LATEST NEWS

मध्यप्रदेश के कूनो में चीतों को बसाने में विन्सेंट अब नहीं रहे, रियाद के अपार्टमेंट में मिला शव

 भोपाल दुनिया के प्रसिद्ध चीता विशेषज्ञ और ‘द मेटापॉपुलेशन इनिशिएटिव’ (TMI) के संस्थापक विन्सेंट वैन डेर मेरवे का शव सऊदी अरब की राजधानी रियाद के एक अपार्टमेंट में मिला है. उनके निधन की खबर से दुनियाभर के वन्यजीव संरक्षणवादियों में शोक की लहर दौड़ गई है. विन्सेंट वैन डेर मेरवे मूल रूप से दक्षिण अफ्रीका के निवासी थे और दक्षिण अफ्रीका के साथ-साथ एशिया में चीता संरक्षण एवं पुनर्वास के क्षेत्र में अपनी विशेषज्ञता के लिए जाने जाते थे. उनकी संस्था ‘द मेटापॉपुलेशन इनिशिएटिव’ इन दिनों सऊदी अरब सरकार के साथ मिलकर वहां चीतों को बसाने की योजना पर काम कर रही थी. इसी सिलसिले में वह रियाद गए थे, जहां उनका शव बरामद हुआ. PM मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट से जुड़े थे विन्सेंट विन्सेंट वैन डेर मेरवे भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के महत्वाकांक्षी ‘प्रोजेक्ट चीता’ से भी गहरे तौर पर जुड़े थे. इस परियोजना के तहत मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में चीतों को फिर से बसाने का प्रयास किया जा रहा है. नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से भारत लाए गए चीतों को भारतीय परिस्थितियों के अनुकूल ढालने में उनकी भूमिका बेहद अहम थी. वह उन चुनिंदा अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों में से एक थे, जिन्होंने इस परियोजना को दिशा-निर्देश प्रदान किए. यह परियोजना भारतीय घास के मैदानों में अफ्रीकी चीतों को बसाने की एक अनूठी पहल है. चुनौतियों के बावजूद, विन्सेंट ने इस प्रोजेक्ट में अपनी आस्था जताई थी और इसके शुरुआती चरणों की सफलता में उनका बड़ा योगदान रहा. चीता संरक्षण में वैश्विक योगदान विन्सेंट ने अफ्रीका और एशिया में चीतों के पुनर्वास से जुड़े कई परियोजनाओं में सक्रिय रूप से काम किया था. उनकी विशेषज्ञता और समर्पण ने चीता संरक्षण के क्षेत्र में एक अमिट छाप छोड़ी. उनके असामयिक निधन से न केवल ‘प्रोजेक्ट चीता’, बल्कि वैश्विक संरक्षण समुदाय को भी गहरा आघात पहुंचा है. कैसे हुआ निधन? विन्सेंट वैन डेर मेरवे की संस्था TMI चीतों की आबादी को बढ़ाने और उनकी सुरक्षा के लिए काम करती है। उनकी संस्था ‘द मेटापॉपुलेशन इनिशिएटिव’ इन दिनों सऊदी अरब सरकार के साथ मिलकर चीतों को बसाने की योजना पर काम कर रही थी। इसी सिलसिले में विन्सेंट रियाद गए थे। रियाद में उनके अपार्टमेंट बिल्डिंग के हॉलवे में विन्सेंट का शव मिला। CCTV फुटेज से पता चला कि मेरवे अचानक गिरे और सिर पर चोट लग गई। गंभीर चोट लगने के कारण उनकी जान चली गई। कौन थे विन्सेंट वैन डेर मेरवे? विन्सेंट का जन्म 1983 में साउथ अफ्रीका में हुआ था। वन्यजीवों के प्रति उनके प्रेम ने उन्हें संरक्षण जीव विज्ञान में एक शानदार करियर की ओर अग्रसर किया। ‘द मेटापॉपुलेशन इनिशिएटिव’ (TMI) के संस्थापक थे।  चीतों की आबादी को बढ़ाने और उनकी सुरक्षा के लिए कई प्रयास किए। विन्सेंट ने चीतों को विभिन्न अभ्यारण्यों में सफलतापूर्वक फिर से बसाया।   217 चीतों के साथ हुई थी शुरुआत विन्सेंट के ‘चीता मेटापॉपुलेशन प्रोजेक्ट’ की शुरुआत साउथ अफ्रीका के 41 वन्यजीव अभ्यारण्यों में 217 चीतों के साथ हुई थी। आज यह प्रोजेक्ट साउथ अफ्रीका, मलावी, जाम्बिया, जिम्बाब्वे, मोजाम्बिक और भारत में 75 अभ्यारण्यों में 537 चीतों तक फैल चुका है। एमपी में चीते बसाने में अहम भूमिका भारत में पीएम नरेंद्र मोदी के ‘प्रोजेक्ट चीता’ की सफलता के पीछे विन्सेंट की अहम भूमिका रही। नरेंद्र मोदी के महत्वाकांक्षी ‘प्रोजेक्ट चीता’ से विन्सेंट गहरे तौर पर जुड़े थे। इस परियोजना के तहत मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में चीतों को फिर से बसाया। नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से भारत लाए गए चीतों को भारतीय परिस्थितियों के अनुकूल ढालने में उनकी भूमिका बेहद अहम थी।

यमन के हूती चरमपंथियों ने अमेरिका के शक्तिशाली ड्रोन MQ-9 को मार गिराया

सना  यमन के हूती चरमपंथियों ने अमेरिका के शक्तिशाली ड्रोन MQ-9 को मार गिराया है। लेबनान के चरमपंथी संगठन हिजबुल्लाह से जुड़े मीडिया आउटलेट अल-मायादीन ने बताया है कि अमेरिकी ड्रोन को यमन के पश्चिमी धामर प्रांत में मार गिराया गया। रिपोर्ट में हालांकि यह साफ नहीं किया गया कि अमेरिकी ड्रोन को किसने मार गिराया। अक्टूबर 2023 के बाद यह 16वां अमेरिकी MQ-9 ड्रोन है जिसे यमन में मार गिराया गया है। एक और ड्रोन के गिराए जाने इस अमेरिकी किलर मशीन की क्षमता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। 3.2 करोड़ डॉलर है MQ-9 की कीमत हूतियों ने 3.2 करोड़ डॉलर वाले MQ-9 रीपर ड्रोन को उस समय मार गिराया है, जब अमेरिकी सेना ने पिछले सप्ताह ही यमन में बड़े हमले शुरू किए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश के बाद अमेरिकी सेना ने हूतियों के खिलाफ घातक हमले किए हैं। हालांकि, अमेरिकी सेना ने अभी तक रीपर ड्रोन के गिराए जाने को लेकर कोई बयान नहीं दिया है। इसी महीने गिराया था एक और ड्रोन इसी महीने में यह अमेरिकी MQ-9 रीपर ड्रोन के खिलाफ हूतियों की दूसरी सफलता है। मार्च की शुरुआत में हूती चरमपंथियों ने दावा किया था कि उन्होंने पश्चिमी यमन के हुदैदाह जिले के ऊपर एक और अमेरिकी निर्मित एमक्यू-9 को मार गिराया है। हूती सशस्त्र बलों ने एक बयान में कहा था कि उनके हवाई सुरक्षा बलों ने ड्रोन को सफलतापूर्वक निशाना बनाया, जब यह कथित तौर पर यमनी क्षेत्र में अभियान चला रहा था। अमेरिकी वायु सेना ने तब बताया था कि उसने लाल सागर के ऊपर संचालन करते समय एक एमक्यू-9 रीपर ड्रोन से संपर्क खो दिया था। अमेरिकी अधिकारी के हवाले से अल-अरबिया ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि एमक्यू-9 ऑपरेशन पोसायडन ऑर्चर के समर्थन में ऑपरेशन कर रहा था। अधिकारी ने घटने कारण और उससे जुड़ी किसी भी कार्रवाई का पता लगाने के लिए आकलन करने की बात कही थी। भारत के लिए क्यों हैं टेंशन? यमन में अमेरिकी एमक्यू-9 रीपर ड्रोन का गिरना भारत के लिए भी चिंता की बात है। भारत इस ड्रोन के प्रीडेटर वैरिएंट के लिए अमेरिका के साथ 3.6 अरब डॉलर की डील की है। इस डील के तहत भारत को अमेरिका से 31 एमक्यू-9 रीपर ए (प्रीडेटर) ड्रोन हासिल होने हैं। लेकिन यमन में इन ड्रोन की नाकामी ने सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है कि अगर हूती विद्रोही अपनी हल्की मिसाइल और रॉकेट से इसे मार गिरा रहे हैं तो चीन जैसे मजबूत प्रतिद्वंद्वियों के सामने यह कितना कारगर होगा और क्या भारत को इस पर भरोसा करना चाहिए?

