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अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर पहुंचे नए मेहमान तो सभी लोगों ने गले लगाकर किया स्वागत

वाशिंगटन अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर 9 महीनों से फंसी सुनीता विलियम्स और उनके साथी बुच विल्मोर की वापसी का रास्ता साफ हो गया है। अंतरिक्ष यात्रियों को वापस धरती पर लाने के लिए स्पेसएक्स का स्पेस क्राफ्ट क्रू-10 नए यात्रियों को लेकर इंटरनेशन स्पेस स्टेशन पर पहुंच चुका है। यान से स्पेस स्टेशन पर पहुंचे यात्रियों को देखते ही वहां पर मौजूद सभी लोगों के चेहरे पर खुशी की लहर दौड़ गई। सभी लोगों ने नए यात्रियों का स्वागत गले लगाकर किया। एक दिन पहले यानि शुक्रवार को अंतरिक्ष स्टेशन के लिए फॉल्कन रॉकेट के सहारे उड़ान भरने वाले स्पेस क्राफ्ट क्रू-10 में अमेरिका, जापान और रूस का प्रतिनिधित्व करने वाले चार नए यात्री वहां पर पहुंचे हैं। यह यहां पर अगले कुछ दिनों तक यह बुच विल्मौर और सुनीता विलियम्स से स्पेस स्टेशन के बारे में जानकारी प्राप्त करेंगे उसके बाद इस सप्ताह के अंत तक सुनीता और बुच अपने 9 महीने के अभियान को समाप्त करके इसी यान से वापस धरती की तरफ उड़ान भरेंगे।

डिलीवरी बॉय पर गिर गई थी स्टारबक्स की गर्म कॉफी, मुआवजे में मिलेंगे 434 करोड़ रुपए

  कैलिफोर्निया अमेरिका के कैलिफोर्निया में एक जूरी ने Starbucks को डिलीवरी ड्राइवर माइकल गार्सिया को $50 मिलियन (करीब 434.78 करोड़ रुपए ) का मुआवजा देने का आदेश दिया है। यह मामला 8 फरवरी 2020 का है, जब लॉस एंजेलिस में एक स्टारबक्स ड्राइव-थ्रू से ऑर्डर उठाते समय गर्म कॉफी के ढक्कन की सही से सीलिंग न होने के कारण वह गार्सिया पर गिर गई। गंभीर जलन और जीवनभर की क्षति कोर्ट दस्तावेजों के अनुसार, एक बारिस्ता ने बेवरेज कैरियर में तीन ड्रिंक्स रखी थीं, लेकिन उनमें से एक का ढक्कन ठीक से बंद नहीं था। इस वजह से वह गार्सिया की गोद में गिर गई, जिससे उसे थर्ड-डिग्री बर्न, नर्व डैमेज और शरीर पर स्थायी निशान पड़ गए। गार्सिया के वकील माइकल पार्कर के मुताबिक, यह घटना न सिर्फ शारीरिक बल्कि मानसिक रूप से भी विनाशकारी थी और इससे उनके मुवक्किल का जीवन पूरी तरह बदल गया। स्टारबक्स का बचाव और अपील की तैयारी जूरी ने गार्सिया के पक्ष में फैसला सुनाते हुए उनके दर्द, मानसिक तनाव और स्थायी क्षति को ध्यान में रखते हुए यह मुआवजा तय किया। हालांकि, Starbucks ने इस फैसले से असहमति जताई और अपील करने की घोषणा की। Starbucks की प्रवक्ता जैकी एंडरसन ने कहा, “हम गार्सिया के प्रति सहानुभूति रखते हैं, लेकिन जूरी के इस फैसले से असहमत हैं। हम हमेशा अपने स्टोर्स में उच्चतम सुरक्षा मानकों को बनाए रखते हैं, जिसमें हॉट ड्रिंक्स को सुरक्षित तरीके से सौंपना शामिल है।” मामले में समझौते की कोशिशें और असफल वार्ता कोर्ट केस से पहले, Starbucks ने गार्सिया को समझौते के तहत $3 मिलियन (26 करोड़ रुपए ) की पेशकश की थी, जिसे बाद में बढ़ाकर $30 मिलियन (261 करोड़ रुपए ) कर दिया गया। गार्सिया इस शर्त पर समझौता करने के लिए तैयार थे कि Starbucks सार्वजनिक रूप से माफी मांगे, अपनी नीतियों में बदलाव करे और ड्रिंक्स को ग्राहकों को सौंपने से पहले अतिरिक्त सुरक्षा जांच अनिवार्य करे। हालांकि, स्टारबक्स ने इन शर्तों को मानने से इनकार कर दिया, जिसके चलते मामला कोर्ट तक पहुंचा। 1994 के मैकडॉनल्ड्स कॉफी केस से तुलना इस मामले की तुलना 1994 के चर्चित मैकडॉनल्ड्स कॉफी (McDonald’s Coffee) केस से की जा रही है, जिसमें स्टेला लिबेक नाम की महिला गर्म कॉफी गिरने से गंभीर रूप से जल गई थी। उस केस में भी जूरी ने मैकडॉनल्ड्स को लगभग $3 मिलियन का जुर्माना भरने का आदेश दिया था।

नौ महीने से अंतरिक्ष में फंसी सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर धरती के जल्द लिए होंगे रवाना

 वॉशिंगटन नासा और स्पेसएक्स का क्रू-10 मिशन अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर पहुंच गया है। फैल्कन 9 रॉकेट में गए इस मिशन के चारों सदस्य अंतरिक्ष स्टेशन पर पहुंच गए हैं। डॉकिंग और हैच खुलने के बाद चारों अंतरिक्ष यात्रियों ने क्रू-9 मिशन के अंतरिक्ष यात्रियों से मुलाकात की। वहीं नासा के मुताबिक बुधवार को नौ महीने से अंतरिक्ष में फंसी सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर धरती के लिए रवाना होंगे। नासा और स्पेसएक्स का क्रू-10 मिशन शनिवार को फैल्कन 9 रॉकेट के जरिये अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के लिए रवाना हुआ था। इस मिशन में एन मैक्लेन, निकोल आयर्स, जापानी अंतरिक्ष  यात्री तकुया ओनिशी और रूसी अंतरिक्ष यात्री किरिल पेस्कोव गए हैं। बताया जाता है कि क्रू-10 मिशन अंतरराष्ट्रीय स्टेशन पर पहुंच गया है। सफल डॉकिंग और हैच खुलने के बाद चारों अंतरिक्ष यात्रियों ने स्टेशन में प्रवेश किया। उन्होंने बुच विल्मोर और सुनीता विलियम्स से मुलाकात की। अगले कुछ दिन तक विल्मोर और विलियम्स नए अंतरिक्ष यात्रिों को स्टेशन के बारे में जानकारी देंगे। फिर वे दोनों इस सप्ताह के अंत में अपने स्पेसएक्स कैप्सूल में सवार होकर धरती के लिए रवाना होंगे। नासा का कहना है कि मौसम अनुकूल रहा तो विल्मोर, विलियम्स और दो अन्य अंतरिक्ष यात्रियों को ले जाने वाला स्पेसएक्स कैप्सूल बुधवार से पहले अंतरिक्ष स्टेशन से अलग हो जाएगा और फ्लोरिडा के तट पर उतरेगा। सुनीता विलियम्स को किस मिशन पर भेजा गया था? 5 जून 2024 को नासा का बोइंग क्रू फ्लाइट टेस्ट मिशन लॉन्च किया गया था। इस मिशन के तहत नासा ने अपने दो अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स और बैरी बुच विल्मोर को आठ दिन की यात्रा पर भेजा। दोनों को स्टारलाइनर अंतरिक्ष यान के जरिए मिशन पर भेजा गया था। यह अंतरिक्ष यात्रियों के साथ अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) के लिए स्टारलाइनर अंतरिक्ष यान की पहली उड़ान थी। जिस मिशन पर सुनीता और बैरी हैं वो नासा के व्यावसायिक क्रू कार्यक्रम का हिस्सा है। दरअसल, नासा का लक्ष्य है कि वह अमेरिका के निजी उद्योग के साथ साझेदारी में अमेरिका से अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन तक सुरक्षित, विश्वसनीय और कम लागत के मानव मिशन भेजे। इसी उद्देश्य से यह टेस्ट मिशन लॉन्च किया गया था।

