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उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन 06 मार्च को करेंगे 3.08 करोड़ के विकास कार्यों का भूमिपूजन

रायपुर कोरबा नगर विधायक, प्रदेश के वाणिज्य, उद्योग , सार्वजनिक उपक्रम, वाणिज्यिक कर (आबकारी) एवं श्रम मंत्री  लखनलाल देवांगन शुक्रवार 06 मार्च 2026 को नगर पालिक निगम कोरबा के विभिन्न वार्डों में  3.08 करोड़ रु के विभिन्न निर्माण कार्यों का भूमिपूजन करेंगे।  मंत्री  देवांगन शुक्रवार को दोपहर 3.30 बजे नगर पालिक निगम कोरबा के दर्री जोन अंतर्गत वार्ड क्रमांक 56 (प्राथमिक शाला आगरखार)में विभिन्न निर्माण कार्यों का भूमिपूजन करेंगे। इनमें नगर पालिक निगम कोरबा क्षेत्रांतर्गत दर्री जोन के 32 शासकीय विद्यालयों में बालक-बालिका शौचालय निर्माण (लागत 1 करोड़ 60 लाख रुपए) तथा दर्री जोन अंतर्गत 21 शासकीय स्कूलों में किचन शेड निर्माण कार्य (लागत 73 लाख रुपए) शामिल हैं। मंत्री  देवांगन सायं 4.30 बजे सरस्वती शिशु मंदिर, सीएसईबी, कोरबा पहुंचकर नगर पालिक निगम कोरबा के कोसाबाड़ी जोन अंतर्गत विभिन्न विकास कार्यों का भूमिपूजन करेंगे। इनमें वार्ड क्रमांक 19 में सीएसईबी के अंतर्गत सरस्वती शिशु मंदिर विद्यालय में भवन निर्माण कार्य (लगभग 25 लाख रुपए), वार्ड क्रमांक 22 में रोड निर्माण एवं शेड निर्माण कार्य ( 10 लाख रुपए), वार्ड क्रमांक 24 नेहरू नगर के मुख्य मार्ग में ग्रीनवेल्ट निर्माण कार्य ( 30 लाख रुपए) तथा वार्ड क्रमांक 21 (पूर्व वार्ड क्रमांक 19) गायत्री यज्ञपीठ सीएसईबी कॉलोनी कोरबा में अतिरिक्त भवन निर्माण एवं जीर्णोंद्धार कार्य (लगभग 10 लाख रुपए) शामिल हैं।

कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय में होली मिलन

रायपुर कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय में होली मिलन कार्यक्रम पारंपरिक उत्साह और हर्षाेल्लास के साथ संपन्न हुआ। प्रशासनिक भवन के कॉन्फ्रेंस हॉल में आयोजित इस कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर (डॉ.) मनोज दयाल ने सभी प्राध्यापकों, अतिथि व्याख्याताओं, अधिकारियों एवं कर्मचारियों सहित विश्वविद्यालय परिवार को होली की हार्दिक शुभकामनाएं दीं।       कुलपति प्रो. मनोज दयाल ने विश्वविद्यालय के ‘रेडियो संवाद’ के माध्यम से भी होली पर्व पर अपना शुभकामना संदेश प्रसारित किया। होली मिलन कार्यक्रम के दौरान सभी ने एक-दूसरे को गुलाल लगाकर होली की बधाई दी और सौहार्दपूर्ण वातावरण में रंगों के इस पर्व का आनंद लिया          कुलपति प्रो. दयाल ने कहा कि रंगों का यह पावन पर्व समाज में प्रेम, भाईचारे, समरसता और एकता का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि होली केवल रंगों का त्यौहार ही नहीं, बल्कि कुटुंब प्रबोधन और सामाजिक सद्भाव को सुदृढ़ करने का अवसर भी है। उन्होंने सभी से अपील की कि त्योहार को स्वदेशी जीवन शैली के अनुरूप मनाते हुए इस बात का विशेष ध्यान रखें कि किसी को किसी प्रकार की असुविधा या कष्ट न पहुंचे। कुलपति ने कामना की कि होली का यह पर्व विश्वविद्यालय परिवार तथा विद्यार्थियों के जीवन में नई ऊर्जा, नई उम्मीद और नई उमंग लेकर आए। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलसचिव सुनील कुमार शर्मा सहित सभी प्राध्यापकगण, अतिथि व्याख्याता, अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