जॉर्जटाउन विश्वविद्यालय के भारतीय छात्र की गिरफ्तारी, हमास से संबंध रखने का लगाया गया है आरोप

वॉशिंगटन  अमेरिका की जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले एक भारतीय छात्र को गिरफ्तार किया गया है। बदर सूरी नाम के इस छात्र पर DHS (यूएस डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी) ने आरोप लगाया है कि उसका फिलिस्तीनी गुट हमास से संबंध हैं। उस पर सोशल मीडिया पर हमास का प्रचार और यहूदी विरोधी बातें फैलाने का भी इल्जाम है। अमेरिका गाजा को नियंत्रित करने वाले हमास को आतंकी गुट मानता है। बदर के वकील ने  बताया कि ट्रंप प्रशासन उसे अमेरिकी विदेश नीति के लिए खतरा बताकर भारत डिपोर्ट करने की योजना बना रहा है। फिलहाल उसका केस लुइसियाना के अलेक्जेंड्रिया की इमिग्रेशन कोर्ट में है। वाइट हाउस के डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ स्टीफन मिलर ने बताया है कि विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि सूरी के काम उसके निर्वासन के लिए काफी हैं। बयान में कहा गया है कि सूरी एक छात्र वीजा पर अमेरिका में रहकर पढ़ाई कर रहा था। उसने एक अमेरिकी लड़की से शादी की हुई है। बदर को सोमवार रात वर्जीनिया के रॉसलिन में उसके घर के बाहर से पुलिस ने गिरफ्तार किया। फिलहाल कोर्ट में है केस बदर सूरी वॉशिंगटन डीसी के जॉर्जटाउन विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ फॉरेन सर्विस में अलवलीद बिन तलाल सेंटर फॉर मुस्लिम-क्रिश्चियन अंडरस्टैंडिंग में फेलो हैं। DHS ने फॉक्स न्यूज को बताया कि सूरी पर हमास से संबंध रखने का आरोप है। हालांकि DHS ने अपने आरोपों के समर्थन में कोई सबूत नहीं दिया है। इस पर सूरी के वकील ने भी सवाल किए हैं। कोलंबिया यूनिवर्सिटी की भारतीय पीएचडी छात्रा रंजनी श्रीनिवासन को भी हाल ही में अमेरिका छोड़ना पड़ा है। उन्होंने भी फिलिस्तीन के समर्थन में प्रदर्शन किया था। इसके चलते उनका वीजा 5 मार्च को रद्द कर दिया गया था। उन पर भी आतंकवाद का समर्थन करने और हमास से जुड़ी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया गया। इससे रंजनी श्रीनिवासन को सेल्फ डिपोर्टेशन के लिए मजबूर होना पड़ा। ट्रंप प्रशासन ने चला रखा है अभियान अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के प्रशासन ने फिलहाल कोलंबिया यूनिवर्सिटी को मिलने वाली करीब 400 मिलियन डॉलर की सरकारी मदद रोकी है। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि अगर कोई छात्र हिंसा और आतंकवाद का समर्थन करता है, तो उसे अमेरिका में रहने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए। इस पर ट्रंप प्रशासन सख्त दिख रहा है।

इजरायल ने गाजा पट्टी में एक बार फिर हवाई हमले शुरू कर दिए, अब आरपार की लड़ाई का ऐलान

तेल अवीव  इजरायल ने गाजा पट्टी में एक बार फिर हवाई हमले शुरू कर दिए हैं। इजरायली सेना ने मंगलवार को एक के बाद एक हमले किए। इससे गाजा में कम से कम 400 से ज्‍यादा लोगों की मौत हुई है। इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्‍याहू ने कहा कि हमास के खिलाफ हमले जारी रहेंगे। ये हमले तब हुए हैं, जब गाजा में जनवरी में शुरू हुए युद्धविराम का पहला फेज खत्म हो गया है। युद्धविराम पर दोनों पक्षों की सहमति ना बन पाने के बाद इजरायल गाजा में बम बरसा रहा है। हालांकि गाजा को नियंत्रित करने वाला फिलिस्तीनी गुट हमास ने इजरायल के हमले और बेंजामिन नेतन्‍याहू की धमकी के बावजूद अपना रुख नहीं बदला है। इजरायली वेबसाइट यरुशलम पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, हमास के अपने रुख में कोई नरमी नहीं है, वह बंधक और युद्धविराम समझौते के लिए अपनी शर्तों पर अड़ा है। एक अधिकारी ने द यरूशलम पोस्ट को बताया कि हमास फिलहाल अपना रुख बदलने के मूड में नहीं दिख रहा है। इससे इजरायल का रुख और सख्त हो सकता है। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने रक्षा मंत्री काट्ज और वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारियों के साथ गाजा मुद्दे पर बुधवार को तीन घंटे तक मीटिंग की है। इस बैठक में हमास और गाजा पर हमले तेज करने का फैसला लिया गया है। ‘जमीनी बल भी गाजा में जाएंगे’ इजरायली अधिकारी ने कहा है कि उनके जमीनी बलों की नेटजारिम कॉरिडोर में एंट्री सिर्फ शुरुआत है। आने वाले समय में इजरायल का रिएक्शन और ज्यादा कड़ा हो सकता है। इजरायल ने गाजा में हमास के शासन को खत्म करने पर जोर दिया है। इजरायल के मिनिस्टर मिकी जोहर लिकुड ने कहा कि हमने हमास के प्रति अपना रवैया ज्यादा सख्त करने का फैसला किया है। जोहर ने कहा, ‘इजरायल चाहता है कि बंधकों की वापसी हो और हमास को निशस्त्र कर दिया जाए। मेरा मानना है कि गाजा पट्टी पर पूरी तरह इजरायल का नियंत्रण हो। अपने लक्ष्यों को हासिल करने के लिए कैबिनेट लड़ाई जारी रखने के पक्ष में हैं।’ मिनिस्टर ओरिट स्ट्रोक ने कहा कि इजरायल का अंतिम लक्ष्य हमास को खत्म करना है। ये युद्ध से ही होगा, इसके अलावा कोई और विकल्प नहीं है। ओरिट स्ट्रोक ने आगे कहा कि इजरायली सेना ने हालिया हवाई हमलों में हमास के नागरिक नेतृत्व को भी निशाना बनाया है। यह बात 7 अक्टूबर, 2023 को ही तय हो गई थी लेकिन इसे पूरी तरह से लागू नहीं किया गया था।अब हम उस लक्ष्य को पूरा करने की दिशा में काम कर रहे हैं। इस पर हम पीछे नहीं हटेंगे।

दिशा सालियान के पिता पहुंचे हाईकोर्ट, आदित्य ठाकरे के खिलाफ FIR की मांग, HC जाएंगे

