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सौगात-ए-सत्ता वाली किट बांट रही भाजपा, अब कहां गया ‘बंटेंगे तो कटेंगे’ वाला नारा, उद्धव ठाकरे ने हमला बोला

मुंबई महाराष्ट्र के पूर्व सीएम उद्धव ठाकरे ने भाजपा पर तीखा हमला बोला है। मुस्लिम समुदाय के लोगों को ईद पर सौगात-ए-मोदी किट बांटने की योजना पर उन्होंने भाजपा पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि इससे भाजपा का दोहरा रवैया उजागर हो गया है। यह सौगात-ए-मोदी नहीं है बल्कि सौगात-ए-सत्ता है। उन्होंने रहा कि इससे भाजपा एक्सपोज हो रही है। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में तो इन लोगों ने बंटेंगे तो कटेंगे का नारा दिया था और अब सौगात-ए-मोदी वाली किट बांट रहे हैं। आखिर यह कैसी किट है। ऐसा लगता है कि राजनीतिक स्वार्थ को साधने वाली यह किट है। उद्धव ठाकरे ने कहा कि यह योजना भाजपा ने बिहार चुनाव में फायदा उठाने के लिए बनाई है। भाजपा तो मुझ पर आरोप लगाती रही है कि मैंने हिंदुत्व को छोड़ दिया है, अब वही बताए कि क्या कर रही है। उद्धव ठाकरे ने कुणाल कामरा के मसले पर भी खूब बात की। उन्होंने कहा कि सरकार कुणाल कामरा को ‘गद्दारों’ के अपमान पर समन जारी कर रही है। लेकिन इस सरकार ने अब तक राहुल सोलापुरकर के मसले पर कुछ नहीं कहा है, जिसने छत्रपति शिवाजी महाराज का अपमान किया था। बता दें कि बुधवार को ही डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे पर तंज कसा था और कहा था कि शिवसेना मालिक और गुलामों की नहीं बल्कि समर्पित कार्यकर्ताओं की पार्टी है। शिवसेना (यूबीटी) से शिवसेना में शामिल हुए कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए शिंदे ने कहा कि उनके जैसे सैनिक सोने का चम्मच लेकर पैदा नहीं हुए। उन्होंने कहा, ‘हमने लोगों के जीवन में सुनहरे दिन लाने के लिए कड़ी मेहनत की है। हम जमीनी कार्यकर्ता हैं और मैं आपका सहयोगी हूं। यह कार्यकर्ताओं की पार्टी है, न कि मालिक और गुलामों की पार्टी।’ शिंदे ने कहा कि उन्होंने हमेशा आलोचना और दुर्व्यवहार का जवाब अपने काम से दिया है। अपने झंडे से हरा रंग क्यों नहीं हटा लेती भाजपा: उद्धव एक और तीखा तंज कसते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा कि ‘बटेंगे तो कटेंगे’ का नारा लगाने वाले अब दौरा करने जा रहे हैं। कह रहे हैं कि वे होली के नाम पर पूरे साल मुसलमानों के नाम पर घृणा फैलाएंगे और फिर चुनाव आने पर उन्हें लुभाएंगे। ठाकरे ने भाजपा की आलोचना करते हुए कहा, ‘इससे पहले कि आप हम पर हिंदुत्व छोड़ने का आरोप लगाएं, आपको अपने झंडे से हरा रंग हटा देना चाहिए।’ अब उनका पाखंड उजागर हो गया है। ठाकरे ने कहा कि वे हरा रंग नहीं हटाएंगे। आपने चुनाव से पहले कई वादे किए थे। बिजली बिल माफी, कर्ज माफी, लड़की बहिन योजना का क्या हुआ?

जस्टिस यशवंत वर्मा कैश मामला: स्टोर रूम 12 दिन बाद पुलिस ने किया सील

नई दिल्ली दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा के घर पर बड़े पैमाने पर कैश बरामद होने के मामले में दिल्ली पुलिस की जांच 12 दिन बाद आगे बढ़ी है। बुधवार को दिल्ली पुलिस की एक टीम जस्टिस यशवंत वर्मा के घर पहुंची और उस स्टोर रूम को सील किया, जिसके बारे में कहा जा रहा है कि वहां नोटों के भरे कई बोरे मिले थे, जिनमें आग लगी थी। यह वाकया उस समय सामने आया था, जब जस्टिस वर्मा के घर के एक हिस्से में आग लग गई थी। फायर कंट्रोल रूम को फोन किया गया तो मौके पर टीम पहुंची और उसने नोटों से भरे बोरे पाए, जिनमें से कुछ नोटों के जलने की बात कही जा रही है। दिल्ली पुलिस कमिश्नर ने कुछ वीडियो और फोटो हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस को भेजे हैं। इस बीच पुलिस ने जांच 12 दिनों के बाद आगे बढ़ाई है। उनके यहां स्टोर रूम को सील किया गया है तो वहीं अग्निकांड वाले दिन की सीसीटीवी फुटेज भी पुलिस लेकर गई है। दरअसल जज का कहना है कि स्टोर रूम उनके घर के मुख्य परिसर का हिस्सा नहीं है और बाहर स्थित है। ऐसे में यदि वहां कुछ मिला है तो जरूरी नहीं है कि उससे उनका ही संबंध हो। जस्टिस वर्मा की ओर से ऐसी दलील दिए जाने के बाद सत्यता की जांच करने के लिए भी पुलिस सीसीटीवी फुटेज को अहम मान रही है। इस मामले की पुलिस और फायर डिपार्टमेंट की ओर से अलग-अलग जांच की जा रही है। सूत्रों का कहना है कि फुटेज की अब तक जो जांच हुई है, उसमें किसी अवैध एंट्री की जानकारी नहीं मिली है। सूत्रों ने बताया कि जो भी कैमरे हैं, वे मेन गेट को फोकस करके नहीं लगे हैं। ऐसे में यह रिकॉर्ड नहीं मिल पा रहा है कि किसकी कब एंट्री हुई और कब एग्जिट हुआ है। सुप्रीम कोर्ट की तरफ से गठित जांच आयोग ने भी पुलिस से रिपोर्ट मांगी है। उसके आधार पर ही पुलिस ने 40 पन्नों की एक रिपोर्ट तैयार की है। इस मामले की जांच के लिए अडिशनल सीपी लेवल के दो अधिकारियों को जिम्मेदारी मिली है। बुधवार को डीसीपी देवेश महला और एसीपी वीरेंद्र जैन मौके पर पहुंचे। उनके साथ एक कैमरा टीम भी थी। दो घंटे तक पड़ताल के बाद टीम लौटी तो जाते हुए कमरे को भी सील कर गई। इससे पहले उस स्टोररूम की वीडियोग्राफी भी हुई, जहां बड़े पैमाने पर कैश मिलने का दावा हो रहा है। बता दें कि होली के दिन 14 मार्च को रात में 11:15 पर आग लगने की सूचना फायर विभाग को मिली थी। मौके पर फायर विभाग पहुंचा तो वहां कमरे में कुछ बोरों में नोट भरे हुए मिले। इनमें से कुछ नोट अधजली अवस्था में थे।

रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने दी जानकारी, भारत आएंगे व्लादिमीर पुतिन, स्वीकार किया निमंत्रण

मॉस्को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भारत दौरे के निमंत्रण को स्वीकार कर लिया है। रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने गुरुवार यह जानकारी दी और कहा कि इस दौरे के लिए तैयारियां चल रही हैं। उन्होंने कहा कि अब हमारी बारी है। रूसी अंतर्राष्ट्रीय मामलों की परिषद (आरआईएसी) द्वारा आयोजित “रूस और भारत: एक नए द्विपक्षीय एजेंडे की ओर” शीर्षक वाले सम्मेलन को संबोधित करते हुए लावरोव ने कहा, “पुतिन के भारत दौरे के लिए वर्तमान में व्यवस्था की जा रही है।” रूसी विदेश मंत्री के हवाले से सरकारी समाचार एजेंसी TASS ने कहा, “राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत सरकार के प्रमुख के भारत दौरे के निमंत्रण को स्वीकार कर लिया है। रूसी राष्ट्र प्रमुख की भारत गणराज्य की यात्रा की वर्तमान में तैयारी की जा रही है।” लावरोव ने कहा कि पिछले साल फिर से चुने जाने के बाद प्रधानमंत्री मोदी की पहली विदेश यात्रा रूस की थी। उन्होंने कहा, “अब हमारी बारी है।” हालांकि, यात्रा की तारीखों का अभी खुलासा नहीं किया गया है। प्रधानमंत्री मोदी ने जुलाई 2024 में रूस का दौरा किया था, जो लगभग पांच वर्षों में देश की उनकी पहली यात्रा थी। इससे पहले, उन्होंने 2019 में एक आर्थिक सम्मेलन में भाग लेने के लिए सुदूर पूर्वी शहर व्लादिवोस्तोक का दौरा किया था। पिछली यात्रा के दौरान, मोदी ने पुतिन को भारत आने का निमंत्रण दिया था। 24 मार्च को, लावरोव ने कहा कि रूस भारत के साथ विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी विकसित कर रहा है। लावरोव ने एक कार्यक्रम में कहा कि रूस चीन, भारत, ईरान, उत्तर कोरिया और स्वतंत्र राज्यों के राष्ट्रमंडल (सीआईएस) देशों जैसे देशों के साथ सक्रिय रूप से संबंधों का विस्तार कर रहा है। शीर्ष रूसी राजनयिक ने कहा, “पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना के साथ व्यापक साझेदारी और रणनीतिक सहयोग के संबंध अभूतपूर्व स्तर के आपसी विश्वास का दावा करते हैं। भारत के साथ विशेष रूप से विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी विकसित हो रही है।”

ओम बिरला ने भी सड़क परिवहन मंत्री की सराहना करते हुए टिप्पणी की, अब कोई रास्ता बचा है क्या

नई दिल्ली हाईवे मैन कहे जाने वाले केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की तारीफ का लंबा दौर संसद में चला। एक ओर जहां लोकसभा में गुरुवार विपक्षी शिवसेना (उद्धव बालासाहब ठाकरे) के एक सदस्य ने देशभर में सड़कों और राजमार्गों के निर्माण के लिए गडकरी की प्रशंसा की। वहीं, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी सड़क परिवहन मंत्री की सराहना करते हुए टिप्पणी की। सदन में प्रश्नकाल में महाराष्ट्र के परभनी से शिवसेना (उबाठा) के सदस्य संजय जाधव ने गडकरी की प्रशंसा करते हुए कहा, ‘वह महाराष्ट्र के ऐसे सुपुत्र हैं जिन्होंने देशभर में सड़कों पर बहुत काम किया है।’ गडकरी ने जाधव के पूरक प्रश्न का उत्तर देते हुए सदन को बताया कि इंदौर से हैदराबाद तक एक राजमार्ग बनाया जा रहा है जो महाराष्ट्र के नांदेड़ से निकलेगा। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में पुणे से अहमदनगर से होते हुए छत्रपति संभाजीनगर के मार्ग पर 15 हजार करोड़ रुपये की लागत से एक नया ‘‘ग्रीन अलाइनमेंट’’ तैयार जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह एक अभिनव मॉडल है और इसमें सरकार का एक भी रुपया नहीं लगा है। गडकरी ने कहा कि पुणे से छत्रपति संभाजीनगर का रास्ता अभी छह से सात घंटे में तय होता है, लेकिन इस मार्ग के बनने के बाद दो घंटे में पूरा हो जाएगा। केंद्रीय मंत्री के जवाब के दौरान ही लोकसभा अध्यक्ष ने चुटकी लेते हुए कहा, ‘कोई मार्ग बचा है क्या?’ जम्मू कश्मीर की बारामूला संसदीय सीट से सदस्य अब्दुल रशीद शेख के पूरक प्रश्न के उत्तर में गडकरी ने कहा कि उत्तरी राज्य में दो लाख करोड़ रुपये की परियोजनाओं पर काम हो रहा है और 105 सुरंग बनाई जा रही हैं। गडकरी ने कहा कि एशिया की सबसे बड़ी जोजिला सुरंग का निर्माण भी वहां किया गया है।

श्रीलंकाई नौसेना ने विशेष अभियान के तहत 11 भारतीय मछुआरों को अवैध रूप से मछली पकड़ने के आरोप में किया गिरफ्तार

कोलंबो श्रीलंकाई नौसेना ने गुरुवार को विशेष अभियान के तहत उत्तरी क्षेत्र में डेल्फ़्ट द्वीप के समीप 11 भारतीय मछुआरों को कथित रूप से अपने जलक्षेत्र में अवैध रूप से मछली पकड़ने के आरोप में गिरफ्तार किया और उनकी ट्रॉलर को जब्त कर लिया। गिरफ्तार किए गए मछुआरों को कांकासनथुराई बंदरगाह लाया गया है, जहां उन्हें आगे की कानूनी कार्यवाही के लिए मैलाडी के मत्स्य निरीक्षक को सौंपा जाएगा। श्रीलंकाई नौसेना नियमित रूप से अपने जलक्षेत्र में अवैध मछली पकड़ने की गतिविधियों पर नजर रखती है और इस तरह की कार्रवाइयां करती है। मछुआरों की समस्या भारतीय और श्रीलंकाई मछुआरों के बीच समुद्री सीमा का उल्लंघन एक संवेदनशील मुद्दा रहा है। पाक जलडमरूमध्य, जो तमिलनाडु को श्रीलंका से अलग करता है, दोनों देशों के मछुआरों के लिए समृद्ध मछली पकड़ने का क्षेत्र है। अक्सर, मछुआरे अनजाने में एक-दूसरे के जलक्षेत्र में प्रवेश कर जाते हैं, जिसके परिणामस्वरूप गिरफ्तारियाँ और नौकाओं की जब्ती होती है। अतीत को कुछ घटनाएं हाल ही में, श्रीलंकाई नौसेना ने जनवरी 2025 में 8 भारतीय मछुआरों को गिरफ्तार किया था और उनकी दो नौकाएँ जब्त की थीं। इसके अलावा, दिसंबर 2024 में, श्रीलंकाई अधिकारियों ने इस वर्ष अब तक 537 भारतीय मछुआरों को गिरफ्तार करने की सूचना दी थी। भारतीय उच्चायोग ने इन मछुआरों की शीघ्र रिहाई का आग्रह किया था और मानवीय दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया था। मछुआरों का यह मुद्दा दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों में तनाव का कारण बना हुआ है, और इसे सुलझाने के लिए मानवीय और रचनात्मक दृष्टिकोण की आवश्यकता है।

