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ब्रह्माकुमारीज की प्रधान राजयोगिनी दादी रतनमोहिनी का 101 साल की आयु में निधन

सिरोही/आबूरोड  ब्रह्माकुमारीज की प्रमुख 101 वर्षीय राजयोगिनी दादी रतनमोहिनी नहीं रहीं। उन्होंने अहमदाबाद के जाइडिस अस्पताल में रात 1ः20 बजे अंतिम सांस ली। उनके पार्थिव शरीर को शांतिवन लाया जा रहा है, जहां मुख्यालय शांतिवन के कॉन्फ्रेंस हाल में अंतिम दर्शनार्थ रखा जाएगा। 10 अप्रैल को सुबह 10 बजे अंतिम संस्कार किया जाएगा। वो मात्र 13 वर्ष की आयु में ही ब्रह्माकुमारीज से जुड़ीं और पूरा जीवन समाज कल्याण में समर्पित कर दिया। 101 वर्ष की आयु में भी दादी की दिनचर्या ब्रह्ममुहूर्त में 3ः30 बजे से शुरू हो जाती थी। सबसे पहले वह परमपिता शिव परमात्मा का ध्यान करतीं। राजयोग मेडिटेशन उनकी दिनचर्या में शामिल रहा। रतनमोहिनी का जन्म 25 मार्च 1925 को सिंध हैदराबाद के एक साधारण परिवार में हुआ। माता-पिता ने नाम रखा लक्ष्मी। किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि कल यही बेटी अध्यात्म और नारी शक्ति का जगमग सितारा बनकर सारे जग को रोशन करेगी। बचपन से अध्यात्म के प्रति लगन और परमात्मा को पाने की चाह में मात्र 13 वर्ष की उम्र में लक्ष्मी ने विश्व शांति और नारी सशक्तिकरण की मुहिम में खुद को झोंक दिया। दादी वर्ष 1937 में ब्रह्माकुमारीज की स्थापना से लेकर आज तक 87 वर्ष की यात्रा की साक्षी रही हैं। पिछले 40 से अधिक वर्ष से आप संगठन के ही युवा प्रभाग की अध्यक्षा की भी जिम्मेदारी संभाल रही हैं। उनकेन नेतृत्व में युवा प्रभाग द्वारा देशभर में अनेक राष्ट्रीय युवा पदयात्रा, साइकिल यात्रा और अन्य अभियान चलाए गए। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने व्यक्त किया शोक मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने दादी रतनमोहिनी के देहावसान पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि दादीजी ने अपना सम्पूर्ण जीवन त्याग, तपस्या और मानवता की सेवा के लिए समर्पित किया। उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति और अनुयायियों को इस दुख को सहने की शक्ति देने की प्रार्थना भी की। 13 वर्ष की आयु में ब्रह्माकुमारी से जुड़ीं दादी रतनमोहिनी का जन्म 25 मार्च 1925 को सिंध (हैदराबाद) के एक सामान्य परिवार में हुआ था। माता-पिता ने उनका नाम लक्ष्मी रखा। बचपन से ही अध्यात्म के प्रति गहरी रुचि थी। मात्र 13 वर्ष की आयु में वे ब्रह्माकुमारी संस्था से जुड़ गईं और पूरी तरह समाज कल्याण और विश्व शांति के कार्यों में स्वयं को समर्पित कर दिया। संस्था के 87 वर्षों की यात्रा की साक्षी दादीजी 1937 में ब्रह्माकुमारीज की स्थापना से लेकर अब तक संस्था की 87 वर्षों की यात्रा की साक्षी रही हैं। वे ब्रह्मा बाबा के 1969 में अव्यक्त होने तक 32 वर्षों तक उनके साथ साये की तरह रहीं। उनका समर्पण, सेवा और नेतृत्व संस्था के लिए प्रेरणास्रोत रहा। युवा प्रभाग की रहीं अध्यक्षा पिछले चार दशकों से दादी रतनमोहिनी ब्रह्माकुमारीज के युवा प्रभाग की अध्यक्षा रहीं। उनके मार्गदर्शन में देशभर में अनेक युवा जागरूकता अभियान, साइकिल यात्राएं और राष्ट्रीय कार्यक्रम आयोजित किए गए। उनका उद्देश्य युवाओं को आध्यात्मिकता की ओर प्रेरित करना रहा। अनुशासित और साधनापूर्ण जीवन 101 वर्ष की आयु में भी दादी की दिनचर्या अत्यंत अनुशासित रही। वे प्रतिदिन ब्रह्ममुहूर्त में 3:30 बजे उठतीं और राजयोग साधना में लीन हो जाती थीं। उनका जीवन ईश्वर-भक्ति, सेवा और सादगी का प्रतीक था। आध्यात्मिक जगत को अपूरणीय क्षति राजयोगिनी दादी रतनमोहिनी के निधन से आध्यात्मिक जगत में शोक की लहर है। उनका देहावसान ब्रह्माकुमारी परिवार और समाज के लिए एक अपूरणीय क्षति है, जिसकी भरपाई संभव नहीं है। दादी रतनमोहिनी में बचपन से ही भक्तिभाव के संस्कार रहे। छोटी सी उम्र होने के बाद भी आप अन्य बच्चों की तरह खेलने-कूदने के स्थान पर ईश्वर की आराधना में अपना ज्यादा वक्त गुजारती थीं। स्वभाव धीर-गंभीर था। पढ़ाई में भी होशियार होने के साथ प्रतिभा संपन्न रहीं हैं। दादीजी ने वर्ष 1937 से लेकर ब्रह्मा बाबा के अ‌व्यक्त होने (वर्ष 1969) तक साये की तरह साथ रहीं। इन 32 साल में आप बाबा के हर पल साथ रहीं। बाबा का कहना और दादी का करना यह विशेषता शुरू से ही थी। बहनों की ट्रेनिंग और नियुक्ति की कमान वर्ष 1996 में ब्रह्माकुमारीज की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में तय हुआ कि अब विधिवत बेटियों को ब्रह्माकुमारी बनने की ट्रेनिंग दी जाएगी। इसके लिए एक ट्रेनिंग सेंटर बनाया गया और तत्कालीन मुख्य प्रशासिका राजयोगिनी दादी प्रकाशमणि ने आपको ट्रेनिंग प्रोग्राम की हैड नियुक्त किया। तब से लेकर आज तक बहनों की नियुक्ति और ट्रेनिंग की जिम्मेदारी दादीजी के हाथों में रही। दादी के नेतृत्व में अब तक 6000 सेवाकेंद्रों की नींव रखी गई है। युवा प्रभाग की संभाली कमान युवा प्रभाग द्वारा दादीजी के नेतृत्व में 2006 में निकाली गई स्वर्णिम भारत युवा पदयात्रा ने ब्रह्माकुमारीज के इतिहास में एक नया अध्याय लिख दिया। 20 अगस्त 2006 को मुंबई से यात्रा का शुभारंभ किया गया और 29 अगस्त 2006 का तीनसुकिया असम में समापन किया गया। स्वर्णिम भारत युवा पदयात्रा द्वारा पूरे देश में 30 हजार किलोमीटर का सफर तय किया गया। इसमें पांच लाख ब्रह्माकुमार भाई-बहनों ने भाग लिया। सवा करोड़ लोगों को शांति, प्रेम, एकता, सौहार्द्र, विश्व बंधुत्व, अध्यात्म, व्यसनमुक्ति और राजयोग ध्यान का संदेश दिया गया। भारत एकता युवा पदयात्रा दादी के ही नेतृत्व में 1985 में भारत एकता युवा पदयात्रा निकाली गई। इससे 12550 किलोमीटर की दूरी तय की गई। यात्रा का शुभारंभ तत्कालीन राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह ने किया था। कन्याकुमारी से दिल्ली (3300 किलोमीटर) की सबसे लंबी यात्रा रही। भारी बारिश और तूफार के दौरान भी राजयोगी भाई-बहनों के कदम नहीं रुके और रेगिस्तान, जल, जंगल, पर्वत का लांघते हुए मिशन पूरा किया। 24 अक्टूबर 1985 को दिल्ली में भव्य समापन समारोह आयोजित किया गया। दादी के निर्देशन में करीब 70 हजार किलोमीटर से अधिक की पैदल यात्राएं निकाली गईं। 1985 में दादी ने की 13 पैदल यात्राएं वर्ष 2006 में निकाली गई युवा पदयात्रा ने लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड में जहां नाम दर्ज कराया, वहीं सभी यात्रियों ने 30 हजार किलोमीटर की पैदल यात्रा तय की। दादी ने 13 मेगा पैदल यात्राएं की हैं। अगस्त 1989 में देश के 67 स्थानों पर एकसाथ अखिल भारतीय नैतिक जागृति अभियान चलाया चलाया गया। अभियान में सैकड़ों स्कूल-कॉलेजों, युवा क्लब और सामाजिक सेवा संस्थानों में प्रदर्शनियां, व्याख्यान, सेमिनार और रचनात्मक कार्यशालाएं आयोजित की गईं। इनमें कई राज्यों के राज्यपाल, मुख्यमंत्रियों ने भाग … Read more

मुद्रा योजना के10 साल, लाभार्थियों में 68% महिलाएं, मोदी बोले- योजना ने लोगों के सपनों को हकीकत बनाया

