल का फायदा उठाकर मौके से भागने में सफल हो गए। मुठभेड़ के बाद तलाशी में मिला माओवादी का शव मुठभेड़ के बाद सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके में सर्चिंग अभियान चलाया। तलाशी के दौरान घटनास्थल से एक पुरुष माओवादी का शव बरामद किया गया। इसके अलावा वहां से हथियार और बड़ी मात्रा में माओवादी सामग्री भी जब्त की गई। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि बरामद सामग्री से माओवादी गतिविधियों से जुड़े कई अहम सुराग मिलने की संभावना है। राजेश पुनेम के रूप में हुई पहचान पुलिस ने मृत माओवादी की पहचान राजेश पुनेम के रूप में की है। वह भैरमगढ़ एरिया कमेटी (एसीएम) का सक्रिय सदस्य बताया गया है। राजेश पुनेम बीजापुर जिले के गंगालूर थाना क्षेत्र के बुरजी गांव का निवासी था। उस पर शासन की ओर से 5 लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया था। जंगलों में सर्चिंग अभियान जारी पुलिस अधिकारियों के अनुसार मुठभेड़ के बाद आसपास के जंगलों में अन्य माओवादियों की तलाश के लिए सर्चिंग अभियान जारी है। सुरक्षा बल लगातार क्षेत्र में अभियान चलाकर माओवादी नेटवर्क को कमजोर करने की दिशा में कार्रवाई कर रहे हैं। अधिकारियों ने बताया कि इलाके में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया गया है और जवानों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।

नगर निगम ने शुरू की 2026-27 बजट की तैयारी, जगदलपुर के नागरिकों से शहर के विकास के लिए सुझाव मांगे

जगदलपुर जगदलपुर नगर निगम ने बजट वर्ष 2026-27 की तैयारी शुरू कर दी है। शहर के विकास को ध्यान में रखते हुए निगम प्रशासन ने नागरिकों, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों, व्यापारी वर्ग, युवाओं और मीडिया से सुझाव मांगे हैं। निगम का कहना है कि सड़क, नाली, पेयजल, स्वच्छता, कचरा प्रबंधन, उद्यान, स्ट्रीट लाइट, सार्वजनिक परिवहन, स्वास्थ्य, शिक्षा, महिला-बाल सुरक्षा, पर्यावरण और जल संरक्षण जैसे विषयों पर व्यवहारिक सुझाव दिए जा सकते हैं, ताकि शहर की जरूरतों के अनुसार बजट तैयार किया जा सके। विकास कामों से जुड़े सुझाव को देंगे प्राथमिकता नगर निगम के मेयर संजय पांडेय ने कहा कि बजट बनाने से पहले शहर के अलग-अलग वर्गों से सुझाव लेने की प्रक्रिया शुरू की गई है। इसके तहत शहर के विकास से जुड़े कामों को प्राथमिकता दी जाएगी। नागरिक अपने वार्ड और क्षेत्र की जरूरतों के अनुसार प्रस्ताव भेज सकते हैं, जिससे बजट में जरूरी कार्यों को शामिल किया जा सके। महापौर ने कहा कि बजट केवल आय-व्यय का दस्तावेज नहीं होता, बल्कि इससे शहर के विकास की दिशा तय होती है। उन्होंने नागरिकों से अपील की है कि वे अपने क्षेत्र की जरूरतों और समस्याओं के आधार पर सुझाव जरूर दें, ताकि शहर के लिए बेहतर और जनहित से जुड़ा बजट तैयार किया जा सके। सुझाव पसंद आया तो बजट में लाएंगे निगम प्रशासन के अनुसार, प्राप्त सभी सुझावों का परीक्षण किया जाएगा और उपयोगी प्रस्तावों को बजट निर्माण प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा। इसके बाद बजट को सामान्य सभा में प्रस्तुत कर स्वीकृति के लिए रखा जाएगा और राशि के आबंटन के लिए राज्य सरकार को भेजा जाएगा। राशि उपलब्ध होने के आधार पर शहर में विकास कार्य किए जाएंगे। नागरिक अपने सुझाव ई-मेल कर सकते हैं नागरिक अपने सुझाव jagdalpurnagarnigam@yahoo.com, व्हाट्सएप नंबर 8839522213 या सीधे महापौर कार्यालय, नगर निगम जगदलपुर में जमा कर सकते हैं। निगम प्रशासन ने शहरवासियों से इस प्रक्रिया में भाग लेने की अपील की है, ताकि सामूहिक सुझावों के आधार पर शहर के विकास की योजना तैयार की जा सके। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष श्री देव ने  भाजपा जिला कार्यालय में आहूत पत्र वार्ता में बजट के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डालते कहा कि हमारी सरकार का पहला बजट ज्ञान पर आधारित था और दूसरा गति पर, इस वर्ष का बजट संकल्प की थीम पर आधारित है, यह बजट प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विकसित भारत के स्वप्न को विकसित छत्तीसगढ़ के माध्यम से साकार करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है। श्री देव ने कहा कि बजट में राज्य के सर्वांगीण विकास को गति देने के लिए सरकार ने 5 विशेष मिशनों की घोषणा की है, जो भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किए गए हैं- सड़कों, पुलों और भवनों के आधुनिक निर्माण के लिए मुख्यमंत्री अधोसंरचना मिशन, प्रदेश को तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में अग्रणी बनाने हेतु मुख्यमंत्री एआई (AI) मिशन, छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहर को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए मुख्यमंत्री पर्यटन विकास मिशन, युवाओं को ‘जॉब सीकर’ के बजाय ‘जॉब क्रिएटर’ बनाने हेतु मुख्यमंत्री स्टार्टअप मिश और खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाएँ प्रदान करने के लिए मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन। श्री देव ने मजबूत अर्थव्यवस्था के प्रामाणिक आँकड़ों को रेखांकित कर कहा कि छत्तीसगढ़ की जीएसडीपी 12 प्रतिशत की दर से बढ़कर 7,09,553 करोड़ रुपए होने का अनुमान है, पूंजीगत व्यय में 63 प्रतिशत की भारी वृद्धि दर्शाती है कि सरकार राज्य में संपत्ति निर्माण पर निवेश कर रही है। राज्य का स्वयं का कर राजस्व 14 प्रतिशत बढ़कर 52,000 करोड़ रुपए होने का अनुमान है।  