गुजरात से हैरान करने वाला मामला, 40 छात्रों ने ब्लेड से काटे हाथ

गुजरात गुजरात से हैरान करने वाला मामला सामने आया है। गुजरात के एक प्राइमरी स्कूल में 40 छात्रों ने ब्लेड से अपने हाथ काट लिए। पांचवीं से आठवीं कक्षा के 40 छात्रों के हाथों पर ब्लेड से बने जख्मों के निशान मिले। घटना से स्कूल और गांव में अफरा-तफरी मच गई। अभिभावकों ने इसकी ग्राम पंचायत में शिकायत दर्ज की और पुलिस से हस्तक्षेप की मांग की। मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। दरअसल गुजरात के अमरेली जिले के मुंजियासर प्राथमिक स्कूल में 40 छात्रों के हाथ पर कटे का निशाना मिला था। बच्चों के हाथ ब्लेड से काटे गए थे। सभी बच्चे पांचवीं से आठवीं कक्षा के छात्र हैं। सामूहिक रूप से बच्चों के हाथ ब्लेड से कटने का मामला सामने आने के बाद स्कूल और गांव में अफरा-तफरी मच गई। नाराज अभिभावकों ने स्कूल प्रशासन से स्पष्टीकरण मांगा, लेकिन जवाब न मिलने पर उन्होंने ग्राम पंचायत में शिकायत दर्ज की और पुलिस से हस्तक्षेप की मांग की। मामले की गंभीरता को देखते हुए धारी के सहायक पुलिस अधीक्षक (ASP) जयवीर गढ़वी ने स्कूल पहुंचे। उन्होंने सीसीटीवी फुटेज की समीक्षा की और बच्चों से पूछताछ कर घटना का सच उजागर किया। ASP ने खुलासा किया कि बच्चों ने Truth and Dare खेल के खुद के हाथ ब्लेड से काटे थे। ASP ने खुलासा किया कि सातवीं कक्षा के एक छात्र ने खेल के दौरान दूसरों को चुनौती दी कि जो अपने हाथ पर ब्लेड से कट लगाएगा, उसे 10 रुपए मिलेंगे। जो ऐसा नहीं करेगा, उसे 5 रुपए देने होंगे। इस चुनौती के चलते 40 से अधिक बच्चों ने पेंसिल शार्पनर की ब्लेड से अपने हाथों पर निशान बना लिए। इसकी सूचना जिला प्राथमिक शिक्षा अधिकारी (DPEO) को दी गई है। मामले की जांच जारी पुलिस ने साफ किया कि यह घटना Truth and Dare खेल से संबंधित है, न कि किसी ऑनलाइन गेम से। बच्चों ने खेल के दौरान एक-दूसरे के हाथों पर शार्पनर की ब्लेड से निशान बनाए। अभिभावकों और ग्रामीणों ने स्कूल प्रशासन की लापरवाही पर नाराजगी जताई है। अब पुलिस और शिक्षा विभाग इस मामले की गहन जांच कर रहे हैं ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके। स्कूल प्रशासन ने दी थी हिदायत जांच से यह भी पता चला कि स्कूल प्रशासन ने घटना की जानकारी मिलने पर बच्चों को घर पर कुछ न बताने की सख्त हिदायत दी थी। उन्हें कहा गया कि अगर कोई हाथ के निशानों के बारे में पूछे, तो कह दें कि खेलते समय गिरने से चोट लगी। हालांकि, एक अभिभावक को सच का पता चल गया और उसने स्कूल में जाकर पूछताछ की। इसके बाद प्रशासन ने अभिभावकों के साथ बैठक बुलाई।

Nandini Milk की कीमतों में बढ़ोतरी, 4 रुपये बढ़ाने का लिया गया फैसला

बेंगलुरु कर्नाटक सरकार ने गुरुवार को एक बड़ा फैसला लिया. राज्य में दूध की कीमत 4 रुपये प्रति लीटर बढ़ाने को मंजूरी दे दी गई है. यह बढ़ी हुई रकम सीधे किसानों को दी जाएगी. यह फैसला किसानों, कई संगठनों और पशुपालन विभाग की भारी मांग के बाद लिया गया है. राज्य की दूध फेडरेशनों ने भी इस कीमत बढ़ोतरी का समर्थन किया है. पहले मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा था कि दूध की कीमत तभी बढ़ाई जाएगी, जब बढ़ी हुई पूरी रकम किसानों को मिले. वह इस बढ़ोतरी के खिलाफ थे, लेकिन उन्होंने कर्नाटक मिल्क फेडरेशन (KMF) को भरोसा दिया था कि कैबिनेट जल्द ही इस पर फैसला लेगी. खबर थी कि गुरुवार को कर्नाटक कैबिनेट KMF से सप्लाई होने वाले नंदिनी दूध की कीमत बढ़ाने पर फैसला करेगी. सूत्रों के हवाले से IANS ने बताया था कि KMF और किसान संगठन 5 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की मांग कर रहे थे. लेकिन सरकार ने पहले 3 रुपये बढ़ाने का मन बनाया था. आखिरकार, 4 रुपये की बढ़ोतरी को मंजूरी मिली. पहले भी कीमत बढ़ाने की बात हुई थी इससे पहले 5 मार्च को कर्नाटक सरकार ने कहा था कि वह लोकप्रिय नंदिनी दूध की कीमत बढ़ाने की तैयारी कर रही है. 10 फरवरी को कर्नाटक राज्य रायता संघ और ग्रीन ब्रिगेड ने बेंगलुरु में KMF ऑफिस के बाहर प्रदर्शन किया था. उन्होंने मांग की थी कि दूध की खरीद कीमत को कम से कम 50 रुपये प्रति लीटर किया जाए. साथ ही, न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) लागू होने तक 10 रुपये प्रति लीटर का अंतरिम समर्थन मूल्य देने की मांग भी उठी थी. पिछले साल भी बढ़ी थी कीमत 25 जून 2024 को कर्नाटक सरकार ने दूध की कीमत 2 रुपये बढ़ाई थी. साथ ही हर पैकेट में 50 मिलीलीटर दूध अतिरिक्त जोड़ा गया था. इस फैसले की काफी आलोचना हुई थी. किसानों को राहत की उम्मीद इस नई बढ़ोतरी से किसानों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है. KMF और किसान संगठनों का कहना है कि दूध उत्पादन की लागत बढ़ गई है, इसलिए कीमत बढ़ाना जरूरी था. अब देखना यह है कि इस फैसले का असर आम लोगों पर कितना पड़ता है. लेकिन सरकार का कहना है कि यह कदम किसानों के हित में उठाया गया है.