नई दिल्ली मुद्रा योजना के 10 साल पूरा होने के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को मुद्रा योजना के लाभार्थियों से बातचीत की. इस दौरान कुछ ऐसे मौके भी आए, जब पीएम मोदी ने मजाकिया अंदाज में लोगों से बात की. प्रधानमंत्री आवास पर आयोजित कार्यक्रम में पीएम मोदी ने कहा कि यह योजना मोदी के लिए नहीं है. यह जरूरतमंदों के लिए है. भारत के लोगों के लिए कुछ भी असंभव नहीं है. लाभार्थियों की यात्रा प्रेरणा देने वाली है. मुद्रा योजना देश के नौजवानों के लिए है. नौजवानों को उनके पैरों पर खड़ा करने के लिए है. इस दौरान पीएम मोदी ने एक लाभार्थी से पूछा कि फिलहाल आपकी आय कितनी है? इस पर उस शख्स की झिझक देखते हुए पीएम मोदी ने कहा कि वित्त मंत्री मेरे बगल में बैठे हैं, उन्हें बोल दूंगा इनकम टैक्स वाले नहीं आएंगे. इस पर सभी ठहाका लगाकर हंसने लगे.. ‘मुद्रा योजना ने कई सपनों को हकीकत में बदला’ पीएम मोदी ने लिखा, ‘आज, जब हम मुद्रा योजना के 10 साल पूरे कर रहे हैं, मैं उन सभी को बधाई देना चाहता हूं, जिनके जीवन में इस योजना की बदौलत बदलाव आया है। इस दशक में मुद्रा योजना ने कई सपनों को हकीकत में बदला है। ऐसे लोगों को सशक्त बनाया है, जिन्हें पहले वित्तीय सहायता से वंचित रखा गया था। यह दर्शाता है कि भारत के लोगों के लिए कुछ भी असंभव नहीं है!’ पीएम ने आगे कहा, भारत के लोगों के लिए कुछ भी असंभव नहीं है, 33 लाख करोड़ देश के लोगों को बिना गारंटी दिए गए, इससे जीवन बदला है, सबसे ज्यादा महिलाएं आगे आई हैं। क लाभार्थी ने बताया कि मुद्रा लोन से अपना बिजनेस सेट-अप करके घर भी खरीदा है। उन्होंने बताया कि जहां पहले उनका सालाना टर्नओवर 12 लाख था, वो अब 50 लाख हो चुका है। उन्होंने पीएम मोदी को इसके लिए थैंक्यू कहा। एक ने कहा मुद्रा योजना से पहले वो 20 हजार रुपए महीना कमाता था, आज उसकी इनकम दोगुनी हो गई है। पहली बार फ्लाइट में बैठी महिला एक लाभार्थी ने बताया कि वह बहुत गरीबी में थीं। उन्होंने बताया कि वह पहली बार दिल्ली आईं और पहली बार ही फ्लाइट में बैठीं। उन्होंने बताया कि उन्हें लोन कैसे मिला। उन्होंने बताया कि वे एक महीने का 60 हजार रुपये इनकम कर रही हैं। पीएम मोदी ने लाभार्थी की सराहना की और उन्हें बधाई दी। नहीं आएंगे इनकम टैक्स वाले इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक लाभार्थी से पूछा कि आपकी आय कितनी है? पीएम मोदी के इस सवाल से लाभार्थी झिझक गया। इस पर पीएम मोदी ने कहा कि वित्त मंत्री मेरे बगल में बैठे हैं, उन्हें बोल दूंगा इनकम टैक्स वाले नहीं आएंगे। पीएम मोदी का इस तरह तंज कसने पर सभी लाभार्थी हंस पड़े।  ये योजना मोदी की तारीफ के लिए नहीं, लाभार्थियों से बोले पीएम लाभार्थियों से बात करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि मुद्रा योजना मोदी की तारीफी के लिए नहीं है। यह योजना मेरे देश के युवाओं को अपने पैरों पर खड़े होने का साहस देने के लिए है। पीएम मोदी से बात करते हुए मध्य प्रदेश के भोपाल के लाभार्थी लवकुश मेहरा ने कहा, ‘पहले मैं किसी के यहां काम करता था, नौकर था, लेकिन आपने मुद्रा लोन के ज़रिए हमारी गारंटी ली और आज हम मालिक बन गए हैं।’ 50 लाख से ज्यादा का हुआ टर्नओवर इसके साथ ही लवकुश ने कहा, ‘मैंने 2021 में अपना व्यवसाय शुरू किया और मैंने बैंक से संपर्क किया, उन्होंने मुझे 5 लाख रुपये की लोन लिमिट दी। मुझे डर था कि मैं पहली बार इतना बड़ा लोन ले रहा हूं। मैं इसे चुका पाऊंगा या नहीं। आज मेरा मुद्रा लोन 5 लाख रुपये से बढ़कर 9.5 लाख रुपये हो गया है। मेरा पहले साल का टर्नओवर 12 लाख रुपये था, जो अब 50 लाख रुपये से ज्यादा हो गया है।’ क्या है मुद्रा योजना? मालूम हो कि प्रधानमंत्री मुद्रा योजना, पीएम मोदी की प्रमुख योजना है। इसका उद्देश्य वित्तपोषित सूक्ष्म उद्यमों और छोटे व्यवसायों को वित्तपोषित करना है। पिछले 10 सालों में 50 करोड़ ऋण खातों को मंजूरी दी है। इस योजना में 68 प्रतिशत महिला लाभार्थी प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के 10 साल पूरे होने पर वित्तीय सेवा विभाग के सचिव एमनागराजू ने कहा, ‘प्रधानमंत्री ने उन लोगों के लिए यह व्यवसाय योजना शुरू की है जो बिना किसी गारंटी के ऋण चाहते हैं। हमने पिछले 10 सालों में 50 करोड़ ऋण खातों को मंजूरी दी है और कुल 33 लाख करोड़ रुपये का ऋण दिया है। इनमें से 68 प्रतिशत महिला लाभार्थी हैं, और 50 प्रतिशत अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़े समुदायों से हैं। लाभार्थी ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से ऋण के लिए आवेदन कर सकते हैं।’ ‘देश के नौजवानों के लिए है योजना’ पीएम मोदी ने कहा कि मुद्रा योजना मोदी के लिए नहीं है, बल्कि देश के नौजवानों के लिए है।  पीएम मोदी ने कहा- हमारे देश में बहुत कम लोग हैं, जिन्हें पता है साइलेंटली कैसे रिवॉल्योशन हो रहा है। ‘सालाना टर्नओवर 12 से 50 लाख पहुंचा’ पीएम मोदी को लोगों ने अपने अनुभव बताया, एक ने कहा मुद्रा लोन के बाद हमने पेट को लेकर सुविधा शुरू की। अब मुझे इसे बहुत फायदा हो रहा है। पीएम मोदी ने एक लाभार्थी से पूछा कि फिलहाल आपकी आय कितनी है? इस पर उस शख्स की झिझक देखते हुए पीएम मोदी ने कहा कि वित्त मंत्री मेरे बगल में बैठे हैं, उन्हें बोल दूंगा इनकम टैक्स वाले नहीं आएंगे। बता दें कि मुद्रा योजना की शुरुआत आठ अप्रैल 2015 को हुई थी. इससे हर साल मुद्रा योजना 5.14 करोड़ रोजगार का सृजन हुआ है. इस योजना के तहत सरकार ने दस साल में 53 लाख करोड़ का लोन दिया है. पीएम मोदी ने सोशल मीडिया पोस्ट कर बताया कि मुद्रा योजना के 10 साल पूरा होने के मौके पर मैंने देशभर से मुद्रा लाभार्थियों को अपने निवास पर आमंत्रित किया था. लाभार्थियों ने हमें बताया कि किस तरह यह योजना उनके जीवन में बदलाव लेकर आई है.

भारत सरकार बदल सकती है पुराने मोबाइल सिम कार्ड

नई दिल्ली मोबाइल फोन में सबसे जरूरी चीज होती है सिम कार्ड, जिसे आप अपना आईडी प्रूफ देकर खरीदते हैं। अब भारत सरकार पुराने मोबाइल सिम कार्ड बदलने के बारे में सोच रही है। NCSC यानी नेशनल साइबर सिक्‍योरिटी कोऑर्डिनेटर की जांच के बाद सिम कार्ड बदलने के बारे में सोचा जा रहा है। सरकार की ओर से जियो, एयरटेल और वीआई यानी वोडा-आइडिया के अधिकारियों के साथ बैठक भी की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, NCSC की जांच में कुछ सिम कार्डों में चीन में बने चिपसेट की मौजूदगी मिली है। इससे सुरक्षा संबंधी चिंताएं पैदा हुई हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि जो चिपसेट, सिम कार्डों में मिले हैं, वो सब्‍सक्राइबर की पहचान को स्‍टोर रखते हैं। पहले बदले जा सकते हैं पुराने सिम इस पूरे मामले की तकनीकी और कानूनी चुनौतियां हो सकती हैं। रिपोर्ट के अनुसार, NCSC और गृह मंत्रालय मिलकर इस मामले की जांच कर रहे हैं। सबसे पहले पुराने सिम कार्डों को बदलने का विचार है। रिपोर्ट में बताया गया है कि NCSC ने वीआई, भारती एयरटेल और रिलायंस जियो के अधिकारियों और दूरसंचार विभाग के साथ बैठक की है। बैठक में टेलिकॉम संसाधनों की खरीद में सुरक्षा खामियों को दूर करने पर बात हुई। इस पर भी चर्चा की गई कि सिम कार्ड बदलने के लिए एक ढांचा कैसे तैयार किया जाए। चीनी कंपनियों के उपकरणों पर लगी है रोक भारत सरकार ने कुछ साल पहले ही प्रमुख चीनी कंपनियों के उपकरणों पर रोक लगा दी थी। चीन की प्रमुख कंपनियां हुवावे और जेडटीई, भारतीय कंपनियों के साथ अब काम नहीं कर रहीं। अमेरिका भी हुवावे पर लगाम कस चुका है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार की मंजूरी के बिना चीन से सिम चिपसेट खरीदना, टेलिकॉम ऑपरेटरों की सोर्सिंग पर सवाल उठाता है। हालांकि ऐसा लगता है कि टेलिकॉम ऑपरेटरों को भी यह जानकारी नहीं थी कि जो सिम कार्ड खरीदे जा रहे हैं, उनमें चीनी चिप की मौजूदगी है। सरकार नहीं दे रही ज्‍यादा जानकारी मिंट की रिपोर्ट कहती है कि मामला संवेदनशील है, इसलिए सरकार इस बारे में ज्‍यादा जानकारी शेयर करने से बच रही है। यह रिपोर्ट दो अधिकारियों के हवाले से तैयार की गई है, जिन्‍होंने नाम ना छापने की शर्त पर यह जानकारी दी है। किन सिम कार्ड विक्रेताओं ने चीनी चिप का इस्‍तेमाल किया, यह जानकारी भी नहीं दी गई है। 1 अरब से ज्‍यादा मोबाइल सब्‍सक्राइबर्स भारत में मोबाइल सब्‍सक्राइबर्स की संख्‍या 1.15 अरब है। रिपोर्ट के अनुसार, इनमें से कुछ सिम कार्डों में चीन में बने चिप लगे हैं, पर यह संख्‍या कितनी है, यह नहीं बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, आमतौर पर टेलिकॉम ऑपरेटर सिम कार्ड की खरीदारी उन विक्रेताओं से करते हैं, जिन्‍हें भरोसेमंद माना जाता है। इनमें ताइवान और वियतनाम के विक्रेता शामिल हैं। वहां से चिप लेकर देश में ही सिम कार्ड की असेंबलिंग और पैकिंग की जाती है। ऐसा लगता है कि विक्रेताओं ने चीनी चिप का इस्‍तेमाल करके टेलिकॉम ऑपरेटरों को सिम की डिलिवरी दी। सिम बदलने से क्‍या होगा सिम कार्डों में चीनी चिप की मौजूदगी, सुरक्षा के लिए चिंता का विषय है। सिम कार्ड बदलकर सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि भविष्‍य में चीनी चिप वाले सिम भारतीय मार्केट में ना आएं। हालांकि इस काम में कुछ तकनीकी और कानूनी समस्‍याएं आएंगी। सिम कार्ड बदलने पर जो खर्च आएगा, उसे मुख्‍य तौर पर टेलिकॉम ऑपरेटरों को ही उठाना होगा।