जम्मू-कश्मीर में तीर्थयात्रियों की बस पर हमला करवाने वाला ‘अबू कताल’ पाकिस्तान में मारा गया

नई दिल्ली भारत में आतंकी घटनाओं को अंजाम देने वाला लश्कर-ए-तैयबा का मौस्ट वॉन्टेड आतंकी अबू कताल शनिवार रात पाकिस्तान में ढेर कर दिया गया है। जानकारी के मुताबिक अनजान हमलावरों ने उसे मौत के घाट उतार दिया। बताया जाता है कि अबू कताल आतंकी हाफिज सईद का करीबी था। इसे अलावा भारत में हमलों की साजिश रचने में उसका अहम हाथ रहता था। बीते साल 9 जून को शिवखोड़ी से लौट रही बस के तीर्थयात्रियों (Pilgrims In Bus) पर कश्मीर ( Kashmir) में हमला (Attacked) करवाने में भी उसका हाथ था। इस हमले में 10 लोगों की मौत हो गई थी। अबू कताल कश्मीर में आतंकी साजिश में लगा ही रहता था। वहीं पाकिस्तान में वह आराम से रह रहा था। राजौरी जिले के धंगरी गांव में आम नागरिकों को निशाना बनाने वाले आतंकी हमले में भी उसका नाम आया था। 2023 की चार्जशीट में एनआई ने उसका नाम शामिल किया था। यहां एक विस्फोट में सात लोगों की मौत हो गई थी। बताया जाता है कि लश्कर के लिए वह लंबे समय से काम कर रहा था। 26/11 हमले के मास्टरमाइंड हाफिज सईद का वह बेहद करीबी था और दोनों मिलकर आतंकी हमलों की साजिश रचा करते थे। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो सिंघी झेलम में गोलीबारी में कताल की जान चली गई है। बीते कुछ महीनों में भारत के खिलाफ साजिश करने वाले कई पाकिस्तान आतंकी मारे गए हैं। बीते दिनों लश्कर का टॉप कमांडर रियाज अहमद उर्फ कासिम भी मार दिया गया था। इसके अलावा बशीर अहमद नाम के आतंकी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। पाकिस्तान लंबे समय से आतंकियों को पनाह दे रहा है। वहीं पाकिस्तान में उग्रवाद और आतंकवाद के साथ अलगाववाद इतने चरम पर पहुंच गया है कि अब सेना के जवान भी सुरक्षित नहीं हैं। पाकिस्तान में बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी ने दावा किया है कि ट्रेन हाइजैक के बाद बंधक बनाए गए सभी पाकिस्तानी जवानों को मार दिया गया है। बीएलए ने दावा किया है कि 214 जवानों को मार दिया गया है।

फ्रांस की परमाणु ऊर्जा से चलने वाली हमलावर पनडुब्बी के अमेरिका के दरवाजे पर पहुंचने से हड़कंप मचा

ओटावा  फ्रांस की परमाणु ऊर्जा से चलने वाली हमलावर पनडुब्बी के अमेरिका के दरवाजे पर पहुंचने से हड़कंप मच गया है। फ्रांसीसी परमाणु पनडुब्बी को अमेरिका की सीमा से महज 480 किलोमीटर की दूरी पर देखा गया। फ्रांसीसी नौसेना की सफ्रेन श्रेणी की पनडुब्बी FS टूरविले इस सप्ताह की शुरुआत में कनाडा के हैलिफैक्स, नोवा स्कोटिया पहुंची। ये घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा के विलय की धमकी दी थी। ऐसे में फ्रांसीसी पनडुब्बी के पहुंचने को लेकर अटकलें लगनी शुरू हो गई। फ्रांस के प्रमुख अखबार ले पेरिसियन के अनुसार, एफएस टूरविले ने अटलांटिक पार का अपना दौरा रॉयल कैनेडियन नेवी के अपने पुराने पनडुब्बी बेड़े को नवीनीकृत करने की 60 अरब डॉलर की निवेश करने घोषणा के बाद किया है। नोवा स्कोटिया के लेफ्टिनेंट गवर्नर माइक सैवेज के कार्यालय ने लिखा, ‘फ्रांसीसी पनडुब्बी टूरविले का स्वागत करते हुए हमें खुशी हो रही है। सहयोगी और मित्र मिलकर काम कर रहे हैं। अपने प्रवास का आनंद लें।’ ट्रंप की धमकियों का जवाब? ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर दावों में इसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की धमकियों के जवाब के रूप में देखा गया। हालांकि, इन अफवाहों को खारिज कर दिया गया। फ्रांस और कनाडा ने सितम्बर में एक संयुक्त घोषणा पर हस्ताक्षर किए थे। उस समय तक ट्रंप राष्ट्रपति चुनाव के लिए अभियान में ही थे। कनाडाई न्यूज चैनल ने सीटीवी के अनुसार, पनडुब्बी के 21 मार्च तक बंदरगाह में रहने की उम्मीद है। टूरविले की खासियत एफएस टूरविले 99 मीटर लंबी पनडुब्बी है, जो पानी में डूबने पर 5200 टन का विस्थापन करती है। यह 350 मीटर से अधिक गहराई तक गोता लगा सकती है। फ्रांसीसी पनडुब्बी एक परमाणु रिएक्टर से संचालित है और यह 25 समुद्री मील से अधिक की गति तक पहुंच सकती है। यह पनडुब्बी नेवी क्रूज मिसाइलों, F21 भारी वायर-गाइडेड टॉरपीडो और आधुनिक एक्सोसेट SM39 एंटी-शिप मिसाइलों से लैस है। फ्रांसीसी पनडुब्बी के बारे में कहा जाता है कि यह सभी महासागरों में काम करने के लिए उपयुक्त है और यह साल में 270 से ज्यादा दिन तक समुद्र में रह सकती है, जिससे इसका उपयोग खुफिया मिशनों के लिए किया जा सकता है।