दुबई में फंसे बिलासपुर के 3 दोस्त, 9 दिन बाद भी नहीं लौट पाए; परिजनों ने मदद के लिए सरकार से की अपील

बिलासपुर  छत्तीसगढ़ के बिलासपुर के 3 युवक दुबई में फंसे हुए हैं। तीनों दोस्त घूमने के लिए दुबई गए थे, लेकिन सुरक्षा को लेकर स्थिति साफ नहीं होने के कारण उनकी वापसी में देरी हो रही है। जानकारी के मुताबिक, युवकों का नाम शिवम मिश्रा, आकाश अग्रवाल और आयुष अग्रवाल है, जो कोटा के रहने वाले हैं। लगातार फ्लाइट रद्द होने से तीनों दुबई में फंसे हुए हैं। हालांकि, तीनों युवक होटल में सुरक्षित हैं। वहीं, परिजनों ने भारत सरकार से मदद मांगी है। तीनों युवक वीडियो कॉल के जरिए परिजनों से संपर्क बनाए हुए हैं। बताया गया कि पहले उनकी टिकट 28 फरवरी की थी, लेकिन उड़ान कैंसिल हो गई। इसके बाद तीन मार्च की नई टिकट मिली, वह भी रद्द हो गई।  केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू से फोन पर बात की शिमव मिश्रा ने केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू से फोन पर बात की। जिस पर उन्होंने मदद का आश्वासन दिया। इधर, इस मामले में कलेक्टर संजय अग्रवाल का कहना है कि अब तक प्रशासनिक स्तर पर जानकारी नहीं मिली है। जानकारी के मुताबिक, युवकों का नाम शिवम मिश्रा, आकाश अग्रवाल और आयुष अग्रवाल है, जो कोटा के रहने वाले हैं। लगातार फ्लाइट रद्द होने से तीनों दुबई में फंसे हुए हैं। हालांकि, तीनों युवक होटल में सुरक्षित हैं। वहीं, परिजनों ने भारत सरकार से मदद मांगी है। तीनों युवक वीडियो कॉल के जरिए परिजनों से संपर्क बनाए हुए हैं। बताया गया कि पहले उनकी टिकट 28 फरवरी की थी, लेकिन उड़ान कैंसिल हो गई। इसके बाद 3 मार्च और 5 मार्च की फ्लाइट भी रद्द हो गई थी। अब आज (6 मार्च) वापसी के कयास लगाए जा रहे हैं। शिमव मिश्रा ने केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू से फोन पर बात की थी। जिस पर उन्होंने मदद का आश्वासन दिया था।