मोटापे से त्रस्त चीनी, एक्शन में राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग, उच्च रक्तचाप, मधुमेह और हृदय संबंधी समस्याओं बीमारियों के मरीजों में जबरदस्त वृद्धि

बीजिंग  चीन में तेजी से एक बीमारी पांव पसार रही है। अगर हालात पर काबू नहीं पाया गया तो 2030 तक पूरे चीन की 65 प्रतिशत आबादी इस बीमारी से पीड़ित होगी। यह खुलासा चीन के राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग ने किया है। इस बीमारी का नाम मोटापा है। रिपोर्ट में बताया गया है कि इस बीमारी से पहले देश में उच्च रक्तचाप, मधुमेह और हृदय संबंधी समस्याओं जैसी पुरानी बीमारियों के मरीजों में जबरदस्त वृद्धि हुई है। ऐसे में आबादी में मोटापे की समस्या भी उतनी ही तेजी से बढ़ रही है। एक्शन में राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग पिछले साल, राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग (NHC) और अन्य सरकारी विभागों ने इस समस्या से निपटने के लिए तीन साल की योजना शुरू की, जिसमें आहार और व्यायाम संबंधी सिफारिशें शामिल हैं। पिछले महीने इसने देश भर के अस्पतालों में “वेट मैनेजमेंट क्लीनिक” शुरू करने की योजना की घोषणा करके अपने प्रयासों को आगे बढ़ाया। चीन में इस प्रयास के अच्छे परिणाम देखने को मिले हैं। अमेरिका-भारत से ज्यादा मोटे व्यक्ति चीन में पिछले महीने द लैंसेट में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, 2021 तक चीन में अधिक वजन वाले या मोटे वयस्कों की संख्या 400 मिलियन के आंकड़े को पार कर गई थी – जबकि भारत में यह 180 मिलियन या संयुक्त राज्य अमेरिका में 172 मिलियन थी। अनुमान है कि 2050 तक यह संख्या बढ़कर 630 मिलियन हो जाएगी। अध्ययन में विश्व स्वास्थ्य संगठन की परिभाषा का इस्तेमाल किया गया है, जिसके अनुसार बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) – किसी व्यक्ति के वजन को उसकी ऊंचाई के वर्ग से भाग देने पर मिलने वाला मान – 30 से अधिक होने पर उसे मोटापे से ग्रस्त माना जाता है। 2030 तक चीन की 65 फीसदी आबादी पर खतरा हालांकि, चीनी सरकार के पास मोटापे की अपनी परिभाषा है, जो 24 से अधिक बीएमआई को अधिक वजन और 28 से अधिक रीडिंग को मोटापे के रूप में वर्गीकृत करती है। एनएचसी ने चेतावनी दी कि एक आधिकारिक अध्ययन ने भविष्यवाणी की थी कि 2030 तक 65 प्रतिशत चीनी वयस्क अधिक वजन या मोटापे से ग्रस्त होंगे। अध्ययन ने यह भी गणना की कि तब तक अधिक वजन और मोटे रोगियों के इलाज पर 418 बिलियन युआन (यूएस $ 57 बिलियन) खर्च होंगे, जो वार्षिक राष्ट्रीय स्वास्थ्य बजट के 22 प्रतिशत के बराबर है, जबकि 2022 में यह 8 प्रतिशत होगा। लोगों के वजन को कम करने का प्लान बना रहा चीन पिछले महीने राष्ट्रीय विधायिका और शीर्ष राजनीतिक सलाहकार निकाय की बैठक के दौरान, संक्रामक रोग विशेषज्ञ झांग वेनहोंग ने कहा कि स्वास्थ्य प्रणाली “बड़े पेट वालों को लक्षित करेगी।” उन्होंने कहा, “हम लोगों को वजन कम करने में मदद करना चाहते हैं।” लेकिन कुछ लोगों ने कहा कि जीवनशैली में बदलाव करना एक चुनौती है। शंघाई में बैंक कर्मचारी 33 वर्षीय वांग शियाओनी ने कहा कि जब वह तनावग्रस्त और दुखी महसूस करती थी तो वह अक्सर ज़्यादा खाती-पीती थी और अक्सर उसके पास व्यायाम करने का समय नहीं होता था।