आधार और वोटर आईडी को जोड़ने के मुद्दे पर निर्वाचन आयोग अगले हफ्ते बैठक करेगी

नई दिल्ली  चुनाव आयोग अगले हफ्ते अहम बैठक करने वाला है। इस बैठक में केंद्रीय गृह मंत्रालय, कानून मंत्रालय और भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) के बड़े अधिकारी शामिल होंगे। ईसी सूत्रों ने बताया कि यह बैठक आधार को वोटर आईडी कार्ड से जोड़ने के बारे में होगी। 2021 में जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 में संशोधन के बाद, आधार को EPIC (इलेक्टर्स फोटो आइडेंटिटी कार्ड) जोड़ने की अनुमति मिल गई थी। इसके बाद चुनाव आयोग ने स्वैच्छिक आधार पर मतदाताओं से आधार नंबर लेना शुरू कर दिया। हालांकि, अभी तक दोनों डेटाबेस को लिंक नहीं किया गया है। वोटर लिस्ट से फर्जी नाम हटाने पर जोर इस कदम का मकसद वोटर लिस्ट से फर्जी नाम हटाना और उसे साफ-सुथरा बनाना था। इसके लिए आधार और वोटर कार्ड को जोड़ना जरूरी नहीं था। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और चुनाव आयुक्त विवेक जोशी 18 मार्च को केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन, विधायी विभाग के सचिव राजीव मणि और UIDAI के सीईओ भुवनेश कुमार से मिलेंगे। आधार को EPIC से जोड़ने की चर्चा इस बैठक में आधार को EPIC से जोड़ने पर चर्चा होगी। यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब तृणमूल कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों में मतदाताओं के एक ही EPIC नंबर होने का मुद्दा उठाया है। चुनाव आयोग ने माना है कि कुछ राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों ने EPIC नंबर जारी करते समय गलत अल्फान्यूमेरिक सीरीज का इस्तेमाल किया था। चुनाव आयोग का प्लान क्या है इलेक्शन कमीशन ने हाल ही में फैसला लिया है कि वह तीन महीने के अंदर डुप्लिकेट नंबर वाले मतदाताओं को नए EPIC नंबर जारी करेगा। आयोग ने कहा है कि डुप्लिकेट नंबर होने का मतलब फर्जी वोटर नहीं है। केवल वही लोग वोट डाल सकते हैं जो किसी विशेष निर्वाचन क्षेत्र में रजिस्टर्ड हैं। आधार को EPIC से जोड़ने के पीछे मुख्य उद्देश्य वोटर लिस्ट को साफ-सुथरा बनाना है। इससे फर्जी वोटरों की पहचान करने में मदद मिलेगी। आधार कार्ड को वोटर आईडी से जोड़ने के कई फायदे आधार कार्ड को वोटर आईडी से जोड़ने के कई फायदे हो सकते हैं। जैसे, इससे फर्जी वोटिंग रुक सकती है। एक व्यक्ति के एक से ज्यादा जगह वोट डालने की संभावना कम हो जाएगी। वोटर लिस्ट में एक ही व्यक्ति का नाम कई बार होने की समस्या भी दूर हो सकती है। चुनाव आयोग का मानना है कि इससे चुनाव प्रक्रिया और पारदर्शी होगी। हालांकि, कुछ लोग इस कदम पर प्राइवेसी की चिंता भी जता रहे हैं। उनका मानना है कि इससे लोगों की निजी जानकारी लीक हो सकती है। वो निजता के उल्लंघन को लेकर चिंतित हैं। उनका कहना है कि आधार जैसी संवेदनशील जानकारी को वोटर आईडी से जोड़ना खतरनाक हो सकता है। यह लोगों के निजता के अधिकार का उल्लंघन भी हो सकता है। आधार-वोटर आईडी जोड़ने का फैसला अहम चुनाव ने इस मुद्दे पर सभी पक्षों से बातचीत करने का फैसला किया है। इसलिए गृह मंत्रालय, कानून मंत्रालय और UIDAI के अधिकारियों के साथ बैठक बुलाई गई है। इस बैठक में सभी पहलुओं पर विस्तार से चर्चा होगी। यह देखना होगा कि EC इस मुद्दे को कैसे संभालता है। आधार को वोटर कार्ड से जोड़ने का फैसला काफी अहम है। इससे चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता आ सकती है, लेकिन साथ ही लोगों की निजता की सुरक्षा भी जरूरी है। आने वाले समय में इस पर और भी चर्चा होगी।

ट्रेन हाइजैक करने वाले बलूच विद्रोहियों ने कर दिया बड़ा ऐलान, सभी 214 बंधकों को मार डाला

