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25 सेकंड में ही हूती विद्रोहियों के गुट को B-2 परमाणु बॉम्बर से खत्म कर दिया गया

न्यूयॉर्क अमेरिका इन दिनों हूती विद्रोहियों पर कहर बरपा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक वीडियो शेयर करते हुए हूतियों को फिर से चेतावनी दे दी है। वीडियो में दिखाया गया है कि कैसे 25 सेकंड में ही हूती विद्रोहियों के गुट को खत्म कर दिया गया। राजनीतिक और रणनीतिक लिहाज से यह वीडियो काफी मायने रखता है। हूती विद्रोहियों ने आंकड़े जारी करते हुए बताया था कि डोनाल्ड ट्रंप का कार्यकाल शुरू होने के बाद से ही अमेरिकी हमलों में कम से कम 67 लोग मारे गए हैं। हालांकि वास्तविक संख्या ज्यादा भी हो सकती है। डोनाल्ड ट्रंप के वीडियो में देखा जा सकता है कि हूती गोलाकार बनाकर खड़े हुए हैं। इसके बाद अचानक विस्फोट होता है। तेज चमक के बाद पूरा इलाका धुएं और धूल के गुबार में समा जाता है। इसके बाद वीडियो जूमआउट होता है और बड़ा इलाका इस धुएं की गिरफ्त में दिखाई देता है। इसमें दो गाड़ियां भी दिखाई देती हैं। अनुमान है कि इन गाड़ियों का इस्तेमाल हमले के लिए किया गया होगा। डोनाल्ड ट्रंप ने वीडियो शेयर करते हुए संदेश भी दिया। उन्होंने लिखा,ये हूती हमले की साजिश के लिए इकट्ठा हुए थे। अब हूती कोई हमला नहीं कर पाएंगे। अब वे हमारा शिप नहीं डुबो सकते। बता दें कि लाल सागर में हूती जहाजों को निशाना बनाते हैं। हमास का समर्थन करने के लिए हूती इजरायल और अमेरिका के जहाजों को ज्यादा निशाना बना रहे हैं। इसी का जवाब देने के लिए अमेरिका ने हूतियों के ठिकानों को तबाह कर दिया। हूती विद्रोहियों ने अभी तक अपने किसी भी नेता की मौत की बात स्वीकार नहीं की है, उधर अमेरिका ने भी किसी भी मारे गए विद्रोही नेता का नाम उजागर नहीं किया है। हालांकि, ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों के बीच हुई बातचीत के लीक होने पर यह जानकारी सामने आई है कि विद्रोहियों के मिसाइल बल के एक नेता को निशाना बनाया गया था। बता दें कि हूतियों को ईरान से समर्थन मिलता है। जानकारों का कहना है कि यह हमला ईरान के परमाणु कार्यक्रम का जवाब है। व्हाइट हाउस की प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी कहा गया कि इन हमलों से ईरान कमजोर हो गया है। अमेरिकी बी-2 बॉम्बर्स की ताकत अमेरिकी वायु सेना के पास कुल मिलाकर केवल 20 स्टील्थ बॉम्बर हैं, जिसका अर्थ है कि पूरे बेड़े का 30 प्रतिशत अब हिंद महासागर में तैनात है। बी-2 बेड़े की बड़ी संख्या ये बताती है कि वायु सेना इनका इस्तेमाल महत्वपूर्ण मिशन के लिए कर रही है। परमाणु हमला करने के अलावा बी-2 स्पिरिट अमेरिकी वायुसेना का इकलौता विमान है, जो 30000 पाउंड के जीबीयू-57/B मैसिव आर्डनेंस पेनेट्रेटर (MOP) बंकर बस्टर बमों को संचालित कर सकता है। हूतियों के पास भूमिगत सुविधाओं का व्यापक नेटवर्क है, जिस पर हमला करने के लिए MOP की जरूरत हो सकती है। हूती लगातार लाल सागर में कर रहे हमला हालांकि, यह अभी पता नहीं कि क्या MOP को हूतियों के खिलाफ तैनात किया गया है या नहीं। यमन के हूती चरमपंथी लाल सागर के व्यापारिक मार्ग के लिए बड़ा खतरा बन चुके हैं। हूतियों ने लाल सागर से गुजरने वाले जहाजों पर हमले किए हैं, जिससे व्यापार मार्ग पर असर पड़ा है। हूतियों के खतरे को खत्म करने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले महीने नए अभियान की घोषणा की थी। अमेरिकी अभियान के बावजूद हूती चरमपंथी झुकने के संकेत नहीं दे रहे हैं। इस बीच उन्होंने इजरायल पर भी हमला तेज किया है। हूतियों ने इस दौरान और इसके पहले कई MQ-9 रीपर ड्रोन को मार गिराने में कामयाबी हासिल की है।

PAK सेना का बड़ा दुस्साहस! LoC पार करने की कोशिश की तो भारतीय सेना ने संभाला मोर्चा, 1 मरा

जम्मू पाकिस्तान की तरफ से सीमा पर हिमाकत बढ़ती जा रही है। सीमा सुरक्षा बल(BSF) के मुताबिक शुक्रवार और शनिवार की दरमयानी रात जम्मू सेक्टर में पाकिस्तान की तरफ से घुसपैठ की कोशिश की जा रही थी। जवानों को जब इसकी भनक लगी तो उन्होंने इस घुसपैठ की कोशिश को नाकाम कर दिया। इस पूरे घटनाक्रम में एक पाकिस्तानी घुसपैठिए को भी मार गिराया गया है। बीएसएफ के आधिकारिक प्रवक्ता ने बताया कि शुक्रवार देर रात हमारे जवानों के जम्मू सीमा क्षेत्र के पास लगी अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर कुछ संदिग्ध गतिविधि नजर आई.. जब उन्होंने इस बात पर ध्यान दिया तो वहां पर एक घुसपैठिया सीमा को पार करने की कोशिश कर रहा था। हमारे जवानों से घुसपैठिए को आगे न बढ़ने और अपने आप को सरेंडर करने के लिए कहा…लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया और आगे बढ़ता रहा.. आखिरकार खतरे को भांपते हुए हमारे जवानों ने उसे मार गिराया। अधिकारियों ने बताया कि इस मामले को लेकर पाकिस्तानी रेंजर्स के सामने विरोध दर्ज कराया गया है। अभी फिलहाल घुसपैठिए की पहचान और उसके मकसद का पता लगाया जा रहा है।

कनाडा में एक और भारतीय का सरेआम खून, चाकू से गोद कर की गई हत्या, पुलिस की गिरफ्त में हमलावर