कानून में संशोधन वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा और जरूरतमंद महिलाओं के कल्याण को सुनिश्चित करने के लिए किया गया : आलोक कुमार

नई दिल्ली  विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने वक्फ संशोधन विधेयक 2024 के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन के लिए एआईएमपीएलबी की आलोचना की है. उन्होंने कहा कि विरोध करना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की बैठकों में पहले ही सभी मुद्दों पर गहन चर्चा की जा चुकी है. मीडिया से बात करते हुए विहिप प्रमुख ने बताया कि देश भर में व्यापक विचार-विमर्श के बाद जेपीसी इस निष्कर्ष पर पहुंची है कि कानून में संशोधन वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा और मुस्लिम समुदाय, खासकर जरूरतमंद महिलाओं और बच्चों के कल्याण को सुनिश्चित करने के लिए किया गया है. कुमार ने कहा, “लोकतंत्र में विरोध करना अधिकार है. भारत में भी मौलिक अधिकार हैं. लेकिन आपने उन मुद्दों पर चर्चा कहां की, जिन पर यह किया जा रहा है? जेपीसी ने किया, पूरे देश में गई और फिर सभी से बात करने के बाद पाया कि वक्फ में संशोधन मुस्लिम समुदाय के कल्याण के लिए है. यह वक्फ की संपत्तियों की रक्षा के लिए है.” उन्होंने कहा, “वक्फ का पैसा जरूरतमंद महिलाओं और बच्चों के लिए है. इसलिए जेपीसी ने भी अपनी रिपोर्ट दी है. इस पर लोकसभा और राज्यसभा में भी विचार किया जाएगा. वहां अपनी बात रखने के लिए एक मंच है. मुझे लगता है कि अगर मुस्लिम समुदाय गुमराह न हो और ईमानदारी से सोचे तो उन्हें लगेगा कि अल्लाह के नाम पर दी गई संपत्ति का सही इस्तेमाल होना चाहिए. इस बिल का उद्देश्य यही है.” वक्फ संशोधन विधेयक के खिलाफ राष्ट्रव्यापी आंदोलन ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) ने वक्फ संशोधन विधेयक के खिलाफ राष्ट्रव्यापी आंदोलन शुरू किया है. बुधवार को पटना में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया गया. बिहार और देश के विभिन्न हिस्सों से लोग बिल का विरोध करने के लिए एकत्र हुए और विधेयक को गैरकानूनी और मुसलमानों के अधिकारों पर सीधा हमला बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार वक्फ की उन संपत्तियों को जब्त करने की कोशिश कर रही है, जिन्हें उनके पूर्वजों ने लोगों के कल्याण के लिए दिया था. उन्होंने दावा किया कि सरकार इन संपत्तियों पर अवैध रूप से कब्जा करने का प्रयास कर रही है. राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के प्रमुख लालू प्रसाद यादव और बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव भी AIMPLB के विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए. तेजस्वी ने अपने संबोधन में पटना आए लोगों को आश्वासन दिया कि उनकी पार्टी और उनके नेता लालू यादव असंवैधानिक वक्फ संशोधन विधेयक के खिलाफ उनकी लड़ाई में उनके साथ मजबूती से खड़े हैं.

UK के बाद समान नागरिक संहिता लागू करने वाला गुजरात दूसरा राज्य बनेगा

अहमदाबाद  उत्तराखंड के बाद गुजरात समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने वाला देश का दूसरा राज्य बन जाएगा। राज्य के कानून मंत्री ऋषिकेश पटेल ने कल राज्य विधानसभा में यह बात कही। राज्य के कानून मंत्री ऋषिकेश पटेल ने कहा कि समान नागरिक संहिता लागू करने का निर्णय राज्य के सभी लोगों के लिए समान न्याय सुनिश्चित करने और एक भारत श्रेष्ठ भारत की अवधारणा को साकार करने की दिशा में एक कदम है। इस दिशा में राज्य सरकार ने राज्य के लिए समान नागरिक संहिता (यूसीसी) का मूल्यांकन और मसौदा तैयार करने के लिए न्यायमूर्ति रंजना देसाई की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। समिति ने निवासियों, सामाजिक राजनीतिक संगठनों से सुझाव आमंत्रित किए हैं, कानून बनाने में अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए सुझाव प्रस्तुत करने की समय सीमा 15 अप्रैल, 2025 तक बढ़ा दी गई है। निचली अदालतों में डिजिटलीकरण ई-कोर्ट प्रोजेट के बारे में पटेल ने कहा कि हाईकोर्ट और निचली अदालतों में डिजिटलीकरण के लिए 27.84 करोड़ रुपये दिए गए हैं। इससे अदालतों में कागजी काम कम होगा और सब कुछ कंप्यूटर पर होगा। फास्ट ट्रैक कोर्ट के बारे में बताते हुए पटेल ने कहा कि पिछले साल जिला अदालतों ने 18,41,016 मामलों को सुलझाया। मतलब, अदालतों ने बहुत तेजी से काम किया। पटेल ने यह भी बताया कि अलग-अलग कानूनों के लिए राज्य में कई अदालतें बनाई गई हैं। 595 विशेष अदालतें बनाई गई उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट की मंजूरी से, 595 विशेष अदालतें बनाई गई हैं। इनमें अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत आने वाले मामले भी शामिल हैं। गुजरात पीड़ित मुआवजा योजना-2019 के बारे में मंत्री जी ने बताया कि अपराधों के शिकार लोगों को मुआवजा दिया गया। जैसे कि अत्याचार, एसिट अटैक (तेजाब हमला), और पॉक्सों एक्ट (Pocso Act) के तहत आने वाले मामलों में पिछले तीन सालों में 39 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया गया। उन्होंने कहा कि सरकार पीड़ितों की मदद कर रही है। क्या होती है समान नागरिक संहिता(UCC), जानें समान नागरिक संहिता: समान नागरिक संहिता धर्म की परवाह किए बिना सभी नागरिकों के व्यक्तिगत मामलों को नियंत्रित करने के लिए कानूनों का एक सेट रखती है, जो यह सुनिश्चित करती है कि उनके मौलिक और संवैधानिक अधिकार सुरक्षित हैं। यूसीसी फुल फॉर्म यूसीसी का मतलब समान नागरिक संहिता है। समान नागरिक संहिता का अर्थ समान नागरिक संहिता कानूनों के एक सामान्य समूह को संदर्भित करती है, जो भारत के सभी नागरिकों पर विवाह, तलाक, विरासत, गोद लेने और उत्तराधिकार के संबंध में लागू होती है। ये कानून भारत के नागरिकों पर धर्म और लिंग रुझान के बावजूद लागू होते हैं। क्या आप जानते हैं: गोवा में एक समान पारिवारिक कानून है, इस प्रकार यह एकमात्र भारतीय राज्य है, जहां समान नागरिक संहिता है और 1954 का विशेष विवाह अधिनियम किसी भी नागरिक को किसी विशेष धार्मिक व्यक्तिगत कानून के दायरे से बाहर शादी करने की अनुमति देता है। समान कानूनों की उत्पत्ति ब्रिटिश सरकार ने 1840 में लेक्स लोकी की रिपोर्ट के आधार पर अपराधों, सबूतों और अनुबंधों के लिए एक समान कानून बनाए थे, लेकिन हिंदुओं और मुसलमानों के व्यक्तिगत कानूनों को उन्होंने जानबूझकर कहीं छोड़ दिया था। दूसरी ओर ब्रिटिश भारत न्यायपालिका ने ब्रिटिश न्यायाधीशों द्वारा हिंदू, मुस्लिम और अंग्रेजी कानून को लागू करने का प्रावधान किया। साथ ही उन दिनों सुधारक महिलाओं द्वारा मूलतः धार्मिक रीति-रिवाजों जैसे सती आदि के तहत किये जाने वाले भेदभाव के विरुद्ध कानून बनाने के लिए आवाज उठा रहे थे। संविधान सभा की स्थापना की गई थी, जिसमें दोनों प्रकार के सदस्य शामिल थे: वे जो समान नागरिक संहिता को अपनाकर समाज में सुधार चाहते थे जैसे डॉ. बी. आर अम्बेडकर और अन्य मुस्लिम प्रतिनिधि थे, जिन्होंने व्यक्तिगत कानूनों को कायम रखा। साथ ही समान नागरिक संहिता के समर्थकों का संविधान सभा में अल्पसंख्यक समुदायों द्वारा विरोध किया गया था। परिणामस्वरूप, डीपीएसपी (राज्य नीति के निदेशक सिद्धांत) के भाग IV में अनुच्छेद 44 के तहत संविधान में केवल एक पंक्ति जोड़ी गई है।