आदिवासी परंपराओं के संरक्षण पर जोर, राज्यपाल रमेन डेका की अपील

रायपुर आर्चरी खिलाड़ियों को 5-5 हजार देने की घोषणा राज्यपाल रमेन डेका ने बैगा-बिरहोर आदिवासियों से कहा कि अपनी समृद्ध, पारंपरिक संस्कृति को सहेजने के लिए स्थानीय भाषाओं, लोकगीतों, कलाओं और रीति-रिवाजों को संरक्षित रखना आवश्यक है। उन्होंने समृद्ध संस्कृति ओर परंपरा को सहेजकर रखनेे का आग्रह करते हुए कहा कि जीवन में आगे बढ़ते हुए भी अपनी परंपराओं को विलुप्त न होने दें।  राज्यपाल रमेन डेका आज अपने बिलासपुर प्रवास के दौरान कोटा विकासखंड के शिवतराई पहुंचकर बैगा और बिरहोर आदिवासियों से शासन की योजनाओं से मिल रहे लाभ की जानकारी ली। राज्यपाल ने कहा कि बैगा और बिरहोर समाज की समृद्ध संस्कृति और परंपराएं उनकी पहचान हैं। इस अवसर पर राज्यपाल ने आर्चरी के खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करते हुए प्रत्येक खिलाड़ी को 5-5 हजार रुपये देने की घोषणा की। उन्होंने खिलाड़ियों को लोकभवन रायपुर आने का निमंत्रण दिया तथा कलेक्टर को उनके आवागमन सहित आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था करने के निर्देश दिए। आर्चरी खिलाड़ियों को 5-5 हजार देने की घोषणा स्व-सहायता समूह द्वारा आजीविका गतिविधियां संचालित राज्यपाल डेका ने लखपति दीदीमती प्रमिला बैगा से चर्चा की। उन्होंने बताया कि वे गोंदा स्व-सहायता समूह से जुड़ी हैं। समूह कीमती रश्मि मरावी ने बताया कि उनके समूह द्वारा सिलाई-मशीन का काम, अचार-पापड़ निर्माण सहित अन्य आजीविका गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। बैगा महिलाओं द्वारा बांस से विभिन्न उपयोगी उत्पाद भी तैयार किए जा रहे हैं। राज्यपाल ने आयुष्मान कार्ड, महतारी वंदन योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना(ग्रामीण), राशन की उपलब्धता, पीएम जनमन योजना सहित अन्य योजनाओं के क्रियान्वयन की जानकारी भी ली। औरापानी कीमती मंगली ने बताया कि उन्हें आवास योजना का लाभ मिला है। शिवतराई कीमती ममता खुसरो ने बताया कि उन्हें आयुष्मान कार्ड के साथ महतारी वंदन योजना का भी लाभ मिल रहा है। उन्होंने आयुष्मान कार्ड से अपना अल्सर का ऑपरेशन भी कराया है।  जनमन योजना के तहत 265 आवास स्वीकृत राज्यपाल ने कहा कि बांस के उत्पाद और पारंपरिक गहने बनाना सिखाने के लिए प्रशिक्षक की भी व्यवस्था की जाएगी। राज्यपाल ने बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाने पर भी जोर दिया। इस दौरान सरपंच ने बताया कि यहां पीएम जनमन योजना के तहत 265 आवास स्वीकृत हुए हैं। कलेक्टर संजय अग्रवाल ने बताया कि जिले में पीवीटीजी समुदाय के लगभग 6400 लोग 54 बसाहटों में निवासरत हैं। पीएम जनमन योजना के तहत लगभग 900 आवास स्वीकृत किए गए हैं तथा 21 सड़कों का निर्माण किया गया है। टाटीधार में बहुद्देशीय केंद्र बनाया गया है। पीवीटीजी बसाहटों में 3 मोबाइल मेडिकल यूनिट के माध्यम से स्वास्थ्य परीक्षण और दवाईयां निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही हैं। नियमित रूप से मेडिकल कैंप लगाए      राज्यपाल ने निर्देश दिए कि पीएम जनमन योजना का अधिक से अधिक लाभ पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाया जाए तथा नियमित रूप से मेडिकल कैंप लगाए जाएं। उन्होंने टीबी मरीजों के पोषण के लिए उन्हें गोद लेने की पहल को भी प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि यदि किसी को मोतियाबिंद की समस्या है, तो वे एम्स आ सकते हैं, वहां उनके ठहरने की व्यवस्था भी की जाएगी। राज्यपाल ने बैगा समाज के लोगों को होली पर्व की शुभकामनाएं दीं और उन्हें उपहार भी प्रदान किया।  इस अवसर पर बैगा समाज के प्रमुख लुमन सिंह बैगा ने पलाश के फूलों की माला पहनाकर राज्यपाल का स्वागत किया तथा बैगा महिलाओं ने खुमरी पहनाकर उनका पारंपरिक स्वागत किया। कार्यक्रम में एसएसपी रजनेश सिंह, सीसीएफ मनोज पांडे, एडीएम शिव कुमार बनर्जी सहित बड़ी संख्या में बैगा आदिवासी समाज के लोग, स्थानीय जनप्रतिनिधि, ग्रामीणजन और अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।

कुलपति प्रो. मनोज दयाल ने राज्यपाल से की सौजन्य भेंट

रायपुर कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) मनोज दयाल ने मंगलवार को कुलाधिपति एवं राज्यपाल माननीय श्री रमेन डेका से सौजन्य भेंट की। इस अवसर पर कुलपति प्रो. दयाल ने विश्वविद्यालय के कुलपति के रूप में कार्य करने का अवसर देने और विकास के प्रति विश्वास जताने के लिए कुलाधिपति के प्रति आभार व्यक्त किया।  प्रोफेसर दयाल ने आश्वस्त किया कि विश्वविद्यालय के हित, प्रगति और शैक्षणिक गुणवत्ता को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक सभी प्रयास कुलाधिपति के मार्गदर्शन में किए जाएंगे। भेंट के दौरान विश्वविद्यालय के भावी विकास के लिए तैयार रोडमैप, रूपरेखा और विभिन्न योजनाओं पर भी विस्तार से चर्चा हुई। इस अवसर पर कुलपति प्रो. दयाल ने उच्च शिक्षा सचिव तथा उच्च शिक्षा आयुक्त से भी मुलाकात कर विश्वविद्यालय की प्रगति, शैक्षणिक गुणवत्ता और विकास संबंधी योजनाओं पर चर्चा की। अधिकारियों ने विश्वविद्यालय की उन्नति के लिए हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया।