मुख्यमंत्री साय का बयान, राज्य नीति आयोग दीर्घकालिक विकास में करेगा अहम योगदान

रायपुर : दीर्घकालिक विकास की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा राज्य नीति आयोग : मुख्यमंत्री  साय राज्य नीति आयोग के उपाध्यक्ष के रूप में गणेश शंकर मिश्रा ने संभाला पदभार, मुख्यमंत्री ने दी शुभकामनाएँ रायपुर मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय नवा रायपुर स्थित नीति भवन में छत्तीसगढ़ राज्य नीति आयोग के नवनियुक्त उपाध्यक्ष  गणेश शंकर मिश्रा के पदभार ग्रहण समारोह में शामिल हुए। मुख्यमंत्री ने उन्हें इस महत्वपूर्ण दायित्व के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दीं। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि राज्य नीति आयोग प्रदेश के दीर्घकालिक विकास विज़न, साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण और विभिन्न विभागों के बेहतर समन्वय के माध्यम से छत्तीसगढ़ के विकास को नई दिशा और गति देने वाला एक महत्वपूर्ण संस्थान है। उन्होंने कहा कि भविष्य की जरूरतों और चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए विकास की योजनाएँ और रणनीतियाँ तैयार करने में आयोग की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज देश माननीय प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसी दृष्टि को ध्यान में रखते हुए छत्तीसगढ़ में भी छत्तीसगढ़ विज़न डॉक्युमेंट 2047 तैयार किया गया है, जिससे प्रदेश के समग्र और दीर्घकालिक विकास की रूपरेखा तय की जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री  मोदी द्वारा योजना आयोग के स्थान पर नीति आयोग के गठन का निर्णय दूरदर्शी सोच का परिणाम था। आज नीति आयोग द्वारा संचालित आकांक्षी जिलों का कार्यक्रम देश के पिछड़े क्षेत्रों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, जिसका सकारात्मक प्रभाव छत्तीसगढ़ के आकांक्षी जिलों में भी देखने को मिला है। मुख्यमंत्री  साय ने कहा कि नीति आयोग की विशेषता यह है कि यह क्षेत्र की वास्तविक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नीति और योजना निर्माण को बढ़ावा देता है। इसी सोच के साथ राज्यों में भी राज्य नीति आयोग का गठन किया गया है, जो विकास की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सुशासन, पारदर्शिता और जनभागीदारी के साथ प्रदेश में विकास को नई गति देने के लिए लगातार कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि  गणेश शंकर मिश्रा के प्रशासनिक अनुभव से राज्य नीति आयोग को नई दिशा और गति मिलेगी। आयोग की ओर से प्राप्त अच्छे सुझावों को राज्य सरकार गंभीरता से लेकर प्रभावी ढंग से लागू करने का प्रयास करेगी। राज्य नीति आयोग के नवनियुक्त उपाध्यक्ष  गणेश शंकर मिश्रा ने कहा कि मुख्यमंत्री  साय के नेतृत्व में प्रदेश निरंतर विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि बेहतर और भविष्योन्मुखी नीतियों के माध्यम से छत्तीसगढ़ को अधिक समृद्ध और विकसित बनाने की दिशा में सभी के साथ मिलकर कार्य किया जाएगा। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री  विजय शर्मा, वन मंत्री  केदार कश्यप, विधायक सु लता उसेंडी, विधायक  अमर अग्रवाल, महापौर धमतरी  रामू रोहरा, राज्य नीति आयोग के सदस्य डॉ. के. सुब्रह्मण्यम, सदस्य सचिव  आशीष भट्ट, सचिव  भुवनेश यादव सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

38°C तक तापमान पहुंचा राजनांदगांव में, उत्तर छत्तीसगढ़ में रातें ठंडी, बारिश फिलहाल नहीं