भारतीय रेल का बड़ा फैसला: वेटिंग टिकट वालों को नहीं मिलेगी स्टेशन में एंट्री

नई दिल्ली अगर आप भी हाल-फिलहाल के दिनों में ट्रेन (भारतीय रेल) से सफर करने वाले हैं और अगर आपका टिकट वेटिंग लिस्ट में है तो ये खबर आपके लिए ही हैं। वेटिंग टिकट को लेकर इंडियन रेलवे ने बड़ा फैसला लिया है। वेटिंग टिकट वाले यात्रियों को ट्रेन में सफर करने की तो छोड़िए वैसे यात्रियों को अब स्टेशन में भी एंट्री नहीं मिलेगी। संसद में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुधवार (26 मार्च) को जानकारी दी कि रेलवे स्टेशनों पर भीड़ प्रबंधन को बेहतर बनाने के लिए कई अहम कदम उठाए गए हैं। इनमें चौड़े फुट-ओवर-ब्रिज, सीसीटीवी निगरानी और वॉर रूम की व्यवस्था शामिल है। रेल मंत्री ने कहा कि त्यौहारों और मेलों के दौरान भारी भीड़ को कंट्रोल करने के लिए रेलवे ने सीमित प्रवेश नियंत्रण प्रणाली लागू की है। इस व्यवस्था के तहत स्टेशनों के बाहर होल्डिंग क्षेत्र बनाए गए हैं, जहां यात्रियों को तब तक एंट्री नहीं दिया जाता जब तक ट्रेन प्लेटफॉर्म पर नहीं आ जाती। बेटिकट और वेटिंग टिकट वालों पर विशेष रूप से नजर रखी जा रही है। वहीं नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर हाल ही में हुई भगदड़ से सबक लेते हुए रेलवे जोनल अधिकारियों को प्लेटफॉर्म टिकट की बिक्री पर कंट्रोल करने का अधिकार दिया गया है। हालांकि वृद्ध, अशिक्षित और महिला यात्रियों की सहायता के लिए कुछ विशेष परिस्थितियों में प्लेटफॉर्म टिकट जारी किया जाएगा। देश के 60 स्टेशनों पर अब सिर्फ कन्फर्म टिकट वालों को एंट्री रेल मंत्री के अनुसार 2024 के त्यौहारी सीजन के दौरान सूरत, उधना, पटना और नई दिल्ली में होल्डिंग एरिया बनाए गए थे।महाकुंभ के दौरान प्रयागराज के नौ स्टेशनों पर भी ये व्यवस्था लागू की गई थी। अब 60 स्टेशनों पर पूर्ण प्रवेश नियंत्रण लागू किया जाएगा। केवल कन्फर्म रिजर्व टिकट वाले यात्रियों को प्लेटफॉर्म तक एंट्री मिलेगा, जबकि वेटिंग लिस्ट और बिना टिकट यात्रियों को बाहरी प्रतीक्षा क्षेत्र में रहना होगा। अनाधिकृत प्रवेश द्वारों को भी सील किया जाएगा। रेल मंत्री ने संसद में कहा कि बड़े रेलवे स्टेशनों पर वॉर रूम स्थापित किए जाएंगे जहां भीड़भाड़ की स्थिति में सभी विभागों के अधिकारी समन्वय से काम करेंगे। सभी भारी भीड़ वाले स्टेशनों पर वॉकी-टॉकी, अनाउंसमेंट प्रणाली और डिजिटल संचार उपकरण लगाए जाएंगे। रेलवे कर्मचारियों को नई वर्दी और आईडी कार्ड मिलेगा रेलवे कर्मचारियों के लिए नई वर्दी और आईडी कार्ड जारी किए जाएंगे ताकि केवल अधिकृत व्यक्ति ही स्टेशनों में एंट्री कर सकें। प्रमुख स्टेशनों पर स्टेशन डायरेक्टर नियुक्त किए जाएंगे जिन्हें वित्तीय अधिकार दिए जाएंगे ताकि वे तत्काल फैसले ले सकें। स्टेशन डायरेक्टर को स्टेशन की क्षमता और उपलब्ध ट्रेनों के अनुसार टिकटों की बिक्री को कंट्रोल करने का अधिकार दिया जाएगा। स्टेशनों पर सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जीआरपी, स्थानीय पुलिस और सिविल प्रशासन को भी शामिल किया जाएगा।