ओटावा कनाडा में एक भारतीय नागरिक हत्‍या की करने की खबर सामने आई है। कनाडा में भारतीय दूतावास ने शनिवार सुबह बताया कि ओटावा के पास कनाडा के रॉकलैंड इलाके में एक भारतीय नागरिक की चाकू घोंपकर हत्या कर दी गई है। दूतावास के अनुसार, एक संदिग्ध को हिरासत में ले लिया गया है। दूतावास ने बताया कि वे पीड़ित परिवार को हर संभव मदद मुहैया करा रहे हैं। बता दें कि भारत और कनाडा के बीच रिश्तों खराब हो चुके हैं। कनाडा में रहने वाले वाले चरमपंथी भारत के नागरिकों खासकर हिंदूओं के खिलाफ हिंसा मचाते रहते हैं। हाल के दिनों में भारतीयों के खिलाफ कनाडा में क्राइम में भी इजाफा हुआ है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भारतीय दूतावास ने हमले की जानकारी दी है। दूतावास ने यह भी बताया कि घटना के बाद संदिग्ध को हिरासत में ले लिया गया है। कनाडा पुलिस का कहना है कि संदिग्ध को हिरासत में ले लिया गया है। पुलिस पूरे मामले की जांच पड़ताल में जुट गई है। संदिग्ध ने क्यों चाकू से किया हमला, नहीं हुआ खुलासा संदिग्ध का मकसद और घटना के बारे में अन्य जानकारी नहीं मिल पाई है। वहां के स्थानीय न्यूज चैनल सीबीसी ने बताया है कि क्लेरेंस-रॉकलैंड में एक व्यक्ति की मौत हो गई है। दूसरे को गिरफ्तार कर लिया गया है। यह साफ नहीं है कि क्या यह वही घटना है जिसका जिक्र भारतीय दूतावास ने एक्स पर अपने पोस्ट में किया है। सीबीएस की रिपोर्ट के अनुसार, ओंटारियो प्रांतीय पुलिस ने रेडियो-कनाडा को बताया कि यह घटना शुक्रवार (स्थानीय समय) दोपहर 3 बजे से ठीक पहले लालोंडे स्ट्रीट के पास हुई है। फिलहाल पुलिस ने अभी तक मौत के कारण का खुलासा नहीं किया है। यह भी नहीं बताया है कि हिरासत में लिए गए व्यक्ति पर कोई आरोप लगाया जाएगा या नहीं। इस बीच, ओन्टारियो प्रांतीय पुलिस ने रॉकलैंड निवासियों को क्षेत्र में पुलिस की मौजूदगी बढ़ाने की चेतावनी दी है। कनाडा में भारतीयों पर हमले बढ़े हाल ही में कनाडा के ओंटारियो प्रांत में झगड़े के दौरान 22 साल के भारतीय छात्र की चाकू घोंपकर हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने इस मामले में पीड़ित के साथ रहने वाले एक व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया था। पुलिस ने अपने बयान में कहा कि लैम्बटन कॉलेज में बिजनेस मैनेजमेंट के पहले साल के छात्र गुरासिस सिंह की चाकू घोंपकर हत्या कर दी गई थी। पुलिस के मुताबिक दोनों एक ही कमरे में रहते थे और दोनों के बीच किचन को लेकर विवाद हुआ था। विवाद इतना ज्यादा बढ़ गया कि आरोपी हंटर ने गुरासिस पर चाकू से हमला किया। इस हमले में गुरासिस सिंह की मौत हो गई।

