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पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल की काबुल यात्रा के दौरान लिया निर्णय, अफगानिस्तान के साथ ‘दुश्मनी’ भुलाने को तैयार पाक

इस्लामाबाद पाकिस्तान और अफगानिस्तान ने रिश्तों को सामान्य बनाने के लिए नए सिरे से कोशिश करने का फैसला किया है। अफगानिस्तान के लिए विशेष प्रतिनिधि सादिक खान के नेतृत्व में एक पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल की काबुल यात्रा के दौरान यह निर्णय लिया गया था। पाकिस्तानी टीम की यात्रा इसलिए महत्वपूर्ण थी क्योंकि यह अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के जाने के तुरंत बाद हुई थी। पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल की यात्रा का उद्देश्य कूटनीतिक जुड़ाव को आगे बढ़ाना, व्यापार, सीमा प्रबंधन और शरणार्थी मुद्दे पर सहयोग को मजबूत करना था। आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि दोनों पक्ष उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल यात्राओं का एक साल का कार्यक्रम बनाने पर सहमत हुए, जिसमें इशाक डार की काबुल यात्रा भी शामिल है। सूत्र ने कहा, “हम दोनों देशों के बीच कोई संवादहीनता नहीं छोड़ना चाहते हैं। दोनों पक्षों के मंत्री नियमित रूप से एक-दूसरे के यहां जाएंगे और ऑनलाइन बैठकों का भी कार्यक्रम है।” एजेंडे में शामिल प्रमुख और महत्वपूर्ण मुद्दों में से एक तोरखम सीमा पर चल रही स्थिति है। दोनों पक्षों की तकनीकी टीमें अप्रैल में सीमा पर विवादित क्षेत्रों पर चर्चा करने के लिए मिलने वाली हैं। वे समाधान खोजने के लिए उपग्रह इमेजरी, मानचित्रों और संरचनात्मक डिजाइनों की भी समीक्षा करेंगे। इस बीच पाकिस्तान और अफगानिस्तान पाक-अफगान तोरखम सीमा को फिर से खोलने पर सहमत हुए। विवादित सीमा के आसपास अफगान बलों की ओर से निर्माण कार्य करने की वजह से दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया जिसकी वजह से तोरखम क्रॉसिंग को बंद करना पड़ा। विवाद के चलते हिंसक झड़पे भी हुईं जिसमें सीमा के निकट कई सशस्त्र बल कर्मियों और नागरिकों की मौत हो गई। संयुक्त समन्वय आयोग (जेसीसी) की बैठक, जो लंबे समय से लंबित थी, को भी पुनर्निर्धारित किया जाएगा। जेसीसी की बैठकों की बहाली को द्विपक्षीय सहयोग को संस्थागत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। पाकिस्तान के अवैध रूप से रह रहे या अफगान नागरिक कार्ड रखने वाले लाखों अफगानों को निर्वासित करने के फैसले पर भी चर्चा की गई, क्योंकि इनके लिए स्वेच्छा से पाकिस्तान छोड़ने की समय-सीमा 31 मार्च को समाप्त हो रही है। पाकिस्तान का कहना है कि वह समय-सीमा समाप्त होने के बाद देश में अवैध रूप से रह रहे अफगान नागरिकों के खिलाफ कार्रवाई शुरू करेगा और यह सुनिश्चित करेगा कि सभी को तोरखम सीमा के जरिए उनके देश वापस भेजा जाए। एक्सपर्ट्स का कहना है कि दोनों देशों के बीच सभी लंबित मामलों को निरंतर बातचीत के ज़रिए सुलझाया जा सकता है। हालांकि, सुरक्षा, सीमा प्रबंधन और बाड़ लगाने से जुड़े संवेदनशील मुद्दे और अफगान नागरिकों की वापसी, दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों के भविष्य को आकार देने में महत्वपूर्ण कारक बने हुए हैं। बता दें दोनों देशों के बीच तनाव का मुख्य कारण पाकिस्तान का यह आरोप है कि अफगानिस्तान टीटीपी जैसे आतंकी संगठनों पनाहगाह बना हुआ है। वहीं तालिबान प्रशासन इस आरोप को खारिज करता रहा है। तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) पाकिस्तान में कई आतंकी हमलों को अंजाम दे चुका है।

निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में दी जानकारी, नया इनकम टैक्स बिल संसद के मानसून सत्र में पेश किया जाएगा

नई दिल्ली नया इनकम टैक्स बिल संसद के अगले सत्र यानी मानसून सत्र में पेश किया जाएगा। यह जानकारी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को लोकसभा में दी। नया इनकम टैक्स बिल-2025 छह दशक पुराने इनकम टैक्स एक्ट-1961 का स्थान लेगा। यह प्रत्यक्ष कर कानूनों को सरल बनाएगा, अस्पष्टताएं दूर करेगा और कर विवादों को कम करेगा। वित्त मंत्री ने कहा कि सरलीकरण की प्रक्रिया तीन मुख्य सिद्धांतों पर आधारित है, जिसमें स्पष्टता के लिए पाठ्य और संरचनात्मक सरलीकरण, निश्चितता और निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए कर नीति में कोई भी बदलाव नहीं और करदाताओं के लिए पूर्वानुमान को बनाए रखने के लिए कर दरों में कोई संशोधन नहीं शामिल हैं। ग्लोबल बेस्ट प्रैक्टिस पर आधारित, इस बिल का उद्देश्य कर नियमों में स्पष्टता प्रदान करके व्यापार में आसानी लाना है। नए इनकम टैक्स बिल में शब्दों की संख्या को घटाकर 2,59,676 कर दिया गया है। यह आंकड़ा पुराने इनकम टैक्स बिल में 5,12,535 पर था। आधिकारिक सरकारी बयान में कहा गया कि नए इनकम टैक्स बिल में चैप्टर्स की संख्या को घटाकर 23 कर दिया गया है, जबकि पुराने इनकम टैक्स बिल में यह संख्या 47 थी। इसके अलावा सेक्शंस की संख्या 819 से घटाकर 536 कर दी गई है। इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का कहना है कि नए इनकम टैक्स बिल-2025 से देश में टैक्स सिस्टम अधिक पारदर्शी होगा और इसके साथ ही इससे करदाताओं का विश्वास बढ़ेगा। भारत में केपीएमजी के पार्टनर, टैक्स, हिमांशु पारेख ने कहा कि नए बिल का एक अच्छा पहलू यह है कि इसमें तालिकाओं और सूत्रों का रणनीतिक उपयोग किया गया है, जो प्रावधानों की व्याख्या को सरल बनाने में मदद करेगा। विधेयक का उद्देश्य करदाताओं की निश्चितता को बढ़ाते हुए विवादों और मुकदमेबाजी को कम करना है। डेलॉयट इंडिया के पार्टनर रोहिंटन सिधवा के अनुसार, यह सुधार भारत के टैक्स स्ट्रक्चर को आधुनिक बनाने, अधिक स्पष्टता और दक्षता लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

बिल्लियों में फैल रहा खतरनाक एफपीवी वायरस से सैकड़ों बिल्लियों की मौत हो चुकी, जीवित रहने की संभावना केवल 1% है