इस्लामाबाद पाकिस्तानी यात्री ट्रेन का अपहरण करने वाले बलूच विद्रोहियों ने दावा किया है कि उन्होंने सभी 214 सैन्य बंधकों को मार डाला है, क्योंकि बलूच राजनीतिक कैदियों को रिहा करने के लिए सौदे के लिए उनकी 48 घंटे की समय सीमा समाप्त हो गई थी. बलूच लिबरेशन आर्मी, जिसने पाकिस्तानी सेना के इस दावे को खारिज कर दिया कि बंधकों को रिहा करवा लिया गया है.  बीएलए ने कहा कि पाकिस्तानी सरकार की “जिद” ने उन्हें ऐसा करने के लिए मजबूर किया. विद्रोहियों ने सरकार को बलूच राजनीतिक कैदियों और कार्यकर्ताओं को रिहा करने के लिए 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया था. बलूच विद्रोहियों ने अगवा कर ली थी ट्रेन दरअसल बलूचिस्तान को पाकिस्तान से अलग करने की मांग करने वाले अलगाववादी समूह बलूच लिबरेशन आर्मी ने मंगलवार को रेलवे ट्रैक को उड़ाने के बाद पेशावर जाने वाली जाफर एक्सप्रेस को हाईजैक कर लिया था. जिस समय ट्रेन को हाइजैक किया गया उस समय ट्रेन में 400 से ज्यादा लोग मौजूद थे. ट्रेन को कब्जे में लेने के बाद बीएलए के विद्रोहियों ने बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को जाने दिया था. बीएलए ने एक बयान में कहा, “पाकिस्तान ने अपनी पारंपरिक जिद और सैन्य अहंकार का प्रदर्शन करते हुए न केवल गंभीर वार्ता से परहेज किया, बल्कि जमीनी हकीकत से भी आंखें मूंद लीं. इस जिद की वजह से सभी 214 बंधकों को मार दिया गया.” ट्रेन में 400 से अधिक यात्री सवार थे, जिनमें से अधिकतर सुरक्षाकर्मी थे. बंधकों को छुड़ाने के लिए अभियान चलाने वाली पाकिस्तानी सेना ने कहा कि 30 घंटे के अभियान के बाद बुधवार को घेराबंदी समाप्त हो गई, जिसमें सभी 33 विद्रोही मारे गए. सेना ने दावा किया कि हमले में 23 सैनिक, तीन रेलवे कर्मचारी और पांच यात्री मारे गए. UNSC में जाफर एक्सप्रेस पर हुए हमले की निंदा यूनाइटेड नेशंस सिक्योरिटी काउंसिल यानि UNSC में पाकिस्तान को बड़ी कामयाबी मिली है। UNSC में पाकिस्तान के बलूचिस्तान में जाफर एक्सप्रेस पर हुए हमले की निंदा की गई है। सबसे खास बात ये है कि पाकिस्तान को डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन का भी साथ मिला है, जिसने अपने पहले कार्यकाल के दौरान बीएलए के हमलों की निंदा करने से परहेज किया था। द न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) ने जाफर एक्सप्रेस पर बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) की तरफ से किए गए “घृणित और कायरतापूर्ण” हमले की कड़ी निंदा की है। यूनाइटेड नेशंस सिक्योरिटी काउंसिल, जिसमें 15 स्थाई और अस्थाई सदस्य होते हैं, उसकी अध्यक्ष डेनमार्क की क्रिस्टीना मार्कस लासेन की तरफ से जारी बयान में दोषियों को इंसाफ के कटघरे में लाने का आह्वान किया गया है। इसके अलावा उन्होंने आतंकी हमले में मारे गये जवानों और नागरिकों के प्रति “गहरी सहानुभूति और संवेदना” जताई है। वहीं उन्होंने सभी देशों से इस संबंध में इस्लामाबाद के साथ सक्रिय रूप से सहयोग करने का आग्रह किया है। UNSC में जाफर एक्सप्रेस हमले की निंदा आपको बता दें कि पाकिस्तान के बलूचिस्तान के पहाड़ी इलाके बोलन में बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी के स्वतंत्रता सेनानियों ने जाफर एक्सप्रेस को हाईजैक कर लिया था। इस दौरान पाकिस्तानी सेना का दावा है कि इस हमले में 440 यात्रियों को बंधक बना लिया गया था, जिन्हें अब रिहा करवा लिया गया है। इस दौरान पाकिस्तान सेना के भी कई दवानों की मौत हो गई है। बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी ने पटरी को उड़ा दिया था। पाकिस्तानी सेना का दावा है कि हमला करने वाले 33 हमलावरों को मार दिया गया है। लेकिन ऑपरेशन शुरू होने से पहले ही 26 यात्रियों को मार दिया गया था, जबकि ऑपरेशन के दौरान चार सुरक्षाकर्मी शहीद हो गए थे। हालांकि बीएलए का दावा है कि अभी भी उसके कब्जे में 150 से ज्यादा पाकिस्तानी सेना के जवान और आम नागरिक हैं। पाकिस्तानी सेना इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने कहा है कि 26 शहीद ट्रेन यात्रियों में सेना और एफसी के 18 सुरक्षाकर्मी, पाकिस्तान रेलवे और अन्य विभागों के तीन अधिकारी और पांच नागरिक शामिल हैं। उन्होंने आगे कहा कि आतंकी हमले में मरने वालों की संख्या और बढ़ सकती है क्योंकि 354 यात्रियों में से 37 गंभीर घायल हुए हैं। इस बीच, हमले पर विस्तार से बात करते हुए UNSC ने कहा कि आतंकवाद के इस निंदनीय कृत्य के परिणामस्वरूप कई पाकिस्तानी नागरिकों की गंभीर क्षति हुई। UNSC की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि “सुरक्षा परिषद के सदस्यों ने इस बात की पुष्टि की कि आतंकवाद अपने सभी रूपों और अभिव्यक्तियों में अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए सबसे गंभीर खतरों में से एक है।” बयान में आगे कहा गया है कि आतंकवाद का कोई भी कृत्य आपराधिक और अनुचित है, चाहे उसका मकसद कुछ भी हो, चाहे वह कहीं भी, कभी भी और किसी के द्वारा भी किया गया हो। बलूच विद्रोहियों का दावा हालांकि, बलूच विद्रोहियों ने पाकिस्तान के दावे का खंडन करते हुए कहा कि भीषण लड़ाई जारी है और सुरक्षा बलों को “भारी नुकसान” उठाना पड़ रहा है. अपने ताजा बयान में, बीएलए ने दावा किया कि दर्रा-ए-बोलन नामक ऑपरेशन में उसके 12 कर्मी मारे गए. बीएलए के बयान में आगे कहा गया है, “फ़िदायीन ने कुछ बंधक सैन्य कर्मियों को विशेष बोगियों में बंद कर दिया और अपनी स्थिति संभाल ली, जबकि अन्य बीएलए सैनिक शेष बंधकों को सुरक्षित स्थान पर ले जाने में कामयाब रहे. जब पाकिस्तानी कमांडो पहुंचे, तो फ़िदायीन ने उन्हें घेर लिया और उन पर भीषण हमला किया. कमांडो को भारी नुकसान उठाना पड़ा, जबकि बंधकों को भी मार दिया गया.” झूठ बोल रही पाक सरकार- बीएलए पाकिस्तान की सरकार ने बुधवार को ही दावा कर दिया था कि संकट खत्म हो गया है और सभी विद्रोही लड़ाके मारे गए हैं। यह भी दावा किया गया था कि सभी बंधकों को छुड़ा लिया गया है। हालांकि पाकिस्तान की सरकार की तरफ से इसका कोई भी सबूत नहीं जारी किया गया था। अब बीएलए का कहना है कि पाकिस्तान की सरकार केवल झूठ बोल रही है। बीएलए ने कहा कि पाक सरकार को अपने जवानों की फिक्र ही नहीं है। वह बात करने को तैयार नहीं है। बीएलए ने कहा था … Read more

पाकिस्तान की हुई फिर किरकिरी अमेरिका में नहीं मिलेगी एंट्री! ट्रंप तैयार कर रहे 41 देशों की ऐसी लिस्ट