मुंबई सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियान के पिता ने बेटी की मौत की जांच सीबीआई को सौंपने का आग्रह किया है। साथ ही मौत की नई सिरे से जांच की भी मांग की है। उन्होंने इस संबंध में बुधवार, 19 मार्च को बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दायर की। याचिका में दिशा सालियान के पिता ने शिवसेना के आदित्य ठाकरे के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की भी मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि दिशा की गैंगरेप के बाद हत्या की गई है। मालूम हो कि करीब तीन साल पहले बीजेपी नेता नितेश राणे ने आरोप लगाया था कि दिशा सालियान की गैंगरेप के बाद हत्या की गई। हालांकि, तब दिशा की मां और पिता ने नितेश के खिलाफ यह कहते हुए केस दर्ज करवा दिया था कि यह उनकी बेटी को बदनाम करने की साजिश है। पर अब पिता का कुछ और ही कहना है। उन्होंने बेटी की मौत की नए सिरे से जांच का आग्रह किया है, और कहा है कि उन्हें नजरबंद करके पुलिस द्वारा पेश किए गए सबूतों को सच मानने के लिए मजबूर किया गया था। दिशा सालियान की 8 जून 2020 को मुंबई के मलाड स्थित एक बिल्डिंग की 8वीं मंजिल से गिरकर मौत हो गई थी। तब पुलिस ने इसे सुसाइड का केस बताया था। दिशा के माता-पिता ने भी जांच पर संतुष्टि दिखाते हुए इसे सुसाइड का केस मान लिया था। पर अब गैंगरेप के बाद हत्या का अंदेशा जताया है। दिशा के पिता ने दायर याचिका में मुंबई पुलिस, तत्कालीन मेयर किशोरी पेडनेकर, एक्टर डिनो मोरिया और सूरज पंचोली पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। दिशा के पिता ने यह भी आरोप लगाया है कि मुंबई पुलिस और किशोरी पेडनेकर ने उन्हें गुमराह किया और दबाव बनाया। बीजेपी नेता नितेश राणे का दावा- CCTV फुटेज डिलीट, पुलिस को सब पता इसके बाद बीजेपी नेता नितेश राणे ने कहा कि आदित्य ठाकरे को अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। उन्होंने कहा कि दिशा सालियान की हत्या की गई थी। सोसाइटी का जो विजिटर रजिस्टर था, उसके पन्ने फाड़ दिए गए और सीसीटीवी फुटेज तक डिलीट कर दिया गया। उन्होंने इस मामले की सीबीआई जांच की मांग की थी। नितेश राणे ने दो साल पहले कहा था कि दिशा ने 100 नंबर पर पुलिस को फोन कर सारी बात बताई थी, और मदद मांगी थी। चूंकि यह कॉल रिकॉर्डेड था, इसलिए पुलिस के पास जरूर जानकारी होगी। नितेश राणे ने यह भी कहा कि वह सीबीआई की मदद करने को भी तैयार हैं। दिशा सालियान की मौत पर क्या बोली थी पुलिस? वहीं, पुलिस ने दावा किया था कि दिशा सालियान करियर को लेकर दबाव में थीं, और इसलिए सुसाइड किया। पर दिशा की मौत के कुछ दिन बाद एक वीडियो सामने आया था, जिसमें वह पार्टी करती नजर आईं। इसे उनकी मौत से एक घंटे पहले का बताया गया। वीडियो में दिशा काफी खुश नजर आ रही थीं, और साथ में उनके बॉयफ्रेंड रोहन भी थे। पुलिस ने बताया था कि दिशा ने मौत से पहले लंदन में एक दोस्त को फोन किया था, और कहा था कि उन पर काम का काफी दबाव है। और बाद में फिर वह मृत मिली थीं। दिशा की मौत के 6 दिन बाद ही सुशांत सिंह राजपूत अपने फ्लैट में मृत पाए गए थे।

भारतीय रेलवे का बड़ा कदम, ट्रेन में अब जितनी सीटें होंगी उतने ही Tickets किए जाएंगे जारी

नई दिल्ली भारतीय रेलवे यात्रियों को बेहतर सुविधा देने के लिए लगातार काम कर रहा है। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संसद में बताया कि रेलवे ट्रेनों में वेटिंग टिकट के यात्रियों को नियंत्रित करने के लिए एक बड़ा कदम उठा रहा है। अब से ट्रेन में जितनी सीटें उपलब्ध होंगी उतने ही टिकट जारी किए जाएंगे। इसका उद्देश्य यह है कि जिन यात्रियों के पास कन्फर्म टिकट है उन्हें वेटिंग टिकट वालों की वजह से कोई परेशानी न हो। रेलवे की बड़ी उपलब्धियां अश्विनी वैष्णव ने यह भी बताया कि मोदी सरकार के कार्यकाल में भारतीय रेलवे ने कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने जानकारी दी कि साल 2014 से पहले भारत में कुल 125 किलोमीटर लंबी टनल्स थीं जबकि अब तक 460 किलोमीटर नई सुरंगें बनाई जा चुकी हैं। इसके साथ ही भारतीय रेलवे के पास अब 56,000 जनरल और स्लीपर कोच हैं जबकि 23,000 एसी कोच हैं। कोलकाता मेट्रो का ऐतिहासिक विकास रेल मंत्री ने कोलकाता मेट्रो रेल प्रोजेक्ट की भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि 1972 में शुरू हुए इस प्रोजेक्ट में 2014 तक सिर्फ 28 किलोमीटर काम हुआ था लेकिन 2014 के बाद मोदी सरकार के कार्यकाल में 10 सालों में 38 किलोमीटर नया काम किया गया है। सुरक्षा पर विशेष ध्यान रेल मंत्री ने सुरक्षा के क्षेत्र में किए गए सुधारों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि रेलवे ने लंबी दूरी की ट्रेनों के लिए नए इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम, फॉग सेफ्टी डिवाइस और अन्य तकनीकी बदलाव किए हैं जिससे यात्रियों की सुरक्षा में सुधार हुआ है। रेलवे का बढ़ता निर्यात अश्विनी वैष्णव ने यह भी बताया कि भारतीय रेलवे अब एक बड़ा निर्यातक बन चुका है। भारत अब ऑस्ट्रेलिया को मेट्रो कोच, यूनाइटेड किंगडम, सऊदी अरब, और फ्रांस को रेल कोच और मैक्सिको, स्पेन, जर्मनी और इटली को ऑपरेशनल इक्विपमेंट्स का निर्यात कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि जल्द ही बिहार में बने लोकोमोटिव और तमिलनाडु में तैयार पहिए दुनियाभर में इस्तेमाल होंगे। इस तरह भारतीय रेलवे ने कई अहम सुधार और विकास कार्य किए हैं जो यात्रियों को बेहतर सेवा प्रदान करने के साथ-साथ दुनिया भर में भारतीय रेलवे को एक महत्वपूर्ण नाम बना रहे हैं।  