बेंगलुरु कर्नाटक के रायचूर जिले में एफपीवी नामक एक खतरनाक वायरस बिल्लियों में तेजी से फैल रहा है, जिससे सैकड़ों बिल्लियों की मौत हो चुकी है। इस वायरस से संक्रमित बिल्लियों के जीवित रहने की संभावना केवल 1% है, और यह वायरस बहुत तेजी से फैलता है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि इस वायरस से इंसानों और कुत्तों को कोई खतरा नहीं है, लेकिन बिल्लियों के मालिकों को सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। पूरे राज्य में फैल रहा वायरस एफपीवी वायरस अब पूरे राज्य में फैल चुका है, और यह बहुत तेजी से बिल्लियों को संक्रमित करता है। रायचूर जिले में सौ से अधिक बिल्लियों में यह वायरस पाया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि एक समूह में 10 बिल्लियां हैं, और उनमें से एक संक्रमित है, तो यह वायरस कुछ ही सेकंड में बाकी सभी बिल्लियों में फैल सकता है। इस वायरस से बचने के लिए बिल्लियों के मालिकों को सावधानी बरतनी चाहिए। खतरनाक है वायरस बताया जा रहा है कि यह वायरस इतना खतरनाक है अगर एक ग्रुप में 10 बिल्लियां हैं, और उनमें से एक वायरस से संक्रमित है, तो वायरस कुछ ही सेकंड में आस-पास की सभी बिल्लियों में फैल जाएगा। इससे बिल्ली और कुत्ते पालने वालों में चिंता पैदा हो गई है। एडिनबर्ग एनिमल हॉस्पिटल के विशेषज्ञों ने कहा है कि एफपीवी वायरस से मनुष्यों और कुत्तों को कोई खास खतरा नहीं है। हालांकि, यह संभव है कि यह वायरस मनुष्यों द्वारा पहने गए कपड़ों, जूतों या हाथों के संपर्क के माध्यम से बिल्लियों में फैल सकता है।  

वार्ता का उद्देश्य काला सागर में समुद्री युद्ध विराम पर पहुंचना है, युद्धविराम हुई चर्चा: व्हाइट हाउस

वाशिंगटन पिछले तीन साल से चल रहे यूक्रेन-रूस युद्ध को खत्म कराने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनका प्रशासन कड़ी मशक्कत कर रहा है। इसी कड़ी में सऊदी अरब की राजधानी रियाद के रिट्ज-कार्लटन होटल में रूस और अमेरिका के प्रतिनिधियों ने मैराथन बैठक की। रूसी समाचार एजेंसी TASS ने अपने सूत्रों के हवाले से बताया कि दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच यह बातचीत करीब 12 घंटे से ज्यादा चली। मंगलवार को दोनों देशों द्वारा एक संयुक्त बयान जारी होने की उम्मीद है। इससे पहले रविवार को यूक्रेन के साथ अमेरिका की बातचीत हुई थी। सूत्रों के हवाले से अरब न्यूज की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिकी पक्ष का नेतृत्व व्हाइट हाउस राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के वरिष्ठ निदेशक एंड्रयू पीक और विदेश विभाग के वरिष्ठ अधिकारी माइकल एंटोन कर रहे हैं। उधर, रूस का प्रतिनिधित्व रूसी उच्च सदन की विदेश मामलों की समिति के प्रमुख ग्रिगोरी करासिन और संघीय सुरक्षा सेवा (एफएसबी) के निदेशक के सलाहकार सर्गेई बेसेडा कर रहे हैं। काला सागर में युद्धविराम पर चर्चा व्हाइट हाउस ने कहा है कि इस वार्ता का उद्देश्य काला सागर (Black Sea) में समुद्री युद्ध विराम पर पहुंचना है, ताकि इस क्षेत्र में जहाजों का बेरोक-टोक और सुक्षिक मुक्त प्रवाह हो सके। वॉशिंगटन को उम्मीद है कि दोनों देशों के बीच हुई बातचीत एक व्यापक कदम की ओर बढ़ रही है और यह शांति का मार्ग प्रशस्त करेगा। व्हाइट हाउस के एक प्रतिनिधि ने उम्मीद जताई है कि निकट भविष्य में सकारात्मक घोषणा होने की उम्मीद है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में रूस के एक सूत्र के हवाले से कहा गया है कि दोनों पक्षों के बीच एक संयुक्त बयान के मसौदे पर सहमति बन गई है, जिसे मंजूरी के लिए दोनों राजधानियों को भेजा गया है। हालांकि क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने वार्ता के मसौदे को उम्मीदों से कम करके आंका है। रॉयटर्स के मुताबिक, पेसकोव ने कहा, “यह मुख्य रूप से नेविगेशन की सुरक्षा के बारे में है।” काला सागर क्यों अहम? काला सागर यूरोप और एशिया के बीच स्थित है। यह कई देशों और संस्कृतियों को जोड़ता है। इसके साथ ही एक महत्वपूर्ण समुद्री परिवहन मार्ग उपलब्ध कराता है। इतना ही नहीं यह रूस और नाटो के बीच एक रणनीतिक बफर के रूप में कार्य करता है, इसलिए यह एक भू-रणनीतिक क्षेत्र के रूप में भी कार्य करता है। यह अमेरिका, रूस और चीन के बीच भू-रणनीतिक प्रतिस्पर्धा के लिए एक सक्रिय स्थल बना हुआ है। दरअसल, रूस-यूक्रेन युद्ध छिड़ने के बाद यह इलाका अशांत हो गया था। इससे व्यापारिक जहाजों का आना-जाना मुश्किल हो रहा था। हालांकि, हाल के महीनों में समुद्री मोर्चे पर शांति रही है। यूक्रेन ने 2023 में रूसी नौसेना को पीछे धकेलने के बाद अपने शिपिंग लेन पर कुछ नियंत्रण हासिल कर लिया है। बहरहाल, व्हाइट हाउस इस मुद्दे को दोनों पक्षों के बीच विश्वास-निर्माण के लिए एक संभावित शुरुआती बिंदु के रूप में देख रहा है। क्या था समझौता और क्यों टूटा? बता दें कि तुर्की और संयुक्त राष्ट्र ने 2022 में ब्लैक सी ग्रेन इनिशिएटिव समझौते में मध्यस्थता करने में मदद की थी, जो जुलाई 2022 में हुआ था। इस समझौते की वजह से यूक्रेन-रूस युद्ध के बावजूद काला सागर केे पार लगभग 33 मिलियन मीट्रिक टन यूक्रेनी अनाज का सुरक्षित निर्यात हो सका था। बाद में रूस ने 2023 में इस समझौते से खुद को अलग कर लिया था और शिकायत की कि उसके अपने खाद्य और उर्वरक निर्यात में गंभीर बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि, मौजूदा समय में रूस को काला सागर के रास्ते अपने अनाज को बाज़ार तक पहुँचाने में कोई गंभीर समस्या नहीं आ रही है। अमेरिका चाहता है कि काला सागर में युद्ध विराम लागू कर सबसे पहले दोनों देशों (यूक्रेन और रूस) के बीच विश्वास बहाली की जाए। इसके बाद धीरे-धीरे पूर्ण युद्धविराम की तरफ बढ़ा जाए।

उषा वेंस 27 मार्च को अपने बेटे के साथ ग्रीनलैंड की यात्रा पर जाने वाली हैं, भड़क गए PM- ये लोग हमारे यहां क्या कर रहे