वाशिंगटन अमेरिकी राष्ट्रपति डोलान्ड ट्रंप अपने फैसलों से पूरी दुनिया को चौंका रहे हैं. टैरिफ विवाद के बीच अब ट्रंप एक और बड़ी योजना बना रहे हैं. मीडिया रिपोर्ट की माने तो आने वाले समय में ट्रंप दर्जन भर से ज्यादा देशों की यात्रा पर बैन लगाने का विचार कर रहे हैं. एक ज्ञापन मे 41 देशों की सूची सौंपी गई है. जिन पर प्रतिबंध लगाने की संभावना जताई गई है. मीडिया रिपोर्ट की माने तो प्रतिबंध लगाने वाले देशों को तीन अलग-अलग समूहों में विभाजित किया गया है. जिन पर आने वाले समय में बेन लगाया जा सकता है. इस कदम का उद्देश्य राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करना बताया जा रहा है. इस प्रतिबंध का सबसे अधिक प्रभाव भारत के पड़ोसी देशों पर देखने को मिल सकता है. विशेष रूप से पाकिस्तान और अफगानिस्तान के नागरिकों के लिए अमेरिका में प्रवेश करना कठिन हो सकता है. अफगानिस्तान में तालिबान के नियंत्रण के बाद से वहां से शरण लेने वाले लोगों के लिए यह फैसला एक बड़ा झटका हो सकता है. तीन ग्रुप ने बांटे गए देश     पहले समूह में 10 देश शामिल हैं, जिनमें अफगानिस्तान, ईरान, सीरिया, क्यूबा और उत्तर कोरिया जैसे देश प्रमुख हैं. इन देशों के नागरिकों के वीजा पर पूरी तरह से रोक लगा दी जाएगी.     दूसरे समूह में पांच देश इरिट्रिया, हैती, लाओस, म्यांमार और दक्षिण सूडान शामिल हैं. इन देशों को आंशिक निलंबन का सामना करना पड़ेगा, जिससे पर्यटक और छात्र वीजा साथ ही अन्य आप्रवासी वीजा प्रभावित होंगे, हालांकि कुछ मामलों में अपवाद भी हो सकते हैं.     तीसरे समूह में 26 देश शामिल हैं, जिनमें बेलारूस, पाकिस्तान और तुर्कमेनिस्तान जैसे देश शामिल हैं. इन देशों के नागरिकों के लिए वीजा जारी करने पर आंशिक प्रतिबंध लगाया जा सकता है. हालांकि, इन देशों को 60 दिनों के भीतर सुरक्षा संबंधी कमियों को दूर करने का अवसर दिया जाएगा. कमियां दूर नहीं हुईं तो वीजा निलंबन हो सकता है अमेरिका के सुरक्षा अधिकारियों ने अपनी सिफारिशों से जुड़ा एक ड्राफ्ट तैयार किया है. इसमें पाकिस्तान को उन 26 देशों में शामिल किया गया है, जिन्हें अमेरिकी वीजा जारी करने पर आंशिक निलंबन का सामना करना पड़ सकता है. हालांकि, शहबाज शरीफ के नेतृत्व वाली सरकार अगर 60 दिन के भीतर कमियों को दूर कर देती है तो बड़ी कार्रवाई से बचा जा सकता है. वानुअतु भी लिस्ट में शामिल जिन देशों पर एक्शन लिए जाने की तैयारी है, उनमें तुर्कमेनिस्तान, बेलारूस, भूटान और वानुअतु शामिल हैं. इनमें वानुअतु हाल ही में तब चर्चा में आया, जब भगोड़े और आईपीएल के पूर्व चेयरमैन ललित मोदी ने दावा किया था कि उन्होंने वहां की नागरिकता हासिल कर ली है. इससे पहले पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने यात्रा प्रतिबंध की खबरों को अटकलें बताकर खारिज कर दिया था. विदेश कार्यालय के प्रवक्ता शफकत अली खान ने कहा था कि पाकिस्तान को ऐसे प्रतिबंधों का कोई आधिकारिक संकेत नहीं मिला है. खान का कहना था कि फिलहाल यह सब अटकलें हैं और इसलिए इस पर कोई प्रतिक्रिया देने की जरूरत नहीं है. जब पाकिस्तानी राजदूत को नहीं मिली थी अमेरिका में एंट्री अमेरिका और पाकिस्तान के बीच हाल में तब तनाव गहराया, जब तुर्कमेनिस्तान में तैनात पाकिस्तानी राजदूत केके अहसान वागन को इस सप्ताह अमेरिका में एंट्री नहीं करने दी गई और लॉस एंजिल्स से निर्वासित कर दिया गया. हालांकि, अमेरिका ने कोई विशेष कारण नहीं बताया, लेकिन रिपोर्टों में कहा गया है कि वागन को इसलिए निर्वासित किया गया क्योंकि अमेरिकी इमिग्रेशन सिस्टम ने विवादास्पद वीजा संदर्भों का पता लगाया था. नए ड्राफ्ट के अनुसार, 10 देशों को रेड लिस्ट में रखा गया है, जिनके नागरिकों का वीजा पूरी तरह से निलंबित कर दिया जाएगा. ये देश हैं- अफगानिस्तान, क्यूबा, ​​ईरान, लीबिया, उत्तर कोरिया, सोमालिया, सूडान, सीरिया, वेनेजुएला और यमन. पांच देशों के दूसरे समूह में इरीट्रिया, हैती, लाओस, म्यांमार और दक्षिण सूडान को रखा गया. इन देशों पर भी कुछ शर्तों के साथ प्रतिबंध प्रस्तावित हैं. पांचों देशों में पर्यटक और छात्र वीजा के साथ-साथ अन्य आप्रवासी वीजा भी प्रभावित हो सकते हैं. बताते चलें कि 20 जनवरी को पद्भार ग्रहण करने के पहले ही दिन ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए थे, जिसमें कहा गया था कि सुरक्षा खतरों का पता लगाने के लिए अमेरिका में एंट्री करने वाले किसी भी विदेशी नागरिक की व्यापक जांच की जरूरत पर जोर दिया जाए. ट्रंप ने पहले ही किया था वादा डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रपति बनने के तुरंत बाद, 20 जनवरी को एक कार्यकारी आदेश जारी किया था, जिसमें अमेरिका में प्रवेश चाहने वाले विदेशी नागरिकों की सुरक्षा जांच को और अधिक सख्त करने की बात कही गई थी. आदेश में कैबिनेट के कई सदस्यों को 21 मार्च तक उन देशों की लिस्ट देने को कहा गया था. अमेरिका इस लिस्ट में अभी बदलाव कर सकता है. मतलब कई देशों को इसमें जोड़ा तो कई देशों को इससे बाहर किया जा सकता है. इसके बाद लिस्ट प्रशासन की मंजूरी के बाद ही जारी होगी.  

सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस जायमाल्या बागची की नियुक्ति, 17 मार्च को शपथ लेंगे