राजनांदगांव   छत्तीसगढ़ में मार्च के साथ ही गर्मी धीरे-धीरे बढ़ने लगी है. मौसम विभाग के अनुसार फिलहाल पूरे प्रदेश में मौसम शुष्क बना हुआ है और कहीं भी बारिश दर्ज नहीं की गई है. मौसम की स्थिति फिलहाल स्थिर बनी हुई है, जिसके कारण आने वाले कुछ दिनों तक मौसम में किसी बड़े बदलाव की संभावना नहीं जताई जा रही है। राजनांदगांव में सबसे ज्यादा तापमान प्रदेश के अलग-अलग जिलों में तापमान में थोड़ा अंतर देखने को मिल रहा है. मौसम विभाग के मुताबिक प्रदेश में सबसे अधिक अधिकतम तापमान राजनांदगांव में 38.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। वहीं न्यूनतम तापमान की बात करें तो अंबिकापुर में सबसे कम 12.0 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया है. इसके कारण वहां सुबह और रात के समय हल्की ठंड का अहसास बना हुआ है। इन इलाकों के ऊपर बना चक्रवाती परिसंचरण मौसम विभाग के अनुसार उत्तरी ओडिशा और उससे सटे गंगा क्षेत्रीय पश्चिम बंगाल के ऊपर समुद्र तल से करीब 0.9 किलोमीटर की ऊंचाई पर चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है। इसके साथ ही उत्तरी उत्तर प्रदेश से लेकर उत्तर-पूर्वी मध्य प्रदेश, उत्तरी छत्तीसगढ़ और दक्षिणी झारखंड होते हुए उत्तरी ओडिशा तक द्रोणिका बनी हुई है. हालांकि फिलहाल इसका प्रदेश के मौसम पर कोई बड़ा असर देखने को नहीं मिल रहा है। अगले 7 दिनों तक मौसम में बड़ा बदलाव नहीं मौसम विभाग का कहना है कि छत्तीसगढ़ में आने वाले 7 दिनों तक अधिकतम तापमान में किसी बड़े बदलाव की संभावना नहीं है. प्रदेश में मौसम शुष्क ही बना रहेगा और दिन के समय हल्की गर्मी का असर महसूस किया जाएगा। रायपुर में साफ रहेगा आसमान राजधानी रायपुर में 6 मार्च को आसमान मुख्यतः साफ रहने की संभावना जताई गई है. मौसम विभाग के अनुसार यहां अधिकतम तापमान लगभग 38 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान करीब 21 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है. दिन के समय तेज धूप के कारण गर्मी का असर महसूस हो सकता है।

रायगढ़ में प्रशासन का नया कदम, “प्रशासन पहुंचेगा जनता के द्वार” अभियान से समस्याओं का होगा समाधान

रायगढ़   आम नागरिकों की समस्याओं के त्वरित, पारदर्शी और प्रभावी निराकरण के उद्देश्य से जिला प्रशासन द्वारा “प्रशासन पहुंचेगा जनता के द्वार” अभियान के तहत जिला स्तरीय जनसमस्या निवारण शिविरों की श्रृंखला प्रारंभ की जा रही है। इसकी शुरुआत 6 मार्च को विकासखंड धरमजयगढ़ के तहसील मुख्यालय प्रांगण कापू से होगी। शिविर दोपहर 12 बजे से सायं 4 बजे तक आयोजित होगा, जिसमें आमजन अपनी मांग, शिकायत, आवेदन एवं अन्य आवश्यक प्रकरण सीधे जिला प्रशासन और संबंधित विभागों के समक्ष प्रस्तुत कर सकेंगे। जिला प्रशासन द्वारा 12 मार्च को मुकडेगा (लैलूंगा), 13 मार्च को तमनार, 19 मार्च को पुसौर, 20 मार्च को छाल (धरमजयगढ़), 27 मार्च को लैलूंगा, 2 अप्रैल को घरघोड़ा तथा 4 अप्रैल को खरसिया तहसील मुख्यालय में शिविर आयोजित किए जाएंगे। प्रत्येक शिविर में संबंधित विभागों के जिला स्तरीय अधिकारियों, अनुविभागीय अधिकारियों (राजस्व) एवं जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों की उपस्थिति अनिवार्य रूप से सुनिश्चित की गई है, ताकि अधिकतम प्रकरणों का निराकरण स्थल पर ही किया जा सके। शिविर में प्राप्त आवेदनों को मांग एवं शिकायत श्रेणी में वर्गीकृत कर नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी। जिन प्रकरणों का समाधान शिविर दिवस पर संभव होगा, उनका निराकरण तत्काल कर आवेदक को जानकारी दी जाएगी। शेष प्रकरणों के लिए निश्चित समय-सीमा तय कर संबंधित आवेदकों को सूचित किया जाएगा। शिविर की तिथि से एक सप्ताह के भीतर श्रेणीवार निराकरण रिपोर्ट संबंधित जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा प्रस्तुत की जाएगी। संपूर्ण प्रक्रिया की सतत मॉनिटरिंग जिला स्तर पर की जाएगी, ताकि पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित हो सके। कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने समस्त अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), जिला स्तरीय अधिकारियों तथा सभी जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करते हुए कहा है कि शिविरों का उद्देश्य केवल आवेदन प्राप्त करना नहीं, बल्कि अधिकाधिक प्रकरणों का मौके पर ही समाधान सुनिश्चित करना है। इससे आम नागरिकों को शासकीय कार्यालयों के अनावश्यक चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और प्रशासन के प्रति विश्वास भी सुदृढ़ होगा।