बन गया वक्फ बिल कानून, कैसे और कब से होगा लागू, विरोध में AIMPLB ने लिखा लेटर

नई दिल्ली राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने वक्फ (संशोधन) बिल को मंजूरी दे दी। सरकार ने नए कानून को लेकर गजट नोटिफिकेशन जारी किया। अब नए कानून को लागू करने की तारीख को लेकर केंद्र सरकार अलग से एक नोटिफिकेशन जारी करेगी। यह बिल (अब कानून) 2 अप्रैल को लोकसभा और 3 अप्रैल को राज्यसभा में 12-12 घंटे की चर्चा के बाद पास हुआ था। नए कानून को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अब तक छह याचिकाएं दाखिल हो चुकी हैं। नई याचिका केरल के सुन्नी मुस्लिम संगठन केरल जमीयतुल उलेमा ने दायर की है। वहीं, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने 11 अप्रैल से पूरे देश में विरोध प्रदर्शन करने की घोषणा की है। इससे पहले कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद, AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी, AAP विधायक अमानतुल्लाह खान, सिविल राइट्स संगठन एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स और जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी अलग-अलग याचिका लगा चुके हैं। इस पर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि इस कानून का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों में हो रहे पक्षपात, दुरुपयोग और अतिक्रमण को रोकना है। इस बिल (अब कानून) को राज्यसभा में 128 सदस्यों ने समर्थन दिया था, जबकि 95 ने इसका विरोध किया। वहीं लोकसभा में यह बिल 2 अप्रैल की आधी रात पारित हुआ था। इस दौरान 288 सांसदों ने समर्थन में और 232 ने विरोध में वोट डाला था। वक्फ बिल पर मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का विरोध ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने शनिवार शाम को वक्फ बिल के विरोध में दो पेज का लेटर जारी किया। AIMPLB ने कहा कि हम सभी धार्मिक, समुदाय-आधारित और सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर राष्ट्रव्यापी आंदोलन करेंगे। यह अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक संशोधन पूरी तरह से निरस्त नहीं हो जाते। वक्फ बिल पर विपक्ष के नेताओं ने क्या कहा?     राहुल गांधी: वक्फ बिल मुसलमानों पर हमला करता है और भविष्य में अन्य समुदायों को निशाना बनाने की मिसाल कायम करता है। बिल पास होने के बाद RSS ने अब कैथोलिक चर्च की जमीन पर फोकस कर लिया है। RSS को अपना ध्यान ईसाइयों की ओर मोड़ने में ज्यादा समय नहीं लगा। संविधान ही एकमात्र ढाल है जो हमारे लोगों को ऐसे हमलों से बचाता है और इसकी रक्षा करना हमारा सामूहिक कर्तव्य है।     कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे: सरकार का इरादा ठीक नहीं है। वक्फ लैंड किसको देंगे यह सामने नहीं आया। व्यापारियों को देंगे…मुझे पता नहीं। अंबानी-अडाणी जैसे लोगों को खिलाएंगे। मैं गृहमंत्री से अपील करूंगा कि आप इसे वापस ले लें। इसे प्रेस्टीज ईश्यू न बनाएं। मुसलमानों के लिए ये अच्छा नहीं है। संविधान के खिलाफ है।     PDP प्रमुख महबूबा मुफ्ती: ऐसा नहीं होना चाहिए। यह अल्पसंख्यकों, मुसलमानों की संस्था है और इसे इस तरह से बुलडोजर करना और राज्यसभा में पारित करना, मैं समझती हूं कि यह डाका डालने के बराबर है, जो बहुत गलत है जो नहीं होना चाहिए।     NC सांसद आगा सैयद रूहुल्लाह मेहदी: भाजपा को मुसलमानों के लिए बोलने का कोई नैतिक या राजनीतिक अधिकार नहीं है और वक्फ विधेयक पारित करके RSS-भाजपा शासन ने अपनी मुस्लिम विरोधी, अल्पसंख्यक विरोधी मंशा की पुष्टि की है। आज भारत क्रूर बहुसंख्यकवाद के एक अंधेरे युग में चला गया है, जहां अल्पसंख्यक हितों को दरवाजा दिखा दिया गया। वक्फ बिल कानून, कैसे और कब से होगा लागू, विरोध में AIMPLB ने लिखा लेटर   राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद वक्फ संशोधन बिल अब कानून बन गया है। सरकार ने नए वक्फ कानून को लेकर गजट नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। अब इसके आगे की राह कैसी होगी ये कई मायनों में अहम है। अब वक्फ कानून कबतक लागू होगा ये सरकार पर निर्भर करता है क्योंकि कानून को लागू करने की तारीख को लेकर केंद्र सरकार अलग से एक नोटिफिकेशन जारी करेगी और यह कानून पूरे देश में लागू हो जाएगा। मुस्लिम पर्सनल लॉ ने लिखा लेटर  ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने वक्फ बिल के विरोध में दो पेज का लेटर जारी किया और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने इसे लेकर कहा कि हम सभी धार्मिक, समुदाय-आधारित और सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर राष्ट्रव्यापी आंदोलन करेंगे। यह अभियान तब तक जारी रहेगा जब तक कि संशोधन पूरी तरह से निरस्त नहीं हो जाते। वक्फ संशोधन बिल इस्लामी मूल्यों, धर्म और शरीयत, धार्मिक और सांस्कृतिक स्वतंत्रता, सांप्रदायिक सद्भाव और भारतीय संविधान के आधारभूत ढांचे पर गंभीर हमला है। कुछ राजनीतिक दलों का भाजपा के सांप्रदायिक एजेंडे को दिए गए समर्थन ने उनके तथाकथित धर्मनिरपेक्ष मुखौटे को पूरी तरह से उजागर कर दिया है। वक्फ बिल का विरोध, बात सुप्रीम कोर्ट पहुंची आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्लाह खान ने वक्फ बिल के विरोध में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दर्ज कराई। इससे पहले शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में दो याचिकाएं लगाई गईं थीं, पहली बिहार के किशनगंज से कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद की और दूसरी एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी की।वहीं, कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने कहा था कि कांग्रेस हम सुप्रीम कोर्ट जाएंगे और उनके साथ ही तमिलनाडु की डीएमके ने भी वक्फ के खिलाफ याचिका लगाने की बात कही थी। बिहार के राज्यपाल ने किया समर्थन बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने लोकसभा और राज्यसभा से पास हुए वक्फ संशोधन बिल का समर्थन किया है। उन्होंने कहा- वक्फ की संपत्तियां अल्लाह की मानी जाती हैं। इसका इस्तेमाल गरीबों, जरूरतमंदों और जनहित के लिए होना चाहिए। गैर मुस्लिमों का भी वक्फ की संपत्तियों में बराबर का हक है। किस-किस दल ने लगाई याचिका?     कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने वक्फ (संशोधन) विधेयक को चुनौती देते हुए 4 अप्रैल को शीर्ष कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। जावेद वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024 पर संयुक्त संसदीय समिति के सदस्य भी थे।     4 अप्रैल को ही ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के प्रमुख और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने भी विधेयक के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।     आम आदमी पार्टी (आप) के विधायक अमानतुल्लाह खान ने भी शनिवार को वक्फ विधेयक को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट (एससी) का दरवाजा खटखटाया था।     एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स नामक एक गैर सरकारी संगठन ने भी इस विधेयक का विरोध करते हुए सुप्रीम कोर्ट … Read more

भारत 2047 तक 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनेगा

नई दिल्ली देश के विकास की दिशा को ध्यान में रखते हुए, जी20 शेरपा और नीति आयोग के पूर्व सीईओ अमिताभ कांत ने बिना किसी संकोच के कहा: 2047 तक विकसित भारत बनने के लिए , भारत को 4 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था से 30 ट्रिलियन डॉलर से अधिक की अर्थव्यवस्था में बदलना होगा। यह सिर्फ़ एक छलांग नहीं है – यह एक पीढ़ीगत धुरी है, और उन्होंने तर्क दिया कि फिनटेक क्षेत्र को इसे आगे बढ़ाने वाले इंजनों में से एक होना चाहिए। कांत ने कहा, “भारत के सकल घरेलू उत्पाद में लगभग नौ गुना वृद्धि होनी चाहिए, इसकी प्रति व्यक्ति आय में लगभग आठ गुना वृद्धि होनी चाहिए, और इसके विनिर्माण में लगभग 16 गुना वृद्धि होनी चाहिए।” उन्होंने व्यापक आर्थिक लक्ष्यों और क्षेत्र-विशिष्ट उत्प्रेरकों के बीच सीधी रेखा खींची। उनके लिए, फिनटेक केवल एक और उच्च-विकास वाला वर्टिकल नहीं है; यह समावेशी, व्यापक-आधारित विकास को प्राप्त करने का आधार है। “यह बहुत महत्वपूर्ण है कि फिनटेक क्षेत्र बढ़ता रहे और विस्तार करता रहे ताकि हम समाज में सभी स्तरों पर ऋण प्रदान करने में सक्षम हों।” आंकड़े उनके आत्मविश्वास को पुष्ट करते हैं। भारत अब वैश्विक स्तर पर तीसरा सबसे बड़ा फिनटेक हब है, न केवल मात्रा के मामले में बल्कि मूल्य के मामले में भी। इस क्षेत्र ने 2023 में 25 बिलियन डॉलर का राजस्व दर्ज किया – जो कि साल-दर-साल (YoY) 56 प्रतिशत की शानदार वृद्धि है। 2030 के लिए अनुमान और भी चौंकाने वाले हैं: 150 फिनटेक यूनिकॉर्न जिनका संयुक्त मूल्यांकन 500 बिलियन डॉलर है और वार्षिक राजस्व 190 बिलियन डॉलर तक पहुँच रहा है। कांत इस विस्फोट का श्रेय तकनीक-प्रेमी युवा जनसांख्यिकी, पूंजी तक बेहतर पहुंच, सरकारी नीतियों को सक्षम बनाने और मोबाइल और इंटरनेट बुनियादी ढांचे में व्यापक प्रगति के शक्तिशाली मिश्रण को देते हैं। लेकिन उन्होंने एक चेतावनी भी जारी की- इस वृद्धि को जिम्मेदारी में बांधा जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “नवाचार फिनटेक की जीवनरेखा है, और जब हम नवाचार करते हैं, तो हमें जिम्मेदारी से ऐसा करना चाहिए।” इसका मतलब है कि ऐसे उत्पाद डिजाइन करना जो कमजोर आबादी की सेवा करें, न कि उन्हें किनारे करें। इसका मतलब है साइबर सुरक्षा खतरों के प्रति लगातार सतर्क रहना और यह सुनिश्चित करना कि UPI, डिजिटल वॉलेट, ब्लॉकचेन के माध्यम से मुख्यधारा का अपनाना, केवल नवीनता पर नहीं, बल्कि भरोसे पर आधारित हो। स्व-नियमन केंद्रीय विषय था। राज्य द्वारा हर कदम तय करने की प्रतीक्षा करने के बजाय, कांत भारतीय रिजर्व बैंक के साथ मिलकर काम करने वाले स्व-नियामक संगठनों (एसआरओ) में फिनटेक शासन का भविष्य देखते हैं। “ये संस्थाएँ आरबीआई की निगरानी में काम करती हैं। वे उद्योग मानकों को निर्धारित करने, अनुपालन लागू करने और नियामकों और फिनटेक कंपनियों के बीच एक सेतु के रूप में कार्य करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।” वर्ष 2047 तक विकसित अर्थव्यवस्था का दर्जा हासिल करने की राह की चुनौतियाँ:     गरीबी और असमानता:         वर्ष 1947 में स्वतंत्रता से लेकर वर्ष 1991 तक गरीबी कम करने के उद्देश्य से समाजवादी नीतियों के क्रियान्वयन के बावजूद भारत की गरीबी दर 50% के आसपास बनी रही।         हालाँकि, उदारीकरण के बाद  (1991-2011) गरीबी लगभग 20% तक कम हो गई, जहाँ 350 मिलियन लोग गरीबी से बाहर आ गए।     मध्यम-आय जाल:         विश्व बैंक की परिभाषा के अनुसार, मध्यम-आय जाल (Middle-Income Trap) से तात्पर्य ऐसी स्थिति से है, जिसमें एक मध्यम-आय देश बढ़ती लागत और घटती प्रतिस्पर्द्धा के कारण उच्च-आय अर्थव्यवस्था में परिवर्तित होने में विफल रहता है।         भारत के लिये भी मध्यम-आय जाल में फँसने का खतरा है, जहाँ देश मध्यम-आय से उच्च-आय की स्थिति में पहुँचने में विफल हो जाते हैं।         वर्ष 1960 में 101 मध्यम-आय अर्थव्यवस्थाओं में से केवल 23 ही वर्ष 2018 तक उच्च-आय अर्थव्यवस्था बन सके।         ऐसी आशंकाएँ व्यक्त की जाती हैं कि विकसित अर्थव्यवस्था की राह पर आगे बढ़ते हुए भारतीय अर्थव्यवस्था मध्यम-आय जाल में फँस सकती है। माना जाता है कि 5,000-6,000 अमेरिकी डॉलर प्रति व्यक्ति आय तक पहुँचने के बाद यह अधिक तेज़ी से आगे नहीं बढ़ पाएगी।     वृद्ध होती आबादी:         भारत की आबादी, जो वर्तमान में लगभग 1.4 बिलियन है, वर्ष 2048 तक 1.64 बिलियन के सर्वोच्च स्तर पर पहुँचने के बाद बाद वर्ष 2100 तक घटकर 1.45 बिलियन रह जाएगी।         इसके परिणामस्वरूप, भारत को वृद्ध होती आबादी से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा, जिसमें स्वास्थ्य देखभाल पर बढ़ते खर्च, बढ़ती पेंशन देनदारियाँ और संभावित श्रम की कमी शामिल हैं।     गतिहीन कृषि:         कृषि क्षेत्र भारत की लगभग 46% आबादी को रोज़गार प्रदान करता है और भारत के सकल घरेलू उत्पाद में इसका योगदान लगभग 16.5% है।         हालाँकि, अप्रभावी भूमि सुधारों, अवैज्ञानिक अभ्यासों, संस्थागत ऋण प्रवाह की कमी और जलवायु अनिश्चितताओं के कारण यह गतिहीन एवं निम्न उत्पादक क्षेत्र बना हुआ है।     विनिर्माण क्षेत्र का पिछड़ापन:         आर्थिक सर्वेक्षण 2023-24 के अनुसार, विनिर्माण क्षेत्र भारत के केवल 11.4% कार्यबल को रोज़गार प्रदान करता है।         इसके अलावा, विनिर्माण क्षेत्र को उच्च इनपुट लागत और अस्थिर मांग के कारण चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।     अकुशल लॉजिस्टिक्स:         आर्थिक सर्वेक्षण 2022-23 से पता चलता है कि भारत में लॉजिस्टिक्स लागत सकल घरेलू उत्पाद के 14-18% के बीच है, जो वैश्विक बेंचमार्क 8% से अधिक है। इसके साथ ही, लॉजिस्टिक प्रदर्शन सूचकांक (LPI) 2023 में भारत 38वें स्थान पर है।     रोज़गारहीनता और प्रच्छन्न बेरोज़गारी:         आईटी सेवाओं में उछाल से प्रेरित भारत के उच्च विकास वर्षों (2000-10) के बावजूद 46% श्रम शक्ति अभी भी कृषि में संलग्न है, जो सकल घरेलू उत्पाद में केवल 18% का योगदान देती है। इसकी उत्पादकता कम है और यह अल्प-रोज़गार (underemployment) की समस्या से भी ग्रस्त है।         इसके अलावा, CMIE के अनुसार भारत में बेरोज़गारी दर मई 2024 में 7% से तेज़ी से बढ़कर जून 2024 में 9.2% हो गई।     श्रम बल गतिशीलता:         महिला श्रम बल भागीदारी मात्र 37% है, हालाँकि वर्ष 2019 में 26% की तुलना में इसमें सुधार हुआ है। फिर भी, यह स्तर अन्य तेज़ी से विकास करते देशों की तुलना में कम है।     वैश्विक आर्थिक मंदी:         वैश्विक आर्थिक मंदी, वस्तुओं की अस्थिर कीमतें, भू-राजनीतिक तनाव और कठिन होती … Read more