शादी की परंपराओं में बदलाव: सेन समाज ने ‘जूता चोरी’ और सगाई के कॉल पर लगाई सख्त पाबंदी

 बालोद/रायपुर छत्तीसगढ़ में सामाजिक संस्थाएं अब शादियों में बढ़ते खर्च और पारिवारिक विवादों को रोकने के लिए ‘रेगुलेटर’ की भूमिका में आ गई हैं. साहू समाज द्वारा प्री-वेडिंग शूट पर प्रतिबंध लगाने के बाद, अब राज्य के सेन समुदाय ने बालोद में कई सख्त नियमों का ऐलान किया है। सेन समुदाय ने शादियों में पारंपरिक ‘जूता चुराई’ रस्म पर रोक और सगाई के बाद दूल्हा-दुल्हन के बीच निजी बातचीत पर प्रतिबंध शामिल है. ये फैसले बालोद जिले में सेन समुदाय की जिला स्तरीय बैठक में लिए गए, जहां नेताओं ने शादी के बढ़ते खर्च, पारिवारिक विवादों और सगाई टूटने के मामलों पर चिंता जताई। सबसे चर्चित फैसला ‘जूता चुराई’ रस्म पर रोक है. यह रस्म उत्तर भारत की कई शादियों में आम है, जिसमें दुल्हन की बहनें या रिश्तेदार दूल्हे के जूते छिपाकर पैसे मांगते हैं. समुदाय के नेताओं के अनुसार, यह रस्म कभी-कभी दोनों परिवारों के बीच बहस या असहज बातचीत का कारण बन जाती है. इसलिए समुदाय ने इसे हतोत्साहित कर प्रभावी रूप से प्रतिबंधित करने का फैसला किया है। एक अन्य महत्वपूर्ण नियम सगाई के बाद दूल्हा-दुल्हन के बीच फोन पर निजी बातचीत पर रोक है. समुदाय के प्रतिनिधियों ने कहा कि हाल के कई मामलों में बार-बार फोन पर बातचीत से गलतफहमियां हुईं और सगाई टूट गई. नए नियम के तहत यदि बातचीत जरूरी हो तो परिवार के सदस्यों की मौजूदगी में ही बात हो सकती है। बैठक में प्री-वेडिंग समारोहों को सीमित करने पर भी जोर दिया गया. दिशानिर्देशों के अनुसार, सगाई में दूल्हे पक्ष से सिर्फ 15-20 लोग ही शामिल होंगे. इससे समारोह सरल रहेंगे और परिवारों पर आर्थिक बोझ कम होगा। समुदाय ने यह भी जोर दिया कि शादियां सही मुहूर्त में ही होनी चाहिए. साथ ही पर्यावरण-अनुकूल प्रथाओं को बढ़ावा दिया गया है. शादी के भोज में प्लास्टिक के बजाय पारंपरिक पत्तल पर भोजन परोसने की सलाह दी गई है। एक अन्य फैसले में कहा गया कि यदि कोई परिवार किसी अन्य धर्म में परिवर्तन करता है, तो समुदाय में सामाजिक परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं, जिसमें सामाजिक बहिष्कार और वैवाहिक संबंधों पर रोक शामिल है। समुदाय के प्रतिनिधियों ने कहा कि ये फैसले बुजुर्गों और सामाजिक नेताओं के बीच चर्चा के बाद लिए गए हैं, ताकि पारंपरिक मूल्यों को संरक्षित रखा जा सके और शादियों के दौरान परिवारों के बीच विवाद न हों. इन दिशानिर्देशों का उद्देश्य शादियों में अनुशासन, सादगी और सद्भाव को बढ़ावा देना है। कुछ सदस्यों ने इन फैसलों का स्वागत किया है, लेकिन युवाओं में बहस छिड़ गई है. कई का मानना है कि शादी से पहले बातचीत से एक-दूसरे को बेहतर समझने में मदद मिलती है, जबकि अन्य मानते हैं कि ये नियम गलतफहमियां रोकेंगे और सामाजिक मूल्यों को बचाएंगे। गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में सेन समाज की आबादी लगभग 2.25 लाख है और यह अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के अंतर्गत आता है. फिलहाल ये नियम बालोद जिले के लिए हैं, लेकिन जल्द ही इन्हें पूरे प्रदेश में लागू करने की योजना है।