ग्रीनलैंड ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री म्यूट बी. एगेदे ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की पत्नी उषा वेंस और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार माइक वाल्ट्ज की ग्रीनलैंड की यात्रा को “अत्यधिक आक्रामक” करार दिया है। यह बयान तब आया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने डेनमार्क के इस स्वायत्त क्षेत्र को अपने कब्जे में लेने की धमकी दी थी, जिसके बाद दोनों देशों के बीच संबंधों में तनाव बढ़ गया है। उषा वेंस गुरुवार, 27 मार्च को अपने बेटे के साथ ग्रीनलैंड की यात्रा पर जाने वाली हैं। व्हाइट हाउस के एक बयान के अनुसार, यह यात्रा सांस्कृतिक उद्देश्यों के लिए है, जिसमें वह ग्रीनलैंड के राष्ट्रीय डॉगस्लेड रेस, अवन्नाता किमुस्सेरसु को देखेंगी और स्थानीय संस्कृति और एकता का जश्न मनाएंगी। इसके अलावा, माइक वाल्ट्ज और ऊर्जा सचिव क्रिस राइट भी इस सप्ताह ग्रीनलैंड का दौरा करने वाले हैं। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री एगेदे ने कहा कि अमेरिकी अधिकारियों की यह यात्रा केवल दबाव बनाने के लिए की जा रही है और इनकी किसी भी आधिकारिक बैठक के लिए आमंत्रण नहीं दिया गया है। शक्ति प्रदर्शन कर रहे ट्रंप- डेनमार्क रविवार को एक अखबार से बातचीत में प्रधानमंत्री एगेदे ने कहा, “राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ग्रीनलैंड में क्या कर रहे हैं? इसका केवल एक ही उद्देश्य है- हम पर अपनी पावर का रौब दिखाना। वे शक्ति प्रदर्शन कर रहे हैं।” उन्होंने आगे कहा कि “उनकी मौजूदगी मात्र से ट्रंप के अभियान को और समर्थन मिलेगा और हमारे ऊपर दबाव बढ़ेगा।” ट्रंप सरकार ने इस यात्रा को “मित्रता का प्रतीक” करार दिया और दावा किया कि अमेरिकी टीम को ग्रीनलैंड में “आमंत्रित” किया गया था। हालांकि, एगेदे ने इसे खारिज करते हुए कहा कि उनकी सरकार ने उषा वेंस या वाल्ट्ज को किसी भी बैठक के लिए आमंत्रित नहीं किया है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की और कहा कि ग्रीनलैंड की अखंडता और लोकतंत्र का सम्मान किया जाना चाहिए। ट्रंप की ग्रीनलैंड पर नजर, नाटो से समर्थन लेने की कोशिश अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले भी ग्रीनलैंड को अमेरिका में शामिल करने की इच्छा जता चुके हैं। अब उन्होंने इस मुद्दे पर नाटो महासचिव मार्क रुटे से भी चर्चा की है। सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने रुटे से कहा, “मार्क, हमें अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ग्रीनलैंड की जरूरत है… हमारे कुछ ‘पसंदीदा खिलाड़ी’ वहां के तट के आसपास सक्रिय हैं, और हमें सतर्क रहना होगा।” ट्रंप के इस बयान के बाद डेनमार्क और ग्रीनलैंड में गहरी चिंता देखी जा रही है, क्योंकि डेनमार्क खुद भी नाटो का सदस्य देश है। वहीं, ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री ने अमेरिका की इन योजनाओं को लेकर स्पष्ट नाराजगी जाहिर की है। 14वीं शताब्दी से डेनमार्क के अधीन है ग्रीनलैंड ग्रीनलैंड दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप है। ये द्वीप 14वीं शताब्दी से डेनमार्क के अधीन रहा है और सामरिक रूप से महत्वपूर्ण है। इसके पास दुर्लभ खनिजों के विशाल भंडार हैं और आर्कटिक क्षेत्र में अमेरिका, रूस और चीन के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा के कारण यह अंतरराष्ट्रीय ध्यान का केंद्र बन गया है। ट्रंप प्रशासन की इस यात्रा से पहले ही डेनिश राष्ट्रीय पुलिस ने अतिरिक्त सुरक्षा बलों को ग्रीनलैंड भेज दिया है, जिससे संभावित विरोध प्रदर्शनों की आशंका जताई जा रही है। यह घटनाक्रम तब सामने आया है जब ग्रीनलैंड की सरकार एक अस्थायी अवधि से गुजर रही है, क्योंकि 11 मार्च को हुए आम चुनाव के बाद नई सरकार का गठन अभी बाकी है। इस संवेदनशील समय में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की यात्रा को ग्रीनलैंड के नेताओं ने “अनादर” का प्रतीक बताया है। आने वाले दिनों में इस मामले पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और डेनमार्क की स्थिति पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।  

प्रेमी संग महिला फरार, गुस्साए घरवालों ने बुलडोजर से तोड़ा बॉयफ्रेंड का घर, पुलिस ने 6 लोगों को गिरफ्तार किया

भरूच आपने अब तक पुलिस-प्रशासन द्वारा ही आरोपी के घर पर बुलडोजर की कार्रवाई करते हुए देखा और सुना होगा। लेकिन गुजरात में एक हैरान करने वाली घटना घटी है। यहां 6 लोगों ने कथित आरोपी सहित उसके रिश्तेदारों के घर पर बुलडोजर चलाकर उन्हें तोड़ दिया। यह घटना भरूच जिले में घटी। आरोपी व्यक्ति पर शादीशुदा महिला को भगाकर ले जाने का शक है। आरोपी शख्स की मां की शिकायत पर पुलिस ने 6 लोगों को गिरफ्तार किया है। भरूच जिले के वेदाच पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर बीएम चौधरी ने कहा कि महिला के परिवार के सदस्यों सहित आरोपियों ने महिला को भगाकर ले जाने के शक में बुलडोजर का इस्तेमाल किया। उन्होंने इस तरह से अपना गुस्सा निकालने का फैसला किया। आरोपियों में महिला का पति भी शामिल है। उसे शक है कि दूसरे समुदाय का व्यक्ति उसकी पत्नी के साथ भाग गया है। पुलिस ने बताया कि घटना 21 मार्च को जिले के करेली गांव में हुई। अधिकारी ने बताया कि 21 मार्च की रात को आरोपियों ने फुलमाली समुदाय के छह घरों को बुलडोजर से मलबे में मिला दिया, जिसमें उस व्यक्ति का घर भी शामिल था जिसपर महिला के साथ भागने का शक है। इसके बाद पुलिस ने बुलडोजर चालक समेत छह लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। चौधरी ने बताया कि सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। चौधरी ने बताया कि महिला आणंद जिले के अंकलाव तालुका में अपने माता-पिता से मिलने गई थी। जहां से महिला और व्यक्ति कथित तौर पर भाग गए। पुलिस अधिकारी ने बताया कि महिला के माता-पिता ने शिकायत दर्ज कराई है और आणंद पुलिस मामले की जांच कर रही है। शिकायत के अनुसार, हेमंत पढियार, सुनील पढियार, बलवंत पढियार, सोहम पढियार और चिराग पढियार समेत आरोपी व्यक्ति के घर गए और उसके परिवार के सदस्य पर महिला के साथ भागने का आरोप लगाते हुए उसे दो दिनों के अंदर पेश करने को कहा। 21 मार्च को रात करीब 9 बजे आरोपी बुलडोजर लेकर व्यक्ति के घर गए और शेड एवं शौचालय सहित मकान के हिस्सों को गिराना शुरू कर दिया। एफआईआर के अनुसार, उन्होंने इलाके के छह घरों के हिस्सों को गिरा दिया। चौधरी ने बताया कि अगले दिन व्यक्ति की मां ने वेदाच पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद छह लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया।

हुर्रियत के दो गुटों ने अलगाववाद से तोड़ लिया नाता, मैं इसका स्वागत करता हूं, अमित शाह का कश्मीर पर ऐलान