सुप्रीम कोर्ट पहुंचे कपिल सिब्बल वक्फ काननू के खिलाफ दायर याचिकाओं पर जल्द सुनवाई की मांग

नई दिल्ली वक्फ संशोधन बिल 2025 को संसद के दोनों सदनों से पारित होने के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी मंजूरी दे दी, लेकिन अब तक इसका विरोध नहीं थमा है. वक्फ कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अब तक 6 याचिकाएं दाखिल हो चुकी हैं, जिन पर जल्द सुनवाई की उम्मीद है. सोमवार (7 अप्रैल, 2025) को राज्यसभा सांसद और सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट में इस मामले में जल्द सुनवाई का अनुरोध किया है, जिस पर मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना ने भी सुनवाई का आश्वासन दिया है. एडवोकेट कपिल सिब्बल याचिकाकर्ता जमीयत उलेमा-ए-हिंद की ओर से कोर्ट में पेश हुए थे. उन्होंने कहा, ‘हम वक्फ कानून में किए गए संशोधनों का विरोध करते हैं और जल्द सुनवाई की मांग करते हैं.’ चीफ जस्टिस संजीव खन्ना ने कहा कि जल्द सुनवाई के अनुरोध को लेकर पहले ही व्यवस्था बनी हुई है. आपको यहां इसे रखने की कोई जरूरत नहीं थी. सीजेआई ने कहा, ‘मैं दोपहर को इन अनुरोधों को देखूंगा और मामले की सुनवाई पर फैसला लूंगा.’ उन्होंने सुनवाई का आश्वासन दिया है. वक्फ संशोधन कानून के खिलाफ अबतक सुप्रीम कोर्ट में 6 याचिकाएं दायर हुई हैं. याचिकाकर्ता आज सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस से जल्दी सुनवाई की मांग कर सकते हैं. चीफ जस्टिस संजीव खन्ना ने स्पष्ट किया कि जल्द सुनवाई के लिए पहले से ही एक व्यवस्था मौजूद है, इसलिए इसे यहां रखने की आवश्यकता नहीं थी. उन्होंने कहा कि वह दोपहर में इन अनुरोधों पर गौर करेंगे और मामले की सुनवाई के संबंध में निर्णय लेंगे. उन्होंने सुनवाई का आश्वासन भी दिया है. वक्फ संशोधन कानून के खिलाफ अब तक सुप्रीम कोर्ट में छह याचिकाएं दायर की जा चुकी हैं, और याचिकाकर्ता आज चीफ जस्टिस से त्वरित सुनवाई की मांग कर सकते हैं. अन्य याचिकाकर्ताओं की ओर से सीनियर एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी और निजाम पाशा ने भी पेशी दी. कानून के खिलाफ सबसे पहले कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने 4 अप्रैल को याचिका प्रस्तुत की थी. इसके अतिरिक्त, एआईएमआईएम के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी और आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्लाह खान ने वक्फ कानून में संशोधनों की वैधता को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की. एक गैर सरकारी संगठन ‘सिविल राइट्स के संरक्षण के लिए संघ’ ने भी एक याचिका प्रस्तुत की है. केरल के सुन्नी मुस्लिम विद्वानों का धार्मिक संगठन ‘समस्त केरल जमीयत-उल उलेमा’ ने एडवोकेट जुल्फिकार अली पी एस के माध्यम से यह याचिका दाखिल की है. अन्य याचिकाकर्ताओं के लिए सीनियर एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी और निजाम पाशा भी पेश हुए थे. कानून के खिलाफ सबसे पहले  कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने 4 अप्रैल को याचिका दाखिल की थी. उनके अलावा एआईएमआईएम अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी और आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्लाह खान ने वक्फ कानून के संशोधनों की वैधता को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. एक गैर सरकारी संगठन ‘एसोसिएशन फॉर द प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स’ ने भी याचिका दायर की है. केरल के सुन्नी मुस्लिम विद्वानों के धार्मिक संगठन ‘समस्त केरल जमीयत-उल उलेमा’ ने एडवोकेट जुल्फिकार अली पी एस के माध्यम से याचिका दाखिल की. याचिकाओं में क्या-क्या सवाल उठाए गए हैं? सुप्रीम कोर्ट में दायर इन याचिकाओं में याचिकाकर्ताओं ने धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन का तर्क देते हुए कहा है कि यह विधेयक धार्मिक मामलों के प्रबंधन में स्वतंत्रता को प्रभावित करता है, जो संविधान के अनुच्छेद 26 के तहत अल्पसंख्यक समुदायों को दी गई है. खासकर, वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करने का प्रावधान और सरकार को वक्फ संपत्तियों पर अधिक नियंत्रण देने की व्यवस्था को मुस्लिम समुदाय के धार्मिक अधिकारों में हस्तक्षेप माना जा रहा है. याचिकाओं में दावा किया गया है कि यह विधेयक समानता के सिद्धांत का उल्लंघन करता है, क्योंकि यह केवल मुस्लिम समुदाय से संबंधित वक्फ संपत्तियों को लक्षित करता है, जबकि अन्य धर्मों के ट्रस्ट या धार्मिक संस्थानों के लिए समान प्रावधान लागू नहीं किए गए हैं. विधेयक में वक्फ संपत्तियों के सर्वेक्षण और प्रबंधन के लिए सरकारी हस्तक्षेप को बढ़ाने के प्रावधानों को संपत्ति के अधिकार के उल्लंघन के रूप में देखा जा रहा है. याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह वक्फ बोर्ड की स्वायत्तता को कम करता है और संपत्तियों पर समुदाय के नियंत्रण को खतरे में डालता है. कुछ याचिकाओं में यह सवाल उठाया गया है कि यह विधेयक अल्पसंख्यक समुदाय की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को कमजोर करता है, जो संविधान के तहत संरक्षित है.विधेयक में जिला कलेक्टर जैसे सरकारी अधिकारियों को वक्फ संपत्तियों के सर्वेक्षण और विवादों को निपटाने का अधिकार देना भी विवाद का कारण बना है. बता दें संसद के दोनों सदनों से बजट सत्र में पारित वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 को शनिवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी मिल गई. इस संबंध में गजट अधिसूचना जारी होने के साथ ही वक्फ अधिनियम, 1995 का नाम भी बदलकर यूनिफाइड वक्फ मैनेजमेंट, इम्पावरमेंट, एफिशिएंसी एंड डेवलपमेंट (उम्मीद) अधिनियम, 1995 हो गया है.  