UPI के बढ़ते चलन ने घटाई ATM की मांग, ग्रामीण इलाकों पर सबसे ज्यादा असर

मुंबई डिजिटल युग के इस दौर में, एक तरफ जहां कैशलेस ट्रांजेक्शन अपना तेजी से स्थान बना रही है और लोगों की रोमर्रा की जिंदगी को आसान बना रही है। वहीं दूसरी तरफ लोग अब कैश के साथ ही साथ एटीएम का प्रयोग कम कर रहे हैं। इस बदलाव के पीछे सबसे प्रमुख कारण UPI पेमेंट्स का उभार है। UPI यानी यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस के माध्यम से लेन-देन आसान और तेज हो गया है, जिससे कैश निकासी की आवश्यकता में कमी आई है। देश में डिजिटल पेमेंट का चलन तेजी से बढ़ रहा है। जिसके चलते एटीएम के इस्तेमाल में गिरावट आई है। इससे जुड़ी हुई आरबीआई ने रिपोर्ट भी पब्लिश की है। भारत में ATM की संख्या में लगातार हो रही गिरावट RBI के ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार,देश में एटीएम की संख्या में भारी कमी आई है। भारत में ATM की संख्या सितंबर 2023 में 219,000 से घटकर सितंबर 2024 में 215,000 हो गई है। यह गिरावट मुख्य रूप से ऑफ-साइट ATM में कमी के कारण हुई है। ये ATM सितंबर 2022 में 97,072 से गिरकर सितंबर 2024 में 87,638 तक पहुंच गए। ATM की संख्या में कमी के कारण वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में बताया कि सरकारी बैंकों ने एटीएम बंद करने के लिए कई कारण बताए हैं। इनमें बैंकों का एकीकरण, एटीएम का कम इस्तेमाल, व्यावसायिक लाभ की कमी और एटीएम का स्थानांतरण शामिल हैं। बैंकर्स का कहना है कि डिजिटल भुगतान के बढ़ते चलन और यूपीआई के उभरने से नकदी का उपयोग कम हुआ है, जिससे एटीएम का संचालन अव्यावहारिक हो गया है। UPI का बढ़ता दबदबा पिछले नौ वर्षों में डिजिटल भुगतान और वित्तीय समावेशन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। जन धन योजना, मोबाइल इंटरनेट और यूपीआई के प्रसार ने इस बदलाव को बढ़ावा दिया है। पिछले पांच वर्षों में यूपीआई लेनदेन में 25 गुना वृद्धि हुई है। वित्त वर्ष 2018-19 में जहां 535 करोड़ यूपीआई लेनदेन हुए, वहीं 2023-24 में यह बढ़कर 13,113 करोड़ हो गए। इस वित्त वर्ष (सितंबर तक) यूपीआई के जरिए 122 लाख करोड़ रुपए के 8,566 करोड़ से अधिक ट्रांजैक्शन दर्ज हुए हैं। डिजिटल इंडिया की ओर बढ़ता कदम उपभोक्ता अब सब्जियों से लेकर ऑटो सवारी और महंगी खरीदारी तक के लिए यूपीआई का उपयोग कर रहे हैं। इस डिजिटल क्रांति ने भारत को नकदी से डिजिटल भुगतान की ओर तेजी से बढ़ाया है। क्यों कम हो रहे ATM मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, देश में पिछले काफी समय से डिजिटल पेमेंट पर जोर दिया जा रहा है। डिजिटल पेमेंट करना लोगों को काफी आसान भी लगता है, इसलिए कम समय में ही यह पूरे देश में काफी लोकप्रिय हो गया है। बैंकों के घटती एटीएम की संख्या में काफी बड़ा रोल यूपीआई का भी है। पिछले कुछ समय से एटीएम के पॉपुलैरिटी में काफी कमी आई है। लोगों तक एटीएम की पहुंच अभी भी कम है, रिपोर्ट्स के अनुसार, देश में प्रति 100,000 लोगों पर केवल 15 एटीएम हैं। RBI के नियमों का असर देश में नकदी अभी भी भारत की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। वित्त वर्ष 22 में 89% लेन-देन और सकल घरेलू उत्पाद का 12% हिस्सा नगद लेन देन का ही था। लेकिन एटीएम लेन-देन और इंटरचेंज शुल्क पर RBI के नियमों ने ATM पर अपना गहरा असर डाला है। इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह बदलाव डिजिटल भुगतान विशेष रूप से यूपीआई की बढ़ती लोकप्रियता और डिजिटल परिवर्तन पर रणनीतिक ध्यान केंद्रित करने से प्रेरित है। आइए सबसे पहले (Automated Teller Machine- ATM) के इतिहास पर एक नजर डालते हैं: भारत में पहला एटीएम साल 1987 में HSBC ने मुंबई में लगाया था. उसके अगले 10 वर्षों में यानी 1997 तक देश में करीब 1500 एटीएम खुले. अगर दुनिया में पहला ATM की बात करें तो 27 जून 1967 को लंदन के एनफील्ड में एक कैश मशीन का उपयोग किया गया था, जिसे दुनिया की पहली एटीएम के रूप में मान्यता प्राप्त है. इस ATM को बार्कलेज बैंक ने शुरू किया था. 80 के दशक के दौरान दुनिया के कई बड़े देशों में ATM मुख्यधारा में शामिल हो गए थे. इसके बाद साल 1997 में इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) ने ‘स्वधन’ नामक से पहला ज्वाइंट ATM नेटवर्क शुरू किया, जिसे इंडिया स्विच कंपनी (ISC) ने संचालित किया. हालांकि, यह 2003 में बंद हो गया. उसके बाद 2004 में नेशनल फाइनेंशियल स्विच (NFS) की स्थापना हुई, जो आज भारत का सबसे बड़ा ATM नेटवर्क है, जिसे नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) संचालित करता है. आज भारत में कुल इतने ATM जनवरी 2022 तक, NFS नेटवर्क के तहत भारत में 2,55,000 से अधिक ATM थे, जिसमें नकदी जमा मशीनें और रिसाइक्लर शामिल थे. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) और NPCI के आंकड़ों के आधार पर 2023 तक भारत में लगभग 2,60,000 से 2,70,000 ATM होने का अनुमान था. फिलहाल भारत में लगभग 2.8 से 3 लाख ATM होने की संभावना है. फिलहाल देश में एक लाख लोगों पर 15 ATM हैं.  ATM की संख्या और प्रभाव के आधार पर SBI सबसे बड़ा ऑपरेटर है, लेकिन कैश मैनेजमेंट में CMS का दबदबा है. भारत में अब तक कितने ATM बंद हो चुके हैं… RBI के आंकड़ों के अनुसार, भारत में ATM की संख्या सितंबर 2023 में 2,19,000 थी, जो सितंबर 2024 में घटकर 2,15,000 हो गई.  इसका मतलब ये है कि इस अवधि में करीब 4 हजार ATM बंद हुए. यही नहीं, साल 2017 के बाद से ही ATM की संख्या में बढ़ोतरी धीमी हो गई, और साल-दर-साल इसका दायरा बढ़ता गया है. खासकर 2022 के बाद से ऑफ-साइट ATM (बैंक परिसर से बाहर स्थित) की संख्या में लगातार गिरावट आई है. यह डिजिटल भुगतान (जैसे UPI) के बढ़ते उपयोग, ATM संचालन की उच्च लागत, और बैंक शाखाओं के विलय के कारण हो रहा है. क्यों बंद हो रहे हैं ATM? यानी सबकुछ ग्राहकों पर निर्भर करता है, अगर ATM का खूब उपयोग होगा तो फिर कारोबार घाटे में नहीं चलेगा, वहीं अगर एक ATM महीने में 300-500 लेनदेन करता है, तो यह घाटे में भी जा सकता है. ये कड़वा सच है, देश में ATM का उपयोग तेजी … Read more

कलेश्वर के जीआईडीसी में एक केमिकल कंपनी में लगी आग, मौके पर पहुंची अग्निशमन दल

भरूच गुजरात के भरूच के नजदीक आज कलेश्वर के जीआईडीसी में एक केमिकल कंपनी में आग लग गई। घटना की जानकारी मिलते ही अग्निशमन दल मौके पर पहुंची। आग पर काबू पाने के प्रयास जारी हैं। वीडियो में देखा जा सकता है कि आग की लपटें और धुएं का गुबार आसमान में आसमान को छूने लगा। हिमाचल-हरियाणा बॉर्डर पर लगी थी आग हिमाचल और हरियाणा के बॉर्डर पर खोखरा पंचायत में एक कबाड़खाने में भीषण आग लग गई है। आग इतनी भयानक है कि धुआं पूरे आसमान में छा गया है। आग लगने के बाद कई सिलेंडर फटने की आवाज आई जिससे आसपास के हजारों लोग जमा हो गए हैं। हिमाचल प्रदेश और हरियाणा के फायर विभाग की टीमें मौके पर पहुंचकर आग बुझाने की कोशिश कर रही हैं।

वक्फ बिल को संसद की मंजूरी मिलते ही मुस्लिम समुदाय के लोग भड़क उठे, सड़क पर उतरकर विरोध जताया