नई दिल्ली जम्मू-कश्मीर में लंबे समय तक अलगाववाद को बढ़ावा देने वाले हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के दो गुटों ने अलग राह अपना ली है। होम मिनिस्टर अमित शाह ने मंगलवार को ऐलान किया कि हुर्रियत के दो गुटों ‘जम्मू कश्मीर पीपुल्स मूवमेंट’ और ‘डेमोक्रेटिक पॉलिटिकल मूवमेंट’ ने अलगाववाद से नाता तोड़ लिया है। उन्होंने कहा कि मैं इसका स्वागत करता हूं। अमित शाह ने इसका श्रेय पीएम नरेंद्र मोदी की विकास की नीतियों को दिया। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार में विकास हो रहा है और यह काम सभी को साथ लेकर किया जा रहा है। इससे अलगाववादी गतिविधियों में कमी आई है। गृह मंत्री ने एक्स पर इसकी जानकारी देते हुए लिखा कि अलगाववाद अब कश्मीर में इतिहास की बात हो रहा है। मोदी सरकार की एकीकरण की नीतियों से जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद खत्म हो रहा है। अमित शाह ने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘हुर्रियत के दो संगठनों ‘जम्मू-कश्मीर पीपुल्स मूवमेंट’ और ‘डेमोक्रेटिक पॉलिटिकल मूवमेंट’ ने अलगाववाद से सभी संबंध तोड़ने की घोषणा की है। मैं भारत की एकता को मजबूत करने की दिशा में अहम इस कदम का स्वागत करता हूं और ऐसे सभी समूहों से आग्रह करता हूं कि वे आगे आएं तथा अलगाववाद को हमेशा के लिए खत्म कर दें।’ इसके साथ ही उन्होंने अपील की है कि अन्य अलगाववादी संगठनों को भी सीख लेनी चाहिए और साथ आना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह पीएम नरेंद्र मोदी की विकास, शांति और एक भारत की नीतियों की जीत है। इससे पहले इसी महीने की शुरुआत में केंद्र सरकार ने हुर्रियत कॉन्फ्रेंस से जुड़े दो समूहों को बैन किया था। सरकार का कहना है कि ये समूह राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में शामिल हैं। इनके चलते जम्मू-कश्मीर में अलगाववाद बढ़ रहा है और आतंकवादियों को भी मदद मिल रही है। इन संगठनों में मीरवाइज उमर फारूक के नेतृत्व वाला संगठन अवामी ऐक्शन कमेटी और जम्मू-कश्मीर इत्तेहादुल मुसलमीन शामिल है। इत्तेहादुल का नेतृत्व मोहम्मब अब्बास अंसारी करते हैं। होम मिनिस्ट्री ने इन्हें बैन का करने का नोटिफिकेशन जारी करते हुए कहा था कि ये देश की एकता, अखंडता और संप्रभुता के लिए खतरा बन रहे हैं। इन दोनों संगठनों को सरकार ने गैर-कानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम के तहत 5 साल के लिए प्रतिबंधित किया है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए मीरवाइज फारूक ने कहा था कि ऐसा करना गलत है और लोकतांत्रिक संगठनों को कुचलने जैसा है।

तिरुमला तिरुपति देवस्थानम ने 5258 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया

तिरुपति  तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) ट्रस्ट बोर्ड के अध्यक्ष बीआर नायडू हैं। उनकी अध्यक्षता में बोर्ड ने वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए बजट को मंजूरी दी है। यह बजट 5258 करोड़ रुपये का है। पिछले वित्तीय वर्ष 2024-25 के बजट से यह थोड़ा ज्यादा है। पिछले साल का बजट 5179 करोड़ रुपये था। इस बार बजट में 79 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई है। बजट में मंदिर की आय और व्यय का विवरण दिया गया। हर साल की तरह, तिरुपति ट्रस्ट को सबसे ज्यादा उम्मीद दान से है। मंदिर को उम्मीद है कि इस साल दान से 1729 करोड़ रुपये मिलेंगे। पिछले साल यह आंकड़ा 1671 करोड़ रुपये था। इसका मतलब है कि दान में बढ़ोतरी होने की संभावना है। मिलेगा 1310 करोड़ ब्याज तिरुपति ट्रस्ट को बैंकों में जमा फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) से भी ब्याज मिलता है। ट्रस्ट के पास लगभग 18000 करोड़ रुपये से ज्यादा की FD है। इस पर उन्हें 1310 करोड़ रुपये का ब्याज मिलने का अनुमान है। प्रसाद से होगी 600 करोड़ कमाई पिछले साल तिरुपति ट्रस्ट ने प्रसाद बेचकर 550 करोड़ रुपये कमाए थे। इस साल ट्रस्ट को उम्मीद है कि वे प्रसाद बेचकर 600 करोड़ रुपये कमाएंगे। प्रसाद की बिक्री से मंदिर को अच्छी आमदनी होती है। 310 करोड़ रुपये टिकट बिक्री से मंदिर को दर्शन टिकटों की बिक्री से भी पैसे मिलते हैं। इस साल अनुमान है कि टिकट बेचकर 310 करोड़ रुपये आएंगे। इसके अलावा, अर्जिता सेवा टिकटों से 130 करोड़ रुपये मिलने की उम्मीद है। ट्रस्ट के रूम से 157 करोड़ कमाई भक्तों के रहने के लिए कमरे और कल्याण मंडपम भी हैं। इनसे ट्रस्ट को 157 करोड़ रुपये की आमदनी होने का अनुमान है। कल्याणकट्टा से 176.5 करोड़ रुपये मिलेंगे। ट्रस्ट को अन्य स्रोतों से भी आय होती है, जैसे कि दान से 90 करोड़ रुपये, किराए और बिजली-पानी के बिल से 66 करोड़ रुपये, प्रकाशनों से 31 करोड़ रुपये और अन्य साधनों से 170 करोड़ रुपये मिलेंगे। कर्मचारियों के वेतन पर होगा सबसे ज्यादा खर्च खर्च की बात करें तो, तिरुपति ट्रस्ट इस साल कर्मचारियों के वेतन पर बहुत बड़ी रकम खर्च करेगा। यह राशि 1773.75 करोड़ रुपये है। हर साल की तरह, TTD का वेतन खर्च दान से मिलने वाली राशि से ज्यादा है। इस साल दान से 1729 करोड़ रुपये मिलने का अनुमान है, जबकि वेतन का खर्च 44.75 करोड़ रुपये ज्यादा है। 800 करोड़ का कॉर्पस फंड TTD ने 800 करोड़ रुपये कॉर्पस और अन्य निवेशों के लिए रखे हैं। मंदिर ट्रस्ट सामग्री खरीदने पर 768.5 करोड़ रुपये खर्च करेगा। इंजीनियरिंग के कामों के लिए 350 करोड़ रुपये और इंजीनियरिंग के रखरखाव के लिए 150 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। तिरुपति ट्रस्ट ने SVIMS (श्री वेंकटेश्वर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज) के इंजीनियरिंग के कामों के लिए 60 करोड़ रुपये और SVIMS को अनुदान के रूप में 60 करोड़ रुपये दिए हैं। TTD ने अन्य संस्थानों को अनुदान के रूप में 130 करोड़ रुपये देने का फैसला किया है। 117.62 करोड़ रुपये लोन देगा TTD हिंदू सनातन धर्म को बढ़ावा देने के लिए भी काम करता है। इसके लिए ट्रस्ट ने HDPP (हिंदू धर्म प्रचार परिषद) और अन्य परियोजनाओं के लिए 121 करोड़ रुपये रखे हैं। TTD लोन और एडवांस के तौर पर 117.62 करोड़ रुपये देगा। अन्य खर्चों में ये शामिल हैं। सुविधा प्रबंधन सेवाओं के लिए 80 करोड़ रुपये, पेंशन और ग्रेच्युटी फंड में योगदान के लिए 100 करोड़ रुपये, राज्य सरकार को योगदान के लिए 50 करोड़ रुपये आदि।

इजरायली सेना ने गाजा पर पूरी तरह से कब्जा और सैन्य शासन स्थापित करने के लिए बड़े आक्रमण की योजना बनाई