रायपुर में 37°C पहुंचा पारा, छत्तीसगढ़ में गर्मी ने पकड़ी रफ्तार

रायपुर. प्रदेश में मार्च के पहले सप्ताह के साथ ही गर्मी का असर बढ़ने लगा है। राजधानी रायपुर में रविवार को अधिकतम तापमान 35.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 2.4 डिग्री अधिक है। वहीं न्यूनतम तापमान 22.2 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 3.7 डिग्री अधिक है। मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में मौसम शुष्क बना हुआ है और अगले पांच दिनों में अधिकतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस की धीरे-धीरे बढ़ोतरी होने की संभावना है। दिन में बढ़ी तपिश, रात में भी कम नहीं हो रही गर्मी दोपहर के समय तेज धूप और गर्म हवा के कारण गर्मी का असर स्पष्ट रूप से महसूस किया गया। खास बात यह है कि रात का तापमान भी अपेक्षाकृत अधिक बना हुआ है, जिससे लोगों को राहत नहीं मिल रही। न्यूनतम तापमान सामान्य से अधिक रहने के कारण सुबह और देर रात में भी हल्की गर्माहट बनी हुई है। रायपुर में औसत सापेक्ष आर्द्रता 61 प्रतिशत रही, जबकि बादल लगभग 30 प्रतिशत देखे गए। हवा की गति लगभग 2 किमी प्रति घंटा रही, जिससे उमस का असर भी महसूस किया गया। कई शहरों में सामान्य से अधिक तापमान प्रदेश के अन्य शहरों में भी तापमान सामान्य से ऊपर बना हुआ है। बिलासपुर में अधिकतम तापमान 35.4 डिग्री और न्यूनतम 21.6 डिग्री दर्ज किया गया। दुर्ग और पेण्ड्रारोड में भी तापमान औसत से अधिक रहा। वहीं अंबिकापुर में न्यूनतम तापमान 14.9 डिग्री सेल्सियस रहा, जो प्रदेश में सबसे कम है, हालांकि दिन का तापमान वहां भी सामान्य से अधिक दर्ज किया गया। अगले सात दिन का पूर्वानुमान मौसम विभाग के अनुमान के अनुसार अगले सात दिनों तक न्यूनतम तापमान में किसी बड़े बदलाव की संभावना नहीं है, जबकि अधिकतम तापमान धीरे-धीरे बढ़ेगा। इसके बाद दो दिनों तक तापमान में विशेष परिवर्तन नहीं होने की संभावना है। लगातार बढ़ते तापमान के कारण मार्च के पहले सप्ताह में ही गर्मी का असर अधिक महसूस हो सकता है।

कोरबा में पत्नी ने भागकर बचाई जान, हाथी ने मंडी प्रभारी पर हमला कर उतारा मौत के घाट

कोरबा. छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले से एक दर्दनाक घटना सामने आई है, जहां कुदमुरा उपार्जन केंद्र में देर रात एक हाथी के हमले में मंडी प्रभारी की मौत हो गई। वहीं मृतक की पत्नी ने किसी तरह भागकर अपनी जान बचाई। इस घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत का माहौल है। जानकारी के अनुसार, घटना बुधवार देर रात करीब 2 बजे कोरकोमा क्षेत्र स्थित कुदमुरा उपार्जन केंद्र की है। बताया जा रहा है कि उपार्जन केंद्र में लगातार धान चोरी की घटनाएं सामने आ रही थी। इसी कारण मंडी प्रभारी राजेश कुमार अपनी पत्नी के साथ केंद्र परिसर में अस्थायी झोपड़ी बनाकर रह रहे थे और धान की सुरक्षा की जिम्मेदारी निभा रहे थे। इस बीच देर रात एक हाथी उपार्जन केंद्र परिसर में घुस आया और झोपड़ी को नुकसान पहुंचाते हुए अंदर सो रहे राजेश कुमार पर हमला कर दिया। हमले में उनकी मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उनकी पत्नी किसी तरह वहां से भागकर अपनी जान बचाई और ग्रामीणों को घटना की जानकारी दी। मृतक राजेश कुमार रजगामार क्षेत्र के निवासी बताए जा रहे हैं। घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी गई है।

बीएसपी प्रबंधन ने दी चेतावनी, भिलाई टाउनशिप में अवैध निर्माण पर होगी सख्त कार्रवाई