नई दिल्ली वक्फ बिल को संसद की मंजूरी मिलते ही पश्चिम बंगाल, गुजरात समेत कई राज्यों के मुसलमान भड़क उठे। उन्होंने सड़क पर उतरकर जमकर विरोध जताया। जुम्मे की नमाज के बाद कोलकाता, चेन्नई, अहमदाबाद जैसे शहरों में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने वक्फ बिल के खिलाफ नारेबाजी की और सरकार से इसे वापस लेने की अपील की। बंगाल की राजधानी में कई लोगों ने हाथों में बैनर ले रखे थे, जिसमें ‘हम वक्फ बिल को खारिज करते हैं’ जैसे नारे लिखे गए थे। वक्फ संशोधन विधेयक 2025 बुधवार को लोकसभा और फिर गुरुवार को राज्यसभा में पेश किया गया, जहां लंबी बहस के बाद इसे पारित कर दिया गया। गुजरात के अहमदाबाद से सामने आए विजुअल्स में मुस्लिम संगठन वक्फ बिल के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए दिखाई दिए। लोगों ने ‘तानाशाही नहीं चलेगी’ और ‘काला कानून वापस लो’ जैसे नारे भी लगाए। प्रदर्शन कर रहे शोएब रजा नामक युवक ने न्यूज एजेंसी एएनआई से कहा, ”यह सरकार मंदिरों की जमीन चोरी करती है। राम मंदिर की जमीन को चोरी किया और अब मस्जिदों की जमीन चोरी करने की फिराक में हैं।” इस दौरान पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे कई लोगों को हिरासत में भी लिया। उधर, चेन्नई में भी विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। यहां एक्टर विजय की तमिलगा वेत्री कझगम ने भी राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन की घोषणा की। चेन्नई और कोयंबटूर और तिरुचिरापल्ली जैसे शहरों में टीवीके कार्यकर्ताओं ने इकट्ठे होते हुए ‘वक्फ विधेयक को खारिज करो’ और ‘मुसलमानों के अधिकार मत छीनो’ जैसे नारे लगाए। पश्चिम बंगाल के कोलकाता में भी शुक्रवार को मुस्लिम संगठन के लोगों ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया। उनके हाथों में भी वक्फ बिल के खिलाफ लिखे नारे वाली बैनर और पोस्टर थे। बिल के खिलाफ कोर्ट पहुंचे कांग्रेस सांसद कांग्रेस ने वक्फ बिल को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का फैसला किया है। कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने याचिका दायर करते हुए वक्फ बिल को मुस्लिम समुदाय के प्रति भेदभावपूर्ण वाला बताया है। बीजेपी ने कांग्रेस समेत विपक्ष पर पलटवार करते हुए कहा कि विपक्ष चाहे तो संसद में पारित वक्फ (संशोधन) विधेयक को अदालत में चुनौती दे सकता है, लेकिन उन्हें इस मुद्दे पर अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्यों को भड़काने और तुष्टीकरण की तुच्छ राजनीति करने से बचना चाहिए। वरिष्ठ बीजेपी नेता और पूर्व केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने संसद परिसर में संवाददाताओं से कहा, “कांग्रेस के कुछ कानूनी विशेषज्ञ बार-बार कह रहे हैं कि यह (विधेयक) असंवैधानिक है और वे अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे। उन्हें अदालत जाने दें। उन्हें कोई नहीं रोक रहा है।”

अमेरिका द्वारा व्यापारिक साझेदारों पर रेसिप्रोकल टैरिफ लगाए जाने के बाद चीन ने WTO में मुकदमा किया दायर

बीजिंग चीन ने शुक्रवार को अमेरिका पर पलटवार करते हुए सभी आयातित अमेरिकी प्रोडक्ट्स पर 34 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ लगा दिया। यह अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा चीनी एक्सपोर्ट पर 34 फीसदी टैरिफ लगाने के फैसले के जवाब में किया गया है। चीन की सरकारी न्यूज एजेंसी शिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, 10 अप्रैल से अमेरिकी वस्तुओं पर टैरिफ लगाए जाएंगे। अमेरिका द्वारा व्यापारिक साझेदारों पर रेसिप्रोकल टैरिफ लगाए जाने के बाद चीन ने विश्व व्यापार संगठन (WTO) में मुकदमा दायर किया है। बीजिंग के वाणिज्य मंत्रालय ने कहा कि उसने सात दुर्लभ पृथ्वी तत्वों पर एक्सपोर्ट्स कंट्रोल भी लगाया है, जिसमें गैडोलीनियम – जिसका इस्तेमाल आम तौर पर एमआरआई में किया जाता है – और यिट्रियम, जिसका इस्तेमाल उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स में किया जाता है- शामिल है। इसके अलावा, मंत्रालय ने अपने बयान में कहा, “चीन ने डब्ल्यूटीओ विवाद निपटान तंत्र के तहत मुकदमा दायर किया है।” इसके अलावा, चीन ने 11 अमेरिकी रक्षा कंपनियों को अविश्वसनीय यूनिट लिस्ट में जोड़ा है और 16 अमेरिकी फर्मों पर निर्यात नियंत्रण लगाने जा रहा है। जनवरी में ट्रंप के व्हाइट हाउस में लौटने के बाद से वॉशिंगटन और बीजिंग के बीच तनाव और बढ़ गया है। टैरिफ को लेकर अमेरिका और दुनियाभर के कई देशों से विवाद चल रहा है। दो अप्रैल को डोनाल्ड ट्रंप ने चीन, भारत समेत कई देशों के खिलाफ बढ़े हुए टैरिफ का ऐलान किया था। इसके अलावा, ट्रंप चीन से फेंटेनाइल ड्रग्स को लेकर भी काफी नाराज हैं। पिछले साल चीन ने अमेरिका से लगभग 164 बिलियन डॉलर का सामान आयात किया था, जो चार साल में सबसे कम था। वित्त मंत्रालय ने 34% टैरिफ की घोषणा करते हुए एक बयान में कहा, “अमेरिका की कार्रवाई अंतर्राष्ट्रीय व्यापार नियमों का पालन नहीं करती है, चीन के वैध और कानूनी अधिकारों और हितों को गंभीर रूप से कमजोर करती है, और यह एकतरफा है।” दोनों सरकारों के बीच आर्थिक संघर्ष दोनों देशों की निजी कंपनियों तक फैल गया है।