वॉशिंगटन  इजरायल ने गाजा पर पूरी तरह से कब्जा करने का प्लान बनाया है। इजरायल की योजना है कि गाजा पर बड़े पैमाने पर हमला करने के बाद पूरे क्षेत्र को नियंत्रण में ले लिया जाए और सेना की मदद से यहां शासन किया जाए। फाइनेंशियल टाइम्स और हारेत्ज की रिपोर्ट के अनुसार, इजरायल की सरकार गाजा पर पूरी तरह से कब्जा करने के बाद बड़ी तादाद में वहां सैनिकों की तैनाती करेगा। ये तैनाती 50 हजार सैनिकों की हो सकती है। वहीं गाजा की स्थानीय आबादी को भी बड़े पैमाने पर स्थानांतरित करने का प्लान है। इससे फिलिस्तीनियों और अरब देशों की मुश्किल बढ़ सकती है। इजरायल ने गाजा में अक्टूबर, 2023 के बाद से लगातार भीषण हमले किए हैं। इससे पहले भी इजरायल ने बार-बार गाजा में हमले किए हैं। हालांकि वह गाजा को पूरी तरह से नियंत्रण में लेने में कामयाब नहीं हो सकती है। अभी तक इजरायली सेना लड़ाई के बाद अस्थायी रूप से पीछे हट गई लेकिन अब उसकी योजना वापसी की नहीं है। वह पूरी तरह से गाजा पर नियंत्रण चाहती है। इजरायल ने बनाया नया प्लान इजरायल की नई योजना में गाजा पर कब्जा करने के लिए 50,000 सैनिकों (5 कॉम्बेट डिविजन) को तैनात करना शामिल है। प्लान में गाजा में सैन्य शासन स्थापित करने और यहां की आबादी को जबरदस्ती अल-मावासी क्षेत्र में स्थानांतरित करना भी शामिल है। अल-मावासी एक छोटा मानवीय क्षेत्र है। यानी एक छोटी जगह में बड़ी तादाद में लोगों को रहने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, यह प्रस्ताव इजरायल के सुरक्षा मंत्रिमंडल के सामने है, अभी इसे मंजूर नहीं किया गया है। FT ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि गाजा के लिए यह योजना इजरायली सेना के नए चीफ ऑफ स्टाफ ने बनाई गई है। इस प्लान पर उनको धुर दक्षिणपंथी मंत्रियों का समर्थन भी मिल गया है। इस योजना पर इजरायल बढ़ता है तो गाजा में बड़े पैमाने पर खून खराबा देखने को मिल सकता है और बड़ी मानवीय त्रासदी खड़ी हो सकती है। गाजा में और बिगड़ सकते हैं हालात गाजा के लिए इजरायल और अमेरिका की ओर से हालिया समय में जो प्लान आए हैं, उनमें यहां की स्थानीय आबादी को हटाने की बात कही जा रही है। ऐसे में इसका ना सिर्फ फिलिस्तीनी बल्कि अरब देश भी विरोध कर रहे हैं। डोनाल्ड ट्रंप ने भी हाल ही में कहा था कि गाजा के लोगों को यहां से निकालकर पड़ोस के अरब देशों में भेज दिया जाए। इसका कड़ा विरोध अरब मुल्कों और गाजावासियों ने किया। ऐसे में साफ है कि गाजा के लोगों को हटाना इजरायल के लिए आसान नहीं होगा।

‘PoK खाली करना होगा नहीं तो…’, इंडिया ने UN में लगाई पाकिस्तान को लताड़, जानिए क्या-क्या कहा

नई दिल्ली भारत ने एक बार फिर पाकिस्तान को उसकी हरकतों के लिए घेर लिया है. ये मौका था संयुक्त राष्ट्र (UN) की सुरक्षा परिषद में शांति बनाए रखने के मुद्दे पर हो रही चर्चा का. यहां पाकिस्तान ने एक बार फिर से जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाया. हालांकि इस बार भी भारत ने पड़ोसी देश को आईना दिखाते हुए जमकर लताड़ लगा दी. दरअसल भारत के स्थायी प्रतिनिधि, राजदूत हरीश पी ने पाकिस्तान को आड़े हाथों लेते हुए कहा, ‘पाकिस्तान बार-बार हमारे जम्मू और कश्मीर पर बेबुनियाद और अनावश्यक बयान देता है. ऐसे बयान न तो पाकिस्तान के झूठे दावों को सही ठहरा सकते हैं, न ही आतंकवाद फैलाने की उसकी नीति को.’ भारत ने साफ शब्दों में ये भी कहा कि पाकिस्तान ने जम्मू और कश्मीर के कुछ हिस्सों पर अवैध रूप से कब्जा किया है और उसे वो इलाका छोड़ना ही होगा. हरिश ने पाकिस्तान को नसीहत दी कि वह अपनी छोटी सोच और देश को बांटने वाली नीतियों को छोड़कर शांति की दिशा में कदम बढ़ाए. ‘पाकिस्तान ने फिर लिया अनावश्यक टिप्पणियों का सहारा’ भारत ने पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए कहा कि उसने फिर से ‘अनावश्यक टिप्पणियों’ का सहारा लिया है, लेकिन इससे न तो उसके गैरकानूनी दावे वैध साबित होंगे, न ही उसकी स्टेट-स्पॉन्सर्ड आतंकवाद की नीति सही ठहराई जा सकती है. हरीश ने कहा कि भारत इस मंच का ध्यान पाकिस्तान के संकीर्ण और विभाजनकारी एजेंडे की ओर भटकने नहीं देगा. उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत इस मामले में अधिक विस्तार से जवाब देने से परहेज करेगा. अनुच्छेद 370 हटने के बाद खराब हो गए रिश्ते गौरतलब है कि 5 अगस्त 2019 को भारत सरकार ने अनुच्छेद 370 को हटाकर जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा समाप्त कर दिया था और इसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित कर दिया था. इसके बाद से ही भारत और पाकिस्तान के संबंधों में और कड़वाहट आ गई और व्यापार बंद हो गया. भारत का रुख स्पष्ट है कि वह पाकिस्तान से आतंकवाद, हिंसा और दुश्मनी से मुक्त माहौल में सामान्य पड़ोसी संबंध चाहता है.