राज्यपाल ने माँ महामाया का दर्शन कर छत्तीसगढ़ की सुख-समृद्धि, खुशहाली की कामना की

रायपुर राज्यपाल  रमेन डेका राज्यपाल  रमेन डेका ने आज रतनपुर पहुंचकर माँ महामाया मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना की। उन्होंने माँ महामाया से छत्तीसगढ़ की सुख-समृद्धि, खुशहाली और प्रदेशवासियों के कल्याण की कामना कर आशीर्वाद लिया। मंदिर परिसर में राज्यपाल का मंदिर समिति के पदाधिकारियों और श्रद्धालुओं ने आत्मीय स्वागत किया। इस अवसर पर नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष  लवकुश कश्यप, कलेक्टर  संजय अग्रवाल, एसएसपी  रजनेश सिंह सहित अन्य अधिकारी-कर्मचारी, सहित  मोहित जायसवाल एवं माँ महामाया मंदिर समिति के पदाधिकारियों मौजूद थे।

खेती-किराना और महुआ व्यापार से बनीं आत्मनिर्भर

रायपुर खेती-किराना और महुआ व्यापार से बनीं आत्मनिर्भर बीजापुर जिले से लगभग 15 किलोमीटर दूर नियद नेल्ला नार क्षेत्र के ग्राम चेरपाल की रहने वाली सुनीता दीदी आज आत्मनिर्भरता की एक प्रेरणादायक मिसाल बन गई हैं। कभी एक साधारण गृहिणी के रूप में जीवन जीने वाली सुनीता दीदी ने स्व-सहायता समूह से जुड़कर अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत किया और आज वे गांव की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा बन गई हैं। पहले सुनीता दीदी  के परिवार की आय केवल खेती और एक छोटी किराना दुकान पर निर्भर थी। खेती मौसम पर आधारित होने के कारण आय स्थिर नहीं रहती थी। इससे बच्चों की पढ़ाई और घर की आवश्यक जरूरतों को पूरा करना भी कठिन हो जाता था। इसी दौरान सुनीता दीदी ने गांव के स्व-सहायता समूह से जुड़ने का निर्णय लिया। समूह की बैठकों में उन्हें बचत, ऋण और स्वरोजगार से जुड़ी योजनाओं की जानकारी मिली। समूह के माध्यम से सुनीता दीदी नियमित बचत करने के बाद उन्हें आरएफ से 1,500 रूपए, सीआईएफ से 50 हजार रूपए और बैंक लिंकेज से 30 हजार रूपए का ऋण मिला। इस आर्थिक सहायता से उन्होंने अपनी आय बढ़ाने के लिए कई छोटे-छोटे कार्य शुरू किए। सबसे पहले उन्होंने खेती को बेहतर बनाने पर ध्यान दिया। उन्नत बीज, जैविक खाद और आधुनिक खेती तकनीकों का उपयोग कर उन्होंने उत्पादन बढ़ाया। इससे उन्हें फसल और सब्जियों से सालाना लगभग 52 हजार से 55 हजार रूपए की आय होने लगी। इसके बाद उन्होंने अपने घर के पास की छोटी किराना दुकान को व्यवस्थित तरीके से चलाना शुरू किया। गांव के लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों का सामान उपलब्ध कराने से दुकान अच्छी चलने लगी और इससे उन्हें सालाना लगभग 45 हजार से 50 हजार रूपए की आय मिलने लगी। इसके साथ ही सुनीता दीदी ने गांव में उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करते हुए महुआ, टोरा सहित अन्य वनोपज का क्रय-विक्रय भी शुरू किया। वे ग्रामीणों से महुआ और टोरा खरीदकर उसे साफ-सफाई के साथ सुरक्षित रखती हैं और बाजार में अच्छे दामों पर बेचती हैं। इससे उन्हें सालाना लगभग 15 हजार से 20 हजार रूपए का अतिरिक्त लाभ मिलने लगा। खेती, किराना दुकान और वनोपज व्यापार से उनकी आय लगातार बढ़ती गई। मेहनत, सही योजना और स्व-सहायता समूह के सहयोग से सुनीता दीदी की वार्षिक आय अब लगभग 1 लाख 20 हजार रूपए से अधिक हो गई है। आज सुनीता दीदी अपने परिवार को आर्थिक रूप से मजबूत बना चुकी हैं। साथ ही वे गांव की अन्य महिलाओं को भी स्व-सहायता समूह से जुड़कर स्वरोजगार अपनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं। उनकी सफलता यह साबित करती है कि सरकारी योजनाओं और स्व-सहायता समूहों के सहयोग से महिलाएं आत्मनिर्भर बनकर अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकती हैं।