एयरपोर्ट में महिला पैसेंजर ने कपड़े उतारे, हंगामा किया… चीखती-चिल्लाती रही

टेक्सास अमेरिका के टेक्सास स्थित एक एयरोपोर्ट का वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें एक महिला अचानक कपड़े उतारकर हिंसक हो गई है। खबर है कि महिला ने कई लोगों को घायल किया और लोगों को दांतों से भी काटा। कहा जा रहा है कि वह खुद को देवी वीनस बता रही थी। घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। टेक्सास के डेलस पोर्ट वर्थ इंटरनेशनल पर यह घटना 14 मार्च की है। महिला की पहचान समांथा पामा के तौर पर हुई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, महिला पर एयरपोर्ट के रेस्त्रां मैनेजर को उसकी ही पैंसिल से सिर और चेहरे पर चोट पहुंचाने की कोशिश के आरोप हैं। इसके अलाव उसपर एक शख्स के हाथों पर बुरी तरह से काटने के भी आरोप लगे हैं। वायरल वीडियो में नजर आ रहा है कि महिला पूरी तरह से नग्न है और पानी फेंक रही है। उसने टीवी की स्क्रीन को तोड़ दिया और अश्लील हरकतें कर रही है। खबर है कि एयरपोर्ट पर मौजूद एक महिला ने पामा को कोट भी दिया, जिसके बाद वह भाग खड़ी हुई और शोर मचाने लगी। पुलिस को पामा टर्मिनल डी के गेट डी1 पर मिली है। खास बात है कि वह खून से लथपथ थी, लेकिन कथित तौर पर उनका नहीं था। इस हरकत के बाद पामा को पुलिस हिरासत में ले लिया गया। उन्होंने पुलिस को बताया है कि वह उस दिन अपनी दवा नहीं ले सकी थीं। हालांकि, अब तक यह भी साफ नहीं है कि वह किस बीमारी की कौन सी दवा ले रही थीं। उन्होंने पुलिस को यह भी जानकारी दी है कि वह अपनी 8 साल की बेटी के साथ यात्रा कर रही थीं। व्यस्त एयरपोर्ट पर इस तरह के बर्ताव की वजह अब तक साफ नहीं हो सकी है। कहा जा रहा है कि पामा किसी मानसिक बीमारी का शिकार हो सकती हैं, लेकिन स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। पुलिस की तरफ से जांच जारी है।

गाजा में जनता का विरोध, युद्ध शुरू होने के बाद से हमास के खिलाफ सबसे बड़ा प्रदर्शन

गाजा इजराइल के साथ युद्ध शुरू होने के बाद से उत्तरी गाजा में फिलिस्तीनियों ने ही सबसे बड़ा हमास विरोधी विरोध प्रदर्शन किया है. इसमें शामिल होने लिए सैकड़ों फिलिस्तीनी सड़कों पर उतरे. उन्होंने युद्ध को समाप्त करने की मांग की और मांग की कि हमास सत्ता से हट जाए. ये प्रदर्शन गाजा पट्टी के उत्तरी हिस्से में बेत लाहिया में हुए. इजरायली सेना द्वारा लगभग दो महीने के संघर्ष विराम के बाद गाजा पर अपनी गहन बमबारी फिर से शुरू करने के एक हफ्ते बाद भीड़ इकट्ठा हुई थी। मंगलवार, 25 मार्च की देर रात सोशल मीडिया पर शेयर किए गए वीडियो और तस्वीरों में सैकड़ों प्रदर्शनकारी, जिनमें ज्यादातर पुरुष थे, “बाहर, बाहर, बाहर, हमास बाहर” और “हमास आतंकवादियों” के नारे लगाते हुए दिखाई दिए. उनके हाथों में प्ले कार्ड थे जिनपर “युद्ध बंद करो” और “हम शांति से रहना चाहते हैं” जैसे नारे लिखे हुए थे. सवाल यह है कि आखिर फिलिस्तीन में आम लोग अब हमास के खिलाफ क्यों सड़कों पर उतर रहे हैं. जानकारों का कहना है कि आम इंसान जंग से आजीज आ चुके हैं. कुछ ये भी कह रहे हैं कि यह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस चेतावनी का भी असर हो सकता है जिसमें उन्होंने हमास-इजरायल जंग को खत्म करने के लिए फिलिस्तीनियों को कहीं और बसाने की बात कही थी. खैर इसका कारण जो भी, लेकिन आम फिलिस्तीनियों का सड़क पर उतरना गाजा और पूरे मध्य पूर्व में शांति की आहट का संकेत देता है. बुधवार को ज्यादातर प्रदर्शन गाजा के उत्तरी हिस्से में हुए. लोग 17 महीने से चल रही इजराइल के साथ जंग को खत्म करने की मांग कर रहे थे, जिसने गाजा में जिंदगी को बहुत मुश्किल बना दिया है. लेकिन प्रदर्शनकारियों ने हमास की भी खुलकर आलोचना की, जिसका अब भी गाजा पर कब्जा है. बेत लाहिया कस्बे में करीब 3,000 लोग जमा हुए. वहां मंगलवार को भी ऐसा ही प्रदर्शन हुआ था. जनता हमास का पतन चाहती है… जैसे नारे लगाए गए. गाजा शहर के शिजैया इलाके में भी दर्जनों लोगों ने “बाहर, बाहर, हमास बाहर जाओ” के नारे लगाए. ‘हमारे बच्चे मारे गए’ न्यूज एजेंसी एपी की रिपोर्ट के मुताबिक अबेद रदवान नाम के एक शख्स ने कहा, “हमारे बच्चे मारे गए, हमारे घर तबाह हो गए.” उन्होंने बेत लाहिया के प्रदर्शन में हिस्सा लिया था और कहा कि यह युद्ध, हमास, फिलिस्तीनी गुटों, इजराइल और दुनिया की चुप्पी के खिलाफ था. अम्मार हसन, जिन्होंने मंगलवार को प्रदर्शन में हिस्सा लिया, ने बताया कि यह शुरू में युद्ध के खिलाफ छोटा प्रदर्शन था, लेकिन बाद में 2,000 से ज्यादा लोग जुट गए और हमास के खिलाफ नारे लगाने लगे. उन्होंने कहा, “हम सिर्फ हमास को प्रभावित कर सकते हैं. प्रदर्शन से इजराइल रुकेगा नहीं, लेकिन हमास पर असर पड़ सकता है.” हमास ने पहले प्रदर्शनों को हिंसा से रोका था, लेकिन इस बार कोई साफ हस्तक्षेप नहीं दिखा. शायद इसलिए कि इजराइल के साथ जंग फिर शुरू होने के बाद हमास कमजोर दिखाई दे रहा है. हमास के वरिष्ठ नेता बासेम नईम ने फेसबुक पर कहा कि लोगों को प्रदर्शन का हक है, लेकिन उनका ध्यान “अपराधी हमलावर” इजराइल पर होना चाहिए. बेत लाहिया के परिवारों के बुजुर्गों ने इजराइल के नए हमले और गाजा में सभी आपूर्तियों पर सख्त रोक के खिलाफ प्रदर्शनों का समर्थन किया. उन्होंने कहा कि समुदाय इजराइल के खिलाफ सशस्त्र प्रतिरोध का पूरा समर्थन करता है. बेत हनून के मोहम्मद अबू साकर ने कहा, “यह प्रदर्शन राजनीति के बारे में नहीं था, यह लोगों की जिंदगी के बारे में था. हम हत्या और विस्थापन रोकना चाहते हैं. हम इजराइल को नहीं रोक सकते, लेकिन हमास से रियायतें मांग सकते हैं.” दो दिन से लगातार प्रदर्शन जबालिया में भी मंगलवार को ऐसा ही प्रदर्शन हुआ. एक प्रदर्शनकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि वे इसलिए शामिल हुए क्योंकि “सबने हमें नाकाम किया.” उन्होंने इजराइल, हमास, पश्चिमी समर्थित फिलिस्तीनी प्राधिकरण और अरब मध्यस्थों के खिलाफ नारे लगाए. वहां हमास की सुरक्षा बल नहीं दिखे, लेकिन समर्थकों और विरोधियों के बीच झड़पें हुईं. बाद में उन्हें प्रदर्शन में शामिल होने का पछतावा हुआ, क्योंकि इजराइली मीडिया ने हमास विरोध पर जोर दिया. इजराइल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने फिलिस्तीनियों से प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की. उन्होंने कहा, “हमास को गाजा से हटाओ और बंधकों को तुरंत रिहा करो. यही जंग रोकने का तरीका है.” यह प्रदर्शन इजराइल के हमास के साथ संघर्षविराम खत्म करने और सैकड़ों लोगों को मारने वाले हमलों के एक हफ्ते बाद शुरू हुए. इस महीने की शुरुआत में इजराइल ने गाजा में भोजन, ईंधन, दवा और मानवीय सहायता रोक दी. 7 अक्टूबर, 2023 को हमास के हमले, जिसमें 1,200 लोग मारे गए और 251 बंधक बनाए गए, के बाद यह जंग शुरू हुई थी. इजराइल के जवाबी हमलों में 50,000 से ज्यादा लोग मारे गए हैं.