नई दिल्ली  कलकत्ता उच्च न्यायालय के जस्टिस जॉयमाल्य बागची को सोमवार को सुप्रीम कोर्ट का जस्टिस नियुक्त किया गया। सुप्रीम कोर्ट कॉलिजियम ने उनका नाम 6 मार्च को भेजा था। केंद्र सरकार को कॉलिजियम ने जस्टिस बागची को सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस के तौर पर नियुक्त करने के लिए सिफारिश की थी।जस्टिस जॉयमाल्या बागची 17 मार्च को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में शपथ लेंगे। 6 साल से अधिक का कार्यकाल कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने सोशल मीडिया के जरिय एक्स हैंडल से उनकी नियुक्ति के बारे घोषणा की है। जस्टिस बागची सुप्रीम कोर्ट में छह वर्ष से अधिक का कार्यकाल पूरा करेंगे। इस दौरान वे भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) के रूप में भी कार्य करेंगे। 3 अक्टूबर, 1966 को जस्टिस बागची का जन्म हुआ था। जस्टिस बागची 2 अक्टूबर, 2031 को रिटायर होंगे और इससे पहले वह सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस भी बनेंगे। जस्टिस केवी विश्वनाथन 25 मई 2031 को चीफ जस्टिस के पद से जब रिटायर होंगे उसके बाद जस्टिस बागची भारत के चीफ जस्टिस बनेंगे। 2011 में कलकत्ता हाई कोर्ट में बने जज जस्टिस बागची को 27 जून, 2011 को कलकत्ता उच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त किया गया था। 4 जनवरी, 2021 को उनका तबादला आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय में किया गया था।बाद में 8 नवंबर, 2021 को वे फिर से कलकत्ता उच्च न्यायालय में लौट आए और तब से वहीं कार्यरत हैं। जस्टिस बागची ने 13 वर्षों से अधिक हाई कोर्ट में सेवा दी है। जस्टिस बागची के शपथ लेने के बाद, सुप्रीम कोर्ट में कुल 33 जस्टिस हो जाएंगे, जबकि कुल सेंक्शन पद 34 हैं।   चर्चा में क्यों ?     हाल ही में सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने कलकत्ता हाई कोर्ट के जस्टिस जायमाल्या बागची को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में नियुक्त करने की सिफारिश की है।      चीफ जस्टिस संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाले पांच सदस्यीय कॉलेजियम ने यह निर्णय सर्वसम्मति से लिया। कलकत्ता हाई कोर्ट का प्रतिनिधित्व     18 जुलाई 2013 को जस्टिस अल्तमस कबीर के सेवानिवृत्त होने के बाद से कलकत्ता हाई कोर्ट से कोई भी न्यायाधीश भारत के मुख्य न्यायाधीश नहीं बने हैं।     वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट की बेंच में कलकत्ता हाई कोर्ट का केवल एक प्रतिनिधित्व है। जजों की नियुक्ति कॉलेजियम प्रणाली     उच्च न्यायालय तथा उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीशों की नियुक्ति एवं स्थानांतरण करने वाली संस्था     ना तो संवैधानिक संस्था है और ना ही वैधानिक         उच्चतम न्यायालय के निर्णयों के माध्यम से स्थापना प्रथम न्यायाधीश मामला (1981)     उच्चतम न्यायालय  ने कहा कि जजों की नियुक्ति के लिये उच्चतम न्यायालय  के मुख्य न्यायाधीश द्वारा की गयी अनुशंसा को राष्ट्रपति ठोस कारणों के आधार पर अस्वीकार कर सकता है दूसरा न्यायाधीश मामला (1993)     जजों की नियुक्ति के लिए अनुशंसा मुख्य न्यायाधीश की व्यक्तिगत राय से नहीं होगी         उच्चतम न्यायालय के दो अन्य वरिष्ठतम न्यायाधीशों से परामर्श लेने के बाद भेजी जाएगी     इस अनुशंसा पर कार्यपालिका अपनी आपत्ति दर्ज करा सकती है     मुख्य न्यायाधीश, कार्यपालिका की आपत्ति को स्वीकार करे या अस्वीकार, उनका निर्णय कार्यपालिका पर बाध्यकारी तीसरा न्यायाधीश मामला (1998)-     उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को जजों की नियुक्ति और स्थानांतरण के मामले में अनुसंशा करने से पहले उच्चतम न्यायालय  के 4 अन्य वरिष्ठतम जजों से परामर्श करना होगा उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीशों की नियुक्ति     उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश तथा अन्य जजों की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।     मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति से सम्बंधित कई विवादों के बाद अब मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति वरिष्ठता के आधार पर होती है।     उच्चतम न्यायालय में अन्य न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिये मुख्य न्यायाधीश, उच्चतम न्यायालय के 4 अन्य वरिष्ठतम जजों से परामर्श करने के बाद राष्ट्रपति के पास सिफारिश भेजता है।     यदि 5 में से 2 न्यायाधीश किसी व्यक्ति की नियुक्ति का विरोध करें तो उसके नाम की सिफारिश राष्ट्रपति को नहीं भेजी जाएगी।     सभी न्यायाधीशों की सलाह लिखित रूप में होनी चाहिये, मौखिक नहीं।  

राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि

मॉस्को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंपने शुक्रवार को व्लादिमीर पुतिन से आग्रह किया कि वे रूस द्वारा कुर्स्क क्षेत्र से बाहर निकाले जा रहे यूक्रेनी सैनिकों को छोड़ दें.इस पर अब पुतिन की प्रतिक्रिया आई है. उन्होंने कहा है कि अगर वे (यूक्रेन के सैनिक) आत्मसमर्पण करते हैं तो वे इस अपील का सम्मान करेंगे. समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने अपनी रिपोर्ट में पुतिन के हवाले से कहा, “यदि वे आत्मसमर्पण करते हैं, तो हम गारंटी देते हैं कि हम उनकी जान बचा लेंगे. उन्हें अंतर्राष्ट्रीय कानून और रूसी संघ के कानूनों के अनुसार जीवन और सभ्य व्यवहार की गारंटी दी जाएगी.” ट्रंप ने शुक्रवार को कहा था कि एक दिन पहले पुतिन के साथ हुई लंबी “सकारात्मक” चर्चा के बाद रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध समाप्त होने की “बहुत अच्छी संभावना” है. वहीं रूस की सुरक्षा परिषद के उपाध्यक्ष, पूर्व राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव ने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया कि यदि यूक्रेनी सैनिक “हथियार डालने से इनकार करते हैं, तो उन सभी को व्यवस्थित और निर्दयतापूर्वक खत्म कर दिया जाएगा.” ट्रंप का पोस्ट ट्रंपने ट्रुथ सोशल पोस्ट में कहा, “कल रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ हमारी बहुत अच्छी और उपयोगी चर्चा हुई, और इस बात की बहुत अच्छी संभावना है कि यह भयानक, खूनी युद्ध अंततः खत्म हो जाएगा.” उन्होंने पुतिन से “पूरी तरह से घिरे” यूक्रेनी सैनिकों की जान बख्शने का अनुरोध किया. सूत्रों के मुताबिक अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ ने भी गुरुवार रात मास्को में पुतिन के साथ लंबी बैठक की थी. हालांकि, ट्रुथ सोशल पोस्ट में ट्रंप ने ये नहीं बताया कि उनकी पुतिन ने सीधे बात हुई थी या नहीं. क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने कहा कि पुतिन ने विटकॉफ के माध्यम से ट्रंप को “संकेत” दिए थे. उन्होंने कहा कि विटकॉफ द्वारा ट्रंप को जानकारी दिए जाने के बाद रूस और अमेरिका अपने नेताओं के बीच फोन कॉल की व्यवस्था करेंगे. ट्रंपने कहा है कि वह चाहते हैं कि मॉस्को और कीव एक त्वरित युद्ध विराम पर सहमत हो जाएं ताकि संघर्ष को रोका जा सके, जिसके बारे में उन्होंने चेतावनी दी है कि यह तीसरे विश्व युद्ध में बदल सकता है। युद्ध में पहले ही दोनों पक्षों के कई लोग मारे जा चुके हैं. 30 दिनों के युद्ध विराम पर जेलेंस्की और पुतिन की सहमति ट्रंप ने इस सप्ताह राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बात की थी जिसमें उन्होंने रूस और यूक्रेन के बीच 30 दिनों के युद्ध विराम का प्रस्ताव रखा था. इसके बाद पुतिन ने गुरुवार को कहा कि वह यूक्रेन में 30 दिन के युद्ध विराम के अमेरिकी प्रस्ताव से सैद्धांतिक रूप से सहमत हैं. वहीं यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने इस समझौते पर सहमति जताई थी. गुरुवार को क्रेमलिन ने रूस द्वारा प्रस्ताव को स्वीकार किए जाने की पुष्टि की, हालांकि पुतिन ने जोर देकर कहा कि प्रमुख विवरण अभी भी अनसुलझे हैं. पुतिन ने मॉस्को में कहा, “यह विचार अपने आप में सही है और हम निश्चित रूप से इसका समर्थन करते हैं. लेकिन कुछ मुद्दे हैं जिन पर हमें चर्चा करने की आवश्यकता है.” पुतिन ने शुक्रवार को अमेरिका के विशेष दूत के माध्यम से युद्ध विराम प्रस्ताव के बारे में ट्रंपको एक संदेश भी भेजा. वहीं ज़ेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन प्रस्तावित युद्धविराम के लिए तैयार है, उन्होंने इसे व्यापक शांति योजना विकसित करने का अवसर बताया.  उन्होंने कीव में मीडिया से बात करते हुए कहा, “मैं (युद्धविराम के बारे में) बहुत गंभीर हूं और मेरे लिए युद्ध को समाप्त करना महत्वपूर्ण है.”  