संसद में भी ओवैसी ने वक्फ बिल का विरोध किया और फाड़ी थी विधेयक की कॉपी, अब पहुंचे सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली संसद से पारित हुए वक्फ (संशोधन) विधेयक 2025 के खिलाफ एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। उन्होंने अपनी याचिका में विधेयक की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी है। संसद में भी ओवैसी ने वक्फ बिल का विरोध किया था और प्रतीकात्मक तौर पर इसकी एक कॉपी भी फाड़ दी थी। ओवैसी की याचिका अधिवक्ता लजफीर अहमद ने दायर की है। विधेयक को राज्यसभा में 128 सदस्यों ने पक्ष में और 95 ने विरोध में पारित किया। इसे 3 अप्रैल की सुबह लोकसभा में 288 सदस्यों ने समर्थन दिया और 232 ने विरोध किया। इससे पहले बिहार के किशनगंज से कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने भी सुप्रीम कोर्ट में विधयेक की वैधता को चुनौती देते हुए कहा था कि यह संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन है। वक्फ बिल पर चर्चा के दौरान संसद में बुधवार को ओवैसी ने भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर हमला बोला था। उन्होंने आरोप लगाया कि वक्फ विधेयक के जरिए मुसलमानों के साथ गलत व्यवहार किया जाएगा। ओवैसी ने कहा, “यह विधेयक मुसलमानों पर हमला है। मोदी सरकार ने मेरी आजादी पर जंग छेड़ दी है। मेरी मस्जिदें, मेरी दरगाहें, मेरे मदरसे निशाने पर हैं। यह सरकार सच सामने नहीं ला रही है। यह विधेयक अनुच्छेद 14- समान संरक्षण का उल्लंघन करता है। सीमाएं लगाई जाएंगी। ऐसा करने से अतिक्रमणकारी मालिक बन जाएगा और एक गैर-मुस्लिम वक्फ बोर्ड का प्रशासन चलाएगा। यह विधेयक समानता कानून का भी उल्लंघन करता है।” वहीं, कांग्रेस सांसद की याचिका में आरोप लगाया गया है कि विधेयक वक्फ संपत्तियों और उनके प्रबंधन पर मनमाने प्रतिबंध लगाता है, जिससे मुस्लिम समुदाय की धार्मिक स्वायत्तता कमज़ोर होती है। अधिवक्ता अनस तनवीर के माध्यम से दायर याचिका में कहा गया है कि प्रस्तावित कानून मुस्लिम समुदाय के साथ भेदभाव करता है, क्योंकि इसमें ऐसे प्रतिबंध लगाए गए हैं जो अन्य धार्मिक बंदोबस्तों के प्रशासन में मौजूद नहीं हैं। बिहार के किशनगंज से लोकसभा सांसद जावेद इस विधेयक पर संयुक्त संसदीय समिति के सदस्य थे और उन्होंने अपनी याचिका में आरोप लगाया कि यह विधेयक किसी व्यक्ति के धार्मिक अभ्यास की अवधि के आधार पर वक्फ के निर्माण पर प्रतिबंध लगाता है। इस तरह की सीमा इस्लामी कानून, रीति-रिवाज या मिसाल में निराधार है और अनुच्छेद 25 के तहत धर्म को मानने और उसका पालन करने के मौलिक अधिकार का उल्लंघन करती है। याचिका में दावा किया गया है कि प्रतिबंध उन लोगों के साथ भेदभाव करता है जिन्होंने हाल ही में इस्लाम धर्म अपनाया है और धार्मिक या धर्मार्थ उद्देश्यों के लिए संपत्ति समर्पित करना चाहते हैं, जिससे संविधान के अनुच्छेद 15 का उल्लंघन होता है। अनुच्छेद 15 धर्म, नस्ल, जाति, लिंग या जन्म स्थान के आधार पर भेदभाव के निषेध से संबंधित है।

अब ट्रंप प्रशासन अमेरिकी सेना से भी छंटनी करने की योजना बना रहा, कहा-इतने सैनिकों की जरूरत नहीं: रिपोर्ट

वाशिंगटन अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद से कई विभागों को बंद करने और फेडरल कर्मचारियों की छंटनी का सिलसिला जारी है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने सरकारी खर्चों को कम करने के लिए डिपार्टमेंट ऑफ गवर्नमेंट एफिशिएंसी यानी DOGE का गठन भी किया था। USAID, शिक्षा विभाग और स्वास्थ्य विभाग जैसे विभागों से हजारों कर्मचारियों को काम से निकाले जाने के बाद अब ट्रंप प्रशासन अमेरिकी सेना से भी छंटनी करने की योजना बना रहा है। एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिकी रक्षा विभाग करीब 90 हजार सैनिकों को हटाकर सैन्य बल में कटौती करने जा रहा है। रिपोर्ट में इस बात का दावा किया है। वेबसाइट ने मामले से परिचित तीन अधिकारियों का हवाला देते हुए बताया है कि अमेरिकी रक्षा विभाग बढ़ते वित्तीय दबाव के कारण सेना से लगभग 90,000 सक्रिय सैनिकों की कटौती पर विचार कर रहा है। रिपोर्ट में बताया गया है कि चर्चा के दौरान सैन्य बल की मौजूदा क्षमता को कम करने की बात की गई है। बता दें कि फिलहाल अमेरिकी सेना में 4,50,00 सैनिक सक्रिय रूप से जुड़े हैं। कटौती के बाद इसे 3,60,000 से 4,20,000 किए जाने की संभावना है। बजट में होगी कटौती इससे पहले DOGE के साथ कदम मिलाते हुए अमेरिका के रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने पेंटागन को फिजूलखर्ची को कम करने और बजट में 8% की कटौती करने की योजना तैयार करने का निर्देश दिया भी दिया था। अमेरिका के रक्षा बजट की बात करें तो वित्तीय वर्ष 2025 के लिए लगभग 849.8 बिलियन डॉलर बजट रहने का अनुमान लगाया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक मिडिल ईस्ट और अफ्रीका में अमेरिका की घटती उपस्थिति के बीच इस तरह की चर्चा की जा रही है। हालांकि चीन का मुकाबला करने के लिए अमेरिका इंडो-पैसिफिक में अपनी उपस्थिति बढ़ाने की कोशिश भी कर रहा है। इस्तीफा देने का मौका दे रही सरकार जानकारी के मुताबिक कम से कम छह अमेरिकी संघीय सरकारी एजेंसियां अपने कर्मचारियों को इस्तीफा देने का अवसर दे रही हैं। एक संक्षिप्त ज्ञापन में हेगसेथ ने कर्मचारियों को स्वैच्छिक प्रारंभिक सेवानिवृत्ति की पेशकश की थी। एक वरिष्ठ रक्षा अधिकारी ने बताया है कि पेंटागन के बजट में 5% से 8% की कटौती के लक्ष्य तक पहुंचने के लिए लगभग 50,000 से 60,000 नौकरियों में कटौती की जाएगी।

संसद के दोनों सदनों से वक्फ संशोधन विधेयक को मंजूरी मिलने के बाद कांग्रेस सांसद ने दी चुनौती, सुप्रीम कोर्ट में पहली याचिका