भिलाई नगर. भिलाई इस्पात संयंत्र प्रबंधन ने भिलाई टाउनशिप क्षेत्र में अनाधिकृत निर्माण एवं नियमों के उल्लंघन के मामलों को गंभीरता से लेते हुए स्पष्ट किया है कि टाउनशिप क्षेत्र में किसी भी प्रकार का अवैध निर्माण या अतिरिक्त विस्तार नियमितीकरण योग्य नहीं है. प्रबंधन ने आबंटियों को चेतावनी दी है कि नियमों की अनदेखी कर किए गए निर्माण पर नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी. भिलाई टाउनशिप में लीज/लाइसेंस/ आबंटन के आधार पर प्रदत्त दुकान, आवास अथवा अन्य परिसरों के सभी आबंटियों से कहा है कि बी.एस.पी. टाउनशिप क्षेत्र एवं इसकी संपत्तियाँ लोक परिसर ( अनाधिकृत अधिभोगियों का निष्कासन) अधिनियम, 1971 के अंतर्गत अधिसूचित लोक परिसर की श्रेणी में आता है. इन परिसरों का आबंटन, प्रबंधन एवं संचालन बी. एस. पी. द्वारा निर्धारित नियमों एवं शर्तों के अनुसार किया जाता है. इन शर्तों के तहत आबंटियों को किसी भी प्रकार का अतिरिक्त अथवा अनाधिकृत निर्माण करने की अनुमति नहीं है. बी. एस. पी. प्रबंधन की पूर्व स्वीकृति के बिना किया गया कोई भी निर्माण नियम विरुद्ध एवं अवैध माना जाएगा. बीएसपी के समस्त आबंटियों से कहा गया है कि वे किसी भी प्रकार का अनाधिकृत निर्माण न करें तथा आबंटन की सभी शर्तों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करे. यह स्पष्ट किया गया है कि अनाधिकृत भवन अथवा नियमाविरुद्ध निर्माण का किसी भी परिस्थिति में नियमितीकरण संभव नहीं है. यदि कोई आबंटी नियमितीकरण संबंधी कोई प्रक्रिया प्रारंभ करता है, तो वह पूर्णतः उसके स्वयं के जोखिम एवं व्यय पर होगी. निगम अथवा अन्य किसी प्राधिकरण के साथ की गई ऐसी कोई भी नियमितीकरण कायर्वाही बी.एस.पी. पर बाध्यकारी नहीं होगी. बीएसपी ने कहा है कि कतिपय समाचार पत्रों में प्रकाशित सूचना एवं नगर निगम, भिलाई द्वारा 25 फरवरी को जारी तथा 26 फरवरी के समाचार पत्रों में प्रकाशित नोटिस के माध्यम से यह ज्ञात हुआ है कि बी. एस. पी. द्वारा लीज पर प्रदत्त आवासीय, व्यावसायिक एवं अन्य परिसरों में लीजधारकों / आबंटियों द्वारा किए गए अनाधिकृत विस्तार एवं निर्माण के मामलों को नगर पालिक निगम अधिनियम, 1956 के प्रावधानों के अंतर्गत नगर पालिक निगम, भिलाई द्वारा नियमितीकरण किए जाने की प्रक्रिया प्रारंभ की गई है. इस संबंध में निगम द्वारा संबंधित लीजधारकों / आबंटियों से आवेदन आमंत्रित किए गए थे, जिन्होंने दुकान /मकान/ अन्य परिसरों में निर्धारित सीमा से अधिक निर्माण किया है. नियमितीकरण संबंधी प्रक्रिया या नोटिस बीएसपी पर बाध्यकारी नहीं उक्त संदर्भित नोटिस (निगम का नोटिस 25 फरवरी) के संबंध में यह स्पष्ट किया गया है कि बी. एस. पी. प्रबंधन द्वारा नगर पालिक निगम, भिलाई की उक्त कार्यवाही से स्वयं को असंबद्ध किया जाता है. अतः नगर निगम, भिलाई द्वारा जारी किसी भी प्रकार की नियमितीकरण संबंधी प्रक्रिया या नोटिस बी. एस. पी. पर बाध्यकारी नहीं है. नगर पालिक निगम अधिनियम, 1956 के प्रावधानों का हवाला देते हुए यह भी स्पष्ट किया गया है कि अनाधिकृत निर्माण या नियमविरुद्ध विस्तार को नियमित करने का अधिकार निगम प्रशासन के पास नहीं है. आवंटन की शर्तों व सुरक्षा मानकों का पूर्णतः पालन करें बीएसपी प्रबंधन ने सभी आबंटियों से अपील की है कि वे टाउनशिप क्षेत्र में किसी भी प्रकार का अतिरिक्त या अनाधिकृत निर्माण न करें तथा आबंटन की शर्तों एवं सुरक्षा मानकों का पूर्णतः पालन करें. भिलाई टाउनशिप की सुव्यवस्था, सुरक्षा एवं नियोजित विकास सुनिश्चित करना संयंत्र प्रबंधन की प्राथमिकता है. इसी उद्देश्य से नियमों के अनुपालन को अनिवार्य बनाया गया है, ताकि नगर की मूल संरचना, नागरिक सुविधाओं एवं सार्वजनिक सुरक्षा से कोई समझौता न हो.

पोलित ब्यूरो मेंबर गणपति करेंगे आत्मसमर्पण!, माओवादी संगठन को लगेगा बड़ा झटका

जगदलपुर. तेलंगाना में एक बार फिर माओवादी संगठन को बड़ा झटका लग सकता है. माओवादी संगठन के पोलित ब्यूरो मेंबर और पूर्व जनरल सेक्रेट्री मुप्पाला लक्ष्मण राव उर्फ गणपति के आत्मसमर्पण को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं. गणपति, माओवादी संगठन का इस वक्त सबसे वरिष्ठ और कद्दावर चेहरा माना जाता है. करीब चार दशक तक अंडरग्राउंड रहकर संगठन को दिशा देने वाला गणपति, देशभर में माओवादी गतिविधियों का रणनीतिक मास्टरमाइंड रहा है. 1970 के दशक में नक्सल का विचारधारा अपनाने वाला 2004 से 2018 तक महासचिव के पद पर रहा. साल 2018 में गणपति ने बढ़ती उम्र और गंभीर स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए CPI (माओवादी) के महासचिव पद से इस्तीफा दे दिया था, लेकिन इसके बाद भी वह संगठन के शीर्ष नेतृत्व में शामिल बना रहा. सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, गणपति के खिलाफ देश के अलग-अलग राज्यों में 150 से अधिक गंभीर मामले दर्ज हैं जिनमें हत्या, विस्फोट, देशद्रोह और यूएपीए जैसे आरोप शामिल हैं. गणपति पर पूरे देश में करीब 3.5 करोड़ रुपए का इनाम घोषित है. छत्तीसगढ़ में 1 करोड़ रुपए का तो पड़ोसी राज्य तेलंगाना में 25 लाख रुपए का ईनाम रखा गया है. अगर आत्मसमर्पण की ये खबरें आधिकारिक रूप से पुष्टि होती हैं, तो यह माओवादी संगठन के लिए अब तक का सबसे बड़ा नैतिक और रणनीतिक झटका माना जाएगा. सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि गणपति के हटने के बाद पहले ही संगठन कमजोर पड़ा है, और अब यह घटनाक्रम नक्सल नेटवर्क के पूरी तरह टूटने की दिशा में बड़ा संकेत हो सकता है. फिलहाल, सुरक्षा एजेंसियां पूरे मामले पर कड़ी निगरानी रखे हुए हैं, और आधिकारिक बयान का इंतजार किया जा रहा है.