गणपति केमिकल फैक्टरी में भीषण आग, मालिक समेत दो की मौत

हरिद्वार हरिद्वार के इब्राहिमपुर गांव स्थित गणपति केमिकल फैक्टरी में सोमवार देर रात लगी भीषण आग पर करीब नौ घंटे बाद जाकर काबू पाया जा सका। हादसे में फैक्टरी मालिक समेत दो लोगों की मौत हो गई। वहीं, झुलसे कर्मचारी जोगेंद्र सैनी निवासी रायसी थाना लक्सर जनपद हरिद्वार का अस्पताल में इलाज चल रहा है। हादसे में दो कर्मचारी अभी भी लापता हैं। वहीं लाखों का नुकसान हुआ है। सोमवार की सुबह पुलिस कप्तान प्रमेंद्र सिंह डोबाल ने अधीनस्थों के साथ पहुंचकर घटनास्थल का जायजा लिया। उन्होंने बताया कि म़तक की पहचान महेश चंद्र अग्रवाल निवासी हरिलोक फेस -2 ज्वालापुर (फैक्ट्री मालिक) और संजय पुत्र डालचंद निवासी ग्राम नवाब नगर जिला रामनगर,उत्तर प्रदेश (श्रमिक) के रूप में हुई है। बता दें कि रविवार की रात करीब करीब नौ बजे बहादराबाद क्षेत्र में इब्राहिमपुर मार्ग पर बनी गणपति केमिकल फैक्टरी में भीषण आग लग गई थी। धमाके के साथ आग लगने के कारण आसपास के गांव में लोग दहशत में आ गए थे। मायापुर, सिडकुल के अलावा कई अन्य जगहों से फायर ब्रिगेड की गाड़ियां बुलानी पड़ी थी। पुलिस और प्रशासन के अधिकारी मध्यरात्रि तक मौके पर डटे रहे। करीब नौ घंटे की मशक्कत के बाद सुबह छह बजे आग पर काबू पाया जा सका, लेकिन फैक्टरी में रेस्क्यू ऑपरेशन अब भी जारी है। फैक्टरी की तलाशी के दौरान बाथरूम से एक युवक का शव बरामद हुआ। उसके पास ही एक दूसरा शव भी मिला। फैक्टरी में भारी मात्रा में केमिकल्स होने की वजह से आग लगातार भड़कती रही, जिससे रेस्क्यू कार्य में काफी दिक्कतें आईं। आग तो बुझा दी गई है, लेकिन अंदर मौजूद रसायनों के कारण खतरा अभी भी बना हुआ है। एसएसपी प्रमेंद्र सिंह डोबाल ने सोमवार की सुबह घटनास्थल पर पहुंचकर जायजा लिया। एसएसपी ने बताया कि हादसे के कारणों की जांच चल रही है।  

कोच ने ट्रेनिंग के बहाने नाबालिग का किया रेप, फोन में मिली 8 लड़कियों की अश्लील तस्वीरें

बेंगलुर  कर्नाटक के बेंगलुरु में एक शर्मनाक घटना सामने आई है। बैडमिंटन के कोच ने एक नाबालिग छात्रा के साथ बलात्कार किया। घटना के खुलासे के बाद पुलिस ने आरोपी बैडमिंटन कोच को अरेस्ट किया है। आरोप है कि कोच में ट्रेनिंग सेशन के दौरान इस गंदी घटना को अंजाम दिया। कोच ने जिस छात्रा को अपनी हवस का शिकार बनाया उसकी उम्र 16 साल है। पुलिस ने इस मामले के पॉक्सो के तहत दर्ज किया है। पुलिस ने मोबाइल किया जब्त पुलिस ने आरोपी कोच बालाजी का मोबाइल जब्त किया है। पुलिस को इस फोन में कथित तौर पर 13 से 16 साल की उम्र की आठ लड़कियों के नग्न वीडियो मिले हैं। पुलिस इस पूरे मामले की जांच कर रही है। यह सामने आया है कि आरोपी लड़की को उसके नृत्य प्रशिक्षण या ट्यूशन सत्र के दौरान संपर्क करता था, उसे अपने घर पर बुलाता था और उसके साथ बलात्कार करता था। उसने कथित तौर पर इन घटनाओं को अपने मोबाइल फोन पर रिकॉर्ड किया। आरोप है कि उसने पीड़ित छात्रा को धमकाया था कि इस बारे में किसी को न बताए। इससे छात्रा डर गई थी, लेकिन लगातार उत्पीड़न के बाद उसने मां को बताया। इसके बाद इस कोच की करतूत का भंडाफाेड़ हुआ। आठ दिन की रिमांड में कोच दक्षिण पूर्व पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) सारा फातिमा के अनुसार एक महिला ने एक शिकायत दर्ज कराई थी। इसमें कहा गया था कि महिला की बेटी के साथ बैडमिंटन के कोच में बलात्कार की घटना को अंजाम दिया। फातिमा ने बताया कि शिकायत में कहा गया है कि बैडमिंटन कोच ने कई बार छात्रा का उत्पीड़न किया। आरोपी के खिलाफ पॉक्सो एक्ट में मामला दर्ज करके कार्रवाई की गई है। दक्षिण पूर्व डीसीपी के अनुसार आरोपी को शनिवार को गिरफ्तार किया गया और बाद में अतिरिक्त मुख्य महानगर दंडाधिकारी (एसीएमएम) अदालत के समक्ष पेश किया गया। हमने उसे आठ दिनों के लिए कस्टडी में लिया है और जांच कर रहे हैं कि क्या आरोपी कई मामलों में शामिल है।

पालघर में रामनवमी जुलूस के दौरान फेंके गए अंडे; पुलिस ने दर्ज किया केस

पालघर रामनवमी के जुलूस पर एक और हमले की खबर है। महाराष्ट्र के पालघर में कथित तौर पर कुछ लोगों ने रैली पर अंडे फेंके। इस घटना के बाद इलाके में तनाव फैल गया था। हालांकि, बाद में पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति पर काबू पाया। इधर, पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में भारतीय जनता पार्टी ने जुलूस पर पथराव के आरोप लगाए हैं। इससे जुड़े वीडियो भी साझा किए गए हैं, जिसमें वाहनों के कांच फूटे नजर आ रहे हैं। हालांकि स्थानीय पुलिस ने तत्काल मौके पर पहुंचकर हालात को काबू किया। इलाके में रात भर भारी पुलिस बल रहा। पुलिस ने एक संदिग्ध को हिरासत में लिया है और पूछताछ जारी है। घटनाक्रम के सीसीटीवी फुटेज भी हासिल किए जा रहे हैं। सकल हिंदू समाज की बाइक रैली पर हमला     पुलिस अधिकारियों ने बताया कि रामनवमी के अवसर पर सकल हिंदू समाज द्वारा आयोजित रैली चिखलडोंगरी के सर्वेश्वर मंदिर से शुरू हुई थी और विरार (पश्चिम) के ग्लोबल सिटी में पिंपलेश्वर मंदिर जा रही थी, तभी यह घटना हुई।     जुलूस में करीब 100 से 150 मोटरसाइकिल, एक रथ और दो टेम्पो शामिल थे, जिसमें स्थानीय लोगों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। जब रैली में शामिल लोग पिंपलेश्वर मंदिर के पास पहुंचे, तो कुछ मोटरसाइकिल सवार साइड स्ट्रीट से जा रहे थे, तभी पास की एक इमारत से कथित तौर पर अंडे फेंके गए।     इससे भक्तों में गुस्सा भड़क गया और इलाके में तनावपूर्ण माहौल बन गया। सूचना मिलने के बाद बोलिंज पुलिस स्टेशन के कर्मी मौके पर गए और स्थिति को नियंत्रण में किया।     पुलिस ने सार्वजनिक उपद्रव और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के लिए भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है और इलाके में सतर्कता बढ़ा दी है। कोलकाता में भी हमले का मामला, भाजपा भड़की इससे पहले पश्चिम बंगाल के कोलकाता में भी जुलूस में हिस्सा लेकर लौट रहे लोगों पर मुस्लिम बहुल इलाके में हमले का आरोप लगा है। आरोप भाजपा सांसद और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने लगाया। मजूमदार ने इसका एक वीडियो भी अपने सोशल मीडिया पर जारी किया है। वहीं पुलिस का कहना है कि शोभायात्रा से लौट रहे लोगों पर हमले की कोई घटना नहीं हुई है। उल्टा पुलिस ने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने बिना अनुमति के जुलूस निकालने की कोशिश की।

मंत्री के घर पहुंची ED, उत्तर प्रदेश में पूर्व BSP विधायक की जांच, 22 करोड़ बैंक फ्रॉड मामले में एक्शन

चेन्नई प्रवर्तन निदेशालय ( ED) ने तमिलनाडु के मंत्री के. एन. नेहरू के भाई के. एन. रविचंद्रन द्वारा स्थापित एक रियल एस्टेट समूह के खिलाफ जांच के तहत सोमवार को शहर में उसके कई परिसरों पर छापे मारे। आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी। रियल्टी कंपनी ‘टीवीएच ग्रुप’ की स्थापना रविचंद्रन ने की थी। सूत्रों ने बताया कि संघीय जांच एजेंसी ‘टीवीएच’ समूह से जुड़ी जांच के तहत परिसरों में छापेमारी की कार्रवाई कर रही है। रविचंद्रन तमिलनाडु के नगरपालिका प्रशासन, शहरी एवं जल आपूर्ति मंत्री के. एन. नेहरू के भाई हैं। रिपोर्ट्स की मानें तो 22 करोड़ की बैंक धोखाधड़ी मामले में यह छापा मारा गया था। इंडियन ओवरसीज बैंक ने ट्रूडम ईपीसी लिमिटेड के खिलाफ केस दर्ज करवाया था। नेहरू के भाई एन रविचंद्रन ट्रूडोम ईपीसी लिमिटेड के डायरेक्टर हैं। ईडी ने राज्य में कुल 13 ठिकानों पर छापा मारा। इसमें मंत्री केएन नेहरू का त्रिचि स्थित घर भी शामिल था। शुक्रवार को इसी तरह चेन्नई में एएम गोपालन की चिट फंड क्ंपनी श्री गोकुलम चिट फंड के ठिकानों पर छापा मारा गया था। गोकुलम गोपालन मलयालम फिल्म एंपुरान के एक प्रोड्यूसर भी हैं। इस फिल्म में गुजरात दंगों को दिखाया गया था। इसमें कथित तौर पर यह भी दिखाया गया कि दंगों में दक्षिणपंथी हिंदू संगठनों की क्या भूमिका थी। एंपुरान के डायरेक्टर और ऐक्टर पृथ्वीराज सुकुमारन को भी इनकम टैक्स डिपार्टमेंट का नोटिस मिला था। उनसे2022 की तीन फिल्मों से होने वाली कमाई की डीटेल मांगी गई थी। बता दें कि एमके स्टालिन ने भी केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है। परिसीमन और हिंदी भाषा के मुद्दे को लेकर स्टालिन कई राज्यों और पार्टियों को एकजुट करने में लगे हैं। हाल ही में नीट विधेयक को भी केंद्र की तरफ से खारिज कर दिया गया।