कर्नाटक में निविदाओं में मुस्लिम ठेकेदारों को 4% कोटा, अधिनियम में संशोधन को मंजूरी; सिद्धारमैया सरकार का फैसला

बेंगलुरु  कर्नाटक कैबिनेट ने कर्नाटक पारदर्शिता सार्वजनिक खरीद (केटीपीपी) अधिनियम में संशोधन को मंजूरी दे दी है, जिसका उद्देश्य मुस्लिम ठेकेदारों को निविदाओं में चार प्रतिशत आरक्षण प्रदान करना है, आधिकारिक सूत्रों ने कहा। यह निर्णय शुक्रवार को मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की अध्यक्षता में विधान सभा के कैबिनेट हॉल में हुई एक बैठक में लिया गया, और यह निर्णय लिया गया कि केटीपीपी अधिनियम को चल रहे विधानसभा सत्र में पेश करने के बाद संशोधन किया जाएगा, आधिकारिक सूत्रों ने कहा। कैबिनेट ने सोमवार को संभावित रूप से उसी सत्र में आज्ञाकारिता की प्रस्तुति को मंजूरी दे दी है। इससे पहले 7 मार्च को, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने पुष्टि की थी कि कर्नाटक सरकार का बजट पेश करते हुए श्रेणी- II बी नामक श्रेणी के तहत मुसलमानों के लिए अब सार्वजनिक कार्यों के अनुबंधों का चार प्रतिशत आरक्षित किया जाएगा। एससी, एसटी, श्रेणी- I, श्रेणी- II ए और श्रेणी- II बी से संबंधित आपूर्तिकर्ताओं के लिए विभिन्न सरकारी विभागों, निगमों और संस्थानों के तहत वस्तुओं और सेवाओं की खरीद में आरक्षण प्रदान किया जाएगा, जो 1 करोड़ रुपये तक है, जिसमें श्रेणी- II बी मुसलमानों को संदर्भित करता है। वहीं, सरकार ने ई-खाता की उम्मीद कर रहे लोगों को खुशखबरी दी है। कैबिनेट ग्रामीण क्षेत्रों में ई-खाता देने के लिए सहमत हो गया है जिसे ग्रामीण विकास और पंचायत राज आज्ञाकारिता द्वारा अनुमोदित किया गया है। यदि इस आज्ञाकारिता को मंजूरी दी जाती है, तो ग्रामीण राजस्व परियोजनाओं और गांव स्टेशन के घरों को सुसज्जित किया जाएगा, यह जोड़ा गया। कर्नाटक लोकसेवा आयोग के सुधार उपायों पर कैबिनेट की बैठक में चर्चा की गई क्योंकि केपीएससी में वृद्धि हुई है। इसके अलावा, कैबिनेट लोकसेवा आयोग के सुधार के लिए एक अलग समिति के गठन के लिए सहमत हो गया है। कैबिनेट ने समिति की सिफारिशों के रखरखाव पर भी परामर्श किया।  

पाकिस्तान के कटोरे में आ गई एक अरब डॉलर की भीख

लाहौर  आर्थिक रूप से जूझ रहे पाकिस्तान को अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ( IMF) से 1 बिलियन डॉलर की आर्थिक मदद मिलने वाली है.  इसको लेकर पाकिस्तान और IMF के बीच सफलतापूर्वक बातचीत हुई है. IMF ने पाकिस्तान के लिए अगले 1 अरब डॉलर की किश्त जारी करने के लिए हरी झंडी दे दी है.   2 अरब डॉलर का कर्ज मांगा पाकिस्तानी न्यूज बेवसाइट ‘समा टीवी’ के मुताबिक पाकिस्तान ने IMF से 2 अरब डॉलर का कर्ज मांगा था, जिसमें किश्त और क्लाइमेट फाइनेंसिंग के लिए 1 अरब डॉलर की मांग रखी गई थी. पाकिस्तानी वित्त मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक क्लाइमेट फाइनेंसिंग के लिए 1 बिलियन डॉलर को किश्तों में दिया जाएगा.   इकोनॉमिक टारगेट को लेकर बातचीत पाकिस्तान और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ( IMF) के बीच जारी नीति स्तर की चर्चा पर IMF ने पाकिस्तान को रेवेन्यू जनरेशन को बढ़ाने और लागत में कटौती करने के लिए कहा है. दोनों के बीच इस बातचीत का फोकस जारी फाइनेंशियल ईयर के प्रदर्शन और अगले साल के आर्थिक लक्ष्यों पर है. IMF और पाकिस्तान की बातचीत पाकिस्तान के वित्त मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक IMF अधिकारियों को सरकार के उन उपायों के बारे में जानकारी दी गई है जो सार्वजनिक खजाने पर बोझ को कम करने के लिए हैं, जिनमें अगले वित्त वर्ष के लिए टैक्स रेवेन्यू टारगेट को 15,000 अरब रुपये से ज्यादा रखने का प्रस्ताव शामिल है. वहीं टैक्स- टू- GDP का अनुपात 13 फीसदी तक बढ़ने का अनुमान है, जबकि नॉन टैक्स रेवेन्यू कलेक्शन 2,745 अरब रुपये तक पहुंचने का अनुमान है. 

पवई पुलिस ने एक बड़े सेक्स रैकेट का पर्दाफाश किया, देह व्यापार के धंधे में शामिल चार महिलाओं को छुड़ाया गया

मुंबई  पवई पुलिस ने एक बड़े सेक्स रैकेट का पर्दाफाश किया है। जब पुलिस ने पवई के होटल में जाल बिछाकर छापेमारी की, तो हैरत में पड़ गई। देह व्यापार के धंधे में शामिल चार महिलाओं को छुड़ाया गया, जो मॉडलिंग की दुनिया में मशहूर हैं। पुलिस टीम ने 60 साल के एक आदमी को गिरफ्तार किया, जो सेक्स रैकेट का सरगना है। वह शो बिजनेस की युवतियों को मॉडलिंग की जाल में फंसाकर वेश्यावृति के लिए मजबूर करता था। वह ग्राहकों को ऑन डिमांड लड़कियों की सप्लाई करता था। होटल से छुड़ाई गई युवतियों की उम्र 26 से 35 के बीच बताई जा रही है। पुलिस ने फिलहाल इन महिलाओं को आश्रय गृह भेज दिया है। उभरते मॉडल को फंसाता था 60 साल का श्याम सुंदर 60 साल का श्याम सुंदर अरोड़ा मॉडलिंग कंपनी चलाता है और इसके आड़ में देह व्यापार का धंधा चला रहा है। जांच में यह सामने आया कि श्याम सुंदर मॉडलिंग के नाम पर उभरते मॉडल को फंसाता है और फिर उसे देह व्यापार के धंधे में धकेल देता था। पवई पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि कुछ लड़कियां एक होटल में पहुंचने वाली हैं। फिर पुलिस ने जाल बिछाया और नकली ग्राहक बनकर बनकर श्याम सुंदर अरोड़ा से संपर्क किया। गुरुवार को श्याम सुंदर चार मॉडल को लेकर होटल में पहुंचा, फिर पुलिस ने छापेमारी की और सभी को हिरासत में ले लिया। इस दौरान चारों मॉडल और श्याम सुंदर के पास 8 मोबाइल फोन और कैश भी मिला। पवई पुलिस के सीनियर इंस्पेक्टर जितेंद्र सोनवणे ने बताया कि इस रैकेट में चरकोप इलाके का एक और आदमी भी शामिल है, जिसकी तलाश की जा रही है। चार मॉडल को होटल से बरामद किया गया सोनवणे ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ की जा रही है। इसके अलावा श्याम सुंदर अरोड़ा के क्रिमिनल रेकॉर्ड भी खंगाले जा रहे हैं। अरोड़ा को भारतीय न्याय संहिता की धारा 143(2) और अनैतिक व्यापार अधिनियम, 1956 की धारा 4 और 5 के तहत गिरफ्तार किया गया है। पुलिस को शक को यह बड़ा सेक्स रैकेट हो सकता है, पुलिस इसके तह तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। फिलहाल होटल से बरामद युवतियों को आश्रय गृह भेजा गया है, जिसने पूछताछ की जाएगी।