PM मोदी ने अपने पत्र में शेख मुजीबुर्रहमान की विरासत को मिटाने की कोशिश की का किया जिक्र

नई दिल्ली भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की राह देख रहे बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस को एक खास चिट्ठी मिली है. ये चिट्ठी प्रधानमंत्री मोदी ने बांग्लादेश के स्वतंत्रता दिवस पर लिखी है. बांग्लादेश अपना स्वतंत्रता दिवस 26 मार्च को मनाता है. यह दिन 1971 में उस ऐतिहासिक क्षण को बताता है, जब भारत की सैन्य सहायता के बदौलत बांग्लादेश पूर्वी पाकिस्तान से अलग होकर एक स्वतंत्र देश बना था. पीएम मोदी ने इस चिट्ठी में इतिहास का जिक्र किया और 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम की अटूट भावना को भारत-बांग्लादेश के मजबूत संबंधों की नींव बताया, और सूक्ष्म रूप से बांग्लादेश को उसकी स्थापना में भारत की भूमिका की याद दिलाई. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने पत्र में बांग्लादेश मुक्ति संग्राम का जिक्र उस समय किया है जब भारत के इस पड़ोसी देश में बंग बंधु शेख मुजीबुर्रहमान की विरासत को मिटाने की कोशिश की जा रही है. बांग्लादेश में पिछले साल 5 अगस्त को कथित क्रांति के बाद शेख हसीना को सत्ता से हटाने के बाद शेख मुजीबुर्रहमान से जुड़े प्रतीकों, चिह्नों पर हमले हुए हैं. बांग्लादेश स्थित भारतीय उच्चायोग द्वारा साझा किये गए संदेश में PM मोदी ने बांग्लादेश के लोगों को शुभकामनाएं देते हुए लिखा है, “यह दिन हमारे साझा इतिहास और बलिदान का प्रमाण है, जिसने हमारी द्विपक्षीय साझेदारी की नींव रखी है.” दोनों देशों के बीच गहरे संबंधों को स्वीकार करते हुए उन्होंने आगे कहा, “बांग्लादेश के मुक्ति संग्राम की भावना हमारे संबंधों के लिए मार्गदर्शक बनी हुई है, जो कई क्षेत्रों में फली-फूली है और हमारे लोगों को ठोस लाभ पहुंचा रही है. हम शांति, स्थिरता और समृद्धि के लिए अपनी साझा आकांक्षाओं और एक-दूसरे के हितों और चिंताओं के प्रति पारस्परिक संवेदनशीलता के आधार पर इस साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध हैं.” गौरतलब है कि 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम के दौरान भारत ने पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) के लोगों को सैन्य, राजनयिक और मानवीय सहायता प्रदान की. भारतीय सेना ने पाकिस्तानी सेना के खिलाफ युद्ध लड़ा, जिसके परिणामस्वरूप 16 दिसंबर 1971 को ढाका में पाकिस्तान की हार हुई और बांग्लादेश एक स्वतंत्र राष्ट्र बन गया. बता दें कि यूनुस के नेतृत्व वाली बांग्लादेश की अंतरिम सरकार जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रही है, वहीं पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के राजनीतिक वापसी की चर्चा जोर पकड़ रही है. 1971 के मुक्ति संग्राम का जिक्र कर पीएम मोदी ने बांग्लादेश को संदेश दिया है कि बांग्लादेश के निर्माण में भारत का रोल दोनों देशों के बीच रिश्तों का रेफरेंस प्वाइंट है. गौरतलब है कि शेख हसीना की सत्ता से विदाई के बाद बांग्लादेश के नए शासन ने भारत से टकराव वाला रुख अपनाया है. लेकिन भारत पर कई चीजों के लिए निर्भर रहने वाला बांग्लादेश अब घुटनों पर आ रहा है. बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने की इच्छा जताई है और इस बाबत भारत को अपना संदेश भेजा है. चर्चाएं हैं कि बैंकॉक में 3-4 अप्रैल को होने वाले बिमस्टेक शिखर सम्मेलन के दौरान यूनुस प्रधानमंत्री मोदी से मिल सकते हैं. लेकिन पीएम मोदी मोहम्मद यूनुस से मिलेंगे या नहीं इस मुद्दे पर नई दिल्ली ने अबतक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है.   विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पहले एक संसदीय समिति को बताया था कि बांग्लादेश के अनुरोध पर विचार किया जा रहा है. सरकारी सूत्रों ने  बताया कि कार्यक्रम के दौरान मोदी की द्विपक्षीय बैठकों की घोषणा बाद में की जाएगी. बता दें कि शेख हसीना के जाने के बाद बांग्लादेश बॉर्डर पर भारत की ओर से किए जा रहे बाड़ेबंदी, बांग्लादेश में हिन्दुओं की सुरक्षा समेत अन्य द्विपक्षीय मुद्दों पर ढाका का व्यवहार लीक से हटकर और भारत की अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं रहा है. इसलिए भारत बांग्लादेश के साथ रिश्तों को आगे ले जाने पर सतर्क रहा है. 