बिल गेट्स ने इनोवेशन, हेल्थ और सस्टेनेबिलिटी में भारत के लीडरशिप की सराहना की

नई दिल्ली गेट्स फाउंडेशन के अध्यक्ष और बोर्ड सदस्य बिल गेट्स ने बुधवार को कहा कि भारत न केवल अपने नागरिकों को सशक्त बनाने के लिए डिजिटल इनोवेशन का निर्माण कर रहा है, बल्कि ऐसे समाधान भी बना रहा है, जिनमें ग्लोबल हेल्थ और विकास को बदलने की क्षमता है। गेट्स फाउंडेशन और महिला सामूहिक मंच के सहयोग से सीआईआई द्वारा आयोजित एक वैश्विक मंच पर बोलते हुए, बिल गेट्स ने इनोवेशन, हेल्थ और सस्टेनेबिलिटी में भारत के लीडरशिप की सराहना की। इस मंच के साथ वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए स्केलेबल, सस्टेनेबल और टेक-ड्रिवन सॉल्यूशन को आगे बढ़ाने में भारत की बढ़ती भूमिका के मध्यनजर ग्लोबल इंडस्ट्री लीडर, पॉलिसी मेकर्स और इन्वेस्टर्स एक साथ आए। गेट्स ने इस बात पर प्रकाश डाला कि भारत किफायती स्वास्थ्य सेवा, एआई-संचालित निदान और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर में अपनी लीडिंग भूमिका के साथ भविष्य का निर्माण कर रहा है। उन्होंने उभरती अर्थव्यवस्थाओं में दबाव वाली चुनौतियों का समाधान करने के लिए वैश्विक स्तर पर भारत के इनोवेटिव सॉल्यूशन को बढ़ाने के महत्व पर जोर दिया। गेट्स ने भारत की तीव्र प्रगति पर भी प्रकाश डालते हुए देश के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, इंक्लूसिव आर्थिक विकास और तकनीकी सफलताओं को दुनिया के लिए एक मॉडल बताया। उन्होंने कहा, “भारत ने कम लागत वाले इनोवेशन के जरिए स्वास्थ्य और विकास में महत्वपूर्ण प्रगति की है।” भविष्य की ओर देखते हुए, गेट्स ने वैश्विक स्तर पर एआई, स्वास्थ्य सेवा और सस्टेनेबल डेवलपमेंट में सफलताओं को बढ़ाने के लिए भारतीय इनोवेटर्स, पॉलिसी मेकर्स और उद्यमियों के साथ मिलकर काम करने के लिए अपने फाउंडेशन के कमिटमेंट की पुष्टि की। अलायंस फॉर ग्लोबल गुड जेंडर इक्विटी एंड इक्वलिटी की अध्यक्ष स्मृति ईरानी ने फाउंडेशन और गेट्स के नेतृत्व की सराहना की। साथ ही सोशल इनोवेशन के लिए निवेश की भी महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। ईरानी ने कम लागत वाले, टेक्नोलॉजी-ड्रिवन समाधान लाने में भारत की शक्ति के बारे में बात की, जो स्वास्थ्य, पोषण और खाद्य सुरक्षा जैसी महत्वपूर्ण वैश्विक चुनौतियों का समाधान कर रहे हैं। सीआईआई के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर में भारत की लीडिंग भूमिका पर जोर दिया और इसे ग्लोबल साउथ के लिए एक ब्लू प्रिंट बताया। सीआईआई के अध्यक्ष संजीव पुरी ने कहा, “आयुष्मान भारत स्वास्थ्य कार्यक्रम और डिजिटल फाइनेंशियल इंक्लूसन, एआई-पावर्ड कृषि समाधान जैसी पहलों की सफलता यह साबित करती है कि जब नीति और टेक्नोलॉजी एक साथ आती है तो हम ऐसे स्केलेबल, सस्टेनेबल सॉल्यूशन बना सकते हैं जो ग्लोबल बेंचमार्क के रूप में काम करते हैं।”

सुप्रीम कोर्ट ने कहा- राशन कार्ड को लेकर घिरीं राज्य सरकारें, सब्सिडी का लाभ वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंचना चाहिए

नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि जब राज्यों से विकास सूचकांक बताने के लिए कहा गया तो उन्होंने प्रति व्यक्ति वृद्धि दर ऊंची दिखाई, लेकिन जब सब्सिडी की बात आई तो उन्होंने दावा किया कि उनकी 75 प्रतिशत आबादी गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) है। अदालत ने कहा कि सब्सिडी का लाभ वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंचने चाहिए। जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस एन. कोटिस्वर सिंह की पीठ ने कहा, ‘हमारी चिंता यह है कि क्या गरीबों को मिलने वाले लाभ उन लोगों तक पहुंच रहे हैं जो इसके हकदार नहीं हैं? राशन कार्ड अब लोकप्रियता का कार्ड बन गया है।’ 75 प्रतिशत आबादी बीपीएल कैसे? पीठ ने कहा, ‘ये राज्य सिर्फ इतना कहते हैं कि हमने इतने कार्ड जारी किए हैं। कुछ राज्य ऐसे हैं जो जब अपना विकास दिखाना चाहते हैं तो कहते हैं कि हमारी प्रति व्यक्ति आय बढ़ रही है। फिर जब हम बीपीएल की बात करते हैं तो वे कहते हैं कि 75 प्रतिशत आबादी बीपीएल है। इन तथ्यों को कैसे जोड़ा जा सकता है? विरोधाभास अंतर्निहित है। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि लाभ वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंचे।’ जानिए पूरा मामला यह केस कोविड-19 महामारी के दौरान प्रवासी कामगारों की परेशानियों को दूर करने के लिए शुरू किए गए एक स्वत: संज्ञान मामले से संबंधित है। कुछ हस्तक्षेपकर्ताओं की ओर से पेश अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि यह विसंगति लोगों की आय में असमानताओं से उपजी है। उन्होंने कहा कि मुट्ठीभर लोग हैं, जिनके पास अन्य आबादी की तुलना में बहुत अधिक संपत्ति है और प्रति व्यक्ति आय का आंकड़ा राज्य की कुल आय का औसत है। अमीर और अमीर होते जा रहे हैं, जबकि गरीब गरीब ही बने हुए हैं। राशन कार्ड जारी करने में राजनीतिक तत्व न हों शामिल भूषण ने कहा कि सरकार के ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकृत गरीब प्रवासी कामगारों को मुफ्त राशन दिए जाने की जरूरत है और यह आंकड़ा लभगग आठ करोड़ है। जस्टिस सूर्य कांत ने कहा कि हमें उम्मीद है कि राशन कार्ड जारी करने में राजनीतिक तत्व शामिल नहीं होंगे। मैं अपनी जड़ों नहीं कटा हूं। मैं हमेशा गरीबों की दुर्दशा के बारे में जानना चाहता हूं। अभी भी ऐसे परिवार हैं जो गरीब हैं। 81 करोड़ लोगों को दिया जा रहा मुफ्त राशन भूषण ने कहा कि केंद्र ने 2021 की जनगणना नहीं कराई और 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर काम कर रही है। इसके परिणामस्वरूप मुफ्त राशन की जरूरत वाले करीब 10 करोड़ लोग बीपीएल श्रेणी से बाहर रह गए। जबकि केंद्र की ओर से एएसजी ऐश्वर्य भाटी ने कहा कि सरकार राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत करीब 81.35 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन दे रही है और इसी तरह की एक अन्य योजना में 11 करोड़ अन्य लोग शामिल हैं। पीठ ने मामले को स्थगित कर दिया और केंद्र से गरीबों को वितरित मुफ्त राशन की स्थिति पर अपना जवाब दाखिल करने को कहा।

11,00 से अधिक फाइलें सार्वजनिक, ट्रंप के आदेश के बाद अब यह दस्तावेज जनता के लिए पूरी तरह सुलभ हो गए