नई दिल्ली वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 संसद के दोनों सदनों में पारित हो चुका है। इसके साथ ही इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को पहली याचिका भी दायर हो गई है। बिहार की किशनगंज लोकसभा सीट से कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने यह याचिका दाखिल की है। सांसद जावेद ने वक्फ कानून में हाल ही में किए गए बदलाव को चुनौती देते हुए इसे मुस्लिम समुदाय के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताया है। उन्होंने अपनी याचिका में इस विधेयक के माध्यम से किए गए संशोधनों को मुस्लिम समुदाय के मूल अधिकारों के खिलाफ बताया है। संसद के दोनों सदनों से वक्फ संशोधन विधेयक को मंजूरी मिलने के बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में बहस तेज हो गई है। मुस्लिम समुदाय के कई संगठन और विपक्ष के नेता इस संशोधन का विरोध कर रहे हैं। दूसरी ओर, सरकार का दावा है कि यह संशोधन वक्फ संपत्तियों के बेहतर प्रबंधन और उनके सही उपयोग के लिए है तथा इससे गरीब मुसलमानों को लाभ मिलेगा। उल्लेखनीय है कि वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 पर राज्यसभा में गुरुवार को चर्चा शुरू हुई और लगातार चली बैठक के बाद शुक्रवार तड़के यह विधेयक पारित हो गया। इसके पक्ष में 128 और विरोध में 95 मत पड़े। लोकसभा पहले ही इसे मंजूरी दे चुकी थी। इस विधेयक का उद्देश्य वक्फ अधिनियम में संशोधन के जरिए वक्फ बोर्ड के ढांचे में बदलाव और कानूनी विवादों को कम करना है। विधेयक को पारित करने के लिए राज्यसभा की बैठक (शुक्रवार) रात 2:30 बजे के बाद तक चली। विपक्ष के सभी संशोधन खारिज हो गए। अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने चर्चा का जवाब देते हुए विपक्ष के इन आरोपों को खारिज कर दिया है कि सरकार अल्पसंख्यकों को डराने के लिए यह विधेयक लाई है। उन्होंने कहा कि मुसलमानों को डराने और गुमराह करने का काम विपक्ष कर रहा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि विधेयक से मुसलमानों को कोई नुकसान नहीं होगा।

अब प्रधानमंत्री मोदी को बांग्लादेश से मिला खास तोहफा, 10 साल पहले पीएम मोदी ने मोहम्मद यूनुस को दिया था गोल्ड मेडल

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस समय थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक के दौरे पर हैं। यहां पर पीएम मोदी ने बिम्सटेक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लिया। इस दौरान बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार प्रोफेसर मुहम्मद यूनुस और पीएम मोदी के बीच मुलाकात भी हुई। इस खास मौके पर मोहम्मद यूनुस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खास उपहार दिया। दरअसल, बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने पीएम नरेंद्र मोदी को एक तस्वीर उपहार के तौर पर दी। ये तस्वीर 03 जनवरी 2015 की है। इसी दिन पीएम मोदी ने 102वीं इंडियन साइंस कांग्रेस में प्रोफेसर यूनुस को गोल्ड मेडल दिया था। इस तस्वीर में पीएम मोदी और मोहम्मद यूनुस नजर आ रहे हैं। मोहम्मद यूनुस के ऑफिस ने शेयर की पोस्ट सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रोफेसर यूनुस के कार्यालय ने एक पोस्ट साझा की है। इस पोस्ट दो फोटो शेयर की गई है। इस पोस्ट में लिखा गया है कि प्रोफेसर मोहम्मद यूनुस शुक्रवार को बैंकॉक में अपनी द्विपक्षीय बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक तस्वीर पेश कर रहे हैं। यह तस्वीर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 3 जनवरी, 2015 को 102वें भारतीय विज्ञान कांग्रेस में प्रोफेसर यूनुस को स्वर्ण पदक प्रदान करने के बारे में है। अंतरिम सरकार के गठन के बाद पहली बार मिले दोनों नेता  जानकारी दें कि बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार के पतन के बाद ये पहला मौका है जब पीएम मोदी और मोहम्मद यूनुस के बीच मुलाकात हुई है। दोनों नेताओं की मुलाकात के दौरान कई मुद्दों पर चर्चा भी हुई। बातचीत के दौरान पीएम मोदी ने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार पर चिंता जाहिर की। दोनों नेताओं के बीच किन मुद्दों पर हुई चर्चा? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख सलाहकार मोहम्मद यूनुस के बीच किन मुद्दों पर चर्चा की गई, इसकी जानकारी विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने विस्तृत तौर पर दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने लोकतांत्रिक, स्थिर, शांतिपूर्ण, प्रगतिशील और समावेशी बांग्लादेश के लिए भारत के समर्थन को दोहराया। उन्होंने प्रो. यूनुस को बताया कि भारत बांग्लादेश के साथ सकारात्मक और रचनात्मक संबंध बनाने की इच्छा रखता है। विक्रम मिसरी ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी आग्रह किया कि माहौल को खराब करने वाली किसी भी बयानबाजी से बचना चाहिए। सीमा पर कानून का सख्त पालन और अवैध सीमा पार करने की रोकथाम सीमा सुरक्षा और सुरक्षा बनाए रखने के लिए आवश्यक है।

बजट सत्र को बेहद उत्पादक बताते हुए कहा कि संसद ने नए कीर्तिमान स्थापित किए, 17 घंटे से अधिक चली चर्चा