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अधिकारियों-कर्मचारियों संग खेली होली, सीएम हाउस में होली के रंगों की बौछार

रायपुर. मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज राजधानी रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ पूरे उत्साह और उमंग के साथ होली का पर्व मनाया। पारंपरिक फाग गीतों और हर्षोल्लास के वातावरण में रंग और उल्लास से सराबोर इस अवसर पर सभी ने एक-दूसरे को गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएँ दीं। अधिकारियों और कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री साय को गुलाल लगाकर उन्हें बधाई दी, वहीं मुख्यमंत्री साय ने भी आत्मीयता के साथ सभी को गुलाल लगाकर रंगोत्सव की शुभकामनाएँ दीं और स्नेह, विश्वास तथा आपसी भाईचारे का संदेश दिया। अधिकारियों-कर्मचारियों संग होली मुख्यमंत्री साय ने कहा कि होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि आपसी प्रेम, सद्भाव और सामाजिक समरसता का प्रतीक है। यह पर्व समाज में एकता, भाईचारे और सकारात्मकता की भावना को सुदृढ़ करता है तथा जीवन में नई ऊर्जा और उत्साह का संचार करता है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के पर्व हमें आपसी मतभेद भुलाकर मिल-जुलकर आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आज मुख्यमंत्री निवास में आयोजित होली मिलन समारोह में सभी से आत्मीय भेंट कर उन्हें अत्यंत प्रसन्नता हुई। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों, साथियों और प्रदेशवासियों के साथ स्नेह, विश्वास और अपनत्व के रंग साझा करना इस पर्व की सबसे बड़ी विशेषता है। उन्होंने कहा कि प्रदेशवासियों का स्नेह और आशीर्वाद ही जनसेवा के उनके संकल्प को और अधिक सशक्त बनाता है। मुख्यमंत्री साय ने प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हुए सभी को होली की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की कि रंगों का यह पावन पर्व सभी के जीवन में सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और नई ऊर्जा का संचार करे तथा हमारा छत्तीसगढ़ निरंतर विकास और खुशहाली के नए आयाम स्थापित करता रहे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक अमित कुमार, रायपुर के पुलिस कमिश्नर डॉ. संजीव शुक्ला सहित मुख्यमंत्री सचिवालय एवं निवास कार्यालय के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।

बिलासपुर रेल मंडल के खराब सिग्नल सिस्टम के कारण हादसा, पटरी से गिरे मालगाड़ी के 9 वैगन

बिलासपुर. बिलासपुर रेल मंडल में एक बार फिर सिग्नल ओवरशूट के कारण मालगाड़ी के 9 वैगन पटरी से उतर गए। इस मामले में संबंधित विभाग की टीम ने जांच शुरु कर दी है। पूछताछ में चालक का कहना है कि जिस समय यह घटना हुई उस समय ट्रेन की स्पीड केवल 40 किलोमीटर प्रति घंटे थी। इसके अलावा उसे आगे की स्थिति की कोई भी जानकारी नहीं है। बिलासपुर रेल मंडल में ट्रेन के डिरेलमेंट और एक ट्रेन से दूसरी ट्रेन के बीच आपसी टक्कर की घटनाएं कम नहीं हो रही है। आटोमेटिक सिग्नलिंग प्रणाली के बावजूद रेल प्रशासन भी घटना पर किसी तरह का कोई काबू नहीं कर पा रही है। बिलासपुर रेल मंडल के सिस्टम को सीआरएस ने भी खराब बताया है, जिसके बाद भी कोई सुधार कार्य नहीं हो रहा है। जानकारी के अनुसार 26 फरवरी को चालक प्रमोद कुमार और सहायक चालक महाकेश मीणा बिजूरी से खाली एन बाक्स मालगाड़ी लेकर रवाना हुए थे। सोनपुर स्टेशन पार करने के बाद अचानक बीपी प्रेशर ड्राप हुआ और गाड़ी देर रात 2 बजकर 52 मिनट पर अचानक खड़ी हो गई। अचानक मालगाड़ी के खड़े होने पर चालक ने सहायक चालक को चेक करने के लिए भेजा। सहायक चालक ने देखा कि इंजन से 13वां, 14वां, 15वां, 16वां, 17वां, 18वां, 19वां वैगन एवं ब्रेकवैन से दूसरा और तीसरा वैगन पटरी से उतर गया है। जांच में चालक से पूछताछ की गई, जिन्होंने मालगाड़ी और इंजन में किसी तरह की कोई समस्या नहीं होने, अचानक बीपी प्रेशर ड्राप होकर गाड़ी खड़ी होने और पटरी से उतरने के अलावा गाड़ी की स्पीड 40 किलोमीटर प्रति रफ्तार की होने की जानकारी दी। इसके अलावा अन्य प्रश्नों के संबंध में उनकी ओर से कोई उत्तर नहीं दिया गया। फिलहाल इस मामले में विभागीय टीम के अफसर अपनी जांच करने के बाद आगे की रिपोर्ट देंगे, जिसके बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी

बच्चों को मिल रहा पौष्टिक आहार विद्यालय की बगिया से

रायपुर बच्चों को मिल रहा पौष्टिक आहार विद्यालय की बगिया से विद्यालय की बगिया से थाली तक एक अनूठी पहल है, जिसमें छात्र स्कूल परिसर में उगी ताजी, जैविक सब्जियां सीधे अपने मिड-डे मील (मध्याह्न भोजन) में खाते हैं। यह न केवल पौष्टिक आहार सुनिश्चित करता है, बल्कि छात्रों को प्रकृति, श्रम और खेती का व्यावहारिक ज्ञान भी देता है, जिससे वे आत्मनिर्भर बनते हैं। बच्चों को मिल रहा पौष्टिक आहार विद्यालय की बगिया से  छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले के रामानुजनगर के विद्यालयों में किचन गार्डन की एक अनूठी पहल बच्चों के पोषण और व्यावहारिक शिक्षा दोनों को नई दिशा दे रही है। जिला शिक्षा अधिकारी के निर्देशन एवं विकास खंड शिक्षा अधिकारी के मार्गदर्शन में संचालित इस योजना के अंतर्गत माध्यमिक शाला पतरापाली का किचन गार्डन पोषण सुदृढ़ीकरण का एक प्रेरक उदाहरण बनकर उभरा है। विद्यालय परिसर में शिक्षकों के मार्गदर्शन में विकसित इस बगीचे से नियमित रूप से ताज़ी एवं पौष्टिक सब्जियाँ प्राप्त हो रही हैं, जिन्हें मध्यान्ह भोजन में शामिल कर विद्यार्थियों को अतिरिक्त पोषण प्रदान किया जा रहा है। इसी कड़ी में आज विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक किचन गार्डन से लगभग 4 किलोग्राम ताज़ी सेमी (फली) की तुड़ाई की।           बच्चों ने स्वयं पौधों की देखभाल, सिंचाई, निदाई-गुड़ाई और तुड़ाई जैसी गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी निभाई, जिससे उन्होंने श्रम का महत्व तो समझा ही, साथ ही कृषि एवं पर्यावरण के प्रति व्यावहारिक ज्ञान भी अर्जित किया। विद्यालय के शिक्षक योगेश साहू ने बताया कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को पोषणयुक्त भोजन उपलब्ध कराना, जैविक खेती के प्रति जागरूकता फैलाना और उन्हें व्यवहारिक शिक्षा से जोड़ना है। ताज़ी सब्जियों के उपयोग से मध्यान्ह भोजन की गुणवत्ता और पौष्टिकता दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिसका बच्चों के स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव स्पष्ट रूप से दिख रहा है।          विद्यालय परिवार का मानना है कि इस प्रकार की गतिविधियाँ बच्चों में प्रकृति प्रेम, जिम्मेदारी और आत्मनिर्भरता की भावना विकसित करती हैं। इस अवसर पर विद्यालय के शिक्षक कृष्णकुमार यादव, अनिता सिंह, योगेश साहू, रघुनाथ जायसवाल सहित अभिभावकगण एवं स्थानीय समुदाय के सदस्य उपस्थित रहे। अभिभावकों ने विद्यालय प्रबंधन और शिक्षकों की इस पहल की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए कहा कि ऐसी योजनाएँ बच्चों के स्वास्थ्य और भविष्य दोनों के लिए अत्यंत लाभकारी हैं। विद्यालय प्रशासन ने संकल्प व्यक्त किया है कि आगे भी किचन गार्डन में विभिन्न मौसमी सब्जियों की खेती जारी रखी जाएगी, ताकि बच्चों को पोषण और ज्ञान दोनों निरंतर मिलते रहें।

सरगुजा जिले में पीएम आवास प्रोजेक्ट ने पकड़ी रफ्तार, लोगों को मिलेगा जल्द फायदा

रायपुर : सरगुजा जिले में पीएम आवास निर्माण ने पकड़ी रफ्तार एक माह में 1628.60 लाख रुपये अंतरित रायपुर सरगुजा जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत आवास निर्माण कार्यों में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। जिले में स्वीकृत कुल 1,02,210 आवासों में से 80,296 आवास पूर्ण किए जा चुके हैं, जो 50 प्रतिशत से अधिक उपलब्धि को दर्शाता है। इस माह 1,781 आवासों का निर्माण कार्य पूर्ण हुआ है। निर्माण कार्यों को गति देने के लिए हितग्राहियों को किश्तों की राशि आधार आधारित डीबीटी प्रणाली के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में समय-सीमा के भीतर अंतरित की जा रही है। वित्तीय वर्ष 2024-26 में स्वीकृत 36,306 आवासों में से 18,782 आवास पूर्ण हो चुके हैं। योजना के तहत प्रत्येक हितग्राही को 1.20 लाख रुपये की राशि स्वीकृति, प्लिंथ एवं पूर्णता चरण में जियो-टैग आधारित सत्यापन के पश्चात प्रदान की जाती है। अब तक 35,125 हितग्राहियों को प्रथम किश्त (40,000 रुपये), 23,419 को द्वितीय किश्त (55,000 रुपये) तथा 10,367 हितग्राहियों को तृतीय किश्त (25,000 रुपये) जारी की जा चुकी है। विगत एक माह में 1,634 आवास पूर्ण करते हुए 1,349.05 लाख रुपये की राशि जारी की गई। साथ ही कुल मिलाकर 1,628.60 लाख रुपये हितग्राहियों के खातों में अंतरित किए गए। इसके अतिरिक्त मनरेगा के अंतर्गत 90 मानव-दिवस का मजदूरी भुगतान तथा स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय निर्माण उपरांत 12,000 रुपये की अतिरिक्त सहायता भी प्रदान की जा रही है। पीएम जनमन योजना के तहत जिले में 2,565 पहाड़ी कोरवा हितग्राहियों को स्वीकृति प्रदान की गई है, जिनमें से 1,385 आवास पूर्ण हो चुके हैं। प्रति हितग्राही 2.00 लाख रुपये की सहायता राशि चार चरणों में जारी की जाती है। विगत एक माह में 73 जनमन आवास पूर्ण हुए तथा 217 लाख रुपये की राशि जारी की गई। मुख्यमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत जिले में 1,024 आवास स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से 214 आवास पूर्ण हो चुके हैं। पिछले एक माह में 74 आवास पूर्ण करते हुए 62.55 लाख रुपये की राशि हितग्राहियों के खातों में अंतरित की गई है। आवास निर्माण में प्रगति सुनिश्चित करने के लिए 45 आवास मित्रों एवं 218 रोजगार सहायकों को कुल 61.97 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई है। वर्तमान में जिले में किसी भी हितग्राही की किश्त भुगतान हेतु लंबित नहीं है, जो प्रशासन की पारदर्शी एवं सक्रिय कार्यप्रणाली को दर्शाता है। आवास निर्माण से संबंधित किसी भी समस्या या सुझाव के लिए हितग्राही राज्य शासन द्वारा जारी निःशुल्क हेल्पलाइन नंबर 1800-233-1290 पर संपर्क कर सकते हैं।