दिल्ली से लेकर यूपी-बिहार तक भीषण गर्मी और हीटवेव का प्रकोप जारी

नई दिल्ली राजधानी दिल्ली समेत देशभर में आज मौसम का मिजाज बदल गया है। अप्रैल की शुरुआत से ही भीषण गर्मी का दौर जारी है। इस बीच मौसम विभाग ने कल के लिए मौसम का पूर्वानुमान जारी किया है। देश के कुछ हिस्सों में भीषण गर्मी और हीटवेव का प्रकोप जारी रहने की संभावना है, वहीं कुछ राज्यों में हल्की बारिश और गरज-चमक के साथ मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है। मौसम विभाग ने कई राज्यों के लिए चेतावनी जारी की है, जिसमें लोगों से सावधानी बरतने की अपील की गई है। जानिए कल कहां कैसा मौसम रहेगा। दिल्ली-एनसीआर में चिलचिलाती धूप, तापमान 40 के करीब दिल्ली-एनसीआर में कल मौसम गर्म और शुष्क रहेगा। दिल्ली में अधिकतम तापमान 39-40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की संभावना है। नोएडा, गुरुग्राम और गाजियाबाद में भी गर्मी का प्रकोप जारी रहेगा। हवा में नमी कम होने से दिन के समय लू जैसी स्थिति बन सकती है। उत्तर प्रदेश में गर्मी का सितम उत्तर प्रदेश में गर्मी का दौर जारी है। मौसम विभाग के अनुसार, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अधिकतम तापमान 38-40 डिग्री सेल्सियस तक रह सकता है। हालांकि, राज्य के पूर्वी हिस्सों में कल मौसम में हल्का बदलाव देखने को मिलेगा। बिहार से सटे क्षेत्रों में हल्की बारिश और बादल छाए रहने की संभावना जताई गई है। बिहार में गरज-चमक के साथ बारिश का अलर्ट बिहार के लिए मौसम विभाग ने विशेष चेतावनी जारी की है। राज्य के पूर्वी हिस्सों जैसे अररिया, किशनगंज, सुपौल, पूर्णिया, दरभंगा और मधुबनी में कल गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है। तापमान में मामूली गिरावट के साथ अधिकतम पारा 34-36 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहेगा। लोगों को तेज हवाओं से सतर्क रहने की सलाह दी गई है। आज आपके यहां कितना रहेगा तापमान शहर न्यूनतम तापमान (°C) अधिकतम तापमान (°C) दिल्ली 21 41 नोएडा 22 42 पटना 25 38 लखनऊ 21 40 जयपुर 16 35 भोपाल 23 41 मुंबई 27 36 गाजियाबाद 22 41 जम्मू 18 33 प्रयागराज 22 42 कोलकाता 27 37 अहमदाबाद 24 43 बेंगलुरु 21 33 कानपुर 21 40 वाराणसी 22 42   राजस्थान में भीषण गर्मी का कहर जारी राजस्थान में गर्मी अपने चरम पर पहुंच रही है। मौसम विभाग ने कल के लिए राज्य के कई हिस्सों में हीटवेव की चेतावनी जारी की है। पश्चिमी राजस्थान में तापमान 42-44 डिग्री सेल्सियस तक जा सकता है। जयपुर, जोधपुर और बीकानेर जैसे शहरों में दिन के समय तेज धूप और गर्म हवाओं का प्रकोप रहेगा। लोगों से दोपहर के समय घर से बाहर न निकलने की अपील की गई है। गुजरात के सौराष्ट्र और कच्छ में भीषण गर्मी गुजरात के सौराष्ट्र और कच्छ क्षेत्र में कल को हीटवेव जैसी स्थिति बनी रहेगी। मौसम विभाग के अनुसार, तापमान 40-42 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की संभावना है। अहमदाबाद और गांधीनगर में भी गर्मी से राहत की कोई उम्मीद नहीं है। हालांकि, तटीय इलाकों में हल्की नमी के कारण स्थिति थोड़ी कम गंभीर रह सकती है। पंजाब और हरियाणा में गर्मी का प्रकोप, कोई राहत नहीं पंजाब और हरियाणा में मौसम विभाग ने कल के लिए हीटवेव की चेतावनी जारी की है। दोनों राज्यों में अधिकतम तापमान 38-41 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है। चंडीगढ़, लुधियाना और हिसार जैसे शहरों में दिन के समय तेज धूप और लू का असर देखने को मिलेगा। न्यूनतम तापमान में भी बढ़ोतरी की संभावना है। हिमाचल प्रदेश में भी बढ़ रही गर्मी हिमाचल प्रदेश के निचले इलाकों में कल गर्मी का असर बढ़ेगा। मौसम विभाग ने मैदानी क्षेत्रों में हीटवेव की चेतावनी दी है, जहां तापमान 35-37 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। हालांकि, ऊंचे पहाड़ी इलाकों में मौसम साफ और शुष्क रहेगा, लेकिन सामान्य से अधिक तापमान दर्ज किया जाएगा। महाराष्ट्र के कोकण और गोवा में गर्मी बढ़ेगी महाराष्ट्र के कोकण क्षेत्र और गोवा में 7 अप्रैल को मौसम विभाग ने ऊष्ण लहर की चेतावनी दी है। तापमान 36-38 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है। मुंबई में भी गर्मी और उमस का असर रहेगा, लेकिन बारिश की कोई संभावना नहीं है। विदर्भ और मराठवाड़ा में भी तापमान में बढ़ोतरी होगी।

चाइनीज इलेक्ट्रॉनिक कंपनियों ने टैरिफ नुकसान के लिए निकाला नया प्लान

नई दिल्ली अमेरिका की तरफ से भारत, चीन समेत ज्यादातर देशों पर टैरिफ लगाया है। ऐसे में इलेक्ट्रॉनिक कंपनियों को काफी नुकसान पहुंचने की उम्मीद है। यह नुकसान चाइनीज कंपनियों के लिए ज्यादा हो सकता है। क्योंकि अमेरिका ने चीन पर बाकी देशों के मुकाबले ज्यादा टैरिफ लगाया है। ऐसे में चाइनीज कंपनियां भारत की तरफ रुख सकती है, जिससे चाइनीज कंपनियों को अमेरिका के लगाए गए टैरिफ का कम नुकसान उठाना पड़े। यह फैसला रूस के फैसले की तरह हो सकता है, जिसमें रूस ने अमेरिकी बैन से बचने के लिए भारत को एक ट्रेड रूट बनाया था। इससे रूस को अमेरिकी बैन का कम नुकसान उठाना पड़ा था। चीन भी इसी प्लान को आगे बढ़ा रहा है। ​ क्या है चीन का प्लान? रिपोर्ट की मानें, तो अमेरिकी टैरिफ ने चीनी इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों जैसे हायर, लेनोवो और हाइसेंस को अपनी कारोबारी रणनीति बदलने के लिए मजबूर कर दिया है। यह सभी चाइनीज इलेक्ट्रॉनिक ब्रांड भारत में मैन्युफैक्चरिंग की तैयारी कर रहे हैं, जिससे भारत से अमेरिका समेत बाकी देशों को इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट की सप्लाई की जा सके। बता दें कि भारत में टैरिफ चीन और वियतनाम की तुलना में कम है। भारत-चीन सीमा तनाव चाइनीज कंपनियों को भरोसा है कि भारत सरकार इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग के नियमों में छूट दे सकती है। मौजूदा वक्त में भारत और चीन के बीच कूटनीतिक रिश्तों को बेहतर करने की कोशिशें चल रही हैं। हालांकि अभी भारत ने चीन जैसे पड़ोसी देशों से FDI की मंजूरी लेनी जरूरी है। साल 2020 में सीमा में तनाव के बीच मुश्किल हो गया है। भारत को होगा फायदा एक्सपर्ट की मानें, तो चीन की तरफ से भारत में इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा दिया जा सकता है। इनका इस्तेमाल ग्रेटर नोएडा और पुणे के कारखानों में नई असेंबली लाइन में किया जा सकता है। एक्सपर्ट की मानें, तो टैरिफ भारत के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। हायर अभी चीन और वियतनाम से अमेरिका को निर्यात करता है। कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग को मिलेगा बढ़ावा ओप्पो और वीवो स्मार्टफोन के लिए कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग करने वाली भगवती प्रोडक्ट्स के राजेश अग्रवाल ने कहा कि अमेरिकी बाजार के लिए वियतनाम और चीन में मैन्युफैक्चरिंग में भारत की तुलना में ज्यादा दबाव है। उनकी कंपनी अमेरिकी प्रोडक्शन को भारत शिफ्ट करने की योजना पर काम कर रहा है। ट्रंप ने भारत पर 26% का टैरिफ लगाया है, जो बाकी एशियाई कंपनियों से कम है। प्रोडक्ट सप्लाई को मिलेगा बढ़ावा ट्रंप ने चीन पर 54 फीसद, वियतनाम पर 46 फीसद, थाईलैंड पर 36 फीसद और ताइवान पर 32 फीसद टैरिफ लगाया हैं, जो 9 अप्रैल से लागू होंगे। हायर, हाइसेंस, लेनोवो, मोटोरोला, ओप्पो, वीवो और TCL जैसे चीनी ब्रांड अमेरिका में एक्टिव हैं, जो ज्यादातर चीन और वियतनाम से प्रोडक्ट सप्लाई करते हैं। भारत के लिए होगा गेमचेंजर कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर डिक्सन टेक्नोलॉजीज को भारत के लिए टैरिफ से फायदा होने की उम्मीद है। यह कंपनी अमेरिकी बाजार के लिए स्मार्टफोन बनाती है। FY25 में इसका अमेरिका में 1700-1800 करोड़ रुपये का कारोबार था। एक्सपर्ट की मानें, तो मौजूदा वक्त में चीनी कंपनियों के लिए FDI मंजूरी में ढील देती है, तो यह भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग और निर्यात के लिए गेमचेंजर हो सकता है।