कामरा को लेकर शिंदे पहली बार बोले- ‘सुपारी ली… तो क्रिया की प्रतिक्रिया होगी

मुंबई कॉमेडियन कुणाल कामरा की तरफ से किए गए जोक पर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने पहली प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा है कि बोलने की आजादी है, लेकिन हर चीज की एक सीमा होनी चाहिए। मुंबई में आयोजित एक शो के दौरान कामरा ने बगैर नाम लिए शिवसेना प्रमुख पर ‘गद्दार’ और ‘ठाणे का रिक्शा’ जैसे तंज कसे थे। खबर है कि कामरा को मुंबई पुलिस ने तलब किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शिंदे ने कहा, ‘बोलने की आजादी हैं यहां। हम व्यंग भी समझते हैं, लेकिन एक सीमा भी होनी चाहिए।’ वहीं, शिवसेना के कई नेता पहले ही कामरा के जोक पर आपत्ति जता चुके हैं और धमकी दे चुके हैं। उन्होंने कहा, ‘यह ऐसा लग रहा है कि किसी के खिलाफ बोलने के लिए सुपारी ली गई है।’ उन्होंने आगे कहा, ‘दूसरे व्यक्ति को एक स्तर बनाए रखना चाहिए, नहीं तो एक्शन का रिएक्शन होता है।’ डिप्टी सीएम ने कहा, ‘यह वही व्यक्ति है, जिसने भारत के सुप्रीम कोर्ट, प्रधानमंत्री और कुछ उद्योगपतियों पर टिप्पणी की है। यह बोलने की स्वतंत्रता नहीं है। यह किसी और के लिए काम कर रहे हैं।’ क्या था जोक शो के दौरान कामरा ने कहा, ‘जो इन्होंने महाराष्ट्र के इलेक्शन में किया है…। बोलना पड़ेगा पहले शिवसेना बीजेपी से बाहर आ गई फिर शिवसेना शिवसेना से बाहर आ गई…। एनसीपी एनसीपी से बाहर आ गई…। एक वोटर को 9 बटन दे दिए। सब कंफ्यूज हो गए।’ उन्होंने आगे कहा, ‘चालू एक जन ने किया था। वह मुंबई में एक बहुत बढ़िया एक डिस्ट्रिक्ट है ठाणे वहां से आते हैं।’ उन्होंने कहा, ‘ठाणे की रिक्शा, चेहरे पर दाढ़ी, आंखों में चश्मा हाय। ठाणे की रिक्शा, चेहरे पर दाढ़ी, आंखों में चश्मा हाय। एक झलक दिखलाए कभी गुवाहाटी में छिप जाए। मेरी नजर से तुम देखो गद्दार नजर वो आए। मंत्री नहीं वो दल बदलू है और कहा क्या जाए। जिस थाली में खाए उसमें ही छेद कर जाए। मंत्रालय से ज्यादा फडणवीस की गोदी में मिल जाए। तीर कमान मिला है इसको बाप मेरा यह चाहे।’ कामरा ने किया माफी मांगने से इनकार कामरा ने कहा है कि वह महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री शिंदे के बारे में अपनी विवादास्पद टिप्पणियों के लिए माफी नहीं मांगेंगे। इसके साथ ही उन्होंने मुंबई में उस स्थान पर तोड़फोड़ किए जाने की आलोचना की, जहां ‘कॉमेडी शो’ रिकॉर्ड किया गया था। कामरा ने सोमवार देर रात सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर साझा किए गए बयान में कहा कि जो लोग सोशल मीडिया पर उनका नंबर लीक करने में व्यस्त हैं या उन्हें लगातार फोन कर रहे हैं, उन्हें पता होना चाहिए कि सभी अज्ञात फोन कॉल उनके वॉयसमेल पर जा रही हैं और उन्हें ‘‘वही गाना’’ सुनाई देगा जिससे वे नफरत करते हैं। कामरा ने लिखा, ‘मैं माफी नहीं मांगूंगा… मैं इस भीड़ से नहीं डरता और मैं अपने बिस्तर के नीचे छिपकर इसके शांत होने का इंतजार नहीं करूंगा।’ उन्होंने कहा, ‘मैंने जो कहा, वह बिलकुल वैसा ही है जैसा कि अजित पवार (उपमुख्यमंत्री) ने एकनाथ शिंदे (उपमुख्यमंत्री) के बारे में कहा था।’ ‘कॉमेडियन’ ने ‘‘उन्हें सबक सिखाने की धमकी देने वाले नेताओं’’ की निंदा करते हुए भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अपने अधिकार के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा, ‘‘किसी शक्तिशाली सार्वजनिक व्यक्ति पर किया गया मजाक सहने में आपकी असमर्थता मेरे अधिकार की प्रकृति को नहीं बदलती। जहां तक मुझे पता है, हमारे नेताओं और हमारी राजनीतिक व्यवस्था के सर्कस का मज़ाक उड़ाना कानून के विरुद्ध नहीं है। हालांकि, मैं अपने खिलाफ किसी भी वैध कार्रवाई के लिए पुलिस और अदालतों के साथ सहयोग करने को तैयार हूं।’’ कामरा ने कहा, ‘‘लेकिन क्या कानून उन लोगों के खिलाफ भी निष्पक्ष और समान रूप से लागू किया जाएगा जिन्होंने यह तय किया है कि मजाक से आहत होने पर तोड़फोड़ करना उचित प्रतिक्रिया है?’’ शिवसैनिक भड़के शिवसेना कार्यकर्ताओं ने रविवार को मुंबई में खार क्षेत्र स्थित ‘हैबिटेट कॉमेडी क्लब’ में कथित रूप से तोड़फोड़ की थी, जहां कामरा का कार्यक्रम शूट किया गया था। इस कार्यक्रम में उन्होंने शिंदे पर ‘‘गद्दार’’ शब्द के जरिये कटाक्ष किया था। बड़ी संख्या में शिवसेना कार्यकर्ता रविवार रात ‘होटल यूनिकॉन्टिनेंटल’ के बाहर एकत्र हुए जहां संबंधित क्लब स्थित है। उन्होंने क्लब और होटल परिसर में तोड़फोड़ की। ‘हैबिटैट क्लब’ वही स्थान है जहां विवादास्पद ‘इंडियाज गॉट लैटेंट’ शो को शूट किया गया था।

अमेरिका ने मिस्र से हमास पर दबाव बढ़ाने को कहा, गाजा में इजरायल की आर्मी लगातार हमले कर रही

काहिरा  मिस्र ने हमास पर गाजा में युद्धविराम के लिए इजरायल के प्रस्ताव को मानने का दबाव बढ़ा दिया है। मिस्र ने युद्धविराम डील ना मानने पर फिलिस्तीनियों को अपने क्षेत्र से निकालने की धमकी दी है। इजरायली वेबसाइट यरुशलम पोस्ट ने एक वरिष्ठ अधिकारी के हवाले से ये दावा किया है। रिपोर्ट के अनुसार, मिस्र ने हमास के उन कैदियों को अपने क्षेत्र से निकालने की धमकी दी है, जिन्हें हाल ही इजरायल ने रिहा किया है। मिस्र ने यह धमकी दी है ताकि हमास लचीला रुख अपनाए और बंधक समझौते के संशोधित प्रस्ताव को स्वीकार करे ले। मिस्र ने लंबे समय से हमास और इजरायल के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाई है। मिस्न ने जिन फिलिस्तीनियों को अपने क्षेत्र से निकालने की बात तकी है, वह लंबे समय तक इजरायल की जेलों में कैद रहे हैं। इन लोगों को गाजा में युद्धविराम के बाद इजरायली बंधकों की रिहाई के बदले में इजरायल सरकार ने छोड़ा है। इजरायल से लौटने के बाद वे अस्थायी रूप से मिस्र में रह रहे हैं। ऐसे में मिस्र के शीर्ष खुफिया अधिकारी हमास पर दबाव डाल रहे हैं कि समझौते को स्वीकार कर लें। ऐसा ना होने पर फिलिस्तीनियों को देश में पनाह देने पर विचार किया जाएगा। अमेरिका के इशारे पर बनाया जा रहा दबाव! इजरायली अधिकारी के अनुसार, डोनाल्ड ट्रंप के दूत स्टीव विटकॉफ ने मिस्र के खुफिया प्रमुख जनरल हसन रशाद पर इस संबंध में दबाव डाला है। विटकॉफ ने मिस्र से इस बात पर निराशा जताई कि वह हमास को अतिरिक्त बंधकों को रिहा करने के लिए मनाने में विफल रहा है। इन बंधकों में इजरायली-अमेरिकी इदान अलेक्जेंडर भी शामिल हैं। अमेरिका की ओर से कड़ा संदेश मिलने के बाद मिस्र ने हमास पर दबाव बढ़ाया है। अमेरिका के दबाव के बाद मिस्र के खुफिया अधिकारी हमास को इस बात के लिए मनाने की कोशिश कर रहे हैं कि कि वह एक नए समझौते को माने। इस समझौते से और ज्यादा बंधकों को छुड़ाया जा सकता है और युद्ध को कुछ समय के लिए रोका जा सकता है। दूसरी ओर हमास युद्ध को स्थायी तौर पर रोकने की कोशिश में लगा है। वह बंधकों की रिहाई के बदले गाजा के लिए ज्यादा सहूलियत चाहता है। इस प्रस्ताव में पांच जीवित बंधकों की रिहाई के बदले में 50 दिनों का युद्धविराम और फिलिस्तीनी कैदियों की रिहाई शामिल है। गाजा में 50 हजार से ज्यादा मौतें गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया है कि इजराइल और हमास के बीच चल रहे युद्ध में मरने वाले फिलिस्तीनियों की संख्या 50,000 को पार कर गई है। हमास के स्वास्थ्य मंत्रालय ने रविवार को कहा कि अक्टूबर 2023 में इजरायल के साथ युद्ध शुरू होने के बाद से फिलिस्तीनी क्षेत्र में कम से कम 50,021 लोग मारे गए हैं।