वाशिंगटन ट्रंप प्रशासन ने संयुक्त राज्य अमेरिका के 35वें राष्ट्रपति जॉन एफ. कैनेडी की हत्या से संबंधित फाइलों को सार्वजनिक कर दिया। कैनेडी की 1963 में टेक्सास में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश के बाद अब यह दस्तावेज जनता के लिए पूरी तरह सुलभ हो गए हैं। इसे सरकारी पारदर्शिता में एक ‘बड़ा कदम’ माना जा रहा है। अमेरिकी खुफिया प्रमुख तुलसी गबार्ड ने एक्स पर इस कदम की घोषणा करते हुए कहा, “राष्ट्रपति ट्रंप अधिकतम पारदर्शिता के एक नए युग की शुरुआत कर रहे हैं। आज, उनके निर्देशानुसार, पहले से संपादित जेएफके हत्याकांड की फाइलें बिना किसी संशोधन के जनता के लिए जारी की जा रही हैं। वादे किए गए, वादे पूरे हुए।” इस फैसले की वजह से 1,100 से अधिक फाइलें सामने आई हैं, जिनमें 31,000 पृष्ठ है। इन दस्तावेजों में सीआईए मेमो, एफबीआई रिपोर्ट और राजनयिक केबल शामिल हैं, जो कैनेडी की हत्या को लेकर लंबे समय से चल रही अटकलों पर प्रकाश डालते हैं। इतिहासकार, शोधकर्ता और षड्यंत्र सिद्धांतकार लंबे समय से जेएफके की मौत से जुड़ी घटनाओं को पूरी तरह से समझने की कोशिश कर रहे हैं। कई एक्सपर्ट मानते हैं कि नई उपलब्ध फाइलें मौजूदा ऐतिहासिक कहानी में बहुत ज़्यादा बदलाव नहीं ला सकती हैं। फिर भी लोगों में इस बात को लेकर आकर्षण बना हुआ है कि पूरी सच्चाई अभी भी गुप्त रखी गई है, जिससे नए सिरे से जांच और बहस को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। कैनेडी ने 22 नवंबर, 1963 को डलास, टेक्सास का दौरा किया। कैनेडी अपनी पत्नी जैकलीन, टेक्सास के गवर्नर जॉन कोनली और कोनली की पत्नी नेली के साथ खुली कार में शहर से गुजर रहे थे। तभी गोलियां चलीं। काफिला पार्कलैंड मेमोरियल अस्पताल पहुंचा, जहां गोलीबारी के करीब 30 मिनट बाद कैनेडी को मृत घोषित कर दिया गया; हमले में कॉनली भी घायल हुए थे। उपराष्ट्रपति लिंडन बी. जॉनसन ने दो घंटे और आठ मिनट बाद डलास लव फील्ड में एयर फोर्स वन में राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली। पुलिस ने ली हार्वे ओसवाल्ड को गोली मारने के आरोप में गिरफ्तार किया। एक नाइट क्लब के मालिक ने ओसवाल्ड को मुकदमे से पहले ही मार डाला। कैनेडी की हत्या अभी भी व्यापक बहस का विषय है और इसने कई षड्यंत्र सिद्धांतों और वैकल्पिक परिदृश्यों को जन्म दिया; सर्वेक्षणों में पाया गया कि अधिकांश अमेरिकियों का मानना ​​था कि इसमें एक साजिश थी।

राजनाथ सिंह ने मेजर बॉब खाथिंग मेमोरियल कार्यक्रम के दौरान कहा- सरकार प्रशासनिक सुधारों पर ध्यान केंद्रित कर रही है

नई दिल्ली रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बुधवार को कहा कि केंद्र की मोदी सरकार ने एक भी गोली चलाए बिना सबसे बड़ी बाधा ‘अनुच्छेद 370’ को हटाकर जम्मू-कश्मीर का देश में पूर्ण विलय किया। यह सभी हितधारकों को ध्यान में रखते हुए पूरी सुरक्षा के साथ शांतिपूर्ण तरीके से किया गया। राजनाथ सिंह ने दिल्ली में आयोजित मेजर बॉब खाथिंग मेमोरियल कार्यक्रम के दौरान कहा कि सरकार प्रशासनिक सुधारों पर ध्यान केंद्रित कर रही है। ‘न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन’ और ‘सुशासन’ के माध्यम से लोगों और सरकार के बीच के अंतर को कम किया गया है। उन्होंने बताया कि मेजर बॉब खाथिंग ने एक भी गोली चलाए बिना तवांग को भारत में कुशलतापूर्वक शामिल किया था। उन्होंने न केवल तवांग, बल्कि पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र के एकीकरण, विकास और पुनर्निर्माण में मेजर खाथिंग की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि पूर्वोत्तर के लिए उन्होंने जो किया, वह सरदार वल्लभभाई पटेल द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर किए गए कार्य के समान है। रक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार की विदेश नीति मेजर खाथिंग जैसे व्यक्तित्वों के कूटनीतिक कौशल पर आधारित है। आज भारत बहुध्रुवीय विश्व में व्याप्त अनिश्चितताओं के बीच अपनी ‘हार्ड पावर और सॉफ्ट पावर’ के बीच संतुलन बनाए हुए है। यह बहुत गर्व की बात है कि भारत ने अपनी वैश्विक स्थिति को मजबूत किया है। दुनिया के सामने एक नया, मजबूत और संगठित भारत उभरा है। एक समय था जब अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भारत को गंभीरता से नहीं लिया जाता था, लेकिन आज जब हम बोलते हैं तो दुनिया सुनती है। यह मेजर खाथिंग के आदर्शों से प्रेरित है। राजनाथ सिंह ने 2047 तक ‘विकसित भारत’ बनाने के लिए संगठित रहने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने देश की विकास यात्रा में पूर्वोत्तर की भूमिका को स्वीकार करते हुए कहा कि सरकार ने हमेशा इस क्षेत्र के विकास को प्राथमिकता दी है। इनमें बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में 13,000 फीट की ऊंचाई पर बनाई गई सेला सुरंग शामिल है, जो असम के तेजपुर को अरुणाचल प्रदेश के तवांग से जोड़ती है। इसके अलावा, अरुणाचल फ्रंटियर हाईवे के खुलने से यह पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र, विशेष रूप से सीमावर्ती क्षेत्रों में संपर्क बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभाएगा। लगभग दो हजार किलोमीटर लंबा यह राजमार्ग भारत के लिए एक रणनीतिक और आर्थिक परिसंपत्ति के रूप में काम करेगा। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा शुरू की गई विकास परियोजनाओं का ही परिणाम है कि पूर्वोत्तर तेजी से विकास के पथ पर आगे बढ़ रहा है और हिंसक घटनाओं में काफी कमी आई है। उन्होंने न्यूयॉर्क टाइम्स द्वारा जारी ‘2025 में भ्रमण योग्य 52 स्थलों’ का उल्लेख किया, जिसमें असम को चौथे स्थान पर रखा गया है। मेजर खाथिंग को भारत का महान सपूत बताते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि उन्होंने युद्ध के मैदान में बहादुरी और कूटनीति के क्षेत्र में कौशल के माध्यम से देश के इतिहास में अपनी अमिट छाप छोड़ी। ऐसे महान व्यक्तित्वों के आदर्शों और सिद्धांतों को अपनाना लोगों की जिम्मेदारी है। कार्यक्रम में अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू, थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेन्द्र द्विवेदी, वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए.पी. सिंह, असम राइफल्स के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल विकास लखेरा और यूनाइटेड सर्विस इंस्टीट्यूशन ऑफ इंडिया के महानिदेशक मेजर जनरल बी.के. शर्मा (सेवानिवृत्त) उपस्थित थे।

मैं किसी से डरता नहीं हूं, मैं किसी की कृपा के भरोसे यहां नहीं आया हूं, चुनाव जीत कर आया हूं, भड़के अमित शाह