प्रधानमंत्री आवास योजना से साकार हुआ सपना, वंचित परिवार को मिला पक्का घर

रायपुर प्रत्येक जनहितकारी योजना का लाभ यदि वास्तविक लाभार्थी तक पहुंचता है तो उसका एक अलग ही परिणाम देखने को मिलता है। प्रधानमंत्री आवास जैसी योजना का दायरा उन तमाम वंचित परिवारों को राहत की छांव देने का माध्यम बन रहा है, जिनके सपनों में भी पक्के छत का आसरा नहीं था। कोरिया जिला मुख्यालय से लगे ग्राम पंचायत भांड़ी में रहने वाले ऐसे ही एक वंचित परिवार के लिए उनका पक्का आवास का सपना हकीकत में बदल चुका है।  मेहनतकश जीवन का संघर्ष           कोरिया के जनपद पंचायत बैकुण्ठपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत भांडी में रहने वाली  जलकी रानी अपने पति दुलार साय और दो बच्चों यानी कुल चार बच्चों के साथ एक कच्चे मकान में जीवन यापन कर रही थीं। मिट्टी की दीवारें, बारिश के दौरान टपकती खपरैल और हर बिगड़ते मौसम में बच्चों की सुरक्षा की चिंता यही उनकी रोजमर्रा की सच्चाई बन चुकी थी। बरसात में घर के भीतर पानी भर जाता, गर्मी में तपती छत और सर्दी में ठंडी हवाएँ दैनिक जीवन संघर्ष में परिवार की परेशानियाँ और बढ़ा देती थीं। आर्थिक संकट में सपनों की छत           जलकी रानी के वंचित परिवार की आय का मुख्य स्रोत मजदूरी है। प्रदेश सरकार द्वारा संचालित मनरेगा जैसी योजना के माध्यम से उन्हे सौ दिवस के रोजगार के बाद अन्य किसानों के खेतों में मजदूरी कर किसी तरह अपने बच्चों का पालन-पोषण करते थे। मजदूरी से मिलने वाली सीमित आय और परिवार में बच्चों की बढ़ती जिम्मेदारियों के बीच इस दंपत्ति का जीवन अत्यंत संघर्षपूर्ण होने से उनके लिए पक्के मकान का सपना केवल सपने जैसा ही था।  प्रधानमंत्री आवास से बदली जिंदगी        इस परिवार के दैनिक जीवन में आशा की एक नई किरण के रूप में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत उन्हें पक्के घर की स्वीकृति मिली। यह उनके लिए किसी सपने के सच होने से कम नहीं थी। स्वीकृति मिलने के बाद जलकी रानी और दुलार साय ने पूरे मन से घर बनाने का कार्य शुरू किया और मनरेगा में काम करने से नब्बे दिन की मजदूरी राशि को भी अपने घर निर्माण में लगाया। दोनो पति पत्नी के द्वारा आवास बनाने के लिए निर्माण कार्य में हाथ बंटाया और उन्होंने अपने सपनों का घर खड़ा किया।  खुशियों की राह, सपनों की हकीकत        प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत  जलकी रानी के परिवार के लिए वह दिन आया जब कच्चे मकान की जगह एक मजबूत सपनों की हकीकत लिए एक पक्का घर खड़ा है। पक्की छत के नीचे पूरा परिवार सुरक्षित और खुशहाल महसूस कर रहा है अब बच्चों के चेहरे पर मुस्कान है और माता-पिता की आँखों में संतोष का भाव। खुश होकर जलकी रानी कहती हैं कि यह घर केवल उनकी मेहनत और आवास योजना से पूरे हुए सपनों का प्रतीक है।