पश्चिम बंगाल में दो गुटों में हिंसक झड़प हुई, पुलिस ने पूरे इलाके में सस्पेंड की इंटरनेट सेवाएं

 बीरभूम पश्चिम बंगाल में दो गुटों में हिंसक झड़प हुई है. पुलिस के अनुसार, शुक्रवार दोपहर में बीरभूम के सैथिया में दो गुटों के बीच एक मौखिक विवाद के कारण झगड़ा हुआ. एक गुट के लोग कथित तौर पर नशे में थे, जिसके कारण विवाद हुआ. दोनों समूहों में हाथापाई हुई और एक-दूसरे पर पत्थरबाजी की गई. हालात बिगड़ता देख मौके पर पुलिस बल को भेजा गया. पुलिस के अनुसार, आगजनी की कोई खबर नहीं है और 20 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है. फर्जी सूचनाओं को फैलने से रोकने के लिए सैंथिया शहर और पांच ग्राम पंचायतों तथा उसके आसपास के इलाकों में इंटरनेट सेवा सस्पेंड की गई है. अधिकारियों ने बताया कि अफ़वाहों और गैरकानूनी गतिविधियों को फैलने से रोकने के लिए पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के सैंथिया शहर के कम से कम पांच ग्राम पंचायत क्षेत्रों में इंटरनेट सेवाएं निलंबित कर दी गई हैं. यह बंद 14 मार्च (शुक्रवार) से 17 मार्च (सोमवार) तक प्रभावी रहेगा. पश्चिम बंगाल सरकार के गृह और हिल अफेयर्स विभाग के प्रधान सचिव द्वारा ने इंटरनेट और कॉल सेवाओं को निलंबित करने के पीछे “अवैध गतिविधियों के लिए अफ़वाहों” का हवाला दिया गया है. इस बीच, बीरभूम में पथराव की घटना की रिपोर्ट के बाद प्रभावित क्षेत्रों में पुलिस बल तैनात किया गया है. इस बीच, बीरभूम में पथराव की घटना की खबरों के बाद प्रभावित इलाकों में पुलिस बल तैनात कर दिए गए हैं. डेटा संबंधी संदेश आदेश में कहा गया है, “सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने और किसी भी अपराध के लिए उकसावे को रोकने के हित में अस्थायी रूप से संदेशों का प्रसारण नहीं किया जाएगा.” आदेश में आगे कहा गया है कि वॉयस कॉल या एसएमएस पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया जा रहा है. इसी तरह, समाचार पत्रों पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया गया है. प्रतिबंध सैंथिया, हटोरा ग्राम पंचायत (जीपी), मठपालसा जीपी, हरिसरा जीपी, दरियापुर जीपी और फुलुर जीपी में लगाया गया है.  

31 मार्च से फिर बंद हो जाएगी पोस्‍ट ऑफिस की ये योजना… मिलता है तगड़ा ब्‍याज

नई दिल्ली महिला सम्मान सेविंग सर्टिफिकेट (MSSC) योजना में निवेश करने के लिए कम समय बचा है. सरकार ने महिला सम्मान सेविंग सर्टिफिकेट (MSSC) योजना में निवेश का समय अभी तक आगे नहीं बढ़ाया है. पोस्‍ट ऑफिस के तहत संचालित महिलाओं के लिए इस स्‍कीम में निवेश करने का अंतिम दिन 31 मार्च 2025 है. जिन महिलाओं ने अभी तक इस योजना में निवेश नहीं किया है, उनके पास मार्च 2025 तक का वक्‍त है. फिर ये योजना बंद भी हो सकती है या फिर सरकार की ओर से इसे बढ़ाने का फैसला भी आ सकता है. महिलाओं के लिए बेहतर है योजना! भारत सरकार ने महिलाओं और लड़कियों के लिए MSSC (महिला सम्मान बचत प्रमाणपत्र) योजना 31 मार्च 2023 को आजादी के अमृत महोत्सव के तहत शुरू की गई थी और इसे दो साल के समय के लिए लागू किया गया था. इस स्कीम का मकसद महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना और उन्हें फाइनेंशियल स्वतंत्रता देना है. इस योजना के तहत 2 साल का मैच्‍योरिटी पीरियड भी दिया गया है. कितना मिलता है ब्‍याज? देश की कोई भी महिला इस योजना में 2 साल के लिए निवेश कर सकती है. इस योजना के तहत तगड़ा ब्‍याज भी दिया जाता है. MSSC योजना पर 7.5% सालाना ब्याज दिया जाता है, जो बैंकों की 2 साल की एफडी से अधिक है. यह एक सेफ योजना है, क्‍योंकि यह सरकार की ओर से संचालित है. इसके तहत अकाउंट पोस्ट ऑफिस या रजिस्टर बैंकों में आसानी से खोला जा सकता है. कितना कर सकते हैं निवेश? इस योजना के तहत कोई भी महिला, जो भारत की निवासी है, न्यूनतम 1,000 रुपये और अधिकतम 2 लाख रुपये का निवेश कर सकती है. 2 साल की अवधि के बाद पूरा मूलधन और ब्याज वापस मिलता है. 1 साल बाद खाताधारक 40% तक की राशि निकाल सकते हैं. महिला सम्मान योजना की शर्तें गंभीर बीमारी या खाताधारक की मृत्यु जैसी कंडीशन में अकाउंट समय से पहले बंद किया जा सकता है. अगर 6 महीने बाद खाताधारक अकाउंट बंद करवाता है, तो ब्याज दर में कटौती हो सकती है. 31 मार्च 2025 तक कर सकते हैं निवेश सरकार ने MSSC योजना को आगे बढ़ाने की कोई घोषणा नहीं की है. ऐसे में 31 मार्च 2025 तक निवेश करना जरूरी है. यह महिलाओं के लिए सुरक्षित और उच्च ब्याज दर वाला बेहतरीन निवेश विकल्प है.  

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