नई दिल्ली राज्यसभा में बुधवार को गृह मंत्रालय के कामकाज पर चर्चा हुई. इस दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने टीएमसी सांसद साकेत गोखले को फटकार लगा दी. दरअसल, गृह मंत्रालय पर चर्चा के दौरान साकेत गोखले ने ईडी और सीबीआई का मुद्दा उठाया. इस पर अमित शाह ने कहा, गृह मंत्रालय पर चर्चा हो रही है लेकिन साकेत गोखले ED और सीबीआई की चर्चा कर रहे हैं. लेकिन फिर भी अगर यह इस मुद्दे को लाना चाहते हैं तो मुझे भी मौका दिया जाए मैं हर सवाल का जवाब दूंगा. इसके बाद साकेत गोखले ने कहा कि माननीय मंत्री जी बोलने से पहले ही डर गए हैं. इस पर अमित शाह ने कहा कि मैं किसी से डरता नहीं हूं. क्योंकि मैं किसी की कृपा के भरोसे यहां नहीं आया हूं मैं यहां पर चुनाव जीत कर आया हूं. मैं किसी विचारधारा का विरोध करके यहां नहीं आया हूं. दरअसल, शाह का ये तंज साकेत गोखले पर है. वे टीएमसी के टिकट पर राज्यसभा पहुंचे हैं. अमित शाह ने कहा, इस सदन को साकेत गोखले गलत तरीके से जानकारी दे रहे हैं.   अमित शाह ने कहा, बंगाल में सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के आदेश के बाद चुनावी हिंसा के मामले में केस दर्ज हुए हैं, जहां पर हमारी सीट ज्यादा आ गई वहां हमारे कार्यकर्ताओं की चुन चुन कर हत्या की गई. शिकायतकर्ता हाई कोर्ट पहुंचे फिर सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट ने यह आदेश दिया कि फिर सारे मामले दर्ज हों. यह वही केस हैं. शाह ने कहा, ये (टीएमसी) सुप्रीम कोर्ट को नहीं मानते हैं, हाई कोर्ट को नहीं मानते हैं. इस पर टीएमसी सांसद सुष्मिता देव ने कहा, यह लोग कितना अनाप शनाप बोलते हैं पर हम कुछ नहीं बोलते. साकेत गोखले ने बयान वापस लेने से किया इनकार सदन में तीखी बहस को देखते हुए उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने साकेत गोखले से कहा कि आपने जो बयान दिया है, उसको वापस लीजिए. इस पर साकेत गोखले ने कहा, मैं इसे वापस नहीं लूंगा. सकेत गोखले ने कहा क्योंकि आपका नाम अमित शाह है तो इसका मतलब यह नहीं है कि आप तानाशाही करेंगे. इस पर सत्ता पक्ष के सांसदों ने हंगामा किया. जेपी नड्डा ने कहा कि यह एक जाति विशेष को अनुसूचित करता है. जो सकेत गोखले ने कहा वह असंसदीय है उसको सदन के रिकॉर्ड से हटाया जाना चाहिए. राज्यसभा सभापति धनखड़ ने कहा कि इसको सदन की कार्रवाई से हटाया जाना चाहिए. उन्होंने साकेत गोखले से कहा या तो आप बयान वापस लीजिए वरना हम हटाते हैं. किरेन रिजीजू ने कहा कि साकेत गोखले ने चर्चा के दौरान एक भी सुझाव नहीं दिया, बल्कि इन्होंने व्यक्तिगत हमले किए हैं. आज तक हमने इस तरीके का कोई सदस्य नहीं देखा, जहां वह इस तरीके की बहस कर रहा हो, इन्होंने राज्यसभा की गरिमा गिरायी है. इस पर टीएमसी सांसद डेरिक ओ ब्रायन ने कहा, सत्ता पक्ष के साथियों ने हमारे सहयोगी के ऊपर सवाल उठाए. उधर, गोखले ने कहा कि मेरी स्पीच को गिरी हुई स्पीच बोला गया. साकेत गोखले ने कहा कि गृह मंत्री बाबासाहेब अंबेडकर का अपमान करते हैं, और यह जाति के अपमान की बात करते हैं. अगर गृह मंत्रालय ने अपने रवैया में सुधार नहीं किया तो आगे विधानसभा चुनाव में वह (बीजेपी) तड़ीपार हो जाएगी. जेपी नड्डा ने कहा कि मैं बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष होने के नाते इस पर आपत्ति दर्ज करवाता हूं, उन्होंने मेरी पार्टी के लिए तड़ीपार जैसे शब्द का इस्तेमाल किया है इसको सदन की कार्रवाई से हटाया जाना चाहिए.  

इनसाइड स्टोरी: एक तीर से तीन निशाने साध गए नेतन्याहू, गाजा में क्यों तोड़ा सीजफायर

नई दिल्ली इजरायल ने बुधवार को लगातार दूसरे दिन गाजा पट्टी पर ताबड़तोड़ हवाई हमले किए हैं। ताजा हमलों में 14 फिलिस्तीनियों की मौत हो गई है। इससे पहले इजरायल ने हमास के साथ एकतरफा युद्धविराम तोड़ते हुए मंगलवार को तड़के गाजा पट्टी पर कई हवाई हमले किए थे, जिसमें 400 से ज्यादा लोग मारे गए जबकि 500 से अधिक घायल हुए हैं। जनवरी में संघर्षविराम लागू होने के बाद से इजरायल द्वारा इस क्षेत्र में हमास के ठिकानों पर सबसे बड़ा हमला है। इजरायली हमलों का यह सिलसिला इस बात का प्रमाण है कि इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू हमास के साथ युद्ध विराम से बाहर निकल गए हैं। जनवरी में उन्होंने युद्ध विराम पर सहमति जताई थी। हालांकि, वह शुरू से ही इस उलझन में थे कि हमास के खिलाफ युद्ध रोका जाय या नहीं लेकिन बंधकों की रिहाई के मुद्दे पर उन्हें अमेरिकी और अपने ही देश के लोगों के दबाव में झुकना पड़ा था। अब जब हमास ने बंधकों का रिहाई रोक दी है, तब नेतन्याहू ने उसी का बहाना बनाकर फिर से गाजा पट्टी पर हमले शुरू कर दिए हैं। नेतन्याहू पर दोहरा दबाव हमास द्वारा बंधक बनाए गए इजरायली लोगों का परिवार चाहता है कि नेतन्याहू हमास के साथ समझौता कर सभी बंधकों को मुक्त कराएं, जबकि उनके दक्षिणपंथी गठबंधन सहयोगी हमास को खत्म करने के उद्देश्य से युद्ध जारी रखना चाहते हैं। इस बीच हमास के एक अधिकारी ताहिर अल-नोनो का कहना है कि हमास गाजा पट्टी पर फिर से इजरायली बमबारी के बावजूद बातचीत के दरवाजे बंद नहीं किए हैं, लेकिन इस बात पर भी जोर दिया है कि जब एक हस्ताक्षरित समझौता अस्तित्व में है तब तक नए समझौते की दरकार नहीं है। ट्रंप का नया दांव भारी उलझन के बीच नेतन्याहू ने गठबंधन सहयोगी के रास्ते पर चलना उचित समझा और मंगलवार से गाजा पर कहर बरपाना शुरू कर दिया है। बड़ी बात ये है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के प्रशासन ने भी नेतन्याहू के इस फैसले का समर्थन किया है, जिसमें उन्होंने एकतरफा युद्धविराम से अलग होकर गाजा पर हवाई हमले किए हैं। यहां यह बात भी दिलचस्प है कि ये वही ट्रंप हैं जिन्होंने हमास-इजरायल के बीच हुए युद्ध विराम की मध्यस्थता का श्रेय लिया था। संभवत: यह गाजा वासियों को अप्रीकी देशों में बसाने के उनके प्लान में आ रही दिक्कतों के बाद बदला स्टैंड है। दरअसल, इजरायल और अमेरिका दोनों ही अब हमास को इस बात का दोषी ठहरा रहे हैं कि उसने स्थाई रूप से युद्ध समाप्त करने के लिए बातचीत को आगे बढ़ाने से पहले अन्य बंधकों को रिहा करने से इनकार कर दिया, जबकि युद्ध विराम समझौते में इसका उल्लेख नहीं था। उधर, इजराइल का आरोप है कि हमास इसकी आड़ में नए हमलों की तैयारी कर रहा था। हालांकि, इजरायल ने इसका कोई सबूत नहीं दिया है। दूसरकी तरफ हमास ने इन आरोपों से इनकार किया है। युद्ध विराम समझौते में क्या कहा गया था? निवर्तमान बाइडेन प्रशासन और आने वाले ट्रम्प प्रशासन के दबाव में जनवरी में हुए युद्धविराम समझौते में चरणबद्ध तरीके से सीजफायर का आह्वान किया गया था। इसके साथ ही 7 अक्टूबर, 2023 को हुए हमास के हमले में अपहृत सभी बंधकों को मुक्त करना और उसके कारण होने वाले युद्ध को समाप्त करना था। सीजफायर के पहले चरण (19 जनवरी से 1 मार्च तक) में हमास ने लगभग 1,800 फिलिस्तीनी कैदियों के बदले में 25 इजरायली बंधकों और आठ अन्य के शवों को रिहा किया, जिनमें घातक हमलों के लिए आजीवन कारावास की सजा काट रहे वरिष्ठ हमास आतंकवादी भी शामिल थे। हालांकि, सीजफायर की वजह से इजरायली सेना बफर जोन में वापस चली गई और लाखों फिलिस्तीनी अपने घरों में वापस लौट आए और गाजा पट्टी में मानवीय सहायता कार्यक्रम में तेजी आ सकी लेकिन अब वह थम चुका है। नेतन्याहू ने युद्ध विराम से पीछे क्यों हट गए? अब सवाल उठता है कि जब सब पटरी पर चल रहा था और सिर्फ बंधकों की रिहाई धीमी पड़ी थी, तब नेतन्याहू ने फिर से एकतरफा युद्ध क्यों छेड़ दिया और मध्य-पूर्व को नया संकट में क्यों डाल दिया। दरअसल, नेतन्याहू अगर अगले चरण में जो मार्च में शुरू होना था, उस पर आगे बढ़कर स्थायी युद्ध विराम पर सहमत होते तो निश्चित रूप से एक राजनीतिक संकट में फंस जाते, जो उनके लगभग 15 साल के शासन को समाप्त कर सकता था। AP की रिपोर्ट में कहा गया है कि नेतन्याहू के दक्षिणपंथी सहयोगी और वित्त मंत्री बेज़ेल स्मोट्रिच ने धमकी दी थी कि अगर नेतन्याहू गाजा पर फिर से हमले शुरू करने के बजाय अगर युद्धविराम के दूसरे चरण की तरफ कदम बढ़ाते हैं तो वह गठबंधन तोड़ देंगे। अगर ऐसा होता तो इजरायल में समय पूर्व चुनाव होने की संभावना बढ़ जाती और नेतन्याहू को इस बात का भय है कि अगर अभी चुनाव हो तो उन्हें हार का सामना करना पड़ सकता है क्योंकि उनकी सरकार के खिलाफ आमजनों में काफी रोष है। दक्षिणपंथियों का फिर मिला साथ हालिया सर्वे में भी ये बात सामने आई है कि तीन चौथाई इजरायली नेतन्याहू से पद छोड़ने की मांग कर रहे हैं। अब लड़ाई को फिर से शुरू करके नेतन्याहू ने एक तरफ स्मोट्रिच का समर्थन सुनिश्चित कर लिया है, दूसरी तरफ किसी भी चुनाव की संभावना को खत्म कर दिया है।