आरजी कर मामला, क्या सामूहिक दुष्कर्म या सबूत मिटाने की संभावना के एंगल पर भी की जांच: हाईकोर्ट

  कोलकाता आरजीकर अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में ट्रेनी डॉक्टर के साथ दुष्कर्म और हत्या मामले में सोमवार को कलकत्ता हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान हाईकोर्ट ने सीबीआई को मामले की जांच से संबंधित केस डायरी अगली सुनवाई पर पेश करने का निर्देश दिया है। सुनवाई के दौरान अदालत ने सीबीआई ये यह भी पूछा कि क्या केंद्रीय एजेंसी अपनी जांच में सामूहिक दुष्कर्म या मामले में सबूतों को नष्ट किए जाने की संभावना के एंगल पर भी जांच कर रही है। वहीं, मृतका के परिजन और मामले में याचिकाकर्ता ने इस दौरान अदालत की निगरानी में जांच की मांग की। उन्होंने दावा किया कि ट्रायल कोर्ट में आरोप-पत्र दाखिल करते समय सीबीआई ने कहा था कि अपराध में बड़ी साजिश शामिल थी। ऐसे में उन्होंने मामले की आगे की जांच के लिए प्रार्थना की। जिस पर न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ताओं की प्रार्थनाओं पर जांच के वर्तमान चरण और सीबीआई द्वारा पेश की जाने वाली केस डायरी को देखने के बाद विचार किया जाएगा। उन्होंने सीबीआई को अगली सुनवाई की तारीख 28 मार्च को केस डायरी पेश करने का भी निर्देश दिया। इसके अतिरिक्त, न्यायमूर्ति घोष ने सीबीआई के वकील से अदालत को यह भी बताने को कहा कि क्या एजेंसी अपनी आगे की जांच में सामूहिक बलात्कार या सबूतों के विनाश की संभावना की जांच कर रही है। पूर्व नागरिक स्वयंसेवक संजय रॉय को पीड़िता के साथ बलात्कार और हत्या के आरोप में कोलकाता पुलिस ने गिरफ्तार किया था। जनवरी में रॉय को दोषी करार देते हुए सत्र न्यायालय ने उसे उसके प्राकृतिक जीवन के अंत तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। न्यायमूर्ति घोष ने उप महाधिवक्ता (डीएसजी) को यह साफ करने का निर्देश दिया कि क्या सीबीआई ने कभी भी भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 70 (सामूहिक बलात्कार) के तहत अपराध की जांच करने पर विचार किया था। चूंकि इस मामले में एक व्यक्ति को पहले ही दोषी ठहराया जा चुका है। ऐसे में न्यायमूर्ति घोष ने आगे पूछा कि क्या सीबीआई ने अपने आरोप-पत्र में इस बात पर विचार किया था कि अपराध एक अकेले अपराधी द्वारा किया गया था या यह सामूहिक दुष्कर्म का मामला था।   इससे पहले, याचिकाकर्ताओं के वकील ने दावा किया कि केंद्रीय एजेंसी मामले की जांच में रुचि नगीं दिखा रही है। उन्होंने न्यायालय से सीबीआई से अपनी आगे की जांच पर प्रगति रिपोर्ट मांगने का भी आग्रह किया। वहीं, पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बनर्जी ने कहा कि राज्य को आगे की जांच पर कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन उन्होंने इस बात पर स्पष्टीकरण मांगा कि क्या कानून किसी आरोपी को दोषी ठहराए जाने और सजा सुनाए जाने के बाद ऐसी जांच की अनुमति देता है। बनर्जी ने यह भी सवाल उठाया कि क्या ट्रायल कोर्ट को मुकदमे के समापन के बाद आगे की जांच की अनुमति देने का अधिकार है। इसके अलावा, उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सीबीआई ने बेहद धीमी गति से मामले की जांच की है। इस पर डीएसजी ने इस दावे का विरोध करते हुए तर्क दिया कि एजेंसी के खिलाफ कोई भी अनुचित आरोप नहीं लगाया जाना चाहिए।

देश में 14 टोल प्लाजा की सालाना कमाई 200 करोड़ रुपये, राजस्थान में सबसे ज्यादा 156 टोल, लेकिन कमाई में UP नंबर 1