आपका पैन हो जाएगा बंद, केंद्र सरकार ने जारी किए निर्देश

नई दिल्ली केंद्र सरकार ने पैन कार्ड यूजर के लिए नई चेतावनी जारी की है। सरकार का मानना है कि, अगर आपने आधार इनरोलमेंट आईडी की मदद से पैन कार्ड हासिल किया है, तो आपको अपने आधार कार्ड को ओरिजिनल आधार कार्ड नंबर से बदल देना चाहिए। वरना आपका पैन 31 दिसंबर 2025 से काम करना बंद कर सकता है। हालांकि यह सभी आधार कार्ड यूजर के लिए नहीं है। सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेस यानी CBDT की तरफ से एक नोटिफिकेशन जारी किया गया है, जिसमें पैन कार्ड होल्डर को 31 दिसंबर 2025 तक आधार नंबर से वेरिफाई करने का निर्देश दिया है। आयकर विभाग को देनी होगी जानकारी सरकारी नोटिफिकेशन की मानें, तो सभी पैन होल्डर को 1 अक्टूबर 2024 से पहले आधार अप्लाई करने के एनरोलमेंट आईडी से पैन कार्ड लेने वाले सभी पैन होल्डर को अब अपना आधार नंबर आयकर विभाग को बताना होगा। 3 अप्रैल 2025 को जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक ऐसे सभी पैन कार्ड होल्डर को 31 दिसंबर 2025 तक अपनी जानकारी उपलब्ध करानी होगी। जुमाने में मिल सकती है छूट पैन कार्ड को आधार नंबर से लिंक करने के लिए पैन-आधार लिंकिंग का मौजूदा प्रॉसेस इस्तेमाल किया जाएगा। पैन कार्ड होल्डर को आयकर विभाग के ई-फाइलिंग पोर्टल पर जाकर पैन-आधार लिंकिंग प्रॉसेस को पूरा करना होगा। वैसे तो पैन-आधार लिंक करने की आखिरी डेडलाइन 30 जून 2023 थी, और अब ऐसा करने पर जुर्माना देना पड़ता है। लेकिन जिन लोगों ने एनरोलमेंट आईडी से पैन लिया, उनके पास उस वक्त आधार नंबर नहीं था, इसलिए ऐसे पैन कार्ड होल्डर 2023 की समय-सीमा में लिंकिंग नहीं कर सके। ऐसे पैन कार्ड होल्डर को जुर्माने से छूट मिल सकती है। 31 दिसंबर 2025 तक आधार न देने पर क्या होगा? टैक्समैन डॉट कॉम के वॉइस प्रेसिडेंट ऑफ एडवाइजरी नवीन बाधवा की मानें, तो अगर पैन कार्ड होल्डर 31 दिसंबर 2025 तक आधार नंबर से पैन को लिंक नहीं करते हैं, तो ऐसा संभव है कि 1 जनवरी 2026 से पैन निष्क्रिय हो जाए, लेकिन इसके आयकर विभाग से पूरी जानकारी हासिल हो सकती है। अगर सरकार की तरफ से पैन और आधार से लिंक नहीं किया जाता है, तो 1000 रुपये पेनल्टी लागू किया जा सकता है। कैसे पैन से आधार कार्ड करें लिंक     ई-फाइलिंग पोर्टल के होम पेज पर जाएं और Quick Links ऑप्शन पर क्लिक करना होगा।     इसके बाद आपको Link Aadhaar ऑप्शन पर क्लिक करना होगा।     पैन और आधार दर्ज करें और वेरिफाई ऑप्शन पर क्लिक करें।     इसके बाद जरूरी डिटेल दर्ज करनी होगी और लिंक आधार पर क्लिक करना होगा।     फिर मोबाइल नंबर पर दर्ज 6 अंकों के ओटीपी को दर्ज करना होगा और वैलिडेट पर क्लिक करें।

नया पोर्टल हुआ लॉन्च, दागी होगा तो कुंडली बताएगा रेरा, अब देश में कहीं का भी हो बिल्डर, स्टेटस रिपोर्ट रेरा को देनी होगी

देहरादून नया पोर्टल सिर्फ नियमों का ऑनलाइन पालन ही नहीं कराएगा, बल्कि बिल्डर्स की कुंडली भी खंगालेगा। अब बिल्डर देश के किसी भी हिस्से का रहने वाला हो, उसे पिछले पांच साल की स्टेटस रिपोर्ट रेरा को देनी होगी। लंबी कवायद के बाद उत्तराखंड भूसंपदा नियामक प्राधिकरण (यूके रेरा) ने भवन खरीदारों के लिए अपना नया पोर्टल लॉन्च कर दिया है। सूचना प्रौद्योगिकी विकास एजेंसी (आईटीडीए) के सहयोग से लॉन्च इस पोर्टल पर भवन खरीदारों को सभी परियोजनाओं के बारे में नई जानकारियां मिलेंगी। खासकर परियोजनाओं का तिमाही ऑनलाइन अपडेट पोर्टल पर प्रदर्शित होगा। नया पोर्टल सिर्फ नियमों का ऑनलाइन पालन ही नहीं कराएगा, बल्कि बिल्डर्स की कुंडली भी खंगालेगा। अब बिल्डर देश के किसी भी हिस्से का रहने वाला हो, उसे पिछले पांच साल की स्टेटस रिपोर्ट रेरा को देनी होगी। इसमें प्रमोटर्स बताएंगे कि पिछले पांच सालों में उन्होंने कितने हाउसिंग और कॉमर्शियल प्रोजेक्ट बनाए। परियोजनाओं की प्रगति व प्रमोटर्स पर दर्ज मुकदमों आदि के बारे में पूरी जानकारी भी पोर्टल पर देनी होगी। यह कुंडली नए पोर्टल पर उपलब्ध होगी। परियोजना में निवेश से पहले बायर्स प्रमोटर के बारे में सब कुछ जान सकेंगे। इससे बायर्स को संपत्ति बुकिंग का निर्णय लेने में काफी मदद मिलेगी। अपडेट नहीं देने पर बिल्डर्स पर होगी कार्रवाई यूके रेरा लंबे समय से अपने पोर्टल को अत्याधुनिक बनाने का प्रयास कर रहा था। इसमें आने वाले खर्च के कारण यह कार्य प्रभावित हो रहा था। अब उत्तराखंड प्रौद्योगिकी विकास एजेंसी (आईटीडीए) ने रेरा के लिए नया पोर्टल https://ukrera.uk.gov.in/ तैयार किया है। नए पोर्टल पर बिल्डर्स से तिमाही अपडेट प्राप्त करने के लिए खास प्रावधान किया गया है। तिमाही अपडेट नहीं देने वाले बिल्डर्स पर कार्रवाई भी की जाएगी। नियमों का ऑनलाइन अनुपालन यूके रेरा के सदस्य नरेश सी मठपाल ने बताया कि अब नए पोर्टल में बिल्डर्स के लिए नियमों के अनुपालन पर जोर दिया गया है। नियम तो पहले से बने हैं, लेकिन ऑनलाइन तरीके से उनका अनुपालन अब तक नहीं कराया जा पा रहा था। अब प्रोजेक्ट पंजीकरण से लेकर परियोजना में प्रगति तक तमाम नियमों का पालन अनिवार्य कर दिया गया है। ले-आउट प्लान हो या राजस्व रिकॉर्ड सब कुछ देख सकेंगे बायर्स रेरा के सदस्य नरेश सी मठपाल ने बताया कि बिल्डर को पंजीकरण प्रक्रिया शुरू करने से पहले अपने दस्तावेज ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड करना जरूरी होगा। कॉलोनी के लिए ले-आउट प्लान, सीमांकन योजना, स्वीकृत नक्शे, लाइसेंस नवीनीकरण पत्र, राजस्व रिकॉर्ड चार्टर्ड अकाउंटेंट से नॉन-डिफॉल्ट का सर्टिफिकेट, ड्राफ्ट अलॉटमेंट लेटर की कॉपी, मसौदा समझौते की प्रति, पर्यावरण मंजूरी, अनुमानित परियोजना लागत रिपोर्ट, एड्रेस प्रूफ कॉपी, कंपनी के निगमन का प्रमाणपत्र सब कुछ ऑनलाइन अपलोड करना होगा। इसे बायर्स देख सकेंगे। रेरा पहली बार करेगा बिल्डर्स-बायर्स से साझा चर्चा रेरा पहली बार देहरादून में 24 अप्रैल को कार्यशाला करने जा रहा है। इसमें प्रमोटर्स, प्रापर्टी एजेंट, आरडब्ल्यूए, बायर्स, अधिवक्ता व चार्टर्ड अकाउंटेंट के साथ चर्चा कर रेरा कानून के पालन को सशक्त बनाने पर जोर देगा। चर्चा से निकले बिंदुओं का रेरा बिल्डर्स से पालन कराएगा।

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