बिहान योजना का कमाल: फूलों की खेती ने रत्ना को बनाया आत्मनिर्भर उद्यमी

रायपुर बिहान योजना से खिला रत्ना का भविष्य- फूलों की खेती से बनीं सफल उद्यमी छत्तीसगढ़ शासन की ‘बिहान’ (छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन) योजना ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इसी योजना से जुड़कर सरगुजा जिले के अम्बिकापुर विकासखंड के ग्राम पंचायत डिगमा की निवासी  रत्ना मजुमदार आज सैकड़ों महिलाओं के लिए प्रेरणा बन गई हैं। अपनी मेहनत और सरकारी सहयोग से उन्होंने न केवल परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत की, बल्कि एक सफल महिला उद्यमी के रूप में पहचान भी बनाई है। पारंपरिक खेती को दिया व्यावसायिक रूप     रत्ना मजुमदार बताती हैं कि उनके ससुर पहले से ही छोटे स्तर पर फूलों की खेती करते थे। ‘माँ महामाया स्व-सहायता समूह’ से जुड़ने के बाद उन्होंने इस पारंपरिक कार्य को व्यवसाय का रूप देने का निर्णय लिया। समूह के माध्यम से उन्होंने पहली बार एक लाख रुपये का ऋण लिया और एक एकड़ भूमि में आधुनिक तकनीक से फूलों की खेती शुरू की। मेहनत और लगन के चलते आज वे दो एकड़ भूमि में सफलतापूर्वक फूलों का उत्पादन कर रही हैं। आधुनिक तकनीक से बढ़ी उत्पादन क्षमता रत्ना ने खेती में आधुनिक और वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाया है। वे उन्नत किस्म के पौधे कोलकाता से मंगवाती हैं, जो मात्र 24 दिनों में फूल देना शुरू कर देते हैं और लगभग तीन महीनों तक लगातार उत्पादन देते हैं। खेतों में ‘ड्रिप इरिगेशन’ (टपक सिंचाई) प्रणाली का उपयोग किया जाता है, जिससे जल संरक्षण के साथ पौधों को पर्याप्त पोषण भी मिलता है। वर्तमान में वे गेंदा फूल की तीन प्रमुख किस्में-लाल, नारंगी और पीला उगा रही हैं। इसके अलावा सर्दियों के मौसम में ‘चेरी’ की खेती भी करती हैं। त्योहारों में बढ़ती मांग से बढ़ता मुनाफा रत्ना के अनुसार नवरात्रि, शिवरात्रि, रामनवमी और दीपावली जैसे पर्वों के दौरान बाजार में फूलों की मांग काफी बढ़ जाती है, जिससे अच्छी कीमत मिलती है। सामान्य दिनों में दरें कम होने के बावजूद वैज्ञानिक खेती के कारण उन्हें सालभर लाभ मिलता रहता है। उन्होंने समूह से लिया गया ऋण समय पर चुका दिया है और अब अपनी आय का निवेश खेती के विस्तार में कर रही हैं। सरकारी योजनाओं ने दिया आत्मनिर्भरता का मार्ग       अपनी सफलता का श्रेय रत्ना मजुमदार ने प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय और प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की जनकल्याणकारी योजनाओं को दिया है। उनका कहना है कि ‘बिहान’ योजना से जुड़कर ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक सशक्तिकरण का अवसर मिला है। सरकार से मिले ऋण और मार्गदर्शन ने उन्हें नई पहचान दिलाई है। बिहान योजना के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक परिवर्तन की नई कहानी लिखी जा रही है। रत्ना मजुमदार जैसी स्वावलंबी महिलाएँ विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं

भैरमगढ़ में पुलिस-नक्सली मुठभेड़: एरिया कमेटी का इनामी माओवादी मारा गया, हथियारों का जखीरा मिला

दंतेवाड़ा दंतेवाड़ा–बीजापुर सीमाक्षेत्र के जंगल-पहाड़ी इलाके में सोमवार को पुलिस और माओवादियों के बीच हुई मुठभेड़ में एक सशस्त्र माओवादी मारा गया। मारे गए माओवादी की पहचान भैरमगढ़ एरिया कमेटी के एसीएम राजेश पुनेम के रूप में की गई है, जिस पर शासन द्वारा 5 लाख रुपये का इनाम घोषित था। पुलिस के अनुसार थाना गीदम क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम गुमलनार, गिरसापारा एवं नेलगोड़ा के मध्य जंगल-पहाड़ क्षेत्र में नक्सली सामग्री एवं हथियारों का डंप छिपाए जाने की विश्वसनीय सूचना मिली थी। इस सूचना पर पुलिस अधीक्षक दंतेवाड़ा के निर्देश पर उप पुलिस अधीक्षक (नक्सल ऑप्स) राहुल कुमार उयके के नेतृत्व में डीआरजी और बस्तर फाइटर्स के जवानों को योजनाबद्ध तरीके से रवाना किया गया। माओवादियों ने घात लगाकर की अंधाधुंध फायरिंग दोपहर लगभग 12:30 बजे पुलिस बल संभावित डंप स्थल की ओर बढ़ा और जंगल-पहाड़ी क्षेत्र में सघन सर्चिंग व घेराबंदी शुरू की। रात करीब 8:30 से 9:00 बजे के बीच पहले से घात लगाए बैठे भैरमगढ़ एरिया कमेटी के 8 से 10 सशस्त्र माओवादियों ने पुलिस पार्टी पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। पुलिस का कहना है कि माओवादियों की मंशा जवानों की हत्या कर हथियार लूटने की थी। पुलिस पार्टी ने तत्काल सुरक्षित स्थान लेकर माओवादियों को आत्मसमर्पण की चेतावनी दी, लेकिन फायरिंग जारी रहने पर जवानों ने आत्मरक्षा में संयमित और सटीक जवाबी कार्रवाई की। प्रभावी जवाबी फायरिंग के बाद माओवादी कमजोर पड़ गए और घने जंगल, पहाड़ी भूभाग तथा अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गए। सर्चिंग में मिला शव और हथियार मुठभेड़ के बाद क्षेत्र की बारीकी से तलाशी लेने पर एक पुरुष सशस्त्र माओवादी का शव बरामद किया गया। साथ ही बड़ी मात्रा में हथियार और नक्सली सामग्री भी जब्त की गई। बरामद सामग्री में एक एसएलआर रायफल, एक इंसास रायफल, एक पिस्टल (मैगजीन सहित), एक वॉकी-टॉकी सेट, एसएलआर व इंसास की मैगजीन, जिंदा कारतूस, मिसफायर राउंड, खाली खोखे और अन्य सामग्री शामिल है। आत्मसमर्पित कैडर की मदद से मृत माओवादी की पहचान राजेश पुनेम, एसीएम, भैरमगढ़ एरिया कमेटी, निवासी ग्राम बुरजी, थाना गंगालूर, जिला बीजापुर के रूप में की गई। घटना स्थल से शव, हथियार और नक्सली सामग्री को अभिरक्षा में लेकर आईईडी और एंबुश के संभावित खतरे को ध्यान में रखते हुए टैक्टिकल मूवमेंट किया गया। आरओपी और एरिया डोमिनेशन के बाद बल सुरक्षित रूप से जिला मुख्यालय दंतेवाड़ा लौट आया। पुलिस के अनुसार यह अभियान बिना किसी सुरक्षाबल क्षति के सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

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