नई दिल्ली हाईवे-एक्सप्रेसवे पर चलते हुए आपको टोल प्लाजा पर रुककर टोल टैक्स भरना पड़ता है. टोल टैक्स से आपकी जेब कटती है तो सरकार का खजाना भरना भरता है. इन टोल टैक्स से सरकारी खजाने में मोटा पैसा आता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि देश का सबसे कमाऊ टोल प्लाजा कौन सा है? इसकी कमाई इतनी है कि सालभर में यह 400 करोड़ रुपये आपकी जेब से वसूल लेता है. देश का सबसे कमाऊ टोल प्लाजा   देश में सबसे ज्यादा कमाई करने वाला टोल प्लाजा गुजरात के भरथाना गांव में बना है, राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 48 पर बना यह टोल प्लाजा कमाई के मामले में अव्वल है.  राजधानी दिल्ली को मुंबई से जोड़ने वाले इस हाईवे पर बने टोल प्लाजा की गिनती सबसे ज्यादा कमाई करने वाले टोल प्लाजा के तौर पर होती है.बता दें कि NH-48 देश के सबसे व्यस्त हाईवे में से एक है. क्या आप जानते हैं कि देश में सबसे ज्यादा कमाई किस टोल प्लाजा पर होती है? इसका जवाब है गुजरात के भरथाना गांव में बना टोल प्लाजा। यह टोल प्लाजा राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 48 पर बना है जो राजधानी दिल्ली को देश की आर्थिक राजधानी मुंबई से जोड़ता है। यह देश में सबसे ज्यादा कमाई करने वाला टोल प्लाजा है। यह टोल प्लाजा हर साल लगभग 400 करोड़ रुपये कमाता है। यह पिछले पांच साल का औसत है। राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 48 देश का सबसे व्यस्त रूट है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने लोकसभा में कुछ जानकारी दी। एनएच-48 के जरिए उत्तरी भारत के राज्यों से सामान पश्चिमी तट के पोर्ट्स तक जाता है। देश में सबसे ज्यादा कमाई करने वाला दूसरा टोल प्लाजा भी इसी एनएच पर है। राजस्थान के शाहजहांपुर में NH-48 पर बना टोल प्लाजा हर साल 378 करोड़ रुपये कमाता है। सरकारी जानकारी के अनुसार भारत में 1,063 टोल प्लाजा हैं। इनमें से 14 टोल प्लाजा हर साल 200 करोड़ रुपये से ज्यादा कमाते हैं। अभी देश में 1.5 लाख किलोमीटर के एनएच नेटवर्क में से लगभग 45,000 किलोमीटर पर टोल लगता है। इसमें नए बने एक्सप्रेसवे भी शामिल हैं। कैसे बढ़ी कमाई पिछले पांच साल में कई नए राजमार्ग बने हैं जिन पर टोल लगता है। FASTag के इस्तेमाल से टोल की चोरी भी कम हुई है। इसलिए टोल से होने वाली कमाई बहुत बढ़ गई है। साल 2019-20 में टोल से 27,504 करोड़ रुपये की कमाई हुई थी। पिछले साल यह कमाई बढ़कर 55,882 करोड़ रुपये हो गई। सरकार के आंकड़ों के अनुसार लोगों ने पिछले पांच साल में टोल के रूप में 1.9 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा दिए हैं। लेकिन यह रकम राजमार्गों के विकास और रखरखाव के लिए खर्च होने वाले बजट का सिर्फ पांचवां हिस्सा है। सरकार केवल उन्हीं राजमार्गों पर टोल लगाती है जो कम से कम ढाई लेन के हों। सरकार ज्यादा से ज्यादा राजमार्गों पर टोल लगाना चाहती है ताकि उसकी कमाई बढ़ सके। किस राज्य में हैं सबसे ज्यादा टोल प्लाजा संसद में दी गई जानकारी के अनुसार उत्तर प्रदेश में 97 टोल प्लाजा हैं। इन टोल प्लाजा ने पिछले पांच साल में सबसे ज्यादा 22,914 करोड़ रुपये की कमाई की है। वहीं राजस्थान में सबसे ज्यादा 156 टोल प्लाजा हैं। इन टोल प्लाजा ने 20,308 करोड़ रुपये की कमाई की है। आमतौर पर, उन टोल प्लाजा पर ज्यादा कमाई होती है जो पोर्ट्स और इंडस्ट्रियल एरिया क्षेत्रों को जोड़ने वाले NH पर बने होते हैं।  एक रिपोर्ट के मुताबिक एक अधिकारी ने कहा, ‘इन टोल प्लाजा पर ज्यादातर कमर्शियल गाड़ियां आती हैं। ये गाड़ियां निजी वाहनों की तुलना में ज्यादा टोल देती हैं। इसलिए ये प्रोजेक्ट निजी कंपनियों के लिए फायदेमंद होती हैं।’ FASTag के आने से टोल संग्रह में पारदर्शिता आई है और टोल प्लाजा पर लगने वाला समय भी कम हुआ है। इससे यात्रियों को भी सुविधा हुई है और सरकार की कमाई भी बढ़ी है। बढ़ी टोल प्लाजा की कमाई   फास्टैग आने के बाद से टोल प्लाजा की कमाई बढ़ गई है. फास्टैग की मदद से टोल टैक्स की चोरी कम हुई है, जिसकी वजह से रेवेन्यू बढ़ा है.  सरकार ज्यादा से ज्यादा राजमार्गों पर टोल लगाना चाहती है ताकि उसकी कमाई बढ़ सके. वहीं एनएच-48 के जरिए उत्तरी भारत के राज्यों से सामान पश्चिमी तट के बंदरगाह तक पहुंचते हैं. ट्रकों और गाड़ियों को इस टोल प्लाजा से होकर गुजरना पड़ता है, जिसकी वजह से इस टोल प्लाजा की कमाई अधिक, वहीं निजी वाहनों के मुकाबले कॉर्मिशियल गाड़ियों का टोल भी अधिक है.   कमाई में ये भी अव्वल   इसी एचएच-48 पर बना राजस्थान के शाहजहांपुर टोल प्लाजा कमाई के मामले में दूसरे नंबर पर है. यहां हर साल 378 करोड़ रुपये का टोल कलेक्शन होता है. इसके अलावा पश्चिम बंगाल का जलाधुलागोरी टोल प्लाजा कमाई में तीसरे नंबर पर है. इसके अलावा उत्तर प्रदेश में बाराजोर टोल प्लाजा चौथे नंबर पर है. बता दें कि  उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा टोल प्लाजा है. इस राज्य में करीब 97 टोल प्लाजा हैं.  

IMF के अनुसार पिछले दशक में भारत की GDP दोगुनी हुई, 2025 में अर्थव्यवस्था $4.3 ट्रिलियन होगी, जापान और जर्मनी से आगे निकल जाएगी.

नई दिल्ली भारत की अर्थव्यवस्था बीते 10 वर्षों में तेजी से बढ़ी है और इसकी जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) में दोगुनी हो गई है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के ताजा आंकड़ों के अनुसार भारत की जीडीपी 2015 में 2.1 ट्रिलियन डॉलर थी, जो 2025 में बढ़कर 4.3 ट्रिलियन डॉलर होने का अनुमान है। नीतिगत सुधार और स्थिर आर्थिक विकास से सम्भव हुई तेज आर्थिक वृद्धि तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के चलते भारत 2025 में जापान और 2027 में जर्मनी को पीछे छोड़ देगा। इससे भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। IMF ने कहा कि भारत की तेज आर्थिक वृद्धि का मुख्य कारण मजबूत नीतिगत सुधार और स्थिर आर्थिक विकास है। बीजेपी नेता अमित मालवीय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की बड़ी उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि साहसिक आर्थिक नीतियों, संरचनात्मक सुधारों और व्यापार करने में आसानी पर फोकस के कारण भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बन गया है। उन्होंने यह भी कहा कि आजादी के बाद किसी भी सरकार को यह सफलता हासिल नहीं हुई थी। 2025 तक जर्मनी, 2027 तक जापान को छोड़ देगी पीछे बीजेपी नेता अमित मालवीय द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर की गई पोस्ट में कहा गया कि विकास की यह गति भारत को एक वैश्विक आर्थिक महाशक्ति के रूप में स्थापित करती है, जो 2025 तक जापान और 2027 तक जर्मनी को पीछे छोड़ देगी. मालवीय ने आगे कहा कि यह असाधारण उपलब्धि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और उनकी सरकार के अथक प्रयासों का प्रमाण है. सक्रिय आर्थिक नीतियों, साहसिक संरचनात्मक सुधारों और व्यापार करने में आसानी पर निरंतर फोकस के माध्यम से मोदी सरकार ने भारत को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना दिया है. शानदार वृद्धि के पीछे कई अन्य कारक मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया और उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजनाओं ने निवेशकों का भरोसा मजबूत किया है। मजबूत स्टार्टअप तंत्र और आईटी क्षेत्र की निरंतर प्रगति ने भी आर्थिक विकास को गति दी है। 10 साल में कोई और देश भी आसपास नहीं देश 2015 में जीडीपी 2025 में जीडीपी वृद्धि दर जर्मनी 3.4 4.9 44% जापान 4.4 4.4 0% यूके 2.9 3.7 28% फ्रांस 2.4 3.3 38% इटली 1.8 2.5 39% कनाडा 1.6 2.3 44% ब्राजील 1.8 2.3 28% रूस 1.4 2.2 57% द. कोरिया 1.5 1.9 27% ऑस्ट्रेलिया 1.2 1.9 58% स्पेन 1.2 1.8 50%   महत्वपूर्ण सुधारों को अपनाने में करता है मदद   अमित मालवीय ने साथ ही कहा कि यह एक ऐसी उपलब्धि जो आजादी के बाद से किसी भी पिछली सरकार को हासिल नहीं हुई थी. इस महीने की शुरुआत में, भारत की विवेकपूर्ण नीतियों की सराहना करते हुए आईएमएफ के कार्यकारी बोर्ड ने कहा है कि देश का मजबूत आर्थिक प्रदर्शन 2047 तक विकसित अर्थव्यवस्था बनने के लिए महत्वपूर्ण सुधारों को अपनाने में मदद कर सकता है.आईएमएफ के कार्यकारी बोर्ड ने कहा कि संरचनात्मक सुधार देश में उच्च-गुणवत्ता की नौकरियां पैदा करने और निवेश के लिए काफी जरूरी हैं. इस महीने की शुरुआत में IMF के कार्यकारी बोर्ड ने भी भारत की आर्थिक नीतियों की तारीफ की। बोर्ड ने कहा कि भारत का मजबूत प्रदर्शन उसे 2047 तक विकसित अर्थव्यवस्था बनने में मदद कर सकता है। IMF ने यह भी सुझाव दिया कि भारत को लेबर मार्केट में सुधार करने और महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए, जिससे उच्च गुणवत्ता वाली नौकरियों का सृजन हो सके।  

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