संघर्ष भरे जीवन को मिला सम्मान और सुरक्षा का संबल’

रायपुर कभी भिक्षाटन और दिहाड़ी मजदूरी से जीवन यापन करने वाली श्रीमती रनिया बाई के परिवार के लिए हर दिन एक नई चुनौती लेकर आता था। कोरिया जिला के बैकुण्ठपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत गढ़तर में रहने वाला यह परिवार कच्ची झोपड़ी में मौसम की मार झेलते हुए जीवन गुजार रहा था। पति अवतार साय के साथ रनिया बाई को जब महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम के तहत अकुशल श्रम में रोजगार मिलने लगा, तब कुछ राहत मिली, लेकिन स्थायी आवास का सपना अब भी दूर था। परिस्थितियां तब बदलीं जब प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की दूरदर्शी पहल पर संचालित ‘प्रधानमंत्री जनमन योजना‘ के अंतर्गत उन्हें पक्के मकान के लिए सहायता स्वीकृत हुई। ग्राम पंचायत के सहयोग और अपनी मेहनत से उन्होंने नया पक्का घर बनाया। अब उनके पास सुरक्षित आवास और शौचालय की सुविधा है। रनिया बाई बताती हैं कि बरसात की रातें अब चिंता में नहीं, सुकून में गुजरती हैं। बच्चों के भविष्य को लेकर भी मन में विश्वास जागा है। सिर्फ आवास ही नहीं, बल्कि अंत्योदय राशन कार्ड से नियमित खाद्यान्न और आयुष्मान भारत योजना के तहत स्वास्थ्य सुरक्षा ने उनके जीवन को स्थिरता दी है। साथ ही राष्ट्रीय पेंशन योजना का लाभ भी मिल रहा है।   शासन की योजनाओं का समुचित लाभ मिलने से एक निराश्रित परिवार की जिंदगी में आशा, सुरक्षा और आत्मविश्वास का नया अध्याय जुड़ गया है।

मनरेगा का दम: रोजगार, विकास और आत्मनिर्भरता की नई कहानी

रायपुर राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना: मजबूत हुई आजीविका की राह जिले के विकासखण्ड लोरमी अंतर्गत ग्राम पंचायत औराबांधा में एक छोटी-सी पहल ने ग्रामीण आजीविका को नई दिशा दी है। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत हितग्राही किसान किशन सिंह के खेत में निर्मित “आजीविका डबरी” आज जल संरक्षण, सिंचाई और मछली पालन का सशक्त माध्यम बन चुकी है। हितग्राही किशन सिंह ने बताया कि पहले सिंचाई के लिए पानी की कमी बनी रहती थी, लेकिन अब डबरी बनने से खेत में वर्षभर पानी उपलब्ध रहेगा और मछली पालन से आय भी बढ़ेगी।  जिले में कलेक्टर  कुन्दन कुमार एवं जिला पंचायत सीईओ  प्रभाकर पाण्डेय के मार्गदर्शन में आजीविका डबरी न केवल जल संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि ग्रामीण आजीविका संवर्धन का भी प्रभावी माध्यम बन रहा है। योजना के तहत स्वीकृत 1.94 लाख रुपये की लागत से इस डबरी का निर्माण कराया गया। कार्य के दौरान कुल 792 मानव दिवस सृजित किए गए, जिससे स्थानीय मजदूरों को गांव में ही रोजगार मिला और पलायन में कमी आई। निर्मित डबरी अब खेतों के लिए जीवनदायिनी साबित हो रही है। वर्षा जल संचयन और भू-जल रिचार्ज के माध्यम से सिंचाई सुविधा सुनिश्चित हुई है, जिससे खरीफ और रबी दोनों मौसमों में फसल उत्पादन की संभावना बढ़ी है। पहले जहां पानी की कमी के कारण फसल प्रभावित होती थी, वहीं अब किसान आत्मविश्वास के साथ बहुफसली खेती की ओर अग्रसर है। साथ ही, डबरी में मछली पालन की योजना से अतिरिक्त आय का स्थायी स्रोत विकसित हो रहा है, जो परिवार की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ बना रहा है। जिले में आजीविका संवर्धन की दृष्टि से आजीविका डबरी निर्माण की अभिनव पहल व्यापक स्तर पर क्रियान्वित की जा रही है। वर्ष 2025-26 हेतु कुल 285 डबरी निर्माण कार्य स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से 218 कार्य प्रारंभ हो चुके हैं और 20 पूर्ण किए जा चुके हैं। शेष कार्यों को मार्च 2026 तक पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित है। यह पहल जल संरक्षण के साथ-साथ कृषि, पशुपालन और मत्स्य पालन को एकीकृत कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को स्थायित्व प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

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