देशभर में चलेगा अभियान, राम जन्मोत्सव पर हर घर में होगा यह काम, VHP ने बनाया खास प्लान

 नई दिल्ली देश भर में हिंदुत्व अभियान को आगे बढ़ाते हुए विश्व हिंदू परिषद (BHP) ने रामनवमी और हनुमान जयंती सहित अपने राष्ट्रव्यापी समारोह ‘श्रीराम महोत्सव’ मनाने का ऐलान किया है, जो पंद्रह दिनों तक चलेगा. हिंदू समूह के स्थानीय कार्यकर्ता 30 मार्च 2025 से शुरू होने वाले पूरे 15 दिनों के दौरान देश भर में सैकड़ों स्थानों पर श्री राम महोत्सव के दौरान जुलूस और धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करेंगे. इस बीच, रामनवमी एक बार फिर पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी (BJP) और अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (TMC) के लिए राजनीतिक युद्ध का मैदान बन गई है, क्योंकि दोनों पार्टियां राज्य में 2026 के चुनावों से पहले बढ़े तनाव के बीच जश्न मनाने की तैयारी कर रही हैं. क्या है प्लान? विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, “संगठन ने श्रीराम महोत्सव की देशव्यापी तैयारियां की है. विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल श्रीराम नवमी और श्री हनुमान जन्मोत्सव के अलावा श्रीराम महोत्सव के पूरे 15 दिनों के दौरान देशभर में सैकड़ों स्थानों पर शोभायात्रा और धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करेगा. स्थानीय कार्यकर्ता अपने-अपने स्थानों पर वहां की लोक परंपराओं के अनुसार पूरी भव्यता और दिव्यता के साथ इन कार्यक्रमों का आयोजन करेंगे.” उन्होंने आगे कहा कि श्रीराम महोत्सव के कार्यक्रम चैत्र मास के पहले दिन यानी विक्रम संवत 2082 की प्रतिपदा 30 मार्च 2025 से शुरू होंगे. उत्तरी दिल्ली के जहांगीरपुरी इलाके में श्रीराम महोत्सव के अंतर्गत आयोजित होने वाली श्री हनुमान जन्मोत्सव की भव्य दिव्य शोभायात्रा 12 अप्रैल 2025 को दोपहर 12:00 बजे शुरू होगी. विनोद बंसल ने कहा कि सभी श्री राम भक्तों, श्री हनुमान भक्तों एवं भारत भक्तों से गुजारिश है कि वे इन सभी कार्यक्रमों में उत्साहपूर्वक हिस्सा लें और धार्मिक आध्यात्मिक एवं राष्ट्रीय जागरण के इस पावन कार्य में अपनी शुभ आहुति दें.  

प्रधानमंत्री पत्रकारों से किया वायदा पूरा करे:अशोक पांडेय

प्रधानमंत्री पत्रकारों से किया वायदा पूरा करे:अशोक पांडेय जंतर मंतर पर भारती श्रमजीवी पत्रकार संघ का महाधरना BSPS ने पत्रकार सुरक्षा कानून सहित 10 सूत्री मांगें प्रधानमंत्री को भेजीं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम सौंपा ज्ञापन, मिलने का समय मांगा पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करने सहित विभिन्न मांगों को लेकर किया प्रदर्शन. राजनितिक दलों एवं अधिवक्ता संघ का मिला समर्थन. देशभर के 20 राज्यों के सैकड़ो पत्रकार हुए शामिल.   नई दिल्ली  भारती श्रमजीवी पत्रकार संघ (बीएसपीएस) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक पांडेय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सत्ता में आने से पहले पत्रकारों सुरक्षा कानून लाने का जो वादा किया था, उसे पूरा करे और पत्रकार प्रोटेक्शन एक्ट जल्द से जल्द लागू करे।आज नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक दिवसीय महाधरना को श्री पाण्डेय ने संबोधित किया। इस धरने में देशभर के पत्रकारों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और विभिन्न महत्वपूर्ण दस सूत्रीय मांगों को लेकर भारत सरकार का ध्यान आकर्षित किया। प्रमुखमांगों में पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करना ,स्वास्थ्य बीमा योजना लागू किया जाए,रेलवे कंसेशन सेवाएं पुनः बहाल करना , अधिस्वीकृत पत्रकारों को टोल शुल्क से मुक्त किये जाने सम्बन्धी मांग, पत्रकार आवास योजना  पूरे देश में समान रूप से लागू की जाए,पत्रकार हत्या के मामलों की फास्ट ट्रैक जांच – इन मामलों में विशेष अदालतों द्वारा ट्रायल की व्यवस्था करने की मांग रखी गई।  पत्रकारों पर दर्ज झूठे मामलों की निष्पक्ष जांच के लिए समिति बनाई जाए, यूट्यूबर्स और अन्य डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए नई नीति बनाई जाने, मध्य व छोटे अखबारों के विकास के लिए उन्हें जीएसटी से छूट दिये जाने,डीएवीपी और आईपीआरडी में संघ के प्रतिनिधित्व को अनिवार्य करने की मांग रखी गई। इस महाधरना को भारती श्रमजीवी पत्रकार संघ के राष्ट्रीय महासचिव शाहनवाज हसन, उपाध्यक्ष आंध्र प्रदेश के राघवेंद्र मिश्रा, संगठन सचिव गिरधर शर्मा(उत्तराखंड ) राष्ट्रीय सचिव डॉ. नवीन आनंद जोशी(मध्य प्रदेश) चंदन मिश्रा( झारखंड ),राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष श्रीमती एस.एस.नसरीन (पश्चिम बंगाल)राष्ट्रीय प्रवक्ता श्रीमती इंदु बंसल (हरियाणा), तमिलनाडु के पी रविंद्र चंद्रन सहित विभिन्न राज्यों के पदाधिकारियों ने संबोधित किया। इस अवसर पर मध्य प्रदेश इकाई के अध्यक्ष डॉ अरुण सक्सेना महासचिव महेंद्र शर्मा,छत्तीसगढ़ यूनिट के अध्यक्ष गंगेश द्विवेदी, उत्तर प्रदेश यूनिट से शिबू निगम, मुन्ना त्रिपाठी, जयद वाजपेई,पश्चिम बंगाल के अध्यक्ष शैलेश्वर पांडा, बानी व्रत करार, सुभाशीष पाल, मनोज शाह, स्वप्न करार,तमिलनाडु के पी रवि चंद्रन, मुन्नू स्वामी, गांधी गणेशन, राजस्थान यूनिट से राजेंद्र शर्मा, आरके जोशी, कानपुर प्रेस क्लब के अध्यक्ष सरस बाजपेई,बिहार के संजीव जायसवाल, नंदन झा, झारखंड से राजीव मिश्रा, जावेद इस्लाम, अरविंद ठाकुर, जगदीश सलूजा,  विभिन्न राज्यों के पत्रकारों ने धरने में बढ़-चढ़कर भाग लिया और इसे सफल बनाया। इस दौरान भारती श्रमजीवी पत्रकार संघ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित हस्ताक्षरयुक्त ज्ञापन भी सौंपा। ज्ञापन में पत्रकारों की सुरक्षा, अधिकार और उनके विकास से संबंधित मुद्दों पर शीघ्र कदम उठाने की मांग की गई। भारती श्रमजीवी पत्रकार संघ का यह महाधरना पत्रकारों की एकता और उनके अधिकारों की सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस महा धरने को विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों जिनमें संजय प्रजापति संजय प्रजापति राष्ट्रीय महासचिव एनसीपी, बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कविता वर्मा, आमआदमी पार्टी, लोक समाज पार्टी, निर्दलीय सांसद पप्पू यादव , भारतीय किसान यूनियन के राजेश अग्रवाल,भाजपा सांसद मनीष जायसवाल, कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत , टीएमसी सांसद अरूप चक्रवर्ती, कश्मीर से नेशनल कांफ्रेंस के सांसद आगा सैयद रूहल्ला मेहंदी ने अपना समर्थन दिया।

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