नई दिल्ली केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में बजट सत्र 2025 के समापन की जानकारी दी। उन्होंने इस सत्र को बेहद उत्पादक बताते हुए कहा कि संसद ने नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। रिजिजू ने लोकसभा और राज्यसभा के सभी सदस्यों, अध्यक्षों, स्पीकर और राजनीतिक दलों के नेताओं का आभार जताया, जिनके सहयोग से यह संभव हुआ। रिजिजू ने बताया कि इस सत्र में राज्यसभा ने 17 घंटे और 2 मिनट की लंबी चर्चा के साथ इतिहास रचा। संशोधन विधेयक पर यह चर्चा हुई, जिसने 1981 के 15 घंटे 51 मिनट के पिछले रिकॉर्ड को तोड़ दिया। यह बहस 3 अप्रैल को सुबह 11 बजे शुरू हुई और 4 अप्रैल को तड़के 4:02 बजे तक चली। खास बात यह रही कि इस दौरान एक भी व्यवधान नहीं हुआ। रिजिजू ने इसे एक बड़ी उपलब्धि करार देते हुए कहा कि इस रिकॉर्ड को तोड़ना मुश्किल होगा। लोकसभा में भी सत्र बेहद सफल रहा। यहां 13 घंटे से अधिक समय तक रेलवे, ऊर्जा, कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय से जुड़े अनुदानों की मांगों पर चर्चा हुई। वहीं, राज्यसभा में शिक्षा, रेलवे, स्वास्थ्य, परिवार कल्याण और गृह मंत्रालय के कामकाज पर विचार-विमर्श हुआ। रिजिजू ने कहा कि दोनों सदनों में चर्चा के दौरान आलोचना, सुझाव और स्पष्टीकरण का स्वस्थ आदान-प्रदान हुआ, लेकिन कोई स्थगन या व्यवधान नहीं देखा गया। उन्होंने संसदीय टीम के सहयोगियों अर्जुन मेघवान और एल. मोहन, सचिव (संसदीय विभाग) और अन्य अधिकारियों को भी धन्यवाद दिया। रिजिजू ने कहा, “हमने नियमों, परंपराओं और प्रक्रियाओं का सम्मान करते हुए संसद का संचालन किया। सरकार की ओर से हम प्रधानमंत्री, सभी दलों के नेताओं और फ्लोर लीडर्स के प्रति आभार व्यक्त करते हैं।” इस सत्र की उत्पादकता की लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा सभापति पहले ही सराहना कर चुके हैं। रिजिजू ने इसे दोहराते हुए कहा कि सदस्यों के धैर्य और योगदान से यह संभव हुआ। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में सवालों के लिए भी समय दिया और कहा कि कोई स्पष्टीकरण चाहिए हो, तो पूछा जा सकता है। रिजिजू ने इसे लोकतंत्र की मजबूती का प्रतीक बताया और कहा कि सरकार सभी आलोचनाओं को स्वीकार करती है, साथ ही बेहतर कामकाज के लिए सुझावों का भी सम्मान करती है। इस सत्र ने संसदीय इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ा है।

बुद्ध का संदेश : विदेश यात्राओं में पीएम मोदी का बौद्ध धर्म पर जोर, विशेष महत्व देते नजर आते हैं

बैंकॉक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और थाई पीएम पैतोंगतार्न शिनावात्रा ने शुक्रवार को थाईलैंड के प्रसिद्ध ऐतिहासिक बौद्ध मंदिर ‘वाट फो’ का दौरा किया। थाइलैंड के बाद पीएम मोदी श्रीलंका का दौरा करेंगे जहां वह अनुराधापुरा में महाबोधि मंदिर जाएंगे। अपनी विदेश यात्राओं में खासतौर से पीएम मोदी बौद्ध धर्म को विशेष महत्व देते नजर आते हैं। 2024 में भारत-आसियान शिखर सम्मेलन में, प्रधानमंत्री मोदी ने लाओस के राष्ट्रपति थोंगलाउन सिसोउलिथ को एक पुरानी पीतल की बुद्ध प्रतिमा भेंट की। उसी वर्ष, भारत ने भगवान बुद्ध और उनके शिष्यों के कई पवित्र अवशेष थाईलैंड भेजे। भगवान बुद्ध और उनके शिष्यों, अरहंत सारिपुत्त और अरहंत महा मोग्गलाना के अवशेषों को एक भारतीय प्रतिनिधिमंडल द्वारा बैंकॉक ले जाया गया और थाईलैंड के चार शहरों में 25 दिनों तक प्रदर्शित किया गया। 2023 में, प्रधानमंत्री मोदी और जापानी प्रधानमंत्री फुमियो किशिदा ने दिल्ली के बुद्ध जयंती पार्क में बाल बोधि वृक्ष का दौरा किया, जिससे भारत और जापान के बीच गहरे बौद्ध संबंधों को मजबूती मिली। भारत ने पहले वैश्विक बौद्ध शिखर सम्मेलन की भी मेजबानी की, जिसमें बौद्ध दर्शन के माध्यम से समकालीन चुनौतियों पर चर्चा करने के लिए विद्वानों को एक साथ लाया गया। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि बुद्ध की शिक्षाएं वैश्विक मुद्दों का समाधान प्रदान करती हैं। 2022 में, पीएम मोदी ने बुद्ध पूर्णिमा पर लुम्बिनी, नेपाल का दौरा किया, भारत अंतरराष्ट्रीय बौद्ध संस्कृति और विरासत केंद्र की आधारशिला रखी। उसी वर्ष, भारत ने भगवान बुद्ध के चार पवित्र अवशेष, जिन्हें कपिलवस्तु अवशेष के नाम से जाना जाता है, मंगोलिया भेजे। वहां 11 दिनों तक मंगोलियाई बुद्ध पूर्णिमा समारोह के साथ उनका प्रदर्शन किया गया। 25 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल अवशेषों के साथ उलानबटार में गंडन मठ परिसर में बत्सागान मंदिर गया, जहां बौद्ध कूटनीति और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के प्रति भारत की प्रतिबद्धता पर प्रकाश डाला गया। 2019 में, पीएम मोदी और मंगोलिया के राष्ट्रपति महामहिम खल्टमागिन बटुल्गा ने संयुक्त रूप से उलानबटार में ऐतिहासिक गंदन तेगचेनलिंग मठ में स्थापित भगवान बुद्ध और उनके दो शिष्यों की एक प्रतिमा का अनावरण किया। 2018 में, पीएम मोदी ने सिंगापुर में बुद्ध टूथ रेलिक मंदिर का दौरा किया, जिससे सिंगापुर की बौद्ध विरासत के प्रति भारत का सम्मान प्रदर्शित हुआ और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूती मिली।2017 में श्रीलंका की अपनी यात्रा के दौरान पीएम मोदी कोलंबो में अंतरराष्ट्रीय वेसाक दिवस समारोह को संबोधित किया और गंगारामया बौद्ध मंदिर का दौरा किया, जिससे भारत-श्रीलंका के सांस्कृतिक और धार्मिक संबंध और गहरे हुए। 2016 में, वियतनाम की अपनी यात्रा के दौरान, पीएम मोदी ने हनोई में क्वान सु पैगोडा का दौरा किया, बौद्ध भिक्षुओं के साथ बातचीत की और दक्षिण पूर्व एशिया में बौद्ध कूटनीति के प्रति भारत की प्रतिबद्धता पर जोर दिया। 2015 में प्रधानमंत्री मोदी ने कई देशों के साथ भारत के बौद्ध संबंधों को मजबूत किया। उन्होंने चीन के शीआन में दा शिंगशान मंदिर और बिग वाइल्ड गूज पैगोडा का दौरा किया, जिससे भारत और चीन के बीच ऐतिहासिक बौद्ध आदान-प्रदान मजबूत हुआ। मंगोलिया में उन्होंने गंडन मठ का दौरा किया, जहां उन्होंने दोनों देशों की साझा आध्यात्मिक विरासत पर जोर दिया। श्रीलंका में उन्होंने अनुराधापुरा में श्री महाबोधि वृक्ष को श्रद्धांजलि अर्पित की, 2014 में, प्रधानमंत्री मोदी ने क्योटो, जापान का दौरा किया, जहाँ उन्होंने तोजी और किन्काकू-जी मंदिरों का भ्रमण किया, जिससे भारत-जापान बौद्ध संबंधों को मजबूती मिली। उन्होंने क्योटो बौद्ध संघ द्वारा आयोजित एक लंच में भी भाग लिया, जो वैश्विक स्तर पर बौद्ध नेताओं के साथ जुड़ने की उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। घरेलू स्तर पर, पीएम मोदी की सरकार ने बौद्ध विरासत को बढ़ावा देने के लिए महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। उनके नेतृत्व में विकसित बौद्ध सर्किट, भगवान बुद्ध के जीवन और शिक्षाओं से जुड़े महत्वपूर्ण स्थलों को दर्शाता है। इन पवित्र स्थानों पर यात्रा को सुविधाजनक बनाने के लिए, बौद्ध सर्किट पर्यटक ट्रेन (महापरिनिर्वाण एक्सप्रेस) शुरू की गई, जो भारत और नेपाल के सबसे प्रतिष्ठित बौद्ध स्थलों को कवर करते हुए एक विसर्जित तीर्थयात्रा अनुभव प्रदान करती है। इसके अलावा, कुशीनगर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे ने तीर्थ स्थलों तक पहुंच में काफी सुधार किया है। नालंदा विश्वविद्यालय के पुनरुद्धार ने भारत को बौद्ध शिक्षा के वैश्विक केंद्र के रूप में फिर से स्थापित किया। सरकार ने बौद्ध साहित्य के संरक्षण को सुनिश्चित करते हुए पाली को एक शास्त्रीय भाषा के रूप में भी मान्यता दी। पीएम मोदी का बौद्ध धर्म पर जोर सांस्कृतिक और आध्यात्मिक नेतृत्व के प्रति भारत के समर्पण को दर्शाता है। बौद्ध विरासत के साथ उनका गहरा जुड़ाव शांति, सद्भाव और साझा सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। बौद्ध देशों के साथ संबंधों को गहरा करके और अपनी बौद्ध विरासत को पुनर्जीवित करके, भारत बौद्ध धर्म में बताए गए शांति और ज्ञान को बढ़ावा देने वाले वैश्विक केंद्र के रूप में अपनी भूमिका को मजबूत करना जारी रखता है।