अमेरिका में काम करने वाले मजदूरों को अच्छा वेतन मिलता है, खासकर कंस्ट्रक्शन मजदूरों को, जानकर हो जाएंगे हैरान

वाशिंगटन अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश है, जिसकी कुल अर्थव्यवस्था लगभग 28 ट्रिलियन डॉलर की है। यह दुनिया की हर बड़ी कंपनी का घर भी है और यहां की कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री भी काफी विकसित है। अमेरिका में काम करने वाले मजदूरों को अच्छा वेतन मिलता है, खासकर कंस्ट्रक्शन मजदूरों को, जो अपने दिन-प्रतिदिन के काम से अमेरिका के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूती प्रदान करते हैं। अगर हम अमेरिका में कंस्ट्रक्शन मजदूर की सैलरी की बात करें तो एक औसत मजदूर को हर महीने लगभग $4000 (लगभग 3 लाख रुपये) तक सैलरी मिलती है। हालांकि, यह आंकड़ा अलग-अलग राज्यों और काम के प्रकार के अनुसार भिन्न हो सकता है। कंस्ट्रक्शन मजदूर के काम की प्रकृति कंस्ट्रक्शन मजदूरों का काम कई प्रकार का होता है। ये वे लोग होते हैं जो घरों, बिल्डिंगों, दुकानों और अन्य संरचनाओं को बनाने का काम करते हैं। अमेरिका में लगभग 10 लाख लोग कंस्ट्रक्शन मजदूरी के तौर पर काम करते हैं। इनमें से कुछ मजदूर भवन निर्माण, सड़क निर्माण, पेंटिंग, और दूसरी असंरचित श्रेणियों में काम करते हैं। कंस्ट्रक्शन मजदूर को प्रति घंटा कितनी सैलरी मिलती है? एक कंस्ट्रक्शन मजदूर को औसतन $23.69 प्रति घंटा की दर से वेतन मिलता है। इसका मतलब यह है कि यदि कोई कंस्ट्रक्शन मजदूर सप्ताह में 40 घंटे काम करता है तो वह एक महीने में लगभग $4000 (लगभग 3 लाख रुपये) कमा सकता है। इसके अलावा, कंस्ट्रक्शन मजदूर का औसतन सलाना वेतन लगभग $49,280 (लगभग 37 लाख रुपये) होता है। यह वेतन अमेरिकी कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री के लिए एक आम आंकड़ा है, लेकिन इसमें कई भिन्नताएं हो सकती हैं जैसे कि व्यक्ति की कौशल स्तर, अनुभव, और काम की कठिनाई के आधार पर। अमेरिका में कंस्ट्रक्शन मजदूर के फायदे अमेरिका में कंस्ट्रक्शन मजदूरों को कई प्रकार के लाभ मिलते हैं, जैसे कि: स्वास्थ्य बीमा: कई कंपनियां अपने कर्मचारियों को स्वास्थ्य बीमा प्रदान करती हैं। पेंशन और रिटायरमेंट फंड: कामकाजी जीवन के अंत में कर्मचारियों के लिए पेंशन और रिटायरमेंट योजनाएं होती हैं। अवकाश लाभ: छुट्टियों और स्वास्थ्य अवकाश का लाभ भी दिया जाता है।  

भारतीय रेलवे द्वारा वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं और दिव्यांगजन के लिए विशेष लोअर बर्थ आरक्षण प्रावधान

नई दिल्ली भारतीय रेलवे ने वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं और दिव्यांगजन के लिए लोअर बर्थ (निचली बर्थ) की सुविधा सुनिश्चित करने हेतु महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। वरिष्ठ नागरिकों, 45 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं और गर्भवती महिलाओं के लिए आरक्षित लोअर बर्थ भारतीय रेलवे द्वारा वरिष्ठ नागरिकों, 45 वर्ष या उससे अधिक आयु की महिलाओं एवं गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष लोअर बर्थ आरक्षण की व्यवस्था की गई है। रेल मंत्री, सूचना एवं प्रसारण मंत्री और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में एक प्रश्न के उत्तर में बताया कि भारतीय रेलवे वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं एवं दिव्यांगजन को लोअर बर्थ प्रदान करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। वरिष्ठ नागरिकों, 45 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं और गर्भवती महिलाओं को यदि बुकिंग के समय विशेष रूप से लोअर बर्थ का विकल्प न भी चुना गया हो, तब भी उन्हें स्वचालित रूप से (यदि सीट उपलब्ध हो) लोअर बर्थ आवंटित की जाती है। लोअर बर्थ आरक्षण का विवरण: •    स्लीपर श्रेणी (Sleeper Class) में प्रत्येक कोच में 6 से 7 लोअर बर्थ का कोटा। •    वातानुकूलित 3 टियर (3AC) में प्रत्येक कोच में 4 से 5 लोअर बर्थ का कोटा। •    वातानुकूलित 2 टियर (2AC) में प्रत्येक कोच में 3 से 4 लोअर बर्थ का कोटा। यह सुविधा ट्रेन में कोचों की संख्या के अनुसार लागू होती है ताकि यात्रियों को अधिकतम सुविधा मिल सके। दिव्यांगजन के लिए आरक्षण कोटा: दिव्यांगजन के लिए आरक्षण कोटा सभी मेल/एक्सप्रेस ट्रेनों, जिसमें राजधानी और शताब्दी जैसी प्रीमियम ट्रेनें भी शामिल हैं, में लागू होता है। इस सुविधा का लाभ रियायत लेने पर निर्भर नहीं है, अर्थात रियायत न लेने पर भी दिव्यांगजन को यह कोटा उपलब्ध रहेगा। •    स्लीपर श्रेणी में 4 बर्थ (जिसमें 2 लोअर बर्थ शामिल)। •    3AC/3E में 4 बर्थ (जिसमें 2 लोअर बर्थ शामिल)। •    आरक्षित सेकंड सिटिंग (2S) या वातानुकूलित चेयर कार (CC) में 4 सीटों का कोटा। खाली लोअर बर्थ होने पर प्राथमिकता: यदि यात्रा के दौरान लोअर बर्थ खाली पाई जाती है तो प्राथमिकता के आधार पर वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगजन और गर्भवती महिलाओं को, जिन्हें पहले मिडिल या अपर बर्थ आवंटित की गई थी, उन्हें खाली लोअर बर्थ दी जाती है। भारतीय रेलवे अपनी इन समावेशी पहलों के माध्यम से यात्रियों को सुविधाजनक और आरामदायक यात्रा अनुभव प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। यात्रियों से अनुरोध है कि वे इस सुविधा का लाभ उठाकर सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा का आनंद लें।