पीएम मोदी ने कहा- नांदेड़ में हुई दुर्घटना में लोगों की मृत्यु से दुःखी हूं, पीड़ित परिवारों को मदद का भी ऐलान

नई दिल्ली प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को महाराष्ट्र के नांदेड़ में हुई दुर्घटना में लोगों की मृत्यु पर शोक व्यक्त किया। साथ ही घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य होने की कामना की। उन्होंने प्रत्येक मृतक के परिजनों को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से 2 लाख और घायलों को 50,000 रुपए की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने पीएम मोदी की तरफ से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बयान जारी करते हुए लिखा, ”महाराष्ट्र के नांदेड़ में हुई दुर्घटना में लोगों की मृत्यु से दुःखी हूं। जिन लोगों ने अपने प्रियजनों को खोया है, उनके प्रति संवेदनाएं। घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं। स्थानीय प्रशासन प्रभावित लोगों की सहायता कर रहा है। प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से प्रत्येक मृतक के परिजनों को 2 लाख रुपए की अनुग्रह राशि दी जाएगी और घायलों को 50,000 रुपए दिए जाएंगे।” इससे पहले महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नांदेड़ हादसे पर दुख जताया और मृतकों के परिजनों को मुख्यमंत्री राहत कोष से 5 लाख की आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया। सीएम फडणवीस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ”यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि आज सुबह नांदेड़ जिले के असेगांव में एक दुर्घटना में कुछ महिलाओं की मृत्यु हो गई, जब 11 महिला मजदूरों को ले जा रही एक ट्रैक्टर ट्रॉली एक कुएं में गिर गई। मैं उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। ये महिलाएं हिंगोली जिले के गुंजगांव की रहने वाली थीं और कृषि कार्य के लिए जा रही थीं। महिलाओं को कुएं से निकालने का काम युद्ध स्तर पर शुरू कर दिया गया है और स्थानीय उप-कलेक्टर और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सहित पूरी टीम मौके पर मौजूद है। तीन महिलाओं को सुरक्षित निकाल लिया गया है। हम हिंगोली और नांदेड़ प्रशासन दोनों के संपर्क में हैं। मृतकों के परिजनों को मुख्यमंत्री राहत कोष से 5 लाख रुपए की आर्थिक सहायता दी जाएगी।” बताया जा रहा है कि खेती के काम के लिए जा रही महिला मजदूरों का ट्रैक्टर कुएं में गिर गया। इस हादसे मे सात महिला मजदूरों की मौत हो गई, जबकि तीन को बचा लिया गया।

कुछ आंतकवादी जंगलों में छिपे हुए हैं जो कि अपना‌ रूट भी बदल सकते हैं, सुरक्षा बलों की टीमें काम में जुटी

सांबा जम्मू-कश्मीर के कठुआ में आतंकियों की हलचल देखी गई है जिसके बाद इलाके के लोगों में दहशत का माहौल बन गया है। आप को बता दें कि कठुआ और ऊधमपुर जिले के बीच के जंगलों में आतंकवादियों के छिपे होने के चलते अब हर जगह पर व्यापक सर्च अभियान चलाया जा रहा है। इसी बीच सुरक्षा बलों को यह सूचना मिली है कि यहां पर आतंकियों की गतिविधियां देखी गई है। जिला सांबा में आतंकवादियों के पुराने रूट बेई नाले में जम्मू-कश्मीर पुलिस के एसओजी ने तलाशी अभियान चलाया है। इस दौरान एसओजी ने उन पुराने ठिकानों को खंगाला जो कि कुछ वर्ष पहले रूट रहे हैं तो वहीं दूसरी तरफ अभी भी कुछ आंतकवादी जंगलों में छिपे हुए हैं जो कि अपना‌ रूट भी बदल सकते हैं, जिससे पहले ही सतर्क होकर पुलिस टीमें तलाशी अभियान चला रही हैं।

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