शुभांशु शुक्ला ड्रैगन यान से भरेंगे उड़ान, जल्द लौटेंगे धरती पर

नई दिल्ली भारतीय मूल की अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स 286 दिनों तक अंतरिक्ष में रहने के बाद आज सुबह स्पेसएक्स के ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट के जरिए धरती पर सुरक्षित लौट आई हैं। यह यान फ्लोरिडा के तट पर बुधवार सुबह 3:27 बजे (IST) सफलतापूर्वक उतरा। स्पेसएक्स के ड्रैगन यान से सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर की सफल वापसी के बाद अब दुनिया की नजर आगामी एक्सियम मिशन 4 (Ax-4) पर टिकी है, जिसमें भारत की महत्वपूर्ण भागीदारी होगी। वसंत 2025 में लॉन्च होने वाले इस निजी अंतरिक्ष मिशन में पहली बार भारतीय वायुसेना के टेस्ट पायलट और गगनयान मिशन से जुड़े अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला को अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) भेजा जाएगा। यह मिशन नासा के केनेडी स्पेस सेंटर, फ्लोरिडा से स्पेसएक्स के ड्रैगन यान के जरिए रवाना होगा और करीब 14 दिनों तक चलेगा। विविध अंतरराष्ट्रीय दल का हिस्सा होंगे शुक्ला Ax-4 मिशन में शुभांशु शुक्ला के अलावा, नासा की पूर्व अंतरिक्ष यात्री पेगी व्हिटसन कमांडर की भूमिका निभाएंगी। उनके साथ यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) के अंतरिक्ष यात्री सावोश उजनांस्की-विस्नीवस्की (पोलैंड) और तिबोर कापू (हंगरी) भी होंगे। यह टीम अंतरिक्ष में विभिन्न वैज्ञानिक रिसर्च, शैक्षिक गतिविधियां और व्यावसायिक परियोजनाओं में शामिल होगी। यह पहली बार होगा जब कोई भारतीय अंतरिक्ष यात्री निजी मिशन के तहत ISS पर जाएगा। भारत और निजी अंतरिक्ष अभियानों के लिए बड़ी उपलब्धि Ax-4 मिशन न केवल अंतरिक्ष में निजी कंपनियों की बढ़ती भागीदारी को दर्शाता है, बल्कि यह भारत और अमेरिका के बीच ISRO और NASA के सहयोग को भी मजबूत करता है। नासा की ISS प्रोग्राम मैनेजर डाना वेइगेल ने कहा, “निजी अंतरिक्ष मिशन माइक्रोग्रैविटी रिसर्च के लिए नए अवसर पैदा करने के साथ-साथ मानव अंतरिक्ष उड़ान की पहुंच को भी व्यापक बना रहे हैं।” गगनयान मिशन को मिलेगा फायदा इसरो इस मिशन पर करीबी नजर रखेगा, क्योंकि इससे मिलने वाले अनुभवों को भारत के गगनयान मिशन में भी इस्तेमाल किया जाएगा। भारत की यह ऐतिहासिक भागीदारी भविष्य में अंतरिक्ष अन्वेषण और व्यावसायिक अंतरिक्ष यात्रा के दरवाजे खोल सकती है। एशिया का पहला वाणिज्यिक अंतरिक्ष स्टेशन बनाने की योजना एक्सियम स्पेस कंपनी भविष्य में दुनिया का पहला निजी स्पेस स्टेशन विकसित करने की योजना बना रही है और Ax-4 मिशन इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। Ax-4 मिशन की तैयारियां जोरों पर हैं और भारत के शुभांशु शुक्ला की ऐतिहासिक यात्रा को लेकर उत्साह लगातार बढ़ रहा है। यह मिशन वैश्विक स्तर पर अंतरिक्ष अभियानों में भारत की भागीदारी को एक नई ऊंचाई पर ले जाने वाला साबित हो सकता है। सुनीता विलियम्स की सफल वापसी सुनीता विलियम्स और उनके सहयोगी बुच विल्मोर बोइंग स्टारलाइनर स्पेसक्राफ्ट से 5 जून 2024 को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) के लिए रवाना हुए थे, लेकिन ये दोनों तकनीकी समस्याओं के कारण वहां फंस गए। नासा ने स्टारलाइनर स्पेसक्राफ्ट को बिना चालक दल के वापस धरती पर लाने का फैसला किया था। अब 9 महीने बाद यह जोड़ी स्पेसएक्स ड्रैगन के क्रू-9 मिशन के साथ लौटी। सुनीता विलियम्स के साथ नासा के निक हेग और रूस के रोस्कोस्मोस कॉस्मोनॉट अलेक्जेंडर गोर्बुनोव भी इस मिशन का हिस्सा थे। यह मिशन, जो शुरू में केवल 8 दिनों के लिए निर्धारित था, तकनीकी खामियों के कारण 9 महीने तक खिंच गया। उनकी वापसी को भारत और विश्व भर में उत्साह के साथ देखा गया। गुजरात के झुलासन गांव, जो सुनीता का पैतृक गांव है, में लोगों ने उनकी सुरक्षित वापसी पर खुशी मनाई और आतिशबाजी की। सुनीता विलियम्स की वापसी और शुभांशु शुक्ला की आगामी यात्रा भारत के अंतरिक्ष इतिहास में नए अध्याय जोड़ रही हैं। जहां सुनीता ने अपनी अद्भुत अंतरिक्ष यात्रा के साथ एक मिसाल कायम की है, वहीं शुभांशु भारत के अंतरिक्ष सपनों को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए तैयार हैं।

slot server thailand super gacor

spaceman slot gacor

slot gacor 777

slot gacor

Nexus Slot Engine

bonus new member

olympus

situs slot bet 200

slot gacor

slot qris

link alternatif ceriabet

slot kamboja

slot 10 ribu

https://mediatamanews.com/

slot88 resmi

slot777

https://sandcastlefunco.com/

slot bet 100

situs judi bola

slot depo 10k

slot88

slot 777

spaceman slot pragmatic

slot bonus

slot gacor deposit pulsa

rtp slot pragmatic tertinggi hari ini

slot mahjong gacor

slot deposit 5000 tanpa potongan

mahjong

spaceman slot

https://www.deschutesjunctionpizzagrill.com/

spbo terlengkap

cmd368

368bet

roulette

ibcbet

clickbet88

clickbet88

clickbet88

bonus new member 100

slot777

https://bit.ly/m/clickbet88

https://vir.jp/clickbet88_login

https://heylink.me/daftar_clickbet88

https://lynk.id/clickbet88_slot

clickbet88

clickbet88

https://www.burgermoods.com/online-ordering/

https://www.wastenotrecycledart.com/cubes/

https://dryogipatelpi.com/contact-us/

spaceman slot gacor

ceriabet link alternatif

ceriabet rtp

ceriabet

ceriabet link alternatif

ceriabet link alternatif

ceriabet login

ceriabet login

cmd368

sicbo online live

Ceriabet Login

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

casino online

clickbet88

login kudahoki88

Ceriabet

Ceriabet

Ceriabet

slot olympus

sbobet

slot thailand

sbobet